Category: मध्य प्रदेश

  • भारत की 4 ऐतिहासिक धरोहरों की अनोखी कहानी, पत्थरों में छिपे रहस्य जानकर चौंक जाएंगे

    भारत की 4 ऐतिहासिक धरोहरों की अनोखी कहानी, पत्थरों में छिपे रहस्य जानकर चौंक जाएंगे

    भोपाल
     मध्यप्रदेश की सदियों पुरानी विरासत अब दुनिया के सामने अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। UNESCO की आधिकारिक Tentative List में प्रदेश के चार नए ऐतिहासिक स्थल शामिल किए गए हैं। इनमें बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिरों का समूह और उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं।

    इन चारों स्थलों को UNESCO की सूची में 8 जुलाई 2026 को जोड़ा गया। यह अंतिम विश्व धरोहर सूची नहीं है, बल्कि आगे World Heritage Site के संभावित नामांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण है।

    क्यों खास हैं ये चार विरासत स्थल?
    गिन्नौरगढ़ किला सीहोर जिले की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वहीं बाघ गुफाएं अपनी प्राचीन बौद्ध गुफाओं और भित्तिचित्रों के लिए जानी जाती हैं। UNESCO के अनुसार बाघ की गुफाओं में संरक्षित चित्र प्राचीन बौद्ध म्यूरल परंपरा के महत्वपूर्ण उदाहरणों में शामिल हैं।

    चंबल घाटी के मंदिर समूह में बेटेश्वर, पदावली और ककनमठ जैसे ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं। वहीं विदिशा की उदयगिरि गुफाएं भी मध्यप्रदेश की प्राचीन धार्मिक और स्थापत्य विरासत को सामने रखती हैं। UNESCO की सूची में इन सभी को अलग-अलग प्रस्तावों के रूप में दर्ज किया गया है।

    पर्यटन और स्थानीय रोजगार की उम्मीद
    UNESCO की Tentative List में शामिल होना इन स्थलों की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ाने की दिशा में एक कदम है। इससे भविष्य में इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प, होम-स्टे, परिवहन और अन्य पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना बन सकती है। हालांकि वास्तविक प्रभाव संरक्षण, पर्यटन सुविधाओं और आगे की UNESCO प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    विरासत संरक्षण पर भी बढ़ेगा फोकस
    चारों स्थलों को वैश्विक विरासत की संभावित सूची में जगह मिलने के बाद इनके संरक्षण और प्रस्तुतीकरण पर भी ध्यान बढ़ने की उम्मीद है। मध्यप्रदेश में पहले से कई ऐतिहासिक स्थल UNESCO की Tentative List में हैं और नए चार नाम जुड़ने से प्रदेश की विरासत सूची और विस्तृत हुई है। अब मध्यप्रदेश की इन चार धरोहरों की कहानी सिर्फ प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इन्हें विश्व धरोहर की दौड़ में आगे बढ़ाने का अगला चरण शुरू होगा।

  • बालाघाट में 400 करोड़ के कामों का प्रस्ताव, स्वास्थ्य के साथ सड़क और पानी पर भी सरकार का फोकस

    बालाघाट में 400 करोड़ के कामों का प्रस्ताव, स्वास्थ्य के साथ सड़क और पानी पर भी सरकार का फोकस

    बालाघाट 
     केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने राज्य शासन बालाघाट में विकास कार्यों का लेखा जोखा पेश करेगी. इसके लिए राज्य सरकार ने बालाघाट में सड़क, स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 400 करोड़ से अधिक की योजना तैयार की है. इस विकास योजना का खाका आज केन्द्रीय गृहमंत्री के सामने रखा जाएगा। 

    बालाघाट क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के साथ ही पेयजल, सड़क बिजली आदि की व्यवस्था बेहतर करने जा रही है. इसके लिए राज्य सरकार अगले एक साल में करीबन 400 करोड़ रुपए की राशि खर्च करेगी.हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी बालाघाट पहुंचे थे और उन्होंने आदिवासी जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को लेकर सवाल खड़े किए थे। 

    बालाघाट के 5 ब्लॉक में होंगे 1500 काम
    आदिवासी जिले बालाघाट में सड़क, स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं बेहतर करने के लिए राज्य शासन ने करीबन 400 करोड़ रुपए की राशि से कई काम कराने का निर्णय किया है. इसके लिए मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने तमाम कामों को स्वीकृति दे दी है. इस पूरे प्लान को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने राज्य शासन द्वारा रखा जाएगा। 

    इसके तहत राज्य शासन बालाघाट जिले के परसवाड़ा, बैहर, लांजी, बिरसा और किरनापुर में करीबन 1500 कामों को किया जाएगा. वहीं, विभिन्न विभागों द्वारा किए जाने वाले इन कामों के लिए जनजतीय विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा सभी विभागों के बीच समन्वय का काम करेंगे। 

