Author: NewseDay

  • योजनाबद्ध पूंजीगत निवेश से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिले नई गति और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं : मुख्यमंत्री  साय

    योजनाबद्ध पूंजीगत निवेश से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिले नई गति और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं : मुख्यमंत्री साय

    रायपुर

    मजबूत अधोसंरचना किसी भी राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार होती है। छत्तीसगढ़ में सड़क, भवन और अन्य सार्वजनिक अधोसंरचनाओं का निर्माण केवल वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की जरूरतों, बढ़ती आबादी, औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियों और बदलती तकनीक को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। राज्य में होने वाले प्रत्येक पूंजीगत निवेश का अधिकतम लाभ प्रदेश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों तक पहुंचे, यह हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। बैठक में अधोसंरचना विकास के लिए पूंजीगत व्यय की प्राथमिकताएं, परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन, सड़क नेटवर्क का दीर्घकालिक विकास, सार्वजनिक परिसंपत्तियों का रखरखाव, आधुनिक निर्माण तकनीक, विभागीय समन्वय और आगामी कार्ययोजना सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘अंजोर विजन 2047’ के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के दीर्घकालिक लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में आधुनिक, सुदृढ़ और टिकाऊ अधोसंरचना की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए पूंजीगत व्यय करने वाले सभी विभागों को अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करते हुए समन्वित और दीर्घकालिक कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ना होगा।

    पूंजीगत निवेश का आर्थिक और सामाजिक प्रभाव हो परियोजनाओं की प्राथमिकता का आधार

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि अधोसंरचना पर किया जाने वाला व्यय केवल निर्माण पर होने वाला खर्च नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य में किया गया निवेश है। इसलिए परियोजनाओं का चयन करते समय यह आकलन किया जाना चाहिए कि संबंधित परियोजना से आवागमन, उद्योग, व्यापार, कृषि, पर्यटन, रोजगार और नागरिक सुविधाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

    उन्होंने कहा कि राज्य के वित्तीय संसाधनों का उपयोग ऐसी परियोजनाओं में प्राथमिकता से किया जाए, जिनसे अधिक से अधिक नागरिकों को लाभ मिले, आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो और संबंधित क्षेत्र के विकास की नई संभावनाएं खुलें। परियोजनाओं की प्राथमिकता केवल तात्कालिक आवश्यकता के आधार पर तय न होकर उनके दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव के आधार पर भी निर्धारित की जाए।

    बजट से निर्माण तक हर चरण की तय हो समय-सीमा

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि किसी परियोजना के लिए बजट प्रावधान हो जाने मात्र से उद्देश्य पूरा नहीं होता। बजट में स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना को धरातल पर समय से पूरा करना सबसे महत्वपूर्ण है। परियोजनाओं में देरी से उनकी लागत बढ़ती है और नागरिकों को मिलने वाला लाभ भी विलंबित होता है।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना की अवधारणा और योजना तैयार करने से लेकर बजट प्रावधान, प्रशासकीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश और निर्माण पूर्ण होने तक प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। प्रत्येक स्तर पर प्रगति की नियमित समीक्षा हो और अनावश्यक विलंब के कारणों को समय रहते दूर किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समयबद्धता के साथ गुणवत्ता भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। निर्माण कार्यों में निर्धारित तकनीकी और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए तथा गुणवत्ता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता न हो।

    प्रदेश के सड़क नेटवर्क का तैयार हो दीर्घकालिक मास्टर प्लान

    मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश में सड़क नेटवर्क के सुनियोजित विस्तार की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को राज्यभर में यातायात की मौजूदा स्थिति, बढ़ती आबादी, औद्योगिक विकास, नए आर्थिक केंद्रों और भविष्य में संभावित यातायात दबाव का आकलन करने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में किन मार्गों को दो लेन और किन मार्गों को चार लेन करने की आवश्यकता है, इसका विस्तृत सर्वे कराया जाए। इसके आधार पर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के सड़क नेटवर्क का दीर्घकालिक मास्टर प्लान तैयार किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क केवल यात्रा को सुगम नहीं बनाता, बल्कि बाजारों तक पहुंच आसान करता है, व्यापार और उद्योग को गति देता है, कृषि उत्पादों के परिवहन को बेहतर बनाता है और नए क्षेत्रों में निवेश एवं रोजगार की संभावनाएं भी पैदा करता है। इसलिए सड़क निर्माण को संबंधित क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों, शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच निर्बाध और बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

    निर्माण जितना महत्वपूर्ण, नियमित रखरखाव भी उतना ही आवश्यक

    मुख्यमंत्री  साय ने सड़कों, भवनों और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों के नियमित रखरखाव के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक अधोसंरचना के निर्माण पर बड़ी राशि खर्च की जाती है। यदि उसका समय पर रखरखाव नहीं किया जाए तो छोटी खराबियां आगे चलकर गंभीर रूप ले लेती हैं और उनकी मरम्मत पर अधिक खर्च करना पड़ता है।

