Author: NewseDay

  • TVS Radeon Update: कम कीमत में 69 KM माइलेज वाली बाइक, तीन वेरिएंट और नए ग्राफिक्स के साथ हुई पेश

    TVS Radeon Update: कम कीमत में 69 KM माइलेज वाली बाइक, तीन वेरिएंट और नए ग्राफिक्स के साथ हुई पेश

    नई दिल्ली
    टीवीएस ने अपनी पॉपुलर कम्यूटर मोटरसाइकिल को अपडेट कर दिया है. हम बात कर रहे हैं टीवीएस रेडियॉन (TVS Radeon) के 2026 एडिशन की. ये बाइक ऑल-एलईडी लाइटिंग, रिवाइज्ड ग्राफिक्स और नए कलर ऑप्शन के साथ आती है. कंपनी ने इस मोटरसाइकिल को ठीक त्योहारी सीजन की शुरुआत में लॉन्च किया है। 

    त्योहारों के वक्त गाड़ियों की बिक्री बढ़ती है. इस मौके का फायदा उठाने के लिए कंपनी ने टीवीएस रेडियॉन का अपडेटेड वर्जन मैदान में उतारा है. आइए जानते हैं नई रेडियॉन में हमें क्या कुछ खास देखने को मिलेगा। 
     
    कितनी है कीमत? 
    नई टीवीएस रेडियॉन (TVS Radeon) की कीमत 67,100 रुपये एक्स-शोरूम से शुरू होती है और 73,100 रुपये एक्स-शोरूम तक जाती है. ये बाइक तीन वेरिएंट्स- बेस, डिजी-ड्रम और डिजी-डिस्क में आएगी. बेस वेरिएंट की कीमत पहले के मुकाबले 1250 रुपये ज्यादा है. वहीं टॉप वेरिएंट यानी डिजी-डिस्क पहले के मुकाबले सस्ता है। 

    सभी वेरिएंट्स की बात करें, तो बेस वेरिएंट की कीमत 67,100 रुपये एक्स शोरूम है. वहीं डिजी-ड्रम की कीमत 70,100 रुपये और टॉप स्पेक्स डिजी-डिस्क की कीमत 73,100 रुपये एक्स शोरूम है। 

    क्या है बाइक में क्या? 
    अपडेट्स की बात करें, तो नई टीवीएस रेडियॉन में एलईडी लाइटिंग सभी वेरिएंट्स में मिलेगी. इसके अलावा नई मोटरसाइकिल में नया हेडलैम्प दिया गया है, जो सिग्नेचर डीआरएल के साथ आता है. बाइक में एलईडी टेललैम्प और एलईडी टर्न इंडीकेटर मिलता है. ये सभी फीचर्स स्टैंडर्ड हैं

    डिजी-डिस्क में फ्रंट डिस्क ब्रेक मिलता है, जबकि अन्य दोनों वेरिएंट्स में ड्रम ब्रेक दिए जाते हैं. मोटरसाइकिल में अपडेटेड ग्राफिक्स मिलेंगे. बेस वेरिएंट में ब्लैक और ब्लू के अलावा ब्लैक और रेड में आता है. वहीं डिजी ड्रम में ब्लैक के साथ ऑरेंज और रेड के साथ ब्लैक कलर का विकल्प मिलेगा। 

    टॉप वेरिएंट डिजी डिस्क में ब्लैक के साथ ऑरेंज और रेड के साथ ब्लैक डीटी मिलता है. इसके अलावा बाइक के फीचर्स में को बदलाव नहीं किया गया है. बाइक में 109.7 सीसी का एयर और ऑयल कूल्ड इंजन आता है, जो 8 एचपी की पावर और 8.7 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है।  

    बाइक में 10 लीटर कैपेसिटी वाला फ्यूल टैंक मिलता है. टीवीएस रेडियॉन का क्लेम्ड माइलेज 69.3 किलोमीटर प्रति लीटर का है. रेडियॉन में यूएसबी चार्जिंग और कलर डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है। 

  • WhatsApp यूजर्स की मौज! बर्थडे विश से जरूरी मैसेज तक होंगे शेड्यूल, जानें कब मिलेगा नया फीचर

    WhatsApp यूजर्स की मौज! बर्थडे विश से जरूरी मैसेज तक होंगे शेड्यूल, जानें कब मिलेगा नया फीचर

    मुंबई 

    WhatsApp पर किसी को जन्मदिन की बधाई देना भूल जाते हैं या फिर जरूरी मैसेज भेजने के लिए सही समय का इंतजार करना पड़ता है, तो जल्द ही आपकी यह परेशानी दूर हो सकती है. WhatsApp एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है कि, जिसकी मदद से यूजर्स पहले से मैसेज लिखकर उसका समय तय कर सकेंगे. इसके बाद मैसेज अपने आप तय टाइम पर भेज दिया जागा. खास खास बात यह है कि इस फीचर से सिर्फ टेक्स्ट ही नहीं, बल्कि फोटो और वीडियो भी शेड्यूल किए जा सकेंगे. यानी मैसेज भेजने के लिए उस वक्त फोन हाथ में रखने या ऑनलाइन रहने की जरूरत नहीं होगी। 

    कुछ Android यूजर्स के लिए शुरू हुई टेस्टिंग
    रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp फिलहाल इस फीचर की टेस्टिंग कुछ Android बीटा यूजर्स के साथ कर रहा है. WABetaInfo की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह सुविधा WhatsApp के Android बीटा वर्जन 2.26.40.7 इस्तेमाल करने वाले कुछ यूजर्स को मिल रही है. आने वाले हफ्तों में इसे और यूजर्स के लिए जारी किया जा सकता है. हालांकि, कंपनी ने अभी तक सभी यूजर्स के लिए इसके रोलआउट की कोई तय तारीख नहीं बताई है। 

