Category: छत्तीसगढ़

  • राज्यपालों की नियुक्ति पर मुख्यमंत्री साय ने जताई खुशी, जनकल्याण को मिलेगी नई दिशा

    राज्यपालों की नियुक्ति पर मुख्यमंत्री साय ने जताई खुशी, जनकल्याण को मिलेगी नई दिशा

    नवनियुक्त राज्यपालों को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई एवं शुभकामनाएं

    मुख्यमंत्री ने कहा- समृद्ध अनुभव और कुशल मार्गदर्शन से संबंधित राज्यों में सुशासन एवं जनकल्याण को मिलेगी नई मजबूती

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा विभिन्न राज्यों के लिए नियुक्त राज्यपालों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने केरल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त ओम प्रकाश माथुर, तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में नियुक्त राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, ओडिशा के राज्यपाल के रूप में नियुक्त ब्रज मोहन राम, कर्नाटक की राज्यपाल के रूप में नियुक्त डॉ. सुधा यादव, उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में नियुक्त डॉ. ढाल सिंह बिसेन तथा सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्त दुष्यंत गौतम को नवीन दायित्व के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सभी नवनियुक्त राज्यपालों का दीर्घ सार्वजनिक जीवन, समृद्ध अनुभव और कुशल मार्गदर्शन संबंधित राज्यों की विकास यात्रा को नई गति प्रदान करेगा तथा सुशासन, जनकल्याण और संवैधानिक मूल्यों को और सुदृढ़ करेगा।

    मुख्यमंत्री साय ने सभी नवनियुक्त राज्यपालों के सफल, यशस्वी एवं गरिमामय कार्यकाल की मंगलकामना की है।

  • छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ के विकास पर सियासत तेज, साय सरकार की योजना में आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई शामिल

    छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ के विकास पर सियासत तेज, साय सरकार की योजना में आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई शामिल

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम के वनगमन पथ को विकसित करने की योजना को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने शोध के आधार पर राम वनगमन पथ के विकास के लिए स्थलों का चयन किया है। योजना के तहत वर्ष 2026 से 2029 तक तीन चरणों में विकास कार्य प्रस्तावित हैं। चयनित स्थलों पर आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि साधु-संतों और श्रद्धालुओं को ठहरने सहित अन्य जरूरी सुविधाएं मिल सकें।

    तीन चरणों में पूरा होगा विकास कार्य
    राज्य सरकार की योजना के अनुसार, राम वनगमन पथ से जुड़े स्थलों का विकास तीन वित्तीय वर्षों में किया जाएगा। पहले चरण में वर्ष 2026-27, दूसरे चरण में 2027-28 और तीसरे चरण में 2028-29 के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार प्रस्तावित है। सरकार का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम से जुड़ी मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाना है।

    कांग्रेस सरकार ने 2019-20 में की थी शुरुआत

    छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पर्यटन परिपथ की घोषणा कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2019-20 में की थी। उस समय इतिहासकार स्वर्गीय हेमू यदु के शोध के आधार पर 75 स्थलों की सूची सामने आई थी। इनमें से नौ स्थलों को विकास के लिए चुना गया था।

    कांग्रेस शासन के दौरान चंदखुरी के कौशल्या मंदिर और शिवरीनारायण सहित कुछ प्रमुख स्थलों पर विकास कार्य हुए। हालांकि, बाकी स्थलों पर योजना का अपेक्षित विस्तार नहीं हो सका। अब साय सरकार ने 31 स्थलों को शामिल करते हुए इस योजना को नए सिरे से आगे बढ़ाने की तैयारी की है।

    पहले चरण में इन स्थलों का होगा विकास
    वर्ष 2026-27 के पहले चरण में रुद्रेश्वर महादेव मंदिर (रुद्री, धमतरी), शृंगी ऋषि-सप्तर्षि आश्रम (नगरी-सिहावा), खरौद, रामाराम, चिंतामीटर मंदिर (सुकमा), रामगढ़, सीता बेंगरा, रामझरना (रायगढ़), विष्णु मंदिर (रामपुर-जुनवानी, कांकेर), चित्रकोट शिव मंदिर और सीतामढ़ी-हरचौका सहित कई स्थलों के विकास की योजना है।

    दूसरे चरण में इन धार्मिक स्थलों पर काम
    वर्ष 2027-28 के दूसरे चरण में राम-लक्ष्मण पायन, सीतामढ़ी-छतोड़ा, सीतामढ़ी-रापा, सीतामढ़ी-कनवाई, सीता लेखनी, सीताकुंड, राम-जानकी मंदिर (सारासोर), पैसर घाट, गड़िया मंदिर, छोटे डोंगर शिव मंदिर तोडमा, राम मंदिर (सूरजपुर) और कोटमसर-कोटि महेश्वर जैसे स्थलों को विकसित करने का प्रस्ताव है।

    तीसरे चरण में शिवरीनारायण और सिरपुर समेत अन्य स्थल
    वर्ष 2028-29 के तीसरे चरण में इंजराम शिव मंदिर, सिंगेश्वर, लोमश ऋषि
    आश्रम, विष्णु मंदिर, कुलेश्वर मंदिर, तीरथगढ़, सीताकुंड, मांडव्य आश्रम, शिवरीनारायण, वाल्मीकि आश्रम, वागेश्वर शिव मंदिर, रक्सा डोंगरी और सिरपुर स्थित राम दिवाला सहित अन्य स्थलों का विकास प्रस्तावित है।

