Category: छत्तीसगढ़

  • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में रायपुर में आईटीएमएस के सुचारू संचालन को लेकर बैठक सम्पन्न हुई

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में रायपुर में आईटीएमएस के सुचारू संचालन को लेकर बैठक सम्पन्न हुई

    रायपुर

     मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में राजधानी रायपुर में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के सुचारू और सतत संचालन को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में आईटीएमएस के संचालन, रखरखाव, वित्तीय दायित्वों और तकनीकी उन्नयन सहित इसके भविष्य में विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

    बैठक में आईटीएमएस से जुड़े लंबित वित्तीय दायित्वों की समीक्षा के साथ सिस्टम के नियमित संचालन एवं रखरखाव के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने आईटीएमएस के प्रभावी संचालन के लिए वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने और दीर्घकालिक योजना तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    कैमरों और तकनीकी संसाधनों के उन्नयन पर जोर

    बैठक में आईटीएमएस के अंतर्गत लगाए गए उपकरणों, कैमरों, सर्वर और सॉफ्टवेयर को समयानुकूल अपग्रेड करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप सिस्टम को आधुनिक बनाने की आवश्यकता बताई, ताकि यातायात प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

    नई सड़कों और जंक्शनों तक होगा विस्तार

    आईटीएमएस को रायपुर की नई सड़कों, प्रमुख कॉरिडोर और जंक्शनों तक विस्तारित करने से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। इसके लिए आवश्यक तकनीकी एवं वित्तीय संसाधनों का आकलन कर चरणबद्ध तरीके से विस्तार की दिशा में आगे बढ़ने पर विचार किया गया।

    बैठक में आईटीएमएस के संचालन, रखरखाव, तकनीकी उन्नयन और भविष्य के विस्तार के लिए दीर्घकालिक वित्तीय रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता पर भी सहमति बनी।

    बैठक में डीजीपी  अरुण देव गौतम, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव मती निहारिका बारिक, एडीजीपी  दीपांशु काबरा, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, एनआरडीए के सीईओ  चंदन कुमार, रायपुर कलेक्टर  गौरव कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन को लेकर शासी परिषद की बैठक, योजनाओं की प्रगति पर हुई चर्चा

    जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन को लेकर शासी परिषद की बैठक, योजनाओं की प्रगति पर हुई चर्चा

    रायपुर

    मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी की शासी परिषद की नवमीं बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन के संबंध में भारत सरकार द्वारा निर्धारित गाईडलाइन के अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने प्रदेश में जलग्रहण के तहत किए जाने वाले कार्यों में अधिक से अधिक भूमिगत जलसंग्रहण के कार्यों को कराने की बात कही। उन्होंने परियोजना के अंतर्गत ज्यादा से ज्यादा आजीविका गतिविधियों के कार्यों को शामिल करने के निर्देश अधिकारियेां को दिए है। जिससे ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को रोजगार मिले। बैठक में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत पौधा रोपण सहित अमृत सरोवर, स्टापडेम, चेकडेम सहित अन्य जलसंग्रहण कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।

    बैठक में जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रमों की वर्ष 2021 से अब तक किए गए कार्यों प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में वाटरशेड विकास कार्यक्रम- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 का प्रारंभिक प्रतिवेदन प्रस्ताव तैयार करने के क्षेत्रफल अनुमोदन के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में जलग्रहण प्रबंधन क्षेत्र विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत आजीविका की गतिविधियों के अंतर्गत डेयरी, मुर्गीपालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन, शुकर पालन, बत्तख पालन, मधुमक्खी पालन, ड्रीम, स्पींकलर, पंप मोटर, पंप, अगरबत्ती उत्पादन, सब्जी उत्पादन, आटा चक्की, दाल पिसाई मशीन, मशाला पिसाई मशीन इत्यादि कार्यों को शामिल करने के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जल संग्रहण संरचानाओं के कार्यों जैस-चेकडेम, स्टापडेम, कुंआ, फार्म पॉण्ड, अरदन डेम, सिंचाई तालाब, डबरी, वृक्षारोपण तथा मृदा एवं नमी संरक्षण संरचना के कार्यों से प्रदेश में अतिरिक्त सिंचाई रकबा की वृद्धि हुई है, इससे राज्य के किसानों को लाभ हुआ है। 

