Author: NewseDay

  • PM Modi Birthday: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए वेतन से पेंशन तक हुए ये 5 बड़े बदलाव

    PM Modi Birthday: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए वेतन से पेंशन तक हुए ये 5 बड़े बदलाव

    नई दिल्ली

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपने 12 साल के कार्यकाल में बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए हैं जिसका फायदा बड़े वर्ग को मिला है। पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान केंद्रीय कर्मचारियों के हित में भी कई अहम फैसले लिए। इन फैसलों की वजह से ना सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव आया बल्कि फ्यूचर प्लानिंग को लेकर भी एक नया विकल्प मिला। आइए पीएम मोदी के 5 बड़े फैसले के बारे में जान लेते हैं।

    वेतन आयोग का गठन
    पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन किया। यह वेतन आयोग अपनी सिफारिशें अगले साल की पहली छमाही तक सरकार को सौंप देगा। इसके बाद सरकार सिफारिशों को लागू करेगी। बता दें कि सातवें वेतन आयोग को लागू भी मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ही किया गया था। हालांकि, इसका गठन यूपीए (UPA) सरकार द्वारा 28 फरवरी 2014 को किया गया था। तब डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे।

    UPS यानी यूनिफाइड पेंशन स्कीम
    सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम का विकल्प दिया। साल 2024 में मंजूर UPS को 1 अप्रैल 2025 से लागू किया गया। यह नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के अंतर्गत ही एक विकल्प के रूप में लाया गया है। इस स्कीम के तहत 25 साल की न्यूनतम अर्हक सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी को रिटायरमेंट से पहले के आखिरी 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 फीसदी सुनिश्चित पेंशन के रूप में मिलेगा। वहीं, कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करने पर न्यूनतम पेंशन ₹10,000 प्रति माह तय की गई है। कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को उसकी पेंशन का 60 फीसदी पारिवारिक पेंशन मिलेगी। इसके अलावा सुनिश्चित पेंशन, पारिवारिक पेंशन और न्यूनतम पेंशन पर महंगाई राहत (DR) भी दी जाएगी। रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी के अलावा शर्तों के साथ एक एकमुश्त भुगतान भी मिलेगा।

    HRA में बदलाव
    मोदी सरकार के कार्यकाल में केंद्रीय कर्मचारियों के हाउस रेंट अलाउंस(HRA) की दरों में भी बदलाव किया गया। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत शहरों को X, Y और Z कैटेगरी में बांटा गया और HRA की शुरुआती दरें क्रमशः 24%, 16% और 8% तय की गईं। बाद में महंगाई भत्ता (DA) बढ़ने के साथ HRA की दरों में भी बढ़ोतरी का प्रावधान रखा गया। जब DA 25% हुआ, तो HRA की दरें बढ़कर 27%, 18% और 9% हो गईं। इसके बाद DA 50% पहुंचने पर HRA बढ़कर 30%, 20% और 10% हो गया। बता दें कि वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 60 पर्सेंट है।

    NPS कर्मचारियों के लिए बढ़ाया योगदान
    केंद्र सरकार के NPS कर्मचारियों के लिए सरकार का योगदान 10% से बढ़ाकर 14% किया गया। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम को साल 2004 में ही बंद कर दिया गया था।

    CGHS में बदलाव
    पिछले 12 वर्षों में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना यानी CGHS में कई अहम बदलाव हुए हैं। 7वें वेतन आयोग के बाद CGHS के मासिक योगदान और अस्पताल में वार्ड की पात्रता को वेतन स्तर से जोड़ा गया। इमरजेंसी की स्थिति में CGHS से जुड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा को भी व्यवस्थित किया गया है।

  • Tata Sons IPO को मिली हरी झंडी, एन चंद्रशेखरन अगले 5 साल संभालेंगे जिम्मेदारी

    Tata Sons IPO को मिली हरी झंडी, एन चंद्रशेखरन अगले 5 साल संभालेंगे जिम्मेदारी

    मुंबई 

    टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड ने गुरुवार को एन. चंद्रशेखरन को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर पांच साल का नया कार्यकाल देने को मंजूरी दे दी। मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक बोर्ड मीटिंग के दौरान टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अकेले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। बता दें कि बीते अगस्त महीने में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी, 2027 में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद अगले कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला लिया था। बहरहाल, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति की खबरों के बीच टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयर गुलजार हो गए।

    क्यों लिस्टिंग की संभावना ?
    टाटा संस बोर्ड ने कंपनी को लिस्ट करने के मुद्दे पर भी विचार किया, लेकिन कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। दरअसल, बीते सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस के प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन को खारिज कर दिया था। इससे टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी हो सकता है।

    अपर-लेयर एनबीएफसी है टाटा संस
    आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को 'अपर-लेयर' की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया था और ऐसी संस्थाओं के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य किया गया था। टाटा संस के लिए मूल समयसीमा 30 सितंबर, 2025 रखी गई थी। टाटा संस ने इस दायित्व से बचने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया और एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने का आवेदन किया था। आरबीआई ने आवेदन पर फैसला लंबित रखा और बाद में भी टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की सूचियों में शामिल करता रहा।

