Category: छत्तीसगढ़

  • मुख्यमंत्री महादेव घाट में आयोजित विराट दीपोत्सव एवं महाआरती ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में हुए शामिल

    मुख्यमंत्री महादेव घाट में आयोजित विराट दीपोत्सव एवं महाआरती ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में हुए शामिल

    रायपुर 

     प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस पर आज राजधानी रायपुर का महादेव घाट सवा लाख दीपों की ज्योति से जगमगा उठा। खारुन नदी के पावन तट पर आयोजित विराट दीपोत्सव एवं महाआरती ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय शामिल हुए और प्रदेशवासियों के साथ प्रधानमंत्री  मोदी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की। सवा लाख दीपों की एक साथ प्रज्वलित ज्योति से महादेव घाट का पूरा परिसर आलोकित हो उठा। श्रद्धा, आस्था और जनभागीदारी के इस अनुपम संगम के बीच खारुन मैया की भव्य महाआरती की गई।

    मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने अपना जीवन राष्ट्र और जनसेवा को समर्पित किया है। उनके नेतृत्व में भारत ने विकास, जनकल्याण और राष्ट्रीय स्वाभिमान के क्षेत्र में अनेक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री  मोदी दिन-रात 140 करोड़ देशवासियों की सेवा में जुटे हैं और उनके नेतृत्व में आज भारत विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज खारुन मैया के पावन तट पर प्रज्वलित सवा लाख दीप प्रधानमंत्री  मोदी के प्रति छत्तीसगढ़वासियों के स्नेह, आत्मीयता और शुभकामनाओं की अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री  मोदी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुदीर्घ और यशस्वी जीवन की मंगलकामना की।

    विराट दीपोत्सव के दौरान साध्वी प्रज्ञा भारती एवं आचार्यों द्वारा विधि-विधान के साथ खारुन मैया की महाआरती की गई। मुख्यमंत्री  साय ने भी महाआरती में सहभागिता की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को समर्पित साध्वी प्रज्ञा भारती द्वारा रचित एवं स्वरबद्ध गीत का मुख्यमंत्री ने विमोचन किया।

    प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश ने देखे ऐतिहासिक परिवर्तन

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने ऐसे अनेक ऐतिहासिक निर्णय और परिवर्तन देखे हैं, जिनकी लंबे समय से प्रतीक्षा थी। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने से लेकर अयोध्या में भगवान  रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने तक देश ने नए आत्मविश्वास और सामर्थ्य का अनुभव किया है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रहित में बड़े और दूरगामी निर्णय लिए गए हैं। उनके दृढ़ संकल्प, स्पष्ट दृष्टि और राष्ट्रसेवा की भावना ने देश में विकास और जनकल्याण की गति को तेज किया है। आज भारत विश्व मंच पर अधिक आत्मविश्वास और सामर्थ्य के साथ अपनी भूमिका निभा रहा है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के लिए शासन का केंद्र हमेशा गरीब और समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति रहा है। इसी भावना के अनुरूप गरीब परिवारों को पक्का आवास, घर-घर शौचालय, जन-धन खाते, रसोई गैस कनेक्शन, खाद्यान्न सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया गया है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी प्रत्येक देशवासी को अपने परिवार का सदस्य मानकर ‘सबका साथ, सबका विकास’ के ध्येय के साथ निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनकी सरकार ने गरीब की छोटी से छोटी आवश्यकता और उसके जीवन को बेहतर बनाने वाली सुविधाओं को शासन की प्राथमिकता बनाया है।

    प्रधानमंत्री के साथ काम करने का अवसर मेरे सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव : मुख्यमंत्री  साय

    मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री  मोदी के साथ अपने कार्य अनुभव को स्मरण करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में जब  नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने, तब मुझे भी उनकी सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। उस दौरान मुझे उनकी कार्यशैली, अनुशासन, परिश्रम और जनसेवा के प्रति समर्पण को निकट से देखने और समझने का अवसर मिला।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी का पूरा जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण और जनसेवा की प्रेरक यात्रा है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व करने तक उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष सेवा और सुशासन को समर्पित रहे हैं। यह देश का सौभाग्य है कि हमें ऐसा नेतृत्व मिला है, जिसने विश्व पटल पर भारत का मान और सम्मान बढ़ाया है।

    प्रधानमंत्री  मोदी का छत्तीसगढ़ से रहा है गहरा आत्मीय जुड़ाव

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ गहरा आत्मीय जुड़ाव रहा है। प्रदेश के विकास को केंद्र सरकार से निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन मिला है। प्रधानमंत्री  मोदी की विकास दृष्टि में छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से यहां के जनजातीय तथा दूरस्थ अंचलों के विकास को महत्वपूर्ण स्थान मिला है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से छत्तीसगढ़ ने माओवादी हिंसा के विरुद्ध निर्णायक सफलता हासिल की है। वर्षों तक हिंसा और पिछड़ेपन का दंश झेलने वाले बस्तर में आज शांति और विकास के नए द्वार खुले हैं। सड़क, बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाएं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं तथा विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के लोगों के जीवन में आ रहा यह परिवर्तन विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई शक्ति दे रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि शांति के वातावरण में बस्तर की प्राकृतिक संपदा, पर्यटन, संस्कृति और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को स्थानीय लोगों की समृद्धि और रोजगार से जोड़ा जाए।

    जनसेवा के 25 वर्षों पर एक महीने तक ‘सेवा संकल्प अभियान’

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ प्रारंभ हुआ है। यह अभियान प्रधानमंत्री  मोदी के सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने का अवसर है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से स्वच्छता, स्वास्थ्य, पोषण, पर्यावरण संरक्षण, जरूरतमंदों की सहायता और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यों को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता करते हुए सेवा के संकल्प को अपने गांव, शहर, मोहल्ले और समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।

    सवा लाख दीपों ने दिया सामूहिक शुभकामनाओं का संदेश

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज महादेव घाट पर सवा लाख दीप प्रज्वलित कर प्रदेशवासियों ने प्रधानमंत्री  मोदी के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन के लिए अपनी मंगलकामनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि राजधानी रायपुर में विभिन्न स्थानों पर लगभग 32 लाख दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री  मोदी के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि दीप भारतीय संस्कृति में आशा, विश्वास, सकारात्मकता और प्रकाश का प्रतीक है। आज जलाया गया प्रत्येक ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रधानमंत्री  मोदी के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना के साथ ही सेवा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का भी प्रतीक है।

    उन्होंने विराट दीपोत्सव एवं महाआरती के भव्य आयोजन के लिए आयोजकों, सनातन ध्वज वाहिनी के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि इतनी विशाल जनभागीदारी ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया है।

    इस अवसर पर विराट दीपोत्सव एवं महाआरती ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम की संयोजक एवं राज्यसभा सांसद  लक्ष्मी वर्मा,  विधायक  राजेश मूणत एवं  मोतीलाल साहू, रायपुर नगर निगम की महापौर  मीनल चौबे,  कौशल्या साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष  रामप्रताप सिंह, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष  राजीव अग्रवाल, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष  राजीव लोचन महाराज, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष  वर्णिका शर्मा, राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष  मोना सेन सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, सनातन ध्वज वाहिनी के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

  • बीरगांव में भगवान विश्वकर्मा पूजा एवं किसान-मजदूर सम्मान समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

    बीरगांव में भगवान विश्वकर्मा पूजा एवं किसान-मजदूर सम्मान समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

    रायपुर

     मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर प्रदेशवासियों से आज शाम अपने-अपने घरों में प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना के साथ ‘आशीर्वाद का दीप’ जलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपना जीवन जनसेवा, राष्ट्र निर्माण और गरीब कल्याण के लिए समर्पित किया है। उनके जन्मदिन से प्रारंभ हुआ ‘सेवा संकल्प अभियान’ हम सभी को सेवा के इसी भाव को जन-जन तक पहुंचाने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी निभाने की प्रेरणा देता है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बीरगांव के बुधवारी बाजार मैदान में आयोजित भगवान विश्वकर्मा पूजा एवं किसान-मजदूर सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। 

