Author: NewseDay

  • डिप्टी CM केशव मौर्य का सख्त संदेश, लापरवाह और अनुशासनहीन अफसरों पर जारी रहेगा एक्शन

    डिप्टी CM केशव मौर्य का सख्त संदेश, लापरवाह और अनुशासनहीन अफसरों पर जारी रहेगा एक्शन

    लखनऊ
     यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लापरवाह अफसरों पर ऐक्शन शुरू कर दिया है। डिप्टी सीएम ने गुरुवार को सुल्तानपुर के परियोजना निदेशक अशोक कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं। यह कार्रवाई शासकीय पद की गरिमा के विपरीत आचरण, अधीनस्थ कार्मिकों के साथ आपत्तिजनक व्यवहार के चलते की गई है।

    डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अशोक कुमार सिंह के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक नियमावली, 1999 के नियम-7 के अंतर्गत अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जनहित एवं जनसेवा है। शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन तथा जनता को समयबद्ध एवं पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा अनुशासनहीनता को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध जारी रहेगी कार्रवाई
    उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि डबल इंजन सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जनसेवा से विमुखता, शासकीय कार्यों में लापरवाही और अनुशासनहीनता करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। सुलतानपुर के परियोजना निदेशक का निलंबन इसी नीति के तहत की गई कार्रवाई का एक उदाहरण है। डिप्टी सीएम ने कहा, शासकीय कार्यों में लापरवाही, अनुशासनहीनता तथा पदीय दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।

    अपनी हंसी न उड़वाएं अखिलेश यादव
    वहीं दूसरी ओर आजमगढ़ पहुंचे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, सपा अध्यक्ष कानून व्यवस्था पर बात न करें। वह कानून व्यवस्था पर सवाल उठाएंगे तो प्रदेश की जनता उन पर हंसेगी। उनकी सरकार में नकल, भू माफिया और अपराधियों को संरक्षण दिया जाता था। भाजपा के गोरखपुर के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय के बरदह थाना क्षेत्र के जिवली स्थित आवास पर बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में डिप्टी सीएम ने कहा कि प्रदेश की जनता को यह बताने की जरूरत नहीं है कि अखिलेश यादव और उनके परिवार के लोग क्या करते थे। ऐसे में सपा अध्यक्ष को अपनी हंसी उड़ाने का काम नहीं करना चाहिए। वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है। जो भी अपराध करेगा, कानून अपना काम करेगा।

     

  • ग्वालियर सड़क घोटाले पर हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: फर्जी लैब टेस्ट का खुलासा, नगर निगम से मांगा जवाब

    ग्वालियर सड़क घोटाले पर हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: फर्जी लैब टेस्ट का खुलासा, नगर निगम से मांगा जवाब

    ग्वालियर

     ग्वालियर में सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए हाई कोर्ट द्वारा गठित आयोग की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आयोग ने कोर्ट को बताया कि श्मशान से गुड़ा तिराहा, कस्तूरबा चौक और गुड़ा-गुड़ी का नाका से बेटी बचाओ होते हुए हनुमान टाकीज तक की सड़कों से लिए गए नमूनों की जांच में गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।

    जांच के दौरान संबंधित सड़कों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में ऐसी प्रयोगशाला रिपोर्ट भी मिलीं, जिन्हें जांच आयोग ने कथित तौर पर फर्जी पाया है। आयोग ने 17 सितंबर को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

    रिपोर्ट के अनुसार डीपीआर में लगी प्रयोगशाला रिपोर्टों की तुलना संबंधित प्रयोगशाला के मूल वर्षवार रजिस्टर और अभिलेखों से कराई गई। जांच में रिपोर्टों में दर्ज प्रयोगशाला क्रमांक मूल अभिलेखों से मेल नहीं पाए गए। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी। इस दिन कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चौराहे तक लिए गए सड़क नमूनों की रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा।
    लैब प्रभारी का शपथपत्र भी रिपोर्ट में शामिल

    आयोग ने रिपोर्ट में बताया कि जोनल रिसर्च लैबोरेटरी, लोक निर्माण विभाग, ग्वालियर के प्रभारी ने 29 अगस्त 2026 को शपथपत्र दिया। इसमें उन्होंने कहा कि डीपीआर में लगी प्रयोगशाला रिपोर्टों पर दर्ज क्रमांक 165/02-2020, 551/02-2020 और 500/01-2015 मूल प्रयोगशाला रिपोर्ट या रजिस्टर की प्रविष्टियों से संबंधित नहीं हैं। लैब प्रभारी के अनुसार ये रिपोर्टें जोनल रिसर्च लैबोरेटरी द्वारा तैयार, जारी या प्रमाणित नहीं की गईं और न ही मूल प्रयोगशाला अभिलेखों का हिस्सा हैं। आयोग ने मूल वर्षवार प्रयोगशाला रजिस्टर के संबंधित पृष्ठों की प्रमाणित प्रतियां भी रिपोर्ट के साथ संलग्न की हैं।
    माप पुस्तिका भी गायब मिली

    जांच आयोग को एक सड़क की डीपीआर के साथ संबंधित माप पुस्तिका भी नहीं मिली। आयोग ने नगर निगम से माप पुस्तिका मांगी तो निगम ने बताया कि संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ 24 अगस्त 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस माप पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराने या प्रस्तुत नहीं किए जाने के संबंध में है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संबंधित सड़क की पुरानी डीपीआर में पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ था।

    बाद में नगर निगम ने संबंधित ठेकेदार को गारंटी अवधि में सड़क की मरम्मत कराने के लिए नोटिस जारी किया था। जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि एक ही सड़क से संबंधित अलग-अलग डीपीआर में पुराने प्रयोगशाला प्रतिवेदन लगाए गए थे।

    हाई कोर्ट ने रिपोर्ट की प्रति नगर निगम के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम आयुक्त के शपथपत्र के साथ रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
    कोर्ट ने कहा- शहरवासियों के साथ भी धोखा!

