Category: विदेश

  • H-1B Visa शुल्क पर ट्रंप प्रशासन का नया आदेश, 21 सितंबर 2027 तक देनी होगी $1 लाख फीस

    H-1B Visa शुल्क पर ट्रंप प्रशासन का नया आदेश, 21 सितंबर 2027 तक देनी होगी $1 लाख फीस

    वॉशिंगटन
     अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B गैर-अप्रवासी वीजा के लिए 100,000 डॉलर का शुल्क लगाने वाले कार्यकारी आदेश को एक और वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। यह जानकारी व्हाइट हाउस ने दी है। H-1B वीजा अमेरिका का एक अस्थायी गैर अप्रवासी वीजा है। इस वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां आईटी, इंजीनियरिंग और विज्ञान जैसे विशेष क्षेत्रों में विदेशी कुशल पेशेवरों को नियुक्त करती हैं। हर साल लॉटरी के जरिए 85,000 H-1B वीजा जारी किए जाते हैं।

    ट्रंप ने H-1B वीजा के शुल्क की अवधि बढ़ाई
    ट्रंप H-1B वीजा के कड़े आलोचकों में गिने जाते हैं। उन्होंने शुरू से ही इस वीजा प्रोग्राम की आलोचना की है। पहले H-1B वीजा पर फीस को 100000 डॉलर तक बढ़ा दिया था। शुरुआत में यह आदेश सिर्फ एक साल के लिए था, जिसे अब एक और साल के लिए बढ़ा दिया गया है। अब 21 सितंबर 2027 तक H-1B वीजा के लिए 100000 डॉलर की फीस भरनी होगी।

    H-1B वीजा पर अमेरिकी अदालतों में सुनवाई
    हालांकि, ट्रंप के H-1B वीजा शुल्क को अदालतों में कानूनी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है। बोस्टन स्थित एक अपीलीय अदालत जून में एक संघीय न्यायाधीश द्वारा दिए गए फैसले की समीक्षा कर रही है , जिसमें ट्रंप प्रशासन के लगाए गए उच्च शुल्क को अवैध करार दिया गया था और सरकार को इसे वसूलने से रोक दिया गया था। एक अन्य अदालत इस बात पर विचार कर रही है कि क्या न्यायाधीश ने अमेरिकी व्यापार संघ के सबसे बड़े लॉबिंग समूह, यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा शुल्क को चुनौती देने वाली याचिका को उचित रूप से खारिज कर दिया था।

    ट्रंप ने H-1B वीजा का शुल्क कब बढ़ाया था?
    H-1B वीजा शुल्क वृद्धि के लिए ट्रंप का प्रारंभिक आदेश पहली बार सितंबर 2025 में जारी किया गया था। वह आदेश इस महीने समाप्त होने वाला था। यह आदेश उन विदेशी नागरिकों को दिए गए वीजा पर लागू नहीं होता था जो पहले से ही छात्र वीजा पर संयुक्त राज्य अमेरिका में हैं, जो नए एच-1बी प्राप्तकर्ताओं का एक बड़ा हिस्सा हैं, या मौजूदा वीजा के नवीनीकरण पर भी लागू नहीं होता था।

    H-1B वीजा का इस्तेमाल किस लिए होता है?
    ट्रंप की आलोचना के बावजूद कि कुछ कंपनियां अमेरिकियों के बजाय कम वेतन वाले विदेशी श्रमिकों को काम पर रखने के लिए H-1B वीजा का उपयोग करती हैं। व्यापार समूह और कंपनियों का कहना है कि वे H-1B वीजा के जरिए उच्च कुशल पेशेवरों की भर्ती इसलिए करती हैं, ताकि कुछ उद्योगों में योग्य अमेरिकी श्रमिकों की कमी को दूर किया जा सके। कांग्रेस द्वारा 1990 में स्थापित किया गया H-1B वीजा, भारत और चीन से भर्ती करने की इच्छुक प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

  • 2014 में टल गया बड़ा खतरा, पाकिस्तानी नौसैनिकों ने युद्धपोत कब्जाकर मिसाइल दागने की बनाई थी योजना

    2014 में टल गया बड़ा खतरा, पाकिस्तानी नौसैनिकों ने युद्धपोत कब्जाकर मिसाइल दागने की बनाई थी योजना

    इस्लामाबाद
    पाकिस्तानी नौसेना युद्धकाल में ही नहीं, शांतिकाल में भी पूरी दुनिया के लिए खतरा है। 2014 में तो पाकिस्तानी नौसेना के बागी अफसरों ने अल कायदा आतंकवादियों के साथ मिलकर परमाणु हथियारों से लैस एक युद्धपोत को अगवा करने की कोशिश की थी। गनीमत रही कि उनकी यह कोशिश नाकाम हो गई और बागी अफसर पकड़े गए। नहीं तो उनकी योजना युद्धपोत को अगवा कर उसमें तैनात मिसाइलों से अरब सागर में तैनात भारतीय और अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला करने की थी। अगर ऐसा होता तो यह किसी बड़े युद्ध की शुरुआत हो सकती थी।

