Category: छत्तीसगढ़

  • आदिवासी समाज को लेकर केदार कश्यप का कांग्रेस पर हमला, बोले- भड़काने में सफल नहीं होगी पार्टी

    आदिवासी समाज को लेकर केदार कश्यप का कांग्रेस पर हमला, बोले- भड़काने में सफल नहीं होगी पार्टी

    रायपुर.

    यूसीसी को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के रूख पर पर मंत्री केदार कश्यप ने निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि जहां राष्ट्रीयता और समाजहित की बात आती है, वहां कांग्रेस विरोध करने लगती है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी समाज को यूसीसी से दूर रखा जाएगा.

    आदिवासी समाज को भड़काने की जो कोशिश हो रही है, वह सफल नहीं होगी. मंत्री केदार कश्यप ने मीडिया से चर्चा में बस्तर से आदिवासियों के साथ आंदोलन करने की कांग्रेस की तैयारी पर कहा कि कांग्रेस को पहले आत्मावलोकन करना चाहिए. कांग्रेस के राजकुमार जब भी यहां आए, उन्होंने कुछ नहीं किया. राहुल गांधी ने 2008 और फिर 2019 में बड़ी-बड़ी बातें कीं, लेकिन पीएम आवास योजना छीन ली, और लोगों की छत छीनने का काम किया. हमारी सरकार की चरण पादुका योजना भी बंद कर दी गई. आज बस्तर नक्सलमुक्त हो रहा है तो कांग्रेस को यह रास नहीं आ रहा है.

    वहीं 29 सीटों पर कांग्रेस के फोकस को लेकर मंत्री ने कहा कि कांग्रेस की मानसिकता ही ऐसी है. उनकी योजनाओं और राजनीति का प्रदेश के विकास से कोई सरोकार नहीं है. आदिवासियों के मन में पीड़ा पैदा करने और उन्हें भड़काने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह सफल नहीं होगी. पहले भी पीसीसी चीफ ने आदिवासियों को बुलाया था बकरा भात खाने के लिए और सुअर भात खिलाकर उन्हें भेज दिया था. महतारी वंदन योजना में डेढ़ लाख महिलाओं के नाम कटने पर मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस के लोग पहले 500 रुपए देने की बात करते थे, जबकि हमारी सरकार ने मातृशक्ति को राखी से पहले ही राशि दी, तो कांग्रेस को तकलीफ हो रही है. यह मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता है. तकनीकी समस्या है तो उसे जल्द सॉल्व कर लिया जाएगा, लेकिन कांग्रेस की मानसिकता नहीं सुधारी जा सकती.

    कंप्यूटर की खराबी सुधारी जा सकती है, लेकिन इनके दिमाग की खराबी का इलाज मुश्किल है.
    कर्नाटक में वंदेमातरम का दो अंतरा ही गाने की घोषणा पर केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस की मानसिकता साफ दिखती है, उनके नेताओं ने तुष्टीकरण की राजनीति के कारण वंदे मातरम नहीं गाने का फैसला लिया था, और वही नीति आज भी चली आ रही है. वहीं यूथ कांग्रेस के चुनाव में खर्च को लेकर कहा कि कांग्रेस में पार्षद और विधायक के टिकट के लिए पैसों का लेन-देन होता है, उसी के आधार पर पद बांटे जाते हैं, और अब संगठन के पदों की भी बोली लग रही है. वन विभाग में वन रक्षकों की भर्ती को लेकर वन मंत्री ने कहा कि लिखित परीक्षा व्यापम के माध्यम से कराने की तैयारी चल रही है. अपडेट के अनुसार दिसंबर 2026 तक परीक्षा आयोजित होने की संभावना है, जिसमें करीब 16 हजार अभ्यर्थी शामिल होंगे, इसके बाद भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

    नेपाल में फंसे लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर
    नेपाल में आई बाढ़ को लेकर राज्य सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है. इस पर मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह बहुत बड़ी प्राकृतिक त्रासदी है. मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए हेल्पलाइन नंबर शुरू कराया है, ताकि वहां फंसे लोगों और उनके परिवारों को संबल मिल सके.