    रिपोर्ट सामने आने पर हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि ग्वालियर के लोग खराब सड़कों की वजह से परेशान हैं, लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि भुगतान हासिल करने के लिए कथित फर्जी प्रयोगशाला रिपोर्ट लगाकर उनके साथ भी धोखा किया गया। हालांकि, कोर्ट ने नगर निगम को जांच आयोग की रिपोर्ट पर जवाब देने का अवसर दिया है। निगम की ओर से अधिवक्ता गौरव मिश्रा ने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जवाब नगर निगम आयुक्त के शपथपत्र के साथ ही दाखिल किया जाए।
    एनएचएआई ने कोर्ट की सख्ती के बाद दिए दस्तावेज

    सुनवाई के दौरान जांच आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया ने बताया कि 15 सितंबर को हाई कोर्ट ने कड़ा आदेश दिया था। इसमें निर्देशों की अवहेलना होने पर एनएचएआई के परियोजना निदेशक भरत सिंह जौया के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की संभावना जताई गई थी। इसके बाद एनएचएआई ने 16 सितंबर को आयोग द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए।

    आयोग ने बताया कि कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चौराहे तक लिए गए नमूनों की रिपोर्ट 18 सितंबर को पेश की जाएगी। वहीं एनएचएआई के अधीन अन्य सड़कों से संबंधित लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट और अंतिम एनएसवी रिपोर्ट 21 सितंबर को प्रस्तुत की जाएगी।

     

  • गांव से शहर तक दीपों की रोशनी, ‘सेवा संकल्प अभियान’ में 1.50 करोड़ से ज्यादा ‘आशीर्वाद के दीये’ जले

    गांव से शहर तक दीपों की रोशनी, ‘सेवा संकल्प अभियान’ में 1.50 करोड़ से ज्यादा ‘आशीर्वाद के दीये’ जले

    रायपुर

     प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की 25 वर्ष की सेवा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आज छत्तीसगढ़ में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम का व्यापक आयोजन किया गया। प्रदेशभर में नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाते हुए 1.50 करोड़ से अधिक दीये प्रज्वलित किए। गांव से लेकर शहर तक विभिन्न स्थानों पर दीप प्रज्वलन के माध्यम से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के दीर्घ सार्वजनिक जीवन, सेवा भावना और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के प्रति जनभावनाएं व्यक्त की गईं।

    ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाओं, युवाओं, किसानों, श्रमिकों, विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने सामूहिक रूप से दीये जलाकर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को शुभकामनाएं दीं। अनेक स्थानों पर दीपों से आकर्षक आकृतियां एवं संदेश भी बनाए गए।

    प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में सेवा और जनभागीदारी का विशेष वातावरण देखने को मिला। मंदिरों, चौक-चौराहों, सार्वजनिक स्थलों और प्रमुख मैदानों में बड़ी संख्या में नागरिक एकत्रित हुए और दीप प्रज्वलित किए। कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में सेवा, सहयोग और सकारात्मक बदलाव के संकल्प को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।

    ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत छत्तीसगढ़ में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक विभिन्न जनसेवा एवं जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य सेवा और सुशासन की भावना को जन-जन तक पहुंचाना तथा समाज के विभिन्न वर्गों को रचनात्मक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों से जोड़ना है।

    प्रदेशभर में ‘आशीर्वाद के दीये’ का यह आयोजन जनभागीदारी और सामूहिक उत्साह का प्रतीक बना। हजारों स्थानों पर एक साथ प्रज्वलित हुए दीपों ने सेवा और संकल्प के संदेश को व्यापक स्वरूप दिया।

     

  • राज्यपाल  पटेल ने रक्तदान स्वास्थ्य शिविर का लोकभवन में किया शुभारंभ

    राज्यपाल पटेल ने रक्तदान स्वास्थ्य शिविर का लोकभवन में किया शुभारंभ

    भोपाल 

    राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर सेवा संकल्प अभियान के तहत लोकभवन में आयोजित स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। शिविर के विभिन्न काउन्टरों पर जाकर परामर्श जाँच एवं परीक्षण व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

    राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने अपनी बोन मिनरल डेनसिटी (बी.एम.डी.) जांच कराकर शिविर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। दंत परीक्षण, फिजियोथेरेपी जाँच, बोन मिनरल डेनसिटी (बी.एम.डी.) जांच एवं नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श एवं औषधि वितरण व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने रक्तदाताओं को फलो की टोकरी भेंट कर, उनके सेवा संकल्प की सराहना की। रक्तदान करने आए छात्र-छात्राओं से चर्चा की। उनका उत्साहवर्धन किया। राज्यपाल ने प्रारंभ में लोक भवन में आयोजित नि:शुल्क परामर्श, जाँच और रक्तदान शिविर का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया।

    रक्तदान एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन गुरुवार को सुबह 10 बजे से एक बजे तक लोक भवन के सांदीपनि सभागार में किया गया था। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे। शिविर में रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन  श्याम सिंह कुमरे एवं जनरल सेक्रेटरी  रामेंद्र सिंह सहित चिकित्सक, विशेषज्ञ एवं अन्य संबंधित जन उपस्थित रहे।

    लोक भवन में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 370 आमजन शामिल हुए। रक्तदान के लिए 109 रक्तदाताओं ने पंजीयन कराया, जिनमें चिकित्सकीय परामर्श के बाद 77 रक्तदाताओं ने रक्तदान किया। दंत परीक्षण शिविर में 74 व्यक्तियों ने जांच कराई। उन्हें उपचार संबंधी परामर्श और आवश्यक औषधियां प्रदान की गई। बी.एम.डी. जाँच शिविर 125 आमजन ने जांच कराई। जांच में 77 आमजन की हड्डियों की स्थिति सामान्य पाई गई, जबकि 45 व्यक्तियों में हड्डियों की मामूली कमजोरी ऑस्टियोपेनिया तथा 3 व्यक्तियों में ऑस्टियोपोरोसिस पाया गया। सभी को चिकित्सकीय परामर्श एवं आवश्यक औषधियां प्रदान की गईं। फिजियोथेरेपी जाँच शिविर में 62 व्यक्तियों ने भाग लिया। उनकी फिजियोथेरेपी से संबंधित समस्याओं के संबंध में चिकित्सकों द्वारा आवश्यक परामर्श एवं व्यायाम बताए गए।

