Category: छत्तीसगढ़

  • नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए खुशखबरी, CG में 877 पदों पर आज लगेगा रोजगार मेला

    नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए खुशखबरी, CG में 877 पदों पर आज लगेगा रोजगार मेला

    रायपुर.

    अगर आप भी नौकरी ढूंढ रहे हैं, तो यह आपके लिए काम की खबर साबित हो सकती है. राजधानी रायपुर में बुधवार को जिला स्तरीय रोजगार मेला लगने वाला है. यहां 877 पदों पर सीधी भर्ती होंगे. निजी क्षेत्र की 8 कंपनियां इसमें शामिल होने वाली हैं.

    रोजगार मेला जिला रोजगार कार्यालय, सिविल लाइंस में सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक आयोजित किया जाएगा. इच्छुक अभर्यितों को तय समय में शामिल होना अनिवार्य है. आज निजी क्षेत्र की कई कंपनियों में नौकरी पाने का शानदार मौका मिलेगा. अलग-अलग योग्यता और तकनीकी दक्षता वाले उम्मीदवारों की भी भर्ती होगी. कुल 877 पदों पर भर्ती की जाएगा. इस रोजगार मेले में शामिल होने के लिए कम से कम आपको 10वीं पास होना जरूरी है. नौकरी के लिए 10वीं, 12वीं, स्नातक और आईटीआई की योग्यता मांगी गई है. वहीं वेल्डर, इलेक्ट्रिशियन, फिटर, डिप्लोमा और कृषि से संबंधित योग्यता रखने वाले भी के लिए भी रोजगार के अवसर उपलब्ध रहेंगे.

    ऑनलाइन आवेदन करना होगा जरूरी 
    नौकरी पाने के इच्छुक अभ्यर्थियों को रोजगार मेले में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना जरूरी होगा. आप erojgar.cg.gov.in पोर्टल या छत्तीसगढ़ रोजगार एप के जरिए पंजीयन और आवेदन कर सकते हैं.

  • रायपुर में CM साय से मिले प्रतिभावान विद्यार्थी, राष्ट्रपति भवन की मुलाकात के अनुभव किए साझा

    रायपुर में CM साय से मिले प्रतिभावान विद्यार्थी, राष्ट्रपति भवन की मुलाकात के अनुभव किए साझा

    रायपुर : राष्ट्रपति से भेंट कर लौटे प्रतिभावान विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की सौजन्य मुलाकात

    राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा और समृद्ध लोक संस्कृति की विद्यार्थियों ने छोड़ी अमिट छाप

    राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से संवाद के अनुभव विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के साथ किए साझा

    मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों को दी बधाई, कहा – आपकी उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय

    राष्ट्रपति ने CWSN विद्यार्थी नुकेश कुमार वर्मा को बांधी राखी, छात्राओं की सुवा नृत्य प्रस्तुति को सराहा

    रायपुर,

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट कर लौटे छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सौजन्य मुलाकात की। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री साय को राष्ट्रपति भवन की अपनी यादगार यात्रा और राष्ट्रपति महोदया के साथ हुए आत्मीय संवाद के अनुभव सुनाए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को इस विशेष अवसर के लिए बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में गौरव की बात है। प्रदेश के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।

    मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी यात्रा के संबंध में जानकारी ली। विद्यार्थियों ने बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मिलना उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव रहा। राष्ट्रपति महोदया ने उनसे सहजता और आत्मीयता के साथ बातचीत की तथा उनकी शिक्षा, रुचियों और भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में जाना। विद्यार्थियों ने राष्ट्रपति भवन के भ्रमण और वहां बिताए क्षणों से जुड़े अपने अनुभव भी मुख्यमंत्री के साथ साझा किए।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे बच्चों में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। उन्हें सही अवसर, प्रोत्साहन और मंच मिले तो वे हर क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर सकते हैं। ऐसे अवसर विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उनके सपनों को नई ऊंचाई देते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी लगन और मेहनत के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखने तथा जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।

    उल्लेखनीय है कि रक्षाबंधन के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट और संवाद का विशेष अवसर प्राप्त हुआ था। इस अवसर पर राष्ट्रपति महोदया ने विद्यार्थियों से आत्मीयतापूर्वक बातचीत की। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

    राष्ट्रपति भवन में इस मुलाकात का एक अत्यंत भावुक और यादगार क्षण उस समय आया, जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने CWSN (Children with Special Needs) विद्यार्थी नुकेश कुमार वर्मा को स्वयं राखी बांधी। राष्ट्रपति महोदया का यह आत्मीय स्नेह नुकेश के साथ ही वहां उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए भी जीवनभर संजोकर रखने वाली स्मृति बन गया।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति की सुंदर झलक भी राष्ट्रपति भवन में देखने को मिली। छात्राओं ने प्रदेश के पारंपरिक सुवा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा, गीत-संगीत और सांस्कृतिक सौंदर्य से सजी इस प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रस्तुति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की सराहना की।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह विशेष रूप से प्रसन्नता की बात है कि प्रदेश के बच्चों ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा से जुड़े राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा के साथ उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी सुंदर परिचय दिया। उन्होंने कहा कि हमारी लोक संस्कृति हमारी पहचान और हमारी अमूल्य धरोहर है। नई पीढ़ी जब इसे आत्मसात कर देश के प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुत करती है, तो हमारी परंपराओं को नई ऊर्जा और व्यापक पहचान मिलती है।

    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि राष्ट्रपति महोदया से प्राप्त प्रोत्साहन और इस यात्रा से मिले अनुभव को वे अपने जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाएं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे अपने सपनों को बड़ा रखें, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और अपनी उपलब्धियों से परिवार, प्रदेश और देश को गौरवान्वित करें।

    राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट करने वाले विद्यार्थियों में नारायणपुर जिले की राजवती पोयाम, सुकमा जिले के हिमांशु ठाकुर, दुर्ग जिले की पायल राजानी, महासमुंद जिले की रागनी साहू, रायपुर जिले के नुकेश कुमार वर्मा तथा महासमुंद जिले के दुर्गेश साहू एवं डिगेश सेन शामिल थे।

    इस अवसर पर डॉ. मुक्ति बैस, राज्य नोडल अधिकारी, समग्र शिक्षा, रायपुर तथा चंद्रशेखर मिथलेश, व्याख्याता (भौतिकी), शासकीय आशी बाई गोलछा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद भी उपस्थित थे।

  • रायपुर में मंत्री केदार कश्यप की प्रेस वार्ता, वन एवं पर्यावरण से जुड़े मामलों पर देंगे जानकारी

    रायपुर में मंत्री केदार कश्यप की प्रेस वार्ता, वन एवं पर्यावरण से जुड़े मामलों पर देंगे जानकारी

    रायपुर : वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की पत्रवार्ता

    रायपुर

    वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप विभागीय गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर आज छत्तीसगढ संवाद के  आडिटोरियम (नवा रायपुर,अटल नगर ) में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा और माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार “हरित छत्तीसगढ़, समृद्ध छत्तीसगढ़” के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए वन संरक्षण का अर्थ केवल वनों की सुरक्षा नहीं है। वनों के संरक्षण के साथ वनवासियों की समृद्धि, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, किसानों की आय में वृद्धि, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार, वन्यजीव संरक्षण तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से बेहतर वन प्रबंधन हमारी प्राथमिकताओं का हिस्सा हैं।

    किसान वृक्ष मित्र योजना-किसान की आय के साथ हरियाली
            मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि हमारी सरकार ने वृक्षारोपण को किसानों की आय से भी जोड़ा है। किसान वृक्ष मित्र योजना में पात्र नागरिकों को 5 एकड़ तक 100 प्रतिशत वित्तीय अनुदान तथा 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जाता है। पिछले दो वर्षों में 36 हजार 896 हितग्राहियों की 62 हजार 441 एकड़ कृषि भूमि में 3.675 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया है।

    वनवासी परिवारों की समृद्धि हमारी पहली प्राथमिकता
     छत्तीसगढ़ में जंगल और जंगल पर निर्भर समुदाय एक-दूसरे से अलग नहीं है, इसलिए हमारी सरकार ने वन संरक्षण के साथ-साथ वनोपज संग्राहकों की आय और उनकेपरिवारों के कल्याण को प्राथमिकता दी है। छत्तीसगढ़ में तेंपदूत्ता संग्र्रहण दर 5,500 प्रति मानक बोरा है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों द्वारा 13.85 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्र्रहण किया गया और 757 करोड़ का ऑनलाइन भुगतान किया गया। 7.14 लाख संग्राहकों को 153 करोड़ प्रोत्साहन पारिश्रमिक का भुगतान किया गया। 12.40 लाख महिला संग्राहकों को चरण पादुका वितरित की गई तथा वर्ष 2026 में 12.38 लाख पुरुष संग्राहकों को चरण पादुका का वितरण प्रस्तावित है। 

    कश्यप ने बताया कि समर्थन मूल्य पर 36 हजार 580 क्विंटल वनोपज की खरीदी की गई, जिसमें संग्राहकों को राशि 16.66 करोड़ रूपए का आनलाईन भुगतान तथा 13 हजार से अधिक संग्राहक परिवारों को लाभ पहुंचा गया है। राजमोहिनी देवी सुरक्षा योजना में 1862 प्रकरणों में 26.08 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया। तेन्दूपदूत्ता संग्राहक परिवार के 8 हजार 533 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति योजनाओं के अन्तर्गत 12.07 करोड़ रूपए की छात्रवृत्ति दी गई। वर्ष 2026 में अबूझमाड़ में 13 नए तेंदूपत्ता फड़ प्रारंभ किए गए हैं।

    महिला सशक्तिकरण वनोपज को आजीविका से जोड़ा
    मंत्री कश्यप ने बताया कि प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन एवं पीएम जनमन योजना के अंतर्गत लघु वघुनोपज के संग्रहण और प्रसंस्करण से 6 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों के 70 हजार से अधिक सदस्य लाभान्वित हुए हैं। वन धन केन्द्रों से जुडी महिला समूहों को 5 करोड़ से अधिक कमीशन दिया गया है। उन्होंने बताया कि वन धन केन्द्रों में 181 प्रकार के हर्बल उत्पादों का निर्माण किया गया है ,जिसका मूल्य राशि 4.42 करोड़ रूपए रहा। धमतरी जिले में महानदी तट एवं अनुपनुयोगी पंचायत भूमि की 120 एकड़ भूमि पर महिला समूहों द्वारा खस का रोपण किया गया है। गौरेला-पेन्ड्रा -मरवाही, बिलासपुरु, कांकेर, धमतरी और कोरबा के 65 ग्रामों की 1,854 महिलाओं द्वारा अपनी बाड़ियों में 64 हजार 798 सिंदूरी तथा 7 लाख 48 हजार 092 सतावर पौधे लगाए गए हैं।

    बस्तर में शांति के साथ विकास और रोजगार की नई शुरुआत
    कश्यप ने बताया कि पिछले दो वर्षों में बस्तर अंचल के माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, इसका परिणाम यह है कि वन विभाग अब अति-संवेदनशील क्षेत्रों में भी वानिकी एवं विदोहन कार्य पुनः प्रारंभ कर रहा है। दंतेवाड़ा , सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोण्डागांव एवं कांकेर के दूरूस्थ वनक्षेत्रों में इमारती लकड़ी एवं बांस विदोहन के कार्य किये जायेंगे। इमारती लकड़ी विदोहन, बांस विदोहन और अन्य कार्यो से कुल 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजन का अनुमान है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने के साथ पलायन कम करने तथा लोगों का जल, जंगल-जमीन और बस्तर की संस्कृति से जुड़ाव मजबूत करने का प्रयास है।

