Category: विदेश

  • ग्वादर में BLA का खूनी हमला, 30 से अधिक पाक सुरक्षा कर्मियों के मारे जाने का दावा, सेना ने नहीं की पुष्टि

    ग्वादर में BLA का खूनी हमला, 30 से अधिक पाक सुरक्षा कर्मियों के मारे जाने का दावा, सेना ने नहीं की पुष्टि

    बलूचिस्तान
    पाकिस्तान में बीएलए यानी बलूच लिबरेशन आर्मी ने कोहराम मचा दिया है. बलूचिस्तान के ग्वादर में बीएलए ने पाकिस्तानी सैनिकों की लाशें बिछाकर गदर काट दी है. जी हां, बलूचिस्तान के ग्वादर में फिदायीन हमला कर बीएलए ने पाकिस्तान के 30 से अधिक सैनिकों को मार डाला. ग्वादर के जिवानी इलाके के पनवान में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड कैंप पर हुए फिदायीन हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली है. गौरतलब है कि बलूच लिबरेशन आर्मी को पाकिस्तान ने बैन कर रखा है. समय-समय पर बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान को घाव देता रहता है. बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ रहा है। 

    बीएलए ने अटैक कर पाकिस्तान को दिया गहरा जख्म
    ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया कि इस हमले में 30 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए. बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान का अलगाववादी समूह है. हालांकि, पाकिस्तान सरकार इसे एक आतंकी संगठन मानती है. इसे बैन कर रखा है. जबकि बलूच लिबरेशन आर्मी का दावा है कि वह बलूचिस्तान को आजाद कराने की लड़ाई लड़ रहा है. उसका कहना है कि बलूचिस्तान का हक मारा जा रहा है. पाकिस्तानी हुकूमत बलूचिस्तान के साथ सौतेला व्यवहार करती है. पाकिस्तानी सरकार यहां के खजाने को लूटती है, मगर उस लिहाज से इस इलाके का विकास नहीं करती। 

    ग्वादर में कब और कैसे हुआ अटैक
    बहरहाल, ग्वादर में यह हमला शुक्रवार शाम को हुआ. इस अटैक को बलूच लिबरेशन आर्मी की खास ‘मजीद ब्रिगेड’ ने अंजाम दिया.  बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया कि अताउल्लाह बलूच उर्फ अजमल नाम के एक आत्मघाती हमलावर ने शाम करीब 6:32 बजे (स्थानीय समय) विस्फोटकों से लदे ट्रक को कोस्ट गार्ड के कड़ी सुरक्षा वाले कैंप में घुसा दिया, जिससे जबरदस्त धमाका हुआ. इस अटैक में कैंप पूरी तरह मलबे के ढेर में बदल गया। 

    बीएलए ने वीडियो में दिखाया सबूत
    बलूच लिबरेशन आर्मी के मीडिया विंग ‘हक्कल’ ने 43 सेकंड का एक वीडियो भी जारी किया. इस वीडियो में साफ दिख रहा था कि धमाके से ठीक पहले विस्फोटकों से भरा ट्रक कैंप में घुस रहा था. बलूच लिबरेशन आर्मीने कहा कि बाद के फुटेज में मिलिट्री कैंप का एक बड़ा हिस्सा तबाह हुआ दिखाई दिया. इतना ही नहीं, ट्रक बम धमाके के बाद बलूच लिबरेशन आर्मी के ‘फतेह स्क्वाड’ ने ज़मीन से एक साथ हमला किया. बलूच लिबरेशन आर्मी के मुताबिक, इसके बाद उसके लड़ाकों ने बचे हुए कोस्ट गार्ड कर्मियों से आमने-सामने की लड़ाई लड़ी और ऑपरेशन के दौरान 30 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को मार गिराया। 

  • अमेरिका में हीटवेव का असर: 4 जुलाई के जश्न पर पड़ा ब्रेक, परेड रद्द, ट्रेन सेवाएं प्रभावित और नेशनल मॉल बंद

    अमेरिका में हीटवेव का असर: 4 जुलाई के जश्न पर पड़ा ब्रेक, परेड रद्द, ट्रेन सेवाएं प्रभावित और नेशनल मॉल बंद

     वॉशिंगटन 

    अमेरिका के पूर्वी तट पर भीषण गर्मी की वजह से कई राज्यों में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम रद्द करने पड़े हैं. वॉशिंगटन डीसी में नेशनल मॉल पर लगा ग्रेट अमेरिकन स्टेट फेयर शुक्रवार को कुछ घंटों के लिए बंद कर दिया गया. गर्मी और नमी के कारण वहां तापमान 113 डिग्री फारेनहाइट (करीब 45 डिग्री सेल्सियस) तक महसूस हो रहा था. वर्जीनिया और मैरीलैंड के कई शहरों में परेड कैंसिल कर दी गई हैं. हालांकि कैपिटल फोर्थ कॉन्सर्ट को तय समय पर ही रखा गया है, बस सुरक्षा के लिए कुछ बदलाव किए गए हैं। 

    फेयर आयोजित करने वाली संस्था फ्रीडम 250 ने एक्स पर बयान जारी कर कहा कि उनके लिए मेहमानों, कर्मचारियों और कलाकारों की सुरक्षा सबसे जरूरी है, इसलिए फेयर को शाम पांच बजे तक बंद रखा गया. इसी गर्मी के चलते वर्जीनिया के लीसबर्ग और मैरीलैंड के लॉरेल तथा टकोमा पार्क में स्वतंत्रता दिवस की परेड रद्द कर दी गई हैं। 

