Author: NewseDay

  • सीएम बोले- पहले कारीगर उद्यमी था, बाजार-बैंक और तकनीक से दूर होने के कारण श्रमिक बनने को मजबूर हुआ

    सीएम बोले- पहले कारीगर उद्यमी था, बाजार-बैंक और तकनीक से दूर होने के कारण श्रमिक बनने को मजबूर हुआ

    लखनऊ 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 के अवसर पर प्रदर्शनी एवं मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सरकारों को सैफई में महोत्सव आयोजित कर मुंबई से डांस कराने और बर्मिंघम की बग्गी लाकर अपना जन्मदिन मनाने से फुर्सत न हो, तब कारीगरों के बारे में सोचने का समय कहां से आता। उन्होंने कहा कि तब स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के बारे में सोचने की भी फुर्सत नहीं थी। हमारी सरकार ने परंपरागत कारीगरों के हुनर को सम्मान देने और उसे बाजार की आवश्यकता से जोड़ने का काम किया। वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना लागू की गई और वर्ष 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई।

    छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को प्रदान की टूलकिट 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की जयंती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस का यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण है। कारीगरों और हस्तशिल्पियों के सम्मान का यह कार्यक्रम नए भारत के शिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वकर्मा से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन दिया। उत्तर प्रदेश में 2019 से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षण, टूलकिट तथा स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। पिछले सात-आठ वर्षों में छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को टूलकिट उपलब्ध कराने के साथ प्रशिक्षण दिया गया है और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया गया है।

    भगवान विश्वकर्मा के मानस प्रतिनिधि हैं हमारे कारीगर

    मुख्यमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा के शिल्प और उनकी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी अद्भुत शिल्पकला से भगवान विश्वकर्मा ने समाज के कल्याण में योगदान दिया। भगवान शिव का त्रिशूल, इंद्र का वज्र और श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र भी भगवान विश्वकर्मा की शिल्पकला से जुड़े उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई उद्योग या कारीगरी का क्षेत्र नहीं होगा, जहां विश्वकर्मा पूजन की परंपरा न रही हो। उन्होंने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भगवान राम को लंका पर चढ़ाई करनी थी, तब समुद्र पर सेतु का निर्माण करने वाले नल और नील भगवान विश्वकर्मा के मानस पुत्र माने जाते हैं। सौ योजन समुद्र में बिना पिलर के सेतु का निर्माण कुछ ही दिनों में पूरा होना उस समय की अद्भुत कारीगरी और शिल्पकला को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा के उन्हीं मानस प्रतिनिधियों के रूप में आज हमारे कारीगर और हस्तशिल्पी समाज के सामने हैं।

    पहले कारीगर उद्यमी था, फिर श्रमिक बनने को मजबूर हुआ

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत उस समय दुनिया में विकसित था, जब भारत का कारीगर उद्यमी था और हस्तशिल्पी आत्मनिर्भर था। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने गरीबी और पैसे का हवाला देकर कारीगरों को सुविधाओं से वंचित रखा। उनके पास हुनर और कारीगरी थी, लेकिन बाजार उनसे दूर कर दिया गया। बैंकिंग व्यवस्था से उन्हें दूर रखा गया और डिजाइन तथा तकनीक की बदलती मांग के अनुरूप उन्हें आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इसका परिणाम यह हुआ कि जो कारीगर कभी उद्यमी हुआ करता था, वह श्रमिक बनने और बदहाली में जीवन जीने को मजबूर हो गया। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री का दायित्व मिलने पर उन्होंने प्रदेश के कारीगरों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उस समय हस्तशिल्पी और कारीगर हताश और निराश थे तथा पलायन कर रहे थे। जिनके परिश्रम से प्रदेश में रौनक और रोजगार का सृजन होता था, वही कारीगर कथित बीमारी, भ्रष्टाचार और अराजकता के कारण प्रदेश से बाहर जाने को मजबूर थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति यह थी कि कारीगरों के हित में काम करने के बजाय लोग कारीगरों से वसूली और उनका शोषण करते थे।

    प्रशिक्षण के साथ मानदेय और टूलकिट भी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने यह समझा कि बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी जैसे परंपरागत कार्य करने वाले लोग रोजाना मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। यदि उन्हें प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा तो प्रशिक्षण अवधि में उनके परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। इसलिए सरकार ने केवल प्रशिक्षण देने के बजाय प्रशिक्षण के साथ मानदेय, प्रशिक्षण पूरा होने पर टूलकिट और उसके बाद बैंक से जोड़ने की व्यवस्था की। उन्होंने बताया कि योजना के तहत 10 दिन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है और प्रशिक्षण के दौरान ₹5,000 का मानदेय उपलब्ध कराया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ₹15,000 तक की टूलकिट दी जाती है। इसका उद्देश्य पारंपरिक हुनर को आज की बाजार और समाज की मांग के अनुरूप विकसित करना है।

    16 से बढ़कर 25 ट्रेड, परंपरागत कारीगरों के साथ युवाओं को भी अवसर

    मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के पहले चरण में 16 ट्रेड शामिल किए गए थे। इनमें 11 पारंपरिक ट्रेड-बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी थे। अब सरकार ने पांच नए पारंपरिक ट्रेड भी जोड़े हैं। इनमें मूर्तिकार, दूधिया, माला बनाने वाला माली, भड़भूजा और मछुआरा शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन पारंपरिक कार्यों से समाज का पेट भरता रहा, उनके करने वालों को लंबे समय तक पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। सरकार ने अब ऐसे लोगों के साथ खड़े होकर उन्हें आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा युवाओं की रुचि और आज की जरूरतों को देखते हुए मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक आइटम की मरम्मत, विद्युत उपकरणों का रिपेयर, प्लंबिंग, कंप्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर जैसे ट्रेड भी जोड़े गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा अपनी रुचि के अनुसार किसी भी ट्रेड में जा सकता है। इन 25 ट्रेड का मूल उद्देश्य एक ही है कि कारीगर और हस्तशिल्पी श्रमिक न बने, बल्कि उद्यमी बने।

