Category: विदेश

  • युवक की दर्दनाक मौत से नेपाल में उबाल, बालेन शाह पर विपक्ष का बड़ा हमला

    युवक की दर्दनाक मौत से नेपाल में उबाल, बालेन शाह पर विपक्ष का बड़ा हमला

    नई दिल्ली
    नेपाल की राजधानी काठमांडू की सड़कों पर इन दिनों भारी उबाल है। वजह है 25 साल के एक युवक की दर्दनाक मौत, जिसने सिस्टम की बेरुखी और कर्ज के तनाव में आकर सरेआम खुद को आग के हवाले कर दिया। गणेश नेपाली नाम का यह युवक अब बालेन्द्र शाह सरकार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों का सबसे बड़ा चेहरा बन गया है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि बढ़ते बवाल को देखते हुए चल रहे संसद सत्र तक को स्थगित करना पड़ा है। जेन-जी यानी युवा वोटर्स के भारी समर्थन से महज चार महीने पहले सत्ता में आई बालेन्द्र शाह की सरकार के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा संकट बन गया है।

    कैसे घटी यह दिल दहला देने वाली घटना?
    घटना 10 जुलाई की है। गणेश नेपाली एक राइड-शेयरिंग ऐप के लिए बाइक चलाकर अपने परिवार का पेट पालता था। काठमांडू में पासपोर्ट विभाग के बाहर कथित तौर पर रास्ता ब्लॉक करने के आरोप में पुलिस ने उसकी मोटरसाइकिल के पहियों पर क्लैंप लगा दिया।

    मोटरसाइकिल ही उसकी रोजी-रोटी का इकलौता साधन थी। इस बात पर उसकी एक अधिकारी से तीखी बहस हो गई और धक्का-मुक्की हुई। पुलिस की इस कार्रवाई से गणेश इस कदर टूट गया कि उसने अपनी ही बाइक से पेट्रोल निकाला, खुद पर छिड़का और आग लगा ली। 60% से ज्यादा जल चुके गणेश को तुरंत एक टॉप अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन जिंदगी और मौत के बीच एक दिन की जंग लड़ने के बाद उसने दम तोड़ दिया।
    कर्ज का बोझ और विदेश जाने का था सपना

    गणेश का परिवार नेपाल के एक बेहद पिछड़े इलाके 'मुगु' से आता है। उसके माता-पिता सीमांत किसान हैं जो सरकारी पेंशन के सहारे गुजर-बसर करते हैं। बड़े भाई मदन नेपाली के मुताबिक गणेश ने यह बाइक लोन पर ली थी और उसकी अगली किस्त की तारीख बेहद करीब थी। पुलिस द्वारा बाइक जब्त किए जाने के बाद उसे किस्त चुकाने और परिवार पालने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था, जिससे वह गहरे तनाव में चला गया।

    दोनों भाई दलित समुदाय से हैं। मदन खुद सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारक होने के बावजूद काठमांडू में मजदूरी करने को मजबूर है। दोनों भाइयों का सपना पैसे जोड़कर खाड़ी देशों और फिर जापान या दक्षिण कोरिया जाने का था।

    बैकफुट पर आई सरकार, किया डैमेज कंट्रोल
    इस घटना के बाद नेपाल में पहले से चल रहे कई विरोध प्रदर्शनों को और हवा मिल गई। विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने विपक्ष पर इस मौत पर राजनीति करने का आरोप लगाया, जिससे जनता का गुस्सा और भड़क गया।

    हालात बेकाबू होते देख सरकार ने तुरंत डैमेज कंट्रोल शुरू किया
    सरकार ने गणेश की 20 वर्षीय पत्नी एकमाया परियार के लिए सरकारी नौकरी और 2 साल की बेटी की शिक्षा का खर्च उठाने का ऐलान किया है। आईटी में डिप्लोमा कर चुकी एकमाया गर्भवती हैं। उनके पास 'नागरिकता प्रमाण पत्र' नहीं था। गृह मंत्री गुरुंग ने खुद जाकर उन्हें यह सर्टिफिकेट सौंपा ताकि उन्हें सरकारी राहत मिल सके। मौत की जांच के लिए डीआईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में 5 सदस्यीय टीम बनाई गई है। खबरों के मुताबिक, सरकार गणेश को "शहीद" का दर्जा भी दे सकती है।

    जिस जेन-जी ने बालेन शाह को कुर्सी पर बिठाया वही अब अपने पीएम के खिलाफ है। अगर ये गुस्सा बढ़ता गया तो बहुत जल्द बालेन शाह का काला चश्मा भी उतर सकता है। यही वजह है कि विपक्ष की बालेन के काले चश्मे पर तंज कस रहा है और उसे निकालने की हिदायत दे रहा है। बता दें कि नेपाली पीएम बालेन अपने स्टाइलिश लुक के लिए खासा चर्चा में रहते हैं। वे अक्सर बंद कमरे में भी काला चश्मा पहने दिखते हैं।

    सिर्फ गणेश की मौत नहीं, इन वजहों से भी है उबाल
    गणेश की मौत तो सिर्फ एक चिंगारी थी, असल में नेपाल की जनता में सरकार के खिलाफ कई और मुद्दों को लेकर भी बारूद इकट्ठा हो रहा था। बालेन्द्र शाह सरकार के कुछ फैसलों ने लोगों को नाराज कर रखा है।

        ट्रेड यूनियनों और छात्र संगठनों को भंग करना।
        संसद को दरकिनार करते हुए सीधे अध्यादेश पास करना।
        अप्रैल में काठमांडू में चलाए गए डिमोलिशन ड्राइव यानी अतिक्रमण हटाओ अभियान में हजारों लोग बेघर हो गए थे।

