Author: NewseDay

  • छत्तीसगढ़ में इंश्योरेंस कंपनी पर बड़ी कार्रवाई, ओरिएंटल इंश्योरेंस 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट

    छत्तीसगढ़ में इंश्योरेंस कंपनी पर बड़ी कार्रवाई, ओरिएंटल इंश्योरेंस 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट

    छत्तीसगढ़ सरकार की सख्त कार्रवाई: ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट

    शासकीय हेलीकॉप्टर का बीमा दावा चार साल से अधिक समय तक लंबित रखने के मामले में विमानन संचालनालय ने की कार्रवाई

    राज्य सरकार ने कहा—सार्वजनिक संपत्ति और जनता के पैसे से जुड़े दावों में अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं

    कंपनी को कारण बताओ नोटिस, लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने के बाद जारी हुआ तर्कसंगत आदेश

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ शासन ने शासकीय हेलीकॉप्टर के बीमा दावे के निराकरण में चार साल से अधिक समय तक हुई देरी के मामले में कड़ा कदम उठाते हुए द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (OICL) को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। विमानन संचालनालय ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए कंपनी के विरुद्ध यह कार्रवाई की है।

    मामला मई 2022 में रायपुर एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हुए राज्य शासन के हेलीकॉप्टर से संबंधित है। राज्य शासन द्वारा हेलीकॉप्टर का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया था और निर्धारित बीमा प्रीमियम का पूर्ण भुगतान किया गया था। दुर्घटना के बाद राज्य शासन की ओर से बीमा दावा प्रस्तुत किया गया, लेकिन कंपनी द्वारा इस दावे को चार वर्ष से अधिक समय तक लंबित रखा गया और अंततः अगस्त 2026 में इसे अस्वीकार कर दिया गया।

    विमानन संचालनालय ने पूरे प्रकरण के परीक्षण में पाया कि सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े बीमा दावे के निराकरण में अत्यधिक विलंब हुआ और राज्य शासन के प्रकरण के निपटारे में कंपनी का रवैया असंगत रहा। शासन ने इसे सार्वजनिक धन और शासकीय हित से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए कार्रवाई की है।

    अधिकारियों के अनुसार शासकीय हेलीकॉप्टर सार्वजनिक संपत्ति है, जिसकी खरीदी और बीमा में जनता का पैसा लगा है। ऐसी स्थिति में बीमा दावे को वर्षों तक लंबित रखने का आर्थिक प्रभाव अंततः सार्वजनिक संसाधनों पर पड़ता है। शासन का स्पष्ट मत है कि सरकार के साथ कार्य करने वाली प्रत्येक सेवा प्रदाता संस्था को अपनी संविदात्मक जिम्मेदारियों और प्रतिबद्धताओं का समयबद्ध रूप से पालन करना होगा।

    कार्रवाई से पहले कंपनी को दिया गया पूरा अवसर

    राज्य शासन ने इस मामले में प्राकृतिक न्याय और निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया। ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कंपनी ने अपना लिखित जवाब प्रस्तुत किया और उसे व्यक्तिगत सुनवाई का भी अवसर दिया गया। कंपनी का पक्ष सुनने और उपलब्ध तथ्यों एवं अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद विमानन संचालनालय ने कारणों सहित आदेश पारित करते हुए कंपनी को तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लिया।

    अधिकारियों ने कहा कि शासन के साथ काम करने वाले प्रत्येक सेवा प्रदाता के लिए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन आवश्यक है। सार्वजनिक दावों के निपटारे में अनावश्यक विलंब को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया मानकर नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि इससे न केवल शासन के वित्तीय हित प्रभावित होते हैं, बल्कि सेवा व्यवस्था के प्रति विश्वास भी कमजोर होता है।

    बीमा राशि की वसूली के लिए आगे भी कार्रवाई जारी रखेगा राज्य

    कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने के साथ ही बीमा दावे का मामला समाप्त नहीं हुआ है। राज्य शासन अपने दावे की राशि प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्रवाई आगे भी जारी रखेगा। अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा शासन की जिम्मेदारी है और राज्य को देय राशि की वसूली के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    राज्य शासन की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक संपत्ति, शासकीय धन और राज्य के वित्तीय हितों से जुड़े मामलों में जवाबदेही सर्वोपरि है। शासन के साथ कार्य करने वाली संस्थाओं से समयबद्ध, पारदर्शी और उत्तरदायी सेवा की अपेक्षा की जाती है तथा सार्वजनिक हित प्रभावित होने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • आठ महीने में एक लाख का आंकड़ा पार करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश

    आठ महीने में एक लाख का आंकड़ा पार करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश

    डिजिटल केसीसी में यूपी ने रचा इतिहास, बना देश में नंबर वन

    प्रदेश में एक लाख से अधिक किसानों ने किया ई-केसीसी पोर्टल या एप के जरिए आवेदन

    आठ महीने में एक लाख का आंकड़ा पार करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश

    95 हजार आवेदन के साथ कर्नाटक दूसरे, 42 हजार के साथ हरियाणा देश में तीसरे स्थान पर

    डबल इंजन की सरकार बनी किसानों के लिए वरदान, घर बैठे ऑनलाइन सुविधा का लाभ उठा रहे लघु और सीमांत किसान

    लखनऊ,
     खेती-किसानी में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उत्तर प्रदेश ने डिजिटल किसान क्रेडिट कार्ड (ई-केसीसी) के क्षेत्र में देश में नया मुकाम हासिल किया है। प्रदेश में अभी तक एक लाख से अधिक किसान ई-केसीसी पोर्टल या एप के जरिए आवेदन कर चुके हैं। महज आठ महीने में एक लाख का आंकड़ा पार करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गत फरवरी में नाबार्ड द्वारा संचालित डिजिटल केसीसी सुविधा का शुभारंभ किया, जिसके बाद प्रदेश में इस पहल ने रफ्तार पकड़ी।

    खासकर लघु और सीमांत किसानों के लिए डबल इंजन सरकार की यह योजना कृषि ऋण तक पहुंच को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। अब किसानों को ऋण लेने के लिए बार-बार बैंक शाखाओं के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। डिजिटल माध्यम से घर बैठे आवेदन और प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा मिलने से किसानों को समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।

    कर्नाटक, हरियाणा और अन्य राज्यों से काफी आगे निकला यूपी

    डिजिटल केसीसी के मामले में उत्तर प्रदेश ने देश के दूसरे राज्यों को काफी पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है। करीब 95 हजार आवेदन के साथ कर्नाटक दूसरे और लगभग 42 हजार के साथ हरियाणा तीसरे स्थान पर है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के किसानों को बड़े पैमाने पर इस योजना से लाभान्वित किया जा रहा है।

    बैंक जाने की जरूरत कम, घर बैठे ऋण की सुविधा

    परंपरागत व्यवस्था में पहले कृषि ऋण के लिए किसानों को बैंक शाखाओं में जाकर आवेदन, दस्तावेज और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती थीं। डिजिटल केसीसी ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में रास्ता खोला है। अब किसान डिजिटल माध्यम से सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। इससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए औपचारिक कृषि ऋण व्यवस्था तक पहुंच आसान हो रही है।

    प्रदेश में डिजिटल कृषि सेवाओं की बढ़ी सुविधा

    सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फरवरी में डिजिटल केसीसी का शुभारंभ किया। जिसका उद्देश्य किसानों को तकनीक के माध्यम से कृषि ऋण व्यवस्था से जोड़ना और ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया को अधिक सरल बनाना है। शुरुआत के महज आठ महीनों में एक लाख किसानों का इसके लिए आवेदन करना प्रदेश में डिजिटल कृषि सेवाओं की बढ़ी सुविधा का बड़ा उदाहरण है।

    डबल इंजन सरकार की किसान केंद्रित पहल

    डिजिटल केसीसी को किसानों की सुविधा बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव को गति देने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र और प्रदेश की डबल इंजन सरकार की किसान केंद्रित नीतियों के बीच डिजिटल माध्यम से ऋण सुविधा का विस्तार खेती की जरूरतों के लिए समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एक लाख से अधिक किसानों का ई-केसीसी के लिए आवेदन करना इस पहल की बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया है।

  • पूर्व AIG राजजीत की बेनामी संपत्तियों पर ANTF की नजर, पंजाब ड्रग्स केस में जांच तेज

    पूर्व AIG राजजीत की बेनामी संपत्तियों पर ANTF की नजर, पंजाब ड्रग्स केस में जांच तेज

    चंडीगढ़.