    दूसरी तरफ, अमेरिकी कैपिटल पुलिस ने बताया कि शाम को होने वाला वार्षिक कैपिटल फोर्थ कॉन्सर्ट तय समय रात आठ बजे ही शुरू होगा, लेकिन गर्मी को देखते हुए दर्शकों के लिए गेट शाम सात बजे 
    खोले जाएंगे। 

    पुलिस ने लोगों से पानी की बोतलें साथ लाने की अपील की है. इस कॉन्सर्ट में पैटी लाबेल, एलन जैक्सन, शिकागो और कूल एंड द गैंग जैसे कलाकार परफॉर्म करेंगे. गुरुवार शाम हुई रिहर्सल में गर्मी की वजह से आम लोगों को जाने की इजाजत नहीं दी गई थी। 

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शाम को साउथ डकोटा जाकर माउंट रशमोर पर भाषण देंगे और आतिशबाजी देखेंगे. वे कल शाम वॉशिंगटन में भी भाषण देंगे, जिसके बाद बड़ा आतिशबाजी शो होगा। 

    भीषण गर्मी के कारण एमट्रेक ने भी उत्तर पूर्वी इलाके में कुछ ट्रेनें रद्द कर दी हैं, क्योंकि गर्मी से पटरियां प्रभावित हो सकती हैं. न्यूयॉर्क में मेयर जोहरान मामदानी ने बिजली बचाने की अपील की, जिस पर रिपब्लिकन नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। 

  • Pakistan Bus Accident: खाई में गिरी ओवरलोडेड बस, 40 की मौत; कई अन्य घायल

    Pakistan Bus Accident: खाई में गिरी ओवरलोडेड बस, 40 की मौत; कई अन्य घायल

    इस्लामाबाद
     पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया है. यहां यात्रियों से भरी एक बस गहरी खाई में गिर गई. अधिकारियों के मुताबिक हादसा उस समय हुआ जब बस बलूचिस्तान के शेरानी जिले के दाना सर इलाके से निकलकर खैबर पख्तूनख्वा में प्रवेश कर रही थी. मिल रही जानकारी के मुताबिक घटना में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई, जबकि अब तक 8 लोगों के जख्मी होने की खबर है। 

    बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने घटना के बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए कहा कि हादसे में जख्मी हुए लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. दुर्घटना के तुरंत बाद इलाके में बचाव अभियान शुरू कर दिया गया. बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने भी राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जा सके. ट्रिब्यून एक्सप्रेस के मुताबिक बस क्वेटा से रवाना हुई थी, जिसके खराब होने के बाद यात्रियों को दूसरी बस में बिठाया गया, जिससे वो ओवरलोड हुई और हादसा हुआ। 

    घटना की जांच जारी
    शेरानी के डिप्टी कमिश्नर हजरत वाली काकर ने बताया- ‘घायलों को निकालकर नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है. मरने वालों की लाशों को निकालने और शिफ्ट करने का काम जारी है.’ डिप्टी कमिश्नर ने आगे बताया कि बस क्वेटा से 36 यात्रियों के साथ रवाना हुई थी, लेकिन रास्ते में एक दूसरी बस खराब हो जाने के कारण कुछ और यात्री इस बस में सवार हो गए थे. इससे बस पर सवारियों की संख्या बढ़ गई थी. प्रशासन ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बस की तेज रफ्तार या सड़क की खराब स्थिति हादसे की वजह हो सकती है. बलूचिस्तान की पहाड़ी सड़कें अक्सर खतरनाक होती हैं और यहां बस व ट्रक दुर्घटनाएं आम हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसा रात के समय हुआ, जिससे बचाव कार्य में दिक्कत आई। 

    घायलों को इलाज के लिए क्वेटा और अन्य नजदीकी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है. पाकिस्तान में सड़क सुरक्षा एक बड़ी समस्या बनी हुई है. हर साल सैकड़ों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं। खराब सड़कें, ओवरलोडेड वाहन, ड्राइवरों की लापरवाही और खराब मौसम अक्सर ऐसे हादसों का कारण बनते हैं. अभी गुरुवार इसी इलाके में मौजूद एक पर्यटन स्थल पर नाव पलट जाने की वजह से एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत हो गई। 

  • मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ‘नो रिटर्न’ पॉलिसी के बाद ईरान संग नए युद्ध की आशंका?

    मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ‘नो रिटर्न’ पॉलिसी के बाद ईरान संग नए युद्ध की आशंका?

