Category: मध्य प्रदेश

  • MP में श्रमिकों को राहत, 50 लाख कामगारों का बढ़ा DA; उद्योगों और सरकारी विभागों में मिलेगा लाभ

    MP में श्रमिकों को राहत, 50 लाख कामगारों का बढ़ा DA; उद्योगों और सरकारी विभागों में मिलेगा लाभ

    भोपाल 

    प्रदेश के सरकारी और निजी सेक्टर में काम करने वाले करीब 50 लाख श्रमिकों को एक अक्टूबर से 6 रुपए प्रतिदिन के मान से बढ़ा हुआ परिवर्तनशील महंगाई भत्ता दिया जाएगा।श्रम विभाग ने प्रदेश के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन दरों में बदलाव कर दिया है। 27 मार्च 2027 तक लागू रहने वाली इन नई दरों में बदलाव में सरकारी क्षेत्रों के 10 लाख और निजी सेक्टर खासतौर पर उद्योगों में काम कने वाले करीब 40 लाख श्रमिकों को न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के अंतर्गत यह लाभ मिलेगा, इसमें परिवर्तनशील महंगाई भत्ता भी शामिल है।

    श्रमायुक्त ने यह बदलाव महंगाई सूचकांक के आधार पर किया है। श्रमायुक्त शीतला पटले द्वारा जारी आदेश में नई न्यूनतम वेतन दरें प्रतिदिन श्रम के आधार पर तय की गई हैं, जिसमें 67 सामान्य नियोजन में काम करने वाले श्रमिकों को 26 दिन के आधार पर न्यूनतम वेतन इस तरह दिया जाएगा।

    इन 67 कैटेगरी में काम करने वालों को इसी आधार पर आने वाले समय में वेतन मिलेगा। अकुशल श्रमिक को महीने में 12575, अर्द्धकुशल श्रमिक को 13571, कुशल श्रमिक को 15294 और उच्च कुशल श्रमिक को 16919 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलेगा जो 26 दिन के मान से दिया जाएगा।

    मुद्रणालय (प्रिंटिंग प्रेस) और कृषि सेक्टर में काम करने वालों का वेतन
    लिपिकीय वर्ग में अकुशल श्रमिक को ₹484, श्रेणी 1 को ₹588, श्रेणी 2 को ₹522 रुपए 26 दिन के मान से मासिक वेतन मिलेगा। उच्च कुशल श्रमिक को ₹651 मिलेंगे और इसमें भी श्रेणी एक को 648 रुपए, श्रेणी दो के श्रमिक को 634 और श्रेणी तीन के श्रमिक को 588 रुपए मिलेंगे। अर्द्धकुशल कैटेगरी में श्रेणी एक के श्रमिक को 588 और श्रेणी दो के श्रमिक को 522 रुपए प्रति दिन मिलेंगे।

    अगरबत्ती श्रमिकों के लिए नई दरें:

    अगरबत्ती रोलिंग (1000 अगरबत्ती रोल करने पर)- कुल ₹74.75

    सुगंधित (सेंटेड) स्टिक- कुल ₹75

    छह माह पहले बढ़ाए थे 9 रुपए प्रतिदिन
    श्रम विभाग ने 1 अप्रैल 2026 से नई न्यूनतम वेतन दरें लागू की थीं। इसमें परिवर्तनशील महंगाई भत्ते के कारण श्रमिकों के वेतन में औसतन ₹9 प्रतिदिन यानी करीब ₹234 मासिक की बढ़ोतरी हुई थी। इसका फायदा सरकारी विभागों के करीब 10 लाख और निजी सेक्टर व उद्योगों के लगभग 40 लाख श्रमिकों को हुआ था।

  • भोपाल में बनेंगे वंदे भारत के मोटर, BHEL को 80 ट्रेनों का ऑर्डर; 176 किमी/घंटा होगी स्पीड

    भोपाल में बनेंगे वंदे भारत के मोटर, BHEL को 80 ट्रेनों का ऑर्डर; 176 किमी/घंटा होगी स्पीड

    भोपाल
    देश में अर्ध-तेज गति वाली रेल सेवाओं के विस्तार में भोपाल की भूमिका अब और ज्यादा मजबूत होने जा रही है। भारतीय रेल नेटवर्क पर दौड़ने वाली आधुनिक ट्रेनों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। BHEL-टीटागढ़ वैगन्स लिमिटेड (Titagarh Wagons Ltd) समूह को 80 वंदे भारत ट्रेनसेट के निर्माण के लिए 23,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम ऑर्डर मिला है। इस मेगा प्रोजेक्ट में ट्रेनों के निर्माण के साथ-साथ अगले 35 साल तक उनके रखरखाव की बड़ी जिम्मेदारी भी शामिल है।