    सड़कों के निर्माण पर खर्च होंगे 269 करोड़ रुपये
    योजना के तहत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से सबसे अधिक राशि खर्च की जाएगी। पांचों विकासखंडों में 151 सड़क और सीसी रोड के निर्माण पर 268.94 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा 69 पुलिया और कल्वर्ट के निर्माण के लिए 34.02 करोड़ रुपये तथा 60 स्टॉप डैम के लिए 35.97 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    20 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों का होगा निर्माण
    आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 20 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए जाएंगे। इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपस्वास्थ्य केंद्रों के भवन भी तैयार किए जाएंगे। स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सोलर पैनल लगाने की भी योजना है।

    बच्चों की मौत वाले गांवों पर विशेष ध्यान
    जिले के डोंगरगांव, बोंदारी, कोंडेकसा, मछरदा, मातला और कोरका जैसे बैगा-गोंड बहुल गांवों में कुपोषण और बीमारी से बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे। अब इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    पेयजल व्यवस्था भी होगी मजबूत
    पांचों विकासखंडों में पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) को दी गई है। किरनापुर और लांजी में नल-जल योजना का काम पूरा हो चुका है। वहीं, जिन गांवों में नल-जल योजना के निर्धारित मापदंड पूरे नहीं होते, वहां पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।

    बालाघाट में क्या-क्या काम होंगे?
    राज्य शासन बालाघाट में 400 करोड़ के विकास कार्यों को 13 विभागों के साथ मिलकर पूरा करेगी. इसके तहत 151 सड़कें बनाई जाएंगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सके. इस पर 268 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी. जिले के सभी ब्लॉक में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए 20 से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य केन्द्र खोले जाएंगे. इसके अलावा सामुदायिक और स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन बनाए जाएंगे. इनके निर्माण पर 3.11 करोड़ की राशि खर्च होगी। 

    देर रात 12 बजे भोपाल पहुंचे अमित शाह, मध्य प्रदेश गौपालक सम्मेलन में होंगे शामिल
    इसके अलावा अनाज वितरण की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए राशन दुकान और गोदाम का निर्माण किया जाएगा. इस पर 6.87 करोड की राशि खर्च होगी. बालाघाट में पेयजल की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पांच ब्लॉक में नल जल योजना के कामों को तेजी से पूरा कराया जाएगा. जिन स्थालों पर पानी की व्यवस्था नहीं है, वहां दूसरे विकल्पों से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। 

     

  • MP में फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच तेज, STF के हत्थे चढ़ा संदिग्ध; 76 पासपोर्ट की जानकारी सामने आई

    MP में फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच तेज, STF के हत्थे चढ़ा संदिग्ध; 76 पासपोर्ट की जानकारी सामने आई

    भोपाल 

    बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनाने वाले नेटवर्क की पड़ताल में लगी स्पेशल टास्क फोर्स की टीम को अहम सफलता मिली है। एसटीएफ ने इस मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने के आधार पर रायसेन जिले से पचास वर्षीय संदिग्ध राहुल प्रकाश उर्फ नृत्या भंते को पकड़ा है। एसटीएफ की टीम उससे पूछताछ कर फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क के संबंधों का पता लगा रही है।

    फर्जी दस्तावेज से पासपोर्ट
    पकड़ा गया संदिग्ध राहुल प्रकाश मूल रूप से भिंड जिले का रहने वाला है। पहले वह बहुजन संघर्ष दल (बसद) का प्रदेश महासचिव भी रह चुका है। लगभग तीन साल पहले राहुल ने अपनी पहचान पूरी तरह बदल ली थी और नृत्या भंते के नाम से मठों में रहना शुरू कर दिया था। पहचान छिपाने के बाद उसने भोपाल के अशोक बुद्ध विहार के पते का उपयोग किया और फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। इन फर्जी दस्तावेज का सहारा लेकर उसने वर्ष 2025 में पासपोर्ट बनवा लिया। इसी पासपोर्ट के माध्यम से उसने थाईलैंड और म्यांमार की यात्राएं भी की थीं। 

    लगातार बदल रहा था ठिकाने
    एसटीएफ की टीम को सूचना मिली थी कि संदेही राहुल प्रकाश कई दिनों से अपना ठिकाना बदल-बदलकर रायसेन क्षेत्र में छिपा हुआ है। सूचना की पुष्टि होने के बाद टीम ने उसे पकड़ा। जांच एजेंसी अब उसके सभी दस्तावेज, बैंक खातों और पासपोर्ट में दर्ज विदेश यात्राओं के विवरण की जानकारी जुटाने का काम कर रही है। एसटीएफ यह भी पता लगा रही है कि वह किन-किन लोगों के लगातार संपर्क में बना हुआ था और उसने भंते का रूप धारण क्यों किया था। हालांकि एसटीएफ की ओर से अभी उसकी गिरफ्तारी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    सात जिलों में फैला नेटवर्क
    बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारती
    य पासपोर्ट तैयार कराने के इस नेटवर्क की पड़ताल में एसटीएफ के सामने अब तक प्रदेश के सात जिलों में 76 फर्जी पासपोर्ट बनने की जानकारी आ चुकी है। जांच में खुलासा हुआ है कि राज्य में सबसे अधिक 40 फर्जी पासपोर्ट भोपाल के पते पर बनाए गए हैं। इसके अलावा डबरा क्षेत्र से 17 और बैतूल जिले से 11 फर्जी पासपोर्ट बनाए गए हैं। एसटीएफ की टीम फर्जीवाड़े के इस नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों की जांच में लगी हुई है।

