Category: मध्य प्रदेश

  • दिव्यांगजनों की सामाजिक भागीदारी में सांकेतिक भाषा की अहम भूमिका: मंत्री कुशवाह

    दिव्यांगजनों की सामाजिक भागीदारी में सांकेतिक भाषा की अहम भूमिका: मंत्री कुशवाह

    अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस
    सांकेतिक भाषा दिव्यांगजनों की शिक्षा, रोजगार, अधिकार और सामाजिक भागीदारी का महत्वपूर्ण आधार : मंत्री कुशवाह

    भोपाल 

    सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि सांकेतिक भाषा दिव्यांगजनों के लिए केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उनकी शिक्षा, रोजगार, अधिकार और सामाजिक भागीदारी का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि कई बार संवाद की बाधा व्यक्ति में नहीं, बल्कि संचार की पहुंच में होती है। ऐसे में व्यक्ति को बदलने के बजाय संवाद के माध्यम को सुलभ बनाना आवश्यक है। सांकेतिक भाषा दिव्यांगजनों को अपनी बात, आवश्यकताओं और भावनाओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने का अवसर देती है। मंत्री कुशवाह अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मंत्री कुशवाह ने कहा कि सांकेतिक भाषा समानता और समावेशन का सुंदर उदाहरण है। इसके माध्यम से दिव्यांगजन समाज से बेहतर तरीके से जुड़ सकते हैं। आज प्रदेश के दिव्यांगजन बच्चे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा एवं हुनर का प्रदर्शन कर रहे हैं और सांकेतिक भाषा के माध्यम से देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है।

    मंत्री कुशवाह ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सांकेतिक भाषा के उपयोग को बढ़ावा देने और प्रशिक्षित सांकेतिक भाषा दुभाषियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। पुलिस स्टेशन, अस्पताल सहित रोजमर्रा की आवश्यकता वाली महत्वपूर्ण जगहों पर सांकेतिक भाषा दुभाषियों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निगम से लेकर पंचायत स्तर तक दिव्यांगजनों को आवश्यक सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

    मंत्री कुशवाह ने कहा कि दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आवश्यक योग्यताएं प्राप्त करने के लिए विभाग लगातार कार्य कर रहा है। निजी संस्थानों में इंटरव्यू एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। दिव्यांगजनों को आरक्षण सहित विभिन्न अवसरों का लाभ लेने के लिए आवश्यक पात्रता एवं योग्यता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    मंत्री कुशवाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। विभाग द्वारा दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें बेहतर सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि दिव्यांगजनों की प्रतिभा और हुनर को उचित अवसर मिले तथा संवाद और संचार की बाधाएं उनके विकास के रास्ते में बाधक न बनें।

    सामाजिक न्याय भवन का नाम "सशक्तिकरण भवन" होगा : मंत्री कुशवाह

    मंत्री कुशवाह ने महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय भवन को अब ‘सशक्तिकरण भवन’ के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि यह नाम दिव्यांगजनों सहित समाज के जरूरतमंद वर्गों को सशक्त बनाने के संकल्प को दर्शाता है। मंत्री कुशवाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर चल रहे सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामाजिक न्याय एवं जनसेवा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सेवा, सहभागिता और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच को मजबूत करना है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर सभी से दिव्यांगजनों की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने और उन्हें समानता, गरिमा एवं सम्मान के साथ आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम में आयुक्त सामाजिक न्याय कृष्ण गोपाल तिवारी, डेफ कैन फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती प्रीति सोनी, आयुक्त दिव्यांगजन अजय खेमरिया एवं प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगणकर ने भी सांकेतिक भाषा के महत्व, दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर अपने विचार व्यक्त किए।

    कार्यक्रम में सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारीगण, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, विषय विशेषज्ञ एवं बड़ी संख्या में दिव्यांगजन एवं दिव्यांग बच्चे उपस्थित रहे।

     

  • मध्यप्रदेश को मिलेंगी 351 नई बसें, 25 सितंबर से शुरू होगी परिवहन सेवा

    मध्यप्रदेश को मिलेंगी 351 नई बसें, 25 सितंबर से शुरू होगी परिवहन सेवा

    प्रदेश में 25 सितंबर से शुरू होगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भेल दशहरा मैदान भोपाल से 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर करेंगे रवाना

    शुरुआती चरण में लगभग 1500 बसों का शुरू हो जाएगा संचालन

    भोपाल
      मध्यप्रदेश के नागरिकों को सुलभ, सुरक्षित, आधुनिक  एवं पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा प्रदेश सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। परिवहन विभाग की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ का 25 सितंबर 2026 को शुभारंभ होगा। भोपाल के दशहरा मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुरुआती चरण में 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न शहरों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करना, दैनिक यात्रियों को राहत पहुंचाना और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रदेश में लगभग 1500 बसें चलना शुरू हो जाएंगी। 

    दो श्रेणियों में शुरू होंगी बस सेवाएं

    कार्यक्रम के दौरान 351 बसों को एक साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसे दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें 120 इंटरसिटी बसें हैं। ये बसें दो या दो से अधिक शहरों के बीच आवागमन को सुगम और तीव्र बनाएंगी। 231 इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ और सस्ती यात्रा सुविधा प्रदान करेंगी।