    भोपाल यूनिट तैयार करेगी ट्रेनों का मोटर और विद्युत तंत्र
    इस महत्वाकांक्षी परियोजना में BHEL की भोपाल इकाई मुख्य रूप से ट्रेनों के मोटर तैयार करने का काम करेगी। इसके अलावा, कंपनी की भोपाल, बेंगलुरु और झांसी इकाइयां मिलकर इन आधुनिक ट्रेनों के लिए जरूरी प्रणोदन और विद्युत तंत्र का निर्माण करेंगी। ये सभी प्रणालियां ट्रेन के सुचारू संचालन के लिए बेहद जरूरी होती हैं। यही तंत्र ट्रेन में बिजली की आपूर्ति और उसे तेज गति प्रदान करने का काम करते हैं, इसलिए इन्हें तकनीकी रूप से ट्रेन का 'इलेक्ट्रिक हार्ट' भी कहा जा सकता है।

    बड़ा प्रोजेक्ट और लंबी जिम्मेदारी
    BHEL-टीटागढ़ वैगन्स समूह को 80 वंदे भारत ट्रेनसेट के लिए 23,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऑर्डर मिला है। इस अनुबंध में ट्रेनों के निर्माण के साथ-साथ 35 साल तक का लंबा रखरखाव भी शामिल है।

    176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए तैयार होंगी ट्रेनें
    नई पीढ़ी की इन वंदे भारत ट्रेनों को अधिकतम 176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन किया जाएगा, जबकि इनका नियमित परिचालन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से किया जाएगा। इस पूरी परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल ट्रेन डिब्बों का निर्माण ही शामिल नहीं है, बल्कि उनके एकीकरण, परीक्षण और दीर्घकालिक रखरखाव का जिम्मा भी संयुक्त रूप से उठाया जाएगा।

    तीन इकाइयों की विशेषज्ञता का होगा इस्तेमाल
    इस परियोजना के जरिए BHEL अपनी अलग-अलग निर्माण इकाइयों की विशेषज्ञता का पूरा इस्तेमाल करेगा। भोपाल के साथ-साथ बेंगलुरु और झांसी की यूनिट्स भी मिलकर काम करेंगी। ट्रेनसेट पूरी तरह तैयार होने के बाद उनके परीक्षण और मेंटेनेंस का काम दोनों कंपनियां मिलकर संभालेंगी, जिससे रेलवे सफर को और अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाया जा सके।

  • महंगी घड़ियां और सोने की चेन चोरी, पूर्व IAS का फोन आगरा में बरामद; वरुण की तलाश जारी

    महंगी घड़ियां और सोने की चेन चोरी, पूर्व IAS का फोन आगरा में बरामद; वरुण की तलाश जारी

    भोपाल
    पूर्व आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या मामले में मुख्य संदिग्ध केयरटेकर वरुण कुमार अभी लापता है। रतीबड़ पुलिस, क्राइम ब्रांच और जोन-1 की टीमों के लगभग 50 लोग वरुण की तलाश में चार राज्यों में दबिश दे रही है। बुधवार को वह घटना के तुरंत बाद लापता हो गया था।

    आगरा में मिला फोन का लोकेशन
    घटना के बाद पुलिस को एक अहम सुराग मिला है। उनके घर से मोबाइल फोन, नकदी और गहनों की चोरी हुई थी। चोरी गए फोन का लोकेशन आगरा में मिला है। इसके बाद भोपाल पुलिस की टीम ने उस व्यक्ति से पूछताछ की है जो इसका इस्तेमाल कर रहा था। जांचकर्ताओं को उसने बताया कि यह फोन उसे एक खास जगह पर पड़ा मिला था।

    बेच दिया होगा फोन
    वहीं, भोपाल पुलिस को शक है कि आरोपी ने भागते समय आगरा में किसी को बहुत कम कीमत पर फोन बेच दिया होगा। कई हाथों से गुजरते हुए वह एक मौजूदा यूजर तक पहुंचा। ऐसे में पुलिस यह पता लगा रही है कि फोन आगरा कैसे पहुंचा। हत्या के बाद किन लोगों ने इसका इस्तेमाल किया है।

    सोने की चेन, अंगूठियां और महंगी घड़ियां हैं गायब
    पुलिस ने घटनास्थल से चोरी हुए सामान की जानकारी दी और बताया कि सोने की चेन, अंगूठियां और चार महंगी घड़ियां गायब थीं। सर्च टीमों ने मध्य प्रदेश, दिल्ली और यूपी में कई जगहों पर तलाशी ली। ग्वालियर, आगरा और पंजाब के कुछ हिस्सों और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की है। लेकिन वरुण का कोई सुराग नहीं मिला है।