  • संत प्रेमानंद महाराज की शिष्या रसिक दुलारी की PM रिपोर्ट से सामने आई चोटों की जानकारी

    संत प्रेमानंद महाराज की शिष्या रसिक दुलारी की PM रिपोर्ट से सामने आई चोटों की जानकारी

    जबलपुर
    संत प्रेमानंद के दीक्षित शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध मौत के सात दिन बाद वृंदावन पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।25 सितंबर को संत प्रेमानंद के वृंदावन स्थित श्रीराधा केलिकुंज आश्रम के पास बने गुरुकृपा कुंज अपार्टमेंट में ही रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी ने चौथी मंजिल से छलांग लगा दी थी।

    गंभीर चोटें मौत का कारण
    कूदने के पहले उन्होंने टाइल्स काटने वाली ग्राइंडर से अपना प्राइवेट पार्ट काट लिया था। करीब 40 मिनट चले पोस्टमार्टम में मौत का प्रमुख कारण ऊंचाई से गिरने के बाद हुई गंभीर चोटें सामने आई हैं।

    रिपोर्ट में सिर में फ्रैक्चर और रक्त का थक्का जमने के साथ छाती की चार पसलियां टूटकर फेफड़े में धंसने की बात सामने आई है।

    सीओ वृंदावन संदीप सिंह ने बताया कि चिकित्सकों ने रक्तस्राव रोकने के लिए उपचार किया था।

    परसवाड़ा में मातम, परिवार को अब भी कई सवाल
    संत प्रेमानंद के दीक्षित शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी गौर के पास परसवाड़ा से हैं, जहां दीपक का बचपन बीता। आईटीबीपी मार्ग पर अंदर बसा परसवाड़ा इन दिनों उनके परिवार के दुख का साक्षी बना हुआ है।

    दीपक के नाना प्रेमलाल पटेल के घर के बाहर सन्नाटा पसरा है। यहीं दीपक का परिवार रहता है। उनकी मां लोंग बाई बेटे की बचपन की तस्वीर सीने से लगाकर बैठी हैं।

    परिवार की निष्पक्ष जांच की मांग
    पिता चेतराम लोधी भी बेटे की मौत को लेकर सदमे में हैं। परिवार का कहना है कि वे किसी को दोषी नहीं ठहरा रहे, लेकिन घटना की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। उनका सवाल है कि आखिर उस दिन ऐसा क्या हुआ, जिसके बाद दीपक ने यह कदम उठाया।

    दीपक और उसका परिवार मूल रूप से बरगी डूब क्षेत्र के कठौतिया गांव का रहने वाला था। पिता के काम की तलाश में जबलपुर आने के बाद परिवार परसवाड़ा में नाना के घर रहने लगा। दीपक ने कठौतिया में आठवीं तक पढ़ाई की, बाद में गौर से स्कूली शिक्षा और बरेला से कॉलेज की पढ़ाई की। वर्ष 2023 में वह पहली बार वृंदावन गया।

     

  • युवाओं को मिला नया मंत्र: खुद बनें अपने जामवंत, ‘Gen B’ से विकसित भारत का संकल्प

    युवाओं को मिला नया मंत्र: खुद बनें अपने जामवंत, ‘Gen B’ से विकसित भारत का संकल्प

    स्वयं के जामवंत खुद बनें युवा – कुलगुरु डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत 

    'भारतीय युवा ‘जेन ज़ेड’ नहीं बल्कि ‘जेन बी’ (जनरेशन फॉर विकसित भारत) हैं' : डॉ. शिवेश प्रताप सिंह
    युवाओं को मिला नया मंत्र: खुद बनें अपने जामवंत, ‘Gen B’ से विकसित भारत का संकल्प

    ग्वालियर

    जीवाजी विश्वविद्यालय में आयोजित विश्वविद्यालय स्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) नेतृत्व एवं प्रशिक्षण शिविर के षष्ठम दिवस पर स्वयंसेवकों को युवाओं की भूमिका, भारतीय सभ्यता, मानवीय मूल्यों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सामाजिक प्रभावों पर केंद्रित बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। षष्ठम दिवस की शुरुआत प्रभात फेरी, योग-पीटी तथा परिसर में स्वच्छता अभियान से हुई तथा बौद्धिक सत्र कि शुरुवात माँ सरस्वती देवी और प्रेरणा पुरुष स्वामी विवेकानंद जी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित के साथ हुई। तत्पश्चात कार्यक्रम समन्वयक डॉ हरिशंकर सिंह कंसाना जी द्वारा प्रतिवेदन वाचन किया गया।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय कुलगुरु माननीय डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत जी ने रामायण के प्रसंग का स्मरण कराते हुए कहा कि जिस प्रकार जाम्बवंत जी ने हनुमान जी को उनकी शक्ति का बोध कराया था, उसी प्रकार आज के युवाओं को भी अपनी क्षमताओं को पहचानकर स्वयं का जाम्बवंत बनना होगा। उन्होंने कहा कि एनएसएस युवाओं को ‘मैं नहीं, हम’ की भावना से सेवा और राष्ट्रहित के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है।
    कुलगुरु ने ‘विकसित’ शब्द की प्रेरक व्याख्या करते हुए विमर्श, कर्तव्यपरायणता, सिद्धि और तरंग को विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