    7 शहरों की 351 बसों को दिखाई जाएगी हरी झंडी

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रथम चरण में प्रदेश के 7 प्रमुख शहरों  की बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसमें इदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल है। इंदौर में 145 बस, जिसमें 50 इंटरसिटी, 95 इंट्रासिटी,  भोपाल के लिए 106 बसें, जिसमें  23 इंटरसिटी, 83 इंट्रासिटी, जबलपुर के लिए 67 बसें, जिसमें  14 इंटरसिटी, 53 इंट्रासिटी। रीवा की 18 इंटरसिटी बस, देवास की 10 इंटरसिटी बस, कटनी की 3 और भिंड की  2 इंटरसिटी बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा।

    लगभग 15,000 सार्वजनिक बसें की जाएंगी संचालित
     
    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत वर्ष 2031 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को नई मजबूती दी जाएगी। प्रदेशभर में लगभग 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित की जाएंगी। इससे प्रतिदिन 30 लाख से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान होगी। साथ ही 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड्स, टर्मिनल्स और डिपो का कायाकल्प किया जाएगा। 

    इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर 

    प्रदेश सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। 

    इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के माध्यम से की जाएगी निगरानी

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत संचालित बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) एवं उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटरों के माध्यम से बसों के संचालन, लोकेशन, समयबद्धता एवं अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे यात्री परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी। सभी बसों को 07 सीसीटीवी कैमरों, पैनिक बटन और रियल-टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग (VLTD) सिस्टम से लैस किया जा रहा है। इसके अलावा, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (PIS), ड्राइवरों की तकनीकी ट्रेनिंग और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र के जरिए सुरक्षित एवं समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित की जाएगी। 

    पीपीपी मॉडल के जरिए निजी ऑपरेटरों की सशक्त भागीदारी
    जन-निजी भागीदारी (PPP) को गति देने के लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएगी। इस मॉडल से निजी बस ऑपरेटरों को राजस्व रिसाव रोकने, नॉन-फेयर रेवेन्यू (जैसे विज्ञापन व कार्गो सेवाएं) बढ़ाने और आधुनिक डिपो व टर्मिनलों के उपयोग की सुविधाएं मिलेंगी साथ ही प्रशासन का पूर्ण सहयोग भी मिलेगा। 

    परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

    प्रदेश में सुगम यात्री परिवहन सेवा शुरू होने से परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यात्री परिवहन के विस्तार से प्रदेश में बस संचालन, वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे परिवहन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
     

  • गरबा में लड़कियों को लेकर BJP विधायक के बयान से विवाद, जानें क्या कहा

    गरबा में लड़कियों को लेकर BJP विधायक के बयान से विवाद, जानें क्या कहा

    इंदौर

    गरबे में मुस्लिमों के प्रवेश को लेकर एमपी में सियासी घमासान मचा हुआ है। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा के बाद महू विधायक उषा ठाकुर ने तेवर दिखाए हैं। साथ ही उन्होंने आंकड़ों के साथ एक दलील भी दी है। उन्होंने कहा कि गरबे से हर साल विधर्मियों के साथ साढ़े चार लाख लड़कियां भाग जाती हैं।

    भागने के बाद एक-एक बच्चा पैदा करतीं
    पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि विधर्मियों के साथ भागने के बाद ये लड़कियां अगले साल एक-एक बच्चा पैदा करती हैं। पूरे साल गरबे के दौरान साढ़े चार लाख बेटियां विधर्मियों के साथ भागती हैं। फिर बच्चों को जन्म देती हैं। इसकी वजह से हर साल 9 लोग बढ़ रहे हैं। इससे जनसांख्यिकी पर असर पड़ रहा है।

    मूर्ति पूजा नहीं करने वालों का प्रवेश निषेध
    उन्होंने कहा कि हमारे सभी संगठनों ने यह निर्णय लिया है कि मूर्ति पूजा नहीं करने वाले लोगों को हम गरबा पंडालों में प्रवेश निषेध करेंगे। ये लोग षड्यंत्र के अंतर्गत कभी तिलक लगाकर तो कभी कलावा बांधकर आते हैं।

    बेटियों को भ्रमित करते
    विधायक उषा ठाकुर ने कहा कि ये लोग हमारे गरबे में शामिल होते हैं और बेटियों को भ्रमित करते हैं। फिर उनका जीवन नरक बताते हैं। ऐसी विद्या कोई भी राष्ट्रभक्त नागरिक इसे आगे नहीं बढ़ने देगा।

    जो मूर्ति पूजा नहीं करते उनको प्रवेश नहीं
    भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने कहा कि जनसांख्यकी पर पड़ रहे असर को देखते हुए हमारे सभी संगठनों ने प्रण किया कि किसी भी गरबा पांडाल में उन लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाएगा जो मूर्ति पूजा नहीं करते हैं। दूसरे धर्म के ऐसे लोगों को प्रतिबंधित किया जाएगा जो साजिश के तहत कलावा बांधकर या तिलक लगाकर गरबा पांडालों में प्रवेश करते हैं।

    हिंदू बहन बेटियों को भ्रमित करने आते हैं विधर्मी
    उषा ठाकुर ने यह भी कहा कि गरबा पंडालों में कुछ लोग हिंदू बहन बेटियों को कथित तौर पर भ्रमित करने के उद्देश्य से पहुंचते हैं। ऐसे विधर्मी लोग हमारी बेटियों का जीवन नर्क बनाते हैं। कोई भी राष्ट्रभक्त नागरिक ऐसे प्रयासों को सफल नहीं होने दे सकता है। गरबा पांडालों में विधर्मियों की एंट्री पर रोक लगाई जानी चाहिए।

