Category: विदेश

  • ईरान के खिलाफ बढ़ी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी, मिडिल ईस्ट भेजे गए 10 हजार अतिरिक्त सैनिक

    ईरान के खिलाफ बढ़ी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी, मिडिल ईस्ट भेजे गए 10 हजार अतिरिक्त सैनिक

    वाशिंगटन 

    अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध शांत होने के बजाय एक नए और अत्यधिक विस्फोटक स्टेज में पहुंच गया है. पेंटागन ने मध्य पूर्व में अपने सैन्य बल को अत्यधिक मजबूत करते हुए एक तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात करने का निर्णय लिया है। 

    सैन डिएगो से रवाना हुआ नौसेना का विमानवाहक पोत 'यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट' (USS Theodore Roosevelt) अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है. इसके साथ ही मरीन सैनिकों से लैस 'यूएसएस मेकिन आइलैंड' (USS Makin Island) एम्फीबियस रेडी ग्रुप भी क्षेत्र में भेजा जा रहा है, जिससे इलाके में लगभग 9,000 से 10,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों और नौसैनिकों की तैनाती होने जा रही है। 

    पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र में यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (USS George H.W. Bush) और यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन (USS George Washington) पहले से ही मोर्चा संभाले हुए हैं. यदि यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन क्षेत्र में बना रहता है, तो अक्टूबर के अंत तक रूजवेल्ट के पहुंचने पर एक ही समय में तीन-तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप्स की उपस्थिति दर्ज की जाएगी। 

    अप्रैल 2026 के बाद यह पहला अवसर होगा जब अमेरिका ने एक साथ तीन परमाणु-संचालित युद्धपोत बेड़ों को इस संवेदनशील क्षेत्र में उतारा है. हालिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व में अमेरिका के 50,000 से अधिक सैनिक और लगभग 20 अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत पहले से तैनात हैं, जो किसी भी बड़े सैन्य टकराव के लिए अमेरिका की पूर्ण युद्ध तत्परता को दर्शाते हैं। 

    चौतरफा दबाव बनाने का प्रयास
    अमेरिका की इस भारी सैन्य वृद्धि को ईरान पर चौतरफा दबाव बनाने और क्षेत्रीय सहयोगियों को सुरक्षा का भरोसा देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजरानी की सुरक्षा के साथ-साथ ईरान समर्थित गुटों के किसी भी हमले को विफल करना इसका मुख्य लक्ष्य है। 

    विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर युद्धपोतों, उन्नत लड़ाकू विमानों और नौसैनिक मरीन बलों का जमावड़ा केवल सुरक्षात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य अभियानों की पूर्व-तैयारी का संकेत भी देता है। 

    दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी सैन्य जमावड़े के जवाब में अपने मिसाइल रक्षा प्रणालियों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) को हाई-अलर्ट पर रख दिया है. तेहरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि किसी भी अमेरिकी उकसावे या संप्रभुता के उल्लंघन का कड़ा और सीधा जवाब दिया जाएगा। 

    इस कूटनीतिक और सैन्य खींचतान के कारण अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है और फारस की खाड़ी के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं. तनाव का यह नया चरण वैश्विक शांति के लिए बेहद संवेदनशील साबित हो रहा है। 

    पेंटागन द्वारा अतिरिक्त 10,000 सैनिकों की तैनाती और नौसेना की इस आक्रामक गोलबंदी ने कूटनीतिक वार्ताओं की गुंजाइश को लगभग समाप्त कर दिया है. यदि किसी भी पक्ष से छोटी सी भी रणनीतिक चूक होती है, तो यह तनाव एक भीषण क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसके गंभीर दुष्परिणाम न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को भुगतने पड़ सकते है। 

  • AI रिश्तों पर चीन ने कसी लगाम, चैटबॉट्स की इमोशनल बातचीत पर नए नियम लागू

    AI रिश्तों पर चीन ने कसी लगाम, चैटबॉट्स की इमोशनल बातचीत पर नए नियम लागू

    बीजिंग 

    आज के समय में AI सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है. अब कई लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट्स से दोस्त, पार्टनर और यहां तक कि परिवार के सदस्य की तरह बात कर रहे हैं. लेकिन चीन ने एआई के इस इस्तेमाल को लेकर बड़ा कदम उठाया है. वहां अब ऐसे AI चैटबॉट्स पर सख्त नियम लागू किए गए हैं, जो लोगों के साथ लंबे समय तक इमोशनल रिलेशनशिप जैसा कनेक्शन बनाते हैं. आइए, जानते हैं पूरे मामले के बारे में। 

    चीन में AI रिश्तों पर नए नियम
    15 जुलाई को चीन ने ऐसे एआई चैटबॉट्स के लिए नए नियम लागू किए, जो इंसानों की तरह बातचीत करते हैं और लोगों को इमोशनल सपोर्ट देते हैं. इन नियमों का मकसद AI की वजह से होने वाली इमोशनल डिपेंडेंसी और दूसरी परेशानियों को कम करना बताया गया है। 

    इन नियमों के तहत एआई को यह साफ बताना होगा कि वह इंसान नहीं है. इसके अलावा चैटबॉट्स को हर दो घंटे में यूजर को यह भी बताना होगा कि वह कितनी देर से ऑनलाइन है। 

    AI को नहीं बढ़ानी होगी इमोशनल डिपेंडेंसी
    नए नियमों के मुताबिक एआई चैटबॉट यूजर को अपने ऊपर ज्यादा निर्भर नहीं बना सकते. उन्हें ऐसी बातें करने से भी रोका गया है, जिससे यूजर AI पर इमोशनल रूप से बहुत ज्यादा निर्भर हो जाए। 

    एआई को खुद को यूजर का सबसे करीबी या एकमात्र साथी बताने जैसी चीजों से भी बचना होगा. इसके अलावा चैटबॉट्स को आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाने या उसका संकेत देने की भी इजाजत नहीं है। 