    मुख्य वक्ता डॉ. शिवेश प्रताप सिंह, सीनियर रिसर्च फेलो, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन, नई दिल्ली ने कहा कि भारतीय युवा केवल ‘Gen Z’ नहीं, बल्कि ‘Gen B – Generation for Viksit Bharat’ हैं। उन्होंने AI के बढ़ते प्रभाव के बीच मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत की नींव तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानवीय संवेदना, सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए।
    उन्होंने युवाओं से विभाजनकारी प्रवृत्तियों से दूर रहकर एकजुट समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

    माननीय कुलगुरु डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत जी और डॉ. शिवेश प्रताप सिंह जी के हाथों से सभी स्वयंसेवकों, जिला संगठकों, कार्यक्रम अधिकारियों, और कार्यक्रम समन्वयक जी को मेडल पहनाकर सम्मानित किया।अंत में शिविर संचालक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरिशंकर सिंह कंसाना ने स्मृति चिह्न भेंट किया। शिविर संचालक एवं राष्ट्रीय सेवा योजना, जीवाजी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरिशंकर सिंह कंसाना के निर्देशन में आयोजित बौद्धिक सत्र का मंच संचालन प्रो. मुदिता मिश्रा ने किया।

    कार्यक्रम के दौरान डॉ. संजय कुमार पांडे, प्रो. हिंदू सिंह धाकड़, डॉ. नरेंद्र कुमार वर्मा, डॉ अर्चना सेन, प्रो. विनोद सिंह कुशवाह, डॉ. गिरजा नरवरिया, प्रो. दीक्षा त्यागी एवं प्रो. एच एल. पटेल उपस्थित रहें।कार्यक्रम के अंत में प्रो. डॉ. मनोज अवस्थी ने अतिथियों एवं सभी सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

  • MP में पटवारियों को सरकार की दो टूक, काम से इनकार किया तो सामूहिक बर्खास्तगी की चेतावनी

    MP में पटवारियों को सरकार की दो टूक, काम से इनकार किया तो सामूहिक बर्खास्तगी की चेतावनी

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश के 50 लाख आवासीय भूखंडों की नि:शुल्क रजिस्ट्री को लेकर शासन-पटवारियों में विवाद गहरा गया है। स्वामित्व अभियान के 17 दिन बाद भी पटवारी रजिस्ट्री में विक्रेता बनने को तैयार नहीं हैं। इधर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कलेक्टरों को इनकार करने वालों को बर्खास्त करने के लिए फ्री हैंड दे दिया। अब पटवारी संघ ने भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि पटवारियों को बर्खास्त किया गया तो वे सामान्य कामकाज भी बंद कर देंगे।

    वहीं, जमीनी मामलों के विशेषज्ञ व पूर्व अधिकारी ओपी भट्ट ने पूरे अभियान की उपयोगिता पर ही सवाल उठाए हैं। कहा, बैंकों से कर्ज लेने के लिए आवासीय भूखंड की रजिस्ट्री अनिवार्य नहीं है। इसके लिए जमीन से संबंधित दस्तावेज पर्याप्त होते हैं, जो स्वामित्व योजना में दिए जा चुके हैं। कोई बैंक इन दस्तावेजों पर कर्ज नहीं देता तो शासन को बैंकों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए थे।

    विवादों में इसलिए नि:शुल्क रजिस्ट्री

    68 लाख में से 50 लाख दस्तावेजों की रजिस्ट्री करने का लक्ष्य तय है। 17 अक्टूबर तक यह लक्ष्य पूरा करना है, इसलिए रजिस्ट्री के अधिकार तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पंचायत समन्वयक व अन्य को दिए गए। इस प्रक्रिया में पटवारियों को उक्त भूखंडों का विक्रेता बनाया गया, क्योंकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया क्रेता व विक्रेता के बीच संपन्न होती है।

    पटवारियों ने कहा-
    अक्सर जमीनी मामलों में पारिवारिक या अन्य विवाद सामने आते हैं। 50 लाख प्रकरणों में ऐसे विवाद आना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में पीडि़त पक्ष पटवारी को भी विक्रेता के रूप में पक्षकार बना सकता है, जिससे वे अनावश्यक न्यायालयीन मामलों में उलझेंगे।

