Author: NewseDay

  • शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट से पूरे मेरठ तक पहुंचा मामला, अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर होगी कार्रवाई

    शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट से पूरे मेरठ तक पहुंचा मामला, अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर होगी कार्रवाई

     मेरठ
    शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण और आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब कार्रवाई पूरे शहर की तरफ बढ़ रही है।

    हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद शासन ने मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के सचिव अर्पित गुप्ता को पद से हटाकर लखनऊ से संबद्ध कर दिया है।

    सचिव का कार्यकाल करीब तीन महीने ही रहा। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई में मेरठ में अवैध निर्माण के मामले में जिस तरह सख्त निर्देश दिए गए, उसी दिन शासन स्तर पर हुई इस कार्रवाई से एमडीए में भी खलबली मच गई है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जोन-ए में एमडीए द्वारा चिन्हित 16,726 ऐसी संपत्तियों को सील करने के आदेश दिए, जिनमें अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई है। कोर्ट ने जोन-बी, सी और डी में भी इसी तरह की संपत्तियों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होगी।

    न्यायमूर्ति जेबी पाडीवाला और न्यायमूर्ति के. विश्वनाथन की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में मेरठ में अवैध निर्माण और अवैध कालोनियों को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा गया। हालांकि, सोमवार की सुनवाई का विस्तृत आदेश अभी अपलोड नहीं हुआ है।

    सेंट्रल मार्केट से शुरू हुआ मामला अब हजारों संपत्तियों तक
    शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल और स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। अदालत के निर्देश पर पहले 44 संपत्तियों में कार्रवाई की गई थी।

    आवास एवं विकास परिषद की ओर से पेश अनुपालन रिपोर्ट में बताया गया कि 44 में से 20 संपत्तियों में पूरी तरह अवैध निर्माण हटाया जा चुका है। शेष 24 संपत्तियों में भी अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद सोमवार की सुनवाई में मामला और व्यापक हो गया। एमडीए के अंतर्गत आने वाले शहर का आधे से अधिक हिस्सा अब चपेट में आयेगा।

    जोन-ए में चिन्हित 16,726 संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में सीलिंग के निर्देश दिए गए। अदालत ने दूसरे जोन में भी ऐसी संपत्तियों की पहचान करने को कहा है। इससे एमडीए के सामने अब बड़े पैमाने पर सर्वे, चिन्हांकन और कार्रवाई की चुनौती खड़ी हो गई है। हजारों संपत्तियों से जुड़े इस मामले में कार्रवाई का असर भवन स्वामियों और व्यापारियों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।

  • निर्माणाधीन जेल परियोजनाओं को मिली रफ्तार, अमेठी और महोबा की जेलें अंतिम चरण में, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर व हापुड़ में तेजी से चल रहा निर्माण कार्य

    निर्माणाधीन जेल परियोजनाओं को मिली रफ्तार, अमेठी और महोबा की जेलें अंतिम चरण में, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर व हापुड़ में तेजी से चल रहा निर्माण कार्य

    लखनऊ
     योगी सरकार प्रदेश की जेल व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और मानवीय बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। बढ़ती बंदी संख्या और जेलों में ओवरक्राउडिंग की समस्या को दूर करने के लिए योगी सरकार ने एक ओर नई जेलों के निर्माण को गति दी है, जिससे जेलों में ओवरक्राउडिंग दर में कमी दर्ज की गई।

    पिछले साढ़े नौ वर्षों में जेलों में ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 हुई
    वर्तमान में प्रदेश में कुल 77 कारागार संचालित हैं, जिनमें 7 केंद्रीय कारागार, 2 महिला केंद्रीय कारागार, 64 जिला कारागार, 1 विशेष कारागार, 2 उप कारागार तथा 1 किशोर सदन शामिल है। योगी सरकार के पिछले साढ़े नौ वर्षों में जेल अवसंरचना के विस्तार का ही परिणाम है कि प्रदेश की जेल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों की कुल बंदी क्षमता 58,400 थी, जबकि वर्ष 2026 तक यह बढ़कर 77,673 हो गई है। इस अवधि में जेलों में ओवरक्राउडिंग दर भी काफी कम हुई है। वर्ष 2017 में जहां ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी, वह वर्ष 2026 में घटकर 1.03 रह गई है। यह कमी योगी सरकार द्वारा जेलों के विस्तार, नई जेलों के निर्माण और अतिरिक्त क्षमता सृजन के लिए किए गए प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम है। योगी सरकार ने वर्ष 2017 के बाद से अब तक सात नई जेलों का संचालन शुरू किया है। इनमें चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा केंद्रीय कारागार, प्रयागराज, श्रावस्ती तथा पुरानी जिला कारागार बरेली शामिल हैं। इन नई जेलों से कुल 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है, जिससे विभिन्न जनपदों की जेलों पर दबाव कम हुआ है।