    दूरस्थ वनांचलों में सड़क, मोबाइल और बुनियादी सुविधाएं
     मंत्री कश्यप ने बताया कि वन संरक्षण के साथ हमारी सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि वन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और दूरसंचार जैसी मूलमूत सुविधाओं से वंचित न रहें। पीएम जनमन योजना के तहत 20 प्रकरणों में 58.002 हेक्टेयर एवं 99.995 किलोमीटर मार्ग के लिए अनुमनुति दी गई।

           वन अधिकार अधिनियम, 2006 की धारा 3(2) के तहत 417 प्रकरणों में 1,300- 1,400 किलोमीटर मार्ग के लिए ग्रामसभा की अनुशंसा के बाद अनुमति जारी की गई।  वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम के तहत जिलों में बीएसएनएल के 62 में से 59 टावरों को रिकॉर्ड 70 दिनों में अनुमति प्रदान की गई है। विगत 2.5 वर्षों में विद्यालय, अस्पताल, आंगनबाड़ी , सड़क, विद्युत एवं दूरदूसंचार लाईन, पेयजल, सिंचाई, कौशल विकास एवं सामुदायिक केन्द्र सहित 13 प्रकार के विकास कार्यों के लिए वन अधिकार अधिनियम की धारा 3 (2) के तहत कुल 1168 प्रकरणों में वनभूमि के विपथन की कार्यवाही की गई।

    वन्यजीव संरक्षण बाघों की संख्या 18 से बढ़कर 35
    वनमंत्री कश्यप ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2022 में प्रदेश में 18 बाघ थे, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 35 हो गए हैं। यह 94 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि है।2,829.387 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला गुरुघासीदास-तमोर पिंगला देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जिसकी अधिसूचना वर्ष 2024 में हुई।एनटीसीए द्वारा बांधवगढ़ से 3 बाघिनों के ट्रांसलोकेशन की अनुमनुति दी गई है। एनक्लोजर और पेट्रोलिंग कैंप तैयार हैं तथा बरसात के बाद स्थातनांरण किया जाना है।

    कृष्ण मृग संरक्षण को माननीय प्रधानमंत्री जी से मिली सराहना
    मंत्री कश्यप ने बताया कि  बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्सं 77 से बढ़कर 200 के पार पहुंच गई है। इस उपलब्धि की सराहना स्वयं माननीय प्रधानमंत्रीं नरेन्द्र मोदी जी ने 26 अप्रैल 2026 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में की। वर्तमान में इन्द्रावती में हमारे राजकीय पशु वन भैंसे 14-17 प्राकृतिक रूप से मौजूद हैं तथा असम से लाए गए वन भैंसे की संख्या 6 से बढ़कर 11 हुई है। राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना की संख्या 800 से 900 दर्ज की गई है और ‘मैना मित्र’योजना के तहत 250 घोंसलों की पहचान की गई है। अचानकमार के औरापानी में वल्चर सेफ जोन विकसित किया गया है तथा इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में तीन प्रजातियों के 150 गिद्ध संरक्षित हैं।

    मानव-हाथी द्वंद तकनीक और जनभागीदारी से समाधान
     कश्यप ने बताया कि मानव-हाथी द्वंद को कम करने के लिए ‘गज संकेत’ ऐप तथा ‘गजरथ यात्रा’ के माध्यम से तकनीक और सामुदायिक सहभागिता को जोड़ा गया है। हाथियों से जनहानि वर्षवार कम होते जा रहे हैं। 90 हाथी मित्र दलों के 545 प्रशिक्षित सदस्य गांव-गांव जाकर जागरूकता का कार्य कर रहे हैं। 12 अगस्त 2026, विश्व हाथी दिवस पर दरभा में गज संकेत’ ऐप का विमोचन किया गया। इस पहल को माननीय मुख्यमंत्री द्वारा राज्य स्तरीय सुशासन पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।

    ईको-टूरिज्म-प्रकृति भी, प्रगति भी

         वन एवं जनलवायु परिवर्तन मंत्री कश्यप ने कहा कि प्रदेश में 240 प्राकृतिक पर्यटन केन्द्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 50 से अधिक पर्यटन केर्न्द्र पूर्णतः स्वावलंबी हो चुके हैं। प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन केन्द्रों के लिए 2 करोड़ 60 लाख के प्रस्तावित लक्ष्य के विरुद्ध 2 करोड़ 21 लाख सकल आय दर्ज की गई है। बस्तर का धुड़मारास सामुदायिक पर्यटन का महत्वपूर्ण उदाहरण है, इससे 40 प्रत्यक्ष रोजगार और 20 अप्रत्यक्ष रोजगार एवं 5 कमरे का ‘धुर्वाडेरा’ होमस्टे बनाया गया है। महासमुंद के शिशुपाल इको ट्रेल को 45 लाख की लागत से विकसित किया गया है। यहां अब तक 832 मानव-दिवस 15 नियमित आजीविका सृजित हुई है। कवर्धा सफारी माडल  में 35 कि.मी. लंबा नया सफारी मार्ग विकसित किया गया है। चक्रीय निधि से खरीदे गये 4ग्4 सफारी वाहनों का संचालन सीधे स्थानीय ईडीसी (थावरझोल) द्वारा किया जा  रहा है।

    बस्तर की संस्कृति और जनजातीय आस्था का संरक्षण
    मंत्री कश्यप ने बताया कि बस्तर की संस्कृति जंगलों और प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई है। इसलिए वन संरक्षण के साथ जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी है।  पिछले2.5 वर्षों में 19.05 करोड़ व्यय कर वन क्षेत्रों में 572 देव गुड़ियों का निर्माण और जीर्णाेद्धार किया गया है। ग्राम गढ़बेंगाल, नारायणपुर में बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक संस्था ‘घोटुल’ के संरक्षण की दिशा में कार्य किया गया है।

    कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को विश्व स्तर पर पहचान
    कश्यप ने बताया कि वर्ष 2025 में 200 वर्ग किलोमीटर में फैले कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया। यह गुफा, तीरथगढ़ जैसे जलप्रपातों और समृद्ध जैव-विविधता का अद्वितीय केन्द्र है। कांगेर घाटी में चक्रीय निधि से 35 जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। 18 हितग्राही ऋण पूर्णतः चुका चुके हैं।

    संयुक्त वन प्रबंधन समितियां- संरक्षण का लाभ सीधे ग्रामीणों तक
    मंत्री कश्यप ने बताया कि वन प्रबंधन समितियों की लाभांश राशि से मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन, अदरक खेती, नीलगिरी रोपण और अगरबत्ती निर्माण जैसी आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। 78 तालाबों मेंसघन मत्स्य पालन किया गया और 30 जून 2026 तक लगभग 3,200 क्विंटल मछली उत्पादन हुआ है। पिछले ढाई वर्षों में चक्रीय निधि से 2,170.15 लाख ऋण प्रदान किया गया है, जिससे 700 परिवार लाभान्वित हुए हैं।

    छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट 
    मंत्री कश्यप ने बताया कि कोपरा जलाशय, बिलासपुर को राज्य का पहला रामसर साइट घोषित किया गया है। Vision@2047 के तहत वर्ष 2030 तक 20 रामसर साइट बनाने का लक्ष्य है। 2.25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली 11,096 आर्द्रभूमियों की ग्राउंड ट्रूथिंग एवं बाउंड्री डिमार्केशन पूर्ण की गई है। प्रदेश में 500 से अधिक वेटलेंडमित्र कार्यरत हैं।  BMC के 105 युवाओं को पैराटेक्सोनामी प्रशिक्षण दी गई है।

    वैज्ञानिक वन प्रबंधन और अनुसंधान
    मंत्री कश्यप ने बताया कि 17 वनमंडलों में 911 सरना का चिन्हांकन एवं प्रलेखन किया गया है, जिनका कुल क्षेत्रफल 2,928.16 हेक्टेयर है। राज्य भर में 240 प्रवासी पक्षी प्रजातियों का डेटाबेस तैयार किया गया है। 7 जिलों में 5 हेक्टेयर सेअधिक वाली 283 आर्द्रभूमियों का सर्वेक्षण किया गया है। 1 हेक्टेयर में 13 विभिन्न बांस प्रजातियों के 120 पौधों का बैम्बू सेटम स्थापित किया गया है। चंदन के 14 वर्ष पुराने प्रायोगिक रोपण के अध्ययन में 33 प्रतिशत हार्डवुड कंटेंट पाया गया है तथा वृक्षारोपण सफल पाया गया है। पिछले दो वर्षों में 72 जैविक प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं,जिससे 4,057 संग्राहक एवं 21,471 किसान लाभान्वित हुए हैं। 24 जिलों के 6,140 पारंपरिक वैद्यों को 10 सम्मेलनों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया है तथा हर्बल प्रसंस्करण के लिए 45 ग्राइंडिंग मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। जामगांव, जिला दुर्ग में राशि 94.75 करोड़ रूपए की लागत से राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेदिक औषधि निर्माण केन्द्र की स्थापना की गई है।

    आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित वन प्रशासन
     मंत्री कश्यप ने बताया कि छ.ग शासन के निर्देशानुसार वन विभाग के अन्तर्गत होने वाली भुगतान प्रक्रिया का पूरी तरह से एंड-टू-एंड डिजिटाईजेशन कर दिया गया है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर और ई-कोष प्लेटफार्म के साथ सफलता पूर्वक एकीकृत किया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,520 करोड़ से अधिक का ऑनलाइन भुगतान किया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक 209 करोड़ का ऑनलाइन भुगतान किया गया है। SPARROW में  8,975 अधिकारी-कर्मचारी आनबोर्ड किए गए तथा 9,464 PAR जनरेट किए गए हैं।  eHRMS में 32,869 अधिकारी एवं कर्मचारी आनबोर्ड हैं।  मुख्यालय से लेकर समस्त वनमंडल स्तर तक ई आफिस शत-प्रतिशत लागू किया गया है।  iGOT कर्मयोगी में 9,230 अधिकारी एवं कर्मचारी आनबोर्ड हैं। वनों की अग्नि दुर्घटना से सुरक्षित रखने हेतु अत्याधुनिक फारेस्ट फायर अलर्ट एवं मानिटरिंग सिस्टम संचालित है, जिससे नियर रियल टाइम अलर्ट जारी होते हैं, रिस्पॉन्स टाइम 1-2 घंटे से घटकर 5-10 मिनट हो गया है तथा इसे बीट स्तर तक विस्तारित किया जा रहा है।

  • AI की बढ़ती ताकत के बीच विशेषज्ञों की चेतावनी, मानव सोच और संवेदनाओं की जगह नहीं ले सकती तकनीक

    AI की बढ़ती ताकत के बीच विशेषज्ञों की चेतावनी, मानव सोच और संवेदनाओं की जगह नहीं ले सकती तकनीक

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव मस्तिष्क और संवेदना का विकल्प नहीं : विशेषज्ञ

    * कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य की चुनौतियों पर वैचारिक विमर्श के साथ काव्य गोष्ठी का आयोजन