    बैठक में पीसीसीएफ  अरूण पाण्डेय, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव  सिद्धार्थ कोमल परदेशी, वित्त, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, वन विभाग, ग्रामीण आजीविका मिशन, नाबार्ड, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड सहित शासी परिषद के अन्य सदस्य शामिल हुए।

  • धमतरी के शशिकांत की जिंदगी बदलेगी, 10 साल पुराने हादसे के बाद CM साय AIIMS में कराएंगे इलाज

    धमतरी के शशिकांत की जिंदगी बदलेगी, 10 साल पुराने हादसे के बाद CM साय AIIMS में कराएंगे इलाज

     धमतरी

     करीब 10 साल पहले हुए सड़क हादसे ने धमतरी जिले के देवपुर निवासी शशिकांत भरत की जिंदगी बदल दी। 11 नवंबर 2016 को ग्राम दुगली के पास धमतरी से लौटते समय शाम करीब पांच से छह बजे के बीच हुए हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। हालत इतनी गंभीर थी कि वे करीब 50 दिनों तक कोमा में रहे।

    हादसे के बाद सर्वाइकल संबंधी समस्या के कारण उनके हाथ-पैरों की कार्यक्षमता प्रभावित हो गई। आज भी वे स्वयं चलने-फिरने, उठने-बैठने और दैनिक कार्य करने में सक्षम नहीं हैं। उनकी देखभाल मुख्य रूप से उनकी मां करती हैं।

    सोशल मीडिया वीडियो देख CM विष्णुदेव साय ने बढ़ाया मदद का हाथ

    शशिकांत की जिंदगी में अब उपचार की नई उम्मीद जगी है। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को उनकी परेशानी की जानकारी मिली। मुख्यमंत्री ने तत्काल शशिकांत से फोन पर बातचीत कर स्वास्थ्य की स्थिति जानी और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

     

  • सेवा सेतु शिविरों में योजनाओं का मिलेगा त्वरित लाभ, समस्याओं का होगा मौके पर निराकरण

    सेवा सेतु शिविरों में योजनाओं का मिलेगा त्वरित लाभ, समस्याओं का होगा मौके पर निराकरण

    रायपुर 

     मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ जनकल्याण और जनभागीदारी का व्यापक अभियान बने। अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से अधिक से अधिक नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री  साय ने आज सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों को लेकर आयोजित कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि अभियान के प्रत्येक कार्यक्रम के केंद्र में आम नागरिक और उसकी जरूरतें होनी चाहिए। पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ने, युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के करीब पहुंचाने और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए।

    मुख्यमंत्री  साय ने सभी जिला कलेक्टरों से अभियान की तैयारियों की नियमित समीक्षा करने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्यक्रमों को सुनियोजित ढंग से संपन्न कराने को कहा। उन्होंने कार्यक्रमों की पूर्व सूचना आम नागरिकों तक पहुंचाने और अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    सेवा सेतु शिविरों में पात्र हितग्राहियों को मौके पर मिलेगा योजनाओं का लाभ

    मुख्यमंत्री  साय ने ‘सेवा सेतु’ अभियान को जनकल्याण की दृष्टि से प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया। अभियान के अंतर्गत चयनित गांवों में स्वास्थ्य शिविर के साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को चिन्हित कर योजनाओं से जोड़ा जाएगा और उनकी समस्याओं का यथासंभव मौके पर निराकरण किया जाएगा।

    शिविर स्थलों पर आवेदन प्राप्त करने के लिए काउंटर स्थापित किए जाएंगे। प्राप्त आवेदनों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी। जिन समस्याओं का तत्काल निराकरण संभव नहीं होगा, उनकी साप्ताहिक समीक्षा कर समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिविर आयोजित होने से पहले ही संबंधित क्षेत्र के संभावित पात्र हितग्राहियों की पहचान की जाए, ताकि शिविर के दौरान उन्हें योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाया जा सके। उन्होंने कहा कि शिविरों की जानकारी पहले से गांवों और नागरिकों तक पहुंचाई जाए, जिससे अधिक से अधिक लोग इनमें शामिल हो सकें।

    रोजगार मेलों से युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर

    मुख्यमंत्री  साय ने कौशल विकास विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले रोजगार मेलों को भी सेवा संकल्प अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रोजगार मेलों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाए।