    हत्या और डकैती का केस दर्ज
    रतीबड़ पुलिस ने फरार केयरटेकर के खिलाफ हत्या और डकैती का मामला दर्ज किया है, जबकि जांचकर्ताओं का कहना है कि उसका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। साथ ही पुलिस अन्य संभावित कारणों की जांच कर रही है। पूर्व आईएएस अग्रवाल के कई लोगों के साथ वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही थी ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उनमें से कोई हत्या से जुड़ा हो सकता है।

    सबूत मिटाने की कोशिश
    पूर्व आईएएस राकेश अग्रवाल का अंतिम संस्कार शुक्रवार होगा, जब उनका बेटा अमेरिका से आएगा। आरोपी ने घटना के बाद जानबूझकर सबूत मिटाने की कोशिश की होगी। उसने एलपीजी सिलेंडर के पाइप हटा दिए थे। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक आयरन चालू छोड़ दिया था। जांच करने वालों ने पाया है कि पूर्व नौकरशाह की हत्या के बाद एक बड़ा धमाका करने और आग लगाने की योजना थी।

    आरोपी के पिता ने कर ली है दूसरी शादी
    पुलिस की जांच टीम ग्वालियर भी पहुंची, यहां आरोपी वरुण के पिता रहते हैं। जांचकर्ताओं को पता चला है कि वरुण की मां के निधन के बाद पिता ने दूसरी शादी कर ली है। इसके बाद वरुण का पिता से संपर्क टूट गया था। जबकि पंजाब में रहने वाली उसकी बहन ने भी पुलिस के सामने बयान दर्ज करवाया है।

    बीमार पड़ने के बाद केयरटेकर रखा
    रिटायर्ड आईएएस अधिकारी की पत्नी निशी ने पुलिस को बताया कि अस्पताल में दो सप्ताह बिताने के बाद वह घर लौटे तो परिवार को उनकी देखभाल के लिए केयरटेकर की जरूरत थी। बेटे को रिसर्च वर्क के लिए वापस अमेरिका जाना था।

    पहले वाला चला गया गांव
    परिवार ने शुरू में एक हेल्थकेयर एजेंसी के जरिए विनोद नाम के केयरटेर को काम पर रखा था, लेकिन उसने यह कहकर नौकरी छोड़ दी कि उसे कागजात लाने के लिए गांव जाना है। इसके बाद उसने शादी कर ली। इसके बाद एजेंसी ने 26 सितंबर को वरुण को भेजा था। वरुण रिटायर्ड अधिकारी राकेश अग्रवाल के कमरे के बाहर हॉल में सोता था।

  • भारत की 4 ऐतिहासिक धरोहरों की अनोखी कहानी, पत्थरों में छिपे रहस्य जानकर चौंक जाएंगे

    भारत की 4 ऐतिहासिक धरोहरों की अनोखी कहानी, पत्थरों में छिपे रहस्य जानकर चौंक जाएंगे

    भोपाल
     मध्यप्रदेश की सदियों पुरानी विरासत अब दुनिया के सामने अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। UNESCO की आधिकारिक Tentative List में प्रदेश के चार नए ऐतिहासिक स्थल शामिल किए गए हैं। इनमें बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिरों का समूह और उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं।

    इन चारों स्थलों को UNESCO की सूची में 8 जुलाई 2026 को जोड़ा गया। यह अंतिम विश्व धरोहर सूची नहीं है, बल्कि आगे World Heritage Site के संभावित नामांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण है।

    क्यों खास हैं ये चार विरासत स्थल?
    गिन्नौरगढ़ किला सीहोर जिले की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वहीं बाघ गुफाएं अपनी प्राचीन बौद्ध गुफाओं और भित्तिचित्रों के लिए जानी जाती हैं। UNESCO के अनुसार बाघ की गुफाओं में संरक्षित चित्र प्राचीन बौद्ध म्यूरल परंपरा के महत्वपूर्ण उदाहरणों में शामिल हैं।

    चंबल घाटी के मंदिर समूह में बेटेश्वर, पदावली और ककनमठ जैसे ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं। वहीं विदिशा की उदयगिरि गुफाएं भी मध्यप्रदेश की प्राचीन धार्मिक और स्थापत्य विरासत को सामने रखती हैं। UNESCO की सूची में इन सभी को अलग-अलग प्रस्तावों के रूप में दर्ज किया गया है।