    पीएनएस जुल्फिकार को अगवा करने की कहानी
    पाकिस्तानी युद्धपोत को अगवा करने की कोशिश 2014 में की गई थी। इस घटना का विस्तार से वर्णन स्टीव कोल की 2018 की बेस्टसेलर पुस्तक 'डायरेक्टोरेट एस' में किया गया है। इसकी योजना पाकिस्तानी नौसेना के दो कट्टरपंथी अधिकारी लेफ्टिनेंट जीशान रफीक और ओवैस जखरानी ने बनाई थी, हालांकि इसमें दर्जनों दूसरे अधिकारी और नौसैनिक शामिल थे। इन दोनों अधिकारियों का संबंध अल कायदा से था। उस समय पीएनएस जुल्फिकार पाकिस्तानी नौसेना का सबसे आधुनिक युद्धपोत था, जो चीन में निर्मित 3,144 टन वजनी चार टाइप एफ-22पी श्रेणी के फ्रिगेटों में से पहला था।

    पीएनएस जुल्फिकार से अमेरिकी युद्धपोत पर हमले की थी प्लानिंग
    इन दोनों की योजना चालक दल और कप्तान को बंधक बनाकर युद्धपोत का अपहरण करना ही नहीं था। बल्कि, इन दोनों ने युद्धपोत पर तैनात मिसाइलों से हमला कर अमेरिकी नौसेना के जहाज को डुबानी की भी प्लानिंग की थी। इनके निशाने पर अमेरिकी युद्धपोत यूएसएनएस सप्लाई था, जो एक फार्स्ट कॉम्बेट सपोर्ट शिप है। इसका इस्तेमाल मिशन पर तैनात अमेरिकी नौसेना के दूसरे युद्धपोतों को ईंधन, हथियार और खाने की डिलीवरी करने के लिए किया जाता है। उस समय यह जहाज उत्तरी अरब सागर में तैनात था, जो अमेरिकी नौसेना के एक फ्रिगेट के लिए सप्लाई लेकर जा रहा था।

    पीएनएस जुल्फिकार पर हथियारों की सप्लाई
    बागी अधिकारियों ने पीएनएस जुल्फिकार पर कब्जे के लिए छोटे हथियार और ऑटोमेटिक रायफलों को बैग में भरकर पहले ही अंदर पहुंचा दिया था। उन्होंने मिसाइल रूम और ऑपरेशन रूम की डुप्लिकेट चाभी भी बनवा ली थी। उन्हें एक और कमजोरी का पता था कि पीएनएस ज़ुल्फिकार पर मौजूद तोप और C-802 मिसाइलों को जहाज के मुख्य ऑपरेशन रूम के बाहर से ही तैयार और लॉन्च किया जा सकता था। C-802 मिसाइलों को दूसरे डेक से तब तक संचालित किया जा सकता था जब तक कि मिसाइलों का आटोमेटिक सिस्टम बंद रहता था।

    परमाणु हथियार से लैस था पीएनएस जुल्फिकार
    पीएनएस जुल्फिकार कोई साधारण जहाज नहीं था। यह पाकिस्तान की नौसेना सामरिक बल कमान का हिस्सा था, जिसे 2012 में स्थापित किया गया था। उस समय पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार दागने में सक्षम कोई पनडुब्बी नहीं थी, लेकिन 19 और 21 दिसंबर 2012 को इस फ्रिगेट ने कथित तौर पर C-802 क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया। इन मिसाइलों में दो से चार किलोटन की क्षमता वाला छोटा परमाणु हथियार भी लगाया जा सकता था, जो 1945 में अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम की विस्फोटक क्षमता का लगभग 15 से 25 प्रतिशत था। हमले के लगभग छह सप्ताह बाद, भारत की खुफिया एजेंसी (R&AW) ने कराची से मिली जानकारी के आधार पर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को सूचित किया कि हमले के समय पीएनएस जुल्फिकार पर एक परमाणु हथियार मौजूद था

    गोलीबारी में मारे गए मुख्य अपहरणकर्ता
    6 सितंबर 2014 की सुबह कराची में, लेफ्टिनेंट रफीक और जखरानी पीएनएस जुल्फिकार पर सवार हुए। उनके कुछ साथी नौसैनिक वर्दी में एक छोटी नाव में बंदरगाह की ओर बढ़े। एक सतर्क संतरी ने उन्हें देख लिया और गोलीबारी शुरू हो गई। जब गोलीबारी रुकी, तो रफीक और जखरानी समेत तीन हमलावर मारे गए। उन्हें अपने हथियारों का इस्तेमाल करने या फ्रिगेट की तोपों से फायरिंग करने का मौका नहीं मिला।

    5 पाकिस्तान नौसैनिको को मौत की सजा मिली
    इस साजिश में शामिल पांच जीवित पाकिस्तानी नौसेना अधिकारियों को मार्च 2016 में एक गुप्त सैन्य मुकदमे के बाद नौसेना न्यायाधिकरण द्वारा मौत की सजा सुनाई गई थी। इनमें सब-लेफ्टिनेंट हम्माद अहमद, इरफानुल्लाह, मोहम्मद हम्माद, अरसलान नज़ीर और हाशिम नसीर शामिल थे। 2024 में उनकी मौत की सजा पर रोक लगा दी गई थी। उनके वर्तमान ठिकाने के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

  • F-35 की स्टील्थ तकनीक से जुड़ा कैनोपी हांगकांग पहुंचा, शिपमेंट सुरक्षा को लेकर अमेरिका में चिंता