    बच्चों के लिए और सख्त नियम
    बच्चों के लिए चीन ने इन नियमों को और सख्त रखा है. 14 साल से कम उम्र के बच्चों को इंसानों की तरह बातचीत करने वाले एआई का इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की मंजूरी चाहिए। 

    वहीं 18 साल से कम उम्र के बच्चों को AI बॉयफ्रेंड, गर्लफ्रेंड, पति-पत्नी या किसी करीबी रिश्ते वाले वर्चुअल पार्टनर का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है। 

    AI कंपनियों पर जुर्माना
    अगर कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उन पर 2 लाख युआन तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. कुछ बड़ी टेक कंपनियों ने नियम लागू होने से पहले ही अपने एआई असिस्टेंट्स से कम्पैनियन फीचर्स हटा दिए थे। 

    AI दोस्त बन रहा है या अकेलापन बढ़ा रहा है?
    रिसर्च में एआई कम्पैनियन ऐप्स को लेकर चिंता भी सामने आई है. एक स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों के पास कम दोस्त या करीबी परिवार वाले होते हैं, उनके AI चैटबॉट इस्तेमाल करने की संभावना ज्यादा होती है. साथ ही एआई चैटबॉट के ज्यादा इस्तेमाल को अकेलेपन से भी जोड़ा गया है। 

    चीन के इस कदम ने एक बड़ी बहस शुरू कर दी है. सवाल यह है कि AI से लोगों को भावनात्मक नुकसान से बचाने के लिए कितने नियम जरूरी हैं और लोगों की निजी जिंदगी में सरकार का कितना दखल होना चाहिए। 

  • फ्लाईदुबई फ्लाइट में बहादुरी दिखाने वाले 4 जांबाजों को सम्मानित करने की तैयारी

    फ्लाईदुबई फ्लाइट में बहादुरी दिखाने वाले 4 जांबाजों को सम्मानित करने की तैयारी

    तेल अवीव 
    दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट में बुधवार को कॉकपिट के अंदर चाकू से हमले के बाद बड़ा हादसा होते-होते बच गया. विमान को आपात स्थिति में सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर उतारा गया. विमान में सवार सभी 174 यात्री सुरक्षित बताए गए हैं. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुताबिक विमान के को-पायलट ने कथित तौर पर मुख्य पायलट पर हमला किया और विमान को नीचे गिराने की कोशिश की. फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, विमान 30 सेकंड के अंदर करीब 14 हजार फीट नीचे आ गया, जिसके बाद यात्रियों में दहशत फैल गई। 

    भारतीय पायलट ने बचाई 174 यात्रियों की जान 
    हालांकि इन पूरे हालात को संभालने का काम मुख्य पायलट स्मित मच्छार ने किया, जो भारतीय नागरिक हैं. रिपोर्टों के मुताबिक घायल होने के बावजूद उन्होंने विमान को संभालने की कोशिश की. इसी दौरान कई यात्री कॉकपिट की ओर पहुंचे और उन्होंने चालक दल के साथ मिलकर को-पायलट को काबू करने में मदद की. इसके बाद बाकी क्रू ने विमान का नियंत्रण संभाला और सुरक्षित रूप से तबूक में लैंडिंग कराई। 

    इजरायली नागरिकों की जांबाजी 
    विमान में 174 लोग सवार थे, जिनमें करीब 166 इजराइली नागरिक बताए गए हैं. घायल पायलट को तबूक के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है. को-पायलट भी घायल हुआ और उसे अस्पताल ले जाया गया. इजराइली अधिकारियों के मुताबिक, सऊदी अधिकारियों ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की है. फ्लाईदुबई ने कहा है कि घटना के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है. मामले की जांच पूरी होने तक एयरलाइन ने इजरायल आने-जाने वाली उड़ानें अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। 

     भारतीय राजदूत ने कैप्टन स्मित मच्छर के परिवार से मुलाकात की

      विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात में भारत के राजदूत ने दुबई में कैप्टन स्मित मच्छर के परिवार से मुलाकात की. उन्होंने भारत सरकार की ओर से उनके कल्याण और सहायता का पूरा आश्वासन दिया. कैप्टन स्मित मच्छर फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में कप्तान थे. उनके सह-पायलट ने उन पर हमला किया जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए. हमले का मकसद अभी स्पष्ट नहीं हुआ है. भारत सरकार उनके परिवार के साथ खड़ी है और हर संभव मदद कर रही है। 

    नागरिक उड्डयन मंत्री ने स्मित मच्छर की बहादुरी की तारीफ की
    केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी और साहस की सराहना की. उन्होंने कहा कि उनकी कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली. नायडू ने बताया- हम कैप्टन स्मित की बहादुरी और साहस पर गर्व करते हैं. यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, लेकिन स्मित ने इसे रोकने में बहुत अच्छा काम किया. वे भारतीय हैं इसलिए हमें गर्व है, लेकिन उनके इस काम पर पूरी दुनिया गर्व कर रही है. फ्लाईदुबई विमान की घटना में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

     सर्जरी के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की हालत स्थिर
    दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले जांबाज पायलट स्मित मच्छार की सर्जरी हो चुकी है और अब उनकी हालत स्थिर है. उन्हें अपने साथी पायलट के हमलों का शिकार होना पड़ा था, जिसमें उन्हें चाकू से गंभीर जख्म आए थे। 

     फ्लाईदुबई कॉकपिट हमले का मंजर, 16 साल के यात्री ने सुनाया किस्सा
    16 साल के यात्री पेलेग इटाली ने फ्लाईदुबई विमान की घटना को याद करते हुए कहा कि तेल अवीव जा रही उड़ान में कॉकपिट में हुए हमले से बचना चमत्कार जैसा लगा. उन्होंने बताया कि हमले ने उन्हें बहुत डरा दिया. पूरे शरीर में सिहरन हो गई और डर से वे बोल भी नहीं पा रहे थे. यह घटना विमान में हवा में हुई थी. सभी यात्री सुरक्षित उतरे, लेकिन उन पलों का आतंक अब भी उनके मन में है। 

