Author: NewseDay

  • Dharavi Redevelopment: मुंबई की धारावी में शुरू हुआ पुनर्विकास का काम, हजारों परिवारों को मिलेंगे नए घर

    Dharavi Redevelopment: मुंबई की धारावी में शुरू हुआ पुनर्विकास का काम, हजारों परिवारों को मिलेंगे नए घर

    मुंबई 
    गौतम अडानी की कंपनी ने मुंबई के धारावी का कायाकल्प करने का काम शुरू कर दिया है. इसे लेकर अडानी एंटरप्राइजेज के डायरेक्टर प्रणव अडानी ने सोमवार को माटुंगा में 22 एकड़ के पुनर्वास हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए भूमि पूजन किया. इसमें एशिया की सबसे बड़ी अनौपचारिक बस्तियों में से एक धारावी के पात्र निवासियों के लिए 10,432 घरों का निर्माण शुरू कर दिया गया है। 

    इस प्रोजेक्ट में होंगे 10 टावर
    Gautam Adani की कंपनी की ओर से दिए गए बयान को देखें, तो मुंबई घारावी के इस प्रोजेक्ट को अडानी नवभारत डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (ANDPL) पूरा करेगी. यह धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट के लिए बनाई गई एक स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) कंपनी है. इस प्रोजेक्ट में 10 टावर होंगे, जिनमें 10,432 पुनर्वास अपार्टमेंट तैयार किए जाएंगे और 1,379 कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूनिट्स भी होंगी। 

    'हर परिवार, सुरक्षित घर का हकदार'
    Adani Enterprises के डायरेक्टर प्रणव अडानी ने कहा, 'धारावी में रहने वाला हर परिवार एक ऐसे घर का हकदार है, जहां वे सुरक्षित महसूस करें और भविष्य की योजना बना सकें. हम जानते हैं कि धारावी के परिवारों के लिए इसका क्या मतलब है. माटुंगा में, हम 10 टावर बना रहे हैं जिनमें 10,432 घर और 1,379 कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूनिट्स होंगी. हम ऐसे इलाके बना रहे हैं, जहां ये परिवार बेहतर ढंग से रह सकें और अपने बच्चों के लिए एक उज्ज्वल भविष्य बना सकें। 

    इतना बड़ा होगा धारावी वालों का नया घर
    प्रणव अडानी के मुताबिक, इन-सीटू (मौजूदा जगह पर) पुनर्वास योजना के तहत धारावी के पात्र निवासियों को 350 वर्ग फुट के घर मिलेंगे. माटुंगा में सबसे पहले सेक्टर 6 और 1 के निवासियों को घर मिलेंगे, इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर धारावी के अन्य पात्र निवासियों के लिए लगभग 4,500 अपार्टमेंट उपलब्ध कराए जाएंगे। 

    हर टावर में 37 से 39 मंजिलें होंगे, जिनमें 10 से 12 पैसेंजर लिफ्ट और दो खास फायर लिफ्ट होंगी. दो और लिफ्ट कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूनिट्स के लिए होंगी. प्लान की गई सुविधाओं में किंडरगार्टन, कम्युनिटी हॉल, पोडियम गार्डन, बैठने की जगह, सोसाइटी ऑफिस और पूजा स्थल शामिल हैं। 

    हर रिहैबिलिटेशन बिल्डिंग में कमर्शियल जगह का 10% हिस्सा कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव के लिए रेवेन्यू जुटाने के लिए रिजर्व होगा. ANDPL हैंडओवर के बाद 10 साल तक बिल्डिंग और शेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर का रखरखाव करेगा। 

    कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट? 
    इन टावरों को महाराष्ट्र सरकार के तहत धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट/स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (DRP/SRA) को तीन चरणों में सौंपा जाएगा. पहले पांच टावर मार्च 2029 तक, अगले दो अगस्त 2029 तक और बाकी तीन अगस्त 2030 तक सौंपे जाने की योजना है। 

    इस प्रोजेक्ट में US की Sasaki, UK की Buro Happold, मुंबई की StudioPOD, आर्किटेक्ट हफीज कॉन्ट्रैक्टर, P&T और ARC Studio के साथ-साथ सिंगापुर के अर्बन-प्लानिंग एक्सपर्ट्स की डिजाइन, इंजीनियरिंग और अर्बन-प्लानिंग की स्पेशिएलिटी का इस्तेमाल किया जा रहा है।  

    भूमि पूजन कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता शामिल हुए. इसके साथ ही यहां मौजूद DRP/SRA के सीईओ महेंद्र कल्याणकर ने कहा कि यह प्रोजेक्ट धारावी के परिवारों के लिए एक अहम कदम है. हमारा ध्यान सुरक्षित, आधुनिक घर और बेहतर जीवन के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर देने पर है। 

    धारावी वालों को दिखाई झलक
    ANDPL के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर अनिल सरदाना ने बताया कि 22,500 स्क्वायर फीटट में फैले धारावी एक्सपीरियंस सेंटर ने निवासियों को प्लान किए गए घरों और इलाकों की पहली झलक दिखाई. कंस्ट्रक्शन शुरू होने के साथ, हमारा ध्यान डिलीवरी और लंबे समय तक रखरखाव पर है। 

    उन्होंने कहा कि इस सेंटर में लाइफ-साइज सैंपल घर, 3D वॉकथ्रू और इंटरैक्टिव डिस्प्ले हैं जो घर, काम की जगह, सुविधाएं, ट्रांसपोर्ट और खुली जगहों को दिखाते हैं. बड़े रीडेवलपमेंट प्लान में दुकानों, स्कूलों, हेल्थकेयर सुविधाओं, पार्कों, पूजा स्थलों, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और दूसरे सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एक मिक्स्ड-यूज टाउनशिप बनाने का प्लान है, जिसमें जरूरी सेवाएं 15 मिनट की पैदल दूरी के अंदर होंगी। 

