Category: मध्य प्रदेश

  • हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: माता-पिता की नौकरी, सैलरी से अकेले तय नहीं होगी OBC क्रीमीलेयर पात्रता

    हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: माता-पिता की नौकरी, सैलरी से अकेले तय नहीं होगी OBC क्रीमीलेयर पात्रता

     ग्वालियर
     मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ओबीसी प्रमाण पत्र को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि माता-पिता के वेतनमान और पदोन्नति के आधार पर ही संतान को क्रीमीलेयर में नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ओबीसी प्रमाण पत्र का आवेदन खारिज करने के आदेश को रद कर दिया और मामले पर नियमों के अनुसार दोबारा विचार करने के निर्देश दिए।

    2020 में खारिज हुआ था आवेदन
    मामला रागिनी राठौर से जुड़ा है। उनके ओबीसी प्रमाण पत्र के आवेदन को अनुविभागीय अधिकारी ने 23 अक्टूबर 2020 को खारिज कर दिया था। इसके बाद रागिनी ने अपर कलेक्टर के समक्ष अपील की, लेकिन 29 नवंबर 2022 को वहां भी एसडीओ के आदेश को बरकरार रखा गया।

    इसके बाद रागिनी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दोनों आदेशों को चुनौती दी।

    पिता की सरकारी नौकरी और वेतन को बनाया था आधार
    याचिका में बताया गया कि अधिकारियों ने रागिनी के पिता की आय को केवल वेतन के आधार पर देखते हुए उन्हें क्रीमीलेयर की श्रेणी में माना और इसी आधार पर ओबीसी प्रमाण पत्र का आवेदन खारिज कर दिया।

    रागिनी के पिता की प्रारंभिक नियुक्ति सिविल जज वर्ग-दो के पद पर हुई थी। इसके बाद 16 जून 2008 को 40 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद उन्हें सिविल जज वर्ग-एक के पद पर पदोन्नति मिली। याचिका के अनुसार, उनके पिता की आय का स्रोत केवल वेतन था।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
    हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन मामले में 11 मार्च 2026 को दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि क्रीमीलेयर का निर्धारण करते समय केवल माता-पिता के वेतन, वेतनमान या पदोन्नति को आधार बनाकर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    खंडपीठ ने प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश रद करते हुए कहा कि मामले के सभी प्रासंगिक पहलुओं की जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जानी चाहिए।
    OBC प्रमाण पत्र जारी करने पर कोर्ट ने नहीं दिया अंतिम आदेश

    हालांकि, हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि उसके आदेश का मतलब रागिनी राठौर को स्वतः ओबीसी प्रमाण पत्र जारी करना नहीं है। कोर्ट ने उनके दावे पर कोई अंतिम राय नहीं दी है।

    प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा या नहीं, इसका निर्णय सक्षम अधिकारी को लागू नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नए सिरे से करना होगा। यानी हाई कोर्ट ने सिर्फ प्रशासनिक आदेशों को रद कर मामले पर नियमानुसार पुनर्विचार का रास्ता साफ किया है।

     

  • दिसंबर तक काटने हैं 1.5 लाख पेड़, डिंडौरी में अब तक 4516 की ही कटाई

    दिसंबर तक काटने हैं 1.5 लाख पेड़, डिंडौरी में अब तक 4516 की ही कटाई

    डिंडौरी

    डिंडौरी जिले के 30 हजार हेक्टेयर में फैले साल के जंगल पर साल बोरर कीट का खतरा बढ़ गया है। इससे प्रभावित करीब 1.50 लाख पेड़ों को 31 दिसंबर तक काटने की तैयारी है। इसके लिए जंगल को 113 सेक्टर में बांटा गया है। हालांकि, विभाग के बताए आंकड़ों और मौके पर काम की रफ्तार को देखें तो तय समय में डेढ़ लाख पेड़ों की कटाई पूरी करना चुनौतीपूर्ण नजर आता है। विभाग के मुताबिक दो मजदूर एक पेड़ काटने में करीब डेढ़ से ढाई घंटे लेते हैं। वहीं, 60 सेक्टर में रोजाना औसतन करीब 565 पेड़ ही काटे जा रहे हैं। इस रफ्तार से पूरी कटाई में लंबा समय लग सकता है।

    डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर मौके पर पहुंची  टीम
    टीम डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर पश्चिम करंजिया वन परिक्षेत्र के चौरा दादर और खारी डीह के बीच स्थित जंगल में पहुंची। यहां करीब डेढ़ किमी पहाड़ी और कीचड़ भरे रास्ते से तरवर टोला के जंगल तक पहुंचना पड़ा। बारिश के कारण कुछ देर काम बंद रहा। बारिश थमने के बाद जंगल में फिर कुल्हाड़ी और आरी चलने लगी

    60 सेक्टर में करीब 600 मजदूर लगाने का दावा
    वन विभाग के मुताबिक 60 सेक्टर में करीब 10-10 मजदूर लगाए गए हैं, यानी करीब 600 मजदूर कटाई में लगे हैं। विभाग का कहना है कि जरूरत पड़ने पर छत्तीसगढ़ सीमा से लगे गांवों से भी मजदूर बुलाए जाएंगे।

    मौके पर मिले मजदूर गोपाल नेताम ने बताया कि उस दिन उसके साथ करीब 13 लोग काम कर रहे थे। मोटे पेड़ों को आरी से और बाकी को कुल्हाड़ी से काटा जा रहा था।

    पेड़ गिराने के बाद सिर्फ तना काटना ही काम नहीं है। मजदूरों को टहनियां काटने और छाल उतारने का काम भी करना पड़ता है। घने जंगल में जंगली घास और वनस्पति के कारण काम जोखिम भरा है। मजदूरों के मुताबिक, यहां अकसर सांप भी दिखाई देते हैं।