    गरबा का मूल धार्मिक स्वरूप बरकरार रखें
    भाजपा विधायक ने यह भी कहा कि गरबा शक्ति की साधना से जुड़ा नृत्य है। पारंपरिक गरबा में साधना और धार्मिक भावना प्रमुख थी लेकिन अब कई आयोजन महंगे डिजाइनर परिधानों, गहनों और टैटू के प्रदर्शन तक सीमित हो रहे हैं। गरबा के मूल धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप को बनाए रखने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    अपनी बहन बेटियों को भी लाएं मुस्लिम- BJP विधायक
    मध्य प्रदेश के ही भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी गरबा उत्सवों में मुसलमानों के प्रवेश को लेकर एक तीखी टिप्प्णी की है। भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि मुस्लिम युवक गरबा में अकेले क्यों आते हैं? उनको भी अपनी बहन, बेटियों को साथ लाना चाहिए। इस बयान पर विपक्षी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

    गरबे के व्यवसायिक स्वरूप पर लगे प्रतिबंध
    इसके साथ ही उन्होंने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की मांगों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि गरबे के व्यवसायिक स्वरूप पर प्रतिबंध लगना चाहिए। उनमें साधना अब समाप्त हो गया है। गरबा शक्ति की साधना का पर्व है। धर्म संस्कृति की रक्षा करें। अब यह गहने और टैटू प्रदर्शन का माध्यम बन गया है। हमारी धार्मिक संस्कृति इस बात की अनुमति नहीं देती है।

    गौरतलब है कि उषा ठाकुर से पहले भोपाल से बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी गरबे में एंट्री को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अकेले क्यों आना है, बहन-बेटियों के साथ आओ, हमारे छोरे भी तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि जिन्हें आना हैं, वो परमानेंट आ जाएं।

    इंदौर में अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए ऊषा ठाकुर ने कहा कि इन सभी विसंगतियों से बेटियों को बचाना और जागरूक करना जरूरी है। शक्ति की साधना का वास्तविक स्वरूप लोगों के सामने लेकर जाना जरूरी है। दुर्गा उत्सव साधना का पर्व है। यह कोई प्रदर्शन या नृत्य मंडली नहीं है। उन्होंने कहा कि लव जिहाद के कठोर कानून से हमारी बेटियों के जीवन की सुरक्षा का दायरा बढ़ा।

    उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्रीय विषय आता है तो कांग्रेस व अल्पसंख्यक लोग कहते हैं कि यह हमारे धर्म के विरुद्ध है। वंदेमातरम गाने में भी परेशानी है, क्योंकि उसमें भारत माता का साकार स्वरूप है। यह कहने के बाद भी गरबा पंडालों में क्यों जाते हैं? उनके धर्म में उनको मूर्ति पूजा की अनुमति नहीं है, फिर भी ये कलावा बांधकर, तिलक लगाकर पहचान छिपाकर ऐसे आयोजनों में जाते हैं और हमारी बेटियों को धोखा देते है। यह पूरी तरह बंद होना चाहिए।

  • MP में बारिश का दौर फिर होगा शुरू, देवरी-सागर में 60.3 मिमी बारिश; 17 जिलों में अलर्ट

    MP में बारिश का दौर फिर होगा शुरू, देवरी-सागर में 60.3 मिमी बारिश; 17 जिलों में अलर्ट

    भोपाल 
    बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के ग्वालियर, भोपाल, रीवा, जबलपुर, शहडोल, सागर संभागों में बारिश देखने को मिली। सबसे ज्यादा बारिश देवरी-सागर में हुई। यहां 60.3 मिमी बारिश दर्ज हुई। वहीं इंदौर, नर्मदापुरम, उज्जैन संभागों में कहीं-कहीं बारिश हुई। राज्य के बाकी के हिस्से सूखे रहे। तापमान की बात करें तो बीते 24 घंटों के दौरान कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। जानिए बीते 24 घंटों के दौरान कैसा रहा मौसम, इसके साथ ही जानिए आने वाले समय का हाल।

    आने वाले दिन में हो सकती बारिश, जानिए कब
    बीते 24 घंटों की बात करने से पहले जानिए आने वाले समय के मौसम का हाल। अनुमान है कि 23 सितंबर से राज्य में बारिश का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र ने 24 और 25 सितंबर को सिस्टम की स्ट्रॉन्ग एक्टिविटी होने की उम्मीद जताई है। इसके चलते 2 दिन के अंदर 15 से 17 जिलों में बारिश देखने को मिल सकती है।
    मौसम विभाग ने दी आंधी-बारिश की चेतावनी

    मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल ने झंझावत और वज्रपात के साथ झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान लगाया है। इसे ध्यान में रखते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में भोपाल, विदिशा, रायसेन, सिहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, रतलाम, उज्जैन, देवास, आगर, नीमच, गुना, ग्वालियर, दतिया, भिंड समेत अन्य शामिल हैं।

