Author: NewseDay

  • MP Weather Update: उज्जैन-जबलपुर में भी रहेगा मिला-जुला मौसम, रात में ठंडक और दिन में गर्मी करेगी परेशान

    MP Weather Update: उज्जैन-जबलपुर में भी रहेगा मिला-जुला मौसम, रात में ठंडक और दिन में गर्मी करेगी परेशान

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में 15 और 16 अक्टूबर को आंधी, गरज-चमक और बारिश की संभावना है। ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के 9 जिलों में असर देखने को मिलेगा। इससे पहले 13 और 14 अक्टूबर को मौसम साफ रहेगा।मौसम केंद्र (IMD) के मुताबिक- ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश का अनुमान है। भोपाल और इंदौर में रात में ठंडक बनी रहेगी, जबकि उज्जैन, जबलपुर समेत अन्य शहरों में भी ऐसा ही मौसम रहेगा।

    मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) का असर खत्म हो गया, लेकिन अब नया सिस्टम एक्टिव हो रहा है। उत्तरी हिस्से में एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) और नए चक्रवात की वजह से प्रदेश में असर देखने को मिलेगा।

    मानसून लौट चुका, बारिश जारी
    प्रदेश से 3 अक्टूबर को ही मानसून लौट चुका है, लेकिन सिस्टम एक्टिव होने से बारिश का दौर फिर से शुरू हुआ। पिछले एक सप्ताह से पूर्वी हिस्से के जिलों में आंधी-बारिश का असर देखा गया। हालांकि, रविवार और सोमवार को कहीं भी आंधी-बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है।

    अक्टूबर की शुरुआत में ही मौसम साफ हो गया और धूप खिल गई। वहीं, रात में ठंडक है। वहीं, कई जिलों में बारिश भी हो रही है। इस बार प्रदेश में 100 दिन तक दक्षिण-पश्चिम मानसून एक्टिव रहा है।

    इस साल सामान्य से कम हुई बारिश
    दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी, 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है।

    वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है, लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है।

    इन 25 जिलों में कोटा फुल
    भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर। बाकी 30 जिलों में कम बारिश हुई।

    इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

  • यूपी में इंसानियत की मिसाल बने राहवीर, सड़क हादसों में मदद करने वाले 27 लोगों को मिलेगा सम्मान

    यूपी में इंसानियत की मिसाल बने राहवीर, सड़क हादसों में मदद करने वाले 27 लोगों को मिलेगा सम्मान

    सड़क हादसे में घायलों की मदद करने वालों को मिलेगा सम्मान, यूपी में 27 राहवीरों को पुरस्कृत करने की तैयारी

    केंद्र से मिली धनराशि, सड़क हादसे में घायलों की जान बचाने वालों को 25 हजार रुपये का पुरस्कार

    गुड सेमेरिटन योजना का नया स्वरूप है राहवीर योजना, 16वें वित्तीय चक्र में भी जारी रहेगी पहल

    योगी सरकार का प्रदेश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर है खास जोर 

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों की मदद कर उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए राहवीर योजना के तहत पुरस्कार दिए जाएंगे। केंद्र सरकार ने इस योजना के अंतर्गत राहवीरों को पुरस्कृत करने के लिए यूपी परिवहन विभाग को 10 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार ने 21 सितंबर 2026 को जारी पत्र के माध्यम से इसकी जानकारी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने और जरूरत के समय घायलों की मदद करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

    गुड सेमेरिटन से राहवीर योजना तक का सफर
    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 3 अक्टूबर 2021 को गुड सेमेरिटन को पुरस्कृत करने की योजना शुरू की थी। इसके तहत पहले वित्तीय चक्र में 36 गुड सेमेरिटन को पांच-पांच हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई थी। इसके बाद 21 अप्रैल 2025 को मंत्रालय ने गुड सेमेरिटन योजना को नए नाम 'राहवीर योजना' के रूप में जारी किया। इसमें पुरस्कार राशि बढ़ाकर प्रति राहवीर 25 हजार रुपये कर दी गई। मंत्रालय ने योजना को 16वें वित्तीय चक्र में जारी रखने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में 21 सितंबर 2026 के पत्र के जरिए उत्तर प्रदेश को पुरस्कार वितरण के लिए 10 लाख रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।

