Category: मध्य प्रदेश

  • MP News: पोषण अभियान में मंदसौर और नीमच का कमाल, देशभर में हासिल किया पहला और दूसरा स्थान

    MP News: पोषण अभियान में मंदसौर और नीमच का कमाल, देशभर में हासिल किया पहला और दूसरा स्थान

    मध्यप्रदेश  राष्ट्रीय पोषण माह में देश में तीसरे स्थान पर

    1.09 करोड़ से अधिक गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज
    मंदसौर और नीमच जिलें देशभर में पहले और दूसरे स्थान पर
    ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर प्रदेश के सभी 55 जिलों में जनभागीदारी

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय पोषण माह-2026 में पोषण जागरूकता और जनभागीदारी के प्रयासों में देश में तीसरा स्थान हासिल किया है। 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे तक प्रदेश में 1 करोड़ 9 लाख 66 हजार 805 गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज की गई हैं। इस उपलब्धि को और विशेष बनाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया के प्रभार वाले मंदसौर और नीमच जिलों ने राष्ट्रीय स्तर पर क्रमशः पहला और दूसरा स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश के सभी 55 जिलों की भागीदारी के साथ यह उपलब्धि पोषण को जनआंदोलन बनाने और आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, देखभाल तथा प्रारंभिक बाल विकास का सशक्त केंद्र बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करती है।

    देश के अग्रणी राज्यों में मध्यप्रदेश की उल्लेखनीय उपस्थिति

    राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे तक देश में कुल 11 करोड़ 91 लाख 64 हजार 823 गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज की गईं। इनमें बिहार 1 करोड़ 49 लाख 93 हजार 265 प्रविष्टियों के साथ पहले, महाराष्ट्र 1 करोड़ 38 लाख 66 हजार 923 के साथ दूसरे और मध्यप्रदेश 1 करोड़ 9 लाख 66 हजार 805 प्रविष्टियों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

    उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ 2 लाख 90 हजार 37, राजस्थान में 91 लाख 78 हजार 866, गुजरात में 84 लाख 23 हजार 561 और छत्तीसगढ़ में 71 लाख 93 हजार 724 प्रविष्टियां दर्ज की गईं। राष्ट्रीय स्तर पर 788 जिलों में से 785 जिलों की भागीदारी दर्ज की गई, जबकि मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों ने पोषण माह की गतिविधियों में सहभागिता की।

    मंदसौर और नीमच की उपलब्धि से प्रदेश को मिली विशेष पहचान

    प्रदेश के मंदसौर जिले ने राष्ट्रीय पोषण माह में पहला और नीमच जिले ने दूसरा स्थान हासिल किया है। दोनों जिले महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया के प्रभार वाले जिले हैं। राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष दो स्थानों पर इन जिलों की उपलब्धि प्रदेश में पोषण संबंधी गतिविधियों के व्यापक संचालन और जनभागीदारी को नई पहचान देती है।

    हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ है इस वर्ष की थीम

    भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत पोषण को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ 9 सितंबर 2026 को किया गया। इस वर्ष की मुख्य थीम ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण, देखभाल और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास से जुड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करना, समुदाय की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना तथा पोषण सेवाओं के प्रति सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही को प्रोत्साहित करना है।

    पांच प्रमुख विषयों पर केंद्रित हैं पोषण संबंधी गतिविधियां

    राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान 5 प्रमुख विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इनमें आहार में विविधता और पर्याप्त प्रोटीन की उपलब्धता, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं विविधतापूर्ण गर्म पका भोजन, सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही, बच्चों के पोषण के साथ प्रारंभिक विकास एवं सीखने के लिए प्रोत्साहन संबंधी गतिविधियां तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य के लिए सहायता शामिल हैं। इन विषयों के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित आहार, बेहतर पोषण व्यवहार, मातृ स्वास्थ्य और बच्चों के समग्र विकास के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है। इस अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों पर उपलब्ध सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के साथ समुदाय को पोषण संबंधी प्रयासों से जोड़ना भी है।

     

  • सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज, उज्जैन और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर श्रद्धालुओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

    सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज, उज्जैन और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर श्रद्धालुओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

    उज्जैन 
     सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए रेलवे उज्जैन और आसपास के स्टेशनों का कायाकल्प करने की तैयारी में है। यात्री सुविधाओं के विस्तार से लेकर भीड़ प्रबंधन और ट्रेनों के संचालन तक, रेलवे का पूरा जोर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर है।

    इसके लिए उज्जैन सहित आसपास के छह स्टेशनों पर 580 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा उज्जैन स्टेशन को मिलेगा। यहां 281.67 करोड़ रुपये की लागत से 17 कार्य किए जाएंगे। स्टेशन पर तीन नए फुट ओवरब्रिज, चार होल्डिंग बिल्डिंग, अतिरिक्त यात्री प्रतीक्षास्थल और स्टेबलिंग लाइनें विकसित की जाएंगी। सिंहस्थ के दौरान एक साथ उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने में ये सुविधाएं अहम भूमिका निभाएंगी।