    ड्रग्स से जुड़े मामले में बर्खास्त पूर्व एआइजी राजजीत सिंह हुंदल की मुश्किलें अब उनकी कथित बेनामी संपत्तियों और बैंक खातों तक पहुंच गई हैं। एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) हुंदल से जुड़े संपत्ति और बैंक रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

    जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि उनके नाम या कथित तौर पर दूसरों के नाम पर मौजूद संपत्तियों और बैंक खातों में हुए लेनदेन का ड्रग्स से जुड़े नेटवर्क से कोई वित्तीय संबंध रहा है या नहीं। एएनटीएफ की जांच में हुंदल से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संपत्तियां किस तरह अर्जित की गईं और इनके लिए रकम कहां से आई।

    इसके साथ ही अलग-अलग बैंक खातों में हुए लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी को संदेह है कि वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने से ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े कुछ और लोगों तक पहुंच बनाई जा सकती है।

  • 51 गांवों में रजिस्ट्री का रास्ता साफ, बिलासपुर में आज खत्म होगी संपत्ति पंजीयन पर रोक

    51 गांवों में रजिस्ट्री का रास्ता साफ, बिलासपुर में आज खत्म होगी संपत्ति पंजीयन पर रोक

    कोरबा.

    चांपा से उरगा और फिर आगे कटघोरा तक बनने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का मामला पिछले चार वर्षों से अटका हुआ है. दो चरणों में बंटी महत्वकांक्षी परियोजना का चांपा से उरगा तक का पहला चरण जैसे तैसे पूरा हो गया है, लेकिन दूसरा चरण उलझा हुआ है.

    इसके कारण 51 गांवों में रजिस्ट्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है. यह पाबंदी आज हटेगी. इसके साथ ही प्रभावित गांव के हजारों ग्रामीणों को बड़ी राहत मिल जाएगी. राष्ट्रीय राजमार्ग के एलाइनमेंट तय न होने का खामियाजा आसपास के 51 गांव के भूविस्थापितों और किसानों को भुगतना पड़ रहा है. सड़क निर्माण के संभावित दायरे की वजह से इन गांवों में जिला प्रशासन द्वारा जमीनों की खरीदी बिक्री और रजिस्ट्री पर पूरी तरह रोक लगाई गई है. लोग अपनी ही जमीन के मालिक होने के बावजूद न तो उस पर कोई निर्णय ले पा रहे हैं और न ही प्रशासनिक पाबंदियों के कारण कोई राहत पा रहे हैं. वर्षों से परेशानी झेल रहे 51 गांव के ग्रामीणों के लिए बुधवार का दिन राहत की खबर लेकर आएगा. बताया जा रहा है कि 51 गांवों की रजिस्ट्री पर लगी पाबंदी को आज हटा दिया जाएगा. पाबंदी हटाने संबंधित आदेश आज जारी होगी.

    रजिस्ट्री पर लगी पाबंदी हट जाने से ग्रामीणों को राहत मिलेगी.चांपा-कटघोरा राष्ट्रीय राजमार्ग की महत्वकांक्षी परियोजना को वर्ष 2017 में मंजूरी मिली थी. उरगा से चांपा 38.2 किमी की लागत 630 करोड़ थी. जिसे पूर्ण कर लिया गया है. इसका दूसरा चरण उरगा से कटघोरा 38 किमी है. जिसकी लागत पहले 999 करोड़ थी. समय बीतने के साथ लागत बढ़कर अब 1200 करोड़ हो गई है. लेटलतीफी पर और भी लागत बढ़ने की संभावना है. महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी केंद्रीय राजमार्ग और सड़क परिवहन मंत्रालय से मिली थी.

  • ‘सेवा-सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित रहे 25 साल’, CM डॉ. यादव ने PM मोदी की सराहना की

    ‘सेवा-सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित रहे 25 साल’, CM डॉ. यादव ने PM मोदी की सराहना की

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्र निर्माण की इस अविराम यात्रा के गौरवपूर्ण पड़ाव के लिए प्रदेशवासियों को दी बधाई
    प्रदेशवासी विकसित भारत के निर्माण में दें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में सेवा ज्योति कलश यात्रा को किया संबोधित

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सेवा-सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्र निर्माण के संकल्प की यह अविराम यात्रा 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई। प्रधानमंत्री मोदी की जनसेवा की यात्रा आज 25 वर्षों के गौरवपूर्ण पड़ाव पर पहुंच रही है। यह यात्रा ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के संकल्प को साकार करने की निरंतर साधना रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश की प्रगति के लिए अपने जीवन का प्रत्येक क्षण राष्ट्र की सेवा में समर्पित करने का देशवासियों से आहवान किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ईश्वर से प्रधानमंत्री मोदी के सुदीर्घ, स्वस्थ एवं यशस्वी जीवन की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के शुभ अवसर पर देशभर के लाखों नागरिक सेवा संकल्प ज्योति यात्रा में सम्मिलित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में सेवा ज्योति कलश यात्रा को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए।

    मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में विकास और जनकल्याण के पथ पर अग्रसर है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यात्रा में सम्मिलित लोगों को 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का संकल्प दिलवाया। मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में विकास और जनकल्याण के पथ पर निरंतर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर तैयार हो चुका है। मध्यप्रदेश सरकार ने भी एक देश, एक प्रधान, एक विधान के संकल्प को पूरा करते हुए विधानसभा के माध्यम से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कराने का रास्ता साफ किया है। प्रधानमंत्री मोदी की कर कमलों से उज्जैन में बाबा महाकाल के महाकाल लोक का लोकार्पण हुआ, परिणामस्वरूप उज्जैन धार्मिक तीर्थाटन का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां वर्ष 2022 तक लगभग 60 से 70 लाख श्रद्धालु ही आते थे, लेकिन वर्ष 2025 में 7 करोड़ तीर्थ यात्री उज्जैन आए और प्रदेश में कुल पर्यटकों की संख्या 20 करोड़ के पार पहुंच गई।

    प्रधानमंत्री मोदी भारत को विकास एवं प्रगति की नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार थे कि 21वीं शताब्दी भारत की होगी। आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, प्रधानमंत्री मोदी सतत् राष्ट्र सेवा करते हुए भारत को विकास एवं प्रगति की नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं। उन्होंने कोरोना जैसे वैश्विक संकट से देश को बाहर निकालने के साथ अनुच्छेद 370 का ऐतिहासिक निर्णय, नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई से लेकर आयुष्मान भारत, उज्ज्वला गैस योजना एवं प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी अनेक योजनाओं का लाभ जन-जन तक पहुंचाकर प्रधानमंत्री मोदी ने करोड़ों लोगों के जीवन को बदलने का कार्य -किया है। प्रधानमंत्री मोदी की यह पूरी यात्रा विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

    कार्यक्रम एवं सेवा ज्योति मशाल यात्रा में सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सदस्य उमेश नाथ जी महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, जितेंद्र पंडिया, सतीश मालवीय, डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान, गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष ओम जैन, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी, सिंहस्थ प्राधिकरण के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कमला कुंवर, उपाध्यक्ष श्रीमती शिवानी कुंवर, संगठन मंत्री चंद्रशेखर, नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, ग्रामीण अध्यक्ष राजेश धाकड़, रूप पमनानी, जगदीश पांचाल,राकेश पंड्या, विवेक गुप्ता, कमल बैरवा, अनिल शिंदे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

  • पम्प ऊर्जीकरण के लिए किसानों के खेतों पर लगाए जाऐगे सोलर सिस्टम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    पम्प ऊर्जीकरण के लिए किसानों के खेतों पर लगाए जाऐगे सोलर सिस्टम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    वृंदावन ग्राम में उन्नत नस्ल के पशुओं की प्रतियोगिता आयोजित करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    उन्नत नस्ल के पशुपालकों में प्रथम आने वाले को मिलेंगे एक लाख रूपये: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
    पम्प ऊर्जीकरण के लिए किसानों के खेतों पर लगाए जाऐगे सोलर सिस्टम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रतलाम में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को उज्जैन से वर्चुअली संबोधित किया

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उन्नत नस्ल के पशुपालन को बढ़ावा दिया जाए। पशुपालकों को प्रोत्साहन मिले, इसके लिए वृंदावन ग्राम में पशु प्रतियोगिता का आयोजन करवाया जाए। प्रथम आने वाले पशुपालक को सरकार एक लाख रुपये देगी। द्वितीय आने वाले को 50 हजार रुपये एवं तीसरे स्थान पर आने वाले को 25 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। पुरस्कार का वितरण दीपावली पर गौवर्धन पूजा के अवसर पर किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को रतलाम में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव कार्यक्रम को उज्जैन से वर्चुअल संबोधित किया। उन्होंने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि रतलाम के किसान खेती में बदलाव के साथ अलग-अलग प्रकार की खेती कर रहे है। किसान अपनी आय बढ़ाने के लिए फसल उत्पादन, प्रोसेसिंग, पशुपालन एवं उद्यानिकी जैसी गतिविधियों को अपना रहे है। किसानों को कृषि क्षेत्र में सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार द्वारा सिंचाई का रकबा बढ़ाने के साथ ही पम्प ऊर्जीकरण के लिए 30 लाख किसानों के खेतों पर सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा गया है। रबी सीजन में सिंचाई के लिए किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध करवाई जाएगी। रतलाम में चंबल के पानी से सिंचाई हो रही है। नदी जोड़ो अभियान से रतलाम के किसानों के जीवन में बदलाव आएगा। एक्सप्रेस-वे के बनने से रतलाम में अच्छी बाजार व्यवस्था उपलब्ध हुई है। रतलाम के किसान बहुउद्देशीय फसलें उगाते हैं। साथ ही प्रोसेसिंग का कार्य भी करते है। रतलाम में अंगूर की खेती और अंगूर की प्रोसेसिंग का व्यवसाय भी अच्छे से चल रहा है। रतलाम स्वर्ण, सेव और उन्नत खेती के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने रतलाम की सेव के साथ ही तेल वाली कचौरी की भी तारीफ की।