    उन्होंने अधिकारियों से कहा कि युवाओं से आवेदन प्राप्त कर रोजगार के अवसरों से जोड़ने की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी की जाए और चयनित युवाओं को शिविरों में नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएं।

    आंगनबाड़ियों में पोषण और सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर

    ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, ‘मेरी पौष्टिक थाली’, चित्रकला प्रतियोगिता, न्योता भोज तथा फल एवं मिठाई वितरण जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

    मुख्यमंत्री  साय ने पोषण चौपालों में अधिक से अधिक माता-पिता की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। महतारी वंदन योजना का लाभ लेकर अपने जीवन में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाली महिलाओं को भी सम्मानित किया जाएगा।

    आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए खिलौने उपलब्ध कराने में सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में भी नागरिकों को आंगनबाड़ियों में बच्चों के उपयोग के लिए खिलौने भेंट करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान के दौरान प्रदेश के शासकीय, निजी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों में चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों, शाला प्रबंधन समितियों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

    मुख्यमंत्री  साय ने शाला प्रबंधन समितियों को इन कार्यक्रमों से सक्रिय रूप से जोड़ने के निर्देश दिए। 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को नुक्कड़ नाटकों जैसी रचनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा। विशेष उपलब्धि प्राप्त दिव्यांग बच्चों को अपने हुनर और प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए मंच उपलब्ध कराया जाएगा।

    रक्तदान, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ेगी जनभागीदारी

    ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के अंतर्गत रक्तदान, वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त अभियान, स्वच्छता तथा जनसरोकार से जुड़ी 25 से अधिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। नदी घाटों की स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    कार्यक्रमों के बाद भी स्वच्छता व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए स्थानीय स्तर पर समितियां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। ‘स्वच्छता ही सेवा’ के अंतर्गत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाली स्वच्छता गतिविधियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।

    ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत होगा वृक्षारोपण

    मुख्यमंत्री  साय ने अभियान के दौरान किए जाने वाले वृक्षारोपण को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरचनाओं, सार्वजनिक स्थलों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर व्यापक वृक्षारोपण किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 अक्टूबर को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का समापन कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है। इस वर्ष प्रदेश में 2.5 करोड़ पौधे लगाने के निर्धारित लक्ष्य को भी पूरा किया जाएगा।

    विकास के प्रतीक स्थलों को भी जनभागीदारी से जोड़ें

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान की वास्तविक सार्थकता तभी होगी, जब इसकी गतिविधियों का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचे। स्वास्थ्य शिविर में जरूरतमंद को उपचार मिले, पात्र परिवार योजनाओं से जुड़े, युवाओं को रोजगार मिले, बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले और स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण में समाज की सक्रिय भागीदारी बढ़े।

    उन्होंने सभी जिलों के कलेक्टरों और संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान को पूरी संवेदनशीलता और सुनियोजित कार्ययोजना के साथ संचालित करें तथा यह सुनिश्चित करें कि जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियों का अधिकतम लाभ प्रदेशवासियों तक पहुंचे।

    इस अवसर पर मुख्य सचिव  विकास शील, अपर मुख्य सचिव  मनोज पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव मती ऋचा शर्मा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

  • केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले से की गोपाल ऋषिकर भारती ने मुलाकात

    केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले से की गोपाल ऋषिकर भारती ने मुलाकात

    बिलासपुर

     रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया आठवाले के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास अठावले एवं केंद्रीय मंत्री का आगमन बिलासपुर में हुआ! कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया था! इस आयोजन के दौरान मूलनिवासी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल ऋषिकार भारती की उपस्थित रहे ।और उन्होंने पार्टी गतिविधियों पर चर्चा की तथा संगठित होकर पार्टी का विस्तार करने की बात की तथा कार्यकर्ताओं को मजबूत करने की दिशा पर वार्तालाप कर कार्यकर्ताओं को मजबूत बनाने हेतु पहल करने की चर्चा की

  • मार्च 2028 तक सभी जल संरचनाओं को पूर्ण करने के निर्देश, गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर

    मार्च 2028 तक सभी जल संरचनाओं को पूर्ण करने के निर्देश, गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर

    रायपुर 

    जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है। प्रदेश में जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण हो और प्रत्येक परिवार को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिले, इस लक्ष्य के साथ राज्य सरकार जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।