    पर्यटन और स्थानीय रोजगार की उम्मीद
    UNESCO की Tentative List में शामिल होना इन स्थलों की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ाने की दिशा में एक कदम है। इससे भविष्य में इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प, होम-स्टे, परिवहन और अन्य पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना बन सकती है। हालांकि वास्तविक प्रभाव संरक्षण, पर्यटन सुविधाओं और आगे की UNESCO प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    विरासत संरक्षण पर भी बढ़ेगा फोकस
    चारों स्थलों को वैश्विक विरासत की संभावित सूची में जगह मिलने के बाद इनके संरक्षण और प्रस्तुतीकरण पर भी ध्यान बढ़ने की उम्मीद है। मध्यप्रदेश में पहले से कई ऐतिहासिक स्थल UNESCO की Tentative List में हैं और नए चार नाम जुड़ने से प्रदेश की विरासत सूची और विस्तृत हुई है। अब मध्यप्रदेश की इन चार धरोहरों की कहानी सिर्फ प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इन्हें विश्व धरोहर की दौड़ में आगे बढ़ाने का अगला चरण शुरू होगा।

  • बालाघाट में 400 करोड़ के कामों का प्रस्ताव, स्वास्थ्य के साथ सड़क और पानी पर भी सरकार का फोकस

    बालाघाट में 400 करोड़ के कामों का प्रस्ताव, स्वास्थ्य के साथ सड़क और पानी पर भी सरकार का फोकस

    बालाघाट 
     केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने राज्य शासन बालाघाट में विकास कार्यों का लेखा जोखा पेश करेगी. इसके लिए राज्य सरकार ने बालाघाट में सड़क, स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 400 करोड़ से अधिक की योजना तैयार की है. इस विकास योजना का खाका आज केन्द्रीय गृहमंत्री के सामने रखा जाएगा। 

    बालाघाट क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के साथ ही पेयजल, सड़क बिजली आदि की व्यवस्था बेहतर करने जा रही है. इसके लिए राज्य सरकार अगले एक साल में करीबन 400 करोड़ रुपए की राशि खर्च करेगी.हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी बालाघाट पहुंचे थे और उन्होंने आदिवासी जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को लेकर सवाल खड़े किए थे। 

    बालाघाट के 5 ब्लॉक में होंगे 1500 काम
    आदिवासी जिले बालाघाट में सड़क, स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं बेहतर करने के लिए राज्य शासन ने करीबन 400 करोड़ रुपए की राशि से कई काम कराने का निर्णय किया है. इसके लिए मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने तमाम कामों को स्वीकृति दे दी है. इस पूरे प्लान को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने राज्य शासन द्वारा रखा जाएगा। 

    इसके तहत राज्य शासन बालाघाट जिले के परसवाड़ा, बैहर, लांजी, बिरसा और किरनापुर में करीबन 1500 कामों को किया जाएगा. वहीं, विभिन्न विभागों द्वारा किए जाने वाले इन कामों के लिए जनजतीय विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा सभी विभागों के बीच समन्वय का काम करेंगे। 

    सड़कों के निर्माण पर खर्च होंगे 269 करोड़ रुपये
    योजना के तहत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से सबसे अधिक राशि खर्च की जाएगी। पांचों विकासखंडों में 151 सड़क और सीसी रोड के निर्माण पर 268.94 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा 69 पुलिया और कल्वर्ट के निर्माण के लिए 34.02 करोड़ रुपये तथा 60 स्टॉप डैम के लिए 35.97 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    20 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों का होगा निर्माण
    आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 20 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए जाएंगे। इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपस्वास्थ्य केंद्रों के भवन भी तैयार किए जाएंगे। स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सोलर पैनल लगाने की भी योजना है।

    बच्चों की मौत वाले गांवों पर विशेष ध्यान
    जिले के डोंगरगांव, बोंदारी, कोंडेकसा, मछरदा, मातला और कोरका जैसे बैगा-गोंड बहुल गांवों में कुपोषण और बीमारी से बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे। अब इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    पेयजल व्यवस्था भी होगी मजबूत
    पांचों विकासखंडों में पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) को दी गई है। किरनापुर और लांजी में नल-जल योजना का काम पूरा हो चुका है। वहीं, जिन गांवों में नल-जल योजना के निर्धारित मापदंड पूरे नहीं होते, वहां पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।

    बालाघाट में क्या-क्या काम होंगे?
    राज्य शासन बालाघाट में 400 करोड़ के विकास कार्यों को 13 विभागों के साथ मिलकर पूरा करेगी. इसके तहत 151 सड़कें बनाई जाएंगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सके. इस पर 268 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी. जिले के सभी ब्लॉक में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए 20 से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य केन्द्र खोले जाएंगे. इसके अलावा सामुदायिक और स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन बनाए जाएंगे. इनके निर्माण पर 3.11 करोड़ की राशि खर्च होगी। 

    देर रात 12 बजे भोपाल पहुंचे अमित शाह, मध्य प्रदेश गौपालक सम्मेलन में होंगे शामिल
    इसके अलावा अनाज वितरण की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए राशन दुकान और गोदाम का निर्माण किया जाएगा. इस पर 6.87 करोड की राशि खर्च होगी. बालाघाट में पेयजल की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पांच ब्लॉक में नल जल योजना के कामों को तेजी से पूरा कराया जाएगा. जिन स्थालों पर पानी की व्यवस्था नहीं है, वहां दूसरे विकल्पों से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। 

