Category: विदेश

  • अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों पर जयशंकर बोले, भारत की सुरक्षा चिंताओं को समझना होगा

    अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों पर जयशंकर बोले, भारत की सुरक्षा चिंताओं को समझना होगा

    नई दिल्ली
    भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संबंधों पर दो टूक बयान दिया है. जयशंकर के मुताबिक, जब तक भारत की सुरक्षा चिंताओं, खासकर सीमा पार आतंकवाद को लेकर पश्चिमी देशों और सहयोगियों का रुख पूरी तरह साफ नहीं होगा, तब तक द्विपक्षीय रिश्तों पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है.

    जयशंकर न्यूयॉर्क स्थित 'एशिया सोसाइटी' में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में पहुंचे थे. इस दौरान पूर्व अमेरिकी राजनयिक और एशिया सोसाइटी के फेलो डेनियल रसेल ने भारत-अमेरिका संबंधों और पिछले कुछ महीनों में ट्रेड और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछा.

    इस पर जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि अगर कोई देश भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी करना चाहता है, तो उसे भारत की बुनियादी संवेदनशीलता को समझना होगा.

    'एक पड़ोसी देश के प्रायोजित आतंकवाद का…'
    जयशंकर ने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा, 'हमारे लिए जो बात सबसे ज्यादा अहम है, वो आतंकवाद का मुद्दा है. हम दुनिया के उन गिने-चुने देशों में से हैं, जिन्हें दशकों से एक पड़ोसी देश के प्रायोजित आतंकवाद का सामना करना पड़ा है.'

    भारतीय विदेश मंत्री ने आगे कहा कि अगर भारत के इस सबसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर उसके साझीदार देशों में पर्याप्त समझ, सराहना या संवेदना नहीं होगी, तो ये स्वाभाविक रूप से आपसी संबंधों पर असर डालेगा.

    डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से अमेरिका और पाकिस्तान काफी करीब आए हैं. पिछले कुछ समय में अमेरिका के रुख और उसकी पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ बढ़ाई गई मुलाकातों पर भारत ने अपनी पैनी नजर रखी है.

    'आपसी तालमेल और समझ बेहतर…'
    जयशंकर ने इस दौरान ये भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच के रिश्ते बेहद अहम हैं और वो उम्मीद करते हैं कि ये साझेदारी एक अच्छी दिशा में आगे बढ़ेगी. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि हमें जमीनी सच्चदाइयों और उन मुद्दों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए जिनका हम सामना कर रहे हैं. जब तक इन मुद्दों पर आपसी तालमेल और समझ बेहतर नहीं होगी, तब तक रिश्तों में वो मजबूती नहीं आ सकेगी जिसकी उम्मीद की जाती है.

  • ईरान से टकराव पर ट्रंप का दावा, जीत के साथ तेल की कीमतें गिरने की उम्मीद

    ईरान से टकराव पर ट्रंप का दावा, जीत के साथ तेल की कीमतें गिरने की उम्मीद

    वाशिंगटन
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध को लेकर एक फिर हुंकार बनी है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बहुत जल्द ही ईरान के खिलाफ युद्ध जीतने वाले हैं। बता दें कि पिछले काफी दिनों से दोनों देशों के बीच मामला गर्म चल रहा है। जहां ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। वहीं, ईरान ने भी कहा है कि वह अमेरिका पर दोबारा हमले करेगा और उसे बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा।

    इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि ईरान के साथ टकराव जल्द ही खत्म हो जाएगा। लेकिन उन्होंने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया है। ट्रंप ने रविवार को पीजीए टूर प्रेसिडेंट्स कप के दौरान फॉक्स न्यूज से बात करते हुए कहा कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि हम यह युद्ध बहुत जल्द जीत लेंगे। उन्होंने कहा कि टकराव खत्म होने के बाद दुनियाभर में तेल की कीमतें काफी गिर सकती हैं।

    उनसे जब पूछा गया कि क्या अमेरिका मध्यावधि चुनावों से पहले और हमले कर सकता है, तो ट्रंप ने इस संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि मेरा मतलब है, ऐसा हो सकता है लेकिन मैं अभी ऐसा कहना नहीं चाहता। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका को पहले ही काफी सैन्य सफलताएं मिल चुकी हैं और ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है।

    ट्रंप ने कहा कि ईरान में महंगाई बहुत अधिक बढ़ गई है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यह 318 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ये दावे ट्रंप ने किए थे और उनके बयानों में इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई थी। गौरतलब है कि ये टिप्पणियां ट्रंप द्वारा होर्मुज को फिर से खोलने और टकराव खत्म करने के ईरान के प्रस्ताव को खारिज करने के एक दिन बाद आईं। ट्रंप ने रविवार को एक्सिओस के साथ एक अलग बातचीत में कहा कि अमेरिकी वार्ताकार इस सप्ताह ईरानी प्रतिनिधियों के साथ और बातचीत कर सकते हैं।

