Category: छत्तीसगढ़

  • ​1,064 सोलर ड्यूल पंपों के लक्ष्य में से 849 पंप स्थापित; दूरस्थ पारा-टोलों को ‘झिरिया’ के दूषित जल से मिली मुक्ति

    ​1,064 सोलर ड्यूल पंपों के लक्ष्य में से 849 पंप स्थापित; दूरस्थ पारा-टोलों को ‘झिरिया’ के दूषित जल से मिली मुक्ति

    अबूझमाड़ के दुर्गम अंचल में 'सौर क्रांति': सोलर ड्यूल पंप से 371 गांवों तक पहुँच रहा स्वच्छ पेयजल

    ​जल जीवन मिशन एवं क्रेडा की संयुक्त पहल से नारायणपुर जिले के वनांचल में बदली पेयजल की तस्वीर

    ​1,064 सोलर ड्यूल पंपों के लक्ष्य में से 849 पंप स्थापित; दूरस्थ पारा-टोलों को 'झिरिया' के दूषित जल से मिली मुक्ति

    सौर ऊर्जा आधारित तकनीक से विद्युतविहीन क्षेत्रों में 24/7 सुरक्षित पेयजल की सुनिश्चितता

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    रायपुर,

           छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के दुर्गम वनांचल एवं पथरीले अंचलों में, जहाँ कभी एक-एक मटका पानी के लिए ग्रामीणों को मीलों का कठिन सफर तय करना पड़ता था या झिरिया के दूषित पानी पर निर्भर रहना पड़ता था, वहाँ अब सौर ऊर्जा एक वरदान बनकर उभरी है। राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप जल जीवन मिशन और छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के साझा प्रयासों से संचालित सोलर ड्यूल पंप योजना ने अबूझमाड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। इस दूरदर्शी पहल का मुख्य उद्देश्य जिले के दूरदराज वाले पारा-टोलों तक स्वच्छ पेयजल की नियमित पहुँच सुनिश्चित करना है, जिससे ग्रामीणों को झिरिया के दूषित जल से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके।
            ​नारायणपुर जिले की भौगोलिक परिस्थितियाँ, कठिन वनांचल और बिखरी हुई बसाहटें पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा को हर घर तक पहुँचाने में हमेशा से बड़ी चुनौती रही हैं। ऐसे क्षेत्रों में पीने का साफ पानी सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील विषय है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिले के 371 ग्रामों एवं पारा-टोलों को स्वच्छ पेयजल से जोड़ने के लिए कुल 1,064 सोलर ड्यूल पंप स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। क्रेडा और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के निरंतर प्रयासों से अब तक 849 पंपों की सफल स्थापना पूरी की जा चुकी है, जिससे एक बड़े क्षेत्र में पेयजल संकट दूर हुआ है।
            ​सोलर ड्यूल पंपों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होते हैं। बिजली की अनिश्चितता वाले या विद्युतविहीन दूरस्थ क्षेत्रों में भी यह प्रणाली बिना किसी रुकावट के चौबीसों घंटे पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करती है। जिले के नेलांगुर, पदमकोट, जाटलूर, उसेबेड़ा, हरबेल, कस्तुरमेंटा-2, धुरबेड़ा और गुमरका जैसे अत्यंत संवेदनशील व दुर्गम गाँवों में इन पंपों के शुरू होने से ग्रामीणों को अपने घर के पास ही शुद्ध पानी मिलने लगा है। इससे पानी जुटाने के लिए दूर जाने की मजबूरी खत्म हुई है, जिससे ग्रामीणों के दैनिक श्रम और समय दोनों की बड़ी बचत हो रही है।
           ​पेयजल की सुलभता का सबसे सुखद और सीधा प्रभाव ग्रामीण महिलाओं और परिवारों की जीवनशैली पर पड़ा है। पहले जहाँ महिलाओं को पानी के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ती थी, वहीं अब वे उस समय का उपयोग अन्य आजीविका गतिविधियों और अपने बच्चों की देखभाल में कर पा रही हैं। इसके साथ ही, शुद्ध पेयजल की उपलब्धता से दूषित पानी के सेवन से होने वाली जलजनित बीमारियों पर प्रभावी रोक लगी है और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। शेष बचे पंपों की स्थापना का कार्य भी तेजी से जारी है। नारायणपुर में सोलर ड्यूल पंपों का यह सफल प्रयोग न केवल दूरस्थ गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुँचाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ में ग्रीन एनर्जी के माध्यम से समावेशी और सतत ग्रामीण विकास की एक नई इबारत भी लिख रहा है।

  • बेटी की उच्च शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए मां ने शुरू की नियमित बचत, सालभर में जमा होंगी 12 हजार रुपये

    बेटी की उच्च शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए मां ने शुरू की नियमित बचत, सालभर में जमा होंगी 12 हजार रुपये

    महतारी वंदन और सुकन्या समृद्धि योजना का लाभ लेकर अनीता ने पेश की आर्थिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण की मिसाल

    रायपुर
    हर मां की ख्वाहिश होती है कि उसकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे, आत्मनिर्भर बने और अपने सपनों को साकार करे। बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बड़ी रकम से ज्यादा जरूरी है समय रहते बचत की शुरुआत करना। इसी सोच को अपने जीवन में उतार रही हैं सरगुजा जिले की श्रीमती अनीता सिंह। वे महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की पूरी राशि अपनी बेटी समीक्षा सिंह के नाम पर खोले गए सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर रही हैं। इस तरह शासन से मिलने वाली आर्थिक सहायता को उन्होंने बेटी की शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए नियमित बचत का माध्यम बना लिया है।

    अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत कृष्णापुर निवासी अनीता सिंह की यह पहल महिला आर्थिक सशक्तिकरण और बेटियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति जागरूकता का प्रेरक उदाहरण है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता राशि को वे दैनिक खर्चों में उपयोग करने के बजाय बेटी के भविष्य के लिए सुरक्षित रख रही हैं। प्रतिमाह एक हजार रुपये की इस बचत से एक वर्ष में 12 हजार रुपये जमा होंगे, जो आने वाले समय में समीक्षा की शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक हो सकते हैं।