    उत्तर प्रदेश में 27 राहवीरों को पुरस्कार देने की तैयारी
    परिवहन विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 27 राहवीरों को 25-25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि देने का प्रस्ताव है। इसके लिए जिला सड़क सुरक्षा समिति की अनुशंसा के आधार पर प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। सितंबर 2026 में इन राहवीरों को पुरस्कृत करने के लिए केंद्र सरकार से धनराशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। अब मंत्रालय की ओर से 10 लाख रुपये उपलब्ध कराए जाने से पुरस्कार वितरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वालों को मिलेगा प्रोत्साहन
    राहवीर योजना का उद्देश्य सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाने और उसकी जान बचाने में मदद करने वाले नागरिकों को सम्मानित करना है। दुर्घटना के बाद शुरुआती समय में चिकित्सा सहायता मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में बिना किसी स्वार्थ के घायलों की मदद करने वाले लोगों को आर्थिक पुरस्कार देकर प्रोत्साहित करना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है। योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित को गोल्डन आवर यानी दुर्घटना के बाद के महत्वपूर्ण शुरुआती एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचाने और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में योगदान देने वाले पात्र नागरिकों को पुरस्कृत किया जाता है। इससे लोगों को सड़क हादसों के समय घायलों की मदद के लिए आगे आने की प्रेरणा मिल सकती है।

    पुरस्कार राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था
    राहवीरों को पुरस्कार राशि उपलब्ध कराने के लिए परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश के भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर सीएनए खाते में 10 लाख रुपये जारी किए गए हैं। इस व्यवस्था के माध्यम से स्वीकृत लाभार्थियों को पुरस्कार राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

  • शासन की पहल से परिवार को मिली आर्थिक राहत, रजिस्ट्री में बचाए ₹46,846 बहनों को किए भेंट

    शासन की पहल से परिवार को मिली आर्थिक राहत, रजिस्ट्री में बचाए ₹46,846 बहनों को किए भेंट

    सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी

    पारिवारिक हकत्याग की रजिस्ट्री में अभिलाष को मिली 46,846 रुपये की राहत, बचत की पूरी राशि बहनों को दी उपहार में

    पंजीयन शुल्क मात्र 500 रुपये होने से कम हुआ आर्थिक बोझ, परिवार की खुशियों का माध्यम बनी शासन की पहल

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओपी चौधरी के नेतृत्व में पंजीयन सेवाओं में सुधार से आम नागरिकों को मिल रही सहूलियत

    रायपुर, 
     छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और किफायती बनाने के लिए किए गए सुधार आम नागरिकों को आर्थिक राहत देने के साथ परिवारों की खुशियों का भी माध्यम बन रहे हैं। बलौदाबाजार जिले के अभिलाष की कहानी इसकी एक मिसाल है। पारिवारिक हकत्याग की रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क मात्र 500 रुपये निर्धारित होने से उन्हें 46 हजार 846 रुपये की बचत हुई। इस आर्थिक राहत से मिली खुशी को उन्होंने अनूठे अंदाज में अपनी बहनों के साथ साझा किया और बचत की पूरी राशि उन्हें उपहार स्वरूप दे दी।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा नागरिक सुविधाओं के विस्तार और प्रक्रियाओं के सरलीकरण के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। पारिवारिक हकत्याग के दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क मात्र 500 रुपये निर्धारित करना इन्हीं जनहितैषी सुधारों में शामिल है। इन सुधारों का लाभ हितग्राहियों तक किस प्रकार पहुंच रहा है, यह जानने के लिए विभाग द्वारा 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत नागरिकों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं।

    रजिस्ट्री में हुई बचत से बहनों के चेहरे पर बिखरी मुस्कान

    सेवा संकल्प अभियान के तहत पंजीयन विभाग से संवाद के दौरान अभिलाष ने बताया कि पारिवारिक हकत्याग से संबंधित दस्तावेज का पंजीयन कराने पर उन्हें शासन द्वारा निर्धारित रियायती शुल्क का लाभ मिला। पहले जहां इस प्रक्रिया में अधिक राशि खर्च होती, वहीं अब मात्र 500 रुपये पंजीयन शुल्क लगने से उनके 46,846 रुपये बच गए। उन्होंने इस बचत को केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरी राशि अपनी बहनों को उपहार स्वरूप देकर परिवार की खुशियों को और बढ़ा दिया।

    अभिलाष के लिए शासन की यह पहल दोहरी खुशी लेकर आई। एक ओर संपत्ति संबंधी आवश्यक दस्तावेज का पंजीयन कम खर्च में पूरा हुआ, वहीं दूसरी ओर बचत की राशि परिवार के सदस्यों के काम आई। उन्होंने पंजीयन प्रक्रिया में मिली आर्थिक राहत और सुविधा के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।