    कैसे काम करेगा मैसेज शेड्यूल करने वाला फीचर?
    इस फीचर का इस्तेमला करना काफी आसान हो सकता है. यूजर को सबसे पहले WhatsApp की किसी चैट में जाकर मैसेज लिखना होगा. इसके बाद सेंड बटन को दबाकर रखने पर, अगर उसके अकाउंट में यह सुविधा उपलब्ध है, तो मैसेज भेजने की तारीख और समय चुनने का ऑप्शन दिखाई दे सकता है. टाइम फिक्स करने के बाद मैसेज शेड्यूल हो जाएगा और चुने गए समय पर अपने आप भेज दिया जाएगा। 

    टेक्स्ट के साथ फोटो और वीडियो भी कर सकेंगे शेड्यूल
    इस फीचर में यूजर्स को सिर्फ टेक्स्ट मैसेज शेड्यूल करने की सुविधा नहीं मिलेगी. रिपोर्ट के मुताबिक, लिंक, फोटो और वीडियो को भी तय समय पर भेजने के लिए शेड्यूल किया जा सकेगा. हालांकि, एक बार में केवल एक फोटो या वीडियो शेड्यूल करने का विकल्प मिल सकता है. फोटो भेजने से पहले यूजर्स उसमें बदलाव कर सकेंगे और जरूरत के हिसाब से कैप्शन भी जोड़ सकेंगे। 

    10 मिनट से लेकर दो हफ्ते तक का समय चुनने का विकल्प
    रिपोर्ट के मुताबिक, यूजर्स मैसेज को कम से कम 10 मिनट बाद और ज्यादा से ज्यादा दो हफ्ते तक के लिए शेड्यूल कर सकेंगे. इसका फायदा यह होगा कि जन्मदिन, सालगिरह या किसी जरूरी काम से जुड़ा मैसेज पहले ही तैयार करके रखा जा सकेगा. तय समय आने पर मैसेज अपने आप चला जाएगा. इसके लिए ऐप को खुला रखना या फोन को ऑनलाइन रखना भी जरूरी नहीं होगा। 

    प्राइवेट और ग्रुप चैट, दोनों में करेगा काम
    यह फीचर सिर्फ किसी एक व्यक्ति को मैसेज भेजने तक सीमित नहीं रह सकता. रिपोर्ट के मुताबिक, इसे प्राइवेट चैट से साथ ग्रुप चैट में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. हालांकि ग्रुप मैसेज को लेकर एक खास बात सामने आई है. शेड्यूल करते समय ग्रुप में जो सदस्य मौजूद होंगे उन्हें ही वह मैसेज मिल सकता है. बाद में ग्रुप में जुड़ने वाले सदस्यों को पहले से शेड्यूल किया गया मैसेज मिलने की उम्मीद नहीं है। 

    भेजने से पहले शेड्यूल मैसेज डिलीट कर सकेंगे
    अगर आपने कोई मैसेज शेडयूल कर दिया है, लेकिन बाद में उसे भेजने का इरादा बदल जाता है तो उसे डिलीट करने का ऑप्शन भी मिल सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, यूजर्स चैट की जानकारी वाले सेक्शन में जाकर शेड्यूल किए गए मैसेज देख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटा सकेंगे. अगर मैसेज भेजे जाने से पहले ही डिलीट कर दिया जाता है, तो सामने वाले व्यक्ति को इसकी सूचना मिलने की उम्मीद नहीं है। 

    आम यूजर्स को कब मिलेगा यह फीचर?
    फिलहाल WhatsApp के शेड्यूल्ड मैसेज फीचर की टेस्टिंग कुछ Android बीटा यूजर्स के साथ चल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में इसे ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाया जा सकता है. हालांकि, WhatsApp ने अभी तक इसके ग्लोबल रोलआउट की आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं किया है. ऐसे में आम यूजर्स को इस फीचर के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। 

  • खेती को लाभकारी बनाने पर योगी सरकार का जोर, 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी

    खेती को लाभकारी बनाने पर योगी सरकार का जोर, 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी

    योगी सरकार का खेती को लाभकारी बनाने पर जोर, 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी

    12 से 18 साल से चकबंदी में फंसे गांवों को मिली राहत, लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान

    उत्तराधिकार और नामांतरण के लंबित मामलों के लिए 15 अक्टूबर से विशेष अभियान

    चकबंदी न्यायालयों में तीन साल से पुराने वादों का प्राथमिकता से होगा निस्तारण

    लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी, अधिकारियों को निरीक्षण के निर्देश

    लखनऊ

    योगी सरकार ने खेती को लाभकारी बनाने, किसानों को चकबंदी संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने और भूमि विवादों के निस्तारण में तेजी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इससे कृषकों को सरकार द्वारा चलाई जा रही लाभार्थीपरक योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। प्रदेश के 8 जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर दी गई है, जबकि वर्षों से लंबित मामलों को निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक विशेष अभियान चलाकर निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों का निस्तारण किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने लंबे समय से लंबित चकबंदी के मामलों में तेजी लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। इसी क्रम में चार जनपदों के छह गांवों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से अलग किया गया है। इनमें उन्नाव के अजगवां, पिडना, सादाबाद व बरेली का मगरासा गांव शामिल हैं। इन गांवों में पिछले 12 वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी। इसके अलावा बुलंदशहर के बराल गांव में सात वर्ष और बांदा के काजीपुर (गिरवान) गांव में दो वर्ष से चकबंदी की प्रक्रिया लंबित थी।

