Category: छत्तीसगढ़

  • खरीफ की 30 और रबी की 15 हेक्टेयर फसल को मिल रहा सिंचाई का पानी, वर्तमान में पूरी क्षमता से भरा बांध

    खरीफ की 30 और रबी की 15 हेक्टेयर फसल को मिल रहा सिंचाई का पानी, वर्तमान में पूरी क्षमता से भरा बांध

    रायपुर

    ग्रामीणों की एक मांग ने आज सरगुजा जिले के सकालो और आसपास के क्षेत्र में जल उपलब्धता की तस्वीर बदल दी है। मवेशियों के लिए पेयजल और निस्तारी की समस्या को देखते हुए ग्रामीणों की मांग पर निर्मित सकालो मुरना बांध अब सिंचाई, निस्तारी और जल संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार बन गया है। बांध से खरीफ की 30 हेक्टेयर और रबी की 15 हेक्टेयर फसल को पानी मिल रहा है। इस तरह कुल 45 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को खेती में सहूलियत मिली है।

    ग्रामीणों की जरूरत बनी बांध निर्माण की पहल का आधार

    अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम सकालो में ग्रामीणों ने मवेशियों के लिए पेयजल संकट और निस्तारी की समस्या को देखते हुए जल संसाधन विभाग से सकालो मुरना में बांध निर्माण की मांग की थी। ग्रामीणों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जल संसाधन विभाग ने स्थल का मुआयना किया और बांध निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा।

    सकालो मुरना बांध निर्माण योजना को 30 जनवरी 2023 को 374.96 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली। इसके बाद निविदा प्रक्रिया पूरी कर निर्माण शुरू किया गया और 15 जून 2024 को बांध का निर्माण पूर्ण हुआ।

    पूरी क्षमता से भरा बांध, आसपास के क्षेत्र में बढ़ा जलस्तर

    वर्तमान में सकालो मुरना बांध पूरी क्षमता से भरा हुआ है। बांध में पर्याप्त जलभराव होने से सकालो मुरना के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी जलस्तर बढ़ा है। इससे निस्तारी और जल संकट की समस्या से राहत मिलने के साथ मवेशियों के लिए भी पेयजल की उपलब्धता बेहतर हुई है।

    स्थानीय स्तर पर जल संग्रहण की सुविधा विकसित होने से ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है और क्षेत्र में जल संरक्षण को भी मजबूती मिली है।

    45 हेक्टेयर खेती को मिला सिंचाई का सहारा

    बांध का बड़ा लाभ क्षेत्र के किसानों को मिल रहा है। इससे लगभग 30 हेक्टेयर खरीफ और 15 हेक्टेयर रबी फसल के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध हो रहा है। कुल 45 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में पानी की सुविधा मिलने से किसानों के लिए खेती करना आसान हुआ है।

    रबी सीजन में भी पानी की उपलब्धता ने किसानों के लिए खेती की संभावनाओं को मजबूत किया है। सिंचाई का स्थानीय स्रोत उपलब्ध होने से खेती को सहारा मिलने के साथ किसानों की आजीविका को भी संबल मिला है।

    जल संरक्षण के साथ आवागमन की भी मिली सुविधा

    सकालो मुरना बांध का लाभ केवल जल संग्रहण और सिंचाई तक सीमित नहीं है। बांध निर्माण के बाद आसपास के ग्रामीणों को आवागमन में भी सुविधा मिली है। इस प्रकार ग्रामीणों की मांग पर तैयार हुई यह जल संरचना सिंचाई, निस्तारी, मवेशियों के पेयजल और आवागमन जैसी कई जरूरतों को पूरा कर रही है।

    सेवा संकल्प अभियान के तहत सकालो मुरना बांध की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि स्थानीय जरूरत के अनुरूप तैयार जल संरचना किस तरह पूरे क्षेत्र में बदलाव का आधार बन सकती है। जल संसाधन संभाग क्रमांक-01, अम्बिकापुर द्वारा निर्मित यह बांध आज जल संरक्षण के साथ किसानों की खेती और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों को सहारा देने वाली महत्वपूर्ण परिसंपत्ति बन गया है।

  • वन मंत्री  कश्यप जगदलपुर के राहत शिविर में प्रभावित परिवारों से मिले, भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की ली जानकारी

    वन मंत्री कश्यप जगदलपुर के राहत शिविर में प्रभावित परिवारों से मिले, भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की ली जानकारी