  • अमेरिका में भारतीय दवाओं पर 100% टैरिफ से राहत, जानें किन दवाओं पर शून्य शुल्क

    अमेरिका में भारतीय दवाओं पर 100% टैरिफ से राहत, जानें किन दवाओं पर शून्य शुल्क

    वाशिंगटन
    अमेरिका भारत समेत कई देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कर रहा है। हालांकि ज्यादा टैरिफ लगाने से अमेरिका के लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ता है। ऐसे टैरिफ से निर्यात करने वाले देश ही नहीं बल्कि अमेरिका को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। दवाइयों के मामले में भी यह किसी से छिपा नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप ने दवाओं पर 100 फीसदी टैरिफ की बात कही थी। हालांकि अब ट्रंप प्रशासन कई खास दवाइयों को मूल्यानुसार शुल्क से छूट देने का विचार कर रहा है। इससे भारत की दवा कंपनियों को भी राहत मिलेगी।

    रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका भारत सहित 20 देशों से आयात की जाने वाली दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और उनसे जुड़े अवयवों परकोई मूल्यानुसार शुल्क नहीं लगाएगा। विश्व सीमा शुल्क संगठन के अनुसार मूल्यानुसार शुल्क, कर योग्य वस्तुओं के मौद्रिक मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत होता है।

    घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर अमेरिका का जोर
    अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने फेडरल रजिस्टर में इन देशों की सूची प्रकाशित की है। विभाग 29 सितंबर से कुछ पेटेंट प्राप्त दवा आयात और उनसे जुड़े घटकों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है। घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो अप्रैल को पेटेंट प्राप्त दवाओं, बायोलाजिक्स और उनसे संबंधित अवयवों के आयात पर शुल्क लगाने के संबंध में एक घोषणापत्र जारी किया था।

    कौन सी दवाइयों पर मिलेगी राहत
    शून्य प्रतिशत शुल्क दर के लिए पात्र उत्पादों में दुर्लभ बीमारियों की सभी दवाएं, बांझपन उपचार, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी, एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स (एडीसी) और पशु औषधियां शामिल हैं। इन दवाओं में इस्तेमाल होने वाले अवयव भी शून्य प्रतिशत शुल्क दर के दायरे में आएंगे।

    भारत के अलावा इन देशों को भी राहत
    भारत के अलावा शून्य शुल्क दर वाली श्रेणी में शामिल अन्य देश अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, उत्तरी मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम हैं।

    नोटिस में कहा गया कि इन देशों से आने वाले पात्र उत्पादों को शून्य प्रतिशत शुल्क का लाभ इसलिए मिल सकता है क्योंकि अमेरिका के साथ उनका इस समय व्यापार और सुरक्षा ढांचा समझौता है या आने वाले दिनों में यह समझौता हो सकता है। यह छूट व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत दवाओं और दवा अवयवों के आयात पर दी जा रही है। एक परिशिष्ट में नामित कंपनियों के लिए यह शुल्क 31 जुलाई से लागू हो चुका है और अन्य दायरे में आने वाली कंपनियों पर यह 29 सितंबर से लागू होगा। वाणिज्य विभाग के नोटिस के अनुसार, जेनेरिक दवा उत्पाद और उनसे जुड़े अवयव धारा 232 के तहत लगने वाले दवा शुल्क के दायरे में नहीं आते हैं।

  • नेपाल में फिर प्राकृतिक आपदा का कहर, सैकड़ों घर तबाह; 21 की मौत

    नेपाल में फिर प्राकृतिक आपदा का कहर, सैकड़ों घर तबाह; 21 की मौत

    काठमांडू

    नेपाल में चार दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड के कारण कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई. जबकि पांच लोग लापता हैं और पांच अन्य घायल हो गए. भीषण बारिश, भयंकर तूफान, बाढ़, भूस्खलन और हिमस्खलन से देश के कुछ हिस्से बुरी तरह प्रभावित हुए । 

    नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के एक ऑफिशियल अपडेट के मुताबिक लैंडस्लाइड की वजह से ज़्यादातर मौतें हुई. इस दौरान 14 लोगों की मौत हो गई और पांच लोग लापता हैं. बाढ़ की वजह से चार मौतें हुई, जबकि लगातार भारी बारिश की वजह से तीन मौतें हुई। 

    खराब मौसम ने देशभर में 247 परिवारों को सीधे तौर पर प्रभावित किया, जिससे कई घर पूरी तरह से तबाह हो गए और 80 अन्य को आंशिक नुकसान हुआ. एनडीआरआरएमए ने बताया कि यह बंगाल की खाड़ी से बने एक कम दबाव वाले सिस्टम के बाद हुआ है, जिससे 24-27 सितंबर तक कई इलाकों में बहुत ज़्यादा बारिश हुई। 

    3000 लोगों सुरक्षित इलाकों में पहुंचाया गया

    एनडीआरआरएमए ने पुष्टि की कि बढ़ते जल स्तर और भूस्खलन के मद्देनजर इमरजेंसी टीमों ने लगभग 3,000 निवासियों को ज़्यादा जोखिम वाले इलाकों से सुरक्षित इलाकों में पहुंचाया. सशस्त्र पुलिस बल इकाइयों और स्थानीय अधिकारियों के साथ बचाव कार्यों में विस्थापित परिवारों को खाना और जरूरी राहत दी गई. जाजरकोट, म्याग्दी और संखुवासभा के बुरी तरह प्रभावित पहाड़ी जिलों में फंसे हुए लोगों को इमरजेंसी हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करके निकाला गया। 