  • राखी बांधकर दीदियों ने दी डिप्टी सीएम विजय शर्मा को बधाई, गुजरात यात्रा के अनुभव भी किए साझा

    राखी बांधकर दीदियों ने दी डिप्टी सीएम विजय शर्मा को बधाई, गुजरात यात्रा के अनुभव भी किए साझा

    रायपुर : बिहान की दीदियों ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को राखी बांधकर दी बधाई, साझा किए गुजरात भ्रमण के अनुभव

    कबीरधाम जिले के 17 बिहान समूहों की दीदियों और 17 पशुपालकों को गुजरात के बनासकाठा के शैक्षणिक भ्रमण पर भेजा गया था

    रायपुर

    कबीरधाम जिले के बिहान स्व-सहायता समूहों से जुड़ी दीदियों और पशुपालकों का गुजरात के बनासकाठा स्थित डेयरी कोऑपरेटिव एवं अमूल डेयरी कोऑपरेटिव का शैक्षणिक भ्रमण उपयोगी और प्रेरणादायी रहा। भ्रमण से वापस लौटने के बाद बिहान समूह की दीदियों ने कवर्धा निवास पहुंचकर उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा से आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान दीदियों ने उन्हें रक्षाबंधन की बधाई देते हुए राखी बांधी और गुजरात में मिले अनुभवों तथा सीखी गई नई तकनीकों की जानकारी साझा की।

    उपमुख्यमंत्री शर्मा ने सभी दीदियों और पशुपालकों का आत्मीय स्वागत करते हुए उनके अनुभव सुने। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक भ्रमण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब वहां से मिली सीख को अपने गांव और जिले में अपनाकर आजीविका के नए अवसर तैयार किए जाएं। उन्होंने दीदियों से बनासकाठा में देखी गई उन्नत डेयरी व्यवस्था, पशुपालन तकनीक, चारा प्रबंधन, दुग्ध संकलन, गुणवत्ता नियंत्रण और सहकारी मॉडल से मिली सीख को स्थानीय स्तर पर लागू करने का आह्वान किया।

    बनासकाठा में देखा सफल डेयरी और सहकारी मॉडल

    उल्लेखनीय है कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से कबीरधाम जिले के 17 बिहान समूहों की दीदियों और 17 पशुपालकों को गुजरात के बनासकाठा के शैक्षणिक भ्रमण पर भेजा गया था। दल ने वहां डेयरी कोऑपरेटिव और अमूल डेयरी कोऑपरेटिव की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने उन्नत पशुपालन तकनीक, संतुलित आहार एवं चारा विकास, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपाय, दुग्ध संकलन एवं प्रसंस्करण की आधुनिक व्यवस्था, दूध की गुणवत्ता जांच, डेयरी उत्पाद निर्माण और उनके विपणन की पूरी प्रक्रिया को करीब से समझा। इसके साथ ही सहकारी मॉडल के माध्यम से छोटे पशुपालकों को संगठित कर उनकी आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की व्यवस्था की भी जानकारी प्राप्त की।

    सीख को कबीरधाम में लागू करने का संकल्प

    गुजरात से लौटीं दीदियों ने बताया कि वहां पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को केवल व्यक्तिगत आय का साधन नहीं, बल्कि सामूहिक आर्थिक विकास के मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। दुग्ध उत्पादकों को बाजार से जोड़ने, गुणवत्ता बनाए रखने और दूध के बेहतर मूल्य प्राप्त करने की व्यवस्थाओं ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया। दीदियों ने कहा कि बनासकाठा में मिली सीख से उन्हें अपने गांवों में पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को और बेहतर ढंग से संचालित करने की प्रेरणा मिली है। वे वहां सीखी गई उपयोगी तकनीकों और प्रबंधन पद्धतियों को अन्य ग्रामीण महिलाओं तथा पशुपालकों के साथ साझा कर सामूहिक रूप से आजीविका के नए अवसर विकसित करने का प्रयास करेंगी।

    ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल

    उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। बिहान स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वहीं पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने, बेहतर प्रबंधन और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से पशुपालकों की आय में वृद्धि के लिए विभिन्न पहल की जा रही हैं।

    उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि कबीरधाम की दीदियों और पशुपालकों का बनासकाठा भ्रमण केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि सीख को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गुजरात के सफल डेयरी मॉडल से प्राप्त अनुभव आने वाले समय में कबीरधाम में दुग्ध उत्पादन, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने में उपयोगी साबित होंगे।

  • नक्सल पीड़ित परिवारों के जीवन में आई स्थिरता, 5 सदस्यों को मिली शासकीय सेवा

    नक्सल पीड़ित परिवारों के जीवन में आई स्थिरता, 5 सदस्यों को मिली शासकीय सेवा

    रायपुर : नक्सल पीड़ित 5 परिवारों के सदस्यों को मिली शासकीय सेवा

    नक्सल पुनर्वास नीति से जीवन में आई स्थिरता, कलेक्टर श्रीमती तनुजा सलाम ने सौंपे नियुक्ति पत्र

    आर्थिक संबल के साथ आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की राह हुई प्रशस्त

