Author: NewseDay

  • अखिलेश के समय गन्ने का पैसा सालों बाद मिलता था… सपा सरकार पर बरसे सूर्य प्रताप शाही

    अखिलेश के समय गन्ने का पैसा सालों बाद मिलता था… सपा सरकार पर बरसे सूर्य प्रताप शाही

    लखनऊ। कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने MSP, गन्ना भुगतान, किसानों की बिजली और रोजगार के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सपा सरकार के कार्यकाल की तुलना योगी सरकार से करते हुए कहा कि अखिलेश यादव को सरकार पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबां में झांकना चाहिए।

    ‘उनके जमाने में धान की MSP ₹1310, आज ₹2385’
    सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि सपा सरकार के समय धान की MSP ₹1310 और गेहूं की MSP ₹1400 थी। इसके मुकाबले योगी सरकार में पिछले साल धान की MSP ₹2385 और गेहूं की ₹2450 दी गई। उन्होंने कहा कि 2017 के चुनाव से पहले प्रचार के दौरान धान ₹700 से ₹800 में बिकता था। आज उत्तर प्रदेश में धान ₹2400, ₹2500, ₹2600 और ₹2700 तक में बिक रहा है। उन्होंने कहा कि बाजार में गेहूं का भाव भी ₹2800 तक पहुंचा है। शाही ने कहा कि MSP बढ़ने से बाजार का रेट भी उठा है और इसका फायदा किसान को मिला है।

    ‘सपा राज में साल-साल तक भुगतान नहीं होता था’
    किसानों के भुगतान को लेकर भी सूर्य प्रताप शाही ने सपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय किसान MSP पर फसल बेचता था, लेकिन उसका भुगतान साल-साल और दो-दो साल तक नहीं होता था। उन्होंने बुंदेलखंड में किसान आत्महत्या का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में वहां लगातार किसान आत्महत्या करते थे। वहीं योगी सरकार की व्यवस्था का जिक्र करते हुए शाही ने कहा कि अब किसान के खाते में सीधे भुगतान होता है और तीन से चार दिन, अधिकतम सात दिन के भीतर पैसा पहुंच जाता है।

    गन्ने के भुगतान पर भी अखिलेश को घेरा
    गन्ना मूल्य और भुगतान को लेकर सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि सपा सरकार के समय गन्ने का दाम ₹280 तय किया गया था और इसका भुगतान तीन किस्तों में किया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले 40 प्रतिशत, फिर 40 प्रतिशत और अंत में 20 प्रतिशत भुगतान होता था और यह 20 प्रतिशत राशि तीन-चार साल बाद तक अटकी रहती थी। शाही ने कहा कि योगी सरकार बनने के समय तीन पेराई सत्रों का करीब ₹10 हजार करोड़ बकाया छोड़ा गया था, जिसका भुगतान योगी सरकार ने किया। उनके मुताबिक अब तक ₹3.5 लाख करोड़ गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा चुका है। इस साल गन्ना मूल्य में ₹25 की बढ़ोतरी की गई है और ₹400 प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ₹36,500 करोड़ में से ₹34 हजार करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।

    ‘किसान के ट्यूबवेल की बिजली माफ’
    सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों के ट्यूबवेल से चलने वाली बिजली को माफ कर दिया है। उन्होंने बताया कि सरकार इसके लिए ₹2600 करोड़ का खर्च वहन कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी व्यवस्था के बावजूद अखिलेश यादव सरकार पर सवाल क्यों उठा रहे हैं। शाही ने कहा कि उन्हें अनावश्यक अफवाह और गलत बातें फैलाने के बजाय अपने ऊपर पुनर्विचार करना चाहिए।

    ‘सपा सरकार में गुंडाराज पूरे प्रदेश में था’
    सूर्य प्रताप शाही ने सपा सरकार के कानून-व्यवस्था के रिकॉर्ड पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार में लूट-खसोट, योजनाओं में भ्रष्टाचार और पुलिस के ऊपर गुंडों का प्रभाव था। उन्होंने मथुरा के जवाहर बाग कांड का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पुलिस के एडिशनल एसपी की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने अन्य घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस समय अपराधियों के हौसले बुलंद थे। शाही ने कहा कि आज गुंडों के वे हौसले पस्त हो चुके हैं और उत्तर प्रदेश की जनता अब गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करेगी।

    ‘अपहरण, फिरौती और लूट का कारोबार खत्म’
    सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि सपा सरकार के दौरान अपहरण, फिरौती, लूट और रैनसम वसूली का माहौल था। उन्होंने इसे उस दौर का ‘उद्योग’ बताते हुए आरोप लगाया कि लोगों का अपहरण किया जाता था, फिरौती मांगी जाती थी और भारी रकम लेकर छोड़ा जाता था। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में यह सब खत्म हो चुका है।

    ‘9.5 लाख से ज्यादा लोगों को पारदर्शी तरीके से नौकरी’
    सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में 9.5 लाख से ज्यादा लोगों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों में कार्यक्षमता बढ़ी है और पब्लिक सर्विस कमीशन की कार्यप्रणाली को बेहतर किया गया है। शाही ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान पब्लिक सर्विस कमीशन, सबऑर्डिनेट सर्विस कमीशन और शिक्षक भर्ती बोर्ड जैसी संस्थाएं ध्वस्त हो गई थीं और नौकरी की नीलामी होती थी। उन्होंने कहा कि अब यह व्यवस्था बंद हो गई है और इसी वजह से समाजवादी पार्टी के ‘पेट में दर्द’ है और अखिलेश यादव बेचैन हैं।

  • IIT रुड़की में अजित डोभाल का बड़ा बयान, भारत की GDP को लेकर बताया 20 साल का अनुमान