    कांग्रेस ने चंद्रखुरी मंदिर को लेकर उठाए सवाल
    राम वनगमन पथ के लिए स्थलों के चयन को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भगवान श्रीराम के वनगमन मार्ग से जुड़े 75 स्थलों को विकसित करने की पहल की थी। इनमें चंद्रखुरी, शिवरीनारायण, सीतामढ़ी-हरचौका, रामगढ़, राजिम, नगरी-सिहावा, रामाराम, तुरतुरिया और चंपारण सहित नौ स्थलों पर निर्माण कार्य शुरू किया गया था।

    वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा घोषित स्थलों की सूची में माता कौशल्या मंदिर, चंद्रखुरी का उल्लेख नहीं होने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि राम वनगमन पथ से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और पहले से शुरू किए गए अधूरे विकास कार्य भी पूरे किए जाने चाहिए।

    शोध के आधार पर स्थलों के चयन का दावा
    राज्य सरकार ने स्थलों के चयन के पीछे शोध का हवाला दिया है। इसके लिए छत्तीसगढ़ के इतिहासकार स्वर्गीय हेमू यदु की वर्ष 2018 में प्रकाशित पुस्तक ‘छत्तीसगढ़ पर्यटन में राम वनगमन पथ’ और पंडित राम अवतार शर्मा के अध्ययन को आधार बताया गया है। पंडित शर्मा ने अयोध्या से श्रीलंका तक भगवान श्रीराम के वनगमन मार्ग का अध्ययन करते हुए देशभर के 240 से अधिक स्थलों का उल्लेख किया था।

    पर्यटन मंत्री और कांग्रेस ने रखे अपने-अपने तर्क
    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि कुछ स्थलों को राम वनगमन पथ से जोड़ने का उल्लेख किसी ग्रंथ में नहीं मिलता। सरकार के अनुसार, चयन शोध के आधार पर किया गया है और अधूरे विकास कार्यों को भी पूरा किया जाएगा।

    वहीं, कांग्रेस के प्रदेश संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चंद्रखुरी में माता कौशल्या मंदिर के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने भाजपा पर भगवान श्रीराम के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करने का आरोप लगाया।

    धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर नजर
    राम वनगमन पथ के विकास से छत्तीसगढ़ के धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई जैसी सुविधाएं विकसित होने से श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिल सकती है। हालांकि, स्थलों के चयन और चंद्रखुरी मंदिर को सूची में शामिल नहीं किए जाने को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। अब योजना के निर्धारित चरणों में कार्य पूरा करना और चयनित स्थलों पर सुविधाएं विकसित करना सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा।

  • बैंकिंग और वित्तीय सुविधाओं से जुड़ेंगे जरूरतमंद लोग, 31 दिसंबर तक चलेगा विशेष अभियान

    बैंकिंग और वित्तीय सुविधाओं से जुड़ेंगे जरूरतमंद लोग, 31 दिसंबर तक चलेगा विशेष अभियान

    वित्तीय समावेशन योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने 21 अक्टूबर से 31 दिसम्बर तक चलेगा विशेष अभियान

    ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय स्तर पर आयोजित होंगे विशेष शिविर

    प्रधानमंत्री जनधन योजना, जीवन ज्योति बीमा, सुरक्षा बीमा एवं अटल पेंशन योजना से जुड़ेंगे पात्र हितग्राही

    प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय में लगेंगे शिविर

    बैंक खातों की केवाईसी, आधार लिंकिंग एवं निष्क्रिय खातों को सक्रिय करने की मिलेगी सुविधा

    वित्तीय साक्षरता एवं डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के लिए भी नागरिकों को किया जाएगा जागरूक

    रायपुर, 

    भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग द्वारा वित्तीय समावेशन की प्रमुख योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक विशेष संतृप्ति अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के अंतर्गत जिले की सभी ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग सुविधाओं से वंचित नागरिकों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना तथा पात्र हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा एवं वित्तीय समावेशन योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना है।

    प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय में आयोजित होगा शिविर

    अभियान के दौरान प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय में कम से कम एक शिविर आयोजित किया जाएगा, ताकि कोई भी क्षेत्र अभियान से वंचित न रहे। शिविरों में प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत नए बैंक खाते खोलने के साथ ही प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एवं अटल पेंशन योजना के अंतर्गत पात्र नागरिकों का नामांकन किया जाएगा। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को भी बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने पर ध्यान दिया जाएगा।

    निष्क्रिय बैंक खाते होंगे सक्रिय, केवाईसी की मिलेगी सुविधा

       शिविरों में प्रधानमंत्री जनधन योजना अंतर्गत नए बैंक खाते खोलना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना एवं प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में आधार लिंकिंग की प्रक्रिया पूरी करना, प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत नए बैंक खाते खोलना, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों के प्रधानमंत्री जनधन खाते खोलना, निष्क्रिय प्रधानमंत्री जनधन खातों को पुनः सक्रिय करना, वर्तमान जनधन एवं अन्य बचत बैंक खातों की पुनः केवाईसी प्रक्रिया पूरी करना, जिन बैंक खातों में केंद्रीय केवाईसी पहचान संख्या लंबित है, उनमें इसे तैयार करना, बचत बैंक खातों एवं लॉकर जैसी अन्य बैंकिंग सुविधाओं में लंबित नामांकन (नॉमिनी) संबंधी जानकारी अपडेट करने के कार्य किए जायेंगे। इससे नागरिकों को बैंकिंग सेवाओं का सुचारू लाभ प्राप्त करने में सुविधा होगी।

    डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के लिए नागरिकों को किया जाएगा जागरूक

    अभियान के दौरान नागरिकों को वित्तीय साक्षरता, सुरक्षित डिजिटल लेनदेन एवं साइबर धोखाधड़ी से बचाव के संबंध में जागरूक किया जाएगा। शिविरों में विभिन्न वित्तीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही पात्र नागरिकों को योजनाओं से जुड़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना एवं प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत नामांकन तथा बैंक खाते से बीमा प्रीमियम की राशि कटौती के लिए लाभार्थियों की स्पष्ट सहमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

    जिला प्रशासन एवं बैंकों के समन्वय से होगा अभियान का संचालन

    अभियान का संचालन जिला कलेक्टर के समग्र मार्गदर्शन में किया जाएगा। अग्रणी जिला प्रबंधक द्वारा विभिन्न बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों एवं इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के साथ समन्वय स्थापित कर शिविरों का आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा। जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति द्वारा शिविरों की तिथियां एवं स्थान निर्धारित किए जाएंगे। अभियान में पंचायत प्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों, स्व-सहायता समूहों, बैंक मित्रों, ग्राहक सेवा केंद्रों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे। इस विशेष अभियान से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के पात्र नागरिकों को बैंकिंग सेवाओं एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा। वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने की यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर एवं बैंकिंग सुविधाओं से वंचित वर्गों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

  • छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव की हलचल तेज, भाजपा ने 170 वार्डों के लिए उम्मीदवारों के पैनल बनाने की रणनीति बनाई

    छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव की हलचल तेज, भाजपा ने 170 वार्डों के लिए उम्मीदवारों के पैनल बनाने की रणनीति बनाई

    भिलाई
    नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी में पार्षद टिकट को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भिलाई नगर निगम, भिलाई-चरोदा नगर निगम, रिसाली नगर निगम और जामुल नगर पालिका के कुल 170 वार्डों में प्रत्याशियों के चयन के लिए पार्टी तीन-तीन दावेदारों का पैनल तैयार करेगी। इस पैनल में शामिल तीन नामों में से किसी एक पर पार्टी अंतिम मुहर लगाएगी। इस व्यवस्था ने टिकट के दावेदारों की सक्रियता बढ़ा दी है। वार्डों में अपनी दावेदारी मजबूत करने से लेकर संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने की कवायद शुरू हो गई है।

    पार्टी की रणनीति स्पष्ट है कि केवल दावेदारी जताने या संगठन में प्रभाव रखने से टिकट नहीं मिलेगा, बल्कि प्रत्याशी की चुनाव जीतने की क्षमता भी अहम होगी। ऐसे में दावेदारों को अपने राजनीतिक संपर्कों के साथ वार्ड में जनाधार, सक्रियता और मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता साबित करनी होगी।

    तीन नामों में जगह बनाने की पहली चुनौती
    भाजपा की टिकट चयन प्रक्रिया में फिलहाल दावेदारों के सामने पहली चुनौती तीन सदस्यीय पैनल में जगह बनाना है। प्रत्येक वार्ड से तीन संभावित प्रत्याशियों के नाम तैयार कर आगे भेजे जाएंगे। इसके बाद पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इन नामों पर विचार कर अंतिम प्रत्याशी तय करेगा। यानी टिकट की दौड़ में शामिल प्रत्येक नेता और कार्यकर्ता को पहले स्थानीय स्तर पर अपनी दावेदारी मजबूत करनी होगी। इस प्रक्रिया के चलते वार्डों में लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं के साथ उन नेताओं की भी नजर टिकट पर है, जो आगामी चुनाव को अपने राजनीतिक भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

    बैठकों के बाद वार्ड स्तर पर शुरू होगी रायशुमारी
    प्रत्याशियों के चयन को लेकर भाजपा संगठन लगातार बैठकें कर रहा है। वार्ड स्तर पर संभावित नामों पर चर्चा और स्थानीय लोगों से राय लेने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने वाली है। इस दौरान दावेदारों की सक्रियता, संगठन के प्रति योगदान, स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ और चुनावी संभावनाओं को ध्यान में रखा जा सकता है। पार्टी के सामने चारों नगरीय निकायों में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती है। इसलिए प्रत्याशी चयन में स्थानीय परिस्थितियों और वार्ड के समीकरणों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिस वार्ड में कई मजबूत दावेदार हैं, वहां पैनल तैयार करना संगठन के लिए आसान नहीं होगा।

