Author: NewseDay

  • जयपुर में अस्थाई पटाखा बिक्री की अनुमति शुरू, जानें आवेदन की तारीख और जरूरी दस्तावेज

    जयपुर में अस्थाई पटाखा बिक्री की अनुमति शुरू, जानें आवेदन की तारीख और जरूरी दस्तावेज

    जयपुर
     दीपावली पर आतिशबाजी की अस्थाई दुकान लगाने की तैयारी कर रहे कारोबारियों के लिए जरूरी खबर है। जिला प्रशासन ने पटाखों की अस्थाई बिक्री के लिए अनुज्ञापत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लाइसेंस लेने के इच्छुक लोगों को 25 सितंबर 2026 तक आवेदन करना होगा। तय तारीख के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर प्रशासन की ओर से कोई विचार नहीं किया जाएगा। ऐसे में पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों के लिए आवेदन की समय सीमा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

    जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट संदेश नायक के अनुसार, दीपावली के अवसर पर विस्फोटक नियम, 2008 के तहत आतिशबाजी की अस्थाई बिक्री के लिए अनुज्ञापत्र जारी किए जाएंगे। अस्थाई अनुज्ञापत्र की अवधि 12 अक्टूबर से 11 नवंबर 2026 तक रहेगी। इस अवधि के दौरान निर्धारित नियमों और स्वीकृत स्थानों पर ही आतिशबाजी की बिक्री की जा सकेगी।

    संबंधित एसडीएम कार्यालय में करना होगा आवेदन
    अस्थाई पटाखा बिक्री का लाइसेंस लेने के लिए आवेदकों को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होगा। आवेदन संबंधित थाना क्षेत्र के उपखण्ड मजिस्ट्रेट कार्यालय में जमा कराया जाएगा। प्रशासन ने आवेदन के साथ प्रस्तावित बिक्री स्थल से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करना भी अनिवार्य किया है।

    आवेदक को प्रस्तावित आतिशबाजी बिक्री स्थल का ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र पांच प्रतियों में देना होगा। इस मानचित्र में आसपास मौजूद व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्पष्ट रूप से दर्शाना जरूरी होगा। इसके अलावा शपथ पत्र, स्थल के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज अथवा किरायानामा की प्रमाणित फोटो कॉपी और आवेदक की दो पासपोर्ट साइज फोटो भी आवेदन के साथ जमा करनी होंगी।

    इन थाना क्षेत्रों के लिए शुरू हुई प्रक्रिया
    अस्थाई आतिशबाजी अनुज्ञापत्र के लिए जयपुर जिले के कई थाना क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें शाहपुरा, मनोहरपुर, अमरसर, जमवारामगढ़, आंधी, चन्दवाजी, रायसर, नरैना, मांजी रेनवाल, माधोराजपुरा, सांभर, फुलेरा, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, गोविन्दगढ़, सामोद, कालाडेरा, दूदू, मौजमाबाद और फागी शामिल हैं।

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित कार्यालय में पहुंचना जरूरी है। अंतिम तारीख के बाद प्राप्त होने वाले आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और न ही उन पर विचार किया जाएगा।

    कारोबारियों के पास अब सीमित समय
    दीपावली से पहले पटाखों की अस्थाई दुकान लगाने के इच्छुक कारोबारियों को अब आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए सीमित समय मिला है। उन्हें जरूरी दस्तावेज तैयार कर 25 सितंबर तक संबंधित एसडीएम कार्यालय में आवेदन जमा करना होगा। आवेदन की अंतिम तारीख निकलने के बाद लाइसेंस के लिए नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा

    एक नजर में
    आवेदन की अंतिम तारीख: 25 सितंबर 2026

    अस्थाई अनुज्ञापत्र की अवधि: 12 अक्टूबर से 11 नवंबर 2026

    आवेदन कहां करें: संबंधित थाना क्षेत्र के उपखण्ड मजिस्ट्रेट कार्यालय

    जरूरी दस्तावेज: ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र की 5 प्रतियां, शपथ पत्र, स्वामित्व दस्तावेज या किरायानामा, 2 पासपोर्ट साइज फोटो

    लाइसेंस की प्रक्रिया: विस्फोटक नियम, 2008 के तहत

    महत्वपूर्ण: 25 सितंबर के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

  • आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण पर जोर, ‘मेरी पौष्टिक थाली’ के साथ होगा ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम

    आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण पर जोर, ‘मेरी पौष्टिक थाली’ के साथ होगा ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम

    रायपुर.

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों में 25 सितंबर से 6 अक्टूबर तक ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के समन्वय से आयोजित इस पहल का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़ी माताओं, बच्चों, महिलाओं और समुदाय को पोषण, स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण योजनाओं की जानकारी से जोड़ना तथा जनभागीदारी को मजबूत करना है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक एक दिवसीय आयोजन होगा। इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम में हितग्राही माताओं, स्वसहायता समूह की महिलाओं, बच्चों के अभिभावकों, मितानिनों तथा समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मितानिनों के योगदान को सम्मानित भी किया जाएगा।

    आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में समुदाय के समक्ष ‘मेरी पौष्टिक थाली’ का प्रदर्शन कर संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व की जानकारी दी जाएगी। महिलाओं और बच्चों के लिए पौष्टिक व्यंजनों की विधि का प्रदर्शन, स्वास्थ्य एवं पोषण आधारित चित्रकला तथा स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, माताओं एवं सुपोषित बच्चों का सम्मान और बच्चों के लिए खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। आंगनबाड़ी केंद्रों में सामुदायिक सहभागिता से ‘न्योता भोज’ भी कराया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान पोषण वाटिका के लिए पौधरोपण करते हुए ‘घर-घर मुनगा, हर घर मुनगा’ के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। समुदाय से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए खिलौने एवं खेल सामग्री उपलब्ध कराने की अपील भी की जाएगी।
    जिलेवार तिथियों में होंगे आयोजन-