    रायपुर,

    नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर अब धरातल पर दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित नक्सल पुनर्वास नीति के तहत मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के पांच नक्सल पीड़ित परिवारों के पात्र सदस्यों को शासकीय सेवा में नियुक्ति प्रदान की गई है। जिला कार्यालय में बुधवार को आयोजित बैठक के दौरान मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के कलेक्टर श्रीमती तनुजा सलाम ने नवनियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    आदिवासी विकास विभाग के आश्रमों और छात्रावासों में मिली
          नक्सल पीड़ित परिवारों के इन पांच सदस्यों की नियुक्ति आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावास एवं आश्रमों में भृत्य पद पर की गई है। नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वालों में रवि दुग्गा, अजय कुमार सलामे, दिलसाय कोरेटी, सुसमीला पूड़ो एवं सुपायल ईश्वर पूड़ो शामिल हैं। शासकीय सेवा का अवसर मिलने से इन परिवारों को नियमित रोजगार के साथ आर्थिक स्थिरता मिलेगी और वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे।

    पुनर्वास नीति से पीड़ित परिवारों को मिल रहा नया संबल
          नक्सल पुनर्वास नीति का उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को पुनर्वास, सुरक्षा और स्थायित्व प्रदान करते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसी क्रम में पात्र परिवारों के सदस्यों को शासकीय सेवा का अवसर दिया जाना उनके सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शासकीय नौकरी मिलने से प्रभावित परिवारों में भविष्य को लेकर भरोसा बढ़ा है। यह पहल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है।

    शासकीय सेवा जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी
           कलेक्टर श्रीमती सलाम ने नवनियुक्त कर्मचारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शासकीय सेवा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और शासन के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी है। उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों से अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर अनुशासन और समर्पण के साथ कार्य करें तथा शासन की मंशा के अनुरूप आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शासकीय सेवा के माध्यम से नवनियुक्त कर्मचारी अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की नींव भी रखेंगे।

  • CGPSC को मिले नए परीक्षा नियंत्रक, राज्य प्रशासनिक सेवा के 6 अधिकारियों का ट्रांसफर

    CGPSC को मिले नए परीक्षा नियंत्रक, राज्य प्रशासनिक सेवा के 6 अधिकारियों का ट्रांसफर

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य प्रशासनिक सेवा के 6 अधिकारियों का प्रशासनिक आधार पर तबादला किया है। इस संबंध में 27 अगस्त 2026 को आदेश जारी किया गया है। आदेश के अनुसार अधिकारियों को नवीन पदस्थापना पर आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से पदस्थ किया है।

    तबादला सूची में देव नारायण कश्यप, चित्रकांत चाली ठाकुर, दीप्ति गौत्ते, गुड्डू लाल जगत, विनय कुमार अग्रवाल और डॉ. ऋतु वर्मा के नाम शामिल हैं।

    ये हुई नई पदस्थापनाएं
    1. देव नारायण कश्यप
    वर्तमान में आयुक्त, नगर पालिक निगम अंबिकापुर के पद पर पदस्थ देव नारायण कश्यप को अब उप सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है।
    2. चित्रकांत चाली ठाकुर
    अपर कलेक्टर, कोंडागांव के पद पर पदस्थ चित्रकांत चाली ठाकुर को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत नारायणपुर बनाया गया है।
    3. दीप्ति गौत्ते
    अपर कलेक्टर, बलौदाबाजार-भाटापारा के पद से दीप्ति गौत्ते को परीक्षा नियंत्रक, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग, नवा रायपुर अटल नगर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    4. गुड्डू लाल जगत
    अपर कलेक्टर, बेमेतरा के पद पर कार्यरत गुड्डू लाल जगत को उप सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, श्रम विभाग, मंत्रालय पदस्थ किया गया है।
    5. विनय कुमार अग्रवाल
    मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत नारायणपुर के पद पर पदस्थ विनय कुमार अग्रवाल को आयुक्त, नगर पालिक निगम अंबिकापुर बनाया गया है।
    6. डॉ. ऋतु वर्मा
    उप सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के पद पर कार्यरत डॉ. ऋतु वर्मा को परीक्षा नियंत्रक, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग, नवा रायपुर अटल नगर के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। उनके शेष दायित्व यथावत रहेंगे।

    शासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यह पदस्थापनाएं प्रशासनिक आधार पर की गई हैं और आगामी आदेश तक प्रभावी रहेंगी।

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा – बच्चों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित करने में उपयोगी होगी पहल

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा – बच्चों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित करने में उपयोगी होगी पहल

    मुख्यमंत्री ने ‘साइंस ऑन व्हील्स’ को दिखाई हरी झंडी, अब स्कूलों तक पहुंचेगी प्रयोगों की चलती-फिरती विज्ञानशाला

    अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, सतत विकास और जल निस्पंदन जैसे विषयों को प्रयोगों और मॉडलों के जरिए समझेंगे विद्यार्थी