     स्मित मच्छार के माता-पिता ने की पीएम मोदी से बात
     तेल अवीव से दुबई जा रही फ्लाइट की हाईजैकिंग वाले कांड में हीरो बने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार के माता-पिता से खुद पीएम मोदी ने बात की है. उन्होंने इससे पहले कैप्टन स्मित मच्छार की दिलेरी को भारत के लिए गर्व की बात कहा। 

    स्मित मच्छार के माता-पिता सऊदी के लिए रवाना
      फ्लाईदुबई फ्लाइट के हाईजैक कांड के हीरो बने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार का इलाज जारी है. इस बीच उनके माता-पिता सऊदी अरब के लिए रवाना हो गए हैं। 

     

     

  • फ्लाईदुबई फ्लाइट में मचा हड़कंप, कॉकपिट कांड पर नेतन्याहू का बड़ा बयान

    फ्लाईदुबई फ्लाइट में मचा हड़कंप, कॉकपिट कांड पर नेतन्याहू का बड़ा बयान

     नई दिल्ली
    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि फ्लाईदुबई के पायलटों और यात्रियों ने विमान में '9/11 जैसी आपदा' होने से रोक दिया. इजरायल जा रही इस फ्लाइट में एक पायलट ने अपने साथी पर चाकू से हमला कर दिया था, जिसके बाद विमान हजारों फीट नीचे चला गया. नेतन्याहू ने सीएनएन को बताया कि भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला होने के बाद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया था। 

    नेतन्याहू के मुताबिक, दरवाजा खुलने के बाद इजरायली यात्री यानिव हयून कॉकपिट में पहुंचे. हयून पेशे से प्लंबर हैं. उन्होंने वहां ओमानी पायलट को विमान के कंट्रोल के साथ छेड़छाड़ करते हुए देखा. नेतन्याहू ने कहा कि उस समय यात्रियों ने कॉकपिट से चीखने और चिल्लाने की आवाजें भी सुनी थीं। 

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    प्लंबर यात्री ने संभाला विमान का कंट्रोल
    नेतन्याहू ने बताया कि हयून ने विमान के कंट्रोल को पीछे की ओर खींचा. इसी दौरान एक अन्य यात्री और क्रू के सदस्य ने हमलावर पायलट को काबू में किया. इसके बाद रिजर्व पायलट कॉकपिट में पहुंचे और विमान को स्थिर किया। 

    इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने एयरपोर्ट पर यानिव हयून से मुलाकात की थी. उनके मुताबिक, हयून भारतीय पायलट के खून से पूरी तरह सने हुए थे. इस घटना में घायल भारतीय पायलट की पहचान कैप्टन स्मित मच्छार के तौर पर हुई है। 

    सऊदी अरब में हो रही संदिग्ध पायलट से पूछताछ
    नेतन्याहू ने बताया कि हमले के आरोपी पायलट को सऊदी अरब में हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात ने इजरायल को इस पूछताछ में शामिल होने की अनुमति दी है। 

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी घटना के बारे में जानकारी दी गई थी. ट्रंप ने भारतीय पायलट को 'हीरो' बताया और कहा कि हमला होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलकर मदद मांगना बेहद अहम था. उन्होंने यानिव हयून के कदम की भी तारीफ की। 

    कैप्टन स्मित मच्छार ने कैसे बचाई यात्रियों की जान
    यह लैंडिंग बिलकुल भी आसान नहीं थी। यात्रियों ने बताया कि ओमानी को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार को नीचे गिरा दिया था और उन पर चाकू से हमले कर रहा था। सब जगह खून फैला हुआ था। कैप्टन स्मित मच्छार की आवाज तक नहीं निकल रही थी। इस दौरान सिर्फ 1 मिनट में विमान करीब 14000 फीट नीचे गिर गया। जिसके बाद कैप्टन स्मित मच्छार ने विमान के कंट्रोल को संभाला और उसे सुरक्षित तबुक हवाई अड्डे पर उतारा। घायल पायलट और फर्स्ट ऑफिसर को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। सऊदी अरब की इंटेलिजेंस एजेंसियों ने को-पायलट को गिरफ्तार किया है और उससे पूछताछ कर रही हैं।

    कैप्टन स्मित मच्छार कौन हैं?
    कैप्टन स्मितत मच्छार 2022 से अमीराती सरकार के स्वामित्व वाली कम लागत वाली एयरलाइन फ्लाईदुबई में काम कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने 10 साल तक स्पाइसजेट में काम किया था। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, कैप्टन मच्छर के पास बोइंग 737 विमानों पर 13 वर्षों से अधिक का वाणिज्यिक उड़ान का अनुभव है। उन्होंने वनलाइनर ट्रेनिंग कैप्टन के रूप में व्यापक रूप से कार्य किया है और उनके पास 9,750 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है। कैप्टन मच्छर 2011 में स्पाइसजेट में शामिल हुए।

    इजरायल में फ्लाईदुबई की फ्लाइट पर रोक
    इजरायल के परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने शिन बेट से देश में आने-जाने वाली फ्लाईदुबई की सभी उड़ानों को रोकने का अनुरोध किया है, क्योंकि ऐसी अपुष्ट खबरें हैं कि इस घटना के लिए जिम्मेदार पायलट ओमानी मूल का था। तबुक हवाई अड्डे के बयान में पुष्टि की गई है कि इस घटना में पायलट और फर्स्ट ऑफिसर दोनों घायल हो गए थे और विमान के उतरने के बाद उन्हें चिकित्सा उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। बयान में उनके घायल होने के कारण का स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। एक यात्री ने बताया कि चाकू से घायल पायलट की हालत गंभीर थी और विमान में मौजूद एक इजरायली डेंटिस्ट ने उसका इलाज किया और उसकी जान बचाई।

