Author: NewseDay

  • जमीन का Land Use बदलवाने के नियम बदले, 6000 वर्गमीटर तक बोर्ड देगा मंजूरी; फीस

    जमीन का Land Use बदलवाने के नियम बदले, 6000 वर्गमीटर तक बोर्ड देगा मंजूरी; फीस

    लखनऊ
    यूपी में लैंड यूज बदलवाना अब आसान और सस्ता हो गया है। अगर आप 6000 वर्ग मीटर तक के क्षेत्रफल का भू-उपयोग परिवर्तन कराना चाहते हैं तो आपको लखनऊ का चक्कर नहीं लगाना होगा। योगी सरकार ने 6000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल सीमा तक के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार विकास प्राधिकरणों के बोर्ड को दे दिया है। शासन ने एक और बड़ी राहत यह दी है कि अब भू-उपयोग परिवर्तन का शुल्क भी काफी कम कर दिया है। ये दरें पांच प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक की गईं हैं। हालांकि इस बड़ी राहत के साथ यह भी शर्त रखी है कि किसी भी मौजूदा भू-उपयोग का सिर्फ एक प्रतिशत तक ही परिवर्तन बोर्ड कर सकता है।

    अभी तक भू-उपयोग परिवर्तन कराने के लिए सारी फाइलों को शासन को ही भेजना पड़ता था। केडीए बोर्ड बस इसकी संस्तुति करता था। जब तक भू-उपयोग परिवर्तन होता था या इसके आवेदनों की फाइलों को निरस्त कर दिया जाता था तब तक विकास कार्यों से संबंधित सामग्रियों की दरें भी काफी बढ़ चुकी होती थीं। शासन ने 6000 वर्ग मीटर तक की जमीनों के आवेदकों को प्राधिकरण बोर्ड स्तर से ही हरी झंडी देने का अधिकार दे दिया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद का आदेश कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में भी पहुंच गया है। इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है।

    परिवर्तन शुल्क की किस्तों में भी राहत
    अब भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की किश्तों में भी राहत दी गई है। पहले इस शुल्क को चार तिमाही किस्तों में 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से साधारण ब्याज के साथ एक वर्ष में दिया जा सकता था मगर अब चार तिमाही किश्तों में एमसीएलआर प्लस वन प्रति वर्ष की दर से भुगतान किया जा सकेगा। उपाध्यक्ष को आवेदन करने पर यह अवधि एक वर्ष और बढ़ सकती है।

    ग्रीन वर्ज और सार्वजनिक सुविधाओं में बदलाव नहीं
    शासन ने यह भी शर्त रख दी है कि ग्रीन वर्ज और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए निर्धारित की गई जमीन का उपयोग नहीं बदला जाएगा। मसलन जो जमीन एसटीपी, पावर स्टेशन, बिजली घर, बस अड्डा, बस स्टॉप और पार्क आदि के लिए मास्टर प्लान में निर्धारित की गई है उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि जिस भू-उपयोग के मद की जमीन का भू-उपयोग परिवर्तित किया जाना है उसमें भी मास्टर प्लान में उस मद में दी गई कुल जमीन का एक प्रतिशत से ज्यादा आवेदन न हो।

    लैड यूज बदलने के लिए इस तरह से देना होगा चार्ज
    केडीए के सचिव अभय कुमार पांडेय के अनुसार शासन का आदेश आ चुका है। नोटिफिकेशन में दिए गए नियमों और संशोधित किए नियमों का पालन कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। केडीए बोर्ड को 6000 वर्ग मीटर तक के क्षेत्रफल का भू उपयोग बदलने का अधिकार मिल गया है। इसके अनुपालन की प्रक्रिया की तैयारी की जा रही है।

  • भाई के कत्ल के गवाह ASI अजनाला गोलीकांड में घायल, अस्पताल पहुंचकर DGP ने जाना हाल

    भाई के कत्ल के गवाह ASI अजनाला गोलीकांड में घायल, अस्पताल पहुंचकर DGP ने जाना हाल

    अमृतसर.