     

  • माध्यमिक आचार्य परीक्षा की Response Sheet नहीं खुली, हाईकोर्ट ने JSSC से मांगी तकनीकी जांच

    माध्यमिक आचार्य परीक्षा की Response Sheet नहीं खुली, हाईकोर्ट ने JSSC से मांगी तकनीकी जांच

    रांची
    माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ी के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम रुख अपनाया है. परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की ओर से JSSC पोर्टल पर "User Does Not Exist" संदेश आने और Response Sheet डाउनलोड नहीं होने की शिकायत पर अदालत ने आयोग के IT और कंप्यूटर विशेषज्ञों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने यह व्यवस्था इसलिए की है ताकि तकनीकी स्थिति की मौके पर ही जांच कर वास्तविक कारण स्पष्ट किया जा सके.

    याचिकाकर्ताओं ने उठाई तकनीकी समस्या
    यह मामला विकास पांडेय एवं अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत में पक्ष रखा. याचिका में कहा गया कि माध्यमिक आचार्य परीक्षा देने के बाद जब अभ्यर्थियों ने JSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी ई-मेल आईडी और पासवर्ड के जरिए लॉग-इन कर Response Sheet और Answer Key डाउनलोड करने की कोशिश की, तब पोर्टल पर "User Does Not Exist" का संदेश दिखाई दिया. इसके कारण वे अपनी Response Sheet प्राप्त नहीं कर सके.

    JSSC ने शपथ पत्र में क्या कहा
    मामले में JSSC ने अदालत में शपथ पत्र दाखिल कर अपना पक्ष रखा है. आयोग ने अपने जवाब में संभावना जताई कि यह समस्या अभ्यर्थियों द्वारा ई-मेल आईडी या पासवर्ड सही तरीके से दर्ज नहीं करने के कारण सामने आई होगी. हालांकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने सही विवरण दर्ज किया था, इसके बावजूद पोर्टल पर यही संदेश आता रहा और Response Sheet डाउनलोड नहीं हो सकी.

    कोर्ट ने तकनीकी जांच का दिया आदेश
    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने केवल दस्तावेजों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय तकनीकी स्तर पर जांच कराने का फैसला किया. अदालत ने निर्देश दिया कि JSSC के कंप्यूटर और IT विशेषज्ञ अगली सुनवाई में अदालत में मौजूद रहें. साथ ही याचिकाकर्ताओं को भी अपनी ई-मेल आईडी और पासवर्ड के साथ उपस्थित रहने को कहा गया है.

    कोर्ट के सामने होगा लाइव लॉग-इन
    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई के दौरान JSSC के तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी में संबंधित अभ्यर्थियों के अकाउंट में लॉग-इन कर यह देखा जाएगा कि उनकी Response Sheet और Answer Key वास्तव में उपलब्ध है या नहीं. यदि उपलब्ध है तो उसे डाउनलोड किया जा सकता है या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी. इससे यह साफ हो सकेगा कि समस्या अभ्यर्थियों द्वारा गलत विवरण दर्ज करने की थी या फिर JSSC पोर्टल में कोई तकनीकी खामी थी.

    13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
    अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:15 बजे निर्धारित की है. अधिवक्ता चंचल जैन ने बताया कि याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग यही है कि Response Sheet और Answer Key से जुड़ी तकनीकी समस्या की निष्पक्ष जांच विशेषज्ञों की मौजूदगी में कराई जाए. हाईकोर्ट के इस निर्देश को उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्होंने परीक्षा के बाद अपनी Response Sheet डाउनलोड नहीं कर पाने की शिकायत उठाई है.

  • श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए 160 विशेष बसें और 50 पार्किंग स्थल तैयार

    श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए 160 विशेष बसें और 50 पार्किंग स्थल तैयार

    मथुरा/बरसाना

     ब्रज के प्रमुख पर्वों में से एक श्री राधा अष्टमी पर्व को लेकर योगी सरकार ने बरसाना में व्यापक तैयारियां की हैं। आगामी 19 सितंबर 2026 (शनिवार) को बरसाना स्थित प्रसिद्ध श्री लाडली जी मंदिर में राधा रानी का जन्मोत्सव पूरी भव्यता और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्री जी का विशेष अभिषेक और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। पर्व में लगभग 25 लाख श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था की है।

    7 जोन और 20 सेक्टरों में बंटा मेला क्षेत्र
    भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिहाज से पूरे बरसाना मेला क्षेत्र को 7 जोन और 20 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। चप्पे- चप्पे पर नजर रखने के लिए लगभग 3 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें 8 अपर पुलिस अधीक्षक, 38 पुलिस उपाधीक्षक, 75 निरीक्षक, 320 उप निरीक्षक, 68 महिला उप निरीक्षक, पीएसी की 2 कंपनी और पीएसी फ्लड की 2 प्लाटून शामिल हैं। इसके अलावा 155 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पूरे मेला क्षेत्र की सघन निगरानी की जाएगी। श्रद्धालुओं की मदद के लिए 2 खोया- पाया केंद्र और 6 वॉच टावर भी स्थापित किए गए हैं।