    बेंजामिन नेतन्याहू ने क्या कहा?
    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस घटना पर बयान जारी करते हुए हमलावर को-पायलट को काबू करने वालों की तारीफ की है। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय के एक बयान के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, "आज सुबह, दुबई से इजरायल आ रही एक फ्लाइट में सुरक्षा से जुड़ी एक गंभीर घटना हुई। फ्लाइट में मौजूद लगभग सभी यात्री इजरायली थे। फ्लाइट के दौरान, जब वे देश के करीब पहुंच रहे थे, तो एक पायलट ने दूसरे पायलट पर चाकू से हमला किया और ऐसा लगता है कि उसने प्लेन में सवार सभी लोगों के साथ प्लेन को क्रैश करने की कोशिश की।

    नेतन्याहू ने सभी को किया सलाम
    नेतन्याहू ने कहा, मैंने एक इजरायली यात्री से बात की। उसने मुझे बताया कि प्लेन घूमने लगा और तेज़ी से नीचे की ओर जाने लगा। उसने बताया कि किसी तरह वह और क्रू का एक सदस्य कॉकपिट में घुसने में कामयाब रहे, और उन्होंने मिलकर उस पायलट को काबू में किया जो प्लेन के सिस्टम को खराब करने की कोशिश कर रहा था। फ़्लाइट के क्रू का एक और सदस्य कॉकपिट में पहुंचा और प्लेन को संभालने में कामयाब रहा। मैं इन नायकों को सलाम करता हूं, जिन्होंने असाधारण सूझबूझ और हिम्मत दिखाई। उन्होंने कई जानें बचाईं। उन्होंने एक बड़ी तबाही को रोका।

    नेतन्याहू बोले- सभी यात्री खतरे से बाहर
    उन्होंने कहा कि प्लेन सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरा। सभी यात्री खतरे से बाहर हैं। चाकू से हमला करने वाले पायलट को गिरफ़्तार कर लिया गया है और सऊदी अधिकारी उससे पूछताछ कर रहे हैं। हम यात्रियों की सुरक्षा और उनके सुरक्षित घर लौटने को सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। मैंने सुरक्षा एजेंसियों को भविष्य में संभावित खतरों के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है। हम स्थिति का लगातार जायजा ले रहे हैं, और जैसे-जैसे हालात बदलेंगे, हम आपको जानकारी देते रहेंगे।

    ईरान कनेक्शन की जानकारी नहीं
    नेतन्याहू ने अपनी बातचीत में यह भी साफ किया कि जांचकर्ताओं के पास अभी ऐसी कोई खास जानकारी नहीं है, जिससे इस घटना का ईरान से संबंध साबित हो. उन्होंने कहा कि फिलहाल इस तरह का कोई ठोस इनपुट सामने नहीं आया है। 

    नेतन्याहू ने अपने पुराने अनुभव का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि 1972 में एक हाईजैक विमान से यात्रियों को छुड़ाने वाली इजरायली कमांडो कार्रवाई के दौरान वह घायल हुए थे. उनके भाई योनी की 1976 में एंटेबे बंधक बचाव अभियान का नेतृत्व करते हुए मौत हो गई थी. नेतन्याहू ने कहा, "उन पायलटों ने 9/11 जैसी आपदा होने से रोक दी, क्योंकि ऐसा ही लग रहा था कि उस वक्त होने वाला था। 

  • अटाकामा में कुदरत का करिश्मा, बारिश के बाद खिले लाखों फूल; देखें अद्भुत नजारा

    अटाकामा में कुदरत का करिश्मा, बारिश के बाद खिले लाखों फूल; देखें अद्भुत नजारा

    सेंटियागो

    चिली के अटाकामा रेगिस्तान में इन दिनों लाखों फूल खिल गए हैं. दुनिया के सबसे सूखे इलाकों में शामिल इस रेगिस्तान में हुई तेज बारिश के बाद जमीन के अंदर पड़े बीज और बल्ब सक्रिय हो गए. अल नीनो से जुड़ी इस बारिश के बाद अटाकामा के कई हिस्सों में बैंगनी और सफेद फूल दिखाई दे रहे हैं. चिली की नेशनल फॉरेस्ट कॉरपोरेशन यानी CONAF के मुताबिक, अक्टूबर में इस फूलों का नजारा अपने चरम पर पहुंच सकता है और करीब 15 हजार हेक्टेयर इलाके में फूल खिलने का अनुमान है। अटाकामा रेगिस्तान चिली के उत्तर में है और राजधानी सैंटियागो से करीब 800 किलोमीटर दूर है. यहां आमतौर पर बारिश बहुत कम होती है. इसी वजह से यहां कई पौधों के बीज और बल्ब जमीन के अंदर लंबे समय तक पड़े रहते हैं. जब उन्हें पर्याप्त पानी मिलता है तो वे दोबारा उगने लगते हैं. इस बार कुछ इलाकों में 180 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई, जो वहां के लिए बेहद ज्यादा है. इस पानी का एक बड़ा हिस्सा रेत के अंदर गहराई तक पहुंचा और इससे जमीन में छिपे पौधों को बढ़ने का मौका मिला।     

    जमीन के अंदर छिपे थे लाखों बीज… अटाकामा में फूलों का यह नजारा अचानक नहीं बना है. यहां करीब 200 प्रजातियों के पौधों के बीज और बल्ब जमीन के अंदर मौजूद रहते हैं. सूखे मौसम में ये पौधे एक तरह से रुके हुए रहते हैं. जैसे ही सही मात्रा में बारिश और नमी मिलती है, ये फिर से सक्रिय हो जाते हैं। चिली की CONAF के अनुसार, 'फ्लावरिंग डेजर्ट' में 200 से ज्यादा तरह के पौधे दिखाई दे सकते हैं. इनमें ऐसे पौधे भी शामिल हैं जो रेगिस्तान की बहुत कम नमी वाली जमीन में रहने के लिए तैयार हो चुके हैं. इनके कुछ हिस्से जमीन के अंदर सुरक्षित रहते हैं और सही मौसम आने पर ऊपर आकर फूल और पत्तियां बनाते हैं। कुछ इलाकों में 180 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश… इस बार अटाकामा के कुछ हिस्सों में बारिश 180 मिलीमीटर से ज्यादा दर्ज की गई. CONAF के अटाकामा जैव विविधता एक्सपर्ट सीजर पिजारो ने बताया कि कुछ जगहों पर इतनी ज्यादा बारिश पहले दर्ज नहीं की गई थी. सामान्य से ज्यादा पानी जमीन में गहराई तक पहुंचा, जिससे पौधों को लंबे समय तक नमी मिली।

