Category: छत्तीसगढ़

  • सड़कों की बदहाली दूर करने में जुटा PWD, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

    सड़कों की बदहाली दूर करने में जुटा PWD, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

    रायपुर

    उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव के निर्देश के बाद अंबिकापुर में सड़कों को गड्ढामुक्त करने की मुहिम तेज हो गई है। सरगुजा प्रवास के दौरान सड़कों की बदहाल स्थिति सुधारने और मरम्मत कार्यों में तेजी लाने के उनके निर्देशों पर लोक निर्माण विभाग ने अमल शुरू कर दिया है। शहर के महामाया चौक से लरंग साय चौक तक सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों की बीटी पैच मरम्मत युद्धस्तर पर शुरू कर दी गई है। विभाग को वित्तीय वर्ष 2026-27 में वार्षिक संधारण मद से 3 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। इस राशि से लोक निर्माण विभाग के अंबिकापुर संभाग के विभिन्न मार्गों के कुल 150 किलोमीटर हिस्सों का संधारण किया जाएगा। सभी निर्धारित मरम्मत कार्यों को दिसम्बर तक पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है।

    उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने अपने सरगुजा प्रवास के दौरान विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए सड़कों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा था कि सड़कों पर बने गड्ढों की शीघ्र मरम्मत की जाए, ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। उन्होंने सड़क संधारण कार्यों में तेजी लाने और यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया था। उनके निर्देशों के अनुपालन में लोक निर्माण विभाग ने प्राथमिकता के आधार पर सड़कों की मरम्मत के कार्य शुरू कर दिए हैं।

    लोक निर्माण विभाग ने अंबिकापुर में महामाया चौक से लरंग साय चौक तक बीटी पैच मरम्मत का काम प्रारंभ किया है। सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों और गड्ढों को दुरुस्त कर आवागमन सुगम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। विभाग स्वीकृत संधारण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने तेजी से काम कर रहा है। मरम्मत पूरी होने से वाहन चालकों और आम नागरिकों को सड़क के गड्ढों से होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी। साथ ही आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित हो सकेगा। विभाग द्वारा अन्य स्वीकृत संधारण कार्यों को भी तय समय-सीमा में पूरा करने आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

  • खेल के मैदान में दिखा उत्साह, प्रतिभा और जीत का जज्बा, मंत्री  अग्रवाल ने खिलाड़ियों का बढ़ाया मनोबल

    खेल के मैदान में दिखा उत्साह, प्रतिभा और जीत का जज्बा, मंत्री अग्रवाल ने खिलाड़ियों का बढ़ाया मनोबल

    रायपुर

     सरगुजा की धरती खेल प्रतिभाओं से समृद्ध है। यहां के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है उन्हें उचित अवसर, प्रोत्साहन और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने की। सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को नई पहचान देने के साथ युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उक्त बातें पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने शनिवार को पीएम  विद्यालय, लखनपुर में आयोजित ब्लॉक स्तरीय सरगुजा ओलंपिक 2026 के समापन समारोह में कही। इस अवसर पर लुण्ड्रा विधायक  प्रमोद मिंज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    समापन समारोह में शामिल होकर पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया तथा उनके खेल कौशल, जोश और जीत के जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को पहचान दिलाने, युवाओं को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने और खेलों के माध्यम से जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे आयोजनों से युवाओं में खेलों के प्रति रुचि बढ़ने के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और आपसी सद्भाव की भावना भी मजबूत होती है।

    सरगुजा की प्रतिभाएं प्रदेश और देश का नाम करेंगी रोशन

    पर्यटन मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि सरगुजा अंचल के युवाओं में प्रतिभा, परिश्रम और संघर्ष की अद्भुत क्षमता है। यहां के खिलाड़ी यदि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और नियमित अभ्यास के साथ आगे बढ़ें, तो निश्चित रूप से राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते। सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजन ऐसे खिलाड़ियों को आगे आने, अपनी प्रतिभा निखारने और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करते हैं।

    उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास और संकल्प है कि सरगुजा की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिले, युवा खेलों के प्रति प्रोत्साहित हों और अपनी उपलब्धियों से सरगुजा सहित पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करें। खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में परिवार, समाज, शिक्षकों और खेल प्रशिक्षकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सभी के सामूहिक प्रयासों से ग्रामीण अंचलों में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सकता है।

    खेलों से विकसित होता है अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व का गुण

    मंत्री  अग्रवाल ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि खेल जीवन में सफलता प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। खेल हमें अनुशासन, धैर्य, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की सीख देते हैं। खेल के मैदान में मिली जीत आत्मविश्वास बढ़ाती है, वहीं हार हमें अपनी कमियों को पहचानकर और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है।

    उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में केवल विजेता बनना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पूरे समर्पण, मेहनत और खेल भावना के साथ भाग लेना भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। प्रत्येक खिलाड़ी को अपनी प्रतिभा पर विश्वास रखते हुए निरंतर अभ्यास करना चाहिए। आज ब्लॉक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी भविष्य में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सरगुजा का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

    प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में खेल संस्कृति को मिल रहा बढ़ावा

    पर्यटन मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को बढ़ावा देने और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों ने देश के युवाओं में खेलकूद, स्वास्थ्य और शारीरिक दक्षता के प्रति नई जागरूकता पैदा की है।

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी युवाओं को खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने तथा खेल सुविधाओं के विकास की दिशा में कार्य कर रही है। ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उचित अवसर उपलब्ध कराना खेलों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, ऊर्जावान और अनुशासित युवा ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    लखनपुर में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम, खेल भावना और उत्साह का शानदार प्रदर्शन

    पीएम  विद्यालय, लखनपुर में आयोजित ब्लॉक स्तरीय सरगुजा ओलंपिक के दौरान खिलाड़ियों में उत्साह और प्रतिस्पर्धा का वातावरण रहा। विभिन्न खेल विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी शारीरिक दक्षता, खेल कौशल और जीत के जज्बे का प्रदर्शन किया। ग्रामीण अंचलों से आए खिलाड़ियों की सहभागिता ने आयोजन को उत्साहपूर्ण बनाया।

    खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी क्षमताओं को परखने, प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्राप्त करने और खेलों के प्रति अपनी रुचि को नई दिशा देने का अवसर मिला। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, उन्हें केवल उचित मंच और प्रोत्साहन की आवश्यकता है।