    9000 विदेशी पर्यटकों और ट्रेकर्स

    आपदा प्राधिकरण ने बताया कि बारिश के दौरान नेपाल में लगभग 9,000 विदेशी पर्यटकों और ट्रेकर्स के सक्रिय होने का अनुमान है. नेपाल पर्यटन बोर्ड और स्थानीय ट्रेकिंग एजेंसियों के साथ मिलकर एनडीआरआरएमए ने अंग्रेजी में सुरक्षा सलाह जारी की, जिसमें कमजोर इलाकों में पर्यटकों को आश्रय लेने और हालात सुधरने तक यात्रा रोकने की सलाह दी गई। 

    106 जगहों पर 100 एमएम से अधिक बारिश

    एनडीआरआरएमए के मॉनिटरिंग स्टेशनों ने चार दिनों में देश भर में 106 जगहों पर 100 एमएम से ज़्यादा बारिश रिकॉर्ड की. सबसे ज़्यादा बारिश दुमकुआली, नवलपरासी (बरदाघाट सुस्ता ईस्ट) में हुई, जहाँ 455.2 एमएम बारिश हुई. इसके बाद कास्की के पोखरा में 407.2 एमएम और तनहुन के अंबू खैरेनी में 373.2 एमएम बारिश हुई। 

    तूफान के पीक के दौरान सुरक्षा जोखिमों को मैनेज करने के लिए एनडीआरआरएमए के सेंट्रल मॉनसून रिस्पॉन्स कमांड सेंटर ने लोकल अधिकारियों को कमज़ोर सड़क हिस्सों पर गाड़ियों का ट्रैफ़िक रोकने का निर्देश दिया और प्रभावित जिलों में स्कूलों की छुट्टियां घोषित कर दी। 

    5000 से ज्यादा डायरेक्ट एसएमएस अलर्ट

    एजेंसी ने फील्ड रेस्पॉन्डर्स को 5,000 से ज़्यादा डायरेक्ट एसएमएस अलर्ट भी भेजे जबकि बाढ़ संबंधित विभाग ने बाढ़ वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को 814,000 से ज़्यादा अर्ली-वॉर्निंग टेक्स्ट मैसेज भेजे. एनडीआरआरएमए की प्रवक्ता शांति बसनेट ने कहा कि सभी 77 जिलों में डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस और तीनों नेशनल सिक्योरिटी एजेंसियां ​​हाई अलर्ट पर हैं क्योंकि डेटा कलेक्शन और रिकवरी की कोशिशें जारी हैं। 

    दिन में पहले शेयर किए गए एक अलग अपडेट में एनडीआरआरएमए ने लैंडस्लाइड से हुई रुकावटों के कारण बड़ी नदी बेसिन के किनारे रहने वाली आबादी के लिए हाई-अलर्ट एडवाइजरी जारी की. अथॉरिटी ने बताया कि मनांग के डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर चामे में लैंडस्लाइड से मार्सयांगडी नदी के पानी के बहाव में रुकावट आई। 

    इसी तरह मस्तंग में थासांग रूरल म्युनिसिपैलिटी के वार्ड 3 में स्थित निसी में एक और लैंडस्लाइड ने काली गंडकी नदी के बहाव को थोड़ा रोक दिया. एनडीआरआरएमए ने दोनों नदियों के निचले इलाकों में रहने वालों से बहुत ज़्यादा सावधान रहने को कहा है, क्योंकि अधिकारी संभावित फ्लैश फ्लड के खतरों पर नजर रख रहे हैं। 

    उफान पर नारायणी नदी

    अधिकारियों ने रविवार सुबह सेंट्रल नेपाल में नारायणी नदी के किनारे रहने वाले सभी लोगों के लिए चेतावनी जारी की, क्योंकि नदी 9 मीटर के चेतावनी लेवल को पार कर बस्तियों में घुस गई थी. चितवन जाने वाले हाईवे, जो पूरे देश में आने-जाने का रास्ता है, भी बंद हैं, और कई जगहों पर लैंडस्लाइड की खबर है। 

    अधिकारी के मुताबिक कई जगहों पर लैंडस्लाइड की वजह से सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में रुकावट आई है, जबकि लगातार बारिश से हालत और खराब हो रहे हैं. विलेज काउंसिल के डिप्टी चेयरपर्सन प्रेम बहादुर घरती मगर ने एएनआई को फोन पर बताया, 'बागलुंग जिले के निशिखोला विलेज काउंसिल में लैंडस्लाइड में दबने से चार लोगों की मौत हो गई। 

    जिले से होकर बहने वाली कालीगंडकी नदी भी घरों और पुलों को बहा ले गई जिससे रोड कनेक्टिविटी कट गई है. बाढ़ और बाढ़ के खतरे के बाद कई जिलों में सिक्योरिटी फोर्स लोगों को निकाल रही हैं और हजारों लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जा रही है। 

    इसके अलावा नेपाल एक और मुसीबत से जूझ रहा है, क्योंकि नेपाल के ऊंचाई वाले मनांग जिले में हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप में हिमस्खलन के बाद दो लाशें बरामद हुई. एनडीआरआरएमए ने नेपाल पुलिस हेडक्वार्टर के जरिए एक्स पर एक पोस्ट में कन्फर्म किया कि मौके पर भेजे गए सर्च और रेस्क्यू कर्मचारियों ने ऊंचाई वाले कैंप में दो मरे हुए लोगों को बरामद किया। 