    हेलमेट-जूते तो दूर, प्राथमिक इलाज की भी परेशानी
    मजदूर फूल सिंह ने बताया कि उन्हें हेलमेट, दस्ताने और सुरक्षा जूते उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उनके मुताबिक पेड़ काटते समय चोट लगने पर मौके पर प्राथमिक इलाज की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

    फूल सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में काम के दूसरे विकल्प कम होने के कारण मजदूर यह काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जंगल में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। प्यास लगने पर मजदूर करीब 200-250 मीटर दूर स्थित झिर से पानी लेते हैं। बारिश के दौरान इसमें भी मटमैला पानी आने की बात उन्होंने कही।

    80 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में साल के जंगल
    डिंडौरी जिले में कुल 80,263 हेक्टेयर क्षेत्र में साल के जंगल हैं। इनमें करीब 76,230 हेक्टेयर सघन और 4,032 हेक्टेयर विरल वन क्षेत्र है।

    वन विभाग के मुताबिक, दो साल में साल बोरर से प्रभावित पेड़ों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले साल 5-6 हजार पेड़ों पर निशान लगाए गए थे, जबकि इस बार यह संख्या करीब डेढ़ लाख तक पहुंच गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, साल बोरर का प्राकृतिक चक्र करीब 30 साल का होता है। डिंडौरी में 1997-98 में भी इसका बड़ा प्रकोप सामने आया था।

    30 साल पहले 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे
    वन विभाग के अनुसार, 1997-98 में साल बोरर के प्रकोप के कारण 1.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे। उस दौरान 1.39 करोड़ कीट नष्ट किए गए थे।

    इस बार प्रभावित पेड़ों की कटाई के बाद छोटे पौधों को सुरक्षित रखने की बात कही जा रही है। हालांकि, कटे हुए जंगल को दोबारा विकसित होने में 20 से 30 साल लग सकते हैं।

    विभाग के अनुमान के मुताबिक कटाई के बाद करीब 46,390 घनमीटर इमारती लकड़ी और 43,940 घनमीटर जलाऊ लकड़ी मिलेगी। कटाई और परिवहन पर करीब 8 से 10 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। लकड़ी की नीलामी ई-ऑक्शन के जरिए की जाएगी।

    डिंडौरी में जलाए गए 19.50 लाख 'साल बोरर' कीड़े
    मध्यप्रदेश के डिंडौरी में वन विभाग ने आठ संग्रहण केंद्रों पर करीब 19 लाख 50 हजार साल बोरर कीड़े जलाए। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे कीड़ों से बनी मालाओं को लकड़ियों के बीच रखकर आग लगाई गई। अकेले करंजिया संग्रहण केंद्र पर 3 लाख 50 हजार कीड़े जलाए गए।

    साल बोरर क्या है ?

    साल बोरर एक बीटल होता है. ये पेड़ के अंदर रहता है और पेड़ को अंदर से खोखला करता है. इसके बाद ये पेड़ किसी काम का नहीं बचता है. फिर उस एक पेड़ को पूरी तरह से बर्बाद करने के बाद ये कीट दूसरे पेड़ में चला जाता है. इसकी पहचान करने का सबसे आसान तरीका ये है कि पेड़ के सबसे नीचे वाले भाग में थोड़ा बुरादा टाइप होता है या फिर पत्तियों की बात करें तो पत्तियां पीली पड़ने लगेंगी. ये सिंप्टम्स होते हैं, अगर बाहर से पहचानना चाहें तो। 

    पेड़ों को काटना क्यों है जरूरी
    साल बोरर कीट लगातार पकड़ा भी जा रहा है. इसके अलावा इस कीट से प्रभावित पेड़ को काटना जरूरी इसलिए भी होता है, क्योंकि अगर संक्रमित पेड़ को काटेंगे नहीं, तो एक पेड़ से दूसरे पेड़ में संक्रमित हो जाएगा. लार्वा थ्रेडिंग के जरिये ये फैलता है. पहले एक पेड़ को खोखला कर फिर दूसरे पेड़ में जाता है, ऑब्जर्वेशन में पाया गया है कि जब तक की एक पेड़ को ये खत्म नहीं कर देते पूरी तरह से, तब तक दूसरे पेड़ में नहीं जाते हैं. अनूपपुर में लगभग 35% साल के पेड़ हैं, अगर साल बोरर कीट से प्रभावित पेड़ों को काटेंगे नहीं तो और संक्रमित होंगे जिससे और ज्यादा नुकसान होगा। 

    अमरकंटक में साल बोरर का कितना प्रकोप
    अमरकंटक का जंगल करीब 8525 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. यहां लगभग 40 लाख साल के पेड़ हैं. क्षेत्र के 10 बीट में से आठ में साल बोरर का संक्रमण भी पाया गया है. इनमें अमरकंटक, सोनमुड़ा, कपिलधारा, उमरगोहान, भूड़ाकोना, दमगढ़, पौड़ी, ताली बीट शामिल है। 

  • आगरा-मुंबई रोड का होगा कायाकल्प, इंदौर से पलासनेर तक 6 लेन बनेगा हाईवे

    आगरा-मुंबई रोड का होगा कायाकल्प, इंदौर से पलासनेर तक 6 लेन बनेगा हाईवे

    इंदौर
     आगरा-मुंबई हाईवे पर इंदौर से पलासनेर के बीच हादसों को रोकने के लिए यहां रोड 6 लेन का किया जा रहा है। 154 किमी के इस हिस्से में रोड चौड़ा किया जाना है। इसी रोड पर सबसे ज्यादा करीब 15 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे। जहां 25 से ज्यादा हादसों में कई लोगों ने अपनी जान गवाई और कई घायल हो गए थे।