    जून, 2026 से लागू संशोधित आरबीआई नियमों के तहत एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की एसेट वाली कोई भी एनबीएफसी अपने-आप अपर-लेयर श्रेणी में आ जाती है। मार्च, 2026 तक टाटा संस की एसेट दो लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई हैं। अगस्त में जारी अपर-लेयर सूची में टाटा संस 17 संस्थाओं में एकमात्र नॉन-लिस्टेड कंपनी थी। इस सूची में आरईसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और भारतीय रेलवे वित्त निगम जैसी सरकारी एनबीएफसी भी शामिल हैं, जिन्हें सूचीबद्धता की अनिवार्यता से छूट हासिल है।

    शेयरधारकों में दो फाड़
    टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर शेयरधारकों के बीच भी मतभेद की खबरें आई हैं। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो नोएल टाटा के नेतृत्व वाला टाटा ट्रस्ट्स (गैर-लाभकारी संस्थाओं का समूह जिसके पास टाटा संस की 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है) लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है जबकि लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला इसका सबसे बड़ा निजी शेयरधारक शापूरजी पालोनजी समूह सार्वजनिक रूप से सूचीबद्धता की मांग कर रहा है।

    टाटा संस टाटा समूह की शीर्ष होल्डिंग कंपनी है और उसकी आईटी, ऑटो, स्टील, कंज्यूमर, एयरलाइल, हॉस्पिटैलिटी और फाइनेंशियल सर्विसेज समेत अलग-अलग कारोबारों में हिस्सेदारी है। शेयर बाजार में लिस्टिंग से कंपनी के फाइनेंस, पूंजी आवंटन और निवेश संबंधी फैसलों में अधिक सार्वजनिक निगरानी और खुलासे की जरूरत बढ़ सकती है।

  • सीवर समस्या निराकरण के लिए शहर का करें सर्वे : निगमायुक्त ,हर गली की चौड़ाई की करें जांच

    सीवर समस्या निराकरण के लिए शहर का करें सर्वे : निगमायुक्त ,हर गली की चौड़ाई की करें जांच

    ग्वालियर
    शहर की सीवर समस्या के निराकरण के लिए नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने वार्ड क्रमांक 18, 17 का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त ने दीनदयाल नगर में सीवर लाइनों की सफाई करने वाली मशीनों को बुलाकर उनका प्रेजेंटेशन देखा। इसके बाद निगमायुक्त ने निर्देश  दिए हैं कि शहर की गलियों का सर्वे करें जिससे पता चल सके कि कौन सी मशीन खरीदी जाए। निरीक्षण के दौरान उपायुक्त मुकेश बंसल, कार्यपालन यंत्री महेंद्र प्रसाद अग्रवाल, शिशिर श्रीवास्तव, सहायक यंत्री सिद्धार्थ सोनी आदि उपस्थित थे।
    नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने माधौनगर के सामने स्थित गाटर वाली पुलिया का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि गाटर वाली पुलिया के नीचे सीवर की समस्या का समाधान कर दिया गया है, जिससे अब पानी नहीं भर रहा है। इसके बाद नगर निगम आयुक्त ने बस स्टैण्ड के पास निरीक्षण किया। यहां पर नाला सीवर लाइन में मिल रहा था, जिसके कारण सीवर लाइन सडक पर बह रही थी, निगमायुक्त ने नाले निर्माण के निर्देष दिए हैं।
    इसके बाद नगर निगम आयुक्त ने वार्ड क्रमांक 18 स्थित दीनदयाल नगर निगम का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सीवर समस्या को देखते हुए नगर निगम आयुक्त ने मौके पर सीवर सक्षन कम जेटिंग मशीन, डी सिल्टिंग मशीन, डी सिंल्टिम कम जेटिंग मशीनों  को मंगाया। निगमायुक्त ने मौके पर खडे होकर सीवर लाइनों को खुलवाया। साथ ही अधिकारियों को निर्देश   दिए कि शहर की सभी गलियों का सर्वे किया जाए, साथ ही उन क्षेत्रों की प्रत्येक गली का सर्वे किया जाए जहां सीवर लाइन की सबसे अधिक समस्या आ रही है, वहां पर गलियों की चौड़ाई के अनुपात के हिसाब से मशीनों के क्रय करने की रूपरेखा बनाई जाए।

     

  • AI-171 क्रैश जांच में नया विवाद, FAS का तकनीकी खामियों की अनदेखी का आरोप; AAIB ने दिया जवाब

    AI-171 क्रैश जांच में नया विवाद, FAS का तकनीकी खामियों की अनदेखी का आरोप; AAIB ने दिया जवाब

    नई दिल्ली
    एअर इंडिया की उड़ान AI-171 हादसे की जांच को लेकर विमानन सुरक्षा संगठन फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (एफएएस) ने विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

    एफएएस के कार्यकारी निदेशक एड पियर्सन ने AAIB के महानिदेशक जीवीजी. युगंधर को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि हादसे से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और तकनीकी खराबी से संबंधित आंकड़ों को जांच में सामने नहीं लाया गया।

    जांच की पारदर्शिता पर एफएएस के सवाल
    पत्र में कहा गया है कि हादसे के बाद एफएएस ने यूके AAIB एक्सपर्ट के माध्यम से भारतीय जांच एजेंसी को सैकड़ों आधिकारिक गैर-सार्वजनिक दस्तावेज सौंपे थे। संगठन के अनुसार, इन दस्तावेजों में दुर्घटनाग्रस्त बोइंग 787 विमान के सिस्टम में चल रही कई तरह की खराबियों से संबंधित जानकारी थी।