    Bदावेदारों के सामने जनाधार साबित करने की चुनौती
    टिकट के लिए सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं को अब अपनी दावेदारी के समर्थन में राजनीतिक ताकत दिखानी होगी। वार्ड में लोगों के बीच उनकी मौजूदगी, स्थानीय समस्याओं को लेकर सक्रियता और मतदाताओं से संपर्क जैसे पहलू अहम हो सकते हैं। पार्टी ऐसे प्रत्याशी उतारना चाहती है, जो केवल चुनाव लड़ने के इच्छुक न हों, बल्कि जीत हासिल करने की क्षमता भी रखते हों। हालांकि, तीन नामों के पैनल में शामिल होना टिकट की गारंटी नहीं होगा। अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व के हाथ में रहेगा।

        तीन लोगों के नाम का पैनल भेजेंगे
        प्रत्येक वार्ड से तीन लोगों के नाम का पैनल बनाकर भेजा जाएगा। इसके बाद पार्टी हाईकमान तय करेगा कि संबंधित वार्ड से किसे पार्षद प्रत्याशी बनाया जाना है। चारों नगरीय निकायों के 170 वार्डों में प्रत्याशियों के चयन की यह प्रक्रिया भाजपा के चुनावी अभियान की दिशा तय करेगी।

        – पुरुषोत्तम देवांगन , भिलाई जिला अध्यक्ष,भाजपा

     

  • छत्तीसगढ़ के गांवों में धर्मांतरण के खिलाफ नाराजगी, पास्टर-पादरियों की एंट्री रोकने के लिए लगाए बोर्ड

    छत्तीसगढ़ के गांवों में धर्मांतरण के खिलाफ नाराजगी, पास्टर-पादरियों की एंट्री रोकने के लिए लगाए बोर्ड

    भानुप्रतापपुर.

    छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में धर्मांतरण को लेकर विरोध का मामला एक बार फिर सामने आया है। अंतागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत कानागांव में ग्रामीणों ने गांव की सीमा पर पास्टर-पादरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने संबंधी सूचना बोर्ड लगाया है।

    11 अक्टूबर को आयोजित सेक्टर स्तरीय गायता जोहारनी कार्यक्रम के बाद यह बोर्ड लगाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे धर्मांतरण के विरोध में हैं। भानुप्रतापपुर के मुंगवाल गांव से शुरू हुआ यह सिलसिला अब अंतागढ़ क्षेत्र तक पहुंच गया है। मामले में प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। जानकारी के मुताबिक, 11 अक्टूबर को कानागांव में सेक्टर स्तरीय गायता जोहारनी कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के बाद ग्रामीणों ने गांव की सीमा पर पास्टर-पादरियों के प्रवेश निषेध से जुड़ा बोर्ड लगाया। स्थानीय लोगों के अनुसार, ग्रामीण धर्मांतरण के विरोध में हैं। इसी के चलते गांव के बाहर यह सूचना बोर्ड लगाया गया है।

    मुंगवाल गांव से शुरू हुआ सिलसिला अब अंतागढ़ तक पहुंचा
    कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र के मुंगवाल गांव से इस तरह के बोर्ड लगाए जाने का सिलसिला शुरू हुआ था। मुंगवाल में पहली बार ऐसा बोर्ड लगाए जाने के बाद यह मामला चर्चा में आया था। अब अंतागढ़ क्षेत्र के कानागांव में भी इसी तरह का बोर्ड लगाए जाने से यह मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है।

    प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
    कांकेर जिले के कानागांव में पास्टर-पादरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध संबंधी बोर्ड लगाए जाने के मामले में फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ग्रामीणों के इस कदम के बाद धर्मांतरण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। अब इस मामले में प्रशासन क्या रुख अपनाता है और आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • निःशुल्क डायलिसिस से सुकमा जिला अस्पताल बना मरीजों का सहारा

    निःशुल्क डायलिसिस से सुकमा जिला अस्पताल बना मरीजों का सहारा

    सेवा की कहानी

    रायपुर
    कभी दुर्गम क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले बस्तर के सुकमा जिले में अब स्वास्थ्य सेवाएं दूर-दराज के मरीजों के लिए उम्मीद बन रही हैं। जिला अस्पताल में संचालित निःशुल्क डायलिसिस यूनिट किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को राहत दे रही है। इसका लाभ छत्तीसगढ़ के मरीजों के साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा के मलकानगिरी से आने वाले लोग भी उठा रहे हैं।

    मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सुकमा जिला प्रशासन अस्पताल की व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी कर रहा है। कलेक्टर श्री अमित कुमार जिला चिकित्सालय की स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित समीक्षा कर रहे हैं। वहीं, विशेषज्ञों और चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से डॉक्टरों की नियुक्तियां की गई हैं। इससे अस्पताल में उपचार की सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिली है।

    दो महीने से मिल रही निःशुल्क सेवा
    ओडिशा के मलकानगिरी निवासी गौतम मजूमदार किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्हें उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ रही थी। सुकमा के डायलिसिस सेंटर की जानकारी मिलने पर उन्होंने यहां उपचार शुरू कराया। गौतम बताते हैं, पिछले दो महीनों से सुकमा जिला अस्पताल में मुझे पूरी तरह निःशुल्क डायलिसिस की सुविधा मिल रही है। यहां अस्पताल का स्टाफ भी आत्मीयता से देखभाल करता है। इस सुविधा से मुझे काफी राहत मिली है। मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का आभारी हूं।

