Author: NewseDay

  • नशा व्यक्ति को विवेक से अविवेक की ओर ले जाता है, राज्यपाल बागडे ने जनभागीदारी पर दिया जोर

    नशा व्यक्ति को विवेक से अविवेक की ओर ले जाता है, राज्यपाल बागडे ने जनभागीदारी पर दिया जोर

    जयपुर
    ज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि नशा विवेक से अविवेक की ओर ले जाता है। यह व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि जीवन को नाश की ओर ले जाता है, इसलिए इससे बचने और सभी को बचाने का हम सभी मिलकर प्रयास करें। उन्होंने विश्वविद्यालय स्थापना दिवस को युवा शक्ति के विकास  केंद्रित करते हुए  कृषि क्षेत्र में विश्वविद्यालय को अग्रणी बनाने का आह्वान किया है।

    राज्यपाल गुरुवार को जोबनेर स्थित कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस और नशामुक्त भारत अभियान में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिन की बधाई देते हुए नशामुक्त समाज के लिए सभी को मिलकर कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने पानी की बचत के लिए उसे सहेजने पर भी जोर दिया। उन्होंने लॉर्ड मैकाले द्वारा गुलामी से जुड़ी शिक्षा के प्रसार और और तत्कालीन विषम परिस्थितियों की भी चर्चा की।

    बागडे ने कहा कि उन्होंने लोकभवन में नशामुक्त भारत की विशेष रूप से बैठक ली थी। इसमें यह तय किया गया कि नशामुक्त अभियान सरकारी नहीं,  समाज का अपना सामूहिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में जाना हुआ है। उद्देश्य यह है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की समीक्षा के साथ प्राथमिक से उच्च शिक्षा से जुड़ी वास्तविक स्थिति को जान समझ कर प्रदेश को इसमें अग्रणी किया जाए। राज्यपाल ने कहा कि सभी मिलकर प्रयास करें कि प्राथमिक शिक्षा के आधार को मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि एक बड़ा लक्ष्य हम सभी का यह होना चाहिए कि नशामुक्ति और टीबी मुक्त कार्यक्रम में जन जन की भागीदारी तय करना है।

    राज्यपाल ने कहा कि देश में सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी को विश्व के 37 देशों ने राष्ट्र का सर्वोत्तम पुरस्कार प्रदान किया है। यह हम सभी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने सभी लोगों को देश के बारे में, समाज के बारे में विचार करते हुए राष्ट्र का माहौल अच्छा रखने पर जोर दिया। उन्होंने भारत की प्राच्य विधा की चर्चा करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में हमारे प्राचीन गौरव से जुड़ी शिक्षा से नई पीढ़ी को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    राज्यपाल ने इससे पहले विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित कृषि मौसम पोर्टल का शुभारम्भ किया। उन्होंने वहां नवनिर्मित विश्वविद्यालय सभागार का भी लोकार्पण किया और कृषि से सम्बद्ध पुस्तकों, स्मारिका का भी विमोचन किया।
    राज्यपाल ने इस दौरान विश्वविद्यालय में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के आलोक में प्रदर्शित उत्पादों का भी अवलोकन किया और विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया।
    विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. पी. एस. चौहान, पूर्व न्यायाधीश करणी सिंह राठौड़ और डॉ. एन. के. गुप्ता ने भी विचार रखे।
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  • खेलों के नए केंद्र के रूप में दुनिया के सामने आएगा मेरठ

    खेलों के नए केंद्र के रूप में दुनिया के सामने आएगा मेरठ

    मेरठ

     मेरठ अब सिर्फ खेल प्रतिभाओं की धरती के रूप में नहीं, बल्कि खेल शिक्षा और आधुनिक प्रशिक्षण के उभरते केंद्र के तौर पर भी देश-दुनिया के सामने अपनी पहचान दर्ज कराने जा रहा है। ग्रेटर नोएडा में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-4.0 में प्रदेश के खेल क्षेत्र की बदलती तस्वीर पेश की जाएगी। इसके लिए पहली बार खेल विभाग का अलग पवेलियन तैयार किया जा रहा है। करीब 200 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाले इस पवेलियन में मेरठ की खेल यूनिवर्सिटी प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी।
    खेल विभाग के इस मंच पर प्रदेश की खेल उपलब्धियों, आधुनिक सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं को एक साथ प्रदर्शित किया जाएगा। खेल निदेशालय, प्रादेशिक विकास दल एवं युवा कल्याण विभाग, स्पोर्ट्स कॉलेज और खेल यूनिवर्सिटी इसमें संयुक्त रूप से भाग लेंगे। डिजिटल डिस्प्ले से लेकर मॉडल और वीडियो प्रस्तुति तक, अलग-अलग माध्यमों से प्रदेश में खेल क्षेत्र में हुए बदलावों की जानकारी दी जाएगी।