    इसी बारिश के बाद अब रेगिस्तान में बैंगनी और सफेद फूलों के बड़े हिस्से दिखाई दे रहे हैं. इस घटना को चिली में 'फ्लावरिंग डेजर्ट' यानी 'फूलों वाला रेगिस्तान' कहा जाता है. यह घटना हर साल एक जैसी नहीं होती. इसके लिए सही समय पर पर्याप्त बारिश और मिट्टी में जरूरी नमी होना जरूरी है। अक्टूबर में सबसे ज्यादा फूल दिखेंगे… CONAF के अनुमान के मुताबिक, इस साल अटाकामा में फूलों का यह नजारा अक्टूबर में सबसे ज्यादा दिखाई दे सकता है. करीब 15 हजार हेक्टेयर इलाके में फूल खिलने का अनुमान है. बारिश के बाद सिर्फ पौधे ही सक्रिय नहीं होते, बल्कि इस पूरे इलाके में कीड़े, मधुमक्खियां, पक्षी और दूसरे छोटे जीव भी ज्यादा दिखाई देने लगते हैं। 

    फूलों से मिलने वाला पराग इन जीवों के लिए भी जरूरी होता है. इस नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक भी पहुंच रहे हैं. कई लोग सड़क के किनारे रुककर फूलों की तस्वीरें ले रहे हैं. लेकिन अधिकारियों ने लोगों से पौधों को नुकसान न पहुंचाने और तय रास्तों पर ही चलने की अपील की है। अल-नीनो की बारिश बनी बड़ी वजह… इस बार अटाकामा में फूल खिलने के पीछे अल नीनो से जुड़ी बारिश को बड़ी वजह माना जा रहा है. अल-नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों की सतह का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे हवा और बारिश के पैटर्न में बदलाव आ सकता है. इस बार इसका असर चिली के उत्तरी हिस्से में भी देखने को मिला।  
    हालांकि, अल-नीनो से हुई बारिश का असर सिर्फ फूलों तक सीमित नहीं रहा।     

    जुलाई में चिली के कुछ हिस्सों में भारी बारिश से नुकसान भी हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान कम से कम 13 लोगों की मौत हुई और करीब 4 हजार घरों को नुकसान पहुंचा या वे पूरी तरह बर्बाद हो गए. यानी जिस बारिश ने अटाकामा में पौधों को जीवन दिया, उसी मौसम ने देश के कुछ हिस्सों में परेशानी भी पैदा की।       
    बारिश कम होने और जमीन सूखने के बाद फूलों का यह नजारा धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा. लेकिन कई पौधों के बीज और जमीन के अंदर मौजूद हिस्से फिर सुरक्षित रहेंगे. अगली बार जब उन्हें सही मात्रा में बारिश मिलेगी, तो अटाकामा फिर फूलों से भर सकता है। 

  • फ्लाईदुबई विमान को लेकर बड़ा अलर्ट, हाईजैक की आशंका के बीच इजरायली विमानों ने घेरा

    फ्लाईदुबई विमान को लेकर बड़ा अलर्ट, हाईजैक की आशंका के बीच इजरायली विमानों ने घेरा

    तेल अवीव
     यूएई के दुबई से इजरायली राजधानी तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के एक विमान की सुरक्षा में चूक का मामला सामने आया है। माना जा रहा था कि इसको हाईजैक करने की कोशिश की गई। हालांकि इसकी सऊदी अरब में लैंडिंग के बाद विमान के अंदर मारपीट का मामला सामने आया है। बताया गया है कि विमान में हिंसा हुई थी। पायलटों के बीच हाथापाई का दावा किया जा रहा है। सऊदी में विमान की लैंडिंग के बाद संबंधित पक्षों ने राहत की सांस ली है।

    इजरायली मीडिया के मुताबिक, विमानन प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि विमान को सऊदी अरब में उतरना था। इससे पहले ही दुबई-तेल अवीव उड़ान की ओर से इमरजेंसी 7700 स्क्वॉक सिग्नल भेजे गए। सिग्नल मिलने के बाद इजरायली सैन्य विमान भेजे गए। ताकि हाईजैकिंग जैसी संभावित घटना का मुकाबला किया जा सके।

    विमान से आया इमरजेंसी सिग्नल
    इजरायली मीडिया ने फ्लाइट डेटा का हवाला देते हुए बताया कि तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के एक यात्री विमान ने सऊदी अरब के ऊपर से वापस मुड़ते समय इमरजेंसी घोषित कर दी। इसके बाद इजरायली वायु सेना के लड़ाकू विमानों को भेजा गया और इमरजेंसी स्तर पर इजरायल में मीटिंग शुरू हो गई।

    N12 के अनुसार, विमान की ओर इजरायली लड़ाकू विमान भेजे गए। इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू और रक्षा मंत्री काट्ज इस मामले पर बातचीत की। सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि शुरू में अधिकारियों को समझ नहीं आया है कि क्या हो रहा है। उन्हें लगा कि यह विमान अपहरण की कोशिश है।

    हाईजैक से सरकार का इनकार
    इधर, इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के प्रवक्ता ने हाईजैक की घटना से इनकार किया है। पीएम कार्यालय ने कहा कि बुधवार को फ्लायदुबई के एक विमान को रास्ता बदलकर सऊदी अरब भेजे जाने को हाईजैकिंग की घटना नहीं माना जा रहा है। खास बात है कि ये घटनाक्रम ऐसे समय पर हुए हैं, जब पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के चलते तनाव बना हुआ है।

    यात्रियों से भरा हुआ था विमान
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कथित इमरजेंसी के समय विमान में 27 बच्चों समेत कुल 174 यात्री सवार थे। कहा जा रहा है कि दोनों पायलट्स के बीच हुई बहस के चलते हाईजैक का सिग्नल चला गया था। वहीं, सिग्नल पाते ही इजरायल की वायुसेना अलर्ट मोड पर आ गई थी और आपातकाल बैठक बुलाई गई थी।

