Category: मध्य प्रदेश

  • जबलपुर में Tech Blitz 2.0 का आगाज, IIT-NIT के पूर्व छात्र बताएंगे इंडस्ट्री के नए गुर

    जबलपुर में Tech Blitz 2.0 का आगाज, IIT-NIT के पूर्व छात्र बताएंगे इंडस्ट्री के नए गुर

    जबलपुर
    इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों को अब देश-दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों और संस्थानों में काम कर रहे अपने सीनियर्स से सीधे सीखने का मौका मिलेगा. कॉलेज की कॉसमॉस सोसायटी द्वारा 'टेक ब्लिट्ज़ 2.0' का आयोजन किया जा रहा है. दो सप्ताह तक चलने वाले इस ऑनलाइन आयोजन में कॉलेज के कई पूर्व छात्रा शामिल होंगे. जिसमें गूगल, इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम जैसे बड़ी कंपनी में काम करने वाले पूर्व छात्र हैं. यहां सभी लोग छात्र और छात्रों को मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी सहित आधुनिक तकनीकों और उनके वास्तविक दुनिया में इस्तेमाल की जानकारी देंगे. इसके अलावा आयोजन में आईआईटी, एनआईटी, एमएनआईटी और डीएवीवी जैसे संस्थानों की छात्र सोसायटियों को भी जोड़ा गया है। 

    कॉसमॉस सोसायटी कराती है एकेडमिक एक्टिविटीज
    जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज एक सरकारी संस्थान है और यह मध्य प्रदेश का सबसे पुराना इंजीनियरिंग कॉलेज है. इसी इंजीनियरिंग कॉलेज में कॉसमॉस नाम की छात्रों की एक सोसायटी है. छात्र इस समिति के माध्यम से पूरे साल इंजीनियरों के बीच साइंटिफिक टेंपरामेंट डेवलप करने के लिए एकेडमिक एक्टिविटीज करते हैं। 

    हजारों छात्रों को मिलेगा फायदा
    कॉसमॉस समिति के सदस्य ध्रुव शुक्ला इस बार 'टेक ब्लिट्ज़ 2.0' नाम से एक आयोजन कर रहे हैं. यह आयोजन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किया जा रहा है. ध्रुव शुक्ल ने बताया, "यह आयोजन हम पहले भी कर चुके हैं, लेकिन इस बार इसे और बेहतर तरीके से किया जा रहा है. इसमें हमने आईआईटी, एनआईटी, एमएनआईटी और डीएवीवी जैसे संस्थानों को भी जोड़ा है. इसके साथ ही वहां की कई सोसाइटियों से भी हमारी बात हुई है. वे सभी छात्र इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं. इस आयोजन का फायदा 10 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज के हजारों छात्रों को मिलेगा। 

    छात्रों को मिलेगा फील्ड का ज्ञान
    जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में कंप्यूटर साइंस के विभागाध्यक्ष डॉ. जेएस ठाकुर ने बताया, " छात्रों को इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान सिलेबस से जुड़ी हुई हर जानकारी दी जाती है. छात्रों के प्रैक्टिकल भी करवाए जाते हैं, लेकिन सिलेबस में कई चीजें ऐसी नहीं हैं, जिनका इस्तेमाल आज के समय में फील्ड पर हो रहा है। 

    इंडस्ट्रियलिस्ट तक सीधी पहुंच
    उन्होंने आगे कहा, "इंजीनियरिंग के मामले में रोज नई जानकारी और नॉलेज आ रही है, जिसकी जानकारी सिलेबस में शामिल करना कठिन है, क्योंकि यह रोज बदलता है. इसका अनुभव उन लोगों को ज्यादा है जो फील्ड में काम कर रहे हैं. इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छोटे-छोटे प्रोजेक्ट पर काम होता है, लेकिन रियल वर्ल्ड में रियल प्रॉब्लम पर काम चल रहा होता है, जो बड़े पैमाने पर होता है. इसकी जानकारी वही लोग दे सकते हैं, जो उन समस्याओं का सामना कर रहे हैं। 

    इंजीनियरिंग की लेटेस्ट इनफॉर्मेशन
    डॉ. जेएस ठाकुर ने बताया, " छात्रों को नया ज्ञान होना बहुत जरूरी है. इसलिए हमने कॉसमॉस सोसायटी के जरिए अपने ही कॉलेज के पूर्व छात्रों से संपर्क करने का सिलसिला शुरू किया. जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व छात्र देश-दुनिया के कई बड़ी संस्थानों में काम कर रहे हैं. पूर्व छात्र इस बात के लिए तैयार हो गए कि वे इंजीनियरिंग की लेटेस्ट इनफॉर्मेशन अपने जूनियर छात्रों तक पहुंचाएंगे। 