    सरकार का दावा-
    बैंकों से कर्ज लेने में होगी आसानी सरकार का दावा है कि रजिस्ट्री होने से संबंधित हितग्राहियों को बैंकों से कर्ज लेने में आसानी होगी और उन्हें अन्य लाभ भी मिलेंगे। जिन दस्तावेजों की नि:शुल्क रजिस्ट्री की जा रही है, वे दस्तावेज स्वामित्व योजना के तहत 2021 से अब तक 68 लाख लोगों को दिए जा चुके हैं। इनमें नक्शा, खसरा, खतौनी और बही की प्रति शामिल है।

    जमीनी मामलों के जानकारों के अनुसार
    जब शासन किसी व्यक्ति को जमीन के ये दस्तावेज उपलब्ध कराकर उसका मालिकाना हक दे चुका है तो अलग से रजिस्ट्री की जरूरत नहीं रह जाती।

    5 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट भी बेकार
    नि:शुल्क रजिस्ट्री शुरू करने से पहले राजस्व विभाग ने आगर मालवा, हरदा, बड़वानी, अशोकनगर और रायसेन में पायलट प्रोजेक्ट चलाया था। इसी दौरान पटवारियों की आपत्तियां सामने आ गई थीं। इसके बावजूद अधिकारियों ने इनको गंभीरता से नहीं लिया। सूत्र बताते हैं, पायलट प्रोजेक्ट में कलेक्टरों से मिले फीडबैक को भी उपेक्षित करते हुए प्रदेशभर में अभियान शुरू कर दिया गया।

    मप्र पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बघेल ने बताया कि स्वामित्व योजना के सभी कामों से पटवारी संघ अलग रहेगा। रजिस्ट्री भी नहीं करेंगे। बीते दिनों संघ की बैठक में इसका निर्णय लिया गया है। योजना से संबंधित कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्य आगामी निर्देश तक नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाएंगे।

    विशेषज्ञों ने अभियान पर उठाए ये सवाल
        जब स्वामित्व योजना के तहत संबंधित हितग्राही के नाम पर भूखंड के जमीनी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए थे तो रजिस्ट्री की जरूरत क्यों थी?
        यदि ऐसे भूखंडों पर लोन लेने के लिए कोई बैंक रजिस्ट्री की प्रति मांग रहे थे या लोन देने से इंकार कर रहे थे तो शासन से सार्वजनिक आदेश जारी क्यों नहीं कराया गया?
        जब भी रजिस्ट्री होती है तो शासन को राजस्व मिलता है। नि:शुल्क रजिस्ट्री में करीब 4000 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा। ऐसी स्थिति के बावजूद शासन को घाटे में डालने वाला अभियान क्यों बनाया गया?
        अभियान डिजाइन करने से पहले जमीनी वास्तविकताओं की पड़ताल क्यों नहीं की गई?

  • अमित शाह के दौरे से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, कांग्रेस के संभावित विरोध को लेकर पुलिस सतर्क

    अमित शाह के दौरे से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, कांग्रेस के संभावित विरोध को लेकर पुलिस सतर्क

    भोपाल 

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज भोपाल में हैं। वे 3 अक्टूबर को अनेक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मध्यप्रदेश में नक्सलमुक्ति के बाद केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का यह पहला मप्र दौरा है। वे उच्च स्तरीय बैठकों के साथ अन्य आयोजनों में हिस्सा लेंगे। अमित शाह आज भौरी स्थित आइसर में 500 करोड़ की लागत वाले अत्रि कैंपस की आधारशिला रखेंगे। वे गोपालक सम्मेलन में संबोधन देंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भोपाल दौरे के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। उनके कार्यक्रमों पर विरोध प्रदर्शनों का खतरा मंडरा रहा है। इसे देखते हुए पुलिस कांग्रेस नेताओं की हरेक गतिविधियों पर नजर रख रही है। एक कांग्रेस नेता को उनके कार्यालय में ही हिरासत में भी लिया गया है।

    शुक्रवार रात 12.15 बजे भोपाल पहुंचे
    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार रात 12.15 बजे भोपाल पहुंचे। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह रात्रि में भारतीय वायुसेना के विमान से भोपाल आए। सीएम मोहन यादव और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विमानतल पर उनका स्वागत किया। अमित शाह आज शनिवार को भेल दशहरा मैदान में राज्यस्तरीय गोपालक सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इसमें 35 हजार से अधिक गोपालक व सहकारी दुग्ध उत्पादक समितियों के सदस्य शामिल होंगे। वे नए आपराधिक कानूनों के पालन में मप्र की नब्ज भी टटोलेंगे।

    भौरी के आइसर में अत्रि कैंपस की रखेंगे आधारशिला
    अमित शाह आज भौरी के आइसर में अत्रि कैंपस की आधारशिला रखेंगे। 52 एकड़ में 'अत्रि' रिसर्च एवं इनोवेशन कैंपस बनेगा। यहां एआई-रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, मेडिकल डिवाइस, ड्रोन, एडवांस्ड मैटेरियल्स, क्लाइमेट साइंस और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में रिसर्च होंगे। 500 करोड़ की लागत होगी।