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा – बच्चों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित करने में उपयोगी होगी पहल

    आधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों तक सीमित पहुंच वाले क्षेत्रों के विद्यार्थियों को मिलेगा विशेष लाभ

    रायपुर 
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज कैम्प कार्यालय बगिया में ‘साइंस ऑन व्हील्स’ वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। विज्ञान को स्कूलों और विद्यार्थियों के और करीब ले जाने वाली यह चलती-फिरती विज्ञानशाला बच्चों को रोचक प्रयोगों, वैज्ञानिक मॉडलों और गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की दुनिया से परिचित कराएगी। विशेष रूप से आधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों तक सीमित पहुंच वाले क्षेत्रों के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा।

    मुख्यमंत्री साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों में स्वाभाविक रूप से अपने आसपास की दुनिया को जानने और समझने की जिज्ञासा होती है। इस जिज्ञासा को वैज्ञानिक सोच, प्रयोग और नवाचार से जोड़ना आवश्यक है। ‘साइंस ऑन व्हील्स’ बच्चों को किताबों में पढ़े विज्ञान को प्रयोगों के माध्यम से समझने का अवसर प्रदान करेगी। इससे उनमें सवाल पूछने, प्रयोग करने और समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने की प्रवृत्ति विकसित होगी।

    उन्होंने कहा कि आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आने वाला समय नई तकनीकों और नवाचार का है। ऐसे में विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के दौरान ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक पक्ष से परिचित कराना उनके भविष्य के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। इस प्रकार की पहल बच्चों की प्रतिभा को पहचानने और उन्हें विज्ञान, अनुसंधान तथा नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    ‘साइंस ऑन व्हील्स’ की विशेषता यह है कि इसमें विज्ञान को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को स्वयं प्रयोग करने और गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। वाहन के माध्यम से स्कूलों तक वैज्ञानिक मॉडल, प्रयोग और प्रदर्शनियां पहुंचाई जाएंगी। इससे विद्यार्थी विज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों को सरल और रोचक तरीके से समझ सकेंगे।

    कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मुख्य रूप से चार महत्वपूर्ण मॉड्यूल से जोड़ा जाएगा। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से उन्हें ब्रह्मांड और अंतरिक्ष विज्ञान की रोचक दुनिया से परिचित कराया जाएगा। रोबोटिक्स के माध्यम से नई तकनीकों, नवाचार और भविष्य के तकनीकी कौशल की समझ विकसित की जाएगी। सतत विकास मॉड्यूल विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और बेहतर भविष्य के निर्माण के प्रति जागरूक करेगा। वहीं जल निस्पंदन के माध्यम से स्वच्छ जल, जल संरक्षण तथा इससे जुड़े वैज्ञानिक समाधानों को प्रयोगों के जरिए समझाया जाएगा।

    एक बार की गतिविधि नहीं, विज्ञान से निरंतर जुड़ाव है उद्देश्य

    ‘साइंस ऑन व्हील्स’ का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल एक बार विज्ञान के प्रयोग दिखाना नहीं, बल्कि विज्ञान, नवाचार और तकनीक के प्रति उनमें स्थायी रुचि विकसित करना है। विभिन्न गतिविधियों, प्रयोगों, मॉडलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों को ऐसा सीखने का अनुभव दिया जाएगा, जो उन्हें स्वयं सवाल पूछने, उनके उत्तर तलाशने और नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित करे।

    इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समस्या-समाधान, तार्किक सोच, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाएगा। भविष्य की तकनीकों से विद्यार्थियों का प्रारंभिक परिचय उन्हें बदलती दुनिया की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में भी सहायक होगा।

    तीन राज्यों में संचालित हो रहा ‘साइंस ऑन व्हील्स’

    उल्लेखनीय है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल के अंतर्गत इस परियोजना को सहयोग प्रदान किया जा रहा है। ‘साइंस ऑन व्हील्स’ एक राष्ट्रीय पहल है, जिसे छत्तीसगढ़, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में प्लक्ष विश्वविद्यालय, IDYM फाउंडेशन और IIT मंडी के सहयोग से लागू किया जा रहा है।

    छत्तीसगढ़ में इस पहल के माध्यम से विज्ञान की व्यावहारिक शिक्षा को विद्यार्थियों के और करीब लाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवा मन में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के साथ उन्हें नई तकनीक और नवाचार से जोड़ना तथा ज्ञान और विज्ञान के माध्यम से सशक्त भारत के निर्माण में उनकी भूमिका के लिए तैयार करना है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार सहित बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

  • अब अंतरिक्ष यात्री बनने की तैयारी करेंगे युवा, मुख्यमंत्री ने ‘अंतरिक्ष संगवारी’ पहल का किया शुभारंभ