    ₹10 लाख तक ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कारीगर को उद्यमी बनाने की प्रक्रिया में प्रशिक्षण और टूलकिट के साथ बैंक से जोड़ना भी जरूरी है। सीएम युवा उद्यमी योजना में युवाओं को ₹5 लाख तक का ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण दिया जा रहा है, जबकि कारीगरों के लिए इसकी सीमा ₹10 लाख तक की गई है। इसमें ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण के साथ 10 से 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी की व्यवस्था भी है। उन्होंने कहा कि सरकार कारीगर के साथ मजबूती से खड़ी है। कारीगर को ऋण के लिए गारंटी देने की जरूरत नहीं है और ब्याज का भार भी सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि बैंक कारीगर को ऋण उपलब्ध कराएं, सरकार ब्याज की जिम्मेदारी उठाएगी।

    हर जिले में टूलकिट वितरण और ऋण की सुविधा

    मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 सितंबर से 29 सितंबर तक हर जनपद में टूलकिट वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कारीगरों को टूलकिट के साथ ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी कारीगर को ₹8 लाख, किसी को ₹2 लाख और किसी को ₹1 लाख का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बैंकों के अधिकारी भी इन कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं और कारीगरों को मौके पर ही बैंक ऋण से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कारीगर को आत्मनिर्भर बनाना है।

    96 लाख एमएसएमई यूनिट, 3.25 करोड़ लोगों को रोजगार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को आगे बढ़ाने की नीति का परिणाम प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश में अब 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं, जिनमें करीब 3 करोड़ 25 लाख लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था, जबकि प्रदेश के पास सबसे बड़ी आबादी, सबसे उर्वरा भूमि, पर्याप्त जल संसाधन और सबसे युवा जनशक्ति थी। अब उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की चर्चा होती है तो उत्तर प्रदेश की भी गिनती होती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश बीमारू नहीं था, बल्कि इसे संचालित करने वाले राजनेताओं की मानसिकता बीमारू थी, जिन्होंने हस्तशिल्प और कारीगरों का सम्मान नहीं किया।

    इंडिया एक्सपो सेंटर में लगेगा यूपी का ट्रेड शो

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का यह एक हिस्सा है। इसी क्रम में 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर में उत्तर प्रदेश ट्रेड शो आयोजित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश के उद्यमियों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों द्वारा तैयार उत्पादों को शोकेस किया जाएगा। इसमें ढाई हजार से अधिक एग्जिबिटर्स भाग लेंगे और साढ़े छह सौ से अधिक फॉरेन बायर्स भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि ट्रेड शो में ₹12 हजार करोड़ से ₹15 हजार करोड़ तक का टर्नओवर हो सकता है। यहां होने वाले ऑर्डर और बिक्री से प्राप्त धन सीधे प्रदेश के कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों तक पहुंचेगा। इससे कारीगरों की आय बढ़ेगी और प्रदेश के विकास को गति मिलेगी।

    इस अवसर पर, उत्तर प्रदेश सरकार में सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यम विभाग के मंत्री भूपेंद्र चौधरी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास के आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यम विभाग शशि भूषण लाल सुशील, एसएलबीसी के कन्वीनर शैलेंद्र कुमार सिंह, आयुक्त एवं निदेशक उद्योग के विजेंद्र पांडियन समेत कारीगर और हस्तशिल्पी उपस्थित रहे। 

    सीएम ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को वितरित की टूल किट

    मुख्यमंत्री ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत विभिन्न जिलों के लाभार्थियों को टूल किट वितरित की। टूल किट पाने वालों में अयोध्या के श्रवण कुमार और राम तीरथ, बाराबंकी के राम जयसवाल और वंदना, उन्नाव के रंजीत, हरदोई के बाबूराम, कानपुर के शिवसेवक और अवधेश, रायबरेली के शाहिद खान, इटावा के विजयपाल तथा लखनऊ के मनीष शामिल रहे।

    लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए वितरित किए चेक

    मुख्यमंत्री ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए चेक भी वितरित किए। चेक पाने वालों में लखनऊ के प्रकाश दीन साहू को 8 लाख रुपये, राहुल कुमार को 1 लाख रुपये और मोहम्मद मुस्ताक को 2 लाख रुपये का चेक दिया गया। वहीं, उन्नाव के रामबाबू को 1.50 लाख रुपये और आनंद कुमार को 1 लाख रुपये का चेक वितरित किया गया। इसके साथ ही कॉरपोरेट प्रशिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू तथा वीएसएसवाई 2.0 के मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ किया गया।
    विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 से पारंपरिक कारीगरों को मिलेगा आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता का संबल : भूपेंद्र चौधरी

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने कारीगरों और हस्तशिल्पियों के चौमुखी उत्थान के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और ओडीओपी जैसी कारीगरपरक योजनाओं की देशभर में चर्चा हो रही है। पिछले वर्षों में इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 6 लाख से अधिक हस्तशिल्पियों एवं कारीगरों को लाभान्वित किया गया है। इससे उनकी दक्षता और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ उन्हें नए बाजार भी उपलब्ध हुए हैं। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के अंतर्गत योजना का दायरा बढ़ाते हुए पारंपरिक एवं आधुनिक व्यवसायों को शामिल किया गया है। भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि योजना के माध्यम से कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण और टूलकिट उपलब्ध कराने के साथ उनके उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम में योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई और वीएसएसवाई 2.0 के मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ किया गया। उन्होंने बताया कि प्लेज योजना के अंतर्गत 14 जनपदों में 205.8 एकड़ से अधिक भूमि स्वीकृत की जा चुकी है तथा इनमें 668 भूखंड उपलब्ध कराए गए हैं। 

    प्रदर्शनी में लगाए गए हैं 125 स्टॉल
    ‘विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026’ पर आधारित प्रदर्शनी 17 से 19 सितंबर, 2026 तक आयोजित की जा रही है। प्रदर्शनी में ओडीओपी, ओडीओसी, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, एमएसएमई, सेक्टर स्किल काउंसिल, फ्रेंचाइजी ब्रांड एवं बैंक से संबंधित 125 स्टॉल लगाए गए हैं। प्रदर्शनी में 25 ट्रेड से जुड़े कारीगरों और उद्यमियों को व्यवसाय विस्तार, तकनीकी उन्नयन, बाजार की मांग, गुणवत्तापूर्ण उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग एवं विपणन आदि के संबंध में मार्गदर्शन दिया जा रहा है। साथ ही कॉरपोरेट प्रशिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू भी किए गए।

  • झारखंड में राशन कार्ड सत्यापन शुरू, निष्क्रिय कार्ड दोबारा सक्रिय कराने को मिलेगा तीन माह का मौका

    झारखंड में राशन कार्ड सत्यापन शुरू, निष्क्रिय कार्ड दोबारा सक्रिय कराने को मिलेगा तीन माह का मौका

    रांची
    केंद्र सरकार के निर्देश के बाद खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने राज्य में राशन कार्डों के सत्यापन और निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. एक अक्तूबर से राज्यभर में कुल 2,87,893 राशन कार्ड निष्क्रिय कर दिए जाएंगे. इनमें छह महीने से खाद्यान्न नहीं उठाने वाले साइलेंट कार्ड और केंद्रीय रिपॉजिटरी के साथ मिलान में सामने आये डुप्लीकेट लाभुक शामिल हैं. विभाग ने ऐसे सभी कार्डधारियों और लाभुकों के लिए ई-केवाइसी कराना अनिवार्य कर दिया है. ई-केवाइसी और जरूरी सत्यापन नहीं कराने पर संबंधित कार्ड या लाभुक का नाम रद्द किया जा सकता है.

    छह माह से राशन नहीं उठाने वाले 1,77,751 कार्ड चिह्नित
    राज्य में छह महीने से खाद्यान्न नहीं उठाने वाले 1,77,751 राशन कार्ड चिह्नित किए गए हैं. ऐसे कार्डों को हर माह की 21 तारीख को चिह्नित किया जाएगा और अगले महीने की पहली तारीख को स्वतः निष्क्रिय कर दिया जाएगा. वहीं, केंद्रीय रिपॉजिटरी के साथ मिलान के दौरान 1,10,142 डुप्लीकेट लाभुकों की पहचान की गई है. इन लाभुकों के कार्ड भी निष्क्रिय किये जा रहे हैं.

    निष्क्रिय कार्ड को दोबारा सक्रिय कराने के लिए तीन माह का मौका
    निष्क्रिय किए गए कार्डधारियों और लाभुकों को ई-केवाइसी और जरूरी सत्यापन कराने के लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा. संबंधित लाभुक अपने जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) डीलर या प्रखंड कार्यालय के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी करा सकेंगे. सत्यापन में पात्र पाए जाने पर लाभुक का कार्ड या नाम दोबारा सक्रिय कर दिया जाएगा. वहीं, तय समय सीमा में ई-केवाइसी और सत्यापन नहीं कराने पर संबंधित नाम को स्थायी रूप से सूची से हटाया जा सकता है. विभाग ने इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं.

  • दिशा सालियान केस में नया मोड़, आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख को ₹500 करोड़ का नोटिस

    दिशा सालियान केस में नया मोड़, आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख को ₹500 करोड़ का नोटिस

    मुंबई

    सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में दिशा के पिता सतीश सालियन ने दोनों से हर्जाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इन दोनों नेताओं ने उनकी इस कानूनी लड़ाई को राजनीति से प्रेरित बताने की कोशिश की।

    आपको बता दें कि दिशा सालियन की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची बिल्डिंग से गिरने से हुई थी। पुलिस ने इस घटना को दुर्घटना माना और एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की। इसके छह दिन बाद एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत हो गई। दिशा के पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और FIR दर्ज करने के साथ-साथ नए सिरे से जांच की मांग की थी। याचिका में आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत कई लोगों पर आरोप लगाए गए। इस घटना के करीब छह साल बाद सीबीआई ने कोर्ट के आदेश पर जांच शुरू कर दी है।

    500 करोड़ रुपये का नोटिस
    500 करोड़ रुपये के इस कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे पर सतीश सालियन के इरादों पर सवाल उठाने और उनकी इस कानूनी लड़ाई को राजनीति से प्रेरित बताने का आरोप लगाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि आदित्य ठाकरे ने उनकी इस कानूनी लड़ाई को दुर्भावनापूर्ण बताया था।

    वकील द्वारा भेजे गए लीगल नोटिस में लिखा है, “मेरे मुवक्किल सतीश सालिया पर ये सारे आरोप झूठे, बेबुनियाद, गैर-जिम्मेदाराना और गंभीर रूप से मानहानि करने वाले हैं। ये आरोप बिना किसी विश्वसनीय सबूत के आधार पर लगाए गए हैं। सतीश सालियान की ईमानदारी और विश्वसनीयता पर सीधा सवाल उठाया गया। एक दुखी पिता को एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर दिखाया गया है जो गलत, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक मकसद के लिए न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है। वह सिर्फ अपनी बेटी के कथित गैंगरेप और हत्या की कानूनी जांच चाहता हैं।”

    इस कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे पर यह गलत दावा करने का भी आरोप लगाया गया है कि सीबीआई ने दिशा सालियन मामले की जांच पहले ही कर ली थी और उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। ठाकरे ने आरोप लगाया था कि सालियन का इस्तेमाल उन्हें परेशान करने के लिए एक हथियार के तौर पर किया जा रहा था। अनिल देशमुख ने इस दावे का समर्थन किया। 23 मार्च 2025 को अनिल देशमुख ने कहा था कि दिशा सालियन केस आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की एक साजिश थी।

    सार्वजनिक माफी की मांग
    सतीश सालियन ने बिना शर्त, स्पष्ट और पूरी तरह से लिखित और सार्वजनिक माफी की मांग की है। इस माफीनामे को सभी प्रमुख प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित और प्रसारित किया जाना चाहिए। वीडियो माफीनामा कम से कम तीन मिनट लंबा होना चाहिए और इसे दोनों नेताओं के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया जाना चाहिए।

  • स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 के अंतर्गत 50 लाख निजी संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान का शुभारंभ

    स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 के अंतर्गत 50 लाख निजी संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान का शुभारंभ

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वामित्व योजना शुरू होने से ग्रामीण आबादी को उनका अधिकार मिलेगा। हमारी सरकार द्वारा प्रदेश के 41 हजार से अधिक गांवों में एक माह तक अभिलेखों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का अभियान चलाया जा रहा है। पैतृक और अपनी संपत्ति हर परिवार का सपना होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद  नितिन नबीन की उपस्थिति में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 योजना में निजी सम्पत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री दस्तावेज प्रदान करने के अभियान के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान का शुभारंभ हो रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन का पहली बार मध्यप्रदेश की धरती पर आगमन हुआ है। हम सभी उनका अभिनंदन करते हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने दुनिया को भारत की शक्ति से परिचित करवाया है। हाल ही में नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट के दौरान दुनिया ने इसे महसूस किया है। प्रधानमंत्री  मोदी देशवासियों के कल्याण के लिए कई योजनाओं के माध्यम से लगातार काम कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज प्रधानमंत्री  मोदी का जन्मदिवस है और भगवान विश्वकर्मा की भी जयंती है। भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि की रचना के साथ-साथ सभी प्रकार के छोटे काम करने वालों को स्वावलंबन की राह दिखलाई। राज्य सरकार छोटे कामगारों के साथ खड़ी है। हमारी सरकार ने लाड़ली बहनों के कल्याण के लिए 55 हजार करोड़ से अधिक राशि अब तक उनके खातों में अंतरित की है। माताओं-बहनों के आशीर्वाद से प्रदेश समृद्ध हो रहा है। बहनों को रोजगार आधारित उद्योग में काम करने पर हर माह 5000 रुपए की प्रोत्साहन राशि का लाभ अलग से मिलेगा। हमारी सरकार उन सभी स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित कर रही हैं, जहां भगवान कृष्ण और भगवान राम के चरण पड़े हैं।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं राज्यसभा सांसद  नवीन ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 के अंतर्गत तीन हितग्राहियों को निःशुल्क पंजीयन विलेख (रजिस्ट्री) प्रदान किए।

    स्वामित्व योजना एक अनमोल उपहार :  नितिन नबीन

    राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर स्वामित्व योजना के रूप में एक अनमोल उपहार दिया है। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने सुशासन, धर्म संस्कृति और जनसेवा के लिए मजबूत नींव रखी थी। उन्होंने विधवा बहनों को संपत्ति का अधिकार और कानूनी सुरक्षा देने की पहल की थी। इसी से प्रेरणा लेकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामित्व योजना के माध्यम से गरीब के सपनों को जमीन पर उतारने का सराहनीय कार्य किया है। इस योजना की शुरुआत देवी अहिल्या की नगरी इंदौर से हो रही है। यह रजिस्ट्री केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण आबादी को स्वाभिमान से जीने का अधिकार है। दशकों से गांवों के लोगों को अपनी जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला। प्रधानमंत्री  मोदी ने देश में स्वामित्व योजना लागू की, जिसका सुखद परिणाम अब मध्यप्रदेश में देखने को मिल रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेशभर में करीब 68 लाख भूखंडों का सर्वे किया है। आज से पचास लाख लोगों को नि:शुल्क रजिस्ट्री कर अधिकार दिलाने की शुरुआत हुई है। इसके लिए राज्य सरकार ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। आज भगवान विश्वकर्मा की जयंती है। देश के श्रमिक और मेहनतकश लोगों को भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद मिलता रहा है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष  नबीन ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिवस पर हमने सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री  मोदी के संकल्प के बलबूते आज देश के 80 करोड़ घरों तक नि:शुल्क अनाज पहुंचाया जा रहा है। कोविड के दौर में नि:शुल्क वैक्सीन उपलब्ध कराई गई। देशभर में गरीबों के जनधन बैंक खाते खोले गए। गरीब-जरूरतमंदों को स्वाभिमान से जीने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री जी ने पिछले 25 सालों से सेवा और समर्पण भाव से देश की सेवा की है। मध्यप्रदेश की धरती से हम सभी मिलकर प्रधानमंत्री  मोदी की दीर्घायु के लिए आशीर्वाद का दीया जलाएंगे। प्रधानमंत्री  मोदी जब किसी वैश्विक आयोजन में जाते हैं तो दुनिया में भारत का डंका बजता है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने 17 सितंबर 2025 को स्वस्थ नारी शक्ति परिवार योजना का शुभारंभ किया। वर्ष 2023 में इसी दिन देश के कारीगरों और शिल्पकारों के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की। आज दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया-2026 का उद्घाटन हो रहा है। मध्यप्रदेश में 50 लाख लोगों को स्वामित्व योजना का लाभ दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी ने हर योजना में अंत्योदय के भाव को सर्वोपरि रखा है। प्रधानमंत्री के संकल्प से अयोध्या में भव्य राम मंदिर और उज्जैन में महाकाल महालोक का निर्माण हो चुका है। देश की 3 करोड़ से अधिक लखपति बहनें स्वावलंबी बनी हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं 93 लाख बहनें आजीविका मिशन के माध्यम से देश के विकास में योगदान दे रही हैं। युवाओं के लिए स्टार्टअप योजना और मुद्रा योजना संचालित हैं। देश में 2 लाख स्टार्टअप आगे बढ़ रहे हैं, जो दूसरों को रोजगार के अवसर दे रहे हैं।

    प्रधानमंत्री  मोदी ने सीमावर्ती गांवों में विकास को प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री  मोदी ने गरीब-जरूरतमंदों को केंद्र में रखते हुए योजनाएं बनाई हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने विकसित भारत @2047 का सपना देखा है। देश का हर नागरिक अपना विकास करेगा तो देश भी निश्चित रूप से आगे बढ़ेगा।

    उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को सुशासन और जनकल्याण के कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। आज पूरे देश के साथ मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री  मोदी का जन्मदिवस उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन भी पहली बार मध्यप्रदेश की धरती पर आए हैं। प्रधानमंत्री  मोदी का पूरा जीवन सेवा, समर्पण और अंत्योदय को समर्पित रहा है, उन्होंने राजनीति को कभी सत्ता का साधन नहीं माना। इसी पावन भावना को आधार बनाकर मध्यप्रदेश सरकार स्वामित्व योजना का शुभारंभ कर रही है। प्रधानमंत्री  मोदी का मानना है कि हर गरीब और जरूरतमंद के पास उसका पक्का मकान होना चाहिए। स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 अभियान के पुनीत कार्य में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विशेष सेवाभाव और समर्पण शामिल रहा है। यह सिर्फ कागजी दस्तावेज नहीं, बल्कि गरीब के स्वाभिमान और उनके स्वर्णिम भविष्य की पक्की मुहर है।

    प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक  हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने गांव, गरीब, किसान, महिला और युवाओं के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं। गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन, बैंक खाते, पक्के मकान और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने का कार्य किया गया है। इसी क्रम में ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से अपनी संपत्ति पर निवास कर रहे लोगों को उनके मकानों और भूमि के वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में स्वामित्व योजना महत्वपूर्ण पहल है। मध्यप्रदेश में लगभग 50 लाख लोगों को उनके घरों के दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण परिवारों को अपनी संपत्ति का अधिकारिक दस्तावेज मिलेगा और आवश्यकता पड़ने पर बैंक ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ लेने में भी सहायता मिलेगी। लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता लोककल्याण को माना था। उसी भावना के अनुरूप मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीणों के हित में कार्य कर रही है। बाबा महाकाल का आशीर्वाद, प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का संकल्प और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से प्रारंभ यह पहल ग्रामीण भारत के भविष्य को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने किया।

    विकास प्रदर्शनी का किया अवलोकन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद  नितिन नबीन और अतिथियों ने कार्यक्रम स्थल पर शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, कार्यक्रमों एवं जिले में संचालित विकासात्मक गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

    स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 में निजी सम्पत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री

    कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री  मोदी के सपने को पूरा करने की दिशा में राज्य सरकार ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 के अंतर्गत 50 लाख निजी संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान का शुरू किया है। अब प्रदेश के ग्रामीण भाइयों-बहनों को घरों की रजिस्ट्री के लिए कोई पैसा नहीं देना होगा। मध्यप्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में अब तक लगभग 68 लाख अधिकार पत्र तैयार किए गए हैं, इनमें 50 लाख निजी संपत्तियों के हैं। आज से इन्हीं मकान मालिकों को नि:शुल्क रजिस्ट्री देने के लिए राज्य सरकार लगभग 4 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

    पंचायत स्तर पर तीन चरणों में होंगे विशेष शिविर, स्थानीय स्तर पर पूरी होगी पंजीयन प्रक्रिया

    योजना के अंतर्गत हितग्राहियों की संपत्ति के आधार पर सुगमता से ऋण उपलब्ध कराने के लिए तैयार निजी अधिकार अभिलेखों का निःशुल्क पंजीयन किया जाएगा। पंजीयन के बाद नागरिक गृह निर्माण, व्यवसाय, कृषि एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण प्राप्त कर सकेंगे। प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ग्राम एवं पंचायत स्तर पर तीन चरणों में विशेष शिविर आयोजित होंगे। प्रथम चरण 17 से 19 सितंबर, द्वितीय चरण 24 से 26 सितंबर और तृतीय चरण 1 से 3 अक्टूबर तक होगा। आवेदन के लिए आबादी भूखंड की लैंड लिंकिंग और समग्र आईडी से ई-केवाईसी अनिवार्य होगी। ‘सारा’ मोबाइल एप के माध्यम से निष्पादन और ‘संपदा’ एप पर विलेख (रजिस्ट्री) के पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पंजीयन प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही पूर्ण करने के लिए पटवारी को निष्पादन अधिकारी तथा तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पीसीओ एवं एडीईओ को पंजीयन अधिकारी नियुक्त किया गया है। पंजीयन पूर्ण होने के बाद विलेख हितग्राही के मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। अभियान की जिला स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग एवं मैदानी समीक्षा की जाएगी और इसे एक माह में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

    कार्यक्रम में राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री  सावित्री ठाकुर, सांसद  शंकर लालवानी,  गजेंद्र पटेल तथा सु कविता पाटीदार, जिला पंचायत अध्यक्ष  रीना सतीश मालवीय,  महेंद्र सिंह, विधायकगण  रमेश मेंदोला,  गोलू शुक्ला,  मालिनी गौड़,  महेंद्र हार्डिया, सु उषा ठाकुर,  मधु वर्मा तथा  मनोज पटेल, सफाई कामगार आयोग के अध्यक्ष  प्रताप करोसिया,  सुमित मिश्रा तथा  श्रवण चावड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण और नागरिक भी उपस्थित रहें।

     

  • शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण से किसानों को राहत, अब साल में एक ही बार चुकाना होगा कर्ज

    शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण से किसानों को राहत, अब साल में एक ही बार चुकाना होगा कर्ज

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मना रही है। इसके तहत किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण, आधुनिक कृषि यंत्र, ड्रोन तकनीक, सिंचाई सुविधाओं सहित कृषि विकास से जुड़ी विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का प्रयास है कि खेती को लाभ का माध्यम बनाने के साथ किसान आय के अन्य स्रोतों को भी मजबूत किया जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव के अवसर पर सागर जिले के किसानों से वर्चुअली जुड़कर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव किसान कल्याण वर्ष के तहत भगवान बलराम और अन्नदाताओं को समर्पित है। सागर में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों की बेहतरी के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेलखंड के लिए केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बड़ी सौगात है। करीब एक लाख करोड़ रुपये की इस योजना से सागर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़ और छतरपुर सहित पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं बनेंगी। किसानों के हर खेत तक पानी पहुंचाने की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण योजना है। उन्होंने प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिवस पर उन्हें बधाई देते हुए बुंदेलखंडवासियों को भी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सागर और बुंदेलखंड क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार काम कर रही है। क्षेत्र में धान, गेहूं और ज्वार के साथ नकदी फसलों का उत्पादन भी हो रहा है। कृषि उत्पादन के साथ फूड प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना से किसानों को अपनी उपज के बेहतर मूल्य के अवसर मिलेंगे।

    शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण से लेकर दिन में 10 घंटे बिजली तक किसानों को मिलेंगी सुविधाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। अब किसानों को वर्ष में एक बार ही ऋण चुकाना होगा। उन्होंने कहा कि 31 मार्च तक ऋण चुकाने से जुड़ी परेशानी को समाप्त किया गया है। सरकार किसानों के लिए करीब 800 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि आगामी फसल सीजन में किसानों को दिन के समय 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। किसानों की सिंचाई संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बिजली व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाद को लेकर ई-टोकन की व्यवस्था की जा रही है, जिससे किसानों को खाद लेने के लिए लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए भी सरकार प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक को अपनाने से खेती में लगातार उन्नति हो रही है। किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों और ड्रोन तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से उद्यानिकी और फल उत्पादन को भी अपनाने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मछली पालन, बकरी पालन और मुर्गी पालन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। गांव-गांव में सहकारी समितियां बनाकर किसान अपना दूध सांची को उपलब्ध करा सकते हैं। इससे उन्हें दूध का उचित मूल्य मिलने के साथ वार्षिक बोनस का लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के माध्यम से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश वर्तमान में दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है और आने वाले समय में प्रदेश को पहले स्थान पर लाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी सीजन में किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा। किसान सोलर पंप लगाकर सिंचाई की सुविधा प्राप्त करने के साथ बिजली बिल से भी राहत पा सकते हैं।

    सागर के विकास को नई गति देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान की आय केवल फसल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मछली पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देकर किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने पर सरकार लगातार काम कर रही है। सरकार बनने के बाद सागर में आयुर्वेदिक कॉलेज और विश्वविद्यालय सहित विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी गई है। उन्होंने कहा कि सागर को विकास के नए आयामों तक ले जाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किसानों को दी जा रही किसान सम्मान निधि की राशि से किसानों की कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति समय पर हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों की महत्वपूर्ण आवश्यकता बिजली और सिंचाई के लिए जल की व्यवस्था लगातार की जा रही है। सड़क, अधोसंरचना, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत की साख एवं भारतीयों का सम्मान बढ़ा है।

    मंत्री  राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश में रबी उपार्जन के अंतर्गत इस वर्ष रिकॉर्ड 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं सरकार द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि अब मध्यप्रदेश में किसानों को उनकी भूमि का अधिग्रहण होने पर चार गुना मुआवजा प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने समस्त जिलेवासियों से अपील की कि प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिन के साथ प्रारंभ हुए सेवा संकल्प अभियान में भागीदार बनें और आज शाम सभी अपने घर-आंगन में आशीर्वाद का दीया अवश्य जलाएं।

    बलराम कृषि महोत्सव के अवसर पर नरयावली विधायक  प्रदीप लारिया ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच है कि शासन की योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा गरीब, किसान, महिला और युवा सहित सभी वर्गों के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से संबल प्रदान किया जा रहा है। किसानों की खेती से जुड़ी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकार सतत कार्य कर रही है तथा बिजली और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में विद्युत उत्पादन में वृद्धि हुई है और मध्यप्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा  अन्न के उत्पादन से किसानों में समृद्धि आ रही है और बिजली, सड़क, सिंचाई, रेल, चिकित्सा, तकनीकी सहित सभी बुनियादी क्षेत्रों में प्रदेश प्रगति कर रहा है।

    कार्यक्रम में एपेक्स बैंक प्रशासक  महेंद्र सिंह यादव, सागर कलेक्टर मती प्रतिभा पाल, भोपाल से आए कृषि वैज्ञानिक  सतीश परसाई तथा प्रगतिशील किसान  आकाश चौरसिया ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे।

     

  • योगी सरकार के ग्लोबल ट्रेड विजन को मिलेगी नई उड़ान, 25 सितंबर से शुरू होगा ट्रेड शो

    योगी सरकार के ग्लोबल ट्रेड विजन को मिलेगी नई उड़ान, 25 सितंबर से शुरू होगा ट्रेड शो

    योगी सरकार के ग्लोबल ट्रेड विजन को नई उड़ान देगा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण

    25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का होगा आयोजन, अब तक 45 हजार से ज्यादा घरेलू खरीदारों का पंजीकरण

    आयोजन में जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर और ऑस्ट्रिया जैसे देशों की होगी भागीदारी, पार्टनर कंट्री के रूप में होंगे सम्मिलित

    प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों, उत्पादों, सरकारी विभागों और विकास प्राधिकरणों को वैश्विक खरीदारों तथा निवेशकों के समक्ष किया जाएगा प्रस्तुत

    लखनऊ/ग्रेटर नोएडा
    उत्तर प्रदेश में निवेश, निर्यात और औद्योगिक विकास को वैश्विक बाजार से जोड़ने की योगी सरकार की पहल को चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 के माध्यम से नई गति मिलने जा रही है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में उत्तर प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों, उत्पादों, सरकारी विभागों और विकास प्राधिकरणों को वैश्विक खरीदारों तथा निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन में घरेलू खरीदारों के साथ अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर पंजीकरण, प्रचार और आमंत्रण प्रक्रिया चल रही है।

    1.5 लाख से ज्यादा घरेलू खरीदारों के पंजीकरण का लक्ष्य

    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में घरेलू बिजनेस-टू-बिजनेस खरीदारों के लिए अब तक 45 हजार से ज्यादा पंजीकरण किए जा चुके हैं और जैसे जैसे आयोजन की तिथि नजदीक आ रही है, पंजीकरण की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। घरेलू खरीदारों का लक्ष्य 1.5 लाख से अधिक रखा गया है। इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी के लिए करीब  1500 पंजीकरण प्राप्त हुए हैं। इनमें साक्षात्कार भी आयोजित किए जा चुके हैं, जबकि 500 से ज्यादा खरीदारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है और 300 से अधिक खरीदारों के टिकट सुरक्षित होने की जानकारी दी गई है। इस प्रकार आयोजन में उत्तर प्रदेश के उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने के लिए खरीदारों और प्रदर्शकों के बीच व्यावसायिक संवाद का व्यापक मंच तैयार किया जा रहा है। योगी सरकार की निवेश एवं निर्यातोन्मुखी नीतियों के संदर्भ में यह आयोजन प्रदेश के उद्यमियों, एमएसएमई इकाइयों, निर्यातकों और औद्योगिक संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में सामने आ रहा है।