    IIT रुड़की में अजित डोभाल का बड़ा बयान, भारत की GDP को लेकर बताया 20 साल का अनुमान

    रुड़की
    भारत की GDP अगले 20 साल में कितनी हो सकती है, इसका अनुमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने बताया है. IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में छात्रों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. मौजूदा GDP 4.015 ट्रिलियन डॉलर है, जो अगले 20 साल में बढ़कर 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. उन्होंने कहा कि छात्र ऐसे दौर में रह रहे हैं, जब उनके भविष्य में काफी संभावनाएं हैं। 

    दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए अजित डोभाल ने कहा कि छात्र भाग्यशाली हैं कि वे बदलाव के ऐसे दौर में रह रहे हैं. उनके मुताबिक, भारत में बड़े बदलाव हो रहे हैं और देश एक शानदार भविष्य की ओर बढ़ रहा है। 

    इस दौरान अजित डोभाल ने 2047 तक के समय को 'अमृत काल' कहे जाने का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह वाकई एक शानदार अमृत काल है. डोभाल ने बताया कि भारत की मौजूदा GDP 4.015 ट्रिलियन डॉलर है, जो अगले 20 साल में बढ़कर 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। 

    भगवान राम के साहस की दी मिसाल
    छात्रों को जिंदगी में साहसी बनने की सलाह देते हुए अजित डोभाल ने भगवान राम का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि ऋषि विश्वामित्र ने राक्षसों का संहार करने के लिए भगवान राम को चुना था. इसकी वजह उनका साहसी स्वभाव था। 

    सिक्किम के शेरपा से सीखे थे सफलता के 3 मंत्र
    अपने भाषण में डोभाल ने करियर के शुरुआती दिनों का एक किस्सा भी साझा किया. उन्होंने बताया कि जब वह सिक्किम में तैनात थे, तब एक शेरपा से उन्हें जीवन में सफलता के तीन मंत्र मिले थे। 

    पहला मंत्र था कि आपको पता होना चाहिए कि आप नक्शे पर कहां खड़े हैं. दूसरा यह कि आपको पता होना चाहिए कि आपको जाना कहां है. तीसरा मंत्र था कि वहां पहुंचने का रास्ता क्या है और वापस कैसे आना है. डोभाल ने छात्रों के साथ सफलता के ये तीन मंत्र साझा किए। 

  • रिहायशी इलाकों में घुसा नहर का पानी, अमृतसर में पाइपलाइन बिछाने पर विवाद

    रिहायशी इलाकों में घुसा नहर का पानी, अमृतसर में पाइपलाइन बिछाने पर विवाद

    अमृतसर.

    अमृतसर-तरनतारन रोड स्थित अपर दोआब नहर से जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन डालने का काम शनिवार तड़के आसपास के इलाकों के लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया। पाइप लाइन डालने के दौरान नहर का पानी कोट मित्त सिंह और आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में दाखिल हो गया।

    अचानक पानी आने से लोगों में अफरातफरी मच गई। घटना के बाद इलाके के लोगों में रोष पाया जा रहा है। संबंधित विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचकर पानी को नियंत्रित करने और निकासी के प्रयासों में जुट गए। जानकारी के अनुसार, जलापूर्ति के लिए एलएंडटी कंपनी की ओर से अपर दोआब नहर के नीचे पाइप लाइन डालने का काम किया जा रहा था। इसी दौरान नहर का पानी आसपास के क्षेत्रों की ओर बढ़ने लगा। कुछ ही समय में पानी कोट मित्त सिंह और नजदीकी इलाकों में दाखिल हो गया।

    पानी के बहाव को नियंत्रित करने की कोशिश
    पानी को रिहायशी इलाके की तरफ जाने से रोकने के लिए आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों की ओर से बोरियां और अन्य सामान डालकर पानी के रास्ते को बंद करने की कोशिश की जा रही है, ताकि पानी का बहाव रिहायशी क्षेत्र की तरफ न बढ़े। लोग अपने स्तर पर पानी को रोकने के लिए रास्ता बंद करने में जुटे हुए हैं। मौके पर मौजूद अधिकारी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और पानी के बहाव को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पाइप टूटने के बाद पानी सड़क के नीचे से जिस तरफ जा रहा था, उसे रोकना प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए तत्काल चुनौती बना हुआ है। इसी के चलते आसपास के लोगों ने भी मौके पर पहुंचकर बोरियों और दूसरे सामान की मदद से पानी को रोकने का प्रयास शुरू किया।

    आवाजाही बंद होने से लोगों को परेशानी
    हालात को देखते हुए फिलहाल तारांवाला पुल से तरनतारन रोड की तरफ जाने वाला रास्ता बंद कर दिया गया है। इससे इस रास्ते से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    विधायक निज्जर मौके पर पहुंचे
    मौके पर विधायक डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर के अलावा संबंधित अधिकारी भी मौजूद हैं। फिलहाल सभी का ध्यान पानी के बहाव को रिहायशी इलाके की तरफ जाने से रोकने और स्थिति को नियंत्रित करने पर है। प्रशासन की ओर से मौके पर स्थिति को संभालने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, स्थानीय लोग भी प्रशासन के साथ मिलकर पानी को रोकने के लिए बोरियां और अन्य सामान लगा रहे हैं। फिलहाल रास्ता बंद है और स्थिति सामान्य होने के बाद ही यहां से आवाजाही शुरू होने की उम्मीद है।

  • बस हादसे से मचा हड़कंप, एक की मौत और 20 यात्री घायल

    बस हादसे से मचा हड़कंप, एक की मौत और 20 यात्री घायल

    बालोद.

    छत्तीसगढ़ के बालोद में बेलगाम रफ्तार शनिवार को सुबह-सुबह दर्दनाक सड़क हादसे का कारण बन गई. यात्रियों से भरी बस करहीभदर के पास दुर्घटना का शिकार हो गई. एक युवक की मौत हो गई है. वहीं 20 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है.