    उन्नतशील किसानों से किया संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद करते हुए सरकार की पीएम एफएमई योजना का लाभ लेकर घी के व्यवसाय को यूएस एवं श्रीलंका तक पहुंचाने वाले किसान दिलीप पाटीदार ने कहा कि उन्हें सरकार की योजना के अंतर्गत 30 लाख 10 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई है। वह बिलोना पद्धति से घी बनाते हैं, जिससे घी की शुद्धता और स्वाद अच्छा होना है जिससे देश के साथ-साथ विदेशों में भी घी की मांग बढ़ी है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। गुलाब की खेती करने वाले प्रवीण पाटीदार ने भी अपने अनुभव साझा किए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमरूद का उत्पादन करने वाले किसान कन्हैयालाल पाटीदार से चर्चा की। कन्हैयालाल ने बताया कि वह कम शुगर वाले वीएनआर, पिंक और रेड डायमंड किस्म के अमरूद का उत्पादन करते हैं। अमरूद को मुंबई, दिल्ली और असम तक के बाजारों में मांग के अनुसार भेजते हैं।

    जैविक उर्वरक के लिए रिसर्च सेंटर का संचालन करने वाली रेखा व्यास ने अपने जैविक खाद की जानकारी दी। लहसुन-प्याज का उत्पादन करने वाले किसान धर्मेंद्र जाट ने भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव से स्थानीय मालवी भाषा में संवाद किया।

    कार्यक्रम में किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, आधुनिक खेती के तौर-तरीकों और कृषि के साथ-साथ पशुपालन, उद्यानिकी एवं अन्य संबद्ध गतिविधियों को अपनाकर आय के विभिन्न स्रोत विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम में एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप, विधायक जावरा डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय, विधायक रतलाम ग्रामीण मथुरालाल डामर ने भी संबोधित किया।

     

  • फ्रांस में छात्र आंदोलन को ट्रंप ने बताया ‘इस्लामी टेकओवर’, बयान पर मचा सियासी घमासान

    फ्रांस में छात्र आंदोलन को ट्रंप ने बताया ‘इस्लामी टेकओवर’, बयान पर मचा सियासी घमासान

    पेरिस /वाशिंगटन

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने  फ्रांस में बड़े पैमाने पर हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के लिए "सामूहिक प्रवासन" और इस्लाम को जिम्मेदार ठहराया, और घर पर होने वाले कठिन मध्यावधि चुनावों से पहले अपने वैश्विक दक्षिणपंथी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया।

    "फ्रांस में जो हो रहा है वह अनियंत्रित सामूहिक प्रवासन से कम नहीं है। यह स्कूलों के बारे में नहीं है, यह इस्लाम द्वारा एक समय के महान देश पर कब्जा करने की चाहत के बारे में है!" ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा।

    फ्रांस के छात्रों ने बेहतर परिस्थितियों की मांग को लेकर सितंबर के अंत से ही देश भर के सैकड़ों हाई स्कूलों के प्रवेश द्वारों को अवरुद्ध कर दिया है, और ये विरोध प्रदर्शन सुरक्षा बलों के साथ छिटपुट झड़पों में तब्दील हो गए हैं।

    फ्रांस में इन दिनों स्कूल और यूनिवर्सिटी के छात्र सड़कों पर हैं. शुरुआत स्कूलों में शिक्षकों, नर्स और स्टाफ की कमी से हुई, लेकिन अब इस आंदोलन पर अमेरिका की राजनीति का असर भी दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों को सिर्फ स्कूलों की समस्या मानने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि यह बेकाबू सामूहिक प्रवासन और इस्लाम के फ्रांस पर कब्जे की कोशिश से जुड़ा है। 

    ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि फ्रांस में जो हो रहा है, वह सिर्फ स्कूलों का मामला नहीं है. उनके मुताबिक, इसके पीछे बड़ी संख्या में हो रहा प्रवासन है और इस्लाम फ्रांस पर कब्जा करना चाहता है. ट्रंप के इस बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि फ्रांस में जमीन पर हो क्या रहा है? क्या वाकई यह आंदोलन धर्म और प्रवासन को लेकर है या कहानी कुछ और है?

     फ्रांस भर में ढाई लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए।
    लेकिन ट्रंप और उनके प्रशासन ने लंबे समय से यूरोपीय सामाजिक समस्याओं के लिए प्रवासन को दोषी ठहराया है, यूरोप से अपनी सीमाओं को बंद करने का आह्वान किया है और धुर दक्षिणपंथी दलों की तरह ही तथाकथित सभ्यतागत पतन की चेतावनी दी है।

    ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (एमएजीए) आंदोलन के प्रमुख नेता अगले महीने होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले आव्रजन के मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए फ्रांस में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

    MAGA के टिप्पणीकारों ने बार-बार फ्रांसीसी अशांति के वीडियो पोस्ट किए हैं, जिसमें ट्रंप के सहयोगी ग्लेन बेक ने सोमवार को कहा कि "फ्रांस में दंगे बाकी पश्चिमी देशों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी हैं।"

    ट्रंप की अलोकप्रियता और ईरान के साथ उनके युद्ध को लेकर आशंकाओं के बीच रिपब्लिकन पार्टी प्रवासन और ट्रांसजेंडर विरोधी बयानबाजी पर और भी जोर दे रही है, क्योंकि उन्हें डर है कि इससे उन्हें कांग्रेस पर अपना नियंत्रण खोने का खतरा है।

    फ्रांस में आखिर हो क्या रहा है?
    मौजूदा आंदोलन की शुरुआत पेरिस के पास स्थित शहर के एक हाई स्कूल से हुई. यहां छात्रों की शिकायत है कि क्लास में 32-35 बच्चे हैं, लेकिन स्कूल में न नर्स है, न शिक्षक. दिव्यांग बच्चों की मदद करने वाला स्टाफ यानी AESH भी कम है। 

    21 सितंबर को छात्र प्रदर्शन कर रहे थे. शुरुआत में आंदोलन एक स्कूल तक सीमित दिख रहा था, लेकिन इसके बाद दूसरे स्कूलों के छात्र भी जुड़ने लगे. अब फ्रांस के अलग-अलग इलाके के कई स्कूलों के बाहर ब्लॉकेड लगे हैं और छात्र अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। 

    आंदोलन ऐसे समय में बढ़ रहा है, जब फ्रांस में बजट को लेकर भी दबाव है. फ्रेंच प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू 2027 के बजट में 54 अरब यूरो की बचत की योजना बता रहे हैं. सरकारी कर्मचारियों के वेतन फ्रीज करने की बात भी हो रही है. हालांकि, यह 54 अरब यूरो पूरे बजट में बचत का आंकड़ा है, सिर्फ स्कूलों के लिए नहीं है. इमैनुएल मैक्रों शासन का भी कहना है कि इसको लेकर लोगों के बीच अफवाह फैली है। 

    क्या आंदोलन में हिंसा भी हो रही है?
    आंदोलन के दौरान कुछ हिस्सों में हिंसा भी हो रही है. 6 अक्टूबर को तीसरा राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन हो रहा है. स्कूल और यूनिवर्सिटी के छात्र सड़कों पर उतर रहे हैं और कई ट्रेड यूनियन भी उनके साथ आ रही हैं. फ्रेंच गृह मंत्रालय 2,66,000 लोगों के शामिल होने की बात कर रहा है, जबकि छात्र संगठन USL 4,50,000 लोगों के शामिल होने का दावा कर रहा है। 

    प्रधानमंत्री के मुताबिक, 215 छात्र और 85 स्कूल कर्मचारी घायल हुए हैं. न्याय मंत्रालय ने 6,000 से ज्यादा गिरफ्तारियों की जानकारी दी है. 100 से ज्यादा स्कूलों को नुकसान पहुंचा है. मार्सेई में आग बुझाने पहुंचे दमकल के ट्रक को भी जला दिया गया. लेकिन यहां एक फर्क समझना जरूरी है। 