    यरुशलम
    पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. इजरायल ने साफ कर दिया है कि उसकी सेना अब गाजा, दक्षिणी लेबनान और सीरिया से पीछे नहीं हटेगी. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने ऐलान किया है कि IDF इन तीनों इलाकों में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्रों में अनिश्चित समय तक तैनात रहेगी. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका स्थायी युद्धविराम की कोशिशों में जुटा है और कई देश तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं। 

    लेकिन इजरायल का जवाब साफ है. पहले सुरक्षा, फिर कूटनीति. इजरायल काट्ज ने कहा कि जब तक इजरायल को अपने नागरिकों की सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिलती, तब तक सेना की वापसी का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने ईरान को भी सीधी चेतावनी दी. अगर ईरान या उसके सहयोगी इन सुरक्षा क्षेत्रों पर हमला करते हैं, तो इजरायल "पूरी ताकत" से जवाब देगा। 

    इजरायली शासन की तरफ से इस तरह के विवादित बयान नए नहीं. चाहे वो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हों, रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज हों या नेतन्याहू सरकार के अन्य मंत्री, सभी की एक भाषाएं सुनने को मिल जाती हैं. वो इजरायल काट्ज हैं जिन्होंने पूरे लेबनान को जलाने की चेतावनी दी, वो पीएम नेतन्याहू ही हैं जिन्होंने पूरे फिलिस्तीन और ईरान को मिटा देने तक की बात की. तो आइए समझतें हैं कि आखिर लेबनान, गाजा और सीरिया से इजरायली सेना वापसी क्यों नहीं करेगी और नेतन्याहू शासन का प्लान क्या है। 

    गाजा में शुरू जंग लेबनान-ईरान तक फैली
    गाजा में जंग अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद शुरू हुई थी. लेकिन यह बहुत पहले ही साफ हो चुका है कि यह आतंकवाद विरोधी अभियान नहीं रह गया है. इजरायल के ऊर्जा मंत्री एली कोहेन के मुताबिक, गाजा के करीब 70 फीसदी हिस्से पर इजरायली सेना का नियंत्रण है. सरकार का अगला लक्ष्य 100 फीसदी नियंत्रण हासिल करना बताया जा रहा है। 

    इजरायल की रणनीति तीन हिस्सों में बंटी हुई है.
    पहला, हमास की सैन्य ताकत पूरी तरह खत्म करना. दूसरा, बंधकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना. तीसरा, सीमा पर स्थायी सुरक्षा बफर बनाना ताकि भविष्य में 7 अक्टूबर जैसा हमला दोबारा न हो. हालांकि इसकी कीमत बहुत भारी रही है. गाजा में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. बड़ी आबादी विस्थापित हो चुकी है. भोजन, दवाइयों और ईंधन की भारी कमी बनी हुई है. इजरायल का कहना है कि यह दबाव हमास को कमजोर करने के लिए जरूरी है। 

    लेबनान में अब पीछे हटने को तैयार नहीं इजरायल
    दूसरा बड़ा मोर्चा दक्षिणी लेबनान है. मार्च महीने में हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया. इसके बाद इजरायल ने जमीनी सैन्य अभियान शुरू किया. अब रक्षा मंत्री काट्ज का कहना है कि जब तक पूरे लेबनान में हिजबुल्लाह पूरी तरह हथियार नहीं रख देता, तब तक सेना वापस नहीं जाएगी. यानी सिर्फ सीमा से हटना अब इजरायल का लक्ष्य नहीं है. वह चाहता है कि हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म हो। 

    इस युद्ध में लेबनान को भारी नुकसान हुआ है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक करीब 4,300 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं इजरायल के भी 38 सैनिक और एक नागरिक ठेकेदार मारे गए हैं. इसके बावजूद तेल अवीव अपने फैसले पर अड़ा हुआ है। 

    सीरिया में 'लो-नॉइज ऑक्यूपेशन'
    तीसरा मोर्चा सीरिया है. यहां इजरायल की रणनीति थोड़ी अलग है. दिसंबर 2024 में बशर अल-असद सरकार के कमजोर पड़ने के बाद इजरायल ने सीमा से लगे बफर जोन में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है.रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल अब करीब 235 वर्ग किलोमीटर इलाके में प्रभावी नियंत्रण बनाए हुए है. इसमें माउंट हर्मोन से लेकर यरमूक नदी तक का क्षेत्र शामिल बताया जाता है। 

    विशेषज्ञ इसे "लो-नॉइज ऑक्यूपेशन" कहते हैं. यानी इजरायल सीरिया में बिना बड़े युद्ध के धीरे-धीरे जमीन पर पकड़ मजबूत कर रहा है. बताया जाता है कि दिसंबर 2024 से जनवरी 2026 के बीच इजरायल ने सीरिया के भीतर 800 से ज्यादा सैन्य अभियान चलाए. कुछ अभियान सीमा से 60 किलोमीटर से ज्यादा अंदर तक पहुंचे. इजरायल का कहना है कि यह कदम "जिहादी संगठनों" को सीमा से दूर रखने के लिए उठाया गया है। 

    लेबनान-गाजा की जंग में ईरान का क्या रोल?
    गाजा में हमास. लेबनान में हिजबुल्लाह और सीरिया में ईरान समर्थित कई सशस्त्र गुट. इजरायल इन तीनों को ईरान के "एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस" का हिस्सा मानता है. यही वजह है कि तेल नेतन्याहू शासन इन तीनों मोर्चों को एक साथ देख रहा है. काट्ज ने साफ कहा कि अगर ईरान ने सीधे हमला किया, तो जवाब भी सीधे ईरान को मिलेगा। 

    दूसरी तरफ ईरान ने भी कड़ा रुख दिखाया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर ईरान के लोगों या नेतृत्व को निशाना बनाया गया, तो जवाब तुरंत और पूरी ताकत से दिया जाएगा. यानी दोनों देशों की भाषा लगातार आक्रामक होती जा रही है. यही सबसे बड़ी चिंता है। 