    असल में क्या हुआ था
    बाद में यह साफ हुआ कि दो पायलट्स के बीच हाथापाई होने के कारण आसमान में स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इसके चलते गलत सिग्नल चला गया था। वायनेट के अनुसार, घटना का पता चलते ही पीएम नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई थी। पुलिस आयुक्त डैनी लेवी का कहना था कि वह इजरायल भी तरह के हालात के लिए तैयार हैं।

    पश्चिम एशिया में तनाव के बीच घटना
    यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब पश्चिम एशिया का एक बड़ा हिस्सा संघर्ष से जूझ रहा है। इजरायल की लेबनान, गाजा और ईरान से तनातनी लगातार जारी है। वहीं सऊदी अरब और यमन के हूतियों के बीच हालिया हफ्तों में लगातार सैन्य संघर्ष देखा गया है। वहीं ईरान में भी इजरायल और अमेरिका की सात महीने से लड़ाई चल रही है।

    पश्चिम एशिया में इस तनातनी के बीच यूएई की एयरलाइन के विमान से इमरजेंसी सिग्नल मिलने की वजह से हड़कंप मच गया। यूएई को पश्चिम एशिया में इजरायल का सबसे करीबी माना जाता है। ऐसे में ये आशंका पैदा हो गई कि किसी विरोधी पक्ष ने तो इस विमान का अपहरण नहीं कर लिया है। इस तरह की घटनाएं पहले भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हो चुकी हैं।

    बुलाई गई इमरजेंसी मीटिंग
    घटना के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री काट्ज ने एक आपातकालीन सुरक्षा परामर्श बैठक बुलाई। हालांकि, एक सुरक्षा सूत्र ने बाद में स्पष्ट किया, "विमान अपहरण के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है, पायलट ने संकट संकेत भेजा था।"

    विमान के फ्लाइट ट्रैकिंग ऐप से गायब हो जाने के बाद सुरक्षा सूत्रों ने आश्वस्त किया कि विमान सऊदी अरब की धरती पर उतरने वाला था। विमान बाद में उतरा और आम जनता के लिए उपलब्ध ट्रैकिंग ऐप पर वापस दिखाई देने लगा।

    फ्लाई दुबई विमान ने संयुक्त अरब अमीरात के दुबई से सुबह 7:05 बजे उड़ान भरी और उसे सुबह 9:30 बजे के आसपास बेन गुरियन हवाई अड्डे पर उतरना था। लेकिन लगभग डेढ़ घंटे की उड़ान के बाद जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही विमान ने कोड 7700 (अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन और संकट कोड) और फिर कोड 7500 प्रसारित किया, जो अपहरण का संकेत था।

    उसी समय विमान वापस मुड़ गया और सऊदी अरब के आसमान में लौट आया और कम ऊंचाई पर उड़ने लगा। दक्षिण की ओर उड़ने के बाद यह सऊदी अरब के भीतर पश्चिम की ओर मुड़ गया।

  • Space War का नया दौर? चीन के सैटेलाइट रिफ्यूलिंग दावे से अमेरिका की बढ़ी चिंता

    Space War का नया दौर? चीन के सैटेलाइट रिफ्यूलिंग दावे से अमेरिका की बढ़ी चिंता

    बीजिंग
    आने वाले समय में महाशक्तियों के बीच युद्ध धरती या समुद्र में नहीं बल्कि अंतरिक्ष में लड़े जाएंगे। और ऐसा लगता है कि चीन ने इस 'स्पेस वॉर' (Space War) की मौन शुरुआत कर दी है। सामने आई एक रिपोर्ट ने दुनिया भर की स्पेस और खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि चीन ने अंतरिक्ष की कक्षा में ही अपने एक सैटेलाइट में ईंधन भरने (In-orbit Refueling) का सीक्रेट ऑपरेशन अंजाम दिया है। अगर यह दावा सच है तो यह अंतरिक्ष में अमेरिका और चीन के बीच एक खतरनाक हथियारों की होड़ का नया युग है।

    अंतरिक्ष में ड्रैगन का नया दांव, सैटेलाइट रिफ्यूलिंग का दावा

    • 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' रिपोर्ट दी है कि चीनी शोधकर्ताओं का दावा है कि देश ने ज्यादा ऊंचाई वाले नेविगेशन सैटेलाइट पर एक अनोखा 'इन-ऑर्बिट रीफ्यूलिंग' ऑपरेशन किया है। हालांकि हालिया वैज्ञानिक पेपर्स और सैटेलाइट विशेषज्ञों के मुताबिक ऑर्बिटल ट्रैकिंग डेटा इस बात पर संदेह पैदा करते हैं कि क्या यह मिशन असल में हुआ भी था।
    • चीन की सरकारी मदद वाली 'डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन लेबोरेटरी' और 'चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज' की स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्विसिंग स्पेसक्राफ्ट 'शिजियान-25' ने फरवरी 2025 में 'बेईडू-2 G7' सैटेलाइट को 142 किलोग्राम प्रोपेलेंट (ईंधन) ट्रांसफर किया जिससे इस नेविगेशन ऑर्बिटर की काम करने की अवधि आठ साल बढ़ गई।
    • ऑर्बिट में ही ईंधन भरने से रिप्लेसमेंट का खर्च काफी कम हो सकता है और आम नागरिकों और सेना के लिए गाइडेंस सिस्टम की मज़बूती बढ़ सकती है।
    • इस टेक्नोलॉजी ने अमेरिका में चिंता बढ़ा दी है। वहां US स्पेस कमांड के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि स्पेस में ईंधन भरने की क्षमता से ऑर्बिट में होने वाले टकराव के दौरान दुश्मन को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।