    • 25 सितंबर को रायपुर शहरी क्षेत्र, बस्तर, सरगुजा और बिलासपुर
    • 26 सितंबर को रायपुर ग्रामीण, कोरबा, कवर्धा और सूरजपुर
    • 28 सितंबर को महासमुंद, दंतेवाड़ा, राजनांदगांव और गरियाबंद
    • 29 सितंबर को धमतरी, दुर्ग, बलौदाबाजार और मुंगेली
    • 30 सितंबर को भिलाई क्षेत्र, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, बीजापुर और जांजगीर
    • 1 अक्टूबर को बेमेतरा, कांकेर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और सुकमा
    • 2 अक्टूबर को जशपुर, कोंडागांव और मानपुर-मोहला
    • 3 अक्टूबर को बालोद, नारायणपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
    • 5 अक्टूबर को सक्ती, रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़
    • 6 अक्टूबर को बलरामपुर, बिलासपुर ग्रामीण और कोरिया जिले में कार्यक्रम आयोजित होंगे।
  • 12 घंटे की पैरोल में शादी, 3 बच्चों संग कंबोडिया से पहुंची मैनपाल की दुल्हन

    12 घंटे की पैरोल में शादी, 3 बच्चों संग कंबोडिया से पहुंची मैनपाल की दुल्हन

    झज्जर.

    करीब आठ साल पहले पैरोल के दौरान जेल से फरार होकर कंबोडिया पहुंचने और वहां से प्रत्यर्पित किए गए आजीवन कारावास के दोषी मैनपाल ढिल्ला बुधवार, 24 सितंबर को अपनी कंबोडियाई पत्नी मेटा चान के साथ हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह बंधन में बंधेंगे।

    हत्या सहित कई गंभीर आपराधिक मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे मैनपाल को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश जसजीत सिंह बेदी की अदालत से 12 घंटे की कस्टडी पैरोल मिली है।

    कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह आठ से रात आठ बजे तक रहेंगे बाहर
    जेल अधीक्षक सेवा सिंह के अनुसार मैनपाल को सामान्य पैरोल की तरह स्वतंत्र रूप से नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि वह पूरे समय पुलिस और जेल कर्मियों की कड़ी कस्टडी व सुरक्षा घेरे में रहेगा। तयशुदा कार्यक्रम के तहत उसे सुबह आठ बजे जेल से बाहर लाया जाएगा और रात आठ बजे तक वापस जेल पहुंचाना होगा।

  • बिहार की बौद्ध धरोहर से थाईलैंड को जोड़ने की तैयारी, नए ट्रैवल पैकेज और कनेक्टिविटी पर जोर

    बिहार की बौद्ध धरोहर से थाईलैंड को जोड़ने की तैयारी, नए ट्रैवल पैकेज और कनेक्टिविटी पर जोर

    पटना
     बिहार की समृद्ध बौद्ध विरासत अब थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के पर्यटकों तक नए अंदाज में पहुंचाने की तैयारी है। बिहार पर्यटन विभाग के तत्वावधान में ‘फैम टूर ऑफ लोटस ट्रायंगल-ट्रैवल टू लैंड ऑफ एनलाइटनमेंट’ के तहत थाईलैंड से आए 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली का भ्रमण किया।

    बिहार यात्रा के अंतिम चरण में पटना पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल ने बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय पर्यटन हित धारकों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।

    बिहार बौद्ध पर्यटकों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार
    पर्यटन निदेशालय के संयुक्त निदेशक राजेश रौशन ने कहा कि बिहार बौद्ध पर्यटकों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार है। बिहार सरकार सीमा-पार पर्यटन को बढ़ावा देना, बेहतरीन ट्रैवल पैकेज बनाना, सीधी कनेक्टिविटी बेहतर करना और बिहार को थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन के तौर पर स्थापित करने की दिशा में कार्यरत है।

    थाई प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त रूप से कहा कि बिहार पर्यटन द्वारा किया गया यह प्रयास भारत और विशेषकर बिहार की वैश्विक पर्यटन पहुंच को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। थाईलैंड-बिहार टूरिज्म के इस पहल का हिस्सा बनना खुशी की बात है।

    बैठक में कारोबार और पर्यटन पर चर्चा
    बैठक में बिहार के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न संगठनों ने थाई प्रतिनिधिमंडल ने अन्य व्यवसायी संस्था से वार्ता की। इस दौरान पर्यटन उत्पादों, ट्रैवल पैकेज, व्यावसायिक अवसर और डेस्टिनेशन प्रमोशन को लेकर दोनों पक्षों ने विचार साझा किए।

    हित धारकों ने कहा कि इस पहल से बिहार-थाईलैंड के बीच पर्यटन सहयोग, कारोबारी साझेदारी और प्रचार-प्रसार के नए रास्ते खुलेंगे। थाई प्रतिनिधिमंडल ने बिहार पर्यटन की पहल को भारत और विशेषकर बिहार की वैश्विक पर्यटन पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। यात्रा पूरी करने के बाद 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बिहार से रवाना हो गया।

  • छत्तीसगढ़ में राजस्व मामलों के निपटारे में तेजी, प्रशासनिक पहल से मिली बड़ी राहत

    छत्तीसगढ़ में राजस्व मामलों के निपटारे में तेजी, प्रशासनिक पहल से मिली बड़ी राहत

    छत्तीसगढ़ में गति पकड़ता राजस्व न्याय

    रिकॉर्ड 81.35 प्रतिशत प्रकरणों के निपटारे से राजस्व अदालतों में आई अभूतपूर्व तेज़ी

    ​प्रशासनिक इच्छाशक्ति से आम जन को सीधी राहत
                      

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाने की दिशा में राजस्व न्यायालयों के प्रदर्शन में एक नया अध्याय जुड़ गया है। दूरस्थ अंचलों से लेकर बड़े शहरों तक भूमि, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और स्वामित्व जैसे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मामलों को समयबद्ध सीमा में सुलझाने के लिए प्रशासनिक प्राथमिकताओं में अभूतपूर्व बदलाव आया है। राज्यभर के राजस्व न्यायालयों में दर्ज कुल 4,67,415 प्रकरणों में से रिकॉर्ड 3,80,224 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण कर लिया गया है। इस प्रकार संपूर्ण राज्य में मामलों के निराकरण की दर 81.35 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जबकि शेष 87,191 प्रकरणों के निपटारे के लिए भी लक्षित एवं सुव्यवस्थित प्रयास जारी हैं।