    हिमालयी देश में यह नई मुसीबत भोटेकोशी बाढ़ की त्रासदी के एक महीने बाद आई है, जिसमें अब तक 1400 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 6000 से ज़्यादा लोग लापता हैं. यह बाढ़ 26 अगस्त की सुबह रसुवा जिले में नदी किनारे की बस्तियों में आई, जिससे नुवाकोट और धाडिंग समेत आस-पास के इलाके तेज़ी से प्रभावित हुए। 

    इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान से इस घटना का असर साफ दिखता है. आठ चालू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (281 MW) और चार बन रहे (388 MW) डैमेज हो गए, जिससे 431.1 MW की जेनरेशन कैपेसिटी पर असर पड़ा. गलछी-बेत्रावती-रसुवागढ़ी रोड और पृथ्वी हाईवे के बड़े हिस्से या तो तबाह हो गए या बुरी तरह डैमेज हो गए। 

  • होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी ड्रोन पर ईरान का कब्जा, IRGC ने इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से पकड़ा

    होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी ड्रोन पर ईरान का कब्जा, IRGC ने इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से पकड़ा

    तेहरान
    ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना के एक ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (ड्रोन पनडुब्बी) को पकड़ा है। इसका नाम REMUS 600 ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल है। यह होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के बिछाए बारूदी सुरंगों का पता लगा रही थी। इस दौरान ईरानी नौसेना ने उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया और उसे वापस लौटने से पहले पकड़ लिया। इसे अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है। इससे होर्मुज को वैश्विक नौवहन के लिए खोलने के अमेरिका की कोशिशों पर भी पानी फिर सकता है।

    अमेरिकी नौसेना का 'रेमस 600' ईरान के कब्जे में
    ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का कहना है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका के एक ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (पानी के नीचे चलने वाले बिना चालक के वाहन) को पकड़ा है। उन्होंने इस बिना चालक वाले वाहन को "रेमस 600 नाम का एक एडवांस्ड सबमर्सिबल" बताया और कहा कि "अब यह फोर्स के विशेषज्ञों के पास है ताकि इससे जानकारी निकाली जा सके।"

    IRGC ने बताया- कैसे पकड़ी अमेरिकी 'पनडुब्बी'
    अर्ध-सरकारी फार्स समाचार एजेंसी ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बयान का हवाला देते हुए कहा, "IRGC नेवी के नाविकों ने खुफिया जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम की मदद से किए गए एक जटिल ऑपरेशन में, अमेरिका की 'आतंकवादी सेना' के एक एडवांस्ड ड्रोन को रोका, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में जासूसी का काम कर रहा था।" उन्होंने आगे कहा, "IRGC नेवी साफ तौर पर कहती है कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है, और हम खतरनाक गतिविधियों और बिना इजाज़त आवाजाही के खिलाफ सख्त और लगातार कार्रवाई कर रहे हैं।"

    रेमस 600 ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल क्या है?
    REMUS 600 ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल को कोंग्सबर्ग मैरीटाइम की सहायक कंपनी हाइड्रॉइड ने अमेरिकी नौसेना अनुसंधान कार्यालय के सहयोग से डिजाइन और विकसित किया है। इसका मकसद अमेरिकी नौसेना को महासागरीय और उथले जल दोनों क्षेत्रों में मिशनों में सहायता करना है। रेमस 600 उथले और गहरे पानी में समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने, निगरानी और टोही मिशन, जल सर्वेक्षण और जासूसी अभियानों को अंजाम दे सकता है। REMUS 600 AUV की लंबाई 4.3 मीटर और व्यास 0.7 मीटर है। तटस्थ रूप से तैरने की स्थिति में इसका वजन 320 किलोग्राम है। रेमस 600 2 मीटर/सेकंड की गति से 150 किमी से 200 किमी की दूरी तय कर सकता है और अधिकतम 600 मीटर की गहराई पर काम कर सकता है।

  • Top Gun के Maverick नहीं, Iceman से प्रभावित थे पापारो; अब चीन पर नजर, संभालते हैं हिंद-प्रशांत

    Top Gun के Maverick नहीं, Iceman से प्रभावित थे पापारो; अब चीन पर नजर, संभालते हैं हिंद-प्रशांत

    वाशिंगटन
    जब दुनिया जंग के मैदान में फतह हासिल करने को ही सबसे बड़ी कामयाबी मानती है, तब एक चार सितारा अमेरिकी सैन्य कमांडर की सोच बिल्कुल अलग नजर आती है।

    यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापारो का मानना है कि एक सच्चे फौजी की असली जीत युद्ध लड़ने में नहीं, बल्कि उसे होने से रोकने में है। आज उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन की आक्रामकता को थामना और ताइवान पर मंडराते युद्ध के बादलों को छांटना है।

    मावेरिक नहीं, शांत और अनुशासित आइसमैन बने प्रेरणा
    बात 1986 की है, जब सैमुअल पापारो पेंसिल्वेनिया में अपनी कॉलेज की पढ़ाई कर रहे थे। एक रोज वह अपनी मंगेतर मॉरीन के साथ मशहूर हॉलीवुड फिल्म टॉप गन देखने पहुंचे। उस दौर में टॉम क्रूज का बेपरवाह और आक्रामक किरदार मावेरिक हर नौजवान का हीरो था।