    खिलाड़ियों की सफलता में अभिभावकों और प्रशिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण

    मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ खेलकूद भी अत्यंत आवश्यक है। खेल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियों में भी भाग लेने के लिए प्रेरित करें।

    उन्होंने कहा कि शिक्षकों, खेल प्रशिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग से ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों के प्रति बढ़ता उत्साह आने वाले समय में सरगुजा को खेल प्रतिभाओं के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।

    सभी प्रतिभागी खिलाड़ी बधाई के पात्र, निरंतर मेहनत से हासिल करें नई ऊंचाइयां

    समापन समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने सरगुजा ओलंपिक में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में उतरने वाला प्रत्येक खिलाड़ी सम्मान और प्रोत्साहन का पात्र है। प्रतियोगिता में जीत हासिल करने वाले खिलाड़ी अपनी सफलता को आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाएं और जो खिलाड़ी इस बार विजयी नहीं हो सके, वे निराश होने के बजाय और अधिक मेहनत तथा आत्मविश्वास के साथ अगली प्रतियोगिता की तैयारी करें।

    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजनों से निकलने वाली खेल प्रतिभाएं आने वाले समय में प्रदेश और देश के विभिन्न खेल मंचों पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराएंगी। उन्होंने आयोजन से जुड़े अधिकारियों, शिक्षकों, खेल प्रशिक्षकों और सहयोगियों के प्रयासों की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।

    समापन समारोह में लुण्ड्रा विधायक  प्रमोद मिंज सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, आयोजन से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षक, खेल प्रशिक्षक, खिलाड़ी एवं बड़ी संख्या में खेलप्रेमी उपस्थित रहे।

  • डिजिटल क्रॉप सर्वे पर सरकार सख्त, मॉनिटरिंग और क्रॉस वेरिफिकेशन पर जोर; 10 नवंबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य

    डिजिटल क्रॉप सर्वे पर सरकार सख्त, मॉनिटरिंग और क्रॉस वेरिफिकेशन पर जोर; 10 नवंबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति की समीक्षा बैठक सम्पन्न

    डिजिटल क्रॉप सर्वे का शेष कार्य 10 नवम्बर तक पूरा करें

    कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में डिजिटल क्रॉप सर्वे के संबंध में कलेक्टरों को दिए निर्देश

    डिजिटल क्रॉप सर्वे की मॉनिटरिंग, त्रुटियों के सुधार और डेटा के क्रॉस वेरिफिकेशन पर जोर

    रायपुर,
     मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति, खसरों की जियो-रेफरेंसिंग, पॉलीगॉन निर्माण, फसल की वास्तविक स्थिति के सत्यापन तथा सर्वे के डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई।
    राजस्व सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने बताया कि राज्य में अब तक 93.84 प्रतिशत डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। मुख्य सचिव ने शेष कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे का उद्देश्य प्रत्येक खसरे में बोई गई फसल के क्षेत्रफल को वास्तविक स्थिति के आधार पर दर्ज करना है। इसके लिए फसल का भौतिक सत्यापन, जियो-टैगिंग, पॉलीगॉन निर्माण तथा संबंधित जानकारी को डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज कर अपलोड करना सुनिश्चित किया जाए।

    10 नवंबर तक पूरा करें सर्वे का शेष कार्य
    मुख्य सचिव ने अधिकारियों और कलेक्टरों को निर्देश दिए कि डिजिटल क्रॉप सर्वे का शेष कार्य हर हाल में 10 नवंबर तक पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन खसरों का नक्शा उपलब्ध नहीं है या जिनकी जियो-रेफरेंसिंग नहीं हुई है, उनकी पहचान कर पॉलीगॉन तैयार किए जाएं और फसल संबंधी जानकारी डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज कर अपलोड की जाए। इसके लिए जिलों में उपलब्ध ग्रामवार डेटा का उपयोग करते हुए शेष खसरों में धान अथवा अन्य फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज की जाए। पिछले वर्ष के फसल संबंधी रिकॉर्ड का भी आवश्यकतानुसार संदर्भ लिया जाए।

    उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में सर्वे का कार्य 90 प्रतिशत या उससे अधिक पूरा हो चुका है, वहां शेष कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। सर्वेयर, पटवारी और राजस्व विभाग के अन्य मैदानी अमले को सक्रिय कर ग्रामवार प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वे का कार्य केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक फसल स्थिति के आधार पर पूरा होना चाहिए।

    ग्राम सभाओं में किसानों की समस्याओं का होगा निराकरण
    मुख्य सचिव ने बताया कि 1 नवंबर से ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं में डिजिटल क्रॉप सर्वे से संबंधित प्रकरणों का सत्यापन कर उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाए। किसानों को ग्राम सभाओं के आयोजन की जानकारी देने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि वे अपनी फसल संबंधी जानकारी में किसी भी प्रकार की त्रुटि या विसंगति होने पर अपनी आपत्ति और समस्या प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने कहा कि ग्रामवार ऐसे किसानों की सूची तैयार की जाए, जिनकी फसल संबंधी जानकारी का सत्यापन या सुधार किया जाना है। ग्राम सभाओं में किसानों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान किया जाए और आवश्यक सुधारों को रिकॉर्ड में अद्यतन किया जाए। कलेक्टर ग्रामसभा सहित सर्वे की आगे की कार्ययोजना तैयार करें तथा सुधार के लिए प्राप्त आवेदनों और प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें।

    डेटा की गुणवत्ता और क्रॉस वेरिफिकेशन पर विशेष जोर
    मुख्य सचिव ने डिजिटल क्रॉप सर्वे के डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला और राज्य स्तर पर क्रॉस वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सर्वे में किसी भी प्रकार की त्रुटि या डेटा संबंधी गड़बड़ी सामने आने पर तत्काल सुधार किया जाए। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड अंतिम रूप से फ्रीज होने के बाद त्रुटियों को गंभीरता से लिया जाएगा। इसलिए सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। प्रत्येक जिले में सर्वे की प्रगति के साथ उसकी गुणवत्ता की भी नियमित जांच की जाए। उन्होंने विशेष रूप से धान सहित सभी फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि कोई भी पात्र फसल क्षेत्र सर्वे से छूटने न पाए।