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का दिन अनेक दृष्टियों से विशेष है। एक ओर सृजन, निर्माण और शिल्प के आराध्य भगवान विश्वकर्मा की जयंती है, वहीं दूसरी ओर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भी है। भगवान विश्वकर्मा हमें अपने कौशल, श्रम और सृजन से समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं और प्रधानमंत्री मोदी का जीवन सेवा, समर्पण तथा राष्ट्र निर्माण के संकल्प का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान के परिश्रम से हमारे अन्न के भंडार भरते हैं और श्रमिक के श्रम से विकास की आधारभूत संरचनाएं आकार लेती हैं। खेत से लेकर कारखाने तक, निर्माण स्थल से लेकर उद्योगों तक हमारे किसान, श्रमिक, कारीगर और शिल्पकार छत्तीसगढ़ की प्रगति के वास्तविक भागीदार हैं। विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प इन्हीं श्रमवीरों के सामर्थ्य, कौशल और परिश्रम से साकार होगा। राज्य सरकार उनके श्रम के सम्मान के साथ उनके परिवारों के जीवन में समृद्धि, सुरक्षा और खुशहाली लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कार्यक्रम से पहले उन्होंने माता परमेश्वरी, भगवान विश्वकर्मा और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना की। उन्होंने विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजन, कौशल और निर्माण के प्रतीक हैं। उनका संदेश हमें श्रम को सम्मान देने और अपने कौशल के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देता है।

    सेवा और जनकल्याण को प्रधानमंत्री मोदी ने बनाया शासन का आधार

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में गरीब, किसान, मजदूर, युवा और महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले अनेक महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। गरीब परिवारों के लिए पक्का आवास, घर-घर शौचालय, बिजली, नल से जल और जन-धन खातों के माध्यम से बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने जैसी पहलों ने करोड़ों लोगों के जीवन को आसान बनाने का काम किया है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। विकसित भारत का यह संकल्प केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य विकास और अवसरों का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तथा देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार ने भी वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का विजन तैयार किया है। हमारा लक्ष्य ऐसा समृद्ध, आत्मनिर्भर और आधुनिक छत्तीसगढ़ बनाना है, जिसमें गांव हो या शहर, किसान हो या श्रमिक, युवा हो या महिला – हर किसी को आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से देशभर में सेवा संकल्प अभियान प्रारंभ हुआ है। यह अभियान सेवा को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी का व्यापक संकल्प बनाने का अवसर है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि आज शाम हर परिवार अपने घर में ‘आशीर्वाद का दीप’ जलाकर प्रधानमंत्री मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करे।

    श्रमिक के जीवन में सुरक्षा और परिवार में खुशहाली हमारा लक्ष्य

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिक केवल निर्माण कार्यों के सहभागी नहीं, बल्कि प्रदेश की प्रगति के महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए राज्य सरकार श्रमिक कल्याण को प्राथमिकता देते हुए ऐसी योजनाएं संचालित कर रही है, जो श्रमिक और उसके परिवार को जीवन के अलग-अलग चरणों में सहारा प्रदान करें।

    उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों के लिए जन्म से लेकर बच्चों की शिक्षा, आजीविका और अन्य आवश्यकताओं तक विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को संसाधनों के अभाव में अपनी प्रतिभा और सपनों से समझौता न करना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रमिक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत 200 बच्चों को निजी आवासीय विद्यालयों में पढ़ने का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने श्रमिकों से शासन की योजनाओं का पूरा लाभ लेने के लिए अपना पंजीयन अनिवार्य रूप से कराने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी सरकार लगातार कदम उठा रही है। महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान कर उनके लिए स्वरोजगार और नियमित आय का साधन तैयार किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि श्रमिक परिवार केवल सहायता प्राप्त करने वाले परिवार न रहें, बल्कि अवसरों और संसाधनों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनें।

    किसानों की समृद्धि से समृद्ध होगा छत्तीसगढ़

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन में किसानों का महत्वपूर्ण स्थान है। किसान की समृद्धि से गांव समृद्ध होता है और गांव की समृद्धि से पूरा प्रदेश मजबूत होता है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। किसानों को दो वर्षों का बकाया धान बोनस भी प्रदान किया गया है। खेती के लिए सिंचाई सुविधा का विस्तार करने के उद्देश्य से प्रदेश में बड़े पैमाने पर सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। सरकार का प्रयास है कि खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचे, खेती की उत्पादकता बढ़े और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हो।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों और श्रमिकों की मेहनत को सम्मान देना ही भगवान विश्वकर्मा के प्रति सच्ची श्रद्धा है। विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण तभी संभव है, जब प्रदेश का अन्नदाता खुशहाल हो और श्रमवीर का परिवार सुरक्षित तथा समृद्ध हो।

    माताओं-बहनों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मिल रही नई शक्ति

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की माताओं और बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जा रही है। इससे महिलाओं को अपनी छोटी-बड़ी आवश्यकताओं के लिए आर्थिक संबल मिला है और परिवार के निर्णयों में उनकी भागीदारी भी मजबूत हुई है।

    उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, कौशल, स्वरोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़कर दीर्घकालीन रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। स्व-सहायता समूहों सहित विभिन्न माध्यमों से महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

    बीरगांव में ढाई वर्षों में लगभग 175 करोड़ रुपए के विकास कार्य

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गांवों के साथ शहरों में भी आधुनिक और बेहतर नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए तेजी से कार्य कर रही है। नगरीय क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अन्य अधोसंरचना के विकास के लिए नगरोत्थान सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि बीरगांव नगर निगम क्षेत्र में पिछले ढाई वर्षों में लगभग 175 करोड़ रुपए के विकास कार्य किए गए हैं। इन कार्यों के माध्यम से क्षेत्र की अधोसंरचना मजबूत हो रही है और नागरिक सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी बीरगांव की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को लगातार आगे बढ़ाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की विकास दृष्टि केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। गांव, कस्बे, छोटे शहर और दूरस्थ जनजातीय अंचल समान रूप से हमारी प्राथमिकता में हैं। प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक अच्छी सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की बुनियादी आवश्यकता है।

    बस्तर में शांति के साथ खुल रहे विकास और रोजगार के नए द्वार

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। नियद नेल्ला नार जैसी पहल के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक शासन की योजनाएं और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।

    उन्होंने कहा कि बस्तर प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और वनोपज की दृष्टि से अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र है। पर्यटन और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर इन संभावनाओं को स्थानीय युवाओं के रोजगार और जनजातीय परिवारों की आय वृद्धि से जोड़ने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है। दूरस्थ क्षेत्रों में अधोसंरचना के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार के नए अवसर भी विकसित किए जा रहे हैं।

    उत्कृष्ट कार्य करने वाली 76 प्रतिभाओं का सम्मान

    समारोह में मुख्यमंत्री साय ने सामाजिक, सांस्कृतिक, कला, साहित्य, समाजसेवा, खेल और विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 76 प्रतिभाओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने सभी सम्मानित प्रतिभाओं को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोग पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी प्रतिभा और उसके योगदान का सम्मान केवल उस व्यक्ति का सम्मान नहीं होता, बल्कि समाज में सकारात्मक कार्य, सृजनशीलता और उत्कृष्टता की संस्कृति को प्रोत्साहित करने का माध्यम भी बनता है। उन्होंने सम्मानित प्रतिभाओं से इसी ऊर्जा के साथ समाज और प्रदेश की प्रगति में अपना योगदान जारी रखने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा तथा रोजगार एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने भी संबोधित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर प्रदेशवासियों से अपने घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाकर उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना करने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम से पूर्व माता परमेश्वरी मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना कर प्रदेश के सभी श्रमिकों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों और निर्माण से जुड़े कर्मयोगियों को विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं।

    इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू, धरसींवा विधायक अनुज शर्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, किसान, श्रमिक, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित थे।

  • सेवा संकल्प अभियान: ‘हर घर जल’ ने आसान किया ग्रामीण जीवन, पानी के लिए दूर जाना हुआ बंद

    सेवा संकल्प अभियान: ‘हर घर जल’ ने आसान किया ग्रामीण जीवन, पानी के लिए दूर जाना हुआ बंद

    सेवा संकल्प अभियान: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ संकल्प से भुलिया बाई के घर पहुंचा स्वच्छ पेयजल

    दूर बिल्लमगढ़ तक पानी लाने की मजबूरी हुई खत्म, जल जीवन मिशन ने आसान किया ग्रामीण परिवार का जीवन

    रायपुर
     गौरेला विकासखंड के वनांचल ग्राम करंगरा की रहने वाली भुलिया बाई के जीवन में जल जीवन मिशन के माध्यम से आया बदलाव ग्रामीण क्षेत्रों में ‘हर घर जल’ के संकल्प की सार्थकता को सामने लाता है।

    कुछ समय पहले तक भुलिया बाई के परिवार के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करना रोजमर्रा की बड़ी चुनौती थी। पानी लेने के लिए उन्हें गांव से दूर बिल्लमगढ़ तक उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर जाना पड़ता था। पानी लाने में समय और मेहनत दोनों लगते थे। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ दूर से पानी लाने की जिम्मेदारी विशेष रूप से उनके लिए परेशानी और शारीरिक थकान का कारण बनती थी।