    खेल पढ़ाई से करियर तक, मेरठ की यूनिवर्सिटी पर नजर

    ट्रेड शो में आने वाले लोगों को मेरठ की खेल यूनिवर्सिटी में उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों की जानकारी दी जाएगी। विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों, प्रवेश व्यवस्था, पात्रता और शैक्षणिक गतिविधियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे युवाओं को उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण के नए विकल्पों की जानकारी मिलेगी।
    प्रदेश की प्रमुख खेल परियोजनाओं को थ्री-डी मॉडल के जरिए भी समझाया जाएगा। मेरठ की खेल यूनिवर्सिटी के साथ अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर में विकसित हो रही खेल सुविधाओं के मॉडल पवेलियन में रखे जाएंगे। प्रदेश में तैयार हो रहे खेल ढांचे पर आधारित डॉक्यूमेंट्री के जरिए भी आगंतुकों को विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
    उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां भी पवेलियन का हिस्सा होंगी। तस्वीरों, वीडियो और डिजिटल स्क्रीन पर खिलाड़ियों की सफलताओं को प्रदर्शित कर प्रदेश की खेल प्रतिभा की कहानी बताई जाएगी।

    मैदान से डिजिटल दुनिया तक दिखेगा खेलों का नया अंदाज

    युवाओं को सीधे खेल गतिविधियों से जोड़ने के लिए पवेलियन में इंटरएक्टिव गेमिंग जोन भी तैयार किया जा रहा है। फुटबॉल, हॉकी और टेबल टेनिस समेत चार खेलों पर आधारित डिजिटल गेम में आगंतुक खुद हिस्सा ले सकेंगे। बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रोत्साहन के तौर पर छोटे उपहार दिए जाएंगे।

    पवेलियन में जेन-जी को ध्यान में रखते हुए फिटनेस, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े संदेश भी दिए जाएंगे। वहीं खेलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल और खिलाड़ियों के डिजिटल डेटा को व्यवस्थित करने की संभावनाओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसका उद्देश्य खेल प्रतिभाओं की पहचान से लेकर उनके प्रदर्शन के विश्लेषण तक तकनीक की बढ़ती भूमिका को सामने लाना है।

    युवा कल्याण विभाग की ओर से युवक मंगल दल और महिला मंगल दल की गतिविधियों, पुरस्कारों और उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। खेल विभाग के विशेष सचिव विनीत कुमार के अनुसार प्रदेश में खेल विद्यालयों, खेल विश्वविद्यालयों, स्पोर्ट्स हॉस्टल और उच्च उत्कृष्टता केंद्रों के जरिए खिलाड़ियों को बेहतर मंच उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से निकलने वाली प्रतिभाओं को अवसर देने के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर है।

  • ‘पहले लड़कियों के साथ लव जिहाद, अब लड़कों का हो रहा माइंडवॉश’, संगीत सोम बोले- यूसीसी ही उतारेगा ये ‘बुखार’

    ‘पहले लड़कियों के साथ लव जिहाद, अब लड़कों का हो रहा माइंडवॉश’, संगीत सोम बोले- यूसीसी ही उतारेगा ये ‘बुखार’

    लखनऊ
    पूर्व भाजपा विधायक संगीत सोम ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर बेहद तीखा बयान दिया है। शामली के आयुष मलिक प्रकरण को सामने रखते हुए सोम ने कहा कि पहले लव जिहाद लड़कियों के साथ चलता था, अब लड़कों के साथ हो रहा है। इसीलिए UCC जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अच्छे परिवारों के लड़कों का बड़े स्तर पर ‘माइंडवॉश’ किया जा रहा है और इसके पीछे फंडिंग से लेकर एक खास नैरेटिव तैयार करने तक का काम हो रहा है।