    सोमवार को जब पशुपतिनाथ मंदिर के पास गणेश का अंतिम संस्कार किया गया, तो वहां उसके 700 किलोमीटर दूर से आए बूढ़े माता-पिता के साथ-साथ अतिक्रमण अभियान में बेघर हुए कई परिवार भी मौजूद थे। हालात को शांत करने के लिए अब सरकार लगातार प्रदर्शनकारियों से बातचीत की कोशिश कर रही है। पीएम के प्रमुख सचिव ने 50,000 से ज्यादा संविदा कर्मचारियों से भी हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की अपील की है और उन्हें नौकरी से न निकालने का भरोसा दिया है।

    विपक्ष का तंज- 'काले चश्मे उतारें पीएम'
    नेपाली कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेर लिया है। संसद में नेपाली कांग्रेस की सांसद बसाना थापा ने पीएम बालेन शाह पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि प्रधानमंत्री अपने 'काले चश्मे' उतारें और जनता की हकीकत का सामना करें। वहीं, दूसरी तरफ गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि विपक्षी दल गणेश नेपाली की दुखद मौत पर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं और युवाओं को भड़का रहे हैं।

  • अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीयों का बढ़ा प्रभाव, महंगाई से निपटने के लिए फेड ने रघुराम राजन समेत 3 विशेषज्ञों पर जताया भरोसा

    अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीयों का बढ़ा प्रभाव, महंगाई से निपटने के लिए फेड ने रघुराम राजन समेत 3 विशेषज्ञों पर जताया भरोसा

    वाशिंगटन

    अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति और कामकाज की समीक्षा करने के लिए 5 नए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया है. फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वॉर्श ने बताया क‍ि इन कमेट‍ियों में पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन समेत तीन भारतीय मूल के दिग्गजों को शामिल किया गया है. ये लोग अमेर‍िका में महंगाई पर काबू पाने के तरीके बताएंगे। 

    रघुराम राजन
    आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन फेड की बैलेंस शीट पॉल‍िसी की समीक्षा करेंगे. यह पैनल फेडरल रिजर्व की खरबों डॉलर के एसेट्स और मौद्रिक नीति पर उनके असर का आकलन करेगा, ताकि यह समझा जा सके कि महंगाई पर काबू पाने में ये कितने मददगार हैं। 
    राज चेट्टी
    दिल्ली में जन्मे और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के मशहूर अर्थशास्त्री राज चेट्टी इस डेटा पैनल के कोकोऑड‍िनेटर होंगे. इनका मुख्य काम फेड की नीतियां तय करने के लिए इस्तेमाल होने वाले इकोनॉम‍िक डेटा की गुणवत्ता और टाइमिंग को बेहतर बनाना है, ताकि फैसले सटीक समय पर लिए जा सकें। 

    आशा शर्मा
    माइक्रोसॉफ्ट की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और एक्सबॉक्स की सीईओ आशा शर्मा को इस महत्वपूर्ण पैनल में जगह मिली है. यह ग्रुप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य नई तकनीकों का देश की उत्पादकता, जॉब्‍स और आर्थिक विकास पर पड़ने वाले असर का मूल्यांकन करेगा। 

    क्‍यों भारतीयों को लाना पड़ा
    फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के मुताबिक, इन कार्यबलों का उद्देश्य फेडरल रिजर्व के काम में पारदर्शिता लाना और नए विचारों को शामिल करना है. इन कमेटियों में नोबेल पुरस्कार विजेता थॉमस सार्जेंट, वॉलमार्ट के पूर्व सीईओ डोंग मैकमिलन और दिग्गज वेंचर कैपिटलिस्ट मार्क एंड्रीसन जैसे दुनिया के सबसे बेहतरीन दिमाग भी शामिल किए गए हैं। 

  • ईरान-अमेरिका सीजफायर खत्म, ट्रंप का बड़ा ऐलान; बढ़ा पश्चिम एशिया में नए टकराव का खतरा

    ईरान-अमेरिका सीजफायर खत्म, ट्रंप का बड़ा ऐलान; बढ़ा पश्चिम एशिया में नए टकराव का खतरा

    नईदिल्ली 

    अमेरिका और ईरान के बीच हुआ संघर्ष-विराम (सीजफायर) टूटने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को पूरी तरह खत्म घोषित कर दिया है इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने चाबहार और बुशहर सहित ईरान के लगभग 90 सैन्य ठिकानों और बंदरगाहों पर भारी बमबारी की है अमेरिका द्वारा किए गए इस बड़े एक्शन और जवाबी कार्रवाई के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
    सीजफायर का अंत: 
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले करने और समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए सीजफायर समाप्त होने का ऐलान किया है 
    अमेरिकी एयरस्ट्राइक: 
    अमेरिकी नौसेना और वायु सेना ने ईरान के चाबहार और बुशहर सहित कई तटीय ठिकानों पर विनाशकारी बमबारी की है
    ईरान का पलटवार: 
    जवाबी कार्रवाई में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं。भारत पर प्रभाव: होरमुज की खाड़ी से गुजरने वाले तेल व्यापार और चाबहार पोर्ट पर जारी इस तनाव से भारत की ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक हितों के प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई है

  • ईरान संकट पर अमेरिका-चीन की बढ़ी तनातनी, क्या क्षेत्रीय संघर्ष ले सकता है वैश्विक युद्ध का रूप?

    ईरान संकट पर अमेरिका-चीन की बढ़ी तनातनी, क्या क्षेत्रीय संघर्ष ले सकता है वैश्विक युद्ध का रूप?