    जल जीवन मिशन के तहत घर में नल कनेक्शन स्थापित होने के बाद भुलिया बाई के परिवार की दिनचर्या में बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें पानी के लिए दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। घर की देहरी पर नल खुलते ही पेयजल उपलब्ध हो जाता है। इससे परिवार के समय और श्रम की बचत हो रही है तथा दैनिक जीवन पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हुआ है।

    भुलिया बाई कहती हैं कि पहले पानी के लिए दूर जाना पड़ता था, लेकिन अब घर में ही नल से पानी मिल जाता है। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ के संकल्प से जुड़ी पहल है जल जीवन मिशन

    जल जीवन मिशन की शुरुआत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को की थी। मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को नियमित और दीर्घकालिक आधार पर पर्याप्त मात्रा में निर्धारित गुणवत्ता का पेयजल घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से उपलब्ध कराना है। यह योजना केन्द्र और राज्य सरकारों की साझेदारी में संचालित होती है, जिसमें केन्द्र सरकार राज्यों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जल जीवन मिशन को ग्रामीण परिवारों के जीवन को आसान बनाने और विशेष रूप से महिलाओं को दूर से पानी लाने की मेहनत से राहत दिलाने से जोड़ा है। केन्द्र सरकार के अनुसार मिशन के आरंभ के समय अगस्त 2019 में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 3.23 करोड़ परिवारों के पास नल कनेक्शन था। 28 जनवरी 2026 तक यह संख्या बढ़कर 15.79 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंच गई थी।

    महिलाओं के समय और श्रम की बचत से बढ़ी जीवन की सुविधा

    भुलिया बाई की कहानी बताती है कि घर तक नल से पानी पहुंचने का असर केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं है। दूर से पानी लाने में लगने वाला समय और श्रम बचने से परिवार के दैनिक कार्यों के लिए अधिक समय उपलब्ध हो रहा है। स्वच्छ पेयजल की सहज उपलब्धता से परिवार के जीवन में सुविधा और सम्मान की भावना भी बढ़ी है।

    जल जीवन मिशन के तहत देशभर में ग्रामीण परिवारों तक नल से पेयजल पहुंचाने का प्रयास ग्रामीण जीवन में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जल जीवन मिशन के तहत देश में   15.91 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से जल की आपूर्ति पहुंच चुकी है।

    सेवा संकल्प अभियान में सामने आई बदलाव की कहानी

    सेवा संकल्प अभियान के दौरान सामने आई भुलिया बाई की कहानी इस बात का उदाहरण है कि जब जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीण परिवारों तक पहुंचता है, तो उसका सीधा असर उनके दैनिक जीवन पर दिखाई देता है। कभी पानी के लिए दूर तक जाना पड़ता था, वहीं अब घर की देहरी पर नल से पानी उपलब्ध हो रहा है।

    भुलिया बाई के लिए घर में नल से पानी पहुंचना केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की कठिनाई से मिली राहत और जीवन को अधिक सहज बनाने वाला बदलाव है। ‘हर घर जल’ के संकल्प के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंच रही इस सुविधा से ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं के समय और श्रम की बचत हो रही है।

  • वसुंधरा परियोजना-राजस्व अभिलेखों का होगा डिजिटलीकरण

    वसुंधरा परियोजना-राजस्व अभिलेखों का होगा डिजिटलीकरण

    वसुंधरा परियोजना-राजस्व अभिलेखों का होगा डिजिटलीकरण

    नागरिक सेवाएं मिलेंगी और अधिक सरल और पारदर्शी रूप में

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ में नागरिक सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए वसुंधरा परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर कार्य शुरू हो गया है। इसके अंतर्गत जिला एवं तहसील स्तर के राजस्व रिकॉर्ड रूम का आधुनिकीकरण और राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। इस संबंध में आज मंत्रालय महानदी भवन में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

           मुख्य सचिव श्री विकासशील ने बैठक के दौरान नामांतरण और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में स्पष्टता व एकरूपता लाने तथा अभिलेखों के व्यवस्थित संधारण पर विशेष जोर दिया। इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में कुछ चयनित जिलों के राजस्व अभिलेखों का पूर्ण डिजिटलीकरण होगा, जिसके बाद इसे प्रदेश के सभी 33 जिलों में विस्तारित किया जाएगा।

    सुरक्षित किए जाने वाले प्रमुख दस्तावेज

            राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने बताया कि डिजिटलीकरण के तहत अधिकार अभिलेख पंजी, बंदोबस्त एवं चकबंदी मिसल, निस्तार पत्रक, खसरा, राजस्व न्यायालय के आदेश, मूल ग्राम नक्शे, संशोधन पंजी, वर्ष 2020 से पूर्व के खसरा पंचशाला अभिलेख और किश्तबंदी खतौनी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की स्कैनिंग व डाटा एंट्री कर उन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा।

    सेवा सेतु पोर्टल से एकीकरण

           परियोजना के तहत तैयार किए जाने वाले डिजिटल रिकॉर्ड भंडार को सेवा सेतु से जोड़ा जाएगा। इससे नागरिकों को ऑनलाइन आवेदन करने, शुल्क भुगतान करने, प्रमाणित डिजिटल प्रतियां प्राप्त करने और आवेदन की स्थिति ट्रैक करने जैसी सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।

    आधुनिक तकनीक (AI और OCR) का उपयोग

          रिकॉर्ड रूम के भौतिक अभिलेखों को बारकोड आधारित वर्गीकरण और डिजिटल लोकेशन के जरिए व्यवस्थित किया जाएगा। इसके अलावा, पुरानी और हस्तलिखित दस्तावेजों को आसानी से खोजने के लिए ओसीआर (OCR) तकनीक और एआई (AI) आधारित खोज सुविधा विकसित करने की योजना है, जिससे दस्तावेजों के संरक्षण के साथ-साथ नागरिकों का काम बेहद आसान हो जाएगा।

  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश

    ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश

    ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश

    रायपुर,
     मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के क्रियान्वयन के संबंध में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गहन चर्चा की गई।

            बैठक में जानकारी दी गई कि इस एक्ट के शेड्यूल-1 के अंतर्गत 43 सेवाएं, 9 शासकीय अधिनियम और 8 प्रशासनिक विभाग शामिल किए गए हैं। इसके क्रियान्वयन के लिए 27 अगस्त 2026 से 90 दिनों की विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। एक्ट के तहत तीन-स्तरीय निगरानी और समीक्षा प्रणाली निर्धारित की गई है। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एपेक्स काउंसिल, कार्यकारी स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति, जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला सशक्त समिति बनाई गई है।

         मुख्य सचिव ने एक्ट का प्रथम प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार कर संबंधित विभागों से जल्द सुझाव प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आवश्यक संशोधन प्रस्ताव तैयार रखकर प्राप्त सुझावों के आधार पर इसे अंतिम रूप देने को कहा गया है।

    डीम्ड अप्रूवल और पेनाल्टी

           बैठक में डीम्ड अप्रूवल प्रमाण-पत्र के प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रमाण-पत्र जारी न होने के मामलों की समीक्षा करने, आवश्यक कार्रवाई करने और विलंब की स्थिति में नियमानुसार पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने एक्ट का चरणबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने, नोडल विभागों का निर्धारण करने और आवश्यक मानक कार्यप्रणाली (SOP) अधिसूचित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा विभागवार सेवाओं की नियमित समीक्षा और त्रैमासिक (क्वार्टरली) मॉनिटरिंग पर भी जोर दिया गया है।

          बैठक में विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव मनीष कुमार ठाकुर, माननीय मुख्यमंत्री के सचिव एवं वाणिज्यिक कर तथा लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • विश्वकर्मा जयंती पर राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने श्रमिक हित में की तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं

    विश्वकर्मा जयंती पर राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने श्रमिक हित में की तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के श्रमवीर अपने परिश्रम, पुरुषार्थ और पसीने से समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की नई इबारत लिख रहे हैं। गांवों के खेत-खलिहानों से लेकर शहरों की ऊंची इमारतों तक, सड़कों और पुलों से लेकर सिंचाई परियोजनाओं, उद्योगों और अधोसंरचना के निर्माण तक प्रदेश की प्रगति की हर तस्वीर में हमारे श्रमिक भाई-बहनों की मेहनत समाहित है। छत्तीसगढ़ ने अपने गठन के 25 वर्षों में विकास के जो नए प्रतिमान स्थापित किए हैं, उनके पीछे हमारे मेहनतकश हाथों का बड़ा योगदान है। यही हाथ आने वाले वर्षों में विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी साकार करेंगे।

    मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेशभर से आए हजारों श्रमिक भाई-बहनों को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और भगवान विश्वकर्मा से छत्तीसगढ़ की सुख, शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा निर्माण और सृजन के आराध्य हैं। वे हमें श्रम के सम्मान और अपने हुनर पर गर्व करने की प्रेरणा देते हैं। सही मायनों में हमारे श्रमिक भाई-बहन ही विकसित छत्तीसगढ़ के विश्वकर्मा हैं। राज्य सरकार श्रमिकों के परिश्रम का सम्मान करने के साथ उनके जीवन में सुरक्षा, सुविधा और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की सोच स्पष्ट है कि विकास का लाभ उस श्रमिक तक भी पहुंचे, जिसके श्रम से विकास की नींव तैयार होती है। श्रमिक को उसके परिश्रम का पूरा सम्मान मिले, उसे सामाजिक सुरक्षा का भरोसा मिले, परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बने और उसके बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें – इसी उद्देश्य के साथ सरकार श्रमिक कल्याण की योजनाओं को लगातार विस्तार दे रही है।

    श्रमिक हित में मुख्यमंत्री की तीन बड़ी घोषणाएं

    मुख्यमंत्री  साय ने राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में श्रमिक भाई-बहनों की सुविधा, आवागमन और स्वरोजगार को ध्यान में रखते हुए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

    मुख्यमंत्री ने शहरों में रोजगार की तलाश में विभिन्न स्थानों पर एकत्र होने वाले श्रमिकों के लिए सर्वसुविधायुक्त आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। इन केंद्रों में श्रमिकों के बैठने की समुचित व्यवस्था के साथ स्वच्छ पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे काम की तलाश में शहर आने वाले श्रमिकों को सम्मानजनक और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा।

    मुख्यमंत्री ने पंजीकृत श्रमिकों के आवागमन को सुगम बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से ई-बाइक सहायता योजना प्रारंभ करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि काम के लिए प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने वाले श्रमिकों के लिए आवागमन की सुविधा सीधे तौर पर उनकी आजीविका और जीवन की सहजता से जुड़ी है।

    मुख्यमंत्री  साय ने असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे परंपरागत रिक्शा चालकों को आधुनिक साधन अपनाने, अपनी आय बढ़ाने और स्वरोजगार को अधिक मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव लाना है। श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भरता और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराकर एक सशक्त श्रमिक परिवार का निर्माण करना सरकार की प्राथमिकता है।

    1.43 लाख से अधिक श्रमिकों को 51.32 करोड़ रुपए से अधिक की सौगात

    महासम्मेलन में मुख्यमंत्री  साय ने श्रम विभाग के विभिन्न मंडलों द्वारा संचालित 26 योजनाओं के अंतर्गत डीबीटी के माध्यम से 1 लाख 43 हजार से अधिक श्रमिकों के बैंक खातों में 51 करोड़ 32 लाख रुपए से अधिक की सहायता राशि अंतरित की। उन्होंने विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के हितग्राहियों को सहायता राशि एवं सामग्री का वितरण भी किया।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों के लिए 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा से लेकर उनके बच्चों की शिक्षा, विवाह सहायता और आर्थिक सशक्तीकरण तक जीवन के विभिन्न चरणों में ये योजनाएं श्रमिक परिवारों का संबल बन रही हैं।

    उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों तक पहुंचाई गई है। उन्होंने प्रदेश के सभी पात्र श्रमिकों से श्रम विभाग में अपना पंजीयन कराने और योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की।

    ‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र के साथ श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र को साकार करते हुए राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि संसाधनों की कमी किसी श्रमिक परिवार के प्रतिभावान बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बने। श्रमिक का बच्चा भी देश के श्रेष्ठ विद्यालय में पढ़े, उच्च शिक्षा प्राप्त करे और अपनी प्रतिभा के बल पर जीवन में ऊंची उड़ान भरे – सरकार इसी संकल्प के साथ काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत श्रमिक परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना के पहले वर्ष 100 बच्चों को इसका लाभ दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 200 बच्चों तक कर दिया गया है। इन विद्यार्थियों की शिक्षा का पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले श्रमिक परिवारों के बच्चों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही पात्र विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने में भी सरकार सहयोग कर रही है।

    मनिंदर की सफलता बनी श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों की मिसाल

    महासम्मेलन में एक प्रेरक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री  साय ने श्रमिक परिवार की प्रतिभाशाली बेटी मनिंदर कौर को लैपटॉप और एक लाख 75 हजार रुपए का चेक प्रदान किया। मनिंदर ने अपनी प्रतिभा और कठिन परिश्रम के बल पर जेईई परीक्षा उत्तीर्ण कर एनआईटी सूरत में प्रवेश सुनिश्चित किया है। उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई का पूरा खर्च अब श्रम विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने मनिंदर को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सफलता केवल एक बेटी की उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए प्रेरणा है। आर्थिक परिस्थितियां प्रतिभा की उड़ान को सीमित न करें, इसके लिए सरकार हर संभव सहयोग करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य के लिए दिन-रात परिश्रम करते हैं। सरकार उनके इस सपने को अपना संकल्प मानकर आगे बढ़ा रही है। श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए मजबूत आधार दिया जा रहा है।

    100 श्रमिक दीदियों के हाथों में ई-रिक्शा की चाबी, आत्मनिर्भरता की राह हुई आसान

    मुख्यमंत्री  साय ने महासम्मेलन में दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत 100 श्रमिक दीदियों को ई-रिक्शा की चाबी सौंपी और हरी झंडी दिखाकर उन्हें रवाना किया। ई-रिक्शा प्राप्त करने वाली महिलाओं के चेहरे पर आत्मनिर्भर भविष्य का उत्साह दिखाई दिया।

    इस दौरान मुख्यमंत्री  साय और श्रम एवं उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन ने हितग्राही मती यशोदा विश्वकर्मा के ई-रिक्शा में सवारी भी की। मुख्यमंत्री ने सभी लाभार्थी महिलाओं से आत्मीय बातचीत की और उन्हें नए स्वरोजगार के लिए शुभकामनाएं दीं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता पूरे परिवार को सशक्त बनाती है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक बहनों को ऐसे साधन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं, जिनसे वे अपने परिश्रम के बल पर सम्मानजनक आय अर्जित कर सकें और परिवार की आर्थिक प्रगति में मजबूत भागीदार बनें।

    श्रमिक बहनों के साथ बैठकर मुख्यमंत्री ने किया भोजन

    राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन के दौरान आत्मीयता से भरा दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आईं श्रमिक बहनों के साथ बैठकर दोपहर के भोजन में शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री ने भोजन के दौरान श्रमिक बहनों से सहजता से बातचीत की। उन्होंने उनके कामकाज, परिवार और बच्चों की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने यह भी पूछा कि उन्हें श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं और योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई तो नहीं आ रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी है, जब उनका लाभ पात्र श्रमिक तक सरलता और समय पर पहुंचे। उन्होंने श्रमिक बहनों से संवाद के दौरान उनके अनुभव भी जाने। मुख्यमंत्री को अपने बीच बैठकर सहजता से भोजन करते और परिवार के सदस्य की तरह बातचीत करते देखकर श्रमिक बहनों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

    डिजिटल तकनीक से योजनाओं को बनाया जा रहा सरल और पारदर्शी

    मुख्यमंत्री  साय ने महासम्मेलन में राज्य की नवीन उपकर कटौती वेबसाइट का शुभारंभ किया तथा पीवीसी एवं क्यूआर कोड युक्त नवीन श्रमिक पंजीयन कार्ड का विमोचन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इसी सोच के साथ पंजीयन से लेकर योजनाओं का लाभ पहुंचाने तक की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया जा रहा है।

    उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वन नेशन-वन राशन कार्ड व्यवस्था से रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले श्रमिकों को बड़ी सुविधा मिली है। अब श्रमिक देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करते हुए भी राशन की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। इसी तरह पीएफ व्यवस्था में तकनीकी सुधारों से रोजगार या कार्यस्थल बदलने पर भी श्रमिकों के लिए खाते से जुड़ी सुविधाओं की निरंतरता आसान हुई है।

    हजारों श्रमिकों के साथ मुख्यमंत्री ने जलाया ‘आशीर्वाद का दीया’

    विश्वकर्मा जयंती के साथ प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर ने महासम्मेलन को विशेष स्वरूप दिया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने पूरे छत्तीसगढ़ की ओर से प्रधानमंत्री  मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की कामना की।

    प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने महासम्मेलन में उपस्थित हजारों श्रमिक भाई-बहनों के साथ ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया। श्रमिकों ने भी दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में गरीब, किसान, श्रमिक, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की गई हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से भी अपने घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करने का आग्रह किया।

    श्रमिकों तक समय पर पहुंच रहा योजनाओं का लाभ : श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन

    श्रम एवं उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य सरकार श्रमिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजनाओं का लाभ समय पर पात्र हितग्राहियों तक पहुंचा रही है। डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में पहुंचने से व्यवस्था अधिक पारदर्शी हुई है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की पहल पर अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से श्रमिक परिवारों के बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। पहले 100 बच्चों को योजना का लाभ दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 200 बच्चों तक कर दिया गया है।