    ​कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति, समय और धन की बचत

            राजस्व मामलों का शीघ्र निपटारा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव ज़मीन और आजीविका से जुड़े नागरिकों के रोज़मर्रा के जीवन पर पड़ता है। कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने से मुक्ति मिलने के साथ-साथ आम जन के समय और संसाधनों की बचत हो रही है, जिससे राज्य में पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित व्यवस्था सुदृढ़ हुई है।

    ​दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों का शानदार प्रदर्शन

            राजस्व न्याय की इस तीव्र गति में सबसे प्रेरणादायक तस्वीर राज्य के दूरस्थ एवं आदिवासी बहुल जिलों से सामने आई है, जहाँ प्रशासनिक पहुंच और त्वरित निर्णय क्षमता मिसाल बनी है। सुकमा जिला 92.70 प्रतिशत निराकरण दर के साथ पूरे प्रदेश में शीर्ष पर है, जहाँ 7,224 मामलों में से 6,697 का निपटारा किया गया है। इसी तरह नारायणपुर में 92.28 प्रतिशत (5,780 में से 5,334 प्रकरण), दंतेवाड़ा में 91.50 प्रतिशत (5,614 में से 5,137 प्रकरण) और बीजापुर में 89.67 प्रतिशत की उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

    ​बड़े ज़िलों में भी तेज़ी से सुलझ रहे ज़मीन-जायदाद के मामले

            भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद दूरदराज के क्षेत्रों में मिली यह सफलता प्रशासनिक तंत्र की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वहीं, राज्य के अधिक केस भार वाले बड़े जिलों में भी प्रकरणों के निपटारे का सिलसिला पूरी तेज़ी से चल रहा है। बस्तर में 17,600 में से 15,745 प्रकरण, बलौदाबाजार-भाटापारा में 20,905 में से 18,494 प्रकरण, राजधानी रायपुर में 34,226 में से 29,824 प्रकरण, बिलासपुर में 29,495 में से 24,539 प्रकरण, जांजगीर-चांपा में 19,132 में से 16,109 प्रकरण तथा कोरबा में 19,705 में से 15,747 मामलों को हल कर नागरिकों को राहत दी गई है।

    ​'ई-धरती' और आधुनिक सर्वेक्षण से संवरते भू-अभिलेख

           राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण के साथ-साथ राज्य सरकार 'ई-धरती' योजना और आधुनिक भू-सर्वेक्षण तकनीकों के ज़रिए भू-अभिलेखों के सुदृढ़ीकरण पर भी व्यापक काम कर रही है। राज्य में 431 वन ग्राम से परिवर्तित राजस्व ग्राम और 596 असर्वेक्षित या मसाहती ग्रामों को मिलाकर कुल 1,027 ग्रामों का सर्वे हेतु चिन्हांकन किया गया है। इनमें से 284 ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य पूरा करके डाटा 'भुइयाँ पोर्टल' पर अपलोड भी कर दिया गया है, जबकि 196 ग्रामों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया चल रही है।

    ​अबूझमाड़ में ऐतिहासिक पहल और डिजिटल नक्शों का निर्माण

          अति-संवेदनशील अबूझमाड़ क्षेत्र और नारायणपुर जिले में भी ग्राम सर्वेक्षण की शुरुआत एक ऐतिहासिक पहल है, जहाँ 6 ग्रामों का अंतिम प्रकाशन पूर्ण कर अभिलेखों एवं नक्शों को 'भुइयां' और 'भू-नक्शा' सॉफ्टवेयर पर अपलोड कर दिया गया है तथा 59 अन्य ग्रामों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया गतिमान है। इसके अतिरिक्त, ई-धरती योजना के तहत बंदोबस्त त्रुटियों को सुधारने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कोंडागांव जिले को 1.10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है। नगरीय निकायों के कैडेस्ट्रल नक्शों को 1:500 के सूक्ष्म पैमाने पर बदलने की दिशा में भी काम तेज़ी से जारी है, जिसके तहत 22 जिलों के 396 गांवों को नए पैमाने के नक्शे प्रदान कर दिए गए हैं, जबकि नजूल व परिवर्तित अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का कार्य भी अंतिम चरणों में है। वर्ष 2025-26 के लिए पात्र हितग्राहियों के सत्यापन एवं e-KYC की प्रक्रिया को भी प्रगति पर रखा गया है।

    ​वर्षों पुराने लंबित मामलों के लिए वैज्ञानिक रणनीति

          न्यायालयीन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए लंबित 87,191 प्रकरणों का समयावधि के अनुसार वैज्ञानिक वर्गीकरण किया गया है।      
            वर्तमान में 0 से 6 माह की अवधि के 51,401 मामले लंबित हैं, जबकि 6 माह से 1 वर्ष के 13,218 मामले, 1 से 3 वर्ष के 15,918 मामले, 3 से 5 वर्ष के 3,903 मामले और 5 वर्ष से अधिक अवधि के 2,751 प्रकरण लंबित सूची में हैं। इस वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य वर्षों पुराने प्रकरणों को चिन्हित कर उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ हल करना है, ताकि लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों का स्थायी अंत हो सके।

    राज्यभर में 80% से अधिक सफलता दर और प्रभावी समीक्षा

            प्रदेश के अन्य जिलों में भी 80 प्रतिशत या उससे अधिक निराकरण दर दर्ज की गई है, जिनमें राजनांदगांव 83.45 प्रतिशत, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई 83.42,कोरिया 81.87,सारंगढ़-बिलाईगढ़ 81.84,धमतरी 81.65 , बेमेतरा 81, जशपुर 80.67, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी 80.38, कबीरधाम 80.23 और कांकेर 80.21 प्रतिशत शामिल हैं। इसके अलावा सरगुजा, महासमुंद, रायगढ़, सूरजपुर, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और बलरामपुर-रामानुजगंज जैसे जिलों में भी निरंतर समीक्षा बैठकों, डिजिटल ट्रैकिंग और समयबद्ध सुनवाई के माध्यम से मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को गति दी जा रही है।

    ​पारदर्शी और त्वरित सुशासन की ओर बढ़ते कदम

           डिजिटल गवर्नेंस, आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों और नियमित मॉनिटरिंग के इस सशक्त संगम से छत्तीसगढ़ का राजस्व प्रशासन आज अधिक त्वरित, पारदर्शी और पूरी तरह जन-कल्याणकारी स्वरूप धारण कर चुका है।

    विष्णु प्रसाद वर्मा
     सहायक संचालक

  • जालंधर में नया नियम लागू, छेड़छाड़ वाली नंबर प्लेट पर पेट्रोल-डीजल बंद

    जालंधर में नया नियम लागू, छेड़छाड़ वाली नंबर प्लेट पर पेट्रोल-डीजल बंद

    जालंधर.