    आगरा-मुंबई रोड (एनएच-52) के इंदौर से खलघाट होते हुए पलासनेर(महाराष्ट्र) तक के हिस्से को सिक्स लेन करने का काम शुरू हो गया है। एनएच-52 के 154.77 किमी हिस्से में मौजूदा 4 लेन सड़क का विस्तार होगा। यह कवायद इसलिए है क्योंकि इस साल जनवरी से जुलाई के बीच एनएच-52 पर 15 ब्लैक स्पॉट्स पर 27 सड़क हादसे हुए, जिनमें 27 लोगों को जान गंवानी पड़ी।

    सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के चेयरमैन जस्टिस एएम सप्रे ने एनएचएआई के अधिकारियों से पूछा कि हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा था कि इंदौर-खलघाट हाईवे को सिक्स लेन किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुल 178 गांवों से जमीन अधिग्रहित की जानी है। सबसे ज्यादा महू के 41 गांवों से जमीनों का अधिग्रहण होगा। अभी डीपीआर पर भी काम जारी है।

    NH-52:15 ब्लैक स्पॉट्स पर 27 जानें गईं

    धार के 16, धरमपुरी के 30 गांव नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने जो प्लान संभागायुक्त भास्कर लक्षकार को दिखाया है, उसके मुताबिक परियोजना का बड़ा असर इंदौर जिले की महू तहसील में होगा। यहां 41 गांव इसके दायरे में हैं। धार तहसील में 16 गांव हैं। धरमपुरी तहसील में 30 गांव हैं। बड़वानी जिले की राजपुर तहसील में 22 गांव प्रोजेक्ट के दायरे में हैं। सेंधवा में 15 गांव हैं। निवाली में 9 गांव हैं। वरला में 2 गांव हैं। खरगोन जिले की महेश्वर तहसील के 6 गांव शामिल हैं। कसरावद के 28 गांव भी इसमें शामिल हैं। महाराष्ट्र की ओर के 9 गांव भी इस हाइवे विस्तार में शामिल हैं। इस तरह मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के कुल 178 गांव प्रोजेक्ट के दायरे में आ रहे हैं।

    नियुक्त होंगे भू-अर्जन अधिकारी : प्रोजेक्ट के लिए जमीन का भू-अर्जन प्रस्तावित है। इसमें निजी, सरकारी और वनभूमि शामिल है। सड़क किनारे की सुविधाओं और जंक्शन के लिए जरूरी जमीन भी शामिल है। सभी संबंधित जिलों की तहसीलों में सक्षम प्राधिकारी भू-अर्जन (कम्पिटेंट अथॉरिटी फॉर लैंड एक्विजिशन-CALA) की नियुक्ति की जानी है। इसके लिए धारा 3(ए) का प्रकाशन किया जाना है।

    अभी तक यहां फोरलेन सड़क
    इंदौर से महाराष्ट्र के पलासनेर के बीच अभी तक फोरलेन सड़क है। कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने एनएचएआई से इस रास्ते पर हादसे रोकने को लेकर उठाए जा रहे कदम पर सवाल पूछा था। इस पर अधिकारियों ने कमेटी को बताया था कि सड़क को फोरलेन से सिक्स लेन किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए मधय प्रदेश और महाराष्ट्र के 170 से ज्यादा गांवों से जमीन अधिग्रहण किया जाना है।

    मध्य प्रदेश इन जिलों के गांवों से लेंगे जमीन
    मध्य प्रदेश के इंदौर, धार, बड़वानी, खरगोन जिलों के गांवों से हाईवे को चौड़ा करने के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए भू-अर्जन अधिकारी नियुक्ति भी की जाएगी। महाराष्ट्र की ओर से भी करीब 9 गांवों से यह सड़क गुजरती है। इसे चौड़ा करने के लिए वहां भी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।

    आर्थिक और औद्योगिक केन्द्रों को मिलेगा फायदा
    यह मार्ग आगरा-मुंबई कॉरिडोर का हिस्सा है, जो उत्तर भारत को पश्चिमी एवं दक्षिणी भारत से जोड़ता है. इंदौर एवं मुंबई जैसे प्रमुख आर्थिक व औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर पर लगातार यातायात का दबाव बढ़ रहा है. इस रूट पर प्रतिदिन लगभग 40 हजार वाहनों का आवागमन हो रहा है. इस रूट के 6-लेन का किए जाने से देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और माल परिवहन की दक्षता में बढ़ोत्तरी होगी। 

    इस परियोजना के तहत भेरू घाट, बाकानेर घाट एवं बिजासन घाट जैसे चुनौतीपूर्ण घाट खंडों को 6-लेन में बदला जाएगा. इस दौरान इस रूट पर पड़ने वाले ब्लैक स्पॉट को भी खत्म किया जाएगा. इस रूट पर कई स्थानों पर ढलाने हैं, इनका संतुलन किया जाएगा. कैरिजवे का चौड़ीकरण किया जाएगा. ढलान को कम तीखा और मोड़ों को अधिक सुरखित बनाया जाएगा. इस नई सड़क पर सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित किया जाएगा। 

    इसको सेफ्टी फर्स्ट के सिद्धांत पर तैयार किया जाएगा. इसमें क्रैश बैरियर्स, उच्च गुणवत्ता की रोड मार्किंग, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइनज, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम एवं आधुनिक स्लोप स्टेबिलाइजेशन तकनीकों का उपयोग किया जाएगा. इन उपायों के माध्यम से घाट खंडों को उच्च क्षमता, अधिक सुरक्षित एवं निर्बाध यातायात के अनुरूप अत्याधुनिक 6-लेन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। 