    Dharavi में रहते हैं 10 लाख लोग 
    गौरतलब है कि मुंबई का धारावी, जहा 10 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं, एक घनी आबादी वाला इलाका है. यहां एक बड़ी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था है और कई छोटे पैमाने के मैन्युफैक्चरिंग और कमर्शियल उद्यम हैं. रीडेवलपमेंट का मकसद घरों और सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना तो है ही, इसके साथ योग्य निवासियों को उचित जगह देना और स्थानीय आजीविका को सहारा देना भी है। 

  • नवरात्रि विशेष: मां दुर्गा के वाहन जंगली जानवर क्यों होते हैं? जानिए पौराणिक मान्यता

    नवरात्रि विशेष: मां दुर्गा के वाहन जंगली जानवर क्यों होते हैं? जानिए पौराणिक मान्यता

    शारदीय नवरात्रि : मां दुर्गा के वाहन जंगली जानवर ही क्यों होते हैं? यह सवाल केवल धार्मिक मान्यता से नहीं, बल्कि प्रकृति, शक्ति और मनुष्य के भीतर छिपी प्रवृत्तियों से भी जुड़ा हुआ है. मां दुर्गा को आदिशक्ति, साहस और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी माना जाता है. उनके विभिन्न स्वरूपों के साथ अलग-अलग वाहन जुड़े हैं और इनमें अधिकांश वाहन शक्तिशाली और जंगलों में स्वतंत्र रहने वाले हैं. यह केवल एक संयोग नहीं, बल्कि इनके पीछे एक खास मान्यता भी है.

    मां दुर्गा का सबसे मुख्य वाहन सिंह है. सिंह को जंगल का शक्तिशाली और निर्भीक जीव माना जाता है. वह अपनी शक्ति, साहस और पराक्रम के लिए जाना जाता है. मां दुर्गा का सिंह पर सवार होना, इस बात का प्रतीक है कि शक्ति जब धर्म के पक्ष में होती है तो वह अहंकार, अत्याचार और आसुरी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण स्थापित कर सकती है. सिंह को मां के साहस और निर्भीकता से भी जोड़ा जाता है. देवी के हाथों में शस्त्र और उनके साथ सिंह का होना यह संदेश देता है कि केवल शक्ति का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस शक्ति का सही दिशा में उपयोग भी जरूरी है.

    कई चित्रों और धार्मिक परंपराओं में मां दुर्गा को बाघ के साथ भी दर्शाया जाता है. उसमें आक्रामकता, गति, एकाग्रता और शिकार पर नियंत्रण जैसी विशेषताएं होती हैं. इसलिए बाघ को देवी की प्रचंड शक्ति और सक्रिय ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. सिंह हो या बाघ, दोनों ही मनुष्य के नियंत्रण से बाहर रहने वाले वन्य जीव हैं. देवी का उन पर सवार होना यह दर्शाता है कि दिव्य शक्ति उन ताकतों पर भी नियंत्रण रख सकती है जिन्हें सामान्य मनुष्य नियंत्रित नहीं कर सकता.

    यहां जंगल का अर्थ भी महत्वपूर्ण है. जंगल ऐसी जगह है जहां प्रकृति अपने मूल और स्वतंत्र स्वरूप में दिखाई देती है. वहां रहने वाले जीव अपनी प्राकृतिक शक्ति के साथ जीवन जीते हैं. मां दुर्गा को प्रकृति की मूल शक्ति माना गया है. इसलिए उनके साथ ऐसे जीवों का जुड़ाव प्रकृति और शक्ति के संबंध को दर्शाता है. देवी केवल घर-परिवार की सुख-समृद्धि की शक्ति नहीं हैं, बल्कि वे प्रकृति के उस प्रचंड रूप का भी प्रतिनिधित्व करती हैं जो जरूरत पड़ने पर विनाशकारी शक्तियों का अंत कर सकता है.

    सिंह-बाघ का असली मतलब क्या है?
    मां दुर्गा के वाहन का एक अर्थ मनुष्य के भीतर मौजूद पशु प्रवृत्तियों से भी है. क्रोध, अहंकार, भय, लोभ और हिंसा जैसी प्रवृत्तियां जब अनियंत्रित हो जाती हैं तो मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करती हैं. सिंह और बाघ जैसी शक्तिशाली प्रवृत्तियों पर देवी का विराजमान होना यह संदेश देता है कि विवेक और चेतना के द्वारा अपनी आंतरिक शक्तियों को नियंत्रित किया जा सकता है. शक्ति को दबाना नहीं, बल्कि उसे सही दिशा देना ही देवी के स्वरूप का संदेश है.

    इस तरह मां दुर्गा के वाहन केवल सवारी के साधन नहीं हैं. वे देवी के गुणों, प्रकृति की शक्ति और मनुष्य के भीतर मौजूद प्रवृत्तियों के प्रतीक हैं. सिंह और बाघ जैसे वाहन यह संदेश देते हैं कि वास्तविक शक्ति वही है जो साहस के साथ-साथ नियंत्रण, विवेक और धर्म का साथ रखे. यही कारण है कि मां दुर्गा के वाहन के रूप में जंगल के शक्तिशाली जीवों की कल्पना भारतीय धार्मिक परंपरा में विशेष अर्थ रखती है.