    वाहन पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) नहीं है या नंबर प्लेट के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है तो अब जालंधर में ऐसे वाहन को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं मिलेगा।

    कमिश्नरेट पुलिस ने बिना नंबर प्लेट, जरूरी एचएसआरपी के बिना चल रहे वाहनों के साथ-साथ टूटी, मुड़ी, क्षतिग्रस्त, बदली या जानबूझकर संशोधित नंबर प्लेट वाले वाहनों को ईंधन देने पर रोक लगा दी है। पुलिस का यह आदेश 21 सितंबर 2026 से लागू हो चुका है और 20 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। पुलिस कमिश्नर सतिंदर सिंह ने धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। इस व्यवस्था की निगरानी डीसीपी जसरूप कौर बाठ करेंगी। पुलिस का कहना है कि नंबर प्लेट वाहन की पहचान का प्रमुख माध्यम है। इसे छिपाकर या बदलकर वाहन चलाने से यातायात नियमों के उल्लंघन के साथ अपराध की जांच में भी परेशानी होती है। ऐसे में ईंधन बिक्री को वैध नंबर प्लेट से जोड़ने का उद्देश्य वाहन की पहचान सुनिश्चित करना है।

    नंबर प्लेट नहीं तो पंप पर ही रुक जाएगी गाड़ी
    नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंप, डीजल डिस्पेंसिंग स्टेशन और सीएनजी स्टेशन पर वाहन में ईंधन भरने से पहले नंबर प्लेट की स्थिति देखी जाएगी। यदि वाहन पर नंबर प्लेट नहीं है या जिस वाहन पर एचएसआरपी लगना जरूरी है, उस पर एचएसआरपी नहीं लगी है तो उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा। इसी तरह प्लेट टूटी हुई, मुड़ी हुई, क्षतिग्रस्त या ऐसी स्थिति में है जिससे वाहन का पंजीकरण नंबर स्पष्ट नहीं हो रहा, तो भी ईंधन देने पर रोक रहेगी। यदि नंबर प्लेट में बदलाव या छेड़छाड़ के संकेत मिलते हैं तो पंप संचालक को पुलिस को इसकी सूचना देनी होगी।

    छेड़छाड़ वाली प्लेट पर खास नजर
    पुलिस के आदेश में नंबर प्लेट से छेड़छाड़ को विशेष रूप से शामिल किया गया है। कई बार वाहन की पहचान छिपाने के लिए नंबर प्लेट को मोड़ दिया जाता है, उस पर कोई सामग्री लगा दी जाती है या प्लेट को इस तरह बदला जाता है कि नंबर स्पष्ट दिखाई न दे। ऐसे वाहनों को भी ईंधन नहीं मिलेगा। पंप कर्मचारी संदिग्ध वाहन के मेक, माडल, रंग और आने-जाने की दिशा जैसी जानकारी संभव होने पर नोट कर सकते हैं। पुलिस को सूचना मिलने पर सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से वाहन की गतिविधि की जांच की जा सकेगी।

    पेट्रोल पंपों पर सीसीटीवी अनिवार्य
    आदेश के तहत सभी ईंधन स्टेशनों के सीसीटीवी कैमरे चालू रखना जरूरी होगा। प्रवेश और निकास स्थान, ईंधन भरने का क्षेत्र, आने-जाने वाले वाहनों, भुगतान क्षेत्र और जहां संभव हो वहां वाहन की नंबर प्लेट की रिकार्डिंग होनी चाहिए। कानूनी और तकनीकी रूप से संभव होने पर पंप के सामने और उससे जुड़ी सड़क की भी निगरानी करनी होगी। सीसीटीवी फुटेज को कम से कम दो महीने तक सुरक्षित रखना होगा। इससे पुलिस को घटना के बाद संदिग्ध वाहन की तलाश करने में मदद मिल सकती है।

    वारदात के बाद भागने वाले वाहन की पहचान में मदद
    पुलिस की इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू अपराध की जांच से जुड़ा है। यदि किसी वारदात में इस्तेमाल वाहन पर नंबर प्लेट नहीं है या उसके साथ छेड़छाड़ की गई है, तो उसके पेट्रोल पंप तक पहुंचने पर पुलिस को सूचना मिल सकती है। पंप की सीसीटीवी फुटेज से वाहन का रंग, माडल और आवाजाही का समय सामने आ सकता है। जांच के दौरान पुलिस इन फुटेज को शहर के अन्य सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिंग से जोड़कर वाहन के संभावित रूट का पता लगा सकती है। इस तरह पेट्रोल पंप की फुटेज किसी आपराधिक मामले में एक अतिरिक्त जांच कड़ी बन सकती है।

    नए और आपातकालीन वाहनों को छूट
    इस आदेश में कुछ वाहनों को छूट दी गई है। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, फायर सर्विस और आपातकालीन सेवा वाले वाहनों पर यह रोक लागू नहीं होगी। नए खरीदे गए ऐसे वाहन, जिनके लिए सक्षम प्राधिकारी की ओर से वैध पंजीकरण नंबर जारी किया गया है, उन्हें भी ईंधन दिया जा सकेगा। वैध अस्थायी पंजीकरण नंबर वाले वाहनों को भी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण प्रस्तुत करने पर ईंधन दिया जाएगा।