    बनेंगे फ्लाई ओवर, अंडरपास
    परियोजना के अंतर्गत खलघाट क्षेत्र में नर्मदा नदी पर एक नए समानांतर पुल का निर्माण भी किया जाएगा. इससे मौजूदा पुल पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा. इसके अलावा आसपास के छोटे बड़े शहरों में होने वाले जाम को कम करने के लिए बायपास, सर्विस रोड, फ्लाई ओवर और अंडरपास का भी निर्माण किया जाएगा. इससे हाईवे और स्थानीय यातायात व्यवस्था को अलग-अलग व्यवस्थित किया जा सकेगा. यह व्यवस्था न केवल जाम की समस्या को कम करेगी, बल्कि लोगों की सुरक्षा, सुविधा एवं यात्रा अनुभव को भी बेहतर बनाएगी। 

    पीथमपुर क्षेत्र को मिलेगा फायदा
    यह परियोजना एनएच-47 व प्रस्तावित इंदौर वेस्टर्न बायपास के साथ मिलकर स्थानीय लॉजिस्टिक्स नेटर्व को और मजबूत करेगी. खासतौर से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को इससे फायदा मिलेगा. इससे सप्लाई चेन और बेहतर होगी. एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव के मुताबिक "इस सिक्स लेन हाईवे के निर्माण से इंदौर से महाराष्ट्र और मुंबई तक की यात्रा कम समय में पूरी होगी. इसके अलावा लॉजिस्टिक नेटवर्क में भी मजबूती आएगी. इसकी डीपीआर दिसंबर के अंत तक पूरी होने की संभावना है। 

  • उज्जैन को मिलेगी ₹255 करोड़ के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की सौगात, शाह करेंगे डिजिटल भूमि-पूजन

    उज्जैन को मिलेगी ₹255 करोड़ के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की सौगात, शाह करेंगे डिजिटल भूमि-पूजन

    केन्द्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री शाह उज्जैन को देंगे 255 करोड़ रूपये के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की सौगात

    केंद्रीय सहकारिता मंत्री 3 अक्टूबर को करेंगे डेयरी प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन

    प्लांट की शुरूआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता से होगी, भविष्य में 5 लाख लीटर तक होगा विस्तार

    उज्जैन 

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है। उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ द्वारा 255 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक डेयरी प्लांट स्थापित किया जा रहा है। केंद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल से इस प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन करेंगे।

    उज्जैन में स्थापित होने वाला यह अत्याधुनिक डेयरी प्लांट क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विभिन्न डेयरी उत्पादों के उत्पादन को नई गति देगा। परियोजना की कुल लागत में से 170 करोड़ रुपये राज्य शासन द्वारा अनुदान के रूप में प्रदान किए जाएंगे, जबकि शेष 85 करोड़ रुपये दुग्ध संघ द्वारा ऋण के माध्यम से जुटाए जाएंगे।परियोजना को अगले दो वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य है।

    प्रस्तावित प्लांट की शुरुआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन दूध प्रसंस्करण क्षमता के साथ होगी। भविष्य में इसकी क्षमता को बढ़ाकर 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक किया जा सकेगा। इससे उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती दुग्ध उपलब्धता के साथ प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार भी संभव होगा।

    पैक्ड मिल्क से लेकर घी तक का होगा उत्पादन

    प्लांट में आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ विभिन्न प्रकार के डेयरी उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा। इसमें 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन पैक्ड मिल्क, 25 हजार लीटर प्रतिदिन दही तथा 10 हजार लीटर प्रतिदिन लस्सी/छाछ के उत्पादन की क्षमता होगी। इसके अलावा 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता का घी प्लांट भी स्थापित किया जाएगा।

    मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के प्रबंध संचालक जयदेव बिस्वास ने कहा, “उज्जैन में आधुनिक डेयरी प्लांट की स्थापना मध्यप्रदेश के डेयरी क्षेत्र के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह द्वारा भोपाल से इस परियोजना का डिजिटल भूमि-पूजन किया जाएगा। इस परियोजना से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध का बेहतर प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन सुनिश्चित होगा तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।” उन्होंने कहा, “प्लांट को भविष्य में 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक विस्तारित करने का प्रबंध किया गया है। इससे उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।”

    यह परियोजना आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध के बेहतर उपयोग और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देगी। साथ ही क्षेत्र में डेयरी गतिविधियों के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने तथा उपभोक्ताओं तक उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद पहुंचाने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

     

  • MP Weather: 10 अक्टूबर तक मानसून लेगा विदाई, 3 दिन धूप के बाद फिर बारिश की संभावना

    MP Weather: 10 अक्टूबर तक मानसून लेगा विदाई, 3 दिन धूप के बाद फिर बारिश की संभावना

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है और 10 अक्टूबर तक प्रदेश से इसके लौटने की संभावना है। अगले तीन दिनों तक कई इलाकों में तेज धूप रहने के आसार हैं, जिससे दिन का तापमान बढ़ सकता है, जबकि रात में हल्की ठंडक महसूस होगी। 5 अक्टूबर को 9 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। प्रदेश में अब तक करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य से लगभग 4% कम है। पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 4% ज्यादा, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में लगभग 12% कम बारिश दर्ज की गई है। 

    ग्वालियर-चंबल और उज्जैन से हो सकती है मानसून की वापसी
    मध्य प्रदेश में मानसून का आधिकारिक सीजन 30 सितंबर को समाप्त हो चुका है, लेकिन अभी तक प्रदेश के किसी भी जिले से मानसून की औपचारिक विदाई नहीं हुई है। वर्तमान में मानसून की वापसी रेखा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के कुछ हिस्सों से होकर गुजर रही है। इसका असर मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग के आसपास भी देखा जा रहा है।

    मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, मानसून की वापसी की शुरुआत इन्हीं क्षेत्रों से हो सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से मानसून विदा हो सकता है। इसकी शुरुआत शुक्रवार या शनिवार से होने की संभावना जताई जा रही है।