    सोम ने कहा कि शामली का मामला इसका एक उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में विदेशी और ‘सो-कॉल्ड सेक्युलर’ लोग भी शामिल हैं। उनके मुताबिक यह केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में बड़े स्तर पर फंडिंग करके युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, सोम ने इन आरोपों के समर्थन में कोई विशिष्ट सार्वजनिक साक्ष्य नहीं दिया।

    यूसीसी ही इस बुखार को उतारने का काम करेगा
    संगीत सोम ने यूसीसी को इसका समाधान बताते हुए कहा कि समान नागरिक कानून ही इस बुखार को उतारने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में समान नागरिक कानून लागू होना चाहिए और जिस मजबूती के साथ इसे लागू करने की जरूरत है, उसी तरह इसे लागू किया जाना चाहिए। एक दिन पहले भी सोम ने यूसीसी का विरोध करने को लेकर अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी पर हमला बोला था।

    ‘मुस्लिमों की तीन बर्बादी- अखिलेश, ओवैसी और राहुल गांधी’
    सोम ने अपने बयान में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर भी सीधा हमला किया। उन्होंने कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि मुस्लिमों की तीन बर्बादी- अखिलेश, ओवैसी और राहुल गांधी। सोम ने तीनों नेताओं पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और दावा किया कि शामली का प्रकरण इसका एक उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश, राहुल और ओवैसी देश में शांति नहीं चाहते और हमेशा देश को बांटने की राजनीति करते हैं। सोम ने कहा कि सनातनी इसे समझ चुके हैं और 2027 में इनकी औकात पता चलेगी।

    दंगा करेंगे तो सात पुश्तें याद रखेंगी
    प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक तनाव का जिक्र करते हुए संगीत सोम ने कहा कि यूपी में धार्मिक संतुलन बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद इन लोगों को पता है कि दंगा करेंगे तो ऐसा इलाज होगा कि सात पुश्तें याद रखेंगी। सोम ने एक वर्ग की बढ़ती आबादी को भी चिंता का विषय बताते हुए यूसीसी को पूरी दमदारी से लागू करने की मांग की।

  • रांची में बनेगा हाईटेक कमांड सेंटर, टोल-फ्री नंबर से मरीजों तक 4 घंटे में पहुंचेगा सुरक्षित रक्त

    रांची में बनेगा हाईटेक कमांड सेंटर, टोल-फ्री नंबर से मरीजों तक 4 घंटे में पहुंचेगा सुरक्षित रक्त

    रांची
    झारखंड में जरूरतमंद मरीजों को समय पर और सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार एक नई और आधुनिक व्यवस्था शुरू करने जा रही है. अब मरीजों या उनके परिजनों को खून के लिए ब्लड बैंकों और अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. नई व्यवस्था के तहत महज एक कॉल पर 4 घंटे के भीतर मरीज तक ब्लड पहुंचा दिया जाएगा. इस पूरी व्यवस्था को अगले 90 दिनों (3 महीने) के भीतर राज्यभर में प्रभावी करने का लक्ष्य रखा गया है. बुधवार को स्वास्थ्य विभाग और एमएस साइंस (MS Science) कंपनी के बीच इस ऐतिहासिक पहल को लेकर एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह और एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा विशेष रूप से उपस्थित रहे.

    रांची में बनेगा सेंट्रलाइज्ड कमांड सेंटर, जारी होगा टोल-फ्री नंबर
    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बताया कि राज्य में पहली बार ऐसी डिजिटल और त्वरित व्यवस्था लागू की जा रही है. पूरे राज्य में ब्लड की आपूर्ति को मॉनिटर और संचालित करने के लिए राजधानी रांची में एक हाई-टेक 'कमांड सेंटर' स्थापित किया जाएगा. साथ ही मरीजों की सुविधा के लिए जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर जारी किया जाएगा, जिस पर कॉल करके ब्लड की डिमांड दर्ज कराई जा सकेगी. ब्लड कलेक्शन, मानक जांच (Testing), स्टोरेज, रखरखाव और संबंधित अस्पताल तक सुरक्षित डिलीवरी की पूरी जवाबदेही कंपनी (एमएस साइंस) की होगी. मंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं कि बिना मानक जांच के किसी भी मरीज को रक्त जारी नहीं किया जाएगा.