     देवांगन ने कहा कि दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत सहायता राशि को एक लाख रुपए से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए किया गया है। आज के कार्यक्रम में 100 श्रमिक दीदियों को ई-रिक्शा प्रदान किए गए हैं। यह पहल श्रमिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    सरल, सुगम और पारदर्शी तरीके से श्रमिकों तक योजनाएं पहुंचाना लक्ष्य : डॉ. रामप्रताप सिंह

    छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में श्रमिकों को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र श्रमिक को विभागीय योजनाओं की जानकारी मिले और उनका लाभ बिना किसी कठिनाई के प्राप्त हो।

    उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अटल करियर निर्माण योजना भी संचालित की जा रही है। प्रदेश में अब तक 25 श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन कर बड़ी संख्या में श्रमिकों को योजनाओं और आर्थिक सहायता से जोड़ा गया है।

    उन्होंने बताया कि श्रमिक कल्याण में डिजिटल तकनीक के उपयोग की छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रदेश की डिजिटल पहल का प्रस्तुतीकरण किया गया।

    श्रमिक परिवारों के सशक्तीकरण से मजबूत होगा छत्तीसगढ़ : सांसद  बृजमोहन अग्रवाल

    सांसद  बृजमोहन अग्रवाल ने भगवान विश्वकर्मा की जयंती और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए लोगों से अपने घर, आंगन और मोहल्लों में ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित करने का आग्रह किया।

    उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने और महिलाओं को ई-रिक्शा के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ने जैसी पहल श्रमिक परिवारों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में रोजगार मेले का आयोजन कर लगभग तीन हजार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

    इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद मती लक्ष्मी वर्मा, विधायक  सुनील सोनी, विधायक  पुरन्दर मिश्रा, महापौर मती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन कुमार अग्रवाल, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, श्रम विभाग के सचिव  हिमशिखर गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बड़ी संख्या में श्रमिक भाई-बहन उपस्थित थे।

  • सेवा संकल्प अभियान : केन्द्र की आजीविका मिशन और बिहान के सहयोग से सीता मरावी ने रचा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय

    सेवा संकल्प अभियान : केन्द्र की आजीविका मिशन और बिहान के सहयोग से सीता मरावी ने रचा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय

    सेवा संकल्प अभियान : केन्द्र की आजीविका मिशन और बिहान के सहयोग से सीता मरावी ने रचा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय

    समूह से आर्थिक सहयोग लेकर शुरू किया किराना और मुर्गी व्यवसाय, आय में हुआ उल्लेखनीय इजाफा

    रायपुर, 
     जीपीएम जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की श्रीमती सीता मरावी की सफलता ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है। महिला स्वसहायता समूह से जुड़कर उन्होंने आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत की और आज किराना दुकान तथा मुर्गी व्यवसाय के माध्यम से उनकी वार्षिक आय लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

    श्रीमती सीता मरावी वंदना महिला स्वसहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और स्वरोजगार शुरू करने का अवसर मिला। उन्होंने बैंक लोन तथा समूह के माध्यम से प्राप्त सीआईएफ एवं आरएफ की राशि से 25 हजार रुपये की सहायता लेकर गांव में किराना दुकान शुरू की। इसके बाद समूह के संकुल से 50 हजार रुपये की राशि प्राप्त कर मुर्गी व्यवसाय भी प्रारंभ किया।

    दोनों व्यवसायों को उन्होंने मेहनत, लगन और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ाया। अलग-अलग आजीविका गतिविधियों से होने वाली आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया। आज श्रीमती सीता मरावी अपने गांव में ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना रही हैं।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ संकल्प से जुड़ी आत्मनिर्भरता की कहानी

    श्रीमती सीता मरावी की सफलता ग्रामीण महिलाओं को स्वसहायता समूहों से जोड़कर उनकी आजीविका और उद्यमिता को मजबूत करने की केन्द्र सरकार की पहल से भी जुड़ती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन केन्द्र प्रायोजित योजना है, जिसे केन्द्र और राज्य सरकारों की साझेदारी से लागू किया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वसहायता समूहों से जोड़कर वित्तीय समावेशन, आजीविका और छोटे उद्यमों को बढ़ावा दिया जाता है। 

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महिला स्वसहायता समूहों की सदस्यों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘लखपति दीदी’ के संकल्प को प्रमुखता दी गई है। इस पहल का उद्देश्य स्वसहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को टिकाऊ तरीके से कम से कम एक लाख रुपये की वार्षिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। इसके लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बैंक ऋण, उद्यमिता और आजीविका गतिविधियों के विस्तार जैसी व्यवस्थाओं को जोड़ा गया है। केन्द्र सरकार के अनुसार जुलाई 2026 तक देशभर में 10.08 करोड़ ग्रामीण परिवार लगभग 92 लाख स्वसहायता समूहों से जुड़े थे और 3.46 करोड़ से अधिक स्वसहायता समूह सदस्यों को ‘लखपति दीदी’ के रूप में सक्षम बनाया जा चुका था। 

    छत्तीसगढ़ में लाखों महिलाओं को स्वसहायता समूहों से मिला मंच

    केन्द्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 2.79 लाख स्वसहायता समूह सक्रिय हैं और लगभग 29.78 लाख महिलाएं इस कार्यक्रम से लाभान्वित हो रही हैं। 

    स्वसहायता समूहों को मिलने वाले रिवॉल्विंग फंड (आरएफ), कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआईएफ) तथा बैंक लिंकेज जैसी व्यवस्थाएं महिलाओं को अपनी आजीविका गतिविधियों को शुरू करने और आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय आधार उपलब्ध कराने में मदद करती हैं। केन्द्र सरकार के अनुसार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आरएफ और सीआईएफ के माध्यम से स्वसहायता समूहों को पूंजी उपलब्ध कराने का प्रावधान है। 

    सीता मरावी की कहानी में भी समूह से मिली वित्तीय सहायता का उपयोग किराना दुकान और मुर्गी व्यवसाय शुरू करने में किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्वसहायता समूह केवल महिलाओं को संगठित करने का माध्यम नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का आधार भी बन रहे हैं।

    किराना दुकान से मुर्गी व्यवसाय तक, बढ़े आय के अवसर

    सीता मरावी ने एक ही व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आय के अलग-अलग स्रोत विकसित किए। किराना दुकान ने उन्हें गांव में ही नियमित व्यवसाय का अवसर दिया, जबकि मुर्गी पालन ने उनकी आय में एक और स्रोत जोड़ा। दोनों गतिविधियों को उन्होंने निरंतर मेहनत और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ाया।

    सीता मरावी बताती हैं कि महिला स्वसहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। समूह से मिले आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन से उन्हें स्वरोजगार शुरू करने का अवसर मिला। आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं और गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।

    महतारी वंदन योजना से मिला अतिरिक्त आर्थिक संबल

    श्रीमती सीता मरावी को महतारी वंदन योजना के तहत 31वीं किस्त की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से घरेलू जरूरतों को पूरा करने में उन्हें सहयोग मिल रहा है। स्वसहायता समूह से मिली सहायता, विभिन्न आजीविका गतिविधियों और स्वयं की मेहनत के साथ उन्होंने आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अपनी अलग पहचान बनाई है। अपनी जिंदगी में आए इस सकारात्मक बदलाव के लिए श्रीमती सीता मरावी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है।

    सेवा संकल्प अभियान में सामने आई आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी

    सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई श्रीमती सीता मरावी की कहानी बताती है कि जब ग्रामीण महिलाओं को संगठन, वित्तीय सहयोग, मार्गदर्शन और आजीविका के अवसर मिलते हैं, तो वे अपनी मेहनत और हुनर के बल पर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती हैं।

    सीता मरावी की यात्रा स्वसहायता समूह से शुरू होकर स्वरोजगार और लखपति दीदी बनने तक पहुंची है। केन्द्र सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ संकल्प और राज्य में संचालित बिहान की गतिविधियों के माध्यम से तैयार हो रहा यह वातावरण ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर दे रहा है। देशभर में स्वसहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय समावेशन और उद्यमिता से जोड़ने पर केन्द्र सरकार लगातार जोर दे रही है। 

    सीता मरावी अब केवल अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने वाली महिला नहीं, बल्कि अपने गांव में यह संदेश देने वाली प्रेरक महिला हैं कि अवसर और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी अपने हुनर को व्यवसाय में बदलकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख सकती हैं।

  • मुख्य सचिव ने ई-ऑफिस एवं समयबद्ध उपस्थिति में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को किया सम्मानित