    अजनाला इलाके में बदमाशों की गोली लगने से जख्मी हुए जीआरपी के एएसआई सुखचैन सिंह के साथ डीजीपी (स्पेशल) प्रवीण कुमार सिन्हा ने सोमवार की शाम अस्पताल में मुलाकात की। डीजे पीने आदेश दिया है कि आरोपियों का पता लगाकर जल्द गिरफ्तार किया जाए।

    सिनोप्सिस-अजनाला के पास गोली लगने से जख्मी एएसआई सुखचैवन सिंह के मामले में पुलिस जांच कर रही है। सीसी कैमरे खंगाले जा रहे हैं। पता चला है कि जीआरपी में तैनात सुखचैन सिंह के भाई की कुछ साल पहले हत्या कर दी गई थी। पता चला है कि सुखचैन भाई की हत्या के मामले में मुख्य गवा है और पैरवी कर रहा है। पुलिस आतंकी एंगिल के साथ साथ इस बिंदू पर भी जांच कर रही है।

    उल्लेखनीय है कि रविवार की देर रात सुख चैन सिंह को बाइक पर सवार तीन लोगों ने गोली मारकर जख्मी कर दिया था वह ड्यूटी के बाद सादे कपड़ों में बाइक से अपने घर लौट रहे थे।

  • कोयला घोटाला: आरोपी चंद्रदेव राय-विनोद तिवारी के साथ कोर्ट पहुंचे विधायक देवेंद्र यादव

    कोयला घोटाला: आरोपी चंद्रदेव राय-विनोद तिवारी के साथ कोर्ट पहुंचे विधायक देवेंद्र यादव

    रायपुर.

    कथित कोयला घोटाला में आज आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की स्पेशल कोर्ट में आरोपियों की पेशी है. सुनवाई के लिए आरोपी बनाए गए कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चन्द्रदेव राय और कांग्रेस नेता विनोद तिवारी कोर्ट पहुंचे.

    मामले में ACB-EOW ने 9 आरोपियों को समन जारी किया था. मामले में आज अंतिम चालान पेश किए जाने की संभावना है. कोर्ट पहुंचने के दौरान विधायक देवेंद्र यादव ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है, लेकिन प्रदेश की सरकार पर न तो जनता को भरोसा है, और न ही उन्हें. लंबे समय की जांच के बाद अब चार्जशीट पेश की जा रही है. उन्होंने सरकार को कुशासन की सरकार बताते हुए कहा कि वे कांग्रेस और राहुल गांधी के सिपाही हैं, और अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. जेल की सलाखें भी पहले उनका हौसला नहीं तोड़ पाईं, ऐसे में यह षड्यंत्र उनका हौसला क्या तोड़ेगा.

    चिंतामणि को लेकर बीजेपी पर साधा निशाना
    वहीं चिंतामणि महाराज को लेकर भी देवेंद्र यादव ने बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि जांच की शुरुआत में चिंतामणि महाराज का नाम FIR में प्रमुखता से था, लेकिन बीजेपी में शामिल होने के बाद उनका नाम ही गायब हो गया. ये बीजेपी की स्कीम है, बीजेपी में शामिल होने के बाद मामले खत्म हो जाने का यह जीता-जागता उदाहरण है.

    क्या है कोयला घोटाला
    छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी प्रकरण साल 2020 से 2022 के दौरान कोयला परिवहन पर लगाया गया अवैध शुल्क था. जांच एजेंसियों के अनुसार, राज्य में ऑनलाइन ई-परमिट प्रणाली में बदलाव कर मैन्युअल अनापत्ति प्रमाण पत्र व्यवस्था लागू की गई थी. इसके तहत खदानों से कोयला निकालने और उसके सुचारू परिवहन के एवज में प्रति टन 25 रुपए की दर से अवैध वसूली (कोल लेवी) करने का एक समानांतर सिंडिकेट खड़ा किया गया था. इस प्रक्रिया से प्रतिदिन करोड़ों रुपये की काली कमाई जुटाई जाती थी, जिसका एक बड़ा हिस्सा अधिकारियों, बिचौलियों और राजनीतिक संरक्षण देने वाले व्यक्तियों के बीच नियमित रूप से वितरित किया जाता था.

    500 करोड़ रुपए से अधिक की काली कमाई
    जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के दौरान प्रति टन 25 रुपए की अवैध लेवी वसूली के जरिए लगभग 500 से 540 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध राशि एकत्रित किए जाने का अनुमान लगाया गया है. जांच रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि इस काली कमाई में से प्रतिदिन 2 से 3 करोड़ रुपये की वसूली की जाती थी, जिसका एक बड़ा हिस्सा बेनामी संपत्तियों की खरीद, राजनेताओं के चुनावी व व्यक्तिगत खर्चों तथा प्रशासनिक अधिकारियों में वितरण के लिए इस्तेमाल किया गया.