    अक्टूबर में दिन गर्म, रातें रहेंगी ठंडी
    अक्टूबर को मौसम के बदलाव का महीना माना जाता है। मानसून की विदाई के साथ आसमान साफ होने लगता है, जिससे दिन में धूप का असर बढ़ता है, जबकि रात के तापमान में गिरावट आने लगती है। यही वजह है कि अक्टूबर की शुरुआत में ही प्रदेश के कई शहरों में रात के तापमान में कमी दर्ज की गई है।

    मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश भी हो सकती है।

    5 अक्टूबर को इन जिलों में बारिश के आसार
    5 अक्टूबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा
    प्रदेश के 25 जिलों में इस मानसून सीजन में बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    ऐसे में संभावना है कि यहीं से मानसून वापसी करेगा। इसके बाद इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से इसकी विदाई होगी। शुक्रवार-शनिवार को इसकी शुरुआत हो सकती है।

    अक्टूबर में दिन गर्म और रातें ठंडी होंगी
    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड रहा है। इस बार भी ऐसा ही होने का अनुमान है। दूसरी ओर, अक्टूबर का महीना चेंज ओवर पीरियड रहता है। इस महीने मानसून विदाई पर रहता है। इससे आसमान साफ हो जाता है। इस कारण दिन में गर्मी और रात में ठंड पड़ती है। यही वजह है कि अक्टूबर के पहले ही दिन कई शहरों में रात के तापमान में गिरावट देखने को मिली है।

    कम बारिश, लेकिन गर्मी का अहसास बढ़ सकता है
    मौसम विशेषज्ञ नायक ने बताया कि अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्से में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। कहीं-कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान भी है। 5 अक्टूबर को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश हो सकती है।

    इस बार प्रदेश में 35.8 इंच बारिश रिकॉर्ड
    दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई है। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।

    प्रदेश के पश्चिमी हिस्से आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है।

    इन 25 जिलों में कोटा फुल
    भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है।

  • एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम के स्वर्ण पर मंत्री विश्वास सारंग ने दी बधाई

    एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम के स्वर्ण पर मंत्री विश्वास सारंग ने दी बधाई

    भोपाल 

    एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम द्वारा शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतने और ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने पर मध्यप्रदेश के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास सारंग ने भारतीय टीम और सभी खिलाड़ियों को बधाई दी है।

    मंत्री  सारंग ने कहा कि भारतीय महिला हॉकी टीम की यह ऐतिहासिक उपलब्धि अत्यंत प्रसन्नता और गौरव का विषय है। हमारी बेटियों ने शानदार प्रतिभा, मेहनत और जुझारूपन का प्रदर्शन करते हुए एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किया है। इस उपलब्धि से हिंदुस्तान का नाम पूरी दुनिया में रोशन हुआ है।उन्होंने कहा कि भारतीय महिला हॉकी टीम की इस सफलता में मध्यप्रदेश की बेटियों की भी महत्वपूर्ण भागीदारी है। मध्यप्रदेश की ईशिका चौधरी, बिच्छू देवी और सुशीला चानू भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं। इनमें ईशिका चौधरी ग्वालियर की खिलाड़ी हैं, जबकि बिच्छू देवी और सुशीला चानू मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की खिलाड़ी हैं।

    मंत्री  सारंग ने कहा कि एशियन गेम्स में मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदेश के खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में स्वर्ण, रजत और कांस्य—तीनों पदक हासिल कर मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने भारतीय महिला हॉकी टीम को स्वर्णिम सफलता और ओलंपिक क्वालीफिकेशन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की बेटियों की यह उपलब्धि प्रदेश के लाखों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

     

  • उज्जैन की प्राचीन वैश्य टेकरी में फिर होगी खुदाई, 2300 साल पुराने रहस्यों से उठेगा पर्दा

    उज्जैन की प्राचीन वैश्य टेकरी में फिर होगी खुदाई, 2300 साल पुराने रहस्यों से उठेगा पर्दा

    उज्जैन 

     कानीपुरा स्थित वैश्य टेकरी के रूप में स्थित विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूप में छिपा 2300 साल पुराना रहस्य जल्द सामने आएगा। 88 साल बाद एक बार फिर वैश्य टेकरी के उत्खनन की तैयारी की जा रही है।

    शुक्रवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की नई दिल्ली, भोपाल, इंदौर तथा उज्जैन के पुराविदों के दल ने टेकरी का जीपीआर (ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार) सर्वे किया। इस तकनीक से जमीन के अंदर दबी हुई दीवारें, कक्ष, नींव, अन्य संरचनाओं तथा दबी हुई वस्तुओं का आसानी से पता लगाया जा सकता है। साथ ही उत्खनन का प्लान भी तैयार किया जा सकता है।

    वैश्य टेकरी स्थित बौद्ध महास्तूप देश के बड़े स्तूपों में से एक है। इसका व्यास 350 फीट तथा ऊंचाई 100 फीट से अधिक है। मान्यता है सम्राट अशोक ने इसका निर्माण कराया था। पाली भाषा में निर्मिथ बौद्ध ग्रंथों में इस स्तूप का उल्लेख मिलता है।

    कहा जाता है गौतम बुद्ध के महाप्रयाण के उपरांत उनसे जुड़ी सैंकड़ों वस्तुओं को देश और विदेश में रहने वाले उनके अनुयायियों में बांट दिया गया था। उन वस्तुओं में तात्कालिक मौर्य शासकों को, जो स्वयं भी बौद्ध अनुयायी थे उन्हें गौतम बुद्ध की आसंदी और चीवर मिले थे। ऐसा माना जाता है वैश्य टेकरी बौद्ध स्तूप में इन दोनों वस्तुओं को रखा गया है। इसीलिए विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए यह स्थान तीर्थ के समान है।
    1938-39 में हुआ था उत्खनन, रोकना पड़ा