    मुख्यमंत्री  साय ने जल संचय जन भागीदारी अभियान की जिलेवार प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग हो और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में काम किया जाए।

    जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण अभियान

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जल संरक्षण को केवल शासकीय कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया जाना चाहिए। वर्ष 2025-26 में प्रदेश के अनेक जिलों ने जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्य किए हैं। अब सभी जिलों को अपने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर बेहतर परिणाम के लिए प्रयास करना होगा।

    मुख्यमंत्री ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से अभियान की जिलेवार प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कोरिया, धमतरी राजनांदगांव सहित अन्य जिलों में जल संरक्षण की दिशा में किए गए कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों के अनुभव और कार्यप्रणाली का लाभ अन्य जिलों को भी मिलना चाहिए, ताकि पूरे प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों को समान गति मिल सके।

    जल संसाधन विभाग के सचिव  राजेश कुमार टोप्पो ने बैठक में बताया कि जल संचय जन भागीदारी अभियान में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों को इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के साथ उससे बेहतर प्रदर्शन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

    छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के प्रयास तभी दीर्घकालिक परिणाम देंगे, जब शासन के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। जनभागीदारी की इसी शक्ति के माध्यम से छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थायी रूप से स्थापित करना है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत सभी जिलों के नोटिफाइड नक्शे तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। अभियान की मुख्य सचिव स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की सतत मॉनिटरिंग की जाए तथा जहां भी कमियां सामने आएं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे हों।

    हर घर तक नल से स्वच्छ जल पहुंचाना हमारा लक्ष्य

    मुख्यमंत्री  साय ने बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। प्रदेश के प्रत्येक घर तक पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए। सभी कलेक्टर अपने-अपने जिलों में इसकी नियमित समीक्षा करें और जहां भी प्रशासनिक, तकनीकी अथवा क्रियान्वयन संबंधी बाधाएं आ रही हैं, उनका तत्काल समाधान करते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराएं।
    उन्होंने कहा कि केवल अधोसंरचना निर्माण ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ परिवारों तक पहुंचे और लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो। इसके लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया जाए।

    पूर्ण कार्यों के भुगतान में न हो अनावश्यक विलंब

    मुख्यमंत्री  साय ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत पूर्ण हो चुके कार्यों के भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन कार्यों को निर्धारित मापदंड और गुणवत्ता के अनुरूप पूर्ण किया जा चुका है, उनका भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।

    उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर मिशन की नियमित समीक्षा करते हुए प्रेजेंटेशन में सामने आई कमियों और समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए। योजना से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय से शेष कार्यों को गति दी जाए।

    हर जिले की प्राथमिकता बने जल सुरक्षा

    मुख्यमंत्री  साय ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे अपने जिलों में जल संरक्षण और हर घर तक नल से पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। स्थानीय परिस्थितियों और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए तथा जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संचय जन भागीदारी अभियान और जल जीवन मिशन सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े हैं। इन प्रयासों के प्रभावी क्रियान्वयन से जहां वर्तमान में लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा मिलेगी, वहीं भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव भी तैयार होगी।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करने का अवसर है। इसके लिए शासन-प्रशासन के साथ जनभागीदारी को और मजबूत करते हुए प्रत्येक जिले को अपनी पूरी क्षमता से कार्य करना होगा। हमारा लक्ष्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जहां जल का बेहतर संरक्षण हो, जल स्रोत सुरक्षित और समृद्ध हों तथा प्रत्येक परिवार को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल सहज रूप से उपलब्ध हो।

    बैठक में मुख्य सचिव  विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, जल संसाधन विभाग के सचिव  आर. एस. टोप्पो, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  अब्दुल कैसर हक, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  रजत बंसल, संयुक्त सचिव  प्रभात मलिक सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • Bastar में ‘हेलमेट बैंक’ की पहल, ₹10 में मिलेगा हेलमेट; हादसों में सिर की चोट से बचाव

    Bastar में ‘हेलमेट बैंक’ की पहल, ₹10 में मिलेगा हेलमेट; हादसों में सिर की चोट से बचाव

    बस्तर.