  • MP की कृषि ताकत का बढ़ा दबदबा, ‘देश की फूड बास्केट बन चुका मध्यप्रदेश’: CM यादव

    MP की कृषि ताकत का बढ़ा दबदबा, ‘देश की फूड बास्केट बन चुका मध्यप्रदेश’: CM यादव

    मध्यप्रदेश देश की फूड बॉस्केट बन चुका है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    कृषि विभाग की टीम कृषि योजनाओं और नीतियों को फाईलों से निकालकर खेत की मेढ़ तक पहुंचाती है
    कृषि विभाग ने प्रदेश में किसानों के कल्याण और सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया है
    राज्य सरकार ने एक साथ 3 हजार 357 शासकीय सेवकों को पदोन्नति का लाभ दिया
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि विभाग के 44 दिवंगत कर्मचारियों के परिजन को सौंपे अनुकम्पा नियुक्ति के पत्र
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के पदोन्नत अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम को किया संबोधित

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि विभाग ने प्रदेश में किसानों के कल्याण और सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया है। कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत, निष्ठा और समर्पण का परिणाम है कि आज मध्यप्रदेश देश की फूड बॉस्केट बन चुका है। परम्परागत खेती से लेकर तकनीकी नवाचार और उद्योग तक विभाग के कर्मचारी-अधिकारी किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। प्रदेश में कृषि विभाग सिर्फ डिपार्टमेंट का नाम नहीं यह, डेवलपमेंट का भी नाम है। कृषि में ही मध्यप्रदेश का विकास छुपा है, इस दृष्टि से मध्यप्रदेश की सुख-समृद्धि का रास्ता कृषि विभाग से होकर जाता है। प्रदेश के माथे से बीमारू राज्य का कलंक हटाने में बड़ी भूमिका कृषि विभाग की रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की ही टीम है जो सरकार की कृषि योजनाओं और नीतियों को फाईलों से निकालकर खेत की मेढ़ों तक पहुंचाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के पदोन्नत शासकीय सेवकों द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अभिनंदन और उनके आभार प्रदर्शन के लिए आयोजित कार्यक्रम को रवींद्र भवन में संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रतीक स्वरूप हल भेंटकर तथा फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर ई-विकास, डिजिटल एग्रीकल्चर, भावांतर भुगतान योजना पर कार्यशाला सह प्रशिक्षण भी आयोजित किया गया।  

     राज्य सरकार हर कदम पर कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति से उन्हें स्वयं को बहुत संतोष है। यह गर्व की बात है कि पदोन्नति के लिए एक दशक की लंबी प्रतीक्षा के बाद भी विभागीय अमले ने काम के प्रति अपने समर्पण को काम नहीं होने दिया। राज्य सरकार ने एक साथ 3 हजार 357 शासकीय सेवकों को पदोन्नति का लाभ दिया है। इसमें किसान कल्याण और कृषि विभाग के 1 हजार 725, मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के 1 हजार 439, कृषि अभियांत्रिकी के 149, बीज प्रमाणीकरण के 36 और बीज निगम के 8 कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिला है। इसके साथ ही 44 युवाओं को सहायक वर्ग-3 के रूप में अनुकम्पा नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए हैं। राज्य सरकार हर कदम पर विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ है।

    प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है। उन्होंने पिछले 12 वर्ष के कार्यकाल में कठिन से कठिन फैसले लेकर भारत को नए दौर में पहुंचाया है। जापान में कल ही संपन्न हुए एशियन गेम्स 2026 में पदकों की संख्या के आधार पर भारत को चौथा स्थान हासिल हुआ है। हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में दुनिया की दिग्गज टीमों और उनके खिलाड़ियों को परास्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम जियो और जीने दो के भाव पर आगे बढ़ने वाले लोग हैं। कृषि के आधार पर हमारी जीवनशैली शाकाहार को प्रोत्साहित करती है। खिलाड़ियों की उपलब्धियों ने दुनिया को बताया है कि शाकाहारी रहते हुए भी शरीर को तंदुरुस्त रखा जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार की ओर से सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की भावना के अनुरूप राज्य सरकार ने विभागों के बीच व्यवस्थाओं के संचालन को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया है। इस वर्ष प्रदेश पौने 14 लाख किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन कर देश में प्रथम स्थान पर रहा है।

     अगले वर्ष में 1 लाख से अधिक पदों पर नई भर्ती की जाएगी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निकट भविष्य में अनुकंपा नियुक्ति की कोई पेंडेंसी नहीं रहेगी। सभी विभागों में पदोन्नति के लिए डीपीसी हर साल करवाई जाएगी, पदोन्नति से रिक्त पदों को समय से भरने के लिए नई भर्ती प्रक्रिया भी लगातार चल रही है। इस वर्ष कृषि विभाग के अंतर्गत मंडी बोर्ड में 600 मंडी निरीक्षक, 50 उपयंत्री, 30 सचिव, 100 डाटा एंट्री ऑपरेटर सहित कुल 1500 से अधिक पदों पर नयी भर्ती वर्ष 2026 में पूरी कर ली जाएगी। हमारी सरकार ने अब तक 85 हजार से अधिक शासकीय पदों पर युवाओं को नौकरी दी है। अगले वर्ष में 1 लाख से अधिक पदों पर नई भर्ती करने का लक्ष्य है।