    बीते 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश देवरी-सागर में
    बीते 24 घँटों में राज्य के कई हिस्सों में बारिश भी दर्ज हुई। सबसे ज्यादा पानी देवरी-सागर में गिरा। यहां 60.3 मिमी बारिश दर्ज हुई। वहीं कई इलाकों में बूंदा-बांदी हुई। यहां 4-5 मिमी बारिश दर्ज हुई। इन इलाकों में बागली, राघौगढ़, कटनी, पचमढ़ी, बांदा, रीवा-हुजूर, शाहगढ़ जैसे इलाके शामिल हैं। वहीं अगर ज्यादा बारिश वाले अन्य इलाकों की बात करें तो हट्टा में 49.4, कोतमा में 41, गैरतगंज में 38.6, परासिया में 37.2, बटियागढ़ में 36 मिमी बारिश दर्ज हुई।
    बीते 24 घंटों में कहां-कितना रहा तापमान

    धार में सबसे कम 20.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। कम पारा वाले इलाकों में पचमढ़ी (नर्मदापुरम) में 21, गिरवर (शाजापुर) में 21.2, मंदौसर/ खंडवा में 21.4 और भोपाल में 21.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। वहीं अगर सबसे ज्यादा तापमान की बात करें तो ग्वालियर में 35 डिग्री रहा। अन्य अधिक तापमान वाले इलाकों में अलीराजपुर में 34.5, खजुराहो (छतरपुर) में 34.4, पृथ्वीराजपुर (निवाड़ी) में 34.1 और रतलाम में 34 डिग्री तापमान दर्ज हुआ।

  • भोपाल में आधी रात थाने में हंगामा, वकील से मारपीट पर 3 पुलिसकर्मी निलंबित

    भोपाल में आधी रात थाने में हंगामा, वकील से मारपीट पर 3 पुलिसकर्मी निलंबित

    भोपाल में थाने के अंदर वकील से मारपीट पर एक्शन: टीआई समेत दो आरक्षक निलंबित, आधी रात जमकर हुआ था हंगामा

    भोपाल
     भोपाल के जहांगीराबाद थाने में अधिवक्ता राकेश रावल से कथित मारपीट के मामले में थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार समेत आरक्षक यश लखेरा और रामस्वरूप को निलंबित कर दिया गया है। डीसीपी जोन-1 अखिल पटेल ने आदेश जारी किए और तीनों को पुलिस लाइन से संबद्ध किया गया है।

    राजधानी भोपाल में जहांगीराबाद थाना परिसर में अधिवक्ता के साथ कथित मारपीट के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। जहांगीराबाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार, आरक्षक यश लखेरा और रामस्वरूप को निलंबित कर दिया गया है। तीनों को पुलिस लाइन से संबद्ध किया गया है। डीसीपी जोन-1 अखिल पटेल ने निलंबन के आदेश जारी किए हैं।

    21 साल से वकालत कर रहे 45 वर्षीय अधिवक्ता राकेश रावल के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा बदसलूकी और मारपीट का आरोप है। घटना से आक्रोशित सैकड़ों वकीलों ने देर रात करीब 3 बजे तक जहांगीराबाद थाने को घेरे रखा और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बुधवार सुबह भोपाल जिला अदालत में भी वकीलों ने प्रदर्शन किया और पैरवी से दूरी बनाए रखी।

    गणेश विसर्जन के दौरान रास्ते के विवाद से शुरू हुआ मामला
    बैरागढ़ कलां निवासी अधिवक्ता राकेश रावल मंगलवार शाम करीब 8 बजे खटलापुरा मंदिर मार्ग से गुजर रहे थे। गणेश प्रतिमा विसर्जन के चलते रास्ता बंद होने के कारण ट्रैफिक एसीपी और पुलिस बल से उनकी बहस हो गई। आरोप है कि इसके बाद पुलिसकर्मी उन्हें जबरन जहांगीराबाद थाने ले गए। पीड़ित अधिवक्ता का कहना है कि जब उन्होंने वाहन में पेट्रोल नहीं होने की बात कही, तो पुलिसकर्मी गाली-गलौज पर उतर आए। विरोध करने पर उन्हें कीचड़ में पटककर लाठियों से पीटा गया।

    मारपीट की खबर के बाद थाने पहुंचे सैकड़ों वकील
    थाने के भीतर अधिवक्ता के साथ कथित मारपीट की खबर फैलने के बाद बड़ी संख्या में वकील जहांगीराबाद थाने पहुंच गए। वकीलों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हंगामा देर रात करीब 3 बजे तक चलता रहा। इसके बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और वकीलों को कार्रवाई का आश्वासन दिया।

    वीडियो में दिखाईं चोटें, वरिष्ठ अधिकारियों ने दिया जांच का आश्वासन
    वकीलों की ओर से जारी एक वीडियो में अधिवक्ता राकेश रावल के कपड़ों पर कीचड़ और पैरों पर चोट के निशान दिखाई दे रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शैलेंद्र सिंह चौहान भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने वकीलों को शांत कराया और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि शिकायत के आधार पर मामले की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    टीआई समेत दो आरक्षक निलंबित
    अधिवक्ता से मारपीट के मामले में डीसीपी
    जोन-1 अखिल पटेल ने निलंबन के आदेश जारी किए हैं। जहांगीराबाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार, आरक्षक यश लखेरा और रामस्वरूप को निलंबित कर दिया गया है। तीनों को पुलिस लाइन से संबद्ध किया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच जारी है। इधर, अधिवक्ताओं ने पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध जताया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, वे अदालत में पैरवी करने के लिए तैयार नहीं हैं।

    जिला अदालत में भी वकीलों ने किया प्रदर्शन
    अधिवक्ता से मारपीट की घटना के विरोध में बुधवार सुबह भोपाल जिला अदालत में भी वकीलों ने हंगामा किया। अधिवक्ताओं ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई और पैरवी से दूरी बनाए रखी। पुलिस की ओर से टीआई समेत तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद मामले में आगे की कार्रवाई और जांच पर नजर बनी हुई है।