    मलकानगिरी के ही ध्रुवल राय और दत्ता जैसे मरीजों को भी यहां उपचार का लाभ मिल रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि सीमावर्ती क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं लोगों को उपचार के लिए दूर जाने की मजबूरी से राहत दे सकती हैं। सुकमा जिला अस्पताल में निःशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक राहत के साथ भरोसे का आधार भी बन रही है।

  • कृषि, पशुपालन और मानव स्वास्थ्य से जुड़े अनुसंधान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण उपलब्धि

    कृषि, पशुपालन और मानव स्वास्थ्य से जुड़े अनुसंधान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण उपलब्धि

    संक्रामक रोगों की पहचान, रोकथाम और वैक्सीन अनुसंधान को मिलेगी गति

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर परिसर में स्थापित अत्याधुनिक बायोसेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल-3) प्रयोगशाला छत्तीसगढ़ में उच्चस्तरीय जैव-सुरक्षा अनुसंधान को नई दिशा देने के साथ ही वैज्ञानिक नवाचार और संक्रामक रोगों की रोकथाम के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस प्रयोगशाला के माध्यम से संक्रामक रोगजनकों की पहचान, उनके वैज्ञानिक अध्ययन, वैक्सीन एवं उपचार संबंधी अनुसंधान तथा उन्नत नैदानिक तकनीकों के विकास को बढ़ावा मिलेगा।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं का विस्तार राज्य के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कृषि एवं पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था वाले छत्तीसगढ़ में इस प्रकार की उच्चस्तरीय वैज्ञानिक सुविधा का विशेष महत्व है।

    उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी द्वारा नवनिर्मित सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के अंतर्गत स्थापित बायोसेफ्टी लेवल-3 प्रयोगशाला का लोकार्पण विगत 28 सितंबर को किया गया था। मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश चंदेल के प्रयासों की सराहना करते हुए बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीएसएल-3 प्रयोगशाला के माध्यम से पौधों, पशुओं और मानव स्वास्थ्य से जुड़े संक्रामक रोगों, विशेषकर पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले जूनोटिक रोगों के अध्ययन एवं निगरानी को नई गति मिलेगी। यह सुविधा गंभीर संक्रामक रोगों की शीघ्र पहचान, रोग प्रकोप से निपटने की तैयारी और उन्नत नैदानिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने में उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

    उन्होंने कहा कि इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला में उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप नियंत्रित वातावरण उपलब्ध होगा, जिससे वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को संक्रामक रोगजनकों के अध्ययन तथा वैक्सीन एवं उपचार संबंधी अनुसंधान के नए अवसर प्राप्त होंगे। इससे राज्य में कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, पशु स्वास्थ्य और संक्रामक रोग अनुसंधान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के परस्पर संबंधों पर आधारित 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण को मजबूत बनाने में भी यह प्रयोगशाला महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में रोगों की निगरानी और वैज्ञानिक समाधान विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

    श्री साय ने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय पहले से ही कृषि अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। विश्वविद्यालय की फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला कृषि नमूनों, मृदा, जल, फसल अवशेषों तथा अन्य नमूनों के परीक्षण एवं अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बीएसएल-3 प्रयोगशाला की स्थापना से विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमताओं को और अधिक मजबूती मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सुविधा से वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, प्रयोगशाला तकनीशियनों एवं संबंधित विशेषज्ञों को उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण और अनुसंधान के अवसर मिलेंगे। इससे राज्य में कुशल वैज्ञानिक मानव संसाधन विकसित करने के साथ ही आधुनिक अनुसंधान तकनीकों के विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा।

    मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि बीएसएल-3 प्रयोगशाला भविष्य में संक्रामक रोग अनुसंधान, रोग निगरानी, जैव-सुरक्षा, पशु एवं जूनोटिक रोगों के अध्ययन तथा रोग प्रकोप से निपटने की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अधोसंरचना के रूप में विकसित होगी। इससे छत्तीसगढ़ में उच्चस्तरीय जैव-सुरक्षा अनुसंधान को नई गति मिलने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता और पहचान को भी मजबूती मिलेगी।

     

  • बरसात में टपकती छत से मिली मुक्ति, पीएम जनमन आवास से संगीता पहाड़ी कोरवा का पक्के घर का सपना हुआ साकार

    बरसात में टपकती छत से मिली मुक्ति, पीएम जनमन आवास से संगीता पहाड़ी कोरवा का पक्के घर का सपना हुआ साकार

    सेवा संकल्प अभियान-2026

    कभी खपरैल की छत से टपकता था पानी, अब अपने पक्के मकान में सुरक्षित और सुकून भरा जीवन जी रहा परिवार

    प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना से मिली सुरक्षित छत, घर में नल से पानी की सुविधा ने भी आसान बनाया जीवन

    पक्का आशियाना मिलने पर संगीता ने जताई खुशी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति व्यक्त किया आभार

    रायपुर
    कभी आसमान में बादल छाते ही संगीता पहाड़ी कोरवा की चिंता बढ़ जाती थी। खपरैल और कच्ची छत वाले मकान में बारिश का पानी टपकने लगता था। बरसात के दिनों में घर के भीतर पानी आने से परिवार को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना से संगीता के परिवार को अपना पक्का आशियाना मिल गया है। जिस परिवार के लिए कभी बारिश का मौसम परेशानियों का कारण बन जाता था, वह आज अपने पक्के मकान में सुरक्षित और सुकून भरा जीवन व्यतीत कर रहा है।

    सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खाला के कोरवा पारा निवासी संगीता पहाड़ी कोरवा की यह कहानी शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण परिवारों के जीवन में आ रहे बदलाव का उदाहरण है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने उनके परिवार को न केवल पक्की छत उपलब्ध कराई है, बल्कि वर्षों से कच्चे मकान में रहने की परेशानियों से भी राहत दिलाई है।

    बरसात में टपकती थी छत, कच्चे मकान में रहना था मुश्किल
    संगीता बताती हैं कि पहले उनका परिवार खपरैल और कच्ची छत वाले मकान में रहता था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था और घर के भीतर पानी आने से काफी परेशानी होती थी। बरसात के दौरान परिवार को घर में सुरक्षित रहने और घरेलू सामान को पानी से बचाने की चिंता बनी रहती थी। कच्चे मकान की असुविधाओं के बीच जीवन गुजारना उनकी मजबूरी थी।

    संगीता के मन में भी अपने परिवार के लिए एक पक्का घर होने का सपना था, जहां बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने की परेशानी न हो और परिवार सुरक्षित रह सके।प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना से मिला लाभ उनके इसी सपने को साकार करने का माध्यम बना।

    पीएम जनमन आवास से मिला अपना पक्का घर, वर्षों पुरानी परेशानी हुई दूर
    प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत संगीता पहाड़ी कोरवा को पक्के आवास का लाभ मिला। उनके मकान का निर्माण पूरा हो चुका है और अब वे अपने परिवार के साथ उसी घर में निवास कर रही हैं। संगीता बताती हैं कि पहले बारिश होने पर घर में पानी टपकता था, लेकिन अब पक्का मकान बनने से यह परेशानी दूर हो गई है। परिवार को सुरक्षित छत मिलने के साथ रहने की बेहतर सुविधा भी उपलब्ध हुई है।

    उनके पति का नाम शनि लाल है। परिवार में सास-ससुर भी हैं, जो अलग रहते हैं। संगीता अपने परिवार के साथ नवनिर्मित पक्के मकान में रह रही हैं। उनका कहना है कि पक्का आवास मिलने से परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें पहले की तरह कच्ची छत और बारिश के पानी की चिंता नहीं करनी पड़ती।

    पक्के आवास के साथ घर में नल से पानी की सुविधा, दैनिक जीवन हुआ आसान
    संगीता के नवनिर्मित आवास में नल से पानी की सुविधा भी उपलब्ध है। इससे परिवार को घरेलू कार्यों के लिए पानी की व्यवस्था करने में सहूलियत मिल रही है। संगीता बताती हैं कि पक्का घर बनने के बाद रहने की व्यवस्था पहले से काफी बेहतर हुई है। घर में पानी की सुविधा उपलब्ध होने से दैनिक जरूरतों को पूरा करना भी आसान हुआ है। उनके लिए अपना पक्का मकान केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और सम्मान के साथ जीवन जीने का आधार बन गया है।

    “पहले बरसात में पानी टपकता था, अब अपने पक्के घर में कोई परेशानी नहीं होती”
    अपने पक्के आवास में रह रहीं संगीता पहाड़ी कोरवा खुशी व्यक्त करते हुए बताती हैं, “पहले हमारा खपरैल और कच्ची छत वाला घर था। बरसात में पानी टपकता था, जिससे बहुत परेशानी होती थी। अब आवास मिल गया है और घर भी पूरा बन गया है। हम उसी में रहते हैं, अब कोई परेशानी नहीं होती। घर में नल से पानी की सुविधा भी है।” संगीता के शब्दों में पक्का आवास मिलने की खुशी साफ झलकती है। वर्षों तक कच्चे मकान में परेशानियां झेलने के बाद अब उनका परिवार सुरक्षित छत के नीचे रह रहा है।

    प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
    प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना का लाभ मिलने पर संगीता पहाड़ी कोरवा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पक्का आवास मिलने से उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। अब वे अपने घर में सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से रह पा रही हैं। संगीता ने आत्मीयता के साथ कहा, “इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विष्णु भइया को बहुत-बहुत धन्यवाद।”

    पीएम जनमन आवास से विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार के जीवन में आया बदलाव
    प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों के पात्र परिवारों को पक्के आवास की सुविधा उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास प्रदान कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। संगीता पहाड़ी कोरवा की कहानी इसी बदलाव की एक तस्वीर प्रस्तुत करती है। कभी खपरैल की छत से टपकते पानी के बीच जीवन गुजारने वाला उनका परिवार आज अपने पक्के मकान में रह रहा है।पक्के आवास के साथ घर में नल से पानी की सुविधा मिलने से परिवार की दैनिक परेशानियां भी कम हुई हैं।

     

  • भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी सरदार सिंह होंगे लीग के एंबेसडर, अरुण साव ने की घोषणा

    भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी सरदार सिंह होंगे लीग के एंबेसडर, अरुण साव ने की घोषणा

    ओलंपियन सुरेंद्र कुमार, प्रदीप मोर, एस.वी. सुनील, ललित कुमार उपाध्याय, शमशेर सिंह और चिंगलेनसाना सिंह करेंगे टीमों की अगुवाई