    पंप संचालकों की जिम्मेदारी बढ़ी
    पेट्रोल पंप संचालकों को पंजाबी और अंग्रेजी में प्रमुख स्थान पर नोटिस लगाकर ग्राहकों को इस नियम की जानकारी देनी होगी। संदिग्ध नंबर प्लेट वाला वाहन मिलने पर नजदीकी पुलिस स्टेशन या पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देनी होगी। पुलिस के आदेश का पालन नहीं करने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    फायदा क्या होगा?
    इस व्यवस्था से वाहन मालिकों पर वैध नंबर प्लेट लगाने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही बिना नंबर या छेड़छाड़ वाली प्लेट वाले वाहनों की पहचान आसान हो सकती है। अपराध की जांच में पेट्रोल पंपों की सीसीटीवी फुटेज पुलिस को अतिरिक्त सुराग दे सकती है। ध्यान रखने वाली बात: वाहन मालिक पेट्रोल पंप पर परेशानी से बचने के लिए अपने वाहन की नंबर प्लेट सही स्थिति में रखें और जहां लागू हो वहां एचएसआरपी लगवाएं। पंप संचालकों के लिए कैमरों की गुणवत्ता और दो महीने तक फुटेज सुरक्षित रखना भी अहम जिम्मेदारी होगी।

  • मुख्यमंत्री ने कहा- भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण था विश्वगुरु, तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय इसके प्रमाण

    मुख्यमंत्री ने कहा- भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण था विश्वगुरु, तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय इसके प्रमाण

    विदेशी आक्रांताओं ने भारत का वैभव ही नहीं लूटा, ज्ञान परंपरा को भी नष्ट करने का किया प्रयास: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
     
    ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर सप्त दिवसीय समारोह के व्याख्यान-सत्र का शुभारंभ
     
    मुख्यमंत्री बोले- अंग्रेजों ने भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का किया काम
     
    मुख्यमंत्री ने कहा- भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण था विश्वगुरु, तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय इसके प्रमाण
     
    मुख्यमंत्री बोले- सत्य को प्रमाण के साथ रखना होगा, विरोधी असत्य बताएंगे और दुष्प्रचार करने वाले पैदा करेंगे संशय
     
    मुख्यमंत्री ने कहा- भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का किया आह्वान
     
    गोरखपुर

     मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं का उद्देश्य केवल भारत का वैभव लूटना नहीं था, बल्कि उसकी ज्ञान परंपरा और बुद्धि को नष्ट करना भी था। मंदिरों पर हमले इसी सोच का हिस्सा थे। ब्रिटिश काल में तरीका बदला और भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का प्रयास किया गया। अब अपनी ज्ञान परंपरा को पहचानने, उसे प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखने और आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का समय है।
     
    मुख्यमंत्री गुरुवार को गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह के व्याख्यान-सत्र को संबोधित कर रहे थे।
     
    मंदिरों पर हमले के पीछे सनातन परंपरा पर प्रहार की सोच

    मुख्यमंत्री ने रामायण काल में दंडकारण्य में ऋषियों के आश्रमों पर हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि राक्षसी और दानवी शक्तियां हों या विदेशी आक्रांता, भारत पर हमले का उद्देश्य वैभव लूटने के साथ उसकी ज्ञान धरोहर को नष्ट करना भी रहा। उन्होंने सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के आक्रमण का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिर को तोड़ने का उद्देश्य केवल लूटपाट नहीं, बल्कि सनातन परंपरा को नष्ट करना भी था।
     
    अंग्रेजों ने भ्रम पैदा कर जड़ों से काटा
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ब्रिटिश काल में तरीका बदल गया। भारतीयों को अपनी भाषा, चिकित्सा पद्धति और ज्ञान परंपरा को लेकर भ्रमित किया गया। संस्कृत के स्थान पर अंग्रेजी और परंपरागत चिकित्सा पद्धति के स्थान पर आधुनिक चिकित्सा को महत्व दिया गया। परिणाम यह हुआ कि हम धीरे-धीरे अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से कटते गए।
     
    ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु था भारत

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु कहलाता था। आज के कई विकसित देशों का इतिहास 400 से 500 वर्षों का है, जबकि भारत में 2600 वर्ष पहले तक्षशिला और करीब 1700 से 1800 वर्ष पहले नालंदा जैसे विश्वविद्यालय थे। काशी, उज्जैन, कांची और नवद्वीप भी ज्ञान के प्रमुख केंद्र रहे।
     
    उन्होंने कहा कि कुंभ केवल स्नान का आयोजन नहीं था। प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक-त्र्यंबकेश्वर में संत और विद्वान अपने शोध और नवाचार पर चर्चा करते थे। भारतीय समाज ने अपने पर्व, त्योहार और मांगलिक कार्यों को आज भी भारतीय पंचांग से जोड़ रखा है।
     
    एक लाख से अधिक पांडुलिपियों का हो रहा संरक्षण
    मुख्यमंत्री ने बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय काशी में एक लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपियां एकत्र की गई हैं और उनके संरक्षण तथा डिजिटाइजेशन का कार्य चल रहा है। परिवारों, विद्वानों के घरों, प्राचीन मठों और मंदिरों में भी ऐसी ज्ञान धरोहर मौजूद है। अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन और लखनऊ समेत विभिन्न स्थानों पर पांडुलिपियां, ताम्रपत्र और शिलालेख मिले हैं।
     
    सत्य के साथ प्रमाण भी रखना होगा
    योगी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में तीन पक्ष सामने होंगे। पहला सत्य का है, इसलिए जो भी कहें, प्रमाणित करके कहें। दूसरा विरोधियों का है, जो उसे असत्य ठहराने का प्रयास करेंगे और तीसरा दुष्प्रचार करने वालों का है, जो संशय पैदा करेंगे। तकनीक ऐसे संशय को दूर करने में बड़ी मदद कर सकती है। इसे समयानुकूल बनाकर ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना होगा।
     
    पाणिनि से चाणक्य तक की विरासत को जानें
    मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा, व्याकरण, अर्थशास्त्र, विज्ञान, खगोल, ज्योतिष, आयुर्वेद, शिल्प और तकनीक समेत हर क्षेत्र में भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा रही है। नई पीढ़ी को पाणिनि, पतंजलि, आयुर्वेद के आचार्यों और चाणक्य के अर्थशास्त्र जैसी विरासत से परिचित कराना होगा। करीब तीन हजार वर्ष पहले नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषि श्रवण परंपरा से प्राप्त ज्ञान को लिपिबद्ध करने के लिए एकत्र हुए थे।
     