    जानकारी के मुताबिक, हादसे का शिकार हुई बस डीआरडी की बताई जा रही है. बड़ी संख्या में आम यात्री सवार थे. शनिवार सुबह बस बालोद से धमतरी की ओर जा रही थी. इसी दौरान करहीभदर के पास बस अनियंत्रित होकर दुर्घटना का शिकार हो गई. हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और आसपास से गुजर रहे लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी. हादसे के बाद शव को बस से बाहर निकालने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी. बताया जा रहा है कि शव को बाहर निकालने में करीब एक घंटे का समय लगा. वहीं घायलों को तत्काल एंबुलेंस 108 की मदद से बालोद जिला अस्पताल भेजा गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार कराया जा रहा है.

    हादसे के कारणों की जांच जारी
    फिलहाल हादसे की सूचना के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है. हादसा किस वजह से हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. शुरुआती तौर पर बस की तेज रफ्तार को हादसे की वजह बताया जा रहा है. हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. बालोद में सुबह-सुबह हुए इस सड़क हादसे ने एक बार फिर तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और मृतक की पहचान के साथ हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है.

  • मरीजों के लिए बड़ी डिजिटल सुविधा, आरोग्य सेतु ऐप पर मिलेगी जांच रिपोर्ट और हेल्थ रिकॉर्ड

    मरीजों के लिए बड़ी डिजिटल सुविधा, आरोग्य सेतु ऐप पर मिलेगी जांच रिपोर्ट और हेल्थ रिकॉर्ड

    अब मरीजों को आरोग्यसेतु एप पर भी मिलेगी जांच रिपोर्ट, स्वयं सुरक्षित रख सकेंगे हेल्थ इलेक्ट्रानिक रिकार्ड

    – मरीज जांच रिपोर्ट भविष्य में जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से कर सकेंगे शेयर

    – सीएम योगी के डिजिटल हेल्थ विजन से यूपी की स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई रफ्तार

    – 900 से अधिक सरकारी अस्पतालों में लैब सेवाएं हुईं डिजिटल, मरीजों को मिल रही बड़ी राहत

    लखनऊ
     योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और मरीजों को बेहतर एवं सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में सरकारी अस्पतालों की लैब में टेस्ट कराने वाले मरीजों को उनकी रिपोर्ट मोबाइल के आरोग्यसेतु ऐप पर भेजने की तैयारी की जा रही है ताकि वह अपनी लैब रिपोर्ट को इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकार्ड के रूप में अपने पास सुरक्षित रख सकें।  

    व्हाट्सएप पर 37.66 लाख और एसएमएस से 31.40 लाख जांच रिपोर्ट भेजी
    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की सचिव रितु माहेश्वरी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की दिशा में कई पहल की गई है। उन्होंने बताया कि मरीजों को उनकी जांच रिपोर्ट मोबाइल के आरोग्यसेतु एप पर भेजने की तैयारी की जा रही है, जिसे वह भविष्य में जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से शेयर कर सकेंगे। वहीं प्रदेश के 900 से अधिक सरकारी अस्पतालों में लैबोरेटरी इंफॉरमेशन सिस्टम (एलआईएस) को हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉरमेशन सिस्टम (एचएमआईएस) से जोड़ दिया गया है। इस व्यवस्था से मरीजों को अब लैब रिपोर्ट के लिए अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। साथ ही डॉक्टर्स को भी जल्द लैब रिपोर्ट मिलने से इलाज में काफी सहूलियत हुई है। उन्होंने बताया कि मरीजों को लैब रिपोर्ट व्हाट्सएप और एसएमएस से भेजी जा रही है। अब तक करीब 58.07 लाख लैब रिपोर्ट का मैसेज व्हाट्सएप पर भेजा गया जबकि 37.66 लाख रिपोर्ट व्हाट्सएप पर भेजी गयी। इसी तरह करीब 46.50 लाख एसएमएस भेजे गए, जिनमें से 31.40 लाख मरीजों को लैब रिपोर्ट भेजी गयी। 

    मरीजों को लैब टेस्ट कराने के लिए बार-बार रजिस्ट्रेशन कराने से मिली मुक्ति
    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की सचिव ने बताया कि एलआईएस-एचएमआईएस के इंटीग्रेटेड होने से अब मरीजों को लैब जांच के लिए बार-बार रजिस्ट्रेशन नहीं कराना पड़ता है। इससे जहां एक ओर मरीजों के समय की बचत हो रही है वहीं दूसरी ओर उन्हे समय पर इलाज भी मिल रहा है। इसका लाभ डॉक्टरों को भी मिल रहा है। जांच परिणाम सीधे एचएमआईएस पोर्टल पर उपलब्ध होने से चिकित्सकों को रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना पड़ता। इससे मरीज की जांच रिपोर्ट के आधार पर उपचार प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके साथ ही मैनुअल और दोहरी डाटा एंट्री की भी व्यवस्था खत्म हो गयी है।

  • शहरी करदाताओं के लिए बड़ी राहत, OTS योजना में 31.06 करोड़ रुपये का ब्याज माफ

    शहरी करदाताओं के लिए बड़ी राहत, OTS योजना में 31.06 करोड़ रुपये का ब्याज माफ

    योगी सरकार की ओटीएस योजना से शहरी करदाताओं को बड़ी राहत, 31.06 करोड़ रुपये की ब्याज माफी

    48 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त, 29,292 को मिली स्वीकृति

    73.80 करोड़ की मांग के सापेक्ष 24.51 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त