     

  • MP में फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच तेज, STF के हत्थे चढ़ा संदिग्ध; 76 पासपोर्ट की जानकारी सामने आई

    MP में फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच तेज, STF के हत्थे चढ़ा संदिग्ध; 76 पासपोर्ट की जानकारी सामने आई

    भोपाल 

    बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनाने वाले नेटवर्क की पड़ताल में लगी स्पेशल टास्क फोर्स की टीम को अहम सफलता मिली है। एसटीएफ ने इस मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने के आधार पर रायसेन जिले से पचास वर्षीय संदिग्ध राहुल प्रकाश उर्फ नृत्या भंते को पकड़ा है। एसटीएफ की टीम उससे पूछताछ कर फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क के संबंधों का पता लगा रही है।

    फर्जी दस्तावेज से पासपोर्ट
    पकड़ा गया संदिग्ध राहुल प्रकाश मूल रूप से भिंड जिले का रहने वाला है। पहले वह बहुजन संघर्ष दल (बसद) का प्रदेश महासचिव भी रह चुका है। लगभग तीन साल पहले राहुल ने अपनी पहचान पूरी तरह बदल ली थी और नृत्या भंते के नाम से मठों में रहना शुरू कर दिया था। पहचान छिपाने के बाद उसने भोपाल के अशोक बुद्ध विहार के पते का उपयोग किया और फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। इन फर्जी दस्तावेज का सहारा लेकर उसने वर्ष 2025 में पासपोर्ट बनवा लिया। इसी पासपोर्ट के माध्यम से उसने थाईलैंड और म्यांमार की यात्राएं भी की थीं। 

    लगातार बदल रहा था ठिकाने
    एसटीएफ की टीम को सूचना मिली थी कि संदेही राहुल प्रकाश कई दिनों से अपना ठिकाना बदल-बदलकर रायसेन क्षेत्र में छिपा हुआ है। सूचना की पुष्टि होने के बाद टीम ने उसे पकड़ा। जांच एजेंसी अब उसके सभी दस्तावेज, बैंक खातों और पासपोर्ट में दर्ज विदेश यात्राओं के विवरण की जानकारी जुटाने का काम कर रही है। एसटीएफ यह भी पता लगा रही है कि वह किन-किन लोगों के लगातार संपर्क में बना हुआ था और उसने भंते का रूप धारण क्यों किया था। हालांकि एसटीएफ की ओर से अभी उसकी गिरफ्तारी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    सात जिलों में फैला नेटवर्क
    बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारती
    य पासपोर्ट तैयार कराने के इस नेटवर्क की पड़ताल में एसटीएफ के सामने अब तक प्रदेश के सात जिलों में 76 फर्जी पासपोर्ट बनने की जानकारी आ चुकी है। जांच में खुलासा हुआ है कि राज्य में सबसे अधिक 40 फर्जी पासपोर्ट भोपाल के पते पर बनाए गए हैं। इसके अलावा डबरा क्षेत्र से 17 और बैतूल जिले से 11 फर्जी पासपोर्ट बनाए गए हैं। एसटीएफ की टीम फर्जीवाड़े के इस नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों की जांच में लगी हुई है।

  • संत प्रेमानंद महाराज की शिष्या रसिक दुलारी की PM रिपोर्ट से सामने आई चोटों की जानकारी

    संत प्रेमानंद महाराज की शिष्या रसिक दुलारी की PM रिपोर्ट से सामने आई चोटों की जानकारी

    जबलपुर
    संत प्रेमानंद के दीक्षित शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध मौत के सात दिन बाद वृंदावन पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।25 सितंबर को संत प्रेमानंद के वृंदावन स्थित श्रीराधा केलिकुंज आश्रम के पास बने गुरुकृपा कुंज अपार्टमेंट में ही रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी ने चौथी मंजिल से छलांग लगा दी थी।

    गंभीर चोटें मौत का कारण
    कूदने के पहले उन्होंने टाइल्स काटने वाली ग्राइंडर से अपना प्राइवेट पार्ट काट लिया था। करीब 40 मिनट चले पोस्टमार्टम में मौत का प्रमुख कारण ऊंचाई से गिरने के बाद हुई गंभीर चोटें सामने आई हैं।

    रिपोर्ट में सिर में फ्रैक्चर और रक्त का थक्का जमने के साथ छाती की चार पसलियां टूटकर फेफड़े में धंसने की बात सामने आई है।

    सीओ वृंदावन संदीप सिंह ने बताया कि चिकित्सकों ने रक्तस्राव रोकने के लिए उपचार किया था।