    लोहंडीगुड़ा में सड़क सुरक्षा को लेकर जनपद पंचायत ने एक नई पहल शुरू की है। अब हेलमेट नहीं होने की वजह से ग्रामीणों को बिना सुरक्षा दोपहिया चलाने की मजबूरी नहीं होगी। जनपद पंचायत ने हेलमेट बैंक की शुरुआत कर जरूरतमंदों को कम शुल्क में हेलमेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।

    अस्पताल चौक स्थित सुरेंद्र पान भंडार को हेलमेट बैंक का पहला केंद्र बनाया गया है। दोपहिया चालक महज 10 रुपये प्रतिदिन के टोकन शुल्क या वैध पहचान पत्र के आधार पर हेलमेट ले सकेंगे। यात्रा पूरी होने के बाद हेलमेट वापस जमा करना होगा, जिसे सैनिटाइज कर दोबारा उपयोग में लाया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में हेलमेट की अनुपलब्धता और आर्थिक परेशानी को देखते हुए यह व्यवस्था शुरू की गई है। जनपद पंचायत का कहना है कि इसका उद्देश्य चालान का डर पैदा करना नहीं, बल्कि स्वेच्छा से हेलमेट पहनने की आदत विकसित करना है। हेलमेट बैंक की शुरुआत के दौरान जनपद पंचायत उपाध्यक्ष डॉ. बसंत कश्यप और सरपंच भरत कश्यप मौजूद रहे। अब इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने ग्रामीण इसे अपनाकर सड़क सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी बनाते हैं।

    ग्रामीणों ने खुद उठाया सड़क बहाली का बीड़ा
    नारायणपुर। बारिश ने झारावाही, हतलानार और दुम्मा इलाके के ग्रामीणों के सामने सड़क संपर्क का संकट खड़ा कर दिया। मुख्य मार्ग की पुलिया बहने के बाद कई गांवों की आवाजाही प्रभावित हो गई। हालात बिगड़े तो ग्रामीण प्रशासन का इंतजार करने के बजाय खुद ही रास्ता बहाल करने मैदान में उतर गए। ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान कर क्षतिग्रस्त हिस्से में ह्यूम पाइप लगाने की कोशिश शुरू की। पानी और कीचड़ के बीच ग्रामीण भारी पाइप को कंधों पर उठाकर मौके तक ले जाते दिखाई दिए। यह तस्वीर ग्रामीणों की एकजुटता के साथ सरकारी व्यवस्था की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मार्ग की खराब स्थिति की जानकारी पहले भी संबंधित स्तर पर दी गई थी। इसके बावजूद समय रहते स्थायी व्यवस्था नहीं होने से उन्हें खुद समस्या से निपटना पड़ा। सड़क संपर्क टूटने का असर स्कूल, स्वास्थ्य सेवाओं, राशन और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ता है। ग्रामीणों ने तत्काल रास्ता बनाने की पहल कर दी है, अब प्रशासन के सामने सुरक्षित और स्थायी बनाने की चुनौती है।

  • नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने संविदा नियुक्तियों के खिलाफ खोला मोर्चा, CG में बढ़ा विरोध

    नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने संविदा नियुक्तियों के खिलाफ खोला मोर्चा, CG में बढ़ा विरोध

    रायपुर.

    पदोन्नति के पदों पर की गई संविदा नियुक्तियों को निरस्त करने और नर्सिंग संवर्ग की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ ने तीन दिवसीय सांकेतिक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

    प्रदर्शन के पहले दिन गुरुवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर परिसर में संघ के पदाधिकारियों और नर्सिंग कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। संघ का कहना है कि लंबे समय से नर्सिंग संवर्ग की कई मांगें लंबित हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से इनके निराकरण की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। इन्हीं मांगों को लेकर तीन दिवसीय सांकेतिक प्रदर्शन के जरिए शासन का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है।

    पदोन्नति के पदों पर संविदा नियुक्ति का विरोध
    एसोसिएशन की प्रमुख मांग नर्सिंग डेमोंस्ट्रेटर और सहायक प्राध्यापक के पदों पर की संविदा नियुक्तियों को निरस्त करना है। संघ ने मांग की है कि पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग, बीएससी नर्सिंग और एमएससी नर्सिंग की योग्यता रखने वाले नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों को वरिष्ठता सूची के आधार पर पदोन्नति दी जाए। संघ ने बताया कि नर्सिंग डेमोंस्ट्रेटर के 22 और सहायक प्राध्यापक के 18 पदों पर सीधी भर्ती के आदेश स्वीकृत होने के बावजूद अब तक विज्ञापन जारी नहीं किया गया है। एसोसिएशन ने इन पदों पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के पात्र नर्सिंग कर्मचारियों को पदोन्नति का अवसर देने की मांग की है।

