Category: छत्तीसगढ़

  • पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी से भेंट कर लिया आशीर्वाद, पंगत में बैठकर ग्रहण किया प्रसाद

    पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी से भेंट कर लिया आशीर्वाद, पंगत में बैठकर ग्रहण किया प्रसाद

    रायपुर 

     परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के अवतरण दिवस के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज रायगढ़ जिले के ग्राम बनोरा स्थित अघोर गुरु पीठ पहुंचे। मुख्यमंत्री श्री साय ने उपासना स्थल पर अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम जी की प्रतिमा के दर्शन कर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी से भेंट कर उनका आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन भी प्राप्त किया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने आश्रम की परंपरा के अनुरूप सादगी के साथ पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान आश्रम का सहज, सेवाभावी और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।

    मुख्यमंत्री श्री साय इसके पश्चात अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर के नवीन भवन के लोकार्पण समारोह में शामिल हुए। उन्होंने नवीन विद्यालय भवन का लोकार्पण कर विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों, शिक्षकों और क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने विद्यालय परिसर का अवलोकन किया और विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई विज्ञान प्रदर्शनी भी देखी। बच्चों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न वैज्ञानिक मॉडल और नवाचारों में उन्होंने विशेष रुचि दिखाई तथा विद्यार्थियों की जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता की सराहना कर उनका उत्साहवर्धन किया।

    समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अघोरेश्वर भगवान राम जी का संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता को समर्पित रहा। उन्होंने आध्यात्मिक साधना को मानव सेवा से जोड़कर समाज के सामने ऐसा मार्ग प्रस्तुत किया, जिसमें जरूरतमंद और पीड़ित मनुष्य की सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया। बनोरा अघोर गुरु पीठ इसी सेवा परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बनोरा आश्रम ने आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ मानव सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। स्वास्थ्य एवं नेत्र शिविरों के आयोजन से लेकर जरूरतमंदों की सहायता और दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने तक आश्रम की अनेक सेवा गतिविधियों ने लोगों के जीवन को संबल दिया है। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने की यह भावना प्रेरणादायी है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर का नवीन भवन इस सेवा यात्रा में शिक्षा के क्षेत्र में जुड़ा एक महत्वपूर्ण अध्याय है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह विद्यालय क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना और उनमें संस्कार, संवेदनशीलता तथा समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना भी है। उन्हें विश्वास है कि इस विद्या मंदिर से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी ज्ञान-विज्ञान में आगे बढ़ने के साथ सेवा और संस्कारों की परंपरा को भी आत्मसात करेंगे।

    उन्होंने कहा कि आज का समय तेजी से बदलती तकनीक और विज्ञान का समय है। हमारे बच्चों में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें अच्छी शिक्षा, आधुनिक संसाधन और अपनी प्रतिभा को सामने लाने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की है। विद्यालय में बच्चों द्वारा प्रस्तुत विज्ञान प्रदर्शनी उनकी रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच का परिचय देती है। ऐसे प्रयास बच्चों में प्रश्न पूछने, नए विचार विकसित करने और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास पैदा करते हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने शिक्षकवृंद की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाते नहीं हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य को गढ़ते हैं। शिक्षक राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव तैयार करते हैं। उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों से बच्चों में ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, संवेदना और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का आह्वान किया।

    अघोरेश्वर भगवान राम जी से हमारे परिवार का रहा है पुराना जुड़ाव : मुख्यमंत्री श्री साय

    मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर अघोरेश्वर भगवान राम जी और बनोरा आश्रम से अपने परिवार के पुराने आत्मीय जुड़ाव को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय केदारनाथ साय जी अघोरेश्वर भगवान राम जी के परम शिष्य थे। इस कारण बचपन से ही परिवार में अघोरेश्वर भगवान राम जी के प्रति श्रद्धा और उनके सेवा-दर्शन का वातावरण रहा है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि गांव बगिया से रायगढ़ की ओर आने-जाने के दौरान अनेक अवसरों पर उन्हें बाबा के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। उन्होंने पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से उनका स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा है। बनोरा आकर उन्हें सदैव आत्मीयता और आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है।

    मुख्यमंत्री ने अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट के पदाधिकारियों, संतवृंद, शिक्षकवृंद और आश्रम की सेवा गतिविधियों से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज के कल्याण के लिए सेवा भाव से किया गया प्रत्येक कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनता है।

    वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बनोरा आश्रम केवल आध्यात्मिक साधना का केंद्र नहीं है, बल्कि मानव सेवा, शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक सरोकारों का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। अघोरेश्वर भगवान राम जी ने अपने जीवन और कार्यों से सेवा, दया, करुणा तथा सामाजिक समरसता का जो संदेश दिया, बनोरा आश्रम उसी परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

    वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट द्वारा वर्षों से स्वास्थ्य, शिक्षा और जरूरतमंदों की सहायता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य समाज के लिए प्रेरणादायी हैं। नवीन विद्यालय भवन के माध्यम से इस सेवा परंपरा में शिक्षा का एक और सशक्त आयाम जुड़ा है। उन्होंने पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के मार्गदर्शन में आश्रम की सेवा गतिविधियों के निरंतर विस्तार की कामना की।

    8 एकड़ परिसर में एक लाख वर्गफीट में बना आधुनिक विद्यालय

    अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा द्वारा निर्मित अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर का नवीन परिसर करीब 8 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है। लगभग एक लाख वर्गफीट में निर्मित जी प्लस-2 भवन में विद्यार्थियों के लिए आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के साथ सुरक्षा और सर्वांगीण विकास का विशेष ध्यान रखा गया है।

    विद्यालय भवन में 41 कक्षाएं और 9 आधुनिक प्रयोगशालाएं बनाई गई हैं। विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए पुस्तकालय और तकनीक आधारित शिक्षा के लिए स्मार्ट क्लास की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। नर्सरी कक्षा के बच्चों के लिए खेल सामग्री एवं गतिविधि आधारित शिक्षण की व्यवस्था की गई है, जिससे प्रारंभिक अवस्था से ही बच्चों के शारीरिक, मानसिक और रचनात्मक विकास को प्रोत्साहित किया जा सके।

    विद्यालय के सुचारु संचालन के लिए 32 शिक्षकों एवं 14 कार्यालयीन कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है। आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों से युक्त यह परिसर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार और सर्वांगीण विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करेगा।

    मानव सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश देता है अघोरेश्वर भगवान राम जी का जीवन-दर्शन