    क्या सच में हुआ ऐसा ऑपरेशन? ट्रैकिंग डेटा ने उठा दिए सवाल
    US स्पेस फोर्स के ऑर्बिटल ट्रैकिंग रिकॉर्ड्स इस दावे पर सवाल उठाए हैं। स्वतंत्र एस्ट्रोफिजिसिस्ट जोनाथन मैकडॉवेल ने बताया कि 2025 की शुरुआत में जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में 'बेईडू-2 G7' और 'शिजियान-25' के बीच लगभग दस लोंगिट्यूडिनल डिग्री का अंतर था। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि ड्रिफ्ट रेट्स यानि खिसकने की गति को देखते हुए, बिना पता चले डॉकिंग होना असल में नामुमकिन है सिवाय इसके कि ट्रैकिंग नेटवर्क ने टारगेट ऑब्जेक्ट्स की गलत पहचान की हो।

    'स्पेस वॉर' का नया दौर, क्यों डरे हुए हैं शक्तिशाली देश?
    हालांकि यह साफ नहीं है कि चीन ने कक्षा में ईंधन भरने की उपलब्धि हासिल की है या नहीं लेकिन अगर यह उपलब्धि हासिल हो जाती है तो इसके दूरगामी सामरिक असर होंगे। पॉल सिज़मैन्स्की और कैलोएरो बोनासिया ने जुलाई 2026 के प्रोसीडिंग्स लेख में कहा है कि ये अंतरिक्ष युद्ध के नये दौर की शुरूआत हो सकती है।

    अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स के पास सीमित ईंधन होता है। जब भी कोई सैटेलाइट खुद को किसी खतरे जैसे दुश्मन के सैटेलाइट से टक्कर से बचाने के लिए अचानक अपना रास्ता बदलता है तो उसका बहुत सारा कीमती ईंधन खर्च होता है। दुश्मन को सिर्फ हमला करने का दिखावा करना है। इससे बचाव करने वाला सैटेलाइट डरकर अपनी जगह बदलेगा, उसका ईंधन खर्च होगा और उसकी काम करने की बची हुई उम्र हमेशा के लिए कम हो जाएगी।

     

  • ईरान का अमेरिका पर बड़ा हमला, जनरल बोले- दबाव में नहीं आएगा देश

    ईरान का अमेरिका पर बड़ा हमला, जनरल बोले- दबाव में नहीं आएगा देश

    तेहरान
     ईरान के साथ अमेरिका का तनाव फिलहाल खत्म नहीं होने वाला है। ईरान सेना के ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी का ताजा बयान यह साफ संकेत दे रहा है।

    ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका के पास अब कोई और रास्ता नहीं बचा। उसे हार माननी होगी और इस इलाके से निकल जाना होगा।

    'अपने बेस को बचा नहीं पाया अमेरिका'
    हुसैन मोहेब्बी ने कहा कि ईरान का अभियान तभी खत्म होगा, जब अमेरिका यह हकीकत स्वीकार कर लेगा कि वह हार चुका है। बता दें कि मिडिल ईस्ट में तनाव अब पहले से ज्यादा बढ़ गए हैं, यह बयान विवाद को और तूल देने का काम कर सकता है।

    मोहेब्बी ने बताया कि अमेरिका के सैनिक अड्डे हाल के संघर्ष में खुद को भी नहीं बचा पाए। ज्यादातर अड्डे अब पूरी तरह बेकार हो चुके हैं। उन्हें दोबारा बनाने में इतना खर्च आएगा कि अमेरिका के लिए यह फायदेमंद नहीं रहेगा।

    ईरान लगातार नए हथियार बना रहा है
    जनरल ने जोर देकर कहा कि ईरान दुनिया की हर उपलब्ध तकनीक का इस्तेमाल कर नए हथियार डिजाइन कर रहा है। पुराने उपकरणों को अपग्रेड किया जा रहा है और रक्षा प्रणालियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है। इसका मकसद देश और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अगर युद्ध का रूप बदलता है तो ईरान मैदान में और नए हथियार लाएगा।

    पड़ोसियों का बदल रहा रुख
    मोहेब्बी ने पड़ोसी देशों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका कभी भी ईरान और उसके पड़ोसियों के बीच पुराने रिश्ते और संचार मार्ग नहीं तोड़ सकता। पड़ोसी देशों को अब समझ आ गया है कि उनके इलाके में अमेरिकी अड्डे सुरक्षा नहीं बल्कि असुरक्षा बढ़ाते हैं।

    दबाव में नहीं आने वाला ईरान
    बता दें कि ईरान के उत्तर-पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी सीमा क्षेत्रों में अमेरिका ने सशस्त्र समूहों का समर्थन किया था। लेकिन यह कोशिश भी नाकाम रही। जनरल ने बताया कि यह अमेरिका की एक और बड़ी विफलता साबित हुई।

    ईरान का यह रुख साफ है कि वह दबाव में आने वाला नहीं है। मोहेब्बी के शब्दों में अमेरिका अब इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए रखने में सक्षम नहीं दिख रहा। नए हथियारों के विकास और पड़ोसियों के साथ मजबूत रिश्तों के चलते ईरान अपनी स्थिति को और मजबूत मान रहा है।

    हालांकि, अमेरिका की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ईरान के इस रवैये से साफ है कि वह अपने बचाव को लेकर पूरी तरह तैयार है।

  • SpaceX Starship की बड़ी कामयाबी, पहली बार ऑर्बिट में पहुंचा रॉकेट

    SpaceX Starship की बड़ी कामयाबी, पहली बार ऑर्बिट में पहुंचा रॉकेट

    वाशिंगटन
    स्पेसएक्स के अगली पीढ़ी के रॉकेट स्टारशिप ने सोमवार को पहली बार पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचने में सफलता हासिल की। उड़ान के दौरान एक इंजन अचानक बंद हो गया था, जिससे मिशन को बीच में ही छोटा करना पड़ा। इसके बावजूद स्टारशिप ने 26 नई पीढ़ी के स्टारलिंक सैटेलाइट कक्षा में सफलतापूर्वक तैनात किए। इसके बाद मिशन को तय समय से करीब 7 घंटे पहले खत्म कर दिया गया और स्टारशिप ने प्रशांत महासागर में नियंत्रित तरीके से उतरते हुए समुद्र में तेज आग के साथ टचडाउन किया। यह उड़ान टेक्सास के स्टारबेस परिसर से हुई थी और 2023 के बाद स्टारशिप की 14वीं उड़ान थी।