    अब अंतरिक्ष यात्री बनने की तैयारी करेंगे युवा, मुख्यमंत्री ने ‘अंतरिक्ष संगवारी’ पहल का किया शुभारंभ

    मुख्यमंत्री ने ‘अंतरिक्ष संगवारी’ अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण पहल का किया शुभारंभ

    जशपुर के 10 हजार विद्यार्थियों की होगी स्क्रीनिंग, चयनित विद्यार्थियों को मिलेगा विशेष अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण

    कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने की अभिनव पहल

    चयनित विद्यार्थियों को बेंगलुरु भ्रमण और अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मिलने का मिलेगा अवसर

    मुख्यमंत्री साय ने कहा – छत्तीसगढ़ के बच्चों की प्रतिभा को विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के मिलेंगे नए अवसर

    रायपुर 
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज कैम्प कार्यालय बगिया में विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने और उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से ‘अंतरिक्ष संगवारी’ अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण पहल का शुभारंभ किया। जिला प्रशासन जशपुर एवं IDYM Foundation के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभिनव कार्यक्रम के माध्यम से कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष यात्रा और अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण से परिचित होने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जशपुर के विद्यार्थियों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। जिले के बच्चों में प्रतिभा और सीखने की अपार क्षमता है। उन्हें सही अवसर, मार्गदर्शन और आधुनिक वैज्ञानिक संसाधन उपलब्ध कराकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि ‘अंतरिक्ष संगवारी’ जैसी पहल विद्यार्थियों के लिए अंतरिक्ष विज्ञान को केवल पुस्तकों में पढ़ने का विषय न रखकर उसे प्रत्यक्ष रूप से जानने और समझने का अवसर प्रदान करेगी। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ेगी और उन्हें भविष्य में विज्ञान, अनुसंधान तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में करियर बनाने की प्रेरणा मिलेगी।

    यह पहल भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन एवं अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला द्वारा समर्थित है। कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण के साथ अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थियों के लिए बेंगलुरु यात्रा भी प्रस्तावित है, जहां उन्हें अंतरिक्ष एवं विज्ञान से जुड़े संस्थानों और गतिविधियों को करीब से समझने के साथ अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से संवाद का अवसर मिलेगा।

    10 हजार विद्यार्थियों की होगी स्क्रीनिंग

    ‘अंतरिक्ष संगवारी’ कार्यक्रम में जिले के सभी 8 विकासखंडों को शामिल किया गया है। कक्षा 8वीं से 12वीं तक के लगभग 10 हजार विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। विभिन्न चरणों में परीक्षा, मूल्यांकन और साक्षात्कार के माध्यम से प्रतिभाशाली एवं अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा।

    कार्यक्रम की घोषणा 27 अगस्त को की गई है। पंजीयन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद 26 सितंबर को परीक्षा आयोजित होगी तथा 27 से 29 सितंबर के बीच मूल्यांकन एवं साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    चयनित विद्यार्थियों के लिए 1 से 7 अक्टूबर तक रायपुर में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात 15 अक्टूबर से बेंगलुरु यात्रा का कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसमें विद्यार्थियों को अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से मिलने और उनके अनुभवों को जानने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम का समापन 26 अक्टूबर 2026 को पुरस्कार समारोह के साथ होगा।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ और जनजातीय अंचलों के बच्चों को भी आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। जशपुर के विद्यार्थी बड़े सपने देखें, वैज्ञानिक सोच विकसित करें और भविष्य में देश के विज्ञान एवं अंतरिक्ष अभियानों में अपना योगदान दें, इस दिशा में ‘अंतरिक्ष संगवारी’ महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार सहित स्व-सहायता समूहों की महिलाएं एवं अन्य गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

  • CG हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, सौतेली मां के भरण-पोषण का जिम्मा बेटों पर

    CG हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, सौतेली मां के भरण-पोषण का जिम्मा बेटों पर

    बिलासपुर.