    परसवाड़ा में मातम, परिवार को अब भी कई सवाल
    संत प्रेमानंद के दीक्षित शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी गौर के पास परसवाड़ा से हैं, जहां दीपक का बचपन बीता। आईटीबीपी मार्ग पर अंदर बसा परसवाड़ा इन दिनों उनके परिवार के दुख का साक्षी बना हुआ है।

    दीपक के नाना प्रेमलाल पटेल के घर के बाहर सन्नाटा पसरा है। यहीं दीपक का परिवार रहता है। उनकी मां लोंग बाई बेटे की बचपन की तस्वीर सीने से लगाकर बैठी हैं।

    परिवार की निष्पक्ष जांच की मांग
    पिता चेतराम लोधी भी बेटे की मौत को लेकर सदमे में हैं। परिवार का कहना है कि वे किसी को दोषी नहीं ठहरा रहे, लेकिन घटना की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। उनका सवाल है कि आखिर उस दिन ऐसा क्या हुआ, जिसके बाद दीपक ने यह कदम उठाया।

    दीपक और उसका परिवार मूल रूप से बरगी डूब क्षेत्र के कठौतिया गांव का रहने वाला था। पिता के काम की तलाश में जबलपुर आने के बाद परिवार परसवाड़ा में नाना के घर रहने लगा। दीपक ने कठौतिया में आठवीं तक पढ़ाई की, बाद में गौर से स्कूली शिक्षा और बरेला से कॉलेज की पढ़ाई की। वर्ष 2023 में वह पहली बार वृंदावन गया।

     

  • युवाओं को मिला नया मंत्र: खुद बनें अपने जामवंत, ‘Gen B’ से विकसित भारत का संकल्प

    युवाओं को मिला नया मंत्र: खुद बनें अपने जामवंत, ‘Gen B’ से विकसित भारत का संकल्प

    स्वयं के जामवंत खुद बनें युवा – कुलगुरु डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत 

    'भारतीय युवा ‘जेन ज़ेड’ नहीं बल्कि ‘जेन बी’ (जनरेशन फॉर विकसित भारत) हैं' : डॉ. शिवेश प्रताप सिंह
    युवाओं को मिला नया मंत्र: खुद बनें अपने जामवंत, ‘Gen B’ से विकसित भारत का संकल्प

    ग्वालियर

    जीवाजी विश्वविद्यालय में आयोजित विश्वविद्यालय स्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) नेतृत्व एवं प्रशिक्षण शिविर के षष्ठम दिवस पर स्वयंसेवकों को युवाओं की भूमिका, भारतीय सभ्यता, मानवीय मूल्यों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सामाजिक प्रभावों पर केंद्रित बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। षष्ठम दिवस की शुरुआत प्रभात फेरी, योग-पीटी तथा परिसर में स्वच्छता अभियान से हुई तथा बौद्धिक सत्र कि शुरुवात माँ सरस्वती देवी और प्रेरणा पुरुष स्वामी विवेकानंद जी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित के साथ हुई। तत्पश्चात कार्यक्रम समन्वयक डॉ हरिशंकर सिंह कंसाना जी द्वारा प्रतिवेदन वाचन किया गया।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय कुलगुरु माननीय डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत जी ने रामायण के प्रसंग का स्मरण कराते हुए कहा कि जिस प्रकार जाम्बवंत जी ने हनुमान जी को उनकी शक्ति का बोध कराया था, उसी प्रकार आज के युवाओं को भी अपनी क्षमताओं को पहचानकर स्वयं का जाम्बवंत बनना होगा। उन्होंने कहा कि एनएसएस युवाओं को ‘मैं नहीं, हम’ की भावना से सेवा और राष्ट्रहित के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है।
    कुलगुरु ने ‘विकसित’ शब्द की प्रेरक व्याख्या करते हुए विमर्श, कर्तव्यपरायणता, सिद्धि और तरंग को विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

    मुख्य वक्ता डॉ. शिवेश प्रताप सिंह, सीनियर रिसर्च फेलो, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन, नई दिल्ली ने कहा कि भारतीय युवा केवल ‘Gen Z’ नहीं, बल्कि ‘Gen B – Generation for Viksit Bharat’ हैं। उन्होंने AI के बढ़ते प्रभाव के बीच मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत की नींव तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानवीय संवेदना, सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए।
    उन्होंने युवाओं से विभाजनकारी प्रवृत्तियों से दूर रहकर एकजुट समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

    माननीय कुलगुरु डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत जी और डॉ. शिवेश प्रताप सिंह जी के हाथों से सभी स्वयंसेवकों, जिला संगठकों, कार्यक्रम अधिकारियों, और कार्यक्रम समन्वयक जी को मेडल पहनाकर सम्मानित किया।अंत में शिविर संचालक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरिशंकर सिंह कंसाना ने स्मृति चिह्न भेंट किया। शिविर संचालक एवं राष्ट्रीय सेवा योजना, जीवाजी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरिशंकर सिंह कंसाना के निर्देशन में आयोजित बौद्धिक सत्र का मंच संचालन प्रो. मुदिता मिश्रा ने किया।