    तीन नए फुट ओवरब्रिज बनेंगे
    उज्जैन स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर एक से आठ के बीच यात्रियों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए तीन नए फुट ओवरब्रिज (एफओबी) बनाए जाएंगे। इनमें बीच में बनने वाला 12 मीटर चौड़ा फुट ओवरब्रिज सबसे अहम है। इस पर 35.68 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें शेड, रैंप और लिफ्ट की सुविधा भी रहेगी, ताकि बुजुर्गों, दिव्यांगों और भारी सामान के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी न हो।

    इसके अलावा भोपाल और रतलाम छोर पर छह-छह मीटर चौड़े दो फुट ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। प्रत्येक पर 18.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। तीनों फुट ओवरब्रिज बनने से प्लेटफार्मों के बीच यात्रियों का दबाव कम करने और भीड़ को अलग-अलग रास्तों से निकालने में मदद मिलेगी।

    चार नई होल्डिंग एरिया, भीड़ बढ़ने पर यहीं रुकेंगे यात्री
    सिंहस्थ के दौरान स्टेशन पर अचानक बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चार नई जी प्लस-2 होल्डिंग बिल्डिंग बनाई जाएंगी। प्लेटफार्म नंबर एक पर रनिंग रूम के पास एक और प्लेटफार्म नंबर आठ पर तीन बिल्डिंग प्रस्तावित हैं। प्रत्येक भवन पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त यात्रियों के लिए होल्डिंग एरिया विकसित करने पर 20.29 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यह है कि ट्रेनों के आने-जाने के समय यात्रियों की भीड़ सीधे प्लेटफार्मों पर जमा न हो और जरूरत पड़ने पर उन्हें निर्धारित स्थानों पर रोका जा सके।

    यार्ड में स्टेबलिंग लाइन, बिजली और ड्रेनेज व्यवस्था भी सुधरेगी
    स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के साथ ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ाने के लिए भी काम किए जाएंगे। लोको यार्ड और एनसी यार्ड में स्टेबलिंग लाइन विकसित करने पर 54.71 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे ट्रेनों को खड़ा करने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था उपलब्ध होगी। सर्कुलेटिंग एरिया और ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने के लिए 19.79 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

    स्टेशन और आसपास के क्षेत्र में बिजली आपूर्ति मजबूत करने के लिए 33 केवी का नया सब स्टेशन बनाया जा रहा है। इलेक्ट्रिकल अपग्रेडेशन पर आठ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सुरक्षा और रेलवे कर्मचारियों की जरूरतों को देखते हुए 20 बिस्तरों वाली बैरक के निर्माण पर 8.75 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा सब डिविजनल रेलवे अस्पताल और 20 कमरों का रेस्ट हाउस भी प्रस्तावित है।

    पंवासा में नया स्टेशन, नईखेड़ी और चिंतामन में भी बढ़ेंगी सुविधाएं
    सिंहस्थ की तैयारियों के तहत उज्जैन-पिंगलेश्वर रेलखंड के बीच पंवासा में नया बी-क्लास स्टेशन बनाया जा रहा है। इस पर 49.85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां करीब 41 करोड़ रुपये की लागत से हाई लेवल प्लेटफार्म, फुट ओवरब्रिज, अस्थायी शौचालय और पेयजल व्यवस्था विकसित की जाएगी।

    नईखेड़ी स्टेशन पर 67.27 करोड़ रुपये की लागत से यार्ड का नवीनीकरण, अतिरिक्त लूप लाइन, स्टेबलिंग लाइन और फुट ओवरब्रिज के काम प्रस्तावित हैं। चिंतामन गणेश स्टेशन पर 49.63 करोड़ रुपये खर्च कर अतिरिक्त लूप लाइन, प्लेटफार्मों पर शेड, छह मीटर चौड़ा फुट ओवरब्रिज और अस्थायी होल्डिंग एरिया विकसित करने की योजना है।

    फतेहाबाद स्टेशन पर 22.64 करोड़ रुपये की लागत से यात्री सुविधाओं और भीड़ नियंत्रण से जुड़े काम किए जाएंगे। यहां फुट ओवरब्रिज और 10 बिस्तरों वाली बैरक भी प्रस्तावित है। मोहनपुरा स्टेशन पर 29.29 करोड़ रुपये खर्च कर दो फुट ओवरब्रिज और छत व शेड सहित उच्च स्तरीय प्लेटफार्म बनाया जाएगा।

    सिंहस्थ के दौरान उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का दबाव केवल मुख्य स्टेशन तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसे में आसपास के स्टेशनों पर सुविधाओं का विस्तार यात्रियों को अलग-अलग मार्गों और स्टेशनों के माध्यम से संभालने में मददगार होगा। रेलवे की इन योजनाओं का असर सिंहस्थ के दौरान यात्रियों की आवाजाही, ट्रेनों के संचालन और स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन पर दिखाई देने की उम्मीद है।

     

  • दमोह के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में खुशखबरी, 6 महीने के हुए बाघिन N-6 के चारों शावक

    दमोह के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में खुशखबरी, 6 महीने के हुए बाघिन N-6 के चारों शावक