    इन गांवों में ग्राम विकास योजना के तहत कार्य होने, नदी के कटान से प्रभावित होने, चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होने, औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल होने, गुटबंदी और दलगत विवाद होने जैसे कारणों से प्रक्रिया आगे बढ़ाने में कठिनाइयां आ रही थीं। विशेष प्रयासों के बावजूद कार्य आगे नहीं बढ़ पाने के कारण इन्हें चकबंदी प्रक्रिया से अलग करने का निर्णय लिया गया।

    आठ जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी
    लंबे समय से लंबित मामलों को निस्तारित करते हुए आठ जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इनमें महराजगंज का बैसार गांव शामिल है, जहां 18 वर्षों से चकबंदी चल रही थी। बुलंदशहर के भीकमपुर और चित्रकूट के सिकरी सालिस गांव में 12 वर्षों से प्रक्रिया लंबित थी। इन तीनों गांवों में चकबंदी पूरी की गई। इसके अलावा बस्ती के औराडीहा व प्रतापगढ़ के देवलहा गांव में दो वर्षों से चल रही चकबंदी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। इन गांवों में उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-52(1) के तहत प्रक्रिया समाप्त की गई।

    उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के लिए विशेष अभियान
    चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने सभी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अभियान के दौरान संबंधित धाराओं के तहत शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।

    अधिकारियों को निदेशालय को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना होगा कि निर्धारित समयसीमा से अधिक अवधि का कोई भी निर्विवाद उत्तराधिकार या नामांतरण का मामला जनपद में लंबित नहीं है। अभियान की अवधि के बाद भी तय समयसीमा से अधिक समय तक लंबित रहने वाले निर्विवाद उत्तराधिकार के मामलों में संबंधित चकबंदी अधिकारी और चकबंदीकर्ता की पहचान कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

    तीन साल से पुराने वादों का प्राथमिकता पर निस्तारण
    चकबंदी न्यायालयों में तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सभी उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारियों को इस कार्य में तेजी लाने के लिए कहा गया है। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

    इसके साथ ही अधिकारियों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी मैनुअल के प्रस्तर 541 के अनुसार अपने न्यायालयों, अधीनस्थ चकबंदी न्यायालयों, कार्यालयों और चकबंदी अभिलेखों के बस्तों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण संबंधी टिप्पणी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध करानी होगी।

  • MP की 1.25 करोड़ लाडली बहनों को आज मिलेगा पैसा, मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे किस्त जारी

    MP की 1.25 करोड़ लाडली बहनों को आज मिलेगा पैसा, मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे किस्त जारी

    उमरिया 
    मध्य प्रदेश की करीब सवा करोड़ महिलाओं के लिए वो गुड न्यूज आ गई है, जिसका उन्हें इंतजार था। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 41वीं किस्त की  तारीख सामने आई है। सीएम मोहन यादव इस बार उमरिया जिले के मानपुर जनपद पंचायत अंतर्गत गुरुवाही ग्राम से आज 14 अक्टूबर को लाडली बहना योजना की अक्टूबर महीने की किस्त जारी करेंगे। उमरिया जिले से अन्य विकास कार्यों की सौगात देने के अलावा मुख्यमंत्री मोहन यादव लाडली बहनों के खाते मं 1500-1500 रुपये ट्रांसफर कर सकते हैं।

    हालांकि अभी तक इसे लेकर सरकार की ओर से आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन अधिकारियों से जानकारी मिली है कि उमरिया जिले से कल यानी आज 14 अक्टूबर को लाडली बहना योजना की किस्त जारी करंगे । पिछले महीने लाडली बहना योजना की किस्त 13 तारीख को जारी हो गई थी। मगर इस बार मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के चलते इस कार्यक्रम में देरी हुई है। उमरिया में होने वाले भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री लाडली बहनों के साथ संवाद भी कर सकते हैं।

    ऐसे चेक करें स्टेटस
    लाडली बहना योजना की अगली किस्त जारी होने से पहले अगर आप स्टेटस चेक करना चाहते हैं ताकि यह स्पष्ट हो जाए कि आपके खाते में पैसा आएगा या नहीं, तो ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर ऐसा कर सकते हैं। स्टेटस चेक करने के लिए लाडली बहना योजना के ऑफिशियल पोर्टल https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं। यहां आपको 'आवेदन एवं भुगतान की स्थिति' पर क्लिक करना है। अब अपने रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी और ओटीपी से लॉगिन करें। आपके खाते की जानकारी खुल जाएगी।

    महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को मजबूत कर रही योजना
    मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना, उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में निरंतर सुधार करना तथा परिवार के निर्णयों में उनकी भूमिका को सशक्त करना है। योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ परिवार की आर्थिक गतिविधियों में भी अधिक प्रभावी भागीदारी निभा सकें।

    योजना के अंतर्गत पात्र सामान्य लाभार्थी महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ प्राप्त करने वाली पंजीकृत पात्र महिलाओं को योजना के प्रावधानों के अनुसार प्रतिमाह 900 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। सहायता राशि आधार से जुड़े डीबीटी सक्रिय बैंक खातों में सीधे अंतरित की जाती है, जिससे भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी और सुविधाजनक बनी रहती है।