    प्रदेश के अन्नदाता की भावनाओं को भलीभांति समझते हैं किसान पुत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कर्मचारियों की परेशानी को समझा और पदोन्नति देकर उसे दूर भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं किसान पुत्र हैं, वे प्रदेश के अन्नदाता की भावनाओं को भलीभांति समझते हैं। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों की आय दोगुना करने के लिए दृढ़संकल्पित है। मंत्री कंषाना ने कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों से किसान कल्याण के लिए लागू की गईं योजनाओं को शत-प्रतिशत जमीन पर उतारने का आहवान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अडिगता और स्पष्ट निर्णयों से पदोन्नतियों का रास्ता हुआ साफ

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अडिगता और स्पष्ट निर्णयों के फलस्वरूप 10 वर्ष से अधिक समय से बंद पदोन्नतियों का रास्ता साफ हुआ। कृषि विभाग में पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया जारी है। कृषक कल्याण वर्ष में अन्नदाता की समृद्धि के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारी-कर्मचारियों को भी बड़ी सौगात दी है। कृषि विभाग के सभी कर्मचारी कृषक कल्याण वर्ष को सफल बनाने के लिए संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। कृषि संचालक उमाशंकर भार्गव ने सभी अधिकारी-कर्मचारियों की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित सभी अथितियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

     

  • UP राज्यसभा चुनाव में BJP का बड़ा दांव, 8 उम्मीदवारों की सूची जारी; हरदीप सिंह पुरी को नहीं मिली जगह

    UP राज्यसभा चुनाव में BJP का बड़ा दांव, 8 उम्मीदवारों की सूची जारी; हरदीप सिंह पुरी को नहीं मिली जगह

    लखनऊ 

    भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी लिस्ट जारी कर दी है। इसमें कुल आठ उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। हालांकि इसमें हरदीप सिंह पुरी का नाम शामिल नहीं है। इस लिस्ट में दो ब्राह्मण चेहरे हैं, जबकि एक राजपूत चेहरा भी है। वहीं, दो महिलाओं को भी जगह दी गई है।

    उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 8 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है. पार्टी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रत्याशियों को जीत की अग्रिम शुभकामनाएं दी हैं। 

    बीजेपी की ओर से जारी सूची में 3 OBC, 2 SC और 3 सामान्य वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं. इनमें 2 महिलाएं भी हैं. वहीं, उम्मीदवारों में 2 ब्राह्मण और 1 राजपूत शामिल हैं. OBC वर्ग में 1 लोधी, 1 पाल और 1 कुर्मी उम्मीदवार हैं। 

    भाजपा के केंद्रीय कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में इन आठ नामों की घोषणा की गई। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में संगठनात्मक अनुभव के साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश की है। भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह का नाम प्रमुख है। इसके अलावा राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यसागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया गया है।

    धर्मपाल सिंह लोधी बिरादरी से आते हैं. वह योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. प्रकाश पाल संगठन में क्षेत्रीय मंत्री हैं और पाल बिरादरी से आते हैं. ओबीसी समुदाय में पाल को गडेरिया बिरादरी माना जाता है. विद्यासागर सोनकर दलित बिरादरी से हैं और पार्टी के अहम पदों पर रह चुके हैं. वह पूर्व MLC और मछलीशहर से पूर्व सांसद रह चुके हैं. इसके अलावा वह पार्टी के पूर्व महामंत्री भी हैं. इस लिस्ट में  मंत्री हरदीप पुरी-बीएल वर्मा का नाम नहीं का नाम नहीं आया है। 

    16 अक्टूबर को वोटिंग
    उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10
    सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में पूरा हो रहा है। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन की अंतिम तिथि छह अक्टूबर है। 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों की स्थिति मजबूत है। चुनाव में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के मतों की जरूरत है। भाजपा गठबंधन के पास आठ सीटों पर जीत की स्थिति बनाने के लिए पर्याप्त संख्या बल है, हालांकि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में आठवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है।

    धर्मपाल सिंह
    धर्मपाल सिंह बरेली के आंवला से बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं. वह कई बार विधायक रह चुके हैं और फिलहाल यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. उनके पास पशुपालन और डेयरी विकास विभाग की जिम्मेदारी है। 