    सीनियर इंजीनियर छात्रों को मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस देंगे ज्ञान

    कॉसमॉस सोसायटी के सदस्य आकाश शर्मा ने बताया, "हमने इंजीनियरिंग कॉलेज के कई पूर्व छात्रों से बात की है और एक शेड्यूल तैयार किया है. इसके तहत दो सप्ताह तक कई सीनियर इंजीनियर विभिन्न विषयों पर ज्ञान देंगे. इसमें मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे आधुनिक विषय शामिल किए गए हैं। 

    इंजीनियरिंग की छात्रा धनश्री का कहना है, '' कॉलेज में हमें चीजों की जानकारी हो जाती है, लेकिन इस ज्ञान का इस्तेमाल कैसे करना है, यह फील्ड में बैठा हुआ आदमी ही बता सकता है. सामान्य ज्ञान की जानकारी और उस पर मास्टरी हासिल करने का तरीका हमारे सीनियर ही हमें सीख सकते हैं, जो इस आयोजन के माध्यम से संभव हो पाएगा। 

  • मध्य प्रदेश के 8 शहरों का बदलेगा स्वरूप, नए मास्टर प्लान में ‘वॉक टू वर्क’ की सुविधा

    मध्य प्रदेश के 8 शहरों का बदलेगा स्वरूप, नए मास्टर प्लान में ‘वॉक टू वर्क’ की सुविधा

    भोपाल 

    सरकार ने अब बड़े शहरों के मास्टर प्लान जारी करना शुरू कर दिया है। भोपाल के बाद अब इंदौर की तैयारी है। क्योंकि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने भोपाल (Bhopal master plan update) से पहले इंदौर के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार कर लिया था। अब नए मास्टर प्लान में नई टाउनशिप पॉलिसी को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं, प्रदूषण रहित वातावरण, वर्टिकल डेवलपमेंट और उद्योगों को बढ़ावा देने का खास ध्यान रखा गया है। टीएंडसीपी की टीम ने प्लान को अंतिम रूप देने के पहले गुजरात की गिफ्ट सिटी और दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की प्लानिंग का भी जाकर अध्ययन किया था।

    टीएंडसीपी अनुसार, प्रदेश के जिन शहरों में आर्थिक गतिविधियां और आबादी बढ़ रही है वहां पर दिल्ली की तर्ज पर ग्रीन-ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित किए जाएंगे। इसके साथ वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ाने के लिए असीमित एफएआर, सड़कों की चौड़ाई के आधार पर मिक्स लैंड यूज, ग्रीन टीडीआर, लोकल एरिया प्लानिंग और पार्किंग संबंधी प्रावधान सुनिश्चित किए जा रहे हैं। इंदौर में भी मेट्रोपोलिटन सिटी की अवधारणा के तहत ग्रोथ कॉरीडोर और उस पर व्यवसायिक गतिविधियों के विकास का प्रयास किया जा रहा है।

    शहरों को मिलेगी वॉक-टू- वर्क सुविधा
    नए मास्टर प्लान में शहरों में प्रदूषण रहित वातावरण बनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ गिफ्ट सिटी जैसी वॉक टू वर्क सुविधा देने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत करने पर भी जोर है। इसके लिए जरूरत के अनुसार ओवरब्रिज, अंडरब्रिज, चौड़ी सड़कों के प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके साथ सेल्फ सस्टेनेबिलिटी यानी शहरों को अपनी ऊर्जा, कचरा प्रबंधन आदि जरूरतों को खुद ही पूरा करने वाला बनाने की व्यवस्थाएं रहेंगी। सॉलिड और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था के भी भविष्य को देखते हुए प्रावधान शामिल किए गए हैं।

    हाईराइज बिल्डिंग से वर्टिकल डेवलपमेंट
    नए मास्टर प्लान में कृषि भूमि को बचाने के लिए वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके लिए एफएआर बढ़ाने के साथ शहर में अधिकांश फोर और सिक्सलेन सड़कों के प्रावधान किए गए हैं। क्योंकि सड़कों के दोनों तरफ हाईराइज बिल्डिंग बनेंगी। कमर्शियल डेवलपमेंट बढ़ाने के लिए मेट्रो के दोनों और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट होगा। यहां एफएआर भी ज्यादा मिलेगा। यहां मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स आईटी पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर आदि बनेंगे। कॉलोनियों की सड़कें भी कम से कम 9 मीटर चौड़ी होंगी।