    जड़ों से कटकर विकास संभव नहीं: विश्वकर्मा
    उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना में भारतीय ज्ञान परंपरा के सूत्र मौजूद हैं। अपनी जमीन और मूल से कटकर विकास संभव नहीं है। भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़कर ही भारत विश्वगुरु के पथ पर आगे बढ़ सकता है।
     
    नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ें: रामनाथन
    आईआईटी बीएचयू के प्रो. वी. रामनाथन ने कहा कि भारतीय सभ्यता ने ज्ञान को हमेशा प्राथमिकता दी है। नई पीढ़ी को आधुनिक माध्यमों से अपनी विरासत की जानकारी देनी होगी। अपनी धरोहर को भूलना समाज में अलगाव का कारण बनता है।
     
    संस्कारयुक्त शिक्षा लोककल्याण का माध्यम: श्रीधराचार्य
    जगद्गुरु स्वामी श्रीधराचार्य ने कहा कि संस्कार के अभाव वाली शिक्षा अमंगलकारी है। भारतीयता से जुड़ी शिक्षा लोककल्याण का माध्यम बनती है। ज्ञान वही है, जो मनुष्य को आत्मबोध की ओर ले जाए।
     
    योग केवल आसन नहीं: विश्वेश प्रपन्नाचार्य
    जगद्गुरु विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने यम, नियम, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, आसन, ध्यान और समाधि का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय योग परंपरा व्यापक है। इसे केवल आसन तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
     
    कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
    व्याख्यान-सत्र की शुरुआत संतों ने ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की। कार्यक्रम में जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा, महंत नारायण गिरि, महंत राजू दास, महंत शेरनाथ, स्वामी नरसिंह दास, महंत राम बालक दास व अन्य संतजन के साथ महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़े संस्थानों के प्रधानाचार्य, शिक्षक, अभिभावक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

  • CM मोहन यादव का बड़ा तोहफा, एक क्लिक में 35.42 लाख खातों में पहुंची सामाजिक सुरक्षा पेंशन

    CM मोहन यादव का बड़ा तोहफा, एक क्लिक में 35.42 लाख खातों में पहुंची सामाजिक सुरक्षा पेंशन

     देवास
    मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान मनाया जा रहा है। देवास में गुरुवार को कई कार्यक्रम हुए, जिसमें मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने सिंगल क्लिक पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन का वितरण किया, इसी कार्यक्रम के दौरान दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वर्चुअल जुड़े, उन्होंने बाइक राइडर्स से संवाद किया और उनके अनुभव पूछे।

    मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान के तहत कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गुरुवार को देवास में बाइक राइडर्स के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संवाद किया। इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन का पैसा सीएम मोहन यादव ने सिंगल क्लिक पर 35.42 लाख हितग्राहियों के खाते में डाला। यह आयोजन देवास जिले के पुंजापुरा में हुआ। इस मौके पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, बागली विधायक भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवास जिले के पुंजापुरा में "सेवा संकल्प अभियान" अंतर्गत वड़नगर से वाराणसी सेवा यात्रा कार्यक्रम में सेवा संकल्प बाइक राइडर्स से वर्चुअली संवाद किया। प्रधानमंत्री ने ‘सेवा संकल्प बाइक यात्रा’ में शामिल देवास के दीपेश गोटी से संवाद किया।

    आपने तो गुजराती और राजस्थानी को पीछे छोड़ दिया
    पीएम नरेंद्र मोदी ने जब बाइक राइडर्स से बात कर रहे थे तो ऐसा वाकया भी हुआ जब जमकर ठहाके लग गए। देवास जिले के पुंजापुरा में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने यात्रा में शामिल शाजापुर जिले के दीपेश गोठी से बात कर रहे थे। मोदी ने दीपेश से पूछा कि यात्रा के दौरान जिनसे मिल रहे हो उनसे कुछ सीखने को मिला क्या? इस पर दीपेश ने कहा कि हम अलग-अलग क्षेत्रों की भाषा सीखने का प्रयास करते हैं। वहीं पीएम मोदी ने पूछा कि आप वडनगर में किसी से पहचान बनाई है कि छोड़ दिया सब। इस पर दीपेश ने कहा कि मैं वहां के व्यापारियों का नंबर लेकर आया हूं, क्योंकि मेरा भी व्यापार है। इस पर पीएम ने दीपेश से कहा कि अच्छा आपने तो सेवा के साथ अपना काम भी कर लिया। इस पर दीपेश के साथ बैठे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा सहित अन्य ठहाके लगाकर हंसे। पीएम ने कहा कि आपने तो गुजराती और राजस्थानी को हरा दिया। अच्छी बात है कि मप्र का मिजाज एंटरप्रेन्योर का बन रहा है। मप्र का जवान भी व्यापार-कारोबार में रुचि ले रहा है।

    मोदी ने हरदा की माहेश्वरी धर्मशाला में भी बाईक राइडर्स से वर्चुअल संवाद किया। कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने सहभागिता की। इस अवसर पर प्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग, पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. प्रभुराम चौधरी, पूर्व मंत्री कमल पटेल सहित पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    पीएम के लिए क्या बोले मोहन यादव
    इस मौके पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात भी बदला और देश भी बदला है। हमें गर्व है कि गुजरात से मुख्यमंत्री के रूप में तीन बार प्रदेश का नेतृत्व करने वाले नरेंद्र मोदी आज तीन बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में भारत को नई दिशा दे रहे हैं। यह वास्तव में एक अनूठा समय है। हमने राम राज्य की कल्पना साहित्य में पढ़ी और सुनी है। आज प्रधानमंत्री जी ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाकर राम राज्य की भावना को साकार करने का कार्य किया है। गरीब से गरीब व्यक्ति के पक्के मकान, उसके घर का चूल्हा, रोजगार और बच्चों की शिक्षा की चिंता करते हुए सरकार निरंतर जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ा रही है।