  • MP में ग्वालियर सबसे गर्म शहर, खजुराहो-रतलाम भी तपे; बारिश के संकेत

    MP में ग्वालियर सबसे गर्म शहर, खजुराहो-रतलाम भी तपे; बारिश के संकेत

     ग्वालियर
     ग्वालियर व चंबल अंचल में पिछले तीन दिन से लगातार तापमान बढ़ रहा है। मंगलवार को ग्वालियर का तापमान 35.2 डिसे पर पहुंच गया और प्रदेश में सबसे अधिक गर्म रहा। हालांकि, खजुराहो व रतलाम दूसरे नंबर पर रहे, यहां का तापमान 35 डिसे पर रहा।

    मौसम विज्ञान केंद्र ने 24 सितंबर से अंचल में एक बार फिर से हल्की से मध्यम वर्षा का दौर शुरू होने का अनुमान लगाया है। ऐसे में 24 से 26 सितंबर तक अंचल में ठीक ठाक वर्षा हो सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र के ताजा अपडेट के मुताबिक मानसून की वापसी जारी है और मंगलवार को यह पंजाब के कुछ क्षेत्रों से वापस हो गया।

    हल्की से मध्यम बारिश की संभावना
    लेकिन पिछले दिनों अंडमान सागर में बना निम्नदाब का क्षेत्र डिप्रेशन में बदलकर उड़ीसा के तट पर आ गया है और यह लगातार आगे बढ़ रहा है। ऐसे में 24 सितंबर से इसका असर अंचल पर भी आना शुरू हो जाएगा, जिसकी वजह से अंचल में हल्की से मध्यम वर्षा होना शुरू हो सकता है।

    यह दौर तीन से चार दिन का हो सकता है। इससे अंचल के बढ़ रहे तापमान में कमी आएगी और मौसम भी ठंडा होगा।

    तीन दिनों से बढ़ रहा तापमान
    अंचल में तापमान पिछले तीन दिन से बढ़ रहा है। तापमान पहले 33 डिसे पर पहुंचा, इसके बाद सोमवार को 35 डिसे पर और मंगलवार को 35.2 डिसे पर। तापमान के बढ़ने से अंचल में गर्मी व उमस बढ़ रही है, जिससे मंगलवार को दिन में लोगों को खासा परेशान होना पड़ा।

    वर्तमान में दिन व रात का तापमान सामान्य से कुछ अधिक हो गया है, इसलिए भी लोगों को कुछ गर्मी अधिक महसूस हो रही है।

    ये रही पारे की चाल…

    अधिकतम तापमान-35.2 डिसे

    न्यूनतम तापमान-26.0 डिसे

    05:30-26.4 डिसे

    08:30-29.0 डिसे

    11:30-33.6 डिसे

    14:30-34.6 डिसे

    17:30-32.4 डिसे

     

  • MGM मामले में NMC ने मांगी रिपोर्ट, एंटी-रैगिंग रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे

    MGM मामले में NMC ने मांगी रिपोर्ट, एंटी-रैगिंग रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे

    इंदौर 
    एमजीएम मेडिकल कॉलेज और एमवाय अस्पताल में PG JR-1 डॉ. सिम्मी यादव से कथित रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान और अकादमिक दबाव के मामले में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने कॉलेज प्रबंधन से 24 घंटे में पैरावाइज कमेंट और एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी है। आयोग ने घटना की तत्काल, निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ जांच के निर्देश दिए हैं।

    NMC को यह शिकायत डॉ. सिम्मी के भाई कुणाल यादव की ओर से मिली थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सीनियर रेजिडेंट्स ने डॉ. सिम्मी को कथित तौर पर बार-बार प्रताड़ित किया, सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और कागजी काम करने के लिए दबाव बनाया।

    इंसुलिन की अधिक मात्रा लेने का आरोप
    शिकायत में दावा किया गया है कि डॉ. सिम्मी ने इंसुलिन की अधिक मात्रा लेकर आत्महत्या का प्रयास किया। इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने की बात शिकायत में कही गई है। परिवार के पास घटना से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड होने का भी दावा किया गया है।

    NMC ने कॉलेज से घटना की तारीख, समय और परिस्थितियों के साथ यह जानकारी मांगी है कि डॉ. सिम्मी किस स्थिति में मिली थीं और उनकी वर्तमान मेडिकल स्थिति क्या है।

    14-15 घंटे ड्यूटी कराने के आरोप की भी जांच
    शिकायत में आरोप है कि आधिकारिक रोस्टर में करीब 12 घंटे की ड्यूटी के बजाय डॉ. सिम्मी से कथित तौर पर 14 से 15 घंटे तक काम कराया गया। इसके अलावा पर्याप्त गैर-अकादमिक और कागजी काम सौंपे जाने का भी आरोप लगाया गया है।

    NMC ने ड्यूटी रोस्टर, बायोमेट्रिक और अटेंडेंस रिकॉर्ड, ड्यूटी व हैंडओवर रजिस्टर तथा अवकाश रिकॉर्ड मांगे हैं। आयोग ने वास्तविक ड्यूटी अवधि और आधिकारिक रोस्टर के बीच अंतर की जांच करने को भी कहा है।