    महतारी वंदन की राशि बनी बेटी के भविष्य की पूंजी
    अनीता सिंह बताती हैं कि उन्होंने अपनी बेटी समीक्षा सिंह के नाम पर सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खुलवाया है। महतारी वंदन योजना से उनके बैंक खाते में प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त होती है। इस पूरी राशि को वे नियमित रूप से बेटी के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर देती हैं।

    उनका कहना है कि बेटी की अच्छी शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए अभी से आर्थिक तैयारी करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि को बचत में बदलने का निर्णय लिया।

    अनीता का मानना है कि छोटी-छोटी राशि को नियमित रूप से जमा करने से भविष्य में एक अच्छी पूंजी तैयार की जा सकती है। इससे बेटी की उच्च शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहारा मिलेगा।

    हर महीने एक हजार रुपये की बचत, सालभर में 12 हजार रुपये का संचय
    अनीता सिंह की बचत की यह पहल आर्थिक नियोजन का भी उदाहरण है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक राशि को वे सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर रही हैं।

    इस तरह नियमित बचत जारी रखने पर एक वर्ष में 12 हजार रुपये की मूल राशि जमा होगी। सुकन्या समृद्धि योजना के प्रावधानों के अनुसार जमा राशि पर निर्धारित ब्याज का लाभ भी मिलता है, जिससे समय के साथ बचत में वृद्धि हो सकती है।

    अनीता बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता के कारण उन्हें बेटी के लिए बचत करने में सुविधा हो रही है। इस राशि को वे समीक्षा की आगे की पढ़ाई और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए सुरक्षित रखना चाहती हैं।

    दो योजनाओं को जोड़कर बेटी की शिक्षा के लिए कर रहीं आर्थिक तैयारी
    अनीता सिंह ने महतारी वंदन योजना और सुकन्या समृद्धि योजना का उपयोग एक-दूसरे के पूरक के रूप में किया है। महतारी वंदन योजना से उन्हें हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त होती है, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना में वे इस राशि को बेटी के भविष्य के लिए जमा कर रही हैं।

    इस प्रकार एक योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता दूसरी योजना के माध्यम से दीर्घकालिक बचत का आधार बन रही है। अनीता का यह प्रयास दर्शाता है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से मिलने वाली सहायता का सुनियोजित उपयोग कर परिवार की भविष्य की जरूरतों के लिए आर्थिक तैयारी की जा सकती है।

    बेटी की अच्छी शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही मां का सपना
    अनीता सिंह चाहती हैं कि उनकी बेटी समीक्षा अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और जीवन में आगे बढ़े। वे अपनी बेटी के भविष्य को लेकर अभी से सजग हैं और नियमित बचत के माध्यम से उसकी शिक्षा के लिए आर्थिक आधार तैयार कर रही हैं।

    उनका कहना है कि बच्चों की उच्च शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए समय रहते बचत करना आवश्यक है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। अनीता के लिए हर महीने जमा किए जाने वाले एक हजार रुपये केवल बचत की राशि नहीं, बल्कि बेटी के सपनों को पूरा करने की दिशा में किया गया एक प्रयास है।

    प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
    महतारी वंदन और सुकन्या समृद्धि योजना का लाभ मिलने पर अनीता सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है। इस राशि का उपयोग वे अपनी बेटी समीक्षा के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा करने के लिए कर रही हैं।

    अनीता ने बताया कि योजना से मिलने वाली सहायता ने उन्हें बेटी के भविष्य के लिए नियमित बचत करने का अवसर दिया है। इससे वे उसकी शिक्षा और आगे की जरूरतों के लिए आर्थिक तैयारी कर पा रही हैं।

    छोटी बचत से बड़े सपनों को संबल, अनीता की पहल बनी प्रेरणा
    सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत अनीता सिंह की कहानी यह संदेश देती है कि आर्थिक सहायता का सही नियोजन परिवार के भविष्य को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

     

  • योजना की राशि से पौष्टिक भोजन, दवाइयों और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था, स्वस्थ हैं मां और बच्चा

    योजना की राशि से पौष्टिक भोजन, दवाइयों और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था, स्वस्थ हैं मां और बच्चा

    सेवा संकल्प अभियान-2026

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मिल रहा बढ़ावा, दूसरी संतान बालिका होने पर 6 हजार रुपये की सहायता का भी प्रावधान

    रायपुर
    मातृत्व का समय हर महिला के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। इस दौरान मां और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक आहार, आवश्यक दवाइयों और नियमित देखभाल की विशेष जरूरत होती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इन आवश्यकताओं को पूरा करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम कृष्णापुर निवासी श्रीमती लीलावती को भी इस योजना से बड़ी राहत मिली है। उन्हें दो किस्तों में कुल 5 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई, जिसका उपयोग उन्होंने पौष्टिक भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने में किया। लीलावती बताती हैं कि योजना से मिली सहायता के कारण उन्हें मातृत्व के दौरान अपनी और बच्चे की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सुविधा हुई। वर्तमान में वे और उनका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

    सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत लीलावती की यह कहानी दर्शाती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता जरूरतमंद महिलाओं के लिए कितनी उपयोगी साबित हो सकती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री माताओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य, पोषण और शिशु की बेहतर देखभाल को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    दो किस्तों में मिली 5 हजार रुपये की सहायता, मातृत्व के दौरान मिला सहारा
    लीलावती बताती हैं कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत उन्हें पहली किस्त में 3 हजार रुपये और दूसरी किस्त में 2 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। कुल 5 हजार रुपये की इस राशि से उन्होंने अपने लिए पौष्टिक आहार, आवश्यक दवाइयों और अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था की। मातृत्व के दौरान स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है और ऐसे समय में मिलने वाली आर्थिक सहायता से परिवार पर पड़ने वाला खर्च का बोझ भी कुछ कम हो जाता है।

    उन्होंने बताया कि योजना का लाभ मिलने से उन्हें अपनी सेहत के साथ बच्चे के स्वास्थ्य की देखभाल करने में भी मदद मिली। पौष्टिक भोजन और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था करने में सहायता राशि उपयोगी साबित हुई। लीलावती के अनुसार, मातृत्व के समय मिलने वाला यह आर्थिक सहयोग उनके लिए महत्वपूर्ण था। आज वे और उनका बच्चा स्वस्थ हैं, जिससे परिवार में खुशी है।

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्रोत्साहन, दूसरी संतान बालिका होने पर भी सहायता का प्रावधान
    प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण को बढ़ावा देना है। योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को प्रथम संतान के लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार कुल 5 हजार रुपये की सहायता राशि दो किस्तों में प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त दूसरी संतान बालिका होने पर पात्रता एवं योजना के प्रावधानों के अनुसार 6 हजार रुपये की सहायता राशि एकमुश्त प्रदान किए जाने का प्रावधान है।

    योजना के माध्यम से महिलाओं को गर्भावस्था और प्रसव के बाद स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक सहयोग मिलता है। विशेष रूप से सीमित आय वाले परिवारों में यह सहायता पौष्टिक भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करने में उपयोगी साबित हो रही है। इससे माताओं को अपने स्वास्थ्य के साथ नवजात शिशु की देखभाल पर भी ध्यान देने में मदद मिलती है।

    योजना से मिली राहत, लीलावती ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
    प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ मिलने पर लीलावती ने खुशी व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उन्होंने बताया कि मातृत्व के दौरान प्राप्त 5 हजार रुपये की सहायता राशि से उन्हें पौष्टिक भोजन और दवाइयों सहित अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने में सहयोग मिला। इससे वे अपनी और बच्चे की सेहत का बेहतर ध्यान रख सकीं। लीलावती का कहना है कि मातृत्व के समय महिलाओं को स्वास्थ्य और पोषण संबंधी अनेक जरूरतें होती हैं। ऐसे में योजना से मिलने वाली सहायता राशि काफी उपयोगी होती है। उन्होंने इस आर्थिक सहयोग के लिए शासन के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए बताया कि वर्तमान में वे और उनका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

    स्वस्थ मां और स्वस्थ शिशु के संकल्प को मिल रहा संबल
    सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत ग्राम कृष्णापुर की लीलावती की कहानी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में संचालित योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव का उदाहरण है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से प्राप्त 5 हजार रुपये की सहायता राशि ने उन्हें मातृत्व के दौरान पौष्टिक आहार, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करने में सहयोग दिया। यह आर्थिक सहायता उनके लिए अपनी और बच्चे की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी।

    लीलावती का अनुभव बताता है कि मातृत्व के समय मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं को स्वास्थ्य और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने में मदद कर सकती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं को मिल रहा यह सहयोग स्वस्थ मातृत्व, बेहतर शिशु देखभाल और परिवार के सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

     

  • RPF के 42वें स्थापना दिवस पर दिखा अनुशासन और शौर्य, सेगवे दस्ते की परेड बनी आकर्षण का केंद्र

    RPF के 42वें स्थापना दिवस पर दिखा अनुशासन और शौर्य, सेगवे दस्ते की परेड बनी आकर्षण का केंद्र

    रायपुर.

    रेलवे सुरक्षा बल ने उत्साह और उल्लास के साथ 42वां स्थापना दिवस मनाया. रेलवे वर्कशॉप ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में उत्कृष्ट सेवा के लिए अधिकारियों और जवानों को 3 राष्ट्रपति पुलिस पदक, 30 पुलिस पदक और एक जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किया गया.

    इस अवसर पर महिला दस्ता, कोरास कमांडो, डॉग स्क्वॉड और सेगवे दस्ते ने प्रदर्शन किया. इसके साथ तकनीकी प्रदर्शनी में ड्रोन निगरानी, ह्यूमनॉइड रोबोट ‘अर्जुन’ और आधुनिक डिजिटल सुरक्षा प्रणालियों की झलक नजर आई. कार्यक्रम में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर महापौर मिनल चौबे, RPF की महानिदेशक सोनाली मिश्रा, डीजीपी अरुण देव गौतम, रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला के अलावा रेलवे और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.

    कार्यक्रम के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे सुरक्षा बल के स्थापना दिवस पर मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं. रेलवे संपत्ति की रक्षा करें. विश्वास बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है. भारतीय रेल जीवन की अभुक्त शक्ति है. रेलवे को सुरक्षित करने में रेलवे सुरक्षा बल की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है. महिलाओं बच्चों के अत्यंत प्रति निष्ठा से अपने दायित्व का निर्वहन करते रहेंगे. हम इसी सेवा भाव की कर्तव्य मान कर चलेंगे. इसमें आपकी भूमिका महत्वपूर्ण है. रेलवे का अनुशासन ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है. सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों को मै नमन करता हूं. पदक विजेताओं को बधाई देता हूं.

    इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में RPF को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा है. यहां बम ब्लास्ट होता था, पटरिया उखाड़ ली जाती थी. ऐसे समय में यहां कार्यक्रम हुआ है. जब यहां से नक्सल समाप्त हो चुका है. आज हमने यहां बल का प्रदर्शन देखा है. जोन और आईटी का उपयोग करके यहां पर यात्रियों को सुविधा उपलब्ध कराने काम कर रहा है. रेल मंत्री ने पूरी फोर्स को पूरा सपोर्ट किया है. हमारे देश में सबसे ज्यादा ट्रैवल करते हैं. महिलाएं लोकल ट्रेन में यात्रा ज्यादा से ज्यादा करें. उसके लिए RPF काम कर रहा है.

    रेलवे महानिदेशक RPF सोनाली मिश्रा ने कहा कि जहां भी हमारी आश्यकता है, वहां विशेष रूप से काम करेंगे. अभी नए अभियान नशे को लेकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने शुरू किया है. टारगेट रखा है, उसमें हम हर प्रकार से सहयोग कर रहे हैं. रेल मंत्री ने मेसेज में बताया है. कमजोर वर्ग, महिलाएं-बच्चे की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. मेरा कैडर एमपी हैं, लेकिन मैने शुरुवात बिलासपुर से की है. आज बहुत खुशी हुई है.