    दमोह
    वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। कभी कुएं में गिरने के कारण मौत के मुंह तक पहुंच चुकी बाघिन एन-6 ने अब इस जंगल को अपना स्थायी ठिकाना बना लिया है। इतना ही नहीं इस बाघिन ने चार शावकों को जन्म देकर यहां अपने परिवार की नई पीढ़ी को भी आगे बढ़ाया है। अप्रैल 2026 में जन्मे चारों शावक अब करीब छह माह के हो चुके हैं।

    हाल ही में यह अपनी मां के साथ टाइगर रिजर्व में लगाए गए कैमरा ट्रैप में कैद हुए हैं। कैमरों में बाघिन कभी अपने शावकों के साथ जंगल में विचरण करती नजर आ रही है तो कभी उनके साथ बैठी दिखाई दे रही है। बाघिन और चार शावकों की तस्वीरें टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास में बढ़ते कुनबे की महत्वपूर्ण तस्वीर पेश कर रही है।

    राधा के बाद एन-6 ने बढ़ाया कुनबा
    वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघों को
    बसाने की शुरुआत बाघिन राधा को लाकर की गई थी, शुरुआती दौर में राधा के कारण ही इस क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी को लेकर विशेष चर्चा रही। अब यहां दूसरी बाघिन एन-6 ने भी चार शावकों को जन्म देकर अपने परिवार को आगे बढ़ाया है। इससे टाइगर रिजर्व में बाघों की नई पीढ़ी के विकसित होने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

    एन-6 के चार शावकों के साथ कैमरा ट्रैप में कैद होने से यह भी सामने आया है कि बाघिन इस क्षेत्र में अपने शावकों के साथ विचरण कर रही है। एक बाघिन का चार शावकों के साथ दिखाई देना वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे टाइगर रिजर्व में बाघों के प्राकृतिक प्रजनन और उनके अनुकूल रहवास की तस्वीर भी सामने आती है।

    फरवरी 2025 में हुआ था खतरनाक हादसा
    यह पूरी कहानी फरवरी 2025 की है। सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन में आने वाले हरदोई गांव में यह घटना घटी थी। करीब तीन साल की एक बाघिन एक जंगली सुअर का पीछा करते हुए अचानक एक गहरे और खुले कुएं में जा गिरी थी। इस अप्रत्याशित हादसे के बाद वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने करीब चार घंटे तक चले एक बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया था।

    खटिया और हाइड्रोलिक क्रेन से चला था रेस्क्यू
    कुएं में गिरी बाघिन और सुअर को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। इस अनोखे और जोखिम भरे रेस्क्यू में हाइड्रोलिक क्रेन के साथ-साथ एक पारंपरिक बुनी हुई खटिया का इस्तेमाल किया गया था। इस घटना ने एक बार फिर यह देश के सामने ला दिया था कि जंगलों के किनारे बसे गांवों में खुले कुएं वन्यजीवों के लिए कितने जानलेवा साबित हो सकते हैं।

    रेस्क्यू के बाद नौरादेही लैंडस्केप में छोड़ा गया था
    कुएं से सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद वन विभाग ने बाघिन की बेहतर मॉनिटरिंग के लिए उसके गले में रेडियो कॉलर लगाया था। इसके बाद उसे नौरादेही लैंडस्केप के अंतर्गत आने वाले वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के जंगलों में शिफ्ट कर दिया गया। इस रीलोकेशन का मुख्य उद्देश्य यही था कि वह रेस्क्यू वाली पुरानी और तनावपूर्ण परिस्थितियों से दूर एक नए और सुरक्षित प्राकृतिक माहौल में खुद को ढाल सके।

    कैमरा ट्रैप में कैद हुई मां और शावकों की जोड़ी
    नये आशियाने में आकर इस बाघिन ने न सिर्फ खुद को उस नए माहौल के अनुकूल ढाला, बल्कि अप्रैल 2026 में चार शावकों को भी जन्म दिया। हाल ही में सामने आई कैमरा-ट्रैप की तस्वीरों में चारों शावक अपनी मां के साथ सुरक्षित रूप से चलते हुए नजर आ रहे हैं। वन अधिकारियों के अनुसार, इन शावकों का जंगल में अपने जीवन के शुरुआती छह महीने सफलतापूर्वक पार कर लेना एक बहुत बड़ी कामयाबी है।

    शावकों के शुरुआती महीने होते हैं बेहद संवेदनशील

        वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, टाइगर के शावकों की जिंदगी के शुरुआती कुछ महीने बेहद नाजुक और खतरे से भरे होते हैं।

        इस दौरान शावक अपनी सुरक्षा, भोजन और शिकार करने के गुर सीखने के लिए पूरी तरह से अपनी मां पर निर्भर रहते हैं।

        सुरक्षित माहौल और मां की मौजूदगी के चलते ही यह नया कुनबा आज मध्यप्रदेश के जंगलों में फल-फूल रहा है।

     

     

  • मंदसौर और नीमच जिलें देशभर में पहले और दूसरे स्थान पर

    मंदसौर और नीमच जिलें देशभर में पहले और दूसरे स्थान पर

    ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर प्रदेश के सभी 55 जिलों में जनभागीदारी