    यातायात और सुगम दर्शन के लिए विशेष प्रबंध
    श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई असुविधा न हो, इसके लिए भारी वाहनों का रूट डायवर्जन लागू किया गया है। उ.प्र.राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) द्वारा 160 विशेष बसें चलाई जाएंगी, जबकि 40 बसों को रिजर्व रखा गया है। प्रत्येक बस पर दो- दो चालकों की ड्यूटी लगाई गई है। बरसाना में एक अस्थायी बस स्टैंड भी बनाया गया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 38 होल्डिंग एरिया, 50 पार्किंग स्थल, 88 बैरियर, 14 बैरिकेडिंग और 7 स्थानों पर जूता-घर की व्यवस्था की गई है।

    स्वास्थ्य, स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्त मेले पर जोर
    स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेला क्षेत्र में 12 मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे। आपात स्थिति के लिए बाइक एंबुलेंस, नियमित दूरी पर एंबुलेंस और एंटी-वेनम दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मेला क्षेत्र में उत्कृष्ट साफ- सफाई और पूरी तरह 'प्लास्टिक मुक्त' बनाने की व्यवस्था की गई है। भंडारा संचालकों को भी नियमित कूड़ा उठान और कूड़ादान रखने की हिदायत दी गई है।

    रोशनी से जगमग हुआ बरसाना 
    सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा के लिहाज से ट्रांसफार्मर और पोल की प्लास्टिक रैपिंग करने का कार्य किया गया है। मथुरा- वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) द्वारा फसाड लाइटिंग, वॉल पेंटिंग और कपड़ों की सजावट से पूरे बरसाना को एक नव्य-भव्य रूप दिया गया है। वहीं खाद्य सुरक्षा मथुरा/बरसाना

     ब्रज के प्रमुख पर्वों में से एक श्री राधा अष्टमी पर्व को लेकर योगी सरकार ने बरसाना में व्यापक तैयारियां की हैं। आगामी 19 सितंबर 2026 (शनिवार) को बरसाना स्थित प्रसिद्ध श्री लाडली जी मंदिर में राधा रानी का जन्मोत्सव पूरी भव्यता और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्री जी का विशेष अभिषेक और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। पर्व में लगभग 25 लाख श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था की है।

    7 जोन और 20 सेक्टरों में बंटा मेला क्षेत्र

    भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिहाज से पूरे बरसाना मेला क्षेत्र को 7 जोन और 20 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। चप्पे- चप्पे पर नजर रखने के लिए लगभग 3 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें 8 अपर पुलिस अधीक्षक, 38 पुलिस उपाधीक्षक, 75 निरीक्षक, 320 उप निरीक्षक, 68 महिला उप निरीक्षक, पीएसी की 2 कंपनी और पीएसी फ्लड की 2 प्लाटून शामिल हैं। इसके अलावा 155 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पूरे मेला क्षेत्र की सघन निगरानी की जाएगी। श्रद्धालुओं की मदद के लिए 2 खोया- पाया केंद्र और 6 वॉच टावर भी स्थापित किए गए हैं।

    यातायात और सुगम दर्शन के लिए विशेष प्रबंध

    श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई असुविधा न हो, इसके लिए भारी वाहनों का रूट डायवर्जन लागू किया गया है। उ.प्र.राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) द्वारा 160 विशेष बसें चलाई जाएंगी, जबकि 40 बसों को रिजर्व रखा गया है। प्रत्येक बस पर दो- दो चालकों की ड्यूटी लगाई गई है। बरसाना में एक अस्थायी बस स्टैंड भी बनाया गया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 38 होल्डिंग एरिया, 50 पार्किंग स्थल, 88 बैरियर, 14 बैरिकेडिंग और 7 स्थानों पर जूता-घर की व्यवस्था की गई है।

    स्वास्थ्य, स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्त मेले पर जोर

    स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेला क्षेत्र में 12 मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे। आपात स्थिति के लिए बाइक एंबुलेंस, नियमित दूरी पर एंबुलेंस और एंटी-वेनम दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मेला क्षेत्र में उत्कृष्ट साफ- सफाई और पूरी तरह 'प्लास्टिक मुक्त' बनाने की व्यवस्था की गई है। भंडारा संचालकों को भी नियमित कूड़ा उठान और कूड़ादान रखने की हिदायत दी गई है।

    रोशनी से जगमग हुआ बरसाना 
    सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा के लिहाज से ट्रांसफार्मर और पोल की प्लास्टिक रैपिंग करने का कार्य किया गया है। मथुरा- वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) द्वारा फसाड लाइटिंग, वॉल पेंटिंग और कपड़ों की सजावट से पूरे बरसाना को एक नव्य-भव्य रूप दिया गया है। वहीं खाद्य सुरक्षा विभाग भी मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।  

    स्थानीय निवासियों को भी मिलेंगे दर्शन के पास: जिलाधिकारी
    जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि 19 सितंबर को श्री राधा अष्टमी पर्व को बरसाना में अत्यंत दिव्य, भव्य और धूमधाम से मनाया जाएगा। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है कि बरसाना आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधाएं मिलें और वे बिना किसी परेशानी के सुगमता के साथ श्रीजी के दर्शन कर सकें। इसके लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बाहरी श्रद्धालुओं के साथ- साथ इस बार बरसाना के स्थानीय निवासियों की सहूलियत का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। स्थानीय लोग भी इस पावन अवसर पर अपने आराध्य श्रीजी (श्री राधारानी जी) के दर्शन कर सकें, इसके लिए उन्हें प्रशासन की ओर से विशेष पास जारी किए गए हैं, ताकि उन्हें भीड़भाड़ में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

      

    स्थानीय निवासियों को भी मिलेंगे दर्शन के पास: जिलाधिकारी
    जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि 19 सितंबर को श्री राधा अष्टमी पर्व को बरसाना में अत्यंत दिव्य, भव्य और धूमधाम से मनाया जाएगा। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है कि बरसाना आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधाएं मिलें और वे बिना किसी परेशानी के सुगमता के साथ श्रीजी के दर्शन कर सकें। इसके लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बाहरी श्रद्धालुओं के साथ- साथ इस बार बरसाना के स्थानीय निवासियों की सहूलियत का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। स्थानीय लोग भी इस पावन अवसर पर अपने आराध्य श्रीजी (श्री राधारानी जी) के दर्शन कर सकें, इसके लिए उन्हें प्रशासन की ओर से विशेष पास जारी किए गए हैं, ताकि उन्हें भीड़भाड़ में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

