Category: विदेश

  • मोजतबा खामेनेई की सेहत पर फिर उठे सवाल, ईरानी धर्मगुरु ने अस्पताल हमले का किया दावा

    मोजतबा खामेनेई की सेहत पर फिर उठे सवाल, ईरानी धर्मगुरु ने अस्पताल हमले का किया दावा

    तेहरान
    28 फरवरी 2026 को ईरान पर हुए भीषण अमेरिकी और इजरायली हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की कमान संभालने वाले नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (56) को लेकर एक और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य और वरिष्ठ धर्मगुरु मोहसिन हैदरी ने कतरी टीवी चैनल 'अल अरबी' को दिए इंटरव्यू में दावा किया है कि शुरुआती हमले में घायल होने के बाद मोजतबा को इलाज के लिए तेहरान के एक अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन इसके बाद तीन अस्पतालों को निशाना बनाया गया और मोजतबा को तीसरी बार मलबे से जिंदा निकाला गया।

    इस खुलासे के बाद 56 साल के नए सुप्रीम लीडर की सेहत, उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति और उनके सीक्रेट लोकेशन को लेकर दुनिया भर में फिर से चर्चा छिड़ गई है।

    अस्पताल पर बमबारी के बाद मलबे से बचाया गया
    ईरानी धर्मगुरु मोहसिन हैदरी के अनुसार, 28 फरवरी को अली खामेनेई के तेहरान स्थित परिसर पर हुए हमले में मोजतबा गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

    हैदरी ने बताया, "जब दुश्मनों को पता चला कि वे घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं, तो तेहरान के तीन अलग-अलग अस्पतालों पर बमबारी की गई। मोजतबा खामेनेई तीसरे अस्पताल में मौजूद थे और उन्हें मलबे के नीचे से बाहर निकाला गया।"

    इस हमले के बाद से ही मोजतबा किसी अज्ञात स्थान पर चले गए हैं और तब से अब तक न तो उन्हें सार्वजनिक रूप से देखा गया है और न ही उनका कोई ऑडियो-वीडियो संदेश जारी हुआ है।

    गुप्त कमरे में वोटिंग और 8 मार्च का चुनाव
    असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का सचिवालय खुद अमेरिकी और इजरायली हमलों का शिकार बना था, जिसमें 8 लोग मारे गए थे और नए सुप्रीम लीडर से जुड़ी कई गोपनीय रिपोर्ट जलकर खाक हो गई थीं।

    हमले के बाद असेंबली के सदस्यों को बिना जगह बताए एक गुप्त कमरे में बुलाया गया। वहां सदस्यों ने कागज की पर्चियों पर अपने वोट लिखे।

    मोहसिन हैदरी ने बताया कि उन्होंने ही सबसे पहले मोजतबा खामेनेई के नाम का प्रस्ताव रखा था, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अली खामेनेई के बेटे को चुनने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी थी।

    मोजतबा को 59 में से 50 वोट मिले, जबकि 8 वोट अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को पड़े और 1 सदस्य ने मतदान में भाग नहीं लिया।

    हैदरी के मुताबिक, मोजतबा को खुद भी यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें चुना जा रहा है। उन्हें टीवी पर आधिकारिक ऐलान देखने के बाद ही अपने सुप्रीम लीडर बनने का पता चला।

    क्या वाकई जिंदा और स्वस्थ हैं मोजतबा खामेनेई?
    मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अमेरिका और ईरान की ओर से अलग-अलग विरोधी दावे किए जा रहे हैं।

    अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वे मानते हैं कि मोजतबा मरे नहीं हैं, लेकिन वे बेहद गंभीर रूप से घायल और अधमरे हो चुके हैं। ट्रंप के मुताबिक उनके शरीर का बायां हिस्सा (हाथ और पैर) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है।

    संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान न्यू यॉर्क पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में इन दावों को खारिज किया। पेजेशकियान ने दावा किया कि उन्होंने हाल ही में मोजतबा खामेनेई के साथ 7 घंटे लंबी बैठक की है और वे पूरी तरह से स्वस्थ और शासन चलाने में सक्षम हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता संभालने से पहले किसी भी औपचारिक पद पर न रहने वाले और "शैडो मैन" कहे जाने वाले मोजतबा खामेनेई की लंबे समय से जारी गुमनामी ईरान के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संशय को और बढ़ा रही है।

  • अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव में नरमी, टैरिफ कटौती के साथ AI पर भी बनेगी सहमति

    अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव में नरमी, टैरिफ कटौती के साथ AI पर भी बनेगी सहमति

    वाशिंगटन
    अमेरिका और चीन के बीच करीब 30 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ लगाने को लेकर सहमति बन गई है। दोनों देश आगे की आर्थिक बातचीत के लिए एक ट्रेड काउंसिल भी बनाएंगे। यह फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तीन दिन के अमेरिका दौरे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद हुआ। शी का यह दौरा 2015 के बाद वाशिंगटन का पहला दौरा था। वाइट हाउस के अनुसार, इस समझौते में अमेरिका से चीन जाने वाले सामान शामिल हैं। इनमें खेती का सामान, लकड़ी और कॉस्मेटिक्स हैं। चीन के छोटे उपकरण, खिलौने और सजावट के सामान पर भी बेहतर टैरिफ मिलेगा।

    चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश कुआलालंपुर में हुई पिछली बातचीत को आगे बढ़ाएंगे और व्यापार पर चर्चा जारी रखेंगे। यह समझौता मौजूदा ट्रेड डील को दो महीने बढ़ाने के बाद आया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इससे बड़े समझौते पर काम करने का समय मिलेगा।