    भोपाल
    मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय पोषण माह-2026 में पोषण जागरूकता और जनभागीदारी के प्रयासों में देश में तीसरा स्थान हासिल किया है। 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे तक प्रदेश में 1 करोड़ 9 लाख 66 हजार 805 गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज की गई हैं। इस उपलब्धि को और विशेष बनाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया के प्रभार वाले मंदसौर और नीमच जिलों ने राष्ट्रीय स्तर पर क्रमशः पहला और दूसरा स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश के सभी 55 जिलों की भागीदारी के साथ यह उपलब्धि पोषण को जनआंदोलन बनाने और आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, देखभाल तथा प्रारंभिक बाल विकास का सशक्त केंद्र बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करती है।

    देश के अग्रणी राज्यों में मध्यप्रदेश की उल्लेखनीय उपस्थिति
    राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे तक देश में कुल 11 करोड़ 91 लाख 64 हजार 823 गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज की गईं। इनमें बिहार 1 करोड़ 49 लाख 93 हजार 265 प्रविष्टियों के साथ पहले, महाराष्ट्र 1 करोड़ 38 लाख 66 हजार 923 के साथ दूसरे और मध्यप्रदेश 1 करोड़ 9 लाख 66 हजार 805 प्रविष्टियों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

    उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ 2 लाख 90 हजार 37, राजस्थान में 91 लाख 78 हजार 866, गुजरात में 84 लाख 23 हजार 561 और छत्तीसगढ़ में 71 लाख 93 हजार 724 प्रविष्टियां दर्ज की गईं। राष्ट्रीय स्तर पर 788 जिलों में से 785 जिलों की भागीदारी दर्ज की गई, जबकि मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों ने पोषण माह की गतिविधियों में सहभागिता की।

    मंदसौर और नीमच की उपलब्धि से प्रदेश को मिली विशेष पहचान
    प्रदेश के मंदसौर जिले ने राष्ट्रीय पोषण माह में पहला और नीमच जिले ने दूसरा स्थान हासिल किया है। दोनों जिले महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया के प्रभार वाले जिले हैं। राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष दो स्थानों पर इन जिलों की उपलब्धि प्रदेश में पोषण संबंधी गतिविधियों के व्यापक संचालन और जनभागीदारी को नई पहचान देती है।

    हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ है इस वर्ष की थीम
    भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत पोषण को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ 9 सितंबर 2026 को किया गया। इस वर्ष की मुख्य थीम ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण, देखभाल और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास से जुड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करना, समुदाय की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना तथा पोषण सेवाओं के प्रति सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही को प्रोत्साहित करना है।

    पांच प्रमुख विषयों पर केंद्रित हैं पोषण संबंधी गतिविधियां
    राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान 5 प्रमुख विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इनमें आहार में विविधता और पर्याप्त प्रोटीन की उपलब्धता, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं विविधतापूर्ण गर्म पका भोजन, सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही, बच्चों के पोषण के साथ प्रारंभिक विकास एवं सीखने के लिए प्रोत्साहन संबंधी गतिविधियां तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य के लिए सहायता शामिल हैं। इन विषयों के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित आहार, बेहतर पोषण व्यवहार, मातृ स्वास्थ्य और बच्चों के समग्र विकास के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है। इस अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों पर उपलब्ध सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के साथ समुदाय को पोषण संबंधी प्रयासों से जोड़ना भी है।

     

  • सात प्रमुख क्षेत्रों के 46 प्रदर्शन संकेतकों से होगा मूल्यांकन; गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थी हितों पर विशेष जोर

    सात प्रमुख क्षेत्रों के 46 प्रदर्शन संकेतकों से होगा मूल्यांकन; गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थी हितों पर विशेष जोर

    भोपाल
    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने विश्वविद्यालयों में रिक्त शैक्षणिक पदों पर भर्ती की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने तथा प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के अंतर्गत आवंटित राशि का निर्धारित समय-सीमा में उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री  परमार ने डिजिटल मूल्यांकन की कार्ययोजना पर प्राथमिकता से क्रियान्वयन करने को कहा। उन्होंने स्वीकृत विकास योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे शैक्षणिक व्यवस्था सुदृढ़ होगी और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

    मंत्री  परमार की उपस्थिति में मंगलवार को मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में उच्च शिक्षा विभाग और प्रदेश के 17 सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के बीच डिलीवरी पार्टनरशिप एग्रीमेंट (DPA) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल के माध्यम से विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक, प्रशासनिक, वित्तीय एवं संस्थागत प्रगति का आंकलन निर्धारित लक्ष्यों और सत्यापित उपलब्धियों के आधार पर किया जाएगा। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना तथा संस्थानों को निरंतर सुधार के लिए प्रोत्साहित करना है।

    कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, उप सचिव  लक्ष्मीकांत खरे सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलसचिव उपस्थित रहे।

    सात प्रमुख क्षेत्रों में 46 प्रदर्शन संकेतकों से होगा मूल्यांकन
    डिलीवरी पार्टनरशिप एग्रीमेंट के अंतर्गत विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन का मूल्यांकन सात प्रमुख क्षेत्रों में निर्धारित 46 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPIs) के आधार पर किया जाएगा। इनमें शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन, सुशासन एवं डिजिटल परिवर्तन, शोध एवं नवाचार, संस्थागत गुणवत्ता, वित्तीय प्रबंधन, रोजगारपरकता तथा विद्यार्थी कल्याण एवं सतत विकास शामिल हैं।