  • आधार प्रमाणीकरण एवं सत्यापन विषय पर एक-दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

    आधार प्रमाणीकरण एवं सत्यापन विषय पर एक-दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ शासन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आज गुरुवार को ‘आधार प्रमाणीकरण एवं सत्यापन’ विषय पर एक-दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य शासन के अधिकारियों- कर्मचारियों को आधार प्रमाणीकरण एवं सत्यापन की तकनीकी प्रक्रियाओं, ऑफलाइन सत्यापन, फेस ऑथेंटिकेशन तथा आधार सेवाओं के सुरक्षित उपयोग से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।

    कार्यशाला की मुख्य अतिथि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले रहीं। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए आधार प्रमाणीकरण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आती हैं। ऐसे में आधार की ऑफलाइन सत्यापन व्यवस्था की जानकारी अधिकारियों एवं संबंधित विभागों के लिए महत्वपूर्ण और उपयोगी है।

     कंगाले ने हितग्राही सत्यापन से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि फिंगरप्रिंट आधारित आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से हितग्राहियों की पहचान सुनिश्चित करने से छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला से अधिकारियों एवं विभागीय प्रतिनिधियों को आधार प्रमाणीकरण एवं सत्यापन की प्रक्रियाओं की बेहतर समझ मिलेगी तथा वे निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप इसका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कर सकेंगे।  

    33 जिलों में 1,100 से अधिक आधार सेवा केंद्र संचालित

     कार्यशाला में छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसाइटी (चिप्स) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में इन-हाउस मॉडल के तहत 1,100 से अधिक आधार सेवा केंद्र शासकीय परिसरों में संचालित किए जा रहे हैं । इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को आधार नामांकन एवं अद्यतन की सुरक्षित, सुगम और विश्वसनीय सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है । उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 3 करोड़ 17 लाख 33 हजार से अधिक आधार पंजीकरण किए जा चुके हैं। 

    7 लाख से अधिक बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अद्यतन

    अग्रवाल ने बताया कि नागरिकों तक आधार सेवाओं की सहज पहुँच सुनिश्चित करने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में विशेष आधार शिविरों का आयोजन किया गया है। विशेष रूप से 5-15 वर्ष तथा 15-17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अद्यतन पर विशेष ध्यान देते हुए, इन शिविरों के माध्यम से अब तक 7 लाख से अधिक बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अद्यतन सफलतापूर्वक किया जा चुका है।

    राज्य में 14 नये आधार सेवा केंद्र खोलने की अनुमति

    अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़़ राज्य के नागरिकों की सुविधा के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने राज्य में 14 नये आधार सेवा केंद्र खोलने की अनुमति प्रदान की है, जिसमें से 5 जिलों दुर्ग, महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा में आधार सेवा केंद्र का संचालन भी प्रारम्भ कर दिया गया है शेष स्थानों पर कार्य प्रगतिरत है । चिप्स द्वारा इन 14 स्थानों के अतिरिक्त 7 अन्य जिलों में आधार सेवा केंद्र खोलने का प्रस्ताव भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को प्रेषित किया है।  

    आधार के सुरक्षित उपयोग एवं निर्धारित प्रक्रियाओं की दी जानकारी
     
    कार्यशाला में वक्ता के रूप में नई दिल्ली से आये भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के आधार उपयोग प्रभाग एवं मीडिया के  निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल प्रवीण चौधरी ने कहा कि आधार अधिनियम के प्रावधानों के तहत आधार से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट नियम एवं निर्धारित व्यवस्थाएं लागू हैं। उन्होंने कहा कि आधार का उपयोग नागरिकों की पहचान के सत्यापन को सुगम और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रवीण चौधरी ने बताया कि नागरिक स्वयं भी अपने आधार का सत्यापन कर सकते हैं, जिसके लिए ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन माध्यम की सुविधा भी उपलब्ध है। उन्होंने आधार के सुरक्षित उपयोग, सत्यापन की निर्धारित प्रक्रियाओं, नागरिक सुविधा तथा डेटा सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि आधार सेवाओं का उपयोग निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं के अनुरूप किया जाना आवश्यक है। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रवीण चौधरी ने बताया कि ऑफलाइन आधार सत्यापन का उपयोग व्यवसायिक संस्थाएं, बैंक आदि निजी संस्थाओं द्वारा आधार के मोबाइल एप के माध्यम से भी किया जा सकेगा।

     कार्यशाला में वक्ता के रूप में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, हैदराबाद के निदेशक  टी. रामकृष्ण उपस्थित रहे। उन्होंने देश में आधार व्यवस्था के क्रमिक विस्तार तथा इसके लिए विकसित की गई तकनीकी एवं संस्थागत अधोसंरचना की विस्तृत जानकारी दी । उन्होंने बताया कि आधार सेवा केंद्रों के निरंतर विस्तार के साथ नागरिकों के लिए नामांकन, अद्यतन एवं प्रमाणीकरण जैसी सेवाओं की पहुंच भी लगातार बढ़ी है। उन्होंने आधार की तकनीकी संरचना, सेवा वितरण तंत्र तथा इसके सुचारू संचालन के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्यरत व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं पर भी जानकारी दी।