    जून 2023 से अब तक 40 किस्तों का नियमित अंतरण
    योजना के अंतर्गत जून 2023 में लगभग 1.25 करोड़ लाभार्थी महिलाओं को पहली मासिक आर्थिक सहायता राशि अंतरित की गई थी। सितंबर 2026 तक नियमित रूप से 40 किश्तों का भुगतान किया जा चुका है। अब 14 अक्टूबर को 41वीं किस्त जारी की जाएगी। इसके अतिरिक्त अगस्त 2023, अगस्त 2024, अगस्त 2025 और अगस्त 2026 में लाभार्थी महिलाओं को चार बार 250-250 रुपये की विशेष आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है।

    योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनके आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना में 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

    136 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन
    उमरिया जिले के गुरुवाही में आयोजित लाड़ली बहना योजना सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुल 14,415.93 लाख रुपये की लागत के 136 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन करेंगे। इनमें 8,731.55 लाख रुपये की लागत के 68 कार्यों का लोकार्पण और 5,684.41 लाख रुपये की लागत के 68 कार्यों का भूमि-पूजन शामिल है। इन विकास कार्यों में बांधवगढ़ और मानपुर विधानसभा क्षेत्रों के कार्य भी शामिल हैं। बांधवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 5,906.99 लाख रुपये की लागत के 18 कार्यों का लोकार्पण तथा 3,225.22 लाख रुपये की लागत के 46 कार्यों का भूमिपूजन किया जाएगा। वहीं, मानपुर विधानसभा क्षेत्र में 2,824.56 लाख रुपये की लागत के 50 कार्यों का लोकार्पण तथा 2,459.16 लाख रुपये की लागत के 22 कार्यों का भूमि-पूजन होगा।
    अम‍ित कुमार

     

  • दंतेवाड़ा की महिला किसान उत्पादक कंपनी को बड़ी उपलब्धि, CGCERT प्रमाणपत्र से बस्तर के उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

    दंतेवाड़ा की महिला किसान उत्पादक कंपनी को बड़ी उपलब्धि, CGCERT प्रमाणपत्र से बस्तर के उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

    बस्तर के जैविक वनोपजों को मिलेगी वैश्विक पहचान

    दंतेवाड़ा की महिला किसान उत्पादक कंपनी को मिला राष्ट्रीय जैविक प्रमाणपत्र

    वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में CGCERT की महत्वपूर्ण उपलब्धि, जनजातीय महिलाओं की आय बढ़ाने की नयी पहल

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ में पहली बार किसी महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा संग्रहित वनोपजों को राष्ट्रीय जैविक प्रमाणपत्र मिला है। दंतेवाड़ा जिले की माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड द्वारा संग्रहित इमली, महुआ और आम को भारत सरकार के राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के तहत जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त हुआ है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ प्रमाणीकरण समिति (CGCERT) की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से बस्तर के वनोपजों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान मिलने की राह खुली है। साथ ही कंपनी से जुड़ी 930 महिलाओं के लिए आय बढ़ाने के नए अवसर सृजित होंगे।

                 कंपनी से जुड़ी अधिकांश महिलाएं जनजातीय समुदायों की हैं और परंपरागत रूप से वनोपज संग्रहण करती हैं। जैविक प्रमाणपत्र मिलने से उनके उत्पादों की देश के प्रीमियम जैविक बाजारों तक पहुंच आसान होने के साथ निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। वर्तमान में कंपनी से 930 महिलाएं जुड़ी हैं। आने वाले समय में यह संख्या बढ़कर 2 हजार से अधिक होने की संभावना है।

                लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर में यह पहल आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से क्षेत्र में शांति और विकास के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। इसी क्रम में अब बस्तर की प्राकृतिक संपदा को स्थानीय महिलाओं की आर्थिक समृद्धि से जोड़ने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जैविक प्रमाणीकरण से वनोपजों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रीमियम जैविक बाजार उपलब्ध होने के साथ साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक निर्यात की संभावनाएं खुलेंगी। महिलाओं को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा।

                प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख तथा CGCERT के अध्यक्ष अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में प्रमाणीकरण की सभी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। CGCERT के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनिमेष गोवर्धन द्वारा इस प्रक्रिया में महिलाओं को आवश्यक समन्वय और तकनीकी सहयोग सुनिश्चित किया गया।

    10 हजार किसानों तक पहल के विस्तार की तैयारी

               वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में इस पहल का विस्तार बस्तर संभाग के लगभग 10 हजार पीजीएस (PGS) से जुड़े किसानों और अन्य महिला किसान उत्पादक कंपनियों तक किए जाने की संभावना है। इससे बस्तर को जैविक वनोपजों के प्रमुख उत्पादन एवं निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के साथ हजारों जनजातीय परिवारों की आय बढ़ाने के नए अवसर खुल सकेंगे।

  • साइबेरिया से सुदूर पूर्व तक भालुओं की बड़े पैमाने पर मौतें, रूस में 3,500 भालुओं को मारने की क्या है वजह?

    साइबेरिया से सुदूर पूर्व तक भालुओं की बड़े पैमाने पर मौतें, रूस में 3,500 भालुओं को मारने की क्या है वजह?