    36,500 वर्गमीटर प्रदर्शनी क्षेत्र बुक

    ट्रेड शो के लिए 36,500 वर्गमीटर प्रदर्शनी क्षेत्र बुक किया जा चुका है, जबकि लगभग 1,000 वर्गमीटर क्षेत्र की बुकिंग और संभावित है। इस प्रदर्शनी में प्रदेश के औद्योगिक एवं वाणिज्यिक सामर्थ्य को विभिन्न सेक्टरों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजन की थीम उत्तर प्रदेश के उत्पादों, निवेश संभावनाओं, औद्योगिक आधारभूत ढांचे और वैश्विक व्यापारिक अवसरों को एक मंच पर लाने पर केंद्रित है।

    जापान समेत पांच देशों की भागीदारी की पुष्टि

    अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के तहत जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर और ऑस्ट्रिया की पुष्टि की जा चुकी है। थाईलैंड की भागीदारी की स्थिति अभी प्रतीक्षित है। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों, खरीदारों और कारोबारी संस्थानों की भागीदारी से उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों, व्यापारिक साझेदारी और निर्यात संभावनाओं पर संवाद का अवसर मिलेगा। योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने और प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान दिलाने की दिशा में आयोजित यह ट्रेड शो राज्य की औद्योगिक क्षमता को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समुदाय के सामने रखने का माध्यम बनेगा।

    20 नॉलेज सेशन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी

    ट्रेड शो में उद्घाटन एवं समापन समारोह के अतिरिक्त 20 नॉलेज सेशन भी संभावित है। जानकारी के अनुसार 25 सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रस्तावित स्लॉट भी निर्धारित किए गए है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापार, उद्योग, निर्यात और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित करने की तैयारी है। उद्घाटन समारोह 25 सितंबर 2026 को पूर्वाह्न में प्रस्तावित है, जबकि समापन एवं पुरस्कार समारोह 29 सितंबर को दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक आयोजित किए जाने की योजना है। राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस बैंड का प्रस्ताव भी है।

  • सिख समाज के हित में यूपी सरकार के कार्यों की जानकारी लेकर दिल्ली LG से मिले सरदार परविंदर सिंह

    सिख समाज के हित में यूपी सरकार के कार्यों की जानकारी लेकर दिल्ली LG से मिले सरदार परविंदर सिंह

    लखनऊ

     दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू जी के लखनऊ आगमन पर उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के वरिष्ठ सदस्य एवं उत्तर प्रदेश सिख गुरुद्वारा कोऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष सरदार परविंदर सिंह के नेतृत्व में कमेटी के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उनसे शिष्टाचार भेंट की।

    भेंट के दौरान सरदार परविंदर सिंह ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में सिख समाज के हित में किए जा रहे कार्यों एवं लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी उपराज्यपाल महोदय को दी।

    सरदार परविंदर सिंह ने बताया कि वीर बाल दिवस के आयोजन की पहल उन्होंने वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री जी के समक्ष रखी थी और वर्ष 2018 में पुनः आग्रह किया था कि चारों साहिबजादों की महान शहादत को देखते हुए वीर बाल दिवस (साहिबजादा दिवस) को सम्मानपूर्वक मनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार मुख्यमंत्री जी ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए लखनऊ से इसकी शासकीय स्तर पर शुरुआत की तथा मुख्यमंत्री आवास पर पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश और कीर्तन-गुरबाणी का आयोजन कराया गया।

    उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के कक्षा 8, 9 एवं 10 के पाठ्यक्रम में श्री गुरु नानक देव जी, श्री गुरु तेग बहादुर जी, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी एवं चारों साहिबजादों के इतिहास को शामिल किया गया है। वीर बाल दिवस के अवसर पर प्रदेश के लगभग तीन करोड़ विद्यार्थी भाषण, निबंध, चित्रकला एवं प्रश्नोत्तरी जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं, जिससे नई पीढ़ी तक सिख गुरुओं और साहिबजादों के इतिहास एवं बलिदान की जानकारी पहुंच रही है।

    सरदार परविंदर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा पिछले वर्षों में सिख धर्म के गुरुओं के प्रकाश उत्सव, शहीदी पर्व एवं अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर लगभग 100 कार्यक्रमों में सहभागिता की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके अनुरोध पर लखनऊ में खालसा चौक का निर्माण कराया गया तथा प्रदेश के विभिन्न गुरुद्वारों के जीर्णोद्धार एवं विकास के लिए भी सरकार द्वारा धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सिख समाज को राजनीतिक, सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन में प्रतिनिधित्व और भागीदारी देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। उन्होंने उपराज्यपाल महोदय को बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ सिख समाज की धार्मिक भावनाओं और गौरवशाली इतिहास को भी सम्मान दिया जा रहा है।

    इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल की ओर से श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष को समर्पित स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू जी को भेंट किया गया तथा शॉल और पुष्पगुच्छ देकर उनका सम्मान किया गया।

    इसके अतिरिक्त गुरुद्वारा यहियागंज द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में भी सरदार परविंदर सिंह ने सहभागिता की और प्रतिनिधिमंडल की ओर से उपराज्यपाल महोदय का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

    प्रतिनिधिमंडल में सरदार तरनजीत सिंह, सरदार हरप्रीत सिंह, सरदार चरणजीत सिंह होरा, सरदार कवलजीत सिंह एवं सरदार त्रिलोचन सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

    सरदार परविंदर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश का सिख समाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा सिख समाज के हित में किए जा रहे कार्यों के लिए उनका आभार व्यक्त करता है और प्रदेश में सामाजिक समरसता, धार्मिक सद्भाव तथा राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर सहयोग करता रहेगा।

  • जनभवन में सीएम योगी की मौजूदगी में गंगासागर नमो नम: का हुआ लोकार्पण

    जनभवन में सीएम योगी की मौजूदगी में गंगासागर नमो नम: का हुआ लोकार्पण

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनभवन परिसर में आयोजित गंगासागर नमो नम: लोकार्पण कार्यक्रम में सम्मलित हुए। इससे पूर्व जनभवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, सीएम योगी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने छात्राओं को उपहार देकर शिक्षा से लगाव के लिए प्रेरित किया।

    गंगासागर नमो नम: लोकार्पण के अवसर पर पूजन भी किया गया। वहीं उपस्थित सभी गणमान्य आरती में भी शामिल हुए। जनभवन में छात्राओं ने भजन व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी प्रस्तुत किया।

  • प्रोजेक्ट चीता के चार वर्ष पूर्ण होने पर वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में हुई ‘चीता चौपाल’

    प्रोजेक्ट चीता के चार वर्ष पूर्ण होने पर वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में हुई ‘चीता चौपाल’

    भोपाल

    मध्यप्रदेश में चीतों के पुनर्स्थापन के चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गुरुवार को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में ‘चीता चौपाल’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं को चीता संरक्षण, पुनर्स्थापन की यात्रा और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।

    कार्यक्रम में प्रमुख सचिव वन  राघवेन्द्र कुमार सिंह ने वर्चुअली जुड़कर विगत 4 वर्षों में चीतों के संरक्षण, प्रजनन एवं उनके रहवास के संबंध में जानकारी प्रदान की। साथ ही चीतों के भविष्य के लिये किये जा रहे प्रबंधन एवं संरक्षण के प्रयासों से विद्यार्थियों एवं युवाओं से संवाद कर अवगत कराया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  शुभरंजन सेन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य-जीव अभिरक्षक डॉ. समिता राजोरा द्वारा विद्यार्थियों को चीता पुनर्वास, संरक्षण, प्राकृतिक आवास एवं वन्य-जीव संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

    चीता चौपाल में क्षेत्र संचालक कूनो राष्ट्रीय उद्यान  उत्तम शर्मा द्वारा कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़कर प्रोजेक्ट चीता के विगत 4 वर्षों में किये गये प्रबंधन के संबंध में विद्यार्थियों को जानकारी दी गई। चीता चौपाल में कूनो राष्ट्रीय उद्यान द्वारा चीता पर केन्द्रित प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के लिये स्टोन पेंटिंग प्रतियोगिता एवं वुडन टाइल पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें भोपाल के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के लगभग 90 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों की सहभागिता से उनमें वन्य-जीवों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होने के साथ चीता पुनर्वास एवं संरक्षण के प्रति जागरूकता का भी प्रसार हुआ। प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख तथा मुख्य वन्य-जीव अभिरक्षक द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर वन विहार के अधिकारी-कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

     

  • DGP से मिले हाल ही में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले ASP अधिकारी, बेहतर पुलिसिंग के लिए मिला मार्गदर्शन

    DGP से मिले हाल ही में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले ASP अधिकारी, बेहतर पुलिसिंग के लिए मिला मार्गदर्शन

    भोपाल 

    पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से हाल ही में प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके 10 सहायक पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) अधिकारियों ने आज पुलिस मुख्यालय भोपाल में सौजन्य भेंट की। इस दौरान डीजीपी  मकवाणा ने अधिकारियों से पुलिस नेतृत्व, पर्यवेक्षण एवं मैदानी कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद किया तथा उन्हें पुलिस सेवा में प्रभावी नेतृत्व के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया। डीजीपी  मकवाणा ने अधिकारियों से कहा कि एसडीओपी पहला पर्यवेक्षण अधिकारी होता है, इसलिए पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाने में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। जनता की शिकायत का समाधान पुलिसिंग की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक है। पीड़ित की शिकायत को पहले चरण में ही समझकर उसके निराकरण का प्रयास किया जाए, ताकि उन्‍हें त्वरित राहत मिल सके।

    डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि पुलिस नेतृत्व में ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ प्रभावी पर्यवेक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिकारी अपने अधीनस्थों के कार्यों की नियमित समीक्षा करें, उनकी समस्याओं को समझें और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि एक अच्छे अधिकारी की जिम्मेदारी केवल कार्यों की निगरानी तक सीमित नहीं होती, बल्कि अधीनस्थों का मार्गदर्शन करना और उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना भी नेतृत्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने थानों के निरीक्षण के संबंध में कहा कि निरीक्षण के दौरान पुलिस कार्यप्रणाली की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से निरुद्ध न रखा जाए तथा थानों में लगे सीसीटीवी कैमरे चालू एवं कार्यशील स्थिति में रहें, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को थानों का नियमित एवं औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए, ताकि मैदानी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त हो सके।

    डीजीपी  मकवाणा ने  कहा कि अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले नियमित निरीक्षणों का हिस्सा बनें और निरीक्षण के दौरान पुलिसिंग की बारीकियों को समझें। मैदानी अनुभव और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन से पुलिसिंग की व्यावहारिक समझ विकसित होती है, जिसका लाभ आगे की सेवा में मिलता है। उन्होंने तकनीक आधारित पुलिसिंग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अपराधों एवं प्रकरणों के निराकरण में उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) के माध्यम से उपलब्ध फिंगरप्रिंट संबंधी तकनीकी सहायता का उपयोग कर अपराधों एवं प्रकरणों के निराकरण को और प्रभावी बनाने की बात कही। उन्होंने थाने की कार्यप्रणाली के संदर्भ में थाना परेड को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि नियमित परेड के माध्यम से बल की उपस्थिति, अनुशासन, वर्दी, टर्नआउट एवं आवश्यक निर्देशों की जानकारी सुनिश्चित की जा सकती है।

    डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि पुलिस सेवा में प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार की समस्याएं सामने आती हैं। अधिकारी का दायित्व है कि वह समस्याओं को टालने के बजाय उनकी जड़ तक पहुंचे और उपलब्ध संसाधनों एवं नियमों के अनुरूप समाधान का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि अधीनस्थों की समस्याओं का समाधान करने वाला नेतृत्व ही संगठन में विश्वास और बेहतर कार्यसंस्कृति विकसित करता है।

    इस अवसर पर अधिकारियों ने पुलिसिंग एवं नेतृत्व से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने विचार और जिज्ञासाएं साझा कीं। डीजीपी  मकवाणा ने अपने अनुभवों के आधार पर अधिकारियों के प्रश्नों का मार्गदर्शन किया तथा उन्हें सेवा के प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर एवं एसओ टू डीजीपी  मलय जैन भी उपस्थित थे।