    मुख्य सचिव ने ई-ऑफिस एवं समयबद्ध उपस्थिति में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को किया सम्मानित

    मुख्य सचिव ने ई-ऑफिस एवं समयबद्ध उपस्थिति में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को किया सम्मानित

    रायपुर
     मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मासिक सम्मान कार्यक्रम में ई-ऑफिस के माध्यम से नस्तियों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण तथा कार्यालयीन समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने वाले मंत्रालयीन अधिकारी एवं कर्मचारियों को अगस्त माह के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। 

                 मुख्य सचिव ने कहा कि मंत्रालय में 10 बजे से पूर्व आने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। मुख्य सचिव ने कहा कि अटेंडेंस एवं ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने पर प्रशंसा पत्र पाने में महिला अधिकारी अग्रणी है। मुख्य सचिव ने प्रशंसा पत्र प्राप्त करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। मुख्य सचिव ने बताया कि आगामी मूल्यांकन में 1 अप्रैल 2026 से 30 सितम्बर 2026 तक की अवधि का संचयी (क्यूमुलेटिव) आकलन किया जाएगा। इसके लिए ई-ऑफिस एवं कार्यालयीन उपस्थिति के आधार पर मंत्रालय में स्कोरबोर्ड तैयार किया जाएगा। जिससे सभी अपने प्रदर्शन का आकलन कर बेहतर कार्य के लिए प्रेरित हो सकें। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, दक्षता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने में ई-ऑफिस की महत्वपूर्ण भूमिका है। 

    विभागीय श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन

                ई-ऑफिस पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विभागों में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग प्रथम, आदिम जाति विकास विभाग द्वितीय तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग तृतीय स्थान पर रहा। मुख्य सचिव ने संयुक्त सचिव, उप सचिव, अवर सचिव, अनुभाग अधिकारी, सहायक अनुभाग अधिकारी, वरिष्ठ सचिवालय सहायक, कनिष्ठ सचिवालय सहायक तथा अन्य कर्मचारियों को भी ई-ऑफिस पर उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान किए।
    संयुक्त सचिव श्रेणी में आदिम जाति विकास विभाग के भूपेन्द्र कुमार राजपूत प्रथम, अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के अनुपम त्रिवेदी द्वितीय तथा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के गजपाल सिंह सिकरवार तृतीय स्थान पर रहे। 

              उप सचिव श्रेणी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के दूरदेशी राम सोन्टापर प्रथम, सामान्य प्रशासन विभाग-1 के किशोर कुमार भूआर्य द्वितीय तथा वाणिज्यिक कर (आबकारी एवं पंजीयन) विभाग के शिव कुमार सिंह तृतीय स्थान पर रहे।

              अवर सचिव श्रेणी में सामान्य प्रशासन विभाग-1 के कैलाश कुमार नेताम प्रथम, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अरूण कुमार मिश्रा द्वितीय पर तथा वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के मगन लाल पवार तृतीय स्थान पर रहे। 

               अनुभाग अधिकारी श्रेणी में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मनीराम रात्रे प्रथम स्थान पर, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के वीरेन्द्र कुमार द्वितीय स्थान पर तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के लिलाम्बर ओहोदर तृतीय स्थान पर रहे।

               सहायक अनुभाग अधिकारी श्रेणी में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मोहम्मद शाहिर अंसारी प्रथम स्थान पर, श्रम विभाग के गोपाल प्रसाद चंद्रा द्वितीय स्थान पर तथा सामान्य प्रशासन विभाग-4 के जलेश राम तृतीय स्थान पर रहे।

                वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मुकेश राम प्रधान प्रथम स्थान पर, आदिम जाति विकास विभाग की सुअंजू दत्ता द्वितीय स्थान पर तथा आदिम जाति विकास विभाग की सुप्रमिला यादव तृतीय स्थान पर रहीं।

                 कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में सामान्य प्रशासन विभाग-1 के रामकुमार सिंह प्रथम स्थान पर, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रभु सिंह राठिया द्वितीय स्थान पर तथा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के संदीप कुमार तारम तृतीय स्थान पर रहे।

                टेक्निकल सेक्शन में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के जगन्नाथ साहू प्रथम स्थान पर, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की श्रीमती माया देवांगन द्वितीय स्थान पर तथा आदिम जाति विकास विभाग के स्मीत कुमार गुप्ता तृतीय स्थान पर रहे।

               समयबद्ध कार्यालयीन उपस्थिति के लिए सहायक अनुभाग अधिकारी आलोक जोशी, सहायक अनुभाग अधिकारी अमृत टोप्पो, संयुक्त सचिव अनुपम त्रिवेद्वी, निज सचिव श्रीमती आराधना साहू, सहायक अनुभाग अधिकारी बागेश कुमार धु्रव, सहायक ग्रेड-2 भूवनेश्वर साहू, उप सचिव श्रीमती क्लेमेनटिना लकड़ा, सहायक अनुभाग अधिकारी देवेन्द्र साहू, अवर सचिव श्रीमती दिव्या वैष्णव, निज सहायक दुष्यंत कुमार साहू, उप सचिव श्रीमती हेमिन बाघे, सहायक अनुभाग अधिकारी श्रीमती कांती सूर्यवंशी, सहायक अनुभाग अधिकारी लोक नारायण शर्मा, सहायक अनुभाग अधिकारी सुमीरा, वरिष्ठ सचिवालय सहायक मेलू राम धु्रव, कनिष्ठ सचिवालय सहायक मोहन लाल यादव, अवर सचिव ओम प्रकाश पात्रे, सहायक अनुभाग अधिकारी पवन कुमार साहू, सहायक अनुभाग अधिकारी पीयूष वैरागड़े, कनिष्ठ सचिवालय सहायक प्रदीप राय, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रीमती प्रमिला यादव, भृत्य राज कुमार सोरी, अवर सचिव राजीव कुमार झड़े, वरिष्ठ सचिवालय सहायक राजेश कुमार टोप्पो, स्टेनोटायपिस्ट सुराखी सिदार, अनुभाग अधिकारी संदीप कुमार शेंडेे, सहायक अनुभाग अधिकारी संतोष महिलांग, अनुभाग अधिकारी शिव कुमार गोड़, वरिष्ठ सचिवालय सहायक सोहन लाल साहू, सहायक अनुभाग अधिकारी श्रीमती सुधा शेंडे, अनुभाग अधिकारी सुनील मैत्री, अनुभाग अधिकारी सुसुनीता गौतम, भृत्य सुरेन्द्र कुमार साहू, कनिष्ठ सचिवालय सहायक विनित चंद्रवंशी, सहायक अनुभाग अधिकारी विनोद कुमार अथंकर को सम्मानित किया गया।

                जून, जुलाई, अगस्त माह के ई-ऑफिस रैंकिंग में प्रथम स्थान पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, दूसरे स्थान पर आदिम जाति विकास विभाग तथा तीसरे स्थान पर गृह विभाग रहा।
    जून, जुलाई, अगस्त माह के ई-ऑफिस रैकिंग में प्रथम स्थान पर सामान्य प्रशासन विभाग-1 के अवर सचिव कैलास कुमार नेताम, द्वितीय स्थान पर वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उप सचिव दूरदेशी राम सोनटापर, तृतीय स्थान पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक प्रभु सिंह राठिया, चिकित्सा शिक्षा विभाग के अवर सचिव पूरन लाल साहू चौथे स्थान पर तथा विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अरूण कुमार मिश्रा पांचवे स्थान पर रहें।

                जून, जुलाई, अगस्त माह के अटेंडेंश रैंकिंग में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अवर सचिव श्रीमती दिव्या वैष्णव, उच्च शिक्षा विभाग के सहायक अनुभाग अधिकारी लोक नारायण शर्मा, सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक मेलू राम धु्रव, सामान्य प्रशासन विभाग की स्टेनोटायपिस्ट सुराखी सिदार, विमानन विभाग की सहायक अनुभाग अधिकारी श्रीमती सुधा शेंडे प्रथम स्थान पर रहें।

  • असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदी के लिए अब 50 हजार के स्थान पर एक लाख रुपए की मिलेगी सहायतामुख्यमंत्री

    असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदी के लिए अब 50 हजार के स्थान पर एक लाख रुपए की मिलेगी सहायतामुख्यमंत्री

    विश्वकर्मा जयंती पर राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने श्रमिक हित में की तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं

    शहरों में बनेंगे सर्वसुविधायुक्त आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र, पंजीकृत श्रमिकों के लिए शुरू होगी ई-बाइक सहायता योजना-मुख्यमंत्री

    असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदी के लिए अब 50 हजार के स्थान पर एक लाख रुपए की मिलेगी सहायतामुख्यमंत्री

    1.43 लाख से अधिक श्रमिकों के खातों में 51.32 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि अंतरित

    100 श्रमिक दीदियों को मिली ई-रिक्शा की चाबी, मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

    श्रमिक परिवार की प्रतिभावान बेटी मनिंदर कौर की इंजीनियरिंग की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

    श्रमिक बहनों के साथ मुख्यमंत्री ने किया दोपहर का भोजन, आत्मीय संवाद कर जाना परिवार का हाल-चाल

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर हजारों श्रमिकों के साथ मुख्यमंत्री ने प्रज्ज्वलित किया ‘आशीर्वाद का दीया’

    रायपुर, 
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के श्रमवीर अपने परिश्रम, पुरुषार्थ और पसीने से समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की नई इबारत लिख रहे हैं। गांवों के खेत-खलिहानों से लेकर शहरों की ऊंची इमारतों तक, सड़कों और पुलों से लेकर सिंचाई परियोजनाओं, उद्योगों और अधोसंरचना के निर्माण तक प्रदेश की प्रगति की हर तस्वीर में हमारे श्रमिक भाई-बहनों की मेहनत समाहित है। छत्तीसगढ़ ने अपने गठन के 25 वर्षों में विकास के जो नए प्रतिमान स्थापित किए हैं, उनके पीछे हमारे मेहनतकश हाथों का बड़ा योगदान है। यही हाथ आने वाले वर्षों में विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी साकार करेंगे।

    मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेशभर से आए हजारों श्रमिक भाई-बहनों को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और भगवान विश्वकर्मा से छत्तीसगढ़ की सुख, शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा निर्माण और सृजन के आराध्य हैं। वे हमें श्रम के सम्मान और अपने हुनर पर गर्व करने की प्रेरणा देते हैं। सही मायनों में हमारे श्रमिक भाई-बहन ही विकसित छत्तीसगढ़ के विश्वकर्मा हैं। राज्य सरकार श्रमिकों के परिश्रम का सम्मान करने के साथ उनके जीवन में सुरक्षा, सुविधा और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की सोच स्पष्ट है कि विकास का लाभ उस श्रमिक तक भी पहुंचे, जिसके श्रम से विकास की नींव तैयार होती है। श्रमिक को उसके परिश्रम का पूरा सम्मान मिले, उसे सामाजिक सुरक्षा का भरोसा मिले, परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बने और उसके बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें – इसी उद्देश्य के साथ सरकार श्रमिक कल्याण की योजनाओं को लगातार विस्तार दे रही है।

    श्रमिक हित में मुख्यमंत्री की तीन बड़ी घोषणाएं

    मुख्यमंत्री साय ने राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में श्रमिक भाई-बहनों की सुविधा, आवागमन और स्वरोजगार को ध्यान में रखते हुए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

    मुख्यमंत्री ने शहरों में रोजगार की तलाश में विभिन्न स्थानों पर एकत्र होने वाले श्रमिकों के लिए सर्वसुविधायुक्त आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। इन केंद्रों में श्रमिकों के बैठने की समुचित व्यवस्था के साथ स्वच्छ पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे काम की तलाश में शहर आने वाले श्रमिकों को सम्मानजनक और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा।

    मुख्यमंत्री ने पंजीकृत श्रमिकों के आवागमन को सुगम बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से ई-बाइक सहायता योजना प्रारंभ करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि काम के लिए प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने वाले श्रमिकों के लिए आवागमन की सुविधा सीधे तौर पर उनकी आजीविका और जीवन की सहजता से जुड़ी है।

    मुख्यमंत्री साय ने असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे परंपरागत रिक्शा चालकों को आधुनिक साधन अपनाने, अपनी आय बढ़ाने और स्वरोजगार को अधिक मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव लाना है। श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भरता और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराकर एक सशक्त श्रमिक परिवार का निर्माण करना सरकार की प्राथमिकता है।

    1.43 लाख से अधिक श्रमिकों को 51.32 करोड़ रुपए से अधिक की सौगात

    महासम्मेलन में मुख्यमंत्री साय ने श्रम विभाग के विभिन्न मंडलों द्वारा संचालित 26 योजनाओं के अंतर्गत डीबीटी के माध्यम से 1 लाख 43 हजार से अधिक श्रमिकों के बैंक खातों में 51 करोड़ 32 लाख रुपए से अधिक की सहायता राशि अंतरित की। उन्होंने विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के हितग्राहियों को सहायता राशि एवं सामग्री का वितरण भी किया।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों के लिए 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा से लेकर उनके बच्चों की शिक्षा, विवाह सहायता और आर्थिक सशक्तीकरण तक जीवन के विभिन्न चरणों में ये योजनाएं श्रमिक परिवारों का संबल बन रही हैं।

    उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों तक पहुंचाई गई है। उन्होंने प्रदेश के सभी पात्र श्रमिकों से श्रम विभाग में अपना पंजीयन कराने और योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की।

    ‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र के साथ श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र को साकार करते हुए राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि संसाधनों की कमी किसी श्रमिक परिवार के प्रतिभावान बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बने। श्रमिक का बच्चा भी देश के श्रेष्ठ विद्यालय में पढ़े, उच्च शिक्षा प्राप्त करे और अपनी प्रतिभा के बल पर जीवन में ऊंची उड़ान भरे – सरकार इसी संकल्प के साथ काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत श्रमिक परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना के पहले वर्ष 100 बच्चों को इसका लाभ दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 200 बच्चों तक कर दिया गया है। इन विद्यार्थियों की शिक्षा का पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले श्रमिक परिवारों के बच्चों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही पात्र विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने में भी सरकार सहयोग कर रही है।

    मनिंदर की सफलता बनी श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों की मिसाल

    महासम्मेलन में एक प्रेरक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री साय ने श्रमिक परिवार की प्रतिभाशाली बेटी मनिंदर कौर को लैपटॉप और एक लाख 75 हजार रुपए का चेक प्रदान किया। मनिंदर ने अपनी प्रतिभा और कठिन परिश्रम के बल पर जेईई परीक्षा उत्तीर्ण कर एनआईटी सूरत में प्रवेश सुनिश्चित किया है। उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई का पूरा खर्च अब श्रम विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने मनिंदर को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सफलता केवल एक बेटी की उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए प्रेरणा है। आर्थिक परिस्थितियां प्रतिभा की उड़ान को सीमित न करें, इसके लिए सरकार हर संभव सहयोग करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य के लिए दिन-रात परिश्रम करते हैं। सरकार उनके इस सपने को अपना संकल्प मानकर आगे बढ़ा रही है। श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए मजबूत आधार दिया जा रहा है।

    100 श्रमिक दीदियों के हाथों में ई-रिक्शा की चाबी, आत्मनिर्भरता की राह हुई आसान

    मुख्यमंत्री साय ने महासम्मेलन में दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत 100 श्रमिक दीदियों को ई-रिक्शा की चाबी सौंपी और हरी झंडी दिखाकर उन्हें रवाना किया। ई-रिक्शा प्राप्त करने वाली महिलाओं के चेहरे पर आत्मनिर्भर भविष्य का उत्साह दिखाई दिया।

    इस दौरान मुख्यमंत्री साय और श्रम एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने हितग्राही श्रीमती यशोदा विश्वकर्मा के ई-रिक्शा में सवारी भी की। मुख्यमंत्री ने सभी लाभार्थी महिलाओं से आत्मीय बातचीत की और उन्हें नए स्वरोजगार के लिए शुभकामनाएं दीं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता पूरे परिवार को सशक्त बनाती है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक बहनों को ऐसे साधन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं, जिनसे वे अपने परिश्रम के बल पर सम्मानजनक आय अर्जित कर सकें और परिवार की आर्थिक प्रगति में मजबूत भागीदार बनें।

    श्रमिक बहनों के साथ बैठकर मुख्यमंत्री ने किया भोजन

    राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन के दौरान आत्मीयता से भरा दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आईं श्रमिक बहनों के साथ बैठकर दोपहर के भोजन में शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री ने भोजन के दौरान श्रमिक बहनों से सहजता से बातचीत की। उन्होंने उनके कामकाज, परिवार और बच्चों की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने यह भी पूछा कि उन्हें श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं और योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई तो नहीं आ रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी है, जब उनका लाभ पात्र श्रमिक तक सरलता और समय पर पहुंचे। उन्होंने श्रमिक बहनों से संवाद के दौरान उनके अनुभव भी जाने। मुख्यमंत्री को अपने बीच बैठकर सहजता से भोजन करते और परिवार के सदस्य की तरह बातचीत करते देखकर श्रमिक बहनों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