    उन्होंने कहा कि निर्माण परियोजनाओं की योजना बनाते समय ही उनके दीर्घकालिक रखरखाव की व्यवस्था भी तय की जाए। नियमित निरीक्षण और समयबद्ध मरम्मत के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली विकसित हो। इससे परिसंपत्तियों की कार्यशील आयु बढ़ेगी, सरकारी संसाधनों की बचत होगी और नागरिकों को लगातार बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क और सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति का नागरिकों के दैनिक जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। अच्छी अधोसंरचना नागरिकों के जीवन को सुगम बनाती है, जबकि रखरखाव के अभाव में वही परिसंपत्ति असुविधा का कारण बन जाती है। इसलिए निर्माण के साथ रखरखाव को भी समान प्राथमिकता दी जाए।

    स्कूल-कॉलेज और सार्वजनिक भवनों में भविष्य की जरूरतों का हो प्रावधान

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि विद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य सार्वजनिक भवनों की योजना तैयार करते समय केवल वर्तमान जरूरतों का आकलन पर्याप्त नहीं है। आने वाले वर्षों में विद्यार्थियों अथवा उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने और नई सुविधाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भवनों की डिजाइन तैयार की जाए।

    उन्होंने कहा कि निर्माण की प्रारंभिक योजना में ही भविष्य में संभावित विस्तार, सुरक्षा, सुगम पहुंच, उपयोगिता और रखरखाव जैसे पहलुओं को शामिल किया जाए। इससे भविष्य में अतिरिक्त निर्माण पर होने वाले अनावश्यक व्यय को कम किया जा सकेगा और उपलब्ध परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग होगा।

    आधुनिक तकनीक और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाए छत्तीसगढ़

    मुख्यमंत्री  साय ने निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण निर्माण सामग्री और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अधिकाधिक उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को देश के अन्य राज्यों में अधोसंरचना निर्माण और रखरखाव के क्षेत्र में अपनाई जा रही श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों, नवाचारों और सफल नीतियों का अध्ययन करने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि उपयोगी नवाचारों को छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, आर्थिक और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया जाए। निर्माण तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए राज्य के इंजीनियरों और तकनीकी अमले को भी नवीनतम तकनीक से निरंतर परिचित कराया जाना जरूरी है।

    मुख्यमंत्री ने इंजीनियरों और तकनीकी अधिकारियों के नियमित प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन के लिए संस्थागत व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

    योजना से रखरखाव तक विकसित होगी एकीकृत डिजिटल व्यवस्था

    बैठक में मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन की प्रस्तावित कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। मिशन के माध्यम से प्रदेश में सार्वजनिक अधोसंरचना की योजना, वित्तपोषण, स्वीकृति, खरीद एवं ठेका प्रक्रिया, निर्माण, निगरानी और रखरखाव की व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार लाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

    अधोसंरचना विकास से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं को एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की योजना पर भी चर्चा हुई। इसके माध्यम से विभिन्न विभागों की परियोजनाओं, उनकी भौतिक एवं वित्तीय प्रगति और निर्धारित समय-सीमा की प्रभावी निगरानी संभव होगी।

    प्रदेश में उपलब्ध अधोसंरचना का समग्र आकलन कर आवश्यकता और उपलब्धता के बीच अंतर की पहचान भी की जाएगी। इससे वास्तविक आवश्यकता के आधार पर परियोजनाओं की प्राथमिकता निर्धारित करने और वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग में सहायता मिलेगी।

    विभाग अलग-अलग नहीं, साझा विकास दृष्टि के साथ करें काम

    मुख्यमंत्री  साय ने अधोसंरचना विकास से जुड़े सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों की योजनाओं को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखने के बजाय प्रदेश की समग्र विकास आवश्यकताओं से जोड़कर कार्य किया जाए।

    बेहतर विभागीय समन्वय से एक ही क्षेत्र में कार्यों की अनावश्यक पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी, संसाधनों का अधिकतम उपयोग होगा और विभिन्न परियोजनाओं को एक-दूसरे के पूरक के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन के अंतर्गत अधिकारियों और कर्मचारियों की तकनीकी, पेशेवर तथा प्रबंधकीय क्षमताओं को भी सुदृढ़ किया जाए। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ टिकाऊपन तथा जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को भी प्राथमिकता दी जाए।

    अधोसंरचना का वास्तविक मूल्य नागरिकों को मिलने वाले लाभ से तय होगा

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि विकास का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कितने किलोमीटर सड़क बनी या कितने भवनों का निर्माण हुआ। वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि उस अधोसंरचना से नागरिकों का जीवन कितना सुगम हुआ, आर्थिक गतिविधियों में कितनी वृद्धि हुई, नए अवसर कितने पैदा हुए और संबंधित क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास को कितनी गति मिली।

    उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसी अधोसंरचना तैयार करना है, जो आज की जरूरतें पूरी करने के साथ आने वाली पीढ़ियों के भी काम आए। योजनाबद्ध पूंजीगत निवेश, आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण निर्माण और नियमित रखरखाव के माध्यम से हमें विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव तैयार करनी है।

    मुख्यमंत्री  साय ने शासन द्वारा किए जा रहे जनहितकारी विकास कार्यों और नई अधोसंरचना से नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।

    बैठक में उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव  विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश बंसल, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव  अंकित आनंद सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • राहुल गांधी पर रवि किशन का तीखा तंज, कांग्रेस के दिल्ली प्रदर्शन पर भी साधा निशाना

    राहुल गांधी पर रवि किशन का तीखा तंज, कांग्रेस के दिल्ली प्रदर्शन पर भी साधा निशाना

    रायपुर.

    भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेता रवि किशन मंगलवार सुबह रायपुर पहुंचे। एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कांग्रेस के दिल्ली प्रदर्शन को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। मोदी को हरा नहीं पा रहे हैं इसलिए लोगों को हाईजैक करने पर आ गए हैं। मारपीट पर उतारू हो गए हैं।

    भारत को फिर से पीछे लेकर जाना चाहती है कांग्रेस
    रवि किशन ने निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने 65 साल तक देश का शोषण किया और अब वह भारत को फिर से पीछे लेकर जाना चाहती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का सम्मान वैश्विक स्तर पर बढ़ा है और देश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

    संसद नहीं चलने देने का लगाया आरोप
    भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद की कार्यवाही नहीं चलने दे रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के कारण लोगों को नौकरी और जरूरी कामों के लिए आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

    EVM और वोट चोरी के आरोपों पर उठाए सवाल
    रवि किशन ने चुनाव में EVM और वोट चोरी को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती है, तब EVM और वोट चोरी का आरोप क्यों नहीं लगाती है ? उन्होंने कांग्रेस से विकास के मुद्दों पर राजनीति करने और देश के लिए अपना रोडमैप स्पष्ट करने की बात कही। उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसे भारत की बात करती है, जहां दंगे न हों, विकास हो और जनता की आवाज सुनी जाए। रवि किशन ने कहा कि सड़क जाम करना आंदोलन का उचित तरीका नहीं है।

    गरबा महोत्सव में शामिल होंगे रवि किशन
    बता दें कि रवि किशन आज बिलासपुर में आयोजित गरबा महोत्सव में विशेष अतिथि के तौर पर शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचे। रायपुर एयरपोर्ट से वह सीधे बिलासपुर जाएंगे। 

  • छत्तीसगढ़: बोड़ला को मिली विकास कार्यों की सौगात, उप मुख्यमंत्री ने ₹60 लाख की परियोजनाओं की रखी नींव

    छत्तीसगढ़: बोड़ला को मिली विकास कार्यों की सौगात, उप मुख्यमंत्री ने ₹60 लाख की परियोजनाओं की रखी नींव

    उप मुख्यमंत्री ने बोड़ला में 60 लाख रूपए के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

    प्रशासनिक सुविधाओं और उच्च शिक्षा के विस्तार को मिलेगी मजबूती

    उप मुख्यमंत्री ने 40 लाख रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की, कॉलेज में स्मार्ट बोर्ड, इंटरनेट और एआई सुविधाओं के विस्तार की पहल

    रायपुर 
     कबीरधाम जिले के बोड़ला में प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार और उच्च शिक्षा के लिए अधोसंरचना विकास को गति देते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज 60 लाख रुपए के दो विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इसके तहत एसडीएम कार्यालय बोड़ला में 30 लाख रुपए की लागत से सभा कक्ष सह सामुदायिक शौचालय तथा शासकीय स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय में 30 लाख रुपए की लागत से अतिरिक्त कक्ष का निर्माण किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने 40 लाख रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की। इसमें कॉलेज में बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए 15 लाख रुपये, बालिका शौचालय निर्माण के लिए 4.60 लाख रुपए, ग्राम भीरा में मंगल भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपए तथा सीसी रोड निर्माण के लिए 10 लाख 40 हजार रुपए शामिल हैं। इसके साथ ही कॉलेज में स्मार्ट बोर्ड, इंटरनेट सुविधा और एआई आधारित तकनीक उपलब्ध कराने की पहल की जाएगी।

          उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल तकनीक और नवाचार के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग ज्ञान बढ़ाने, क्षमताओं के विकास और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी तकनीक के स्वामी बनें, तकनीक उनका स्वामी न बने। चैटजीपीटी, जेमिनाई, ग्रोक और परप्लेक्सिटी जैसे एआई टूल्स का उपयोग पढ़ाई और रचनात्मक कार्यों को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। साथ ही विद्यार्थियों को अपने संस्कारों और मूल्यों को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विधानसभा क्षेत्र के 85 स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इनमें 50 स्थानों पर स्मार्ट बोर्ड लगाए जा चुके हैं तथा शेष 35 स्थानों पर भी लगाए जाएंगे। छात्रावासों और महाविद्यालयों में भी डिजिटल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से विज्ञान, गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान जैसे विषयों की जटिल अवधारणाओं को वीडियो और डिजिटल सामग्री से सरलता से समझाया जा सकेगा।

          उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों की काउंसलिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत एनडीए, सीजीपीएससी, यूपीएससी, कर्मचारी चयन आयोग और नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को उनके लक्ष्य के अनुरूप मार्गदर्शन मिल सके। उन्होंने विद्यार्थियों से नई तकनीक सीखने और उसका विवेकपूर्ण उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, नवाचार और सकारात्मक सोच के साथ निरंतर प्रयास एवं अभ्यास से सफलता प्राप्त की जा सकती है। कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष बालका रामकिंकर वर्मा, नगर पंचायत बोड़ला अध्यक्ष विजय पाटिल, बरसाती लाल वर्मा, छोटूराम चंद्रवंशी, मोहन धुर्वे, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष नंद श्रीवास, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती ललिता रूपसिंग धुर्वे, कांशीराम उईके, सरपंच श्रीमती रेशमा बाई सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

  • प्रदेश के पांचों जोन के 440 खिलाड़ी वॉलीबाल, सॉफ्टबाल और हैंडबाल में दिखाएंगे दमखम

    प्रदेश के पांचों जोन के 440 खिलाड़ी वॉलीबाल, सॉफ्टबाल और हैंडबाल में दिखाएंगे दमखम

    रायपुर

    खेल भावना, अनुशासन और उत्साह के बीच कबीरधाम जिले में 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता-2026 का आज भव्य शुभारंभ हुआ। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक  विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के स्वामी करपात्री जी स्टेडियम कवर्धा में आयोजित समारोह में  प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। इस दौरान ध्वज फहराया गया और विभिन्न जोनों से आए खिलाड़ियों ने मार्च पास्ट कर खेल भावना, एकता और अनुशासन का परिचय दिया। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और उनका उत्साहवर्धन करते हुए बेहतर प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं।

      उप मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि खेल खेलिए और पूरे उत्साह के साथ खेलिए। हार और जीत हमेशा हमारे हाथ में नहीं होती, इसलिए परिणाम की चिंता करने के बजाय अपने खेल पर ध्यान देना चाहिए। खिलाड़ियों का प्रदर्शन इतना उम्दा होना चाहिए कि दर्शक खेल देखकर शानदार खेल की प्रशंसा करें। यही खेल का असली आनंद और सच्ची खेल भावना है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मेहनत सफलता दिलाती है और सफलता से सम्मान मिलता है। जब आप सफल होते हैं, तो दुनिया आपकी प्रतिभा को पहचानती है। सफलता का कोई अलग मंत्र नहीं है, इसके लिए जरूरी है कि खिलाड़ी अपने खेल को बेहतर बनाने के लिए पूरी लगन, मेहनत और समर्पण के साथ जुटे रहें।

     उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि खिलाड़ियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जीत-हार के पीछे परेशान होने के बजाय अपनी खेल प्रतिभा को तराशने के लिए मेहनत करनी चाहिए और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने प्रदेश के पांचों जोन से आए सभी युवा खिलाड़ियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बस्तर के दूरस्थ अंचलों, अबूझमाड़, सुकमा और बीजापुर से आए खिलाड़ियों से मिलकर  विशेष खुशी हुई। बस्तर के युवा अब नक्सलवाद के दंश को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने और पूरे देश में अपनी प्रतिभा से पहचान बनाने के लिए तैयार हैं। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, नगर पालिका परिषद कवर्धा के अध्यक्ष  चन्द्रप्रकाश चन्द्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश चन्द्रवंशी, जिला पंचायत के उपाध्यक्ष  कैलाश चन्द्रवंशी, पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण के सदस्य  भगत पटेल तथा जनपद पंचायत कवर्धा की अध्यक्ष मती सुषमा गणपत बघेल,  विजय पटेल,  संतोष पटेल,  मनीराम,  लोकचंद साहू,  उमंग पांडेय, जिला शिक्षा अधिकारी  एफ आर वर्मा सहित खिलाड़ी उपस्थित रहे। 

    प्रदेश के पांचों जोन के 440 खिलाड़ी ले रहे हिस्सा

    जिला प्रशासन एवं स्कूल शिक्षा विभाग, जिला कबीरधाम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह चार दिवसीय प्रतियोगिता 13 से 16 अक्टूबर तक चलेगी। इसमें प्रदेश के बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर, रायपुर और दुर्ग जोन के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिता में बालक वर्ग से 220 और बालिका वर्ग से 220 खिलाड़ी शामिल हैं। इस प्रकार कुल 440 प्रतिभागी एवं अधिकारी प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं।

    वॉलीबाल, सॉफ्टबाल और हैंडबाल में दिखाएंगे प्रतिभा

    प्रतियोगिता में 14 वर्ष आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं की वॉलीबाल तथा 19 वर्ष आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं की सॉफ्टबाल और हैंडबाल स्पर्धाएं आयोजित की जा रही हैं। चार दिनों तक चलने वाली इन स्पर्धाओं में खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा, कौशल और टीम भावना का प्रदर्शन करेंगे।