    विद्यासागर सोनकर
    विद्यासागर सोनकर जौनपुर और पूर्वी यूपी के वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं. वह 1996 में 11वीं लोकसभा के लिए सैदपुर (SC) से सांसद चुने गए थे। 

    प्रियंका सिंह रावत
    प्रियंका सिंह रावत बीजेपी की पूर्व लोकसभा सांसद हैं. उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव बाराबंकी से जीता था. उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया को हराया था। 

    राम प्रताप सिंह चौहान
    राम प्रताप सिंह चौहान यूपी बीजेपी के वरिष्ठ संगठन नेता हैं. जून 2026 में यूपी बीजेपी में हुए बदलाव के दौरान उन्हें प्रदेश महामंत्री बनाया गया था. अगस्त 2026 में उन्हें पश्चिमी यूपी के संगठनात्मक क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई। 

    प्रकाश पाल
    प्रकाश पाल बीजेपी के वरिष्ठ संगठन नेता और यूपी बीजेपी OBC मोर्चा के अध्यक्ष हैं. वह पहले बीजेपी के कानपुर-बुंदेलखंड संगठनात्मक क्षेत्र की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 

    इस बार नए चेहरों को मिला मौका
    इस बार बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए सभी नए चेहरों को मौका दिया है. पुराने चेहरों को इस बार उम्मीदवार नहीं बनाया गया है. इनमें अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, बीएल वर्मा, हरदीप सिंह पुरी, नीरज शेखर, बृजलाल, दिनेश शर्मा और गीता शाक्य शामिल हैं. दिनेश शर्मा अब अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल हैं। 

    सपा का तीसरी सीट पर जोर
    समाजवादी पार्टी ने पहले ही प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। सपा के पास अपने संख्या बल के आधार पर दो सीटें जीतने की स्थिति है। हालांकि पार्टी तीसरी सीट के लिए भी प्रयास कर सकती है, जिससे चुनाव में राजनीतिक जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राज्यसभा चुनाव को अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों दलों की नजर अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के साथ-साथ दूसरे खेमे में सेंध लगाने पर भी है।

    मजबूत संख्याबल का संकेत
    भाजपा ने आठ उम्मीदवार उतारकर जहां अपने मजबूत संख्या बल का संकेत दिया है, वहीं उम्मीदवारों के चयन में अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी दिखाई दे रही है। अब निगाहें नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और सपा की आगे की रणनीति पर हैं। राज्यसभा चुनाव में यदि सभी 10 सीटों पर मुकाबला होता है तो 16 अक्टूबर को मतदान के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। फिलहाल भाजपा ने अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुनावी मैदान को औपचारिक रूप से सजा दिया है।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में मौत के बाद बढ़ा विवाद, अभिजीत दीपके पर मर्डर केस को लेकर उठे सवाल

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में मौत के बाद बढ़ा विवाद, अभिजीत दीपके पर मर्डर केस को लेकर उठे सवाल

    मुंबई

    कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके पर हत्या का मुकदमा चल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभिजीत दीपके की रैली में एक बुजुर्ग की मौत के बाद लोग CJP फाउंडर पर बुरी तरह भड़के हुए हैं और हत्या का मुकदमा दर्ज करने की भी मांग कर दी है। दरअसल 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में दीपके द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में 75 वर्षीय बुजुर्ग एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। यह प्रदर्शन देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाया गया था।

    मृतक बुजुर्ग व्यक्ति की पहचान ठाणे के गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई के रूप में हुई है। शिवाजी पार्क थाने के एक अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान उन्हें अचानक सीने में दर्द होने लगी। उन्होंने बताया, "पिल्लई शाम करीब साढ़े चार बजे CJP द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए शिवाजी पार्क पहुंचे थे। शाम पांच बजे उन्होंने सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद उनके दोस्तों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें एक नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।" चिकित्सकों ने बताया कि उपचार के दौरान पिल्लई की मौत हो गई।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक CJP का विरोध प्रदर्शन करीब चार बजे शुरू हुआ था और उस समय तेज धूप थी। पुलिस की अनुमति नहीं होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग जुटे और इस प्रतिष्ठित मैदान के आसपास का इलाका हजारों लोगों से भर गया। इस दौरान अराजकता फैल गई और बाद में बाद में बुजुर्ग की मौत हो गई।