    तेहरान
     
    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उसके बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी दोबारा लागू कर दी है. अमेरिकी सेना के मुताबिक यह नाकेबंदी पहले भी अप्रैल से जून के बीच लागू की गई थी और अब इसे फिर से शुरू किया गया है. इसका उद्देश्य ईरान पर दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है. दूसरी ओर हालात ऐसे हो गए हैं कि पहले से लागू सीजफायर पूरी तरह टूटता नजर आ रहा है. अमेरिका ने लगातार चौथे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए. इसके जवाब में क्षेत्र के कई हिस्सों में हमलों और धमाकों की खबरें सामने आईं. इस बीच अमेरिका के सहयोगी कुवैत और बहरीन ने अपने नागरिकों को संभावित खतरों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है. वहीं ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। 

    ट्रंप ने पुलों-बिजली संयंत्रों पर हमले की चेतावनी
    इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक टीवी इंटरव्यू में ईरान को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि यदि तेहरान जल्द बातचीत की मेज पर वापस नहीं आता, तो अगले सप्ताह अमेरिका ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमला कर सकता है. ट्रंप पहले भी इस तरह की चेतावनियां दे चुके हैं और उन्हें अक्सर बातचीत के दौरान दबाव बनाने की रणनीति माना जाता है। 

    होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर नहीं लगेगी फीस
    उधर ट्रंप ने अपने पहले किए गए एक फैसले में बदलाव भी किया. उन्होंने कहा कि अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क नहीं लगाया जाएगा. इसके बजाय खाड़ी के देशों द्वारा अमेरिका में किए जाने वाले निवेश को प्राथमिकता दी जाएगी. इस फैसले को क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने और व्यापारिक तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। 

    अमेरिका ने बुशहर में 4 जगहों पर की बमबारी
    ईरान के बुशेहर प्रांत के गवर्नर मोहम्मद मोज़ाफरी ने कहा है कि अमेरिका के हमलों में शहर के चार स्थानों को निशाना बनाया गया. सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, मंगलवार सुबह हुए इन हमलों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. गवर्नर ने बताया कि सभी राहत और बचाव एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और फिलहाल शहर में स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है। 

     चीन ने दिया अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब- खतरनाक स्थिति के जिम्मेदार आप
    संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत सुन लेई ने अमेरिका पर ईरान पर बड़े सैन्य हमले करके पूरे क्षेत्र को एक बार फिर खतरनाक स्थिति में पहुंचाने का आरोप लगाया है. सुन लेई ने यह बयान तब दिया, जब संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने आरोप लगाया कि चीन ईरान और यमन तक सामान की आपूर्ति रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है. चीन ने इस आरोप को पूरी तरह बेबुनियाद बताया. सुन लेई ने कहा कि चीन ऐसे निर्यात पर सख्त नियंत्रण रखता है. उन्होंने कहा कि फिलहाल सबसे जरूरी है कि अमेरिका मध्य पूर्व में नए संघर्ष और अस्थिरता पैदा करना बंद करे। 

     अमेरिका ने चीन पर लगाया आरोप, ईरान-हूतियों की कर रहा मदद
    संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह ईरान और यमन के हूती विद्रोहियों तक ऐसे सामान की आपूर्ति रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा, जिनका इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बोलते हुए वॉल्ट्ज ने कहा कि ईरान और चीन की कुछ कंपनियों ने हूतियों पर लगाए गए संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध से जुड़े प्रस्ताव का उल्लंघन किया है, लेकिन इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। 

    अमेरिकी नाकेबंदी से पहले बढ़ी थी होर्मुज में जहाजों की संख्या
    जहाजों की निगरानी करने वाली कंपनी कप्लर (Kpler) के अनुसार, अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी लागू होने से पहले मंगलवार को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बढ़ गई. आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान गुजरने वाले 11 जहाजों में से 9 ईरान से जुड़े व्यापारिक मार्ग का इस्तेमाल कर रहे थे. इनमें एक बहुत बड़ा तेल टैंकर लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल, एक टैंकर रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद और दो जहाज एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) लेकर निकले. वहीं, मंगलवार को अन्य खाड़ी देशों से तेल या गैस लोड करने वाले टैंकरों की आवाजाही नहीं देखी गई।
     
    अमेरिकी सेना ने 7 घंटे तक किया ईरान पर हमला
    अमेरिकी सेना की ओर से बताया गया है कि ईरान के खिलाफ सात घंटे तक चले अभियान में अमेरिकी लड़ाकू विमानों, ड्रोन और नौसैनिक जहाजों ने सटीक हथियारों का इस्तेमाल करते हुए ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों, नौसैनिक क्षमताओं तथा तटीय रक्षा प्रणालियों पर हमला किया. इसका उद्देश्य ईरान की वाणिज्यिक जहाज़रानी और नागरिक जहाज़ों के चालक दल को खतरे में डालने की क्षमता को और कमजोर करना था. ये हमले उसी दिन किए गए, जिस दिन अमेरिकी बलों ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले जहाजों के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी फिर से शुरू की. सेंटकॉम की ओर से कहा गया है कि अमेरिकी बल सतर्क हैं और पूरी तरह युद्ध के लिए तैयार हैं।

    युद्ध के बीच ईरान में चल रही हैं परीक्षाएं
    ईरान के शिक्षा मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों से सैन्य ठिकानों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के पास बने परीक्षा केंद्रों को दूसरी सुरक्षित जगहों पर स्थानांतरित कर दिया है. फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, अब इन परीक्षा केंद्रों को सार्वजनिक सभागारों और धार्मिक केंद्रों जैसी सुरक्षित इमारतों में चलाया जाएगा. सरकार ने यह फैसला संभावित नए हमलों के खतरे को देखते हुए लिया है, ताकि परीक्षार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और परीक्षाएं बिना किसी बाधा के कराई जा सकें। 