    अलाउंस और वेतन बढ़ाने की मांग
    नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के नर्सिंग संवर्ग के ग्रेड-पे और वेतनमान में वृद्धि से संबंधित प्रस्ताव को शासन स्तर पर भेजकर जल्द स्वीकृति देने की मांग की है। इसके अलावा नर्सिंग ऑफिसर और सीनियर नर्सिंग ऑफिसर पदनाम से संबंधित घोषणा के अनुरूप आदेश जारी करने की मांग भी रखी गई है। संघ ने नर्सिंग अलाउंस 7,200 रुपये और वॉशिंग अलाउंस 1,800 रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग की है। वहीं संविदा और कलेक्टर दर पर कार्यरत स्टाफ नर्सों के लिए न्यूनतम 40 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन निर्धारित करने की मांग भी शामिल है।

    लंबित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने की मांग
    एसोसिएशन ने नर्सिंग सिस्टर, सहायक नर्सिंग अधीक्षक, उप नर्सिंग अधीक्षक, डेमोंस्ट्रेटर और सहायक प्राध्यापक के पदों पर लंबित पदोन्नति प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की है। साथ ही स्टाफ नर्सों के रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करने और पहले से कार्यरत संविदा एवं कलेक्टर दर के स्टाफ नर्सों को नियमित पदों पर प्राथमिकता देने की मांग की गई है। इसके अलावा समयमान वेतनमान से संबंधित आदेश जारी करने की मांग भी संघ ने रखी है।

    1500 से बढ़ाकर 15 हजार रुपये दें स्टाइपेंड
    नर्सिंग छात्र-छात्राओं के स्टाइपेंड को लेकर भी एसोसिएशन ने सरकार से बड़ा बदलाव करने की मांग की है। संघ के मुताबिक वर्ष 1998-99 से नर्सिंग विद्यार्थियों को 1,500 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जिसमें पिछले 27 वर्षों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। एसोसिएशन ने इसे बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है। प्रदर्शन के पहले दिन चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियमित नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों के साथ संविदा और डेली वेजेस पर कार्यरत स्टाफ नर्सों ने भी हिस्सा लिया। संघ ने कहा कि तीन दिवसीय सांकेतिक प्रदर्शन के माध्यम से शासन तक अपनी मांगें पहुंचाई जा रही हैं और लंबित मुद्दों के शीघ्र निराकरण की उम्मीद है।

  • नुआखाई, महाअष्टमी और गोवर्धन पूजा पर छुट्टी, रायपुर में 3 स्थानीय अवकाश घोषित

    नुआखाई, महाअष्टमी और गोवर्धन पूजा पर छुट्टी, रायपुर में 3 स्थानीय अवकाश घोषित

    रायपुर.

    रायपुर जिले में वर्ष 2026 के लिए तीन स्थानीय अवकाश घोषित किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, नवा रायपुर अटल नगर की ओर से जारी आदेश के तहत इन अवकाशों की घोषणा की गई है।

    आदेश के अनुसार नुआखाई पर्व, महाअष्टमी और गोवर्धन पूजा के अवसर पर रायपुर जिले के संबंधित शासकीय कार्यालयों एवं संस्थाओं में स्थानीय अवकाश रहेगा। जारी आदेश के मुताबिक 15 सितंबर 2026, मंगलवार को नुआखाई पर्व के अवसर पर स्थानीय अवकाश रहेगा। इसके बाद 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को महाअष्टमी के लिए छुट्टी घोषित की गई है। वहीं, 9 नवंबर 2026, सोमवार को गोवर्धन पूजा के अवसर पर भी स्थानीय अवकाश रहेगा। आदेश में गोवर्धन पूजा को दीपावली के दूसरे दिन होने वाले पर्व के रूप में उल्लेखित किया गया है।