    योगी सरकार बनाने जा रही 6 और नई जेल
    योगी सरकार छह नई जिला जेलों के निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। इनमें कानपुर नगर (2030 क्षमता), औरैया (1056), शाहजहांपुर (1520), ज्ञानपुर-भदोही (574), मुरादाबाद (2000) तथा ललितपुर (552) शामिल हैं। इन छह नई जेलों के निर्माण से प्रदेश में 7,732 अतिरिक्त बंदियों की क्षमता उपलब्ध होगी। इन परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसके अलावा प्रदेश में नई निर्माणाधीन जेल परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य चल रहा है। अमेठी और महोबा में बन रही नई जिला जेलों का निर्माण लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अमेठी जेल का कार्य 98 प्रतिशत से अधिक तथा महोबा जेल का कार्य 93 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। इनके अतिरिक्त हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में भी नई जेलों का निर्माण तेजी से जारी है। इन छह निर्माणाधीन जेलों की कुल क्षमता 6,156 बंदियों की होगी। योगी सरकार का लक्ष्य है कि अधिकांश परियोजनाएं वर्ष 2026 तक पूर्ण कर ली जाएं।

    संभल, बलिया और शामली में जेल के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज
    जेल अवसंरचना के विस्तार के साथ-साथ सरकार उन जिलों में भी नई जेलों की स्थापना की तैयारी कर रही है, जहां भूमि क्रय एवं पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है। संभल, शामली, बलिया, सहारनपुर, अमरोहा और चंदौली में प्रस्तावित जेलों के लिए भूमि अधिग्रहण और पंजीकरण की कार्रवाई प्रगति पर है। इनमें से कई परियोजनाओं के लिए शासन स्तर पर करोड़ों रुपये की धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है। मालूम हो कि जेलों में अत्यधिक भीड़ सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पुनर्वास संबंधी गतिविधियों को प्रभावित करती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने जेलों की क्षमता बढ़ाने को प्राथमिकता दी है। नई जेलों के निर्माण से न केवल बंदियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि जेल प्रशासन को भी सुरक्षा व्यवस्था और सुधारात्मक कार्यक्रमों के संचालन में सुविधा होगी। योगी सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक बंदी को निर्धारित मानकों के अनुरूप रहने की सुविधा मिले तथा जेलों में भीड़भाड़ के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं को न्यूनतम किया जा सके। इसके लिए नई जेलों का निर्माण, पुराने कारागारों का उन्नयन, अतिरिक्त बैरकों का निर्माण और आधुनिक सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

  • भारतीय व्यापार मंडल की विचारधारा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’, सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने का संकल्प

    भारतीय व्यापार मंडल की विचारधारा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’, सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने का संकल्प

    भोपाल 

    भारतीय व्यापार मण्डल की विचारधारा "वसुधैव कुटुंबकम्" की है…जिसे अपनाकर हम सदैव सभी को साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं…भारतीय व्यापार मण्डल व्यापारियों के उत्थान व नवनिर्माण में निरन्तर आगे बढ़ रहा है…

    गठन की इस कड़ी में…जिसमें आज भारतीय व्यापार मण्डल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अंकुर सिंघल जी ने भारतीय व्यापार मण्डल के मध्य प्रदेश प्रदेश महामंत्री एवं महाकौशल प्रांत प्रभारी श्री डॉ. विश्वनाथ प्रसाद अग्रवाल जी की संस्तुति पर श्री रामेश्वर अग्रवाल जी को मध्य प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया…

    मध्य प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व मिलने पर श्री रामेश्वर अग्रवाल जी को ढेर सारी शुभकामनाएं…