     ईरान का दावा, अमेरिका ने गेहूं भडारण साइलो को बनाया निशाना
    ईरान की फार्स समाचार एजेंसी के मुताबिक अमेरिका के हमले में ईरान के खुज़ेस्तान प्रांत के होवेज़ेह काउंटी स्थित एक गेहूं भंडारण साइलो को निशाना बनाया गया. प्रांत के उप-गवर्नर ने बताया कि रात में हुए इस हमले में साइलो को नुकसान पहुंचा है, लेकिन राहत की बात यह है कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। 

     

  • Iran vs US: जवाबी कार्रवाई के बाद अमेरिका पर बढ़ा दबाव, 1945 के जापान-जर्मनी जैसी तुलना की वजह क्या है?

    Iran vs US: जवाबी कार्रवाई के बाद अमेरिका पर बढ़ा दबाव, 1945 के जापान-जर्मनी जैसी तुलना की वजह क्या है?

    तेहरान 

    अमेरिका और ईरान के बीच फिर से जंग शुरू हो गई है. यदि यह लड़ाई लंबी खिंचती है तो फिर क्‍या होगा? दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. CNN की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ युद्ध के बीच अमेरिका के हथियारों का जखीरा खतरनाक स्‍तर तक कम हो गया है. THAAD और पैट्रियट इंटरसेप्‍टर का स्‍टॉक तो आधे पर पहुंच चुका है. ऐसे में यदि ईरान जंग ज्‍यादा लंबे समय तक खिंचती है तो अमेरिका के लिए खतरनाक हालात पैदा हो सकते हैं. बता दें कि राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ऐलान कर चुके हैं कि सीजफायर का दौर खत्‍म हो चुका है, ऐसे में आनेवाले दिनों में युद्ध की तीव्रता और बढ़ सकती है. मौजूदा हालात यदि ऐसे ही रहे तो अमेरिका की स्थिति ठीक वैसी ही हो सकती है, जैसी जापान और जर्मनी की दूसरे विश्‍वयुद्ध के बाद साल 1945 में हो गई थी. सेकेंड वर्ल्‍ड वॉर से पहले जापान और जर्मनी बेहद शक्तिशाली थे, लेकिन उसके बाद उनकी स्थिति डांवाडोल हो गई। 

    रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ जारी युद्ध के फिर तेज होने से अमेरिका के हथियारों का भंडार गंभीर रूप से प्रभावित होने लगा है. यदि मौजूदा रफ्तार से सैन्य अभियान जारी रहता है तो अमेरिकी सेना की भविष्य में चीन या उत्तर कोरिया जैसे संभावित प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ बड़े युद्ध लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यह कहे जाने के बाद कि ईरान के साथ संघर्षविराम अब समाप्त हो चुका है, हथियारों की खपत को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं. जंग के शुरुआती चरण में अमेरिकी सेना ने लंबी दूरी तक सटीक हमला करने और मिसाइल डिफेंस के लिए इस्तेमाल होने वाली हजारों एडवांस मिसाइलों का उपयोग किया। 

    अमेरिका की हालत होगी खराब
    सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के रक्षा विश्लेषक और रिटायर्ड मरीन कर्नल मार्क कैंसियन ने कहा कि यदि अगले कुछ दिनों तक भी यही स्थिति बनी रही तो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के रणनीतिक जोखिम का स्तर बढ़ सकता है. उनके मुताबिक, युद्ध के कारण हथियारों का भंडार इतनी तेजी से घट रहा है कि उसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं दिखती. CSIS के विश्लेषण के अनुसार, अप्रैल में ईरान के साथ संघर्ष समाप्त होने तक अमेरिका अपने थाड (THAAD) बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर्स का कम से कम आधा, पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टरों का लगभग आधा और टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का करीब 30 प्रतिशत इस्तेमाल कर चुका था. बाद में कम तीव्रता वाले हमलों के कारण हथियारों की खपत कुछ धीमी हुई, लेकिन हथियारों के भंडार की भरपाई की रफ्तार बेहद कम बनी हुई है। 

    ऐसे में तो खतरे में पड़ जाएगी बादशाहत
    एक्‍सपर्ट के मुताबिक, मौजूदा उत्पादन क्षमता के तहत अमेरिकी रक्षा विभाग को हर महीने लगभग 15 नई टॉमहॉक और 20 पैट्रियट मिसाइलें ही मिल रही हैं, जबकि वर्ष 2026 में THAAD इंटरसेप्‍टर मिसाइलों की कोई नई डिलीवरी तय नहीं है. अनुमान है कि युद्ध-पूर्व स्तर तक भंडार को दोबारा पहुंचाने में तीन से पांच वर्ष लग सकते हैं. पूर्व पेंटागन अधिकारी एलेन मैककस्कर ने कहा कि अधिकांश महत्वपूर्ण हथियारों की फिर से आपूर्ति करने में कई वर्ष लगेंगे. वहीं, रक्षा विशेषज्ञ जॉन फेरारी ने दावा किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से इन मिसाइलों की भरपाई के लिए अमेरिकी कांग्रेस ने अभी तक कोई अतिरिक्त बजट को मंजूरी नहीं दी है, जिससे उत्पादन सामान्य गति से ही चल रहा है। 

    अमेरिकी रक्षा विभाग ने क्‍या कहा?
    हालांकि, अमेरिकी के रक्षा विभाग पेंटागन का कहना है कि वह डिफेंस प्रोडक्‍शन की क्षमता को तेजी से बढ़ाने के लिए काम कर रहा है. ट्रंप सरकार ने रक्षा उत्पादन अधिनियम (Defense Production Act) का उपयोग कर मिसाइल निर्माण में आने वाली प्रशासनिक बाधाओं को कम करने और उत्पादन बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की है. साथ ही जर्मनी और यूक्रेन जैसे देशों को पैट्रियट मिसाइलों के घरेलू उत्पादन की अनुमति देने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन प्रयासों का असर दिखने में अभी कई वर्ष लगेंगे. पेंटागन ने हालांकि भरोसा दिलाया है कि अमेरिकी सेना के पास अपने हितों और सहयोगियों की रक्षा के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता मौजूद है. इसके बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि यदि लंबे समय तक मिसाइलों का इस्तेमाल जारी रहा तो भविष्य में चीन या उत्तर कोरिया के साथ किसी बड़े संघर्ष की स्थिति में अमेरिका के सामने नई रणनीतिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। 

  • Bangkok Fire Tragedy: पब में मची अफरा-तफरी, आग की चपेट में आए दर्जनों लोग, 27 की मौत

    Bangkok Fire Tragedy: पब में मची अफरा-तफरी, आग की चपेट में आए दर्जनों लोग, 27 की मौत

    बैंकॉक
     थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के एक पब में सोमवार सुबह तड़के भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 27 लोग मारे गए हैं, जबकि 60 से ज्यादा घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि घायलों में 22 लोगों की हालत गंभीर है। मौके पर पहुंचने वाले प्रत्यक्षदर्शियों ने ऑनलाइन वीडियो शेयर किए हैं, जिसमें पब के दरवाजे के आग की लपटें और धुआं निकलता दिख रहा है। इसके बीच में लोगों को भागने की कोशिश करते देखा जा सकता है।

    आधी रात को पब में लगी आग
    अधिकारियों का कहना है कि उन्हें आधी रात के आसपास बैंकॉक के उत्तरी हिस्से में स्थित ना लादप्राओ पब में आग लगने की सूचना मिली थी। बाद में घटनास्थल पर पहुंचे थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने बताया कि 27 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।

    थाई पीएम ने कहा कि पब में परफॉर्म कर रहे एक म्यूजिशियन ने उन्हें बताया कि बिजली जाने से पहले स्टेज के पास लगे सर्किट ब्रेकर से धुआं निकलते देखा था। फिर एक धमाके की आवाज सुनाई थी और तेजी से पूरी जगह घना धुआं भर गया। कई पीड़ित पब के पिछले हिस्से में बने रेस्ट रूम में पाए गए।

    आखिर हुआ क्या?
    देश के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल ने सोमवार तड़के सुबह घटनास्थल का दौरा किया. उनके अनुसार जिन लोगों की जान बच गई उन्होंने बताया कि आग लगने के बाद पब तेजी से धुएं से भर गया, जिससे कई लोगों को जगह के पिछले हिस्से में बाथरूम के पास भागना पड़ा. अनुतिन ने कहा, "हमने 27 शव बरामद किए हैं, बाकी लोगों को हॉस्पिटल भेजा जा रहा है। 

    उन्होंने कहा कि पब पर मौजूद म्यूजिशियन ने बताया कि "स्टेज के पास लगे सर्किट ब्रेकर से धुआं निकला, जिसके बाद लाइट चली गई और धमाका हुआ। 

    बैंकॉक मेट्रोपॉलिटन एडमिनिस्ट्रेशन के अधिकारी सुरियाचाई राविवान ने बताया कि इस घटना में घायल हुए 63 और लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. बैंकॉक के गवर्नर चाडचार्ट सिट्टीपुंट ने पत्रकारों को बताया कि घायल और हॉस्पिटल में भर्ती लोगों में से 22 की हालत गंभीर है. यानी मौतों का आंकड़ा अभी बढ़ सकता है। 

    22 घायलों की हालत गंभीर
    समाचार एजेंसी एपी ने बैंकॉक के गवर्नर चाडचार्ट सिट्टीपुंट के हवाले से बताया कि 63 लोगों को अस्पताल ले जाया गया। इनमें 22 की हालत गंभीर है। अधिकारियों के सामने लोगों पीड़ितों की पहचान करने में मुश्किल हो रही है, क्योंकि कई लोगों के पास आईडी नहीं थी या वे बेहोश थे। घटनास्थल पर अपने प्रियजनों की जानकारी लेने आ रहे लोगों से जानकारी इकठ्ठा करने के लिए एक रजिस्ट्रेशन डेस्क भी बनाया गया है।

    टॉयलेट में मिले लोगों के शव
    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आग ने कुछ मिनट के अंदर ही पब को चपेट में ले लिया। आग लगने के दौरान कुछ लोग जान बचाने के लिए टॉयलेट में छिप गए थे। बचाव टीमों को कई लोगों के शव टॉयलेट में ही मिले। अधिकारियों ने बताया फायरकर्मियों ने करीब आधे घंटे में आग पर काबू पा लिया। घटना के बाद सामने आई तस्वीरों में पब के अंदर का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त था। तस्वीरों में जली हुई मेजें और कुर्सियां नजर आ रही थीं।