    इन कार्यालयों में लागू होंगे अवकाश
    सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार ये तीनों स्थानीय अवकाश रायपुर जिले के अंतर्गत आने वाले संबंधित शासकीय कार्यालयों एवं संस्थाओं में लागू होंगे। इसके साथ ही रायपुर शहर (राजधानी) स्थित शासकीय कार्यालय एवं संस्थाएं भी इन स्थानीय अवकाशों के दायरे में रहेंगी। इस तरह सितंबर से नवंबर के बीच रायपुर जिले में नुआखाई, महाअष्टमी और गोवर्धन पूजा के अवसर पर शासकीय कार्यालयों एवं संबंधित संस्थाओं में तीन स्थानीय अवकाश रहेंगे।

  • CM विष्णुदेव साय का सख्त निर्देश, जर्जर और जोखिमपूर्ण भवनों की जांच में लापरवाही पर होगी कार्रवाई

    CM विष्णुदेव साय का सख्त निर्देश, जर्जर और जोखिमपूर्ण भवनों की जांच में लापरवाही पर होगी कार्रवाई

    जोखिमपूर्ण भवनो की जांच में होगी लापरवाही, तो तय होगी जवाबदेही – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, संभावित खतरों की पहले पहचान कर करें प्रभावी कार्रवाई : मुख्यमंत्री साय

    मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टर-एसपी को दिए स्पष्ट निर्देश: घटना होने का इंतजार नहीं, संभावित जोखिमों की पहचान कर समय रहते करें कार्रवाई

    सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण एवं सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश

    जर्जर और जोखिमपूर्ण भवनों की वास्तविक स्थिति का करें आकलन, विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े मानकों के पालन में नहीं हो कोई शिथिलता

    अवैध और मिलावटी शराब के खिलाफ पुलिस, आबकारी और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से चलाएं अभियान

    दूसरे राज्यों से अवैध शराब की आवक रोकने सीमावर्ती क्षेत्रों और परिवहन मार्गों पर बढ़ाएं निगरानी

    रायपुर 
     विद्यार्थियों और नागरिकों के जीवन की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन की जिम्मेदारी केवल किसी घटना के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संभावित खतरों की पहले से पहचान कर उन्हें दूर करना भी हमारी जिम्मेदारी है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल तथा बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण एवं सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश देते हुए कहा कि जहां भी सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आएं, वहां समय-सीमा निर्धारित कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित कराया जाए।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से कहा कि वे अपने-अपने जिलों में स्वयं इसकी नियमित निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि शासन के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर दिखाई दे।

    मुख्यमंत्री साय ने स्कूलों, पुस्तकालयों, छात्रावासों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर स्थित पुराने एवं जर्जर भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे भवन, जिनकी स्थिति जोखिमपूर्ण है अथवा जिनसे किसी प्रकार की जनहानि की आशंका हो सकती है, उनकी पहचान कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान हो और दुर्घटना की आशंका को पहले ही समाप्त कर दिया जाए। विशेष रूप से बच्चों और विद्यार्थियों से जुड़े संस्थानों में सुरक्षा मानकों के पालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

    उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिलों में सुरक्षा से संबंधित निरीक्षण की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए। केवल शिकायत अथवा दुर्घटना सामने आने के बाद कार्रवाई करने की प्रवृत्ति के स्थान पर सतत निगरानी और समय रहते सुधार की कार्यसंस्कृति विकसित करनी होगी।

    अवैध और मिलावटी शराब के विरुद्ध प्रदेशभर में सख्त अभियान चलाने के निर्देश

    मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को अवैध एवं मिलावटी शराब के निर्माण, बिक्री, भंडारण और परिवहन के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आबकारी विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। जिन क्षेत्रों अथवा स्थानों पर अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, बिक्री या मिलावट की आशंका हो, वहां संयुक्त टीमों के माध्यम से छापेमारी की जाए।

    सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ाएं निगरानी, दूसरे राज्यों से अवैध शराब की आवक पर लगे प्रभावी रोक

    उन्होंने पुलिस और आबकारी विभाग को सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान करते हुए संयुक्त रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध शराब के निर्माण अथवा मिलावट में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

    लापरवाही पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा उदासीनता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि बैठक में दिए गए निर्देशों पर तत्काल अमल शुरू किया जाए तथा जिलों में की गई कार्रवाई की नियमित समीक्षा भी सुनिश्चित की जाए।

    इस अवसर पर मुख्य सचिव विकास शील, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।