  • पॉलीहाउस और खाद कारोबार के नाम पर बड़ा फ्रॉड, पलामू में 18 लोगों को लगा ₹77 लाख का चूना

    पॉलीहाउस और खाद कारोबार के नाम पर बड़ा फ्रॉड, पलामू में 18 लोगों को लगा ₹77 लाख का चूना

    मेदिनीनगर (पलामू)
    खाद कंपनी की डीलरशिप दिलाने, पॉलीहाउस निर्माण कराने और पौधारोपण में सहयोग के नाम पर झारखंड और बिहार के 18 लोगों से करीब 76.97 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। मेदिनीनगर के बेरिया इलाके से संचालित कंपनी के संचालक कार्यालय बंद कर फरार हो गए हैं।

    ठगी के शिकार लोगों में पलामू के हुसैनाबाद, हैदरनगर और पड़वा के अलावा बिहार के औरंगाबाद क्षेत्र के लोग शामिल हैं। पीड़ितों की शिकायत पर मेदिनीनगर टाउन थाना में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

    अलग-अलग काम का झांसा देकर वसूली रकम
    जानकारी के अनुसार, मेदिनीनगर टाउन थाना क्षेत्र के बेरिया इलाके में रासायनिक और जैविक खाद के कारोबार के नाम पर कंपनी का संचालन किया जा रहा था।

    कंपनी के प्रतिनिधियों ने पलामू और बिहार के औरंगाबाद क्षेत्र के लोगों से संपर्क कर उन्हें खाद की डीलरशिप दिलाने, पॉलीहाउस का निर्माण कराने और पौधारोपण में सहयोग करने का भरोसा दिया था। इन प्रस्तावों के आधार पर लोगों से मोटी रकम ली गई।

    बैंक में बाउंस हो गए चेक
    पीड़ितों का आरोप है कि कंपनी की ओर से कुछ लोगों को भुगतान के लिए चेक भी दिए गए, लेकिन बैंक में जमा करने पर चेक बाउंस हो गए। इसके बाद लोगों को ठगी का संदेह हुआ। जब तक वे मामले को समझ पाते, कंपनी का कार्यालय बंद हो चुका था और संबंधित लोग फरार हो गए थे। अब पीड़ित अपनी रकम वापस पाने के लिए पुलिस से गुहार लगा रहे हैं।

    पुलिस कर रही मामले की जांच
    मेदिनीनगर टाउन थाना प्रभारी ज्योतिलाल रजवार ने बताया कि पीड़ितों के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। अलग-अलग लोगों से अलग-अलग रकम लिए जाने की बात सामने आई है। हैदरनगर निवासी इकबाल सिद्दीकी ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

     

  • गोपाल किरन संस्था ने बढ़ाया बाढ़ पीड़ितों की ओर मदद का हाथ

    गोपाल किरन संस्था ने बढ़ाया बाढ़ पीड़ितों की ओर मदद का हाथ

    आपदा प्रभावित परिवारों की मदद और बच्चों की शिक्षा को जारी रखना संस्था की प्राथमिकताओं में शामिल : श्रीप्रकाश सिंह निमराजे

    ग्वालियर
    छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बाढ़ से प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए गोपाल किरन समाजसेवी संस्था (GKSSS) ने आर्थिक सहयोग प्रदान करने के साथ पीड़ितों के लिए स्टेशनरी सामग्री भी भेजी। संस्था की इस पहल का उद्देश्य आपदा से प्रभावित लोगों को कठिन परिस्थितियों में सहयोग देना तथा बच्चों की शिक्षा को बाधित होने से बचाने की दिशा में प्रयास करना है।

    गोपाल किरन समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने कहा कि आपदा के समय प्रभावित परिवारों की सहायता करना संस्था की प्राथमिकताओं में शामिल है। संस्था समय-समय पर आपदा प्रभावित लोगों की मदद के लिए सहयोग करती रही है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण लोगों को आर्थिक कठिनाइयों, दैनिक आवश्यकताओं की कमी और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होना सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदना का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

     निमराजे ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ केवल घरों, संपत्तियों और आजीविका को ही प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और उनके सामान्य जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। इसलिए प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहयोग देने के साथ बच्चों के लिए स्टेशनरी सामग्री उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। संस्था की ओर से भेजी गई शैक्षणिक सामग्री का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना और विपरीत परिस्थितियों में उनके शैक्षणिक हितों का ध्यान रखना है।

    उन्होंने कहा कि आपदा के समय सहायता, जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता और शिक्षा को प्रोत्साहन देना गोपाल किरन समाजसेवी संस्था के कार्यों की प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं। संस्था का मानना है कि सामाजिक सेवा का वास्तविक अर्थ केवल सामान्य परिस्थितियों में समाज के लिए कार्य करना नहीं, बल्कि संकट के समय जरूरतमंद लोगों के साथ खड़े होकर उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोग करना भी है। आपदा प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता मिलने से उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करने में संबल मिलता है।