    मगर दिलचस्प बात यह रही कि पापारो को मावेरिक नहीं, बल्कि उसका प्रतिद्वंद्वी आइसमैन भा गया। पापारो का मानना था कि आइसमैन हवा-हवाई बातों पर नहीं, बल्कि अनुशासन, कड़ी मेहनत और सही फैसलों पर भरोसा करता था। यही सोच आगे चलकर उनके पूरे सैन्य जीवन की रीढ़ बनी।

    पापारो का वर्दी से पुश्तैनी नाता
    सैन्य सेवा का संस्कार पापारो को विरासत में मिला था, हालांकि उनका पारिवारिक परिवेश बेहद सादगी भरा था। उनके पिता सैमुअल सीनियर मरीन कोर में रहे और यूएसएस जॉन एफ. कैनेडी और किट्टी हॉक जैसे विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर्स की देखरेख का काम किया। वहीं उनके दादा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नौसेना के निर्माण दस्ते का हिस्सा रहे।

    उनकी मां ने दक्षिण फिलाडेल्फिया के हेयर सैलून में बाल धोने और स्टोर में मेकअप काउंटर पर काम करके घर संभाला। पापारो अपने परिवार की पहली पीढ़ी थे जिन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की।

    विलेनोवा कैथोलिक कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने टॉपगन फाइटर वेपन्स स्कूल से फाइटर पायलट की ट्रेनिंग ली और अमेरिकी नौसेना की अग्रिम कतार में शामिल हो गए।

    पापारो कैसे करते है आधी दुनिया पर निगरानी?
    एडमिरल पापारो आज दुनिया की सबसे विशाल सैन्य कमान की अगुवाई कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में करीब 4 लाख सैन्य व असैन्य कर्मी, 5 एयरक्राफ्ट कैरियर, लगभग 200 युद्धपोत और 1,000 से अधिक आधुनिक लड़ाकू विमान तैनात हैं।

    दूसरे विश्व युद्ध के बाद से प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का दबदबा रहा है, लेकिन अब शी जिनपिंग के नेतृत्व वाला चीन इस प्रभुत्व को सीधी चुनौती दे रहा है।

    रिपोर्टों के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति ने अपनी सेना को 2027 तक ताइवान पर नियंत्रण करने लायक ताकत हासिल करने का लक्ष्य दे रखा है। ऐसे में पापारो का दायित्व सिर्फ सीमाएं संभालना नहीं, बल्कि बीजिंग को यह अहसास कराना है कि ताइवान पर किसी भी सैन्य दुस्साहस का अंजाम कितना भयावह हो सकता है।

    पापारो विवादों से रखते दूरी
    एडमिरल पापारो सुर्खियों और गैर-जरूरी बयानों से दूर रहना पसंद करते हैं। बताया जाता है कि उन्होंने ईरान संकट के समय भी एयरक्राफ्ट कैरियर्स और विध्वंसकों से हवाई हमलों को लेकर अपनी स्वतंत्र सैन्य राय रखी थी और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के सामने भी स्थिति का सटीक आकलन पेश किया था।

    पापारो साफ कहते हैं कि वे जंग जीतकर कोई महान नायक बनने की होड़ में नहीं हैं। उनका एकमात्र मकसद प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखना और शांति की रक्षा करना है। उनकी सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि वे जिस जंग की तैयारी दिन-रात कर रहे हैं, दुनिया को वह जंग कभी लड़नी ही न पड़े।

  • Boeing 737 MAX पर फिर बढ़ी चिंता, सॉफ्टवेयर गड़बड़ी के बाद डिलीवरी रोकने की मांग

    Boeing 737 MAX पर फिर बढ़ी चिंता, सॉफ्टवेयर गड़बड़ी के बाद डिलीवरी रोकने की मांग

     वॉशिंगटन
     विमान बनाने वाली अमेरिकी कंपनी बोइंग के 737 MAX विमानों में सॉफ्टवेयर गड़बड़ी का पता चला है। इसकी वजह से लैंडिंग के दौरान पायलटों को ऑटोमेटेड फ्लाइट गाइडेंस नहीं मिल पाता है।

    कंपनी के डॉक्यूमेंट्स का हवाला देते हुए वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट दी है कि यह समस्या कॉकपिट सॉफ्टवेयर अपडेट से जुड़ी है और तब हो सकती है जब पायलट मिस्ड अप्रोच (लैंडिंग की कोशिश नाकाम होने) के बाद विमान का तय रूट बदलते हैं। ऐसी स्थिति में अगली बार लैंडिंग की कोशिश के दौरान ऑटोमेटेड नेविगेशन फीचर काम करना बंद कर सकता है।

    बोइंग ने क्या कहा?
    बोइंग ने कहा कि उसने पिछले महीने ही ऑपरेटर्स को इस समस्या के बारे में बता दिया था और वह इसके स्थायी समाधान पर काम कर रही है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को भेजे एक ईमेल बयान में बोइंग ने कहा, "हमने ऑपरेटर्स के साथ ऐसी स्थितियों को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए मौजूदा पायलट प्रक्रियाओं को मजबूत करने वाली जानकारी साझा की। हमारे इंजीनियर इस समस्या को हमेशा के लिए ठीक करने के लिए एक सॉफ्टवेयर अपडेट पर काम कर रहे हैं।"

    फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) सुरक्षा से जुड़ी संभावित समस्या की समीक्षा कर रहा है। एफएए ने कहा कि उसे कुछ 737 MAX विमानों में लगे फ्लाइट कंप्यूटर के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट से जुड़ी समस्या के बारे में जानकारी है।