    फ्लैटेड इंडस्ट्री का भी होगा प्रावधान
    मास्टर प्लान में उद्योगों को बढ़ावा देने का भी ध्यान रखा गया है। इसलिए फ्लैटेड इंडस्ट्री के प्रावधान किए गए हैं। बहुमंजिला इमारत के फ्लैट में भी इंडस्ट्री लगाई जा सकेंगी। व्हाइट और ग्रीन श्रेणी के उद्योग कॉलोनी के अंदर भी चल सकेंगे। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ रोजगार भी बढ़ेगा। निजी कॉलोनाइजर यदि अपनी कॉलोनी में अस्पताल, स्कूल, वृद्धाश्रम बनाएंगे तो उन्हें ज्यादा एफएआर मिल सकेगा।

    धार्मिक शहरों और पर्यटन स्थलों के भी बनेंगे मास्टर प्लान
    टाउन एंड कंट्री प्लानिंग मप्र के संचालक कौशलेन्द्र विक्रम सिंह के अनुसार प्रदेश में धार्मिक शहरों और पर्यटन स्थलों के भी अलग से मास्टर प्लान बनाए जा रहे हैं। उज्जैन का नया मास्टर प्लान लागू हो चुका है। जबकि ओंकारेश्वर, चित्रकूट, महेश्वर, मांडू, ओरछा, सांची, सलकनपुर, अमरकंटक का भी नया मास्टर प्लान बनाया जाएगा। प्रदेश में धर्म स्थलों के साथ पर्यटन स्थलों पर भी सैलानियों की संख्या बढ़ रही है। इसे देखते हुए इन शहरों की आगामी 30 से 50 साल तक की प्लानिंग की जाएगी। यहां आने वालों के लिए सुविधाएं विकसित होंगी।

  • भोपाल में 3 अक्टूबर को अमित शाह का दौरा, MP को मिलेंगी कई बड़ी सौगातें; जानें कार्यक्रम

    भोपाल में 3 अक्टूबर को अमित शाह का दौरा, MP को मिलेंगी कई बड़ी सौगातें; जानें कार्यक्रम

    भोपाल 
    केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह तीन अक्टूबर को भोपाल दौरे पर होंगे. केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह प्रदेश को कई सौगातें देने भोपाल आ रहे हैं. मध्यप्रदेश में अक्टूबर महीने की शुरुआत से दिग्गज नेताओं का मध्यप्रदेश में डेरा रहेगा. एक अक्टूबर को राहुल गांधी का बालाघाट दौरा है और उसके ठीक बाद तीन अक्टूबर को केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह भोपाल के दौरे पर होंगे। 

    ये है भोपाल में अमित शाह का पूरा कार्यक्रम
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  मंत्रालय में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित आगमन के संबंध में मुख्य सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों से बैठक कर इस बारे में चर्चा की. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कांफ्रेंस द्वारा कलेक्टर, कमिश्नर भोपाल और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियों ने निर्देश भी दिए. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि शनिवार, 3 अक्टूबर को भेापाल के भेल दशहरा मैदान में राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. गोपालक सम्मेलन स्थल पर केंद्रीय मंत्री शाह न्याय संहिता पर केंद्रित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन व अवलोकन करेंगे। 

    केंद्रीय मंत्री शाह इसके बाद राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन को संबोधित करेंगे. अमित शाह भोपाल बायपास भौरी के पास आईआईएसईआर परिसर का शिलान्यास और परिसर में स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे। 

    मध्यप्रदेश को ये सौगातें देंगे अमित शाह
    प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री शाह प्रदेश में दुग्ध संयंत्र, डेयरी प्रसंस्करण और गुणवत्ता जांच लैब की विभिन्न सौगात भी देंगे. इन परियोजनाओं में उज्जैन में 255 करोड़ रुपए की लागत का डेयरी प्लांट और भोपाल में फर्मेंटेड प्रोडक्ट दूध प्लांट भी शामिल है. इस अवसर पर भोपाल पश्चिमी बायपास का भूमि पूजन भी किया जाएगा. केंद्रीय गृहमंत्री शाह भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ पशुपालकों को बोनस वितरण, गौशालाओं की सहायता के लिए राशि प्रदान करेंगे. साथ ही गोपालक दीदीयों के सम्मान और उन्हें डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र वितरित किए जाएंगे। 

    करीब ₹3774 करोड़ का यह सड़क प्रोजेक्ट 35.61 किलोमीटर लंबा एक प्रमुख फोर-लेन प्रोजेक्ट है। यह बायपास मंडीदीप के समीप इटायाकलां में भोपाल-जबलपुर मार्ग से शुरू होकर कोलार और रातीबड से होते हुए भोपाल-देवास इंदौर मार्ग पर ग्राम फंदा कलां तक जाएगा। पहले इसकी लंबाई 40.90 किमी रखी गई थी। संशोधित अलाइनमेंट के बाद घटाकर 35.61 किमी कर दी गई।