    मर्डर केस दर्ज करने की मांग
    बुजुर्ग की मौत के बाद 'शिवाजी पार्क सिटीजन्स फोरम' ने अभिजीत दीपके के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। फोरम ने अधिकारियों से अपील की है कि इस दुखद घटना के लिए सीधे तौर पर अभिजीत दीपके को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए। वहीं स्थानीय वकील और शिवाजी पार्क की निवासी सिद्धि देवलेकर की शिकायत पर पुलिस ने कानूनी शिकंजा भी कसा है। सिद्धि देवलेकर ने CJP नेता अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

    देवलेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बॉम्बे हाईकोर्ट और महाराष्ट्र सरकार के स्पष्ट आदेशों के तहत शिवाजी पार्क में सभा की अनुमति खारिज कर दी गई थी। इसके बावजूद CJP नेताओं ने कानून को दरकिनार कर भारी भीड़ जुटाई। उन्होंने एक बयान में कहा, “यह कोई शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं था। यह राजनीतिक विरोध के नाम पर कानून और अदालत के आदेशों की धज्जियां उड़ाने की कोशिश थी।” शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में CJP के आयोजकों और 400-500 अज्ञात समर्थकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 189 और 223 और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1)(3) व 135 के तहत FIR दर्ज की है।

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP का आंदोलन
    गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कई आपत्तियों को दरकिनार कर फैसले लिए थे। इसके बाद देश के प्रमुख विपक्षी दलों सहित CJP ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। CJP ने मुंबई के बाद दिल्ली में प्रदर्शन का भी ऐलान किया है।

  • गिरिडीह उपचुनाव में जातीय समीकरण अहम, भाजपा फीडबैक के आधार पर चुनेगी प्रत्याशी

    गिरिडीह उपचुनाव में जातीय समीकरण अहम, भाजपा फीडबैक के आधार पर चुनेगी प्रत्याशी

    रांची
    गिरिडीह विधानसभा में दुर्गापूजा समाप्त होते ही उपचुनाव का माहौल बन जाएगा। पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार के निधन से गिरिडीह विधानसभा की सीट खाली हुई है। नवंबर में यहां चुनाव घोषित होने की संभावना है। दो बार से यहां हार का सामना कर रही भारतीय जनता पार्टी के लिए गिरिडीह सीट पर उपचुनाव के लिए एक योग्य प्रत्याशी की तलाश प्रारंभ हो गई है।

    प्रदेश के नेता गिरिडीह के कार्यकर्ताओं से फीडबैक ले रहे हैं। इसमें स्थानीय स्तर पर सक्रियता, जाातीय समीकरण और जीत की संभावना वाले नाम पर चर्चा हो रही है। इस विधानसभा में गिरिडीह सदर और पीरटांड़ दो प्रखंड हैं।

    गिरिडीह सदर के शहरी क्षेत्र में भाजपा का अच्छा आधार है लेकिन पीरटांड़ में पार्टी पिछड़ जाती है। प्रदेश नेतृत्व प्रत्याशी का नाम तय करते हुए पीरटांड़ क्षेत्र में उस नेता के प्रभाव का आकलन भी कर रहा है।

    निर्भय शाहाबादी और सुरेश साव का ओबीसी समाज में आधार
    गिरिडीह में पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे निर्भय शाहाबादी करीब 3500 वोटों से सुदिव्य कुमार से परिजित हुए थे।शाहाबादी वैश्य समुदाय से आते हैं और दूसरे ओबीसी समुदाय का भी उन्हें समर्थन मिलता रहा है। इसके अलावा शहरी मध्यवर्ग भाजपा का पारंपरिक वोटबैंक रहा है। लेकिन निर्भय शाहाबादी की उम्र ज्यादा होने की वजह से उनके टिकट पर संशय हो सकता है।

    सुरेश साव भाजपा के युवा नेता हैं। वैश्य समाज से ही आने वाले युवा नेता सुरेश साव पूर्व में धनबाद लोकसभा के प्रभारी रहे हैं और पार्टी को जीत दिला चुके हैं। शहरी मतदाताओं से उनका भी नियमित संपर्क है।

    पीरटांड़ के संताल बहुल क्षेत्र में सुरेश साव पिछले दस सालों से लगातार सक्रिय हैं। सुरेश साव ने पिछले दिनों बड़ी संख्या में संताल समाज के लोगों को भाजपा की सदस्यता भी दिलाई है।

    रवींद्र राय और चुन्नू कांत सामान्य जाति के बड़े नाम
    पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय भाजपा के बड़े नेता हैं। गिरिडीह जिले के ही निवासी रवींद्र राय पड़ोसी विधानसभा क्षेत्र राजधनवार से पूर्व में विधायक भी रहे हैं। भूमिहार समाज से आने वाले रवींद्र राय झारखंड भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं।

