Category: विदेश

  • दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना? बोलीं- फैसला मेरा होगा, भारत से प्रत्यर्पण का सवाल अलग

    दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना? बोलीं- फैसला मेरा होगा, भारत से प्रत्यर्पण का सवाल अलग

    नई दिल्ली

    भारत में शरण पाईं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। उन्होंने ही दिसंबर में अपने मुल्क लौटने की संभावनाएं जताई हैं। खास बात है कि उन्होंने ये ऐलान ऐसे समय पर किया है, जब ढाका ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। शेख हसीना के आरोप हैं कि ये सजा राजनीति से प्रेरित है और उन्हें अपने बचाव का मौका नहीं मिला। शेख हसीना ने यह भी साफ किया है कि वह बांग्लादेश लौटने का फैसला उन्होंने खुद किया है।

    न्यूज18 से बातचीत में जब पूछा गया कि आपको वापस लौटने पर फांसी दी जा सकती, क्या आप इसे लेकर चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे अपनी जिंदगी की कोई चिंता नहीं है। मैंने कई बार मौत का सामना किया है। मुझे चिंता न्याय के खत्म होने की है। मुझे चिंता इस बात की है कि अदालतों, कानूनों और संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना के लिए किया जा रहा है।'

    फांसी की सजा मानने से इनकार
    उन्होंने कहा, 'राजनीति से प्रेरित प्रक्रिया के जरिए सुनाई गई मौत की सजा को आखिरी बात नहीं माना जा सकता। मुझे अपना बचाव करने का सही मौका नहीं दिया गया। आरोपी के शामिल हुए बगैर, उचित बचाव के बिना और राजनीतिक दबाव में सुनाया गया फैसला न्याय नहीं है।'

    उन्होंने कहा, 'जिस कानून का इस्तेमाल अब मेरे खिलाफ किया जा रहा है, उसे मेरे कार्यकाल के दौरान 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुए अत्याचारों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए बनाया गया था। अगर अधिकारी सच में न्याय में यकीन रखते हैं, तो उन्हें एक स्वतंत्र प्रक्रिया की अनुमति देनी चाहिए। मुझे अदालत के सामने पेश होने दें। मुझे सबूत पेश करने दें। मेरे वकीलों को मेरा बचाव करने दें। गवाहों के बयान होने दें। सबूतों को सामने आने दें।'

    न्याय का मतलब सजा नहीं
    उन्होंने कहा, 'मैं बस वही उम्मीद करती हूं जिसकी गारंटी संविधान और कानून हर नागरिक को देते हैं। व्यक्तिगत सुरक्षा, वकीलों तक पहुंच, अपना बचाव करने का अधिकार, निष्पक्ष अदालत, कार्यवाही और सुनवाई।' उन्होंने कहा के ये राजनीतिक शर्तें नहीं हैं, बल्कि कानून की बुनियादी जरूरते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार कहती है कि आओ और न्याय का सामना करो, तो मैं कहूंगी कि मैं आने के लिए तैयार हूं। लेकिन न्याय का मतलब न्याय होना चाहिए, पहले से तय सजा नहीं।'

    क्या भारत भेज रहा है वापस
    जब पूछा गया कि क्या उन्होंने वापसी के बारे में भारत से बात की है। उन्होंने वेबसाइट को बताया, 'भारत संप्रभु है और मैं उसकी सरकार की ओर से कोई बात नहीं करूंगी। मेरी समझ यह है कि भारत एक कानूनी मामले की तरह प्रत्यर्पण पर काम कर रहा है। यह भारत का मामला है।' उन्होंने कहा, 'मैंने हमेशा बांग्लादेश के साथ भारत की दोस्ती को अहमियत दी है, लेकिन वापस बांग्लादेश लौटने का फैसला मेरा अपना है। भारत दोस्त है, लेकिन बांग्लादेश मेरा घर है। मैं अनिश्चितकाल तक अपने देश से बाहर नहीं रह सकती।'

    अगस्त में हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का फैसला कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था, 'मुझे पता है, वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मेरी जान ले सकते हैं। मैं अपने लोगों के साथ रहने के लिए घर वापस जाऊंगी।'

  • नाइजीरिया में तेल चोरी के दौरान जहरीली गैस का कहर, 37 लोगों की मौत; कई लापता

    नाइजीरिया में तेल चोरी के दौरान जहरीली गैस का कहर, 37 लोगों की मौत; कई लापता

     लागोस
     शुक्रवार को नाइजीरिया के एक पर्यावरण समूह ने दावा किया कि तेल पाइपलाइन से तेल चुराने की कोशिश के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से कम से कम 37 लोगों की जान चली गई। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या की पुष्टि नहीं की है।

    यूथ्स एंड एनवायरनमेंटल एडवोकेसी सेंटर के मुताबिक, यह दर्दनाक हादसा गुरुवार आधी रात के आसपास रिवर्स राज्य के ओक्रिका इलाके में हुआ।

    बताया जा रहा है कि ओकारी जेटी पर एक बड़े जहाज में तेल भरा जा रहा था, तभी कुछ संदिग्ध चोर पाइपलाइन में तेज दबाव वाले पेट्रोलियम उत्पाद को अवैध तरीके से अपनी नावों में भरने की कोशिश करने लगे। इसी दौरान वहां जहरीली गैस का रिसाव हो गया। समूह का कहना है कि कई लोग अब भी लापता हैं और नदी में कुछ शव तैरते हुए देखे गए हैं।