    पुरातत्व के जानकार व इतिहासकार बताते हैं सन 1938-39 में वैश्य टैकरी का उत्खनन हुआ था। एनबी गर्दे के निर्देशन में टेकरी की खोदाई की गई थी। इसके मुहाने पर एक वर्तुलाकार गड्ढा खोदा गया था। लेकिन दो हजार साल से अधिक समय तक बंद रहने के कारण इसमें गैस जमा हो गई थी, खोदाई के दौरान कई श्रमिक इसके प्रभाव में आए और बेहोश हो गए। इसके बाद उत्खनन कार्य बंद कर दिया गया। अब 88 साल बाद फिर से इसके उत्खनन की तैयारी की जा रही है।
    दल में यह विशेषज्ञ शामिल

    शुक्रवार को जीपीआर तकनीक से वैश्य टेकरी का सर्वेक्षण करने आए विशेषज्ञों ने मीडिया से कोई जानकारी साझा नहीं की। दल में नई दिल्ली के शिवाकांत वाजपेयी, डा.ऋतुजा चव्हाण, डा.ज्योति सवरूप, डा.रमेश यादव, डा.आशुतोष महाशब्दे, उज्जैन के पुराविद् व त्रिवेणी संग्रहालय के संग्रह अध्यक्ष डा.योगेश पाल, डा.अंकित चौहान आदि शामिल थे।
    बढ़ेगा अवंतिका का महत्व

    छठी शताब्दी ईसा पूर्व अखंड भारत के सोलह जनपद थें, इनमें से उज्जैन को अवंति महाजनपद कहा जाता था। यह नगरी शैव, वैष्णव, शाक्त, बौद्ध और जैन धर्म का प्रमुख केंद्र मानी जाती थी। कर्क रेखा गुजरने से यह नगरी कालगणना का भी प्रमुख केंद्र रही है। शासन की मंशा है कि अवंति महाजनपद का वैभव और बढ़े। इसी उद्देश्य से वैश्य टेकरी के उन्नयन की तैयारी की जा रही है। बौद्ध स्तूप के विकास के बाद यहां जापान, चीन, रशिया, कंबोडिया, श्रीलंका जैसे देश में रहने वाले बौद्ध अनुयायी आएंगे। इससे एक और जहां उज्जैन का धार्मिक महत्व और बढ़ेगा। आर्थिकी भी बढ़ेगी।
     

    88 साल पहले की खोदाई में मिली थे नरकंकाल

    वैश्य टेकरी के समीप कुम्हार टेकरी भी है। यहां भी 1938-39 में खोदाई हुई थी। तब इसमें अलग-अलग अवस्थाओं में (बैठे, लेटे आदि) नरकंकाल मिले थे। इसका भी पूरी तरह से अध्ययन नहीं हो पाया। वैश्य टेकरी के साथ एएसआइ कुम्हार टेकरी का भी अध्ययन करेगी।
    मौर्यकाल की ईंटे प्राप्त हुई थी

    पुराविदों का कहना है कि 1938-39 में खोदाई के दौरान स्तूप की दीवार गुंबद की तरह गोल दिखाई दे रही थीं। खोदाई में जो ईंटे प्राप्त हुई थी वें 22.6 गुणा 18.6 / 15.6 गुणा 3.7 इंच आकार की थी।
    क्या होती है जीपीआर तकनीक

    ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) तकनीक के तहत भूमि के भीतर रडार से तरंगे भेजी जाती हैं। जब ये तरंगे किसी वस्तु या अलग घनत्व से टकराकर वापस आती हैं तो विशेष उपकरण उन्हें रिकार्ड कर वस्तु आदि का चित्र अथवा नक्शा बना देते हैं। आधुनिक समय में इसका उपयोग पाइप लाइन आदि के सर्वे के लिए किया जाता है।

  • वन्यजीव सप्ताह में वन विहार में विभिन्न प्रतियोगिताएं, कार्यक्रम हुए

    वन्यजीव सप्ताह में वन विहार में विभिन्न प्रतियोगिताएं, कार्यक्रम हुए

    भोपाल 

    2 अक्टूबर को "जुड़े आवास, वन्यजीवन का विकास थीम पर आयोजित राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2026 के अवसर पर पक्षी अवलोकन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में यूथ हास्टल, शासकीय नूतन एवं अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के कुल 109 प्रतिभागियों ने पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों का दर्शन किये। पक्षी अवलोकन के दौरान पक्षी प्रेमियों को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले विभिन्न पक्षियों की पहचान, उनके व्यवहार, आवास एवं पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर लगभग 54 पक्षी प्रजातियों का अवलोकन किया गया।

    देखे गए प्रमुख पक्षियों में लिटिल कार्मोरेंट (Little Cormorant), इंडियन पैराडाइज फ्लाइकेचर (Indian Paradise Flycatcher), इंडियन रॉबिन (Indian Robin), प्लम हेडेड पैराकीट (Plum & headed Parakeet), स्पॉटेड डव (Spotted Dove), ब्लैक ड्रोंगो (Black Drongo), सहित अनेक अन्य प्रजातियाँ शामिल रहीं।

    पक्षी अवलोकन में स्रोत व्यक्ति के रूप में डॉ. संगीता राजगीर, मोहम्मद खलीक, गौरा जोशी (भोपाल बर्ड्स) एवं संकल्प किशनानी उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को पक्षी अवलोकन की बारीकियों, पक्षियों की पहचान तथा उनके संरक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन सहायक संचालक वन विहार डॉ. रूही हक द्वारा किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य आमजन एवं प्रकृति प्रेमियों में पक्षियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा जैव विविधता के संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करना था। प्रतिभागियों ने इस गतिविधि में विशेष रुचि दिखाई और प्रकृति के साथ जुड़ने का अनुभव प्राप्त किया।