    अघोरेश्वर भगवान राम जी का जीवन मानव सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता के आदर्शों को समर्पित रहा। उन्होंने समाज में उपेक्षित, वंचित एवं पीड़ित लोगों के प्रति संवेदना और सेवा को आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण आधार बनाया। विशेष रूप से कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के बीच जाकर उनकी सेवा करने तथा उन्हें अपनत्व और सम्मान देने के उनके प्रयास मानवता के प्रति उनके गहरे समर्पण के उदाहरण बने।

    अघोरेश्वर भगवान राम जी का जीवन-दर्शन प्रत्येक मनुष्य में ईश्वर के दर्शन, समानता, प्रेम, करुणा और जरूरतमंद की सहायता की प्रेरणा देता है। उन्होंने आध्यात्मिकता को समाज और मानव कल्याण से जोड़ने पर बल दिया। उनके द्वारा प्रतिपादित सेवा परंपरा और 19 सूत्रीय सिद्धांतों के अनुरूप विभिन्न आश्रमों एवं संस्थाओं के माध्यम से आज भी सामाजिक एवं मानवीय कार्य आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

    तीन दशक से सेवा और साधना का केंद्र बना बनोरा

    रायगढ़ जिले में स्थित ग्राम बनोरा आज आध्यात्मिक साधना के साथ शिक्षा, चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। करीब तीन दशक पहले पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के कर-कमलों से यहां अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट की नींव रखी गई थी। स्थापना के बाद से ट्रस्ट और उससे जुड़ी संस्थाओं द्वारा जरूरतमंदों की सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और सामाजिक संस्कारों से जुड़े अनेक कार्य निरंतर संचालित किए जा रहे हैं।

    बनोरा से प्रारंभ हुई सेवा की यह यात्रा समय के साथ विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों तक पहुंची है। आध्यात्मिक साधना के साथ मानव कल्याण को जोड़ने की यह परंपरा आश्रम की विशिष्ट पहचान बनी हुई है।

    इस अवसर पर लोकसभा सांसद श्री राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, नगर निगम महापौर श्री जीवर्धन चौहान, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुजाता सुकलाल चौहान, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट के पदाधिकारी, संतवृंद, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

  • बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा दाता बनने की ओर बढ़ते कदम

    बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा दाता बनने की ओर बढ़ते कदम

    रायपुर

     देश में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ आम नागरिकों को ऊर्जा उत्पादन में सहभागी बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। योजना ने घरों की छतों को केवल मकान का हिस्सा नहीं रहने दिया, बल्कि उन्हें बिजली उत्पादन की छोटी इकाइयों में बदलने का रास्ता खोला है। रूफटॉप सोलर संयंत्र के माध्यम से परिवार अपनी बिजली की जरूरतें पूरी करने के साथ अतिरिक्त बिजली को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार विद्युत ग्रिड में भेज सकते हैं। इस तरह बिजली का एक सामान्य उपभोक्ता ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया में सहभागी बनकर ‘ऊर्जा दाता’ की भूमिका की ओर बढ़ रहा है।

    सूर्य की रोशनी से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई राह

    भारत में सौर ऊर्जा की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए घरों की खाली छतों का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए करना स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत पात्र परिवार अपने घरों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करा सकते हैं और निर्धारित प्रावधानों के अनुसार केंद्र एवं राज्य सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

    योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी से संयंत्र स्थापित करने की प्रारंभिक लागत का बोझ कम होता है। वहीं, सौर ऊर्जा से घर की बिजली जरूरतों की पूर्ति होने पर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता और घरेलू बिजली खर्च में कमी आने की संभावना रहती है। आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पादन होने पर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजने की व्यवस्था नागरिकों को ऊर्जा व्यवस्था से सीधे जोड़ती है।

    सरगुजा में योजना के प्रति बढ़ा उत्साह, लक्ष्य से अधिक आए आवेदन

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को सरगुजा जिले में भी नागरिकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। वर्ष 2025-26 के लिए जिले में 2,000 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 3,282 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 3,222 आवेदनों में वेंडरों का चयन किया जा चुका है, जबकि 1,733 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।

    शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में योजना की पहुंच बढ़ रही है। अम्बिकापुर शहर में 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 2,158 आवेदन प्राप्त हुए और 1,360 घरों में संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं अम्बिकापुर ग्रामीण क्षेत्र में 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 1,124 आवेदन प्राप्त हुए तथा 373 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं।

    ये आंकड़े बताते हैं कि सरगुजा में नागरिक सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए तेजी से आगे आ रहे हैं। योजना के प्रति बढ़ती रुचि यह भी दर्शाती है कि परिवार बिजली की जरूरत पूरी करने के साथ ऊर्जा उत्पादन में अपनी भागीदारी को लेकर भी जागरूक हो रहे हैं।

    विनोद कुमार राय की छत बनी ऊर्जा उत्पादन का माध्यम

    अम्बिकापुर के राजेंद्र प्रसाद वार्ड, दर्रीपारा निवासी श्री विनोद कुमार राय के परिवार का अनुभव इस बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत करता है। सोलर संयंत्र स्थापित करने से पहले उनके घर का बिजली बिल कई बार 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच जाता था। इससे परिवार के मासिक बजट पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ता था।

    प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी मिलने के बाद श्री राय ने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया और अपने घर की छत पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कराया। लगभग 2 लाख रुपये की लागत वाले संयंत्र पर उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार से 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इस तरह उन्हें कुल 1.08 लाख रुपये की अनुदान सहायता प्राप्त हुई।

    श्री राय ने सब्सिडी की राशि सोलर संयंत्र के लिए लिए गए बैंक ऋण में जमा की। अब उनके लिए सौर ऊर्जा केवल बिजली खर्च कम करने का माध्यम नहीं है, बल्कि बिजली उत्पादन में स्वयं की भागीदारी का अवसर भी है। कई बार उनके घर में सोलर संयंत्र से उत्पादित बिजली घरेलू खपत से अधिक हो जाती है। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है और निर्धारित नियमों के अनुसार उसका लाभ मिलता है।

    नीधि वर्मा के परिवार को बिजली खर्च में राहत

    अम्बिकापुर के मायापुर निवासी श्रीमती नीधि वर्मा ने भी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अपने घर में सोलर बिजली संयंत्र स्थापित कराया। उनके अनुसार संयंत्र लगने से पहले घर का बिजली बिल लगभग 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह आता था। सौर ऊर्जा से घरेलू बिजली की जरूरतें पूरी होने के बाद बिजली खर्च में उल्लेखनीय राहत मिली है।

    श्रीमती वर्मा को भी योजना के तहत लगभग 1.08 लाख रुपये की सब्सिडी मिली, जिसमें केंद्र सरकार की 78 हजार रुपये और राज्य सरकार की 30 हजार रुपये की सहायता शामिल है। उनका कहना है कि पहले उनका परिवार केवल बिजली का उपभोक्ता था, लेकिन अब घर की छत से बिजली का उत्पादन भी कर रहा है। अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जाने से उनका परिवार ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से सहभागी बना है।