    गिरिडीह विधानसभा में ब्राह्मण और भूमिहार मतदाताओं की अच्छी संख्या भी है। इसके अलावा चुन्नु कांत भी भाजपा प्रत्याशी की रेस में कार्यकर्ताओं की पसंद बताए जा रहे हैं। चुन्नु कांत कायस्थ समाज से आते हैं जिसकी गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में अच्छी संख्या है। स्थानीय होने की वजह से चुन्नु कांत का आम मतदाताओं से लगातार मिलना जुलना भी है।

  • उदयपुर में दर्दनाक हादसे के बाद प्रदर्शन, महिला की मौत से भड़का लोगों का गुस्सा

    उदयपुर में दर्दनाक हादसे के बाद प्रदर्शन, महिला की मौत से भड़का लोगों का गुस्सा

    उदयपुर
    राजस्थान के उदयपुर शहर में सोमवार सुबह सड़क हादसे में स्कूटी सवार महिला की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों और आसपास के लोगों ने ट्रक चालक को पकड़ लिया और ट्रक के केबिन में आग लगा दी। इसके बाद लोगों ने सड़क प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही सवीना थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने समझाइश कर मामला शांत करवाया और ट्रक चालक को भीड़ के चंगुल से छुड़ाया।

    सवीना थाना पुलिस के मुताबिक उदयपुर शहर में तीतरड़ी गुप्तेश्वर रोड पर सुबह करीब 8 बजे हादसा हुआ। तेज रफ्तार ट्रक ने स्कूटी सवार महिला को कुचल दिया। हादसे में निर्मला साहू (48) पत्नी कन्हैयालाल साहू निवासी तीतरड़ी की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा उस वक्त हुआ जब ट्रक तीतरड़ी गांव की तरफ आ रहा था और स्कूटी सवार महिला अपने घर की ओर लौट रही थी। जिस जगह हादसा हुआ, वहां से कुछ ही दूरी पर महिला का घर था। ऐसे में हादसे की खबर मिलते ही परिवार के लोग और आसपास रहने वाले लोग मौके पर पहुंच गए।

    भीड़ ने ट्रक में लगाई आग
    महिला की मौत से गुस्साए लोगों ने ट्रक चालक को मौके पर पकड़ लिया। साथ ही लोगों ने ट्रक के केबिन में आग लगा दी। सड़क पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और प्रदर्शन करने लगे। लोगों ने पुलिस के मौके पर पहुंचने में देरी का आरोप भी लगाया। पुलिस के अनुसार जिस परिवार ने ट्रक चालक को संरक्षण देने की कोशिश की, उसके खिलाफ भी लोगों ने आक्रोश जताया और हमला करने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया और चालक को भीड़ से छुड़ाकर सुरक्षित थाने पहुंचाया।

    पुलिस ने शांत करवाया मामला
    हादसे के बाद मौके पर तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों ने मृतका के परिजनों और प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत की। पुलिस अधिकारियों ने ट्रक चालक पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद लोग शांत हुए। पुलिस ने महिला के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं, ट्रक चालक को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर पुलिस थाने लाई, जहां पर उससे पूछताछ की जा रही है।

  • बंदरों पर शिकंजे की तैयारी, हांसी में 12 महीने चलेगा अभियान; टेंडर के लिए 4 एजेंसियां मैदान में

    बंदरों पर शिकंजे की तैयारी, हांसी में 12 महीने चलेगा अभियान; टेंडर के लिए 4 एजेंसियां मैदान में

    हांसी.

    शहर से बंदरों को पकड़ने का टेंडर आखिरकार छठे प्रयास में सिरे चढ़ गया है। नगर निगम ने बहादुरगढ़ की एजेंसी को एक साल का ठेका दिया है। एजेंसी एक बंदर पकड़ने के लिए निगम से 1570 रुपये लेगी। विशेषज्ञ टीम बंदरों को पकड़कर नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका के जंगलों में छोड़कर आएगी।

    निगमायुक्त ने एजेंसी संचालक को बुलाकर टेंडर की दर पर चर्चा की। इसके बाद 1570 रुपये की दर तय की गई। अनुबंध के तहत एजेंसी की विशेष टीम शहर के विभिन्न हिस्सों में जाल और आधुनिक उपकरणों की मदद से बंदरों को पकड़ेगी। इसके बाद उन्हें सुरक्षित तरीके से फिरोजपुर झिरका के जंगलों में छोड़ा जाएगा, ताकि वे प्राकृतिक आवास में लौट सकें। निगम को उम्मीद है कि अभियान शुरू होने से मुख्य बाजारों, कॉलोनियों और आवासीय इलाकों में बंदरों की समस्या का समाधान होगा।