    हाईकोर्ट ने कहा है कि निःसंतान और असहाय सौतेली मां को केवल सौतेली मां होने के आधार पर भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता।

    हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश निरस्त करते हुए 77 वर्षीय विधवा महिला को उसके तीन सौतेले बेटों से हर माह कुल 9 हजार रुपये भरण-पोषण दिलाने का आदेश दिया है, जिसमें प्रत्येक बेटे को तीन-तीन हजार रुपये प्रतिमाह देने होंगे, जिसका भुगतान सितंबर 2026 से शुरू होगा। दरअसल, महिला ने फैमिली कोर्ट में तीनों सौतेले बेटों से हर माह 20 हजार भरण-पोषण की मांग की थी। उसका कहना था कि पति की मृत्यु के बाद बेटों ने उसकी देखभाल बंद कर दी। दावा किया कि उसने अपने स्त्रीधन और पैतृक संपत्ति से कृषि भूमि खरीदी थी, लेकिन उसे आय में कोई हिस्सा नहीं दिया जा रहा था।

    हाईकोर्ट ने गुजरात के फैसले का दिया हवाला
    फैमिली कोर्ट ने इस आधार पर याचिका खारिज कर दी थी कि संबंधित युवक उसके सौतेले बेटे हैं। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कीर्तिकांत डी. वडोदिया बनाम गुजरात राज्य के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि निःसंतान सौतेली मां, यदि विधवा है और स्वयं का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है तो परिस्थितियों के अनुसार सौतेले बेटों से भरण-पोषण मांग सकती है।

  • खेलों को बढ़ावा देने की पहल, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ‘खेलो इंडिया संवाद’ कार्यक्रम में हुए शामिल

    खेलों को बढ़ावा देने की पहल, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ‘खेलो इंडिया संवाद’ कार्यक्रम में हुए शामिल

    उप मुख्यमंत्री अरुण साव ‘खेलो इंडिया संवाद’ कार्यक्रम में हुए शामिल

    खेल सुविधाओं के विस्तार, वर्ष 2036 के ओलंपिक के लिए प्रतिभा विकास, नशामुक्ति, युवा नेतृत्व, शासन में युवाओं की भागीदारी तथा युवा सशक्तीकरण पर युवाओं ने रखे अपने विचार और सुझाव

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया संवाद’ को वर्चुअली संबोधित किया

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर तिलक वर्मा और यूथ-आइकन डॉ. प्रियंका बिस्सा भी कार्यक्रम में हुए शामिल

    रायपुर. 
    उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव आज रायपुर में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) में आयोजित ‘खेलो इंडिया संवाद’ कार्यक्रम में शामिल हुए। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर आयोजित देशव्यापी ‘खेलो इंडिया संवाद’ को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय युवा मामले व खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने देश के विभिन्न शहरों से लगभग 1600 स्थानों से जुड़े 8 लाख से अधिक युवाओं को संबोधित किया। देशभर के एथलीट्स और खेल जगत की प्रसिद्ध हस्तियां भी इसमें वर्चुअली शामिल हुए। रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर तिलक वर्मा और यूथ-आइकन डॉ. प्रियंका बिस्सा भी मौजूद थीं।
     
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया संवाद’ में देशभर के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब हम खेल की बात करते हैं, तो ये केवल मेडल जीतने तक सीमित नहीं है। ये विकसित भारत के निर्माण में भारत की खेलशक्ति और भारत की युवाशक्ति को एक साथ जोड़ने का अभियान है। उन्होंने कहा, “जो खेले, वो खिले। और खेल में खिलना सिर्फ मैदान पर जीतना नहीं है, खेल में खिलना मतलब व्यक्तित्व का खिलना, परिवार का खिलना और देश का गौरव बढ़ाना।“

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में 21वीं सदी का आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आज स्पोर्ट्स और स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटीज से लेकर आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर्स तक देश में एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिसमें प्रतिभा को पहचानने से लेकर उसे दुनिया के मंच तक पहुंचाने तक हर स्तर पर सहयोग मिले। हम दुनिया के दूसरे देशों के साथ भी स्पोर्ट्स साइंस, प्रशिक्षण, कोचिंग और अनुभव साझा करने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं।

    मोदी ने कहा कि ‘खेलो इंडिया संवाद’ सिर्फ खेल की बात करने का कार्यक्रम नहीं है। ये एक ऐसे संवाद का मंच है जिसका एक-एक विचार देश के स्पोर्ट्स विजन को एक नई दिशा दे सकता है। इसके साथ जो युवा संवाद हो रहा है, वो युवाओं के विचारों और महत्वाकांक्षाओं को देश के सपनों से जोड़ने का बहुत बड़ा माध्यम है। इस कार्यक्रम में स्पोर्ट्स इकोसिस्टम, टैलेंट डेवलपमेंट, गवर्नेंस और विकसित भारत को लेकर युवा क्या सोचते हैं, उनके सुझाव क्या हैं, इन बातों को सुनकर उन्हें नीतियों के निर्माण में शामिल किया जाएगा। 

    उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने एनआईटी में आयोजित ‘खेलो इंडिया संवाद’ में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हर व्यक्ति की सफलता के पीछे कठोर परिश्रम होता है। बुराईयों को त्याग कर, अपनी कमियों और खामियों को दूर कर जब मेहनत करते हैं, तब हमें बड़ी सफलता मिलती है। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि नशामुक्त युवा ही विकसित भारत का निर्माण कर सकता है। नशामुक्त होना अपने आप में देश को ताकत और मजबूती देना है। 

    उप मुख्यमंत्री साव ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि कई बार हमें थोड़ी असफलता मिलती है, पर इससे निराश और हताश नहीं होना है, न ही नशे की ओर प्रवृत्त होना है। नशा आपको कमजोर करता है, नुकसान पहुंचाता है। नशे से कभी किसी को कोई लाभ नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन में पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। आपके सामर्थ्य और आपके दम पर यह देश विकसित भारत बनेगा। हमारे प्रधानमंत्री आप लोगों को आगे बढ़ाना चाहते हैं, युवाओं की क्षमता का उपयोग कर भारत को विकसित राष्ट्र बनाना चाहते हैं।

    मशहूर क्रिकेटर तिलक वर्मा ने कार्यक्रम में युवाओं के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि खेल व्यक्ति को सब कुछ सिखाता है। कठिन परिस्थितियों से जूझना, दवाब झेलना, कौशल, टीम भावना और मानसिक स्थिरता जैसे गुण विकसित करने के साथ ही यह सेहत, फिटनेस और पोषण के लिए जागरूक करता है। उन्होंने कहा कि कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली और नीरज चोपड़ा जैसे खिलाड़ियों ने देश के लाखों युवाओं को खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। यूथ-आइकन डॉ. प्रियंका बिस्सा ने कहा कि युवाओं को सुझाव देने और पहल करने के साथ ही खुद जिम्मेदारी लेने की भी जरूरत है। युवा अपने इनिशिएटिव्स (Initiatives) में ओनरशिप (Ownership) की भावना के साथ काम करें। नेतृत्व, शासन-प्रशासन और देश को आगे बढ़ाने में युवा अपनी सक्रिय और सशक्त मौजूदगी दर्ज कराएं। 

    एनआईटी के विद्यार्थियों, खिलाड़ियों और युवाओं ने ‘खेलो इंडिया संवाद’ के तहत आयोजित ‘युवा संवाद’ में देश में खेल अधोसंरचना के विकास, खेल सुविधाओं के विस्तार, खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने, वर्ष 2036 के ओलंपिक के लिए प्रतिभा विकास, नशामुक्ति, युवा नेतृत्व एवं शासन में युवाओं की भागीदारी तथा विकसित भारत के लिए युवा सशक्तीकरण जैसे विषयों पर अपने विचार और सुझाव रखें। कार्यक्रम में युवाओं को नशामुक्त रहने की शपथ भी दिलाई गई। एनआईटी के निदेशक डॉ. एन.वी. रमना राव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संचालक सुआकांक्षा शिक्षा खलखो और माय भारत के राज्य निदेशक अर्पित तिवारी सहित एनआईटी के प्राध्यापकगण तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

  • पिट लगाकर जांची सड़क की परतें, पीएमजीएसवाई सड़कों की गुणवत्ता पर कलेक्टर की पैनी नजर

    पिट लगाकर जांची सड़क की परतें, पीएमजीएसवाई सड़कों की गुणवत्ता पर कलेक्टर की पैनी नजर

    पिट लगाकर जांची सड़क की परतें, पीएमजीएसवाई सड़कों की गुणवत्ता पर कलेक्टर की पैनी नजर

    मनेन्द्रगढ़/एमसीबी

    ग्रामीण अंचलों में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि विकास की जीवनरेखा होती हैं। इन्हीं सड़कों की गुणवत्ता और मजबूती सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत निर्मित सड़कों का मौके पर पहुंचकर भौतिक निरीक्षण किया। दूरस्थ विकासखंड भरतपुर में कलेक्टर ने अधिकारियों के साथ सड़क निर्माण की गुणवत्ता परखी और महज कागजी रिपोर्ट पर भरोसा करने के बजाय सड़क में पिट लगवाकर उसकी अंदरूनी निर्माण परतों की वास्तविक स्थिति जांची।

    निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर अनिल कुमार सिदार, एसडीएम एस. शेखर मिश्रा, तहसीलदार नीरज कांत तिवारी, पीएमजीएसवाई के कार्यपालन अभियंता मोती राम सिंह, एसडीओ विमल शर्मा सहित सब-इंजीनियर उपस्थित रहे।

    कोईलरा-कुरकुट्टी खालेपारा सड़क की खुली परतें, मानकों पर खरी उतरी गुणवत्ता

    कलेक्टर ने सबसे पहले कोईलरा पीएमजीएसवाई रोड से कुरकुट्टी खालेपारा वाया तोजा तक निर्मित सड़क का निरीक्षण किया। 7.03 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण के लिए 401.60 लाख रुपए की अनुबंधित राशि निर्धारित की गई थी। सड़क का निर्माण 31 मार्च 2026 को पूर्ण हुआ है।

    निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता जानने के लिए चैनेज 150 मीटर पर पिट लगाकर सड़क की विभिन्न परतों की मौके पर जांच की गई। जांच में एमएसएस लेयर की स्वीकृत मोटाई 20 एमएम के मुकाबले 25 एमएम, डीबीएम लेयर की स्वीकृत 150 एमएम के मुकाबले 170 एमएम तथा जीएसईबी लेयर की स्वीकृत 150 एमएम के मुकाबले 160 एमएम पाई गई।

    मौके पर हुई जांच में सड़क की प्रमुख निर्माण परतें निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुरूप मिलीं। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि सड़क की गुणवत्ता को केवल ऊपरी सतह से नहीं, बल्कि निर्माण की अंदरूनी परतों तक जाकर परखा गया।

    सिंगरौली-पुरहनिया पारा सड़क का भी लिया जायजा

    इसके बाद कलेक्टर ने सिंगरौली से पुरहनिया पारा तक निर्मित पीएमजीएसवाई सड़क का निरीक्षण किया। 2.025 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण के लिए 125.14 लाख रुपए की अनुबंधित राशि निर्धारित की गई थी। सड़क का निर्माण कार्य 31 दिसंबर 2025 को पूर्ण हुआ था।

    कलेक्टर ने सड़क की सतह, निर्माण की स्थिति और गुणवत्ता का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण से जुड़ी तकनीकी जानकारी ली और सड़क की वर्तमान स्थिति के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।

    गुणवत्ता में लापरवाही नहीं, टिकाऊ सड़कें बनाने पर जोर

    निरीक्षण के दौरान दोनों सड़कों की निर्माण गुणवत्ता संतोषजनक एवं निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुरूप पाई गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली सड़कों की गुणवत्ता और टिकाऊपन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

    उन्होंने कहा कि सड़कें केवल निर्माण पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीणों को लंबे समय तक सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा देने के उद्देश्य से बनाई जाती हैं। इसलिए निर्माण के प्रत्येक चरण में तकनीकी मानकों का गंभीरता से पालन और नियमित निगरानी आवश्यक है।

    कलेक्टर के इस मौके पर किए गए निरीक्षण ने यह संदेश दिया कि ग्रामीण सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। सड़क की ऊपरी चमक के साथ-साथ उसकी नींव और अंदरूनी परतें भी मजबूत हों, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की सीधी निगरानी जारी रहेगी।

  • बच्ची के गले में फंसा सेफ्टी पिन, बस्तर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन से बचाई जान

    बच्ची के गले में फंसा सेफ्टी पिन, बस्तर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन से बचाई जान

    जगदलपुर.

    बस्तर जिले के मावलीबेडा में दो साल की बच्ची के गले में सेफ्टी पिन फंसने का मामला सामने आया है। बच्ची खेलते समय सेफ्टी पिन निगल गई, जो उसकी सांस की नली में जाकर फंस गया। इसके बाद उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी।

    परिजन तत्काल बच्ची को मेडिकल कॉलेज डिमरापाल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने दूरबीन पद्धति से सफलतापूर्वक सेफ्टी पिन निकालकर उसकी जान बचाई। जानकारी के अनुसार, दो वर्षीय मोनिका घर में खेल रही थी। इसी दौरान उसने सेफ्टी पिन निगल लिया। पिन सांस की नली में फंसने के कारण बच्ची को अचानक सांस लेने में दिक्कत होने लगी। बच्ची की हालत देखकर परिजन घबरा गए और उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज डिमरापाल ले गए।

    समय पर उपचार मिलने से बच गई जान
    मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने बच्ची की जांच की। जांच में सेफ्टी पिन सांस की नली में फंसा हुआ पाया गया। इसके बाद चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया और दूरबीन पद्धति से पिन को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। समय पर उपचार मिलने से बच्ची की जान बच गई। प्रक्रिया के बाद उसकी हालत में सुधार बताया गया।

    बच्चों को खेलने के लिए न दें सिक्के, छोटे खिलौने, पिन या बीज
    डॉक्टरों ने इस घटना के बाद पालकों से छोटे बच्चों की निगरानी रखने की अपील की है। चिकित्सकों ने कहा कि बच्चों को खेलते समय सिक्के, छोटे खिलौने, पिन, बीज और ऐसी अन्य छोटी वस्तुएं नहीं देनी चाहिए, जिन्हें वे गलती से निगल सकते हैं।ऐसी वस्तुएं निगलने से सांस की नली में फंसकर गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर बच्चे की जान भी खतरे में पड़ सकती है।