    एफएएस का कहना है कि विमान के एयरक्राफ्ट कम्युनिकेशंस एड्रेसिंग एंड रिपोर्टिंग सिस्टम और एयरक्राफ्ट हेल्थ मैनेजमेंट डेटा स्ट्रीम से भी ऐसी जानकारियां मिलीं, जो हादसे से ठीक पहले हुई तकनीकी विफलताओं और उनके सटीक समय की ओर इशारा करती हैं।

    तकनीकी दस्तावेजों को दबाने का आरोप
    पियर्सन ने पत्र में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आइसीएओ) के नियमों के तहत जांच एजेंसी का दायित्व है कि हादसे से जुड़े सभी प्रासंगिक तथ्यों को एकत्र करे, दर्ज करे और उनका पारदर्शी विश्लेषण करे।

    एफएएस का आरोप है कि AAIB ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में इन दस्तावेजों का जिक्र तक नहीं किया। संगठन के अनुसार, जांच एजेंसी का रुख पायलटों पर दोष मढ़ने जैसा दिख रहा है, जबकि तकनीकी खामियों को दरकिनार किया जा रहा है।

    जांच एजेंसी ने आरोपों का किया खंडन
    AAIB ने एफएएस के आरोपों का खंडन करते हुए जांच में निष्पक्षता का दावा किया है। ब्यूरो के जवाब के अनुसार, एफएएस की ओर से दिए गए सभी तकनीकी इनपुट और दस्तावेज 10 जून 2026 को प्राप्त हो चुके थे और जांच टीम उनका गहराई से अध्ययन कर रही है।

    AAIB ने कहा कि पूरी जांच 'एयरक्राफ्ट (इ इन्वेस्टिगेशन आफ एक्सीडेंट्स एंड इंसिडेंट्स) रूल्स, 2025' और आइसीएओ प्रविधानों के तहत निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है।

    एफएएस ने दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
    AAIB के स्पष्टीकरण के बावजूद एफएएस ने जांच से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को तुरंत सार्वजनिक रिकाॅर्ड में शामिल करने की मांग की है। संगठन ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि समय रहते सुरक्षा चेतावनियां जारी क्यों नहीं की गईं।

    एफएएस का कहना है कि विमानन सुरक्षा में गोपनीयता के बजाय समय पर दी गई पारदर्शी जानकारी भविष्य में होने वाले हादसों को रोकने में मदद कर सकती है।

    क्या है AI-171 हादसा
    जून 2025 में एअर इंडिया की उड़ान AI-171 (बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर) अहमदाबाद से लंदन जाते समय टेकआफ के ठीक 32 सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी।

  • मास्टर सर्कुलर्स और सतर्कता मैनुअल 2026 पर प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम

    मास्टर सर्कुलर्स और सतर्कता मैनुअल 2026 पर प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम

    हैदराबाद

    एनएमडीसी लिमिटेड के सतर्कता विभाग ने 17 सितंबर 2026 को हैदराबाद में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा आयोजित "मास्टर सर्कुलर्स और सतर्कता मैनुअल 2026" पर दक्षिण क्षेत्र के संगठनों के सतर्कता अधिकारियों के लिए प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में  सह-मेजबानी की।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि,  प्रवीण कुमार सिन्हा, पूर्व विशेष निदेशक, सीबीआई द्वारा प्रतिभागियों से वर्चुवल रूप में संबोधित किया गया, जिन्होंने सीवीसी द्वारा जारी मास्टर परिपत्रों के महत्व और सतर्कता मैनुअल के संशोधन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संवेदनशील पदों पर तैनात कर्मियों के रोटेशन के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जो एक महत्वपूर्ण निवारक सतर्कता उपाय के रूप में सिद्ध है।

    इस अवसर पर सीवीसी के सलाहकार  राजीव वर्मा, सीवीसी के निदेशक  अजय कुमार वर्मा और ओएसडी, सीवीसी  अरविंद कुमार के साथ-साथ  सु स्‍पूर्ति रेड्डी, सीवीओ, मिधानी और बीडीएल;         पी. कृष्ण कुमार, सीवीओ, ईसीआईएल; और  सी. नीलकंठ रेड्डी, सीवीओ, एनएमडीसी लिमिटेड आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही ।

    सीवीसी के प्रतिष्ठित वक्ताओं ने सतर्कता मैनुअल 2026 के संबंध में बहुत ही सार्थक जानकारी दी है,  जिसमें समय समय पर लाए गए प्रमुख परिवर्तनों और सतर्कता प्रशासन के लिए उनके महत्‍व पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने हाल ही में जारी किए गए सीवीसी के मास्टर सर्कुलर्स पर भी विस्तार से बताया, जिसमें उनके महत्वपूर्ण प्रावधान और व्यावहारिक प्रासंगिकता भी शामिल है। कार्यक्रम के पूरे सत्र अत्यधिक संवादात्मक थे, जिसमें विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रश्नों व संदेहों का समाधान किया और व्यावहारिक चर्चाओं के माध्यम से मूल्यवान स्पष्टीकरण प्रदान किए ।

    इस कार्यक्रम में दक्षिण क्षेत्र के लगभग 75 सतर्कता अधिकारियों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सत्रों ने प्रतिभागियों की अद्यतन सतर्कता ढांचे की समझ को बढ़ाया और सतर्कता प्रथाओं में स्थिरता को बढ़ावा देने और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक अंतर्दृष्टि प्रदान की।