    तकनीकी सत्रों में आधार सत्यापन की प्रक्रियाओं पर हुई विस्तार से चर्चा

    कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को ऑफलाइन आधार सत्यापन, फेस ऑथेंटिकेशन तथा आधार सेवाओं के सुरक्षित उपयोग से संबंधित व्यावहारिक जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने सीमित नेटवर्क वाले क्षेत्रों में ऑफलाइन सत्यापन की उपयोगिता तथा फिंगरप्रिंट अथवा आइरिस प्रमाणीकरण में कठिनाई होने की स्थिति में फेस ऑथेंटिकेशन के उपयोग और लाभों के बारे में विस्तार से बताया। 

    150 से अधिक अधिकारियों ने लिया भाग

    कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक भास्कर विलास संदीपन, कोष एवं लेखा संचालनालय के संचालक एस. जयवर्धन, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय की संचालक डॉ. फरिहा आलम, चिप्स के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी शशांक पांडे, संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपम आशीष टोप्पो एवं आशीष जायसवाल सहित विभिन्न विभागों के 150 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया।

  • मुख्यमंत्री महादेव घाट में आयोजित विराट दीपोत्सव एवं महाआरती ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में हुए शामिल

    मुख्यमंत्री महादेव घाट में आयोजित विराट दीपोत्सव एवं महाआरती ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में हुए शामिल

    रायपुर 

     प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस पर आज राजधानी रायपुर का महादेव घाट सवा लाख दीपों की ज्योति से जगमगा उठा। खारुन नदी के पावन तट पर आयोजित विराट दीपोत्सव एवं महाआरती ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय शामिल हुए और प्रदेशवासियों के साथ प्रधानमंत्री  मोदी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की। सवा लाख दीपों की एक साथ प्रज्वलित ज्योति से महादेव घाट का पूरा परिसर आलोकित हो उठा। श्रद्धा, आस्था और जनभागीदारी के इस अनुपम संगम के बीच खारुन मैया की भव्य महाआरती की गई।

    मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने अपना जीवन राष्ट्र और जनसेवा को समर्पित किया है। उनके नेतृत्व में भारत ने विकास, जनकल्याण और राष्ट्रीय स्वाभिमान के क्षेत्र में अनेक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री  मोदी दिन-रात 140 करोड़ देशवासियों की सेवा में जुटे हैं और उनके नेतृत्व में आज भारत विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज खारुन मैया के पावन तट पर प्रज्वलित सवा लाख दीप प्रधानमंत्री  मोदी के प्रति छत्तीसगढ़वासियों के स्नेह, आत्मीयता और शुभकामनाओं की अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री  मोदी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुदीर्घ और यशस्वी जीवन की मंगलकामना की।

    विराट दीपोत्सव के दौरान साध्वी प्रज्ञा भारती एवं आचार्यों द्वारा विधि-विधान के साथ खारुन मैया की महाआरती की गई। मुख्यमंत्री  साय ने भी महाआरती में सहभागिता की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को समर्पित साध्वी प्रज्ञा भारती द्वारा रचित एवं स्वरबद्ध गीत का मुख्यमंत्री ने विमोचन किया।

    प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश ने देखे ऐतिहासिक परिवर्तन

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने ऐसे अनेक ऐतिहासिक निर्णय और परिवर्तन देखे हैं, जिनकी लंबे समय से प्रतीक्षा थी। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने से लेकर अयोध्या में भगवान  रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने तक देश ने नए आत्मविश्वास और सामर्थ्य का अनुभव किया है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रहित में बड़े और दूरगामी निर्णय लिए गए हैं। उनके दृढ़ संकल्प, स्पष्ट दृष्टि और राष्ट्रसेवा की भावना ने देश में विकास और जनकल्याण की गति को तेज किया है। आज भारत विश्व मंच पर अधिक आत्मविश्वास और सामर्थ्य के साथ अपनी भूमिका निभा रहा है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के लिए शासन का केंद्र हमेशा गरीब और समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति रहा है। इसी भावना के अनुरूप गरीब परिवारों को पक्का आवास, घर-घर शौचालय, जन-धन खाते, रसोई गैस कनेक्शन, खाद्यान्न सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया गया है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी प्रत्येक देशवासी को अपने परिवार का सदस्य मानकर ‘सबका साथ, सबका विकास’ के ध्येय के साथ निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनकी सरकार ने गरीब की छोटी से छोटी आवश्यकता और उसके जीवन को बेहतर बनाने वाली सुविधाओं को शासन की प्राथमिकता बनाया है।

    प्रधानमंत्री के साथ काम करने का अवसर मेरे सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव : मुख्यमंत्री  साय

    मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री  मोदी के साथ अपने कार्य अनुभव को स्मरण करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में जब  नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने, तब मुझे भी उनकी सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। उस दौरान मुझे उनकी कार्यशैली, अनुशासन, परिश्रम और जनसेवा के प्रति समर्पण को निकट से देखने और समझने का अवसर मिला।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी का पूरा जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण और जनसेवा की प्रेरक यात्रा है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व करने तक उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष सेवा और सुशासन को समर्पित रहे हैं। यह देश का सौभाग्य है कि हमें ऐसा नेतृत्व मिला है, जिसने विश्व पटल पर भारत का मान और सम्मान बढ़ाया है।

    प्रधानमंत्री  मोदी का छत्तीसगढ़ से रहा है गहरा आत्मीय जुड़ाव

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ गहरा आत्मीय जुड़ाव रहा है। प्रदेश के विकास को केंद्र सरकार से निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन मिला है। प्रधानमंत्री  मोदी की विकास दृष्टि में छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से यहां के जनजातीय तथा दूरस्थ अंचलों के विकास को महत्वपूर्ण स्थान मिला है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से छत्तीसगढ़ ने माओवादी हिंसा के विरुद्ध निर्णायक सफलता हासिल की है। वर्षों तक हिंसा और पिछड़ेपन का दंश झेलने वाले बस्तर में आज शांति और विकास के नए द्वार खुले हैं। सड़क, बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाएं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं तथा विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के लोगों के जीवन में आ रहा यह परिवर्तन विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई शक्ति दे रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि शांति के वातावरण में बस्तर की प्राकृतिक संपदा, पर्यटन, संस्कृति और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को स्थानीय लोगों की समृद्धि और रोजगार से जोड़ा जाए।