    क्या अमेरिका की बात अब नहीं सुन रहा इजरायल?
    अमेरिका लगातार युद्धविराम की कोशिश कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र भी सैन्य वापसी की मांग कर चुका है. लेकिन इजरायल फिलहाल किसी दबाव में झुकता नहीं दिख रहा. काट्ज ने साफ कहा कि इजरायल ने कभी अमेरिका से अपने युद्ध लड़ने को नहीं कहा. इसलिए सुरक्षा से जुड़े फैसले भी वही खुद करेगा. यानी अब इजरायल अपनी स्वतंत्र सुरक्षा नीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। 

    इजरायल की नई "नो-एग्जिट डॉक्ट्रिन" पूरे मध्य पूर्व की राजनीति बदल सकती है. अगर सेना लंबे समय तक गाजा, लेबनान और सीरिया में बनी रहती है, तो इन इलाकों का सुरक्षा संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा. लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. जितना लंबा सैन्य कब्जा रहेगा, उतना ही ईरान और उसके सहयोगी संगठनों के साथ टकराव का खतरा बढ़ेगा. यही वजह है कि अब पूरी दुनिया की नजर एक सवाल पर टिकी है कि क्या यह रणनीति इजरायल को सुरक्षा देगी, या फिर पश्चिम एशिया को एक और बड़े युद्ध की तरफ धकेल रही है?

     

  • Pakistan-Afghanistan Tension: पाक हमलों के जवाब में तालिबान का एक्शन, ड्रोन से ISIS ठिकानों पर एयरस्ट्राइक

    Pakistan-Afghanistan Tension: पाक हमलों के जवाब में तालिबान का एक्शन, ड्रोन से ISIS ठिकानों पर एयरस्ट्राइक

    काबुल 

    पड़ोसी देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सैन्य टकराव के कारण अब हालात काफी तनावपूर्ण हैं. अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तानी सीमा के भीतर घुसकर आतंकी संगठन ISIS-K के ठिकानों पर बड़ी एयरस्ट्राइक की है. तालिबान के मुताबिक,  इन ठिकानों से अफगानिस्तान में नागरिकों पर हमलों की साजिश रची जा रही थी. यह दावा पाकिस्तान के हालिया हवाई हमलों के दो दिन बाद सामने आया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है। 

    तालिबान का कहना है कि यह बड़ी सैन्य कार्रवाई पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में की गई है. अफगानिस्तान के न्यूज चैनल 'टोलो न्यूज' ने भी इस दावे की पुष्टि की है. रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के ड्रोन विमानों ने सीधे उन ठिकानों को हिट किया जहां ISIS-K के आतंकी छिपे थे. खैबर पख्तूनख्वा के सरान इलाके में तो एक स्कूल को मलबे में तब्दील कर दिया गया, क्योंकि आतंकी उसे अपना गुप्त ठिकाना बनाकर रह रहे थे. तालिबान ने साफ किया कि इस हमले में कई आतंकी ढेर हुए हैं, जबकि किसी भी आम नागरिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। 

    पाकिस्तान के हमले का करारा पलटवार

    तालिबान का यह बड़ा एक्शन रविवार को पाकिस्तान द्वारा की गई बमबारी का नतीजा माना जा रहा है. दरअसल, दो दिन पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की सीमा में घुसकर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए थे. संयुक्त राष्ट्र (UNAMA) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की उस कार्रवाई में कम से कम 28 बेकसूर लोग मारे गए थे और कई घायल हुए थे. वहीं, अफगानिस्तान के सरकारी प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने मरने वाले नागरिकों की संख्या 38 बताई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. तालिबान के इस ताजा एक्शन को उसी पाकिस्तानी हमले का सीधा और करारा जवाब माना जा रहा है। 

    सोमवार को भारत ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर अफगानिस्तान पर हुए पाकिस्तानी हमलों की निंदा की. भारत का कहना है कि किसी दूसरे देश की सीमा में घुसकर हमला करना उसकी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन है, जिससे पूरे इलाके की शांति खतरे में पड़ती है. भारत ने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान अपनी घरेलू नाकामियों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए पड़ोसियों पर ऐसे हमले करता रहा है। 

    फिलहाल, पाकिस्तान हमेशा की तरह आरोप लगा रहा है कि अफगानिस्तान आतंकियों को पनाह दे रहा है, जबकि तालिबान का कहना है कि आतंकवाद पाकिस्तान की खुद की पैदा की हुई अंदरूनी समस्या है. अब इस ताजा एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच जंग का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। 

  • America Weather Alert: 115°F जैसी महसूस हो रही गर्मी, भीषण हीटवेव से 6 करोड़ लोगों पर संकट

    America Weather Alert: 115°F जैसी महसूस हो रही गर्मी, भीषण हीटवेव से 6 करोड़ लोगों पर संकट

    वाशिंगटन 
    अमेरिका इस समय साल की सबसे खतरनाक हीटवेव का सामना कर रहा है. देश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में भीषण गर्मी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि कई इलाकों में तापमान से ज्यादा खतरनाक गर्मी का एहसास होगा, जहां ह्यूमिडिटी की वजह से लोगों को 115 डिग्री फारेनहाइट यानी करीब 46 डिग्री सेल्सियस जैसी गर्मी महसूस होगी। 

