Category: छत्तीसगढ़

  • पोटाकेबिन में बच्चों के बीमार पड़ने पर गिरी गाज, अधीक्षिका निलंबित

    पोटाकेबिन में बच्चों के बीमार पड़ने पर गिरी गाज, अधीक्षिका निलंबित

    सुकमा.

    पोलमपल्ली स्थित पोटाकेबिन और आरएमएसए छात्रावास में बच्चों के बीमार पड़ने के मामले में प्रशासन ने अब जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है. बच्चों को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 28 और 29 अगस्त को शिविर लगाकर सभी बच्चों की स्वास्थ्य जांच की.

    मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने भी 29 अगस्त को संस्था का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान संचालन में गंभीर कमियां सामने आने के बाद पोटाकेबिन की अधीक्षिका पदमलता मौर्य को निलंबित कर दिया गया. उनके स्थान पर सहायक शिक्षक वैजयंती चंद्रा को संस्था का प्रभार सौंपा गया है. यह कार्रवाई संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बस्तर की ओर से की गई है. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब छात्रावास की व्यवस्थाओं पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है. खासकर बच्चों के स्वास्थ्य, भोजन, स्वच्छता और आवासीय व्यवस्था को लेकर जिम्मेदारी तय करने पर जोर रहेगा.

    आवासीय संस्थानों में बड़ी संख्या में बच्चे रहते हैं, ऐसे में छोटी सी लापरवाही भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है. यही वजह है कि पोलमपल्ली की घटना के बाद प्रशासन ने स्वास्थ्य परीक्षण के साथ जिम्मेदार अधिकारी पर भी कार्रवाई की है. अब जरूरत है कि आगे ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए व्यवस्था की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए.

  • नई सड़क, नए बाजार: रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर बदलेगा बस्तर की तस्वीर

    नई सड़क, नए बाजार: रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर बदलेगा बस्तर की तस्वीर

    कांकेर.

    रायपुर से विशाखापटनम के बीच बन रहा 465 किलोमीटर लंबा इकोनॉमिक कॉरिडोर बस्तर के लिए सिर्फ तेज आवागमन का रास्ता नहीं, बल्कि कारोबार के नए अवसर लेकर आने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है.

    छह लेन का यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे रायपुर और विशाखापटनम के बीच मौजूदा 597 किलोमीटर की दूरी को करीब 465 किलोमीटर तक सीमित कर देगा. इसके बनने के बाद बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जैसे इलाकों की कनेक्टिविटी सीधे बड़े बाजारों और विशाखापटनम पोर्ट से जुड़ जाएगी. कांकेर-कोंडागांव के बीच 2.83 किलोमीटर लंबी ट्विन टनल इस परियोजना की बड़ी विशेषता है. पहाड़ी और जंगल वाले क्षेत्र में बन रही यह सुरंग प्रदेश की प्रमुख इंजीनियरिंग उपलब्धियों में शामिल होगी. वहीं ओडिशा सीमा के पास एलिवेटेड वियाडक्ट भी बनाया जा रहा है. बेहतर सड़क संपर्क से बस्तर की कृषि और वनोपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी.

    महुआ, इमली, धान और हस्तशिल्प जैसे उत्पादों के परिवहन में समय और लागत कम होने की उम्मीद है. करीब 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस कॉरिडोर के 2027 तक शुरू होने की संभावना है. ऐसे में एक्सप्रेसवे बस्तर के लिए सड़क से ज्यादा आर्थिक विकास की नई लाइफलाइन बन सकता है.

  • महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की मजबूत हुई भूमिका, राष्ट्रीय पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ी हिस्सेदारी

    महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की मजबूत हुई भूमिका, राष्ट्रीय पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ी हिस्सेदारी

    छत्तीसगढ़ ने भारत के महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी भूमिका को किया सुदृढ़

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खनिज विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता पर दिया जोर

    केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने उद्योग की अधिक भागीदारी का किया आह्वान

    छत्तीसगढ़ के पांच खनिज ब्लॉक महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी की 8वीं श्रृंखला में शामिल

    रायपुर 
    खान मंत्रालय ने आज रायपुर, छत्तीसगढ़ में महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी की 8वीं श्रृंखला पर रोड शो का आयोजन किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में तथा कोयला एवं खान मंत्रालय के माननीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे उपस्थित रहे। इस अवसर पर आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू तथा सीएमडीसी के अध्यक्ष सौरभ सिंह के साथ ही वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और अन्य हितधारक भी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के समृद्ध खनिज संसाधनों तथा भारत के खनन एवं औद्योगिक विकास में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने अधिक निवेश, खनिज संसाधनों के त्वरित विकास तथा केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से राज्य की खनिज क्षमता का दोहन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने हितधारकों को राज्य सरकार की ओर से निवेश को सुगम बनाने और सतत खनिज विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने भारत के आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रगति, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इन संसाधनों की खोज और विकास में तेजी लाने तथा उद्योग एवं निवेशकों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खनिज मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना भारत की खनिज सुरक्षा को सुदृढ़ करने और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ के मजबूत खनन एवं औद्योगिक आधार तथा नई खनिज मूल्य श्रृंखलाओं के विकास की राज्य की क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों में निवेश से नए औद्योगिक विकास केंद्रों को बढ़ावा मिल सकता है, सतत अवसंरचना मजबूत हो सकती है और स्थानीय समुदायों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की अवसंरचना, कुशल कार्यबल और संस्थागत सहयोग दीर्घकालिक निवेश के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

    सीएमडीसी के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने निवेशकों से छत्तीसगढ़ की विशाल खनिज क्षमता का पता लगाने का आह्वान किया तथा तेज परिचालन, पारदर्शी खनन प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकी आधारित खनिज निगरानी के प्रति राज्य के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने आदिवासी टिन संग्राहकों को पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाने के लिए टिन पोर्टल तथा टिन-युक्त संसाधनों से कोलंबाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज सहित विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया।

    खान मंत्रालय के सचिव केशव चंद्र ने कहा कि नीतिगत सुधारों, पारदर्शी नीलामी और तेज परिचालन से भारत का महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ हुआ है तथा अब तक प्रस्तुत 88 महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों में से 56 की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 8वीं श्रृंखला में नौ राज्यों में फैले 20 ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें 17 समग्र लाइसेंस और 3 खनन पट्टा ब्लॉक हैं तथा ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व, दुर्लभ धातु, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन, पोटाश, फॉस्फोराइट और ग्लॉकोनाइट जैसे खनिज सम्मिलित हैं, जिनमें से पांच ब्लॉक छत्तीसगढ़ में स्थित हैं।

    खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव संदीप कदम ने अपने संबोधन में भारत के आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने खनन से आगे बढ़कर प्रसंस्करण, परिशोधन और मूल्य संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करने तथा नीलाम किए गए ब्लॉकों के तेजी से संचालन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला और आत्मनिर्भर महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए केंद्र, राज्यों और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग का भी आह्वान किया।

    तकनीकी सत्र की शुरुआत एनएमईडीटी के महानिदेशक पंकज गर्ग की प्रस्तुति से हुई, जो समग्र लाइसेंस धारकों के लिए अन्वेषण व्यय की आंशिक प्रतिपूर्ति की एनएमईडीटी योजना पर आधारित थी। इसके बाद संभावित बोलीदाताओं को 8वीं श्रृंखला के अंतर्गत नीलामी के लिए पेश किए गए खनिज ब्लॉकों और नीलामी व्यवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई, जिसमें एमईसीएल के एचओडी (अन्वेषण) श्रीकांत शर्मा ने खनिज ब्लॉकों और उनकी संभावनाओं, एसबीआईसीएपीएस के सहायक उपाध्यक्ष प्रतिन शर्मा ने खनिज नीलामी प्रक्रिया एवं निविदा दस्तावेज तथा एमएसटीसी के सहायक प्रबंधक पुष्कर हजेला ने ई-नीलामी प्रक्रिया की जानकारी दी। 

    सत्र का समापन संभावित बोलीदाताओं के साथ संवाद, उनके प्रश्नों के समाधान और नीलामी प्रक्रिया एवं संबंधित पहलुओं पर स्पष्टीकरण के साथ हुआ।रोड शो सरकार की खनिज अन्वेषण में तेजी लाने, निवेश एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने और भारत की महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा एक आत्मनिर्भर और खनिज-सुरक्षित भारत के विजन को आगे बढ़ाता है।

    रोड शो के पश्चात खान मंत्रालय के सचिव केशव चंद्र की अध्यक्षता में खनिज ब्लॉक आवंटियों और पसंदीदा बोलीदाताओं के साथ एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य आवंटित ब्लॉकों के शीघ्र परिचालन में तेजी लाना रहा। भारत सरकार के खान मंत्रालय तथा छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों ने ब्लॉकों की प्रगति की समीक्षा की, प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा की और उनके समयबद्ध समाधान के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया। बैठक ने आवंटियों को कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दे उठाने और आवश्यक सहयोग प्राप्त करने का मंच भी उपलब्ध कराया, जिससे तेज परियोजना क्रियान्वयन, घरेलू खनिज उत्पादन में वृद्धि और भारत की खनिज आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने की साझा प्रतिबद्धता और मजबूत हुई।

  • पूर्व CM भूपेश बघेल के करीबी पर ED का शिकंजा, ठिकानों पर दबिश

    पूर्व CM भूपेश बघेल के करीबी पर ED का शिकंजा, ठिकानों पर दबिश

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार सुबह एक बार फिर बड़ी कार्रवाई शुरू की है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व निजी सहायक (PA) के.के. चंद्रवंशी के ठिकानों पर ईडी की टीम ने दबिश दी है।

    दुर्ग। दुर्ग जिले के पुरानी भिलाई इलाके में मंगलवार तड़के प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लंबे समय तक पर्सनल असिस्टेंट (PA) रहे केके चंद्रवंशी के निवास पर ED ने छापेमारी की है।

    जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब दो गाड़ियों में ED के 8 अधिकारी केके चंद्रवंशी के घर पहुंचे। टीम ने घर में जांच शुरू कर दी है। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है।

    केके चंद्रवंशी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल के दौरान लंबे समय तक उनके पर्सनल असिस्टेंट के तौर पर कार्यरत रहे हैं। फिलहाल ED की यह कार्रवाई किस मामले से जुड़ी है और जांच में क्या सामने आया है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ED की टीम द्वारा दस्तावेजों और अन्य संभावित रिकॉर्ड की जांच किए जाने की बात सामने आ रही है। कार्रवाई पूरी होने के बाद ही छापेमारी से जुड़े पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

    टीम में करीब 5 से 6 अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं, जो घर में मौजूद दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई के बाद इलाके में हलचल बढ़ गई। ED अधिकारियों ने घर पहुंचने के बाद जांच शुरू कर दी। फिलहाल अधिकारी दस्तावेजों के साथ-साथ अन्य जरूरी रिकॉर्ड की पड़ताल कर रहे हैं।

    बघेल के पूर्व पीए चंद्राकर:
    केके चंद्रवंशी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निजी सहायक रह चुके हैं। ऐसे में उनके यहां ED की कार्रवाई को राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में अहम माना जा रहा है। हालांकि, शुरुआती जानकारी में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ED की यह कार्रवाई किस मामले से जुड़ी है और जांच के दौरान टीम किन दस्तावेजों या तथ्यों की पड़ताल कर रही है।

    बताया जा रहा है कि ED के अधिकारी कार्रवाई के दौरान आवश्यक दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है। फिलहाल कार्रवाई जारी है और एजेंसी की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।

    छत्तीसगढ़ में बढ़ी ईडी रेड:
    छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों के दौरान आर्थिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसियां कई नेताओं, अधिकारियों और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर कार्रवाई कर चुकी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके करीबियों से जुड़े परिसरों पर भी अलग-अलग मामलों में पहले जांच एजेंसियों की कार्रवाई हो चुकी है।

    केके चंद्रवंशी के घर मंगलवार को हुई इस ताजा कार्रवाई को लेकर अब सबकी नजर ED की आधिकारिक जानकारी पर है। जांच पूरी होने या एजेंसी की ओर से बयान आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि कार्रवाई किस प्रकरण के तहत की गई है और जांच में क्या तथ्य सामने आए हैं। फिलहाल केके चंद्रवंशी के घर ED की जांच जारी है और अधिकारी दस्तावेजों की पड़ताल में जुटे हुए हैं।

    कार्रवाई से जुड़े मुख्य बिंदु:
     * सुबह-सुबह पहुंची टीम: ईडी के अधिकारी दो गाड़ियों में सवार होकर तड़के चंद्रवंशी के आवास पर पहुंचे और पूरे परिसर को सुरक्षा बलों की निगरानी में ले लिया।
     * दस्तावेजों की जांच जारी: जांच एजेंसी घर में मौजूद वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, अचल संपत्तियों और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही है।
     * परिजनों से पूछताछ: छापेमारी के दौरान घर में मौजूद सदस्यों से वित्तीय मामलों और संपत्तियों के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
     * बाहरी आवाजाही पर रोक: कार्रवाई के दौरान सुरक्षा कारणों से घर के अंदर और बाहर लोगों की आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दी गई है।
    जांच एजेंसी की ओर से अभी इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह छापेमारी किस विशेष प्रकरण या वित्तीय अनियमितता से जुड़ी है।

  • विष्णु भैया की योजना बनी सावित्री का सहारा, आर्थिक चिंता से मिली राहत

    विष्णु भैया की योजना बनी सावित्री का सहारा, आर्थिक चिंता से मिली राहत

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना प्रदेश की महिलाओं के लिए आर्थिक संबल और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन रही है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सहयोग करने का आत्मविश्वास दे रही है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम अमोरा निवासी सावित्री यादव के जीवन में भी इस योजना ने सकारात्मक बदलाव लाया है।

    सावित्री यादव के लिए महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर बनी है। योजना के तहत मिलने वाली नियमित राशि से उनकी छोटी-बड़ी जरूरतें पूरी हो रही हैं और आर्थिक चिंता भी कम हुई है। महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त के रूप में 1,000 रुपये की राशि प्राप्त होने पर उनके चेहरे पर खुशी और संतोष साफ दिखाई दिया।

    “विष्णु भैया की यह मदद हमारे जैसे परिवारों के लिए बड़ा सहारा है”

    31वीं किस्त मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए सावित्री यादव ने कहा कि हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके लिए बहुत उपयोगी है। उन्होंने बताया कि इस राशि से वे परिवार की जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग करती हैं और संभव होने पर थोड़ी बचत भी कर लेती हैं। इससे उन्हें जरूरत के समय आर्थिक सहारे के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

    सावित्री यादव ने कहा, “विष्णु भैया की यह मदद हमारे जैसे परिवारों के लिए बड़ा सहारा है। हर महीने मिलने वाली राशि से घर की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलती है। महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त मेरे लिए सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि भरोसा और संबल है। इससे परिवार की आर्थिक चिंता कम हुई है और भविष्य को लेकर विश्वास बढ़ा है।”

    महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता महिलाओं को आर्थिक निर्णयों में अधिक सक्षम बनाने के साथ उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रही है। सावित्री यादव जैसी महिलाओं के लिए योजना की राशि घरेलू जरूरतों में सहयोग का माध्यम बनने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का आधार भी बन रही है।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। महतारी वंदन योजना इसी संकल्प को धरातल पर साकार कर रही है। योजना से जुड़ी महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि नियमित आर्थिक संबल उनके जीवन में स्थायित्व, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की उम्मीद को मजबूत कर रहा है।

  • कृषि में तकनीक का साथ, ICAR-NIBSM ने किसानों को बांटे आधुनिक उपकरण

    कृषि में तकनीक का साथ, ICAR-NIBSM ने किसानों को बांटे आधुनिक उपकरण

     रायपुर

    आईसीएआर-एनआईबीएसएम ने एससीएसपी कार्यक्रम के तहत किसानों को वितरित किए पावर स्प्रेयर एवं सोलर पैनल

    भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर-निब्सम), रायपुर द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) के अंतर्गत किसानों एवं महिला किसानों को 140 बैटरी चालित पावर स्प्रेयर तथा सोलर पैनल के तीन सेट वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देना, किसानों की शारीरिक मेहनत एवं श्रम को कम करना तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम में मुर्रा, बेठिया, देवगांव, अडसेना एवं बेलटुकरी गांवों के कुल 160 किसान एवं महिला किसानों ने भाग लिया।

    किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. पी. के. राय, निदेशक, ने वर्तमान मानसून के दौरान वर्षाजल के संग्रहण एवं संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने किसानों से उपलब्ध जल-संरक्षण एवं जल-संचयन संरचनाओं में वर्षाजल को एकत्रित करने तथा संग्रहित जल का रबी फसलों के उत्पादन में विवेकपूर्ण उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने फसल विविधीकरण को किसानों की आय बढ़ाने, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा कृषि उत्पादन के जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

     डॉ. राय ने कहा कि संस्थान द्वारा एससीएसपी कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न गांवों के किसानों एवं महिला किसानों को निरंतर आवश्यकतानुसार तकनीकी ज्ञान, प्रशिक्षण तथा कृषि संबंधी आवश्यक सामग्री एवं उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल किसानों की क्षमता बढ़ाने, कृषि उत्पादकता में सुधार लाने में सहायक हैं।

    डॉ. पंकज शर्मा, संयुक्त निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक ने किसानों को धान की फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में धान की फसल रोपाई के लगभग 40-50 दिन की अवस्था में है। इस समय धान में तना छेदक (येलो स्टेम बोरर) एवं पत्ती लपेटक (लीफ फोल्डर) कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर जीवाणु झुलसा रोग (बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट) के लक्षण भी पाए गए हैं। उन्होंने किसानों से कीट एवं रोगों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर समय पर आवश्यकतानुसार प्रबंधन उपाय अपनाने तथा अनावश्यक कीटनाशकों के प्रयोग से बचने का आग्रह किया। उन्होंने फेरोमोन ट्रैप एवं ट्राइकोकार्ड को एकीकृत कीट प्रबंधन ( IPM) के महत्वपूर्ण घटकों के रूप में अपनाने तथा रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग केवल आवश्यकता एवं कीट प्रकोप के स्तर के आधार पर करने की सलाह दी।

    कार्यक्रम में शामिल किसानों एवं ग्राम प्रतिनिधियों ने एससीएसपी कार्यक्रम के अंतर्गत तकनीकी मार्गदर्शन, कृषि उपकरण एवं आवश्यक कृषि सामग्री उपलब्ध कराने के लिए संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने पावर स्प्रेयर एवं सोलर पैनल के वितरण को कृषि कार्यों को सुगम बनाने तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में उपयोगी एवं महत्वपूर्ण पहल बताया।

    कार्यक्रम में सरपंच मती कंचन गायकवाड़ एवं  प्रदीप मडरिया सहित संस्थान के वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. के. सी. शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक एवं नोडल अधिकारी द्वारा किया गया।

  • विकास को नई रफ्तार, दर्री जोन में 7 नवनिर्मित सामुदायिक भवनों का लोकार्पण

    विकास को नई रफ्तार, दर्री जोन में 7 नवनिर्मित सामुदायिक भवनों का लोकार्पण

    रायपुर

    उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन और महापौर संजूदेवी राजपूत ने किया जनसेवा में समर्पितउद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन और महापौर संजूदेवी राजपूत ने किया जनसेवा में समर्पित

    नगर पालिक निगम कोरबा के दर्री जोन अंतर्गत 07 नवनिर्मित सामुदायिक भवनों का लोकार्पण आज एक ही दिन पृथक-पृथक वार्डों में किया गया। प्रदेश के उद्योग, वाणिज्य, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य एवं महापौर मती संजू देवी राजपूत की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान इन सभी सामुदायिक भवनों को जनता की सेवा में समर्पित किया गया।

    कुल 90 लाख की लागत से बने हैं 7 भवन

         नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा दर्री जोन में इन भवनों का निर्माण कराया गया है:-

    वार्ड क्र. 55 सलिहाभांठा’ में 10 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन
    वार्ड क्र. 55 नागिनभांठा बस्ती’ में उप स्वास्थ्य केंद्र के समीप पटेल समाज हेतु 10 लाख की लागत से भवन
    वार्ड क्र. 54 जमनीपाली हाउसिंग बोर्ड कालोनी’ में 10 लाख की लागत से भवन
    वार्ड क्र. 54 गोपालपुर’ में माता चौरा के पास 10 लाख की लागत से अहातायुक्त सामुदायिक भवन
    वार्ड क्र. 58 सरदार वल्लभभाई पटेल नगर साडा’ में शिव मंदिर के समीप 15 लाख की लागत से भवन
    वार्ड क्र. 59 दर्रीखार क्र. 01’ में कन्या शाला के समीप 25 लाख की लागत से भवन
    वार्ड क्र. 60 प्रगतिनगर लेबर कालोनी दर्री’ में 10 लाख की लागत से उड़िया समाज के लिए सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया गया।

           इस अवसर पर समाज के लोगों ने सामुदायिक भवनों की सौगात के लिए उद्योग मंत्री और महापौर के प्रति आभार व्यक्त किया।

    ’आमजन को अधिकाधिक सुविधाएं देना हमारा प्रथम लक्ष्य: मंत्री देवांगन’  

          कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन ने कहा कि जनताजनार्दन को अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनकी विकास संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान करना मेरा प्रथम लक्ष्य है। इसी लक्ष्य को सामने रखकर निगम क्षेत्र में लगातार विकास कार्य कराए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय तथा उप मुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन मंत्री  अरुण साव के मार्गदर्शन से विगत ढाई वर्षों के दौरान निगम क्षेत्र में 1100 करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत हो चुके हैं, जिनमें से कई पूर्ण हो चुके हैं, कुछ प्रगति पर हैं और शेष निविदा प्रक्रिया में हैं।

    बिना भेदभाव के सभी 67 वार्डों में विकास कार्य: महापौर

            महापौर मती संजू देवी राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री  अरुण साव तथा उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन से नगर पालिक निगम कोरबा के सभी 67 वार्डों में बिना किसी भेदभाव के व्यापक रूप से विकास कार्य कराए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के संकल्प के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्रदेश में 26 लाख आवासगृहों की स्वीकृति प्रदान की गई है।
     
            लोकार्पण कार्यक्रमों के दौरान सभापति  नूतन सिंह ठाकुर, वरिष्ठ पार्षद  नरेंद्र देवांगन, मेयर इन काउंसिल सदस्य अजय कुमार चंद्रा, सरोज शांडिल्य, फिरतराम साहू, पार्षदगण, एल्डरमेन ईश्वर साहू, मनोज अग्रवाल, मंडल अध्यक्ष मनोज लहरे, नरेंद्र पाटनवार सहित जोन कमिश्नर लीलाधर पटेल और बड़ी संख्या में वार्डवासी उपस्थित थे।

  • संभाग आयुक्त  श्याम धावड़े ने मैदानी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन एवं नियमित मॉनिटरिंग पर दिया जोर

    संभाग आयुक्त श्याम धावड़े ने मैदानी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन एवं नियमित मॉनिटरिंग पर दिया जोर

    रायपुर

    सचिव  भीम सिंह ने योजनाओं के लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति और लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश

    रायपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित रेड क्रॉस सभा कक्ष में आज पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव  भीम सिंह ने रायपुर संभाग में संचालित विकसित भारत-जी राम जी एवं प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में रायपुर संभाग आयुक्त  श्याम धावड़े ने भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

     समीक्षा के दौरान विकसित भारत-जी राम जी अंतर्गत जुलाई एवं अगस्त माह में सृजित मानव दिवस तथा गत वित्तीय वर्ष की तुलना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण अंतर्गत 90 मानव दिवस रोजगार, सिक्योर पोर्टल के माध्यम से कार्यों की स्वीकृति, प्रत्येक ग्राम पंचायत में कार्य स्वीकृति, बालिका शौचालय, मुक्तिधाम , महात्मा गांधी नरेगा के अपूर्ण कार्यों की पूर्णता, एसएनए-स्पर्श के माध्यम से भुगतान, पौधरोपण, वर्षा उपरांत श्रममूलक कार्यों की स्वीकृति एवं मानव दिवस सृजन की कार्ययोजना, NMMS के माध्यम से उपस्थिति, लंबित ई-केवायसी, शून्य प्रविष्टि वाले मस्टर रोल तथा युक्तधारा में प्लान किए गए कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। 

     सचिव  भीम सिंह ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति में तेजी लाई जाए। उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप श्रममूलक कार्य स्वीकृत करने, अधिकाधिक मानव दिवस सृजन करने तथा महात्मा गांधी नरेगा के अपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, विशेष परियोजना एवं पीएम जनमन योजनांतर्गत लक्ष्य के विरूद्ध स्वीकृत एवं पूर्ण आवासों की स्थिति की समीक्षा करते हुए लंबित प्रथम किस्त के प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने तथा आवास निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही आवास सॉफ्ट से अपात्र किए गए हितग्राहियों, जॉब कार्ड, योजनाओं के अभिसरण तथा A, B एवं C कैटेगरी के प्रकरणों के चिन्हांकन एवं निराकरण की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

     सचिव  सिंह ने आर-सेटी एवं आरएमटी के माध्यम से हितग्राहियों के प्रशिक्षण तथा लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। 

     संभाग आयुक्त  श्याम धावड़े ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी योजनाओं की नियमित रूप से मॉनिटरिंग करते हुए मैदानी स्तर पर योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने मानव दिवस सृजन, आवास निर्माण, लंबित प्रकरणों के निराकरण एवं अपूर्ण कार्यों की पूर्णता में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने के साथ ही जिला एवं जनपद स्तर पर सतत समीक्षा करने पर जोर दिया।  उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए। 

     बैठक में रायपुर संभाग के सभी जिलों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, समस्त जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं कार्यपालन अभियंता, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सहित संबंधित अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

  • महतारी वंदन से महिलाओं को मिला आर्थिक संबल, पूनम धावरिया ने मुख्यमंत्री को कहा—धन्यवाद

    महतारी वंदन से महिलाओं को मिला आर्थिक संबल, पूनम धावरिया ने मुख्यमंत्री को कहा—धन्यवाद

    रायपुर

    महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ आर्थिक रूप से अधिक सक्षम महसूस कर रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के सारबहरा निवासी श्रीमती पूनम धावरिया भी इस योजना से लाभान्वित हो रही हैं। उन्हें महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि प्राप्त हो चुकी है।

    राशि प्राप्त होने पर श्रीमती पूनम धावरिया ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें नियमित रूप से प्रत्येक माह आर्थिक सहायता मिल रही है। यह राशि उनके लिए बेहद उपयोगी है और घर-परिवार की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक सहारा प्रदान करती है।

    समय पर मिली राशि से रक्षाबंधन की खुशी हुई दोगुनी

     पूनम धावरिया ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए सितंबर माह की किस्त की राशि अगस्त माह में ही प्रदान की गई है। समय से पहले राशि मिलने से महिलाओं में खुशी का माहौल है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व से पहले राशि मिलना उनके लिए विशेष खुशी की बात है।

    उन्होंने भावुक होकर कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर समय से मिली यह राशि उन्हें भाई की ओर से मिले उपहार जैसी महसूस हुई। इस आर्थिक सहायता से पर्व की तैयारियों और आवश्यक घरेलू खर्चों में उन्हें सहूलियत मिली है।

    महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
     
    पूनम ने कहा कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नियमित रूप से मिलने वाली राशि से महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।

    उन्होंने कहा कि योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग महिलाएं अपनी दैनिक जरूरतों, परिवार से जुड़े खर्चों तथा अन्य आवश्यक कार्यों में कर पा रही हैं। इससे उनमें आर्थिक आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।
     पूनम धावरिया ने महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं के लिए भरोसे और संबल का माध्यम बन रही है। पूनम धावरिया की कहानी इसी बदलाव की एक झलक प्रस्तुत करती है, जहां समय पर मिली सहायता ने न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद की, बल्कि रक्षाबंधन के पर्व की खुशियों को भी बढ़ाया।

  • केंद्रीय राज्य मंत्री  सतीश चंद्र दुबे ने उद्योग की अधिक भागीदारी का किया आह्वान

    केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने उद्योग की अधिक भागीदारी का किया आह्वान

    रायपुर 

    खान मंत्रालय ने आज रायपुर, छत्तीसगढ़ में महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी की 8वीं श्रृंखला पर रोड शो का आयोजन किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में तथा कोयला एवं खान मंत्रालय के माननीय राज्य मंत्री  सतीश चंद्र दुबे उपस्थित रहे। इस अवसर पर आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री  तोखन साहू तथा सीएमडीसी के अध्यक्ष  सौरभ सिंह के साथ ही वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और अन्य हितधारक भी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के समृद्ध खनिज संसाधनों तथा भारत के खनन एवं औद्योगिक विकास में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने अधिक निवेश, खनिज संसाधनों के त्वरित विकास तथा केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से राज्य की खनिज क्षमता का दोहन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने हितधारकों को राज्य सरकार की ओर से निवेश को सुगम बनाने और सतत खनिज विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोयला एवं खान राज्य मंत्री  सतीश चंद्र दुबे ने भारत के आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रगति, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इन संसाधनों की खोज और विकास में तेजी लाने तथा उद्योग एवं निवेशकों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खनिज मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना भारत की खनिज सुरक्षा को सुदृढ़ करने और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री  तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ के मजबूत खनन एवं औद्योगिक आधार तथा नई खनिज मूल्य श्रृंखलाओं के विकास की राज्य की क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों में निवेश से नए औद्योगिक विकास केंद्रों को बढ़ावा मिल सकता है, सतत अवसंरचना मजबूत हो सकती है और स्थानीय समुदायों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की अवसंरचना, कुशल कार्यबल और संस्थागत सहयोग दीर्घकालिक निवेश के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

    सीएमडीसी के अध्यक्ष  सौरभ सिंह ने निवेशकों से छत्तीसगढ़ की विशाल खनिज क्षमता का पता लगाने का आह्वान किया तथा तेज परिचालन, पारदर्शी खनन प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकी आधारित खनिज निगरानी के प्रति राज्य के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने आदिवासी टिन संग्राहकों को पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाने के लिए टिन पोर्टल तथा टिन-युक्त संसाधनों से कोलंबाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज सहित विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया।

    खान मंत्रालय के सचिव  केशव चंद्र ने कहा कि नीतिगत सुधारों, पारदर्शी नीलामी और तेज परिचालन से भारत का महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ हुआ है तथा अब तक प्रस्तुत 88 महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों में से 56 की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 8वीं श्रृंखला में नौ राज्यों में फैले 20 ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें 17 समग्र लाइसेंस और 3 खनन पट्टा ब्लॉक हैं तथा ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व, दुर्लभ धातु, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन, पोटाश, फॉस्फोराइट और ग्लॉकोनाइट जैसे खनिज सम्मिलित हैं, जिनमें से पांच ब्लॉक छत्तीसगढ़ में स्थित हैं।

    खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव  संदीप कदम ने अपने संबोधन में भारत के आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने खनन से आगे बढ़कर प्रसंस्करण, परिशोधन और मूल्य संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करने तथा नीलाम किए गए ब्लॉकों के तेजी से संचालन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला और आत्मनिर्भर महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए केंद्र, राज्यों और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग का भी आह्वान किया।

    तकनीकी सत्र की शुरुआत एनएमईडीटी के महानिदेशक  पंकज गर्ग की प्रस्तुति से हुई, जो समग्र लाइसेंस धारकों के लिए अन्वेषण व्यय की आंशिक प्रतिपूर्ति की एनएमईडीटी योजना पर आधारित थी। इसके बाद संभावित बोलीदाताओं को 8वीं श्रृंखला के अंतर्गत नीलामी के लिए पेश किए गए खनिज ब्लॉकों और नीलामी व्यवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई, जिसमें एमईसीएल के एचओडी (अन्वेषण)  कांत शर्मा ने खनिज ब्लॉकों और उनकी संभावनाओं, एसबीआईसीएपीएस के सहायक उपाध्यक्ष  प्रतिन शर्मा ने खनिज नीलामी प्रक्रिया एवं निविदा दस्तावेज तथा एमएसटीसी के सहायक प्रबंधक  पुष्कर हजेला ने ई-नीलामी प्रक्रिया की जानकारी दी। 

    सत्र का समापन संभावित बोलीदाताओं के साथ संवाद, उनके प्रश्नों के समाधान और नीलामी प्रक्रिया एवं संबंधित पहलुओं पर स्पष्टीकरण के साथ हुआ।रोड शो सरकार की खनिज अन्वेषण में तेजी लाने, निवेश एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने और भारत की महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा एक आत्मनिर्भर और खनिज-सुरक्षित भारत के विजन को आगे बढ़ाता है।

    रोड शो के पश्चात खान मंत्रालय के सचिव  केशव चंद्र की अध्यक्षता में खनिज ब्लॉक आवंटियों और पसंदीदा बोलीदाताओं के साथ एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य आवंटित ब्लॉकों के शीघ्र परिचालन में तेजी लाना रहा। भारत सरकार के खान मंत्रालय तथा छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों ने ब्लॉकों की प्रगति की समीक्षा की, प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा की और उनके समयबद्ध समाधान के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया। बैठक ने आवंटियों को कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दे उठाने और आवश्यक सहयोग प्राप्त करने का मंच भी उपलब्ध कराया, जिससे तेज परियोजना क्रियान्वयन, घरेलू खनिज उत्पादन में वृद्धि और भारत की खनिज आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने की साझा प्रतिबद्धता और मजबूत हुई।