    ट्रेनों में गांजा सप्लाई पर कहा सोनाली मिश्रा ने कहा कि ज्वाइंट ऑपरेशन चल रहा है. हम लोग गारमेंट के सहयोग से काम कर रहे हैं. RPF और GRPF के साथ स्टेट पुलिस भी काम कर रही है. हमारा इसमें अरेस्ट भी बड़ी संख्या में बढ़ा है. हमारा जो टारगेट रखा गया है, उसमें भी हम काम करेंगे. हमने SOP नए बनाए हैं. ट्रैफिकर्स भी अपना मॉडल बदल रहे हैं. आने वाले समय में बेहतर कार्रवाई होगी.

  • घुनघुट्टा जलाशय से 381 मछुआरों को आजीविका का सहारा, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिल रहा आर्थिक सहयोग

    घुनघुट्टा जलाशय से 381 मछुआरों को आजीविका का सहारा, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिल रहा आर्थिक सहयोग

    डबरी में मछली पालन के साथ सब्जी उत्पादन और सिंचाई से किसानों को दोहरा लाभ, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी बन रहीं आत्मनिर्भर

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में अब खेतों और तालाबों के साथ आजीविका डबरियां, जलाशय और अमृत सरोवर भी किसानों तथा ग्रामीण परिवारों की आर्थिक समृद्धि का माध्यम बन रहे हैं। खेती और पशुपालन के साथ मत्स्य पालन को अपनाकर ग्रामीण परिवार अपनी आय के स्रोत बढ़ा रहे हैं। सरगुजा जिले में शासन की विभिन्न योजनाओं, मत्स्य पालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और स्थानीय जल संसाधनों के बेहतर उपयोग से आजीविका के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। कहीं मछुआरा सहकारी समितियों के सैकड़ों सदस्य सामूहिक मत्स्य पालन से अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं, तो कहीं किसान डबरी में मछली पालन के साथ सब्जी उत्पादन और सिंचाई का लाभ उठा रहे हैं। वहीं स्व-सहायता समूहों की महिलाएं अमृत सरोवरों में मछली पालन कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने और स्वरोजगार के अवसरों का विस्तार करने की दिशा में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मिलने वाली अनुदान सहायता और विभागीय मार्गदर्शन से मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने के अवसर बढ़ रहे हैं। सरगुजा जिले में पारंपरिक जलाशयों से लेकर आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक तक मत्स्य पालन के विविध स्वरूप सामने आ रहे हैं। इन प्रयासों की विशेषता यह है कि ग्रामीण परिवार उपलब्ध भूमि और जल संसाधनों का उपयोग एक से अधिक आजीविका गतिविधियों के लिए कर रहे हैं।

    घुनघुट्टा जलाशय बना 381 मछुआरों की आजीविका का आधार
    सरगुजा जिले का घुनघुट्टा जलाशय सामूहिक मत्स्य पालन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को आजीविका उपलब्ध कराने का उदाहरण है। यहां आदिवासी मछुआ सहकारी समिति, कलगसा के 381 सदस्य मत्स्य पालन से जुड़े हुए हैं। समिति को जलाशय 10 वर्ष की अवधि के लिए पट्टे पर उपलब्ध कराया गया है, जिससे सदस्य संगठित रूप से मत्स्य उत्पादन की गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। जलाशय में मछली पालन से जुड़े कार्य इन परिवारों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बने हुए हैं।

    समिति के अध्यक्ष श्री राम बिलोच राम बताते हैं कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मछली बीज के लिए 7 लाख 62 हजार रुपये की अनुदान सहायता मिलती है। इस सहयोग से जलाशय में मत्स्य उत्पादन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। सहकारी समिति के माध्यम से सामूहिक प्रयासों का लाभ बड़ी संख्या में मछुआरा परिवारों तक पहुंच रहा है। घुनघुट्टा जलाशय का यह उदाहरण दर्शाता है कि उपलब्ध जल संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग और सहकारी व्यवस्था ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर विकसित करने में सहायक हो सकती है।

    आजीविका डबरियों से मछली पालन और खेती को दोहरा लाभ
    ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित आजीविका डबरियां अब केवल वर्षा जल संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम भी बन रही हैं। इन डबरियों में वर्षा जल का संचय कर किसान मछली पालन कर रहे हैं और आवश्यकता के अनुसार पानी का उपयोग सब्जी उत्पादन तथा फसलों की सिंचाई में भी कर रहे हैं। इससे एक ही संसाधन का उपयोग कई आर्थिक गतिविधियों के लिए संभव हो रहा है।

    लखनपुर विकासखंड के किसान श्री शिवबालक ने अपनी आजीविका डबरी में कतला, रोहू, मृगल और ग्रास कार्प प्रजाति की मछलियों का पालन किया। उन्होंने लगभग दो क्विंटल मछली की बिक्री कर 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी प्राप्त की। मछली पालन के साथ वे डबरी में संचित पानी का उपयोग सब्जी उत्पादन के लिए भी करते हैं। इस प्रकार डबरी उनके लिए जल संरक्षण, मत्स्य पालन और खेती को जोड़ने वाला उपयोगी संसाधन बन गई है।

    इसी तरह बतौली विकासखंड के किसान श्री लक्ष्मी प्रसाद ने डबरी में मछली पालन से लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित की है। उन्होंने करीब 20 क्विंटल मछली उत्पादन का आकलन किया है। डबरी में उपलब्ध पानी का उपयोग वे साग-सब्जी और गेहूं की सिंचाई के लिए भी कर रहे हैं। मत्स्य पालन से प्राप्त आय और सिंचाई की सुविधा ने उनके कृषि कार्यों को अतिरिक्त सहारा दिया है। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि जल संरक्षण के लिए विकसित संरचनाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने पर किसानों को अतिरिक्त आर्थिक अवसर मिल सकते हैं।