    विशेष श्रेणी के किसानों का भी होगा पंजीयन
    मुख्य सचिव ने विशेष श्रेणी के किसानों का अलग से पंजीयन कर उनकी जानकारी डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक में अपलोड करने के निर्देश दिए। इसमें वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के अंतर्गत आने वाले किसान, वन क्षेत्रों के ग्रामों से संबंधित किसान, ग्राम कोटवार तथा शासकीय पट्टाधारी किसानों की जानकारी शामिल करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि इन श्रेणियों के किसानों का सर्वे और पंजीयन भी निर्धारित समय-सीमा में पूरा कर 10 नवंबर तक संबंधित रिपोर्ट अपलोड की जाए। उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय जिलों और एफआरए क्षेत्रों में कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि पात्र किसानों का पंजीयन और फसल संबंधी विवरण सही तरीके से दर्ज हो। मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे की सफलता के लिए सही डेटा, पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि सर्वे का कार्य वास्तविक स्थिति के आधार पर पूरा हो तथा किसानों को अपनी समस्याएं रखने और उनमें सुधार कराने का अवसर मिले।बैठक में मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को जल जीवन मिशन के कार्यों की भी समीक्षा करने और संबंधित प्रगति पर आवश्यक ध्यान देने के निर्देश दिए। 

    बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग की सचिव सुरीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार, संचालक खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग  श्रीमती फरिया आलम सिद्दीकी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • प्रभावित परिवारों को शीघ्र मिले नियमानुसार मुआवजा, नुकसान के आकलन और राहत संबंधी कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश

    प्रभावित परिवारों को शीघ्र मिले नियमानुसार मुआवजा, नुकसान के आकलन और राहत संबंधी कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश

    रायपुर

     पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के हाथी प्रभावित ग्राम मरडीह, फुंगी और कुरमंतपारा का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने हाथियों की गतिविधियों से प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा क्षेत्र में हुए नुकसान की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान मंत्री  अग्रवाल ने वन विभाग के अधिकारियों, एसडीएम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    मंत्री  अग्रवाल ने प्रभावित गांवों के भ्रमण के दौरान ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और हाथियों के कारण उत्पन्न परिस्थितियों तथा उन्हें हो रही परेशानियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान और राहत संबंधी कार्रवाई की जानकारी प्राप्त की। मंत्री  अग्रवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हाथियों से प्रभावित परिवारों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो तथा उनके नुकसान का नियमानुसार आकलन कर मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया प्राथमिकता के साथ पूरी की जाए।

    प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने में न हो अनावश्यक विलंब

    मंत्री  राजेश अग्रवाल ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि हाथियों के कारण हुए नुकसान का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ आकलन किया जाए। प्रभावित परिवारों के प्रकरणों में आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर नियमानुसार मुआवजा दिलाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को समय पर राहत उपलब्ध कराना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में विभागीय समन्वय बनाए रखते हुए त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए।

    मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि हाथियों की गतिविधियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर शासन पूरी तरह संवेदनशील है। ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को आवश्यक राहत दिलाने के लिए सभी संबंधित विभागों को जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करना होगा।

    जनता की सुरक्षा और हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहना हमारी प्राथमिकता: मंत्री  अग्रवाल

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्र में हुए नुकसान की जानकारी मिलते ही आज मैं स्वयं ग्रामीणों के बीच पहुंचा हूं। प्रभावित परिवारों की समस्याओं को समझना और उन्हें समय पर राहत दिलाना हमारी जिम्मेदारी है। मैंने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नुकसान का शीघ्र आकलन कर प्रभावित परिवारों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिलाने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। जनता की सुरक्षा, प्रभावित परिवारों को राहत और हर परिस्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़े रहना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

    उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के साथ वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को आपसी समन्वय से कार्य करना चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    ग्रामीणों से सतर्क रहने और वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील

    मंत्री  अग्रवाल ने ग्रामीणों से अपील की कि हाथियों की मौजूदगी के दौरान पूरी सावधानी बरतें और किसी भी प्रकार का जोखिम न उठाएं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें तथा वन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करें। हाथियों की गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तत्काल वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को सूचित करें। उन्होंने कहा कि मानव जीवन की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की जागरूकता, सतर्कता और प्रशासन के साथ समन्वय से संभावित खतरों को कम किया जा सकता है।

    मंत्री  अग्रवाल ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि शासन और प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान तथा प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित गांवों की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा ग्रामीणों की सुरक्षा और राहत संबंधी कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इस दौरान वन विभाग के अधिकारी, एसडीएम, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

  • छत्तीसगढ़ कोल लेवी केस: ₹104 करोड़ के लेनदेन को लेकर बड़ा खुलासा, कांग्रेस कार्यालय का नाम आया सामने

    छत्तीसगढ़ कोल लेवी केस: ₹104 करोड़ के लेनदेन को लेकर बड़ा खुलासा, कांग्रेस कार्यालय का नाम आया सामने

    रायपुर

     ईओडब्ल्यू ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कोल लेवी घोटाले में सोमवार को विशेष अदालत में छठा पूरक आरोप पत्र दाखिल कर कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से वसूले गए अवैध लेवी के 104.20 करोड़ रुपये रायपुर स्थित राजीव भवन (प्रदेश कांग्रेस कार्यालय) पहुंचाए गए। यह रकम तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक भेजी गई थी।

    जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2020 में खनिज विभाग की आनलाइन ई-परमिट प्रणाली में बदलाव कर जिला खनिज अधिकारी (डीएमओ) का मैन्युअल अनुमोदन अनिवार्य किया गया। इसके बिना डीओ जारी होना बंद कर दिया गया और परिवहन पर रोक लगा दी गई। इसी प्रशासनिक शिकंजे की आड़ में 25 रुपये प्रति टन की दर से अवैध कोयला लेवी की वसूली शुरू हुई। वसूली का मुख्य सूत्रधार सूर्यकांत तिवारी था, जो मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) और वरिष्ठ अफसरों के नाम का दुरुपयोग कर पूरा सिंडिकेट चला रहा था।

    किसे कितनी मिली अवैध रकम

    रामगोपाल अग्रवाल (तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष): डायरियों में दर्ज 'भवन' और 'सी पार्टी' कोडवर्ड की 32 प्रविष्टियों के जरिए कुल 104.20 करोड़ रुपये स्वीकार करने का आरोप।