    सार्वजनिक अपमान और धमकी के आरोप
    शिकायत में मामूली गलतियों पर कथित सार्वजनिक अपमान, मानसिक उत्पीड़न और धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। डॉ. सिम्मी को लगातार टारगेट करने और परिणाम भुगतने की धमकी देने का भी दावा किया गया है।

    आयोग ने कॉलेज से पूछा है कि क्या डॉ. सिम्मी ने इससे पहले रैगिंग, उत्पीड़न, अत्यधिक कार्यभार या गैर-अकादमिक काम को लेकर मौखिक अथवा लिखित शिकायत की थी। शिकायत होने पर उसकी कॉपी और उस पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है।

    NMC ने डॉ. यशस्वी, डॉ. निकिता और डॉ. श्वेता से जुड़े आरोपों की भी अलग-अलग जांच कर उनका पक्ष और जवाब रिपोर्ट में शामिल करने को कहा है।

    HOD को शिकायत की जानकारी थी या नहीं, मांगा जवाब
    आयोग ने पूछा है कि कथित शिकायतों की जानकारी विभागाध्यक्ष डॉ. निलेश दलाल को कब और किस माध्यम से दी गई थी। इसके बाद क्या कार्रवाई की गई, काउंसलिंग, मध्यस्थता, चेतावनी या निगरानी जैसी कोई व्यवस्था की गई या नहीं, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।

    एंटी रैगिंग कमेटी और स्क्वाड की भी जांच
    NMC ने कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी और एंटी रैगिंग स्क्वाड के गठन और कामकाज का ब्योरा मांगा है। इसमें समिति की संरचना, निगरानी व्यवस्था, निरीक्षण व राउंड के रिकॉर्ड, प्राप्त शिकायतें और उन पर हुई कार्रवाई शामिल है।

    आयोग ने संबंधित विभाग के PG छात्रों से वरिष्ठ रेजिडेंट्स और फैकल्टी की अनुपस्थिति में गोपनीय बातचीत करने को भी कहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि विभाग में उत्पीड़न, अपमान, धमकी या गैर-अकादमिक काम के दबाव की अन्य शिकायतें तो नहीं हैं।

    वॉट्सऐप और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश
    NMC ने संबंधित वॉट्सऐप ग्रुप, मैसेज, ईमेल, शिकायतें, ड्यूटी रोस्टर, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, हैंडओवर रजिस्टर, अवकाश और अकादमिक रिकॉर्ड समेत सभी संबंधित दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रिकॉर्ड को बदला, हटाया या नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।

    शिकायत के कारण अकादमिक नुकसान नहीं हो
    NMC ने कॉलेज से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि शिकायत करने या जांच में शामिल होने के कारण डॉ. सिम्मी की PG ट्रेनिंग, अटेंडेंस, फॉर्मेटिव असेसमेंट, थीसिस, परीक्षा पात्रता या अकादमिक प्रगति प्रभावित न हो।

    कॉलेज को यह भी बताना होगा कि डॉ. सिम्मी को आगे के उत्पीड़न, धमकी या प्रतिशोध से बचाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। मानसिक स्वास्थ्य सहायता और काउंसलिंग की व्यवस्था का विवरण भी रिपोर्ट में देना होगा।

    24 घंटे में दस्तावेजों के साथ देनी होगी रिपोर्ट
    NMC ने कॉलेज प्रबंधन से सभी बिंदुओं पर दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ पैरावाइज कमेंट और ATR 24 घंटे के भीतर भेजने को कहा है। जांच के दौरान या उसके बाद डॉ. सिम्मी के खिलाफ किसी तरह की प्रताड़ना, धमकी, प्रतिशोध या प्रतिकूल अकादमिक कार्रवाई नहीं करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    आयोग ने जांच में जानकारी देने वाले छात्रों और रेजिडेंट्स की पहचान कानून के दायरे में गोपनीय रखने को कहा है। साथ ही रैगिंग रोकने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और 9 मार्च 2026 के NMC पब्लिक नोटिस के अनुपालन की रिपोर्ट भी मांगी है।

  • गर्भवती महिला से मारपीट और धमकी का मामला, SI समेत 4 पर केस

    गर्भवती महिला से मारपीट और धमकी का मामला, SI समेत 4 पर केस

    बालाघाट
    बालाघाट के किरनापुर पुलिस थाने में दर्ज चोरी के मामले को लेकर महिला से अमानवीय मारपीट का मामला सामने आया था। इसके बाद पुलिस की एसआईटी ने जांच की, जिसमें कानून का उल्लंघन कर महिला को जबरन जुर्म कबूल करने के लिए डराने-धमकाने सहित अन्य अनियमितताएं सामने आई। 

    चोरी की जांच में थाने लाई गई थी महिला
    मामला 21 अगस्त को किरनापुर पोस्ट ऑफिस के सामने हुई 50 हजार रुपए की चोरी से जुड़ा है। पुलिस 2 सितंबर को टिमकीटोला निवासी सावित्री चौधरी और उनके पति कैलाश चौधरी को पूछताछ के लिए थाने लाई थी। आरोप है कि यहां दोनों के साथ मारपीट और महिला के साथ दुर्व्यवहार किया गया। 3 सितंबर को सावित्री को आरोपी बनाकर कोर्ट में पेश किया गया था।