    यह मिशन 10 घंटे चलने वाला था, लेकिन इंजन में आई दिक्कत के बाद इसे करीब तीन घंटे में ही खत्म कर दिया गया। स्टारशिप का ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद उसके तीन मुख्य इंजनों में से एक समय से पहले बंद हो गया। स्पेसएक्स के प्रवक्ता डैन हुओट ने पहले कहा कि इस स्थिति में यान को कक्षा तक भेजने का फैसला नहीं किया जाएगा। हालांकि, इंजीनियरों से मिले अपडेट के बाद उन्होंने कुछ मिनट में बताया कि स्टारशिप अभी भी इंजन फायरिंग के जरिए कक्षा तक पहुंच सकता है। इसके बाद यान ने सफलतापूर्वक यह प्रक्रिया पूरी की।

    करीब 40 मंजिल ऊंचा यान है स्टारशिप
    करीब 269 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्टारशिप ने एक-एक करके 26 नई पीढ़ी के स्टारलिंक सैटेलाइट छोड़े। एलन मस्क ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि सभी 26 सैटेलाइट सफलतापूर्वक तैनात हो गए और सामान्य तरीके से काम कर रहे हैं। स्टारशिप करीब 40 मंजिल ऊंचा यान है, जिसमें सुपर हेवी बूस्टर के ऊपर मुख्य स्टारशिप यान लगा होता है। उड़ान के दौरान सुपर हेवी ने स्टारशिप को अंतरिक्ष तक पहुंचाया और फिर खुद समुद्र में नियंत्रित तरीके से उतरा। हालांकि, उसके कुछ इंजन नीचे आते समय काम करना बंद कर गए।

    कितना मुश्किल रहा अब तक का सफर
    स्टारशिप का प्रशांत महासागर में उतरना भी योजना के मुताबिक नियंत्रित था। यान ने समुद्र की सतह से टकराने से पहले अपने थ्रस्टर की मदद से खुद को सीधा किया और समुद्र में पहुंचा। इसके बाद उसके निचले हिस्से में आग लग गई और यान एक तरफ झुक गया। स्पेसएक्स ने इस मिशन के बाद स्टारशिप को समुद्र से वापस निकालने की योजना नहीं बनाई थी। कंपनी के लिए यह सफलता इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले 2023 से हुई स्टारशिप की सभी 13 परीक्षण उड़ानें सिर्फ सबऑर्बिटल चरण तक सीमित रही थीं। स्टारशिप को भविष्य में स्टारलिंक सैटेलाइट तेजी से लॉन्च करने और नासा के चंद्र मिशनों में इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा रहा है।

  • अबू धाबी में नेतन्याहू की अहम बैठक, एयर डिफेंस और ईरान के प्रभाव पर चर्चा

    अबू धाबी में नेतन्याहू की अहम बैठक, एयर डिफेंस और ईरान के प्रभाव पर चर्चा

    अबू धाबी
     संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के अबू धाबी यात्रा की पुष्टि की है। उसने बताया है कि इस दौरान नेतन्याहू ने राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक की भी की थी। बैठक में सऊदी अरब, जॉर्डन, मोरक्को और लीबिया सहित क्षेत्र के कई अरब देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस बैठक को इजरायल के साथ सामान्य रिश्तों की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। हालांकि, पाकिस्तान को इस बैठक से दूर रखा गया, जो खुद को इस्लामी दुनिया का रहनुमा होने का दिखावा करता है।

    नेतन्याहू ने अरब देशों को बड़ा ऑफर दिया
    रिपोर्ट के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू की अरब देशों के नेताओं के साथ हुई बैठक ईरान और मध्य पूर्व में उसके समर्थकों के प्रभाव को सीमित करने के तरीकों पर केंद्रित थी। इस बैठक में यमन के हूती विद्रोहियों पर खास चर्चा की गई, जिनके हमलों के कारण सऊदी अरब को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बैठक के दौरान अरब देशों के प्रतिनिधियों ने हवाई हमलों से रक्षा के लिए एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती के इजरायल के प्रस्ताव को ध्यान से सुना। ऐसी रिपोर्ट हैं कि इजरायल ने पहले ही संयुक्त अरब अमीरात की रक्षा के लिए अपने एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हुए हैं।

    नेतन्याहू के यूएई दौरे की पुष्टि
    एक आधिकारिक बयान में, इजरायली प्रधानमंत्री के कार्यालय ने पुष्टि की कि नेतन्याहू और उनकी पत्नी ने कल संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के निमंत्रण पर संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया। कार्यालय ने कहा कि इस यात्रा में "दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय चुनौतियों" पर चर्चा हुई। यूएई के दौरे पर गए इजरायली प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख, मोसाद के प्रमुख, प्रधानमंत्री के सैन्य सचिव और राजनीतिक सलाहकार भी शामिल थे।

    लीबिया के सद्दाम हफ्तार से मिले नेतन्याहू
    इटली के अखबार 'इल फोग्लियो' की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अबू धाबी में पूर्वी लीबिया के डिप्टी कमांडर और खलीफा हफ्तार के बेटे सद्दाम हफ्तार के साथ एक गुप्त बैठक की। रिपोर्ट में हफ्तार के पूर्व सलाहकार मोहम्मद बुइसिर का हवाला दिया गया है, जिन्होंने दावा किया कि सद्दाम ने लीबिया का राष्ट्रपति बनने की अपनी कोशिश के लिए इजरायल का राजनीतिक समर्थन हासिल करने के लिए नेतन्याहू से मुलाकात की थी। खबरों के मुताबिक, नेतन्याहू के विमान के उतरने के ठीक 20 मिनट बाद सद्दाम का विमान अबू धाबी में उतरा।