    अमेरिका की नेशनल वेदर सर्विस (NWS) ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में 18 राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ सकती है. हालात इतने गंभीर हैं कि 6 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए हीट अलर्ट जारी किया गया है। 

    मौसम विभाग के मुताबिक, कई इलाकों में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाएगा. लेकिन असली चिंता तापमान नहीं, बल्कि हीट इंडेक्स को लेकर है. ज्यादा नमी यानी ह्यूमिडिटी की वजह से लोगों को गर्मी 115 डिग्री फारेनहाइट यानी करीब 46 डिग्री सेल्सियस जैसी महसूस होगी। 

    अमेरिका की नेशनल वेदर सर्विस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी चेतावनी में कहा है कि देश के पूर्वी दो-तिहाई हिस्से में खतरनाक और कई जगह रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ने वाली है. एजेंसी के मुताबिक, यह हीटवेव 4 जुलाई यानी अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस वाले लंबे वीकेंड तक जारी रह सकती है। 

    दिन तो दिन, रात में भी नहीं मिलेगी राहत
    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दिन ही नहीं, रातों में भी राहत नहीं मिलेंगी. कई शहरों में रात का तापमान भी 80 डिग्री फारेनहाइट यानी करीब 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा. इसका मतलब है कि लोगों को रात के समय भी गर्मी से राहत नहीं मिलेगी, जिससे हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा काफी बढ़ जाएगा। 

    NWS के मुताबिक, हीट इंडेक्स वह पैमाना है जिसमें एक्चुअल तापमान के साथ हवा में मौजूद नमी को भी शामिल किया जाता है. इसलिए कई बार थर्मामीटर पर तापमान कम दिखाई देता है, लेकिन शरीर को उससे कहीं ज्यादा गर्मी महसूस होती है. यही वजह है कि इस बार हीट इंडेक्स 100 से 110 डिग्री फारेनहाइट तक रहने का अनुमान है, जबकि कुछ इलाकों में यह 115 डिग्री तक पहुंच सकता है। 

    हीट एग्जॉशन और जानलेवा हीट स्ट्रोक का खतरा
    स्वास्थ्य एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि वे धूप में निकलने से बचें, खूब पानी पिएं, एयर कंडीशनर या ठंडी जगहों पर रहें और बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों का खास ध्यान रखें. डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक तेज धूप में रहने से हीट क्रैम्प्स, हीट एग्जॉशन और जानलेवा हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। 

    दिलचस्प बात यह है कि जहां अमेरिका का पूर्वी हिस्सा आग उगलती गर्मी से जूझ रहा है, वहीं पश्चिमी हिस्से में मौसम बिल्कुल उल्टा है. मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी राज्यों में तापमान सामान्य से 20 से 35 डिग्री फारेनहाइट तक कम रहने का अनुमान है. हालांकि देश के बड़े हिस्से में फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही खतरनाक हीटवेव बनी हुई है, जिसने करोड़ों लोगों की दिनचर्या प्रभावित कर दी है और आने वाले कई दिनों तक राहत मिलने के आसार भी कम नजर आ रहे हैं। 

  • क्या डॉलर के बुरे दिन शुरू? दुनिया के कई केंद्रीय बैंक घटा सकते हैं डॉलर पर निर्भरता

    क्या डॉलर के बुरे दिन शुरू? दुनिया के कई केंद्रीय बैंक घटा सकते हैं डॉलर पर निर्भरता

    न्यूयॉर्क

    क्‍या डॉलर के बुरे दिन शुरू होने वाले हैं, अब डॉलर दुनिया में दबदबे वाली करेंसी नहीं रहेगी या क्‍या दुनिया को डॉलर का विकल्‍प मिल गया है? एक रिपोर्ट में ऐसा खुलासा किया गया है, जिसके बाद आपके भी मन में ये सभी सवाल घूमने लगेंगे. रॉयटर्स की रिपोर्ट में एक सर्वे के हवाले से कहा गया है कि दुनिया अब डॉलर रिजर्व को कम करने की तैयारी कर रही है. दुनिया में ऐसा पहली बार होने जा रहा है। 

    यह सर्वे ऑफिशियल मॉनिटरी एंड फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस फोरम (OMFIF) की ओर से की गई है. इस सर्वे में कहा गया है कि पहली बार दुनिया के केंद्रीय बैंक आने वाले 10 सालों में अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में अमेरिकी डॉलर की हिस्‍सेदारी बढ़ाने के बजाय घटाने की योजना बना रहे हैं, जो यह संकेत देता है कि फॉरेक्‍स रिजर्व पोर्टफोलियो को दुनिया डाइवर्सिफाइड रखना चाहती है। 

    पहले क्‍यों होती थी सिर्फ डॉलर बढ़ाने की बात? 
    दरअसल, दुनिया में सबसे स्थिर करेंसी डॉलर मानी जाती रही है और पूरी दुनिया डॉलर में ही एक दूसरे देश से कारोबार कर रहे हैं. चाहे तेल का आयात हो या किसी फूड आइटम्‍स का निर्यात डॉलर में ही लेनदेन होता रहा है, लेकिन अब स्थिति‍ धीरे-धीरे बदल रही है. कई देश लोकल करेंसी में आयात-निर्यात करना शुरू कर चुके हैं और अमेरिका के दबाव वाली राजनीति से नाराज भी दिख रहे हैं. सर्वे में खुलासा हुआ है कि ऐसा पहली बार है कि ज्‍यादातर देश डॉलर होल्डिंग्‍स को अगले 10 साल में कम करने जा रहे हैं। 