    भोपाल पश्चिमी बायपास प्रोजेक्ट में सर्विस रोड, फ्लाईओवर, बड़े ग्रेड सेपरेटर और एक बड़ा रेलवे ओवरब्रिज (ROB) शामिल होगा। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए रातापानी क्षेत्र के पास विशेष एलिवेटेड रास्ते (वाइल्डलाइफ वायडक्ट) भी बनाए जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर को इस परियोजना का भूमि पूजन करेंगे।

    35 हजार से ज्यादा गोपालक पहुंचेंगे
    कार्यक्रम में गृह विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, सहकारिता विभाग, लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग के कार्यों के प्रेजेंटेशन भी होंगे. कार्यक्रम में भोपाल, सीहोर, बैतूल, राजगढ़, हरदा, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, विदिशा, रायसेन नर्मदापुरम जिलों के साथ प्रदेश के 35 हजार से अधिक गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों की भागीदारी रहेगी। 

  • कम बारिश ने बढ़ाई उज्जैन की टेंशन, फरवरी-मार्च में सूख सकते हैं कुएं-बोरिंग; डैम में 90 दिन का पानी

    कम बारिश ने बढ़ाई उज्जैन की टेंशन, फरवरी-मार्च में सूख सकते हैं कुएं-बोरिंग; डैम में 90 दिन का पानी

    उज्जैन
     मानसून की अधिकारिक विदाई बुधवार को हो जाएगी। 30 सितंबर के बाद होने वाली किसी भी वर्षा को मौसम विभाग मानसूनोत्तर वर्षा (आफ्टर रैनी सीजन) की श्रेणी में दर्ज करेगा। लेकिन इस बार मानसून की विदाई शहर के लिए राहत नहीं, बल्कि एक भीषण जल संकट का अलार्म बजाकर जा रही है। सात लाख की आबादी की प्यास बुझाने वाले गंभीर बांध में इस समय जल संकट का सन्नाटा पसरा है।

    2250 एमसीएफटी की क्षमता वाले इस बांध में फिलहाल महज 715 एमसीएफटी पानी ही बचा है- यानी बांध 68 प्रतिशत खाली है। ऊपर से वाष्पीकरण और रोजमर्रा की सप्लाई के चलते बांध से हर दिन 7 से 8 एमसीएफटी पानी तेजी से घट रहा है।

    इस हिसाब से गंभीर बांध में अगले 90 दिन नियमित जल प्रदाय करने जितना पानी ही उपलब्ध है। जीवाजी वेधशाला के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि इस सीजन में औसत 906 मिमी के मुकाबले महज 682 मिमी (75 प्रतिशत) बारिश हुई- यानी सीधी 25 प्रतिशत की बड़ी गिरावट। उज्जैन में करीब एक दशक (10 साल) बाद ऐसे सूखे जैसे हालात बने हैं।

    गंभीर बांध : शहर की निर्भरता और बड़ा संकेतक
    राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष अगस्त में पेश की गई संयुक्त समिति की रिपोर्ट के अनुसार, उज्जैन शहर की मौजूदा जलापूर्ति का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा अकेले गंभीर बांध से पूरा होता है। अल्प वर्षा के कारण बांध में क्षमता का एक-तिहाई पानी ही बच पाना आने वाले शीतकाल और ग्रीष्मकाल के लिए बड़े संकट की दस्तक है।

    अल्प बारिश की वजह से भूजल रिचार्ज भी नगण्य रहा है। आशंका जताई जा रही है कि जो कुएं, हैंडपंप और बोरिंग अमूमन मई-जून की भीषण गर्मी में सूखते थे, वे इस बार शीतकाल समाप्त होते-होते (फरवरी-मार्च में) ही दम तोड़ देंगे। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रबी फसलों (गेहूं और चना) के लिए मिट्टी में आवश्यक शुरुआती नमी नहीं मिलेगी। फसलों के उत्पादन में गिरावट का सीधा असर किसान की जेब और अंततः शहर के व्यापार पर पड़ेगा।

    नर्मदा का सहारा : राहत बड़ी, लेकिन वित्तीय लागत भी भारी
    गंभीर बांध में जलस्तर घटने पर नर्मदा-आधारित जल प्रदाय योजना उज्जैन के लिए लाइफलाइन बनती है। लेकिन नर्मदा का पानी शहर तक लाना वित्तीय रूप से अत्यधिक खर्चीला है। पंपिंग, बिजली और रखरखाव का लगातार भारी खर्च उठाना पड़ता है। वर्तमान में नर्मदा जल की लागत 22.60 प्रति घन मीटर है। यह दर वर्ष 2014 से लागू है, जिसे अब तक बढ़ाया नहीं गया है।