    अन्य प्रतियोगिताएं एवं गतिविधियां

    वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत दिनांक 02 अक्टूबर 2026 को प्रातः 10:00 बजे से वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में जन-जागरूकता के उद्देश्य से "मध्यप्रदेश के वन्यजीव" विषय पर स्टोन पेंटिंग (खुला वर्ग) एवं वुडन टाइल पेंटिंग (खुला वर्ग) प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें क्रमशः 65 एवं 116 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

    इसी क्रम में "खजाने की खोज (खुला वर्ग) प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें 15 दल बनाये गये जिनमें 121 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

    विद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए प्रातः 10:00 बजे से 12:00 बजे तक वन विहार में सृजनात्मक कार्यशाला एवं प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यशाला के दौरान विषय विशेषज्ञ  संजय सोनकेशरिया द्वारा रंगीन कागज के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न पक्षियों, तितलियों एवं फूलों की आकृतियां बनाना सिखाया गया।  अरविन्द अनुपम, मूर्तिकार, क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय द्वारा क्ले मॉडलिंग के माध्यम से विद्यार्थियों को अजगर बनाना सिखाया गया। वहीं  पल्लवी तरमाकर द्वारा विद्यार्थियों को स्टोन पेंटिंग बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। क्ले मॉडलिंग में 48, स्टोन पेंटिंग में 27 एवं पेपर क्राफ्ट में 15 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसके साथ ही विद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए कहानी प्रतियोगिता (कक्षा 9 से 12) का आयोजन किया गया, जिसमें 17 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

    3 अक्टूबर 2026 के कार्यक्रम

    वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत दिनांक 03 अक्टूबर 2026 को वन विहार में विभिन्न जागरूकता एवं सहभागिता आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रातः 08:00 बजे से 09:30 बजे तक दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए "वन विहार की आवाजें" कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। साथ ही विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक "जुड़े आवास, वन्यजीवन का विकास" विषय पर युवा संसद का आयोजन किया जाएगा। इसी विषय पर वन भवन में प्रातः 09:30 बजे से 11:30 बजे तक "स्टेंड फॉर वाइल्ड लाइफ" (खुला वर्ग) का आयोजन भी किया जाएगा। सभी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी हेतु नीचे दिये गये QR कोड को स्केन करें।

     

     

  • नवीन न्याय संहिताओं की झलक दिखाएगी भव्य प्रदर्शनी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे शुभारंभ

    नवीन न्याय संहिताओं की झलक दिखाएगी भव्य प्रदर्शनी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे शुभारंभ

    भोपाल 

    केंद्रीय गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में नवीन न्याय संहिताओं के प्रति आम नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से भोपाल में पाँच दिवसीय भव्य प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। प्रदर्शनी का उद्घाटन 3 अक्टूबर को माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा किया जाएगा। यह प्रदर्शनी 3 से 7 अक्टूबर 2026 तक बीएचईएल दशहरा मैदान, गोविंदपुरा, भोपाल में आयोजित होगी।

    नवीन न्यायिक संहिता के अनुरूप आधुनिक एवं वैज्ञानिक अन्वेषण प्रणाली का सजीव प्रदर्शन

    प्रदर्शनी में नवीन न्यायिक संहिता के अनुरूप अपराध नियंत्रण, अन्वेषण तथा वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की संपूर्ण प्रक्रिया को सरल, सहज एवं सजीव रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें घटना घटित होने से लेकर साक्ष्य संकलन, वैज्ञानिक परीक्षण, अपराधियों की पहचान तथा न्याय दिलाने तक की कार्रवाई को क्रमबद्ध तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा।

    इसके अंतर्गत घटना की सूचना डायल-112 अथवा ई-एफआईआर के माध्यम से प्राप्त होने के बाद पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया, थाना स्टाफ के घटनास्थल पर पहुंचने तथा आवश्यकता के अनुसार फॉरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉड एवं फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई का सजीव प्रदर्शन होगा। घटनास्थल से तकनीकी एवं वैज्ञानिक विधियों से साक्ष्य एवं नमूने एकत्र करने तथा उनकी सुरक्षित प्रक्रिया को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

    वैज्ञानिक साक्ष्यों से अपराध के खुलासे तक की पूरी प्रक्रिया

    प्रदर्शनी में संकलित साक्ष्यों एवं प्राप्त चिन्हों के तकनीकी परीक्षण और उपलब्ध पुलिस प्रणालियों के माध्यम से मिलान की प्रक्रिया को समझाया जाएगा। साक्ष्यों को फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) तथा आवश्यकतानुसार मेडिको-लीगल जांच के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की जाएगी। वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपराध की विवेचना को मजबूत बनाने तथा प्राप्त निष्कर्षों को प्रभावी ढंग से न्यायिक प्रक्रिया के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की कार्यप्रणाली को भी सजीव दर्शाया जाएगा।

    तकनीक और लाइव डेमो होंगे प्रदर्शनी के प्रमुख आकर्षण

    प्रदर्शनी में क्राइम सीन के 3D मॉडल, डिजिटल डिस्प्ले, वीडियो तथा लाइव डेमो के माध्यम से आधुनिक अन्वेषण प्रणाली को प्रदर्शित किया जाएगा। क्राइम सीन पर साक्ष्य संकलन और वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। साइबर सुरक्षा के लिए ‘सेफ क्लिक अभियान’ तथा ऑनलाइन ई-जीरो एफआईआर की जानकारी भी नागरिकों को दी जाएगी।

    इसके साथ ही ऑपरेशन मुस्कान, महिला हेल्प डेस्क एवं ‘Say No to Drugs’ जैसे जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से पुलिस की नागरिक-केंद्रित भूमिका को प्रदर्शित किया जाएगा। नागरिकों एवं विद्यार्थियों के लिए नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित लाइव डिजिटल क्विज़ का भी आयोजन होगा।