    क्‍यों हो रही डॉलर घटाने की बात? 
    सर्वे के अनुसार, केंद्रीय बैंकों को तीन बड़े रि
    स्‍क दिखाई दे रहे हैं, जो डॉलर को लेकर पैदा हुए हैं. इसमें सबसे बड़ा अमेरिकी राजनीतिक अनिश्‍चतता, जिससे डॉलर की स्थिर रहने पर सवाल खड़ा हुआ है. दुसरा कई देशों के साथ अमेरिका का जियो-पॉलिटिकल टेंशन, जिस कारण डॉलर में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. खासकर ईरान जंग के दौरान डॉलर में अस्थिरता काफी दिखाई दी है. तीसरी सबसे बड़ी वजह ग्‍लोबल फाइनेंशियल सिस्‍टम का मल्‍टीपोलर होना यानी ज्‍यादातर देश अब सिर्फ डॉलर नहीं, बल्कि अलग-अलग करेंसी में एक दूसरे के साथ ट्रेड कर रहे हैं. इसका सीधा मतलब है कि दुनियाभर के देश अब सिर्फ डॉलर पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं। 

    डॉलर की जगह कौन-कौन सी करेंसी ज्‍यादा पसंद हैं 
    अभी डॉलर का विकल्‍प स्‍पष्‍ट तौर पर दिखाई नहीं देता है, लेकिन अगर ऐसा ही रहा तो बहुत जल्‍द दुनिया डॉलर को पीछे छोड़कर किसी दूसरे करेंसी की ओर बढ़ेगी. सर्वे में कहा गया है कि डॉलर की जगह सबसे ज्‍यादा पसंद किए जाने वाली चीजों में सोना, यूरो, ब्रिटिश पाउंड, चीनी युआन, नॉर्वे की क्रोन और न्‍यूजीलैंड डॉलर है. हालांकि, सर्वे का यह भी कहना है कि यूरो और युआन की अपनी लिमिटेशन हैं, यही कारण है कि वे डॉलर का पूर्ण विकल्‍प नहीं बन पाए हैं। 

    सोने का बढ़ रहा रिजर्व
    रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस सर्वे से पहले एक अन्‍य सर्वे में कहा गया है कि रिकॉर्ड संख्या में केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाने की योजना बना रहे हैं. कई देशों के लिए सोना अब जियो-पॉलिटिकल रिस्‍क के खिलाफ सुरक्षा और रिजर्व को डाइवर्सिफाई रखने का प्रमुख साधन बनता जा रहा है। 

    डॉलर का वजूद मिट जाएगा?
    रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी तक ऐसा नहीं दिखाई देता है कि डॉलर का प्रभुत्‍व दुनिया से खत्‍म हो जाएगा, क्‍यों डॉलर अभी दुनिया की सबसे बड़ी रिजर्व करेंसी है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और सुरक्षित निवेश के रूप में उसकी भूमिका बहुत मजबूत बनी हुई है. बदलाव अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे हो रहा है। 

    भारत पर क्‍या असर होगा? 
    अगर डॉलर से निर्भरता कम होती है तो भारत जैसे देश अपनी करेंसी को बढ़ावा दे सकते हैं और दुनिया के साथ रुपये में कारोबार बढ़ सकता है. साथ ही अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने और अन्य मुद्राओं का हिस्सा बढ़ा सकते हैं. हालांकि, ये अचानक नहीं होगा, बल्कि डॉलर का दबदबा धीरे-धीरे कम हो सकता है। 

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप और मजबूत, राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर बड़ा बदलाव

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप और मजबूत, राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर बड़ा बदलाव

    वाशिंगटन

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी ताकत दी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मानें तो अब वह किसी भी एजेंसी चीफ को कभी भी बटा सकते हैं. जी हां, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों का दायरा काफी बढ़ा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्वतंत्र फेडरल एजेंसियो के प्रमुखों को हटाए जाने के फैसले को सही ठहराया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में  कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के प्रमुखों को अपनी इच्छा से पद से हटा सकते हैं. हालांकि, इस फैसले में फेडरल रिजर्व यानी अमेरिकी केंद्रीय बैंक को इससे अलग रखा गया है। 

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या अपवाद रखा?
    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जजों अपने फैसले में यह भी कहा कि फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक (Lisa Cook) फिलहाल अपने पद पर बनी रहेंगी. वह ट्रंप प्रशासन की ओर से उन्हें हटाने की कोशिश के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने उन पर मॉर्गेज फ्रॉड के आरोप लगाए हैं. हालांकि, कुक ने इन आरोपों से इनकार किया है। 

    अब ट्रंप को वजह बताने की जरूरत नहीं
    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, फेडरल रिजर्व को छोड़कर बाकी स्वतंत्र एजेंसियों के प्रमुखों को हटाने के लिए अब राष्ट्रपति को किसी खास वजह अथवा कारण की जरूरत नहीं होगी. इससे पहले संघीय कानूनों के तहत ऐसे अधिकारियों को हटाने के लिए ठोस कारण बताना जरूरी था. यानी देश के सेंट्रल बैंक को छोड़कर कोर्ट ने माना कि राष्ट्रपति अपनी मर्जी से एजंसियों के प्रमुखों को हटा सकते हैं। 

    सुप्रीम कोर्ट ने पलटा 91 साल पुराना फैसला
    सुप्रीम कोर्ट ने 91 साल पुराने अपने ही ऐतिहासिक फैसले Humphrey’s Executor v. United States को भी पलट दिया. उस फैसले में राष्ट्रपति के अधिकार सीमित किए गए थे ताकि स्वतंत्र एजेंसियां राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर काम कर सकें. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कोर्ट के 6 कंजर्वेटिव जजों के बहुमत से आया, जिसे ट्रंप प्रशासन की शक्तियों में बड़ी बढ़ोतरी के तौर पर देखा जा रहा है. इस बेंच में 9 जज शामिल थे। 

    चीफ जस्टिस ने क्या कहा
    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति को अधिकारियों को हटाने से रोकने वाली व्यवस्था संविधान में तय शक्तियों के बंटवारे के खिलाफ है. जजों ने फेडरल ट्रेड कमीशन की पूर्व सदस्य रेबेका स्लॉटर के मामले में फैसला सुनाया, जिन्हें ट्रंप ने बिना किसी कारण के निकाल दिया था, जबकि फेडरल कानून के एक नियम के अनुसार कारण बताना जरूरी है। 

    इस फैसले का लॉजिक दूसरी एजेंसियों पर भी लागू होता है, जिनमें नेशनल लेबर रिलेशंस बोर्ड, मेरिट सिस्टम्स प्रोटेक्शन बोर्ड और कंज्यूमर प्रोडक्ट सेफ्टी कमीशन शामिल हैं, जहां ट्रंप ने बोर्ड के सदस्यों को भी निकाल दिया है. इस फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप काफी खुश हैं। 

    डोनाल्ड ट्रंप हुए खुश
    डोनाल्ड ट्रंप ने एक ट्रुथ सोशल पोस्ट में इस फैसले पर अपनी खुशी और सहमति जताई. उन्होंने लिखा, ‘यह बहुत सम्मान की बात है कि मौजूदा प्रेसिडेंट होने के नाते यह ऐतिहासिक और अभूतपूर्व फैसला मिला, जो प्रेसिडेंशियल शक्तियों के संबंध में अब तक दिए गए सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक है। 

  • पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर फिर भड़की हिंसा, आधी रात के हमले में 35 लोगों की मौत, बढ़ा तनाव

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर फिर भड़की हिंसा, आधी रात के हमले में 35 लोगों की मौत, बढ़ा तनाव

    काबुल 
     पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया है. पाकिस्तान ने अफगान सीमा से सटे इलाकों में मिलिट्री ऑपरेशन चलाने का दावा किया है. पाकिस्तान सरकार के मुताबिक सुरक्षा बलों ने पहले खुफिया सूचना के आधार पर जमीनी अभियान चलाया और उसके बाद अफगानिस्तान सीमा के पास आतंकियों के ठिकानों पर सटीक हवाई हमले (कैलिब्रेटेड स्ट्राइक) किए. इस कार्रवाई में कुल 35 लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है. यह ऑपरेशन ऐसे समय हुआ है जब एक दिन पहले कराची में पाकिस्तान रेंजर्स के मुख्यालय पर बड़ा आतंकी हमला हुआ था. रिपोर्ट् के मुताबिक पाकिस्तान की ओर से यह एक महीने में चौथा हमला है. इससे पहले 10 जून को पाकिस्तान के हमले में 26 लोग मारे गए थे। 

    पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि हाल के दिनों में देशभर में सुरक्षा बलों पर बढ़ते आतंकी हमलों के जवाब में यह अभियान शुरू किया गया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। 

    कराची हमले के बाद हुई कार्रवाई
    शनिवार को कराची स्थित पाकिस्तान रेंजर्स
    के क्षेत्रीय मुख्यालय पर हथियारों और विस्फोटकों से लैस आतंकियों ने हमला किया था. इस हमले में तीन पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई थी. जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने तीन हमलावरों को मार गिराया, जबकि एक हमलावर घायल अवस्था में गिरफ्तार किया गया. पाकिस्तानी सेना के अनुसार गिरफ्तार आरोपी अफगान नागरिक है. इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़े संगठन जमात-उल-अहरार ने ली थी। 

    किन ठिकानों को बनाया निशाना?
    पाकिस्तान के मुताबिक सबसे पहले खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में खुफिया सूचना के आधार पर जमीनी अभियान चलाया गया. इस दौरान पाकिस्तान ने दावा किया कि ‘खान फरोश’ नाम का एक प्रमुख कमांडर समेत चार आतंकवादी मारे गए. इसके बाद अफगानिस्तान सीमा से लगे इलाकों में मौजूद जमात-उल-अहरार और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े ठिकानों पर सटीक हमले किए गए. पाकिस्तान का दावा है कि अफगानिस्तान के पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में स्थित तीन ठिकाने नष्ट कर दिए गए, जहां 25 आतंकवादी मारे गए. इसके अलावा बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी नष्ट करने की बात कही गई है। 