    रायपुर
    भारत के सबसे प्रतिष्ठित और सफल फील्ड हॉकी खिलाड़ियों में से एक सरदार सिंह को छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के पहले सीजन का लीग एंबेसडर घोषित किया गया है। राज्य सरकार द्वारा आयोजित भारत की पहली हॉकी लीग, छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का उद्घाटन सीजन 21 अक्टूबर से 1 नवम्बर तक राजधानी रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में आयोजित होगा। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव के मुख्य आतिथ्य में आज रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित एक कार्यक्रम में लीग की छह फ्रेंचाइज़ीस और टीमों का ऐलान किया गया। ड्रा के जरिए फ्रेंचाइजीस को टीमों के आबंटन के साथ ही सभी टीमों की जर्सी भी लॉन्च की गई। टीम ड्रॉ के माध्यम से प्रत्येक फ्रेंचाइज़ी को 22 खिलाड़ियों का दल और एक मुख्य कोच आबंटित किया गया।
     
    उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम में कहा, “छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के पहले सीजन के लिए सरदार सिंह जैसी प्रतिष्ठित शख्सियत को लीग एंबेसडर बनाना हमारे युवा खिलाड़ियों को सही संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वह भारत के सबसे प्रतिष्ठित हॉकी खिलाड़ियों में से एक हैं और उनकी विशेषज्ञता से इस लीग को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।”

    श्री साव ने जमीनी स्तर पर छत्तीसगढ़ में हॉकी को प्रभावी ढंग से बढ़ावा देने के लिए लीग और फ्रेंचाइज़ी टीमों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “मैं उन छह टीम मालिकों और प्रायोजकों का हार्दिक स्वागत करता हूं, जिन्होंने हमारे खेल का समर्थन करने और इसमें निवेश करने का निर्णय लिया है। हॉकी को बढ़ावा देने के लिए उनका दृष्टिकोण और दृढ़ संकल्प सराहनीय है। राज्य में हॉकी के पुनरुत्थान की इस महत्वपूर्ण पहल में सरकार के साथ साझेदारी के लिए मैं उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं।”

    छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के लीग एंबेसडर सरदार सिंह ने कहा, “एक पूर्व खिलाड़ी और अब हॉकी इंडिया के साथ कोच के रूप में मैंने छत्तीसगढ़ में खेलों के विकास को करीब से देखा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षा राज्य को एक खेल राज्य के रूप में विकसित करने की है। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की शुरुआत एक ऐसी पहल है, जो दूसरे राज्यों के लिए मिसाल बनेगी। मुझे विश्वास है कि इससे छत्तीसगढ़ के हॉकी खिलाड़ियों को बहुत लाभ मिलेगा। सीएचएल का लीग एंबेसडर बनना मेरे लिए केवल एक मानद पद नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भविष्य के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सितारों के रूप में विकसित करने में योगदान देने का अवसर भी है।”

    सीएचएल में छह फ्रेंचाइज़ी टीमें शामिल हैं, जिनमें राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज खिलाड़ियों, ओलंपियनों, स्थानीय प्रतिभाओं और छत्तीसगढ़ क्षेत्र के अनुभवी खिलाड़ियों का शानदार मिश्रण देखने को मिलेगा। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को उच्च स्तरीय मंच उपलब्ध कराना और राज्य में घरेलू हॉकी के ढांचे को मजबूत करना है।

    प्रतियोगिता की छह फ्रेंचाइजी टीमों के साथ प्रतिष्ठित संस्थान जुड़े हैं। चक्रधर चैंपियंस की फ्रेंचाइजी जिंदल स्टील लिमिटेड, न्यायधानी नाइट्स की साउथ इस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), राजधानी रॉयल्स की बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड, मैनपाट टाइगर्स की छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल, संस्कारधानी स्ट्राइकर्स की सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड और बैलाडीला बुल्स की फ्रेंचाइजी एनएमडीसी लिमिटेड के पास है।

    विजेता को मिलेंगे 11 लाख रुपए, 18 पुरुष मुकाबलों के साथ महिला हॉकी का भी दिखेगा रोमांच

    छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में छह फ्रेंचाइजी टीमों के कुल 132 खिलाड़ी मैदान में उतरेंगे। इनमें छत्तीसगढ़ के 108 स्थानीय और 24 अतिथि खिलाड़ी शामिल हैं। प्रत्येक टीम में 22 खिलाड़ी होंगे। इनमें चार अतिथि खिलाड़ी शामिल रहेंगे। हर टीम में एक पूर्व ओलंपियन मार्की खिलाड़ी भी होगा। 21 अक्टूबर से 1 नवम्बर तक आयोजित इस लीग में 18 पुरुष हॉकी मुकाबले और एक प्रदर्शनी महिला हॉकी मैच खेला जाएगा। खिलाड़ियों के लिए कुल 21 लाख रुपए की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। विजेता टीम को 11 लाख और उपविजेता को छह लाख रुपए मिलेंगे। दर्शक सभी मुकाबलों का नि:शुल्क आनंद ले सकेंगे। हॉकी के रोमांच के साथ छत्तीसगढ़ी संस्कृति और मनोरंजन का भी रंग जमेगा।