    शैक्षणिक गुणवत्ता के आंकलन में शैक्षणिक कैलेंडर का समयबद्ध पालन, परीक्षाओं के परिणाम समय पर घोषित करना, पाठ्यक्रमों का निर्धारित अवधि में संचालन और विद्यार्थियों की उत्तीर्णता में सुधार जैसे बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा। प्रशासनिक दक्षता के लिए समर्थ ईआरपी (SAMARTH ERP) का प्रभावी क्रियान्वयन, ऑनलाइन विद्यार्थी सेवाएं, ई-ऑफिस तथा शिकायतों का समयबद्ध निराकरण भी मूल्यांकन का हिस्सा होंगे।

    शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशनों, बाह्य शोध अनुदान, शोध परियोजनाओं, पेटेंट और प्राध्यापकों के प्रशिक्षण को प्रोत्साहित किया जाएगा। संस्थागत गुणवत्ता के अंतर्गत राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) से प्रत्यायन, राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग रूपरेखा (NIRF) में सहभागिता और शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से सुधार पर जोर रहेगा।

    वित्तीय प्रबंधन के तहत स्वीकृत अनुदान का नियमानुसार उपयोग, उपयोगिता प्रमाण-पत्रों की समय पर प्रस्तुति तथा लेखा एवं अंकेक्षण संबंधी अनुपालना का आकलन किया जाएगा। विद्यार्थियों की रोजगारपरकता बढ़ाने के लिए प्लेसमेंट, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, कौशल प्रमाणन, उद्योग सहभागिता, स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन गतिविधियों को महत्व दिया जाएगा। वहीं, छात्रवृत्ति कवरेज, वंचित वर्गों एवं छात्राओं की शैक्षणिक निरंतरता, शिकायत निवारण, समावेशी परिसर और हरित परिसर से जुड़ी गतिविधियां भी मूल्यांकन में शामिल होंगी।

    सत्यापित आंकड़ों के आधार पर तय होंगे लक्ष्य
    इस व्यवस्था में शैक्षणिक सत्र 2025-26 को आधार वर्ष बनाया गया है। विश्वविद्यालयों को इस अवधि के वास्तविक प्रदर्शन से संबंधित आंकड़े और उनके समर्थन में आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सत्यापन के बाद प्रत्येक विश्वविद्यालय की आधारभूत स्थिति निर्धारित की जाएगी।

    वर्ष 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लक्ष्यों की प्राप्ति का आकलन आधार वर्ष के सत्यापित आंकड़ों के सापेक्ष किया जाएगा। इससे विश्वविद्यालयों की प्रगति का निष्पक्ष एवं प्रमाण-आधारित मूल्यांकन संभव होगा। नियमित समीक्षा के दौरान निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति में कमी पाए जाने पर समयबद्ध सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर रहेगा।

    गुणवत्ता, जवाबदेही और विद्यार्थी हितों पर केंद्रित पहल
    डिलीवरी पार्टनरशिप एग्रीमेंट विश्वविद्यालयों को अपनी उपलब्धियों का आकलन करने, सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने और स्पष्ट कार्ययोजना बनाने में मदद करेगा। इसके साथ ही शैक्षणिक पदों की शीघ्र पूर्ति, पीएम-उषा की राशि का समयबद्ध उपयोग और स्वीकृत विकास कार्यों का समय पर क्रियान्वयन उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    प्रदर्शन आधारित इस व्यवस्था से विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक दक्षता और संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर सुविधाएं और रोजगारपरक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में संस्थागत प्रयासों को गति मिलेगी।

     

  • मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक संपन्न

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक संपन्न

    भोपाल
    फोटो निर्वाचक नामावली में छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने एवं मतदाता सूची को अद्यतन करने के संबंध में आज मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संजीव कुमार झा की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। आयोजित बैठक में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, इन्डियन नेशनल कांग्रेस, कम्युनिष्ट पार्टी आफ इण्डिया एवं बहुजन समाज पार्टी के प्रतिनिधि शामिल हुए।

    बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री झा ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से छूटे हुए नागरिकों एवं प्रथम बार/युवा पात्र मतदाताओं के नाम निर्वाचक नामावली में शामिल करने के लिए निरन्तर अद्यतन प्रक्रिया के तहत विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। उन्होंने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) के माध्यम से मतदाता सूची को अद्यतन करने के कार्य में सहयोग करने का आग्रह किया।

    फॉर्म-6 से होगा नए मतदाताओं का पंजीयन
    बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री झा ने बताया कि प्रथम बार पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने का कार्य अभियान चलाकर किया जा है। पात्र नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेज निर्धारित नियमों के अनुसार उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यह भी स्पष्ट किया गया कि फॉर्म-6 जमा करने के बाद अलग से घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन फॉर्म) प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है।