    प्रति यूनिट के आधार पर भुगतान, NCC और पुलिस की ली जाएगी मदद
    एनएचएम (NHM) के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि कंपनी खुद रक्तदान शिविर आयोजित करेगी और मैनपावर की व्यवस्था करेगी. सरकार कंपनी को प्रति यूनिट रक्त के आधार पर भुगतान करेगी. अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ब्लड कलेक्शन बढ़ाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. इसमें NCC, NSS, पुलिस बल और निजी सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा. ब्लड डोनेशन कैंप में रक्तदाताओं के लिए रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था भी एजेंसी ही करेगी.

  • 2022 में थमा था पोलियो ड्रॉप का उत्पादन, अब बिबकॉल को बंद करने पर कैबिनेट की मुहर

    2022 में थमा था पोलियो ड्रॉप का उत्पादन, अब बिबकॉल को बंद करने पर कैबिनेट की मुहर

    बुलंदशहर
    37 साल पहले बुलंदशहर में स्थापित हुई बिबकॉल कंपनी अब बंद हो जाएगी। ये कंपनी पोलियो ड्राप बनाती थी। 2022 में इसका प्रोडक्शन पूरी तरह से बंद हो चुका है। कभी भारत के पोलियो उन्मूलन अभियान की अहम ताकत रही सरकारी वैक्सीन कंपनी भारत इम्यूनोलॉजिकल्स एंड बायोलॉजिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बिबकॉल) अब अपने अस्तित्व के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। दो साल से इस कंपनी के कर्मचारियों को सैलरी तक नहीं मिली है। अफसरों के मुताबिक दिल्ली में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बिबकॉल को बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

    बिबकॉल की स्थापना 10 मार्च 1989 को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के लिए ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) का उत्पादन करना और वैक्सीन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना था। कंपनी का प्लांट उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के चोला में स्थापित किया गया था। 1990 के दशक में बिबकॉल ने ओपीवी उत्पादन की दिशा में काम शुरू किया और बाद में इसे डब्लयूएचओ-जीपीएम प्रमाणन भी मिला। 2000 के दशक की शुरुआत में कंपनी को भारत सरकार और यूनिसेफ की ओर से बड़े वैक्सीन सप्लाई ऑर्डर मिले। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, बिबकॉल ने भारत के पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम में बड़ी मात्रा में ओपीवी की आपूर्ति की।

    पोलियो उन्मूलन अभियान में रही अहम भूमिका
    भारत में पोलियो उन्मूलन अभियान के दौरान बिबकॉल देश की उन सरकारी संस्थाओं में शामिल थी जिन्होंने बड़े पैमाने पर ओरल पोलियो वैक्सीन उपलब्ध कराने में योगदान दिया। वर्ष 2015 में सरकार ने भी कहा था कि बिबकॉल ने भारत के इम्यूनाइजेशन कार्यक्रम के लिए अरबों डोज की ओपीवी सप्लाई की और देश को पोलियो मुक्त बनाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में बिबकॉल के पीएसयू पर सरकार ने अहम फैसला किया है जिसके तहत अब सरकार वैक्सीन और बायोलॉजिकल बनाने वाली इस कंपनी के पीएसयू को पूरी तरह से बंद करने वाली है।

    क्यों लिया गया ये फैसला
    बिबकॉल कंपनी को लगातार नुकसान हुआ, जिसकी वजह से आर्थिक तंगी के कारण कंपनी ने पिछले करीब दो साल से कर्मचारियों को लंबे समय तक वेतन नहीं दिया। जिसके कारण इस कंपनी को बंद करने का फैसला किया गया।

    वर्ष 2022 में बंद हो गया था प्रोडक्शन
    बिबकॉल सरकारी कंपनी है, जो वैक्सीन और बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स बनाती है। इसकी मुख्य मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ने दिसंबर 2022 के आखिर में अपने मुख्य प्रोडक्ट, ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) का उत्पादन बंद कर दिया था। इसके बाद से ही कंपनी को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। यह कंपनी बच्चों के लिए पोलियो वैक्सीन (ओपीवी), जिंक टैबलेट, डायरिया मैनेजमेट किट और अन्य दवाएं बनाने का काम करती है। भारत को पोलियो मुक्त बनाने में इस कंपनी ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

    करीब 90 कर्मचारी अभी सेवारत
    कंपनी की स्थापना के समय और बीच में प्रोडक्शन बढ़ाने पर स्थाई और स्थाई मिलाकर लगभग 300 अधिकारी कर्मचारी इसमें सेवारत थे। इसके बाद जब प्रोडक्शन कम हुआ तो कर्मचारियों अधिकारियों की संख्या घटती गई और इनमें से कुछ सेवानिवृत हो गए और कुछ की सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो गई। बिबकॉल के सीनियर प्लांट सुपरिंटेंडेंट सुनील शर्मा ने बताया कि वर्तमान में लगभग 90 अधिकारी कर्मचारी सेवारत हैं। बिबकॉल बंद होने का बेहद दुख है। हम वर्ष 2022 से अपने वेतन और कंपनी को चलाने की मांग को लेकर जगह-जगह संपर्क कर रहे थे मगर विफलता ही हाथ लगी। पूर्व वाइस प्रेसीडेंट बिबकॉल सुनील शर्मा ने बताया, पोलियो वैक्सीन बनाने वाली बिबकॉल कंपनी को आज नई दिल्ली में हुई कैबिनेट की बैठक में बंद करने का निर्णय लिया गया है।

  • RSS के ‘अभ्युदय संघ समागम’ की तैयारी तेज, मोहन भागवत करेंगे 50 हजार स्वयंसेवकों को संबोधित

    RSS के ‘अभ्युदय संघ समागम’ की तैयारी तेज, मोहन भागवत करेंगे 50 हजार स्वयंसेवकों को संबोधित

    मुजफ्फरपुर
     Mohan Bhagwat Muzaffarpur Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत 13 दिसंबर को मुजफ्फरपुर आ रहे हैं। वे यहां उत्तर बिहार प्रांत द्वारा आयोजित 'अभ्युदय संघ समागम' में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे।

    संघ प्रमुख के इस कार्यक्रम को लेकर मुजफ्फरपुर में सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
    50 हजार स्वयंसेवक जुटेंगे

    इस समागम में उत्तर बिहार के सभी जिलों से करीब 50 हजार पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवक जुटेंगे। संघ प्रमुख इन कार्यकर्ताओं को सीधे संबोधित कर उनका मार्गदर्शन करेंगे। आयोजन को लेकर आरएसएस के स्वयंसेवक भव्य तैयारियों में जुट गए हैं।

    ऑनलाइन निबंधन शुरू
    समागम को सफल बनाने के लिए संघ कार्यालय मधुकर निकेतन में विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इसके साथ ही कार्यक्रम के लिए ऑनलाइन निबंधन (रजिस्ट्रेशन) कार्य का विधिवत शुभारंभ कर दिया गया है।

    भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी क्षेत्रों में संपर्क अभियान चलाया जाएगा।
    पताही हवाई अड्डा चिह्नित

    आयोजन स्थल के रूप में फिलहाल शहर के पताही हवाई अड्डा मैदान को चिन्हित किया गया है। इसके अलावा कार्यकर्ता अन्य उपयुक्त मैदानों और बड़े स्थानों की भी टोह ले रहे हैं।
    पूरे उत्तर बिहार प्रांत में इस कार्यक्रम को लेकर उत्साह का माहौल है।

    अंतिम रूप में व्यवस्थाएं
    विभाग संघचालक चंद्रमोहन खन्ना चन्नी के अनुसार कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। समागम में उत्तर बिहार की ऐतिहासिक भागीदारी होगी।

    निबंधन प्रशिक्षण के इस मुख्य सत्र में प्रांत प्रचारक रविशंकर सिंह विशेन, विभाग संघचालक चंद्रमोहन खन्ना, महानगर संघचालक अविनाश कुमार, महानगर कुटुंब प्रबोधन संयोजक रजनीश मिश्रा और जिला प्रचारक सुनील रुद्र आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहकर अभी बताइए आनलाइन कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश दिए।

     

  • टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने में जुटी सरकार

    टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने में जुटी सरकार

    लखनऊ

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर प्रदेशभर में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत गुरुवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ में 500 टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि टीबी के उपचार के साथ मरीजों के पोषण और स्वास्थ्य की देखभाल भी सरकार की प्राथमिकता है। हम सब टीबी को मिलकर हराएंगे। 

    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की सेवा में लगातार 25 वर्षों से अनवरत कार्य कर रहे हैं। उनके ‘सेवा ही संकल्प’ के भाव को आत्मसात करते हुए प्रदेश में सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ देश और दुनिया में लगातार प्रयास हो रहे हैं और भारत ने टीबी उन्मूलन का संकल्प लिया है। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और प्रभावी उपचार के माध्यम से टीबी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है, इसलिए इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है।

    स्वच्छता की भूमिका महत्वपूर्ण

    उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि टीबी से बचाव और उपचार में स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका है। मरीजों और उनके परिवारों को अपने घर एवं आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। एकजुट प्रयासों से ही भारत और उत्तर प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

    आधुनिक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध

    उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर एवं आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। टीबी मरीजों के उपचार के साथ उन्हें पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि वे जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकें।

    संविधान स्थल का भी हुआ शुभारंभ

    केजीएमयू में डिप्टी सीएम द्वारा संविधान स्थल का शुभारंभ भी किया गया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान हमारे राष्ट्र की आत्मशक्ति है। संविधान स्थल विद्यार्थियों, चिकित्सकों, कर्मचारियों और यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति में राष्ट्र के प्रति कर्तव्य एवं संविधान के प्रति निष्ठा के भाव को और सशक्त करने का कार्य करेगा।

    पोषण पोटली का किया वितरण

    कार्यक्रम में टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित करते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई तथा प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के लिए सरकार, स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों और समाज के सभी वर्गों से मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया गया।

    इनकी रही उपस्थिति 

    इस अवसर पर केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद, प्रति कुलपति प्रो. अंजू अग्रवाल, कुलसचिव अर्चना गहरवार, डीन पैरामेडिकल प्रो. के.के. सिंह, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रश्मि कुशवाहा, विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन एवं उपाध्यक्ष, नेशनल टीबी टास्क फोर्स प्रो. सूर्यकांत सहित केनरा बैंक, इंडियन बैंक एवं रोटरी क्लब ऑफ लखनऊ के प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

  • सेवा संकल्प अभियान: ‘हर घर जल’ ने आसान किया ग्रामीण जीवन, पानी के लिए दूर जाना हुआ बंद

    सेवा संकल्प अभियान: ‘हर घर जल’ ने आसान किया ग्रामीण जीवन, पानी के लिए दूर जाना हुआ बंद

    सेवा संकल्प अभियान: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ संकल्प से भुलिया बाई के घर पहुंचा स्वच्छ पेयजल

    दूर बिल्लमगढ़ तक पानी लाने की मजबूरी हुई खत्म, जल जीवन मिशन ने आसान किया ग्रामीण परिवार का जीवन

    रायपुर
     गौरेला विकासखंड के वनांचल ग्राम करंगरा की रहने वाली भुलिया बाई के जीवन में जल जीवन मिशन के माध्यम से आया बदलाव ग्रामीण क्षेत्रों में ‘हर घर जल’ के संकल्प की सार्थकता को सामने लाता है।

    कुछ समय पहले तक भुलिया बाई के परिवार के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करना रोजमर्रा की बड़ी चुनौती थी। पानी लेने के लिए उन्हें गांव से दूर बिल्लमगढ़ तक उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर जाना पड़ता था। पानी लाने में समय और मेहनत दोनों लगते थे। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ दूर से पानी लाने की जिम्मेदारी विशेष रूप से उनके लिए परेशानी और शारीरिक थकान का कारण बनती थी।

    जल जीवन मिशन के तहत घर में नल कनेक्शन स्थापित होने के बाद भुलिया बाई के परिवार की दिनचर्या में बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें पानी के लिए दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। घर की देहरी पर नल खुलते ही पेयजल उपलब्ध हो जाता है। इससे परिवार के समय और श्रम की बचत हो रही है तथा दैनिक जीवन पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हुआ है।

    भुलिया बाई कहती हैं कि पहले पानी के लिए दूर जाना पड़ता था, लेकिन अब घर में ही नल से पानी मिल जाता है। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ के संकल्प से जुड़ी पहल है जल जीवन मिशन

    जल जीवन मिशन की शुरुआत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को की थी। मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को नियमित और दीर्घकालिक आधार पर पर्याप्त मात्रा में निर्धारित गुणवत्ता का पेयजल घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से उपलब्ध कराना है। यह योजना केन्द्र और राज्य सरकारों की साझेदारी में संचालित होती है, जिसमें केन्द्र सरकार राज्यों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जल जीवन मिशन को ग्रामीण परिवारों के जीवन को आसान बनाने और विशेष रूप से महिलाओं को दूर से पानी लाने की मेहनत से राहत दिलाने से जोड़ा है। केन्द्र सरकार के अनुसार मिशन के आरंभ के समय अगस्त 2019 में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 3.23 करोड़ परिवारों के पास नल कनेक्शन था। 28 जनवरी 2026 तक यह संख्या बढ़कर 15.79 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंच गई थी।

    महिलाओं के समय और श्रम की बचत से बढ़ी जीवन की सुविधा

    भुलिया बाई की कहानी बताती है कि घर तक नल से पानी पहुंचने का असर केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं है। दूर से पानी लाने में लगने वाला समय और श्रम बचने से परिवार के दैनिक कार्यों के लिए अधिक समय उपलब्ध हो रहा है। स्वच्छ पेयजल की सहज उपलब्धता से परिवार के जीवन में सुविधा और सम्मान की भावना भी बढ़ी है।

    जल जीवन मिशन के तहत देशभर में ग्रामीण परिवारों तक नल से पेयजल पहुंचाने का प्रयास ग्रामीण जीवन में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जल जीवन मिशन के तहत देश में   15.91 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से जल की आपूर्ति पहुंच चुकी है।

    सेवा संकल्प अभियान में सामने आई बदलाव की कहानी

    सेवा संकल्प अभियान के दौरान सामने आई भुलिया बाई की कहानी इस बात का उदाहरण है कि जब जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीण परिवारों तक पहुंचता है, तो उसका सीधा असर उनके दैनिक जीवन पर दिखाई देता है। कभी पानी के लिए दूर तक जाना पड़ता था, वहीं अब घर की देहरी पर नल से पानी उपलब्ध हो रहा है।

    भुलिया बाई के लिए घर में नल से पानी पहुंचना केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की कठिनाई से मिली राहत और जीवन को अधिक सहज बनाने वाला बदलाव है। ‘हर घर जल’ के संकल्प के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंच रही इस सुविधा से ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं के समय और श्रम की बचत हो रही है।

  • जयपुर में पटाखों की अस्थाई बिक्री का लाइसेंस मिलेगा 12 अक्टूबर से, जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया

    जयपुर में पटाखों की अस्थाई बिक्री का लाइसेंस मिलेगा 12 अक्टूबर से, जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया

    जयपुर
    दीपावली पर आतिशबाजी का कारोबार करने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए जिला प्रशासन ने अस्थाई अनुज्ञापत्र की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बार पटाखों की अस्थाई बिक्री के लिए लाइसेंस लेने के इच्छुक आवेदकों को 25 सितम्बर 2026 तक आवेदन करना होगा। तय तारीख के बाद पहुंचने वाले आवेदनों पर प्रशासन की ओर से कोई विचार नहीं किया जाएगा। ऐसे में आतिशबाजी कारोबार से जुड़े लोगों के लिए आवेदन की समय-सीमा महत्वपूर्ण है।

    जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट संदेश नायक के अनुसार, विस्फोटक नियम, 2008 के तहत दीपावली के अवसर पर आतिशबाजी के अस्थाई अनुज्ञापत्र 12 अक्टूबर से 11 नवम्बर 2026 तक जारी किए जाएंगे। इसके लिए आवेदकों को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन अपने थाना क्षेत्र से संबंधित उपखण्ड मजिस्ट्रेट कार्यालय में जमा करना होगा।