    सीवीओ, एनएमडीसी ने सतर्कता अधिकारियों के लिए सीवीसी मास्टर परिपत्रों और सतर्कता मैनुअल 2026 के महत्व पर जोर दिया और साथ ही उन्‍होंने सतर्कता कार्यों में इन परिपत्रों और सतर्कता मैनुअल के प्रावधानों की पूरी समझ और उनके प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला ।

    सतर्कता के विभागाध्‍यक्ष ने सभी प्रतिष्ठित वक्ताओं को उनके बहुमूल्य ज्ञान और अनुभव को साझा करने के लिए और प्रतिभागियों को उनकी उत्साही भागीदारी, ध्यानपूर्वक सुनने और उनकी सार्थक प्रतिभागिता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया । इनकी प्रतिभागिता ने कार्यक्रम को अत्यधिक संवादात्मक और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    यह कार्यक्रम पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और प्रभावी सतर्कता प्रशासन को विशेष महत्‍व देते हुए भाग लेने वाले सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (पीएसयू) की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, अद्यतन सतर्कता मैनुअल और मास्टर सर्कुलर्स के विस्‍तृत प्रसार, क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ । राष्‍ट्रगान और राष्‍ट्रीय गीत के आलापन के साथ कार्यक्रम का समापन संपन्‍न हुआ।

  • प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा की कुल सीटें 620 से बढ़कर 8,675 हुईं

    प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा की कुल सीटें 620 से बढ़कर 8,675 हुईं

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में पिछले दो दशकों में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। वर्ष 2002 में प्रदेश में जहां केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं वर्ष 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 33 हो गई है। चिकित्सा शिक्षा की कुल सीटें भी 620 से बढ़कर 8,675 हो गई हैं। वर्ष 2023 के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए नए मेडिकल कॉलेज, विशेषज्ञ विभाग, आवश्यक मानव संसाधन और आधुनिक उपचार सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसका प्रभाव प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के अवसरों के साथ-साथ विशेषज्ञ एवं उच्च स्तरीय उपचार की उपलब्धता बढ़ने के रूप में भी दिखाई दे रहा है।

    मेडिकल कॉलेजों के विस्तार से बढ़ी चिकित्सा शिक्षा की क्षमता

    प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के साथ चिकित्सा शिक्षा की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2002 में 5 मेडिकल कॉलेजों से शुरू हुआ यह नेटवर्क वर्ष 2026 में 33 मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच गया है। इसी अवधि में चिकित्सा शिक्षा की कुल सीटें 620 से बढ़कर 8,675 हो गई हैं। वर्ष 2023 के बाद चिकित्सा शिक्षा को स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए नए मेडिकल कॉलेजों, विशेषज्ञ विभागों और आवश्यक मानव संसाधन के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में चिकित्सा शिक्षा के अवसरों के विस्तार के साथ नागरिकों को बेहतर उपचार सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्यों को प्राथमिकता दी है।

    विशेषज्ञ एवं सुपर स्पेशियलिटी उपचार का विस्तार

    मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के साथ प्रदेश में उच्च स्तरीय उपचार सुविधाओं का दायरा भी बढ़ा है। वर्ष 2002 में सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की संख्या शून्य थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 4 हो गई है। पैथोलॉजी सेवाओं की उपलब्धता भी 45 से बढ़कर 134 हुई है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार करने तथा आधुनिक जांच एवं उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में वर्ष 2023–26 के दौरान विशेष प्रयास किए गए हैं। प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में ऑन्को सर्जरी विभाग और कैथ लैब जैसी सुविधाओं के विस्तार की कार्ययोजना पर भी जोर दिया गया है।

     स्वास्थ्य अधोसंरचना का हुआ व्यापक विस्तार

    वर्ष 2002 की तुलना में वर्ष 2026 में प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थाओं के नेटवर्क का भी विस्तार हुआ है। जिला अस्पतालों की संख्या 36 से बढ़कर 55, सिविल अस्पताल 58 से बढ़कर 158, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र 229 से बढ़कर 348 और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र 1,194 से बढ़कर 1,442 हो गए हैं। उप स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या भी 8,835 से बढ़कर 10,256 हुई है। सामान्य बेड की संख्या 21,234 से बढ़कर 61,817 तथा आईसीयू बेड 277 से बढ़कर 3,395 हो गए हैं।

    2023 के बाद मानव संसाधन का हुआ सशक्तीकरण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में स्वास्थ्य अधोसंरचना के साथ मानव संसाधन को भी प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2024 में स्वास्थ्य संस्थाओं में 46,491 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई। इनमें नियमित, संविदा और आउटसोर्स पद शामिल हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरने की दिशा में भी निर्णय लिए गए। नर्सिंग संवर्ग की भर्ती, मेडिकल कॉलेजों में आवश्यक मैनपावर और विशेषज्ञ सेवाओं को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में लगातार सुधार

    स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का प्रभाव मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतकों में भी दिखाई देता है। वर्ष 2002 में मातृ मृत्यु अनुपात 379 था, जो वर्ष 2026 में घटकर 135 रह गया है। इसी अवधि में शिशु मृत्यु दर 82 से घटकर 35 हुई है। संस्थागत प्रसव की दर वर्ष 2002 के 35 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2026 में 98 प्रतिशत तक पहुंच गई है। गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीयन, प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान जैसी सेवाओं पर निरंतर जोर दिया जा रहा है।

    दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं

    प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री जनमन अभियान के अंतर्गत 66 मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू की गईं। ये यूनिट 21 जिलों के 87 विकासखंडों के 1,268 गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए संचालित की गईं। इनमें चिकित्सकीय परामर्श, जांच, दवाएं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं तथा विभिन्न रोगों की स्क्रीनिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

    आपातकालीन सेवाओं को मिली मजबूती

    आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन व्यवस्था का भी विस्तार हुआ है। प्रदेश में एम्बुलेंस सेवाओं की संख्या वर्ष 2002 के 256 से बढ़कर वर्ष 2026 में 2,052 हो गई है। पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर उच्च स्तरीय उपचार तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूती मिली है। आवश्यक दवाओं की उपलब्धता वाले संस्थानों की संख्या भी वर्ष 2002 के 214 से बढ़कर 2026 में 650 हो गई है।

     आयुष्मान भारत से उपचार की आर्थिक पहुंच

    स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ उपचार की आर्थिक पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2023–26 के दौरान अधिकाधिक अस्पतालों और चिकित्सकों को योजना से जोड़ने, इसकी पहुंच बढ़ाने और पात्र हितग्राहियों को उपचार सुविधा उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दिया गया है।

    प्राथमिक स्वास्थ्य से मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी तक विकसित हुआ नेटवर्क

    मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र का विस्तार अब प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और उप स्वास्थ्य केन्द्र से लेकर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तक एक व्यापक व्यवस्था के रूप में दिखाई देता है। वर्ष 2002 से 2026 के बीच मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा की क्षमता में हुई वृद्धि ने प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों और उच्च स्तरीय उपचार सुविधाओं के विस्तार का आधार तैयार किया है। वहीं वर्ष 2023 के बाद स्वास्थ्य अधोसंरचना, मानव संसाधन, आधुनिक तकनीक, मोबाइल स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक उपचार की पहुंच को मजबूत करने पर विशेष फोकस किया गया है। 

  • राजस्थान में ई-बस सेवा का विस्तार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा करने के मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

    राजस्थान में ई-बस सेवा का विस्तार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा करने के मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

    जयपुर
     राजस्थान के शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में पीएम ई-बस सेवा योजना के विस्तार की तैयारी तेज हो गई है। योजना के तहत राजस्थान को दो चरणों में कुल 1150 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं। इनमें से 229 ई-बसें राज्य को प्राप्त हो चुकी हैं। वहीं, बसों के संचालन के लिए आठ जिलों में 65 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। सरकार अब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को तेजी से पूरा करने पर फोकस कर रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा ई-बसों का संचालन शुरू किया जा सके।

    योजना की प्रगति को लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। इसमें स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव रवि जैन समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। ई-बस सेवा संचालित करने वाले जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, भीलवाड़ा और अलवर जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े।

    बैठक में शासन सचिव रवि जैन ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से योजना की अब तक की प्रगति और क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी दी। इसके बाद मुख्य सचिव ने अधिकारियों से ई-बसों के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की और जरूरी निर्देश दिए।

    चार्जिंग स्टेशन बनाना सबसे अहम कड़ी
    ई-बसों के संचालन में चार्जिंग नेटवर्क को महत्वपूर्ण मानते हुए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण और स्थापना तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बसों के संचालन से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार रहनी चाहिए, ताकि यात्रियों को नियमित और निर्बाध सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिल सके।

    उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और योजना से जुड़े सभी कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए। इससे आने वाले समय में प्राप्त होने वाली नई ई-बसों को भी बिना किसी बड़ी बाधा के संचालन में लाया जा सकेगा।

    एसी बसों में डिजिटल टिकटिंग की सुविधा
    पीएम ई-बस सेवा के तहत राजस्थान में संचालित होने वाली बसें वातानुकूलित इलेक्ट्रिक सिटी बसें हैं। इनमें पारंपरिक ईंधन वाली बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए इन बसों में डिजिटल टिकटिंग और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

    सरकार की योजना के तहत 1150 ई-बसों का पूरा बेड़ा तैयार होने के बाद राज्य के प्रमुख शहरों में शहरी परिवहन नेटवर्क को इससे बड़ा विस्तार मिलने की संभावना है। फिलहाल आठ शहरों में बसों और चार्जिंग स्टेशनों की व्यवस्था तैयार की जा रही है। आगामी चरण में जैसे-जैसे नई बसें उपलब्ध होंगी, उनके संचालन के लिए चार्जिंग और अन्य बुनियादी ढांचे को समय पर तैयार करना सरकार के सामने प्रमुख चुनौती रहेगी।

    जयपुर को सर्वाधिक 450 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित
    योजना के तहत जयपुर को सर्वाधिक 450 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की गई हैं। इसके अलावा जोधपुर और बीकानेर को 125-125 बसें मिलेंगी। अजमेर, अलवर और कोटा में 100-100 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा, जबकि उदयपुर, सीकर और भीलवाड़ा को 50-50 बसें आवंटित की गई हैं। इन बसों के संचालन से शहरी परिवहन व्यवस्था अधिक आधुनिक, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल बनेगी।

  • प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में आए सकारात्मक परिवर्तन पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन

    प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में आए सकारात्मक परिवर्तन पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन

    वाराणसी
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी में ‘सेवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में रक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री सभी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी ‘जनसेवा से राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष’ का अवलोकन किया। रक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री ने पीएम की कर्मभूमि वाराणसी से उनकी जन्मभूमि वडनगर जाने वाली ‘सेवा संकल्प बाइक यात्रा’ को झंडी दिखाकर रवाना किया। 250 बाइकों पर सवार 500 युवा इस यात्रा को पूरा करेंगे। यात्रा शुरू होने पर इन युवाओं पर पुष्पवर्षा की गई। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में आए सकारात्मक परिवर्तन पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई। मुख्यमंत्री ने काशी के लोकप्रिय सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने बाबा विश्वनाथ, मां गंगा व मां अन्नपूर्णा से पीएम मोदी के स्वस्थ दीर्घायु जीवन की कामना के साथ प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर व विकसित भारत की संकल्पना को पूरा करने की प्रार्थना की।

    पीएम मोदी के सेवा संकल्प के 25 वर्ष
    सीएम ने इस वर्ष को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के सेवा संकल्प के 25 वर्ष 7 अक्टूबर 2026 को पूरे होने जा रहे हैं। 7 अक्टूबर 2001 को मोदी जी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने बिना रुके, झुके, डिगे ‘चरैवेति-चरैवेति’ के मंत्र के साथ इस यात्रा को बढ़ाया। तप, परिश्रम, साधना के साथ प्रधानमंत्री के रूप में उनकी गौरवशाली यात्रा का दर्शन कर देशवासी नए भारत पर गौरव की अनुभूति कर रहे हैं। मोदी जी के नेतृत्व में सुरक्षित भारत अब दुनिया से आंख से आंख मिलाकर बात करता है।

    आज से दो यात्राओं का प्रारंभ
    सीएम योगी ने पीएम मोदी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज से दो यात्राएं प्रारंभ हो रही है। 75 वर्ष पहले मोदी जी का जन्म गुजरात के पौराणिक गांव वडनगर में हुआ था। गुजरात की पावन नदियों के जल को लेकर 25-25 बाइक पर वहां से 10 यात्राएं चलेंगी। इसी क्रम में यूपी की 10 पावन नदियों का जल लेकर काशी से 10 यात्राएं विभिन्न मार्गों से होते हुए वडनगर को प्रस्थान करेंगी। ये यात्राएं काशी व वडनगर के महत्व को 10 राज्यों तक पहुंचाएंगी। यूपी की पवित्र नदियों का जल वडनगर में भगवान हाटकेश्वर को अर्पित होगा और गुजरात की नदियों का जल बाबा विश्वनाथ को समर्पित होगा।

    सीएम ने युवाओं का किया अभिनंदन
    मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा के प्रतीक युवा इस यात्रा के सहभागी बने हैं। 20 दिन की बाइक यात्रा में समय देने वाले युवाओं का अभिनंदन करते हुए सीएम ने कहा कि ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ को बढ़ाने वाली इस यात्रा में युवाओं को प्रतिदिन 100 किलोमीटर की दूरी तय कर चार बड़े कार्यक्रमों से जुड़ना है। रोमांच से भरी इस यात्रा के जरिए युवाओं का अलग-अलग राज्यों में संवाद व सेवा के कार्यक्रमों से भी जुड़ाव होगा। आज से 7 अक्टूबर तक चलने वाली यह यात्रा हमेशा स्मरणीय रहेगी।

    पीएम की सेवा संकल्प यात्रा में सहभागी हैं भारतवासी
    सीएम ने कहा कि आज से 75 वर्ष पहले वडनगर से भी एक यात्रा प्रारंभ हुई थी। वहां के सामान्य परिवार में जन्म लेकर भारत के प्रधानमंत्री और विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता के रूप में मोदी जी की यात्रा देश-दुनियावासी देख रहे हैं। 25 वर्ष पहले सेवा की जो यात्रा मोदी जी ने गुजरात से प्रारंभ की थी, उसमें भारत का हर नागरिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहभागी रहा है।

    गांव, गरीब, नारी, युवा समेत सबके जीवन में बदलाव
    सीएम ने प्रधानमंत्री की 25 वर्ष की शानदार यात्रा में आए बदलाव की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि गांव अपनी बदलती कहानी को सुनाते हुए आत्मनिर्भर हो गए हैं। आजादी के बाद दशकों तक गरीबों को आवास नहीं मिला, लेकिन पीएम मोदी जी ने 12 वर्ष में 4 करोड़ लोगों को आवास उपलब्ध कराया। नारी गरिमा का जिक्र करते हुए सीएम ने परिवर्तन की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि घर में शौचालय न होने के कारण नारी को अंधेरा होने का इंतजार करना पड़ता था, किंतु आज 12 करोड़ घरों में बने शौचालय नारी गरिमा के प्रतीक हैं।

    गांव-गांव में इंटरनेट व बैंकिंग सेवा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी जी के 25 वर्ष के सेवा संकल्प की यह यात्रा बिना किसी सिफारिश, लेनदेन के योग्यतानुसार युवाओं को नौकरी मिलने की कहानी सुनाती है। यह यात्रा 11 करोड़ परिवारों में उज्जवला योजना के तहत हर माता के जीवन में आए बदलाव की कहानी भी सुना रही है। जिन गांवों ने आजादी के बाद दशकों तक बिजली नहीं देखी, अब वहां हर घर में दूधिया प्रकाश चमकता है। गांव-गांव में इंटरनेट व बैंकिंग सेवा मिल रही है। यह कहानी उस गरीब की भी है, जिसे पीएम मोदी ने अपने विजन से सामान्य परिवार के रूप में स्थापित करने के लिए स्वस्थ माहौल उपलब्ध कराया। इस यात्रा में आयुष्मान भारत के तहत वार्षिक स्वास्थ्य बीमा कवर के कारण 60 करोड़ लोगों के जीवन में आए बदलाव की कहानी भी है।