    पारिवारिक संपत्ति के दस्तावेजों का पंजीयन हुआ किफायती

    राज्य सरकार द्वारा पारिवारिक हकत्याग से संबंधित पात्र दस्तावेजों के लिए पंजीयन शुल्क मात्र 500 रुपये निर्धारित किए जाने से नागरिकों को बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति संबंधी अधिकारों के व्यवस्थापन में होने वाला खर्च कम हुआ है। विशेष रूप से उन परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है, जिन्हें पहले पंजीयन शुल्क के रूप में अधिक राशि खर्च करनी पड़ती थी।

    बलौदाबाजार के अभिलाष का अनुभव दर्शाता है कि शासन के नीतिगत सुधार किस प्रकार आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। रजिस्ट्री में बचाए गए 46,846 रुपये जब बहनों को उपहार के रूप में मिले, तो पंजीयन शुल्क में मिली राहत पारिवारिक स्नेह और खुशियों की एक यादगार कहानी बन गई।

  • झारखंड के बबईदा गांव में दो बहनों की हत्या से सनसनी, पूजा-पाठ के बाद वारदात; पुलिस जांच में जुटी

    झारखंड के बबईदा गांव में दो बहनों की हत्या से सनसनी, पूजा-पाठ के बाद वारदात; पुलिस जांच में जुटी

    धालभूमगढ़
     धालभूमगढ़ प्रखंड की रावताड़ा पंचायत स्थित बबईदा गांव में सोमवार को दो सगी बहनों की हत्या से सनसनी फैल गई। दोनों की हत्या का आरोप उनके भाई स्वरूप टुडू पर है। बताया जा रहा है कि अंधविश्वास और तांत्रिक क्रियाओं के संदेह में उसने इस घटना को अंजाम दिया।

    वारदात के बाद आरोपित ने खुद धालभूमगढ़ थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच कर रही है। मृतकों की पहचान लक्ष्मी मुंडी (करीब 50 वर्ष) और दुलारी सोरेन (करीब 52 वर्ष) के रूप में हुई है। लक्ष्मी की शादी धालभूमगढ़ प्रखंड के बासाझोर और दुलारी की शादी घाटशिला प्रखंड के चड़ईगोड़ा में हुई थी।

    रात में कराया था पूजा-पाठ
    स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, स्वरूप ने बीती रात गांव में ओझा-गुणी को बुलाया था। पूजा-पाठ में शामिल होने के लिए उसने अपनी दोनों बहनों को भी आमंत्रित किया था। बताया जाता है कि पूजा-पाठ के बाद दोनों बहनें सो रही थी। इसी दौरान उन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया गया, जिससे उनकी मौत हो गई।

    घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी धीरज कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों से पूछताछ की। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    अंधविश्वास या मानसिक स्थिति, जांच जारी
    थाना प्रभारी धीरज कुमार ने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि घटना के पीछे अंधविश्वास था या आरोपित की मानसिक स्थिति से जुड़ा कोई कारण। इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस हत्या के कारणों और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।

    जागरूकता के बावजूद ऐसी घटनाएं चिंता का विषय
    पूर्व मुखिया शरबत मुर्मू ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि प्रखंड प्रशासन की ओर से अंधविश्वास और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर आयोजित किए जाते हैं। इसके बावजूद ऐसी घटनाएं होना चिंता का विषय है।

    उन्होंने कहा कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने की जरूरत है। ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।

  • बिहार में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी, पानी टंकियों को सोलर ऊर्जा से जोड़ने का प्रस्ताव

    बिहार में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी, पानी टंकियों को सोलर ऊर्जा से जोड़ने का प्रस्ताव

     पटना
     बिहार की पंचायतों में पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाने एवं बिजली पर निर्भरता कम करने के लिए पानी टंकी पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की योजना सरकार लाने जा रही है।

    राज्य में लगभग 70 हजार पानी टंकी पंचायती राज विभाग के एवं 50 हजार से अधिक पानी टंकी लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के हैं।

    ऐसे में मिलाकर 1.23 लाख से अधिक पानी टंकी हैं। इसमें इन्हें सौर ऊर्जा से जोड़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को अधिक सुगम एवं टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।

    पंचायती राज विभाग व पीएचईडी ने तैयार किया प्रस्ताव
    साथ ही बिजली खर्च में कमी आने और बिजली कटौती के दौरान जलापूर्ति प्रभावित होने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल का जल योजना के तहत बड़ी संख्या में पानी टंकी के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जाती है। पानी पहुंचाने के लिए मोटर पंप का इस्तेमाल होता है, जो मुख्य रूप से बिजली पर निर्भर हैं।