    ओटीएस से निकायों की तिजोरी मजबूत, गृहकर वसूली में लखनऊ नगर निगम प्रदेश में अव्वल

    करदाताओं को औसतन 12655 रुपये की बचत, पुराने बकायों के निस्तारण का अवसर

    पेयजल, सड़क और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं के विकास में होगा राजस्व का उपयोग

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) शहरी करदाताओं के लिए आर्थिक राहत का माध्यम बन रही है। ओटीएस योजना के तहत स्वीकृत 29292 लाभार्थियों को अब तक कुल 31.06 करोड़ रुपये की सरचार्ज एवं ब्याज में छूट दी गई है। इससे प्रत्येक लाभार्थी को औसतन लगभग 12655 रुपये की आर्थिक बचत हुई है। योजना के माध्यम से पुराने कर बकायों के पारदर्शी और सम्मानजनक निस्तारण का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।

    स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2026) के अवसर पर नगर विकास विभाग द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत नागरिकों को वर्षों से लंबित कर बकायों का निस्तारण कराने और सरचार्ज व ब्याज में छूट पाने का अवसर मिल रहा है। इससे जहां आम परिवारों पर पुराने बकाये का आर्थिक बोझ कम हो रहा है, वहीं नगरीय निकायों की राजस्व वसूली को भी गति मिल रही है।

    अब तक 48 हजार से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए

    योजना के प्रति नागरिकों की भागीदारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक कुल 48751 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 25231 आवेदनों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। नगर निगमों में 40480, नगर पालिका परिषदों में 6033,  नगर पंचायतों में 2160, और जल संस्थानों में 394 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

    आवासीय संपत्तियों के सर्वाधिक आवेदन

    योजना का लाभ उठाने वालों में आम परिवारों की भागीदारी सबसे अधिक है। प्राप्त आवेदनों में 81.5 प्रतिशत यानी 31002 आवेदन आवासीय संपत्तियों से संबंधित हैं। इसके अलावा 3785 व्यावसायिक और 3235 मिश्रित उपयोग वाली संपत्तियों के स्वामियों ने भी योजना के तहत आवेदन किया है। यह भागीदारी शहरी करदाताओं के बीच योजना की पहुंच को दर्शाती है।

    निकायों की आर्थिक मजबूती को मिल रहा आधार

    योजना के अंतर्गत पंजीकृत 73.80 करोड़ रुपये की कुल मांग के सापेक्ष अब तक 24.51 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष राजस्व प्राप्त हुआ है। इससे नगरीय निकायों के लंबित करों की वसूली को गति मिली है। सरकार की इस पहल से करदाताओं को राहत देने के साथ-साथ स्थानीय निकायों के वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

    गृहकर वसूली में लखनऊ नगर निगम सबसे आगे

    ओटीएस योजना के तहत गृहकर वसूली में लखनऊ नगर निगम प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों में सबसे आगे है। लखनऊ नगर निगम ने अब तक 6.70 करोड़ रुपये के करीब गृहकर वसूली की है। योजना के तहत बड़ी संख्या में बकायेदार आवेदन कर रहे हैं और नगर निगम स्तर पर आवेदनों के निस्तारण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। लखनऊ नगर निगम में अब तक ओटीएस योजना के तहत 4159 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 3723 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं। वहीं 5 आवेदन निरस्त किए गए हैं, जबकि 239 आवेदन अभी प्रक्रिया में हैं।

    नागरिक सुविधाओं के विकास में होगा राजस्व का उपयोग

    योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल बकाया करों की वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने से भी जुड़ा है। प्राप्त राजस्व का उपयोग स्वच्छ पेयजल, बेहतर सड़कों, स्ट्रीट लाइटों और आधुनिक नगरीय सुविधाओं के विकास में किया जाएगा। इस प्रकार ओटीएस योजना के माध्यम से सरकार करदाताओं को पुराने बकायों से राहत देने, राजस्व संग्रह बढ़ाने और शहरों के विकास को गति देने की दिशा में काम कर रही है।

    योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

    नगर विकास सचिव अनुज कुमार झा ने कहा कि ओटीएस योजना से शहरी करदाताओं को राहत देने के साथ नगरीय निकायों की राजस्व वसूली को भी गति मिल रही है। अभी काफी काम करना बाकी है। सभी निकाय योजना को प्रभावी ढंग से लागू करें, ताकि अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिले और पुराने बकायों का निस्तारण हो सके।

  • आवासीय स्कूलों को मिली बड़ी सौगात, 15 सर्वोदय विद्यालयों में बढ़ेंगी सुविधाएं

    आवासीय स्कूलों को मिली बड़ी सौगात, 15 सर्वोदय विद्यालयों में बढ़ेंगी सुविधाएं

    सर्वोदय विद्यालयों में सुविधाओं की सौगात, 15 स्कूलों के कायाकल्प के लिए 1.50 करोड़ रुपए जारी 

    आवासीय स्कूलों में मजबूत होगा इंफ्रास्ट्रक्चर, विद्यार्थियों को मिलेंगी बेहतर शैक्षणिक और आवासीय सुविधाएं

    हॉस्टल से स्मार्ट क्लास तक सुधरेंगी व्यवस्थाएं, पेयजल और स्वच्छता पर भी जोर

    बरेली से रायबरेली तक 15 सर्वोदय विद्यालयों को मिलेगा विकास कार्यों का लाभ

    सुरक्षित और आधुनिक माहौल में सर्वांगीण विकास की दिशा में योगी सरकार का कदम

    लखनऊ
     योगी सरकार प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर आवासीय और शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दे रही है। इसी कड़ी में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों की अवस्थापना सुविधाओं को और मजबूत करने की पहल की गई है। प्रदेश के 15 सर्वोदय विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए 1.50 करोड़ रुपये (150 लाख रुपये) की धनराशि स्वीकृत की गई है।