    समाज ने किया था थाने का घेराव
    महिला से मारपीट के आरोपों के विरोध में मरार माली समाज ने 15 सितंबर को किरनापुर में आंदोलन किया था। इस दौरान थाने में पथराव और तोड़फोड़ भी हुई थी। पुलिस ने पूर्व सांसद कंकर मुंजारे, समाज अध्यक्ष रमेश पंचे, जिला पंचायत प्रतिनिधि, सरपंच समेत 63 नामजद और 100 से 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ बलवा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित धाराओं में केस दर्ज किया था।

    एसआईटी ने जांच में पाई अनियमितताएं
    एसपी आदित्य मिश्रा के निर्देश पर डीएसपी प्रतिष्ठा राठौर के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी ने चौधरी दंपती की शिकायत की जांच की। एसआईटी के अनुसार महिला को पर्याप्त कानूनी आधार के बिना थाने में रखा गया। रिपोर्ट में सूर्यास्त के बाद गिरफ्तारी और न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति से जुड़ी प्रक्रिया में भी अनियमितता सामने आने की बात कही गई है।

    केवल इकबालिया बयान के आधार पर कार्रवाई
    जांच रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने पर्याप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए बिना महिला के खिलाफ कार्रवाई की। एसआईटी ने महिला और उसके पति को अवैधानिक रूप से थाने में रखने, डराने-धमकाने और अनुचित दबाव डालने के आरोपों की भी पुष्टि की है।

    चार पुलिसकर्मियों पर इन धाराओं में केस
    एसआईटी जांच के आधार पर पुलिस ने एसआई दामेन्द्र तुरकर, प्रआर आशीष बघेल, आरक्षक कपिल बघेल और महिला आरक्षक मेघा टेकाम के खिलाफ बीएनएस की धारा 127, 115(2), 296(बी), 351(1) और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच जारी है।

    एक दिन पहले पीड़िता ने बताई थी पूरी घटना
    एसआईटी रिपोर्ट सामने आने से एक दिन पहले सावित्री चौधरी ने पति कैलाश के साथ मीडिया के सामने थाने में हुई घटना के बारे में बताया था। पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने भी महिला को कोर्ट में पेश किए जाने के बाद अदालत की उस टिप्पणी का हवाला दिया था, जिसमें गिरफ्तारी को अवैधानिक बताते हुए महिला को रिहा किए जाने की बात कही गई थी।

  • UPI पेमेंट पर व्यापारियों का विरोध, स्कैनर पर बांधेंगे काला कपड़ा

    UPI पेमेंट पर व्यापारियों का विरोध, स्कैनर पर बांधेंगे काला कपड़ा

    भोपाल/इंदौर / ग्वालियर

    मध्य प्रदेश में आज 'नो-UPI डे' रहेगा। भोपाल, इंदौर समेत पूरे प्रदेश के व्यापारी ₹2000 से अधिक का यूपीआई भुगतान नहीं लेंगे।अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल मध्य प्रदेश ने यह आह्वान किया है।हालांकि, किसी भी व्यापारी से जोर-जबर्दस्ती नहीं की जाएगी। भोपाल में यूपीआई स्कैनर को काले कपड़े से ढांककर सांकेतिक विरोध भी जताएंगे।इससे पहले इंदौर में मंगलवार रात को टाइल्स एंड सेनेटरी वेयर व्यापारी एसोसिएशन के नेतृत्व में रीगल स्क्वायर पर हुए प्रदर्शन में 150 से ज्यादा व्यापारी शामिल हुए। व्यापारियों ने ‘यूपीआई बंद करो, यूपीआई पर चार्ज बंद करो’ के नारे लगाए।

     अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाया है। सभी व्यापारी इसका विरोध कर रहे हैं।सरकार के इस फैसले का विरोध शहरभर के व्यापारी व उनके संगठन 23 सितंबर बुधवार को नो-यूपीआई डे मनाकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

    साथ ही वे अपने-अपने प्रतिष्ठान व दुकान पर यूपीआई स्कैनर को काले कपड़े से ढंककर रखेंगे। नो यूपीआई डे मनाने का आह्वान शहर की व्यापारिक संस्था चैंबर ऑफ कॉमर्स व मध्यप्रदेश व्यापारी संघ ने किया है।

    चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष डॉक्टर प्रवीण अग्रवाल सहित सभी पदाधिकारियों का कहना है कि दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्सन पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर लगाना गलत निर्णय है, क्योंकि इसका असर व्यापारियों पर पड़ेगा।

    इसके बाद इसका असर कहीं न कहीं आम लोगों पर ही आएगा। अभी सभी व्यापारी अपने कामकाज को सही तरीके से लिखा पढ़ी में ले आए हैं। इस निर्णय से फिर से नकद लेनदेन शुरू होगा और पहले जैसी टैक्स चोरी व कालाधन जैसी समस्याएं पैदा होंगी।

    यूपीआई से नहीं करेंगे लेनदेन
    इसलिए बुधवार को संस्था के सदस्यों सहित अंचल के सभी व्यापारिक एवं औद्योगिक संगठनों से अपील की गई है कि व्यापारिक ट्रांजेक्शन पर एमडीआर चार्ज लिए जाने का विरोध करते हुए सभी नो यूपीआई डे मनाएं और अपने-अपने स्कैनरों को काले कपड़े से ढंक कर रखें और यूपीआई से लेनदेन न करें।

    व्यापार संघ के अध्यक्ष राजेंद्र खंडेलवाल ने बताया कि व्यापार संघ थाटीपुर के नेतृत्व में क्षेत्र के सभी व्यापारी एकजुट होकर विरोध दर्ज कराएंगे। सभी व्यापारी इसकी फोटो संघ के ग्रुप में भेजेंगे, जिसे प्रदेश की वेबसाइट पर अपलोड कर सरकार तक व्यापारियों की नाराजगी पहुंचाई जाएगी।