    कार्यक्रम के दौरान डॉ. संजय कुमार पांडे, प्रो. हिंदू सिंह धाकड़, डॉ. नरेंद्र कुमार वर्मा, डॉ अर्चना सेन, प्रो. विनोद सिंह कुशवाह, डॉ. गिरजा नरवरिया, प्रो. दीक्षा त्यागी एवं प्रो. एच एल. पटेल उपस्थित रहें।कार्यक्रम के अंत में प्रो. डॉ. मनोज अवस्थी ने अतिथियों एवं सभी सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

  • MP में पटवारियों को सरकार की दो टूक, काम से इनकार किया तो सामूहिक बर्खास्तगी की चेतावनी

    MP में पटवारियों को सरकार की दो टूक, काम से इनकार किया तो सामूहिक बर्खास्तगी की चेतावनी

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश के 50 लाख आवासीय भूखंडों की नि:शुल्क रजिस्ट्री को लेकर शासन-पटवारियों में विवाद गहरा गया है। स्वामित्व अभियान के 17 दिन बाद भी पटवारी रजिस्ट्री में विक्रेता बनने को तैयार नहीं हैं। इधर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कलेक्टरों को इनकार करने वालों को बर्खास्त करने के लिए फ्री हैंड दे दिया। अब पटवारी संघ ने भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि पटवारियों को बर्खास्त किया गया तो वे सामान्य कामकाज भी बंद कर देंगे।

    वहीं, जमीनी मामलों के विशेषज्ञ व पूर्व अधिकारी ओपी भट्ट ने पूरे अभियान की उपयोगिता पर ही सवाल उठाए हैं। कहा, बैंकों से कर्ज लेने के लिए आवासीय भूखंड की रजिस्ट्री अनिवार्य नहीं है। इसके लिए जमीन से संबंधित दस्तावेज पर्याप्त होते हैं, जो स्वामित्व योजना में दिए जा चुके हैं। कोई बैंक इन दस्तावेजों पर कर्ज नहीं देता तो शासन को बैंकों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए थे।

    विवादों में इसलिए नि:शुल्क रजिस्ट्री

    68 लाख में से 50 लाख दस्तावेजों की रजिस्ट्री करने का लक्ष्य तय है। 17 अक्टूबर तक यह लक्ष्य पूरा करना है, इसलिए रजिस्ट्री के अधिकार तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पंचायत समन्वयक व अन्य को दिए गए। इस प्रक्रिया में पटवारियों को उक्त भूखंडों का विक्रेता बनाया गया, क्योंकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया क्रेता व विक्रेता के बीच संपन्न होती है।

    पटवारियों ने कहा-
    अक्सर जमीनी मामलों में पारिवारिक या अन्य विवाद सामने आते हैं। 50 लाख प्रकरणों में ऐसे विवाद आना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में पीडि़त पक्ष पटवारी को भी विक्रेता के रूप में पक्षकार बना सकता है, जिससे वे अनावश्यक न्यायालयीन मामलों में उलझेंगे।

    सरकार का दावा-
    बैंकों से कर्ज लेने में होगी आसानी सरकार का दावा है कि रजिस्ट्री होने से संबंधित हितग्राहियों को बैंकों से कर्ज लेने में आसानी होगी और उन्हें अन्य लाभ भी मिलेंगे। जिन दस्तावेजों की नि:शुल्क रजिस्ट्री की जा रही है, वे दस्तावेज स्वामित्व योजना के तहत 2021 से अब तक 68 लाख लोगों को दिए जा चुके हैं। इनमें नक्शा, खसरा, खतौनी और बही की प्रति शामिल है।

    जमीनी मामलों के जानकारों के अनुसार
    जब शासन किसी व्यक्ति को जमीन के ये दस्तावेज उपलब्ध कराकर उसका मालिकाना हक दे चुका है तो अलग से रजिस्ट्री की जरूरत नहीं रह जाती।

    5 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट भी बेकार
    नि:शुल्क रजिस्ट्री शुरू करने से पहले राजस्व विभाग ने आगर मालवा, हरदा, बड़वानी, अशोकनगर और रायसेन में पायलट प्रोजेक्ट चलाया था। इसी दौरान पटवारियों की आपत्तियां सामने आ गई थीं। इसके बावजूद अधिकारियों ने इनको गंभीरता से नहीं लिया। सूत्र बताते हैं, पायलट प्रोजेक्ट में कलेक्टरों से मिले फीडबैक को भी उपेक्षित करते हुए प्रदेशभर में अभियान शुरू कर दिया गया।