    स्थानीय निवासियों को मिलेगी बड़ी राहत
    शहर के प्रमुख क्षेत्रों में पिछले कई महीनों से बंदरों का उत्पात बढ़ा हुआ था। बंदरों के काटने, सामान छीनने और छतों व बालकनियों में नुकसान पहुंचाने से नागरिकों में भय का माहौल था। लगातार टेंडर विफल होने से निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे थे। अब ठेका फाइनल होने से नागरिकों और व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। जल्द ही एजेंसी टीम तैनात कर बंदर पकड़ने का अभियान शुरू करेगी।

    एजेंसी को टेंडर जारी –
    शहर में बंदर पकड़ने के लिए बहादुरगढ़ की एजेंसी को टेंडर जारी कर दिया गया है। एजेंसी अब जल्द ही शहर में बंदर पकड़ने का अभियान चलाएगी।
    – डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगम आयुक्त, नगर निगम।

  • इगलास से अतरौली तक बदलेगी बस स्टेशनों की पहचान, महापुरुषों के नाम पर होंगे नए नाम

    इगलास से अतरौली तक बदलेगी बस स्टेशनों की पहचान, महापुरुषों के नाम पर होंगे नए नाम

    अलीगढ़
    यूपी के अलीगढ़ के आठ प्रमुख बस स्टेशनों को अब नई पहचान मिलने जा रही है। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत जिले के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले शहीदों और महापुरुषों के नाम पर बस स्टेशनों के नामकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। चार साल बाद एक बार फिर बस स्टेशनों के नाम बदलने की कवायद तेज हुई है। क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) रोडवेज की ओर से आठ बस स्टेशनों के नए नामों की संस्तुति शासन को भेज दी गई है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद इन बस स्टेशनों की पहचान उनके नए नाम से होगी।

    इस पहल का उद्देश्य स्थानीय इतिहास के उन नायकों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है, जिनका योगदान महत्वपूर्ण होने के बावजूद समय के साथ लोगों की स्मृतियों से दूर होता गया। बस स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों के नामकरण के माध्यम से इनके संघर्ष और योगदान को आम लोगों के बीच पहुंचाने की योजना है। इससे रोजाना हजारों यात्रियों को इन महापुरुषों और शहीदों के नामों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। प्रस्ताव के मुताबिक इगलास बस स्टेशन का नाम राजा अमानी जी बस स्टेशन रखा जाएगा। इसी तरह अकराबाद बस स्टेशन का नाम अमर शहीद ठाकुर मंगल सिंह-महताब सिंह बस स्टेशन करने की संस्तुति की गई है।

    मसूदाबाद बस स्टेशन का नाम नारायण पंडित जी बस स्टेशन प्रस्तावित है। शहर के महत्वपूर्ण सैटेलाइट बस स्टेशन, सूतमील चौराहा का नाम मोहनलाल गौतम बस स्टेशन रखने का प्रस्ताव है। वहीं गभाना बस स्टेशन का नाम छोटे लाल गौतम बस स्टेशन किया जाना प्रस्तावित है। शहर के गांधीपार्क बस स्टेशन को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी बस स्टेशन के नाम से पहचान देने की संस्तुति भेजी गई है। इसी क्रम में खैर बस स्टेशन का नाम ठाकुर टोडर सिंह बस स्टेशन और अतरौली बस स्टेशन का नाम बनारसी दास बस स्टेशन किए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इन नामों के जरिए जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को सार्वजनिक पहचान देने का प्रयास किया गया है।

    चार साल बाद फिर बदलेगी पहचान
    बस स्टेशनों के नाम बदलने की प्रक्रिया जिले में करीब चार साल बाद फिर सामने आई है। प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजे जाने के बाद अब निगाहें स्वीकृति पर टिकी हैं। शासन की मंजूरी मिलने के बाद रोडवेज स्तर पर नए नामों को रिकॉर्ड, साइन बोर्ड और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं में दर्ज किया जाएगा।

    यात्रियों के साथ नई पीढ़ी को भी मिलेगा संदेश
    बस स्टेशनों पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं। ऐसे में इन स्थानों का नाम महापुरुष व शहीदों के नाम पर रखने से उनके योगदान की जानकारी व्यापक स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। खासतौर पर स्थानीय इतिहास से जुड़े व्यक्तित्वों को सार्वजनिक स्थलों के माध्यम से पहचान मिलने से नई पीढ़ी में उनके बारे में जानने की रुचि बढ़ सकती है। शासन से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अलीगढ़ के आठ बस स्टेशनों की पहचान उनके नए नामों के साथ इतिहास व वर्तमान को जोड़ने वाली नजर आएगी।