    देवेंद्र सिंह यादव (पूर्व विधायक, भिलाई नगर): खैरागढ़ उपचुनाव और व्यक्तिगत उपयोग के लिए सहयोगी नवाज के माध्यम से 3 करोड़ रुपये लेने का विवरण।

    चंद्रदेव प्रसाद राय (पूर्व विधायक, बिलाईगढ़): नकद रकम और चुनावी खर्च के अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा दिए गए लाखों रुपये के सोने के आभूषण प्राप्त किए।

    जयप्रकाश मौर्य (तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म):सिंडिकेट को मदद पहुंचाने और पैलेट उद्योगों पर 100 रुपये प्रति टन वसूली के लिए दबाव बनाने के एवज में आर्थिक लाभ प्राप्त किया।

    विनोद तिवारी व रामप्रताप सिंह (कांग्रेस नेता): राजनीतिक प्रभाव और समन्वय के लिए क्रमशः 2.12 करोड़ रुपये और अन्य लेन-देन में सहभागिता के साक्ष्य।

    राजीव भवन में रकम आने और राम गोपाल अग्रवाल तक पहुंचने की जानकारी
    चार्जशीट के मुताबिक, रकम पहुंचाने वाले लोगों के बयानों में कैश से भरा बैग राजीव भवन ले जाकर देवेंद्र डडसेना के पास जमा कराने की बात है। देवेंद्र डडसेना, राम गोपाल अग्रवाल के निजी सहायक के रूप में काम करता था और राजीव भवन में उनके कक्ष के पास बैठता था। राजीव भवन में देवेंद्र डउसेना के साथ कार्यरत कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए।

    रूपेंद्र यादव और सोहन साहू ने बताया कि उन्होंने कई बार भवन के बाईं ओर स्थित शटर के पास गाड़ियों से काले बैग उतरते और देवेंद्र डडसेना के कमरे में रखे जाते देखे। रूपेंद्र यादव ने एक बार में लगभग 8-10 बैग आने और कई बार उन्हें कमरे तक पहुंचाने में मदद करने की बात कही। सोहन साहू ने एक गाड़ी के नंबर में “0009” अंक होने और सफेद स्विफ्ट डिजायर का जिक्र किया।

    बैग लाने-ले जाने के दौरान कार्यालय के उस हिस्से को बंद करने और कर्मचारियों को वहां से हटाने की बात भी सामने आई है। शिशुपाल साहू और गजेंद्र यादव ने बताया कि राम गोपाल अग्रवाल और देवेंद्र डडसेना उस समय कार्यालय में मौजूद थे। उन्होंने उस हिस्से को बंद किए जाने और बैगों के बारे में बाद में मिली जानकारी भी दी।

    शेल कंपनियों और अचल संपत्तियों में निवेश

    जांच में सामने आया कि अवैध वसूली की रकम को छिपाने के लिए रानू साहू के भाई पियूष साहू, सौम्या चौरसिया के रिश्तेदार अनुराग चौरसिया और कारोबारी सुनील कुमार अग्रवाल (इंद्रमणि समूह) व जोगेंदर सिंह का सहारा लिया गया। फर्जी लोन,राइस मिलों के खातों और शेल कंपनियों के जरिए 10.77 करोड़ से अधिक की बैंक एंट्री कराई गई तथा बेनामी जमीनें, वाशरी और फ्लैट खरीदे गए।
    व्हाट्सएप चैट व डायरियों से खुले राज

    ईओडब्ल्यू ने जब्त हस्तलिखित डायरियों, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट्स और आरोपियों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट को पुख्ता साक्ष्य बनाया है। डायरियों में दर्ज 'डी','आरपी', 'जेपी', 'चंद्रा', 'भगत' और 'एमयू' जैसे कोडवर्ड की पहचान जांच के दौरान उजागर हो चुकी है।
    चालान में शामिल आरोपियों की भूमिका

    1. राम गोपाल अग्रवाल

    राम गोपाल अग्रवाल संबंधित अवधि में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्क्ष एवं छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे। जब्त डायरियों में ‘‘भवन’ एवं "C PARTY" के नाम से 32 प्रविष्टियों में कुल ₹104.20 करोड़ (एक सौ चार करोड़ बीस लाख रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में यह रकम राजीव भवन पहुंचाए जाने तथा देवेन्द्र डडसेना के माध्यम से राम गोपाल अग्रवाल द्वारा पार्टी के लिए प्राप्त किए जाने के तथ्य मिले हैं। उनके परिवार से संबंधित कंपनियों के नाम भूमि खरीदी और रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान का विवरण भी चालान में शामिल है।

    2. देवेन्द्र सिंह यादव

    भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव एवं उनके लिए रकम प्राप्त करने वाले नवाज से संबंधित 11 डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹3 करोड़ ;तीन करोड़ रुपयेद्ध दर्ज हैं। इनमें खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल है। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी की ओर से रकम प्राप्त करने तथा उसका उपयोग चुनाव संबंधी कार्यों और स्वयं के लिए करने में देवेंद्र सिंह यादव की भूमिका पाई गई है।

    3. विनोद तिवारी

    विनोद तिवारी के नाम अथवा उनसे जुड़े नामों से जब्त डायरियों में 22 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बारह लाख ग्यारह हजार रुपये (लगभग ₹2.12 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग राजनीतिक कार्यों में करने के तथ्य मिले हैं। खैरागढ़ उपचुनाव की होर्डिंग के भुगतान तथा जिला पंचायत के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के लिए रकम की व्यवस्था से संबंधित विवरण भी सामने आया है।

    4. रामप्रताप सिंह

    जब्त डायरियों में "R P Singh" एवं "RP" नाम से रामप्रताप सिंह से संबंधित 25 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बानवे लाख नब्बे हजार रुपये (लगभग ₹2.93 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने तथा उसे व्यक्तिगत खर्च, राजनीतिक कार्यों, मीडिया प्रबंधन और वाहन व्यवस्था में उपयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है।

    5. चंद्रदेव प्रसाद राय

    तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से संबंधित चार डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹49.50 लाख (लगभग उनचास लाख पचास हजार रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग चुनाव संबंधी खर्चों में करने के तथ्य मिले हैं। इसके अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा उन्हें आभूषण उपलब्ध कराए जाने का विवरण भी चालान में शामिल है।