    बीते 12 वर्षों में नर्मदा का पानी उज्जैन लाने और गंभीर में खाली स्थान भरने के मद में अरबों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। कम वर्षा का सीधा अर्थ है कि नगर निगम और प्रशासन को आगामी दिनों में वैकल्पिक नर्मदा जल पर निर्भरता बढ़ानी होगी, जिससे सरकारी खजाने पर वित्तीय दबाव कई गुना बढ़ जाएगा।

    सिंहस्थ 2028 से पहले जल रणनीति की परीक्षा
    एनजीटी की रिपोर्ट में सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन की अनुमानित जल मांग 410 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) बताई गई है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि मेला अवधि में आने वाली करोड़ों की तैरती आबादी की प्यास बुझाना सामान्य दिनों से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होगा।

    इस वर्ष का मानसून केवल एक मौसमी आंकड़ा नहीं, बल्कि उज्जैन की अगले दो वर्षों की जल प्रबंधन नीति का शुरुआती अलर्ट है। यदि आने वाले दिनों में मानसूनोत्तर वर्षा से राहत नहीं मिलती, तो प्रशासन को समय रहते जल वितरण, सीवरेज रिसाइकलिंग और भूजल संरक्षण की आपातकालीन योजना पर काम शुरू करना होगा।

  • रबी सीजन के लिये करें बिजली की पर्याप्त व्यवस्था : ऊर्जा मंत्री  तोमर

    रबी सीजन के लिये करें बिजली की पर्याप्त व्यवस्था : ऊर्जा मंत्री तोमर

    भोपाल 

    ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बुधवार को प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि रबी सीजन के लिये किसानों को बिजली की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करें। अभी से पुख्ता इंतजाम करें, जिससे बिजली माँग की आपूर्ति में कोई अड़चन नहीं आये। बैठक में एमडी मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी  मंजीत सिंह ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में बिजली उत्पादन के लिये कोयले का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। साथ ही कोयले की आपूर्ति भी सतत जारी है।

    ऊर्जा मंत्री  तोमर ने कहा कि विद्युत उत्पादन संयंत्रों की क्षमता के अनुरूप उत्पादन करना सुनिश्चित करें। वरिष्ठ अधिकारी इसकी सतत समीक्षा भी करें। प्लांट के कोल स्टॉक, प्राप्ति, खपत एवं क्वालिटी की साप्ताहिक रिपोर्ट उपलब्ध करायें। एनटीपीसी से संबंधित विद्युत गृहों से अनुबंधित क्षमता के अनुसार विद्युत उपलब्धता के निरीक्षण की जिम्मेदारी भी तय करें। बैठक में विभिन्न प्लांटों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में किसी भी प्लांट में कम उत्पादन नहीं हुआ है।

     

  • हेलमेट एवं सीटबेल्ट के अनिवार्य उपयोग को लेकर मध्यप्रदेश पुलिस का 10 दिवसीय विशेष अभियान

    हेलमेट एवं सीटबेल्ट के अनिवार्य उपयोग को लेकर मध्यप्रदेश पुलिस का 10 दिवसीय विशेष अभियान

    भोपाल 

    सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने तथा दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को रोकने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में हेलमेट एवं सीटबेल्ट के अनिवार्य उपयोग को लेकर 10 दिवसीय विशेष प्रवर्तन एवं जन-जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान 28 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। अभियान का उद्देश्य केवल चालानी कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए नागरिकों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना तथा सुरक्षित यातायात संस्कृति को प्रोत्साहित करना है।

    सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा में सामने आया है कि दोपहिया वाहन चालकों द्वारा हेलमेट तथा चार पहिया वाहन चालकों एवं यात्रियों द्वारा सीटबेल्ट का उपयोग नहीं करने से दुर्घटना की स्थिति में गंभीर चोट एवं मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अभियान के दौरान हेलमेट एवं सीटबेल्ट के शत-प्रतिशत उपयोग को प्रोत्साहित करने के साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    प्रमुख चौराहों, हाईवे और ब्लैक स्पॉट पर विशेष चेकिंग

    अभियान के दौरान जिलों में मुख्य चौराहों, राष्ट्रीय एवं राज्यीय राजमार्गों तथा दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट) पर निर्धारित समयावधि में विशेष चेकिंग प्वाइंट स्थापित कर सघन जांच की जाएगी। हेलमेट नहीं पहनने वाले दोपहिया वाहन चालकों तथा सीटबेल्ट का उपयोग नहीं करने वाले चार पहिया वाहन चालकों के विरुद्ध नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाएगी।