    गोपाल किरन समाजसेवी संस्था शिक्षा, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तीकरण, वंचित समुदायों के कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में कार्य करती रही है। संस्था अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता के अंतर्गत जरूरतमंद लोगों की सहायता तथा आपदा के समय सहयोगात्मक गतिविधियों को भी महत्व देती है। जगदलपुर के बाढ़ पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता और स्टेशनरी सामग्री भेजने की पहल इसी सामाजिक दृष्टिकोण का हिस्सा है।

    श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने कहा कि आपदाओं से प्रभावित लोगों की सहायता करना केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के सभी सक्षम व्यक्तियों, सामाजिक संगठनों और संस्थाओं का साझा दायित्व है। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए आगे आएँ और विशेष रूप से प्रभावित बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में यथासंभव योगदान दें।

    संस्था का उद्देश्य है कि कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे परिवारों को सहयोग मिले और बच्चों को शिक्षा से जुड़े रहने के अवसर प्राप्त हों। गोपाल किरन समाजसेवी संस्था आगे भी अपनी क्षमता और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सामाजिक जरूरतों तथा आपदा प्रभावित लोगों की सहायता के लिए प्रयासरत रहेगी।

     

  • यूपी में मेधावी छात्राओं की स्कूटी योजना की तैयारी तेज, हेलमेट और 5 लीटर पेट्रोल भी मिलेगा

    यूपी में मेधावी छात्राओं की स्कूटी योजना की तैयारी तेज, हेलमेट और 5 लीटर पेट्रोल भी मिलेगा

     लखनऊ
    यूपी में छात्राओं को स्कूटी की सौगात की तारीख और नजदीक आ गई है। पहले दिसंबर में बांटने की तैयारी थी। अब दो चरणों में स्कूटी बांटी जाएगी। पहले चरण में अगले ही महीने यानी नवंबर में 20 से 25 हजार छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। स्कूटी के लिए मेधावी छात्राओं की सूची का काम लगभग पूरा हो चुका है।

    विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों की मेधावी छात्राओं को अगले महीने मुफ्त स्कूटी बांटे जाने की तैयारियां शासन स्तर पर तेज कर दी गई हैं। दो चरणों में 40 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटी बांटने की तैयारी है। पहले चरण में 20 हजार से 25 हजार तक मेधावी छात्राओं को स्कूटी बांटने की तैयारी है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से स्कूटी बांटने के लिए औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं।

    क्यों दो चरणों में बांटने का फैसला
    40 हजार तक स्कूटी खरीदने का बजट भी विभाग के पास है। फिलहाल एक साथ इतनी बड़ी संख्या में स्कूटी की उपलब्धता कराने में कंपनी को कठिनाई न हो इसके लिए इसे दो चरणों में बांटा जाएगा। पहले चरण में 20 हजार से 25 हजार तक मेधावी बेटियों को स्कूटी देने की तैयारी की जा रही है। बाकी मेधावी छात्राओं को अगले चरण में दी जाएगी। नवंबर से स्कूटी वितरण की शुरुआत कर दी जाएगी। कंपनी की ओर से जैसे-जैसे डिलिवरी होगी उसके वितरण का काम भी तेजी से किया जाएगा।

    स्कूटी पर होगी पीएम मोदी और सीएम योगी की फोटो
    स्कूटी पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो होगी। उत्तर प्रदेश सरकार का लोगो भी होगा। स्कूटी वितरण से विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में छात्राओं का नामांकन बढ़ेगा। मेधावी बेटियों के नाम पहले ही विश्वविद्यालय व कॉलेजों से लेकर सत्यापन कराया गया है। कोई भी पात्र मेधावी छात्रा न छूटे इसके लिए एक-एक डाटा की जांच की जा रही है।

    एक अधिकारी के अनुसार 320 करोड़ रुपये का बजट भी इसके लिए दिया जा चुका है और टेंडर प्रक्रिया को पूरा कर अब जल्द खरीद शुरू होगी। कंपनी को एक साथ इतनी बड़ी संख्या में स्कूटी उपलब्ध कराने में कठिनाई न हो और वादे के मुताबिक नवंबर में वितरण शुरू हो इसके लिए दो चरणों में 40 हजार स्कूटी का वितरण किया जाएगा।

    हेलमेट, एसेसरीज और पांच लीटर पेट्रोल भी मिलेगा
    स्कूटी देने के साथ ही सरकार इसके साथ कई चीजें मुफ्त देगी। हर स्कूटी के साथ हेलमेट और एसेसरीज भी सरकार की तरफ से दी जाएगी। इसके साथ ही पांच लीटर पेट्रोल भी दिया जाएगा।

  • सपना कुमारी से आकाश दीप तक, बिहार की मेडल योजना से खिलाड़ियों को मिल रहा सरकारी नौकरी का मौका

    सपना कुमारी से आकाश दीप तक, बिहार की मेडल योजना से खिलाड़ियों को मिल रहा सरकारी नौकरी का मौका