    6. जयप्रकाश मौर्य

    तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म, जयप्रकाश मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹1 करोड़ (लगभग एक करोड़ रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग के मामलों में उसके साथ संपर्क रखने तथा अवैध वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है। पैलेट उद्योगपतियों को ₹100 प्रति टन की रकम सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए जाने का विवरण भी उनके विरुद्ध चालान में शामिल है।

    7. पियूष कुमार साहू

    पियूष कुमार साहू की भूमिका अपनी बहन रानू साहू को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम संपत्तियों में निवेश कराने में पाई गई है। परिवार से संबंधित 13 संपत्तियों की खरीदी में बैंक खातों से भुगतान के अलावा रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान भी किया गया। रकम के लेन-देन और संपत्ति खरीदी में उनके तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया।

    8. जोगेन्दर सिंह

    जोगेन्दर सिंह, सूर्यकांत तिवारी के व्यावसायिक भागीदार थे। विवेचना में जय अम्बे रोड लाइन्स के माध्यम से नकद रकम की व्यवस्था करने तथा अपनी फर्मों के खातों से बैंक प्रविष्टियां उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका पाई गई है। सात फर्मों को भेजी गई लगभग ₹40 करोड़ (लगभग चालीस करोड़ रुपये) की राशि और उससे संबंधित लेन-देन का विवरण भी चालान में दिया गया है।

    9. अनुराग चौरसिया

    अनुराग चौरसिया की भूमिका सौम्या चौरसिया को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम फ्लैट और भूमि खरीदी में लगाने में पाई गई है। इसके लिए मोटल मधुबन तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया। इन खातों में प्राप्त रकम, आगे किए गए भुगतान और संपत्तियों में निवेश का विवरण चालान में शामिल है।

    10. दीपेश टांक

    दीपेश टांक की भूमिका भूमि सौदे में रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद रकम प्राप्त करने तथा नकद रकम को कृषि आय के रूप में दर्शाने में पाई गई है। भूमि विक्रय के बाद भी वे ओम एग्रो फार्म के कार्यों एवं भुगतान से जुड़े रहे। अवैध रकम को भूमि और फार्म के कार्यों में लगाने तथा उसे वैध आय दर्शाने से संबंधित तथ्य चालान में दिए गए हैं।

    11. सुनील कुमार अग्रवाल

    इंद्रमणि समूह के सुनील कुमार अग्रवाल की भूमिका सूर्यकांत तिवारी की ओर से भेजी गई नकद रकम अपने यहां रखने, उससे आगे भुगतान करने तथा वाशरी खरीदी में निवेश कराने में पाई गई है। इंद्रमणि समूह से संबंधित लेन-देन, वाशरी एवं भूमि खरीदी और नकद रकम के उपयोग का विवरण चालान में शामिल है।

    12. राहुल मिश्रा

    राहुल मिश्रा, सूर्यकांत तिवारी से जुड़ी निर्माण परियोजनाओं में कार्य करते थे। विवेचना में उनके पास बड़ी नकद रकम रखे जाने तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे निखिल चंद्राकर के माध्यम से सूर्यकांत तिवारी को वापस उपलब्ध कराए जाने के तथ्य मिले हैं। निर्माण कार्यों के भुगतान और नकद रकम सुरक्षित रखने में उनकी भूमिका का विवरण चालान में दिया गया है।

     

  • माता साहिब हासी देवी को राष्ट्रीय सम्मान, कोलकाता टकसाल में तैयार हुआ ₹200 का विशेष स्मारक सिक्का

    माता साहिब हासी देवी को राष्ट्रीय सम्मान, कोलकाता टकसाल में तैयार हुआ ₹200 का विशेष स्मारक सिक्का

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 22 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक आयोजन होने जा रहा है। शदाणी दरबार की पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर भारत सरकार 200 का स्मारक सिक्का जारी करेगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रायपुर लोकभवन में सिक्के का विमोचन करेंगी। इस मौके पर माता साहिब के सम्मान में विशेष डाक टिकट भी जारी किया जाएगा। 35 ग्राम वजन वाले इस सिक्के में 50 प्रतिशत चांदी सहित चार धातुओं का मिश्रण होगा। इस पहल को सिंधी समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने के रूप में देखा जा रहा है।

    दरबार के सचिव उदय सांई ने बताया कि किसी सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी होना समाज के लिए ऐतिहासिक मौका है। इससे देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों सिंधी लोगों को गर्व महसूस होगा।

    उन्होंने इस पहल को सफल बनाने में सिक्का संग्राहक विक्रम तेजवानी के वर्षों के प्रयासों को अहम बताया। सिक्के का वजन 35 ग्राम होगा, कोलकाता टकसाल में बना है। स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की अलग-अलग इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे।

    राष्ट्रपति के हाथों होगा सिक्के का विमोचन

    22 अक्टूबर को रायपुर लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्मारक सिक्के का अनावरण करेंगी। आयोजन में 200 से अधिक विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। सिक्के के साथ विशेष डाक टिकट जारी किए जाने की भी जानकारी दी गई है। माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती से जुड़ा यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    35 ग्राम का सिक्का, 50 प्रतिशत चांदी का इस्तेमाल

    प्रसिद्ध मुद्राशास्त्री सुधीर लूणावत के मुताबिक, स्मारक सिक्के का निर्माण भारत सरकार की कोलकाता टकसाल में किया जा रहा है। सिक्के का कुल वजन 35 ग्राम होगा।

    सिक्के में इस्तेमाल होने वाली धातुएं:

    चांदी: 50 प्रतिशत

    तांबा: 40 प्रतिशत

    निकल: 5 प्रतिशत

    जस्ता: 5 प्रतिशत

    धातुओं के इस मिश्रण से तैयार होने वाला सिक्का माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती की स्मृति में जारी किया जाएगा।

    कहां और कैसे होगी सिक्के की बुकिंग?