    दोपहिया वाहन पर पीछे बैठने वाली सवारी के लिए भी हेलमेट अनिवार्य होने के संबंध में विशेष रूप से जागरूक किया जाएगा तथा नियम का उल्लंघन पाए जाने पर वाहन चालक एवं पीछे बैठी सवारी के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    ITMS, CCTV और ANPR से होगी निगरानी

    जिन शहरों में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) एवं CCTV कैमरे उपलब्ध हैं, वहां ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सहित उपलब्ध तकनीकी माध्यमों का उपयोग करते हुए ई-चालान की कार्रवाई की जाएगी। हेलमेट एवं सीटबेल्ट के नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस के निलंबन के लिए मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के तहत संबंधित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को प्रस्ताव भेजने की कार्रवाई भी की जाएगी।

    स्कूल-कॉलेजों से लेकर बाजारों तक चलेगा जागरूकता अभियान

    प्रवर्तन कार्रवाई के साथ-साथ व्यापक जन-जागरूकता गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, औद्योगिक संस्थानों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में हेलमेट एवं सीटबेल्ट के महत्व को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रमुख चौराहों, बाजारों एवं सार्वजनिक स्थानों पर बैनर, पोस्टर, होर्डिंग, पंपलेट सहित अन्य प्रचार माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।

    अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड, रेडक्रॉस, सामाजिक संगठनों तथा अन्य हितधारकों को भी जोड़ा जाएगा। पेट्रोल पंप, ऑटोमोबाइल डीलर, ड्राइविंग स्कूल, परिवहन व्यवसाय से जुड़े संगठनों एवं अन्य संबंधित संस्थानों के सहयोग से नागरिकों को हेलमेट एवं सीटबेल्ट के नियमित उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एवं अन्य उपलब्ध संचार माध्यमों के जरिए सड़क सुरक्षा संबंधी संदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। हेलमेट एवं सीटबेल्ट के उपयोग से दुर्घटनाओं में जीवन बचने के वास्तविक उदाहरणों को जन-जागरूकता सामग्री में प्रमुखता से शामिल किया गया, ताकि नागरिकों को इन सुरक्षा उपकरणों के महत्व के प्रति जागरूक किया जा सके

  • साइबर जालसाजों से सावधान रहें, बिल भुगतान केवल अधिकृत माध्यमों से ही करें : ऊर्जा मंत्री  तोमर

    साइबर जालसाजों से सावधान रहें, बिल भुगतान केवल अधिकृत माध्यमों से ही करें : ऊर्जा मंत्री तोमर

    भोपाल

    ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने बिजली बिलों का नगद भुगतान कंपनी के जोन, वितरण केन्द्र कार्यालय, पीओएस मशीन अथवा अधिकृत भुगतान केन्द्रों जैसे एम.पी.ऑनलाइन, कॉमन सर्विस सेंटर पर ही करें। उपभोक्ताओं को बिजली बिलों के केशलेस भुगतान के लिये कंपनी के पोर्टल (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, पेटीएम ऐप, व्हाट्सएप पे एवं उपाय मोबाइल ऐप के माध्यम से भी बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।

    कंपनी के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि उपभोक्ता को असमय विद्युत विच्छेदन से बचने के लिये किसी निजी मोबाईल नंबर से कॉल कर भुगतान करने हेतु कोई एसएमएस/ व्हाट्सएप जारी नहीं किया जाता है। कंपनी द्वारा जारी किए गए एसएमएस केवल निर्धारित नम्बर सेंडर आईडी से ही प्रेषित किए जाते हैं। उपभोक्ता किसी अन्य सेंडर आईडी अथवा निजी नंबर से आए भ्रामक मेसेज से सतर्क रहें। कंपनी अंतर्गत विद्युत देयकों के भुगतान के लिए उपभोक्ता पहचान नंबर यानि आईवीआरएस नंबर की जरूरत होती है। आईवीआरएस नंबर के आधार पर ही जोन, वितरण केन्द्रों या अन्य गेटवे एमपी ऑनलाइन, पेटीएम, फोन पे, गूगल पे. अमेजन पे, व्हाट्सएप पे आदि पर बिजली बिलों का भुगतान होता है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी अनजान मोबाइल नंबर से आए फोन या व्हाट्सएप मैसेज के आधार पर किसी भी मोबाइल नंबर पर देयकों की राशि अंतरित न करें। साथ ही अपना पिन नंबर भी किसी के साथ साझा न करें।