    आशा एवं पूर्ण विश्वास है कि श्री रामेश्वर अग्रवाल जी की कार्य प्रणाली से भारतीय व्यापार मण्डल (रजि.) मध्य प्रदेश एवं सम्पूर्ण राष्ट्र में निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसित होने की कामना है…और पूर्ण विश्वास है आप संगठन के इस महत्वपूर्ण दायित्व का सशक्त निर्वहन करेंगे…

     

  • राजस्थान पंचायत चुनाव: आज सरपंच-वार्ड पंच पदों की आरक्षण लॉटरी, गांवों में बढ़ी हलचल

    राजस्थान पंचायत चुनाव: आज सरपंच-वार्ड पंच पदों की आरक्षण लॉटरी, गांवों में बढ़ी हलचल

    जयपुर
    नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब पंचायतों में भी आरक्षण की लॉटरी निकलते ही गांवों में सियासी पारा चढ़ गया है। जिला प्रमुख के 41 पदों के बाद बुधवार को जिला मुख्यालयों पर 1403 जिला परिषद सदस्य, 457 प्रधान व 8245 पंचायत समिति सदस्यों के पदों के संबंध में आरक्षण लॉटरी निकाली गई। इसके साथ ही स्पष्ट हो गया कि राजस्थान में 221 महिलाएं प्रधान बनेंगी। इनमें जयपुर-जोधपुर जिलों में संख्या सबसे ज्यादा रही है। 4 जिलों में केवल एसटी कैटेगरी में प्रधान होगा।

    जिला मुख्यालयों पर बुधवार को निकाली गई लॉटरी के आधार पर पंचायत समिति प्रधानों में एससी के 79, एसटी के 93 और ओबीसी के लिए करीब 56 पद आरक्षित किए गए है। जिलेवार जानकारी के अनुसार जयपुर की 22 पंचायत समितियों में 1 महिला प्रधान बन सकेंगी। उदयपुर में 20 पंचायत समितियों में से एक में भी ओबीसी वर्ग का प्रधान नहीं होगा इनके अलावा डूंगरपुर, बांसवाड़ा सलूंबर और प्रतापगढ़ जिलों में केवल एसटी वर्ग से ही प्रधान बनेंगे।

    14 हजार 403 सरंपच चुने जाएंगे
    पंचायती राज संस्थाओं के जिला परिषद, पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत स्तर पर कुल 1.51 लाख से अधिक वार्ड हैं और 14 हजार 403 ग्राम पंचायतों के लिए सरपंचों का चुनाव होगा। पंचायती राज संस्थाओं मैं महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण होने के कारण इन संस्थाओं में 75 हजार से अधिक महिलाओं का चुनाव भी किया जाएग। इनके अलावा 1403 जिला परिषद सदस्य 41 जिलों के लिए जिला प्रमुख और 8245 पंचायत समिति सदस्य 457 प्रधानों का चुनाव करेंगे, जिनमें भी महिला आरक्षण लागू होगा। अनुमान है कि पंचायत चुनाव में 7 लाख से अधिक लोग के लिए सामने आ सकते हैं। जिला प्रमुख पदों का आरक्षण पहले ही तय हो चुका है।

    सरपंच और वार्ड पंचों के पदों की लॉटरी आज
    अब गुरुवार को उपखंड स्तर पर सरपंच और वार्ड पंचों के पदों की लॉटरी निकाली जाएगी। प्रदेश में 41 जिला परिषद और 457 पंचायत समिति और ग्राम पंचायतें 14 हजार से अधिक हैं, जिनके वार्डों की संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा है। 41 जिला परिषदों में जिला प्रमुख पदों के लिए ओबीसी के 5, अनुसूचित जाति (एससी) के 8, अनुसूचित जनजाति (एसटी) के 7 प्रतिनिधि चुने जाएंगे, वहीं चूरू, अजमेर, झुंझुनू, चित्तौड़गढ़, हनुमानगढ़, डीग, श्रीगंगानगर, झालावाड़, फलोदी, बीकानेर एवं कोटा में जिला प्रमुख सामान्य महिला श्रेणी से होगा। बारां, बाड़मेर, भीलवाड़ा, जयपुर, जोधपुर, करौली, कोटपूतली-बहरोड़, राजसमंद, सिरोही एवं उदयपुर में भी जिला प्रमुख सामान्य श्रेणी में होंगे। सामान्य श्रेणी के पदों पर आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधि भी चुने जा सकेंगे।