    शदाणी दरबार के सचिव उदय सांई के अनुसार, सिक्के के विमोचन के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक दरबार की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से इसकी बुकिंग कर सकेंगे। कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए भी बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि, बुकिंग की तारीख, कीमत, उपलब्ध सिक्कों की संख्या और आधिकारिक बिक्री संबंधी विस्तृत जानकारी की पुष्टि संबंधित आधिकारिक घोषणा से की जानी चाहिए।

    सिंधी समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

    दरबार के सचिव उदय सांई ने कहा कि किसी सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी होना समाज के लिए गर्व का विषय है। इससे देश और विदेश में रहने वाले सिंधी समुदाय के लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इस पहल को आगे बढ़ाने में सिक्का संग्राहक विक्रम तेजवानी के वर्षों के प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया।

    शदाणी दरबार की परंपरा 18वीं सदी से जुड़ी हुई है। दरबार के संस्थापक संत शदूराम साहिब का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में हुआ था। दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वर्ष 1768 में वे सिंध क्षेत्र के मठेलो पहुंचे और बाद में हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां प्रज्वलित की गई पवित्र धूनी साहिब आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है।

    बुकिंग की भी मिलेगी सुविधा
    संत डॉ. युधिष्ठिर लाल के बेटे और दरबार के सचिव उदय सांई ने बताया कि स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की कई इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे।

    इसके अलावा कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। उदय सांई ने कहा कि सिंधी समाज के लिए यह आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने के रूप में देखा जा रहा है।

    स्मारक सिक्के के जरिए माता साहिब हासी देवी के योगदान और शदाणी दरबार की पहचान को भी व्यापक स्तर पर प्रतिष्ठा मिलने की उम्मीद है।

    शदाणी दरबार पीठ 300 साल पुराना मठ
    शदाणी दरबार का इतिहास 18वीं सदी से जुड़ा है। इसके संस्थापक संत शदूराम साहिब का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में हुआ था। दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वर्ष 1768 में वे सिंध क्षेत्र के मठेलो पहुंचे।

    इसके बाद उन्होंने हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां पवित्र धूनी साहिब प्रज्वलित की गई, जो आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

    भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद शदाणी परंपरा भारत में भी आगे बढ़ी। रायपुर में धमतरी रोड पर लगभग 12 एकड़ में शदाणी दरबार तीर्थ विकसित किया गया। 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने इसकी नींव रखी।

    वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल इसके नौवें पीठाधीश्वर हैं। दरबार में धार्मिक आयोजनों के साथ मानव सेवा और समाज कल्याण के कार्य भी किए जाते हैं।

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    विभाजन के बाद रायपुर बना शदाणी परंपरा का प्रमुख केंद्र

    भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद शदाणी परंपरा भारत में भी आगे बढ़ी। रायपुर में धमतरी रोड पर लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में शदाणी दरबार तीर्थ विकसित किया गया। 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने इसकी नींव रखी थी। वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल दरबार के नौवें पीठाधीश्वर हैं। यहां धार्मिक आयोजनों के साथ मानव सेवा और समाज कल्याण से जुड़े कार्य भी किए जाते हैं।

    सिक्के से राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी विरासत को पहचान

    माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती पर जारी होने वाला स्मारक सिक्का सिंधी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करेगा। रायपुर में होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं, इतिहास में रुचि रखने वालों और सिक्का संग्राहकों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

  • खैरागढ़ में ‘नमो सेवा’ नाट्य मंचन से दिखा सेवा और समर्पण का संदेश, 500 से अधिक विद्यार्थी हुए शामिल

    खैरागढ़ में ‘नमो सेवा’ नाट्य मंचन से दिखा सेवा और समर्पण का संदेश, 500 से अधिक विद्यार्थी हुए शामिल

    रायपुर : इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में ‘नमो सेवा– अनकही कहानियां’ का जिला स्तरीय भव्य नाट्य मंचन

    500 से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति में संगीत और नाट्य प्रस्तुति के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन, सेवा-संकल्प और राष्ट्र के प्रति समर्पण का किया गया चित्रण

    रायपुर

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिला मुख्यालय खैरागढ़ के इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय परिसर-2 में ‘नमो सेवा–अनकही कहानियां’ का जिला स्तरीय नाट्य मंचन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 500 से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता रही। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने संगीत, अभिनय और भावपूर्ण संवादों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन, सार्वजनिक सेवा के अनुभवों और राष्ट्र के प्रति समर्पण पर आधारित संगीतमय नाटक प्रस्तुत किया।  इस प्रस्तुति में भारतीय कला, संगीत और नाट्य परंपरा के माध्यम से सेवा, जनभागीदारी, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के संदेश को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया।  इसके अतिरिक्त भारत के रंग’ की सांस्कृतिक भावभूमि पर आधारित वंदे मातरम की गौरव गाथा पर भरतनाट्यम , कथक की सामूहिक नृत्य प्रस्तुति दी गयी ।

     जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए नाटक के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से सेवा भाव, कर्तव्यनिष्ठा और समाज के प्रति जिम्मेदारी को प्रस्तुत किया। संगीत और अभिनय के समन्वय से तैयार इस प्रस्तुति ने सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का संदेश दिया।

    ‘नमो सेवा–अनकही कहानियां’ के मंचन का प्रमुख उद्देश्य सेवा और समर्पण के विचारों को जनसामान्य तक पहुंचाना तथा समाज में सकारात्मक योगदान देने की भावना को प्रोत्साहित करना रहा। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जनसेवा केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जनभागीदारी, सामूहिक प्रयास और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों को केंद्र में रखकर विद्यार्थियों ने सेवा के व्यापक अर्थ को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित यह जिला स्तरीय कार्यक्रम सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सेवा के मूल्यों को प्रसारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को देश के सार्वजनिक जीवन, सामाजिक दायित्वों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों को समझने के साथ अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने कला और संस्कृति की भूमिका को रेखांकित करते हुए यह संदेश दिया कि संगीत एवं नाट्य मंचन जनजागरूकता, सामाजिक सहभागिता और सकारात्मक विचारों के प्रसार के प्रभावी माध्यम हैं।

    इस अवसर पर बिसेसर साहू, घम्मन साहू, शशांक ताम्रकार, जैनेन्द्र जंघेल, श्रीमती नीलिमा गोस्वामी, श्रीमती गिरिजा चंद्राकर, विकेश गुप्ता, रामाधार रजक, भावेश कोचर, गोरेलाल वर्मा, श्रीमती वंदना टांडेकर, आयूब सोलंकी, रूपेंद्र रजक और लखन साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

  • सेवा, समर्पण और जिजीविषा की मिसाल सात बार नदियां पार कर स्वास्थ्य दल पहुंचा तुमेरादी