    पौने पांच सौ करोड़ रुपये खर्च आने का विभाग को अनुमान
    बिजली आपूर्ति बाधित होने या तकनीकी खराबी के कारण कई जगहों पर पानी की आपूर्ति प्रभावित होती है। सौर ऊर्जा का विकल्प मिलने से इस समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।

    सरकार के लोक वित्त समिति ने 4809 करोड़ रुपये खर्च की मंजूरी दे दी है। प्रत्येक टंकी पर पांच-पांच किलोवाट के सोलर पैनल लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।अब आगे की प्रक्रिया पंचायती राज विभाग पूर्ण करनी है।

    बिजली खर्च में आएगी कमी
    पानी टंकी पर सौर ऊर्जा लगाने से बिजली बिल का बोझ कम करने में भी मदद मिलेगी। इससे पंचायत स्तर पर पेयजल व्यवस्था के संचालन की लागत घटाने की संभावना है

    सोलर पैनल लगाने के साथ उनके नियमित रखरखाव और खराब होने की स्थिति में त्वरित मरम्मत की व्यवस्था जरूरी होगी। इससे योजना का लाभ लंबे समय तक मिल सकेगा।

    पंचायतों में सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति व्यवस्था विकसित होने से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में मदद मिलेगी।

     

  • जनगणना 2027 की तैयारी तेज, लिव-इन जोड़ों और चार शादियों के विकल्प को लेकर चर्चा तेज़

    जनगणना 2027 की तैयारी तेज, लिव-इन जोड़ों और चार शादियों के विकल्प को लेकर चर्चा तेज़

    गोरखपुर
    दूसरे चरण की जनगणना में 16 नवंबर से स्वगणना और एक दिसंबर से जनगणना शुरू होगी। जनगणना के लिए गोरखपुर के एमएमएमयूटी में प्रशिक्षण शुरू हो गया है। पहले चरण में प्रशिक्षित फिल्ड ट्रेनर अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण में मिल रही जानकारियों क अनुसार इस बार जनगणना में हर व्यक्ति से 40 सवाल पूछे जाएंगे।

    जनगणना में इस बार पुरुषों एवं महिलाओं की चार शादी दर्शाने का विकल्प है, जबकि लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े शादी से पहले ही दंपति माने जाएंगे। भारत सरकार के राजपत्र के अनुसार किसी भी जाति धर्म के लोग चार शादी को जनगणना में दर्शा सकते हैं।

    बेघर लोगों की होगी गणना
    पहले चरण में मकान गणना की गई, जिसके आधार पर जनगणना होगी। इस बार बेघर लोगों की भी गणना की जाएगी। लोगों की नागरिकता के बजाए घोषित राष्ट्रीयता को जनगणना में दर्ज किया जाएगा। जाति भी पूछी जाएगी।

    जनगणना की ट्रेनिंग शुरू
    जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि दूसरे चरण की जनगणना के लिए ट्रेनिंग शुरू हो गया है। प्रशिक्षण लेने वाले लोगों से कहा गया कि सभी सवालों के बारे में अच्छी तरह समझ लें। जनगणना के आंकड़े पूरी तरह सही होने चाहिए। इसी के अनुसार भविष्य की योजनाएं बनतीं हैं। जो लोग स्वगणना कर सकते हैं, उन्हें स्वगणना करने से सुविधा होगी।

    ये सवाल भी पूछे जाएंगे
    नाम से लेकर मोबाइल तकः नाम, परिवार से संबंध, लिंग, जन्मतिथि, आयु और वैवाहिक स्थिति।

    सामाजिक जानकारीः धर्म, जाति, अनुसूचित जाति/जनजाति, दिव्यांगता, मातृभाषा और शिक्षा।

    रोजगार और व्यवसायः काम की स्थिति, व्यवसाय, उद्योग, कामगार की श्रेणी और आर्थिक गतिविधि।

    प्रवास और परिवारः जन्म स्थान, अंतिम निवास, प्रवास का कारण, अवधि, स्थायी पत्ता।

    अन्य जानकारी: कोविड टीकाकरण, बैंक खाता, मोबाइल, आधार, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस।

    इन लोगों की नहीं लगेगी ट्यूटी
    उधर, यूपी सरकार ने तीन महीने में रिटायर्ड होने वाले कार्मिकों को जनगणना ड्यूटी से राहत दे दी है। ऐसे कर्मचारियों की जनगणना में ड्यूटी नहीं लगाए जाने को लेकर कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग के संयुक्त सचिव कृपा शंकर यादव की ओर से सभी विभागों को निर्देश भेज दिया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि जनगणना-2027 के दूसरे चरण के अंतर्गत निकटतम तीन माह के अंदर सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों को दूसरे चरण के जनगणना कार्यों से मुक्त रखा जाएगा। दूसरे चरण के जनगणना का काम अप्रशिक्षित कार्मिकों से नहीं कराया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद किसी भी कार्मिक को विशेष परिस्थितियों को छोड़कर जनगणना के काम से छूट नहीं दी जाएगी। छावनी परिषद के अतिरिक्त किसी भी अन्य इकाई को स्पेशल नहीं बताया जाएगा।