    पाइपलाइन से तेल चोरी का संकट
    पुलिस का कहना है कि पीड़ितों की मौत कच्चा तेल चुराने की कोशिश के दौरान हुई। यह घटना नाइजर डेल्टा में कच्चे तेल की चोरी और पाइपलाइन में तोड़फोड़ की गंभीर और लगातार बनी हुई समस्या है।

    अक्टूबर 2023 के बाद से यह इस तरह की सबसे बड़ी घटना है, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने का दावा किया गया है।

    इस क्षेत्र में अवैध रूप से तेल निकालने की घटनाओं के कारण अक्सर जानलेवा हादसे और भारी प्रदूषण होता है, जिससे नाइजीरिया के तेल उद्योग को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है।

    सुरक्षा एजेंसियों की जांच
    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, रिवर्स पुलिस के प्रवक्ता एएसपी ब्लेसिंग काबोर्लो अगाबे ने कहा कि घटना से जुड़े हालात का पता लगाने और तथ्यों की पुष्टि के लिए गहन जांच चल रही है। घटना के कारणों और मरने वालों की सही संख्या की पुष्टि नहीं कर सकी है।

    वहीं, नाइजीरिया सुरक्षा और नागरिक रक्षा कोर ने स्पष्ट किया है कि हताहतों की बताई जा रही संख्या की अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा, घटना में शामिल रासायनिक पदार्थ की तकनीकी जांच की भी आवश्यकता है।

    कोर ने कहा कि वह मरने वालों, घायलों और लापता लोगों की सही संख्या का पता लगाने के लिए अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसके साथ ही, किसी भी संभावित लापरवाही, स्थानीय मिलीभगत या आपराधिक मदद की भी जांच की जा रही है।

     

  • हूती विद्रोहियों और यमनी सेना में घमासान, 81 लड़ाके मारे गए; बाब-अल-मंदेब को लेकर तनाव बढ़ा

    हूती विद्रोहियों और यमनी सेना में घमासान, 81 लड़ाके मारे गए; बाब-अल-मंदेब को लेकर तनाव बढ़ा

    सना 
    यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी बलों के बीच जारी संघर्ष ने एक बार फिर हिंसक रूप ले लिया है. गुरुवार से शुरू हुई झड़पों में दोनों तरफ से अब तक कम से कम 81 लड़ाके मारे जा चुके हैं. मौतों का यह आंकड़ा सैन्य अधिकारियों और चिकित्सा सूत्रों के हवाले से सामने आया है। 

    मृतकों में सरकारी बलों के 39 जवान और हूती समूह के कम से कम 42 लड़ाके शामिल हैं. दोनों पक्षों के बीच संघर्ष के चलते हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. जानकारी के मुताबिक, देश के अलग-अलग इलाकों में हुई लड़ाई में दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। 

    रेड सी तट पर सरकारी बलों को पहुंचा नुकसान
    रेड सी यानी लाल सागर के तट पर तैनात एक सैन्य अधिकारी के मुताबिक, वहां हुई झड़पों में सरकारी बलों के 24 जवान मारे गए. यह इलाका संघर्ष के लिहाज से अहम माना जा रहा है। 

    यहां दोनों पक्षों के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई है. ताइज शहर में तैनात एक दूसरे आर्मी ऑफिसर ने बताया कि वहां 15 जवान मारे गए हैं. इस तरह रेड सी तट और ताइज में सरकारी बलों के कुल 39 लड़ाके मारे गए हैं। 

    हूती पक्ष को भी भारी नुकसान
    हूती नियंत्रण वाले इलाकों से मिली चिकित्सा जानकारी के अनुसार, संघर्ष में कम से कम 42 हूती लड़ाके भी मारे गए हैं. इससे साफ है कि गुरुवार से जारी लड़ाई में दोनों पक्षों को बड़ा नुकसान हुआ है। 

    हालांकि, अभी तक संघर्ष में घायल हुए लोगों या नागरिकों के हताहत होने की संख्या की जानकारी नहीं दी गई है. इसी तरह झड़पों की वजह और आगे की स्थिति को लेकर भी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। 

    ईरान का दावा- 105 बच्चों और महिलाओं पर हमला

    दोनों देशों ने एक-दूसरे के अहम ठिकानों पर हमले किए हैं. इसमें 105 बच्चों और महिलाओं के जख्मी होने का आरोप ईरान की ओर की ओर से लगाया गया है. हाल के हफ्तों में दोनों के बीच सबसे भीषण सैन्य टकराव देखने को मिला है. दक्षिणी ईरान में एक शादी समारोह पर अमेरिकी हमले का आरोप इस तनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने रात में ईरान के कई ठिकानों पर बहुत भारी हमला किया. उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका जब चाहे, इस तरह की एक और कार्रवाई कर सकता है. ट्रंप ने कुछ समय के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य का नाम बदलकर ट्रंप स्ट्रेट रखने की बात भी कही. हालांकि ये ट्रंप का अपना काम करने का स्टाइल है लेकिन उन्हें इससे पीछे भी हटना पड़ा। 