    इससे बरेली, कौशाम्बी, अयोध्या, ललितपुर, हरदोई, आजमगढ़, बलिया, प्रयागराज, इटावा, फर्रूखाबाद, बांदा, चित्रकूट, जालौन और रायबरेली के सर्वोदय विद्यालय लाभान्वित होंगे। सरकार की इस पहल से इन आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, आधुनिक और बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।

    हॉस्टल से स्मार्ट क्लास तक सुविधाएं होंगी मजबूत

    स्वीकृत धनराशि से विद्यालयों में हॉस्टल सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ स्मार्ट क्लासरूम और प्रयोगशालाओं के रख-रखाव व आवश्यक मरम्मत कार्य कराए जाएंगे। इसके अलावा पेयजल, स्वच्छता और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर रहेगा। खेल परिसर के जीर्णोद्धार से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेल और शारीरिक विकास के लिए भी बेहतर माहौल मिलेगा।

    शिक्षा के साथ सर्वांगीण विकास पर फोकस

    योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल विद्यालयों की इमारत और सुविधाओं को बेहतर करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। आधुनिक संसाधनों से लैस विद्यालय विद्यार्थियों को शिक्षा, तकनीक, प्रयोगात्मक अध्ययन और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक होंगे।

    तकनीक और आधुनिक सुविधाओं का बढ़ेगा समन्वय

    सरकार की ओर से विद्यालयों में तकनीक और आधुनिक सुविधाओं के समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। स्मार्ट क्लासरूम और प्रयोगशालाओं जैसी सुविधाओं का रख-रखाव बेहतर होने से विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का लाभ मिल सकेगा। आवासीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा।

    हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करें विद्यार्थी

    सरकार का लक्ष्य है कि सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को ऐसा वातावरण मिले, जहां वे अपनी प्रतिभा को निखारकर आगे बढ़ सकें। विभाग की ओर से कहा गया है कि लक्ष्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सुरक्षित, आधुनिक और बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करना है। आने वाले समय में तकनीक और आधुनिक सुविधाओं का समन्वय और मजबूत किया जाएगा, ताकि सर्वोदय विद्यालयों के छात्र हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर सकें।

  • सपा शासनकाल में बहुत सारी भर्तियां ऐसी हुईं, जिसमें आवेदन न करने वालों को भी मिला नियुक्ति पत्र- मुख्यमंत्री

    सपा शासनकाल में बहुत सारी भर्तियां ऐसी हुईं, जिसमें आवेदन न करने वालों को भी मिला नियुक्ति पत्र- मुख्यमंत्री

    सीएम योगी ने यूपी में एक लाख नई नौकरियों का किया ‘श्रीगणेश’ 

    विभिन्न विभागों में नवनियुक्त 818 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सौंपे नियुक्ति पत्र 

    सपा के उपदेशक नेता गिनते जाएं, हम छह महीने में एक लाख से अधिक नौजवानों को नियुक्ति देंगे- सीएम योगी

    रविवार को भी मिलेगा लगभग हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र, पुलिस-होमगार्ड में करीब 77 हजार भर्तियों की प्रक्रिया जारी

    यूपीएसएसएससी परिणामों से 25-30 हजार और उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग से भी 20-25 हजार भर्तियां होंगी

    सपा शासनकाल में बहुत सारी भर्तियां ऐसी हुईं, जिसमें आवेदन न करने वालों को भी मिला नियुक्ति पत्र- मुख्यमंत्री

    सीएम की दो टूक- 2017 के पहले सरकार ने आयोग-बोर्ड में भाई-भतीजों को बैठाकर बदनाम किया था यूपी को

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘मिशन रोजगार’ के अंतर्गत शनिवार को एक लाख नई नौकरियों का शुभारंभ किया। उन्होंने नवचयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे और उन्हें शुभकामनाएं दीं। सरकार पर प्रश्न खड़ा करने वाले समाजवादी पार्टी के नेताओं से सीएम योगी ने कहा, आप गिनते जाइए, हम छह महीने में एक लाख से अधिक नौजवानों को नियुक्ति देंगे। आज तीन विभागों के नियुक्ति पत्र दे रहे हैं। रविवार को भी लगभग हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र देंगे। यह प्रक्रिया अनवरत चलेगी। यूपी पुलिस में 36 हजार, होमगार्ड में 41-42 हजार युवाओं की नियुक्ति करेंगे। इनके मेडिकल व फिजिकल की प्रक्रिया चल रही है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) के अगले छह महीने में जारी होने वाले परिणामों से 25-30 हजार नए युवाओं को अवसर मिलेंगे। उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग से भी 20-25 हजार युवाओं की भर्ती होगी। तीन-चार महीने में इसके परिणाम आ जाएंगे। यूपीपीएससी की परीक्षाओं के उपरांत भी 15-16 हजार युवाओं को अलग-अलग विभागों में नियुक्ति मिलेगी। 

    सीएम योगी ने लोकभवन सभागार में आयोजित भव्य कार्यक्रम में विभिन्न विभागों में चयनित 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान मिशन रोजगार पर लघु फिल्म भी दिखाई गई। सीएम ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग व उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पदाधिकारियों को बधाई दी और कहा कि आयोग व बोर्ड जब शासन की राजनीति का शिकार नहीं होते और परीक्षा की शुचितापूर्ण प्रक्रिया संपन्न होती है तो परिणाम भी ऐसे ही दिखते हैं।