  • श्रमिक परिवार की बेटी निकिता को मिली नई उम्मीद, सरकारी योजना से शिक्षा और भविष्य को मिला संबल

    श्रमिक परिवार की बेटी निकिता को मिली नई उम्मीद, सरकारी योजना से शिक्षा और भविष्य को मिला संबल

    सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी

    श्रमिक परिवार की बेटी निकिता के सपनों को मिला संबल, नोनी सशक्तिकरण योजना से पढ़ाई की राह हुई आसान

    20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता से पूरी हो रहीं शैक्षणिक जरूरतें, उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ रहे कदम

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार, बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही योजना

    रायपुर, 
    आर्थिक संसाधनों की कमी किसी बेटी की शिक्षा और आगे बढ़ने के सपनों में बाधा न बने, इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन की मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना श्रमिक परिवारों की बेटियों को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता राशि बेटियों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने और उन्हें आत्मनिर्भर भविष्य की ओर आगे बढ़ने में मददगार साबित हो रही है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम धुरकोट निवासी निकिता कहरा भी इस योजना से लाभान्वित हुई हैं। उन्हें श्रम विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के तहत 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है, जिससे उनकी आगे की पढ़ाई को सहारा मिला है।

    शिक्षा के सपनों को मिला आर्थिक सहयोग

    निकिता कहरा के लिए योजना के तहत मिली 20 हजार रुपये की सहायता राशि पढ़ाई जारी रखने और शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच शिक्षा से जुड़े खर्चों की व्यवस्था करना श्रमिक परिवारों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में शासन से प्राप्त यह सहायता निकिता को अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने और भविष्य के लिए बेहतर तैयारी करने में सहयोग प्रदान कर रही है।

    इस आर्थिक सहायता से निकिता को पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहूलियत मिल रही है। साथ ही उन्हें अपनी शिक्षा जारी रखने और भविष्य में बेहतर अवसर प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन भी मिला है।

    श्रमिक परिवारों की बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

    मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिक परिवारों की पात्र बेटियों को 20 हजार रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। योजना का उद्देश्य बेटियों को आर्थिक संबल देकर उनकी शिक्षा, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना है।

    निकिता कहरा ने योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उनके लिए यह सहायता राशि शिक्षा से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के साथ अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ने का माध्यम बनी है।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत निकिता कहरा की यह कहानी दर्शाती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से मिलने वाला आर्थिक सहयोग श्रमिक परिवारों की बेटियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना जैसी पहलें बेटियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें शिक्षित, सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

  • उत्तर प्रदेश के 68 हजार ग्राम प्रहरियों के लिए बड़ा अपडेट, मानदेय बढ़ाने और आयुष्मान कार्ड देने की तैयारी

    उत्तर प्रदेश के 68 हजार ग्राम प्रहरियों के लिए बड़ा अपडेट, मानदेय बढ़ाने और आयुष्मान कार्ड देने की तैयारी

    बरेली
     गांवों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में अहम भूमिका निभाने वाले ग्राम प्रहरियों का मानदेय अब 2500 से बढ़ाकर 3500 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को ग्राम प्रहरियों के सम्मान समारोह में मानदेय में एक हजार रुपये की वृद्धि के साथ पांच लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा देने की घोषणा की

    उन्होंने ग्राम प्रहरियों को गांव की सुरक्षा व्यवस्था की आंख और कान बताते हुए कहा कि उनकी सतर्कता से अपराध, अफवाह और अवैध गतिविधियों पर समय रहते अंकुश लगाया जा सकता है।

    इससे पहले मुख्यमंत्री ने बरेली जोन के 11 ग्राम प्रहरियों को मंच से पगड़ी पहनाकर और गिफ्ट हैंपर देकर सम्मानित किया। फिर प्रदेश के 68000 ग्राम प्रहरियों के मानदेय बढ़ोतरी और कैशलेस इलाज की सुविधा की घोषणा की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम प्रहरी गांव में सीसीटीवी कैमरे की तरह हैं। गांव में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तत्काल पुलिस तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है।

    ग्राम प्रहरी पुलिस के लगातार संपर्क में रहें तो अपराधियों के मंसूबों पर समय रहते पानी फेरा जा सकता है। उन्होंने कहा कि गांव का अंतिम व्यक्ति भी सजग हो तो सुरक्षा व्यवस्था की नींव मजबूत होती है।