    ताइज में यमनी सेना की बड़ी कार्रवाई, हूती विद्रोहियों के 3 ड्रोन मार गिराए
    यमनी सेना ने ताइज प्रांत के जबल हबाशी जिले में एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन चलाते हुए हूती विद्रोहियों के तीन ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया है. देश की सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हवाई हमले को नाकाम करने के साथ-साथ यमनी सेना और हूती लड़ाकों के बीच ताइज़ शहर के पश्चिम में स्थित अल-बराह मोर्चे पर भी भारी झड़प हुई है. सीमावर्ती इलाकों में हूती लड़ाकों की बढ़ती गतिविधियों के बीच सेना की इस त्वरित कार्रवाई ने विद्रोहियों के मंसूबों को नाकाम कर दिया है, हालांकि इस भीषण गोलाबारी और जंग के बाद इलाके में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। 

     होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए तेहरान की मंजूरी जरूरी, ईरान ने दी सख्त चेतावनी

    ईरान के सुरक्षा अधिकारी इब्राहिम अजीजी ने साफ कर दिया है कि तेहरान की इजाजत के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से नहीं खोला जा सकता है. उन्होंने दावा किया कि ईरान की सख्त सैन्य रणनीति के आगे उसके विरोधी 500 मील पीछे हटने पर मजबूर हो गए हैं. अधिकारी के अनुसार, हाल ही में किए गए सैन्य हमलों ने दुनिया के सामने ये साबित कर दिया है कि ईरान अपनी चेतावनियों को अमलीजामा पहनाने और अपनी धमकियों को पूरा करने की पूरी क्षमता रखता है. इस बयान के बाद रणनीतिक रूप से बेहद अहम इस समुद्री मार्ग को लेकर वैश्विक स्तर पर तनाव और ज्यादा गहरा गया है। 

     दक्षिण लेबनान के अल-मंसूरी गांव पर इसराइली तोपों का जोरदार हमला
    दक्षिणी लेबनान में एक बार फिर भारी तनाव देखने को मिला है, जहां इसराइली तोपखाने ने अल-मंसूरी शहर को निशाना बनाते हुए भीषण गोलाबारी की है. लेबनान की आधिकारिक नेशनल न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इसराइली सेना ने सीमा पार से अल-मंसूरी इलाके में तोपों से कई गोले दागे हैं. इस अचानक हुए हमले के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है और सुरक्षा को लेकर काफी चिंताएं बढ़ गई हैं. सीमावर्ती इलाकों में लगातार हो रही इस तरह की सैन्य कार्रवाइयों से दोनों देशों के बीच पहले से बने संवेदनशील हालात और भी ज्यादा गंभीर रूप ले रहे हैं। 

  • BLA के हमलों से मुनीर की बढ़ी टेंशन, बलूचिस्तान में 25 पाक सैनिकों के मारे जाने का दावा

    BLA के हमलों से मुनीर की बढ़ी टेंशन, बलूचिस्तान में 25 पाक सैनिकों के मारे जाने का दावा

    बलोचिस्तान
       
    पाकिस्तान के बलोचिस्तान में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों के खिलाफ दो अलग-अलग हमलों को लेकर बलोच लिबरेशन आर्मी यानी BLA ने बड़ा दावा किया है. संगठन का कहना है कि 3 सितंबर को हुए इन हमलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 25 जवान मारे गए। 

    BLA के मुताबिक, पहला हमला जियारत क्रॉस के पास पाकिस्तानी सेना के एक काफिले को निशाना बनाकर किया गया. संगठन ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने काफिले की दो गाड़ियों को नष्ट कर दिया और इस हमले में 18 सुरक्षाकर्मी मारे गए. BLA का कहना है कि पांच घायल जवान वहां से भागने में कामयाब रहे, जबकि हमलावरों ने हथियार भी अपने कब्जे में ले लिए। 

    संगठन ने दूसरे हमले का दावा सुराब के हाजीका इलाके में किया. BLA के मुताबिक, यहां उसके एसटीओएस ने रिमोट कंट्रोल से संचालित वाहन में विस्फोट किया. इस हमले में सात सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का दावा किया गया है. BLA ने जियारत क्रॉस पर हुए हमले में अपने फतेह स्क्वाड के शामिल होने की बात कही है. संगठन ने दोनों हमलों की जिम्मेदारी भी ली है। 

    जियारत क्रॉस पर सैन्य काफिले को बनाया निशाना
    BLA के प्रवक्ता के मुताबिक, उसके लड़ाकों ने जियारत क्रॉस के पास एक सैन्य काफिले को निशाना बनाया। हमले में सैन्य वाहनों को निशाना बनाया गया और इनमें से दो वाहन नष्ट हो गए, जिनमें एक सैन्य ट्रक भी शामिल था।

    संगठन ने शुरुआत में इस हमले में 18 सैन्यकर्मियों के मारे जाने का दावा किया था। बाद में उसने मृतकों की संख्या बढ़ाकर 25 कर दी। BLA ने अपने आधिकारिक मीडिया चैनल हक्कल के जरिए एक मिनट 11 सेकंड का वीडियो ट्रेलर भी जारी किया। संगठन का कहना है कि इसमें जियारत क्रॉस हमले की तस्वीरें हैं।

    जारी किए गए फुटेज में कथित तौर पर जलते हुए पाकिस्तानी सैन्य वाहनों के पास हथियारबंद लड़ाके नजर आते हैं। मौके पर शव और हथियार भी दिखाई देने का दावा किया गया है। BLA ने कहा है कि वह बाद में इस हमले का पूरा वीडियो जारी करेगा।