    जनसेवा के 25 वर्षों पर एक महीने तक ‘सेवा संकल्प अभियान’

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ प्रारंभ हुआ है। यह अभियान प्रधानमंत्री  मोदी के सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने का अवसर है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से स्वच्छता, स्वास्थ्य, पोषण, पर्यावरण संरक्षण, जरूरतमंदों की सहायता और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यों को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता करते हुए सेवा के संकल्प को अपने गांव, शहर, मोहल्ले और समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।

    सवा लाख दीपों ने दिया सामूहिक शुभकामनाओं का संदेश

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज महादेव घाट पर सवा लाख दीप प्रज्वलित कर प्रदेशवासियों ने प्रधानमंत्री  मोदी के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन के लिए अपनी मंगलकामनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि राजधानी रायपुर में विभिन्न स्थानों पर लगभग 32 लाख दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री  मोदी के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि दीप भारतीय संस्कृति में आशा, विश्वास, सकारात्मकता और प्रकाश का प्रतीक है। आज जलाया गया प्रत्येक ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रधानमंत्री  मोदी के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना के साथ ही सेवा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का भी प्रतीक है।

    उन्होंने विराट दीपोत्सव एवं महाआरती के भव्य आयोजन के लिए आयोजकों, सनातन ध्वज वाहिनी के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि इतनी विशाल जनभागीदारी ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया है।

    इस अवसर पर विराट दीपोत्सव एवं महाआरती ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम की संयोजक एवं राज्यसभा सांसद  लक्ष्मी वर्मा,  विधायक  राजेश मूणत एवं  मोतीलाल साहू, रायपुर नगर निगम की महापौर  मीनल चौबे,  कौशल्या साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष  रामप्रताप सिंह, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष  राजीव अग्रवाल, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष  राजीव लोचन महाराज, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष  वर्णिका शर्मा, राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष  मोना सेन सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, सनातन ध्वज वाहिनी के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

  • बिहार कलाकार पेंशन योजना में अब तक 411 कलाकार लाभान्वित, जानें कौन कर सकता है आवेदन

    बिहार कलाकार पेंशन योजना में अब तक 411 कलाकार लाभान्वित, जानें कौन कर सकता है आवेदन

    पटना
     Bihar Artist Pension Scheme:कला के मंच पर वर्षों तक अपनी प्रतिभा दिखाने वाले वरिष्ठ कलाकारों के लिए बिहार सरकार की मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना आर्थिक सहारा बन रही है।

    50 वर्ष से अधिक उम्र और कम आय वाले ऐसे कलाकार, जिन्होंने कला के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्षों तक योगदान दिया है, इस योजना का लाभ ले सकते हैं।

    चयनित कलाकारों को हर महीने 3,000 रुपये पेंशन दी जाती है। जनवरी 2026 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक विभिन्न जिलों के करीब 411 कलाकारों को डीबीटी के माध्यम से पेंशन दी जा रही है।

    50 साल की उम्र और 10 साल का अनुभव जरूरी
    योजना का लाभ लेने के लिए कलाकार की उम्र 50 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। आवेदक बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए और कला के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्षों का अनुभव होना जरूरी है।

    इसके साथ ही उसकी वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। आवेदक को किसी अन्य सरकारी पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा हो।

    कलाकार का बिहार के कला एवं संस्कृति विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण भी अनिवार्य है। विभागीय विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा के बाद पात्र कलाकारों को पेंशन की स्वीकृति दी जाती है।

    अब तक 411 कलाकारों को मिली पेंशन
    सरकारी स्वीकृतियों के अनुसार जून 2026 के लिए अलग-अलग आदेशों में 258 और 153 अनुशंसित कलाकारों को 3,000 रुपये प्रतिमाह की दर से पेंशन देने की मंजूरी दी गई।

    इस तरह करीब 411 कलाकारों को योजना के तहत पेंशन उपलब्ध कराई गई है। राशि सीधे कलाकारों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है।

    आवेदन से चयन तक कैसे पहुंचता है नाम?
    कलाकारों को सबसे पहले बिहार कलाकार पंजीकरण पोर्टल पर अपनी प्रोफाइल बनानी होती है। इसके लिए artistregistration.bihar.gov.in पर जाकर नाम और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा। मोबाइल पर आए ओटीपी के बाद आवेदन फार्म खुलेगा।

    आवेदन में व्यक्तिगत जानकारी के साथ कलाकार को अपने कला क्षेत्र, अनुभव और अब तक दी गई प्रस्तुतियों का विवरण देना होगा। बैंक खाते की जानकारी के साथ अपनी तस्वीर, प्रस्तुतियों की तस्वीरें और वीडियो भी अपलोड किए जा सकते हैं।

    तीन स्तरों पर होती है जांच
    आवेदन मिलने के बाद पात्रता की प्राथमिक जांच की जाती है। इसके बाद आवेदन संबंधित जिले के कला एवं संस्कृति कार्यालय तक पहुंचता है। यहां कलाकार के आयु, निवास, आय और कला क्षेत्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाती है।

    जिला स्तर की जांच के बाद आवेदन विभागीय चयन समिति के पास भेजे जाते हैं। समिति पात्र कलाकारों के अनुभव, आर्थिक स्थिति और कला क्षेत्र में योगदान से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा करती है।
    अनुशंसित कलाकारों के नाम पर अंतिम स्वीकृति के बाद पेंशन की राशि डीबीटी से बैंक खाते में भेजी जाती है।