    रायपुर

    वन मंत्री  केदार कश्यप ने बस्तर के बाढ़ प्रभावित घोटिया और नारायणपाल क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का मौके पर जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली और अधिकारियों को नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    मंत्री  कश्यप ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर कमी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित लोगों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखते हुए उन्हें समय पर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।

    मंत्री  कश्यप ने जगदलपुर टाउन हॉल में बनाए गए राहत शिविर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने शिविर में रह रहे बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और उनकी आवश्यकताओं के संबंध में चर्चा की। उन्होंने शिविर में नाश्ता, भोजन, पेयजल और आवश्यक दवाइयों सहित उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। 

    वन मंत्री  कश्यप ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राहत शिविर में रह रहे परिवारों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित होती रहें और प्रभावित परिवारों की जरूरतों के अनुसार तत्काल सुविधाएं मुहैय्या कराई जाएं।

    वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संकट की इस घड़ी में बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहना और प्रभावित लोगों की सुरक्षा और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस अवसर पर जगदलपुर के महापौर  संजय पांडे भी उपस्थित थे।

  • महानदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत-बचाव कार्य जारी

    महानदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत-बचाव कार्य जारी

    रायपुर

    महानदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पुसौर विकासखंड अंतर्गत महानदी के तटीय क्षेत्रों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

    पुसौर विकासखंड में महानदी के तटीय इलाके में स्थित गांव सूरजगढ़ और परसापाली में बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया जा रहा है। सूरजगढ़ गांव में प्रभावित करीब 450 लोग ग्रामीणों को पड़ीगांव राहत शिविर में शिफ्ट किया जा रहा है। शिविर में भोजन, पेयजल सहित आवश्यक व्यवस्थाएं प्रशासन द्वारा की जा रही हैं। इसी तरह परसापाली में भी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रभावित लोगों के लिए छिछोर उमरिया के स्कूल भवन में राहत शिविर बनाया गया है। यहां भी प्रभावित ग्रामीणों को पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन द्वारा महानदी के अन्य तटीय क्षेत्रों में भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। तटीय इलाकों में बाढ़ की संभावना को देखते हुए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों में मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

    एसडीएम  महेश शर्मा सहित प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। अधिकारी मौके पर पहुंचकर जलस्तर, प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और राहत व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। पुसौर जनपद पंचायत के सीईओ, पंचायत सचिव, पटवारी तथा पशुपालन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी मौके पर उपस्थित रहकर राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों से जलभराव वाले क्षेत्रों और नदी के आसपास जाने से बचने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

  • कुंगारपाल में वन मंत्री श्री केदार कश्यप की मौजूदगी में ग्रामीणों ने सुना ‘मन की बात’ का 138 वां संस्करण

    कुंगारपाल में वन मंत्री श्री केदार कश्यप की मौजूदगी में ग्रामीणों ने सुना ‘मन की बात’ का 138 वां संस्करण

    रायपुर

     जिले के जनपद पंचायत बस्तर के अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंगारपाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का 138 वां संस्करण पूरे उत्साह के साथ सुना गया। इस विशेष प्रसारण के दौरान छत्तीसगढ़ शासन के वन मंत्री केदार कश्यप मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
    कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सहभागिता देखने को मिली। ग्रामीणों ने वन मंत्री के साथ बैठकर देश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक बदलावों और जन-सरोकारों से जुड़े विषयों को सुना।           

    इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, जनपद पंचायत अध्यक्ष संतोष बघेल तथा जिला पंचायत सदस्य निर्देश दीवान प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा क्षेत्र के विभिन्न जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

  • केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने सखी वन स्टॉप सेंटर का किया निरीक्षण

    केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने सखी वन स्टॉप सेंटर का किया निरीक्षण

    रायपुर

     केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने अपने दुर्ग प्रवास के दौरान दुर्ग स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण कर वहां संचालित व्यवस्थाओं और सेवाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने संकटग्रस्त महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही काउंसलिंग, कानूनी सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं एवं पुनर्वास संबंधी सुविधाओं की जानकारी ली।

     सखी वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद सहित विभिन्न समस्याओं से पीड़ित महिलाओं को काउंसलिंग के साथ आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। महिला एवं बाल विकास अधिकारी द्वारा केन्द्रीय राज्यमंत्री को सेंटर में दर्ज होने वाले प्रकरणों और महिलाओं को प्रदान की जा रही सेवाओं के संबंध में जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान सावित्री ठाकुर ने संकटग्रस्त महिलाओं को समय पर सुरक्षा, आवास, कानूनी सहायता और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