    F-35 की स्टील्थ तकनीक से जुड़ा कैनोपी हांगकांग पहुंचा, शिपमेंट सुरक्षा को लेकर अमेरिका में चिंता

     वॉशिंगटन
    ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका ले जाए जा रहे F-35 फाइटर जेट के बेहद संवेदनशील पुर्जों वाली एक खेप को हांगकांग भेज दिया गया। इस घटना के बाद अमेरिका ने जांच शुरू कर दी है, क्योंकि आशंका है कि ये पुर्जे चीनी अधिकारियों के हाथ लग सकते थे।

    पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिपमेंट में F-35 का कैनोपी शामिल था और ये एयरक्राफ्ट के स्टील्थ सिस्टम का एक अहम हिस्सा है। यह सामान एक ब्रोकर के जरिए ले जाया जा रहा था लेकिन यह साफ नहीं है कि शिपमेंट को असल में कहां भेजा गया या ये पार्ट्स अभी किसके पास हैं।

    मामले की जांच शुरू
    इस घटना के बाद पेंटागन और कांग्रेस, दोनों ने ही जांच शुरू कर दी है। जून में अमेरिकी विदेश विभाग और पेंटागन के अधिकारियों ने कांग्रेस की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अहम कमेटियों के स्टाफ को जानकारी देना शुरू किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि ये ब्रीफिंग अभी भी जारी हैं और आगे भी और बैठकें होने की उम्मीद है।

    F-35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस ने पुष्टि की कि उसे F-35 लाइटनिंग II के पार्ट्स से जुड़ी शिपमेंट की समस्या के बारे में जानकारी थी। अमेरिकी अधिकारी इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ मिलकर इन पार्ट्स को वापस लाने, घटना की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटना को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय करने पर काम कर रहे हैं।

    क्यों अहम हैं ये पुर्जे
    यह गायब हिस्सा पायलट के कॉकपिट के लिए सिर्फ एक सुरक्षा कवच से कहीं ज्यादा है। F-35 का कैनोपी कॉकपिट के ऊपर लगा एक ऐक्रेलिक बबल है जिस पर पारदर्शी रडार-एब्जॉर्बिंग मटीरियल की एक पतली परत चढ़ी होती है और यह कोटिंग विमान के रडार सिग्नेचर को कम करके उसके स्टील्थ डिजाइन का एक हिस्सा बनती है।

    समय के साथ कोटिंग खराब हो सकती है, जिसका मतलब है कि जैसे-जैसे F-35 फ्लीट बढ़ेगी, कैनोपी की मरम्मत या उन्हें बदलने की जरूरत होगी। अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए 1,300 से ज्यादा फाइटर जेट बनाए जा चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में F-35 के लिए मेंटेनेंस की सुविधाएं तो हैं लेकिन अभी उनमें से किसी में भी इसकी कैनोपी की मरम्मत करने की क्षमता नहीं है।

    F-35 प्रोग्राम पुर्जों को स्टोर करने, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और उनकी मरम्मत करने के लिए दुनिया भर में फैली सुविधाओं के नेटवर्क पर निर्भर करता है। इस विमान को बनाने वाली कंपनी, लॉकहीड मार्टिन, प्रोग्राम की पूरी सप्लाई चेन को मैनेज करती है और पुर्जों को लाने-ले जाने के लिए कमर्शियल शिपिंग कंपनियों की मदद लेती है।

    कंपनी ने क्या कहा?
    कंपनी का कहना है कि सुरक्षा कारणों से वह अलग-अलग शिपमेंट के बारे में बात नहीं कर सकती लेकिन एयरक्राफ्ट के पार्ट्स की आवाजाही से जुड़े अमेरिकी नियमों का पालन करती है। कंपनी ने कहा, "हमारी टीमें F-35 प्रोग्राम की विश्वसनीयता और हमारे सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर शिपमेंट को पूरी सावधानी और सुरक्षा उपायों के साथ संभालती हैं।"

    यह ताजा घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी सरकार की F-35 के स्पेयर पार्ट्स को ट्रैक करने की क्षमता को लेकर लंबे समय से चिंताएं बनी हुई हैं। सरकारी जवाबदेही कार्यालय (GAO) की 2023 की एक रिपोर्ट में पाया गया कि मई 2018 से एक मुख्य ठेकेदार ने 85 मिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत के 1 मिलियन से ज्यादा F-35 स्पेयर पार्ट्स खो दिए थे।

    निगरानी संस्था के अनुसार, F-35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस ने उन नुकसानों में से 2 प्रतिशत से भी कम की समीक्षा की थी। GAO ने यह भी पाया कि अक्टूबर 2022 तक 66 मिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत के 900,000 से ज्यादा अतिरिक्त पार्ट्स की जानकारी समीक्षा के लिए प्रोग्राम ऑफिस को नहीं दी गई थी।

    यह समस्या कुछ हद तक F-35 के ग्लोबल स्पेयर-पार्ट्स पूल के मैनेजमेंट के तरीके से जुड़ी है। पार्ट्स पेंटागन के होते हैं, जबकि मुख्य कॉन्ट्रैक्टर ज्यादातर इन्वेंट्री को मैनेज करते हैं, जिससे सरकार के लिए उनकी लोकेशन और नुकसान का पता लगाने में कमियां रह जाती हैं। GAO ने कहा कि यह ग्लोबल पूल अमेरिका और विदेशों में 50 से ज्यादा जगहों पर फैला हुआ है।