    उन्होंने ग्राम प्रहरियों को बरसात के मौसम में फैलने वाली अफवाहों के प्रति विशेष सतर्क रहने को कहा। पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और बहराइच जैसे जिलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सही सूचना समय पर मिलना जरूरी है। किसी संदिग्ध गतिविधि या अफवाह की सूचना तत्काल पुलिस को दी जाए, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।

    मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रहरियों से गांवों में जमीनों पर अवैध कब्जे और भूमाफिया की गतिविधियों पर भी नजर रखने को कहा। उन्होंने कहा कि जहां पहले सड़कें नहीं थीं, वहां अब विकास कार्य हो रहे हैं।

    विकास के साथ जमीनों की गतिविधियां भी बढ़ती हैं। ऐसे में किसी भी अवैध कब्जे या संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस-प्रशासन को तत्काल दी जानी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रहरियों को सम्मान मिलने पर बधाई देते हुए कहा कि यह उनके परिश्रम का परिणाम है। इस सम्मान को बनाए रखने के लिए उन्हें जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ काम करना होगा। संबोधन के अंत में उन्होंने भारत माता की जय और हर-हर महादेव का उद्घोष किया। इसके बाद ग्राम प्रहरियों के साथ सेल्फी भी ली।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव सजग होगा तो आत्मनिर्भर बनेगा। ग्राम प्रहरियों को अपने कार्यों के जरिये नींव के पत्थर की तरह योगदान देना होगा। गांव से लेकर जनपद और प्रदेश तक सुरक्षा व विकास की मजबूत कड़ी तैयार करने में उनकी भूमिका अहम है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। माफिया के खिलाफ कार्रवाई के साथ विरासत और विकास के संगम को आगे बढ़ाया जा रहा है।

    2019 के बाद अब फिर बढ़ा मानदेय
    मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रहरियों के मानदेय में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में उन्हें 1500 रुपये प्रतिमाह मिलते थे। वर्ष 2019 में इसमें एक हजार रुपये की वृद्धि कर मानदेय 2500 रुपये किया गया था।

    अब एक बार फिर एक हजार रुपये बढ़ाकर इसे 3500 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही ग्राम प्रहरियों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का लाभ देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी निभाने वाले ग्राम प्रहरियों को अपनी भूमिका के प्रति सजग रहना होगा।

    2017 से पहले त्योहारों पर रहता था उपद्रव का अंदेशा
    मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था में बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि 2017 से पहले त्योहार आते ही उपद्रव की आशंका पैदा हो जाती थी। अब प्रदेश में धार्मिक आयोजन और मेले उत्साह के साथ हो रहे हैं।

    शारदीय नवरात्र में जगह-जगह मां जगतजननी की प्रतिमाएं स्थापित कर अनुष्ठान किए जा रहे हैं। शाकुंभरी पीठ समेत विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में दर्शन कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसा माहौल तैयार किया है, जिसमें लोग भयमुक्त होकर अपने धार्मिक और सामाजिक आयोजन कर पा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षित उत्तर प्रदेश की छवि से देश और दुनिया में प्रदेश के प्रति धारणा बदली है।

    पहले कुछ लोगों की गलतियों के कारण प्रदेश के लोगों को भी पहचान के संकट का सामना करना पड़ता था। अब लोग उत्तर प्रदेश के लोगों से परहेज नहीं करते, बल्कि सहजता से मिलते हैं।

    सुरक्षा से निवेश और रोजगार का रास्ता खुलता है
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा का सीधा संबंध विकास से है। जब माहौल सुरक्षित होता है तो सड़कें बनती हैं, निवेश आता है और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। लोगों का विश्वास मजबूत होता है तो उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।

    प्रदेश में आयोजित हो रहे मेले और उत्सव इसी विश्वास का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि गांवों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में ग्राम प्रहरियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सीसीटीवी कैमरों और एआइ आधारित तकनीक से भी आरोपितों की पहचान करने में मदद मिल रही है।

    ग्राम प्रहरियों को मोबाइल फोन उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे पुलिस से संपर्क बनाए रख सकें और सूचनाओं का तत्काल आदान-प्रदान हो सके।

  • योगी सरकार के मिशन रोजगार को मिलेगी गति, ‘उद्यमी बडी’ युवाओं को स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं से जोड़ेगा

    योगी सरकार के मिशन रोजगार को मिलेगी गति, ‘उद्यमी बडी’ युवाओं को स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं से जोड़ेगा