    सेवा, समर्पण और जिजीविषा की मिसाल सात बार नदियां पार कर स्वास्थ्य दल पहुंचा तुमेरादी

    रायपुर

     ​बस्तर के सुदूर, वनांचल और दुर्गम इलाकों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाना हमेशा से एक चुनौती रहा है। लेकिन जब इरादे मजबूत हों, तो नदियां, घने जंगल और दुर्गम पहाड़ भी सेवा की राह में बाधा नहीं बन सकते। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड के अंतिम छोर पर बसे गांव तुमेरादी की 45 वर्षीया सन्नो बाई के जीवन में आया बदलाव, शासन के 'मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान' की संवेदनशीलता और स्वास्थ्य अमले के अप्रतिम समर्पण की बानगी प्रस्तुत करता है।

    ​सात बार नदी पार कर पहुंची 'उम्मीद की किरण'

     ​उप स्वास्थ्य केंद्र मड़पुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित तुमेरादी गांव तक पहुंचने की राह अत्यंत कठिन है। चारों तरफ से घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और नदी-नालों से घिरे इस गांव तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य दल को एक ही नदी को सात बार पार करना पड़ता है। दुर्गम रास्तों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण तुमेरादी के ग्रामीणों के लिए समय पर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करना हमेशा से दुष्कर रहा है।

    लेकिन 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हिम्मत नहीं हारी। दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना टीम गांव पहुंची और ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया।

    ​शिविर में हुआ कुष्ठ रोग का खुलासा

    ​गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर के दौरान 45 वर्षीया श्रीमती सन्नो बाई का परीक्षण किया गया। जांच में सामने आया कि सन्नो बाई लंबे समय से कुष्ठ रोग से पीड़ित थीं। उचित जानकारी के अभाव, आर्थिक तंगी और दूरस्थ भौगोलिक स्थिति के कारण वे अब तक इलाज से वंचित थीं। बीमारी इस कदर बढ़ चुकी थी कि उनके हाथ की उंगलियां प्रभावित होने लगी थीं। ​स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य दल ने तुरंत पहल की और उन्हें जिला चिकित्सालय नारायणपुर भेजा।

    ​जिला अस्पताल में शुरू हुआ त्वरित व मुफ्त इलाज

     ​जिला चिकित्सालय नारायणपुर में विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा सन्नो बाई की विस्तृत जांच की गई और कुष्ठ रोग की पुष्टि होने के बाद तत्काल एमडीटी  दवाइयां उपलब्ध कराकर नियमित उपचार शुरू किया गया। इसके साथ ही सन्नो बाई और उनके परिवार को बीमारी से बचाव, सावधानियों और नियमित दवा के सेवन के महत्व के बारे में विस्तार से परामर्श दिया गया।

    समय पर बीमारी की पहचान और इलाज शुरू होने से सन्नो बाई का हाथ स्थायी रूप से विकलांग होने से बच गया। वर्तमान में उनका उपचार नियमित रूप से जारी है और उनकी स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है।

    ​अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने का संकल्प

     ​सन्नो बाई की यह कहानी केवल एक मरीज के ठीक होने की कथा नहीं है, बल्कि यह उस सेवा-भाव की प्रतीक है जो राज्य सरकार के "अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा" के संकल्प को धरातल पर चरितार्थ करती है।

    ​मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान ने यह साबित कर दिया है कि शासन की स्वास्थ्य सेवाएं केवल सुगम और शहरी इलाकों तक सीमित नहीं हैं। जब सेवा का संकल्प दृढ़ हो, तो कठिन से कठिन रास्ते भी आसान हो जाते हैं। सात बार नदी पार कर और घने जंगलों को चीरते हुए तुमेरादी पहुंची स्वास्थ्य टीम के इस प्रयास ने न केवल सन्नो बाई को एक नया जीवन और नई उम्मीद दी है, बल्कि दूरस्थ अंचलों के ग्रामीणों में स्वास्थ्य तंत्र के प्रति विश्वास को और अधिक सुदृढ़ किया है।

  • कैंसर अस्पताल के काम में लापरवाही पर नाराजगी, हेल्थ मिनिस्टर ने तय की 25 दिसंबर की डेडलाइन

    कैंसर अस्पताल के काम में लापरवाही पर नाराजगी, हेल्थ मिनिस्टर ने तय की 25 दिसंबर की डेडलाइन

    बिलासपुर

    बिलासपुर में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के निरीक्षण के साथ ही राज्य कैंसर अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान मंत्री ने ठेका कंपनी के कर्मचारियों से काम पूरा होने की तारीख पूछी। कर्मचारी ने जल्द काम पूरा करने की बात कही, लेकिन स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताई।

    इस पर विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा- डेट बताओ, ऐसा नहीं चलेगा। पहले ही तीन बार समय बढ़ाया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 25 दिसंबर तक हर हाल में काम पूरा किया जाए, अन्यथा सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

    10 एकड़ में बनेगी सिम्स की नई बिल्डिंग
    दरअसल, कोनी स्थित सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के निरीक्षण में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और अस्पताल की सुरक्षा से जुड़े कई फैसले लिए। उनके साथ स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, डॉ. बीपी सिंह, सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति, डॉ. भूपेन्द्र कश्यप सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान सिम्स की नई बिल्डिंग के लिए जमीन, अस्पताल के खुले रैंप की सुरक्षा, मशीनों की मरम्मत के लिए बजट और अस्पताल तक पहुंचने के लिए नई सड़क बनाने पर चर्चा हुई।

    मंत्री सीधे जमीन देखने जाने के बजाय सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की छठी मंजिल पर पहुंचे। यहां से विधायक सुशांत शुक्ला ने पीछे स्थित करीब 10 एकड़ खाली सरकारी जमीन दिखाई। उन्होंने बताया कि इस जमीन पर सिम्स की नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव है। इसमें करीब 2.5 एकड़ जमीन वन विभाग की है। डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि इस संबंध में विभाग से पहले ही पत्राचार किया जा चुका है।

    खुले रैंप पर जाली लगेगी, जूदेव की प्रतिमा भी लगेगी
    निरीक्षण के दौरान अस्पताल के खुले रैंप को देखकर विधायक सुशांत शुक्ला ने सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रैंप खुला रहने से दुर्घटना की आशंका है और यह आत्महत्या जैसी घटनाओं के लिहाज से भी संवेदनशील स्थान बन सकता है। इस पर मंत्री ने तत्काल रैंप पर सुरक्षा जाली लगाने की स्वीकृति दी।

    विधायक ने अस्पताल परिसर में स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी रखी। मंत्री ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। वहीं डॉ. बीपी सिंह ने अस्पताल की मशीनों में आने वाली छोटी-मोटी खराबियों को तत्काल दूर करने के लिए अलग से बजट जारी करने की मांग की, ताकि उपकरण खराब होने पर मरीजों के इलाज में बाधा न आए।

    ज्यादा लोग सवार हुए तो लिफ्ट नहीं चली
    निरीक्षण के बाद 5वीं मंजिल से नीचे उतरते समय एक लिफ्ट में क्षमता से अधिक लोग सवार हो गए। 12 से ज्यादा लोगों के चढ़ने के कारण लिफ्ट आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद डॉ. बीपी सिंह, डॉ. अर्चना सिंह और सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति को दूसरी लिफ्ट से नीचे उतरना पड़ा। इस घटना ने अस्पताल में लिफ्ट के सुरक्षित उपयोग और क्षमता के पालन का मुद्दा भी सामने ला दिया।

    कैंसर अस्पताल का काम 25 दिसंबर तक पूरा करने के निर्देश
    सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के निरीक्षण के बाद मंत्री का काफिला सिम्स के लिए रवाना हो रहा था। इसी दौरान विधायक सुशांत शुक्ला ने याद दिलाया कि निर्माणाधीन राज्य कैंसर अस्पताल का निरीक्षण बाकी है। इसके बाद काफिला कैंसर अस्पताल पहुंचा, जहां अधिकारियों ने निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी दी।

    मंत्री ने ठेका कंपनी के कर्मचारियों से काम पूरा होने की तारीख पूछी। कर्मचारी ने जल्द काम पूरा करने की बात कही, लेकिन स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताई। इस पर विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा- डेट बताओ, ऐसा नहीं चलेगा। पहले ही तीन बार समय बढ़ाया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 25 दिसंबर तक हर हाल में काम पूरा किया जाए, अन्यथा सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

    डिप्टी सीएम अरुण साव भी पहुंचे
    इस दौरे के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव का फोन आया। वे भी मौके पर पहुंचे और प्रस्तावित योजनाओं और निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद अधिकारियों के साथ अस्पताल से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा की गई।

    तीन रास्तों से जुड़ सकेगा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल
    अस्पताल तक पहुंच आसान बनाने के लिए कामधेनु विश्वविद्यालय के पास से और अस्पताल के पीछे से नई सड़क निकालने पर सहमति बनी। लिंक रोड बनने से सुपरस्पेशलिटी अस्पताल परिसर तक पहुंचने के लिए कुल तीन रास्ते उपलब्ध हो सकेंगे।

    इससे मरीजों और उनके परिजनों को आने-जाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। मंत्री ने विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों को आपसी समन्वय से प्रस्ताव पर जल्द काम करने के निर्देश दिए।

  • छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर रही इंस्पायर अवार्ड योजना, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने बताई अहमियत

    छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर रही इंस्पायर अवार्ड योजना, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने बताई अहमियत

    इंस्पायर अवार्ड योजना से बच्चों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच को मिल रहा प्रोत्साहन – शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव

    शिक्षा मंत्री ने इंस्पायर मानक में चयनित 40 प्रतिभागियों का किया सम्मान

    रायपुर
    शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इंस्पायर अवार्ड कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चयनित लगभग 40 विद्यार्थियों को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता का अवसर मिला यह बहुत हर्ष की बात है।केंद्र सरकार की पहल से संचालित इंस्पायर अवार्ड योजना बच्चों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई मौलिक प्रतिभा होती है, आवश्यकता है उसे पहचानने और उचित अवसर प्रदान करने की। ड्रोन तकनीक, सौर ऊर्जा और दैनिक जीवन में उपयोगी विभिन्न आविष्कारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित किया।

    उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ से लगभग 80 हजार नवाचारी विचार सामने आए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार के साथ शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने तथा अपने आविष्कारों को समाज के लिए उपयोगी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और बच्चों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने में सहयोग देने वाले अभिभावकों एवं शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया ।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा विभाग के सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों को नवाचार, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। नवाचार का अर्थ केवल नई चीजों का आविष्कार करना नहीं, बल्कि पुराने कार्यों को नए और बेहतर तरीकों से करना भी है। विद्यार्थियों को नए विचार विकसित करने, प्रयोग करने तथा अपनी गलतियों से सीखना चाहिए।उन्होंने कहा कि विद्यार्थी चाहे ग्रामीण क्षेत्र, आदिवासी अंचल अथवा किसी भी सामाजिक परिवेश से आते हों, उन्हें स्वयं को कभी कम नहीं समझना चाहिए। सफलता का आधार व्यक्ति की पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि उसकी क्षमता, मेहनत और सोच होती है।भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजी, हिंदी, छत्तीसगढ़ी अथवा कोई भी भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम है। वास्तविक महत्व विषय की समझ, ज्ञान और कार्य करने की योग्यता का है।

    रायपुर के बीटीआई ग्राउण्ड परिसर में स्थित एससीआरटी भवन के सभा कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से चयनित चालीस विद्यार्थियों के साथ ही जुलाई माह में इंस्पायर मानक प्रतियोगिता में राज्य के पाँच प्रतिभागियों को जापान देश जाने और सीखने का अवसर मिला उनको भी सम्मानित किया गया । साथ ही जापान से वापस आए प्रतिभागी रमन दास मानिकपुरी, समीक्षा साहू, सुनयना और शैयाद अली ने अपने अनुभव को भी साझा किया । इस अवसर पर  लोक शिक्षण विभाग के संचालक ऋतुराज रघुवंशी, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण सहित चयनित छात्र एवं छात्राएँ, शिक्षकगण उपस्थित रहे । 

    ज्ञात हो कि इंस्पायर–मानक अवार्ड योजना भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) के सहयोग से संचालित की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहित करना है। योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को उनके मौलिक एवं नवाचारी विचारों पर आधारित प्रोजेक्ट या मॉडल विकसित करने के लिए 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने तथा जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिलता है।