    जून 2026 की एक रिपोर्ट में GAO ने कहा कि पेंटागन को अभी भी स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और कॉन्ट्रैक्टर्स पर ज्यादा निर्भरता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

  • बलूचिस्तान में मुठभेड़ के बाद 5 उग्रवादी मारे गए, हथियारों के साथ 6 ट्रक और 3 बस बरामद

    बलूचिस्तान में मुठभेड़ के बाद 5 उग्रवादी मारे गए, हथियारों के साथ 6 ट्रक और 3 बस बरामद

    क्वेटा
    बलूचिस्तान में लगातार हालात बिगड़ रहे हैं। स्थानीय लड़ाकों से संघर्ष कर रही पाकिस्तानी सेना ने एक अभियान के दौरान 5 उग्रवादियों को मार गिराया है। पाकिस्तान सेना के मुताबिक, यह उग्रवादी करीब 23 लोगों को बंधक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा बलों ने फुर्ती दिखाते हुए इनकी चाल को नाकाम कर दिया। पाकिस्तान सेना ने एक बयान में कहा कि आतंकवादियों ने फिरौती के लिए अपहरण, जबरन वसूली और गाड़ियां छीनने के मकसद से एक चेक पोस्ट बनाया था।

    पाकिस्तानी सेना के मुताबिक यह घटना 18 सितंबर को रात में उस वक्त हुई जब उग्रवादियों ने कलात के पास चमन-कराची एन-25 राजमार्ग पर लोगों की शांतिपूर्ण आवाजाही में बाधा डालने की कोशिश की। इसके बाद सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में करीब 5 उग्रवादी मारे गए। इसके साथ ही उनके द्वारा अगवा किए गए 23 लोगों को भी छुड़ा लिया गया।

    बलूचिस्तान से 23 लोगों को रिहा कराया गया- पाकिस्तान सेना
    पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने कहा, ''सुरक्षा बलों ने तुरंत कार्रवाई की और जबरदस्त गोलीबारी के बाद सशस्त्र बलों की प्रभावी जवाबी कार्रवाई में पांच उग्रवादी मारे गए।'' उग्रवादियों के ठिकाने से छह ट्रक, तीन बस और दो कार सहित भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक भी बरामद किए गए।

    आतंक विरोधी अभियान लगातार जारी- पाकिस्तान सेना
    आईएसपीआर ने कहा कि इलाके में बचे हुए किसी भी उग्रवादी को खत्म करने और स्थानीय आबादी तथा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान जारी है। बता दें, पाकिस्तान आतंकवाद-विरोधी अभियान चला रहा है। बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा समेत कई इलाकों में पाकिस्तानी सेना पूरी तरह से घिरी हुई है। लगातार होते संघर्ष के बीच बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सेना के जवान भी मारे जा रहे हैं।

    बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहे लड़ाके लगातार पाकिस्तानी सेना के लिए चुनौतियां बढ़ा रहे हैं, जिसके कारण पाकिस्तानी सेना ने ने आतंकवाद-विरोधी अभियानों को तेज कर दिया है। हालांकि, इस अभियान के बीच पाकिस्तानी सेना लगातार वहां के आम नागरिकों के ऊपर भी अत्याचार करती हुई नजर आता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आजादी के बाद से लेकर अभी तक पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान क्षेत्र में लाखों लोगों को मौत के घाट उतार दिया है।

  • एक हफ्ते में दूसरी बार मिसाइल लॉन्च, उत्तर कोरिया की कार्रवाई पर दक्षिण कोरिया ने जताई आपत्ति

    एक हफ्ते में दूसरी बार मिसाइल लॉन्च, उत्तर कोरिया की कार्रवाई पर दक्षिण कोरिया ने जताई आपत्ति

    प्योंगयांग
    उत्तर कोरिया ने रविवार को कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्व में समुद्र की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी. जापान के रक्षा मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी. दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उत्तर कोरिया ने एक अननोन प्रोजेक्टाइल दागा. जापान की सरकारी मीडिया एजेंसी NHK के मुताबिक, यह जापान के स्पेशल इकोनॉमिक जोन के बाहर जाकर गिरा.

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इससे एक दिन पहले उत्तर कोरिया ने प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी संगठन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. यह बयान सरकारी मीडिया पर पढ़कर सुनाया गया. पिछले सप्ताह उत्तर कोरिया ने अमेरिका की अगुवाई में हुए नौसैनिक अभ्यास की भी निंदा की थी. इस अभ्यास में दक्षिण कोरिया और जापान शामिल थे और यह 29 अगस्त से 10 सितंबर तक गुआम के पास चला था.

    उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने शुक्रवार को अमेरिका की अगुवाई वाले सैन्य अभ्यासों को कोरियाई प्रायद्वीप में लगातार बिगड़ते तनाव के लिए जिम्मेदार ठहराया था. उन्होंने कहा था कि देश अपने परमाणु हथियारों को मजबूत करने की दिशा में अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा.

    सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई
    उत्तर कोरिया के मिसाइल लॉन्च की खबरों के बाद दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) की बैठक बुलाई. रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने वॉनसान इलाके से पूर्वी सागर की ओर कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं.