     

  • निर्देशिका खुद बनी विद्योतमा

    निर्देशिका खुद बनी विद्योतमा

    निर्देशिका खुद बनी विद्योतमा
    भोपाल 

    शो मस्ट गो ऑन की कहावत कल शाम आपुलकी महाराष्ट्र मंडल के राजीव गांधी कॉलेज,त्रिलंगा के मंच पर तब चरितार्थ हो गई जब नाटिका की मुख्य पात्र राजकुमारी विद्योत्तमा के अचानक चोटिल हो जाने के कारण निर्देशिका ज्योति सावरीकर को स्वयं ही इस पात्र को निभाना पड़ा। दरअसल ये किरदार मूलतः श्रेयसी झोलदेव कर रही थीं।पर एक दिन पहले अचानक उनके  दोनों पैरों में लिगामेंट फ्रैक्चर होने से उनका शो में भाग लेना संभव नहीं हुआ।ऐसे में   निर्देशिका ने स्वयं मंच पर उतर कर अपने मंझे हुए अभिनय से इस किरदार को जीवंत किया। 
    इस नाटिका में कालिदास की भूमिका नीता लोखंडे व राजा विक्रमादित्य की भूमिका स्मिता पागनीस थे। साथी कलाकार में साधना देसाई, स्वाति पाठक, श्वेता केंदुलकर, शैलजा खांडेकर, मनीषा फफूनकर तथा सूत्रधार शोभा भिसे व सपना अलकरी रहे। सभी महिला कलाकारों ने उत्तम प्रस्तुति दी

  • कचहरी चौराहे पर बुलडोजर एक्शन, नोटिस के बाद VDA ने हटाया जायका रेस्टोरेंट का निर्माण

    कचहरी चौराहे पर बुलडोजर एक्शन, नोटिस के बाद VDA ने हटाया जायका रेस्टोरेंट का निर्माण

    वाराणसी
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में अवैध निर्माण के खिलाफ VDA ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की है. कैंट थाना क्षेत्र के कचहरी चौराहे पर स्थित जायका रेस्टोरेंट में यह कार्रवाई की जा रही है. VDA ने रेस्टोरेंट के निर्माण को अवैध बताते हुए पहले ही नोटिस जारी किया था.

    जायका रेस्टोरेंट का आरोप है कि नोटिस के बावजूद निर्माण खुद से नहीं हटाया गया. इसके बाद VDA की टीम मौके पर पहुंची और बुलडोजर से कार्रवाई शुरू की.

    कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. VDA की टीम अवैध बताए जा रहे निर्माण को हटाने में जुटी है. पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई की जा रही है. इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है.

    दरअसल, जायका रेस्टोरेंट एक मुस्लिम व्यापारी का बताया जा रहा है. VDA की ओर से पहले ही निर्माण को लेकर नोटिस दिया गया था. नोटिस में निर्माण हटाने के लिए कहा गया था. निर्माण नहीं हटाए जाने के बाद अब प्राधिकरण ने बुलडोजर चलाया है.

    कचहरी से संदहा चौराहे तक होना है चौड़ीकरण
    यह कार्रवाई कचहरी चौराहे के आसपास सड़क चौड़ीकरण की योजना से भी जुड़ी है. कचहरी से संदहा चौराहे तक सड़क का चौड़ीकरण होना है. इसी के तहत रास्ते में आने वाले निर्माण को लेकर कार्रवाई की जा रही है.

    VDA की टीम मौके पर मौजूद है. बुलडोजर की मदद से निर्माण हटाया जा रहा है. कार्रवाई के दौरान किसी तरह की स्थिति न बिगड़े, इसके लिए पुलिस बल तैनात किया गया है.

    फिलहाल मौके पर VDA की कार्रवाई जारी है. प्राधिकरण की ओर से पहले जारी किए गए नोटिस और उसके बाद की कार्रवाई को लेकर टीम निर्माण से जुड़े दस्तावेज भी देख रही है. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद इलाके में हलचल बढ़ गई है.
     