    प्रत्येक जिले में चलाया जा रहा विशेष अभियान
    बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री झा ने बताया कि नए एवं पंजीकरण से छूटे पात्र मतदाताओं की सुविधा के लिए प्रत्येक जिले में विशेष अभियान आयोजित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य पात्र नागरिकों को पंजीयन प्रक्रिया की जानकारी देकर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने हेतु आवेदन प्राप्त करना तथा आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में सहायता प्रदान करना है। इसके लिए तहसील स्तर पर एस.डी एम./तहसीलदार एवं जिला स्तर पर संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। बैठक में संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री आर.पी.एस. जादौन तथा उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी सर्वश्री संजय श्रीवास्तव, राजेश यादव एवं वीरेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे।

     

  • एमपी ट्रांसको की 132 केवी भोपाल–अमरावद खुर्द लाइन का क्षमता उन्नयन कार्य शुरू

    एमपी ट्रांसको की 132 केवी भोपाल–अमरावद खुर्द लाइन का क्षमता उन्नयन कार्य शुरू

    भोपाल
    ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) भोपाल शहर की बढ़ती विद्युत मांग के अनुरूप पारेषण व्यवस्था को सक्षम बनाने के लिए एचटीएलएस (हाई टेम्परेचर लो सैग) कंडक्टर तकनीक से ट्रांसमिशन लाइनों की क्षमता बढ़ा रही है।

    मध्यप्रदेश में पहली बार इसी तकनीक का उपयोग 400 केवी सबस्टेशन सुखी सेवनिया से 220 केवी सबस्टेशन गोविंदपुरा भोपाल तक की ट्रांसमिशन लाइन में किया गया था। इस लाइन में पारंपरिक जेबरा कंडक्टर को एचटीएलएस कंडक्टर से बदलने से भोपाल शहर की पारेषण व्यवस्था को लाभ मिला है। अब भोपाल से अमरावद खुर्द तक के महत्वपूर्ण पारेषण सर्किट की क्षमता उन्नयन का कार्य भी किया जा रहा है।

    नया कॉरिडोर बनाने से बेहतर विकल्प है एचटीएलएस तकनीक
    ऊर्जा मंत्री  तोमर ने कहा कि राजधानी भोपाल में विद्युत मांग बढ़ने के साथ मौजूदा पारेषण नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना आवश्यक है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नई ट्रांसमिशन लाइन के लिए कॉरिडोर विकसित करने और राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) प्राप्त करने में व्यावहारिक कठिनाइयां आती हैं। ऐसे में मौजूदा लाइन कॉरिडोर का उपयोग करते हुए एचटीएलएस तकनीक से पारेषण क्षमता बढ़ाना एक उपयोगी विकल्प है।

    भोपाल–अमरावद खुर्द सर्किट का होगा क्षमता उन्नयन
    एमपी ट्रांसको द्वारा 132 केवी डीसीडीएस भोपाल–अमरावद खुर्द लाइन के सर्किट में मौजूदा एसीएसआर पैंथर कंडक्टर को समतुल्य एचटीएलएस कंडक्टर से बदलने का कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही 132 केवी सबस्टेशन अमरावद खुर्द, 132 केवी सबस्टेशन मैनिट और 220 केवी सबस्टेशन भोपाल में संबंधित 132 केवी फीडर बे की क्षमता का भी उन्नयन किया जा रहा है। इससे लाइन और सबस्टेशन के संबंधित हिस्सों को बढ़ी हुई पारेषण क्षमता के अनुरूप सक्षम बनाने में मदद मिलेगी।

    अमरावद खुर्द और मैनिट की विद्युत आपूर्ति के प्रबंधन में भी लाभ
    भोपाल की पारेषण व्यवस्था में एचटीएलएस तकनीक के उपयोग से अमरावद खुर्द और मैनिट सब स्टेशन से संबंधित विद्युत आपूर्ति के प्रबंधन को भी लाभ मिलेगा।

    यह है एचटीएलएस का फायदा
    एचटीएलएस कंडक्टर उच्च तापमान पर भी अपेक्षाकृत कम सैग के साथ अधिक करंट वहन करने में सक्षम होते हैं। इससे मौजूदा ट्रांसमिशन कॉरिडोर का बेहतर उपयोग करते हुए पारेषण क्षमता बढ़ाई जा सकती है और नई लाइन के लिए अलग कॉरिडोर विकसित करने की आवश्यकता कम हो सकती है।

     

  • विगत दो सप्ताह में साइबर अपराधियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    विगत दो सप्ताह में साइबर अपराधियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    प्रदेश के विभिन्‍न जिलों में साइबर ठगी के मामलों का खुलासा
     अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े आरोपी गिरफ्तार
    ठगी की राशि होल्ड कराने से लेकर पीड़ितों को राशि वापस दिलाने तक पुलिस की प्रभावी कार्रवाई