    बस सेवाओं के लिए क्या बोले सीएम
    मोहन यादव ने कहा कि कल पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के अवसर पर मुझे प्रसन्नता है कि 21 वर्ष पहले बंद हुई मध्यप्रदेश सड़क परिवहन निगम की बस सेवाएं पुनः प्रारंभ होने जा रही हैं। मध्यप्रदेश में 5 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण हो चुका है और गांव-गांव तक सड़क एवं हाई-वे कनेक्टिविटी का विस्तार हुआ है। मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित है और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के साथ आवागमन की सुविधाओं को और सुदृढ़ करने के लिए सड़क परिवहन निगम की बसें तीन स्तरों पर संचालित की जाएंगी। नगरीय क्षेत्रों में, प्रदेश के भीतर विभिन्न मार्गों पर तथा अंतरराज्यीय मार्गों पर। इससे प्रदेश के यात्रियों को आवागमन की बेहतर और सुविधाजनक सेवा उपलब्ध होगी।

    पुलिस के 18000 पदों पर भर्ती
    प्रदेश में पुलिस इंस्पेक्टर से लेकर जवान तक 18,000 पदों पर भर्ती की जा रही है। इसके साथ ही सरकार द्वारा कुल 85,000 नए पदों पर भर्ती का कार्य किया जा रहा है। एमएसएमई के माध्यम से प्रदेश के 1 करोड़ 20 लाख युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में बेरोजगारी दर देश के राज्यों में सबसे कम है, यह हमारे लिए गर्व की बात है। हमारे बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए सरकार लैपटॉप, साइकिल और किताबों के साथ स्कूटी भी प्रदान कर रही है, ताकि वे अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर आगे बढ़ सकें।

    कांग्रेस ने लोगों को प्यासा रखा
    मोहन यादव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के लोगों ने वर्षों तक इस क्षेत्र को प्यासा रखा। खेत सूखे रहे और लोग गरीब होते गए। भाजपा के मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती, स्वर्गीय बाबूलाल गौर एवं शिवराज सिंह चौहान के साथ हमारी सरकार में लगातार ₹65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का रकबा बढ़ाकर सबके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। अब किसान भाई – बहन वर्ष में दो से तीन फसल आसानी से ले सकते हैं।

  • UPITS-26: स्मार्ट तकनीक से जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में यूपी की नई पहल

    UPITS-26: स्मार्ट तकनीक से जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में यूपी की नई पहल

    यूपीआईटीएस-26 में दिखेगी यूपी की स्मार्ट सिंचाई व्यवस्था, तकनीक से जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण का बना यूपी मॉडल

    – सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के पवेलियन में लाइव इंजीनियरिंग मॉडल, स्काडा और एआई तकनीक का होगा प्रदर्शन

    – बाढ़ नियंत्रण, नदी जोड़ो परियोजनाओं, ड्रेजिंग और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई की मिलेगी जानकारी

    लखनऊ,
    योगी सरकार द्वारा प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, बेहतर जल प्रबंधन और टिकाऊ इंजीनियरिंग से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की झलक उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2026 में देखने को मिलेगी। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होने वाले यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण में उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से हॉल नंबर-6 में पवेलियन लगाया गया है। यहां तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरिंग एवं तकनीकी छात्रों, प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के संकाय सदस्यों, छात्रों और आमजन को विभाग की परियोजनाओं, तकनीकी नवाचारों और पिछले एक दशक की उपलब्धियों से रूबरू कराया जाएगा।

    पिछले साढ़े नौ वर्षों में 19.48 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार
    प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने बताया कि पवेलियन में आधुनिक सिंचाई परियोजनाओं के साथ जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में अपनाई जा रही तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। विजटर्स को लाइव इंजीनियरिंग मॉडल के माध्यम से प्रमुख परियोजनाओं की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिलेगा। इनमें बाणसागर नहर परियोजना, पहाड़ी बांध परियोजना, अर्जुन सहायक नहर परियोजना, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना सहित अन्य प्रमुख परियोजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। विभागीय प्रदर्शनी में नहर नेटवर्क और लिफ्ट कैनाल के कार्यात्मक मॉडलों के साथ बांधों और बैराजों की कार्यप्रणाली को ऑडियो-विजुअल माध्यम से समझाया जाएगा। प्रदर्शनी में पिछले साढ़े नौ वर्षों में पूरी की गई प्रमुख, मध्यम और लघु सिंचाई परियोजनाओं की उपलब्धियों को प्रमुखता दी गई है। बाणसागर नहर परियोजना, पहाड़ी बांध परियोजना, अर्जुन सहायक नहर परियोजना, महुआगांव-चिल्ली स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजना, लहचुरा बांध परियोजना, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, यूपी वाटर रिस्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट फेज-2 और जरगो नहर प्रणाली के पुनर्गठन जैसी परियोजनाओं से सिंचाई क्षमता में विस्तार हुआ है। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 17.29 लाख हेक्टेयर नया सिंचाई क्षेत्र विकसित हुआ जबकि 2.19 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र को पुनर्स्थापित किया गया। इस तरह कुल 19.48 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का विस्तार/पुनर्स्थापन हुआ और 44.81 लाख किसान परिवार इससे लाभान्वित हुए हैं।

    स्काडा और एआई से किया जा रहा स्मार्ट जल प्रबंधन
    मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह ने बताया कि पवेलियन में प्रमुख आकर्षण स्मार्ट सिंचाई प्रणाली होगी। विभाग सिंचाई जल के वितरण, नहर संचालन और सरकारी नलकूपों के संचालन में स्काडा, एआई और आईओटी जैसी तकनीकों का उपयोग कर रहा है। 15 प्रमुख बांधों और बैराजों पर स्काडा सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिसके माध्यम से कंट्रोल रूम से गेटों का इलेक्ट्रॉनिक संचालन और बांध-बैराज से संबंधित रियल-टाइम डेटा ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है। केंद्रीयकृत नियंत्रण प्रणाली के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित बैराजों, सरकारी नलकूपों और पंप नहरों की स्थिति की निगरानी और नियंत्रण भी किया जा रहा है। प्रदर्शनी में बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में अपनाए जा रहे आधुनिक उपाय भी प्रदर्शित होंगे। विभाग के अनुसार तटबंधों के सुदृढ़ीकरण, संवेदनशील स्थलों की निगरानी और प्रभावी बाढ़ प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए कंक्रीट मैट्रेस टेक्नोलॉजी, सिल्ट वेन, बॉटम पैनल्स, शीट पाइल, परमेबल स्ट्रक्चर और टेट्रापॉड जैसी तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। प्रदेश की गंगा, यमुना, सोलानी, रामगंगा, सुवाओन, खोकरी, मंदाकिनी, केन, बेतवा, बूढ़ी गंगा और टेढ़ी नदियों पर फल्ड प्लेन जोनिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। इस कार्य में उत्तर प्रदेश को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही नदी के प्रवाह को सुचारु बनाने और तटबंधों पर बाढ़ के दबाव को कम करने के लिए प्रदेश में 58 स्थानों पर ड्रेजिंग का कार्य किया गया है। गंगा, घाघरा, शारदा और रामगंगा जैसी नदियों में ड्रेजिंग के माध्यम से नदी के प्रवाह को व्यवस्थित करने के प्रयास किए गए हैं। महाकुम्भ के दौरान गंगा की तीन धाराओं को ड्रेजिंग के जरिए एक धारा में चैनलाइज किया गया था। वहीं बिजनौर में सेक्टोरल ड्रेजिंग के जरिए गंगा को चैनलाइज कर रिवर ट्रेनिंग का कार्य किया गया।

    'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' पर जोर
    विभाग की ओर से कम पानी वाले क्षेत्रों में जल के अधिकतम उपयोग के लिए प्रेशर इरिगेशन और स्प्रिंकलर आधारित सिंचाई परियोजनाओं को बढ़ावा दिया गया है। हमीरपुर में महुआगांव चिल्ली, महोबा में कुलपहाड़ और ललितपुर में शहजाद बांध स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजनाओं का उल्लेख प्रदर्शनी में किया गया है। सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और गोरखपुर में सात प्रेशर सिंचाई प्रणालियां विकसित की गई हैं, जिनसे करीब 4,000 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता और लगभग 15 हजार किसान परिवारों को लाभ मिला है। उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के तहत सिंचाई विभाग ने नलकूपों, लिफ्ट नहरों, स्प्रिंकलर और प्रेशर सिंचाई परियोजनाओं, मुख्य नहर प्रणालियों के उपकरणों एवं सेंसरों और कार्यालयों में सौर ऊर्जा के उपयोग की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नहरों के वाटरवेज पर सोलर पावर प्लांट लगाने की संभावनाओं को भी प्रदर्शनी में दिखाया जा रहा है। विभाग की प्रदर्शनी में नहरों की सिल्ट सफाई और अंतिम छोर के किसानों तक सिंचाई जल पहुंचाने की व्यवस्था भी प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएगी। नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य 27,551 किलोमीटर से बढ़ाकर 55,320 किलोमीटर किया गया है। खरीफ में पानी की पहुंच 9,517 टेल से बढ़कर 10,422 टेल और रबी में 9,376 से बढ़कर 10,932 टेल तक हुई है। इस अवधि में कुल सिंचित क्षेत्र 82.54 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 106.82 लाख हेक्टेयर हुआ है।

  • गुणवत्ता युक्त जलापूर्ति की निरंतरता तथा संचालन निगरानी सुनिश्चित करें – कलेक्टर

    गुणवत्ता युक्त जलापूर्ति की निरंतरता तथा संचालन निगरानी सुनिश्चित करें – कलेक्टर

    गुणवत्ता युक्त जलापूर्ति की निरंतरता तथा संचालन निगरानी सुनिश्चित करें – कलेक्टर

    कलेक्टर ने जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में समीक्षा कर दिए निर्देश

    अनूपपुर
    कलेक्टर श्री रत्नाकर झा की अध्यक्षता में जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक कलेक्ट्रेट स्थित नर्मदा सभागार में आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत व्यक्तिगत शौचालय, सामुदायिक स्वच्छता परिसर, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम- 2026 एवं घर-घर कचरा संग्रहण सहित विभिन्न कार्यों के प्रगति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने व्यक्तिगत शौचालय निर्माण की ग्राम पंचायतवार प्रगति की समीक्षा करते हुए शेष पात्र परिवारों का सर्वे कर उन्हें चिन्हित करने तथा पात्र परिवारों को लाभान्वित करने के  निर्देश दिए।

    कलेक्टर ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम- 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि ग्राम पंचायतों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था व्यवस्थित एवं नियमित रूप से संचालित हो। उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत निर्मित संरचनाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, जिन ग्राम पंचायतों में कचरा वाहनों में खराबी के कारण घर-घर कचरा संग्रहण प्रभावित है, उनमें आवश्यक सुधार कराकर कचरा संग्रहण व्यवस्था नियमित रूप से संचालित कराने को कहा। उन्होंने सामुदायिक स्वच्छता परिसरों के उचित रखरखाव एवं नियमित संचालन पर भी ध्यान देने तथा आवश्यकता वाले स्थानों पर नवीन सामुदायिक स्वच्छता परिसरों के निर्माण की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    स्वच्छता व्यवस्थाओं के साथ पेयजल उपलब्धता की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित नल-जल योजनाओं की चालू एवं बंद स्थिति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को गुणवत्तायुक्त एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना आवश्यक है। जल की गुणवत्ता में कमी अथवा दूषित जल के सेवन से विभिन्न प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए अधिकारी जल की गुणवत्ता के साथ जलापूर्ति की निरंतरता भी सुनिश्चित करें। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मैदानी भ्रमणकर कार्यों का नियमित निरीक्षण कर नल-जल योजनाओं की वास्तविक स्थिति की निगरानी करने तथा किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर उसका तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    बैठक में बताया गया कि ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित की जाने वाली नल-जल योजनाओं में अनूपपुर विकासखंड की 10, कोतमा की 11, जैतहरी की 20 तथा पुष्पराजगढ़ की 44 योजनाएं शामिल हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि हस्तांतरण से पूर्व सभी योजनाओं की स्थिति का परीक्षण कर आवश्यक कमियों को दूर किया जाए, ताकि ग्राम पंचायतों को योजनाओं के संचालन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। उन्होंने जैतहरी जनपद की योजनाओं में आवश्यक कार्यवाही पूर्ण करते हुए 7 दिवस के भीतर हस्तांतरण सुनिश्चित करने तथा जिले की शेष सभी नल-जल योजनाओं का हस्तांतरण 31 अक्टूबर तक पूर्ण करने के निर्देश दिए।

    बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अर्चना कुमारी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, स्वच्छ भारत मिशन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।