    पहाड़ी कोरवा परिवार भी अपना रहे मछली पालन, डबरी की मेड़ों पर फलदार पौधों से अतिरिक्त आय की तैयारी
    सरगुजा जिले में आजीविका डबरियों के माध्यम से मत्स्य पालन का विस्तार अन्य ग्रामीण परिवारों तक भी हो रहा है। अम्बिकापुर विकासखंड की श्रीमती जोशमनि एक्का के परिवार ने 2 लाख 99 हजार रुपये की लागत से निर्मित डबरी में मछली पालन शुरू किया है। वहीं लखनपुर विकासखंड के किसान श्री कनी लाल बड़ा ने अपनी डबरी में 9 किलोग्राम मछली बीज डालकर मत्स्य पालन को सब्जी उत्पादन से जोड़ा है। इन गतिविधियों से परिवारों को खेती के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने की संभावनाएं मिल रही हैं।

     

  • जमीन की रजिस्ट्री में चंचल कुमारी पाल को मिली 50 प्रतिशत शुल्क की छूट, नामांतरण की परेशानी से भी राहत

    जमीन की रजिस्ट्री में चंचल कुमारी पाल को मिली 50 प्रतिशत शुल्क की छूट, नामांतरण की परेशानी से भी राहत

    सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी

    जमीन की रजिस्ट्री में चंचल कुमारी पाल को मिली 50 प्रतिशत शुल्क की छूट, नामांतरण की परेशानी से भी राहत

    महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क 4 से घटकर 2 प्रतिशत, आर्थिक बचत के साथ आसान हुई नामांतरण की प्रक्रिया

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सुधारों से महिलाओं को मिल रहा दोहरा लाभ

    रायपुर, 
    संपत्ति की रजिस्ट्री में आर्थिक बचत और नामांतरण की आसान प्रक्रिया ने दंतेवाड़ा की श्रीमती चंचल कुमारी पाल को दोहरी राहत दी है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलने से उनका रजिस्ट्री का खर्च कम हुआ है। वहीं, नामांतरण की प्रक्रिया में हुए सुधारों से संपत्ति संबंधी कार्यों को पूरा करना भी पहले की तुलना में आसान हो गया है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में श्रीमती पाल ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले नामांतरण से जुड़े कार्यों में परेशानी होती थी, लेकिन अब प्रक्रिया अधिक सहज और सुविधाजनक हुई है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में प्रदेश की पंजीयन व्यवस्था में नागरिकों की सुविधा के लिए विभिन्न सुधार किए गए हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत और नामांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने जैसी पहल से नागरिकों को आर्थिक राहत मिलने के साथ अनावश्यक कार्यालयीन दौड़भाग से भी राहत मिल रही है।

    महिलाओं के लिए आधा हुआ पंजीयन शुल्क, चंचल को मिला आर्थिक लाभ

    श्रीमती चंचल कुमारी पाल ने बताया कि महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में दी जा रही 50 प्रतिशत की रियायत का उन्हें प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इससे संपत्ति पंजीयन पर होने वाला खर्च कम हुआ और उन्हें आर्थिक राहत मिली।

    राज्य शासन द्वारा महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इस निर्णय से महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराना पहले की तुलना में अधिक किफायती हुआ है।

    श्रीमती पाल ने इस पहल को महिलाओं के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि पंजीयन शुल्क में कमी से आर्थिक बोझ घटा है। यह सुविधा महिलाओं को अपने नाम संपत्ति का पंजीयन कराने के लिए प्रोत्साहित करने में भी सहायक है।

    पहले नामांतरण में होती थी परेशानी, अब प्रक्रिया हुई सरल

    श्रीमती चंचल कुमारी पाल ने पंजीयन व्यवस्था में तकनीकी सुधारों से मिली सुविधा का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि पहले संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण से संबंधित कार्यों में परेशानी होती थी और प्रक्रिया पूरी होने में समय लगता था। अब नामांतरण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और तेज हुई है।

    पंजीयन विभाग की ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो रही है।

    श्रीमती पाल ने बताया कि नामांतरण की प्रक्रिया आसान होने से संपत्ति संबंधी कार्यों को पूरा करने में सुविधा मिली है। उनके लिए यह बदलाव पंजीयन शुल्क में आर्थिक राहत के साथ एक अतिरिक्त लाभ के रूप में सामने आया है।

    संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

    महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत का उद्देश्य पंजीयन का आर्थिक भार कम करने के साथ संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

    अपने नाम संपत्ति का स्वामित्व महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण आधार है। पंजीयन शुल्क में कमी से महिलाओं और उनके परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल रहा है।

    दंतेवाड़ा की श्रीमती चंचल कुमारी पाल का अनुभव दर्शाता है कि शुल्क में रियायत और पंजीयन सेवाओं में सुधार से महिलाओं को आर्थिक एवं प्रक्रियागत दोनों स्तरों पर राहत मिल रही है।

    मुख्यमंत्री और वित्त एवं पंजीयन मंत्री के प्रति जताया आभार

    श्रीमती चंचल कुमारी पाल ने महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट और नामांतरण की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और नागरिक सेवाओं को सरल बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

    सेवा संकल्प अभियान से सामने आ रही बदलाव की कहानियां

    ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर पंजीयन सेवाओं में किए गए सुधारों के जमीनी प्रभाव, अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है।

    दंतेवाड़ा की श्रीमती चंचल कुमारी पाल की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है। उनके लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट केवल आर्थिक बचत नहीं, बल्कि अपने नाम संपत्ति पंजीयन कराने में मिली महत्वपूर्ण सुविधा है। वहीं, नामांतरण की सरल प्रक्रिया ने संपत्ति संबंधी कार्यों को अधिक सहज बनाया है। इस तरह पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधार महिलाओं को आर्थिक राहत देने के साथ नागरिक सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायक हो रहे हैं।

  • दुर्ग में दिव्यांग बच्चों के लिए शिविर, 11 बच्चों को UDID कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में मिली मदद

    दुर्ग में दिव्यांग बच्चों के लिए शिविर, 11 बच्चों को UDID कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में मिली मदद

    दुर्ग.