    मप्र पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बघेल ने बताया कि स्वामित्व योजना के सभी कामों से पटवारी संघ अलग रहेगा। रजिस्ट्री भी नहीं करेंगे। बीते दिनों संघ की बैठक में इसका निर्णय लिया गया है। योजना से संबंधित कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्य आगामी निर्देश तक नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाएंगे।

    विशेषज्ञों ने अभियान पर उठाए ये सवाल
        जब स्वामित्व योजना के तहत संबंधित हितग्राही के नाम पर भूखंड के जमीनी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए थे तो रजिस्ट्री की जरूरत क्यों थी?
        यदि ऐसे भूखंडों पर लोन लेने के लिए कोई बैंक रजिस्ट्री की प्रति मांग रहे थे या लोन देने से इंकार कर रहे थे तो शासन से सार्वजनिक आदेश जारी क्यों नहीं कराया गया?
        जब भी रजिस्ट्री होती है तो शासन को राजस्व मिलता है। नि:शुल्क रजिस्ट्री में करीब 4000 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा। ऐसी स्थिति के बावजूद शासन को घाटे में डालने वाला अभियान क्यों बनाया गया?
        अभियान डिजाइन करने से पहले जमीनी वास्तविकताओं की पड़ताल क्यों नहीं की गई?

  • अमित शाह के दौरे से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, कांग्रेस के संभावित विरोध को लेकर पुलिस सतर्क

    अमित शाह के दौरे से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, कांग्रेस के संभावित विरोध को लेकर पुलिस सतर्क

    भोपाल 

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज भोपाल में हैं। वे 3 अक्टूबर को अनेक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मध्यप्रदेश में नक्सलमुक्ति के बाद केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का यह पहला मप्र दौरा है। वे उच्च स्तरीय बैठकों के साथ अन्य आयोजनों में हिस्सा लेंगे। अमित शाह आज भौरी स्थित आइसर में 500 करोड़ की लागत वाले अत्रि कैंपस की आधारशिला रखेंगे। वे गोपालक सम्मेलन में संबोधन देंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भोपाल दौरे के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। उनके कार्यक्रमों पर विरोध प्रदर्शनों का खतरा मंडरा रहा है। इसे देखते हुए पुलिस कांग्रेस नेताओं की हरेक गतिविधियों पर नजर रख रही है। एक कांग्रेस नेता को उनके कार्यालय में ही हिरासत में भी लिया गया है।

    शुक्रवार रात 12.15 बजे भोपाल पहुंचे
    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार रात 12.15 बजे भोपाल पहुंचे। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह रात्रि में भारतीय वायुसेना के विमान से भोपाल आए। सीएम मोहन यादव और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विमानतल पर उनका स्वागत किया। अमित शाह आज शनिवार को भेल दशहरा मैदान में राज्यस्तरीय गोपालक सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इसमें 35 हजार से अधिक गोपालक व सहकारी दुग्ध उत्पादक समितियों के सदस्य शामिल होंगे। वे नए आपराधिक कानूनों के पालन में मप्र की नब्ज भी टटोलेंगे।

    भौरी के आइसर में अत्रि कैंपस की रखेंगे आधारशिला
    अमित शाह आज भौरी के आइसर में अत्रि कैंपस की आधारशिला रखेंगे। 52 एकड़ में 'अत्रि' रिसर्च एवं इनोवेशन कैंपस बनेगा। यहां एआई-रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, मेडिकल डिवाइस, ड्रोन, एडवांस्ड मैटेरियल्स, क्लाइमेट साइंस और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में रिसर्च होंगे। 500 करोड़ की लागत होगी।

    कांग्रेस नेता को उनके कार्यालय में ही हिरासत में लिया
    उधर, केंद्रीय गृह मंत्री के कार्यक्रम में विरोध प्रदर्शन की आशंका के चलते पुलिस ने कार्रवाई भी शुरू की है। भोपाल भर में सभी वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं पर गहरी नजर रखी जा रही है। नरेला में कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला को आफिस में नजरबंद किया गया है।

    गृहमंत्री अमित शाह का भोपाल दौरा

    शुक्रवार रात भोपाल आए गृहमंत्री अमित शाह
    अनेक कार्यक्रमों में करेंगे शिरकत
    केंद्रीय गृहमंत्री के भोपाल दौरे पर पुलिस सतर्क
    कांग्रेस नेता को किया नजरबंद
    शहर में आज कई कार्यक्रम
    500 करोड़ के अत्रि कैंपस का शिलान्यास करेंगे गृहमंत्री
    नक्सलमुक्ति के बाद शाह पहली बार मप्र पहुंचे
    अब नशा मुक्ति का लक्ष्य