     राज्यमंत्री ने सेंटर में संचालित विभिन्न सुविधाओं का भी अवलोकन किया। इनमें परामर्श, विधिक सहायता, चिकित्सा सहायता, पुलिस सहायता तथा अस्थायी आश्रय की व्यवस्था शामिल है। निरीक्षण के दौरान सेंटर की व्यवस्थाओं, साफ-सफाई और स्टाफ द्वारा किए जा रहे कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने केंद्र की सराहना की। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री अशोक शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री अजय साहू सहित वन स्टॉप सेंटर के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।

  • हर संभव मदद का दिया भरोसा

    हर संभव मदद का दिया भरोसा

    ​रायपुर
         
     प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं आपदा प्रबंधन कार्यों को गति देने के लिए राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने आज लखना, बेमता और बलौदीखुर्द गांवों का सघन दौरा किया। उन्होंने बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनका हालचाल जाना और पीड़ितों को ढांढस बंधाते हुए आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस विपदा की घड़ी में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

     ​अपने दौरे के दौरान राजस्व मंत्री ने गांव-गांव में बाढ़ के पानी से हुए नुकसान का प्रत्यक्ष जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से आत्मीय चर्चा करते हुए उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। ग्रामीणों को भरोसा दिलाते हुए  वर्मा ने कहा कि आपदा की इस कठिन परिस्थिति में शासन-प्रशासन पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है। किसी भी प्रभावित परिवार को असहाय नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि फसल, मकान एवं जन-धन के नुकसान का निष्पक्ष और त्वरित आकलन कराया जा रहा है, ताकि सभी पीड़ितों को नियमानुसार जल्द से जल्द राहत राशि और सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
             
    ​निरीक्षण के दौरान मंत्री  वर्मा ने मौके पर उपस्थित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही फसल क्षति, मकानों के नुकसान और पशु हानि का पारदर्शी सर्वे तुरंत पूरा करने के आदेश दिए गए, ताकि मुआवजा वितरण में कोई देरी न हो। संक्रामक बीमारियों के खतरे को देखते हुए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को गांवों में विशेष कैंप लगाने और कीटनाशकों का छिड़काव कराने की बात भी कही।
           
    ​आपदा के समय सीधे अपने बीच पहुंचे राजस्व मंत्री की इस संवेदनशीलता और त्वरित पहल से लखना, बेमता एवं बलौदीखुर्द के ग्रामीणों ने मंत्री  वर्मा का आभार प्रकट किया। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित राजस्व और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

  • नेलसनार में बाढ़ के बीच जिला प्रशासन की मानवीय पहल, बाढ़ में फंसे यात्रियों को कराया भोजन

    नेलसनार में बाढ़ के बीच जिला प्रशासन की मानवीय पहल, बाढ़ में फंसे यात्रियों को कराया भोजन

    बीजापु

    भैरमगढ़ के समीप नेलसनार क्षेत्र में बाढ़ के कारण नेशनल हाईवे के अवरुद्ध होने से आवागमन प्रभावित हुआ। इस दौरान मार्ग में फंसे यात्रियों को जिला प्रशासन की ओर से भोजन उपलब्ध कराया गया।

    बाढ़ की स्थिति को देखते हुए 26 सितंबर को दिन के समय करीब 150 लोगों तथा रात्रि में लगभग 70 मुसाफिरों को भोजन कराया गया। विपरीत परिस्थितियों में जिला प्रशासन की इस मानवीय पहल से रास्ते में फंसे लोगों को राहत मिली।

    कलेक्टर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन में संबंधित क्षेत्रों के एसडीएम, तहसीलदार सहित मैदानी अमला लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासनिक एवं एसडीआरएफ की टीम द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है तथा आवश्यकता के अनुसार प्रभावित एवं फंसे लोगों तक सहायता पहुंचाई जा रही है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बाढ़ प्रभावित मार्गों पर अनावश्यक आवागमन से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

  • ग्रामीणों को मिला स्थानीय रोजगार

    ग्रामीणों को मिला स्थानीय रोजगार

    रायपुर

    “जल है तो जीवन है”—यह पंक्तियाँ धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत मुल्ले के लिए केवल एक नारा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन और अर्थव्यवस्था की बुनियाद बन चुकी हैं। वर्षा आधारित इस क्षेत्र में जल की एक-एक बूंद को सहेजने के संकल्प के साथ 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत विकसित भारत जीरामजी योजना से जल स्रोतों में सेंड फिल्टर (Sand Filter) का सफल निर्माण कराया गया है। यह पहल वर्षा एवं सतही जल के कुशल प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभरी है।

    प्राकृतिक छनन तकनीक से बहते पानी का जतन

    ​वर्षाकाल में खेतों और गलियों से बहकर व्यर्थ चले जाने वाले पानी को उपयोगी बनाने के उद्देश्य से गाँव में सेंड फिल्टर की स्थापना की गई है। इस संरचना में रेत और प्राकृतिक छनन माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जो जल के साथ बहकर आने वाली मिट्टी, गाद और अन्य ठोस अशुद्धियों को प्रभावी ढंग से रोकते हैं। इससे स्वच्छ जल जमीन के भीतर समाकर भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। सीमित संसाधनों में तैयार यह छोटी संरचना भविष्य की जल संपदा को सुरक्षित करने की एक मजबूत नींव साबित हो रही है।

    52 हजार की लागत में दोहरा लाभ: जल संरक्षण के साथ रोजगार

    ​ग्राम मुल्ले में इस सेंड फिल्टर का निर्माण 52 हजार रुपये की स्वीकृत लागत से सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिसमें सामग्री के लिए 41 हजार रुपये तथा मजदूरी के लिए 11 हजार रुपये निर्धारित थे। निर्माण कार्य पूर्ण होने पर कुल 52 हजार रुपये व्यय हुए, जिसमें से 10,500 रुपये मजदूरी मद में खर्च किए गए। इस कार्य की सबसे खास बात यह रही कि इसमें गाँव के ही श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और आय का साधन प्राप्त हुआ।

    कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

    कृषि प्रधान ग्राम मुल्ले की अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर जल की उपलब्धता पर निर्भर है। ऐसे में सेंड फिल्टर के ज़रिए भूजल स्तर में सुधार होने से आने वाले समय में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को निरंतरता मिलेगी, जिसका सीधा सकारात्मक असर किसानों की आय और फसल उत्पादन पर पड़ेगा।

    बदलाव की बयार: 'आज का संरक्षण, कल की सुरक्षा'

    इस पहल ने ग्रामीणों की सोच में भी बड़ा बदलाव लाया है। अब गाँव के लोग वर्षा जल को केवल एक तात्कालिक जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य के लिए संजोने योग्य प्राकृतिक धरोहर मान रहे हैं। मुल्ले गाँव का यह प्रयास यह संदेश देता है कि जल सुरक्षा की जंग केवल बड़ी-बड़ी परियोजनाओं से ही नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी से किए गए छोटे-छोटे प्रयासों से भी जीती जा सकती है। आज सहेजी जा रही यही एक-एक बूंद आने वाले कल में गाँव की जीवनरेखा बनेगी।

  • प्रदेशभर में अब तक कुल 10 लाख 29 हजार 831 मुनगा के पौधे का वितरण

    प्रदेशभर में अब तक कुल 10 लाख 29 हजार 831 मुनगा के पौधे का वितरण

    रायपुर

     कुपोषण के खिलाफ छत्तीसगढ़ की एक स्थानीय पहल अब राष्ट्रीय मंच तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने पोषण की चुनौती से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और जनभागीदारी को जोड़ने वाली इस पहल की सराहना की।

    छत्तीसगढ़ में सितंबर माह को पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 12 सितंबर को ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत की। अभियान का उद्देश्य मुनगा के पौधे को घर-घर पहुंचाने के साथ उसके पोषण संबंधी लाभों के प्रति परिवारों को जागरूक करना है।