    स्कूलों में पढ़ाई कर रहे दिव्यांग बच्चों को सुविधा मुहैया कराने समय- समय आंकलन शिविर लगाया जाता है। इसी कड़ी में विकासखण्ड दुर्ग शहर तथा धमधा द्वारा संयुक्त रूप से दिव्यांग बच्चों का आकलन शिविर यूआरसीसी कार्यालय दुर्ग में लगाया गया।

    जिला परियोजना समन्वयक विनोद कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में लगी शिविर में 0 से 18 वर्ष के कुल 104 दिव्यांग बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई। इसमें से तत्काल 11 बच्चों का यूडीआईडी कार्ड (पहचान पत्र ) बनाने हेतु प्रमाणीकरण किया गया। वैसे दिव्यांगता 40% होने पर ही यूडीआईडी कार्ड बनता है। वहीं दिव्यांगता की श्रेणी में कुल 21 अलग अलग प्रकार की बाधिता को रखा गया है। निःशुल्क जांच के साथ चश्मा तथा आवश्यकतानुसार दवाई प्रदान की गई।

    विकासखंड स्तरीय दिव्यांग आकलन शिविर एपीसी इंद्र कुमार रामटेके एवं यूआरसी नेम सिंह साहू के नेतृत्व में धमधा एवं दुर्ग विकासखंड के दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए लगाई गई। इसमें अस्थि बाधित, श्रवण बाधित, बौद्धिक निशक्तता, अल्प दृष्टि आदि बच्चों का आकलन किया गया। जिला अस्पताल से आए हुए विशेषज्ञ टीम में नाक, कान एवं गला विशेषज्ञ रेणु तिवारी, शिशु रोग विशेषज्ञ मोहित कुमार सोनी, अस्थि रोग विशेषज्ञ अनुरंजन टोप्पो, नेत्र सहायक अधिकारी मोहित राम पटेल तथा एलिमको कृत्रिम अंग निर्माण की टीम ने बच्चों की जांच की।

  • महतारी वंदन योजना की राशि से भारती बनीं आत्मनिर्भर, सिलाई का काम शुरू कर बढ़ाए कमाई के रास्ते

    महतारी वंदन योजना की राशि से भारती बनीं आत्मनिर्भर, सिलाई का काम शुरू कर बढ़ाए कमाई के रास्ते

    सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी

    महतारी वंदन योजना से बदली भारती की जिंदगी, सहायता राशि से सिलाई मशीन खरीदकर शुरू किया स्वरोजगार

    घर की आर्थिक परेशानियों के बीच महतारी वंदन योजना बनी सहारा, अब सिलाई से परिवार की आमदनी में दे रहीं योगदान

    प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से मिला पोषण और देखभाल का संबल, दो योजनाओं ने दी आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की नई राह

    रायपुर, 
    महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं के लिए न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने का माध्यम बन रही है, बल्कि उन्हें स्वरोजगार से जुड़ने का अवसर भी प्रदान कर रही है। जांजगीर-चांपा जिले की श्रीमती भारती धीवर इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उन्होंने महतारी वंदन योजना से प्राप्त सहायता राशि का सदुपयोग करते हुए सिलाई मशीन खरीदी और घर से ही सिलाई का काम शुरू कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है। वहीं, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से मिली सहायता ने गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद पोषण एवं देखभाल संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दिया है।

    महतारी वंदन की राशि से खरीदी सिलाई मशीन, हुनर को बनाया कमाई का जरिया

    श्रीमती भारती धीवर बताती हैं कि पहले परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। सीमित आय के कारण घर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। वे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए कुछ काम करना चाहती थीं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण स्वरोजगार शुरू करना आसान नहीं था।

    ऐसे समय में महतारी वंदन योजना उनके लिए मददगार साबित हुई। योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता राशि का उपयोग कर उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और अपने हुनर को आजीविका का माध्यम बनाया। अब वे घर से ही सिलाई का काम कर आय अर्जित कर रही हैं। इससे उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी सहयोग करने का अवसर मिल रहा है।

    प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से मिला मातृत्व और पोषण का संबल

    श्रीमती भारती धीवर को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का भी लाभ मिला है। इस योजना के तहत प्राप्त आर्थिक सहायता से उन्हें गर्भावस्था के दौरान पोषण और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिली। बच्चे के जन्म के बाद भी यह सहायता उनके और शिशु के पोषण एवं देखभाल में उपयोगी साबित हुई।

    भारती बताती हैं कि इन दोनों योजनाओं ने उनके जीवन में अलग-अलग जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महतारी वंदन योजना ने जहां उन्हें स्वरोजगार शुरू करने का अवसर दिया, वहीं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ने मातृत्व के दौरान आर्थिक संबल प्रदान किया।

    आर्थिक सहायता से बढ़ा आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

    सिलाई कार्य शुरू करने के बाद श्रीमती भारती धीवर के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। पहले जहां वे परिवार की आर्थिक जरूरतों को लेकर चिंतित रहती थीं, वहीं अब अपने हुनर से आय अर्जित कर परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने में योगदान दे रही हैं। घर से ही काम करने की सुविधा से वे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ स्वरोजगार को भी आगे बढ़ा रही हैं।

    उनके लिए महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता राशि केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का माध्यम बनी है।

    श्रीमती भारती धीवर ने दोनों योजनाओं का लाभ मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं से मिली सहायता ने उन्हें सिलाई कार्य शुरू करने और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दिया है।

    भारती धीवर की यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता का सही उपयोग महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी पहलें महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करने के साथ उन्हें स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता और बेहतर पारिवारिक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं।

  • छत्तीसगढ़ के श्रेष्ठ शिक्षकों को मिलेगा सम्मान, कल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव करेंगे सम्मानित

    छत्तीसगढ़ के श्रेष्ठ शिक्षकों को मिलेगा सम्मान, कल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव करेंगे सम्मानित

    दुर्ग.

    लंबी प्रतीक्षा के बाद आखिरकार उत्कृष्ट शिक्षकों के सम्मान की तिथि तय की गई है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के मुख्य आतिथ्य में शिक्षक सम्मान समारोह 13 अक्टूबर को खालसा पब्लिक स्कूल में दोपहर 12 बजे से रखा गया है।

    सम्मान समारोह में दुर्ग संभाग के अलावा दुर्ग जिले के उत्कृष्ट शिक्षक भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण योजना के तहत विकासखंड, जिला तथा संभाग स्तर पर उत्कृष्ट शिक्षकों को चयन किया जा चुका है। अफसोस इस बात का है कि एक माह से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी इन शिक्षकों को अब तक पुरस्कृत नहीं किया जा सका है। दरअसल, मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण योजना के तहत प्रति वर्ष शिक्षक दिवस पर 5 सितंबर को विकासखंड, जिला तथा संभाग स्तर पर उत्कृष्ट शिक्षकों को पुरस्कृत किए जाने का प्रावधान रहा है। विकासखंड स्तर पर शिक्षादूत, जिला स्तर पर ज्ञानदीप तथा संभाग स्तर पर शिक्षाश्री पुरस्कार से शिक्षकों को नवाजा जाता है। विकासखंड स्तर पर शिक्षादूत पुरस्कार के लिए 9 सहायक शिक्षक, ज्ञानदीप के लिए पूर्व माध्यमिक शाला के 3 शिक्षक तथा संभाग स्तर पर 3 व्याख्याता को शिक्षाश्री सम्मान दिया जाना है। इसके लिए उत्कृष्ट शिक्षकों का चयन भी हो ‘चुका है।

    सम्मान समारोह में शिक्षादूत पुरस्कार के लिए प्रत्येक शिक्षकों को 5000 रूपये, ज्ञानदीप पर 7000 रुपए तथा शिक्षाश्री पुरस्कार के लिए 10000 रुपए एवं प्रशस्ति पत्र, शील्ड प्रदान किया जाएगा। ज्ञानदीप पुरस्कार के लिए श्रीमती स्वाति प्रसाद शिक्षक (एल.बी) शास. पू.मा.शा टेमरी दुर्ग, राकेश हरमुख शिक्षक (ई) शास. पू. मा.शा तुमाकला धमधा तथा मुकेश कुमार वर्मा शिक्षक (एल.बी) शास.पू.मा.शा. अमेरी पाटन के नामों की घोषणा की गई है। शिक्षादूत पुरस्कार के लिए दुर्ग ब्लॉक से रजनीकांत भारद्वाज करहीडीह, टोमन लाल साहू बोरसीभाठा तथा चित्रा इंगले बिरेझरभाठा, पाटन ब्लॉक से टिकेश्वरी वर्मा अमेरी, दिलीप कुमार शुक्ला कुगदा तथा कमल सिंह साहू मोरिद, धमधा ब्लॉक से चदूलाल साहू नवीन सेमरिया, श्रीमती सपना दुबे रामपुर तथा कुंवर सिंह खिलौरा का चयन किया गया है।

  • छत्तीसगढ़ में महिला क्रिकेट का बड़ा आयोजन, रायपुर में भारत-जिम्बाब्वे सीरीज का आगाज 16 अक्टूबर से

    छत्तीसगढ़ में महिला क्रिकेट का बड़ा आयोजन, रायपुर में भारत-जिम्बाब्वे सीरीज का आगाज 16 अक्टूबर से

    रायपुर 

     छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में क्रिकेट प्रेमियों को पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मुकाबलों का रोमांच देखने का मौका मिलेगा। भारत और जिम्बाब्वे की महिला टीमें 16 अक्टूबर से तीन मैचों की टी20 सीरीज में आमने-सामने होंगी। शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में 16, 18 और 20 अक्टूबर को मुकाबले खेले जाएंगे। भारतीय टीम की कप्तानी और नए क्रिकेटिंग दौर को लेकर भी इस सीरीज पर नजरें रहेंगी।

    रायपुर में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट, भारत-जिम्बाब्वे की भिड़ंत पर नजरें

     छत्तीसगढ़ के क्रिकेट इतिहास में अक्टूबर का महीना खास होने जा रहा है। राजधानी रायपुर पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मुकाबलों की मेजबानी करेगा। भारत और जिम्बाब्वे की महिला टीमें तीन मैचों की टी20 सीरीज में अपना दम दिखाएंगी। इस सीरीज को लेकर स्थानीय क्रिकेट प्रेमियों में उत्साह है। अब तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पुरुष मुकाबलों के लिए पहचान बनाने वाला रायपुर का स्टेडियम महिला क्रिकेट के रोमांच का भी गवाह बनेगा।

    16 अक्टूबर से सीरीज का आगाज, 18 और 20 को भी मुकाबले
    भारत और जिम्बाब्वे के बीच पहला टी20 मुकाबला 16 अक्टूबर को खेला जाएगा। सीरीज का दूसरा मैच 18 अक्टूबर और तीसरा मुकाबला 20 अक्टूबर को निर्धारित है। सभी मैच रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाएंगे। तीनों मुकाबलों का कार्यक्रम शाम 5 बजे से शुरू होने का बताया गया है। मैचों के दौरान दर्शकों की नजर भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन और जिम्बाब्वे की टीम की चुनौती पर रहेगी।

    भारतीय टीम रायपुर पहुंची, जिम्बाब्वे का आगमन निर्धारित
    सीरीज की तैयारियों के बीच भारतीय टीम के खिलाड़ियों का रायपुर पहुंचना शुरू हो गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारतीय टीम की खिलाड़ी स्मृति मंधाना रविवार को करीब दोपहर 3:30 बजे रायपुर पहुंचीं। टीम के अन्य खिलाड़ियों के भी पहुंचने का कार्यक्रम है। जिम्बाब्वे की टीम के 12 अक्टूबर को रायपुर पहुंचने की जानकारी दी गई है। दोनों टीमों के आगमन के साथ ही शहर में अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट सीरीज की तैयारियां तेज होंगी।

