Category: विदेश

  • बुर्ज खलीफा की बादशाहत खत्म करेगा जेद्दा टावर! 109 मंजिलों तक पहुंचा निर्माण, जानें कितनी होगी ऊंचाई

    बुर्ज खलीफा की बादशाहत खत्म करेगा जेद्दा टावर! 109 मंजिलों तक पहुंचा निर्माण, जानें कितनी होगी ऊंचाई

    दुबई
       दुबई की बुर्ज खलीफा को दुनिया की सबसे ऊंची इमारत का खिताब हो सकता है छिन जाए. इस इमारत का यह रिकॉर्ड अब टूटने की ओर है. सऊदी अरब के जेद्दा शहर में एक ऐसी गगनचुंबी इमारत तैयार हो रही है, जिसकी ऊंचाई सुनकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह प्रोजेक्ट कितना बड़ा है। 

    नाम है जेद्दा टावर. इसे पहले किंगडम टावर के नाम से जाना जाता था. पूरी तरह तैयार होने के बाद इसकी ऊंचाई कम से कम 1000 मीटर यानी 1 किलोमीटर होगी. इस ऊंचाई के साथ यह दुनिया की पहली ऐसी इमारत बनने जा रही है, जो एक किलोमीटर के निशान को पार करेगी। 

    109 मंजिलों तक पहुंच चुका है टावर

    निर्माण की ताजा प्रगति के मुताबिक अगस्त 2026 तक जेद्दा टावर का स्ट्रक्चर 109वीं मंजिल तक पहुंच चुका था. इसकी ऊंचाई करीब 430 मीटर हो गई थी. यानी इमारत अभी अपनी अंतिम ऊंचाई से काफी नीचे है, लेकिन जमीन से ऊपर उठता इसका ढांचा अब दूर से ही एक विशाल गगनचुंबी इमारत जैसा दिखाई देने लगा है। 

    टावर में 157 से ज्यादा मंजिलें होने की योजना है. निर्माण की रफ्तार भी लगातार बढ़ाई जा रही है. इंजीनियरिंग फर्म थॉर्नटन टोमासेट्टी के मुताबिक इसका कोर स्ट्रक्चर हर हफ्ते करीब एक मंजिल और लगभग 4 मीटर ऊपर जा रहा है। 

    बुर्ज खलीफा से कितनी ऊंची होगी?
    अभी दुनिया की सबसे ऊंची इमारत दुबई की बुर्ज खलीफा है, जिसकी ऊंचाई 828 मीटर है. जेद्दा टावर की प्रस्तावित ऊंचाई कम से कम 1000 मीटर है.यानी दोनों के बीच करीब 172 मीटर का अंतर होगा. आसान भाषा में समझें तो जब जेद्दा टावर पूरा होगा, तब बुर्ज खलीफा का 828 मीटर का रिकॉर्ड पीछे छूट जाएगा। 

    लेकिन इस प्रोजेक्ट की खासियत सिर्फ इसकी ऊंचाई नहीं है.

    तीन पंखुड़ियों जैसी क्यों है डिजाइन?

    जेद्दा टावर का डिजाइन अमेरिकी आर्किटेक्ट एड्रियन स्मिथ ने तैयार किया है. दिलचस्प बात यह है कि एड्रियन स्मिथ बुर्ज खलीफा के डिजाइन से भी जुड़े रहे हैं। 

    जेद्दा टावर को ऊपर से देखने पर इसकी आकृति तीन पंखुड़ियों जैसी नजर आती है. यह डिजाइन केवल देखने में आकर्षक बनाने के लिए नहीं है. इतनी ऊंची इमारत के लिए हवा सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होती है. टावर का आकार हवा के दबाव और उसके आसपास बनने वाले एयरफ्लो को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.यानी यहां डिजाइन और इंजीनियरिंग दोनों का काम साथ-साथ किया गया है। 

    630 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर होगा ऑब्जर्वेशन डेक
    जेद्दा टावर के अंदर सिर्फ ऑफिस या घर नहीं होंगे. इसमें होटल, रेजिडेंशियल स्पेस, सर्विस अपार्टमेंट्स और दूसरी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं.इसकी सबसे खास सुविधाओं में दुनिया के सबसे ऊंचे ऑब्जर्वेशन डेक में से एक शामिल होगा, जो करीब 630 से 638 मीटर की ऊंचाई पर होगा. इसके अलावा टावर के ऊपरी हिस्से में हेलीपैड की भी योजना है। 

    200 कमरों का लग्जरी होटल भी
    जेद्दा टावर को सिर्फ एक ऊंची इमारत के तौर पर नहीं बनाया जा रहा. इसमें करीब 200 कमरों वाला लग्जरी होटल भी प्रस्तावित है.इसके अलावा यहां प्राइवेट रेजिडेंस और सर्विस अपार्टमेंट्स होंगे. इमारत जितनी ऊपर जाएगी, वहां के कुछ रेजिडेंशियल स्पेस उतने ही खास और महंगे होने की उम्मीद है। 

    सात साल तक क्यों थम गया था काम?
    इस प्रोजेक्ट की कहानी सिर्फ इंजीनियरिंग की नहीं है. इसका निर्माण 2013 में शुरू हुआ था, लेकिन कुछ सालों बाद काम रुक गया.2018 के बाद जेद्दा टावर का निर्माण लंबे समय तक ठप रहा. इसके पीछे प्रोजेक्ट से जुड़ी वित्तीय और राजनीतिक परिस्थितियां अहम वजहों में शामिल थीं। 

    करीब सात साल तक रुके रहने के बाद जनवरी 2025 में निर्माण दोबारा शुरू हुआ. इसके बाद प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए 2 अरब डॉलर से ज्यादा के नए कॉन्ट्रैक्ट की खबरें सामने आईं और साइट पर फिर से बड़े स्तर पर काम शुरू हुआ। 

    अब कब तक पूरा होगा?
    मौजूदा निर्माण प्रगति को देखते हुए जेद्दा टावर के 2028 के आसपास पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है.अगर प्रोजेक्ट योजना के मुताबिक पूरा हुआ, तो उस वक्त दुनिया की सबसे ऊंची इमारत का रिकॉर्ड एक बार फिर बदल जाएगा. 828 मीटर की बुर्ज खलीफा नंबर-1 से नंबर-2 पर आ जाएगी. जेद्दा टावर कम से कम 1000 मीटर की ऊंचाई के साथ दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बन जाएगी। 