    रायपुर
    नव छत्ती
    सगढ़ साहित्य सांस्कृतिक संस्थान, रायपुर के तत्वावधान में सोमवार को रायपुर के वृंदावन सभागार में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य की चुनौतियां’ विषय पर वैचारिक विमर्श एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, कवियों और साहित्यप्रेमियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव, संभावनाओं, चुनौतियों तथा मानवीय मूल्यों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
    कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि, लेखक एवं स्तंभकार संजीव कुमार ठाकुर ने की। मुख्य अतिथि के रूप में बेंगलुरु से विशेष रूप से पहुंचे आर्यावर्त के प्रबंध संपादक बिजय कुमार सिंह उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. महेंद्र कुमार ठाकुर, व्यंग्यकार एवं ज्योतिष विशेषज्ञ, उपसंचालक जनसंपर्क सौरभ शर्मा, पत्रकारिता महाविद्यालय के प्राचार्य देवाशीष मुखर्जी, कवि सुरेंद्र रावल तथा छत्तीसगढ़ी कवि-गीतकार मीर अली मीर शामिल रहे।
    संस्थान के अध्यक्ष डॉ. संजीव ठाकुर ने कहा कि 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकास की नई दिशा और चुनौतियों की नई राह है।' उन्होंने कहा कि एआई के बढ़ते प्रभाव से घबराने के बजाय उसके उपयोग को समझने और सावधानीपूर्वक अपनाने की आवश्यकता है। मशीन बुद्धिमान हो सकती है, लेकिन वह मानव मस्तिष्क, मानवीय संवेदनाओं और भावनात्मक अनुभवों का विकल्प नहीं बन सकती। तकनीक का उपयोग मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए, न कि मानवीय संवेदनाओं और रचनात्मकता को कमजोर करने के लिए।
    विमर्श के दौरान साहित्य और तकनीक के बदलते संबंधों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा, पत्रकारिता, साहित्य, चिकित्सा, उद्योग और अन्य अनेक क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर रही है, लेकिन इसके साथ रोजगार, मौलिकता, रचनात्मकता, सूचना की विश्वसनीयता और मानवीय मूल्यों से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ऐसे में तकनीकी प्रगति के साथ विवेक, संवेदना और नैतिक जिम्मेदारी का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
    वक्ताओं ने कहा कि एआई मनुष्य की कार्यक्षमता बढ़ाने वाला प्रभावी साधन बन सकता है, लेकिन सृजन के पीछे मौजूद भावनात्मक अनुभव, जीवन की अनुभूति और मानवीय दृष्टि को मशीन पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकती। साहित्य के क्षेत्र में भी तकनीक सहायक की भूमिका निभा सकती है, लेकिन रचना की आत्मा मानवीय अनुभव और संवेदना से ही आती है।
    विचार-विमर्श के पश्चात काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मंजूषा अग्रवाल, कल्याणी तिवारी, यशवंत कुमार चतुर्वेदी, मीर अली मीर, मन्नू लाल यदु, छबिलाल सोनी, रूनाली चक्रवर्ती, सुषमा प्रेम पटेल, शकुंतला तिवारी, अभिषेक शर्मा, उदयभान सिंह चौहान, भूपेंद्र कुमार शर्मा, यशवंत यदु, जे. एस. उरकरकर, विवेक कुमार एवं प्रिया वर्मा ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कवियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्रकृति, देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, पारिवारिक रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं सहित विभिन्न विषयों को अपनी रचनाओं में स्वर दिया।
    मंजूषा अग्रवाल ने शब्द और भाव के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा—
    'शब्द तभी अमर होते हैं,
    जब भाव से निकलते हैं।
    कवि तभी चमकते हैं,
    जब आँखों से बोलते हैं।'

    कल्याणी तिवारी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संदर्भ में अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए मशीन और मनुष्य के संबंधों पर प्रश्न उठाए—
    'मैं यंत्र नहीं, मैं प्रश्न हूँ,
    प्रश्न यहाँ है कि तुमने मुझमें बुद्धि भरी।
    प्रभावों को कैसे उत्कृष्टता प्रदान करूँ,
    नभ से सुने विस्तारों में,
    क्या तुम साथ निभाओगी?'
    यशवंत कुमार चतुर्वेदी ने सावन की मनोहारी छटा को अपनी कविता में उकेरा—
    'सावन की कारी-कारी बदरिया,
    रिमझिम-रिमझिम बारिश का पानी।
    सावन पुरवाई शोर करे है,
    भूली-बिसरी वह कहानी।'
    मन्नू लाल यदु ने देशभक्ति से ओत-प्रोत रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—
    'कठिन लड़ाई लड़के पाएँ भारत की आज़ादी,
    मैं धरती के बेटा आहूँ, देश हमर महतारी।' 
    छबिलाल सोनी ने बचपन की स्मृतियों और संघर्षों को शब्द देते हुए अपनी रचना में बीते दिनों की तस्वीर प्रस्तुत की—
    'याद मुझे हैं दिन बचपन के,

    अपना कच्चा वो मकान।
    निर्धनता में बीते दिन थे,
    आधे थे हर अरमान।
    बिना रंग-रोगन की दीवारें,
    कमरों में बिछी चटाई थी।
    गोबर से लिपा-पोता आँगन,
    लगती हमको सुखदायी थी।'
    रूनाली चक्रवर्ती ने भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता और विश्वास को अपनी रचना में अभिव्यक्त किया—
    'भाई एक उम्मीद है, आस है,
    बहनों की हिम्मत और विश्वास है।
    भाई त्याग है, तपस्या है, सेवा है,
    बहनों के लिए जीवन भर का रखवाला है।'

    सुषमा प्रेम पटेल ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा-माधव की भक्ति भावना से ओत-प्रोत रचना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया-
    'अधरों पर स्थित हास्य सजाकर,
    नित लीला सरस रचते हैं।
    गोकुल में वह प्यारे कान्हा,
    माखन के चोर कहाते हैं।
    चंचल चितवन सा आकर्षण,
    देख हृदय नित मुस्काते हैं।
    राधा-माधव जब मिलते हैं,
    सुषमा शुभ दृश्य सजाते हैं।'

    विवेक कुमार रहाटगांवकर ने प्रसिद्ध कवि गोपालदास नीरज की कविता का छत्तीसगढ़ी अनुवाद प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में शहर और समाज की बदलती संवेदनाओं तथा मनुष्य के भीतर छिपे भावों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया गया।
    कार्यक्रम का संचालन ऋषभदेव साहू ने किया। काव्य गोष्ठी में उपस्थित रचनाकारों ने अपनी विविध रचनाओं के माध्यम से साहित्य की शक्ति और मानवीय संवेदनाओं की महत्ता को रेखांकित किया। आयोजन के अंत में छबिलाल सोनी ने अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों और साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
    कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन सकती है, लेकिन मानव समाज की संवेदना, सृजनशीलता, विवेक और आत्मीयता को सुरक्षित रखना उतना ही आवश्यक है। एआई मनुष्य की सहायता का माध्यम बन सकता है, मानव मस्तिष्क और मानवीय संवेदनाओं का विकल्प नहीं।

  • स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने घरों से की बदलाव की शुरुआत

    स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने घरों से की बदलाव की शुरुआत

    रायपुर

    ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रे-वाटर यानी घरेलू गंदे पानी के सुरक्षित प्रबंधन के लिए दुर्ग जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं एवं स्वच्छताग्राहियों द्वारा श्रमदान से 3360 सोख्ता गड्ढों (सोक पिट) का निर्माण किया गया है। अभियान का उद्देश्य घरों से निकलने वाले निस्तारित एवं गंदे पानी को गलियों, रास्तों और सार्वजनिक स्थानों पर खुले में बहने से रोकना है।

     इससे गांवों में गंदगी और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के साथ-साथ पानी के प्राकृतिक निस्तारण एवं भू-जल पुनर्भरण को भी बढ़ावा मिलेगा। दुर्ग जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी  बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रे-वाटर के सुरक्षित प्रबंधन को लेकर जनभागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है। महिलाओं द्वारा स्वयं आगे बढ़कर अपने घरों से इस अभियान की शुरुआत करना ग्रामीण समुदाय के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

    ‘पहले खुद से शुरुआत’ बनी अभियान की पहचान

     इस पहल की खास बात है कि स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘नेतृत्व परिवर्तन और स्वयं से शुरुआत’ की प्रेरणादायक थीम के साथ अपने घरों से ही अभियान की शुरुआत की। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुरू किए गए इस अभियान को अपशिष्ट जल प्रबंधन सप्ताह के रूप में आगे बढ़ाया गया। महिलाओं ने संकल्प लिया कि यदि उनके घरों से निकलने वाला गंदा पानी खुले में बह रहा है, तो वे सबसे पहले अपने घर के आसपास सोख्ता गड्ढे का निर्माण करेंगी। इसके बाद अन्य ग्रामीण परिवारों को भी इसके लिए प्रेरित किया गया।

    श्रमदान से तैयार हो रहे सोख्ता गड्ढे

     अभियान पूरी तरह जनभागीदारी और श्रमदान पर आधारित है। स्वच्छताग्राहियों एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने आपसी सहयोग से घरों के आसपास लगभग 2 से 3 फीट गहरे गड्ढे तैयार किए। इनमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ईंट, पत्थर और कंकड़ आदि सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे घरेलू पानी जमीन में सुरक्षित रूप से सोख सके और भू-जल पुनर्भरण में मदद मिले।

    सेप्टिक टैंक के ओवरफ्लो पानी का भी सुरक्षित प्रबंधन

    अभियान का दायरा केवल सामान्य घरेलू ग्रे-वाटर तक सीमित नहीं है। ऐसे ग्रामीण परिवार, जिनके घरों में सेप्टिक टैंक युक्त शौचालय हैं और टैंक के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी खुले में बह रहा था, उन्हें भी अभियान से जोड़ा गया है। ऐसे स्थानों पर विशेष सोक पिट एवं सोख्ता गड्ढों के माध्यम से पानी के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था की जा रही है।

     सोख्ता गड्ढों का निर्माण तकनीकी रूप से सही तरीके से हो, इसके लिए जनपद पंचायत स्तर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, करारोपण अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी, विकासखण्ड समन्वयक एवं तकनीकी सहायकों द्वारा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया गया। गांवों के संकुल बनाकर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो अभियान की सतत मॉनिटरिंग और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित कर रहे हैं।
     
     जिले में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पूर्व में भी ग्राम पंचायतों में वर्मी एवं नाडेप संरचनाओं की सफाई, कचरे का पृथक्करण तथा सार्वजनिक जलस्रोतों के आसपास स्वच्छता अभियान चलाए गए हैं। ग्रे-वाटर प्रबंधन की यह पहल इन प्रयासों को और मजबूती प्रदान कर रही है। जिला प्रशासन और स्व-सहायता समूहों की इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता एवं जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। वहीं, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं जनभागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की प्रभावी मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।

  • मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले में नियम विरुद्ध उर्वरक एवं कीटनाशी विक्रेताओं पर कार्रवाई

    मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले में नियम विरुद्ध उर्वरक एवं कीटनाशी विक्रेताओं पर कार्रवाई

    रायपुर

    94 उर्वरक विक्रय केंद्रों और 21 पौध संरक्षण औषधि केंद्रों का किया गया निरीक्षण

    खरीफ वर्ष 2026 में जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग की सुनियोजित कार्ययोजना के तहत मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के पंजीकृत कृषकों को उर्वरकों का शत-प्रतिशत वितरण किया गया है। वर्तमान में जिले की समितियों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक भंडारित है। किसानों को उच्च गुणवत्ता के कृषि आदान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा विक्रय केंद्रों की सतत निगरानी एवं निरीक्षण किया जा रहा है।

    94 उर्वरक विक्रय केंद्रों और 21 पौध संरक्षण औषधि केंद्रों का किया गया निरीक्षण

    38 केंद्रों को नोटिस एवं 8 केंद्रों में बिक्री पर प्रतिबंध

    जिले में अब तक 94 सहकारी एवं निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया गया है। अनियमितता पाए जाने पर 30 केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि 5 केंद्रों में उर्वरक की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसी प्रकार 21 पौध संरक्षण औषधि केंद्रों का निरीक्षण किया गया। विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर 8 केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं बिना वैध दस्तावेज के कीटनाशक विक्रय पाए जाने पर 3 केंद्रों में जब्ती एवं बिक्री प्रतिबंध की कार्रवाई की गई है। विक्रय केंद्रों में अनियमितता पाए जाने पर उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत तथा कीटनाशी विक्रेताओं के विरुद्ध कीटनाशी अधिनियम, 1968 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। 

     कृषि रसायनों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उर्वरक एवं कीटनाशकों के नमूने लिए जाकर प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। विभाग द्वारा किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए निरंतर निगरानी की जा रही है।

    नैनो उर्वरकों एवं संतुलित कृषि पद्धति अपनाने की सलाह

     मौसम की अनुकूलता को ध्यान में रखते हुए नैनो उर्वरकों के उपयोग तथा संतुलित एवं समन्वित कृषि पद्धति अपनाने के संबंध में प्रक्षेत्र स्तर के अधिकारियों द्वारा किसानों को आवश्यक जानकारी दी जा रही है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को कृषि रसायनों की खरीदी पंजीकृत संस्थानों एवं अधिकृत विक्रय केंद्रों से करने की सलाह दी जा रही है, ताकि उन्हें उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान प्राप्त हो सकें। 

              विभाग ने किसानों से अपील की है कि उपज बढ़ाने संबंधी भ्रामक प्रचार एवं अवैध तरीके से कृषि आदानों की बिक्री के झांसे में न आएं। डोर-टू-डोर कृषि आदानों की खरीदी से सावधान रहें तथा ऐसी किसी भी गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल विभागीय अधिकारियों को सूचित करें।

  • नवरात्रि एवं गणेश उत्सव के दौरान सुरक्षा, यातायात और नागरिक सुविधाओं के संबंध में दिए आवश्यक निर्देश

    नवरात्रि एवं गणेश उत्सव के दौरान सुरक्षा, यातायात और नागरिक सुविधाओं के संबंध में दिए आवश्यक निर्देश

    जांजगीर-चांपा

    कलेक्टर  जन्मेजय महोबे एवं पुलिस अधीक्षक  विजय कुमार पाण्डेय ने आगामी नवरात्रि, दशहरा एवं गणेश उत्सव के आयोजन की तैयारियों को लेकर नगर पालिका चांपा क्षेत्र के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आगामी दशहरा आयोजन के लिए संभावित स्थल के रूप में भालेराव मैदान एवं एम.एम.आर. कॉलेज परिसर का जायजा लिया। उन्होंने दोनों स्थलों की उपलब्ध सुविधाओं एवं आयोजन की आवश्यकताओं का आकलन कर उपयुक्त स्थल का चयन किया जा सके। निरीक्षण के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष  प्रदीप नामदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. युलैंडन यार्क, एसडीएम चांपा  पवन कोसमा, पार्षदगण, जनप्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

    कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक ने दोनों संभावित स्थलों पर लोगों की सुरक्षा, सुगम आवागमन, पार्किंग एवं आवश्यक नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। कलेक्टर ने आयोजन स्थल की क्षमता एवं उपलब्ध व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए आवश्यक तैयारियों के संबंध में दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने प्रवेश एवं निकासी व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, पार्किंग, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारी सुनिश्चित करने को कहा। पुलिस अधीक्षक ने आगामी पर्वों के दौरान सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने आयोजन स्थलों एवं आसपास के क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही और पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित रखने तथा श्रद्धालुओं एवं आम नागरिकों के सुगम आवागमन के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

      निरीक्षण के दौरान कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक ने रामबांधा तालाब के पास स्थापित गणेश उत्सव पंडाल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने पंडाल के आसपास की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आयोजकों एवं संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। कलेक्टर-एसपी ने पंडाल के आसपास पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और आम नागरिकों के आवागमन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। उन्होंने नवरात्रि एवं आगामी पर्वों के दौरान संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, यातायात, पार्किंग एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सभी तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए।

  • सहारे से आत्मनिर्भरता की ओर कदम, तीन दिव्यांगजनों को मिली ट्राईसिकल

    सहारे से आत्मनिर्भरता की ओर कदम, तीन दिव्यांगजनों को मिली ट्राईसिकल

    रायपुर

    कलेक्टर ने प्रदान की ट्राईसिकल, स्वावलंबन की ओर बढ़े कदम

    संयुक्त जिला कार्यालय बालोद में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में आज संवेदनशील प्रशासन और त्वरित जनसमस्या समाधान की सुखद तस्वीर देखने को मिली। जनदर्शन में पहुंचे तीन दिव्यांगजनों की आवश्यकता को देखते हुए कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने उन्हें मौके पर ही ट्राईसिकल प्रदान की। शासन की इस त्वरित सहायता से अब इन दिव्यांगजनों के लिए आवागमन आसान होने के साथ ही उनके रोजमर्रा के काम और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। सहायता मिलने पर लाभार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे और उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भावुक होकर कहा “धन्यवाद विष्णु भैया।”

     जनदर्शन में दिव्यांगजनों की स्थिति का परीक्षण करने के बाद उनकी दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर सहायता उपलब्ध कराई गई। डौण्डीलोहारा विकासखंड के ग्राम मनकी सा निवासी सुश्री टुमेश्वरी और ग्राम कोबा निवासी श्रीमती शशिकला को 80 प्रतिशत दिव्यांगता होने पर आधुनिक बैटरी चालित ट्राईसिकल प्रदान की गई। वहीं बालोद विकासखंड के ग्राम तमोरा निवासी श्री राजेश कुमार को 50 प्रतिशत दिव्यांगता के आधार पर सामान्य ट्राईसिकल प्रदान की गई।

    बैटरी ट्राईसिकल से आत्मनिर्भर होंगी टुमेश्वरी

    डौण्डीलोहारा विकासखंड के ग्राम पंचायत मनकी सा निवासी टुमेश्वरी ने बताया कि दिव्यांगता के कारण उन्हें आने-जाने में काफी परेशानी होती थी। रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए उन्हें अपने पिता या भाई पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे न केवल उनकी स्वयं की कठिनाइयां बढ़ती थीं, बल्कि परिवार के सदस्यों का समय भी प्रभावित होता था।टुमेश्वरी स्व-सहायता समूह से जुड़कर कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि अब बैटरी चालित ट्राईसिकल मिलने से वह बैंक आने-जाने सहित स्व-सहायता समूह से जुड़े कार्य स्वयं कर सकेंगी। किसी पर निर्भरता कम होने से उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होगी। उन्होंने इस सहायता के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार जताते हुए कहा “धन्यवाद विष्णु भैया।”

    ट्राईसिकल ने शशिकला के कारोबार को दी नई रफ्तार

      ग्राम कोबा निवासी श्रीमती शशिकला गांव में ही किराने की छोटी दुकान संचालित करती हैं। दिव्यांगता के कारण दुकान आने-जाने और आवश्यक सामग्री खरीदने के लिए दूसरे गांव जाने में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई बार उन्हें दूसरों की मदद लेनी पड़ती थी। बैटरी चालित ट्राईसिकल मिलने के बाद अब उनका आवागमन सुगम होगा और वह अपने व्यवसाय से जुड़े काम अधिक आसानी से कर सकेंगी। शशिकला ने कहा कि इतनी कम अवधि में मिली सहायता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है। उन्होंने प्रशासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विष्णु भैया को धन्यवाद कहा।

  • रायगढ़ जिले में कुल 16 हजार 873 ट्रेंच निर्माण का लक्ष्य निर्धारित, 52.55 लाख रुपये स्वीकृत

    रायगढ़ जिले में कुल 16 हजार 873 ट्रेंच निर्माण का लक्ष्य निर्धारित, 52.55 लाख रुपये स्वीकृत

    रायपुऱ

    वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन, मिट्टी के कटाव को रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में रायगढ़ जिले में स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच एवं कंटूर ट्रेंच निर्माण के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। ढलान वाले क्षेत्रों में किए जा रहे ये कार्य वर्षा जल के तेज बहाव को नियंत्रित कर उसे भूमि में समाहित करने में सहायक होंगे, जिससे खेतों की नमी और भूमि की उत्पादकता को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
              
    जिले में कुल 16 हजार 873 ट्रेंच निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो लगभग 38.27 एकड़ क्षेत्र में निर्मित किए जाएंगे। इन कार्यों के लिए 52.55 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस योजना के अंतर्गत रायगढ़, खरसिया और तमनार विकासखंड की विभिन्न ग्राम पंचायतों में कुल 28 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें रायगढ़ विकासखंड में 6, खरसिया में 16 तथा तमनार विकासखंड में 6 कार्य शामिल हैं।

    ’वर्षा जल का संरक्षण, मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण’

    स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच एवं कंटूर ट्रेंच का निर्माण विशेष रूप से ढलान वाले क्षेत्रों में वर्षा जल के बहाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया जाता है। इन संरचनाओं के माध्यम से पानी को रोककर धीरे-धीरे जमीन में समाहित होने का अवसर मिलता है। इससे भू-क्षरण कम होने, मिट्टी में नमी बनाए रखने और भूमि की उत्पादक क्षमता को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

    ’प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ रोजगार का अवसर’

    इन कार्यों को ग्रामीण समुदाय की भागीदारी और श्रम आधारित गतिविधियों के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। इससे एक ओर जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। ढलानों पर बनाई जा रही ये छोटी-छोटी जल संरचनाएं भविष्य में खेतों और गांवों के लिए बड़े बदलाव का आधार बन सकती हैं। “जल और मिट्टी का संरक्षण, समृद्ध गांव की मजबूत नींव” के उद्देश्य के साथ रायगढ़ जिले में किए जा रहे ये कार्य प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।

     

  • जामबहार में बनेगा 3.40 करोड़ की लागत से नया सबस्टेशन

    जामबहार में बनेगा 3.40 करोड़ की लागत से नया सबस्टेशन

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ के उद्योग, वाणिज्य, श्रम व आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने कोरबा जिले के बालको क्षेत्र से लगे ग्राम पंचायत जामबहार में 3.40 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 33/11 के.वी. (05 एम.वी.ए. क्षमता) विद्युत सबस्टेशन का विधिवत भूमिपूजन किया। इस नए सबस्टेशन के निर्माण से क्षेत्र की बिजली आपूर्ति में गुणवत्ता आएगी और आसपास के अन्य सबस्टेशनों पर दबाव कम होगा।

    शहरी व ग्रामीण बस्तियों में सुधरेगी बिजली आपूर्ति

    सबस्टेशन निर्माण के लाभ रेखांकित करते हुए उद्योग मंत्री देवांगन ने बताया कि इससे कोरबा शहरी क्षेत्र के रूमगरा, बेलगिरी बस्ती, मदरसा मोहल्ला, हवाई पट्टी, खान मोहल्ला और जोगियाडेरा जैसी बस्तियों को बेहतर बिजली मिलेगी। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के जामबहार, रोकबहरी, सोनपुरी, परसाबातेल और चुहिया में भी सुचारू विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित होगी। योजना से 4,500 से अधिक उपभोक्ता सीधे लाभान्वित होंगे।

    सौर ऊर्जा और योजनाओं का लाभ उठाने की अपील

    समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा हर घर तक समुचित बिजली पहुंचाना है। उन्होंने ग्रामीणों से 'प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना' और 'बिजली बिल समाधान योजना' का लाभ उठाने की अपील की।

     कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह और जिला पंचायत सदस्य रेणुका राठिया ने मंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण कदम बताया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि रफीक मेमन, निगम पार्षद नरेंद्र देवांगन, सीमा कंवर, जामबहार सरपंच उपन सिंह कंवर तथा बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालन अभियंता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।