    स्मृति मंधाना पहली बार फुल टाइम कप्तान
    इस सीरीज में स्मृति मंधाना पहली बार फुल-टाइम कप्तान के तौर पर भारतीय टीम की कमान संभालेंगी। शेफाली वर्मा उप-कप्तान होंगी। पूर्व कप्तान हरमनप्रीत कौर भी टीम में शामिल हैं।

    15 सदस्यीय टीम में ऋचा घोष, जी. कमलिनी, दीप्ति शर्मा, प्रेमा रावत, श्री चरणी, नंदनी शर्मा, क्रांति गौड़, अरुंधति रेड्डी, जिन्तिमणि कलिता और मिन्नू मणि भी शामिल हैं। तीनों मैच रायपुर में होने से स्थानीय क्रिकेट प्रशंसकों को छह दिनों में तीन अंतरराष्ट्रीय मैच देखने का मौका मिलेगा।

    E-टिकट से एंट्री, ओपन वाई-फाई की सुविधा
    दर्शकों की सुविधा के लिए टिकट ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। ई-टिकट स्कैन करने के लिए स्टेडियम परिसर में ओपन वाई-फाई की सुविधा रहेगी। टिकट के साथ तय संख्या में पार्किंग पास दिए जाएंगे। स्टेडियम और पार्किंग क्षेत्र में CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। दर्शकों के लिए खाने-पीने की चीजों और पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था भी रहेगी।

    एम्बुलेंस और ग्रीन कॉरिडोर तैयार रहेगा
    स्वास्थ्य विभाग आसपास के अस्पतालों की मैपिंग करेगा। स्टेडियम में एम्बुलेंस तैनात रहेगी। आपात स्थिति और VIP आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर तय किया जाएगा। फायर ब्रिगेड, पर्याप्त पानी और इमरजेंसी रूट की भी व्यवस्था रहेगी। बिजली और मोबाइल नेटवर्क की सुविधा बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों को दी गई है।

    2 जुलाई 2026 को NGT ने अंतरिम आदेश जारी कर रायपुर समेत 3 स्टेडियमों में ट्रिब्यूनल की मंजूरी के बिना आगे मैच कराने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद इंटरनेशनल महिला क्रिकेट मैच कराने की मंजूरी मांगी गई। सुनवाई के बाद NGT ने 3 मैचों के लिए रोक हटा दी।

    मैदान पर छह अभ्यास सत्र, खिलाड़ियों की तैयारी पर रहेगा फोकस
    मैचों से पहले भारतीय टीम के लिए अभ्यास सत्र निर्धारित किए गए हैं। कार्यक्रम के अनुसार, 12 और 13 अक्टूबर को शाम 6 से रात 9 बजे तक अभ्यास होगा। 14 अक्टूबर को दोपहर 2 से शाम 5 बजे और 15 अक्टूबर को शाम 6 से रात 9 बजे तक टीम मैदान पर अभ्यास करेगी। पहले मुकाबले के बाद 17 अक्टूबर को दोपहर 2 से शाम 5 बजे तथा दूसरे मैच के बाद 19 अक्टूबर को शाम 6 से रात 9 बजे तक अभ्यास का कार्यक्रम है। इस तरह भारतीय टीम के कुल छह अभ्यास सत्र निर्धारित बताए गए हैं। जिम्बाब्वे की टीम के लिए भी 13, 14, 15, 17 और 19 अक्टूबर को अभ्यास प्रस्तावित है।

    दर्शकों की सुविधा और प्रशासनिक तैयारी
    मैचों की तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक की गई। इसके बाद रायपुर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में लोकल सपोर्ट कमेटी बनाई गई है। इस समिति में पुलिस, खेल विभाग, परिवहन, लोक निर्माण विभाग, एनआरडीए और छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के अधिकारी शामिल हैं। दर्शकों के लिए टिकट ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे। ई-टिकट स्कैन करने के लिए स्टेडियम परिसर में ओपन वाई-फाई की सुविधा दी जाएगी। टिकट के साथ तय संख्या में पार्किंग पास मिलेंगे। स्टेडियम और पार्किंग क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे तथा दर्शकों के लिए भोजन और पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी। 

    सुरक्षा इंतजाम और एनजीटी का आदेश
    स्वास्थ्य विभाग आसपास के अस्पतालों की मैपिंग करेगा और स्टेडियम में एंबुलेंस तैनात रहेगी। आपात स्थिति तथा वीआईपी आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर तय किया जाएगा। दमकल, आपातकालीन रास्ते, बिजली और मोबाइल नेटवर्क की सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। एनजीटी ने 2 जुलाई 2026 को जारी अंतरिम आदेश में रायपुर समेत तीन स्टेडियमों में अनुमति के बिना खेल गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। बाद में अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए अनुमति मांगने पर एनजीटी ने तीन मैचों के लिए रोक संशोधित कर स्वीकृति दी है। 

    रायपुर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए ऐतिहासिक मौका
    इस सीरीज का सबसे खास पहलू यह है कि रायपुर में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मुकाबले देखने को मिलेंगे। इससे स्थानीय दर्शकों को महिला क्रिकेटरों के प्रदर्शन को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। भारत और जिम्बाब्वे के बीच होने वाले मुकाबले शहर के खेलप्रेमियों के लिए यादगार अनुभव बन सकते हैं। सीरीज के निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, दोनों टीमें 21 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे रायपुर से रवाना होंगी।

    टिकट और स्टेडियम पहुंचने से जुड़ी अपडेट पर रखें नजर
    मैच देखने की योजना बना रहे दर्शकों को टिकट की उपलब्धता, प्रवेश नियम, स्टेडियम में दर्शकों के प्रवेश का समय और अन्य व्यवस्थाओं की आधिकारिक घोषणा पर नजर रखनी चाहिए। टिकट बिक्री या प्रवेश संबंधी जानकारी की पुष्टि होने के बाद ही यात्रा और मैच देखने की योजना बनाना बेहतर रहेगा।