    सुराब के हाजीका इलाके में भी हमला
    BLA के बयान के मुताबिक, दूसरा हमला सुराब के हाजीका इलाके में किया गया। संगठन की स्पेशल टैक्टिकल ऑपरेशंस स्क्वाड (STOS) ने विस्फोटकों से लदी एक गाड़ी को दूर से विस्फोट कर दिया। BLA के अनुसार, इस हमले में एक सैन्य वाहन नष्ट हुआ और सात सैन्यकर्मी मारे गए। दोनों हमलों में कुल 25 सैन्यकर्मियों के मारे जाने का दावा BLA की ओर से किया गया है।

    बलूचिस्तान में 21 आतंकवादी मारे गए
    इससे पहले पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार को दावा किया था कि उसके अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों और विद्रोहियों के बीच हुई दो अलग-अलग झड़पों में कम से कम 21 आतंकवादी मारे गए हैं। सेना ने एक बयान में कहा कि ये घटनाएं सोमवार रात चगाई जिले के नोकचा और पिशिन जिले के जियारत चौराहे पर हुईं, जिनमें सुरक्षा बल के पांच जवान और सीमा शुल्क विभाग का एक अधिकारी भी मारा गया।

    इसमें कहा गया है कि सुरक्षा बलों की प्रभावी जवाबी कार्रवाई में 'फितना-अल-खवारिज' से जुड़े 21 आतंकवादी मारे गए। 'फितना-अल-खवारिज' वह शब्द है जिसका इस्तेमाल सरकार प्रतिबंधित संगठन 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (टीटीपी) के लिए करती है। पहली घटना में, आतंकवादियों ने जबरन वसूली के लिए एन-40 क्वेटा-ताफ्टन राजमार्ग पर एक अवैध जांच चौकी बनाकर यात्रियों की आवाजाही में बाधा डालने की कोशिश की।

    पाकिस्तान ने नहीं की सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि
    इन हमलों में 25 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने के BLA के दावे की फिलहाल पाकिस्तानी अधिकारियों या किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है. BLA इससे पहले भी पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों पर किए गए हमलों में बड़ी संख्या में जवानों के मारे जाने का दावा करता रहा है। 

    बलोचिस्तान में लगातार बढ़ रही हिंसा
    बलोचिस्तान में अलगाववादी संगठन BLA लंबे समय से पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों के खिलाफ सशस्त्र अभियान चला रहा है. अगस्त 2026 में भी BLA ने 9 से 15 अगस्त के बीच आठ दिनों में 22 समन्वित हमले करने का दावा किया था. संगठन ने इन हमलों में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की बात कही थी। 

    अगस्त के अंत में मस्तुंग के पास एक सैन्य काफिले पर IED हमले को लेकर भी BLA ने 13 सैनिकों को मारने का दावा किया था. वहीं जुलाई 2026 में ग्वादर कोस्ट गार्ड कैंप पर आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी BLA की मजीद ब्रिगेड ने ली थी और 30 से ज्यादा पैरामिलिट्री जवानों के मारे जाने का दावा किया था। 

  • नेपाल में चमत्कार! 9 दिन बाद सुरंग से आई इंसानी आवाज, 2 लोगों का हुआ सफल रेस्क्यू

    नेपाल में चमत्कार! 9 दिन बाद सुरंग से आई इंसानी आवाज, 2 लोगों का हुआ सफल रेस्क्यू

    काठमांडू
    नेपाल में 26 अगस्त की फ्लैश फ्लड के नौ दिन बाद त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला गया है. रेस्क्यू किए गए लोगों की पहचान मैकेनिकल फोरमैन संजय साह और मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महार्जन के तौर पर हुई है. शुक्रवार को पहले संजय साह को बाहर निकाला गया और उसके बाद कबीर महार्जन को भी सुरक्षित निकाल लिया गया। 

    यह रेस्क्यू तब संभव हुआ जब टीमों को सुरंग के अंदर से इंसानी आवाजें सुनाई दीं. रेस्क्यू टीम ने अंदर फंसे लोगों से कहा, "घबराएं नहीं, हम आपको बचाने आए हैं." इसके जवाब में अंदर से आवाज सुनाई दी। 

    इसके बाद नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल ने ऑपरेशन तेज किया और सुरंग के अंदर मौजूद लोगों से संपर्क स्थापित किया. रेस्क्यू टीमों को आशंका है कि अभी और लोग सुरंग के अंदर फंसे हो सकते हैं, इसलिए तलाश जारी है। 

    26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने त्रिशूली नदी के पूरे कॉरिडोर में भारी तबाही मचाई थी. इस हादसे में 1,252 लोगों की मौत हुई और कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के साथ प्रमुख सड़क संपर्क भी प्रभावित हुए. मुश्किल हालात के बीच रेस्क्यू टीमें लगातार सुरंगों और क्षतिग्रस्त ढांचों में फंसे दूसरे लोगों की तलाश कर रही हैं। 

    900 से ज्यादा हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता
    26 अगस्त को आई भयानक फ्लैश फ्लड ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी. बाढ़ के बाद 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े 900 से ज्यादा कर्मचारी लापता हो गए. इनमें से सैकड़ों के सुरंगों और जमीन के नीचे बने हिस्सों में फंसे होने की आशंका है। 