    कांग्रेस नेता को उनके कार्यालय में ही हिरासत में लिया
    उधर, केंद्रीय गृह मंत्री के कार्यक्रम में विरोध प्रदर्शन की आशंका के चलते पुलिस ने कार्रवाई भी शुरू की है। भोपाल भर में सभी वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं पर गहरी नजर रखी जा रही है। नरेला में कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला को आफिस में नजरबंद किया गया है।

    गृहमंत्री अमित शाह का भोपाल दौरा

    शुक्रवार रात भोपाल आए गृहमंत्री अमित शाह
    अनेक कार्यक्रमों में करेंगे शिरकत
    केंद्रीय गृहमंत्री के भोपाल दौरे पर पुलिस सतर्क
    कांग्रेस नेता को किया नजरबंद
    शहर में आज कई कार्यक्रम
    500 करोड़ के अत्रि कैंपस का शिलान्यास करेंगे गृहमंत्री
    नक्सलमुक्ति के बाद शाह पहली बार मप्र पहुंचे
    अब नशा मुक्ति का लक्ष्य

  • अमित शाह का देर रात भोपाल आगमन, स्टेट हैंगर पर CM और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहे मौजूद

    अमित शाह का देर रात भोपाल आगमन, स्टेट हैंगर पर CM और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहे मौजूद

    भोपाल 

    .केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार रात 12 बजे भोपाल पहुंचे। स्टेट हैंगर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, डीजीपी कैलाश मकवाना, भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार और भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने उनका स्वागत किया।

    दिल्ली में व्यस्तता के चलते शाह करीब ढाई घंटे की देरी से भोपाल के लिए रवाना हुए। इसके चलते मंत्रियों और विधायकों को स्टेट हैंगर से वापस घर भेज दिया गया था।

    गोपालक सम्मेलन में 35 हजार लोग शामिल होंगे
    भोपाल में आयोजित गोपालक सम्मेलन में 35 हजार से अधिक गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्य शामिल होंगे। इसमें भोपाल के अलावा सीहोर, बैतूल, राजगढ़, हरदा, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, विदिशा, रायसेन और नर्मदापुरम सहित कई जिलों से प्रतिभागियों के पहुंचने की जानकारी है।

    सम्मेलन में अमित शाह को प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष के तहत किए गए कार्यों और बलराम कृषि महोत्सव की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए गृह, पशुपालन एवं डेयरी, सहकारिता, लोक निर्माण और परिवहन विभाग अपने-अपने कार्यों और योजनाओं का प्रस्तुतीकरण करेंगे।

    पशुपालकों को बोनस, गौशालाओं को मदद
    कार्यक्रम में शाह भोपाल और इंदौर दुग्ध संघों से जुड़े पशुपालकों को बोनस वितरित करेंगे। गौशालाओं को आर्थिक सहायता दी जाएगी। गोपालक दीदियों का सम्मान होगा और डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र भी वितरित किए जाएंगे।

    डेयरी क्षेत्र में भी कई घोषणाएं
    दौरे के दौरान प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और डेयरी प्रसंस्करण से जुड़ी परियोजनाओं की सौगात भी प्रस्तावित है। इनमें उज्जैन में 255 करोड़ रुपए का डेयरी प्लांट और भोपाल में फॉर्म्युलेटेड/फर्मेंटेड मिल्क प्रोडक्ट से जुड़ी सुविधा शामिल है।

    भोपाल दुग्ध संघ परिसर में तैयार फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट पर 16.80 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इससे दही, छाछ, लस्सी, श्रीखंड और मावा जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने की योजना है।

    किसान फोकस क्यों?
    मध्यप्रदेश विधानसभा में 2026 में दिए गए सरकारी जवाब के अनुसार 30 जून 2026 तक प्रदेश में 1,11,88,295 किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी थी। सरकार ने विधानसभा में कहा कि जिलावार फार्मर आईडी की जानकारी परिशिष्ट में दी गई है और शेष किसानों की आईडी बनाने की प्रक्रिया जारी है।

    यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि फार्मर आईडी की संख्या को किसान वोटरों की संख्या नहीं माना जा सकता। मतदाता सूची में मतदाताओं को किसान या गैर-किसान के आधार पर वर्गीकृत नहीं किया जाता। इसलिए किसी जिले में कितने किसान मतदाता हैं, इसका अलग आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

    केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक के आंकड़ों में भी मध्यप्रदेश में 1.04 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनने की जानकारी दी गई थी। जून तक राज्य सरकार का आंकड़ा बढ़कर 1.11 करोड़ से अधिक हो गया।

  • हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: माता-पिता की नौकरी, सैलरी से अकेले तय नहीं होगी OBC क्रीमीलेयर पात्रता

    हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: माता-पिता की नौकरी, सैलरी से अकेले तय नहीं होगी OBC क्रीमीलेयर पात्रता

     ग्वालियर
     मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ओबीसी प्रमाण पत्र को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि माता-पिता के वेतनमान और पदोन्नति के आधार पर ही संतान को क्रीमीलेयर में नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ओबीसी प्रमाण पत्र का आवेदन खारिज करने के आदेश को रद कर दिया और मामले पर नियमों के अनुसार दोबारा विचार करने के निर्देश दिए।

    2020 में खारिज हुआ था आवेदन
    मामला रागिनी राठौर से जुड़ा है। उनके ओबीसी प्रमाण पत्र के आवेदन को अनुविभागीय अधिकारी ने 23 अक्टूबर 2020 को खारिज कर दिया था। इसके बाद रागिनी ने अपर कलेक्टर के समक्ष अपील की, लेकिन 29 नवंबर 2022 को वहां भी एसडीओ के आदेश को बरकरार रखा गया।

    इसके बाद रागिनी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दोनों आदेशों को चुनौती दी।

    पिता की सरकारी नौकरी और वेतन को बनाया था आधार
    याचिका में बताया गया कि अधिकारियों ने रागिनी के पिता की आय को केवल वेतन के आधार पर देखते हुए उन्हें क्रीमीलेयर की श्रेणी में माना और इसी आधार पर ओबीसी प्रमाण पत्र का आवेदन खारिज कर दिया।

    रागिनी के पिता की प्रारंभिक नियुक्ति सिविल जज वर्ग-दो के पद पर हुई थी। इसके बाद 16 जून 2008 को 40 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद उन्हें सिविल जज वर्ग-एक के पद पर पदोन्नति मिली। याचिका के अनुसार, उनके पिता की आय का स्रोत केवल वेतन था।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
    हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन मामले में 11 मार्च 2026 को दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि क्रीमीलेयर का निर्धारण करते समय केवल माता-पिता के वेतन, वेतनमान या पदोन्नति को आधार बनाकर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    खंडपीठ ने प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश रद करते हुए कहा कि मामले के सभी प्रासंगिक पहलुओं की जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जानी चाहिए।
    OBC प्रमाण पत्र जारी करने पर कोर्ट ने नहीं दिया अंतिम आदेश

    हालांकि, हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि उसके आदेश का मतलब रागिनी राठौर को स्वतः ओबीसी प्रमाण पत्र जारी करना नहीं है। कोर्ट ने उनके दावे पर कोई अंतिम राय नहीं दी है।

    प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा या नहीं, इसका निर्णय सक्षम अधिकारी को लागू नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नए सिरे से करना होगा। यानी हाई कोर्ट ने सिर्फ प्रशासनिक आदेशों को रद कर मामले पर नियमानुसार पुनर्विचार का रास्ता साफ किया है।

     

  • दिसंबर तक काटने हैं 1.5 लाख पेड़, डिंडौरी में अब तक 4516 की ही कटाई

    दिसंबर तक काटने हैं 1.5 लाख पेड़, डिंडौरी में अब तक 4516 की ही कटाई

    डिंडौरी

    डिंडौरी जिले के 30 हजार हेक्टेयर में फैले साल के जंगल पर साल बोरर कीट का खतरा बढ़ गया है। इससे प्रभावित करीब 1.50 लाख पेड़ों को 31 दिसंबर तक काटने की तैयारी है। इसके लिए जंगल को 113 सेक्टर में बांटा गया है। हालांकि, विभाग के बताए आंकड़ों और मौके पर काम की रफ्तार को देखें तो तय समय में डेढ़ लाख पेड़ों की कटाई पूरी करना चुनौतीपूर्ण नजर आता है। विभाग के मुताबिक दो मजदूर एक पेड़ काटने में करीब डेढ़ से ढाई घंटे लेते हैं। वहीं, 60 सेक्टर में रोजाना औसतन करीब 565 पेड़ ही काटे जा रहे हैं। इस रफ्तार से पूरी कटाई में लंबा समय लग सकता है।

    डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर मौके पर पहुंची  टीम
    टीम डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर पश्चिम करंजिया वन परिक्षेत्र के चौरा दादर और खारी डीह के बीच स्थित जंगल में पहुंची। यहां करीब डेढ़ किमी पहाड़ी और कीचड़ भरे रास्ते से तरवर टोला के जंगल तक पहुंचना पड़ा। बारिश के कारण कुछ देर काम बंद रहा। बारिश थमने के बाद जंगल में फिर कुल्हाड़ी और आरी चलने लगी

    60 सेक्टर में करीब 600 मजदूर लगाने का दावा
    वन विभाग के मुताबिक 60 सेक्टर में करीब 10-10 मजदूर लगाए गए हैं, यानी करीब 600 मजदूर कटाई में लगे हैं। विभाग का कहना है कि जरूरत पड़ने पर छत्तीसगढ़ सीमा से लगे गांवों से भी मजदूर बुलाए जाएंगे।

    मौके पर मिले मजदूर गोपाल नेताम ने बताया कि उस दिन उसके साथ करीब 13 लोग काम कर रहे थे। मोटे पेड़ों को आरी से और बाकी को कुल्हाड़ी से काटा जा रहा था।

    पेड़ गिराने के बाद सिर्फ तना काटना ही काम नहीं है। मजदूरों को टहनियां काटने और छाल उतारने का काम भी करना पड़ता है। घने जंगल में जंगली घास और वनस्पति के कारण काम जोखिम भरा है। मजदूरों के मुताबिक, यहां अकसर सांप भी दिखाई देते हैं।