    डिजिटल तकनीक से योजनाओं को बनाया जा रहा सरल और पारदर्शी

    मुख्यमंत्री साय ने महासम्मेलन में राज्य की नवीन उपकर कटौती वेबसाइट का शुभारंभ किया तथा पीवीसी एवं क्यूआर कोड युक्त नवीन श्रमिक पंजीयन कार्ड का विमोचन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इसी सोच के साथ पंजीयन से लेकर योजनाओं का लाभ पहुंचाने तक की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया जा रहा है।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वन नेशन-वन राशन कार्ड व्यवस्था से रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले श्रमिकों को बड़ी सुविधा मिली है। अब श्रमिक देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करते हुए भी राशन की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। इसी तरह पीएफ व्यवस्था में तकनीकी सुधारों से रोजगार या कार्यस्थल बदलने पर भी श्रमिकों के लिए खाते से जुड़ी सुविधाओं की निरंतरता आसान हुई है।

    हजारों श्रमिकों के साथ मुख्यमंत्री ने जलाया ‘आशीर्वाद का दीया’

    विश्वकर्मा जयंती के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर ने महासम्मेलन को विशेष स्वरूप दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूरे छत्तीसगढ़ की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की कामना की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने महासम्मेलन में उपस्थित हजारों श्रमिक भाई-बहनों के साथ ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया। श्रमिकों ने भी दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गरीब, किसान, श्रमिक, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की गई हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से भी अपने घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करने का आग्रह किया।

    श्रमिकों तक समय पर पहुंच रहा योजनाओं का लाभ : श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन

    श्रम एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य सरकार श्रमिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजनाओं का लाभ समय पर पात्र हितग्राहियों तक पहुंचा रही है। डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में पहुंचने से व्यवस्था अधिक पारदर्शी हुई है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से श्रमिक परिवारों के बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। पहले 100 बच्चों को योजना का लाभ दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 200 बच्चों तक कर दिया गया है।

    देवांगन ने कहा कि दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत सहायता राशि को एक लाख रुपए से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए किया गया है। आज के कार्यक्रम में 100 श्रमिक दीदियों को ई-रिक्शा प्रदान किए गए हैं। यह पहल श्रमिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    सरल, सुगम और पारदर्शी तरीके से श्रमिकों तक योजनाएं पहुंचाना लक्ष्य : डॉ. रामप्रताप सिंह

    छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में श्रमिकों को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र श्रमिक को विभागीय योजनाओं की जानकारी मिले और उनका लाभ बिना किसी कठिनाई के प्राप्त हो।

    उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अटल करियर निर्माण योजना भी संचालित की जा रही है। प्रदेश में अब तक 25 श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन कर बड़ी संख्या में श्रमिकों को योजनाओं और आर्थिक सहायता से जोड़ा गया है।

    उन्होंने बताया कि श्रमिक कल्याण में डिजिटल तकनीक के उपयोग की छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रदेश की डिजिटल पहल का प्रस्तुतीकरण किया गया।

    श्रमिक परिवारों के सशक्तीकरण से मजबूत होगा छत्तीसगढ़ : सांसद बृजमोहन अग्रवाल

    सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भगवान विश्वकर्मा की जयंती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए लोगों से अपने घर, आंगन और मोहल्लों में ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित करने का आग्रह किया।

    उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने और महिलाओं को ई-रिक्शा के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ने जैसी पहल श्रमिक परिवारों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में रोजगार मेले का आयोजन कर लगभग तीन हजार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

    इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, विधायक पुरन्दर मिश्रा, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन कुमार अग्रवाल, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बड़ी संख्या में श्रमिक भाई-बहन उपस्थित थे।

  • सेवा संकल्प अभियान: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ संकल्प से आत्मनिर्भरता की राह पर रानू कैवर्त

    सेवा संकल्प अभियान: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ संकल्प से आत्मनिर्भरता की राह पर रानू कैवर्त

    सेवा संकल्प अभियान: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ संकल्प से आत्मनिर्भरता की राह पर रानू कैवर्त

    बिहान से जुड़कर हुनर को बनाया कारोबार का आधार, सिलाई से किराना और मुर्गी पालन से हैचरी तक कई गतिविधियों से सालाना 2 से 3 लाख रुपये की आय

    रायपुर, 
     गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत अंडी निवासी श्रीमती रानू कैवर्त की सफलता ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़कर श्रीमती रानू कैवर्त ने अपने हुनर, मेहनत और उपलब्ध संसाधनों को आजीविका के विभिन्न साधनों से जोड़ा और आज उनकी वार्षिक आय लगभग 2 से 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

    श्रीमती रानू कैवर्त शिव गुरु महिला स्व-सहायता समूह की सचिव हैं। बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें समूह के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। उन्होंने समूह से प्राप्त सहयोग और मार्गदर्शन का उपयोग करते हुए एक ही व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय कई आजीविका गतिविधियों को अपनाया। सिलाई कार्य, कपड़ों की दुकान, किराना स्टोर, बटेर पालन, देशी मुर्गी पालन और हैचरी जैसे कार्यों को उन्होंने अपनी आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा बनाया।

    इन प्रयासों ने न केवल उनकी आय के स्रोतों में विस्तार किया, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया। आज श्रीमती रानू कैवर्त अपनी मेहनत और बहुआयामी आजीविका गतिविधियों के माध्यम से सालाना लगभग 2 से 3 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं और लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ संकल्प से महिलाओं को मिला नया अवसर

    श्रीमती रानू कैवर्त की सफलता को ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की उस व्यापक पहल से जोड़कर देखा जा सकता है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘लखपति दीदी’ के संकल्प को प्रमुखता दी है। केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के तहत स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आजीविका, वित्तीय समावेशन, कौशल, उद्यमिता और संस्थागत ऋण तक पहुंच के लिए सहायता दी जाती है। लखपति दीदी पहल इसी मिशन का एक परिणाम है, जिसका उद्देश्य स्व-सहायता समूह की महिला सदस्यों को टिकाऊ आधार पर कम से कम एक लाख रुपये वार्षिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। केन्द्र सरकार के अनुसार जुलाई 2026 तक देशभर में 10.08 करोड़ ग्रामीण परिवारों को लगभग 92 लाख स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका था और 3.46 करोड़ से अधिक महिलाएं लखपति दीदी के रूप में सक्षम हुई थीं।

    छत्तीसगढ़ में भी लाखों महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं

    केन्द्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत   2.79 लाख स्व-सहायता समूह सक्रिय थे और लगभग 29.78 लाख महिलाएं इस कार्यक्रम से लाभान्वित हो रही थीं।

    यह व्यवस्था महिलाओं को केवल समूह से जोड़ने तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूहों को वित्तीय समावेशन, टिकाऊ आजीविका और सामुदायिक संस्थाओं के सशक्तिकरण से जोड़ा जाता है। केन्द्र सरकार की ओर से समूहों को रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड जैसी सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान भी है, जिससे महिलाएं अपनी आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए पूंजी और संस्थागत सहयोग प्राप्त कर सकें।

    एक नहीं, कई आजीविका गतिविधियों से बढ़ी आय

    रानू कैवर्त की कहानी की खासियत यह है कि उन्होंने अपनी आय के लिए एक ही साधन पर निर्भर रहने के बजाय कई गतिविधियों को जोड़ा। सिलाई और कपड़ों की दुकान से लेकर किराना व्यवसाय, बटेर पालन, देशी मुर्गी पालन और हैचरी तक के कार्यों ने उनके लिए आय के अलग-अलग अवसर तैयार किए हैं।

    रानू बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने का अवसर मिला। बिहान समूह से प्राप्त सहयोग और मार्गदर्शन का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने अलग-अलग आजीविका गतिविधियां अपनाईं। उनके अनुसार, समूह से जुड़ने से उनमें अपने दम पर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

    महतारी वंदन योजना से मिला अतिरिक्त आर्थिक संबल

    श्रीमती रानू कैवर्त को महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता भी प्राप्त होती है। उनके अनुसार नियमित आर्थिक सहायता से घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहयोग मिलता है और आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए आत्मविश्वास मजबूत हुआ है। अपनी सफलता और आत्मनिर्भरता की दिशा में मिले अवसरों के लिए श्रीमती रानू कैवर्त ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।

    सेवा संकल्प अभियान में सामने आई आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी

    श्रीमती रानू कैवर्त की कहानी यह बताती है कि जब ग्रामीण महिलाओं को संगठन, मार्गदर्शन, वित्तीय एवं आजीविका संबंधी अवसर मिलते हैं और वे अपनी मेहनत व हुनर को व्यवसाय से जोड़ती हैं, तो परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

    सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई यह कहानी केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन व्यवस्था, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लखपति दीदी के संकल्प और राज्य में बिहान के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को मिल रहे सहयोग के बीच बने समन्वय की एक मिसाल है। रानू कैवर्त ने अपने हुनर और मेहनत को अवसर से जोड़कर आत्मनिर्भरता की राह बनाई है और अब गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।