    पटना
    बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना से जहां एक तरफ राज्य में खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे युवक-युवतियों की संख्या बढ़ी है, तो दूसरी तरफ दो साल में 181 खिलाड़ियों को मेडल के आधार पर अलग-अलग स्तर पर सरकारी नौकरियां मिली हैं। जिन 181 खिलाड़ियों को सरकारी जॉब मिली है, उसमें 95 पुरुष और 86 महिला प्लेयर शामिल हैं। मेडल के आधार पर सरकारी नौकरी में युवतियों की लगभग आधी हिस्सेदारी से सरकार गदगद है, क्योंकि बिहार में छात्राओं को कई तरह की प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए स्कूल से ही पढ़ाई और खेल से जोड़ा जा रहा है।

    बिहार की मेडल आधारित नौकरी योजना के तहत डीएसपी, दारोगा, पंचायती राज पदाधिकारी और अन्य उपयुक्त पदों पर सीधी बहाली के लिए नियम तय कर दिए गए हैं। सरकार आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण के जरिए खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर भी दे रही है। भारतीय क्रिकेट टीम के गेंदबाज आकाश दीप और मुकेश कुमार को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर नियुक्ति मिली है।

    रग्बी खिलाड़ी सपना कुमारी को मिली डीएसपी की नौकरी
    रग्बी खिलाड़ी सपना कुमारी कहती है कि उन्हें सामाजिक विरोध और संसाधन की कमी का सामना करना पड़ा। गांव में शॉर्ट्स पहनकर खेलने पर लोग ताने मारते थे, लेकिन मां हमेशा हौसला बढ़ाती रहीं। राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के बाद 2022 में पाटलिपुत्र खेल परिसर में आयोजित प्रतियोगिता में तीन स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतने पर सपना को सरकारी नौकरी मिली। वर्तमान में सपना बिहार राज्य खेल प्राधिकरण में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने के बाद गांव और समाज का नजरिया बदला है और अब दूसरे लोग भी अपनी बेटियों को खेल में आगे बढ़ने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं।

    फुटबॉल प्लेयर श्यामा रानी भी गवर्नमेंट जॉब में
    मुंगेर जिले के इटहरी गांव की फुटबॉल खिलाड़ी श्यामा रानी की खेल यात्रा 2008 में शुरू हुई थी। सामाजिक दिक्कतों के बावजूद परिवार ने श्यामा का साथ दिया। श्यामा महिला फुटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और इंडियन वीमेंस लीग में पंजाब एफसी की कप्तान रह चुकी हैं। श्यामा खेल कोटे के तहत नौकरी कर रही हैं और राज्य खेल प्राधिकरण में ही खेल गतिविधियों में योगदान दे रही हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं, बेहतर प्रशिक्षण और खेल क्लबों से लड़कियों के लिए आगे बढ़ने के अवसर बढ़े हैं।

    खिलाड़ियों को मिलती है 3 से 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता
    बिहार राज्य खेल प्राधिकरण की एथलेटिक्स कोच कोमल कुमारी ने कहा कि पहले राज्य में खेल की आधारभूत संरचना और सरकारी सहयोग की कमी थी। अब खेल विभाग और राज्य खेल प्राधिकरण के सहयोग से खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रेरणा, सक्षम और उत्कर्ष जैसी योजनाओं के तहत पात्र खिलाड़ियों को 3 लाख से 20 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है, जिससे उन्हें प्रशिक्षण, डाइट वगैरह में मदद मिलती है।

  • पंजाब में खाद की गुणवत्ता जांचने की तैयारी तेज, मोहाली में खुली हाईटेक लैब

    पंजाब में खाद की गुणवत्ता जांचने की तैयारी तेज, मोहाली में खुली हाईटेक लैब

    मोहाली.

    जैविक खेती के नाम पर किसानों को घटिया या नकली जैव उर्वरक बेचने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। पंजाब सरकार ने जैव उर्वरकों की गुणवत्ता जांच के लिए प्रदेश में तीन प्रयोगशालाओं का नेटवर्क तैयार किया है।

    पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुदियन ने मंगलवार को एसएएस नगर (मोहाली) के कलकत भवन में एक बायो-फर्टिलाइजर परीक्षण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया, जो 4.50 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित तीन ऐसी प्रयोगशालाओं के राज्य के नेटवर्क को पूरा करता है। मोहाली, गुरदासपुर और बठिंडा में स्थित प्रयोगशालाओं का उद्देश्य जैव-निषेचनकर्ताओं और अन्य जैव-इनपुट की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, किसानों को नकली उत्पादों से बचाना और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है।
    उद्घाटन के मौके पर बोलते हुए, खुदियन ने कहा कि प्रयोगशालाएं किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करते हुए प्रमाणित और प्रभावी उत्पादों तक पहुंचने में मदद करेंगी।

    वे उर्वरक नियंत्रण व्यवस्था के प्रवर्तन को भी मजबूत करेंगे, निर्माताओं और डीलरों की निगरानी की सुविधा प्रदान करेंगे, और पंजाब की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल जैव-उर्वर उपभेदों में सुधार के लिए डेटा उत्पन्न करेंगे। देश के खाद्य उत्पादन में पंजाब के योगदान पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य में भारत के गेहूं और चावल उत्पादन में 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य में सुधार करने और कृषि उपज की गुणवत्ता को बनाए रखने वाली स्थायी कृषि पद्धतियों के महत्व पर बल दिया।

    खुदियन ने कहा कि खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि उत्पादन के बारे में बढ़ती जागरूकता के बीच जैविक खेती को बरकरार रखा है। राज्य सरकार के अनुसार, पंजाब में लगभग 30,000 एकड़ जमीन 2025-26 में प्रमाणित जैविक खेती के अधीन थी। मंत्री ने कहा कि पंजाब की जैव उर्वरकों की सालाना खपत 15,000 से 16,000 मीट्रिक टन/किलोलीटर होने का अनुमान है और यह लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों के बढ़ते उपयोग और जैविक खेती के विस्तार के साथ गुणवत्ता परीक्षण आवश्यक हो गया है। तीन प्रयोगशालाओं से नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने, कृषि आदानों की गुणवत्ता में सुधार करने और स्थायी कृषि प्रथाओं को अपनाने वाले किसानों का समर्थन करने में मदद करने की उम्मीद है। उद्घाटन के मौके पर डेराबसी के विधायक कुलजीत सिंह रंधावा, अपर सचिव कृषि लतीफ अहमद और निदेशक कृषि गुरजीत सिंह बराड़ भी मौजूद थे।

  • हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में प्रशासनिक कार्रवाई, कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप पर गिरी गाज

    हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में प्रशासनिक कार्रवाई, कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप पर गिरी गाज

    दुर्ग.

    हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप पर राज्य शासन ने बड़ी कार्रवाई की है. विवादों में चल रहे कुलसचिव को उच्च शिक्षा विभाग ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए निलंबित कर दिया है.

    कुलसचिव पर शासन ने यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 (1) (क) के तहत की है. दरअसल भूपेंद्र कुलदीप पर अपने अधिकारों के गलत इस्तेमाल पद का दुरुपयोग करते हुए विश्विद्यालय खाते से राशि खर्च करने के आरोप लगे थे. इसके अलावा चतुर्थ वर्ग संविदा कर्मचारी महिला के वेतन से एक लाख 49 हजार रुपये अपने बेटे के खाते में ट्रान्सफर करने के मामले में अपराध दर्ज किया गया था. इन सभी मामलों कें लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जांच समिति बनाई थी जिसमें भूपेंद्र कुमार कुलदीप दोषी पाए गए थे. जिसके बाद उन्हें सो कॉस जारी किया गया था. लेकिन जवाब संतोष जनक नही होने पर आगे की कार्रवाई की गई.

    वहीं, 29 सितंबर को उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें कुलसचिव के पद से हटाकर रायपुर स्थित उच्च शिक्षा संचालनालय में अटैच कर दिया था. उनकी जगह दुर्ग के शासकीय वीवाईटी पीजी कॉलेज के इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार पांडेय को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया था. इस आदेश को भूपेंद्र कुलदीप ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. 9 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने शासन के अटैचमेंट आदेश को रद्द कर दिया. इसके बाद कुलदीप विश्वविद्यालय में दोबारा जॉइनिंग देने पहुंचे, लेकिन कुलपति संजय तिवारी ने उनके कक्ष में ताला लगवा दिया था. अब 12 अक्टूबर को राज्य शासन ने उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया है. इस आदेश में महिला कर्मचारी के वेतन से कथित तौर पर 1.49 लाख रुपए से ज्यादा की रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर कराने के मामले का उल्लेख है. इसके अलावा विश्वविद्यालय में अधिकारों के गलत इस्तेमाल और दूसरी गड़बड़ियों का भी उल्लेख किया गया है.

    निलंबन के दौरान भूपेंद्र कुमार कुलदीप का मुख्यालय उच्च शिक्षा संचालनालय, इंद्रावती भवन, अटल नगर, नवा रायपुर रहेगा. दूसरे मामले में कुलदीप के खिलाफ दुर्ग के मोहन नगर थाने में 3 अगस्त 2026 को एफआईआर दर्ज की गई थी. भूपेंद्र कुलदीप के घर पर साफ सफाई का काम करने वाली विश्वविद्यालय की दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शुभांगी मराठे के मासिक वेतन 11,515 रुपए निर्धारित था, लेकिन उन्हें 2,200 रुपए दिए जाते थे और शेष रकम फोनपे या पेटीएम के माध्यम से कुलदीप के बेटे के खाते में ट्रांसफर कराई जाती थी.पुलिस के मुताबिक, 6 फरवरी 2025 से 4 जुलाई 2026 के बीच कथित तौर पर 1,49,384 रुपए का लेनदेन हुआ. इस मामले में कुलदीप को 3 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसी दिन थाने से मुचलके पर रिहा कर दिया गया. शासन के ताजा आदेश में भी इस एफआईआर और उनके जमानत पर होने का उल्लेख किया गया है. हालांकि, आपराधिक मामले में आरोप साबित होने का अंतिम फैसला न्यायालय को करना है.