    किन कलाकारों के लिए है योजना?
        उम्र 50 वर्ष या उससे अधिक हो।
        बिहार का स्थायी निवासी होना जरूरी।
        कला के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव हो।
        वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से कम हो।
        किसी अन्य सरकारी पेंशन का लाभ नहीं ले रहे हों।
        बिहार कलाकार पंजीकरण पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
        विभागीय जांच और चयन समिति की अनुशंसा के बाद पेंशन स्वीकृत होगी।

    ऐसे करें पंजीयन
    1. artistregistration.bihar.gov.in पर जाएं।
    2. नाम और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करें।
    3. ओटीपी के बाद बेसिक डिटेल भरें।
    4. कला क्षेत्र, अनुभव और प्रस्तुतियों की जानकारी दें।
    5. बैंक खाते का विवरण भरें।
    6. फोटो, प्रस्तुति की तस्वीरें और वीडियो अपलोड करें।
    7. आवेदन जमा करने के बाद विभागीय जांच और चयन प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करें।

     

  • राघोपुर में कटाव पर अब तक करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं थमा गंगा का कहर

    राघोपुर में कटाव पर अब तक करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं थमा गंगा का कहर

    भागलपुर
     राघोपुर 1994 से गंगा के कटाव का दंश झेल रहा है। गंगा की धारा के दबाव में वर्षों से गांव और खेती की जमीन कटती रही है। हर साल बाढ़ और कटाव के दौरान करोड़ों रुपये की योजनाएं और फ्लड फाइटिंग कार्य किए गए, लेकिन राघोपुर को अब तक स्थायी समाधान नहीं मिल सका।

    500 मीटर तटबंध ध्वस्त होने से मचा था हाहाकार
    राघोपुर-काजीकोरैया जमींदारी तटबंध पर इस बार कटाव ने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। करीब 500 मीटर तटबंध ध्वस्त होने के बाद इलाके में हाहाकार मच गया था। ग्रामीणों की चिंता और हालात की गंभीरता मुख्यमंत्री तक पहुंची।

    इसके बाद मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से गंगा की धारा को रोकने और राघोपुर को बचाने के लिए बड़े स्तर पर बचाव कार्य शुरू हुआ। बचाव कार्य से फिलहाल कटाव पर नियंत्रण मिला है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। तटबंध के आगे बची जमीन और उसके बाद मौजूद रेलवे लाइन की सुरक्षा अब सबसे बड़ी चिंता है।

    अब तक करोड़ों खर्च, फिर भी कटाव बरकरार
    उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार राघोपुर-काजीकोरैया जमींदारी तटबंध पर वर्ष 2005-06 में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से स्थायी कटाव निरोधी कार्य शुरू हुआ था। इसके बाद 2008 में करीब 18.77 करोड़, 2014 में करीब 67.99 करोड़ और 2015 में करीब 65 करोड़ रुपये की योजनाओं का उल्लेख मिलता है।

    2016 में इस्माइलपुर-बिंदटोली और राघोपुर क्षेत्र के लिए करीब 115 करोड़ रुपये की योजना भी सामने आई थी।

    एक पुराने आकलन के अनुसार, 2006 से 2019 के बीच पूरे नवगछिया अनुमंडल में स्थायी कटाव निरोधी और फ्लड फाइटिंग कार्यों पर करीब 686 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके बावजूद राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध हर साल गंगा के दबाव से जूझता रहा।

    2026 में फिर करीब पांच करोड़ की योजना
    राघोपुर को कटाव से बचाने के लिए वर्ष 2026 में भी करीब पांच करोड़ रुपये की प्राक्कलित लागत से कटाव निरोधी योजना तैयार की गई थी। लेकिन जुलाई में गंगा के तेज कटाव ने बचाव की तैयारियों की परीक्षा ले ली।

    तटबंध का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ और जल संसाधन विभाग का अस्थायी कैंप कार्यालय भी गंगा में समा गया। जल संसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख ई. वरुण कुमार ने रेलवे ट्रैक की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए अतिरिक्त संसाधन और बड़े संवेदकों को बचाव कार्य में लगाने की बात कही है।

    विभाग के अनुसार नदी की मुख्य धारा तटबंध की ओर शिफ्ट होने और विक्रमशिला सेतु के अपस्ट्रीम में तेज बहाव के कारण मार्जिनल बांध पर लगातार दबाव बना हुआ था।

    सवाल सिर्फ कटाव का नहीं, खर्च का भी
    राघोपुर की मौजूदा स्थिति अब सिर्फ बाढ़ और कटाव का मामला नहीं रह गई है। वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी तटबंध बार-बार कमजोर पड़ रहा है। ऐसे में स्थायी समाधान को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    रेलवे लाइन तक पहुंचा संकट
    राघोपुर में कटाव जिस तेजी से बढ़ा है, उसने रेलवे लाइन की सुरक्षा को भी चिंता के केंद्र में ला दिया है। यदि गंगा की धारा इसी दिशा में दबाव बनाए रखती है तो बची जमीन के साथ रेलवे परिसंपत्तियों पर भी खतरा बढ़ सकता है।

    इसी बीच स्थायी समाधान की दिशा में पहल को लेकर प्रधानमंत्री के निर्देश पर बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भागलपुर एवं राघोपुर आगमन को लेकर ग्रामीणों में उम्मीद जगी है।

    वर्षों से कटाव का दंश झेल रहे लोगों को उम्मीद है कि इस बार सिर्फ तत्काल बचाव तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राघोपुर के लिए स्थायी कटाव निरोधी समाधान की दिशा में ठोस निर्णय होगा।

    सुलगते सवाल
        क्या स्थायी कटाव निरोधी योजनाओं की तकनीकी डिजाइन बदलती नदी की धारा के अनुरूप रही?
        क्या निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी पर्याप्त रही?
        क्या हर साल फ्लड फाइटिंग पर होने वाले खर्च के बावजूद स्थायी सुरक्षा की प्रभावी रणनीति तैयार नहीं हो सकी?