    दक्षिण कोरिया ने इस लॉन्च की निंदा की. यह करीब एक सप्ताह में उत्तर कोरिया का दूसरा मिसाइल परीक्षण था. इससे पहले 12 सितंबर को भी परीक्षण किया गया था. NSC ने प्योंगयांग से तुरंत मिसाइल गतिविधियां रोकने की अपील की और कहा कि यह परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का सीधा उल्लंघन है.

  • सऊदी अरब पर मिसाइल हमले के बीच ट्रंप अचानक वॉशिंगटन लौटे, अमेरिका ने जारी की यात्रा चेतावनी

    सऊदी अरब पर मिसाइल हमले के बीच ट्रंप अचानक वॉशिंगटन लौटे, अमेरिका ने जारी की यात्रा चेतावनी

     वॉशिंगटन
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपना वीकेंड ट्रिप एक दिन पहले ही बीच में ही रद कर दिया और शनिवार शाम को अचानक वॉशिंगटन डीसी लौट आए।

    व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक वीडियो में उन्हें मरीन वन से उतरते हुए देखा गया। हालांकि, उनके अचानक लौटने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है, क्योंकि उनका कैंप डेविड में रविवार तक रुकने का कार्यक्रम था।

    समझिए क्यों मचा है हड़कंप?
    बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप की यह वापसी ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी विदेश विभाग ने शनिवार को पश्चिम एशिया को लेकर एक नया सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। विभाग ने वहां मौजूद अमेरिकी नागरिकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने और संभावित यात्रा बाधाओं के लिए तैयार रहने की सलाह दी है।

    सऊदी अरब पर मिसाइल हमला
    दूसरी तरफ शनिवार को ही सऊदी अरब ने इस बात की पुष्टि की कि यमन के हूती विद्रोही गुट ने उसकी राजधानी रियाद को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाने की कोशिश की थी।

    हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी राजधानी रियाद और यानबू में स्थित तेल कंपनी अरामको की सुविधाओं को निशाना बनाने के लिए कई मिसाइलों और ड्रोन्स का इस्तेमाल किया। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के साथ चल रहे संघर्ष के बीच रियाद को निशाना बनाने की यह हालिया घटना है।

    यात्रियों के लिए जारी की चेतावनी
    इसके अलावा विदेश विभाग की चेतावनी में कहा गया है कि यह सैन्य संघर्ष तेजी से बढ़ सकता है, इसलिए अमेरिकी नागरिकों को पश्चिम एशिया की यात्रा पर जाने से बचना चाहिए। साथ ही, जो लोग पहले से वहां हैं, उन्हें एयरपोर्ट और उड़ानों से जुड़ी ताजा जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

     

  • ईरान ने ट्रंप के सामने रखीं 7 शर्तें, अमेरिका की नाकाबंदी हटाने और फंड रिलीज की मांग

    ईरान ने ट्रंप के सामने रखीं 7 शर्तें, अमेरिका की नाकाबंदी हटाने और फंड रिलीज की मांग

    वाशिंगटन
    पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट और तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना वीकेंड दौरा बीच में ही छोड़कर शनिवार को अचानक व्हाइट हाउस लौट आए हैं। ट्रंप का मैरीलैंड स्थित राष्ट्रपति आवास 'कैंप डेविड' से तय समय से एक दिन पहले वॉशिंगटन लौटना इस बात का साफ संकेत है कि क्षेत्र में तनाव बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुका है।

    व्हाइट हाउस प्रशासन की ओर से ट्रंप के अचानक लौटने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है, लेकिन यह कदम अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी उस आपातकालीन सुरक्षा एडवाइजरी के तुरंत बाद आया है, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को पश्चिम एशिया की यात्रा टालने और स्थिति के "अनियंत्रित रूप से बिगड़ने" की सख्त चेतावनी दी गई है।

    रियाद पर हूती मिसाइल हमला और US का 'ट्रैवल रेड अलर्ट'
    तनाव में इस ताजा उछाल की मुख्य वजह यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की सऊदी अरब की राजधानी रियाद को निशाना बनाकर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल है।

    सऊदी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने मिसाइल को बीच हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि हूतियों का दावा है कि उन्होंने रियाद के संवेदनशील ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।

    इस हमले के तुरंत बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने दूतावासों के जरिए चेतावनी जारी करते हुए कहा, "यह सैन्य संघर्ष बेहद तेजी से उग्र रूप ले सकता है। क्षेत्र के भीतर या वहां से होकर यात्रा करने वाले सभी अमेरिकी नागरिक अपनी योजनाओं पर तुरंत पुनर्विचार करें।"

    ईरान की ट्रंप को 7 शर्तें: "पैसा छोड़ो, नौसेना नाकाबंदी हटाओ"
    इस भीषण तनाव के बीच ईरान ने युद्ध विराम और बातचीत की मेज पर लौटने के लिए वॉशिंगटन के सामने सात शर्तें रख दी हैं।

    ईरान के शीर्ष सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रजाई ने अल जजीरा से बातचीत में खुलासा किया कि कतर के माध्यम से ये शर्तें अमेरिका को सौंप दी गई हैं और तेहरान अब राष्ट्रपति ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है।

    रजाई ने सार्वजनिक रूप से तीन मुख्य शर्तों का खुलासा किया:
    सभी मोर्चों पर युद्ध की तुरंत समाप्ति: क्षेत्र में जारी तमाम सैन्य कार्रवाइयों पर पूर्ण विराम।