    स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप से खपत पर नजर

    रूफटॉप सोलर व्यवस्था के साथ डिजिटल तकनीक भी बिजली उपयोग को अधिक समझने और नियंत्रित करने में मदद कर रही है। स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप के माध्यम से उपभोक्ता अपने घर की बिजली खपत से संबंधित जानकारी देख सकते हैं।

    श्री विनोद कुमार राय बताते हैं कि स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप से वे प्रतिदिन की बिजली खपत पर नजर रखते हैं। इससे परिवार को अनावश्यक रूप से चल रहे विद्युत उपकरणों को बंद करने और बिजली के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूकता मिली है।

    इस तरह प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना केवल सोलर पैनल लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवारों में ऊर्जा बचत, स्मार्ट बिजली उपयोग और जिम्मेदार उपभोक्ता व्यवहार को भी बढ़ावा दे रही है।

    बिजली बिल में राहत के साथ पर्यावरण संरक्षण

    सौर ऊर्जा का महत्व केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है। सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन में करने से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलती है। एक घर की छत पर स्थापित सोलर संयंत्र छोटी इकाई जरूर है, लेकिन जब हजारों और लाखों परिवार इससे जुड़ते हैं तो सामूहिक रूप से यह स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का बड़ा माध्यम बन सकता है।

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना इसी जनभागीदारी को व्यापक स्वरूप देने का प्रयास है। योजना के माध्यम से परिवार अपनी ऊर्जा जरूरतों के प्रति अधिक आत्मनिर्भर बनने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं।

    उपभोक्ता से उत्पादक—ऊर्जा व्यवस्था में जनभागीदारी का नया आयाम

    परंपरागत व्यवस्था में आम नागरिक विद्युत ग्रिड से बिजली प्राप्त कर उसका उपयोग करता है और बिल का भुगतान करता है। रूफटॉप सोलर इस व्यवस्था में एक नया आयाम जोड़ता है। अब वही उपभोक्ता अपने घर की छत पर बिजली का उत्पादन कर सकता है, पहले अपनी जरूरत पूरी कर सकता है और परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त बिजली ग्रिड को उपलब्ध करा सकता है।

    यही प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है—ऊर्जा उत्पादन में नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी।

    हर छत बने ऊर्जा का स्रोत

    सरगुजा में प्राप्त आवेदनों और स्थापित सोलर संयंत्रों की संख्या यह संकेत देती है कि सौर ऊर्जा को लेकर नागरिकों की रुचि बढ़ रही है। शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण परिवार भी अपने घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए आगे आ रहे हैं।

    विनोद कुमार राय और नीधि वर्मा जैसे परिवारों के अनुभव इस बदलाव को जमीन पर साकार होते दिखाते हैं। जिन घरों में कभी बिजली बिल मासिक बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा होता था, उन्हीं घरों की छतें अब बिजली उत्पादन का माध्यम बन रही हैं।

    सौर ऊर्जा से बिजली खर्च में राहत, अतिरिक्त बिजली से ग्रिड को सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण—प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना घर-घर को ऊर्जा आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    जब अधिक से अधिक परिवार सौर ऊर्जा अपनाएंगे, तो ऊर्जा उत्पादन में जनभागीदारी का दायरा भी बढ़ेगा। इस तरह देश की हर ऐसी छत, जिस पर सौर पैनल स्थापित है, स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन में अपना योगदान देते हुए ‘विकसित भारत, विकसित छत्तीसगढ़’ की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण इकाई बन सकती है।

  • प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना के लिए संजय वास्तव ने प्रज्ज्वलित किया आशीर्वाद का दीप

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना के लिए संजय वास्तव ने प्रज्ज्वलित किया आशीर्वाद का दीप

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव ने आज अपने निवास पर आशीर्वाद का दीप प्रज्ज्वलित कर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि प्रधानमंत्री जी सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें तथा देशसेवा के अपने संकल्प को निरंतर आगे बढ़ाते हुए राष्ट्र को विकास और प्रगति की नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।

     संजय वास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रहित, जनसेवा और देश के विकास के प्रति उनका समर्पण सभी के लिए प्रेरणादायी है। उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु के लिए आज आशीर्वाद का दीप प्रज्ज्वलित कर ईश्वर से मंगलकामना की गई है।

    उन्होंने प्रदेशवासियों एवं देशवासियों से आह्वान किया कि प्रधानमंत्री जी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सुखमय जीवन की कामना के लिए अपने-अपने घरों में आशीर्वाद का दीप प्रज्ज्वलित करें और इस मंगलकामना में सहभागी बनें।

     वास्तव ने कहा कि दीप प्रज्ज्वलन हमारी आस्था, श्रद्धा और शुभकामनाओं का प्रतीक है। आइए, हम सभी मिलकर प्रधानमंत्री जी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन के लिए प्रार्थना करें और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक मजबूत बनाएं।

  • छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा पर्यटन इकाइयॉं लीज़ पर देने की तैयारी, निवेशकों के लिए खुलेगा नया अवसर

    छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा पर्यटन इकाइयॉं लीज़ पर देने की तैयारी, निवेशकों के लिए खुलेगा नया अवसर

    रायपुर

     छत्तीसगढ़ में पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देने और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की विभिन्न पर्यटन इकाइयों को लीज़ पर दिए जाने की प्रक्रिया को निवेशकों के लिए सरल एवं सुगम बनाने के उद्देश्य से ‘एक्सप्लोर, इनवेस्ट, ट्रांसफार्म’ थीम पर प्री-एनआईटी (नोटिस इनवाइटिंग टेंडर) कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कॉन्फ्रेंस में निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स को पर्यटन बोर्ड की विभिन्न प्रॉपर्टीज, लीज़ एवं टेंडर प्रक्रिया, उपलब्ध सरकारी प्रोत्साहनों, पीपीपी मॉडल तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। साथ ही पर्यटन क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाकर पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को नई गति देने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    पर्यटन बोर्ड की प्रॉपर्टीज में निवेश के अवसरों की दी जानकारी

    कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे के प्रस्तुतीकरण से हुई। उन्होंने उपस्थित निवेशकों एवं स्टेकहोल्डर्स को बोर्ड के विभिन्न होटल, मोटल, रिसॉर्ट एवं पर्यटन इकाइयों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रॉपर्टीज की लोकेशन, उपलब्ध सुविधाओं, प्रमुख विशेषताओं तथा पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में उनके विकास की संभावनाओं से अवगत कराया।