  • MP News: अमित शाह का फिर होगा मध्य प्रदेश दौरा, ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की रखेंगे नींव

    MP News: अमित शाह का फिर होगा मध्य प्रदेश दौरा, ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की रखेंगे नींव

    ग्वालियर 
     29 अक्टूबर का दिन ग्वालियर और मध्यप्रदेश के लिए एक बड़ी सौगात लेकर आने वाली है. देश के गृहमंत्री अमित शाह ग्वालियर आने वाले हैं और वे यहां एशिया के सबसे बड़े और ग्वालियर में प्रस्तावित टेलकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन का भूमिपूजन करेंगे. अमित शाह का ये 26 दिनों में मध्य प्रदेश का दूसरा दौरा होगा, इससे पहले वे 3 अक्टूबर को भोपाल आए थे। 

    ग्वालियर बनेगा एशिया का सबसे बड़ा टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन
    हाल ही में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से ग्वालियर में एशिया का सबसे बड़ा टेलकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की सौगात मिली थी. ये देश के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है. इस उद्योगिक प्रोजेक्ट के ज़रिए टेलीकॉम क्षेत्र में ग्वालियर के लिए रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे. 5500 करोड़ रु के निवेश वाली इस परियोजना का ग्वालियर के साडा क्षेत्र में भूमिपूजन करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दौरा प्रस्तावित है. हालांकि, पहले ये दौरा 12 अक्टूबर का माना जा रहा था लेकिन तारीखों में बदलाव हुआ है। 

    अमित शाह ने सिंधिया का आमंत्रण स्वीकारा
    प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया, '' केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर के टेलकॉम मैनुफैक्चरिंग जोन के भूमिपूजन के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को आमंत्रित किया था, जिस पर उन्होंने 29 अक्टूबर के लिए हामी भरी है. वे तय तारीख पर ग्वालियर दौरे पर रहेंगे और क्षेत्र को बड़ी सौगात देंगे। 

    'हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार'
    ऊर्जा मंत्री ने आगे कहा, ''29 अक्टूबर को इस कार्यक्रम में 24 कंपनियों की इकाइयों का भूमिपूजन होगा और इन इकाइयों से करीब 10 हज़ार युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा. इस टेलीकॉम मैनुफैक्चरिंग जोन का मुख्य फोकस ऑप्टिकल फाइबर, सेमीकंडर और 5जी-6जी तकनीक से जुड़े उपकरणों के निर्माण रिसर्च सुर इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा। 

    'फिर बदलेगी ग्वालियर में उद्योग की तस्वीर'
    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का कहना है कि, ये टेलीकॉम मैन्युफ़ैक्चरिंग जोन ग्वालियर क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि बनेगा और जो ग्वालियर उद्योग विहीन हो गया था, वहां एक बार फिर रोजगार का सृजन होगा। 

  • MP News: पोषण अभियान में मंदसौर और नीमच का कमाल, देशभर में हासिल किया पहला और दूसरा स्थान

    MP News: पोषण अभियान में मंदसौर और नीमच का कमाल, देशभर में हासिल किया पहला और दूसरा स्थान

    मध्यप्रदेश  राष्ट्रीय पोषण माह में देश में तीसरे स्थान पर

    1.09 करोड़ से अधिक गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज
    मंदसौर और नीमच जिलें देशभर में पहले और दूसरे स्थान पर
    ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर प्रदेश के सभी 55 जिलों में जनभागीदारी

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय पोषण माह-2026 में पोषण जागरूकता और जनभागीदारी के प्रयासों में देश में तीसरा स्थान हासिल किया है। 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे तक प्रदेश में 1 करोड़ 9 लाख 66 हजार 805 गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज की गई हैं। इस उपलब्धि को और विशेष बनाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया के प्रभार वाले मंदसौर और नीमच जिलों ने राष्ट्रीय स्तर पर क्रमशः पहला और दूसरा स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश के सभी 55 जिलों की भागीदारी के साथ यह उपलब्धि पोषण को जनआंदोलन बनाने और आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, देखभाल तथा प्रारंभिक बाल विकास का सशक्त केंद्र बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करती है।

    देश के अग्रणी राज्यों में मध्यप्रदेश की उल्लेखनीय उपस्थिति

    राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे तक देश में कुल 11 करोड़ 91 लाख 64 हजार 823 गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज की गईं। इनमें बिहार 1 करोड़ 49 लाख 93 हजार 265 प्रविष्टियों के साथ पहले, महाराष्ट्र 1 करोड़ 38 लाख 66 हजार 923 के साथ दूसरे और मध्यप्रदेश 1 करोड़ 9 लाख 66 हजार 805 प्रविष्टियों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

    उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ 2 लाख 90 हजार 37, राजस्थान में 91 लाख 78 हजार 866, गुजरात में 84 लाख 23 हजार 561 और छत्तीसगढ़ में 71 लाख 93 हजार 724 प्रविष्टियां दर्ज की गईं। राष्ट्रीय स्तर पर 788 जिलों में से 785 जिलों की भागीदारी दर्ज की गई, जबकि मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों ने पोषण माह की गतिविधियों में सहभागिता की।

    मंदसौर और नीमच की उपलब्धि से प्रदेश को मिली विशेष पहचान

    प्रदेश के मंदसौर जिले ने राष्ट्रीय पोषण माह में पहला और नीमच जिले ने दूसरा स्थान हासिल किया है। दोनों जिले महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया के प्रभार वाले जिले हैं। राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष दो स्थानों पर इन जिलों की उपलब्धि प्रदेश में पोषण संबंधी गतिविधियों के व्यापक संचालन और जनभागीदारी को नई पहचान देती है।

    हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ है इस वर्ष की थीम

    भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत पोषण को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ 9 सितंबर 2026 को किया गया। इस वर्ष की मुख्य थीम ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण, देखभाल और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास से जुड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करना, समुदाय की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना तथा पोषण सेवाओं के प्रति सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही को प्रोत्साहित करना है।

    पांच प्रमुख विषयों पर केंद्रित हैं पोषण संबंधी गतिविधियां

    राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान 5 प्रमुख विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इनमें आहार में विविधता और पर्याप्त प्रोटीन की उपलब्धता, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं विविधतापूर्ण गर्म पका भोजन, सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही, बच्चों के पोषण के साथ प्रारंभिक विकास एवं सीखने के लिए प्रोत्साहन संबंधी गतिविधियां तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य के लिए सहायता शामिल हैं। इन विषयों के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित आहार, बेहतर पोषण व्यवहार, मातृ स्वास्थ्य और बच्चों के समग्र विकास के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है। इस अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों पर उपलब्ध सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के साथ समुदाय को पोषण संबंधी प्रयासों से जोड़ना भी है।