    मॉस्को 
    रूस में साल 2026 की शुरुआत से अक्टूबर के पहले हफ्ते तक करीब 3,500 भालुओं को मार दिया गया. इनमें सबसे ज्यादा भालू साइबेरिया और रूस के सुदूर पूर्वी इलाकों में मारे गए. क्षेत्रीय अधिकारियों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, साइबेरिया में करीब 2,200 और सुदूर पूर्व में 1,100 से ज्यादा भालुओं को मारा गया. इन आंकड़ों से पता चलता है कि रूस के कई इलाकों में भालुओं को मारने की कार्रवाई की गई है। 

    इस साल रूस में भालुओं के इंसानी बस्तियों में पहुंचने और लोगों पर हमले करने की कई घटनाएं सामने आई हैं. कुछ हमलों में लोगों की जान भी गई है. ऐसे मामलों में उन भालुओं को मारने की कार्रवाई की गई जिन्हें इंसानों के लिए खतरा माना गया. अब भालुओं की बढ़ती संख्या और लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। 

    रूस के साइबेरिया इलाके में करीब 2,200 भालुओं को मारा गया. इनमें क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र में सबसे ज्यादा 898 भालू मारे गए. वहीं, इरकुत्स्क क्षेत्र में 414, तुवा में 263 और खाकासिया में 204 भालुओं को मारा गया. रूस के सुदूर पूर्वी इलाकों में भी 1,100 से ज्यादा भालू मारे गए. इनमें बुर्यातिया में 356 और कामचटका में 207 भालुओं को मारा गया. ये आंकड़े साल 2026 की शुरुआत से अक्टूबर के पहले हफ्ते तक के हैं। 

    भालू क्यों कर रहे हैं लोगों पर हमले?
    रूस के कई इलाकों में भालुओं के इंसानी बस्तियों तक पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं. कुछ मामलों में भालुओं ने लोगों पर हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई. ऐसे में अधिकारियों ने उन भालुओं को मारने की कार्रवाई की जिन्हें लोगों के लिए खतरा माना गया. जंगल के पास रहने वाले लोगों और पर्यटकों के लिए भालुओं का सामना करना खतरे की वजह बन सकता है. भालू आम तौर पर खाने की तलाश में घूमते हैं. लेकिन जब वे इंसानी बस्तियों के पास पहुंचते हैं, तो लोगों और जानवरों के बीच टकराव का खतरा बढ़ जाता है। 

    खाने की तलाश में बस्तियों तक पहुंच रहे भालू
    भालुओं के इंसानी इलाकों में आने की एक बड़ी वजह खाने की कमी हो सकती है. जंगल में जब उन्हें खाने के लिए फल, बेर और दूसरे खाद्य पदार्थ कम मिलते हैं, तो वे दूसरी जगहों पर खाने की तलाश करते हैं. इस दौरान वे गांवों और शहरों के पास भी पहुंच सकते हैं. खुले में पड़ा कचरा और खाने की बची हुई चीजें भी भालुओं को इंसानी बस्तियों की ओर खींचती हैं. अगर उन्हें किसी जगह आसानी से खाना मिल जाता है, तो वे दोबारा वहां आ सकते हैं. मौसम में बदलाव और सूखे का असर भी जंगल में मिलने वाले खाने पर पड़ सकता है। 

    रूस में 3 लाख से ज्यादा भूरे भालू
    रूस में भूरे भालुओं की संख्या काफी ज्यादा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में इनकी आबादी करीब 3.08 लाख है. पिछले करीब 30 साल में इनकी संख्या दोगुने से ज्यादा हो गई है. भालुओं की बढ़ती संख्या और इंसानों पर हमलों को देखते हुए रूस में नए कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है. इनमें भालुओं के शिकार के नियमों में बदलाव और अलग-अलग इलाकों में उनकी संख्या को नियंत्रित करना शामिल है। 

    हालांकि, भालुओं को मारना ही इस समस्या का एकमात्र हल नहीं है. जंगल में खाने की कमी को समझना, कचरे को खुले में नहीं छोड़ना और लोगों को भालुओं से बचने के तरीके बताना भी जरूरी है. भालू जंगल के प्राकृतिक संतुलन का हिस्सा हैं. इसलिए लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ इन जानवरों को बचाना भी जरूरी है. इसके लिए ऐसे कदम उठाने होंगे जिनसे इंसानों और भालुओं के बीच टकराव कम हो सके। 

  • Dharavi Redevelopment: मुंबई की धारावी में शुरू हुआ पुनर्विकास का काम, हजारों परिवारों को मिलेंगे नए घर

    Dharavi Redevelopment: मुंबई की धारावी में शुरू हुआ पुनर्विकास का काम, हजारों परिवारों को मिलेंगे नए घर

    मुंबई 
    गौतम अडानी की कंपनी ने मुंबई के धारावी का कायाकल्प करने का काम शुरू कर दिया है. इसे लेकर अडानी एंटरप्राइजेज के डायरेक्टर प्रणव अडानी ने सोमवार को माटुंगा में 22 एकड़ के पुनर्वास हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए भूमि पूजन किया. इसमें एशिया की सबसे बड़ी अनौपचारिक बस्तियों में से एक धारावी के पात्र निवासियों के लिए 10,432 घरों का निर्माण शुरू कर दिया गया है। 

    इस प्रोजेक्ट में होंगे 10 टावर
    Gautam Adani की कंपनी की ओर से दिए गए बयान को देखें, तो मुंबई घारावी के इस प्रोजेक्ट को अडानी नवभारत डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (ANDPL) पूरा करेगी. यह धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट के लिए बनाई गई एक स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) कंपनी है. इस प्रोजेक्ट में 10 टावर होंगे, जिनमें 10,432 पुनर्वास अपार्टमेंट तैयार किए जाएंगे और 1,379 कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूनिट्स भी होंगी। 