    *युवाओं के जीवन में भी आया परिवर्त

  • सत्ता के लिए व्याकुल हैं अखिलेश, मोदी-योगी का विकास नहीं दिख रहा… राजभर का सपा पर तीखा हमला

    सत्ता के लिए व्याकुल हैं अखिलेश, मोदी-योगी का विकास नहीं दिख रहा… राजभर का सपा पर तीखा हमला

    लखनऊ
    एक्सप्रेसवे, ऑनलाइन पेमेंट, वक्फ संपत्ति, सरकारी नौकरियों और कानून-व्यवस्था को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों पर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तीखा पलटवार किया। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव सत्ता पाने के लिए व्याकुल हैं, इसलिए उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास के काम पसंद नहीं आ रहे। उन्होंने कहा कि सड़कें बनती हैं तो टूटती भी हैं और टूटने पर ठेकेदार उन्हें दोबारा बनाता है। अगर अखिलेश को सड़कों की चिंता है तो उन्हें अपने कार्यकाल की सड़कों को भी झांककर देखना चाहिए।

    ‘ऑनलाइन पेमेंट पर चुंगी की बात कर गुमराह कर रहे अखिलेश’
    ऑनलाइन पेमेंट पर चुंगी लगाए जाने के अखिलेश यादव के आरोप पर राजभर ने कहा कि उन्हें सही जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 95 प्रतिशत लोगों पर इसका कोई भार नहीं है, जबकि 5 प्रतिशत सक्षम लोगों पर भार है। राजभर ने आरोप लगाया कि विपक्ष इसी तरह की बातों से लोगों को गुमराह कर रहा है।

    सीए-एनआरसी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसके विरोध में विपक्षी दलों ने आंदोलन किया और दिल्ली का शाहीन बाग पूरे देश में चर्चा का विषय बना, लेकिन कानून लागू हुआ। राजभर ने दावा किया कि लागू होने के तीन साल से ज्यादा समय बाद भी एक भी मुसलमान देश से नहीं निकाला गया।

    ‘वक्फ की संपत्ति का हिसाब होने लगा तो विपक्ष परेशान’
    वक्फ बोर्ड की संपत्ति के मुद्दे पर राजभर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कानून आने के बाद विपक्षी दल रोना-रोने लगे कि अब क्या होगा। उन्होंने कहा कि संपत्ति ‘उम्मीद’ पोर्टल पर दर्ज होने के बाद चोरी नहीं की जा सकेगी।

    राजभर ने आरोप लगाया कि सपा, बसपा और कांग्रेस की सरकारों के दौरान वक्फ की करोड़ों की संपत्ति को हजारों में लेकर किसी ने होटल बनाया, किसी ने मॉल बनाया और किसी ने बेच दिया। उन्होंने कहा कि अब रिकॉर्ड दर्ज होने की व्यवस्था से ऐसे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

    ‘अखिलेश के कार्यकाल में नौकरी बिकती थी’
    सरकारी नौकरियों को लेकर अखिलेश यादव के दावों पर राजभर ने कहा कि उन्हें सही जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार अपने कार्यकाल में 9.5 लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां दे चुकी है। वहीं, अखिलेश सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में नौकरियां बिकती थीं।

    राजभर ने दावा किया कि नौकरी का विज्ञापन निकलते ही शिवपाल यादव और उनके लोग सक्रिय हो जाते थे। उनके मुताबिक पांच, दस और पंद्रह लाख रुपये तक की बोली लगती थी। पैसा लेने के बाद सूची बनती थी, शिवपाल यादव सूची तैयार करते थे, अखिलेश यादव उस पर दस्तखत करते थे और संबंधित विभाग उसी सूची को जारी करता था।

    ‘नौकरियां बिना पैसे मिल रही हैं, इसलिए परेशान हैं’
    राजभर ने कहा कि अब योगी सरकार बिना पैसे के नौकरियां दे रही है, इसलिए अखिलेश यादव परेशान हैं। अखिलेश के सत्ता में आने पर नौकरी देने के दावे पर तंज कसते हुए उन्होंने पूछा, ‘कहां से देंगे, अपने घर से?’ उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश खुलकर नहीं कह पा रहे कि सरकार बनने पर अपनी जाति को नौकरी देंगे।

    राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव ने अपने पांच साल के कार्यकाल में अपनी बिरादरी को आगे बढ़ाने का काम किया और अब उन्हें चिंता है कि योगी सरकार नौकरियां देती गई तो सत्ता में लौटने पर उनके लोगों को नौकरी कैसे मिलेगी।

    ‘सपा सरकार में गुंडों की सरकार कही जाती थी’
    इबर और महिला अपराध को लेकर अखिलेश यादव के आरोपों पर राजभर ने उन्हें अपने गिरेबान में झांकने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार को गुंडों की सरकार कहा जाता था। मुजफ्फरनगर दंगे का जिक्र करते हुए राजभर ने आरोप लगाया कि जब मुजफ्फरनगर जल रहा था और लोग मारे जा रहे थे, तब सैफई में नाच देखा जा रहा था।