     

  • सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज, उज्जैन और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर श्रद्धालुओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

    सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज, उज्जैन और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर श्रद्धालुओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

    उज्जैन 
     सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए रेलवे उज्जैन और आसपास के स्टेशनों का कायाकल्प करने की तैयारी में है। यात्री सुविधाओं के विस्तार से लेकर भीड़ प्रबंधन और ट्रेनों के संचालन तक, रेलवे का पूरा जोर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर है।

    इसके लिए उज्जैन सहित आसपास के छह स्टेशनों पर 580 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा उज्जैन स्टेशन को मिलेगा। यहां 281.67 करोड़ रुपये की लागत से 17 कार्य किए जाएंगे। स्टेशन पर तीन नए फुट ओवरब्रिज, चार होल्डिंग बिल्डिंग, अतिरिक्त यात्री प्रतीक्षास्थल और स्टेबलिंग लाइनें विकसित की जाएंगी। सिंहस्थ के दौरान एक साथ उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने में ये सुविधाएं अहम भूमिका निभाएंगी।

    तीन नए फुट ओवरब्रिज बनेंगे
    उज्जैन स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर एक से आठ के बीच यात्रियों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए तीन नए फुट ओवरब्रिज (एफओबी) बनाए जाएंगे। इनमें बीच में बनने वाला 12 मीटर चौड़ा फुट ओवरब्रिज सबसे अहम है। इस पर 35.68 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें शेड, रैंप और लिफ्ट की सुविधा भी रहेगी, ताकि बुजुर्गों, दिव्यांगों और भारी सामान के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी न हो।

    इसके अलावा भोपाल और रतलाम छोर पर छह-छह मीटर चौड़े दो फुट ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। प्रत्येक पर 18.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। तीनों फुट ओवरब्रिज बनने से प्लेटफार्मों के बीच यात्रियों का दबाव कम करने और भीड़ को अलग-अलग रास्तों से निकालने में मदद मिलेगी।

    चार नई होल्डिंग एरिया, भीड़ बढ़ने पर यहीं रुकेंगे यात्री
    सिंहस्थ के दौरान स्टेशन पर अचानक बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चार नई जी प्लस-2 होल्डिंग बिल्डिंग बनाई जाएंगी। प्लेटफार्म नंबर एक पर रनिंग रूम के पास एक और प्लेटफार्म नंबर आठ पर तीन बिल्डिंग प्रस्तावित हैं। प्रत्येक भवन पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त यात्रियों के लिए होल्डिंग एरिया विकसित करने पर 20.29 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यह है कि ट्रेनों के आने-जाने के समय यात्रियों की भीड़ सीधे प्लेटफार्मों पर जमा न हो और जरूरत पड़ने पर उन्हें निर्धारित स्थानों पर रोका जा सके।

    यार्ड में स्टेबलिंग लाइन, बिजली और ड्रेनेज व्यवस्था भी सुधरेगी
    स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के साथ ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ाने के लिए भी काम किए जाएंगे। लोको यार्ड और एनसी यार्ड में स्टेबलिंग लाइन विकसित करने पर 54.71 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे ट्रेनों को खड़ा करने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था उपलब्ध होगी। सर्कुलेटिंग एरिया और ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने के लिए 19.79 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

    स्टेशन और आसपास के क्षेत्र में बिजली आपूर्ति मजबूत करने के लिए 33 केवी का नया सब स्टेशन बनाया जा रहा है। इलेक्ट्रिकल अपग्रेडेशन पर आठ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सुरक्षा और रेलवे कर्मचारियों की जरूरतों को देखते हुए 20 बिस्तरों वाली बैरक के निर्माण पर 8.75 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा सब डिविजनल रेलवे अस्पताल और 20 कमरों का रेस्ट हाउस भी प्रस्तावित है।

    पंवासा में नया स्टेशन, नईखेड़ी और चिंतामन में भी बढ़ेंगी सुविधाएं
    सिंहस्थ की तैयारियों के तहत उज्जैन-पिंगलेश्वर रेलखंड के बीच पंवासा में नया बी-क्लास स्टेशन बनाया जा रहा है। इस पर 49.85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां करीब 41 करोड़ रुपये की लागत से हाई लेवल प्लेटफार्म, फुट ओवरब्रिज, अस्थायी शौचालय और पेयजल व्यवस्था विकसित की जाएगी।

    नईखेड़ी स्टेशन पर 67.27 करोड़ रुपये की लागत से यार्ड का नवीनीकरण, अतिरिक्त लूप लाइन, स्टेबलिंग लाइन और फुट ओवरब्रिज के काम प्रस्तावित हैं। चिंतामन गणेश स्टेशन पर 49.63 करोड़ रुपये खर्च कर अतिरिक्त लूप लाइन, प्लेटफार्मों पर शेड, छह मीटर चौड़ा फुट ओवरब्रिज और अस्थायी होल्डिंग एरिया विकसित करने की योजना है।

    फतेहाबाद स्टेशन पर 22.64 करोड़ रुपये की लागत से यात्री सुविधाओं और भीड़ नियंत्रण से जुड़े काम किए जाएंगे। यहां फुट ओवरब्रिज और 10 बिस्तरों वाली बैरक भी प्रस्तावित है। मोहनपुरा स्टेशन पर 29.29 करोड़ रुपये खर्च कर दो फुट ओवरब्रिज और छत व शेड सहित उच्च स्तरीय प्लेटफार्म बनाया जाएगा।