    गदर मचाने वाले गिनती करें, हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे
    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक साढ़े 9 लाख नौजवानों को नियुक्ति दी गई है। हम छह महीने के अंदर एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने जा रहे हैं। 2017 के पहले गदर मचाने वाले काउंट करें, हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे। 2017 के पहले तत्कालीन सरकार ने आयोगों-बोर्डों में भाई-भतीजों को बैठाकर पूरी प्रक्रिया को बदनाम कर दिया था। एक भी भर्ती ईमानदारी से नहीं होती थी। युवाओं के सामने एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई थी। यूपी में नौकरी थी नहीं और बाहर पहचान का संकट था, जिससे उनके सपने तार-तार होते थे। तत्कालीन सरकार की भ्रष्ट-भेदभावपूर्ण कार्यप्रणाली व बीमारू मानसिकता के कारण यूपी बीमारू हो गया था। 

    हमने यूपी की स्ट्रेंथ को इकॉनमिक अपॉर्च्युनिटी माना
    सीएम ने कहा कि 2017 के पहले एक अयोग्य व्यक्ति को उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन का चेयरमैन बना दिया गया। उसके गदर के कारण न्यायालय को और सड़क पर उतर कर युवाओं को कहना पड़ा कि इसे जिंदगी भर जेल में सड़ाओ। 2017 में युवाओं ने सरकार बदलने का बड़ा फैसला भी लिया। हमारी सरकार ने पीएम मोदी के विजन के अनुरूप मिशन रोजगार के कार्यक्रम को बढ़ाया। पिछली सरकार नौजवान की शक्ति, ताकत व प्रतिभा को सम्मान नहीं दे पाई, हमने यूपी की स्ट्रेंथ को इकॉनमिक अपॉर्च्युनिटी माना। उन्होंने यूपी के अंदर अवसरों को लॉक कर दिया था, हमने उस पोटेंशियल को प्रतिभाशाली युवाओं के जरिए अनलॉक करने का प्रयास किया। इसका परिणाम अब दिख रहा है।

    राजनीतिक संक्रमण के दौर से गुजरना पड़ा यूपी को 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाशाली युवा जब यूपी की ताकत बनेंगे तो प्रदेश नंबर-1 इकॉनमी के रूप में खुद को स्थापित करेगा। हर क्षेत्र में नए भारत के नए यूपी के रूप में अपना स्थान बनाएगा। देश का हृदय स्थल, सबसे उर्वरा भूमि, सर्वाधिक जल संसाधन, परंपरागत उद्यम के साथ आगे बढ़ने वाला राज्य है यूपी। कभी प्रति व्यक्ति सर्वाधिक आय वाला यह राज्य राजनीतिक संक्रमण के ऐसे दौर से गुजरा कि नौजवान के सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया। उस दौर में कोई भी सुरक्षित नहीं था। नौजवान को रुचि के अनुरूप प्लेटफॉर्म नहीं मिलता था। 

    काले धब्बे से अब मुक्त हो गया यूपी
    सीएम ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले उपदेशक चाचा-भतीजे की जोड़ी बेखौफ नौकरियों पर डकैती डालने निकलती थी, लेकिन 2027 के बाद ये उपदेश देने लायक भी नहीं रह पाएंगे। उत्सव प्रदेश को उपद्रव प्रदेश बनाने वालों को, किसानों को आत्महत्या और यूपी के नागरिकों को भूखे मरने के लिए उनके हाल पर छोड़ने वालों को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह मामला गलती का नहीं, बल्कि शरारत का था। हम अब इस काले धब्बे से मुक्त हुए हैं। 

    सपा शासन में आवेदन न करने वालों को भी नियुक्ति पत्र 
    सीएम ने आरोप लगाया कि सपा में बहुत सारी भर्तियां ऐसी हुई थीं, जिसमें आवेदन न करने वालों को भी नियुक्ति पत्र मिल गया और आवेदन करने वाले देखते रह गए। सीएम ने युवाओं से अपील की कि आपके भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के भविष्य से आप खिलवाड़ करें। आपको यह ताकत बाबा साहेब ने संविधान के माध्यम से दी है। 

    हमने चुनौती को समाधान तक पहुंचाया
    सीएम ने कहा कि सरकार बनने के बाद हर क्षेत्र में जीरो टॉलरेंस लागू किया गया। अब यूपी के किसी व्यक्ति के समक्ष पहचान का संकट नहीं है। यूपी की उपलब्धियों को देखकर अन्य प्रदेश के लोग भी अभिभूत होते हैं। सपा सरकार ने चुनौतियों को समस्या माना। वे परिवार-सिंडिकेट से बेईमानी व भ्रष्टाचार कराते रहे। 2017 के पहले यूपी सबसे गरीब राज्यों में माना जाता था, लेकिन हमने चुनौती को समाधान तक पहुंचाया, जिससे यूपी की प्रति व्यक्ति आय, अर्थव्यवस्था, महिला वर्कफोर्स व बजट को तीन गुना करने में सफलता मिली। यूपी 6 वर्ष से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट, भारत के ग्रोथ इंजन का महत्वपूर्ण अंग और टॉप-3 इकॉनमी में गिना जा रहा है। एक साथ-एक स्वर में सोचने की ताकत से यूपी इंफ्रास्ट्राक्चर, इकॉनमिक ग्रोथ, ओडीओपी, एमएसएमई सेक्टर आदि के लिए जाना जा रहा है। एमएसएमई सेक्टर में तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दिया गया। 2017 से पहले यह बंद पड़ा था। 

    हस्तशिल्पी के चेहरे पर चमक आती है तो दौड़ता है यूपी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि कारीगर/ हस्तशिल्पी श्रमिक बनने को दर-दर ठोकर खाए। इसका यही मतलब है कि तत्कालीन सरकारों ने उसके हुनर को सम्मान नहीं दिया। हमने उसे सम्मान, मार्केट, टेक्नोलॉजी और प्लेटफॉर्म भी दिया तो वह फिर से खड़ा हुआ। यूपी लाखों करोड़ का एक्सपोर्ट कर रहा है। कारीगर व हस्तशिल्पी के पास पैसा आ रहा है। उसके चेहरे पर चमक आती है तो यूपी तेजी से दौड़ता है। 