    'हर परिवार, सुरक्षित घर का हकदार'
    Adani Enterprises के डायरेक्टर प्रणव अडानी ने कहा, 'धारावी में रहने वाला हर परिवार एक ऐसे घर का हकदार है, जहां वे सुरक्षित महसूस करें और भविष्य की योजना बना सकें. हम जानते हैं कि धारावी के परिवारों के लिए इसका क्या मतलब है. माटुंगा में, हम 10 टावर बना रहे हैं जिनमें 10,432 घर और 1,379 कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूनिट्स होंगी. हम ऐसे इलाके बना रहे हैं, जहां ये परिवार बेहतर ढंग से रह सकें और अपने बच्चों के लिए एक उज्ज्वल भविष्य बना सकें। 

    इतना बड़ा होगा धारावी वालों का नया घर
    प्रणव अडानी के मुताबिक, इन-सीटू (मौजूदा जगह पर) पुनर्वास योजना के तहत धारावी के पात्र निवासियों को 350 वर्ग फुट के घर मिलेंगे. माटुंगा में सबसे पहले सेक्टर 6 और 1 के निवासियों को घर मिलेंगे, इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर धारावी के अन्य पात्र निवासियों के लिए लगभग 4,500 अपार्टमेंट उपलब्ध कराए जाएंगे। 

    हर टावर में 37 से 39 मंजिलें होंगे, जिनमें 10 से 12 पैसेंजर लिफ्ट और दो खास फायर लिफ्ट होंगी. दो और लिफ्ट कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूनिट्स के लिए होंगी. प्लान की गई सुविधाओं में किंडरगार्टन, कम्युनिटी हॉल, पोडियम गार्डन, बैठने की जगह, सोसाइटी ऑफिस और पूजा स्थल शामिल हैं। 

    हर रिहैबिलिटेशन बिल्डिंग में कमर्शियल जगह का 10% हिस्सा कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव के लिए रेवेन्यू जुटाने के लिए रिजर्व होगा. ANDPL हैंडओवर के बाद 10 साल तक बिल्डिंग और शेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर का रखरखाव करेगा। 

    कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट? 
    इन टावरों को महाराष्ट्र सरकार के तहत धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट/स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (DRP/SRA) को तीन चरणों में सौंपा जाएगा. पहले पांच टावर मार्च 2029 तक, अगले दो अगस्त 2029 तक और बाकी तीन अगस्त 2030 तक सौंपे जाने की योजना है। 

    इस प्रोजेक्ट में US की Sasaki, UK की Buro Happold, मुंबई की StudioPOD, आर्किटेक्ट हफीज कॉन्ट्रैक्टर, P&T और ARC Studio के साथ-साथ सिंगापुर के अर्बन-प्लानिंग एक्सपर्ट्स की डिजाइन, इंजीनियरिंग और अर्बन-प्लानिंग की स्पेशिएलिटी का इस्तेमाल किया जा रहा है।  

    भूमि पूजन कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता शामिल हुए. इसके साथ ही यहां मौजूद DRP/SRA के सीईओ महेंद्र कल्याणकर ने कहा कि यह प्रोजेक्ट धारावी के परिवारों के लिए एक अहम कदम है. हमारा ध्यान सुरक्षित, आधुनिक घर और बेहतर जीवन के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर देने पर है। 

    धारावी वालों को दिखाई झलक
    ANDPL के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर अनिल सरदाना ने बताया कि 22,500 स्क्वायर फीटट में फैले धारावी एक्सपीरियंस सेंटर ने निवासियों को प्लान किए गए घरों और इलाकों की पहली झलक दिखाई. कंस्ट्रक्शन शुरू होने के साथ, हमारा ध्यान डिलीवरी और लंबे समय तक रखरखाव पर है। 

    उन्होंने कहा कि इस सेंटर में लाइफ-साइज सैंपल घर, 3D वॉकथ्रू और इंटरैक्टिव डिस्प्ले हैं जो घर, काम की जगह, सुविधाएं, ट्रांसपोर्ट और खुली जगहों को दिखाते हैं. बड़े रीडेवलपमेंट प्लान में दुकानों, स्कूलों, हेल्थकेयर सुविधाओं, पार्कों, पूजा स्थलों, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और दूसरे सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एक मिक्स्ड-यूज टाउनशिप बनाने का प्लान है, जिसमें जरूरी सेवाएं 15 मिनट की पैदल दूरी के अंदर होंगी। 

    Dharavi में रहते हैं 10 लाख लोग 
    गौरतलब है कि मुंबई का धारावी, जहा 10 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं, एक घनी आबादी वाला इलाका है. यहां एक बड़ी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था है और कई छोटे पैमाने के मैन्युफैक्चरिंग और कमर्शियल उद्यम हैं. रीडेवलपमेंट का मकसद घरों और सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना तो है ही, इसके साथ योग्य निवासियों को उचित जगह देना और स्थानीय आजीविका को सहारा देना भी है। 

  • नवरात्रि विशेष: मां दुर्गा के वाहन जंगली जानवर क्यों होते हैं? जानिए पौराणिक मान्यता

    नवरात्रि विशेष: मां दुर्गा के वाहन जंगली जानवर क्यों होते हैं? जानिए पौराणिक मान्यता

    शारदीय नवरात्रि : मां दुर्गा के वाहन जंगली जानवर ही क्यों होते हैं? यह सवाल केवल धार्मिक मान्यता से नहीं, बल्कि प्रकृति, शक्ति और मनुष्य के भीतर छिपी प्रवृत्तियों से भी जुड़ा हुआ है. मां दुर्गा को आदिशक्ति, साहस और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी माना जाता है. उनके विभिन्न स्वरूपों के साथ अलग-अलग वाहन जुड़े हैं और इनमें अधिकांश वाहन शक्तिशाली और जंगलों में स्वतंत्र रहने वाले हैं. यह केवल एक संयोग नहीं, बल्कि इनके पीछे एक खास मान्यता भी है.