    श्री चौबे ने बताया कि छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की कई प्रॉपर्टीज प्रमुख पर्यटन स्थलों और आकर्षक लोकेशन पर स्थित हैं। निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता एवं निवेश के माध्यम से इन इकाइयों में पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं का विकास किया जा सकता है। उन्होंने लीज़ एवं टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स की जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों का समाधान भी किया।

    उन्होंने कहा कि बोर्ड का प्रयास है कि निवेशकों को लीज़ प्रक्रिया से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां स्पष्ट, पारदर्शी और सुगम तरीके से उपलब्ध कराई जाएं, ताकि अधिक से अधिक योग्य निवेशक इसमें भाग ले सकें और पर्यटन इकाइयों का बेहतर संचालन एवं विकास सुनिश्चित हो सके।

    पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को मिल रही नई दिशा

    पर्यटन एवं संस्कृति सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने निवेशकों एवं स्टेकहोल्डर्स को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार एवं राज्य नेतृत्व के मार्गदर्शन में पर्यटन उद्योग को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद छत्तीसगढ़ स्पष्ट रणनीति के साथ पर्यटन विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य में पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय   संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और विविध पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़कर पर्यटन गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य में सुरक्षा एवं परिस्थितियों में सुधार के साथ पर्यटन गतिविधियों में भी बढ़ोतरी हुई है और निवेशकों की रुचि पर्यटन क्षेत्र में बढ़ रही है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य में पर्यटन क्षेत्र को निवेश के लिए अनुकूल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के रिसॉर्ट्स और अन्य प्रॉपर्टीज की आकर्षक लोकेशन निजी क्षेत्र के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती हैं।

    पर्यटन को अनुभव और रोजगार से जोड़ने पर जोर

    छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विविधताओं से समृद्ध राज्य है। यहां के पर्यटन स्थल केवल भ्रमण के केंद्र नहीं हैं, बल्कि राज्य की संस्कृति, परंपराओं,   प्राकृतिक विरासत और स्थानीय जीवन को जानने-समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के होटल एवं रिसॉर्ट अपनी आकर्षक लोकेशन के कारण पर्यटकों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। बोर्ड का प्रयास है कि इन प्रॉपर्टीज का विकास इस तरह किया जाए कि वे पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ छत्तीसगढ़ के पर्यटन अनुभव को भी और समृद्ध बनाएं।

    श्री शर्मा ने कहा कि पर्यटन के विकास के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़ते हैं। राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

    सिंगल विंडो से निवेश प्रक्रिया होगी आसान

    कॉन्फ्रेंस में निवेशकों के लिए प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने पर विशेष जोर दिया गया। निवेशकों को विभिन्न विभागों और प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम हो, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से निवेश प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने की दिशा में जानकारी साझा की गई।

    इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न प्रक्रियाओं एवं आवश्यक अनुमतियों को सरल बनाना तथा पर्यटन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना है। इससे निवेशकों को आवश्यक जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने और परियोजनाओं की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।

    सब्सिडी और सरकारी प्रोत्साहनों की जानकारी

    कार्यक्रम में सीएसआईडीसी के उप संचालक श्री अमेय त्रिपाठी ने छत्तीसगढ़ में पर्यटन एवं संबंधित क्षेत्रों में निवेश के लिए उपलब्ध सब्सिडी, प्रोत्साहन एवं अन्य सरकारी सुविधाओं की जानकारी दी। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पात्र परियोजनाओं, निवेश सुविधाओं तथा विभिन्न प्रकार की सहायता और प्रोत्साहन योजनाओं से संबंधित जानकारी साझा की गई।

    पीपीपी मॉडल से पर्यटन विकास को नई गति देने पर चर्चा

    अर्नेस्ट एंड यंग के पार्टनर एवं पीपीपी एक्सपर्ट श्री अंकुर गर्ग ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने पीपीपी मॉडल की संरचना, सरकारी एवं निजी क्षेत्र की भूमिका, निवेश, परियोजना संचालन और राजस्व मॉडल सहित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

    उन्होंने पर्यटन परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता एवं निवेश का उपयोग करते हुए सुविधाओं के विकास और संचालन को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। कॉन्फ्रेंस में पीपीपी मॉडल को पर्यटन क्षेत्र में निवेश और अधोसंरचना विकास के एक संभावित माध्यम के रूप में समझाया गया।

    डिजिटल पहचान सत्यापन से पर्यटन सेवाओं को सुगम बनाने पर जोर

    कार्यक्रम में यूआईडीएआई दिल्ली के डायरेक्टर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रवीण चौधरी ने आधार आधारित डिजिटल एवं ऑफलाइन वेरिफिकेशन व्यवस्था की उपयोगिता के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल पहचान सत्यापन की व्यवस्था पर्यटन क्षेत्र के साथ-साथ पुलिस एवं अन्य सरकारी विभागों के लिए भी उपयोगी हो सकती है।

    उन्होंने सिक्योर क्यूआर कोड के माध्यम से दस्तावेजों की प्रामाणिकता जांचने की प्रक्रिया की जानकारी दी। इससे अधिकृत संस्थाओं को पहचान एवं दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने बताया कि ऐसी डिजिटल व्यवस्था का उपयोग संबंधित संस्था के पंजीकरण, लागू नियमों और वैध उद्देश्य के अनुरूप किया जाना आवश्यक है।

    ‘एक्सप्लोर, इनवेस्ट, ट्रांसफार्म’ से पर्यटन निवेश को नई दिशा

    ‘एक्सप्लोर, इनवेस्ट, ट्रांसफार्म’ थीम पर आयोजित प्री-एनआईटी कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ में पर्यटन निवेश की संभावनाओं को निवेशकों के सामने प्रस्तुत करना और टूरिज्म बोर्ड की विभिन्न होटल, मोटल एवं रिसॉर्ट इकाइयों को लीज़ पर देने की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट एवं सुगम बनाना रहा। कॉन्फ्रेंस में सरकारी प्रोत्साहनों, सिंगल विंडो सुविधा, पीपीपी मॉडल, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और डिजिटल तकनीक के उपयोग पर व्यापक चर्चा हुई।

    कार्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ को पर्यटन निवेश के लिए संभावनाशील गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने के साथ राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन संपदा को निवेश, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में संवाद को आगे बढ़ाया गया।

  • तंत्र क्रिया के आरोप में छात्र की TC का मामला गरमाया, डॉ. वर्णिका ने निरस्त करने के दिए निर्देश

    तंत्र क्रिया के आरोप में छात्र की TC का मामला गरमाया, डॉ. वर्णिका ने निरस्त करने के दिए निर्देश