    पिछली सरकार ने पैदा किए थे बिचौलिए
    सीएम ने कहा कि 2017 के पहले किसान आत्महत्या करता था। दशकों से परियोजनाएं लंबित थीं। बीज-खाद, टेक्नोलॉजी, बाजार कुछ भी नहीं था। पिछली सरकार ने बिचौलिए पैदा कर दिए थे, जो किसान का हिस्सा खा जाते थे। उन्होंने लैंड, सैंड, कैटल, नकल व भू-माफिया पैदा कर दिए थे, जो युवा ऊर्जा को तबाह कर रहे थे। आज यूपी ने इन सबसे मुक्त होकर उत्सव प्रदेश के रूप में नई पहचान बनाई है।

    25 से 29 सितंबर तक होगा यूपीआईटीएस
    मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 से 29 सितंबर तक गौतमबुद्ध नगर में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के चौथे संस्करण का आयोजन होगा। इसमें 650 विदेशी खरीदार यूपी के उत्पादों की खरीदारी करेंगे। 2500 से अधिक एग्जीबिटर्स आएंगे। यूपी के युवा, कारीगर, हस्तशिल्पी, उद्यमी के बनाए गए उत्पादों की शोकेसिंग होगी। उन्हें बड़े ऑर्डर मिलेंगे। 

    2017 के पहले 120, अब 24 हजार से अधिक स्टार्टअप 
    सीएम ने कहा कि 2017 के पहले भी यूपी के पास सबसे ज्यादा युवा शक्ति थी, किंतु स्टार्टअप इकोसिस्टम का अभाव था। तब बमुश्किल 120 स्टार्टअप थे, आज 24 हजार से अधिक स्टार्टअप यूपी में संचालित हो रहे हैं। इनमें आधे स्टार्टअप आधी आबादी संचालित कर रही है, जिससे वे हजारों करोड़ का व्यवसाय कर रही हैं। डिजिटल इंडिया-स्टैंडअप इंडिया ने प्रधानमंत्री जी के विजन को प्रभावी ढंग से बढ़ाया है। डबल इंजन की भाजपा सरकार ने मिशन रोजगार को ईमानदारी से लागू किया है। पीएम मोदी जी भी 51 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र दे रहे हैं।

    2014 के पहले आयुष की पहचान नहीं थी
    सीएम ने कहा कि 2014 के पहले आयुष की पहचान नहीं थी, लेकिन पीएम मोदी जी ने नया मंत्रालय गठित कर ट्रेडिशनल मेडिसिन को पहचान दी। आयुर्वेद, योग, नैचुरीपैथी, होमियोपैथ, यूनानी आदि को प्लेटफॉर्म दिया। एम्स की तर्ज पर दिल्ली में सेंटर संचालित हो रहा है। 2014 के पहले कोई आयुर्वेद, आयुष, होमियोपैथ में फॉर्मेसी व डिप्लोमा की डिग्री के बारे में सोचता नहीं था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। प्रधानमंत्री जी ने आयुष को प्लेटफॉर्म दिया। हमने मॉडर्न व ट्रेडिशनल मेडिसिन पर काम किया। अब आयुष विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज आदि बन रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया (विज्ञापन से नियुक्ति पत्र वितरण तक) की समयबद्धता, मेरिट को लेकर समीक्षा हो रही है। पहले विज्ञापन जारी होते ही सिंडिकेट व गिरोह वसूली के धंधे में व्यस्त हो जाते थे। बची-खुची कसर इंटरव्यू पूरी कर देता था। हमने ग्रुप-3 व 4 भर्ती में इंटरव्यू सिस्टम समाप्त कर दिया।

    इस अवसर पर आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, चिकित्सा शिक्षा व परिवार कल्याण राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, एमएसएमई राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे।

  • रायगढ़ पंजीयन कार्यालय में नागरिक सुविधाओं का विस्तार, हेल्प डेस्क से डिजिटल पेमेंट तक नई व्यवस्था

    रायगढ़ पंजीयन कार्यालय में नागरिक सुविधाओं का विस्तार, हेल्प डेस्क से डिजिटल पेमेंट तक नई व्यवस्था

    सेवा संकल्प अभियान: नागरिक सुविधा का मॉडल बना रायगढ़ का पंजीयन कार्यालय

    हेल्प डेस्क से लेकर डिजिटल भुगतान तक, पूरी व्यवस्था हुई नागरिक-केंद्रित

    औसत प्रतीक्षा समय 15.33 मिनट, प्रतिदिन 64 नागरिकों को मिल रही सेवा

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री ओपी चौधरी की पहल से नागरिकों को मिल रही बेहतर पंजीयन सुविधा

    रायपुर, 
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री ओपी चौधरी की पहल से रायगढ़ के पंजीयन कार्यालय को आधुनिक सुविधाओं से युक्त मॉडल पंजीयन कार्यालय के रूप में विकसित किया गया है। सेवा संकल्प अभियान के तहत विकसित इस कार्यालय में पंजीयन प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया गया है। अब व्यवस्था का केंद्र कार्यालय की प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिक की सुविधा और आवश्यकता को बनाया गया है।

    संपत्ति की रजिस्ट्री किसी भी व्यक्ति और परिवार के लिए महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। इसे ध्यान में रखते हुए पंजीयन कार्यालय में नागरिकों को अनावश्यक परेशानी और बार-बार कार्यालय आने की स्थिति से बचाने के लिए प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को व्यवस्थित किया गया है।