    सिंहस्थ के दौरान उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का दबाव केवल मुख्य स्टेशन तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसे में आसपास के स्टेशनों पर सुविधाओं का विस्तार यात्रियों को अलग-अलग मार्गों और स्टेशनों के माध्यम से संभालने में मददगार होगा। रेलवे की इन योजनाओं का असर सिंहस्थ के दौरान यात्रियों की आवाजाही, ट्रेनों के संचालन और स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन पर दिखाई देने की उम्मीद है।

     

  • दमोह के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में खुशखबरी, 6 महीने के हुए बाघिन N-6 के चारों शावक

    दमोह के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में खुशखबरी, 6 महीने के हुए बाघिन N-6 के चारों शावक

    दमोह
    वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। कभी कुएं में गिरने के कारण मौत के मुंह तक पहुंच चुकी बाघिन एन-6 ने अब इस जंगल को अपना स्थायी ठिकाना बना लिया है। इतना ही नहीं इस बाघिन ने चार शावकों को जन्म देकर यहां अपने परिवार की नई पीढ़ी को भी आगे बढ़ाया है। अप्रैल 2026 में जन्मे चारों शावक अब करीब छह माह के हो चुके हैं।

    हाल ही में यह अपनी मां के साथ टाइगर रिजर्व में लगाए गए कैमरा ट्रैप में कैद हुए हैं। कैमरों में बाघिन कभी अपने शावकों के साथ जंगल में विचरण करती नजर आ रही है तो कभी उनके साथ बैठी दिखाई दे रही है। बाघिन और चार शावकों की तस्वीरें टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास में बढ़ते कुनबे की महत्वपूर्ण तस्वीर पेश कर रही है।

    राधा के बाद एन-6 ने बढ़ाया कुनबा
    वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघों को
    बसाने की शुरुआत बाघिन राधा को लाकर की गई थी, शुरुआती दौर में राधा के कारण ही इस क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी को लेकर विशेष चर्चा रही। अब यहां दूसरी बाघिन एन-6 ने भी चार शावकों को जन्म देकर अपने परिवार को आगे बढ़ाया है। इससे टाइगर रिजर्व में बाघों की नई पीढ़ी के विकसित होने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

    एन-6 के चार शावकों के साथ कैमरा ट्रैप में कैद होने से यह भी सामने आया है कि बाघिन इस क्षेत्र में अपने शावकों के साथ विचरण कर रही है। एक बाघिन का चार शावकों के साथ दिखाई देना वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे टाइगर रिजर्व में बाघों के प्राकृतिक प्रजनन और उनके अनुकूल रहवास की तस्वीर भी सामने आती है।

    फरवरी 2025 में हुआ था खतरनाक हादसा
    यह पूरी कहानी फरवरी 2025 की है। सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन में आने वाले हरदोई गांव में यह घटना घटी थी। करीब तीन साल की एक बाघिन एक जंगली सुअर का पीछा करते हुए अचानक एक गहरे और खुले कुएं में जा गिरी थी। इस अप्रत्याशित हादसे के बाद वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने करीब चार घंटे तक चले एक बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया था।

    खटिया और हाइड्रोलिक क्रेन से चला था रेस्क्यू
    कुएं में गिरी बाघिन और सुअर को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। इस अनोखे और जोखिम भरे रेस्क्यू में हाइड्रोलिक क्रेन के साथ-साथ एक पारंपरिक बुनी हुई खटिया का इस्तेमाल किया गया था। इस घटना ने एक बार फिर यह देश के सामने ला दिया था कि जंगलों के किनारे बसे गांवों में खुले कुएं वन्यजीवों के लिए कितने जानलेवा साबित हो सकते हैं।

    रेस्क्यू के बाद नौरादेही लैंडस्केप में छोड़ा गया था
    कुएं से सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद वन विभाग ने बाघिन की बेहतर मॉनिटरिंग के लिए उसके गले में रेडियो कॉलर लगाया था। इसके बाद उसे नौरादेही लैंडस्केप के अंतर्गत आने वाले वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के जंगलों में शिफ्ट कर दिया गया। इस रीलोकेशन का मुख्य उद्देश्य यही था कि वह रेस्क्यू वाली पुरानी और तनावपूर्ण परिस्थितियों से दूर एक नए और सुरक्षित प्राकृतिक माहौल में खुद को ढाल सके।

    कैमरा ट्रैप में कैद हुई मां और शावकों की जोड़ी
    नये आशियाने में आकर इस बाघिन ने न सिर्फ खुद को उस नए माहौल के अनुकूल ढाला, बल्कि अप्रैल 2026 में चार शावकों को भी जन्म दिया। हाल ही में सामने आई कैमरा-ट्रैप की तस्वीरों में चारों शावक अपनी मां के साथ सुरक्षित रूप से चलते हुए नजर आ रहे हैं। वन अधिकारियों के अनुसार, इन शावकों का जंगल में अपने जीवन के शुरुआती छह महीने सफलतापूर्वक पार कर लेना एक बहुत बड़ी कामयाबी है।

    शावकों के शुरुआती महीने होते हैं बेहद संवेदनशील

        वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, टाइगर के शावकों की जिंदगी के शुरुआती कुछ महीने बेहद नाजुक और खतरे से भरे होते हैं।

        इस दौरान शावक अपनी सुरक्षा, भोजन और शिकार करने के गुर सीखने के लिए पूरी तरह से अपनी मां पर निर्भर रहते हैं।

        सुरक्षित माहौल और मां की मौजूदगी के चलते ही यह नया कुनबा आज मध्यप्रदेश के जंगलों में फल-फूल रहा है।

     

     

  • नवरात्रि के चौथे दिन ऐसे करें मां कूष्मांडा की आराधना, मिलेगा सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद

    नवरात्रि के चौथे दिन ऐसे करें मां कूष्मांडा की आराधना, मिलेगा सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद

    Navratri 4th day 2026: नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा को मां कूष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। कहते हैं कि अपनी मंद यानी हल्की हंसी के द्वारा ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण मां दुर्गा को 'कूष्मांडा' नाम से पुकारा जाता है। कहा जाता है कि जब सृष्टि नहीं थी, चारों ओर अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए इन्हें सृष्टि की ‘आदिशक्ति’ या ‘आदिस्वरूपा’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना करने से समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु और यश में वृद्धि होती है। सुख-समृद्धि के साथ सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद मिलता है।

    देवी कूष्मांडा मां भवानी का चौथा स्वरूप हैं। इनका स्वरूप अत्यंत दिव्य, तेजस्वी और प्रकाशमान है। मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में क्रमश: कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा है। मां कूष्मांडा के आठवें हाथ में सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। माता का वाहन सिंह या शेर है। जानें मां कूष्मांडा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, प्रिय भोग, रंग, फूल और आरती।
    मां कूष्मांडा पूजा विधि:

    मां कूष्मांडा की पूजा करने के लिए सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां कूष्मांडा का ध्यान करते हुए मां दुर्गा को फल, फूल, सुहाग का सामान, धूप, दीपक और मिठाई आदि अर्पित करें। अंत में मां कूष्मांडा को भोग लगाएं और आरती उतारें।

    मां कूष्मांडा की पूजा ये शुभ मुहूर्त:
    ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:54 से सुबह 05:43 बजे तक।

    अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:30 बजे तक।

    अमृत काल: दोपहर 04:14 से शाम 05:57 बजे तक।

    विजय मुहूर्त: दोपहर 02:22 से दोपहर 03:09 बजे तक।

    गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:17 से शाम 06:42 बजे तक।

    मां कूष्मांडा का प्रिय भोग:
    मां कूष्मांडा को नवरात्रि के चौथे दिन मालपुआ का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा माता को कद्दू से बनी मिठाई या पेठा और दही आदि भी अर्पित किए जाते हैं।

    नवरात्रि के चौथे दिन का शुभ रंग:
    नवरात्रि के चौथे दिन का शुभ रंग हरा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हरे रंग के वस्त्र धारण करने से मां कूष्मांडा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    नवरात्रि के चौथे दिन का प्रिय फूल:
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा का प्रिय रंग लाल है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा में लाल कमल, लाल गुड़हल और लाल गुलाब आदि शामिल करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां कूष्मांडा की कृपा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

    मां कूष्मांडा के प्रिय मंत्र:
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा के प्रिय मंत्रों का जाप करने से साधक को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। ये हैं मां के प्रिय मंत्र:

    मां कूष्मांडा का मंत्र (मंत्र):
    ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
    मां कूष्मांडा का बीज मंत्र:

    ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नमः
    मां कूष्मांडा का स्तुति मंत्र:
    या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

    मां कूष्मांडा की आरती:
    कुष्मांडा जय जग सुखदानी।

    मुझ पर दया करो महारानी॥

    पिगंला ज्वालामुखी निराली।

    शाकंबरी मां भोली भाली॥

    लाखों नाम निराले तेरे ।

    भक्त कई मतवाले तेरे॥

    भीमा पर्वत पर है डेरा।

    स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥

    सबकी सुनती हो जगदंबे।

    सुख पहुंचती हो मां अंबे॥

    तेरे दर्शन का मैं प्यासा।

    पूर्ण कर दो मेरी आशा॥

    मां के मन में ममता भारी।

    क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥

    तेरे दर पर किया है डेरा।

    दूर करो मां संकट मेरा॥

    मेरे कारज पूरे कर दो।

    मेरे तुम भंडारे भर दो॥

    तेरा दास तुझे ही ध्याए।

    भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

  • मंदसौर और नीमच जिलें देशभर में पहले और दूसरे स्थान पर

    मंदसौर और नीमच जिलें देशभर में पहले और दूसरे स्थान पर

    ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर प्रदेश के सभी 55 जिलों में जनभागीदारी

    भोपाल
    मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय पोषण माह-2026 में पोषण जागरूकता और जनभागीदारी के प्रयासों में देश में तीसरा स्थान हासिल किया है। 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे तक प्रदेश में 1 करोड़ 9 लाख 66 हजार 805 गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज की गई हैं। इस उपलब्धि को और विशेष बनाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया के प्रभार वाले मंदसौर और नीमच जिलों ने राष्ट्रीय स्तर पर क्रमशः पहला और दूसरा स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश के सभी 55 जिलों की भागीदारी के साथ यह उपलब्धि पोषण को जनआंदोलन बनाने और आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, देखभाल तथा प्रारंभिक बाल विकास का सशक्त केंद्र बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करती है।

    देश के अग्रणी राज्यों में मध्यप्रदेश की उल्लेखनीय उपस्थिति
    राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे तक देश में कुल 11 करोड़ 91 लाख 64 हजार 823 गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज की गईं। इनमें बिहार 1 करोड़ 49 लाख 93 हजार 265 प्रविष्टियों के साथ पहले, महाराष्ट्र 1 करोड़ 38 लाख 66 हजार 923 के साथ दूसरे और मध्यप्रदेश 1 करोड़ 9 लाख 66 हजार 805 प्रविष्टियों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

    उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ 2 लाख 90 हजार 37, राजस्थान में 91 लाख 78 हजार 866, गुजरात में 84 लाख 23 हजार 561 और छत्तीसगढ़ में 71 लाख 93 हजार 724 प्रविष्टियां दर्ज की गईं। राष्ट्रीय स्तर पर 788 जिलों में से 785 जिलों की भागीदारी दर्ज की गई, जबकि मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों ने पोषण माह की गतिविधियों में सहभागिता की।