    कंपनी के संज्ञान में आया है कि सायबर जालसाजों द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज अथवा आई.व्ही.आर. तकनीक से फोन कॉल पर नंबर दबाने के लिये कहा जाता है जिसमें बिल भुगतान कराने हेतु भय बनाकर कि आपकी बिजली कुछ घंटों बाद काट दी जाएगी, इसके लिए बिल भुगतान करने के लिये विशेष नंबर दबाएं, मोबाइल नंबर विशेष अथवा अनजान लिंक/ऐप पर क्लिक कर या संपर्क कर बकाया राशि जमा कराएं। इस प्रकार के एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज एवं आई.व्ही.आर. फोन कॉल फर्जी हैं, इन पर ध्यान नहीं दिया जाए। विद्युत उपभोक्ताओं से अपील की गयी है कि इस प्रकार के फर्जी सायबर जालसाजों से सतर्क और सावधान रहें। साइबर फ्रॉड संबंधित किसी भी घटना की सूचना तत्काल भारत सरकार की हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज कराए।

    यदि किसी अनजान नंबर से बिजली संबंधी कार्य के लिए फोन आता है, तो उपभोक्ता संबंधित व्यक्ति से उसका Employee ID अवश्य पूछें। सत्यापन के बाद ही किसी व्यक्ति को कंपनी का अधिकृत कर्मचारी मानें और किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी किसी से भी साझा करने से बचें।

     

  • ‘पर्यावरण और जीवनशैली’ विषय पर प्री-सीओपी 31 परामर्श राष्ट्रीय संगोष्ठी गुरुवार को भोपाल में

    ‘पर्यावरण और जीवनशैली’ विषय पर प्री-सीओपी 31 परामर्श राष्ट्रीय संगोष्ठी गुरुवार को भोपाल में

    भोपाल

    ‘पर्यावरण और जीवनशैली’ विषय पर प्री-सीओपी31 परामर्श राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन विज्ञान भवन, भोपाल में गुरुवार, 1 अक्टूबर को किया जाएगा। संगोष्ठी में जलवायु और सतत विकास के बीच समन्वय को मजबूत करने और राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में राज्यों की भूमिका पर विचार-विमर्श होगा। विशेषज्ञ एवं संबंधित क्षेत्रों के प्रतिनिधि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और जीवनशैली में आवश्यक बदलाव से जुड़े विषयों पर विचार साझा करेंगे।

    जलवायु कार्रवाई और सतत विकास के लिए समग्र दृष्टिकोण

    संगोष्ठी ‘लिविंग द राइट वे’ पहल की अवधारणा पर आधारित है। इसका उद्देश्य जलवायु कार्रवाई, सतत विकास और जीवनशैली में परिवर्तन के लिए सरकार और समाज के समन्वित प्रयासों को बढ़ावा देना है। पहल के अंतर्गत सरकार, संस्थाओं, समुदायों और नागरिकों की सामूहिक भागीदारी से जलवायु-सक्षम, समतापूर्ण और सतत समाज के निर्माण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    पहल की परिकल्पना ऐसे जलवायु-सक्षम, समतापूर्ण और सतत समाज के निर्माण की है, जहां सरकार, संस्थाएं, समुदाय और नागरिक मिलकर ऐसी जीवनशैली अपनाएं, जो भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं, सतत विकास लक्ष्यों और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी योगदान दे। पहल का उद्देश्य सरकार, नागरिक समाज, अकादमिक जगत, निजी क्षेत्र, युवाओं और समुदायों को साथ लाकर जलवायु कार्रवाई एवं सतत विकास को नीतियों, संस्थाओं और दैनिक जीवनशैली में एकीकृत करना है।

    तीन तकनीकी सत्रों में होगा विचार-विमर्श

    संगोष्ठी में तीन तकनीकी सत्र होंगे। इनमें नीतिगत समन्वय के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान, राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में राज्यों की भूमिका एवं संक्रमण के वित्तपोषण तथा सीओपी31 से अपेक्षाओं से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। भारत की राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं, पंचामृत संकल्पों, मिशन लाइफ और सतत विकास लक्ष्यों को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने में राज्यों, स्थानीय सरकारों, नागरिक समाज, अकादमिक जगत, निजी क्षेत्र, युवाओं और समुदायों की भूमिका पर भी चर्चा होगी।

    कार्यक्रम में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संयुक्त संगठन मंत्री  प्रवीण रामदास विशिष्ट अतिथि और पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक  गोपाल आर्य अध्यक्ष के रूप में शामिल होंगे। मध्यप्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (मैपकास्ट), मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग, पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) और अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ गुड गवर्नेंस एंड पॉलिसी एनालिसिस कार्यक्रम में सहभागी संस्थाओं के रूप में शामिल हैं।