    लीग की सबसे बड़ी खासियत प्रत्येक टीम में एक पूर्व ओलंपियन का मार्की खिलाड़ी के रूप में शामिल होना है। इन छह दिग्गज खिलाड़ियों में एस.वी. सुनील, सुरेंद्र कुमार, ललित कुमार उपाध्याय, चिंगलेनसाना सिंह, शमशेर सिंह और प्रदीप मोर के नाम शामिल हैं। इन अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी से स्थानीय खिलाड़ियों को भी मैदान पर उनके साथ खेलने का अवसर मिलेगा।

    छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए पुरस्कारों की भी आकर्षक व्यवस्था की गई है। कुल 21 लाख रुपए की पुरस्कार राशि में से 17 लाख रुपए विजेता और उपविजेता टीमों के लिए निर्धारित हैं। विजेता टीम को 11 लाख रुपए तथा उपविजेता को छह लाख रुपए दिए जाएंगे। व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिए अलग-अलग श्रेणियों में कुल चार लाख रुपए के पुरस्कार रखे गए हैं।

  • दो सीसी सड़क सह नाली निर्माण कार्यों का भूमिपूजन के साथ ही निर्माण कार्य प्रारंभ

    दो सीसी सड़क सह नाली निर्माण कार्यों का भूमिपूजन के साथ ही निर्माण कार्य प्रारंभ

    रायपुर
    उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और विकास कार्यों को गति देते हुए मुख्यमंत्री गौरव पथ योजना के अंतर्गत कबीरधाम जिले में कुल 78.51 लाख रुपए की लागत से सीसी सड़क सह नाली निर्माण कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया। इस अवसर पर क्षेत्र की महिलाओं की सहभागिता के साथ भूमिपूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ। भूमिपूजन के साथ ही दोनों निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिए गए। इन निर्माण कार्यों के पूर्ण होने से ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलेगी तथा व्यवस्थित नाली निर्माण से जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी। इससे गांवों में सड़क एवं नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा और ग्रामीणों को दैनिक आवागमन में होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी।

           मुख्यमंत्री गौरव पथ योजना के अंतर्गत ग्राम धरमपुरा में मानिकचौरी मेन रोड से धान खरीदी केंद्र एवं गौठान तक 49.74 लाख रुपए की लागत से 0.5 किलोमीटर लंबाई में सीसी सड़क सह नाली का निर्माण किया जाएगा। इस निर्माण कार्य से ग्रामीणों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी। साथ ही सड़क के किनारे नाली निर्माण होने से जल निकासी व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही ग्राम बिरकोना में 28.77 लाख रुपए की लागत से 0.25 किमी लंबाई में सीसी सड़क सह नाली निर्माण कार्य कराया जाएगा। उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने संबंधित अधिकारी और ठेकेदार को गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के निर्देश दिए।

         उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में ग्राम बिरकोना में 1 करोड़ 2 लाख 96 हजार रुपए तथा ग्राम धरमपुरा में  1 करोड़ 24 लाख 7 हजार रुपए की लागत से विभिन्न विकास कार्य कराए गए हैं। इसके साथ ही दोनों गांवों में सैकड़ों प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण भी किया गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों को पक्के मकान की सुविधा मिली है। सरकार का उद्देश्य गांवों में सड़क, नाली, आवास सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार कर ग्रामीणों के जीवन को और अधिक सुविधाजनक बनाना है।

        उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने कहा कि कवर्धा विधानसभा क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। इसके तहत स्कूलों में लगाई गई स्क्रीन के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ करियर काउंसलिंग और कोचिंग की सुविधा भी मिलेगी।विधानसभा क्षेत्र के कुल 85 स्कूलों में से अब तक 50 स्कूलों में स्क्रीन लगाई जा चुकी हैं। शेष 35 स्कूलों में भी स्क्रीन लगाने की योजना है। इसके अलावा क्षेत्र के सभी 8 छात्रावासों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस पहल के तहत देश के प्रमुख ऑनलाइन शिक्षा संस्थानों में शामिल फिजिक्स वाला के माध्यम से विद्यार्थियों को कोचिंग उपलब्ध कराने के लिए बातचीत की गई है। योजना के अनुसार, विद्यार्थियों को स्कूलों और छात्रावासों में ही स्क्रीन के माध्यम से ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य महंगी कोचिंग और दूसरे शहरों में जाकर पढ़ाई करने की मजबूरी को कम करना तथा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना है।

         तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में साहसिक कार्य किया गया है। वे बिरकोना और धरमपुरा जैसे गांवों की जरूरतों को समझते हुए लगातार विकास कार्यों को गति प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों द्वारा भूमिपूजन किया जाना भी सराहनीय है, क्योंकि महिलाओं की भागीदारी के बिना समाज और क्षेत्र का विकास संभव नहीं है। विकास एक सतत प्रक्रिया है, जो कभी रुकनी नहीं चाहिए। इस दौरान पुर्व विधायक मोतीराम चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य बीरेंद्र साहू ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

    भूमिपूजन के साथ ही शुरू हुए निर्माण कार्य
          उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, नाली सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता देते हुए इन निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया। दोनों कार्यों को भूमिपूजन के साथ ही प्रारंभ कर दिया गया है। इन निर्माण कार्यों से धरमपुरा और बिरकोना के ग्रामीणों को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध होने के साथ ही गांवों में बुनियादी अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी।