Category: छत्तीसगढ़

  • नन्हें-मुन्नों के हाथों सजी मेंहदी और राखी, सेंट जोसेफ कान्वेंट में दिखी रचनात्मकता की खूबसूरत झलक

    नन्हें-मुन्नों के हाथों सजी मेंहदी और राखी, सेंट जोसेफ कान्वेंट में दिखी रचनात्मकता की खूबसूरत झलक

    नन्हें-मुन्नों के हाथों सजी मेंहदी और राखी, सेंट जोसेफ कान्वेंट में दिखी रचनात्मकता की खूबसूरत झलक

    मनेन्द्रगढ़/एमसीबी

    नई लेदरी (साउथ जेकेडी) स्थित सेंट जोसेफ कान्वेंट स्कूल में शनिवार को नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए मेंहदी और राखी बनाने की गतिविधि आयोजित की गई। मासूम हाथों से बनाई गई रंग-बिरंगी राखियों और आकर्षक मेंहदी डिजाइनों ने विद्यालय परिसर में उत्साह और उमंग का माहौल बना दिया।

    कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में रचनात्मकता, कला-कौशल और भारतीय त्योहारों के प्रति प्रेम एवं संस्कारों को बढ़ावा देना रहा। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ अपनी कल्पनाशक्ति का प्रदर्शन करते हुए सुंदर राखियां तैयार कीं और मेंहदी के मनमोहक डिजाइन बनाए।

    इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानपाठिका श्रीमती अनामिका पंत के मार्गदर्शन में शिक्षिकाओं रीतु मिश्रा, शाहिन खान, अर्चना डे, शहनाज़ अंसारी, तहरीना खान, दीपाली, स्नेहलता एवं वंदना वर्मा ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए गतिविधि को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि ऐसे रचनात्मक आयोजन बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ उन्हें अपनी संस्कृति और त्योहारों से जोड़ने का सुंदर माध्यम हैं। बच्चों की मासूम मुस्कान और उत्साह ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।

  • संघर्ष, सक्रियता और संगठन के भरोसे का मिला बड़ा सम्मान, कासिम अंसारी को मिली जिले की कमान

    संघर्ष, सक्रियता और संगठन के भरोसे का मिला बड़ा सम्मान, कासिम अंसारी को मिली जिले की कमान

    मनेन्द्रगढ़/एमसीबी
    भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने संगठन को नई मजबूती और धार देने की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए कासिम अंसारी को मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय की अनुशंसा तथा पूर्व विधायक गुलाब कमरो के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से मिली यह जिम्मेदारी कासिम अंसारी की लगातार सक्रियता, संघर्षशीलता और संगठन के प्रति समर्पण का सम्मान मानी जा रही है।

    शहरी अध्यक्ष के दायित्व से सीधे जिले की कमान तक पहुंचना कासिम अंसारी के संगठनात्मक सफर की बड़ी उपलब्धि है। छात्र हितों की आवाज को मजबूती से उठाने वाले कासिम ने स्थानीय स्तर से लेकर रायपुर और नई दिल्ली तक छात्रों की समस्याओं को लेकर संघर्ष किया है। उनकी सक्रिय कार्यशैली और युवाओं के बीच मजबूत पकड़ को देखते हुए संगठन ने अब उन्हें पूरे जिले की जिम्मेदारी सौंपी है।

    जमीनी संघर्ष और समर्पण का मिला सम्मान
    कासिम अंसारी लंबे समय से छात्र हितों और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। जिला उपाध्यक्ष सहित विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए उन्होंने छात्र-छात्राओं की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। संगठन के कार्यक्रमों से लेकर आंदोलनों तक उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें एक जुझारू युवा कार्यकर्ता के रूप में पहचान दिलाई।

    शहर से गांव और कॉलेजों तक संगठन मजबूत करने का संकल्प
    जिलाध्यक्ष की नई जिम्मेदारी मिलने के बाद अब कासिम अंसारी के सामने जिलेभर में एनएसयूआई को और मजबूत करने की बड़ी चुनौती है। उनके नेतृत्व में कॉलेजों, छात्रावासों और ग्रामीण क्षेत्रों तक संगठन की पहुंच बढ़ाने तथा छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने की तैयारी है।

    प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने कासिम अंसारी की सक्रियता और छात्र हितों के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में संगठन को नई मजबूती मिलेगी। पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने उन्हें मेहनती और संघर्षशील युवा नेता बताते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति से छात्रों और युवाओं में नई ऊर्जा का संचार होगा।
    जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव, कांग्रेस नेता रमेश सिंह और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर अध्यक्ष सौरव मिश्रा सहित वरिष्ठ नेताओं ने भी कासिम अंसारी को बधाई दी। नेताओं ने कहा कि शहरी अध्यक्ष से जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलना उनके प्रति संगठन के विश्वास और उनकी सक्रियता का प्रमाण है।

    कासिम अंसारी बोले-हर छात्र की आवाज बनेगी संगठन की ताकत
    नवनियुक्त जिलाध्यक्ष कासिम अंसारी ने प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय, पूर्व विधायक गुलाब कमरो, जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव, रमेश सिंह, सौरव मिश्रा सहित सभी वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।
    उन्होंने कहा कि संगठन ने जिस विश्वास के साथ उन्हें जिले की जिम्मेदारी सौंपी है, उस विश्वास पर पूरी तरह खरा उतरने का प्रयास करेंगे। हर छात्र की आवाज को बुलंद करना, छात्र हितों के मुद्दों को मजबूती से उठाना और एनएसयूआई को कॉलेजों से लेकर गांव-गांव तक मजबूत करना उनकी प्राथमिकता होगी।
    कासिम अंसारी की नियुक्ति की खबर से जिलेभर के छात्र नेताओं, युवाओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल है। समर्थकों ने इसे युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण निर्णय बताते हुए नवनियुक्त जिलाध्यक्ष को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

  • नगर पालिका दफ्तर में राजस्व निरीक्षक पर हमला, मारपीट के बाद पुलिस ने दर्ज किया मामला

    नगर पालिका दफ्तर में राजस्व निरीक्षक पर हमला, मारपीट के बाद पुलिस ने दर्ज किया मामला

    अभनपुर.

    नगर पालिका गोबरा नवापारा के राजस्व निरीक्षक निखिल चंद्राकर के साथ कार्यालय में घुसकर मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है. राजस्व निरीक्षक की शिकायत पर गोबरा नवापारा पुलिस ने 4 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

    राजस्व निरीक्षक ने पुलिस को बताया कि 20 अगस्त की रात करीब 8 बजे वह अपनी पत्नी के पैन कार्ड में नाम सुधारवाने के लिए मस्जिद के पास आवेदन देकर मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे. सदर रोड नवापारा मोड़ के पास रूपो जगत अपने साथी के साथ मोटरसाइकिल से उनके सामने से कट मारकर निकला. मोटरसाइकिल ठीक से चलाने की समझाइश देने पर आरोपी द्वारा गाली-गलौज करने का आरोप है. शिकायत के मुताबिक बाद में आरोपी उसके घर के पास भी पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी.   

    कार्यालय में आरोपियों ने की मारपीट
    शिकायत में यह भी बताया गया कि 21 अगस्त की शाम करीब 5 बजे आरोपी रूपो जगत, लल्ला पटेल, विजय यादव, मोनू कंसारी सहित अन्य लोग नगर पालिका कार्यालय पहुंचे और राजस्व निरीक्षक के कक्ष में घुस गए. आरोप है कि इस दौरान शासकीय दस्तावेज फेंके गए, शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाई गई और राजस्व निरीक्षक के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की गई. हमले में उनके सिर, पीठ और हाथ-पैर में चोट आने की बात शिकायत में कही गई है. घटना के दौरान नगर पालिका स्टाफ ने बीच-बचाव किया और आरोपियों को भवन से बाहर निकाला. इसके बाद आरोपियों ने मुख्य दरवाजा तोड़कर दोबारा अंदर आने का प्रयास किए गया. घटना के दौरान नगर पालिका कर्मचारी सेवक साहू, सरस्वती कंवर, सुभाषिनी शर्मा सहित अन्य स्टाफ मौजूद थे.

    आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज
    गोबरा नवापारा पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 221, 296, 3(5), 324(4) और 351(2) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. मामले में पुलिस घटना से जुड़े साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है.

  • जो कभी चलाती थीं बंदूक, आज बना रहीं राखियां; नक्सली बहनों की बदली तस्वीर

    जो कभी चलाती थीं बंदूक, आज बना रहीं राखियां; नक्सली बहनों की बदली तस्वीर

    भानुप्रतापपुर.

    नक्सल प्रभावित और पुनर्वासित परिवारों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में कांकेर जिले में नई पहल शुरू की गई है। भानुप्रतापपुर के चौगेल पुनर्वास केंद्र में बिहान योजना के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों और पुनर्वासित परिवारों को राखी निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया है।

    प्रशिक्षण के बाद अब तक 700 से अधिक राखियां तैयार की जा चुकी हैं। भानुप्रतापपुर के चौगेल स्थित नक्सल प्रभावित परिवार पुनर्वास केंद्र में इन दिनों राखियों की रंग-बिरंगी दुनिया दिखाई दे रही है। रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए यहां पुनर्वासित एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को राखी निर्माण से जोड़ा गया है। राखी निर्माण का प्रशिक्षण संकुल संगठन केवटी अंतर्गत कमला तारम और पार्वती आंचले ने दिया। इस पहल का उद्देश्य केवल राखी बनाना नहीं, बल्कि पुनर्वासित परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

    बिहान योजना के माध्यम से शुरू की गई यह गतिविधि पारंपरिक पर्व को आजीविका से जोड़ने का भी उदाहरण है। तैयार की जा रही राखियों के निर्माण के साथ उनके विपणन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। चौगेल का यह पुनर्वास केंद्र अब केवल पुनर्वास का स्थान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लिख रहा है। हुनर के जरिए रोजगार और रोजगार के जरिए सम्मान- राखी निर्माण की यह पहल पुनर्वासित परिवारों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक कदम कही जा सकती है।

  • महतारी वंदन योजना का गलत फायदा पड़ा भारी, शिक्षक और क्लर्क से सैलरी के जरिए होगी रिकवरी

    महतारी वंदन योजना का गलत फायदा पड़ा भारी, शिक्षक और क्लर्क से सैलरी के जरिए होगी रिकवरी

    बिलासपुर.

    छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है. बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लॉक के 11 शिक्षक और बाबुओं को चिन्हित किया गया है जो अपात्र होने के बाद भी उसका लाभ उठा रहे थे.

    शासकीय शिक्षक और बाबू के पद में कार्यरत कर्मियों के परिवारों द्वारा योजना का नियम विरुद्ध लाभ उठाने पर अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. बीईओ के जरिए अब उनसे वसूली की कार्रवाई शुरू हो गई है. महतारी वंदन योजना में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश की सभी महिलाओं को माह में एक हजार रुपए देने का निर्णय लिया गया है. इसका लाभ शासकीय सेवक वाले नहीं उठा सकते. इसके बाद भी जिले के बिल्हा ब्लॉक के शिक्षा विभाग में शिक्षक और बाबू के पद पर कार्यरत शासकीय सेवक नियमों को ताक पर रखकर महतारी वंदन योजना का लाभ उठा रहे थे.

    इसमें कुछ शिक्षिकाएं और महिला बाबू भी उसका लाभ ले रही थीं. एकीकृत बाल विकास परियोजना, बिल्हा की जांच में 11 ऐसे अपात्र हितग्राहियों के नाम सामने आए हैं. इसलिए विभाग ने ऐसे शासकीय सेवकों की जानकारी बीईओ, बिल्हा को भेज़ी है. अपात्र महिलाओं को चिह्नित किया गया है, जिनके पति या वे स्वयं शासकीय सेवा शिक्षक, वर्ग 2 और सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं. अपात्र हितग्राहियों के खातों में गलत तरीके से भेजी गई कुल 1,24,000 रुपए की राशि वसूली करने कहा गया है.

    अपात्र हितग्राही ले रहे थे योजना का लाभ
    रत्ना क्षत्री पति विनोद कुमार क्षत्री शासकीय सेवक ग्रेड 2, गंगा बाई पति केसर सिंह शासकीय सेवक ग्रेड 2, रमा वर्मा पति रवींद्र वर्मा शिक्षक वर्ग 2, दिनेश्वरी कुर्रे पति शैलेश कुमार कुर्रे शिक्षक वर्ग 2, कुसुम यादव पति राजकुमार यादव शिक्षा कर्मी, गोदावरी कौशिक पति सुरेश कौशिक शासकीय शिक्षक, रामेश्वरी साहू पति राजेश साहू शासकीय सेवक ग्रेड 2, कीर्ति पाटले पति संतोष पाटले शासकीय सेवक ग्रेड 1, सविता कुर्रे पति गोरेलाल कुर्रे सहायक शिक्षक, अमर ज्योति शांडिल्य पति विनोद कुमार सहायक शिक्षक और लक्ष्मी पति परविंदर कुमार शासकीय शिक्षक शामिल हैं.

    बीईओ ने जारी किया वसूली आदेश
    बिल्हा बीईओ भूपेंद्र कौशिक ने कहा कि शासकीय शिक्षक और बाबू होने के बाद भी शासन की महतारी योजना के नाम पर प्रतिमाह रुपए लेने वालों की पहचान महिला एवं बाल विकास विभाग ने की है. उनसे वसूली का आदेश जारी किया गया है. इसके बाद भी राशि जमा नहीं करने पर वेतन से रिकवरी की जाएगी.

  • रेशम एवं धागाकरण केंद्रों की व्यवस्थाओं परखी, सचिव ने दिए आवश्यक निर्देश

    रेशम एवं धागाकरण केंद्रों की व्यवस्थाओं परखी, सचिव ने दिए आवश्यक निर्देश

    रायपुर 

    सचिव ग्रामोद्योग  राजेश सिंह राणा द्वारा रेशम एवं धागाकरण केन्द्रों का किया गया निरीक्षण

    छत्तीसगढ़ शासन, ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह संचालक  राजेश सिंह राणा द्वारा आज बस्तर जिलें के ककून बैंक, धागाकरण केन्द्र धरमपुरा, जगदलपुर तथा केन्द्रीय रेशम बोर्ड के रिसर्च सेंटर, धरमपुरा जगदलपुर का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान सचिव  राजेश राणा ने कोसा कृमिपालन एवं धागाकरण कार्य का अवलोकन कर संबंधित अधिकारियों एवं हितग्राहियों से कार्य की प्रगति तथा उत्पादन की जानकारी ली। उन्होंने धागाकारकों से धागा उत्पादन, विपणन एवं आय में वृद्धि के संबंध में चर्चा करते हुए उनके द्वारा उत्पादित धागे की गुणवत्ता एवं बिक्री की जानकारी प्राप्त की। 

    सचिव ग्रामोद्योग  राजेश सिंह राणा द्वारा रेशम एवं धागाकरण केन्द्रों का किया गया निरीक्षण

        इस अवसर पर महिला समूह की अध्यक्ष द्वारा बताया गया कि धागाकरण केन्द्र में 43 महिला हितग्राही कार्यरत है। समूह द्वारा बाजार की मांग के अनुरूप धागे का उत्पादन कर व्यापारियों को विक्रय किया जाता है। व्यापारियों द्वारा रिल्ड यार्न लगभग रूपये 6800 प्रति किग्रा तथा स्पन यार्न 3400-3500 रूपये प्रति किग्रा की दर से क्रय किया जाता है। सचिव  राणा ने ककून बैक का निरीक्षण कर कोसा भण्डारण, उपलब्धता एवं आगामी आवश्कताओं के संबंध में भी जानकारी ली। इसी क्रम में सचिव  राणा ने बस्तर संभाग के सभी जिलों से 25 हितग्राहियों को टसर कृमिपालन प्रशिक्षण तथा 25 हितग्राहियों को धागारण प्रशिक्षण हेतु चयनित कर केन्द्रीय रेशम बोर्ड के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किये जाने के निर्देश दिये।

    सचिव ग्रामोद्योग  राजेश सिंह राणा द्वारा रेशम एवं धागाकरण केन्द्रों का किया गया निरीक्षण

        उन्होने ने सुकमा एवं दंतेवाड़ा जिलें में भी धागाकरण प्रशिक्षण प्रारंभ करने के निर्देश दिये। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेष रूप नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के हितग्राहियों को प्राथमिकता देते हुए अधिक से अधिक लाभान्वित करने के निर्देश दिये गये ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होने के साथ हितग्राहियों की आय में वृद्धि हो सकें। 

        ग्रामोद्योग के सचिव सह संचालक राजेश सिंह राणा द्वारा कांकेर जिलें के बाबूकोहका स्थित ककून बैंक का निरीक्षण किया गया तद्संबंध में टसर तथा मलबरी ककून के मूल्य, टसर धागाकरण तथा बस्तर संभाग में रैली कोसा के आवक संबंधी आवश्यक निर्देश दिये गये। इसी तारतम्य में हितग्राहियांे की आय वृद्धि करने के लिए केन्द्रों में हलदी, गेंदा, पपीता एवं अन्य फलदार पौधे तथा साग-सब्जियां लगाकर अंतर फसल लगाने के निर्देश दिये गये।

  • चिरायु योजना से बाल मधुमेह से जूझ रही 11 वर्षीय बच्ची को मिला निःशुल्क उपचार

    चिरायु योजना से बाल मधुमेह से जूझ रही 11 वर्षीय बच्ची को मिला निःशुल्क उपचार

    रायपुर

    चिरायु योजना से बाल मधुमेह से जूझ रही 11 वर्षीय बच्ची को मिला निःशुल्क उपचार

    राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की चिरायु योजना ऐसे बच्चों के लिए आशा की किरण बन रही है, जो जन्मजात बीमारियों या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। समय पर पहचान, विशेषज्ञ उपचार और पूरी तरह निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से यह योजना बच्चों को स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से समय पर स्वास्थ्य जांच एवं उपचार उपलब्ध होने से न केवल बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर उपचार का बोझ भी कम हो रहा है। मुंगेली विकासखण्ड के ग्राम नारायणपुर निवासी 11 वर्षीय किनामिका साहू के लिए भी चिरायु योजना ऐसी ही उम्मीद की किरण बनी है। किनामिका बाल मधुमेह से पीडि़त है और उसका उपचार पूर्व में बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। उपचार एवं आवश्यक दवाइयों पर परिवार को प्रतिमाह लगभग 10 से 12 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह खर्च लगातार चुनौती बन रहा था।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शीला साहा ने बताया कि जांच के दौरान चिरायु टीम को बच्ची के स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिली। इसके पश्चात टीम ने बच्ची को जिला चिकित्सालय में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मधु ध्रुव से स्वास्थ्य परीक्षण कराया। जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर बच्ची के उपचार को आगे बढ़ाया गया। चिरायु योजना के अंतर्गत बच्ची को जिला चिकित्सालय के माध्यम से निःशुल्क ग्लूकोमीटर एवं आवश्यक इंसुलिन दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। इससे बच्ची के नियमित उपचार में सुविधा मिली और परिवार पर पड़ रहा आर्थिक बोझ भी काफी कम हुआ। समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिलने से परिवार को उपचार को लेकर राहत और भरोसा मिला है। 

    डीपीएम  गिरीश कुर्रे ने बताया कि बाल मधुमेह में शरीर में इंसुलिन की कमी के कारण नियमित चिकित्सकीय देखरेख और उपचार आवश्यक होता है। ऐसे मामलों में समय पर पहचान, चिकित्सकीय परामर्श और नियमित उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। चिरायु योजना के माध्यम से बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार एवं स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। किनामिका के परिजनों ने शासन की चिरायु योजना और स्वास्थ्य विभाग की टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निजी अस्पताल में उपचार पर होने वाला खर्च उनके लिए काफी कठिन था। योजना के माध्यम से निःशुल्क उपचार सामग्री मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। साथ ही परिवार को आर्थिक चिंता से राहत प्रदान कर बच्ची के नियमित उपचार को सुगम बनाया है।

  • कोंटा की 14 महिला स्व-सहायता समूहों को मिला 39.50 लाख रूपए का बैंक लिंकेज ऋण

    कोंटा की 14 महिला स्व-सहायता समूहों को मिला 39.50 लाख रूपए का बैंक लिंकेज ऋण

    रायपुर

    ‘बिहान’ से सुकमा की महिलाओं को मिली आत्मनिर्भरता की नई राह

    छत्तीसगढ़ सरकार की 'बिहान' योजना महिलाओं के जीवन में बड़ा आर्थिक बदलाव लाई है। स्व-सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आजीविका के नए साधन दिए जा रहे हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ रहा है।
                 