  • बिहार में चौर विकास योजना के तहत मिलेंगे लाखों रुपये, मत्स्य पालन से आय बढ़ाने का मौका

    बिहार में चौर विकास योजना के तहत मिलेंगे लाखों रुपये, मत्स्य पालन से आय बढ़ाने का मौका

     पटना
     सरकार बेकार पड़ी चौर भूमि को उपयोगी बनाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने की पहल कर रही है। इसी क्रम में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।

    योजना के माध्यम से राज्य में बड़े पैमाने पर उपलब्ध निजी चौर भूमि को मत्स्य आधारित समेकित जलकृषि के लिए विकसित किया जाएगा। चौर संसाधनों में मछली पालन के साथ-साथ कृषि, बागवानी एवं कृषि वानिकी को बढ़ावा दिया जाएगा।

    इसका उद्देश्य चौर भूमि में उपलब्ध जल एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है।

    योजना के तहत एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो तालाबों के निर्माण के लिए प्रति हेक्टेयर 8.88 लाख रुपये, चार तालाबों के निर्माण के लिए 7.32 लाख रुपये तथा एक तालाब के निर्माण एवं भूमि विकास के लिए 9.69 लाख रुपये की इकाई लागत निर्धारित की गई है।

    50 प्रतिशत मिलेगा अनुदान
    सभी वर्ग के लाभुकों को इकाई लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। वहीं, उद्यमी आधारित चौर विकास के लिए 40 प्रतिशत अनुदान का प्रविधान किया गया है।

    व्यक्तिगत या समूह लाभुकों को स्व-अभिप्रमाणित दो पासपोर्ट आकार के फोटो, आधार कार्ड, जाति प्रमाण-पत्र तथा समूह में कार्य करने की सहमति से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

    वहीं, उद्यमी लाभुकों को स्व-अभिप्रमाणित निबंधन प्रमाण-पत्र, पिछले तीन वर्षों का अंकेक्षण एवं आयकर रिटर्न, पैन कार्ड, जीएसटी, भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र और लीज एकरारनामा प्रस्तुत करना होगा।

    कहां करे आवेदन?
    मत्स्य प्रशिक्षण प्राप्त लाभुकों तथा मत्स्य आधारित उद्यम का अनुभव रखने वाले आवेदकों को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी। योजना के लिए आवेदन मत्स्य निदेशालय की वेबसाइट fisheries.bihar.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

     

  • पर्यावरण संरक्षण का संदेश, सेवा एवं समर्पण अभियान में शाहपुरा में हुआ वृक्षारोपण

    पर्यावरण संरक्षण का संदेश, सेवा एवं समर्पण अभियान में शाहपुरा में हुआ वृक्षारोपण

    सेवा एवं समर्पण अभियान के तहत शाहपुरा में हुआ वृक्षारोपण                 
    भाजपा कार्यकर्ताओं ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प, प्रदेश से आए बाइकर्स ने भी लिया हिस्सा

    शाहपुरा
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे सेवा एवं समर्पण अभियान के अंतर्गत शाहपुरा में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, युवा कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने विभिन्न स्थानों पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
    कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि एक पौधा केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण की नींव है।
    इस अवसर पर “हर पौधा—भविष्य की हरियाली और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी” का संदेश देते हुए आमजन से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय सहभागिता की अपील की गई। साथ ही पौधारोपण के बाद उनकी देखभाल को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
    कार्यक्रम में प्रदेश से आए बाइकर्स के साथ भाजपा जिला अध्यक्ष चमरू सिंह नेताम, जिला उपाध्यक्ष ज्ञानदीप त्रिपाठी, जिला उपाध्यक्ष संतोष साहू, जनपद अध्यक्ष प्रियंका आर्मो, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष घनश्याम कछवाहा, चिकित्सा प्रकोष्ठ जिला संयोजक श्वेता जैन, भाजपा मंडल अध्यक्ष भजन चक्रवर्ती, मंडल अध्यक्ष हिरेंद्र मरावी, नगर परिषद अध्यक्ष शालिनी अग्रवाल, उपाध्यक्ष मुकेश साहू, सत्यम मानिकपुरी, हरिहरन रजक, नंद कुमार ठाकुर सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं नागरिक उपस्थित रहे।
    जिला मीडिया प्रभारी राज साहू ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि सेवा एवं समर्पण अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों को आगे भी जारी रखा जाएगा।

  • आत्मअनुशासन और समय प्रबंधन पर विद्यार्थियों से संवाद, जेपी यादव ने किया प्रेरित