    वाइट हाउस में लंबी मुलाकात और डिनर
    ट्रंप और शी ने गुरुवार को वाइट हाउस में कई घंटे बात की। इसके बाद दोनों ने सरकारी अधिकारियों और बिजनेस लीडर्स के साथ डिनर किया। इसमें अल्फाबेट के सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला, एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन भी शामिल थे। दोनों नेताओं ने स्थिरता और सहयोग पर जोर दिया। शी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे के फायदे वाला सहयोग बढ़ाना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को सीमा में रखना चाहिए।

    एआई पर भी बात होगी
    व्यापार के साथ-साथ दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भी बातचीत शुरू करने पर राजी हुए। इसमें मौकों और जोखिम दोनों पर चर्चा होगी। नवंबर में एआई पर एक और दौर होने की उम्मीद है। अधिकारी एआई से जुड़ी घटनाओं पर बात करने का एक चैनल भी बनाएंगे। वाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेता इस बैठक में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' की जगह 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द इस्तेमाल करने पर सहमत हुए। चीन ने इस शब्द का स्वागत किया और और बातचीत की अपील की।

    अन्य समझौते भी हुए
    शी के दौरे में सिर्फ व्यापार और एआई ही नहीं थे। दोनों देश एशिया-पैसिफिक आर्थिक सहयोग और जी-20 समिट जैसी बड़ी बैठकें आयोजित करने में एक-दूसरे की मदद करेंगे। ट्रंप और शी एक-दूसरे के देश में होने वाली बैठकों में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने यह भी तय किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर अलग-अलग देशों या संस्थाओं द्वारा लगाए गए ट्रांजिट टोल नहीं होने चाहिए।

    क्या है टैरिफ विवाद?
    अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लंबे व्यापार तनाव से जुड़ा है। अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार घाटा, व्यापार के तरीके और बौद्धिक संपदा के मुद्दों को टैरिफ लगाने की वजह बताया था। अमेरिका ने 2018 में चीनी सामान पर कई टैरिफ लगाना शुरू किया था। इसके बाद चीन ने अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाए। बीजिंग ने अमेरिकी कदमों को एकतरफा और नियमों के खिलाफ बताया। चीन ने कुछ रेयर अर्थ एलिमेंट पर निर्यात नियंत्रण और कुछ अमेरिकी कंपनियों पर रोक भी लगाई।

    इसके बाद दोनों तरफ टैरिफ बढ़ाने के कई दौर चले। चीन अमेरिका को आयात से ज्यादा निर्यात करता है, इसलिए उसके पास टैरिफ लगाने के लिए कम सामान थे। इसलिए उसने निर्यात नियंत्रण जैसे अन्य तरीके भी अपनाए। 2025 में भी यह सिलसिला चला। चीन ने अमेरिकी कदमों को धमकी और दबाव बताया था।

  • जिस आतंक को पाकिस्तान ने पाला, वही बना आफत; ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में नंबर-1

    जिस आतंक को पाकिस्तान ने पाला, वही बना आफत; ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में नंबर-1

    वशिंगटन
    जब सांप पालोगे तो एक दिन तुमको डसेगा ही', ये पुरानी कहावत इन दिनों पाकिस्तान पर सटीक बैठ रही है। भारत के खिलाफ जहां पाकिस्तान ने सांप यानी आतंकी पाले अब वहीं उसे डंस रहे हैं। ये बात कोई और कोई नहीं बल्कि खुद पाकिस्तान के लोग कह रहे हैं। हाल ही में अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने अपने ही मुल्क की सच्चाई दुनिया के सामने लाई। उन्होंने ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 में पाकिस्तान को आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देश बताए जाने पर रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि, पाकिस्तान अब आतंकी संगठनों को लेकर अपनाई गई अपनी पुरानी नीतियों के नतीजे भुगत रहा है।

    'सांप पालोगे तो डसेगा ही…'
    हुसैन हक्कानी ने एक्स पर ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान की स्थिति वाला एक ग्राफिक शेयर किया। इसके साथ उन्होंने लिखा कि जब कोई अपने घर के पीछे सांप पालता है तो एक दिन वही सांप घर के लोगों को भी काट सकता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने करीब 50 साल पहले चरमपंथी जिहादी संगठनों को हथियार और समर्थन देना शुरू किया था। अब वही पाकिस्तान आतंकवादी हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में सबसे ऊपर है। हक्कानी ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अपनी पुरानी नीतियों से कोई सबक सीखने के लिए तैयार है।

    ये बयान इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) की 2026 की रिपोर्ट जारी होने के बाद आई हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान को आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की लिस्ट में पहले स्थान पर रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़ी 1,139 मौतें हुईं और 1,045 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2013 के बाद पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों का आंकड़ा 2025 में सबसे ज्यादा रहा।

    ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान नंबर-1
    रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में 8.574 अंक हासिल किए और इस मामले में बुर्किना फासो से आगे रहा। पाकिस्तान हर साल इस इंडेक्स में आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 देशों में शामिल रहा है। हालांकि, 2025 में पहली बार पाकिस्तान इस सूची में नंबर-1 पर पहुंचा। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों में करीब 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह लगातार छठा साल है, जब देश में आतंकवाद से जुड़ी मौतों का आंकड़ा बढ़ा है। हालांकि, आतंकवादी घटनाओं की संख्या में थोड़ी कमी आई। 2024 में पाकिस्तान में 1,098 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो 2025 में घटकर 1,045 रह गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में किडनैंपिग घटनाओं में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई। 2024 में ऐसी 101 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जो 2025 में बढ़कर 655 हो गईं।