    फ्रीज फंड की रिहाई: अलग-अलग इंटरनेश बैंकों में जब्त किए गए ईरान के अरबों डॉलर के फंड को तुरंत बहाल करना।

    अमेरिकी नौसेना नाकाबंदी का अंत: लाल सागर और फारस की खाड़ी में ईरान व उसके सहयोगियों के खिलाफ जारी अमेरिकी नेवल ब्लॉकैड को खत्म करना।

    निर्णायक जंग के लिए तैयार: तेहरान की दोटूक चेतावनी
    ईरानी सुरक्षा प्रमुख ने अमेरिकी प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वॉशिंगटन ने इन शर्तों को खारिज कर दिया, तो ईरान 'निर्णायक युद्ध' के लिए पूरी तरह तैयार है।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों से ईरान डरने वाला नहीं है। कतर की मध्यस्थता में चल रही इस कूटनीतिक कोशिश के बीच अब पूरी दुनिया की नजरें व्हाइट हाउस पर टिकी हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान की शर्तों पर क्या रुख अपनाते हैं।

  • रूसी चुनाव के बीच मॉस्को पर बड़ा ड्रोन हमला, रिफाइनरी में आग के बाद आसमान में छाया धुआं

    रूसी चुनाव के बीच मॉस्को पर बड़ा ड्रोन हमला, रिफाइनरी में आग के बाद आसमान में छाया धुआं

    मॉस्को
    रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को में ड्रोन हमला हुआ है. यूक्रेन ने मॉस्को पर एक हजार से अधिक ड्रोन दागे. मॉस्को की एक ऑयल रिफाइनरी को ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा है. हमले के बाद यहां आग लग गई. दूर से आग की लपटें और धुएं का गुबार दिखाई दिया. धमाकों की आवाज भी सुनाई दी.

    मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने रविवार को टेलीग्राम पर बताया कि ड्रोन ने मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया. रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास ने भी मेयर के हवाले से रिफाइनरी में नुकसान की जानकारी दी है. इस हमले में दो लोगों की मौत की भी खबर है.

    वहीं न्यूज एजेंसियों ने सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो की जगह की पुष्टि की है. इन वीडियो में दूर एक जगह आग जलती दिख रही है. आसमान में धुएं का गुबार उठता नजर आ रहा है.

    इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि बीती रात मॉस्को क्षेत्र में यूक्रेन की लंबी दूरी की कार्रवाई का रूस पर काफी असर हुआ. उन्होंने दावा किया कि रूस के एक अहम तेल उद्योग ठिकाने और एक लॉजिस्टिक्स सेंटर को निशाना बनाया गया.

    जेलेंस्की के मुताबिक, इन ठिकानों से रूस की युद्ध मशीन को अरबों डॉलर की मदद मिलती है. कार्रवाई में FP-1, RZ-100, MICH-2000, Palianytsia, Vendetta, Liutyi, Bars, Flamingo, Sichen और Pelican जैसे सिस्टम का इस्तेमाल किया गया. जेलेंस्की ने यूक्रेन की सुरक्षा सेवा, मानव रहित सिस्टम बल, विशेष अभियान बल, रक्षा खुफिया और विदेश खुफिया सेवा के जवानों को धन्यवाद दिया.

    उन्होंने कहा कि रूस के वोरोनिश क्षेत्र में एक ठिकाने पर प्रतिबंध भी लगाए गए हैं. जेलेंस्की ने मॉस्को से युद्ध खत्म कर शांति का रास्ता चुनने को कहा. उन्होंने कहा कि तनाव कम करने के रास्ते ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में मौजूद हैं, लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है.

    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब रूस में संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग का आज आखिरी दिन है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस चुनाव को यूक्रेन युद्ध के लिए जनता के समर्थन की परीक्षा के तौर पर पेश किया है.

    रूस में स्टेट ड्यूमा के लिए वोटिंग तीन दिनों से चल रही है. रविवार को इसका तीसरा और आखिरी दिन है. सत्ताधारी यूनाइटेड रशिया पार्टी के चुनाव में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद है.

    दरअसल, यह चुनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पहला संसदीय चुनाव है. क्रेमलिन इस चुनाव के नतीजों को अपनी नीतियों और यूक्रेन युद्ध के लिए जनता के समर्थन के तौर पर पेश कर सकता है.

    यूक्रेन पर ड्रोन हमले का आरोप
    मॉस्को में हुए ड्रोन हमले का आरोप रूस ने यूक्रेन पर लगाया है. दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव जारी है. रूस पहले भी यूक्रेन पर ड्रोन हमलों के आरोप लगाता रहा है. इस बीच एक्स पर पोस्ट पर यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इन हमलों की पुष्टि कर दी है.

    रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने शुक्रवार को भी यूक्रेन पर चुनाव में दखल देने की कोशिश का आरोप लगाया था. उन्होंने रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के जापोरिज्जिया इलाके में एक चुनाव अधिकारी के घर पर हमले का जिक्र किया था.

    रूस के मुताबिक इस हमले में चुनाव अधिकारी एलेना अस्तानिना की मौत हुई. यूक्रेन ने रूस के चुनाव को पहले ही खारिज किया है. कीव ने इसे एक दिखावटी इलेक्शन बताया है. वहीं यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू होने के कारण वहां चुनाव स्थगित हैं.

    रूस के चुनाव अधिकारियों ने शनिवार को मॉस्को में ऑनलाइन वोटिंग सिस्टम पर साइबर हमले की भी जानकारी दी थी. चुनाव अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन मतदान व्यवस्था को निशाना बनाने की कोशिश हुई.

    इस बीच रूस में चुनाव को लेकर सुरक्षा भी कड़ी रखी गई है. रूसी सरकार का कहना है कि पश्चिम के साथ मौजूदा टकराव के दौरान राष्ट्रीय एकता जरूरी है. रूसी सरकार यूक्रेन में चल रही सैन्य कार्रवाई को पश्चिम के साथ बड़े संघर्ष का हिस्सा बताती रही है.

    युद्ध की थकान का भी दिख सकता है असर
    रूस में चुनाव का नतीजा काफी हद तक तय माना जा रहा है. यूनाइटेड रशिया के सत्ता में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद है. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध और आर्थिक दबाव की वजह से लोगों में थकान का असर कुछ विपक्षी दलों को मिल सकता है.

    बर्लिन स्थित नेस्ट थिंक टैंक ने कहा है कि चुनाव के दौरान कुछ ऐसे नतीजे भी सामने आ सकते हैं, जो क्रेमलिन के लिए असहज स्थिति पैदा करें. खासकर ऐसे समय में जब रूस आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है.

    इस चुनाव में ज्यादातर युद्ध विरोधी उम्मीदवारों को मैदान में उतरने की इजाजत नहीं मिली. वहीं कुछ उदारवादी उम्मीदवारों ने युद्ध को लेकर अपनी चिंता जताई है. रूस में सेना को बदनाम करने या अधिकारियों के मुताबिक फर्जी खबर फैलाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है.

    ऐसे माहौल में मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी पर हुआ ड्रोन हमला चुनाव के आखिरी दिन की बड़ी घटना बन गया है. फिलहाल हमले में नुकसान का पूरा आकलन किया जा रहा है. साथ ही इस हमले के पीछे किसका हाथ था, इसे लेकर भी स्थिति साफ नहीं हुई है. इस हमले में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है.

  • कतर से हमास तक पहुंच रहा था पैसा? नई रिपोर्ट के दावे से नेतन्याहू सरकार घिरी, जांच की मांग

    कतर से हमास तक पहुंच रहा था पैसा? नई रिपोर्ट के दावे से नेतन्याहू सरकार घिरी, जांच की मांग

    यरूशलेम
    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर कतर और हमास से जुड़े फंडिंग के एक मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं. दरअसल, एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 7 अक्टूबर 2023 के हमले से पहले इजरायली खुफिया एजेंसियों ने नेतन्याहू को कतर से हमास के सैन्य संगठन तक पहुंच रहे पैसों को लेकर कई बार चेतावनी दी थी.

    इस रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया आकलन में यह रकम हमास के सैन्य संगठन के कुल बजट की करीब आधी तक बताई गई थी. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने नेतन्याहू पर निशाना साधा है. उनका कहना है कि अगर सुरक्षा एजेंसियों की ओर से ऐसी जानकारी दी गई थी, तो इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए.

    इजरायली खुफिया एजेंसियों ने दी थी वार्निंग
    इजरायली न्यूजपेपर येदिओथ अहरोनोथ (Yedioth Ahronoth) की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेतन्याहू को कतर से हमास के सैन्य संगठन तक पहुंच रहे पैसों की जानकारी कई बार दी गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली खुफिया एजेंसियों ने आकलन किया था कि यह पैसा हमास के सैन्य संगठन के बजट का बड़ा हिस्सा था.

    रिपोर्ट में मिस्र की ओर से दी गई चेतावनी का भी जिक्र है. दावा किया गया है कि मिस्र ने भी नेतन्याहू को बताया था कि कतर से आने वाली रकम हमास के सैन्य संगठन तक पहुंच रही है. इसके अलावा इजरायली खुफिया एजेंसियों को एक अलग और गुप्त रास्ते की जानकारी मिली थी. इसके जरिए कतर से जुड़ी रकम सीधे हमास की सशस्त्र इकाइयों तक पहुंचाई जा रही थी.

    इस बीच नेतन्याहू के कार्यालय ने इन दावों को खारिज किया है. कार्यालय ने जांच रिपोर्ट को पुराने झूठ का संग्रह बताया है. उसका कहना है कि इन दावों को पहले भी गलत साबित किया जा चुका है. नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा है कि इजरायल के सुरक्षा प्रमुखों ने कतर की आर्थिक मदद का समर्थन किया था. यह मदद मानवीय जरूरतों के लिए थी. इसका उद्देश्य गाजा में शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद करना था.

    कतर ने भी आरोपों को बताया गलत
    कतर ने भी रिपोर्ट में किए गए दावों को पूरी तरह खारिज किया है. कतर के अंतरराष्ट्रीय मीडिया कार्यालय ने कहा कि उसने कभी हमास को पैसा नहीं दिया. उसके मुताबिक, कतर की मदद इजरायल और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ तय व्यवस्था के तहत फिलिस्तीनी नागरिकों तक पहुंचाई गई.