    भोपाल
    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी बैंक खातों के दुरुपयोग, UPI फ्रॉड एवं ऑनलाइन निवेश के नाम पर की जाने वाली ठगी के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विगत दो सप्ताह में प्रदेश के विभिन्‍न जिलों में साइबर अपराध से जुड़े प्रकरणों में आरोपियों की गिरफ्तारी, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा, ठगी की राशि को होल्ड कराने तथा पीड़ितों को राशि वापस दिलाने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल फुटप्रिंट, बैंकिंग ट्रांजेक्शन एवं मनी ट्रेल का विश्लेषण करते हुए पुलिस टीमों ने अलग-अलग राज्यों तक पहुंच बनाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कई मामलों में बैंकिंग संस्थानों से तत्काल समन्वय कर ठगी की राशि को होल्ड/फ्रीज कराया गया, जिससे पीड़ितों को उनकी राशि वापस दिलाने की कार्रवाई संभव हो सकी।

    बैतूल- 1 करोड़ 93 लाख रूपए की ऑनलाइन धोखाधड़ी का आरोपी नागपुर से गिरफ्तार
    बैतूल बाजार पुलिस ने ऑनलाइन रोबोट्रेड एप्लीकेशन के माध्यम से हुई 1 करोड़ 93 लाख रूपए की धोखाधड़ी के मामले में एक आरोपी को नागपुर से गिरफ्तार किया।

    अनूपपुर- 91 लाख रूपए की साइबर ठगी में कानपुर से आरोपी गिरफ्तार, 14 लाख रूपए से अधिक की राशि पीड़ित को वापस
    थाना जैतहरी पुलिस ने 91 लाख की साइबर धोखाधड़ी के मामले में फरार आरोपी को कानपुर (उत्तरप्रदेश) से गिरफ्तार किया। आरोपी द्वारा व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में निवेश कर अच्छा रिटर्न दिलाने का झांसा देकर फरियादी से राशि ट्रांसफर कराई गई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 34 लाख की राशि होल्ड कराई है। जबकि 14 लाख रूपए से अधिक की राशि पीड़ित के बैंक खाते में वापस कराई जा चुकी है। शेष राशि वापस कराने की कार्यवाही जारी है। प्रकरण में पूर्व में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

    मंदसौर-14 लाख रूपए की ठगी, हरियाणा से अंतरराज्यीय आरोपी गिरफ्तार
    मंदसौर पुलिस ने व्हाट्सएप के माध्यम से ऑनलाइन निवेश एवं अधिक मुनाफे का झांसा देकर लगभग 14 लाख रूपए की साइबर ठगी करने वाले आरोपी को हरियाणा के सोनीपत से गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान ठगी की लगभग 10 लाख रूपए की राशि को बैंक खाते में होल्ड/फ्रीज कराया गया। आरोपी से मनी ट्रेल एवं नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों के संबंध में पूछताछ की जा रही है।

    शाजापुर – 2 लाख 60 हजार रूपए की साइबर ठगी का आरोपी गिरफ्तार
    पुलिस ने 2 लाख 60 हजार रूपए की साइबर ठगी के मामले का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच में ठगी की राशि ट्रांसफर कराने वाले नेटवर्क के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। प्रकरण से जुड़े अन्य तथ्यों एवं संभावित आरोपियों की जांच जारी है।

    कटनी- 1 लाख 88 हजार रूपए की UPI ठगी, अंतरराज्यीय गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार
    कटनी पुलिस ने 1 लाख 88 हजार रूपए की UPI साइबर ठगी के मामले में अंतरराज्यीय गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया।

    ग्वालियर- अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश
    ग्वालियर साइबर क्राइम विंग ने ऑनलाइन फ्रॉड के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई में 01 लैपटॉप, 02 टैबलेट, 19 मोबाइल फोन, 17 एटीएम कार्ड, 04 पासबुक, 09 चेकबुक एवं 38 सिम कार्ड जब्‍त किए हैं। जांच में साइबर फ्रॉड नेटवर्क के दुबई, कंबोडिया एवं श्रीलंका से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों एवं साइबर अपराधों में उनकी भूमिका की जांच जारी है। एक अन्य कार्रवाई में डेटिंग ऐप के माध्यम से ब्लैकमेलिंग एवं अवैध वसूली करने वाले 02 आरोपियों को क्राइम ब्रांच ग्वालियर ने मुरैना से गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने होटल में बंधक बनाकर मारपीट कर तथा आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने की धमकी देकर 1 लाख 38 हजार की वसूली की थी।

    अशोकनगर- फर्जी दस्तावेजों से बैंक खाता खुलवाकर अवैध लेन-देन करने वाला आरोपी गिरफ्तार
    अशोकनगर पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाता खुलवाकर उसे अवैध लेन-देन में उपयोग करने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच में उक्त खाते से लाखों रुपये के लेन-देन की जानकारी सामने आई है। पुलिस द्वारा बैंक खाते के उपयोग, लेन-देन एवं उससे जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है।

    गुना-12 पीड़ितों की 1 लाख 77 हजार रूपए से अधिक की राशि वापस
    पुलिस ने साइबर ठगी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए NCRP पोर्टल की MRM प्रक्रिया के माध्यम से संबंधित बैंक खातों पर तत्काल होल्ड लगवाया। बैंकिंग संस्थानों के साथ समन्वय कर निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद पुलिस ने 12 पीड़ितों से ठगी गई 1 लाख 77 हजार 402 रूपए की राशि को वापस कराया।