    एजेंसी ने कहा, "एफएए एक सुधारात्मक कार्रवाई समीक्षा बोर्ड बुलाएगा और अगर सुरक्षा से जुड़ी कोई चिंता सामने आती है तो तुरंत कार्रवाई करेगा।" एफएए, बोइंग और एयरलाइंस अब यह पता लगा रहे हैं कि प्रभावित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कितनी बड़े पैमाने पर हो रहा है और क्या इस समस्या से सुरक्षा को कोई व्यापक खतरा है।

    विमानों की डिलीवरी पर रोक लगाने की मांग
    वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, साउथवेस्ट एयरलाइंस और यूनाइटेड एयरलाइंस ने बोइंग से कहा है कि वे उस सॉफ्टवेयर वाले नए 737 MAX विमानों की डिलीवरी रोक दें, जिनमें यह समस्या है। इसके बजाय उन्होंने पुराने सॉफ्टवेयर वर्शन वाले विमानों की मांग की है।

    इस नई समस्या के कारण MAX विमानों की जांच और बढ़ गई है। अभी यह साफ नहीं है कि इस सॉफ्टवेयर वाले कितने विमान अभी उड़ान भर रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब बोइंग के 737 MAX प्रोग्राम की रेगुलेटरी और सुरक्षा के लिहाज़ से कड़ी जांच हो रही है।

  • मोजतबा खामेनेई की सेहत पर फिर उठे सवाल, ईरानी धर्मगुरु ने अस्पताल हमले का किया दावा

    मोजतबा खामेनेई की सेहत पर फिर उठे सवाल, ईरानी धर्मगुरु ने अस्पताल हमले का किया दावा

    तेहरान
    28 फरवरी 2026 को ईरान पर हुए भीषण अमेरिकी और इजरायली हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की कमान संभालने वाले नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (56) को लेकर एक और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य और वरिष्ठ धर्मगुरु मोहसिन हैदरी ने कतरी टीवी चैनल 'अल अरबी' को दिए इंटरव्यू में दावा किया है कि शुरुआती हमले में घायल होने के बाद मोजतबा को इलाज के लिए तेहरान के एक अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन इसके बाद तीन अस्पतालों को निशाना बनाया गया और मोजतबा को तीसरी बार मलबे से जिंदा निकाला गया।

    इस खुलासे के बाद 56 साल के नए सुप्रीम लीडर की सेहत, उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति और उनके सीक्रेट लोकेशन को लेकर दुनिया भर में फिर से चर्चा छिड़ गई है।

    अस्पताल पर बमबारी के बाद मलबे से बचाया गया
    ईरानी धर्मगुरु मोहसिन हैदरी के अनुसार, 28 फरवरी को अली खामेनेई के तेहरान स्थित परिसर पर हुए हमले में मोजतबा गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

    हैदरी ने बताया, "जब दुश्मनों को पता चला कि वे घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं, तो तेहरान के तीन अलग-अलग अस्पतालों पर बमबारी की गई। मोजतबा खामेनेई तीसरे अस्पताल में मौजूद थे और उन्हें मलबे के नीचे से बाहर निकाला गया।"

    इस हमले के बाद से ही मोजतबा किसी अज्ञात स्थान पर चले गए हैं और तब से अब तक न तो उन्हें सार्वजनिक रूप से देखा गया है और न ही उनका कोई ऑडियो-वीडियो संदेश जारी हुआ है।

    गुप्त कमरे में वोटिंग और 8 मार्च का चुनाव
    असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का सचिवालय खुद अमेरिकी और इजरायली हमलों का शिकार बना था, जिसमें 8 लोग मारे गए थे और नए सुप्रीम लीडर से जुड़ी कई गोपनीय रिपोर्ट जलकर खाक हो गई थीं।

    हमले के बाद असेंबली के सदस्यों को बिना जगह बताए एक गुप्त कमरे में बुलाया गया। वहां सदस्यों ने कागज की पर्चियों पर अपने वोट लिखे।

    मोहसिन हैदरी ने बताया कि उन्होंने ही सबसे पहले मोजतबा खामेनेई के नाम का प्रस्ताव रखा था, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अली खामेनेई के बेटे को चुनने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी थी।

    मोजतबा को 59 में से 50 वोट मिले, जबकि 8 वोट अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को पड़े और 1 सदस्य ने मतदान में भाग नहीं लिया।

    हैदरी के मुताबिक, मोजतबा को खुद भी यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें चुना जा रहा है। उन्हें टीवी पर आधिकारिक ऐलान देखने के बाद ही अपने सुप्रीम लीडर बनने का पता चला।

    क्या वाकई जिंदा और स्वस्थ हैं मोजतबा खामेनेई?
    मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अमेरिका और ईरान की ओर से अलग-अलग विरोधी दावे किए जा रहे हैं।

    अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वे मानते हैं कि मोजतबा मरे नहीं हैं, लेकिन वे बेहद गंभीर रूप से घायल और अधमरे हो चुके हैं। ट्रंप के मुताबिक उनके शरीर का बायां हिस्सा (हाथ और पैर) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है।

    संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान न्यू यॉर्क पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में इन दावों को खारिज किया। पेजेशकियान ने दावा किया कि उन्होंने हाल ही में मोजतबा खामेनेई के साथ 7 घंटे लंबी बैठक की है और वे पूरी तरह से स्वस्थ और शासन चलाने में सक्षम हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता संभालने से पहले किसी भी औपचारिक पद पर न रहने वाले और "शैडो मैन" कहे जाने वाले मोजतबा खामेनेई की लंबे समय से जारी गुमनामी ईरान के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संशय को और बढ़ा रही है।

  • अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव में नरमी, टैरिफ कटौती के साथ AI पर भी बनेगी सहमति

    अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव में नरमी, टैरिफ कटौती के साथ AI पर भी बनेगी सहमति

    वाशिंगटन
    अमेरिका और चीन के बीच करीब 30 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ लगाने को लेकर सहमति बन गई है। दोनों देश आगे की आर्थिक बातचीत के लिए एक ट्रेड काउंसिल भी बनाएंगे। यह फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तीन दिन के अमेरिका दौरे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद हुआ। शी का यह दौरा 2015 के बाद वाशिंगटन का पहला दौरा था। वाइट हाउस के अनुसार, इस समझौते में अमेरिका से चीन जाने वाले सामान शामिल हैं। इनमें खेती का सामान, लकड़ी और कॉस्मेटिक्स हैं। चीन के छोटे उपकरण, खिलौने और सजावट के सामान पर भी बेहतर टैरिफ मिलेगा।

    चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश कुआलालंपुर में हुई पिछली बातचीत को आगे बढ़ाएंगे और व्यापार पर चर्चा जारी रखेंगे। यह समझौता मौजूदा ट्रेड डील को दो महीने बढ़ाने के बाद आया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इससे बड़े समझौते पर काम करने का समय मिलेगा।

    वाइट हाउस में लंबी मुलाकात और डिनर
    ट्रंप और शी ने गुरुवार को वाइट हाउस में कई घंटे बात की। इसके बाद दोनों ने सरकारी अधिकारियों और बिजनेस लीडर्स के साथ डिनर किया। इसमें अल्फाबेट के सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला, एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन भी शामिल थे। दोनों नेताओं ने स्थिरता और सहयोग पर जोर दिया। शी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे के फायदे वाला सहयोग बढ़ाना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को सीमा में रखना चाहिए।

    एआई पर भी बात होगी
    व्यापार के साथ-साथ दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भी बातचीत शुरू करने पर राजी हुए। इसमें मौकों और जोखिम दोनों पर चर्चा होगी। नवंबर में एआई पर एक और दौर होने की उम्मीद है। अधिकारी एआई से जुड़ी घटनाओं पर बात करने का एक चैनल भी बनाएंगे। वाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेता इस बैठक में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' की जगह 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द इस्तेमाल करने पर सहमत हुए। चीन ने इस शब्द का स्वागत किया और और बातचीत की अपील की।

    अन्य समझौते भी हुए
    शी के दौरे में सिर्फ व्यापार और एआई ही नहीं थे। दोनों देश एशिया-पैसिफिक आर्थिक सहयोग और जी-20 समिट जैसी बड़ी बैठकें आयोजित करने में एक-दूसरे की मदद करेंगे। ट्रंप और शी एक-दूसरे के देश में होने वाली बैठकों में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने यह भी तय किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर अलग-अलग देशों या संस्थाओं द्वारा लगाए गए ट्रांजिट टोल नहीं होने चाहिए।

    क्या है टैरिफ विवाद?
    अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लंबे व्यापार तनाव से जुड़ा है। अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार घाटा, व्यापार के तरीके और बौद्धिक संपदा के मुद्दों को टैरिफ लगाने की वजह बताया था। अमेरिका ने 2018 में चीनी सामान पर कई टैरिफ लगाना शुरू किया था। इसके बाद चीन ने अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाए। बीजिंग ने अमेरिकी कदमों को एकतरफा और नियमों के खिलाफ बताया। चीन ने कुछ रेयर अर्थ एलिमेंट पर निर्यात नियंत्रण और कुछ अमेरिकी कंपनियों पर रोक भी लगाई।

    इसके बाद दोनों तरफ टैरिफ बढ़ाने के कई दौर चले। चीन अमेरिका को आयात से ज्यादा निर्यात करता है, इसलिए उसके पास टैरिफ लगाने के लिए कम सामान थे। इसलिए उसने निर्यात नियंत्रण जैसे अन्य तरीके भी अपनाए। 2025 में भी यह सिलसिला चला। चीन ने अमेरिकी कदमों को धमकी और दबाव बताया था।

  • जिस आतंक को पाकिस्तान ने पाला, वही बना आफत; ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में नंबर-1

    जिस आतंक को पाकिस्तान ने पाला, वही बना आफत; ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में नंबर-1

    वशिंगटन
    जब सांप पालोगे तो एक दिन तुमको डसेगा ही', ये पुरानी कहावत इन दिनों पाकिस्तान पर सटीक बैठ रही है। भारत के खिलाफ जहां पाकिस्तान ने सांप यानी आतंकी पाले अब वहीं उसे डंस रहे हैं। ये बात कोई और कोई नहीं बल्कि खुद पाकिस्तान के लोग कह रहे हैं। हाल ही में अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने अपने ही मुल्क की सच्चाई दुनिया के सामने लाई। उन्होंने ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 में पाकिस्तान को आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देश बताए जाने पर रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि, पाकिस्तान अब आतंकी संगठनों को लेकर अपनाई गई अपनी पुरानी नीतियों के नतीजे भुगत रहा है।

    'सांप पालोगे तो डसेगा ही…'
    हुसैन हक्कानी ने एक्स पर ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान की स्थिति वाला एक ग्राफिक शेयर किया। इसके साथ उन्होंने लिखा कि जब कोई अपने घर के पीछे सांप पालता है तो एक दिन वही सांप घर के लोगों को भी काट सकता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने करीब 50 साल पहले चरमपंथी जिहादी संगठनों को हथियार और समर्थन देना शुरू किया था। अब वही पाकिस्तान आतंकवादी हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में सबसे ऊपर है। हक्कानी ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अपनी पुरानी नीतियों से कोई सबक सीखने के लिए तैयार है।

    ये बयान इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) की 2026 की रिपोर्ट जारी होने के बाद आई हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान को आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की लिस्ट में पहले स्थान पर रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़ी 1,139 मौतें हुईं और 1,045 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2013 के बाद पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों का आंकड़ा 2025 में सबसे ज्यादा रहा।

    ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान नंबर-1
    रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में 8.574 अंक हासिल किए और इस मामले में बुर्किना फासो से आगे रहा। पाकिस्तान हर साल इस इंडेक्स में आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 देशों में शामिल रहा है। हालांकि, 2025 में पहली बार पाकिस्तान इस सूची में नंबर-1 पर पहुंचा। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों में करीब 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह लगातार छठा साल है, जब देश में आतंकवाद से जुड़ी मौतों का आंकड़ा बढ़ा है। हालांकि, आतंकवादी घटनाओं की संख्या में थोड़ी कमी आई। 2024 में पाकिस्तान में 1,098 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो 2025 में घटकर 1,045 रह गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में किडनैंपिग घटनाओं में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई। 2024 में ऐसी 101 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जो 2025 में बढ़कर 655 हो गईं।

    वहीं, दुनियाभर में आतंकवाद से होने वाली मौतों में कमी आई है। 2025 में आतंकवाद के कारण 5,582 लोगों की मौत हुई, जो 2024 के मुकाबले 28 फीसदी कम है। इसी तरह आतंकवादी हमलों की संख्या भी करीब 22 फीसदी घटकर 2,944 रह गई। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस के मुताबिक, 81 देशों में आतंकवाद की स्थिति में सुधार हुआ, जबकि 19 देशों में हालात पहले से खराब हुए।

    बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हाल बेहाल
    रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पश्चिमी इलाके आतंकवादी गतिविधियों के मुख्य केंद्र बने हुए हैं। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में हुए 74 फीसदी से ज्यादा आतंकवादी हमले बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हुए। इन दोनों राज्यों में आतंकवाद से जुड़ी करीब 67 फीसदी मौतें भी हुईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी और इसके बाद पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़े हमले हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के पड़ोसी देशों के साथ तनावपूर्ण रिश्ते और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) तथा बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) की बढ़ती हिंसा ने देश के सामने सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

    पाकिस्तान के लिए काल बनी TTP
    इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) की रिपोर्ट के मुताबिक, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों के पीछे सबसे बड़े संगठनों में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार, टीटीपी लगातार पांचवें साल पाकिस्तान का सबसे घातक आतंकवादी संगठन रहा। 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से हुई 56 फीसदी मौतों के लिए टीटीपी को जिम्मेदार बताया गया। इस दौरान संगठन ने 595 हमले किए, जिनमें 637 लोगों की मौत हुई। यह आंकड़ा 2024 के मुकाबले करीब 13 फीसदी ज्यादा है।

    आईईपी ने टीटीपी को 2025 में दुनिया का तीसरा सबसे घातक आतंकवादी संगठन भी बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के चार सबसे घातक आतंकवादी संगठनों में टीटीपी अकेला ऐसा संगठन था, जिसके कारण होने वाली मौतों में 2025 में बढ़ोतरी दर्ज की गई। आईईपी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनिया के चार सबसे घातक आतंकवादी संगठनों में इस्लामिक स्टेट, जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन (जेएनआईएम), तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अल-शबाब शामिल थे।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि टीटीपी के हमलों में लगातार चार साल से बढ़ोतरी हो रही है। 2025 में संगठन ने 595 हमले किए और ये सभी हमले पाकिस्तान में हुए। इनमें से ज्यादातर हमले अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा इलाके में हुए। रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र टीटीपी की आतंकवादी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    पैसेंजर ट्रेन पर BLA के हमले का जिक्र
    रिपोर्ट में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की बढ़ती गतिविधियों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में पाकिस्तान में हुए सबसे बड़े आतंकवादी हमलों में से एक के पीछे बीएलए का हाथ था। रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवादियों ने क्वेटा रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर विस्फोट किया और इसके बाद एक पैसेंजर ट्रेन पर कब्जा कर लिया। इस दौरान 442 लोगों को बंधक बनाया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस घटना में 21 बंधकों, 4 सैन्यकर्मियों और 33 आतंकवादियों की मौत हुई।

    इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस के अनुसार, टीटीपी के हमलों में लगातार चार साल से बढ़ोतरी हो रही है। 2025 में टीटीपी ने 595 हमले किए और ये सभी हमले पाकिस्तान में हुए। इनमें ज्यादातर हमले अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा इलाके में किए गए।