    प्रवेश से पंजीयन तक हर चरण में सुविधा

    कार्यालय में प्रवेश करते ही नागरिकों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए हेल्प डेस्क एवं रिसेप्शन की व्यवस्था की गई है। दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच की सुविधा होने से कमियों की जानकारी प्रक्रिया के शुरुआती चरण में ही मिल जाती है। इससे अंतिम चरण में होने वाली परेशानी और अनावश्यक समय की बचत होती है। भीड़ और कतार की व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए टोकन आधारित कतार प्रबंधन प्रणाली लागू की गई है।

    मुद्रांक शुल्क, पंजीयन शुल्क और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी बोर्ड एवं डिजिटल डिस्प्ले के माध्यम से प्रदर्शित की जा रही है। डिजिटल एवं कैशलेस भुगतान की सुविधा से लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ी है। मॉडल पंजीयन कार्यालय में प्रतिदिन औसतन 64 नागरिक सेवाएं प्राप्त कर रहे हैं, जबकि प्रतिदिन औसतन 16 दस्तावेजों का पंजीयन हो रहा है। नागरिकों का औसत प्रतीक्षा समय 15.33 मिनट दर्ज किया गया है। अब तक प्राप्त फीडबैक में 105 सकारात्मक नागरिक प्रतिक्रियाएं भी दर्ज की गई हैं।

    मॉडल पंजीयन कार्यालय में नागरिकों की पूरी प्रक्रिया को 9 चरणों में व्यवस्थित किया गया है। इसमें कार्यालय में प्रवेश, हेल्प डेस्क से मार्गदर्शन, दस्तावेजों का प्री-चेक, टोकन प्राप्त करना, व्यवस्थित प्रतीक्षा, निर्धारित पंजीयन प्रक्रिया, डिजिटल अथवा कैशलेस भुगतान, दस्तावेज एवं स्टेटस की जानकारी और कार्य पूर्ण होने के बाद सम्मानजनक निकास शामिल है।

    वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्था

    नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वातानुकूलित प्रतीक्षालय, आरामदायक लाउंज, चार्जिंग स्टेशन, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष सहायता की व्यवस्था भी की गई है। नागरिक अपने अनुभव और सुझाव क्यूआर कोड के माध्यम से सीधे साझा कर सकते हैं।

    तकनीक के साथ कार्यसंस्कृति में भी बदलाव

    सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने के लिए कार्यालय में समर्पित सर्वर रूम और मजबूत आईटी अधोसंरचना विकसित की गई है। मॉडल पंजीयन कार्यालय की व्यवस्था केवल आधुनिक सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सरल प्रक्रिया, तकनीकी व्यवस्था, पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों के प्रति संवेदनशील व्यवहार को भी इसका हिस्सा बनाया गया है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुशासन और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देने की दिशा में तथा वित्त मंत्री ओपी चौधरी की पहल से विकसित रायगढ़ का मॉडल पंजीयन कार्यालय इस बात का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है कि तकनीक, सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं और संवेदनशील कार्यसंस्कृति के माध्यम से सरकारी सेवाओं को नागरिकों के लिए अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जा सकता है। यह व्यवस्था नागरिकों के समय का सम्मान करने और उन्हें बेहतर सेवा अनुभव प्रदान करने की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में सामने आई है।

  • नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी बदला समीकरण, उम्मीदवार के नाम वापस लेने से बढ़ी हलचल

    नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी बदला समीकरण, उम्मीदवार के नाम वापस लेने से बढ़ी हलचल

    कोलकाता
     विधानसभा उपचुनाव में नंदीग्राम के बाद अब रेजीनगर में भी ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी ने नामांकन वापस लेने का फैसला किया है। रेजीनगर से ममता तृणमूल के प्रत्याशी रबिउल आलम चौधरी ने शनिवार को नामांकन वापस लेने की घोषणा की। इसके साथ ही नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों विधानसभा सीटों के उपचुनाव में ममता तृणमूल का कोई प्रत्याशी नहीं रहेगा।

    रबिउल ने नामांकन वापस लेने की वजह नया चुनाव चिह्न लोगों के बीच पहचान बनाने में कठिनाई और कार्यकर्ताओं पर दबाव को बताया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता चुनाव मैदान में उतरने को तैयार नहीं हैं। रबिउल के अनुसार, उन्होंने ममता बनर्जी से भी इस संबंध में बात की है।

    नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी वापसी
    नंदीग्राम में ममता तृणमूल की प्रत्याशी संचिता प्रधान दे ने शुक्रवार को नामांकन वापस लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने वहां कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही थी।

    रेजीनगर को लेकर उन्होंने कहा था कि इस पर बाद में फैसला किया जाएगा। इसके बाद से ही रबिउल के नामांकन वापस लेने की अटकलें लग रही थीं। शनिवार को नामांकन वापसी की अंतिम तारीख पर उन्होंने यह फैसला कर लिया।

    आयोग ने बदला नाम और चिह्न
    निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘घासफूल’ चिह्न को फिलहाल स्थगित किया है। इसके बाद ममता तृणमूल को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉलर’ चिह्न दिया गया है।

    नए चिह्न के साथ चुनाव लड़ने में आ रही दिक्कत का हवाला देते हुए दोनों सीटों पर ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशियों ने नामांकन वापस ले लिया है। अब दोनों उपचुनाव में ममता तृणमूल का कोई उम्मीदवार नहीं होगा।

    प्रतीक को लेकर हुमायूं के बेटे की बढ़ी मुश्किल
    वहीं, रेजीनगर में आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर के बेटे गोलाम नबी आजाद रबिन के सामने भी प्रतीक को लेकर पेच फंस गया है।

    वह अपने पिता के पुराने ‘बांसुरी’ प्रतीक पर चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपचुनाव के लिए किसी प्रतीक को पहले से आरक्षित नहीं किया जाता।