    मां दुर्गा का सबसे मुख्य वाहन सिंह है. सिंह को जंगल का शक्तिशाली और निर्भीक जीव माना जाता है. वह अपनी शक्ति, साहस और पराक्रम के लिए जाना जाता है. मां दुर्गा का सिंह पर सवार होना, इस बात का प्रतीक है कि शक्ति जब धर्म के पक्ष में होती है तो वह अहंकार, अत्याचार और आसुरी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण स्थापित कर सकती है. सिंह को मां के साहस और निर्भीकता से भी जोड़ा जाता है. देवी के हाथों में शस्त्र और उनके साथ सिंह का होना यह संदेश देता है कि केवल शक्ति का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस शक्ति का सही दिशा में उपयोग भी जरूरी है.

    कई चित्रों और धार्मिक परंपराओं में मां दुर्गा को बाघ के साथ भी दर्शाया जाता है. उसमें आक्रामकता, गति, एकाग्रता और शिकार पर नियंत्रण जैसी विशेषताएं होती हैं. इसलिए बाघ को देवी की प्रचंड शक्ति और सक्रिय ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. सिंह हो या बाघ, दोनों ही मनुष्य के नियंत्रण से बाहर रहने वाले वन्य जीव हैं. देवी का उन पर सवार होना यह दर्शाता है कि दिव्य शक्ति उन ताकतों पर भी नियंत्रण रख सकती है जिन्हें सामान्य मनुष्य नियंत्रित नहीं कर सकता.

    यहां जंगल का अर्थ भी महत्वपूर्ण है. जंगल ऐसी जगह है जहां प्रकृति अपने मूल और स्वतंत्र स्वरूप में दिखाई देती है. वहां रहने वाले जीव अपनी प्राकृतिक शक्ति के साथ जीवन जीते हैं. मां दुर्गा को प्रकृति की मूल शक्ति माना गया है. इसलिए उनके साथ ऐसे जीवों का जुड़ाव प्रकृति और शक्ति के संबंध को दर्शाता है. देवी केवल घर-परिवार की सुख-समृद्धि की शक्ति नहीं हैं, बल्कि वे प्रकृति के उस प्रचंड रूप का भी प्रतिनिधित्व करती हैं जो जरूरत पड़ने पर विनाशकारी शक्तियों का अंत कर सकता है.

    सिंह-बाघ का असली मतलब क्या है?
    मां दुर्गा के वाहन का एक अर्थ मनुष्य के भीतर मौजूद पशु प्रवृत्तियों से भी है. क्रोध, अहंकार, भय, लोभ और हिंसा जैसी प्रवृत्तियां जब अनियंत्रित हो जाती हैं तो मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करती हैं. सिंह और बाघ जैसी शक्तिशाली प्रवृत्तियों पर देवी का विराजमान होना यह संदेश देता है कि विवेक और चेतना के द्वारा अपनी आंतरिक शक्तियों को नियंत्रित किया जा सकता है. शक्ति को दबाना नहीं, बल्कि उसे सही दिशा देना ही देवी के स्वरूप का संदेश है.

    इस तरह मां दुर्गा के वाहन केवल सवारी के साधन नहीं हैं. वे देवी के गुणों, प्रकृति की शक्ति और मनुष्य के भीतर मौजूद प्रवृत्तियों के प्रतीक हैं. सिंह और बाघ जैसे वाहन यह संदेश देते हैं कि वास्तविक शक्ति वही है जो साहस के साथ-साथ नियंत्रण, विवेक और धर्म का साथ रखे. यही कारण है कि मां दुर्गा के वाहन के रूप में जंगल के शक्तिशाली जीवों की कल्पना भारतीय धार्मिक परंपरा में विशेष अर्थ रखती है.

  • MP News: अमित शाह का फिर होगा मध्य प्रदेश दौरा, ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की रखेंगे नींव

    MP News: अमित शाह का फिर होगा मध्य प्रदेश दौरा, ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की रखेंगे नींव

    ग्वालियर 
     29 अक्टूबर का दिन ग्वालियर और मध्यप्रदेश के लिए एक बड़ी सौगात लेकर आने वाली है. देश के गृहमंत्री अमित शाह ग्वालियर आने वाले हैं और वे यहां एशिया के सबसे बड़े और ग्वालियर में प्रस्तावित टेलकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन का भूमिपूजन करेंगे. अमित शाह का ये 26 दिनों में मध्य प्रदेश का दूसरा दौरा होगा, इससे पहले वे 3 अक्टूबर को भोपाल आए थे। 

    ग्वालियर बनेगा एशिया का सबसे बड़ा टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन
    हाल ही में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से ग्वालियर में एशिया का सबसे बड़ा टेलकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की सौगात मिली थी. ये देश के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है. इस उद्योगिक प्रोजेक्ट के ज़रिए टेलीकॉम क्षेत्र में ग्वालियर के लिए रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे. 5500 करोड़ रु के निवेश वाली इस परियोजना का ग्वालियर के साडा क्षेत्र में भूमिपूजन करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दौरा प्रस्तावित है. हालांकि, पहले ये दौरा 12 अक्टूबर का माना जा रहा था लेकिन तारीखों में बदलाव हुआ है। 