    देवास- 14 साइबर फ्रॉड मामलों में 80 हजार रूपए की राशि वापस
    देवास पुलिस द्वारा साइबर फ्रॉड से संबंधित 14 मामलों में 80 हजार रूपए की राशि पीड़ितों के खातों में वापस कराई गई। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों के विरुद्ध कार्रवाई में तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण, डिजिटल ट्रांजेक्शन की निगरानी, मनी ट्रेल की जांच, फर्जी बैंक खातों की पहचान, बैंकिंग संस्थानों से त्वरित समन्वय तथा NCRP/MRM प्रक्रिया का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि ऑनलाइन निवेश, अधिक मुनाफे, नौकरी, ट्रेडिंग अथवा अन्य किसी लालच में आकर अनजान व्यक्तियों को राशि ट्रांसफर न करें।

  • मंत्रि-परिषद सदस्यों के साथ बीएमएस के पदाधिकारियों की होगी बैठक

    मंत्रि-परिषद सदस्यों के साथ बीएमएस के पदाधिकारियों की होगी बैठक

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और श्रमिक कर्मचारियों की समस्याओं को तत्परता से हल किया जाएगा। इस संबंध में चर्चा, विमर्श और आवश्यक निर्णय के लिए राज्य सरकार के द्वार खुले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, मुख्यमंत्री निवास में भेंट करने आए भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के प्रतिनिधि मंडल से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि आगामी 15 अक्टूबर को भारतीय मजदूर संघ के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल द्वारा विभिन्न सुझावों और मांगों के संबंध में संबंधित विभाग के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक भी आयोजित की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीएमएस ने श्रमिकों के हित में सदैव रचनात्मक भूमिका का निर्वहन किया है। राज्य सरकार सकारात्मक दृष्टिकोण से श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए सजग और सक्रिय है। चर्चा में अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, प्रदेश अध्यक्ष  संजय सिंह,  रामनाथ गणेशे,  अरविन्द मिश्रा,  सी.बी. राजेश,  कुलदीप गुर्जर,  आशीष सिंह और वित्त सचिव श्रीमती मेघा दुबे शामिल थीं।

     

  • बफर जोन पर्यटन से स्थानीय समुदायों को मिल रहे रोजगार और आजीविका के अवसर

    बफर जोन पर्यटन से स्थानीय समुदायों को मिल रहे रोजगार और आजीविका के अवसर

    भोपाल
    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीव पर्यटन को लेकर पर्यटकों का उत्साह लगातार बना हुआ है। यहां कोर जोन के साथ बफर जोन पर्यटन भी जोर पकड़ रहा है। मानसून के दौरान कोर जोन में सफारी बंद रहने की वजह से बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों का चलन शुरू किया गया। यह प्रयोग इतना उत्साहवर्धक रहा कि पर्यटन सत्र 2026-27 के शुरुआती 100 दिनों में परासी और पचपेड़ी बफर जोन में वन्यजीवों को नजदीक से रूबरू देखने इस साल 1 जुलाई से 8 अक्टूबर तक 802 वाहनों से कुल 3,780 पर्यटक आये। इनमें 3,758 भारतीय और 22 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। मानसून के दौरान शुरू हुआ ये सिलसिला अब तक जारी है।

    परासी बफर जोन में 550 वाहनों से 2,588 पर्यटक पहुंचे, जबकि पचपेड़ी बफर जोन में 252 वाहनों से 1,192 पर्यटकों ने जंगल सफारी की। दोनों पर्यटन गेट्स पर पर्यटकों की अच्छी उपस्थिति रही। आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई में 243 वाहनों से 1,109, अगस्त में 265 वाहनों से 1,247 और सितंबर में 168 वाहनों से 780 पर्यटकों ने बफर जोन का भ्रमण किया। वहीं, एक से आठ अक्टूबर तक 126 वाहनों से 644 पर्यटक जंगल सफारी के लिए पहुंचे। इस अवधि में अगस्त माह में सर्वाधिक पर्यटक आए।

    प्राकृतिक परिवेश में वन्यप्राणियों को देखने का अवसर
    बांधवगढ़ के बफर जोन में पर्यटकों को बाघ सहित अन्य वन्यप्राणियों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखने का अवसर मिल रहा है। जंगल की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता पर्यटकों के आकर्षण को बढ़ा रही है। यहां मानव और वन्यप्राणियों के सह-अस्तित्व की झलक भी देखने को मिलती है, जिससे पर्यटक प्रकृति को करीब से जानने और समझने का अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। देशी और विदेशी पर्यटक यहां पहुंचकर वन्यप्राणियों के दीदार के साथ जंगल की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले रहे हैं।

    पर्यटन से स्थानीय आजीविका को मिल रहा बढ़ावा
    परासी और पचपेड़ी बफर जोन में पर्यटकों को बाघ सहित अन्य वन्यप्राणियों के नियमित दीदार हो रहे हैं, जिससे उनका उत्साह बना हुआ है। बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के संचालन से स्थानीय समुदायों को रोजगार और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। साथ ही, इन गतिविधियों से वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिल रही है। अक्टूबर से कोर जोन में पर्यटन शुरू होने के बाद भी बफर जोन में जंगल सफारी के प्रति पर्यटकों का उत्साह बरकरार है।