    नवरात्र पर यूपीकॉन की नई पहल, उद्यमिता की राह दिखाएगी ‘उद्यमी बडी’

    यूथ अड्डा का मैस्कॉट ‘उद्यमी बडी’ लॉन्च, ‘मेरा सपना, मेरी शक्ति’ से युवाओं और बेटियों को मिला उद्यमिता का संदेश

    योगी सरकार के मिशन रोजगार को गति देने की पहल, युवाओं को स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं से जोड़ रहा यूपीकॉन

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने के प्रयासों को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। इसी क्रम में नवरात्र के अवसर पर उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट्स लिमिटेड (यूपीकॉन) ने युवाओं और महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश के विभिन्न यूथ अड्डा केंद्रों पर ‘उद्यमी बडी’ मैस्कॉट का शुभारंभ किया। इस पहल के जरिए युवाओं, विशेषकर बेटियों को अपने सपनों को पहचानने, कौशल विकसित करने और अपने विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए प्रेरित किया गया।

    लखनऊ, मुरादाबाद, आजमगढ़, मिर्जापुर, गोरखपुर, प्रयागराज, गोंडा और वाराणसी समेत विभिन्न जिलों के यूथ अड्डा केंद्रों पर आयोजित कार्यक्रमों में सैकड़ों युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें अपना व्यवसाय शुरू करने की इच्छुक युवतियों के साथ पहले से उद्यम कर रहीं महिला उद्यमी भी शामिल रहीं।

    ‘मेरा सपना, मेरी शक्ति’ से मिला आत्मनिर्भरता का संदेश

    कार्यक्रम के दौरान ‘मेरा सपना, मेरी शक्ति’ गतिविधि आयोजित की गई। प्रतिभागियों से अपने सपने लिखने और भविष्य में सीखना चाहने वाले कौशल की जानकारी देने को कहा गया। इसका उद्देश्य युवतियों और युवाओं को अपनी रुचि एवं क्षमता पहचानने तथा अपने विचारों को उद्यम के रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित करना था। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया गया।

    नई पीढ़ी के सपनों का प्रतीक है ‘उद्यमी बडी’

    ‘उद्यमी बडी’ एक युवा लड़की के रूप में तैयार किया गया मैस्कॉट है। यह नई पीढ़ी की उस सोच का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें युवा अपनी प्रतिभा और कौशल के आधार पर नए अवसर तलाशने के साथ अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं। नवरात्र के दौरान महिला शक्ति और आत्मनिर्भरता के संदेश के साथ इस पहल को जोड़कर युवतियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया गया।

    सरकारी योजनाओं से जोड़े जा रहे युवा

    कार्यक्रमों में प्रतिभागियों को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा), मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना (एनवाईएसवाई) और एमएसएमई विभाग की अन्य ऋण एवं सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई। युवाओं को बताया गया कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन का लाभ लेकर वे अपने व्यावसायिक विचारों को धरातल पर उतार सकते हैं। यूथ अड्डा के माध्यम से युवाओं को उद्यमिता संबंधी जानकारी, मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे योगी सरकार के युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनाने के संकल्प को भी मजबूती मिल रही है।

    रोजगार तलाशने के साथ रोजगार देने की सोच

    इस अवसर पर यूपीकॉन के प्रबंध निदेशक प्रवीण सिंह ने कहा कि यूपीकॉन की पहल का उद्देश्य युवाओं, विशेषकर महिलाओं को उद्यमिता के अवसरों से जोड़ना और उन्हें रोजगार तलाशने के साथ-साथ स्वयं रोजगार सृजित करने के लिए प्रेरित करना है। यूथ अड्डा के माध्यम से युवाओं को उद्यमिता संबंधी जानकारी, मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं से जुड़ने का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘उद्यमी बडी’ केवल एक मैस्कॉट नहीं, बल्कि युवाओं को सपने देखने, कौशल सीखने और अपने पैरों पर खड़े होने की प्रेरणा देने वाला संदेश है।

  • मोहाली में मतदाताओं की संख्या घटी, डेराबस्सी में सबसे ज्यादा 2.79 लाख वोटर

    मोहाली में मतदाताओं की संख्या घटी, डेराबस्सी में सबसे ज्यादा 2.79 लाख वोटर

    मोहाली
     विधानसभा क्षेत्र मोहाली जो कि पंजाब की सबसे अहम सीट मानी जाती है की मतदाता सूची में आए बदलाव ने चुनावी गणित को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची में मोहाली हलके में 2,02,010 मतदाता दर्ज किए गए हैं। यह संख्या 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज 2,33,573 मतदाताओं से 31,563 कम है। वहीं, 2022 के विधानसभा चुनाव में हलके में 2,39,357 मतदाता थे। उस आंकड़े के मुकाबले मौजूदा सूची में 37,347 मतदाताओं का अंतर सामने आया है। जिले के खरड़ और डेराबस्सी विधानसभा क्षेत्रों के मुकाबले मोहाली हलके में पुराने चुनावी आंकड़ों और मौजूदा मतदाता सूची के बीच सबसे बड़ा अंतर दिखाई देता है।