  • इजरायल प्रधानमंत्री के बेटे ने बदला नाम, टैक्स और युद्ध पर चर्चा ते

    इजरायल प्रधानमंत्री के बेटे ने बदला नाम, टैक्स और युद्ध पर चर्चा ते

     नई दिल्ली
    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के परिवार से जुड़ा एक और नया विवाद सामने आया है। नेतन्याहू के बड़े बेटे यायर नेतन्याहू ने अपना नाम बदलकर योनातन हुन कर लिया है। लीक हुए डेटा के मुताबिक, नेतन्याहू के बेटे ने यह काम पिछले दो सालों के दौरान ही किया है। क्योंकि 2024 में टैक्स भरने के दौरान उन्होंने अपने जन्म वाले नाम का ही प्रयोग किया था। लेकिन 2026 में जब उन्होंने टैक्स फाइलिंग की, तो अपना नाम बदलकर 'योनातन हुन' कर लिया है।

    इजरायली मीडिया के मुताबिक नेतन्याहू परिवार टैक्स और भ्रष्टाचार के मामलों में फंसा हुआ है। ऐसे में प्रधानमंत्री के बड़े बेटे के इस कदम को भी शक की नजर से देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि 34 साल के एक्टिविस्ट और पीएम नेतन्याहू के बेटे ने किन वजहों से यह नाम बदला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अपने नाम में यह बदलाव रेगुलेटरी अपडेट उनके मौजूदा नेशनल आइडेंटिफिकेशन नंबर के तहत किया गया है। इसमें उन्होंने अपना रेसिडेंशियल एड्रेस बस 'बाल्फोर 0' के नाम से दिया है। यह एड्रेस इजरायल के प्रधानमंत्री आवास की तरफ इशारा करता है।

    नाम बदलने के मकसद को लेकर लोगों में छिड़ी बहस
    पिछले कई सालों से युद्ध में उलझे इजरायल के लोगों के बीच में प्रधानमंत्री के बेटे द्वारा नाम बदलने को लेकर काफी चर्चा है। लोग इस फैसले के पीछे के मकसद को लेकर बंटे हुए हैं। क्योंकि एक तरफ जहां युद्ध के लिए सभी रिजर्व सैनिकों को बुलाया जा चुका है, वहीं 34 वर्षीय योनातन हुन 2023 से फ्लोरिडा में रह रहे हैं। विदेश में रहने की वजह से इजरायल में उनकी कड़ी आलोचना भी हुई थी। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने युद्ध में लड़ने से बचने के लिए यह तरकीब अपनाई है, वहीं कई लोग इसे टैक्स से जोड़कर देख रहे हैं।

    'योनातन हुन' नाम में है ऐतिहासिक संदर्भ
    इजरायल के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार ने भले ही बेटे के नाम बदलने को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी हो, लेकिन लोगों ने इसका मतलब निकालना शुरू कर दिया है। इजरायली मीडिया के मुताबिक उनका पहला नाम 'योनातन' मुख्य रूप से उनके चाचा ;योनी नेतन्याहू' को श्रद्धांजलि है। वह 1976 में एक युगांडा में एक मिशन को दौरान शहीद हो गए थे। इसके बाद वह इजरायल में एक हीरो के तौर पर देखे जाने लगे थे। बेंजामिन नेतन्याहू के शुरुआती करियर के दौरान उन्हें इसका काफी फायदा मिला था।

    दूसरी ओर 'हुन' नाम नेतन्याहू परिवार की पुरानी जड़ों की पहचान करवाता है। नेतन्याहू परिवार के बुजुर्ग बेन आर्टजी जब इजरायल में आकर बसे थे, तब उनका नाम बेन नहीं था। यह नाम उन्होंने यहां इजरायल में आकर ही परिवर्तित किया था। आते समय उनका नाम सैमुअल हुन था। इन्हीं की याद में नेतन्याहू के बड़े बेटे ने अपना नाम के दूसरे शब्द में हुन शब्द का प्रयोग किया है। हालांकि, इससे पहले भी युवा नेतन्याहू अपने एक पॉडकॉस्ट के दौरान यायर हुन नाम का प्रयोग कर चुके हैं। लेकिन अब सरकारी काम में उपयोग करने से यह नाम पक्का हो चुका है।

    इजरायल के प्रधानमंत्री के बेटे द्वारा नाम बदलने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। नेतन्याहू या उनके ऑफिस की तरफ से भी इस पर कोई जानकारी नहीं दी गई है।

  • सीजफायर टूटा, ट्रंप ने दी चेतावनी; ईरान पर हमले की तैयारी तेज

    सीजफायर टूटा, ट्रंप ने दी चेतावनी; ईरान पर हमले की तैयारी तेज

    नई दिल्ली
    ईरान युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को एक हवाई हमले से हुई थी जिसमें 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे. ईरान ने इस सप्ताह खामेनेई को दफनाया. इससे पहले कई दिनों तक अंतिम संस्कार समारोह चला, जिसमें उनके शव को ईरान और इराक दोनों देशों के शहरों में ले जाया गया. खामेनेई की अंतिम यात्रा के बाद सुलह से ज्यादा संग्राम का जो डर लग रहा था, वो सही साबित होता दिख रहा है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि ईरान पर 1000 मिसाइलें दागी जाने के लिए तैयार हैं.

    वहीं सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने अब बातचीत से इनकार कर दिया है. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपने रुख से पीछे नहीं हटता, तब तक किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं होगी.

    बता दें, इस पूरे हफ्ते अमेरिका और ईरान में सिर्फ बयानों का वार-पलटवार ही नहीं हुआ, मिसाइलों का प्रहार भी जमकर हुआ. होर्मुज में जहाजों पर हमलों से शुरू हुई लड़ाई कुछ ही घंटों में ईरान के अलग-अलग शहरों में बमबारी तक पहुंच गई.

    एक तरफ ईरान अली खामेनेई को दफनाने की तैयारियों में जुटा था तो दूसरी तरफ उसे अमेरिका के हमले का जवाब देने के लिए कतर और बहरीन तक सैन्य ठिकानों पर निशाने लगाने पड़े. दोनों इतने पर ही नहीं रुके. अमेरिका ने तेहरान के आसपास कई इलाकों में ताबड़तोड़ हमले किए, पुल उड़ा डाले और ऑयल रिफाइनरी तक को निशाना बनाया.

    वहीं, ईरान ने तेल अवीव और कई इलाकों में इजरायल के मिलिट्री बेस को बर्बाद कर दिया. सीजफायर की धज्जियां उड़ाते इन हालातों ने ट्रंप का गुस्सा और बढ़ा दिया. पहले उन्होंने बयान दिया कि हमने अच्छे होने की वजह से ईरान को एक हफ्ते की छुट्टी दी है ताकि वो अपने नेता को अंतिम विदाई दे पाएं, फिर ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध में हमारे हाथों पूरी तरह बर्बाद हो चुका है. लेकिन अब ट्रंप का जो ताजा बयान आया है, उसने तो हड़कंप मचा दिया है.

    एक साल तक ईरान पर हमले जारी रखने को तैयार
    ट्रंप ने सोशल मीडिया पर शेयर की पोस्ट में कहा है कि अगर ईरान की सरकार ने अपनी उस धमकी पर अमल किया, जिसमें उसने अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति (यानी मुझपर) जानलेवा हमला करने या हत्या करने की बात कही है, तो ईरान पर 1000 मिसाइलें दागी जाने के लिए तैयार हैं. इसके तुरंत बाद हजारों और मिसाइलें दागी जाएंगी. इसके लिए आदेश दिए जा चुके हैं और अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार और सक्षम है कि वो एक साल तक ईरान पर हमले जारी रखे और ईरान के हर इलाके को पूरी तरह तबाह और बर्बाद कर दे.

    ट्रंप ने इस पोस्ट के जरिए एक तरफ जहां अमेरिकी सेना के महायुद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रहने का संदेश दिया है, वहीं ये भी साफ कर दिया है कि फिलहाल जो हालात हैं, उनमें युद्ध किसी भी पल फिर से शुरू हो सकता है. वैसे भी वो बार बार दोहरा रहे हैं कि युद्धविराम अब खत्म हो चुका है.

    ईरान भी अमेरिका पर ही आरोप लगा रहा है कि ये सब उसी का किया धरा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर लिखा, ईरान ने अब तक अपना वादा निभाया है, जबकि अमेरिका ने MoU के पैरा 9 का उल्लंघन किया. अमेरिका एक के बाद एक उल्लंघन कर रहा है. सीजफायर के स्थायी होने की सारी उम्मीदें फिलहाल टूट चुकी हैं. अब दोनों देशों की मिसाइलें तैयार हैं. गरजने के लिए भी, बरसने के लिए भी.

  • अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा का बड़ा बयान, बदले की कसम से बढ़ी क्षेत्रीय हलचल

    अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा का बड़ा बयान, बदले की कसम से बढ़ी क्षेत्रीय हलचल

    तेहरान

    ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने शनिवार को अपने पिता और फरवरी में इजरायल-अमेरिकी हमलों में मारे गए तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने की कसम खाई। मोजतबा ने कहा कि कि उनके मारे गए पहले के नेता और पिता का बदला लेना देश की मांग है और यह जरूर होना चाहिए। उन्होंने यह बात उनके टेलीग्राम अकाउंट पर जारी एक लिखित मैसेज में कही। खामेनेई ने यह मैसेज अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के मौके पर दिया। खामेनेई ने मैसेज में कहा, "हम शहीद नेता और इन दोनों युद्धों के सभी शहीदों के खून का बदला अपराधी और बदनाम हत्यारों से लेने का वादा करते हैं।"

    इससे पहले, खामेनेई के अंतिम संस्कार में अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या की खुली मांग के बाद प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर यह बात तब कही जब सीनियर अमेरिकी अधिकारियों ने मांग की कि ईरान एक पब्लिक बयान दे कि होर्मुज स्ट्रेट खुला है और इस जरूरी कॉरिडोर को पार करने वाले जहाजों पर हमला नहीं किया जाएगा। हालांकि, अभी तक तेहरान ने ऐसा नहीं किया है, बल्कि इस बात पर जोर दिया है कि यह रास्ता उसके कंट्रोल में रहे।

    अमेरिका ने फिर शुरू किए ईरान पर हमले
    अमेरिका कुछ दिनों से ईरान को निशाना बनाकर फिर से हवाई हमले कर रहा है जिसके जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया के कई देशों पर हमले किए हैं। ये हमले इस सप्ताह की शुरुआत में होर्मुज में तीन पोतों पर ईरान के हमले के बाद शुरू हुए थे। ट्रंप ने अपनी वेबसाइट 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, ''एक हजार मिसाइलें तैयार हैं और उनका निशाना ईरान है। अगर ईरान सरकार अपनी धमकी पर अमल करती है तो इसके तुरंत बाद हजारों और मिसाइलें दागी जाएंगी।''

    'ईरान के सभी इलाकों को तबाह कर देगा अमेरिका'
    ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान के सभी क्षेत्रों को पूरी तरह तबाह और नष्ट कर देगी- अल्लाह का शुक्र है! ट्रंप ने युद्ध और उसके बाद कायम अस्थिर युद्धविराम के दौरान कई बार अरबी में ईश्वर का नाम लिया है। उन्होंने ईरान की सभ्यता को नष्ट करने की धमकी भी दी है। देशव्यापी अधिकार संगठन 'काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस' ने पहले ट्रंप पर इस्लाम का विकृत तरीके से मजाक उड़ाने का आरोप लगाते हुए उनकी आलोचना की थी।

    अयातुल्ला अली खामेनेई को किया सुपुर्द-ए-खाक
    ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को गुरुवार देर रात को मशहद शहर के 'इमाम रजा दरगाह' में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। ईरान की समाचार एजेंसी इरना के अनुसार देर रात श्री खामेनेई के बड़े बेटे हुज्जतुलइस्लाम सैय्यद मुस्तफा हुसैनी खामेनेई की अगुवाई में लाखों लोगों ने जनाजे की नमाज अदा की। इसके साथ ही ईरान और पड़ोसी देश इराक के पांच शहरों में छह दिनों से चल रहा शोक यात्रा संपन्न हो गया। मंगलवार को ईरान के मध्य शहर कोम में अंतिम संस्कार समारोह आयोजित किया गया, जिसके बाद अगले दिन इराक के शहरों नजफ और कर्बला में शोक समारोह हुए।

  • वियतनाम में नाव दुर्घटना से हड़कंप, कई भारतीय सवार; राहत और बचाव कार्य जारी

    वियतनाम में नाव दुर्घटना से हड़कंप, कई भारतीय सवार; राहत और बचाव कार्य जारी

    हनोई
     वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास बड़ा हादसा हो गया है, जहां भारतीय नाविकों से भरी नाव समुद्र में पलट गई है। हनोई में भारतीय दूतावास ने इस दुखद घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि स्थानीय प्रशासन द्वारा हादसे की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। डूबे हुए लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

    खोज और बचाव अभियान जारी रहने के बीच भारतीय मिशन ने कंट्रोल रूम बनाए हैं। दूतावास ने कहा कि स्थानीय अधिकारी घटना की पूरी जानकारी जुटा रहे हैं।

    दूतावास ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा, "एक दुखद घटना में शनिवार को वियतनाम में फु क्वोक द्वीप के पास कई भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक नाव पलट गई है।"

    हेल्पलाइन नंबर जारी
    आपातकालीन स्थिति में पीड़ितों की मदद और जानकारी के लिए हो ची मिन्ह सिटी में भारतीय महावाणिज्य दूतावास और हनोई स्थित दूतावास में 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम स्थापित कर हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए गए हैं।

    पहले कंट्रोल रूम से इन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है- +84 36 281 7930, +84 91 552 37 14 और +84 33 452 0414।

    हनोई वाले दूसरे कंट्रोल रूम से इस नंबर पर संपर्क किया जा सकता है- +84 91 308 9165

    प्रभावित परिवारों के लिए बनाया गया कंट्रोल रूम
    दूतावास ने बताया कि प्रभावित परिवारों को सूचना और सहायता प्रदान करने के लिए, हो ची मिन्ह सिटी में भारतीय वाणिज्य दूतावास में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। किसी भी मदद के लिए इन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

    वियतनाम बोट हादसे से जुड़ी 5 अहम बातें
    • दोपहर 1 बजे हुआ हादसा
    : फू क्वोक स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन अथॉरिटी के मुताबिक, यह हादसा दोपहर करीब 1 बजे हुआ. ओशन पर्ल आइलैंड कंपनी की इस स्पीडबोट को 57 वर्षीय नगुयेन होंग है चला रहे थे जिसमें 32 भारतीय पर्यटकों के अलावा 3 क्रू मेंबर और 1 फ्लाइट अटेंडेंट सहित कुल 36 लोग सवार थे। 

    • तकनीकी खराबी के कारण पलटी बोट: यह स्पीडबोट होन मे रुट से एन थोई पोर्ट (फू क्वोक एयरपोर्ट से लगभग 25 किमी दूर) जा रही थी. होन मे रुट नगोई द्वीप से करीब 400 मीटर दूर बोट में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण वह समंदर में पलट गई, जिससे सभी लोग पानी में गिर गए. हादसे में कुछ लोगों के हताहत होने की खबर है लेकिन सटीक संख्या की पुष्टि होनी अभी बाकी है। 

    • घटनास्थल के लिए रवाना हुए भारतीय राजदूत: वियतनाम में नियुक्त भारतीय राजदूत इस बेहद संवेदनशील मामले पर वहां के उच्च अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वे खुद भी दुर्घटनास्थल के लिए रवाना होने वाले हैं। 

    • हो ची मिन्ह और हनोई से दो टीमें भेजी गईं: प्रभावित भारतीयों की तुरंत मदद और रेस्क्यू के लिए भारतीय दूतावास की दो विशेष टीमें घटनास्थल के लिए रवाना की जा रही हैं. इनमें से पहली टीम आज शाम तक और दूसरी टीम देर रात तक दुर्घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्यों की कमान संभालेगी। 

    • दूतावास ने जारी किए 24×7 इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर: संकट की इस घड़ी में परिवारों को जानकारी और सहायता देने के लिए हो ची मिन्ह सिटी और हनोई में कंट्रोल रूम एक्टिव कर दिए गए हैं. प्रभावित लोग हो ची मिन्ह सिटी के लिए +84 36 281 7930, +84 91 552 3714, +84 33 452 0414 और हनोई के लिए +84 91 308 9165 पर संपर्क कर सकते हैं। 

    युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन 
    हादसे के फौरन बाद वियतनाम के स्थानीय प्रशासन और तटीय सुरक्षा एजेंसियों ने कमान संभाल ली है. समंदर की तेज धाराओं और मौसम की चुनौतियों के बीच लापता भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए गोताखोरों और आधुनिक नावों की मदद ली जा रही है. रेस्क्यू टीमें पल-पल समंदर की खाक छान रही हैं. हालांकि, अभी तक हादसे में हताहत हुए लोगों की सटीक संख्या और उनकी स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।