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान में क्यों बढ़ रहा तनाव?
    पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में सुरक्षा बलों और पुलिस पर हमले लगातार बढ़े हैं. पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और उससे जुड़े संगठन अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमले करते हैं. हालांकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है. पाकिस्तान इससे पहले भी कई बार सीमा पार कर हवाई हमला करता रहा है। 

  • “डरने वाली नहीं हूं”शेख हसीना ने मौत की सजा और देश वापसी को लेकर रखी अपनी बात

    “डरने वाली नहीं हूं”शेख हसीना ने मौत की सजा और देश वापसी को लेकर रखी अपनी बात

    नई दिल्ली
    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और दो साल पहले हुए सत्ता परिवर्तन की वजह से अपना देश छोड़कर भारत आने वाली शेख हसीना ने वापसी को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वह इसी साल बांग्लादेश वापस लौट जाएंगी। उन्होंने अवामी लीग को सिर्फ एक दल नहीं, बल्कि अपनी ताकत बताया। बांग्लादेश में साल 2024 के मध्य में बड़े पैमाने पर विरोध और हिंसा हुई थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री आवास तक भीड़ पहुंच गई। इसके चलते उन्हें अपने देश को छोड़कर भागना पड़ा और भारत से अच्छे संबंध होने की वजह से वे नई दिल्ली में तब से रह रही हैं। हसीना ने साफ कर दिया है कि इस साल के आखिरी में वह बांग्लादेश लौट जाएंगी। हसीना को बांग्लादेश में फांसी की सजा मिली हुई है।

    शेख हसीना के भारत आने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद से भी हटा दिया गया था। उनके खिलाफ स्थानीय स्तर पर काफी गुस्सा था। हालांकि, बाद में पूरी दुनिया को पता चल गया कि वह आंदोलन कोई बांग्लादेश के भलाई के लिए नहीं, बल्कि उसे और कट्टरता की ओर ले जाने के लिए ही था। हसीना के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार चली, जिसमें जमकर दंगे हुए। हिंदुओं को जमकर प्रताड़ित किया गया। कई को तो जिंदा ही मार डाला गया और ज्यादातर के मंदिरों, घरों को भी नुकसान पहुंचाया गया। इस साल फरवरी में हुए आम चुनाव में बांग्लादेश में यूनुस से बांग्लादेश का पीछा छूटा और तारिक रहमान प्रधानमंत्री बने। इसके बाद, भारत और बांग्लादेश के संबंध बेहतर होने लगे हैं।

    ‘मैं इसी साल बांग्लादेश वापस लौट जाऊंगी’
    एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में जब शेख हसीना से पूछा गया कि आपने कई बार संकेत दिया है कि आप जल्द ही बांग्लादेश लौट सकती हैं, तो इस पर उन्होंने जवाब दिया, ''मेरी वापसी कोई पर्सनल एम्बिशन का सवाल नहीं है। यह एक बहुत बड़े सवाल से जुड़ा है। बांग्लादेश के लोगों के पॉलिटिकल राइट्स, लोकतंत्र की बहाली, कानून का राज स्थापित करना बहुत जरूरी है। मैं सत्ता के लिए राजनीति नहीं करती हूं और बांग्लादेश के लोगों की भलाई के लिए राजनीति करती हूं। मैं बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के सोनार बांग्ला बनाने के सपने को पूरा करने के लिए राजनीति में आई और उसे पूरा करने के लिए काम करती हूं। मैं साफ-साफ कह देना चाहती हूं कि हर रुकावट और साजिश को पार करते हुए मैं इस साल अपने देश वापस लौट जाऊंगी।''

    मौत की सजा को बताया गैर-कानूनी
    शेख हसीना ने बांग्लादेश में मिली मौत की सजा पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह फैसला मेरे लिए न्याय नहीं है। यह गैर-कानूनी, गैर-संवैधानिक और राजनीति से प्रेरित है। ज्यूडिशियरी को अवामी लीग की लीडरशिप से बदला लेने के लिए एक जरिया बना दिया गया। इस तरह की कोशिशें पहले भी हुईं, तब भी फेल रहीं, अब भी फेल रहेंगी। उन्होंने आगे कहा कि मैं मौत से नहीं डरती हूं। 1975 में मैंने अपने पिता, अपने भाइयों और लगभग अपने पूरे परिवार को खो दिया। 21 अगस्त को मुझे ग्रेनेड से मारने की कोशिश हुई थी। मेरे खिलाफ कई बार साजिशें रची गईं, लेकिन हर बार उससे बाहर आई।

    उन्होंने आगे कहा कि मैं बांग्लादेश के लोगों के लिए हमेशा खड़ी रही हूं। पांच बार जनता के वोटों से प्रधानमंत्री चुनी गई और देश के विकास के लिए लगातार काम किया। शेख हसीना ने आगे बताया कि अवामी लीग कोई कागज का संगठन नहीं है। यह एक ऐसी ताकत है, जोकि बंगाल की मिट्टी, बंगाल के लोगों, बंगाल के इतिहास और बंगाली राष्ट्र की पहचान में बसी हुई है। 77 साल के इतिहास में अवामी लीग पर कई बार हमले हुए हैं, कई बार खून भी बहा है और उस पर बैन भी लगाया गया, लेकिन हर बार यह लोगों की ताकत से वापस उठ खड़ी हुई है।