    मोहाली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद वोटरों की संख्या 7.8% घट गई है। सोमवार को जारी अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक जिले में अब 7,47,569 वोटर हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह संख्या 8,10,719 थी। इस हिसाब से 63,150 वोटरों की कमी आई है।

    हालांकि यह हटाए गए वोटरों की वास्तविक संख्या नहीं है, क्योंकि अंतिम सूची में नए वोट भी जुड़े हैं। प्रशासन बाद में हटाए गए वोटरों का अंतिम आंकड़ा जारी करेगा। डिप्टी कमिश्नर-कम-जिला चुनाव अधिकारी कोमल मित्तल ने रोल ऑब्जर्वर मोहम्मद तैय्यब की मौजूदगी में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अंतिम मतदाता सूची जारी होने की जानकारी दी। प्रतिनिधियों को मतदाता सूची की प्रतियां भी सौंपी गईं।

    डेराबस्सी में सबसे ज्यादा वोटर अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक, डेराबस्सी विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 2,79,857 वोटर हैं। खरड़ में 2,65,702 और मोहाली में 2,02,010 वोटर दर्ज किए गए हैं। 13 अगस्त को जारी मसौदा मतदाता सूची में जिले के 7,00,719 वोटर थे। इनमें 3,62,751 पुरुष, 3,37,954 महिलाएं और थर्ड जेंडर के 14 वोटर शामिल थे। उस समय खरड़ में 2,46,922, मोहाली में 1,92,715 और डेराबस्सी में 2,61,082 वोटर थे। मसौदा सूची के मुकाबले अंतिम सूची में 46,850 वोटर बढ़े हैं।

    84,795 वोटरों की नहीं हुई थी मैपिंग SIR के दौरान जिले में 84,795 ऐसे वोटर मिले, जिनकी मैपिंग नहीं हो पाई थी। इसके अलावा, 1,09,419 मामलों में तार्किक विसंगतियां मिली थीं। संबंधित वोटरों को नोटिस देकर जरूरी दस्तावेज जमा कराने और अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 13 अगस्त से 12 सितंबर तक थी।

    25 जून से शुरू हुई थी प्रक्रिया नोटिस जारी करने और उनके निपटारे की प्रक्रिया 8 अक्टूबर तक चली। मोहाली जिले में SIR की प्रक्रिया 25 जून से शुरू हुई थी। 838 बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को 8,54,423 वोटरों तक पहुंचकर गणना फॉर्म भरवाने और जानकारी का सत्यापन करने की जिम्मेदारी दी गई थी। बीएलओ ने 25 जून से 24 जुलाई तक घर-घर जाकर जानकारी जुटाई। इस दौरान अनुपस्थित, दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके, मृत और दोहरी एंट्री वाले वोटरों की जांच की गई।

    नाम नहीं तो फॉर्म-6 भरकर बनवा सकते हैं वोट अंतिम मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर पात्र व्यक्ति फॉर्म-6 भरकर नया वोट बनवा सकता है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने के अलावा संबंधित बीएलओ या निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारी के कार्यालय में भी संपर्क किया जा सकता है। एसआईआर के लिए अर्हता तिथि 1 अक्टूबर 2026 रखी गई थी।

     राजनीतिक दृष्टि से यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मतदाता सूची बूथ स्तर पर राजनीतिक दलों की तैयारी, मतदाताओं तक पहुंच और चुनावी प्रबंधन का आधार होती है। हालांकि, मतदाताओं की संख्या में कमी के आधार पर किसी राजनीतिक दल के समर्थन या चुनावी नतीजों पर असर का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। यहां एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मौजूदा सूची में कितने नाम हटाए गए, कितने नए मतदाता जुड़े और कितने नामों में संशोधन हुआ। 

    जिला प्रशासन की ओर से जारी अंतिम सूची के कुल आंकड़े इन सवालों का पूरा जवाब नहीं देते। एसआईआर के दौरान वास्तव में हटाए गए नामों की संख्या जानने के लिए पुनरीक्षण से पहले की सूची और अंतिम सूची का आधिकारिक तुलनात्मक ब्योरा जरूरी है।