    हेलमेट-जूते तो दूर, प्राथमिक इलाज की भी परेशानी
    मजदूर फूल सिंह ने बताया कि उन्हें हेलमेट, दस्ताने और सुरक्षा जूते उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उनके मुताबिक पेड़ काटते समय चोट लगने पर मौके पर प्राथमिक इलाज की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

    फूल सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में काम के दूसरे विकल्प कम होने के कारण मजदूर यह काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जंगल में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। प्यास लगने पर मजदूर करीब 200-250 मीटर दूर स्थित झिर से पानी लेते हैं। बारिश के दौरान इसमें भी मटमैला पानी आने की बात उन्होंने कही।

    80 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में साल के जंगल
    डिंडौरी जिले में कुल 80,263 हेक्टेयर क्षेत्र में साल के जंगल हैं। इनमें करीब 76,230 हेक्टेयर सघन और 4,032 हेक्टेयर विरल वन क्षेत्र है।

    वन विभाग के मुताबिक, दो साल में साल बोरर से प्रभावित पेड़ों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले साल 5-6 हजार पेड़ों पर निशान लगाए गए थे, जबकि इस बार यह संख्या करीब डेढ़ लाख तक पहुंच गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, साल बोरर का प्राकृतिक चक्र करीब 30 साल का होता है। डिंडौरी में 1997-98 में भी इसका बड़ा प्रकोप सामने आया था।

    30 साल पहले 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे
    वन विभाग के अनुसार, 1997-98 में साल बोरर के प्रकोप के कारण 1.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे। उस दौरान 1.39 करोड़ कीट नष्ट किए गए थे।

    इस बार प्रभावित पेड़ों की कटाई के बाद छोटे पौधों को सुरक्षित रखने की बात कही जा रही है। हालांकि, कटे हुए जंगल को दोबारा विकसित होने में 20 से 30 साल लग सकते हैं।

    विभाग के अनुमान के मुताबिक कटाई के बाद करीब 46,390 घनमीटर इमारती लकड़ी और 43,940 घनमीटर जलाऊ लकड़ी मिलेगी। कटाई और परिवहन पर करीब 8 से 10 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। लकड़ी की नीलामी ई-ऑक्शन के जरिए की जाएगी।

    डिंडौरी में जलाए गए 19.50 लाख 'साल बोरर' कीड़े
    मध्यप्रदेश के डिंडौरी में वन विभाग ने आठ संग्रहण केंद्रों पर करीब 19 लाख 50 हजार साल बोरर कीड़े जलाए। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे कीड़ों से बनी मालाओं को लकड़ियों के बीच रखकर आग लगाई गई। अकेले करंजिया संग्रहण केंद्र पर 3 लाख 50 हजार कीड़े जलाए गए।

    साल बोरर क्या है ?

    साल बोरर एक बीटल होता है. ये पेड़ के अंदर रहता है और पेड़ को अंदर से खोखला करता है. इसके बाद ये पेड़ किसी काम का नहीं बचता है. फिर उस एक पेड़ को पूरी तरह से बर्बाद करने के बाद ये कीट दूसरे पेड़ में चला जाता है. इसकी पहचान करने का सबसे आसान तरीका ये है कि पेड़ के सबसे नीचे वाले भाग में थोड़ा बुरादा टाइप होता है या फिर पत्तियों की बात करें तो पत्तियां पीली पड़ने लगेंगी. ये सिंप्टम्स होते हैं, अगर बाहर से पहचानना चाहें तो। 

    पेड़ों को काटना क्यों है जरूरी
    साल बोरर कीट लगातार पकड़ा भी जा रहा है. इसके अलावा इस कीट से प्रभावित पेड़ को काटना जरूरी इसलिए भी होता है, क्योंकि अगर संक्रमित पेड़ को काटेंगे नहीं, तो एक पेड़ से दूसरे पेड़ में संक्रमित हो जाएगा. लार्वा थ्रेडिंग के जरिये ये फैलता है. पहले एक पेड़ को खोखला कर फिर दूसरे पेड़ में जाता है, ऑब्जर्वेशन में पाया गया है कि जब तक की एक पेड़ को ये खत्म नहीं कर देते पूरी तरह से, तब तक दूसरे पेड़ में नहीं जाते हैं. अनूपपुर में लगभग 35% साल के पेड़ हैं, अगर साल बोरर कीट से प्रभावित पेड़ों को काटेंगे नहीं तो और संक्रमित होंगे जिससे और ज्यादा नुकसान होगा। 

    अमरकंटक में साल बोरर का कितना प्रकोप
    अमरकंटक का जंगल करीब 8525 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. यहां लगभग 40 लाख साल के पेड़ हैं. क्षेत्र के 10 बीट में से आठ में साल बोरर का संक्रमण भी पाया गया है. इनमें अमरकंटक, सोनमुड़ा, कपिलधारा, उमरगोहान, भूड़ाकोना, दमगढ़, पौड़ी, ताली बीट शामिल है।