    फिलहाल 109 मंजिलों तक पहुंच चुका इसका ढांचा उस भविष्य की झलक दे रहा है, जब पहली बार किसी इमारत की ऊंचाई एक पूरे किलोमीटर के पार होगी। 

  • यूक्रेन का अनोखा वॉर फंडिंग प्लान! पोर्न को मिलेगी कानूनी मंजूरी, टैक्स से जुटेंगे $25 मिलियन

    यूक्रेन का अनोखा वॉर फंडिंग प्लान! पोर्न को मिलेगी कानूनी मंजूरी, टैक्स से जुटेंगे $25 मिलियन

    कीव
     रूस के खिलाफ जंग लड़ रहे यूक्रेन में पोर्नोग्राफी को कानूनी रूप से वैध बनाने का प्रस्ताव सामने आया है. यूक्रेनी सांसद यारोस्लाव जेलेजनियाक के समर्थन वाला एक बिल एडल्ट एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को कानूनी अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहा है. जेलेजनियाक यूक्रेनी संसद की वित्त समिति के अध्यक्ष हैं। 

    वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेजनियाक का अनुमान है कि पोर्नोग्राफी को कानूनी बनाने से सरकार को टैक्स के रूप में करीब 25 मिलियन डॉलर यानी 2.5 करोड़ डॉलर की आमदनी हो सकती है. उनका कहना है कि यह रकम युद्ध के लिए करीब 30 हजार ड्रोन खरीदने के लिए पर्याप्त हो सकती है। 

    अभी पोर्नोग्राफी है गैरकानूनी
    यूक्रेन में फिलहाल पोर्नोग्राफी बना
    ना, रखना या उसका वितरण करना गैरकानूनी है. इसके लिए सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है. हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बावजूद एडल्ट कंटेंट इंडस्ट्री लगातार बढ़ी है और भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों की मदद से इसका कारोबार चलता रहा है। 

    अब टैक्स अधिकारियों ने एडल्ट कंटेंट क्रिएटर्स से टैक्स वसूलने की कोशिश शुरू की है. लेकिन यहां एक अजीब स्थिति पैदा हो गई है. जो क्रिएटर्स अपनी कमाई घोषित करते हैं, वे खुद ऐसी गतिविधियों की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं, जो कानून के तहत अपराध हैं।

    जेलेजनियाक ने इसे 'ट्रेजिकॉमिक' स्थिति बताया. उनके मुताबिक, महिलाओं के सामने या तो टैक्स न देने पर आपराधिक कार्रवाई का खतरा है या टैक्स देने पर पोर्नोग्राफी कानून के तहत कार्रवाई का। 

    OnlyFans से करोड़ों की कमाई
    रिपोर्ट में प्लेटफॉर्म की पैरेंट कंपनी फेनिक्स इंटरनेशनल के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 2023 में 7,900 यूक्रेनियों ने OnlyFans के जरिए 131 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाए। 

    टैक्स अधिकारियों की कार्रवाई के बाद कुछ क्रिएटर्स को टैक्स चोरी और अवैध एडल्ट कंटेंट बनाने के आरोपों में नोटिस भी मिले. OnlyFans क्रिएटर स्वितलाना ड्वोर्निकोवा ने दावा किया कि पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा और 20 हजार डॉलर नकद के साथ लैपटॉप और हार्ड ड्राइव जब्त किए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने केस खत्म करने के बदले रिश्वत की पेशकश की, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। 

    राष्ट्रपति जेलेंस्की की वेबसाइट पर पहुंचा मामला
    टैक्स वकील लेसिया मिखालेंको ने कहा कि युद्ध के दौरान क्रिएटर्स पर मुकदमा चलाना सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं है. वहीं ड्वोर्निकोवा ने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की वेबसाइट पर याचिका दायर कर खुद को 'ईमानदार टैक्सपेयर' बताया. उनका दावा था कि उन्होंने करीब 9 लाख डॉलर टैक्स दिया है। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका को एक हफ्ते में 25 हजार से ज्यादा हस्ताक्षर मिले. इसके बाद जेलेंस्की ने कहा कि संसद जेलेजनियाक के पोर्नोग्राफी को कानूनी बनाने के प्रस्ताव पर विचार करेगी. बिल जुलाई में संसद की पहली रीडिंग पास कर चुका है और अब दूसरी रीडिंग का इंतजार है। 

     

  • ज्वालामुखी फटने से आसमान में छाई राख, जकार्ता एयरपोर्ट पर उड़ानें थमीं; 22,800 यात्री फंसे

    ज्वालामुखी फटने से आसमान में छाई राख, जकार्ता एयरपोर्ट पर उड़ानें थमीं; 22,800 यात्री फंसे

    सुमात्रा
    इंडोनेशिया में रविवार सुबह अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी फट गया. विस्फोट के बाद राख के दो गुबार बने. इनमें से एक 20 हजार फीट तक पहुंचा, जबकि दूसरा लगभग 50 हजार फीट की ऊंचाई तक गया. राख फैलने के कारण जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुछ घंटे उड़ान संचालन रोकना पड़ा। 

    यह ज्वालामुखी जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा जलडमरूमध्य (सुंडा जलसंधि) में स्थित है. भूवैज्ञानिक एजेंसी के मुताबिक, यहां शुक्रवार से गतिविधि बढ़ी हुई थी. रविवार सुबह 3:53 बजे करीब 30 सेकंड तक विस्फोट हुआ. निगरानी कैमरे में ज्वालामुखी से निकलती लावा की चमक भी दिखाई दी. फिलहाल किसी की मौत की खबर नहीं है. लोगों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी गई है। 

    आसमान में 50 हजार फीट तक पहुंची राख

    विस्फोट के बाद राख के दो अलग-अलग गुबार बने. पहला करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंचा. यह उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ा, जिससे जकार्ता, बैंटन, पश्चिमी जावा के कुछ हिस्सों पर असर पड़ा। 