    रसुवा और नुवाकोट में बाढ़ से प्रभावित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में लापता करीब 500 कर्मचारियों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई गई है. बाढ़ शुरू होने के वक्त कुछ कर्मचारियों ने मदद के लिए आवाज लगाई थी. सुरंगों से बाहर निकलने में कामयाब कर्मचारियों ने भी बताया था कि उनके कई साथी अंदर फंसे हुए हैं। 

    ऑक्सीजन कम होने से बढ़ी चिंता
    रेस्क्यू ऑपरेशन लंबा खिंचने के बीच विशेषज्ञों को सुरंगों के अंदर ऑक्सीजन का स्तर कम होने की चिंता है. इससे अंदर फंसे लोगों के बचने की संभावना लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। 

    इस बीच, सुरंग के अंदर से एक से ज्यादा लोगों की आवाज सुनाई देना रेस्क्यू टीम और उनके परिवारों के लिए बड़ी उम्मीद लेकर आया है. नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें अब उन लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश में जुटी हैं। 

  • जन्म से अमेरिकी नागरिकता खत्म करने की ट्रंप की कोशिश पर ब्रेक, कोर्ट ने दिया बड़ा झटका

    जन्म से अमेरिकी नागरिकता खत्म करने की ट्रंप की कोशिश पर ब्रेक, कोर्ट ने दिया बड़ा झटका

    वाशिंगटन

    अमेरिका में इमिग्रेशन पॉलिसी सख्त करने की कोशिश में लगे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक और झटका लगा है. अमेरिका में एक फेडरल जज ने बुधवार, 2 सितंबर को ट्रंप सरकार को झटका दिया. जज ने ट्रंप सरकार को जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता के नियमों को सीमित करने वाले नए आदेश को लागू करने से रोक दिया है. इस फैसले से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका के अंदर जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को सीमित करने की नई कोशिश फिलहाल रुक गई है. इससे पहले भी ट्रंप ने ऐसा ही कदम उठाया था, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी पिछली कोशिश को खारिज कर दिया था। 

    अब कोर्ट में क्या हुआ?
    मैरीलैंड की अमेरिकी जिला जज डेबोरा बोर्डमैन ने यह शुरुआती रोक लगाई है. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार मानवाधिकार संगठनों ने ट्रंप के 6 अगस्त के कार्यकारी आदेश को चुनौती दी थी. इस आदेश का निशाना उन लोगों पर था, जिन्हें ट्रंप ने “बर्थ टूरिज्म” यानी बच्चे को जन्म देने के लिए अमेरिका आने वाला बताया था। 

    बोर्डमैन ने अपने 35 पन्नों के फैसले में लिखा कि “सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना चुका है. इस मामले में शामिल बच्चों को जन्म के समय ही अमेरिकी नागरिक माना जाता है.” उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप का 6 अगस्त वाला आदेश लगभग निश्चित रूप से असंवैधानिक है, यानी अमेरिकी संविधान के खिलाफ है. प्रवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया। 

    रिपोर्ट के अनुसार मैरीलैंड की संस्था वी आर कासा की लीगल डायरेक्टर शाना खदर ने कहा, “जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता पर हमला करने के मामले में ट्रंप सरकार इस अदालत में हार चुकी है, सुप्रीम कोर्ट में भी हार चुकी है और आज फिर हार गई। 

    ट्रंप के आदेश और अदालत के फैसले
    ट्रंप का नया कार्यकारी आदेश उन लोगों को निशाना बनाता है, जिनके बारे में उनका आरोप है कि वे पर्यटन के बहाने अमेरिका आते हैं, लेकिन असल में उनका इरादा बच्चे को जन्म देने का होता है. इस मुद्दे पर ट्रंप के पहले कार्यकारी आदेश में कहा गया था कि अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे माता-पिता या अस्थायी वीजा पर अमेरिका आए माता-पिता के यहां पैदा होने वाले बच्चों को अपने आप अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी। 

    निचली अदालतों ने ट्रंप के इस कदम को रोक दिया था. अदालतों ने कहा था कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के नागरिकता संबंधी नियम के तहत, अमेरिका की जमीन पर पैदा होने वाले लगभग हर व्यक्ति को अमेरिकी नागरिक माना जाता है. सुप्रीम कोर्ट भी इस बात से सहमत हुआ। 

    जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को सीमित करने की ट्रंप की कोशिश उनकी अमेरिका में प्रवासियों की संख्या कम करने की बड़ी मुहिम का हिस्सा है. इस मुहिम में बिना कानूनी डॉक्यूमेंट वाले लाखों प्रवासियों को अमेरिका से निकालना और एक दर्जन से ज्यादा देशों के नागरिको को देश से निकाले जाने से मिली कानूनी सुरक्षा हटाना भी शामिल है। 

  • नेपाल में तबाही के बाद भी जारी रेस्क्यू, 600 विदेशी लापता; 1,222 शव बरामद

    नेपाल में तबाही के बाद भी जारी रेस्क्यू, 600 विदेशी लापता; 1,222 शव बरामद

    काठमांडू 
    नेपाल में बाढ़ और आपदा के बाद राहत, बचाव और शवों की तलाश का अभियान लगातार जारी है. नेपाल पुलिस के ताजा अपडेट के मुताबिक, देशभर में अब तक 1,222 शव बरामद किए जा चुके हैं. वहीं 4,875 लोगों के लापता होने की जानकारी दर्ज की गई है. लापता लोगों में 601 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। 