    पांच प्रतियों में देना होगा प्रस्तावित स्थल का ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र
    आवेदन के साथ केवल सामान्य दस्तावेज ही नहीं, बल्कि प्रस्तावित आतिशबाजी बिक्री स्थल से संबंधित विस्तृत कागजात भी देने होंगे। प्रशासन के अनुसार प्रस्तावित स्थल का ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र पांच प्रतियों में देना होगा। इस मानचित्र में आसपास मौजूद व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्पष्ट रूप से दर्शाना जरूरी होगा। इसके अलावा शपथ पत्र, स्थल के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज अथवा किरायानामा की प्रमाणित फोटो कॉपी और आवेदक की दो पासपोर्ट साइज फोटो भी लगानी होंगी।

    इस बार अस्थाई अनुज्ञापत्र के लिए जयपुर जिले के कई थाना क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें शाहपुरा, मनोहरपुर, अमरसर, जमवारामगढ़, आंधी, चन्दवाजी, रायसर, नरैना, मांजी रेनवाल, माधोराजपुरा, सांभर, फुलेरा, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, गोविन्दगढ़, सामोद, कालाडेरा, दूदू, मौजमाबाद और फागी शामिल हैं।

    प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि आवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर ही संबंधित कार्यालय में पहुंचना चाहिए। इसके बाद मिलने वाले आवेदन स्वीकार कर विचाराधीन नहीं किए जाएंगे।

     

  • वसुंधरा परियोजना-राजस्व अभिलेखों का होगा डिजिटलीकरण

    वसुंधरा परियोजना-राजस्व अभिलेखों का होगा डिजिटलीकरण

    वसुंधरा परियोजना-राजस्व अभिलेखों का होगा डिजिटलीकरण

    नागरिक सेवाएं मिलेंगी और अधिक सरल और पारदर्शी रूप में

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ में नागरिक सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए वसुंधरा परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर कार्य शुरू हो गया है। इसके अंतर्गत जिला एवं तहसील स्तर के राजस्व रिकॉर्ड रूम का आधुनिकीकरण और राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। इस संबंध में आज मंत्रालय महानदी भवन में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

           मुख्य सचिव श्री विकासशील ने बैठक के दौरान नामांतरण और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में स्पष्टता व एकरूपता लाने तथा अभिलेखों के व्यवस्थित संधारण पर विशेष जोर दिया। इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में कुछ चयनित जिलों के राजस्व अभिलेखों का पूर्ण डिजिटलीकरण होगा, जिसके बाद इसे प्रदेश के सभी 33 जिलों में विस्तारित किया जाएगा।

    सुरक्षित किए जाने वाले प्रमुख दस्तावेज

            राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने बताया कि डिजिटलीकरण के तहत अधिकार अभिलेख पंजी, बंदोबस्त एवं चकबंदी मिसल, निस्तार पत्रक, खसरा, राजस्व न्यायालय के आदेश, मूल ग्राम नक्शे, संशोधन पंजी, वर्ष 2020 से पूर्व के खसरा पंचशाला अभिलेख और किश्तबंदी खतौनी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की स्कैनिंग व डाटा एंट्री कर उन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा।

    सेवा सेतु पोर्टल से एकीकरण

           परियोजना के तहत तैयार किए जाने वाले डिजिटल रिकॉर्ड भंडार को सेवा सेतु से जोड़ा जाएगा। इससे नागरिकों को ऑनलाइन आवेदन करने, शुल्क भुगतान करने, प्रमाणित डिजिटल प्रतियां प्राप्त करने और आवेदन की स्थिति ट्रैक करने जैसी सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।

    आधुनिक तकनीक (AI और OCR) का उपयोग

          रिकॉर्ड रूम के भौतिक अभिलेखों को बारकोड आधारित वर्गीकरण और डिजिटल लोकेशन के जरिए व्यवस्थित किया जाएगा। इसके अलावा, पुरानी और हस्तलिखित दस्तावेजों को आसानी से खोजने के लिए ओसीआर (OCR) तकनीक और एआई (AI) आधारित खोज सुविधा विकसित करने की योजना है, जिससे दस्तावेजों के संरक्षण के साथ-साथ नागरिकों का काम बेहद आसान हो जाएगा।