    दूसरा गुबार 50 हजार फीट तक पहुंचा. यह पश्चिम और उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ा. इसकी वजह से बैंटन, लैंपुंग, बेंगकुलु, दक्षिणी सुंडा जलडमरूमध्य और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के कुछ हिस्से प्रभावित हुए। 

    जकार्ता एयरपोर्ट पर थमीं उड़ानें
    राख फैलने के खतरे को देखते हुए सोएकार्नो-हट्टा एयरपोर्ट ने सुबह 5:30 बजे से 9:30 बजे तक उड़ान संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया. यात्रियों ने टिकट का पैसा वापस लेने की कोशिश की. कुछ लोग अपना चेक-इन सामान भी वापस लिए। 

    इससे रविवार को 209 फ्लाइट मूवमेंट प्रभावित हुए. करीब 22,800 यात्री इसकी चपेट में आए. घरेलू उड़ानों में मकासर जाने वाला रूट भी प्रभावित रहा. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सिंगापुर जाने वाली फ्लाइट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ा. हांगकांग, सिडनी, एम्स्टर्डम, सियोल, दोहा और कुआलालंपुर की उड़ानों में भी रद्दीकरण, देरी या समय में बदलाव हुआ। 

    170 विमान एयरपोर्ट पर ही खड़े रहे
    रात में एयरपोर्ट पर खड़े किए गए 170 विमान वहीं मौजूद रहे. नागरिक उड्डयन विभाग एयरलाइंस, एयरपोर्ट संचालकों, एयर नेविगेशन सेवाओं और मौसम विभाग के साथ मिलकर हालात पर नजर रख रहा है। 

    यात्रियों को सलाह दी गई है कि एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी एयरलाइन से फ्लाइट की ताजा स्थिति जरूर जांच लें. अधिकारियों ने जरूरी न होने पर फिलहाल एयरपोर्ट जाने से बचने को भी कहा है. उड़ानों की बहाली के बाद भी विमान की आवाजाही, उपलब्ध विमानों तथा टर्मिनल पर यात्रियों की भीड़ पर असर पड़ सकता है। 

    3 किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी
    गनीमत रही कि विस्फोट में किसी की मौत की खबर नहीं है. प्रशासन ने लोगों को निकालने का आदेश भी नहीं दिया है. सबसे नजदीकी बस्ती 16 किलोमीटर से ज्यादा दूर है. फिर भी लोगों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी गई है। 

    अनाक क्राकाटोआ चार स्तर वाली चेतावनी व्यवस्था में दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर है. 2018 में भी इस ज्वालामुखी के विस्फोट के बाद सुनामी आई थी. उस घटना में जावा और सुमात्रा में कम से कम 430 लोगों की मौत हुई थी. वैज्ञानिकों के मुताबिक, उस घटना के बाद ज्वालामुखी का द्वीप अपने पुराने आकार का करीब एक-चौथाई रह गया है। 

  • AI नहीं, बच्चों की पढ़ाई में शिक्षक जरूरी! न्यूयॉर्क ने 8वीं तक छात्रों के लिए AI पर लगाई रोक

    AI नहीं, बच्चों की पढ़ाई में शिक्षक जरूरी! न्यूयॉर्क ने 8वीं तक छात्रों के लिए AI पर लगाई रोक

    न्यूयॉर्क
    आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर हर तरफ चर्चा है, अधिकतर लोग मानने लगे हैं कि अब इसके बिना कुछ भी संभव नहीं है, लेकिन अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी के अधिकारियों ने प्राइमरी स्कूलों में AI के इस्तेमाल पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया है। 

    न्यूयॉर्क सिटी के अधिकारियों ने सार्वजनिक प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के लिए बड़ा ऐलान कर दिया है. अब स्टूडेंट आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के इस्तेमाल पर इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक का ऐलान कर दिया है। 

    अमेरिका में स्कूलों को लेकर AI के संबंध में लिया गया है, यह अब तक का सबसे बड़ा और सख्त फैसला माना जा रहा है. अब लॉस एंजिल्स समेत कई अन्य शहरों के स्कूलों में AI के नियमों का दोबारा रिव्यू किया जा रहा है। 

    40 एजुकेशन AI टूल को किया है बैन
    न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने बुधवार को बताया है कि शहर के स्कूलों की क्लासेस में फिलहाल इस्तेमाल किए जा रहे हैं 40 एजुकेशन AI टूल्स के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। 

    स्टूडेंट को टीचर चाहिए और उनसे जुड़ाव चाहिए
    मेयर ने कहा है कि बच्चों को सीखने और बढ़ने के लिए टीचर चाहिए और उनसे जुड़ाव चाहिए. स्टूडेंट को साथियों के साथ मिलकर कौशल सीखने चाहिए और टीचर्स से नई-नई चीजों को सीखना चाहिए। 

    बच्चों के लिए एआई टूल्स पर क्यों लगी पाबंदी?

        यह पाबंदी प्री-किंडरगार्टन से लेकर आठवीं कक्षा तक के छात्रों पर लागू की गई है। मेयर ममदानी और स्कूल्स चांसलर कामर सैमुअल्स द्वारा जारी इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य बच्चों में क्रिटिकल थिंकिंग यानी खुद से सोचने-समझने की क्षमता को बचाना और शिक्षकों व छात्रों के बीच संवाद को बनाए रखना है।

        इस नए नियम के तहत शिक्षा अधिकारी 38 से अधिक क्लासरूम प्रोग्राम्स के स्वचालित (ऑटोमेटेड) फीचर्स को पूरी तरह बंद कर देंगे। इसके अलावा चैटजीपीटी और क्लॉड जैसे पब्लिक चैटबॉट सभी स्तर के स्कूलों में पूरी तरह से ब्लॉक रहेंगे। न्यूयॉर्क ने साल 2023 में भी चैटजीपीटी पर बैन लगाया था, लेकिन बाद में इसे हटा लिया गया था। अब प्रशासन ने पिछली नीतियों में बदलाव करते हुए दो-तिहाई छात्रों के लिए सख्त नियम लागू कर दिए हैं।

    चैटबॉट्स के इस्तेमाल से बच्चों को क्या हैं नुकसान?

    क्रिटिकल थिंकिंग की कमी:
    एआई चैटबॉट्स से बच्चों को हर जटिल सवाल का बना-बनाया जवाब सेकंडों में मिल जाता है, इससे वे खुद से तर्क करना, समस्याओं का विश्लेषण करना और दिमागी कसरत करना छोड़ देते हैं। इससे उनकी सोचने समझने की क्षमता प्रभावित होती है।

    रचनात्मकता और मौलिकता की कमी:
    निबंध, कविताएं या प्रोजेक्ट खुद तैयार करने के बजाय बच्चे एआई का सहारा लेते हैं। इससे उनकी भाषा शैली, कल्पनाशीलता और खुद को अभिव्यक्त करने की प्राकृतिक कला धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी।

    गलत सूचनाओं का असर:
    चैटबॉट्स अक्सर गलत या भ्रामक तथ्यों को बहुत ही प्रामाणिक और आत्मविश्वास भरे ढंग से पेश करते हैं। कच्ची उम्र के बच्चे इन जानकारियों को पूरी तरह सच मान लेते हैं, जिससे उनके बुनियादी ज्ञान की नींव ही गलत तथ्यों पर खड़ी हो सकती है।
    मानवीय और सामाजिक कौशल में गिरावट:

    कक्षा में दोस्तों के साथ ग्रुप डिस्कशन करने या शिक्षकों से सवाल पूछने की बजाय स्क्रीन देखते रहने के कारण बच्चों के संवाद और सामाजिक कौशल का विकास रुक जाता है।

    शिक्षक-छात्र संबंधों में दूरी:
    एक शिक्षक बच्चे की मानसिक स्थिति, उसकी कमजोरी और मजबूती को समझकर व्यक्तिगत मार्गदर्शन देता है। हर समस्या के लिए मशीनों पर निर्भरता इस भावनात्मक जुड़ाव और जरूरी मार्गदर्शन को पूरी तरह खत्म कर देती है।

    स्क्रीन टाइम लिमिट कम करने पर जोर
        इस पाबंदी से हाई स्कूल के छात्रों को थोड़ी राहत दी गई है। उन्हें साल में दो बार एआई साक्षरता की कक्षाएं दी जाएंगी और कड़ी निगरानी में कुछ चुनिंदा एआई प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने की छूट मिलेगी। दूसरी ओर शिक्षकों को लेसन प्लानिंग और प्रशासनिक कार्यों के लिए एआई टूल्स का उपयोग करने की अनुमति दी गई है।

        हालांकि, कॉपियां जांचने (ग्रेडिंग) या छात्रों के किसी भी तरह के औपचारिक मूल्यांकन के लिए एआई का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित रहेगा। प्रशासन ने बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की लिमिट भी तय कर दी है। इसके तहत तीसरी से पांचवीं कक्षा के बच्चों के लिए 30 मिनट और छठी से आठवीं कक्षा के लिए 45 मिनट की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है। हालांकि, दिव्यांग छात्रों और अंग्रेजी भाषा सीखने वाले बच्चों को इन नियमों में विशेष छूट दी जाएगी।

    टेक कंपनियों के दावों पर मेयर का पलटवार
    प्रेस ब्रीफिंग के दौरान शहर के अधिकारियों ने टेक इंडस्ट्री की उस सोच को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें एआई को शिक्षा के लिए जरूरी बताया जाता है। मेयर जोहरान ममदानी ने कड़े शब्दों में कहा कि टेक कंपनियां हमें यह विश्वास दिलाना चाहती हैं कि शुरुआती शिक्षा में एआई जरूरी है, लेकिन हम ऐसा बिल्कुल नहीं मानते। उन्होंने तर्क दिया कि स्कूलों का काम बच्चों को सवाल पूछना और चीजों को परखना सिखाना है, इसलिए यह अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे व्यावसायिक सॉफ्टवेयर की आंख मूंदकर अनुमति देने के बजाय उसकी कड़ी निगरानी करें।

    फैसले पर उठ रहे सवाल
        इस बड़े फैसले पर शिक्षा जगत
    से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ टीचर्स के अध्यक्ष माइकल मुलग्रू ने स्क्रीन टाइम लिमिट और विशेष बच्चों को दी गई छूट का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों पर जिम्मेदारी डालने के बजाय टेक कंपनियों और सप्लायर्स से सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों की मांग की जानी चाहिए।

        वहीं फेयरप्ले के कार्यकारी निदेशक जॉश गोलिन ने चिंता जताई कि एआई के लंबे समय तक पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समझने के लिए एक साल का समय काफी नहीं है। इसके अलावा सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बच्चे स्कूल के बाद घर जाकर अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर होमवर्क के लिए एआई का इस्तेमाल कर सकते हैं।

        चांसलर कामर सैमुअल्स ने भी माना कि घर पर बच्चों की डिजिटल आदतों पर नजर रखने के लिए स्कूल के साथ-साथ अभिभावकों की भी मदद लेनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया और इसके प्रभाव पर नजर रखने के लिए 'टेक्नोलॉजी इन स्कूल्स कोएलिशन' नाम का एक नया संगठन भी बनाया गया है।

    इन क्लास पर पड़ेगा असर 
    फैसले का असर क्लास 8 तक के बच्चों पर देखने को मिलेगा. हालांकि हाई स्कूल के छात्रों को कुछ मामले में AI का इस्तेमाल करने की अनुमति होगी. सिटी एडमिन ने कहा है कि टीचर्स अपनी प्लानिंग और शेड्यूलिंग जैसे कामों में AI का इस्तेमाल कर सकेंगे. AI ग्लोबल लीडर्स गूगल, एंथ्रोपिक और माइक्रोसॉफ्ट ने इस मामले को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।  

    यह फैसला ऐसे समय आया है, जब स्टूडेंट की निर्भरता बहुत ज्यादा AI और अन्य AI टूल्स पर हो गई है. कैलकुलेशन से लेकर राइटिंग में तक में स्टूडेंट AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। 

  • नेपाल बाढ़ ने छीनीं बुनियादी सुविधाएं, राहत शिविरों में महिलाओं को पैड-अंडरवियर तक के लिए जूझना पड़ा