    दक्षिण बस्तर के सुकमा जिले के दूरस्थ वनांचल में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ महिलाओं के जीवन में आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। कलेक्टर  अमित कुमार के निर्देशन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में जनपद पंचायत कोंटा की 14 महिला स्व-सहायता समूहों को कुल 39.50 लाख रुपये का बैंक लिंकेज ऋण प्रदान किया गया है। यह ऋण महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर है।

    *छोटे कारोबार को मिलेगा बड़ा सहारा*
                 
    ऋण की राशि मिलने से महिला समूहों की दीदियों में उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा है। महिलाएं इस राशि का उपयोग कृषि, पशुपालन, सिलाई और स्थानीय छोटे व्यवसायों को बढ़ाने में करेंगी। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

    *बच्चों की पढ़ाई और परिवार के भविष्य को मिलेगी मजबूती*
                

    स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि आजीविका के साधन मजबूत होने से वे अपने बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतों और परिवार के बेहतर भविष्य के लिए अधिक मजबूती से योगदान दे सकेंगी। ‘बिहान’ के माध्यम से महिलाएं बचत, समूह संचालन और बैंकिंग गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं।

    *बैंकिंग और वित्तीय अनुशासन की सीख*
                
     ऋण वितरण के दौरान प्रशासन और बैंक अधिकारियों ने महिलाओं से संवाद कर ऋण राशि का उपयोग आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में करने की समझाइश दी। उन्हें समय पर ऋण की किश्त जमा करने, नियमित बचत करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की जानकारी भी दी गई। इससे महिलाओं की बैंकिंग व्यवस्था में विश्वसनीयता और आर्थिक आत्मविश्वास दोनों मजबूत होंगे।

    *‘बिहान’ बन रहा बदलाव का माध्यम*
                  
    सुकमा जैसे वनांचल जिले में ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं को समूह से जोड़कर उन्हें बचत, बैंक लिंकेज, स्वरोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध करा रहा है। अब महिलाएं केवल परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपनी मेहनत और समूह की ताकत से आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।

    *प्रशासन और बैंक के समन्वय से बढ़ी महिलाओं की ताकत*
             
    इस पहल में जनपद पंचायत कोंटा के विकास विस्तार अधिकारी  गोपाल नेताम, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक कोंटा के शाखा प्रबंधक  रामाकृष्णा, प्रभारी बीपीएम  अरविंद कुमार, संकुल समन्वयक मती रुकमणी कर्मा और मती आरती बघेल उपस्थित रहीं।
               
    सुकमा जिले की इन महिलाओं की सफलता यह संदेश देती है कि सरकारी योजना, बैंकिंग सहयोग और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार के साथ पूरे गांव की आर्थिक तस्वीर बदल सकती हैं। ‘बिहान’ की यह पहल वनांचल की महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को नई दिशा दे रही है।

     

  • जगदलपुर कलेक्टोरेट में लगी प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र ‘वोकल फॉर लोकल’ को मिला बढ़ावा

    जगदलपुर कलेक्टोरेट में लगी प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र ‘वोकल फॉर लोकल’ को मिला बढ़ावा

    रायपुर

    बस्तर की ग्रामीण महिलाओं ने रक्षाबंधन पर बिखेरी अपनी हुनर

    रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बस्तर की ग्रामीण महिलाओं के हुनर, स्वावलंबन और स्थानीय संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली। जगदलपुर कलेक्टोरेट परिसर में विकासखंड जगदलपुर, बकावंड और बस्तर सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों की महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा हस्तनिर्मित एवं पर्यावरण-अनुकूल राखियों की विशेष प्रदर्शनी-सह- बिक्री लगाई गई। प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार इन राखियों ने न केवल लोगों का ध्यान आकर्षित किया, बल्कि बस्तर की ग्रामीण महिलाओं की रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता को भी नई पहचान दी। कलेक्टर  आकाश छिकारा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं सहायक कलेक्टर ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार राखियों और अन्य हस्तनिर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए स्वयं राखियां खरीदकर उनका उत्साहवर्धन किया।