    पुलिस की प्रमुख उपलब्धियों की भी होगी प्रस्तुति

    प्रदर्शनी में आधुनिक एवं वैज्ञानिक अन्वेषण प्रणाली के सजीव प्रदर्शन के साथ मध्यप्रदेश पुलिस की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। साइबर अपराधों की रोकथाम एवं उनके खुलासे में किए गए चलाये गए 'सेफ़ क्लिक’ अभियान, CCTNS के माध्यम से तकनीकी नवाचार एवं नेटवर्क के सफल क्रियान्वयन तथा नारकोटिक्स द्वारा चलाए गए ‘नशे से दूरी हे जरूरी' अभियानों और उनमें प्राप्त प्रमुख उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा।

    नागरिकों के लिए आधुनिक न्याय व्यवस्था को समझने का अवसर

    प्रदर्शनी का उद्देश्य नागरिकों को नवीन न्याय संहिताओं में हुए महत्वपूर्ण बदलावों, अन्वेषण में तकनीक एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के बढ़ते उपयोग तथा अपराध नियंत्रण की आधुनिक कार्यप्रणाली से परिचित कराना है। प्रदर्शनी के माध्यम से पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया से लेकर वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और उनके परीक्षण तक की प्रक्रिया को सरल एवं सहज तरीके से समझाया जाएगा।

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नागरिकों, विद्यार्थियों एवं युवाओं से प्रदर्शनी में सहभागिता कर आधुनिक एवं वैज्ञानिक अन्वेषण प्रणाली तथा नवीन न्याय संहिताओं को समझने का आग्रह किया गया है।

     

  • आधुनिक पुलिसिंग के साथ कानून, साइबर अपराध अनुसंधान एवं ए.आई. पर रहेगा विशेष फोकस

    भोपाल

    मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भोपाल में 92वें सूबेदार/उप निरीक्षक बैच के बुनियादी प्रशिक्षण का शुभारंभ निदेशक/विशेष पुलिस महानिदेशक, पुलिस अकादमी  रवि कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में हुआ। इस आधारभूत प्रशिक्षण में वर्ष 2025 बैच के चयनित कुल 286 प्रशिक्षु सूबेदार/उप निरीक्षक (182 पुरुष एवं 104 महिला) शामिल हैं।

    प्रशिक्षण में पारंपरिक पुलिसिंग के आधारभूत ज्ञान के साथ वर्तमान समय की पुलिसिंग आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीक, साइबर अपराध अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.), नेतृत्व क्षमता, सामुदायिक पुलिसिंग एवं प्रशासनिक दक्षता जैसे विषयों को विशेष रूप से शामिल किया गया है।

    आंतरिक प्रशिक्षण में कानून, प्रशासन एवं आधुनिक पुलिसिंग पर जोर

    तीन माह के बुनियादी प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को आंतरिक प्रशिक्षण के अंतर्गत पुलिस संगठन एवं प्रशासनिक व्यवस्था, कानून का प्रारंभिक एवं व्यावहारिक ज्ञान — भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम सहित अन्य महत्वपूर्ण अधिनियम, पुलिस कार्यप्रणाली एवं पुलिस रेग्यूलेशन, व्यक्तित्व विकास, मानव व्यवहार, पुलिस में नैतिकता एवं प्रबंध कौशल एवं कम्प्यूटर अवेयरनेस एवं पुलिस कार्यों में कम्प्यूटर का प्रभावी उपयोग विषयों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

    प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों में कानून एवं न्यायिक व्यवस्था की समझ, उप निरीक्षक/सूबेदार के अधिकार एवं सीमाओं का ज्ञान, विभिन्न राज्य एवं केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय, सामुदायिक पुलिसिंग तथा अपराध अनुसंधान की व्यावहारिक दक्षता विकसित करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    साइबर अपराध अनुसंधान एवं ए.आई. तकनीक से कराया जाएगा परिचित

    वर्तमान समय में अपराध के बदलते स्वरूप को देखते हुए प्रशिक्षण में साइबर अपराध अनुसंधान एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित उपकरणों के उपयोग पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रशिक्षु अधिकारियों को तकनीक आधारित अपराधों की पहचान, अनुसंधान एवं प्रभावी कार्रवाई के लिए आवश्यक व्यावसायिक दक्षता प्रदान करना है।

    शारीरिक दक्षता, ड्रिल एवं हथियार प्रशिक्षण

    बाह्य प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रशिक्षु अधिकारियों को शारीरिक एवं व्यावसायिक दक्षता के लिए फिजिकल ट्रेनिंग (पीटी) एवं शरीर सौष्ठव, एथलेटिक्स एवं टीम गेम्स, बेसिक ड्रिल,आर्म्स प्रशिक्षण, वेपन हैंडलिंग एवं फायरिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकारियों में शारीरिक दक्षता के साथ अनुशासन, टीम भावना, आत्मविश्वास एवं फील्ड ड्यूटी के लिए आवश्यक व्यावहारिक क्षमता विकसित की जाएगी।

    प्रशिक्षण के माध्यम से प्रशिक्षु अधिकारियों को कानून-व्यवस्था एवं अपराध अनुसंधान के साथ-साथ जनसामान्य से प्रभावी संवाद, टीम लीडरशिप, तकनीकी दक्षता, अंतर-विभागीय समन्वय एवं फील्ड स्तर पर त्वरित निर्णय लेने के लिए तैयार किया जाएगा।

    इस अवसर पर उप निदेशक  रामजी वास्तव, सहायक निदेशक (प्रशिक्षण) मती रश्मि पाण्डेय, सहायक निदेशक/प्रभारी पुलिस अधीक्षक, पीटीएस भोपाल मती यास्मीन जहरा सहित अकादमी के वरिष्ठ अधिकारी एवं स्टाफ उपस्थित रहे।