    नेपाल पुलिस के मुताबिक, आपदा प्रभावित इलाकों में कुल 7,892 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. अभियान के दौरान 65 पुलिसकर्मी प्रभावित हुए हैं, जबकि 25 पुलिसकर्मी अभी संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। 

    पुलिस के अनुसार, बरामद 1,222 शवों में 406 पुरुष, 236 महिलाएं, 43 बालिकाएं और 34 बालक शामिल हैं. इसके अलावा 421 आंशिक मानव अंग और 82 ऐसे शव या अवशेष भी मिले हैं, जिनकी पहचान नहीं हो सकी है. अब तक 882 शवों का अंतिम प्रबंधन किया जा चुका है। 

    लापता लोगों में 2,924 नेपाली नागरिकों के बारे में उनके रिश्तेदारों ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दर्ज कराई है. वहीं 1,350 लोगों के लापता होने की सूचना सरकार के अलग-अलग निकायों को फोन के जरिए दी गई है. इसके अलावा 601 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दर्ज है। 

    6,006 लोगों का रेस्क्यू किया गया
    नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 6,006 लोगों को घायल अवस्था में बचाया या रेस्क्यू किया गया है. इनमें 4,666 पुरुष, 1,213 महिलाएं और 45 नाबालिग शामिल हैं. इसके अलावा 675 विदेशी नागरिकों को भी बचाया गया है. बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए होल्डिंग सेंटरों में फिलहाल 3,126 लोगों को रखा गया है। 

    1,022 मृतकों के DNA सैंपल से पहचान की कोशिश
    पहचान की प्रक्रिया भी जारी है. नेपाल पुलिस ने 553 ऐसे शवों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड की है, जिनकी पहचान अभी नहीं हो पाई है. अब तक 1,022 मृतकों के DNA सैंपल और 463 मृतकों के परिजनों के DNA सैंपल लिए गए हैं. DNA प्रक्रिया के तहत कुल 1,655 सैंपल दर्ज किए गए हैं. नेपाल पुलिस का कहना है कि प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव, शव बरामदगी, पहचान और राहत का काम लगातार जारी है। 

  • 286 दिन बाद Pattaya में US सैनिकों की एंट्री, Parasailing से Cannabis तक इन चीजों की इजाजत नहीं

    286 दिन बाद Pattaya में US सैनिकों की एंट्री, Parasailing से Cannabis तक इन चीजों की इजाजत नहीं

    पटाया 
    मिडिल ईस्ट में लंबे और मुश्किल मिशन के बाद USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर बुधवार सुबह आखिरकार थाईलैंड पहुंच गया. पश्चिम एशिया के समंदर में 200 दिन गुजारने के बाद ये अमेरिकी सैनिकों के लिए राहत और रिलैक्स होने की बात है. इस जहाज से लगभग 5000 अमेरिकी सैनिक थाइलैंड पहुंचे हैं. इन सैनिकों का ठिकाना थाईलैंड का पटाया शहर है. ये सैनिक यहां रिलैक्स और रिफ्रेश तो हो सकते हैं, लेकिन यहां इन पर कई तरह की रोक रहेगी।

    थाइलैंड के अखबार बंकॉक पोस्ट के अनुसार हजारों सैनिकों के आने से पास के रिज़ॉर्ट शहर पटाया में आर्थिक तेज़ी की उम्मीदें जगी हैं. यह शहर लंबे समय से सेक्स टूरिज़्म डेस्टिनेशन के तौर पर भी जाना जाता है। 

    पटाया के मेयर पोरामासे न्गाम्पिचेस ने बताया कि लगभग 40 बसों का एक बेड़ा सैनिकों को पटाया और लैम चाबांग बंदरगाह के बीच ले जाएगा, जहां जहाज रुकेंगे। 

    द नेशन ने थाई अधिकारियों के अनुसार बताया है कि समुद्र में 200 से ज़्यादा दिन बिताने के बाद लगभग 5,000 नाविकों और मरीन को आराम करने और तरोताज़ा होने के लिए किनारे पर आने की छुट्टी (शोर लीव) दी जाएगी। 

    पटाया के मेयर पोरामासे नगाम्पिचेस का अनुमान है कि थाईलैंड में अमेरिकी सैनिकों की इस भीड़ से होटलों, रेस्तरां, बार, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, खुदरा विक्रेताओं और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों को फ़ायदा होने की उम्मीद है। 

    टूरिज्म एसोसिएशन के अनुसार पटाया में रहने की जगह के बाज़ार में 3,00,000 से ज़्यादा कमरे उपलब्ध हैं। 

    पटाया में ये काम नहीं कर पाएंगे अमेरिकी सैनिक
    पटाया में ये सैनिक आराम और रिफ्रेश तो कर पाएंगे, लेकिन इन पर कुछ प्रतिबंध भी होंगे। 