    तंत्र क्रिया के आरोप में छात्र को टीसी, आयोग ने लिया कड़ा संज्ञान

    टीसी निरस्त करने का डॉ वर्णिका ने दिया त्वरित निर्देश 
    रायपुर

    प्रयास विद्यालय, रायपुर में कक्षा 9वीं के छात्र को विद्यालय से टीसी देकर बाहर किए जाने से संबंधित मामला छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के संज्ञान में आया। मामले को लेकर बच्चे के पालक की ओर से आवेदन में आरोप लगाया गया है कि छात्र को विद्यालय से निष्कासित करते हुए टीसी जारी की गई। साथ ही यह बात भी सामने आई है कि छात्र के तंत्र क्रिया में संलिप्त होने के कथित आरोप के चलते उसके विरुद्ध कार्रवाई की गई थी। हालांकि, तंत्र क्रिया में संलिप्तता संबंधी आरोप की कोई पुष्टि नहीं हुई है। प्राप्त आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि छात्र के पालक को समुचित जानकारी दिए बिना उसे कक्षा से बाहर कर टीसी प्रदान की गई, जिस पर पालक द्वारा विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उचित जांच एवं कार्रवाई की मांग की गई। 

    आवेदन का अवलोकन करने के पश्चात आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13(1)(ज) एवं धारा 14 के तहत प्रकरण का संज्ञान लिया गया है। आयोग द्वारा सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, रायपुर को मामले की विस्तृत जांच कर तथ्यात्मक एवं लिखित प्रतिवेदन आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास से दूरभाष पर चर्चा कर मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। आयोग ने छात्र की टीसी निरस्त कर उसकी पढ़ाई पुनः जारी रखने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी परिस्थिति में उसकी शिक्षा प्रभावित न हो। मामले की जांच के लिए प्रयास विद्यालय, रायपुर के प्राचार्य एवं अधीक्षक को आपातकालीन खंडपीठ में 21 सितंबर 2026 को दोपहर 02:00 बजे आयोग कार्यालय में उपस्थित होकर संबंधित दस्तावेजों एवं अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है। आयोग अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा ने निर्देशित किया है कि प्रकरण के अंतिम निराकरण तक छात्र के शैक्षणिक हित ध्यान में रखते हुए उसकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रखी जाए।

  • खपरगंज में गणेशोत्सव प्रेम सद्भाव की मिसाल,57 वर्षों से चली आ रही शानदार परंपरा

    खपरगंज में गणेशोत्सव प्रेम सद्भाव की मिसाल,57 वर्षों से चली आ रही शानदार परंपरा

    बिलासपुर 
     खपरगंज गणेश उत्सव समिति का यह गणेश पंडाल खपरगंज चौक का है जहां की फिज़ा में कुछ दिन पहले नफरत का ज़हर  फैलाने की कोशिश की गई थी। पर यह अपना शहर है जहां प्रेम की अरपा धारा बहती है । खपरगंज के लोगों ने अपने चौक में पिछले 57 वर्षों से चली आ रही परंपरा बनाए रखी और पूरे जोश और एकता के साथ गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की गई । हर साल की तरह उस चौक के पूरे हिंदू, मुस्लिम और सभी समाज के भाई बहनों ने मिलकर त्यौहार की गरिमा और सौहार्द बनाए रखा । आज गणेश पंडाल के इस मंच पर नन्हे नन्हे बच्चों की प्रस्तुति हुई। रंग बिरंगी वेशभूषा में पहचान में नहीं आ रहा है कि कौन बच्चा हिंदू परिवार का है और कौन बच्चा मुस्लिम परिवार का है । यह है हमारी मजबूत एकता की मिसाल ।

    वह एकता जो हमारे बुजुर्गों ने हमारे संस्कार में दी है । इस मंच से ही पैगाम सब तरफ पहुंच गया है कि कोई कितनी भी कोशिश कर ले हमारे लहू का रंग लाल है लाल ही रहेगा हमारे अंदर किसी के उकसाने से किसी के बहकाने से नफरत नहीं आ सकती।हमारे त्यौहार एक है।हमारा साथ एक है ।हमारे पड़ोसी एक है, हमारा शहर एक है ,हमारा देश एक है । सभी दुआ करिए , प्रार्थना करिए कि पूरे देश में हमारे शहर में हमारे मोहल्ले में हमारा आपस का प्यार हमारी एकता हमेशा बनी रहे ।इसे किसी की बुरी नजर ना लगे और जो लोग भटके हुए हैं उन्हें सही राह दिखे वह भी प्यार के साथ आपस में एक दूसरे से मिलकर रहे । जय हिंद ।

  • PSSOU के दो अहम MOU, शिक्षा और जनजातीय शोध को मिलेगा नया मंच

    PSSOU के दो अहम MOU, शिक्षा और जनजातीय शोध को मिलेगा नया मंच

    PSSOU के दो अहम MOU, शिक्षा और जनजातीय शोध को मिलेगा नया मंच

    रायपुर
    पण्डित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर ने शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MOU) किए हैं। विश्वविद्यालय ने *महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बिलासपुर (MUMT) तथा जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के साथ समझौता किया है। इन समझौतों के जरिए अकादमिक गतिविधियों, संयुक्त शोध, प्रशिक्षण, नवाचार और जनजातीय विषयों पर अध्ययन को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का आधार तैयार हुआ है।

     अकादमिक गतिविधियों से लेकर डिजिटल शिक्षा तक सहयोग

            महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते के तहत दोनों संस्थान अकादमिक, अनुसंधान, प्रशिक्षण, नवाचार, विस्तार और संस्थागत विकास के क्षेत्र में सहयोग करेंगे। संयुक्त संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यान और अकादमिक आयोजनों के साथ अंतर्विषयी अध्ययन तथा पाठ्यचर्या से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।  दोनों संस्थान MOOCs, मुक्त शैक्षिक संसाधन (OER), डिजिटल एवं स्व-अध्ययन सामग्री तथा तकनीक आधारित शिक्षण संसाधनों के विकास में भी सहयोग कर सकेंगे।

     संयुक्त शोध और प्रकाशन को बढ़ावा

            MOU के तहत संयुक्त अनुसंधान, सर्वेक्षण, क्षेत्र अध्ययन, प्रायोजित शोध, परामर्श और संयुक्त प्रकाशन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए अनुसंधान पद्धति, प्रशिक्षण, विशेषज्ञ व्याख्यान और संकाय विकास कार्यक्रमों के आयोजन की संभावनाएं भी रखी गई हैं।

              विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, परियोजना कार्य, क्षेत्रीय अनुभव, शैक्षिक भ्रमण, कौशल विकास, करियर मार्गदर्शन और उद्यमिता से जुड़े अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी दोनों संस्थान मिलकर काम कर सकेंगे।

     जनजातीय समाज से जुड़े विषयों पर विशेष फोकस

            जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के साथ हुए MOU में जनजातीय मुद्दों और अनुसूचित जनजातियों से जुड़े विषयों पर संयुक्त अध्ययन एवं शोध को प्रमुखता दी गई है। सम्मेलन, संगोष्ठी, प्रकाशन और ज्ञान- साझाकरण जैसी गतिविधियों के माध्यम से जनजातीय विषयों पर अकादमिक विमर्श को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

              समझौते के तहत जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र रणनीति निर्माण, योजना और कार्य-रोडमैप तैयार करने में बौद्धिक सहयोग प्रदान करेगा। आवश्यकता के अनुसार केंद्र अपनी विशेषज्ञता और ज्ञान भी उपलब्ध करा सकेगा।

     दो सदस्यीय संचालन समिति करेगी समन्वय

            MOU के तहत प्रस्तावित गतिविधियों के समन्वय और निगरानी के लिए दोनों पक्षों से एक-एक प्रतिनिधि वाली दो सदस्यीय संचालन समिति गठित करने का प्रावधान किया गया है। बौद्धिक संपदा, स्वामित्व, प्रोत्साहन और ज्ञान-साझाकरण से जुड़े विषय संबंधित कार्य की प्रकृति के अनुसार आपसी सहमति से तय किए जाएंगे।

     शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर

           विश्वविद्यालय के अनुसार दोनों समझौतों का उद्देश्य विशेषज्ञता और संसाधनों के साझा उपयोग के साथ संस्थागत सहयोग को व्यावहारिक रूप देना है। इससे शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए अकादमिक एवं शोध के नए अवसर विकसित हो सकेंगे।

            वहीं जनजातीय अनुसंधान से जुड़े समझौते के माध्यम से जनजातीय समाज, संस्कृति, परंपरा और समसामयिक विषयों पर अध्ययन को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

          इस अवसर पर PSSOU की ओर से कुलपति प्रो. वी. के. सारस्वत एवं कुलसचिव श्री चंद्रभूषण मिश्र उपस्थित रहे। MUMT की ओर से कुलपति प्रो. डॉ. नरेश कुमार तिवारी एवं कुलसचिव डॉ. विजय गरुडिक शामिल हुए।

            जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली की ओर से प्रदेश समन्वयक राजीव शर्मा एवं सामाजिक कार्यकर्ता वैभव सुरंगे उपस्थित रहे।

  • सेमीकंडक्टर से ग्रीन एनर्जी तक, भविष्य के उद्योगों का नया गंतव्य बन रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री

    सेमीकंडक्टर से ग्रीन एनर्जी तक, भविष्य के उद्योगों का नया गंतव्य बन रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री

    भविष्य के उद्योगों का नया केंद्र बनने की ओर अग्रसर छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    नए दौर की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो रहा छत्तीसगढ़, भविष्य के उद्योगों पर हमारा फोकस : मुख्यमंत्री

    सेमीकंडक्टर से ग्रीन एनर्जी तक, भविष्य के उद्योगों का नया गंतव्य बन रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री

    छत्तीसगढ़ निवेश और उद्योगों की नई संभावनाओं का केंद्र : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    मुख्यमंत्री साय ने रायपुर में किया ‘इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026’ का शुभारंभ

    देशभर के 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमी तीन दिवसीय औद्योगिक मेले में ले रहे हिस्सा

    नई औद्योगिक विकास नीति से छत्तीसगढ़ में निवेश को मिली नई गति, प्रस्तावों के साथ धरातल पर भी उतर रही परियोजनाएं : मुख्यमंत्री साय

    आईटी, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और ग्रीन एनर्जी सहित नए एवं उभरते सेक्टरों पर राज्य सरकार का विशेष फोकस

    निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ उद्योगों के लिए ‘एक्सीलरेटर’ की भूमिका निभा रही राज्य सरकार

    स्थानीय संसाधनों के वैल्यू एडिशन और युवाओं के रोजगार को औद्योगिक विकास का आधार बना रही सरकार

    मुख्यमंत्री ने औद्योगिक स्टॉलों का किया अवलोकन, देशभर से आए उद्यमियों से किया आत्मीय संवाद

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों से आए उद्यमियों, निवेशकों और औद्योगिक प्रतिनिधियों का छत्तीसगढ़ की धरती पर स्वागत करते हुए उन्हें प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने और यहां उपलब्ध निवेश की व्यापक संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज अपनी पारंपरिक औद्योगिक ताकत के साथ नई अर्थव्यवस्था और उभरते उद्योगों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। खनिज, ऊर्जा, वन संपदा, पर्याप्त मानव संसाधन और देश के मध्य में अनुकूल भौगोलिक स्थिति हमारी स्वाभाविक ताकत है। राज्य सरकार इन खूबियों को आधुनिक तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और निवेशक हितैषी नीतियों से जोड़कर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

    उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की भूमिका केवल उद्योगों के लिए नियामक की नहीं है। हम सरकार को उद्योग और निवेश की राह आसान करने वाले सहयोगी और ‘एक्सीलरेटर’ के रूप में विकसित कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि निवेश का प्रस्ताव आने से लेकर उद्योग के धरातल पर स्थापित होने तक हर चरण में निवेशकों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था मिले।

    मुख्यमंत्री ने लघु उद्योग भारती द्वारा राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक आयोजन के लिए रायपुर का चयन किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं। बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई का विस्तार होने से स्थानीय स्तर पर उद्यमिता बढ़ती है, रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और आर्थिक गतिविधियों का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि लघु उद्योग भारती देशभर के 750 से अधिक जिलों में उद्यमियों को संगठित कर उद्योग और उद्यमिता को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ के 25 जिलों में भी 1200 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्योग संगठन से जुड़े हैं। 18 से 20 सितम्बर तक आयोजित इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में देशभर के 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों की भागीदारी इस आयोजन के महत्व को दर्शाती है।

    उन्होंने कहा कि यह औद्योगिक मेला केवल उत्पादों और तकनीकों की प्रदर्शनी नहीं है। यह उद्यमियों के बीच संवाद, अनुभव, नवाचार और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से नए व्यावसायिक संबंध बनेंगे, नई संभावनाओं पर चर्चा होगी और युवाओं को उद्योग तथा उद्यमिता की दुनिया को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

    नई औद्योगिक नीति से निवेश को मिली नई गति

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने उद्योग जगत, निवेशकों और विभिन्न हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू की है। इस नीति का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि ऐसा औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें निवेश, उत्पादन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था एक साथ आगे बढ़ें।

    उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति में प्रक्रियाओं के सरलीकरण, निवेशकों को प्रोत्साहन, नए एवं उभरते सेक्टरों को बढ़ावा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। नीति लागू होने के बाद प्रदेश को बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और प्रसन्नता की बात है कि अनेक परियोजनाओं पर धरातल पर काम भी प्रारंभ हो चुका है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब केवल कोयला, स्टील और सीमेंट जैसे पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार प्रदेश के औद्योगिक आधार को विविधता देने के लिए आईटी, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल, ग्रीन एनर्जी सहित विभिन्न नए और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में लगभग 1100 करोड़ रुपए की सेमीकंडक्टर परियोजना पर कार्य प्रारंभ होना इस बदलते औद्योगिक परिदृश्य का उदाहरण है।

    उन्होंने कहा कि नवा रायपुर को आधुनिक टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। यहां आधुनिक अधोसंरचना के साथ नए उद्योगों और तकनीक आधारित कंपनियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। राज्य में टेक्नोलॉजी हब और इंडस्ट्री एक्सीलेंस हब विकसित करने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ रही है।

    निवेशकों के लिए प्रक्रियाएं सरल, सरकार बनेगी सहभागी

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी राज्य में उद्योग तभी तेजी से आगे बढ़ सकते हैं, जब निवेशकों को नीतिगत स्थिरता के साथ सरल और पारदर्शी प्रक्रियाएं मिलें। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योग स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में काम किया है, ताकि निवेशकों को विभिन्न कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।

    उन्होंने कहा कि उद्योगों को समय पर आवश्यक भूमि, अधोसंरचना और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार चाहती है कि उद्यमी अपना समय और ऊर्जा प्रक्रियागत जटिलताओं में लगाने के बजाय उत्पादन, नवाचार, विस्तार और रोजगार सृजन में लगाएं।

    खनिज, ऊर्जा और वन संपदा छत्तीसगढ़ की बड़ी ताकत

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से देश के सबसे समृद्ध राज्यों में शामिल है। कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज यहां प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इन संसाधनों का प्रदेश के भीतर अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन हमारी औद्योगिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत से अधिक भू-भाग वनाच्छादित है। प्रदेश में इमली, महुआ, चिरौंजी, हर्रा-बहेड़ा सहित अनेक प्रकार की लघु वनोपज और औषधीय संसाधन उपलब्ध हैं। इनका वैज्ञानिक प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन कर वनांचल में उद्योग एवं रोजगार की नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे स्थानीय समुदायों और जनजातीय परिवारों की आय बढ़ाने के भी नए रास्ते खुलेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता का एक और मजबूत आधार है। प्रदेश में लगभग 30 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन की क्षमता है। ऊर्जा क्षेत्र में नए निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं और आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। पर्याप्त बिजली, जल संसाधन, मानव संसाधन, प्राकृतिक संपदा और देश के मध्य में स्थित होने का भौगोलिक लाभ छत्तीसगढ़ को उद्योगों के लिए स्वाभाविक रूप से अनुकूल बनाता है।

    स्थानीय युवाओं के रोजगार से जुड़ेगा औद्योगिक विकास

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि औद्योगिक विकास का वास्तविक लाभ तभी है, जब उससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ें। इसीलिए नई औद्योगिक नीति में स्थानीय रोजगार को विशेष महत्व दिया गया है। अधिक संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन के प्रावधान किए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा औद्योगिक विकास है, जिसमें प्रदेश का युवा केवल रोजगार तलाशने वाला न रहे, बल्कि अपने कौशल, नवाचार और उद्यमशीलता के बल पर रोजगार देने वाला भी बने। एमएसएमई और स्टार्टअप इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सरकार युवाओं को कौशल, तकनीक, बाजार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    बस्तर में पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए व्यापक संभावनाएं

    मुख्यमंत्री साय ने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और पर्यटन संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों के साथ पर्यटन क्षेत्र में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार पर्यटन को रोजगार और स्थानीय आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में आगे बढ़ा रही है।

    उन्होंने कहा कि बस्तर के जलप्रपात, घने वन, प्राकृतिक स्थल और विशिष्ट जनजातीय संस्कृति देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। होम-स्टे जैसी पहलों के माध्यम से पर्यटन को सीधे स्थानीय परिवारों की आजीविका से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए उद्यमियों से आग्रह किया कि वे औद्योगिक मेले के साथ छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को भी देखें और प्रदेश में उपलब्ध निवेश की विविध संभावनाओं को करीब से समझें।

    उद्योगों की लंबी उड़ान के लिए तैयार है छत्तीसगढ़ : उपमुख्यमंत्री अरुण साव

    उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर का 14वां संस्करण छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास यात्रा के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश उद्योगों के क्षेत्र में नई और लंबी उड़ान के लिए तैयार है।

    उन्होंने कहा कि यह आयोजन देश के अलग-अलग हिस्सों से आए उद्यमियों को एक-दूसरे के उत्पाद, तकनीक, नवाचार और अनुभव को समझने तथा नई व्यावसायिक संभावनाएं तलाशने का अवसर देगा। उद्योगों के विस्तार से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने उद्यमियों से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक संभावनाओं के साथ प्रदेश के पर्यटन और तीर्थ स्थलों को भी देखने का आग्रह किया।

    निवेश प्रस्ताव अब धरातल पर ले रहे आकार : उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन

    उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में लागू नई औद्योगिक नीति में निवेशकों को आकर्षित करने और उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। सरकार के प्रयासों से प्रदेश में निवेश प्रस्ताव आने के साथ उनका क्रियान्वयन भी धरातल पर दिखाई देने लगा है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में छोटे और बड़े नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिनसे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। लघु उद्योगों को प्रोत्साहन, उद्यमियों की समस्याओं के समाधान और नए निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। अलग-अलग सेक्टरों में संवाद और कार्यशालाओं के माध्यम से उद्यमियों को राज्य की नीतियों तथा उपलब्ध अवसरों से जोड़ा जा रहा है।

    लघु उद्योग भारती के प्रकाश चंद्र गुप्त ने कहा कि संगठन पिछले 32 वर्षों से देश के सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को संगठित करने तथा उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं को केंद्र एवं राज्य सरकारों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारत में लघु और विकेंद्रीकृत उद्योगों की समृद्ध परंपरा रही है। वर्तमान समय में इन्हें आधुनिक बाजार, नई तकनीक और मजबूत व्यावसायिक नेटवर्क से जोड़ने की आवश्यकता है। इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर इसी उद्देश्य से उद्यमियों को साझा मंच उपलब्ध करा रहा है। तीन दिवसीय आयोजन में उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन के साथ नए व्यावसायिक संपर्क बनाने, नवाचार साझा करने और भविष्य की औद्योगिक संभावनाओं पर संवाद करने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का किया अवलोकन, उद्यमियों से जाना उनके नवाचारों के बारे में

    इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026 में देश और प्रदेश की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों द्वारा बड़ी संख्या में स्टॉल लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मेले के विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और प्रदर्शित उत्पादों, तकनीकों एवं नवाचारों की जानकारी ली।

    प्रदर्शनी में पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों एवं उपचार पद्धतियों से लेकर आधुनिक मशीनरी, आईटी और नवीन तकनीक आधारित औद्योगिक उत्पादों का प्रदर्शन किया गया है। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों और औद्योगिक प्रतिनिधियों से आत्मीय संवाद कर उनकी व्यावसायिक गतिविधियों, नवीन तकनीकों और औद्योगिक अनुभवों की जानकारी ली। उन्होंने उद्यमियों से छत्तीसगढ़ में उपलब्ध निवेश अवसरों और उद्योगों के लिए विकसित किए जा रहे अनुकूल वातावरण पर भी चर्चा की।

    मुख्यमंत्री साय ने आयोजन को देशभर के उद्यमियों के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण सेतु बताते हुए लघु उद्योग भारती के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आयोजन की तैयारियों और औद्योगिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पदाधिकारियों, सदस्यों एवं प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने संसाधनों, सामर्थ्य और नई संभावनाओं के साथ औद्योगिक विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। राज्य सरकार सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़े—सभी प्रकार के उद्योगों के लिए सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने देशभर के उद्यमियों का आह्वान किया कि वे छत्तीसगढ़ आएं, यहां की संभावनाओं को समझें, निवेश करें और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनें।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी, लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी तथा देशभर से आए उद्यमी एवं औद्योगिक प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

  • स्टार्टअप और आधुनिक शिक्षा पर जोर, छत्तीसगढ़ में 9 हजार सरकारी पदों पर सीधी भर्ती की तैयारी

    स्टार्टअप और आधुनिक शिक्षा पर जोर, छत्तीसगढ़ में 9 हजार सरकारी पदों पर सीधी भर्ती की तैयारी

    कौशल, रोजगार, स्टार्टअप और आधुनिक शिक्षा पर सरकार का जोर, 18 हजार से अधिक युवाओं को मिला प्रशिक्षण

     9 हजार सरकारी पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया

    छत्तीसगढ़ सरकार की रोजगार और कौशल विकास पहल से युवाओं को मिल रहे अवसर 

    रायपुर
    युवाओं को विकास के केंद्र में रखते हुए छत्तीसगढ़ की श्री विष्णु देव साय की सरकार कौशल विकास, रोजगार, उच्च शिक्षा, उद्यमिता और खेल क्षेत्र में अवसरों का विस्तार कर रही है। पिछले करीब तीन वर्षों में जब से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सत्ता संभाली है, युवाओं को सक्षम, रोजगारपरक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं और पहल शुरू की हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य शिक्षा और प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ते हुए राज्य की युवा आबादी को विकास की नई ताकत में बदलना है। लक्ष्य केवल युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें कुशल, आत्मनिर्भर, नवाचारी और भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार मानव संसाधन के रूप में विकसित करना है।

    18 हज़ार 330 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है

            प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत राज्य के 26 जिलों में करीब 18 हज़ार 330 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इस पर लगभग 29 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं, 35 हजार और युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य सरकार ने युवाओं के कौशल विकास के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है, ताकि प्रशिक्षण को उद्योगों और बाजार की बदलती जरूरतों के अनुसार बनाया जा सके।

    युवा को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, अवसर और पारदर्शी व्यवस्था

         मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा, “युवा छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत और भविष्य की उम्मीद हैं। हमारा प्रयास है कि हर युवा को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, अवसर और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध हो। युवा सशक्तीकरण विकसित छत्तीसगढ़ के हमारे विजन का केंद्र है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप है।”

    पारदर्शी भर्ती पर फोकस

            युवा केंद्रित एजेंडे में रोजगार के साथ सरकारी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता को भी प्राथमिकता दी गई है। राज्य में करीब 9 हजार रिक्त सरकारी पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा क्लास-3 और क्लास-4 के पदों पर भर्ती को एकीकृत, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए नए छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल का गठन किया गया है।

     युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकार द्वारा निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था

            सरकार ने युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर अवसर देने के लिए CG-ACE पहल शुरू की है। इसके तहत NEET, CLAT, JEE, UPSC, CGPSC, बैंकिंग, SSC और रेलवे जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए 33 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार

          युवा विकास की रणनीति में विष्णु देव साय सरकार ने उच्च शिक्षा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है। उच्च शिक्षा के बजट में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-26 में इसे बढ़ाकर 1,822.75 करोड़ रुपये किया गया है। राज्य के पांच सरकारी कॉलेजों को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें जशपुर, रायपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार और रायगढ़ के कॉलेज शामिल हैं। इसी तरह, आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की तर्ज पर कवर्धा, जशपुर, रायगढ़ और जगदलपुर में छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CGIT) विकसित किए गए हैं। आने वाले समय में रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में भी इनके विस्तार की योजना है।

          धनंजय राठौर
          संयुक्त संचालक, 
         जनसम्पर्क (रायपुर)

  • महादेव घाट पर महाआरती और ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम, मुख्यमंत्री साय समेत कई हस्तियां रहीं मौजूद

    महादेव घाट पर महाआरती और ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम, मुख्यमंत्री साय समेत कई हस्तियां रहीं मौजूद

    रायपुर
    खारुन नदी के पावन तट, महादेव घाट, रायपुर पर नगर पालिका निगम रायपुर द्वारा आयोजित भव्य महाआरती एवं “आशीर्वाद का दिया — जनसेवा से देशसेवा” कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी, साध्वी प्रज्ञा जी, माननीय श्रीमती कौशल्या साय जी, विधायकगण, निगम-आयोग एवं मंडल के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे जी के साथ छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू जी उपस्थित हुई l

    भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने एवं जन्मदिवस के शुभ अवसर पर तेलीबांधा, रायपुर में आयोजित भव्य ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू जी ने सहभागिता की।

    इस अवसर पर 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित किए गए, जिससे रायपुर दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। इस ऐतिहासिक आयोजन का गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में रिकॉर्ड दर्ज हुआ।

    साथ ही ‘प्रोजेक्ट अक्षरा – स्क्रीन से दूरी, पढ़ना है जरूरी’ का शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य बच्चों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना और उन्हें अनावश्यक स्क्रीन समय से दूर करना है।

    🪔 आशीर्वाद का दीया | ऐतिहासिक अवसर 🪔