    आत्मअनुशासन और समय प्रबंधन पर विद्यार्थियों से संवाद, जेपी यादव ने किया प्रेरित

    समय के सदुपयोग एवं आत्म अनुशासन से आसान होती है जीवन की राह

    संभागीय उपायुक्त जेपी यादव ने विद्यार्थियों से किया प्रेरणा संवाद

    शहडोल
     एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शहडोल में आयोजित प्रेरणा संवाद कार्यक्रम में जनजातीय कार्य विभाग के संभागीय उपायुक्त जेपी यादव ने विद्यार्थियों को समय के सदुपयोग, निरंतर प्रयास, कड़ी मेहनत, आत्म अनुशासन, एकाग्रता एवं सकारात्मक सोच का महत्व बताते हुए जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रेरित किया।

    यादव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसे कभी न कभी समस्याओं का सामना न करना पड़ा हो। समस्या आने पर उसके आकार को समझते हुए उससे कई गुना बड़े प्रयास के साथ समाधान के लिए तब तक प्रयास करते रहना चाहिए, जब तक समस्या का निराकरण न हो जाए। जो व्यक्ति समस्याओं के सामने डटे रहते हैं, वे सफल होते हैं, जबकि समस्या का आकार देखकर पीछे हटने वाले व्यक्ति अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि समय की चाल को कोई रोक नहीं पाया है, इसलिए समय की कद्र करना सीखना चाहिए। सही समय पर प्रयास नहीं करने से जीवन में कठिनाइयां बढ़ती हैं और बाद में पछताने से कोई लाभ नहीं होता। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कितनी भी बार असफलता मिले, हार नहीं माननी चाहिए। सफलता एक दिन में नहीं मिलती, लेकिन निरंतर प्रयास से एक दिन सफलता अवश्य प्राप्त होती है। उन्होंने “लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” कविता विद्यार्थियों के साथ गाकर उन्हें प्रेरित किया।

    संभागीय उपायुक्त ने विद्यार्थियों को समय प्रबंधन का महत्व बताते हुए कहा कि आज का काम कल पर टालने से कार्यों का बोझ बढ़ता जाता है। इसलिए प्रतिदिन का कार्य प्रतिदिन पूरा करने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में आत्म अनुशासन का बहुत महत्व है। आत्म अनुशासन के बिना जीवन बिना मांझी की पतवार के समान है। विद्यार्थियों को दूसरों से तुलना करने के बजाय स्वयं से प्रतियोगिता कर निरंतर अपने को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।

    यादव ने कहा कि माता-पिता लगभग सभी के अच्छे होते हैं, लेकिन बच्चों का अच्छा बनना भी उतना ही आवश्यक है। माता-पिता के त्याग का प्रतिफल बच्चों की सफलता पर निर्भर करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने माता-पिता को खुश होने का अवसर देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि सभी को नौकरी मिले, लेकिन सकारात्मक प्रयास और मेहनत जारी रखने पर जीवन में कोई न कोई कार्य अवश्य मिलेगा। जीवन में निराश होने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि हौसला बनाए रखने की जरूरत है।

    उन्होंने प्रेरणा संवाद के दौरान उपस्थित शिक्षकों से कहा कि वे बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार रखें। कमजोर विद्यार्थियों के प्रति सद्भाव रखते हुए उनका हौसला बढ़ाएं और उन्हें निरंतर प्रेरित करते रहें। उन्होंने कहा कि कभी-कभी बहुत पीछे रहने वाला बच्चा भी जीवन में बहुत बड़ी मंजिल हासिल कर लेता है।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। प्रेरणा संवाद से उत्साहित विद्यार्थियों ने इसे हौसला बढ़ाने वाला कार्यक्रम बताते हुए कहा कि वे आगे बढ़कर अपने जीवन को सफल बनाने का निरंतर प्रयास करेंगे।