     

  • 150 से अधिक म्यूल बैंक खातों व सिम का उपयोग कर 11 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का खुलासा

    150 से अधिक म्यूल बैंक खातों व सिम का उपयोग कर 11 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का खुलासा

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों के विरुद्ध लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में मंदसौर पुलिस ने साइबर ठगी के एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मुख्य सरगना सहित 6 आरोपियों को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की गई इस कार्रवाई में सामने आया कि गिरोह देश के अलग-अलग हिस्सों से मेट्रिमोनियल साइट्स के माध्यम से लोगों को विश्वास में लेकर ठगी करता था। प्रारंभिक जांच में गिरोह द्वारा 11 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी और 150 से अधिक साइबर घटनाओं को अंजाम दिए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 22 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 30 मोबाइल सिम एवं 5 एटीएम कार्ड जब्त किए हैं। विभिन्न बैंक खातों में जमा 8 लाख रुपये से अधिक की राशि को फ्रीज कराया है।

    जिले के शामगढ़ निवासी पीड़िता मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल अपडेट करने के बाद साइबर ठगों के संपर्क में आई थी। आरोपी ने स्वयं को NRI बताकर पीड़िता से शादी करने का विश्वास दिलाया। नकली फोटो और कथित परिजनों के माध्यम से व्हाट्सएप पर बातचीत कर पीड़िता का विश्वास हासिल किया गया। इसके बाद विदेश से गिफ्ट भेजने, गिफ्ट कस्टम में पकड़े जाने तथा कस्टम ड्यूटी एवं प्रोसेसिंग फीस के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में राशि जमा कराई गई। इस तरह पीड़िता से 7 लाख 50 हजार रुपये की ठगी की गई। शिकायत मिलने पर थाना शामगढ़ में प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ की गई।

    पुलिस अधीक्षक मंदसौर  विनोद कुमार मीना के निर्देशन में प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम गठित की गई। टीम ने लगभग दो माह तक तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया और साइबर ठगी से जुड़े डिजिटल एवं बैंकिंग नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा।

    लगातार किए गए तकनीकी विश्लेषण से आरोपियों की जानकारी प्राप्त होने के बाद पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से राजस्थान के जयपुर में दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ एवं विवेचना में सामने आए तथ्यों के आधार पर गिरोह के एक अन्य सदस्य एवं मुख्य सरगना को बिहार के अरवल जिले से गिरफ्तार किया गया।

    150 से अधिक म्यूल बैंक खाते और सिम के जरिए चल रहा था नेटवर्क

    जांच में सामने आया कि साइबर ठगी का यह नेटवर्क अलग-अलग स्तर पर काम कर रहा था। गिरोह द्वारा 150 से अधिक म्यूल बैंक अकाउंट एवं म्यूल मोबाइल सिम का उपयोग किया गया। अधिकांश मोबाइल सिम आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली एवं बिहार से प्राप्त की गई थीं, जबकि कुछ सिम एवं बैंक खाते भोपाल से भी प्राप्त कर उपयोग किए गए।

    गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में ठगी की रकम निकालते थे। निश्चित समय अंतराल के बाद वह अपने स्‍थान बदल लेते थे। बैंक खाते फ्रीज होने पर संबंधित मोबाइल फोन, सिम, पासबुक एवं एटीएम आदि नष्ट कर दिए जाते थे और अगली ठगी के लिए नए मोबाइल, सिम एवं बैंक खातों का उपयोग किया जाता था।

    गिरोह का एक मुख्य व्यक्ति विभिन्न बैंक खातों में जमा राशि की जानकारी रखता था और सदस्यों को राशि निकालने तथा निर्धारित खातों में जमा करने के निर्देश देता था।

    मध्यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि अनजान व्यक्तियों द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें। मेट्रिमोनियल साइट, ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश, गिफ्ट अथवा किसी अन्य आकर्षक प्रस्ताव के माध्यम से किए जा रहे संपर्क में सावधानी बरतें। किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन, पासवर्ड एवं अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। साइबर फ्रॉड होने पर तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि पर किसानों को दी बधाई

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि पर किसानों को दी बधाई

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हित में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विपणन सीजन 2027-28 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि को मंजूरी दी है। इसमें गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम की फसलें शामिल हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह वृद्धि अन्नदाताओं को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य प्राप्त करने में मदद करेगी। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी, जिससे कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री  मोदी के किसान हितैषी निर्णय से समृद्धि आयेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान हितैषी इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री  मोदी का हार्दिक आभार माना और अन्नदाताओं के हित में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के लिए किसानों को बधाई दी है।