    कुछ जगह हिंसा हो रही है, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा छात्र आंदोलन हिंसक है. सरकार कुछ सख्त वामपंथी कार्यकर्ताओं और बाहरी उपद्रवियों की भूमिका की तरफ भी इशारा कर रही है, जबकि हजारों छात्र स्कूलों की सुविधाओं और स्टाफ को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। 

    तो फिर ट्रंप इसे इस्लामी आंदोलन क्यों बता रहे हैं?
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस के छात्र आंदोलन को धार्मिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं. छात्रों की शुरुआती मांगों में शिक्षक, नर्स, स्टाफ और स्कूल के संसाधन शामिल हैं. आप्रवासन या इस्लाम को लेकर आंदोलन शुरू नहीं हुआ था. इसके बावजूद ट्रंप पूरे विवाद को प्रवासन और इस्लाम से जोड़ रहे हैं. वह इसे एक बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक संकट के रूप में देख रहे हैं। 

    ट्रंप के बयान से ऐसा संदेश जा रहा है कि फ्रांस में स्कूलों से जुड़ी शिकायत के पीछे असल समस्या आबादी में हो रहा बदलाव और इस्लाम का कथिर रूप से बढ़ता प्रभाव है. लेकिन जानकारी इस दावे से मेल नहीं खा रही है. फ्रांसीसी अधिकारियों की तरफ से सामने आ रही जानकारी भी यह नहीं दिखा रही कि छात्र किसी संगठित इस्लामी एजेंडे के तहत प्रदर्शन कर रहे हैं। 

    ट्रंप का यह नजरिया कहां से आ रहा है?
    अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान को अमेरिकी और यूरोपीय दक्षिणपंथ की राजनीति के संदर्भ में समझा जा सकता है. इस राजनीति में यूरोप के कई विरोध प्रदर्शनों को प्रवासन, इस्लाम और सुरक्षा के मुद्दों से जोड़कर देखा जाता है. ट्रंप लंबे समय से अमेरिका में सख्त बॉर्डर पॉलिसी और अवैध प्रवासन के खिलाफ सख्त रुख रखते हैं। 

    ऐसे में फ्रांस की अशांति को वह अमेरिकी बहस के लिए एक उदाहरण की तरह पेश कर रहे हैं. यानी फ्रांस में जो समस्या स्कूल से जुड़कर शुरू हुई, उसे ट्रंप एक बड़े सांस्कृतिक संघर्ष के तौर पर देख रहे हैं. फॉक्स की होस्ट टॉमी लाहरेन भी इन प्रदर्शनों को अमेरिकियों के लिए एक "चेतावनी भरी कहानी" बता रही हैं. इससे पता चलता है कि फ्रांस का यह प्रदर्शन अब सिर्फ फ्रांस तक सीमित बहस नहीं रह गया है। 

    अमेरिका के राष्ट्रपति ब्रिटेन के प्रदर्शनों को भी इस्लाम के टेकओवर से जोड़कर देखते हैं. बीते दिनों जब ब्रिटेन में राइट विंग के नेताओं ने सड़क पर प्रदर्शन किए, तो उसे ट्रंप से लेकर एलॉन मस्क और बाकी बड़े अमेरिकी नेताओं ने भी समर्थन दिया था. इन प्रदर्शनों को ट्रंप के करीबियों ने भी संबोधित किया था। 

    सोशल मीडिया इस कहानी को और कैसे बदल रहा है?
    सोशल मीडिया पर ही सबसे ज्यादा भ्रम पैदा हो रहा है. फ्रांस 24 के "ट्रुथ और फेक" के मुताबिक, एलेक्स जोन्स और टॉमी रॉबिन्सन जैसे दक्षिणपंथी चेहरे पुराने और दूसरी घटनाओं के वीडियो शेयर कर रहे हैं. उन्हें मौजूदा प्रदर्शनों से जोड़ रहे हैं. कुछ वीडियो के साथ यह दावा किया जा रहा है कि फ्रांस में एंटी-व्हाइट या इस्लामी विद्रोह हो रहा है। 

    एक वायरल वीडियो की जांच की गई तो पता चला कि वह दिसंबर 2022 का है. उसमें पेरिस में कुर्द समुदाय पर हुई गोलीबारी के बाद के प्रदर्शन दिख रहे हैं. यानी वीडियो असली है, लेकिन उसे जिस घटना से जोड़कर दिखाया जा रहा है, वह गलत है। 