    अमेरिकी सैनिकों को होटलों में रात बिताने या अपने जहाज़ों पर लौटने की इजाज़त होगी. लेकिन उन्हें कुछ टूरिस्ट गतिविधियों में हिस्सा लेने की इजाज़त नहीं होगी. जैसे ये सैनिक जेट स्की राइडिंग और पैरासेलिंग जैसे वॉटरस्पोर्ट्स में शामिल नहीं हो पाएंगे. इसके अलावा ये सैनिक पटाया में गांजे का भी सेवन नहीं कर पाएंगे। 

    थाईलैंड में हाल की घटनाओं के बाद गांजे से जुड़ी नीति में बदलाव दिख रहा है. वहां का जन स्वास्थ्य मंत्रालय भांग के इस्तेमाल को सिर्फ़ मेडिकल मक़सद तक सीमित करने की दिशा में कदम उठा रहा है। 

    इधर अमेरिकी सैनिकों की आमद के बाद पटाया में टूरिस्ट पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है. सर्विलांस कैमरों की जांच की जा रही है और हॉटलाइन 1155 मदद के लिए तैयार है. मेयर ने कहा कि स्थानीय कारोबारियों को पर्यटकों से ज़्यादा पैसे न लेने के लिए कहा गया  है। 

    सोमवार को पटाया के मेयर के सेक्रेटरी बांचा कुल्लावानिच और असिस्टेंट मेयर कियातिसाक श्रीवोंगचाई ने अमेरिकी नौसेना के प्रतिनिधियों के साथ सुरक्षा उपायों पर चर्चा की। 

    बैठक में यह तय हुआ कि नाविक पटाया वॉकिंग स्ट्रीट जा सकते हैं, लेकिन उन्हें रात 2 बजे तक वह इलाका छोड़ना होगा। 

    अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि पटाया में वेश्यावृत्ति गैर-कानूनी है। 
    बता दें कि आमतौर पर अमेरिकी नौसैनिक तैनाती छह से नौ महीने के लिए होती है, लेकिन संघर्ष के समय इसे बढ़ाया जा सकता है. ईरान वॉर के समय ये सैनिक 200 दिनों से पश्चिम एशिया के समंदर में तैनात थे। 

  • पैसा बांटने वाला Saudi Arabia अब लेगा ₹75,876 करोड़ का लोन, MBS की आर्थिक रणनीति पर उठे सवाल

    पैसा बांटने वाला Saudi Arabia अब लेगा ₹75,876 करोड़ का लोन, MBS की आर्थिक रणनीति पर उठे सवाल

    दुबई 

    सऊदी अरब का जिक्र होते ही रियाल, तेल, ऐश और रईसी ही सबके जेहन में आता है। गगनचुंबी इमारतें और रॉकेट की रफ्तार से चलती लग्जरी कारों के देश की पहचान धनकुबेर वाले देशों के रूप में की जाती है। दुनियाभर के कई लोगों का सपना होता है कि वे सऊदी अरब में जाकर काम करें और तगड़ा पैसा कमाकर वापस लौटें। इन सब के अलावा जब भी किसी देश को पैसे की जरूरत होती है तो ज्यादातर सऊदी अरब की तरफ रुख करते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ा उलट है। दुनिया के कई देशों को लोन की हेल्प करने वाले सऊदी को अब खुद लोन की जरूरत पड़ रही है।

    सऊदी को पड़ी 8 अरब डॉलर की जरूरत
    सऊदी अरब लंबे समय से दुनियाभर में तेल की सप्लाई करने और मध्य पूर्व का वित्तीय महाशक्ति रहा है। सॉवरेन वेल्थ फंड के जरिये सऊदी अरब दुनिया भर में पैसे निवेश करता रहा है और विकासशील देशों को मदद और लोन मुहैया कराता रहा है। लेकिन शेखों के देश में एक अलग मोड आ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वक्त सऊदी अरब का नेशनल डेट मैनेजमेंट सेंटर (NDMC) लगभग 8 अरब डॉलर के नए सिंडिकेटेड लोन के लिए बैंकों से चर्चा कर रहा है। इसे भारतीय मुद्रा में बदलने पर ₹7.6 खरब होते हैं। सऊदी की सरकारी तेल कंपनी अरामको भी इसी तरह के फाइनेंसिंग विकल्पों पर बातचीत कर रही है।

    ईरान युद्ध से टूटी सऊदी के इकॉनमी की रफ्तार
    अब सवाल ये है कि मिडिल ईस्ट में धाक रखने वाले सऊदी को आखिर इतने पैसों की जरूरत क्यों पड़ रही है? दरअसल ईरान में चल रहे युद्ध ने सऊदी अरब की इकोनॉमी पर तगड़ा असर डाला है। इस वॉर ने तेल के इंपोर्ट, सप्लाई के प्रमुख रास्तों और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है, इसकी वजह से सऊदी अरब के तेल निर्यात में कमी आई है।

    इसके अलावा तेहरान ने सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है, जबकि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में जहाजों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। एक तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से सऊदी तेल की ब्रिकी में कमी आई है तो वहीं दूसरी ओर हूती विद्रोहियों की वजह से बाब अल मंदेब भी बंद रहता है। इन हमलों की वजह से तेल सेक्टर में लगभग 25% की गिरावट आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना महामारी के बाद से दूसरी तिमाही में सऊदी अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई।