    सरकार का निर्णय व्यापारियों पर आर्थिक बोझ

    व्यापार मंडल के प्रदेश महासचिव अनुपम अग्रवाल ने बताया कि सरकार का यह निर्णय सीधे तौर पर व्यापारियों पर आर्थिक बोझ डालेगा। अधिकतम राशि 300 रुपए तक वसूली जाएगी।

    यदि व्यापारी एक दिन में 2 हजार रुपए से ज्यादा के 10 ट्रांसजेक्शन भी लेता है तो उसे 3 हजार रुपए देना पड़ सकते हैं। थोक किराना समेत जितने भी थोक व्यापार है, उनके लिए परेशानी ज्यादा बढ़ेगी। किराना में ही 90 प्रतिशत से ज्यादा लेन-देन 2 हजार रुपए से ज्यादा का होता है।

    अग्रवाल ने बताया कि वे खुद थोक तेल के कारोबारी है। यदि किसी ने 15 लीटर का एक जार भी लिया है तो उसकी कीमत 2200 रुपए तक है। जब ग्राहक ट्रांसजेक्शन करेगा तो मुझे सीधे तौर पर एमडीआर देना पड़ेगा।

    15 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम बता दें कि 15 अक्टूबर से ₹2,000 रुपए से ज्यादा के पर्सन टु मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा। ₹75000 और उससे ज्यादा के लेन-देन पर चार्ज ₹300 रुपए होगा।

    प्रदेश के 4700 पेट्रोल पंप पर भी यह फैसला मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने 16 अक्टूबर से 2 हजार से ज्यादा के बिल पर UPI पेमेंट नहीं लेने का फैसला किया है। इससे पहले बुधवार को होने वाले सांकेतिक विरोध प्रदर्शन में भी वे शामिल होंगे।

    व्यापारियों के खिलाफ सरकार-खण्डेलवाल
    खण्डेलवाल ने कहा सरकार ने यह शुल्क थोपकर डिजिटल इंडिया को सफल बनाने वाले व्यापारी वर्ग की कमर तोड़ने का काम किया है।

    कैट का नो यूपीआई डे कल राजीव प्लाजा मेंकंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) बुधवार को नो यूपीआई डे राजीव प्लाजा में दोपहर एक बजे से आंदोलन के रूप में मनायेगा।

    कैट के जिलाध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने बताया कि इस अवसर पर सभी मोबाइल व्यवसायी धरना प्रदर्शन करेंगे। साथ ही कैट मध्यप्रदेश के अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन सभा को संबोधित करेंगे।

    कैट के महामंत्री रामकुमार गोयल, कोषाध्यक्ष नितिन गोयल, कार्यक्रम संयोजक एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोज चौरसिया ने सभी कैट पदाधिकारी और सदस्यों को नो यूपीआइ डे में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आग्रह किया है।

  • गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने पर जोर, मंत्री सारंग ने मांगी कार्ययोजना

    गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने पर जोर, मंत्री सारंग ने मांगी कार्ययोजना

    उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराने के लिये बनेगी कमेटी

    सहयोगी संबंधित विभागों के समन्वय से बनायें रूपरेखा : मंत्री सारंग
    प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिये हुई बैठक

    भोपाल 

    प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिये सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग की अध्यक्षता में मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में प्रमाणित एवं हाइब्रिड बीज की उपलब्धता बढ़ाने के लिये कार्य-योजना पर चर्चा की गई।

    मंत्री सारंग ने कहा कि दलहन के बीजों की उपलब्धता पर ध्यान दिया जाना होगा। जिस प्रकार पिछले वर्ष 5 बीजों पर बीज संघ ने काम किया था, उसी प्रकार इस वर्ष कार्य-योजना बनाई जाये। दूसरे विभागों से क्या अपेक्षाएँ हैं उस पर एक पीपीटी तैयार करें। मंत्री सारंग ने कहा कि एक हाई लेवल कमेटी बनाकर उच्च गुणवत्ता का बीज तैयार करने और इसके लिये अन्य विभागों से समन्वय स्थापित करने की रूपरेखा तैयार की जाये। हाई लेवल कमेटी में सहकारिता, कृषि, उद्यानिकी और कृषि विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि भी शामिल हों, जो एक माह में विस्तृत रूप से कार्य कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

    बैठक में बीज उत्पादन एवं विपणन में शासकीय संस्थानों की उपादेयता, प्रमुख फसलों की बीज आवश्यकता, उपलब्धता, प्रदेश में प्रमुख फसलों का बोया गया क्षेत्रफल, फसलवार अधिक व कम उत्पादकता वाले जिले, हाइब्रिड बीज-आवश्यकता, शासकीय योगदान एवं कार्य-योजना, आगामी 5 वर्षों के लिये बीज उत्पादन कार्यक्रम, उद्यानिकी हाईब्रिड बीजों के लिये आधारभूत संरचना विकसित करने, बीज उत्पादन एवं विपणन में वर्तमान बाधाएँ एवं समाधान जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

    बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त के.सी. गुप्ता, सहकारिता आयुक्त दीपक सिंह, संचालक कृषि उमाशंकर भार्गव, उप सचिव मनोज सिन्हा और प्रबंध संचालक बीज संघ महेन्द्र दीक्षित सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।