    अमित शाह ने सिंधिया का आमंत्रण स्वीकारा
    प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया, '' केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर के टेलकॉम मैनुफैक्चरिंग जोन के भूमिपूजन के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को आमंत्रित किया था, जिस पर उन्होंने 29 अक्टूबर के लिए हामी भरी है. वे तय तारीख पर ग्वालियर दौरे पर रहेंगे और क्षेत्र को बड़ी सौगात देंगे। 

    'हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार'
    ऊर्जा मंत्री ने आगे कहा, ''29 अक्टूबर को इस कार्यक्रम में 24 कंपनियों की इकाइयों का भूमिपूजन होगा और इन इकाइयों से करीब 10 हज़ार युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा. इस टेलीकॉम मैनुफैक्चरिंग जोन का मुख्य फोकस ऑप्टिकल फाइबर, सेमीकंडर और 5जी-6जी तकनीक से जुड़े उपकरणों के निर्माण रिसर्च सुर इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा। 

    'फिर बदलेगी ग्वालियर में उद्योग की तस्वीर'
    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का कहना है कि, ये टेलीकॉम मैन्युफ़ैक्चरिंग जोन ग्वालियर क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि बनेगा और जो ग्वालियर उद्योग विहीन हो गया था, वहां एक बार फिर रोजगार का सृजन होगा। 

  • MP News: पोषण अभियान में मंदसौर और नीमच का कमाल, देशभर में हासिल किया पहला और दूसरा स्थान

    MP News: पोषण अभियान में मंदसौर और नीमच का कमाल, देशभर में हासिल किया पहला और दूसरा स्थान

    मध्यप्रदेश  राष्ट्रीय पोषण माह में देश में तीसरे स्थान पर

    1.09 करोड़ से अधिक गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज
    मंदसौर और नीमच जिलें देशभर में पहले और दूसरे स्थान पर
    ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर प्रदेश के सभी 55 जिलों में जनभागीदारी

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय पोषण माह-2026 में पोषण जागरूकता और जनभागीदारी के प्रयासों में देश में तीसरा स्थान हासिल किया है। 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे तक प्रदेश में 1 करोड़ 9 लाख 66 हजार 805 गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज की गई हैं। इस उपलब्धि को और विशेष बनाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया के प्रभार वाले मंदसौर और नीमच जिलों ने राष्ट्रीय स्तर पर क्रमशः पहला और दूसरा स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश के सभी 55 जिलों की भागीदारी के साथ यह उपलब्धि पोषण को जनआंदोलन बनाने और आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, देखभाल तथा प्रारंभिक बाल विकास का सशक्त केंद्र बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करती है।

    देश के अग्रणी राज्यों में मध्यप्रदेश की उल्लेखनीय उपस्थिति

    राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे तक देश में कुल 11 करोड़ 91 लाख 64 हजार 823 गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज की गईं। इनमें बिहार 1 करोड़ 49 लाख 93 हजार 265 प्रविष्टियों के साथ पहले, महाराष्ट्र 1 करोड़ 38 लाख 66 हजार 923 के साथ दूसरे और मध्यप्रदेश 1 करोड़ 9 लाख 66 हजार 805 प्रविष्टियों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

    उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ 2 लाख 90 हजार 37, राजस्थान में 91 लाख 78 हजार 866, गुजरात में 84 लाख 23 हजार 561 और छत्तीसगढ़ में 71 लाख 93 हजार 724 प्रविष्टियां दर्ज की गईं। राष्ट्रीय स्तर पर 788 जिलों में से 785 जिलों की भागीदारी दर्ज की गई, जबकि मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों ने पोषण माह की गतिविधियों में सहभागिता की।

    मंदसौर और नीमच की उपलब्धि से प्रदेश को मिली विशेष पहचान

    प्रदेश के मंदसौर जिले ने राष्ट्रीय पोषण माह में पहला और नीमच जिले ने दूसरा स्थान हासिल किया है। दोनों जिले महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया के प्रभार वाले जिले हैं। राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष दो स्थानों पर इन जिलों की उपलब्धि प्रदेश में पोषण संबंधी गतिविधियों के व्यापक संचालन और जनभागीदारी को नई पहचान देती है।

    हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ है इस वर्ष की थीम

    भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत पोषण को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ 9 सितंबर 2026 को किया गया। इस वर्ष की मुख्य थीम ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण, देखभाल और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास से जुड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करना, समुदाय की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना तथा पोषण सेवाओं के प्रति सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही को प्रोत्साहित करना है।

    पांच प्रमुख विषयों पर केंद्रित हैं पोषण संबंधी गतिविधियां

    राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान 5 प्रमुख विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इनमें आहार में विविधता और पर्याप्त प्रोटीन की उपलब्धता, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं विविधतापूर्ण गर्म पका भोजन, सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही, बच्चों के पोषण के साथ प्रारंभिक विकास एवं सीखने के लिए प्रोत्साहन संबंधी गतिविधियां तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य के लिए सहायता शामिल हैं। इन विषयों के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित आहार, बेहतर पोषण व्यवहार, मातृ स्वास्थ्य और बच्चों के समग्र विकास के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है। इस अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों पर उपलब्ध सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के साथ समुदाय को पोषण संबंधी प्रयासों से जोड़ना भी है।