    वहीं, दुनियाभर में आतंकवाद से होने वाली मौतों में कमी आई है। 2025 में आतंकवाद के कारण 5,582 लोगों की मौत हुई, जो 2024 के मुकाबले 28 फीसदी कम है। इसी तरह आतंकवादी हमलों की संख्या भी करीब 22 फीसदी घटकर 2,944 रह गई। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस के मुताबिक, 81 देशों में आतंकवाद की स्थिति में सुधार हुआ, जबकि 19 देशों में हालात पहले से खराब हुए।

    बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हाल बेहाल
    रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पश्चिमी इलाके आतंकवादी गतिविधियों के मुख्य केंद्र बने हुए हैं। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में हुए 74 फीसदी से ज्यादा आतंकवादी हमले बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हुए। इन दोनों राज्यों में आतंकवाद से जुड़ी करीब 67 फीसदी मौतें भी हुईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी और इसके बाद पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़े हमले हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के पड़ोसी देशों के साथ तनावपूर्ण रिश्ते और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) तथा बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) की बढ़ती हिंसा ने देश के सामने सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

    पाकिस्तान के लिए काल बनी TTP
    इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) की रिपोर्ट के मुताबिक, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों के पीछे सबसे बड़े संगठनों में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार, टीटीपी लगातार पांचवें साल पाकिस्तान का सबसे घातक आतंकवादी संगठन रहा। 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से हुई 56 फीसदी मौतों के लिए टीटीपी को जिम्मेदार बताया गया। इस दौरान संगठन ने 595 हमले किए, जिनमें 637 लोगों की मौत हुई। यह आंकड़ा 2024 के मुकाबले करीब 13 फीसदी ज्यादा है।

    आईईपी ने टीटीपी को 2025 में दुनिया का तीसरा सबसे घातक आतंकवादी संगठन भी बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के चार सबसे घातक आतंकवादी संगठनों में टीटीपी अकेला ऐसा संगठन था, जिसके कारण होने वाली मौतों में 2025 में बढ़ोतरी दर्ज की गई। आईईपी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनिया के चार सबसे घातक आतंकवादी संगठनों में इस्लामिक स्टेट, जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन (जेएनआईएम), तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अल-शबाब शामिल थे।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि टीटीपी के हमलों में लगातार चार साल से बढ़ोतरी हो रही है। 2025 में संगठन ने 595 हमले किए और ये सभी हमले पाकिस्तान में हुए। इनमें से ज्यादातर हमले अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा इलाके में हुए। रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र टीटीपी की आतंकवादी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    पैसेंजर ट्रेन पर BLA के हमले का जिक्र
    रिपोर्ट में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की बढ़ती गतिविधियों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में पाकिस्तान में हुए सबसे बड़े आतंकवादी हमलों में से एक के पीछे बीएलए का हाथ था। रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवादियों ने क्वेटा रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर विस्फोट किया और इसके बाद एक पैसेंजर ट्रेन पर कब्जा कर लिया। इस दौरान 442 लोगों को बंधक बनाया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस घटना में 21 बंधकों, 4 सैन्यकर्मियों और 33 आतंकवादियों की मौत हुई।

    इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस के अनुसार, टीटीपी के हमलों में लगातार चार साल से बढ़ोतरी हो रही है। 2025 में टीटीपी ने 595 हमले किए और ये सभी हमले पाकिस्तान में हुए। इनमें ज्यादातर हमले अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा इलाके में किए गए।

  • ईरान ने रखी 7 दिन में होर्मुज खोलने की शर्त, ट्रंप ने प्रस्ताव को बताया अस्वीकार्य

    ईरान ने रखी 7 दिन में होर्मुज खोलने की शर्त, ट्रंप ने प्रस्ताव को बताया अस्वीकार्य

    वाशिंगटन
    ईरान ने जब सात दिन में होर्मुज को खोलने के लिए अपनी शर्तें रखीं तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें शिरे से खारिज कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज बंद होने से और उसके प्लांट तबाह होने की वजह से ईरान की कमाई बंद हो गई है। ऐसे में ईरान के लोग भूखों मरने लगे हैं। इसीलिए वह होर्मुज खोलने को बेताब हो रहा है। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान को ऐसे नहीं बख्शेंगे।
    ईरान ने क्या कहा था

    ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने कहा है कि उनका देश अमेरिका के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू करने के उद्देश्य से पेश किए गए प्रस्ताव के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को ईरान में प्रवेश की अनुमति देने के लिए तैयार है। 'सीबीएस न्यूज' के कार्यक्रम 'फेस द नेशन' को दिए एक इंटरव्यू में पेज़ेशकियान ने कहा कि अगर अमेरिका रणनीतिक जलमार्ग को दोबारा खोलने और परमाणु वार्ता बहाल करने के ईरान के नए प्रस्ताव पर हामी भरता है, तो ईरान "अपनी प्रतिबद्धताओं का पूरी तरह से पालन करेगा।"

    इससे पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस सप्ताह प्रस्ताव दिया था कि व्यापक परमाणु समझौते की दिशा में शुरुआती कदम के रूप में अमेरिका के साथ बातचीत शुरू होने के सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर घोषित इस प्रस्ताव पर अमेरिका की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    अराघची ने अपने टेलीग्राम चैनल पर प्रकाशित ईरानी मीडिया के साथ बातचीत में कहा, "हमने अमेरिकी राष्ट्रपति की शुरुआती प्रतिक्रिया देखी। हालाँकि, मध्यस्थों के ज़रिए हमें कोई जानकारी नहीं दी गई है।" ईरानी मंत्री ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई विरोधाभासी बयान दिए हैं।

    ईरानी राजनयिक ने आगे कहा, "हम मध्यस्थों से अंतिम रुख का इंतज़ार कर रहे हैं, और उसी के आधार पर हम अपने फ़ैसले लेंगे।" उन्होंने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने की दिशा में कोई भी प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि अमेरिका ईरान की शर्तों को पूरा करे।

    जून के मध्य में अमेरिका और ईरान ने शांति समझौता करने की प्रक्रिया शुरू करने के इरादे से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। हालाँकि, तीन हफ़्ते बाद, तनाव का एक नया दौर शुरू हो गया। वाशिंगटन ने तेहरान पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया, जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले शुरू कर दिए। फ़िलहाल, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बंद है।

  • US Diesel Export Ban: अमेरिका ने निर्यात घटाया तो बढ़ सकती हैं वैश्विक ईंधन कीमतें, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देश प्रभावित

    US Diesel Export Ban: अमेरिका ने निर्यात घटाया तो बढ़ सकती हैं वैश्विक ईंधन कीमतें, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देश प्रभावित

     वाशिंगटन

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डीजल के निर्यात पर रोक लगाने की बात कही है. दरअसल, अमेरिका में ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इससे घरेलू स्तर पर लोगों की परेशानी बढ़ी है. ट्रंप प्रशासन अब कीमतों को कम करने के रास्ते तलाश रहा है। 

    इसी बीच डीजल निर्यात पर रोक का प्रस्ताव सामने आया है. अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी कहा है कि प्रशासन निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है. दरअसल, अमेरिका दुनिया में डीजल के सबसे बड़े निर्यातकों में शामिल है. वह वैश्विक डीजल सप्लाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा उपलब्ध कराता है. ऐसे में अमेरिका से डीजल का निर्यात कम होने पर दुनिया के दूसरे देशों में इसकी कीमत बढ़ सकती है। 

    इस समय वैश्विक ईंधन बाजार पहले से दबाव में है. मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली तेल सप्लाई भी प्रभावित हुई है. वहीं, रूस के डीजल निर्यात पर रोक और यूक्रेन के रूसी तेल ठिकानों पर हमलों ने भी स्थिति को मुश्किल बनाया है। 

    ऑस्ट्रेलिया पर क्यों पड़ेगा ज्यादा असर?
    ऑस्ट्रेलिया विकसित देशों में प्रति व्यक्ति डीजल की सबसे ज्यादा खपत करने वाले देशों में है. हालांकि, ऑस्ट्रेलिया आम तौर पर अमेरिका से डीजल आयात नहीं करता. मार्च में एक इमरजेंसी खेप जरूर अमेरिका से वहां पहुंची थी। 

    इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया पर असर पड़ सकता है. इसकी वजह वैश्विक बाजार है. अगर अमेरिका डीजल का निर्यात रोकता है तो दुनिया भर में इसकी कीमत तेजी से बढ़ सकती है. इससे ऑस्ट्रेलिया में भी ईंधन महंगा होगा. हालात ज्यादा बिगड़े तो वहां ईंधन की राशनिंग तक की नौबत आ सकती है। 

    अमेरिका में भी बढ़ सकती है परेशानी
    डीजल निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने से अमेरिका को भी नुकसान हो सकता है. देश में डीजल की सप्लाई जरूरत से ज्यादा हो सकती है. इससे घरेलू कीमतें घट सकती हैं. लेकिन ज्यादा सप्लाई होने पर अमेरिकी रिफाइनरियों को उत्पादन कम करना पड़ सकता है. इसी वजह से व्हाइट हाउस ने फिलहाल पूरी तरह निर्यात रोकने के बजाय दूसरे विकल्पों पर विचार किया है। 

    ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि अमेरिकी कंपनियों को घरेलू बाजार की ओर ज्यादा ईंधन भेजने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है. इसके लिए टैक्स में छूट जैसे वित्तीय उपाय किए जा सकते हैं. इसके अलावा अमेरिका डीजल निर्यात के लिए कोटा भी तय कर सकता है. यानी देश से बाहर जाने वाले डीजल की मात्रा सीमित की जा सकती है. इस फैसले का इस्तेमाल व्यापार वार्ता में भी किया जा सकता है। 

  • $7 अरब के लोन पर IMF की सख्ती, पाकिस्तान को करने होंगे 174 बड़े बदलाव

    $7 अरब के लोन पर IMF की सख्ती, पाकिस्तान को करने होंगे 174 बड़े बदलाव

    नई दिल्‍ली

    इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने पाकिस्‍तान को बड़ा झटका दिया है. आईएमएफ ने पड़ोसी मुल्‍क पाकिस्‍तान के सामने कुछ ऐसी शर्त रख दी है, जिसे पूरा किए बिना उसे एक भी पैसे नहीं मिलेंगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ कठिन वार्ता के एक और दौर के लिए तैयार है। 

    IMF का कहना है कि पाकिस्‍तानी सरकार को 7 अरब डॉलर का कर्ज अनलॉक करने के लिए संसद के सामने 174 विधायी संशोधनों को पेश करना होगा और उसे लागू कराने की कोशिश करनी होगी. प्रस्‍तावित कानूनी बदलावों में टैक्‍सेशन, एनर्जी सेक्‍टर, प्राइवेटाइजेशन और सॉवरेन वेल्‍थ फंड समेत अन्‍य सेक्‍टर शामिल हैं।  

    इन चर्चाओं के दौरान IMF पाकिस्‍तान के सुधारों और उसकी ग्रोथ की भी जांच कर सकता है, जिसमें 15 संरचनात्‍मक मानदंड, साथ ही राजकोषीय बदलाव, फाइनेंस और अन्‍य उपाय शामिल हैं। 

    पाकिस्‍तान ने 174 बदलावों पर क्‍या कहा? 
    विधायी प्रक्रिया का पैमाना राष्ट्रीय सभा की एक समिति के सामने रखा गया है, जहां पाकिस्तान के वित्त सचिव इम्दादुल्लाह बोसल ने कहा कि IMF की शर्तों से जुड़े 174 संशोधनों को संसद के सामने रखना होगा. बोसल ने फाइनेंस और रेवेन्‍यू संबंधी राष्‍ट्रीय सभा की स्‍थायी समिति को बताया कि IMF कुल 174 संशोधनों को पास करवाना चाहता है। 

    हालांकि, वित्त सचिव ने यह बात बरकरार रखी कि प्रस्तावित संशोधनों पर निर्णय लेने का विशेषाधिकार संसद के पास होगा. ये बदलाव पाकिस्तान के आर्थिक ढांचे के कई क्षेत्रों को कवर करते हैं, जिनमें टैक्‍सेशन, एनर्जी, प्राइवेटाइजेशन और सॉवरेन वेल्‍थ फंड शामिल हैं।  

    15 नियम-कायदों की भी होगी जांच
    ये विधायी बदलाव ऐसे समय में आए हैं जब पाकिस्तान और आईएमएफ ने चौथी समीक्षा के तहत बातचीत कर रहे हैं. इस समीक्षा में 15 संरचनात्‍मक मापदंडों को शामिल किया जाएगा और अर्थव्‍यवस्‍था के खास सेक्‍टर में सुधारों की ग्रोथ का आकलन किया जाएगा। 

    ऊर्जा क्षेत्र, सरकारी स्वामित्व वाले कारोबार (SOE) और प्राइवेट से संबंधित उपायों के साथ-साथ टैक्‍स सुधार भी जांच के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में शामिल होंगे. राजकोषीय सुदृढ़ीकरण, राज्‍य फाइनेंस और मितव्ययिता उपायों पर भी चर्चा होगी। 

    बिजली वितरण कंपनियां और शुगर पॉलिसी
    बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण का मुद्दा भी समीक्षा वार्ता में शामिल होने की उम्मीद है, क्योंकि इस्लामाबाद अपने ऊर्जा क्षेत्र और राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों से संबंधित प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की कोशिश कर रहा है. इस मुद्दे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर लाभ कमाने वाली डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों का निजीकरण कर दिया जाता है तो घाटे में चल रही डिस्‍ट्रीब्‍यूटर कंपनियों का क्या होगा। 

    चीनी नीति में बदलाव भी आईएमएफ के मानदंडों में शामिल हैं. पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, संघीय सरकार ने उदारीकरण के लिए एक मसौदा नीति जारी की है, जिस पर तीन प्रांतों ने सहमति जताई है और एक ने आपत्ति जताई है. चर्चा के दायरे में आने वाले अन्य क्षेत्रों में इस्लामी बैंकिंग से संबंधित सुधार और टैक्‍सेशन सिस्‍टम में और बदलाव शामिल हैं। 

  • 45 वर्षों की शांति और मानवीय सेवा के लिए न्यू जर्सी में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का सम्मान

    45 वर्षों की शांति और मानवीय सेवा के लिए न्यू जर्सी में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का सम्मान

    न्यू जर्सी
    पिछले 45 वर्षों से गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने विविध समुदायों और संस्कृतियों के बीच शांति, मानवीय मूल्यों और मानव-हृदयों के बीच आत्मीय जुड़ाव को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य किया है। न्यू जर्सी की अपनी हाल की यात्रा के दौरान उनकी साढ़े चार दशक लंबी इस मानवसेवा और शांति-निर्माण की यात्रा को न्यू जर्सी राज्य विधानमंडल तथा एडिसन और फ्रैंकलिन टाउनशिप ने औपचारिक रूप से सम्मानित किया। यह सम्मान शांति-स्थापना, जन-कल्याण और मानवीय सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान की स्वीकृति है।

    इन सम्मानों के साथ उत्तरी अमेरिका में गुरुदेव को प्राप्त नागरिक सम्मान की एक सुदीर्घ श्रृंखला में एक और अध्याय जुड़ गया है। अब तक अमेरिका और कनाडा के 54 शहरों ने गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के सम्मान में ‘श्री श्री रविशंकर दिवस’ घोषित किए हैं। ये घोषणाएँ उनके मानवीय सरोकारों, शांति के प्रयासों और अधिक सुदृढ़ एवं संवेदनशील समुदायों के निर्माण में उनके योगदान की सार्वजनिक स्वीकृति हैं।

    23 सितंबर को न्यूयॉर्क स्थित सेंट जॉन द डिवाइन कैथेड्रल में खचाखच भरे सभागार को संबोधित करते हुए गुरुदेव ने कहा, “एकाकीपन लोगों की अनुपस्थिति नहीं है; यह उस आत्मीय उपस्थिति के अनुभव का अभाव है, जिसे हृदय महसूस कर सके।”

    आंतरिक शक्ति की चर्चा करते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वास्तविक सामर्थ्य भीतर से प्रस्फुटित होता है। परिस्थितियाँ कितनी ही विषम क्यों न हों, अपने भीतर केंद्रित और संतुलित बने रहने की क्षमता ही उस शक्ति की सच्ची अभिव्यक्ति है।

    न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी में अपने हालिया सार्वजनिक संवादों के दौरान गुरुदेव ने निरंतर इस विचार को रेखांकित किया कि आंतरिक कल्याण को सामूहिक कल्याण से अलग करके नहीं देखा जा सकता। एक शांत और संतुलित व्यक्ति ही शांत परिवार की नींव रखता है, और शांत परिवारों से ही शांतिपूर्ण समुदायों का निर्माण होता है। अंततः यही आंतरिक शांति और मानवीय संवेदना मिलकर एक अधिक शांतिपूर्ण विश्व की आधारभूमि तैयार करती है।

  • होर्मुज में अमेरिकी लेजर सिस्टम का इस्तेमाल, ड्रोन-मिसाइलों पर निशाना

    होर्मुज में अमेरिकी लेजर सिस्टम का इस्तेमाल, ड्रोन-मिसाइलों पर निशाना

    तेहरान 
    अमेरिकी सैन्य बल अब लेजर सिस्टम का इस्तेमाल असल मुकाबले में करने लगे हैं. पेंटागन ने पुष्टि की है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरानी ड्रोन और आने वाली क्रूज मिसाइलों को लेजर से मार गिराया जा रहा है. पारंपरिक इंटरसेप्टर मिसाइलों की तुलना में इसकी लागत बहुत कम है।  एक पारंपरिक मिसाइल लाखों डॉलर की पड़ती है जबकि लेजर शॉट की कीमत बिजली के खर्च जितनी ही होती है. इसी वजह से यह तकनीक आकर्षक बन गई है. उसी समय अमेरिकी दक्षिणी सीमा पर कार्टेल द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ड्रोनों के खिलाफ भी इस तकनीक का परीक्षण चल रहा है। ड्रग तस्करी और निगरानी के लिए छोटी ड्रोनें लगातार समस्या बन रही थीं. लेजर सिस्टम इन्हें तेजी से और कम खर्च में नष्ट कर सकता है. दशकों के शोध और विकास के बाद लेजर हथियार अब प्रयोगशाला से निकलकर युद्ध के मैदान तक पहुंच गए हैं। 

    लेजर सिस्टम कैसे काम करता है?
    उच्च ऊर्जा लेजर एक शक्तिशाली किरण पैदा करता है जो लक्ष्य पर टारगेट किया जाता है. टारगेट जला जाता है. उसके सेंसर और संरचना को नुकसान पहुंचाती है. ड्रोन या मिसाइल जैसे छोटे और तेज लक्ष्यों के खिलाफ यह बहुत प्रभावी साबित हो रहा है. पारंपरिक हथियारों में गोला-बारूद सीमित होता है लेकिन लेजर के लिए सिर्फ बिजली की जरूरत होती है. जहाज या जमीनी वाहन पर लगे जनरेटर से यह लगातार काम कर सकता है। 

    आर्मी ने वार-रेडी यानी युद्ध के लिए तैयार हाई एनर्जी लेजर सिस्टम के लिए 50 करोड़ डॉलर का ठेका दिया है. यह ठेका दिखाता है कि अब यह तकनीक सिर्फ प्रयोग नहीं बल्कि वास्तविक तैनाती के चरण में पहुंच चुकी है. दिलचस्प बात यह है कि ऑपरेटर इन्हें निशाना बनाने के लिए रीकॉन्फिगर्ड एक्सबॉक्स कंट्रोलर का इस्तेमाल कर रहे हैं. गेमिंग कंट्रोलर सस्ते, आसानी से उपलब्ध और सैनिकों के लिए परिचित होते हैं. इससे ट्रेनिंग का समय भी कम लगता है। 

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है. यहां ईरानी ड्रोन और मिसाइलों का खतरा लगातार बना रहता है. पारंपरिक रक्षा प्रणालियां महंगी पड़ती हैं. स्टॉक भी सीमित होता है. लेजर सिस्टम इस समस्या का समाधान पेश करता है. यह न सिर्फ ड्रोन बल्कि कम ऊंचाई पर आने वाली क्रूज मिसाइलों को भी निशाना बना सकता है. लागत कम होने से लंबे समय तक लगातार रक्षा संभव हो जाती है।   

    दक्षिणी सीमा पर स्थिति अलग है. यहां मुख्य चुनौती छोटी और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली ड्रोनें हैं जो तस्करी के लिए इस्तेमाल होती हैं. पारंपरिक हथियार इनके खिलाफ बेकार साबित होते हैं. लेजर सटीक और कम कोलेटरल डैमेज वाला विकल्प देता है. दोनों जगहों पर परीक्षण और असल इस्तेमाल से सेना को अनुभव मिल रहा है कि अलग-अलग परिस्थितियों में यह तकनीक कितनी कारगर है।  

    फायदे और चुनौतियां
    सबसे बड़ा फायदा लागत का है. एक लेजर शॉट की कीमत कुछ डॉलर में सिमट जाती है जबकि एक इंटरसेप्टर मिसाइल कई लाख डॉलर की हो सकती है. दूसरा फायदा गति का है. लेजर प्रकाश की गति से चलता है इसलिए चकमा देना मुश्किल होता है. तीसरा फायदा यह कि गोला-बारूद खत्म होने की चिंता नहीं रहती। 

    फिर भी चुनौतियां बाकी हैं. खराब मौसम, धूल,धुंध या बारिश लेजर की प्रभावशीलता कम कर सकती है. उच्च ऊर्जा सिस्टम को ठंडा रखने के लिए अच्छी कूलिंग व्यवस्था चाहिए. बिजली की निरंतर आपूर्ति भी जरूरी है. इन सीमाओं के बावजूद तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है और सेना इसे व्यावहारिक बना रही है।   

    निर्देशित ऊर्जा हथियार भविष्य के युद्ध की तस्वीर बदल सकते हैं. ड्रोन स्वार्म यानी झुंड में आने वाले कई ड्रोनों के खिलाफ पारंपरिक हथियार अपर्याप्त साबित हो सकते हैं. लेजर एक के बाद एक लक्ष्य को तेजी से निपटा सकता है. समुद्री जहाजों, जमीनी ठिकानों और यहां तक कि विमानों पर भी इनकी तैनाती बढ़ने की उम्मीद है।  

    एक्सबॉक्स कंट्रोलर जैसी आम चीजों का इस्तेमाल बताता है कि सेना व्यावहारिक और सस्ते समाधान अपना रही है. इससे न सिर्फ लागत घटती है बल्कि सैनिकों के लिए सिस्टम संचालित करना आसान हो जाता है. पेंटागन का जोर इस बात पर है कि दशकों की रिसर्च अब असली नतीजे दे रही है। 

    कुल मिलाकर अमेरिकी सेना का लेजर सिस्टम इस्तेमाल करना सैन्य तकनीक में एक बड़ा बदलाव है. होर्मुज से लेकर दक्षिणी सीमा तक इसका प्रयोग साबित करता है कि निर्देशित ऊर्जा हथियार अब कल्पना नहीं बल्कि हकीकत बन चुके हैं. आने वाले वर्षों में इनकी संख्या और क्षमता दोनों बढ़ने वाली हैं. यह विकास न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की सैन्य रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है। 

  • UN मुख्यालय में शहबाज शरीफ से हाफिज सईद पर सवाल, बिना जवाब आगे बढ़े

    UN मुख्यालय में शहबाज शरीफ से हाफिज सईद पर सवाल, बिना जवाब आगे बढ़े

    लाहौर 

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में में किरकिरी झेलनी पड़ गई। उनसे जब पत्रकारों ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक आतंकवादी हाफिज सईद के बारे सवाल पूछा तो वह वहां से भाग खड़े हुए। उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। बताते चलें कि 81वीं UN जनरल असेंबली के लि जैसे जब शहबाज शरीफ UN मुख्यालय में दाखिल हुए तो पत्रकारों ने उनसे पूछा, "प्रधानमंत्री आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?" शरीफ ने कोई जवाब नहीं दिया।

    बाद में जब वे वहां से निकले तो उनसे फिर पूछा गया कि पाकिस्तान हाफिज सईद पर कब मुकदमा चलाएगा, लेकिन प्रधानमंत्री ने एक बार फिर जवाब देने से इनकार कर दिया।

    इससे एक दिन पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाते हुए आईना दिखाया। भारत ने साफ शब्दों में कहा कि पाक को सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के बजाय कर्ज में डूबी बदहाल अर्थव्यवस्था को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

    जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान के ध्यान भटकाने वाले एजेंडे की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की प्राथमिकताएं पूरी तरह गलत हैं और उसका भारतविरोधी रवैया उसकी डूबती अर्थव्यवस्था को नहीं बचा सकता। त्यागी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नागरिकों के दमन को उजागर किया। उन्होंने बताया कि पीओके में भोजन, ईंधन और दवाओं की आपूर्ति रोककर पाकिस्तानी सरकार किस तरह प्रदर्शनकारियों के साथ जानलेवा हिंसा कर रही है।

    26/11 हमले में आरोपी है हाफिज सईद
    हाफिज मोहम्मद सईद लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है और भारत में उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत नामित आतंकवादी किया गया है. वह 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में भारत में वांटेड आरोपी है. कई हमलों का मास्टरमाइंड है. पाकिस्तान में वह खुला घूमता है और आईएसआई पर उसे सुरक्षा देने के आरोप लगते हैं। 

    हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले की जांच से जुड़े मामले में भी NIA ने हाफिज सईद का नाम अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी नंबर 8 के तौर पर रखा है. NIA का आरोप है कि 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम हमले की बड़ी साजिश में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिव शामिल थे। 

    UN में भारत ने पाकिस्तान को घेरा
    शहबाज शरीफ से ये सवाल ऐसे वक्त पूछे गए, जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान पर आतंकवाद और आर्थिक संकट को लेकर हमला बोला था. भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान से कहा कि उसे दूसरे देशों की जमीन पर नजर रखने और सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के बजाय अपनी अर्थव्यवस्था और विकास पर ध्यान देना चाहिए। 

    भारत ने पाकिस्तान में मानवाधिकारों के हालात का भी मुद्दा उठाया. क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में नागरिकों के मारे जाने और जरूरी सामान की सप्लाई से जुड़े आरोपों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को दूसरे देशों के मामलों पर सवाल उठाने के बजाय अपने यहां के हालात पर ध्यान देना चाहिए। 

    कश्मीर भारत का अहम हिस्सा
    जम्मू-कश्मीर के भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा होने की बात दोहराते हुए भारत ने मांग की कि पाकिस्तान अपने गैरकानूनी कब्जे वाले सभी इलाकों को तुरंत खाली करे।

    नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र में सिंधु जल संधि के मसले पर पाकिस्तान की ओर से बांटे गए पाकिस्तनी पत्र को खारिज कर दिया। पाकिस्तान ने कथित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ के फैसले को लेकर ये पत्र वितरित किए थे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने कहा कि पाकिस्तान झूठ फैलाकर अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं को गलत तरीके से पेश कर रहा है।

  • अमेरिका ने किया MQ-20 का ऑटोनॉमस टेस्ट, बिना पायलट उड़ान भरने में सक्षम ड्रोन

    अमेरिका ने किया MQ-20 का ऑटोनॉमस टेस्ट, बिना पायलट उड़ान भरने में सक्षम ड्रोन

    न्यूयॉर्क

    MQ-20 एवेंजर जनरल एटॉमिक्स द्वारा विकसित जेट इंजन वाला बिना पायलट वाला फाइटर जेट है. यह विमान 741 km/hr की गति से उड़ सकता है. 50,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है. करीब 20 घंटे हवा में रह सकता है. अमेरिकी नौसेना ने इसे अपने भविष्य के कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के रूप में नहीं चुना है। 
     
    बल्कि यह ऑटोनॉमस, मिशन प्लानिंग और कमांड-कंट्रोल सिस्टम के विकास के लिए टेस्ट एयरक्राफ्ट यानी सरोगेट के रूप में काम कर रहा है. जनरल एटॉमिक्स के अनुसार यह भूमिका पिछले पांच साल से ज्यादा समय से निभा रहा है, भले ही नए खास बनाए गए डेमोंस्ट्रेटर विमान आ चुके हों। 

    10 सितंबर को हुए ग्रे फ्लैग 2026 प्रदर्शन में अमेरिकी नौसेना की स्ट्राइक प्लानिंग एंड एग्जिक्यूशन सिस्टम्स टीम ने एक पूरा मिशन तैयार किया, उसे MQ-20 को भेजा और बाद में परिणामों की समीक्षा की. यह सिर्फ बिना पायलट के उड़ान भरने का परीक्षण नहीं था. असल चुनौती यह है कि कमांडर ऑटोनॉमस विमानों को बड़े युद्ध योजना का हिस्सा कैसे बनाएं। 

    सीएएमपी तकनीक क्यों खास है?
    इस परीक्षण का मुख्य आधार कोलैबोरेटिव ऑटोनॉमी मिशन प्लानिंग यानी CAMP है. सीएएमपी योजना को अलग-अलग विमान के लिए लागू करने की भूमिका, कार्य, समय, अधिकार और सीमाओं में बदल देता है. ऑटोनॉमस सिस्टम को पता चल जाता है कि उसे क्या हासिल करना है और किन सीमाओं के अंदर रहना है। 

    अगर हर ऑटोनॉमस विमान के लिए लगातार एक ऑपरेटर उड़ान पथ नियंत्रित करे तो ज्यादा विमान तैनात करने पर कंट्रोलर, ग्राउंड स्टेशन और संचार क्षमता भी उतनी ही बढ़ानी पड़ेगी. इससे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की उपयोगिता सीमित हो जाती है. सीएएमपी एक अलग मॉडल पेश करता है। 

    ऑपरेटर मिशन के उद्देश्य, समय, अधिकार और पाबंदियां तय करते हैं. बाकी ऑटोनॉमस विमान खुद संभालता है. इससे ऑपरेटर का बोझ कम होता है और भविष्य में कई कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को आसानी से शामिल किया जा सकता है। 

    बिगड़े संचार माहौल में भी काम करने की क्षमता
    यह क्षमता विरोधी के जैमिंग या सैटेलाइट संचार बाधित होने पर भी महत्वपूर्ण है. अगर विमान को पहले से अपना मिशन, समय, इलाका और सीमाएं पता हों तो वह सीधा कंट्रोल टूटने पर अपना काम जारी रख सकता है। 

    पहले नवंबर 2024 में अमेरिकी नौसेना ने पैटक्सेंट रिवर से कैलिफोर्निया में उड़ रहे MQ-20 को लो-अर्थ-ऑर्बिट सैटेलाइट के जरिए नियंत्रित किया था. वह लंबी दूरी के कमांड-कंट्रोल का परीक्षण था. ग्रे फ्लैग 2026 मिशन स्तर की ऑटोनॉमस की ओर बढ़ता है। 

    MQ-20 परिपक्व जेट पावर्ड प्लेटफॉर्म है. इस पर नए सॉफ्टवेयर, ऑटोनॉमस फंक्शन और संचार आर्किटेक्चर का परीक्षण आसानी से हो सकता है. इसकी गति, उड़ान अवधि और मिशन सिस्टम असल युद्ध विमान के करीब हैं. जनवरी 2026 में जनरल एटॉमिक्स ने बताया कि एवेंजर ने सरकारी रेफरेंस ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर के साथ क्रूड एग्रेसर विमान के खिलाफ लाइव ऑटोनॉमस इंटरसेप्ट भी किया। 

    ऑनबोर्ड सेंसर से खुद से फैसले लिए. इससे भविष्य के कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर विकसित करने में मदद मिल रही है. सीएएमपी की असली ताकत इंटरऑपरेबिलिटी में है. भविष्य में ऑटोनॉमस विमान, हथियार और अन्य सिस्टम एक नेटवर्क में जुड़ेंगे. यह ऑटोनॉमस विमान, हथियार और अन्य नेटवर्क्ड सिस्टम को एक ही मिशन उद्देश्य के इर्द-गिर्द कॉर्डिनेट करने में मदद कर सकता है।