    मुनगा या सहजन छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर सहज उपलब्ध है। पोषक तत्वों से भरपूर मुनगा स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन ए, सी, कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व के साथ ही औषधीय गुणों से युक्त है। मुनगा को अपने भोजन में पौष्टिक आहार के रूप में शामिल करने की पहल बेहतरीन है। मुनगे के पेड़ को पेड़ तेजी से बढ़ता है और अपेक्षाकृत कम देखभाल की जरूरत होती है। मुनगा पोषण, औषधीय गुणों एवं हरियाली के दृष्टिगत महत्वपूर्ण पौधा माना गया है। स्थानीय भोजन और पोषण से जोड़ते हुए राज्य सरकार ने इसे कुपोषण के खिलाफ अभियान का हिस्सा बनाया है। खासतौर पर महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के पोषण के लिए ध्यान केंद्रित कर ’हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान चलाया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों को इस अभियान का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है, जहां पोषण जागरूकता के साथ परिवारों को मुनगा के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    ’हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान के तहत प्रदेशभर में विभिन्न आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों एवं जनमानस के घरों के लिए व्यापक तौर पर मुनगे के पौधे का वितरण किया गया है, जिसके अंतर्गत प्रदेशभर में अब तक कुल 10 लाख 29 हजार 831 मुनगा के पौधें का वितरण का किया गया है। जिलों में क्रमशः बस्तर जिले में 25,244, कांकेर जिले में 43,071, दंतेवाड़ा में 7,056, नारायणपुर में 21,224, बीजापुर में 15699, सुकमा में 4,835, कोंडागांव में 31983, सरगुजा में 43754, कोरिया में 19022, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 11939, सूरजपुर में 64599, बलरामपुर में 27107, जशपुर जिले में 1,62271 पौधे लगाएं गए है।

    इसी प्रकार रायपुर जिले में 23948, महासमुंद में 6420, धमतरी में 48833, बलौदाबाजार में 28398, गरियाबंद में 10527, दुर्ग में 42474 राजनांदगांव जिले में 3480, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 21991, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 39222, कबीरधाम में 75776, बेमेतरा में 19575, बालोद में 50933, बिलासपुर में 14965, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 43007, जांजगीर-चांपा में 57653, सक्ती में 6425, कोरबा में 1,01,002, रायगढ़  में 41,776, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 9,824, मुंगेली जिले में 6,518 पौधे लगाएं गए है।

    इस पहल की खास बात यह है कि इसमें किसी महंगे या बाहरी संसाधन के बजाय स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध पौधे को पोषण अभियान का माध्यम बनाया गया है। यानी घर के आंगन में लगा एक पौधा परिवार के भोजन में पोषण बढ़ाने के साथ कुपोषण के खिलाफ जागरूकता का भी जरिया बने। ‘हर घर मुनगा’ को केवल पौधरोपण अभियान के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके जरिए पौधरोपण, पोषण जागरूकता, आंगनबाड़ी सेवाओं और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

  • रामनामी समुदाय के प्रतिनिधियों ने पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल से की भेंट

    रामनामी समुदाय के प्रतिनिधियों ने पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल से की भेंट

    रायपुर

     पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल से आज नया रायपुर स्थित शासकीय निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत और अनूठी आस्था के प्रतीक रामनामी समुदाय के सदस्यों ने आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर मंत्री  अग्रवाल ने रामनामी समुदाय की आस्था, परंपरा, जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का प्रतिष्ठित सम्मान मिलने पर समुदाय के सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि रामनामी समुदाय छत्तीसगढ़ की विशिष्ट लोक-सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समुदाय की आस्था, परंपराएं और जीवनशैली हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनाए रखने का कार्य करती हैं। ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।

    उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म की उपलब्धि नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और रामनामी समाज की जीवंत विरासत का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। इस फिल्म के माध्यम से रामनामी समाज की विशिष्ट पहचान, उनकी आस्था और सांस्कृतिक जीवन को देशभर में पहचान मिली है।

    मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विविधता, जीवंतता और जनजीवन से गहरा जुड़ाव है। यहां की लोक परंपराएं, जनजातीय एवं लोक कलाएं, आस्था से जुड़ी परंपराएं और समुदायों की विशिष्ट जीवनशैली प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती हैं। रामनामी समाज की परंपराएं इसी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और उसे देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। स्थानीय परंपराओं, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ना तथा उन्हें व्यापक मंच उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है।

    मंत्री  अग्रवाल ने रामनामी समुदाय के सदस्यों से बातचीत के दौरान उनकी परंपराओं, सांस्कृतिक गतिविधियों और समाज की विशिष्ट पहचान से जुड़े विभिन्न विषयों की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में समाज और समुदायों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    इस अवसर पर रामनामी समुदाय के सदस्यों ने डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ को मिले राष्ट्रीय सम्मान के लिए प्रसन्नता व्यक्त की और मंत्री  राजेश अग्रवाल के प्रति आभार जताया। मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपराओं और विरासत को आगे बढ़ाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई।