Author: NewseDay

  • मथुरा में छाता चीनी मिल में 3.96 करोड़ लीटर क्षमता का लगेगा एथेनॉल प्लांट

    मथुरा में छाता चीनी मिल में 3.96 करोड़ लीटर क्षमता का लगेगा एथेनॉल प्लांट

    मथुरा में छाता चीनी मिल में 3.96 करोड़ लीटर क्षमता का लगेगा एथेनॉल प्लांट

    200 करोड़ से अधिक की लागत, गन्ने के बाद मक्का-धान से भी होगा उत्पादन, हजारों को मिलेगा रोजगार

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मथुरा की बंद छाता चीनी मिल में एथेनॉल प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने बताया कि 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाला यह एक्सटेंशन प्लांट साल में 11 महीने संचालित होगा।

    उन्होंने बताया कि यह मिल 19 साल पहले बंद हो गई थी। समाजवादी पार्टी के सरकार के दौरान इसको एक रुपए का भुगतान नहीं किया गया। प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 3.96 करोड़ लीटर होगी। गन्ना पेराई का सीजन समाप्त होने के बाद मक्का और धान से भी एथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा।

    छाता चीनी मिल की नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से करीब 40 मिनट की दूरी को भी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां गोदाम और अन्य सुविधाएं विकसित करने की संभावनाएं हैं। परियोजना से क्षेत्र में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

  • योगी कैबिनेट ने दी अभियंताओं के वित्तीय अधिकार बढ़ाने को मंजूरी

    योगी कैबिनेट ने दी अभियंताओं के वित्तीय अधिकार बढ़ाने को मंजूरी

    योगी कैबिनेट ने दी अभियंताओं के वित्तीय अधिकार बढ़ाने को मंजूरी

    निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए 31 साल पुराने वित्तीय अधिकारों में संशोधन

    छोटे-छोटे कामों के लिए उच्च स्तर की मंजूरी का इंतजार नहीं, विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आएगी तेजी

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश के अभियंत्रण विभागों में कार्यों के त्वरित एवं प्रभावी निष्पादन के लिए अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों में वृद्धि किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस फैसले से निर्माण कार्यों को गति देने और छोटे-छोटे कार्यों के लिए उच्च स्तर से अनुमोदन लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिलेगी।

    31 साल पुराने प्रावधानों में होगा संशोधन

    वित्तीय नियम संग्रह खंड-1 में अभियंत्रण विभागों के अभियंताओं को वित्तीय अधिकारों का प्रतिनिधायन किया गया है। इन अधिकारों में समय-समय पर शासनादेशों के माध्यम से संशोधन और वृद्धि होती रही है। वर्तमान में वित्त (लेखा) अनुभाग-2 के शासनादेश के अनुसार वित्तीय अधिकार निर्धारित हैं। यह व्यवस्था पिछले 31 वर्षों से अधिक समय से लागू है। निर्माण सामग्री, श्रम और सेवाओं की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण मौजूदा वित्तीय अधिकारों के तहत कार्यों के निष्पादन में कठिनाइयां आ रही थीं। छोटे-छोटे निर्माण कार्यों के लिए भी उच्च स्तर से अनुमोदन लेना पड़ता था, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती थी।

    लोक निर्माण से ग्रामीण अभियंत्रण तक मिलेगा लाभ

    प्रस्ताव के तहत लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग सहित अन्य अभियंत्रण विभागों के अभियंताओं को प्रदत्त वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन की सीमा में वृद्धि की जाएगी। इससे अभियंताओं को अपने स्तर पर निर्धारित वित्तीय सीमा के भीतर कार्यों को स्वीकृति देने और आगे बढ़ाने में अधिक सुविधा मिलेगी। निर्माण कार्यों के लिए बार-बार उच्च स्तर से अनुमोदन लेने की जरूरत कम होने से विकास परियोजनाओं की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    लागत बढ़ने के बीच जरूरी था बदलाव

    निर्माण सामग्री, श्रम और सेवाओं की लागत में वृद्धि के कारण 1995 में निर्धारित वित्तीय अधिकारों के तहत कार्य कराना कठिन हो रहा था। ऐसे में वित्तीय अधिकारों में संशोधन की जरूरत महसूस की गई। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य निर्माण कार्यों के निष्पादन में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करना और परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने की दिशा में कदम बढ़ाना है। इस फैसले से प्रदेश में सड़क, सिंचाई, ग्रामीण विकास और अन्य निर्माण परियोजनाओं के क्रियान्वयन को गति मिलने की उम्मीद है। वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन की सीमा बढ़ने से विभागीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।

  • घातक तलवार और चाकू लेकर घूम रहे दो आरोपी कुठला पुलिस के हत्थे चढ़े, आर्म्स एक्ट के तहत हुई कार्रवाई, न्यायालय ने दोनों को भेजा जेल

    घातक तलवार और चाकू लेकर घूम रहे दो आरोपी कुठला पुलिस के हत्थे चढ़े, आर्म्स एक्ट के तहत हुई कार्रवाई, न्यायालय ने दोनों को भेजा जेल

    घातक तलवार और चाकू लेकर घूम रहे दो आरोपी कुठला पुलिस के हत्थे चढ़े, आर्म्स एक्ट के तहत हुई कार्रवाई, न्यायालय ने दोनों को भेजा जेल

    कटनी
     आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत कुठला पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाई करते हुए धारदार तलवार और चाकू के साथ दो युवकों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, पुलिस अधीक्षक कटनी अभिनय विश्वकर्मा (भापुसे) के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य एवं उप पुलिस अधीक्षक शिवा पाठक के मार्गदर्शन में कुठला थाना प्रभारी निरीक्षक अखलेश दाहिया के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई।
    पहली कार्रवाई 14 सितंबर की रात पेट्रोलिंग के दौरान पहलवान ढाबा के आगे नहर के पास की गई। पुलिस को यहां एक युवक संदिग्ध अवस्था में मिला। पूछताछ में उसने अपना नाम शिब्बू चौधरी (20), निवासी इंद्रानगर गली नंबर 9, थाना कुठला बताया। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से धारदार लोहे की तलवार बरामद हुई, जिसे पुलिस ने जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, 15 सितंबर को पुलिस को भ्रमण के दौरान इंद्रानगर बायपास यात्री प्रतीक्षालय के पास एक युवक के धारदार चाकू लेकर मौजूद होने की मुखबिर से सूचना मिली। सूचना की तस्दीक करने पहुंची पुलिस को देखकर युवक भागने का प्रयास करने लगा। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मोहित पटेल (22), निवासी इंद्रानगर गली नंबर 4, थाना कुठला बताया। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से धारदार चाकू बरामद हुआ।
    पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध पृथक-पृथक धारा 25 आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया। कार्रवाई पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पूरी कार्रवाई कुठला थाना प्रभारी निरीक्षक अखलेश दाहिया के नेतृत्व में की गई। कार्रवाई में सहायक उप निरीक्षक रवि शुक्ला, प्रधान आरक्षक अजय यादव, राहुल मिश्रा, रामेश्वर सिंह, आलोक तिवारी, आरक्षक दुर्गेश सिंह, विवेक शुक्ला, विजय प्रजापति सहित अन्य पुलिस स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

  • एलडीए पूरा करेगा एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना

    एलडीए पूरा करेगा एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना

    एलडीए पूरा करेगा एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना

    करीब 5,000 होमबायर्स की समस्या सुलझने की उम्मीद, 2,912 करोड़ तक की संभावित देनदारी

    शेष अवस्थापना सुविधाओं का होगा विकास, सरकारी जमीन की भी होगी सुरक्षा

    लखनऊ, 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में लखनऊ स्थित मेसर्स एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना को पूरा किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत हाईटेक टाउनशिप नीति के अंतर्गत दिए गए लाइसेंस के तहत स्वीकृत परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) टेकओवर करेगा। इसके बाद परियोजना को पूर्ण करने का प्रस्ताव राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

    2,912 करोड़ तक की संभावित देनदारी
    प्रारंभिक अनुमान के अनुसार परियोजना की अधिकतम संभावित देनदारी करीब 2,912 करोड़ रुपये है। हालांकि, वास्तविक देनदारी आईआरपी (इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल) प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित होगी, जिसके भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि एलडीए को सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।

    5,000 होमबायर्स की समस्या सुलझने की उम्मीद
    विशेष सचिव आवास राजेश कुमार राय ने बताया कि परियोजना को सरकारी अभिकरण के माध्यम से पूरा किए जाने से करीब 5,000 होमबायर्स की समस्या का समाधान संभव हो सकेगा। रुकी हुई परियोजना में दोबारा विकास कार्य शुरू कराए जा सकेंगे। हाईटेक टाउनशिप की शेष अवस्थापना सुविधाओं और उपयोगिताओं का विकास भी कराया जा सकेगा। इससे परियोजना को पूर्ण कर सुनियोजित विकास सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    सरकारी जमीन की होगी सुरक्षा
    प्रस्ताव के तहत बंधक भूमि और ग्राम समाज की भूमि को किसी तीसरे पक्ष के पक्ष में विनियमित किए जाने के स्थान पर लखनऊ विकास प्राधिकरण के पक्ष में विनियमित किया जाएगा। इससे शासकीय भूमि की रक्षा होगी। साथ ही, भविष्य में शासकीय विभागों की देनदारियों की प्राप्ति की संभावना भी बेहतर हो सकेगी।

    रियल एस्टेट और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
    किसी शासकीय अभिकरण के माध्यम से परियोजना को विकसित किए जाने से होमबायर्स के बीच विश्वास पैदा होगा। परियोजना पूरी होने से रियल एस्टेट क्षेत्र और निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार सृजन में वृद्धि होने की भी उम्मीद है।

  • राजस्थान के मिठड़ी बाइपास पर भीषण हादसा, एक ही परिवार के 3 लोगों समेत 4 की मौत

    राजस्थान के मिठड़ी बाइपास पर भीषण हादसा, एक ही परिवार के 3 लोगों समेत 4 की मौत

    नागौर
     राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में गुरुवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। हादसा नावां क्षेत्र के मिठड़ी बाइपास पर सुबह करीब 5 बजे हुआ। यहां मुरड़ से भरे डंपर और कार में आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। हादसा इतना जबरदस्त थी कि कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और उसमें सवार चारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में पति-पत्नी और उनकी बेटी समेत कार चालक शामिल है।

    हादसे की सूचना मिलते ही नावां पुलिस मौके पर पहुंची। कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण शव अंदर फंस गए थे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी शवों को डीडवाना-कुचामन जिले के नावां उपजिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। हादसे के बाद सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। पुलिस ने क्षतिग्रस्त कार और डंपर को हटवाकर यातायात सुचारू करवाया।

    पति-पत्नी और बेटी की मौत
    पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान लक्ष्मण सिंह (46), उनकी पत्नी तुलसी (45), बेटी शीतल (22) और कार चालक रामा किशन (35) के रूप में हुई है। तीनों मृतक एक ही परिवार के थे। परिवार डीडवाना-कुचामन जिले के मिठड़ी के पास पालड़ी गांव में किराए के मकान में रह रहा था। बताया गया कि कार सवार जयपुर की ओर से आए थे और नावां होते हुए मिठड़ी गांव की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान मिठड़ी बाइपास पर सामने से आ रहे मुरड़ से भरे डंपर से कार की भिड़ंत हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। फिर कुछ ही देर में चारों की मौत हो गई।

    एएनएम के पद पर कार्यरत थी महिला
    पुलिस ने सभी शवों को नावां के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। साथ ही परिजनों को सूचना भिजवा दी है। परिजनों के आने के बाद पोस्टमार्टम होगा। इसके बाद शवों परिजनों को सौंपे जाएंगे। मृतका तुलसी स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के पद पर कार्यरत थी। वह कासेड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र में अपनी सेवाएं दे रही थी। हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

    डंपर जब्त, हादसे की जांच शुरू
    नावां थानाधिकारी सुरेश चौधरी ने बताया कि हादसे के बाद डंपर को जब्त कर पुलिस थाने भिजवा दिया गया है। पुलिस ने क्षतिग्रस्त कार को भी सड़क से हटवाया और यातायात बहाल करवाया। हादसे में शामिल डंपर में मुरड़ भरी हुई थी। क्षेत्र में रात के समय मुरड़ और बजरी से भरे भारी वाहनों के संचालन को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। फिलहाल, पुलिस हादसे के कारणों की जांच में जुटी हुई है।

     

  • यूपी के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को नया विस्तार, 14,429 स्कूल बनेंगे स्मार्ट स्कूल

    यूपी के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को नया विस्तार, 14,429 स्कूल बनेंगे स्मार्ट स्कूल

    यूपी के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को नया विस्तार, 14,429 स्कूल बनेंगे स्मार्ट स्कूल

    श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड करेगी स्मार्ट क्लास की स्थापना, 300 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत, चरणबद्ध तरीके से होगा विद्यालयों का विकास

    वर्तमान में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की मिल रही सुविधा

    2 लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को दिए गए टैबलेट, बच्चों को आधुनिक और बेहतर डिजिटल शिक्षा उपलब्ध कराने पर योगी सरकार का जोर

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को और मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए कैबिनेट बैठक में अहम निर्णय लिया है। प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में विकसित करने के लिए श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया गया है। कैबिनेट ने 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 14,429 प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की स्थापना चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।

    प्रदेश सरकार पहले से ही बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर लगातार काम कर रही है। वर्तमान में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही 2 लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को टैबलेट दिए जा चुके हैं। सरकार का प्रयास है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए सरकारी स्कूलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा के बेहतर अवसर मिलें।

    उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत योगी सरकार ने वर्ष 2021 में की थी और इनका विधिवत संचालन शैक्षिक सत्र 2022-23 से शुरू हुआ। स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को विषयों को समझने में डिजिटल माध्यमों का लाभ मिल रहा है। अब प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के निर्णय से इस व्यवस्था का और विस्तार होगा।

    300 करोड़ रुपये से होगा स्मार्ट स्कूलों का विकास

    कैबिनेट निर्णय के अनुसार बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 14,429 प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की स्थापना की जाएगी। स्मार्ट क्लास की स्थापना का कार्य नियमानुसार प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए प्रति विद्यालय 2,07,910 रुपये (सेनेटेज चार्जेज एवं जीएसटी सहित) की प्रस्तावित दर निर्धारित की गई है।

    यदि निविदा प्रक्रिया में प्रति विद्यालय इससे कम दर प्राप्त होती है, तो स्वीकृत कुल 300 करोड़ रुपये की धनराशि के भीतर अधिक संख्या में प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

    उच्च नामांकन वाले विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ेंगी डिजिटल सुविधाएं

    प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या और उच्च नामांकन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब की स्थापना की जाएगी। भारत सरकार की समग्र शिक्षा योजनान्तर्गत परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों, कक्षा 6 से 8, में डिजिटल इनिशिएटिव प्रोग्राम के तहत उच्च नामांकन वाले विद्यालयों में भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब स्थापित किए जाने हैं।

    परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने से बच्चों को पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था के साथ आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा। स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने में मदद मिलेगी। डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी बच्चों को सीखने के लिए अतिरिक्त डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराएगी।

    योगी सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के बच्चों को बेहतर, आधुनिक और तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। सरकारी स्कूलों में डिजिटल संसाधनों का लगातार विस्तार इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे बदलती तकनीक के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ सकें।

  • सिद्धार्थनगर और हरदोई जिले में बनेंगे तीन नए बस स्टेशन, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

    सिद्धार्थनगर और हरदोई जिले में बनेंगे तीन नए बस स्टेशन, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

    सिद्धार्थनगर और हरदोई जिले में बनेंगे तीन नए बस स्टेशन, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

    शोहरतगढ़, बढ़नी और सवायजपुर में बनेंगे बस अड्डे, राजस्व विभाग से परिवहन विभाग को मिलेगी निशुल्क भूमि

    योगी सरकार ने बढ़ाई परिवहन सुविधाओं की राह, बढ़ेंगे रोजगार और व्यापार के भी अवसर

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के तीन स्थानों पर बस स्टेशनों के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। कैबिनेट ने सिद्धार्थनगर विधानसभा क्षेत्र के शोहरतगढ़, बढ़नी और हरदोई जिले की तहसील सवायजपुर में बस स्टेशन के निर्माण के लिए राजस्व विभाग की भूमि को परिवहन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरण और नामांतरण किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

    परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि प्रस्ताव के अनुसार सिद्धार्थनगर के विधानसभा क्षेत्र शोहरतगढ़ के कस्बा शोहरतगढ, कस्बा बढ़नी और हरदोई की तहसील सवायजपुर में बस स्टेशन का निर्माण कराया जाना है। इन बस स्टेशनों के निर्माण के लिए राजस्व विभाग की चिह्नित भूमि परिवहन विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।

    पर्यटन को भी मिलेगा प्रोत्साहन
    दयाशंकर सिंह ने कहा कि बेहतर परिवहन सुविधा से सामाजिक विकास, जीवन स्तर में सुधार और पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इस बुनियादी ढांचे के तहत सड़क नेटवर्क बेहतर होगा और यातायात संबंधी समस्याओं में कमी आएगी। 

    स्थानीय लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर
    इन बस स्टेशनों के बनने से शहर के आस-पास के लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही बस स्टेशन परिसर में यात्रियों को सुविधाओं के साथ सुगम परिवहन सेवा उपलब्ध होगी। परियोजना से क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने, व्यापार एवं रोजगार के अवसर बढ़ने व स्थानीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ होने की बात कही गई।

  • नए शहरों के विकास के लिए लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली को मिलेंगे 380 करोड़

    नए शहरों के विकास के लिए लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली को मिलेंगे 380 करोड़

    नए शहरों के विकास के लिए लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली को मिलेंगे 380 करोड़

    मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत तीन विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं को पहली किस्त जारी करने की मंजूरी

    भूमि अर्जन के लिए राज्य सरकार देगी 50 प्रतिशत तक सीड कैपिटल, अधिकतम 20 वर्ष की अवधि का प्रावधान

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में नए शहरों के समग्र विकास के लिए 3,500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में सुनियोजित शहरी विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए कुल 380 करोड़ रुपये की पहली किस्त की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए धनराशि अवमुक्त किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस फैसले से नए शहरों के विकास, भूमि अर्जन और आवासीय सुविधाओं के विस्तार की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।

    सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देने पर जोर
    विशेष सचिव आवास राजेश कुमार राय ने इस विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में बढ़ती शहरी आबादी और आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार नगरीय क्षेत्रों के सुनियोजित एवं सुव्यवस्थित विकास पर जोर दे रही है। इसी उद्देश्य से शासनादेश दिनांक 6 अप्रैल 2023 के जरिये मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना लागू की गई थी। योजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों का व्यवस्थित विस्तार करने के साथ आम जनसंख्या को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके तहत नए शहरों के विकास के लिए आवश्यक भूमि अर्जन और संबंधित अवस्थापना सुविधाओं के विकास को प्रोत्साहित किया जाता है। इस फैसले से लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली में प्रस्तावित नए शहरों की परियोजनाओं को वित्तीय सहयोग मिलेगा। इससे शहरी विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और भविष्य की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए आधार तैयार होगा।

    भूमि अर्जन के लिए 50 प्रतिशत तक सीड कैपिटल
    मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत भूमि अर्जन में आने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में दिए जाने का प्रावधान है। यह धनराशि अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य विकास प्राधिकरणों को नए शहरों के लिए आवश्यक भूमि अर्जित करने में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। भूमि अर्जन के बाद संबंधित परियोजनाओं के समग्र एवं समुचित विकास को आगे बढ़ाया जा सकेगा। राज्य सरकार की ओर से सीड कैपिटल उपलब्ध होने से विकास प्राधिकरणों पर भूमि अर्जन का तत्काल वित्तीय दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इससे नए शहरों की परियोजनाओं को गति देने का रास्ता सुगम होगा।

    लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली की परियोजनाओं को 655.76 करोड़ तक की सहायता
    योजना के अंतर्गत लखनऊ, उन्नाव एवं रायबरेली विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए सीड कैपिटल की अधिकतम धनराशि 655.76 करोड़ रुपये अनुमन्य की गई है। इसी के सापेक्ष पहली किस्त के रूप में कुल 380 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस धनराशि को अवमुक्त किए जाने से तीनों विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं के लिए भूमि अर्जन और नए शहरों के विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3,500 करोड़ का प्रावधान
    प्रदेश में नए शहरों के समग्र एवं समुचित विकास के लिए वित्ती
    य वर्ष 2026-27 में 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह बजटीय प्रावधान नए शहरों के विकास से संबंधित कार्यों को वित्तीय आधार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से प्रदेश में शहरी विस्तार, भूमि अर्जन और आवासीय सुविधाओं के विकास से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की क्षमता मजबूत होगी। नए शहरों के निर्माण के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।

    आम जनता को मिलेंगी बेहतर आवासीय सुविधाएं
    मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना का प्रमुख उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास के साथ आम जनसंख्या को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत भूमि अर्जन और नए शहरों के समग्र विकास को प्रोत्साहन दिया जाता है। लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली की परियोजनाओं के लिए 380 करोड़ रुपये की पहली किस्त की मंजूरी से इन क्षेत्रों में नए शहरों के विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे भविष्य में आवासीय सुविधाओं और शहरी अवस्थापना के विस्तार के लिए आधार तैयार होगा।

  • 11 दिसंबर को शनि होंगे मार्गी, बनेगा धन लक्ष्मी राजयोग; इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

    11 दिसंबर को शनि होंगे मार्गी, बनेगा धन लक्ष्मी राजयोग; इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

    11 दिसंबर को शनि देव अपनी वक्री चाल समाप्त करके मार्गी होने जा रहे हैं. शनि की सीधी चाल से 'धन लक्ष्मी राजयोग' का अत्यंत दुर्लभ और शुभ निर्माण हो रहा है. ज्योतिष के अनुसार, इस राजयोग के प्रभाव से कई राशियों के जीवन से आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और काम में आ रही बाधाएं हमेशा के लिए समाप्त होंगी.

    क्या होता है शनि का मार्गी होना?
    जब कोई ग्रह पीछे की ओर चलता हुआ प्रतीत होता है, तो उसे 'वक्री' कहा जाता है. इसके विपरीत, जब वह वक्री अवस्था समाप्त करके वापस अपनी सामान्य और सीधी दिशा में चलने लगता है, तो ज्योतिष की भाषा में उसे 'मार्गी' होना कहते हैं. आइए जानते हैं वे कौन सी भाग्यशाली राशियां हैं जिन्हें शनि के मार्गी होने से भरपूर धन-दौलत और सफलता मिलने वाली है.

    वृषभ राशि (Taurus)
    वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि का मार्गी होना भाग्य के दरवाजे खोलने जैसा रहेगा.

    धन लाभ: लंबे समय से अटका हुआ पैसा अचानक वापस मिल सकता है. आय के नए स्रोत बनेंगे.

    करियर: नौकरीपेशा लोगों को मनचाही जगह ट्रांसफर या पदोन्नति (प्रमोशन) मिल सकती है.

    व्यापार: बिजनेस में किया गया पुराना निवेश अब भारी मुनाफा देना शुरू करेगा.

    मिथुन राशि (Gemini)
    मिथुन राशि के लोगों के लिए शनि देव की सीधी चाल जीवन में स्थिरता और तरक्की लेकर आएगी.

    आर्थिक मजबूती: धन लक्ष्मी राजयोग के प्रभाव से आपकी आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत होगी. बैंक बैलेंस में जबरदस्त इजाफा देखने को मिलेगा.

    नौकरी में बदलाव: यदि आप नौकरी बदलने का विचार कर रहे थे, तो बड़ी कंपनियों से अच्छे ऑफर आ सकते हैं.

    मान-सम्मान: समाज और परिवार में आपका कद और प्रतिष्ठा बढ़ेगी.

    तुला राशि (Libra)
    तुला राशि शनि देव की उच्च राशि मानी जाती है. ऐसे में शनि का मार्गी होना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

    प्रॉपर्टी और वाहन का सुख: नया घर, जमीन या वाहन खरीदने का सपना पूरा हो सकता है.

    कर्जों से मुक्ति: यदि आप लंबे समय से कर्ज या उधारी से परेशान थे, तो उससे छुटकारा पाने के रास्ते खुलेंगे.

    पारिवारिक सुख: घर में चल रहे आपसी मतभेद खत्म होंगे और खुशहाली का माहौल रहेगा.

    कुंभ राशि (Aquarius)
    कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं. अपनी ही राशि में शनि का मार्गी होना आपके लिए 'धन लक्ष्मी राजयोग' का सबसे बड़ा लाभ लेकर आएगा.

    करियर में बड़ी सफलता: कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का पूरा फल मिलेगा. बॉस और उच्च अधिकारियों का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा.

    व्यापारिक विस्तार: जो लोग नया काम शुरू करना चाहते हैं या बिजनेस बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए यह समय सबसे उत्तम रहेगा.

    मानसिक तनाव से राहत: पुरानी बीमारियों और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी, आत्मविश्वास में वृद्धि होगी.

    शनि देव की कृपा बनाए रखने के लिए उपाय
    – शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
    – जरूरतमंदों और गरीबों को काले तिल, उड़द की दाल या काले वस्त्रों का दान करें.
    – नियमित रूप से हनुमान चालीसा या ऊं शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें.

  • स्वचालित परीक्षण स्टेशन के लिए नवीन राज्य नीति-2026 को मंजूरी

    स्वचालित परीक्षण स्टेशन के लिए नवीन राज्य नीति-2026 को मंजूरी

    स्वचालित परीक्षण स्टेशन के लिए नवीन राज्य नीति-2026 को मंजूरी

    हर जिले में खुल सकेंगे तीन स्वचालित परीक्षण केंद्र, मशीनें करेंगी वाहनों की फिटनेस जांच

    एटीएस के लिए जमीन और नेटवर्थ की शर्तों में बड़ी राहत, योगी सरकार ने निवेश का रास्ता किया आसान

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश की सड़कों पर चलने वाले वाहनों की सेहत (फिटनेस) को बेहतर करने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के भीतर 'स्वचालित परीक्षण स्टेशन' (ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन-एटीएस) स्थापित करने की मंजूरी दे दी गई है। अब गाड़ियों की जांच मशीनों से की जाएगी, जिससे सटीक रिपोर्ट मिलेगी। इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के लिए सरकार ने 2 अगस्त 2023 के पुराने सरकारी आदेश को खत्म कर दिया गया है और उसकी जगह एक नई नीति 'राज्य नीति-2026' को पास किया है।

    परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में तीन एटीएस सेंटर खोले जा सकते हैं। हर सेंटर पर 24 हजार गाड़ियों तक जांच की जाएगी। वहीं पूर्व में सेंटर के लिए 2.5 एकड़ जमीन की शर्तों में भी छूट दी गई है, अब यह 1 एकड़ कर दिया गया है। वहीं एटीएस सेंटर खोलने के लिए पहले 6 करोड़ रुपये की नेटवर्थ की अनिवार्यता थी, जिसे अब हटा दिया गया है। इसके अलावा इन सेंटरों को सुचारु रूप से संचालित होने के लिए 6 महीने तक कार्रवाई में भी छूट मिलेगी।

    सरकार पर कोई अतिरिक्त भार नहीं
    दरअसल, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की 23 सितंबर 2021, 31 अक्टूबर 2022, 14 मार्च 2024 और 8 मई 2024 की अधिसूचनाओं के माध्यम से केंद्रीय मोटर यान नियमावली 1989 में अध्याय-11 के तहत स्वचालित परीक्षण स्टेशन (एटीएस) का विनियमन एवं नियंत्रण जोड़ा गया है। इन्हीं नवीनतम दिशा-निर्देशों और परिपत्रों को पूर्व में जारी राज्य नीति (2 अगस्त 2023) में समाहित करते हुए नई संशोधित राज्य नीति का ड्राफ्ट तैयार कर मंत्रिपरिषद के सामने रखा गया था। योगी कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्ताव स्वीकृत होने से उत्तर प्रदेश राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त व्यय भार यानी वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। प्रस्तावित राज्य नीति अधिसूचित होने की तिथि से ही तत्काल प्रभावी हो जाएगी।

    हर जनपद में एटीएस की स्थापना संभव
    नई नीति के प्रभावी होने के बाद प्रदेश के प्रत्येक जनपद में स्वचालित परीक्षण स्टेशन की जल्द स्थापना संभव होगी। इससे राज्य में निजी निवेश बढ़ेगा। यानी एटीएस की स्थापना के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा मिलने का रास्ता खुलेगा।

    रोजगार के नए अवसर मिलेंगे
    एटीएस के संचालन के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस तरह स्वचालित परीक्षण स्टेशन की स्थापना से रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। वहीं नई व्यवस्था में वाहनों का फिटनेस परीक्षण बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित मशीनों के माध्यम से पूरी तरह पारदर्शी ढंग से होगा। इसके साथ ही सड़कों पर केवल पूरी तरह से फिट वाहनों का संचालन सुनिश्चित होने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।