    सऊदी को क्यों चाहिए इतने पैसे?
    सऊदी अरब का जिक्र होते ही पैसे ही पैसे नजर आते हैं, लेकिन मिडिल ईस्ट में अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद तस्वीर कुछ और ही बन गई है है। दरअसल सऊदी अरब को इतने मोटे पैसे की जरूरत की वजह उसका विजन 2030 है। बता दें कि साल 2016 में MBS द्वारा शुरू की गई इस योजना का लक्ष्य तेल निर्भरता कम करके टूरिज्म, इंटरटेनमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर के माध्यम से अर्थव्यवस्था को कई क्षेत्रों में ले जाना है।

    क्राउन प्रिंस सलमान का मानना कि जब सऊदी का कच्चा तेल कम होगा या खत्म होने की कगार पर आएगा तो उसे अचानक आर्थिक समस्याओं का सामना ना करना पड़े। इसलिए अभी से ही देश की अर्थव्यवस्था को और क्षेत्रों के लिए खोलना चाहते हैं।

     

  • अमेरिका-ईरान जंग के बीच चीन की बड़ी चाल, Xi Jinping के Egypt दौरे से Middle East में बढ़ेगा Beijing का प्रभाव

    अमेरिका-ईरान जंग के बीच चीन की बड़ी चाल, Xi Jinping के Egypt दौरे से Middle East में बढ़ेगा Beijing का प्रभाव

    वाशिंगटन

    एक तरफ होर्मुज की खाड़ी में अमेरिका और ईरान की जंग एक बार फिर से तेज हो चुकी है, तो दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग मिस्र पहुंच गए हैं. यह दौरा देखने में सामान्य कूटनीतिक यात्रा लगता है, लेकिन इसका समय बहुत मायने रखता है. जिस वक्त होर्मुज का समुद्री रास्ता युद्ध की वजह से बुरी तरह प्रभावित है, ठीक उसी वक्त चीन मिस्र के साथ अपने रिश्ते और मजबूत कर रहा है, जिसके हाथ में दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक रास्तों में से एक, यानी स्वेज कैनाल है। 

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज में जहाजों की आवाजाही तेजी से घटी है. मंगलवार को सिर्फ चार मालवाहक जहाज इस रास्ते से गुजरे, जबकि पिछले दस दिनों का औसत करीब तेरह जहाजों का था. सामान्य दिनों में दुनिया का लगभग बीस फीसदी तेल व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है. लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और टैंकरों पर हमलों ने इस रूट को बेहद असुरक्षित बना दिया है। 

    ठीक इसी समय शी जिनपिंग काहिरा में हैं. चीन के राष्ट्रपति करीब एक दशक बाद मिस्र पहुंचे हैं. यह सिर्फ पुरानी दोस्ती निभाने की यात्रा नहीं है. मिस्र लंबे समय से अमेरिका का करीबी रणनीतिक साथी रहा है, लेकिन बीते कुछ सालों में काहिरा ने बीजिंग, मॉस्को और दूसरी ताकतों के साथ भी अपने संबंध तेजी से बढ़ाए हैं. रॉयटर्स के मुताबिक चीन और मिस्र के बीच व्यापार करीब इक्कीस अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, और स्वेज कैनाल आर्थिक क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में चीनी निवेश बढ़ रहा है। 

    यही इस दौरे की सबसे बड़ी कहानी है. अमेरिका जहां मिडिल ईस्ट में सैन्य ताकत के जरिए ईरान को रोकने में जुटा है, वहीं चीन उसी इलाके में निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, कूटनीति और साझेदारियों के जरिए अपना असर बढ़ा रहा है. मिस्र के पास स्वेज कैनाल है, जो एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप को जोड़ता है. होर्मुज में बाधा के बीच स्वेज ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम विकल्प बनकर उभरा है। 

    इसी बीच अगस्त में चीन और मिस्र ने पहली बार संयुक्त हवाई अभ्यास भी किया, जिसमें चीनी J-16 और मिस्री राफेल लड़ाकू विमानों ने साथ उड़ान भरी. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह दिखाता है कि अब चीन-मिस्र संबंध सिर्फ सड़कों और फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहे। 

    मिस्र अरब जगत का बड़ा केंद्र है, अफ्रीका का प्रवेश द्वार है और ब्रिक्स का सदस्य भी है. शी जिनपिंग मिस्र को मिडिल ईस्ट और अफ्रीका दोनों में अपना प्रभाव बढ़ाने के आधार के तौर पर देख रहे हैं. इससे पहले बीजिंग ईरान और सऊदी अरब के बीच बातचीत करवाकर भी मध्यस्थ की छवि बनाने की कोशिश कर चुका है। 

    रॉयटर्स के अनुसार, काहिरा अमेरिकी सैन्य मदद के साथ साथ चीन, रूस और यूरोप के साथ भी अपने विकल्प बढ़ा रहा है. इसका मतलब यह नहीं कि चीन ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका की जगह ले ली है, लेकिन तस्वीर बदल जरूर रही है। 

    भारत के लिए भी यह घटनाक्रम अहम है. होर्मुज भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है, जबकि स्वेज भारत के यूरोप व्यापार के लिए जरूरी है. अगर ये समुद्री रास्ते लंबे समय तक अस्थिर रहते हैं, तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, माल भाड़े और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. ऐसे में अमेरिका के साथ रिश्ते बनाए रखते हुए चीन से मुकाबला और रूस के साथ संतुलन बनाना भारत के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।