    नेपाल बाढ़ ने छीनीं बुनियादी सुविधाएं, राहत शिविरों में महिलाओं को पैड-अंडरवियर तक के लिए जूझना पड़ा

    काठमांडू 

    नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हजारों लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है. घर उजड़ गए, सामान बह गया और बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं. लेकिन बाढ़ से बच निकलने के बाद भी महिलाओं की मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। 

    AFP की ग्राउंड रिपोर्ट में नेपाल के राहत शिविरों में रह रही महिलाओं की ऐसी परेशानियां सामने आई हैं, जिन पर आमतौर पर आपदा के दौरान कम बात होती है. महिलाओं के लिए पीरियड्स, साफ पानी, टॉयलेट, कपड़े और प्राइवेसी जैसी रोजमर्रा की जरूरतें भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। 

    ‘पैड तो मिल रहे हैं, लेकिन अंडरवियर नहीं’

    AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, राहत शिविर में रह रही कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें सैनिटरी पैड मिल रहे हैं, लेकिन पहनने के लिए अंडरगारमेंट्स जैसी जरूरी चीजें आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। 

    बाढ़ में घर और सामान खो चुकी महिलाओं के लिए यह समस्या और बड़ी हो गई है. पीरियड्स के दौरान सिर्फ पैड मिलना ही काफी नहीं होता. साफ पानी, टॉयलेट, कपड़े बदलने की जगह और निजी स्वच्छता के लिए जरूरी सुविधाएं भी चाहिए होती हैं। 

    400 से ज्यादा लोगों के लिए सिर्फ तीन टॉयलेट
    AFP की रिपोर्ट में राहत शिविरों में सैनिटेशन की स्थिति भी सामने आई है. एक शिविर में 400 से ज्यादा लोगों के लिए सिर्फ तीन टॉयलेट होने की बात बताई गई है। 

    महिलाओं के लिए परेशानी इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि उन्हें टॉयलेट के साथ-साथ नहाने और कपड़े बदलने के लिए भी पर्याप्त प्राइवेसी चाहिए. लेकिन आपदा के बाद बनाए गए अस्थायी शिविरों में ये सुविधाएं अक्सर सीमित होती हैं। 

    बाढ़ ने छीन ली सिर्फ छत नहीं, निजी जिंदगी भी
    घर उजड़ने के बाद राहत शिविर में पहुंचना किसी परिवार के लिए राहत की शुरुआत हो सकती है, लेकिन महिलाओं की जिंदगी में कई निजी मुश्किलें वहीं से शुरू होती हैं। 

    घर में जिन चीजों को लेकर कभी सोचना नहीं पड़ता था, वही चीजें अब जरूरत बन जाती हैं- साफ कपड़े, अंडरगारमेंट्स, सैनिटरी पैड, साफ पानी और ऐसी जगह जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी निजी जरूरतें पूरी कर सकें। 

    AFP की रिपोर्ट इस बात को सामने लाती है कि आपदा राहत सिर्फ खाना, पानी और टेंट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हो सकती. महिलाओं की गरिमा और स्वच्छता से जुड़ी जरूरतों को भी राहत व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाना जरूरी है। 

    जिंदगी बच गई, लेकिन सामान्य जिंदगी कब लौटेगी?
    बाढ़ से बच जाना निश्चित तौर पर सबसे बड़ी राहत है. लेकिन जिन लोगों ने अपना घर और सामान खो दिया है, उनके लिए सामान्य जिंदगी में लौटना लंबा सफर है। 

    राहत शिविरों में रह रही महिलाओं की बातें इसी संघर्ष को सामने लाती हैं. उनके लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आज खाना मिलेगा या नहीं. सवाल यह भी है कि वे कब फिर से अपने घर जैसी सुरक्षा, प्राइवेसी और सम्मान के साथ जिंदगी जी पाएंगी। 

    AFP की रिपोर्ट के जरिए सामने आई ये तस्वीर बताती है कि किसी आपदा का असर पानी उतरने के बाद भी लंबे समय तक लोगों की जिंदगी में बना रहता है। 

  • ईरान युद्ध से जुड़ी लीक पर ट्रंप का सख्त एक्शन, करीब 50 सैन्य अफसरों से पूछे गए सवाल

    ईरान युद्ध से जुड़ी लीक पर ट्रंप का सख्त एक्शन, करीब 50 सैन्य अफसरों से पूछे गए सवाल

    वाशिंगटन
    ईरान युद्ध से जुड़ी अहम जानकारी मीडिया तक पहुंचने के मामले में अमेरिका ने जांच तेज कर दी है. पेंटागन (संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग ) ने करीब 50 ज्वाइंट स्टाफ सदस्यों का ट्रंप सरकार ने पॉलीग्राफ टेस्ट कराया है. जांच का मकसद यह पता लगाना है कि ईरान युद्ध से जुड़ी गोपनीय जानकारी पत्रकारों तक किसने पहुंचाई। 

    पहले जानते हैं पॉलीग्राफ टेस्ट क्या है. पॉलीग्राफ टेस्ट (Polygraph Test) को आम भाषा में लाई डिटेक्टर टेस्ट (Lie Detector Test) या झूठ पकड़ने वाली जांच कहा जाता है. इसमें सवालों के जवाब देते समय व्यक्ति की सांस, दिल की धड़कन और शरीर में होने वाले बदलावों को रिकॉर्ड किया जाता है. इन बदलावों से जांचकर्ता यह समझने की कोशिश करते हैं कि जवाब देते समय व्यक्ति के शरीर में किस तरह की प्रतिक्रिया हुई। 

    हालांकि, किसी व्यक्ति के तनाव में होने का मतलब यह अपने आप साबित नहीं करता कि वह झूठ बोल रहा है. इसलिए पॉलीग्राफ टेस्ट को जांच का एक हिस्सा माना जाता है, अंतिम सबूत नहीं. खैर, अब लौटते हैं अपनी खबर पर। 

    यह जानकारी अमेरिकी न्यूज एजेंसी द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दायरे में अमेरिकी सेना के ज्वाइंट स्टाफ से जुड़े करीब 50 लोग आए हैं. इनमें सैन्य अधिकारी के साथ कुछ नागरिक कर्मचारी भी शामिल हैं. पिछले महीने उनसे सवाल किए गए कि क्या उन्होंने अमेरिका के कम होते हथियारों के भंडार से जुड़ी जानकारी किसी पत्रकार को दी थी। 

    ईरान युद्ध में हथियारों की कमी की जानकारी लीक होने का शक
    मामला सिर्फ सामान्य सैन्य जानकारी के लीक होने का नहीं है. जांच उन खबरों को लेकर हो रही है, जिनमें ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका के कुछ जरूरी हथियारों की कमी की बात सामने आई थी. ऐसे हथियार युद्ध में बेहद अहम होते हैं, इसलिए इनसे जुड़ी जानकारी को संवेदनशील माना जाता है. अब अमेरिकी जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि सैन्य व्यवस्था के भीतर से यह जानकारी बाहर कैसे पहुंची. इसी वजह से ज्वाइंट स्टाफ से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई. पॉलीग्राफ टेस्ट भी इसी जांच का हिस्सा है। 

    पेंटागन ने क्या कहा?
    इस मामले पर पेंटागन ने जांच से जुड़ी खास जानकारी देने से इनकार किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि विभाग आंतरिक कर्मचारियों या जांच से जुड़े मामलों पर टिप्पणी नहीं करता. उनका कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक होने के सभी मामलों को बेहद गंभीरता से लिया जाता है और उनकी जांच की जाती है। 

    पेंटागन अमेरिका के रक्षा विभाग का मुख्यालय है. यह वर्जीनिया के आर्लिंगटन में स्थित है. फिलहाल जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका के हथियारों की स्थिति से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पत्रकारों तक आखिर कैसे पहुंची। 

     

  • खर्ग द्वीप के करीब ईरानी टैंकर पर मिसाइल अटैक, अमेरिका पर हमले का आरोप

    खर्ग द्वीप के करीब ईरानी टैंकर पर मिसाइल अटैक, अमेरिका पर हमले का आरोप

    तेहरान 

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम की ओर जा रहा है। इसी बीच ईरानी मीडिया ने खर्ग द्वीप पर बड़े हमले का दावा किया है। जानकारी के मुताबिक खर्ग द्वीप के पास जोरदार धमाके सुने गए हैं। ये धमाके वहीं हुए हैं जहां तेल का मुख्य हब है। एसएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक खर्ग द्वीप के पास ही ईरान के टैंकर को निशाना बनाया गया है।

    अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अमेरिका ने ईरान के टैंकर को ही निशाना बनाया है या फिर खर्ग द्वीप पर भी तबाही मचाई है। बीते दिनों अमेरिका ने एआई वीडियो जारी करते हुए दावा किया था कि खर्ग द्वीप को तबाह करके टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया है। हालांकि ईरान ने अमेरिका के इस दावे को खारिज कर दिया था।

    अमेरिका बोला- यह युद्ध नहीं है
    अमेरिका एक तरफ युद्ध की आग भड़काता ही जा रहा है और दूसरी तरफ दावा कर रहा है कि यह युद्ध नहीं है। वेंस से अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान पूछा गया कि क्या तीन नवंबर को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले युद्ध समाप्त हो सकता है जिसके जवाब में उन्होंने कहा, ''मैं इसे युद्ध नहीं कहूंगा। फिलहाल सक्रिय गोलीबारी नहीं हो रही है।''

    ट्रंप इसे बता रहे मामूली बात
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष को ''मामूली बात'' करार दिया और देश के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस के इस बयान से सहमति जताई कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को ''युद्ध'' नहीं कहा जा सकता। ट्रंप ने 'ओवल ऑफिस' (अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक कार्यालय) में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान वेंस की एक दिन पहले की टिप्पणियों के बारे में सवाल किए जाने पर कहा कि ईरान पर अमेरिकी हमले अब ''रुक-रुककर'' हो रहे हैं। उन्होंने इस संघर्ष की गंभीरता को कम दिखाने की कोशिश की जबकि इस युद्ध पर अमेरिकी करदाताओं के 37.5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च हो चुके हैं और अमेरिका के 18 सैन्यकर्मियों की मौत हुई है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक अहम रास्ता बना हुआ है। क्षेत्रीय तनाव के बीच इससे होकर होने वाली जहाजों की आवाजाही में काफी कमी आई है। हाल के दिनों में यहाँ से गुज़रने वाले जहाजों की संख्या बहुत कम हो गई है। बड़े तेल टैंकर और गैस कैरियर लगभग इस रास्ते का इस्तेमाल करना बंद कर चुके हैं। तनाव बढ़ने से पहले, दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की खेप इसी जलडमरूमध्य से होकर गुज़रती थी।

  • पाकिस्तान में ‘वन कमांडर, थ्री फोर्सेज’ सिस्टम लागू, फील्ड मार्शल असीम मुनीर बने सर्वेसर्वा

    पाकिस्तान में ‘वन कमांडर, थ्री फोर्सेज’ सिस्टम लागू, फील्ड मार्शल असीम मुनीर बने सर्वेसर्वा

    इस्लामाबाद

    पाकिस्तान की संसद ने देश के सैन्य कमान ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार एक ही अधिकारी को सेना, नौसेना और वायुसेना- तीनों की कमान सौंपने का कानूनी अधिकार दिया है। नेशनल असेंबली ने अगस्त के अंत में पाकिस्तान के रक्षा बल अधिनियम, 2026 को मंजूरी दी थी। इसके तहत चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDF) का नया पद बनाया गया है।

    फील्ड मार्शल असीम मुनीर पाकिस्तान के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बने हैं। वह इस पद के साथ-साथ सेना प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे। यह बदलाव 1976 के बाद पाकिस्तान के सैन्य कमान ढांचे में सबसे बड़ा पुनर्गठन माना जा रहा है। इससे पहले किसी एक अधिकारी को तीनों सेनाओं पर इस तरह का औपचारिक कानूनी अधिकार नहीं मिला था।

    क्या बदला है पाकिस्तान की सैन्य कमान व्यवस्था में?
    अब तक तीनों सेनाओं के बीच तालमेल के लिए जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी के चेयरमैन का पद था। यह पद 1976 में बनाया गया था, लेकिन इसके पास नौसेना या वायुसेना को सीधे कमांड करने का कानूनी अधिकार नहीं था।

    नए CDF पद में यह स्थिति बदल गई है। इसके तहत:

        CDF को तीनों सेनाओं पर ऑपरेशनल कमान हासिल होगी।
        वह सीधे संघीय सरकार को रिपोर्ट करेगा।
        उसे ऐसे फैसलों को लागू कराने का अधिकार होगा, जिन्हें पुरानी व्यवस्था में लागू कराने की शक्ति नहीं थी।
        असीम मुनीर सेना प्रमुख के पद पर रहते हुए CDF की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।

    रावलपिंडी स्थित एक सेवानिवृत्त थ्री-स्टार जनरल ने अल जजीरा से कहा कि नए कानून ने प्रधानमंत्री से लेकर जमीन पर तैनात सैन्य इकाइयों तक कमान की एक स्पष्ट और लिखित श्रृंखला तैयार कर दी है। सेवानिवृत्त जनरल नईम खालिद लोधी के मुताबिक, CDF अब एक वास्तविक कमांडर है, जबकि पुराना पद मुख्य रूप से समन्वय तक सीमित था।

    क्या इससे सेना और ताकतवर हो गई?
    नए कानून को लेकर विश्लेषकों की राय एक जैसी नहीं है। कानून के मुताबिक, परमाणु बलों की कमान का पद अब सेना से ही आएगा। विश्लेषक माजिद निजामी के अनुसार, इससे औपचारिक रूप से वह संभावना खत्म हो गई है कि यह जिम्मेदारी पहले की तरह नौसेना या वायुसेना के किसी अधिकारी के पास भी जा सकती थी।

    रावलपिंडी के एक सेवानिवृत्त थ्री-स्टार जनरल ने नई व्यवस्था को स्पष्ट रूप से सेना-केंद्रित बताया। वहीं, रणनीतिक योजना से जुड़े रहे एक पूर्व अधिकारी ने आशंका जताई कि नौसेना और वायुसेना में करियर से जुड़े फैसले अब सेना के नेतृत्व वाली कमान व्यवस्था के जरिए होंगे।

    हालांकि, सेवानिवृत्त जनरल नईम खालिद लोधी ने इस बदलाव को अलग नजरिए से देखा। उनके अनुसार, CDF के पास अब फैसलों को लागू कराने की वास्तविक शक्ति है, जो पुराने समन्वयकारी पद के पास नहीं थी।

    क्या नागरिक सरकार की निगरानी कमजोर होगी?
    नए कानून के बाद नागरिक निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वकील और पूर्व अधिकारी कर्नल इनाम रहीम के मुताबिक, अब CDF सिर्फ एक पत्र के जरिए अधिकारियों को बर्खास्त कर सकता है। इसके लिए पहले जिस कैबिनेट सारांश की जरूरत होती थी, वह अब जरूरी नहीं है।

    कराची के वकील अब्दुल मोइज जाफरी ने तर्क दिया कि कानून ने औपचारिक रूप से बराबर माने जाने वाले एक सर्विस चीफ को दूसरे के अधीन कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में इस सवाल की स्वतंत्र रूप से जांच करने के लिए पर्याप्त स्वतंत्र अदालत नहीं है।

    हालांकि, हर कोई इस कानून को जरूरत से ज्यादा ताकत देने वाला नहीं मानता। सुप्रीम कोर्ट के वकील हाफिज अहसान अहमद खोखर ने इसकी तुलना ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के समान कानूनों से की। हालांकि इन देशों में संबंधित पद तीनों सेनाओं के बीच बदलता रहता है, जबकि पाकिस्तान में यह पद सेना प्रमुख के पास ही रहेगा।

    पाकिस्तान सरकार ने बताए बदलाव के तीन मकसद
    पाकिस्तान के मुताबिक, सैन्य कमान में यह पुनर्गठन तीन प्रमुख उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया गया है। पहला- जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और ड्रोन अभियानों के बीच बेहतर तालमेल। दूसरा, पुरानी व्यवस्था को खत्म करना, जिसमें तीनों सेनाएं बड़े स्तर पर अलग-अलग तरीके से काम करती थीं। तीसरा- संकट के समय तेजी से फैसले लेना, क्योंकि अब एक अधिकारी तीनों सेनाओं को एक साथ निर्देश दे सकेगा।

  • कैलिफोर्निया में बड़ी ड्रग्स बरामदगी, भारतीय नागरिक के ठिकानों से मेथामफेटामाइन, हथियार और कैश मिला

    कैलिफोर्निया में बड़ी ड्रग्स बरामदगी, भारतीय नागरिक के ठिकानों से मेथामफेटामाइन, हथियार और कैश मिला

    कैलिफोर्निया

    अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक भारतीय नागरिक पर  पिज्जा आउटलेट की आड़ में ड्रग्स का कारोबार करने का मामला सामने आया है. U.S. Department of Justice के मुताबिक, 50 साल के कवल प्रीत सिंह पर बड़ी मात्रा में मेथामफेटामाइन बेचने और ड्रग्स की तस्करी में अवैध हथियार रखने के आरोप हैं। 

    जांच के दौरान अधिकारियों ने उसके घर और कारोबार की तलाशी ली. इस दौरान 40 पाउंड से ज्यादा मेथामफेटामाइन, तीन हथियार और 10 हजार डॉलर से ज्यादा नकद बरामद हुआ. कवल प्रीत सिंह कैलिफोर्निया के दिनुबा शहर में Round Table Pizza रेस्तरां चलाता था। कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक, आरोप है कि वह इसी रेस्तरां से बड़ी मात्रा में मेथामफेटामाइन बेचता था. उस पर ड्रग्स की तस्करी से जुड़े अवैध हथियार रखने का भी आरोप है। 

    अमेरिकी अधिकारियों ने 18 अगस्त को सिंह के घर और उसके कारोबार की तलाशी ली. इस दौरान बड़ी मात्रा में ड्रग्स के खेप के साथ तीन बंदूकें और नकदी मिली. इस मामले की जांच FBI और Homeland Security Investigations ने की है। 

    अगर कवल प्रीत सिंह को दोषी ठहराया जाता है तो ड्रग्स की तस्करी के मामले में उसे कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा हो सकती है. इसके अलावा उस पर 1 करोड़ डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं, ड्रग्स की तस्करी के दौरान हथियार रखने के आरोप में उसे कम से कम 5 साल की अतिरिक्त सजा हो सकती है। 

    हालांकि, अभी ये सिर्फ आरोप हैं. अदालत में दोष साबित होने तक सिंह को कानून के तहत निर्दोष माना जाएगा. अंतिम सजा अदालत संबंधित कानून और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए तय करेगी। 

    क्या है मेथामफेटामाइन?
    मेथामफेटामाइन एक बेहद नशीला और खतरनाक सिंथेटिक ड्रग है, जो दिमाग और शरीर पर तेज असर डालता है. इसके इस्तेमाल से गंभीर स्वास्थ्य नुकसान और लत लग सकती है. अमेरिका में बड़ी मात्रा में इसकी बिक्री और तस्करी करना गंभीर अपराध है। 

  • नेपाल में भारी तबाही के बीच बढ़ा मृतकों का आंकड़ा, 1,344 लोगों की गई जान

    नेपाल में भारी तबाही के बीच बढ़ा मृतकों का आंकड़ा, 1,344 लोगों की गई जान

    काठमांडू 

    नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. अब तक 1,344लोगों की जान जा चुकी है और 5053 लोग लापता हैं. 32963 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 7570 घरों को नुकसान पहुंचा है। नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में अब तक 1,344 लोगों की जान जा चुकी है. पिछले हफ्ते आई फ्लैश फ्लड ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई गांवों और कस्बों को बुरी तरह प्रभावित किया. कई इलाकों में अब भी मलबे और कीचड़ के बीच लोगों की तलाश जारी है। 

    मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी NDRF
    तबाही के बीच सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों को ढूंढना है, जो अभी भी मलबे और कीचड़ के नीचे फंसे हो सकते हैं. इसी को देखते हुए भारत ने 11 सदस्यीय  NDRF तकनीकी टीम नेपाल भेजी है. यह टीम स्थानीय बचाव दलों के साथ मिलकर उन जगहों पर तलाशी अभियान चला रही है, जहां लोगों के दबे होने की आशंका है। 

    नेपाल के दार्चुला में भूस्खलन से नदी का रास्ता बंद, निचले इलाकों में अलर्ट
    नेपाल के दार्चुला जिले में शुक्रवार को भारी भूस्खलन के बाद चौलानी नदी का प्रवाह बाधित हो गया। नदी का रास्ता बंद होने से आसपास के क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है। लोगों को नदी के आसपास और निचले क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    चिलिमे सुरंग में भारतीय टीम क्या कर रही है?
    भारतीय सुरंग बचाव दल ने शुक्रवार को चिलिमे सुरंग के अंदर अभियान चलाया। टीम का प्रयास सुरंग के पानी और मलबे से प्रभावित हिस्सों तक पहुंचने और वहां फंसे लोगों की तलाश करने का है। भारी उपकरणों को सुरंग तक पहुंचाने और बचाव अभियान को गति देने के लिए एक अस्थायी ट्रैक भी तैयार किया जा रहा है। टीम ने सुरंग के भीतर सुरक्षा रस्सियां लगाई हैं, जबकि पानी और मलबे से बाधित हिस्सों में फ्लोट और पंप भी तैनात किए जा रहे हैं।

    रसुवा जिले के स्याब्रुबेसी गांव के पास स्थित चिलिमे जलविद्युत परियोजना का इलाका बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। सुरंग के कई हिस्से पानी और मलबे से बाधित हो गए थे, जिसके कारण वहां पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ था। अब भारतीय टीम सुरंग के अंदर आगे बढ़कर प्रभावित हिस्सों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, ताकि खोज और बचाव अभियान को और प्रभावी बनाया जा सके।

     चिलिमे सुरंग में फंसे लोगों के लिए बचाव अभियान, भारतीय टीम जुटी; मृतकों का आंकड़ा 1344 पहुंचा
    नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। भारतीय बचाव दल नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत कार्यों में जुटा है। इसी क्रम में विशेष भारतीय सुरंग बचाव टीम ने चिलिमे सुरंग में अभियान तेज कर दिया है। वहीं शुक्रवार को नेपाल सरकार ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें बताया गया कि बाढ़ से 32 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। इससे सड़कें, पुल, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों को नुकसान पहुंचा है। सरकार की शुरुआती रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। वहीं इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 1344 हो गई। प्रभावित इलाकों से और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़ी है।  

    कहां से कितने लोगों की हो चुकी है मौत कुल मौत – 1,344

        रसुवा: 140
        नुवाकोट: 184
        धादिंग: 67
        गोरखा: 73
        तनहुं: 38
        नवलपरासी पूर्व: 221
        नवलपरासी पश्चिम: 212
        चितवन: 359
        (विभिन्न मानव अंगों सहित)
        शिनाख्त कर सौंपे गए शवों की संख्या: 96
        घायलों की संख्या: 5,663
        लापता लोगों की संख्या: 5,053
        बचाए गए लोगों की संख्या: 13,095

    7570 घरों को हुआ नुकसान

        निजी घर: कुल 7570
        सरकारी संरचना: कुल 48 (35 पूर्ण क्षति, 13 आंशिक क्षति)
        विद्यालय: कुल 18 (11 पूर्ण क्षति, 7 आंशिक क्षति)
        स्वास्थ्य संस्था: कुल 7 (4 पूर्ण क्षति, 3 आंशिक क्षति)
        सड़क: 55 किलोमीटर पूर्ण क्षति पुल: कुल मोटरेबल 37 (33 पूर्ण क्षति) और 68 झोलुंगे (झूला) पुल

    26 अगस्त को आई थी विनाशकारी बाढ़

    नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन से अचानक आई बाढ़ ने उत्तर और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई और व्यापक स्तर पर नुकसान हुआ।