    मंदसौर और नीमच की उपलब्धि से प्रदेश को मिली विशेष पहचान
    प्रदेश के मंदसौर जिले ने राष्ट्रीय पोषण माह में पहला और नीमच जिले ने दूसरा स्थान हासिल किया है। दोनों जिले महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया के प्रभार वाले जिले हैं। राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष दो स्थानों पर इन जिलों की उपलब्धि प्रदेश में पोषण संबंधी गतिविधियों के व्यापक संचालन और जनभागीदारी को नई पहचान देती है।

    हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ है इस वर्ष की थीम
    भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत पोषण को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ 9 सितंबर 2026 को किया गया। इस वर्ष की मुख्य थीम ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण, देखभाल और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास से जुड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करना, समुदाय की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना तथा पोषण सेवाओं के प्रति सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही को प्रोत्साहित करना है।

    पांच प्रमुख विषयों पर केंद्रित हैं पोषण संबंधी गतिविधियां
    राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान 5 प्रमुख विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इनमें आहार में विविधता और पर्याप्त प्रोटीन की उपलब्धता, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं विविधतापूर्ण गर्म पका भोजन, सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही, बच्चों के पोषण के साथ प्रारंभिक विकास एवं सीखने के लिए प्रोत्साहन संबंधी गतिविधियां तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य के लिए सहायता शामिल हैं। इन विषयों के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित आहार, बेहतर पोषण व्यवहार, मातृ स्वास्थ्य और बच्चों के समग्र विकास के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है। इस अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों पर उपलब्ध सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के साथ समुदाय को पोषण संबंधी प्रयासों से जोड़ना भी है।

     

  • सात प्रमुख क्षेत्रों के 46 प्रदर्शन संकेतकों से होगा मूल्यांकन; गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थी हितों पर विशेष जोर

    सात प्रमुख क्षेत्रों के 46 प्रदर्शन संकेतकों से होगा मूल्यांकन; गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थी हितों पर विशेष जोर

    भोपाल
    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने विश्वविद्यालयों में रिक्त शैक्षणिक पदों पर भर्ती की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने तथा प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के अंतर्गत आवंटित राशि का निर्धारित समय-सीमा में उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री  परमार ने डिजिटल मूल्यांकन की कार्ययोजना पर प्राथमिकता से क्रियान्वयन करने को कहा। उन्होंने स्वीकृत विकास योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे शैक्षणिक व्यवस्था सुदृढ़ होगी और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

    मंत्री  परमार की उपस्थिति में मंगलवार को मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में उच्च शिक्षा विभाग और प्रदेश के 17 सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के बीच डिलीवरी पार्टनरशिप एग्रीमेंट (DPA) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल के माध्यम से विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक, प्रशासनिक, वित्तीय एवं संस्थागत प्रगति का आंकलन निर्धारित लक्ष्यों और सत्यापित उपलब्धियों के आधार पर किया जाएगा। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना तथा संस्थानों को निरंतर सुधार के लिए प्रोत्साहित करना है।

    कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, उप सचिव  लक्ष्मीकांत खरे सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलसचिव उपस्थित रहे।

    सात प्रमुख क्षेत्रों में 46 प्रदर्शन संकेतकों से होगा मूल्यांकन
    डिलीवरी पार्टनरशिप एग्रीमेंट के अंतर्गत विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन का मूल्यांकन सात प्रमुख क्षेत्रों में निर्धारित 46 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPIs) के आधार पर किया जाएगा। इनमें शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन, सुशासन एवं डिजिटल परिवर्तन, शोध एवं नवाचार, संस्थागत गुणवत्ता, वित्तीय प्रबंधन, रोजगारपरकता तथा विद्यार्थी कल्याण एवं सतत विकास शामिल हैं।

    शैक्षणिक गुणवत्ता के आंकलन में शैक्षणिक कैलेंडर का समयबद्ध पालन, परीक्षाओं के परिणाम समय पर घोषित करना, पाठ्यक्रमों का निर्धारित अवधि में संचालन और विद्यार्थियों की उत्तीर्णता में सुधार जैसे बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा। प्रशासनिक दक्षता के लिए समर्थ ईआरपी (SAMARTH ERP) का प्रभावी क्रियान्वयन, ऑनलाइन विद्यार्थी सेवाएं, ई-ऑफिस तथा शिकायतों का समयबद्ध निराकरण भी मूल्यांकन का हिस्सा होंगे।

    शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशनों, बाह्य शोध अनुदान, शोध परियोजनाओं, पेटेंट और प्राध्यापकों के प्रशिक्षण को प्रोत्साहित किया जाएगा। संस्थागत गुणवत्ता के अंतर्गत राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) से प्रत्यायन, राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग रूपरेखा (NIRF) में सहभागिता और शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से सुधार पर जोर रहेगा।

    वित्तीय प्रबंधन के तहत स्वीकृत अनुदान का नियमानुसार उपयोग, उपयोगिता प्रमाण-पत्रों की समय पर प्रस्तुति तथा लेखा एवं अंकेक्षण संबंधी अनुपालना का आकलन किया जाएगा। विद्यार्थियों की रोजगारपरकता बढ़ाने के लिए प्लेसमेंट, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, कौशल प्रमाणन, उद्योग सहभागिता, स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन गतिविधियों को महत्व दिया जाएगा। वहीं, छात्रवृत्ति कवरेज, वंचित वर्गों एवं छात्राओं की शैक्षणिक निरंतरता, शिकायत निवारण, समावेशी परिसर और हरित परिसर से जुड़ी गतिविधियां भी मूल्यांकन में शामिल होंगी।

    सत्यापित आंकड़ों के आधार पर तय होंगे लक्ष्य
    इस व्यवस्था में शैक्षणिक सत्र 2025-26 को आधार वर्ष बनाया गया है। विश्वविद्यालयों को इस अवधि के वास्तविक प्रदर्शन से संबंधित आंकड़े और उनके समर्थन में आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सत्यापन के बाद प्रत्येक विश्वविद्यालय की आधारभूत स्थिति निर्धारित की जाएगी।