  • अक्टूबर में आएगा स्वच्छ सर्वेक्षण का रिजल्ट, MP के 15 शहरों पर सबकी नजर

    अक्टूबर में आएगा स्वच्छ सर्वेक्षण का रिजल्ट, MP के 15 शहरों पर सबकी नजर

     भोपाल 
    स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के परिणामों का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। पिछले वर्ष इन पुरस्कारों की घोषणा जुलाई में हो गई थी लेकिन इस बार अक्टूबर माह में होगी। मध्यप्रदेश के लगभग 15 शहर स्वच्छता सर्वे की रैंकिंग की दौड़ में शामिल हैं। कचरा प्रबंधन की नियमानुसार व्यवस्था नहीं कर पाने से प्रदेश के कई शहरों की रैंकिंग बिगड़ सकती है। वहीं नागरिकों का फीडबैक भी निर्णायक रहेगा। दरअसल प्रदेश में प्रतिदिन निकलने वाला घरेलू कचरे की मात्रा बढ़ती जा रही है लेकिन प्रोसेसिंग की व्यवस्था नहीं है।

    मैदानी निरीक्षण पर तय किए जाएंगे नंबर
    प्रदेश में एक साल में प्रतिदिन निकलने वाले घरेलू कचरे की मात्रा में 1730 टन बढ़ चुकी है। इसके साथ इस कचरे की प्रोसेसिंग में भी गैप बढ़ा है। एक साल पहले 18.05 टीपीडी कचरे की प्रोसेसिंग नहीं हो पा रही थी जो अब बढ़कर 55.39 टन प्रतिदिन हो गई है। अभी भी 34 डंपिंग साइट्स पर लगभग 13 लाख मीट्रिक टन लीगेसी वेस्ट जमा है, जो शहरों की सूरत पर धब्बा बना हुआ है। स्वच्छ अवार्ड की रैंकिंग 12500 नंबरों पर होगी। इसमें से 1-1 हजार नंबर ओडीएफ और वाटर प्लस के साथ ही गार्बेज फ्री सिटी के लिए होंगे। बचे 10500 नंबर टीम के मैदानी निरीक्षण पर तय किए जाएंगे। राजधानी भोपाल के साथ ही इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, सतना जैसे बड़े शहरों में भी कचरे के ऐसे पहाड़ दिखाई देते हैं। 

    धार्मिक स्थलों के साथ स्कूलों में भी सर्वे
    स्वच्छ सर्वे की टीमों ने फरवरी-मार्च में प्रदेश के नगरीय निकायों में जाकर सर्वेक्षण का काम पूरा किया। इस बार टूरिस्ट, हेरिटेज, धार्मिक स्थलों के साथ अन्य ऐसे स्थानों की स्वच्छता का भी निरीक्षण किया गया जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसके साथ स्कूली बच्चों के व्यवहार में स्वच्छता शामिल हुई या नहीं, इसका भी स्कूलों में जाकर जायजा लिया गया। नई टूलकिट में खुले में शौच और यूरिनेशन रोकने का एक नया इंडिकेटर शामिल थे। टीमों ने निकायों में खुले में यूरिनेशन रोकने के लिए जरूरत के अनुसार व्यवस्था भी देखी।

    स्वच्छ शहर जोड़ी में मिल सकता है लाभ
    इस बार स्वच्छ शहर जोड़ी नाम से से एक नई अवार्ड कैटेगरी शुरू की गई है। इससे स्वच्छ शहर अपने समीपस्थ शहर को स्वच्छता सिखाकर जोड़ी में अवॉर्ड ले सकेंगे। प्रदेश के स्वच्छता में अव्वल शहरों को इसका लाभ मिल सकता है। क्योंकि पिछले वर्ष प्रदेश के आठ शहरों को अवॉर्ड मिला था। इनमें इंदौ, उज्जैन, बुदनी, भोपाल, देवास, शाहगंज, जबलपुर और ग्वालियर शामिल थे। इन शहरों के आसपास वाले नगरों के साथ जोड़ी में पुरस्कार आ सकता है।

    स्वच्छता मानक के नंबर निर्धारित

    1500- दिखाई देने वाली स्वच्छता
    1000- कचरे का सेग्रीगेशन, संग्रहण और परिवहन
    1500- सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग
    1000- एक्सेस टू सेनिटेशन
    1000- उपयोग किए गए पानी का प्रबंधन
    500- डीस्लजिंग सर्विसेज का मशीनीकरण
    1500- स्वच्छता की एडवोकेसी
    1000- इकोसिस्टम सशक्तिकरण
    500- स्वच्छता कर्मियों का कल्याण
    1000- सिटीजन फीडबैक और शिकायत निवारण
    10500- कुल नंबर