    राजभर ने दावा किया कि सपा सरकार के दौरान एक हजार दंगे हुए, कर्फ्यू लगा और 1,200 लोगों की जान गई। उन्होंने कहा कि उस दौर में हर जिले में एक माफिया होता था, गैंगवार चलता था और लोग असलहे लहराते हुए सड़कों पर घूमते थे। राजभर ने सवाल किया कि क्या अखिलेश यादव उसी तरह का राज चाहते हैं। उन्होंने योगी सरकार को कानून के राज वाली सरकार बताते हुए कहा कि आज अपराध करने वाला 48 घंटे के भीतर जेल की सलाखों के पीछे पहुंच जाता है।

    ‘मंदिर भी बनाएंगे और मौलाना के साथ नमाज भी पढ़ेंगे?’
    अखिलेश यादव के मंदिर बनवाने के बयान पर भी राजभर ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि जो मंदिर बनवाने की बात करते हैं, वही मौलाना के साथ जाकर नमाज भी पढ़ते हैं। राजभर ने सवाल किया कि मंदिर बनाकर वहां पूजा भी करेंगे और टीका लगाकर नमाज पढ़ने भी जाएंगे?

  • पृथ्वी शॉ की शादी पर लगा ब्रेक? आकृति अग्रवाल से टूटा रिश्ता, सोशल मीडिया पर संकेत

    पृथ्वी शॉ की शादी पर लगा ब्रेक? आकृति अग्रवाल से टूटा रिश्ता, सोशल मीडिया पर संकेत

    मुंबई 

    क्रिकेटर पृथ्वी शॉ एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वह ऑफ फील्ड अपनी निजी जिंदगी में बड़े बदलाव से गुजर रहे हैं। पृथ्वी शॉ और उनकी मंगेतर अभिनेत्री आकृति अग्रवाल ने गुरुवार को आपसी सहमति से सगाई तोड़ने का फैसला किया है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आकृति ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी पुष्टि की। उन्होंने अपने इस फैसले के बारे में बताया और कहा कि उनके मुताबिक इस संबंध का आगे कोई भविष्य नहीं बचा था। दोनों की अपेक्षाएं और जिम्मेदारियां अलग-अलग थीं और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने साथ छोड़ने का फैसला लिया।

    आकृति अग्रवाल ने शेयर किया इमोशनल मैसेज
    भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल ने मार्च 2026 में सार्वजनिक रूप से सगाई की थी। हालांकि 6 महीने के अंदर ही उन्होंने अलग होने का फैसला कर लिया है। उन्होंने आपसी सहमति से सगाई तोड़ने का फैसला किया है। आकृति ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, ''भारी दिल से बताना चाहती हूं कि मैं और मेरे मंगेतर अब अलग हो रहे हैं। आगे की जिंदगी को लेकर हमारे सोच और हालात अलग हैं, इसलिए हमने ये फैसला लिया है।''

    उन्होंने आगे लिखा, 'चाहे हम एक-दूसरे से कितना भी प्यार और परवाह क्यों न करते हों, लेकिन अब ये मान लिया है कि हमारी राहें एक नहीं हैं। जिम्मेदारियों और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए हम दोनों ने मिलकर अलग होने का फैसला लिया है।''

    आकृति अग्रवाल और पृथ्वी शॉ ने अलग होने की वजह बने हालातों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। लेकिन उनकी उन्होंने पृथ्वी को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी है। उन्होंने लिखा, “आगे बढ़ते हुए मैं सच में हम दोनों के लिए बेहतरीन भविष्य, शांति और खुशी की कामना करती हूं।”

    आकृति ने कहा, “इस मुश्किल समय में सभी से विनती है कि हमारी प्राइवेसी का सम्मान करें और हमारे इस फैसले के पीछे की वजहों को लेकर किसी तरह का अनुमान या अटकलें लगाने से बचें। समझने और हमारे हालात का सम्मान करने के लिए धन्यवाद।''

    पृथ्वी शॉ का क्रिकेट करियर
    युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को एक समय भारतीय टीम का उभरता हुआ सितारा माना गया था और उनकी तुलना कई बड़े दिग्गजों से होती थी लेकिन खराब फॉर्म और गलत वजहों के कारण वह भारतीय टीम से बाहर हो गए और फिर वापस लौटने में वह अभी तक सफल नहीं हुए हैं। उन्होंने 2018 में टेस्ट डेब्यू पर भारत के लिए शतक लगाया था और सुर्खियां बटोरी थी। हाल के सालों में फिटनेस और फॉर्म के कारण टीमों ने उनसे दूरी बना ली। आईपीएल 2025 में वह अनसोल्ड रहे थे और फिर उससे पहले मुंबई ने अपनी टीम से बाहर कर दिया था। हालांकि उन्हें आईपीएल 2026 के लिए दिल्ली कैपिटल्स ने अपनी टीम में शामिल किया था। उन्होंने भारत के लिए टेस्ट में 5 मैच खेलते हुए 339 रन बनाए। वनडे में उन्होंने 6 मैचों में 189 रन बनाए। टी20 इंटरनेशनल में उन्हें सिर्फ एक मैच खेलने का मौका मिला।