    वर्ष 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लक्ष्यों की प्राप्ति का आकलन आधार वर्ष के सत्यापित आंकड़ों के सापेक्ष किया जाएगा। इससे विश्वविद्यालयों की प्रगति का निष्पक्ष एवं प्रमाण-आधारित मूल्यांकन संभव होगा। नियमित समीक्षा के दौरान निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति में कमी पाए जाने पर समयबद्ध सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर रहेगा।

    गुणवत्ता, जवाबदेही और विद्यार्थी हितों पर केंद्रित पहल
    डिलीवरी पार्टनरशिप एग्रीमेंट विश्वविद्यालयों को अपनी उपलब्धियों का आकलन करने, सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने और स्पष्ट कार्ययोजना बनाने में मदद करेगा। इसके साथ ही शैक्षणिक पदों की शीघ्र पूर्ति, पीएम-उषा की राशि का समयबद्ध उपयोग और स्वीकृत विकास कार्यों का समय पर क्रियान्वयन उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    प्रदर्शन आधारित इस व्यवस्था से विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक दक्षता और संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर सुविधाएं और रोजगारपरक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में संस्थागत प्रयासों को गति मिलेगी।

     

  • ​कुरुषनार का कायकल्प: जहाँ कल तक गूंजती थीं बारूद की आहटें

    ​कुरुषनार का कायकल्प: जहाँ कल तक गूंजती थीं बारूद की आहटें

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ का नाम सुनते ही कभी बीहड़, संवेदनशीलता और सुरक्षा चुनौतियों की तस्वीर जेहन में उभरती थी। लेकिन आज वही अबूझमाड़ बदलाव की एक नई और सुखद इबारत लिख रहा है। छत्तीसगढ के नारायणपुर जिले के विकासखंड ओरछा स्थित कुरुषनार की फिजाओं में अब डर की परछाई नहीं, बल्कि बच्चों की खिलखिलाहट और पढ़ाई का नया उत्साह है। कुरुषनार का यह परिसर, जो कभी सुरक्षा बलों का एक मजबूत कैंप हुआ करता था और जहाँ से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था संचालित होती थी, आज 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत शिक्षा और उम्मीदों का जगमगाता केंद्र बन चुका है। समय के साथ जब क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति में अभूतपूर्व सुधार आया और बलों ने अगले संवेदनशील गंतव्य की ओर रुख किया, तो जिला प्रशासन ने इस खाली परिसर का ऐसा रचनात्मक उपयोग किया जिसने पूरे राज्य के सामने जनकल्याण की एक अनूठी मिसाल कायम कर दी है।

    *बंदूक की छांव से 'विद्या के मंदिर' तक का सफर*

    *अब वनांचल के बच्चे सीखेंगे Artificial Intelligence (AI)*
     ​बंदूक की छांव से निकलकर विद्या के मंदिर में तब्दील हो चुके इस परिसर में वर्तमान में 110 मासूम बच्चे पूर्णतः सुरक्षित वातावरण में रहकर अपने सपनों को नए पंख लगा रहे हैं। दूरस्थ और वनांचल क्षेत्र होने के कारण यहाँ के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित आवास हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में पूर्व सुरक्षा शिविर का आश्रम शाला के रूप में रूपांतरण होने से न केवल बच्चों को रहने के लिए एक महफ़ूज़ छत मिली, बल्कि उनके सर्वांगीण और व्यक्तित्व विकास के लिए एक अनुकूल शैक्षणिक माहौल भी तैयार हुआ है।

    *डिजिटल तकनीक, कोडिंग और आधुनिक विज्ञान की नई खोजों से रूबरू होंगे बच्चे*

    दूरस्थ अंचल के इन बच्चों को आधुनिक दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने योग्य बनाने के लिए प्रशासन ने एक दूरदर्शी खाका तैयार किया है। जिला खनिज न्यास (DMF) के माध्यम से इस परिसर को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने का प्रस्ताव बनाया गया है। इसके अंतर्गत अबूझमाड़ के बच्चे अब केवल पारंपरिक पढ़ाई तक सीमित न रहकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लैब के जरिए डिजिटल तकनीक, कोडिंग और आधुनिक विज्ञान की नई खोजों से रूबरू होंगे। इसके साथ ही, बच्चों में स्वाध्याय, साहित्य और सामान्य ज्ञान के प्रति रुचि जगाने के लिए एक समृद्ध पुस्तकालय का निर्माण भी प्रस्तावित है, जो उनकी कल्पनाशीलता और विचारों को विस्तार देगा। 

    बच्चों के शारीरिक विकास, अनुशासन, टीम भावना और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक आधुनिक खेल मैदान भी तैयार किया जाएगा, जहाँ वे अपनी छिपी हुई प्रतिभा को निखार सकेंगे।

    *सुरक्षा से विकास और उज्ज्वल भविष्य की नई भोर*

    Qकुरुषनार का यह ऐतिहासिक रूपांतरण केवल एक इमारत का बदलाव मात्र नहीं है, बल्कि यह इस बात का सजीव प्रमाण है कि जब सुरक्षा का विश्वास कायम होता है, तो विकास के द्वार स्वतः खुल जाते हैं। कुरुषनार की यह अनूठी पहल पूरे राज्य को यह संदेश देती है कि जहाँ कभी सुरक्षा का कड़ा पहरा था, आज वहाँ AI तकनीक और पुस्तकों के जरिए नौनिहालों का उज्ज्वल भविष्य गढ़ा जा रहा है। यह सकारात्मक बदलाव अबूझमाड़ के बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें कल के प्रतिभावान नागरिक, इंजीनियर, वैज्ञानिक और खिलाड़ी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।