    कतर ने कहा कि अगर किसी दूसरे तरीके से कोई पैसा हमास तक पहुंचा भी है, तो उसका कतर से कोई संबंध नहीं है. कतर ने इजरायल के राजनीतिक नेताओं पर भी निशाना साधा. उसने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले गल्फ देश को बलि का बकरा बनाने की कोशिश की जा रही है.

    रिपोर्ट के सामने आने के बाद नेतन्याहू की सरकार पर विपक्ष का दबाव बढ़ा है. याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइजेनकोट ने कहा कि इन खुलासों से 7 अक्टूबर के हमले से जुड़ी घटनाओं की जांच की जरूरत और बढ़ गई है. उन्होंने 7 अक्टूबर की सुरक्षा विफलताओं की जांच के लिए एक राज्य जांच आयोग बनाने की मांग की. इस हमले से पहले इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया सूचनाओं को लेकर पहले भी कई सवाल उठ चुके हैं.

    नई रिपोर्ट ने अब कतर से आने वाली रकम और उसके हमास तक पहुंचने के दावों को लेकर एक और बहस छेड़ दी है. हालांकि, नेतन्याहू का कार्यालय और कतर दोनों इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं.
     

  • पाकिस्तान के लिए नया संकट! हूतियों ने तुर्किए के साथ सीधे हमले की चेतावनी दी

    पाकिस्तान के लिए नया संकट! हूतियों ने तुर्किए के साथ सीधे हमले की चेतावनी दी

    नई दिल्ली  
    मक्का समझौता करने के बाद पाकिस्तान की मुसीबतें और भी बढ़ गई हैं। पहली बात तो सऊदी अरब के खिलाफ हूतियों के अटैक पर निष्क्रियता की वजह से उसकी दुनियाभर में आलोचना हो रही है। दूसरी ओर हूती विद्रोहियों ने पाकिस्तान को भी हमले की धमकी दे दी है।अमेरिका के पूर्व सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल एचआर मैकमास्टर ने कहा कि मक्का पैक्ट के पीछे भी पाकिस्तान के इरादे साफ नहीं हैं। आपको बता दें कि 7 अगस्त को ही सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने एक सझौते पर साइन किए थे। इस समझौते के मुताबिक अगर इन तीनों में से किसी एक देश पर भी हमला होता है तो तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और तीनों प्रतिक्रिया देंगे। तुर्किए ने तो यहां तक कहा था कि यह नाटो की तर्ज पर बनाया गया है. इसलिए इसे इस्लामिक नाटो कहा जा सकता है।

    हूतियों ने पाकिस्तान को दी धमकी
    सऊदी अरब में तुर्की और पाकिस्तान की सेना की तैनाती को लेकर हूती विद्रोहियों ने दोनों देशों को हमले की धमकी दी है। हूती नेता अल बुखैती ने कहा कि अगर इस्लामाबाद और अंकारा सामने आते हैं तो उनपर भी सीधा हमला होगा। हूती नेता ने कहा कि यमन अब भी रक्षात्मक रुख अपना रहा है। लेकिन अगर पाकिस्तान और तुर्की भी उतरते हैं तो उनके लिए ठक नहीं होगा। उन्होने कहा कि यमन किसी भी विदेशी ताकत का दखल स्वीकार नहीं करेगा।

    पाकिस्तान ने ईरान और अमरेका के बीच युद्धविराम पर समझौता करवाने और क्रेडिट लूटने की पूरी कोशिश की थी लेकिन उसका कोई भी प्रयास सफल नहीं हो पाया। इसके बाद पाकिस्तान की शांतिदूत की छवि बनाने वाली कोशिश फेल हो गई। मक्का समझौता करके उसने एक बार फिर अपनी विदेश नीति दिखाने की कोशिश की लेकिन यह भी फेल ही होता नजर आ रहा है।

    हूतियों ने खोल दिया नया मोर्चा
    सऊदी अरब ने शनिवार को पुष्टि की कि यमन के हूती विद्रोहियों ने बैलिस्टिक मिसाइल से उसकी राजधानी रियाद को निशाना बनाने की कोशिश की। ईरान समर्थित विद्रोहियों के साथ संघर्ष तेज होने के बाद रियाद को निशाना बनाने की यह पहली कोशिश है। हूती विद्रोहियों ने ईरान युद्ध में एक नया मोर्चा खोल दिया है।

    हूती विद्रोहियों से लड़ रहे सऊदी अरब नीत गठबंधन ने तड़के की गई इस कोशिश के काफी देर बाद बयान जारी कर कहा कि मिसाइल को बीच में ही रोक दिया गया। रियाद के कुछ निवासियों ने विस्फोट की आवाज सुनी। बाद में कुछ लोगों ने हवाई अड्डे के पास धुएं का गुबार देखा। किसी के हताहत होने या किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

    बयान में यह भी कहा गया कि हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के बंदरगाह शहर यनबू में असैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कोशिश की। सऊदी अरब की एक प्रमुख पाइपलाइन यहीं समाप्त होती है। इसके अलावा ताइफ, बैश और फरसान में भी हमले के प्रयास किए गए लेकिन उन्हें नाकाम कर दिया गया। गठबंधन ने इस बारे में और जानकारी नहीं दी। हूती विद्रोहियों ने इससे पहले बिना कोई सबूत दिए दावा किया था कि उन्होंने रियाद में ''संवेदनशील ठिकानों'' और यनबू में सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जिससे ''भीषण आग'' लग गई।