    बस्तर की ग्रामीण महिलाओं ने रक्षाबंधन पर बिखेरी अपनी हुनर

    *प्राकृतिक सामग्रियों से सजी बस्तर की राखियां*      

    प्रदर्शनी में ग्रामीण महिलाओं ने धान, चावल, लालभाजी एवं खीरे के बीज, मयूर पंख, बांस, प्राकृतिक धागों और कौड़ियों जैसी स्थानीय एवं प्राकृतिक सामग्रियों से आकर्षक राखियां तैयार की थीं। इन राखियों में बस्तर की लोककला, प्रकृति और पारंपरिक संस्कृति की सुंदर झलक दिखाई दी। कलेक्टोरेट पहुंचे अधिकारी-कर्मचारी और आम नागरिक भी इन राखियों को खरीदने के लिए उत्साहित नजर आए। स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हुई।

    *प्रशिक्षण से निखरा हुनर, समूहों के माध्यम से बड़े स्तर पर उत्पादन*      

    ग्रामीण महिलाओं को राखी निर्माण में दक्ष बनाने के लिए जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, आड़ावाल द्वारा 21 से 26 जुलाई तक विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था। इसमें जिले के सातों जनपदों से आई 30 महिला प्रतिभागियों ने राखी निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को डिजाइन चयन, रंग संयोजन, गुणवत्ता, पैकेजिंग तथा प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग से आकर्षक राखियां तैयार करने की तकनीक सिखाई गई। प्रशिक्षण के बाद इन महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों की अन्य महिलाओं को भी जोड़ते हुए बड़े पैमाने पर राखियों का निर्माण किया।

    *‘वोकल फॉर लोकल’ के साथ महिलाओं को मिला सीधा बाजार*     

    कलेक्टोरेट परिसर में लगी यह प्रदर्शनी केवल राखियों की बिक्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को सीधे बाजार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनी। बिचौलियों से मुक्त सीधी बिक्री के कारण महिलाओं को अपने उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिला। इससे उनकी आय बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी विकसित हुए।

    *बस्तर की संस्कृति और आत्मनिर्भरता का सुंदर संगम*   

    हस्तनिर्मित राखियों की यह प्रदर्शनी पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को एक साथ मजबूती प्रदान कर रही है। प्राकृतिक संसाधनों से तैयार इन राखियों के माध्यम से बस्तर की ग्रामीण महिलाओं ने यह संदेश दिया कि स्थानीय हुनर और संसाधनों को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई जा सकती है।

  • Bastar में त्योहारों को लेकर खाद्य सुरक्षा अभियान तेज, मिलावटखोरी पर प्रशासन की नजर

    Bastar में त्योहारों को लेकर खाद्य सुरक्षा अभियान तेज, मिलावटखोरी पर प्रशासन की नजर

    जगदलपुर.

    रक्षाबंधन से पहले बस्तर में लोगों की थाली तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाने के लिए जांच अभियान शुरू हो गया है. खाबो, बने रहिबो 2.0 अभियान के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने जगदलपुर समेत कई इलाकों में जांच की.

    होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर नमूने लिए जा रहे हैं. 17 से 24 अगस्त तक चलने वाले अभियान में मिठाई और दूध से जुड़े कारोबार पर विशेष निगरानी रखी जाएगी. मावा, पनीर, क्रीम, चीज और अन्य दुग्ध उत्पादों की वास्तविक गुणवत्ता और स्वरूप की जांच होगी. बिना लेबल बिक रहे खाद्य पदार्थों के साथ सामग्री और उसके स्रोत की जानकारी भी जांच के दायरे में है. अधिकारियों की नजर प्रतिबंधित रंग और खाद्य सामग्री की गलत प्रस्तुति पर भी रहेगी. दुकानदारों से बिल, सप्लायर की जानकारी और कच्चे माल के स्रोत से जुड़े दस्तावेज मांगे जा रहे हैं. होटल और रेस्टोरेंट में बटर-पनीर के नाम पर इस्तेमाल हो रहे उत्पादों की भी जांच की जाएगी.

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल वनस्पति वसा मिलने से किसी मिठाई को प्रतिबंधित उत्पाद नहीं माना जाएगा. उत्पाद का नाम, उसकी सामग्री, प्रस्तुतीकरण और लागू खाद्य मानकों को मिलाकर स्थिति तय होगी. नियमों का उल्लंघन और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. त्योहारों के बीच अभियान का उद्देश्य बाजार में सुरक्षित और मानकों के अनुरूप खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना है.