    प्रदर्शनों में कुछ जगहों पर फिलिस्तीन के झंडे के साथ लोगों को प्रदर्शन करते देखा गया है. हालांकि, यह भी समझना जरूरी है कि यूरोपीय देशों में फिलिस्तीन के मुद्दे पर ईसाई समुदाय के लोगों का रुख भी काफी अलग रहा है. वे फिलिस्तीन को एक राज्य के तौर पर देखते हैं. गाजा में जंग के बीच इजरायल की आलोचना भी देखी गई है। 

    फ्रांस में आंदोलन अब बड़ा हो रहा है और अब यूनियन भी इसमें शामिल हो रही हैं. स्कूल और यूनिवर्सिटी के छात्र सड़क पर आ रहे हैं और ट्रेड यूनियनें भी उनका समर्थन कर रही हैं. पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. कुछ छात्र कह रहे हैं कि प्रदर्शन पर जरूरत से ज्यादा सख्ती हो रही है. मसलन आंदोलन को धार्मिक रंग देने की ट्रंप की कोशिशों खुद फ्रेंच अधिकारियों ने ही खारिज कर दिया है, और स्पष्ट किया है कि वे छात्र ही हैं। 

  • झारखंड हाईकोर्ट में CGL नियुक्ति विवाद की सुनवाई, 2700 अभ्यर्थियों की नौकरी पर फैसला बाकी

    झारखंड हाईकोर्ट में CGL नियुक्ति विवाद की सुनवाई, 2700 अभ्यर्थियों की नौकरी पर फैसला बाकी

    रांची
     झारखंड हाई कोर्ट में सीजीएल परीक्षा रद करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई जारी है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में सीआईडी की जांच जारी है।

    इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि वह सीआईडी की जांच को लेकर सुनवाई नहीं कर रही है। अदालत ने कहा कि वह 2700 अभ्यर्थियों को एक नोटिफिकेशन के माध्यम से हटाए जाने के मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने कहा कि यह मामला गंभीर है और वह मामले में जल्द से जल्द निर्णय देना चाहती है।

    अदालत ने कहा कि उसे सिर्फ यह देखना है कि सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के लिए सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है या नहीं। सरकार के जवाब को देखते हुए अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सरकार ने दबाव में नियुक्ति रद करने का निर्णय लिया है। फिलहाल मामले में दोपहर 2:15 बजे से फिर सुनवाई होगी। 

    विभिन्न परीक्षाओं के अभ्यर्थियों ने दी चुनौती
    उल्लेखनीय है कि अदालत के समक्ष अलग-अलग याचिकाओं के जरिए अभ्यर्थियों ने सरकार और आयोग के विज्ञापन रद्द करने के निर्णय को चुनौती दी है. प्रार्थी रमेश उरांव व अन्य की ओर से याचिका दायर कर जेएसएससी सीजीएल परीक्षा-2023 को रद्द करने की सरकार की अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जबकि प्रार्थी सुभाष मुरमू व अन्य ने सीडीपीओ नियुक्ति परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इसके साथ ही प्रार्थी दीपमाला, आशीष अक्षत, आकांक्षा मिंज व अन्य ने जेपीएससी 11वीं से 13वीं प्रतियोगिता परीक्षा तथा प्रार्थी सौरभ सिंह व अन्य ने फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा रद्द करने के फैसले को निरस्त करने की मांग की है। 

    अभ्यर्थियों के भविष्य पर छाया संकट
    प्रार्थियों की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि परीक्षा प्रक्रियाओं के अंतिम चरण या विज्ञापन जारी होने के बाद अचानक बिना किसी ठोस व तार्किक कारण के पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करना गलत है. सरकार के इस कदम से वर्षों से तैयारी कर रहे हजारों योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है और उनकी उम्र सीमा भी समाप्त हो रही है. फिलहाल हाईकोर्ट की इस पीठ में मामले पर बहस जारी है और अदालत के रुख पर राज्यभर के युवाओं की नजरें टिकी हुई हैं। 

  • बैलेट पेपर चुनाव में BJP का दबदबा, कांग्रेस को मिली सिर्फ 2 सीटें; 32 पर भगवा जीत

    बैलेट पेपर चुनाव में BJP का दबदबा, कांग्रेस को मिली सिर्फ 2 सीटें; 32 पर भगवा जीत

    दिसपुर

    असम की  में चुनावी झटका लगा है। एसआईआर (SIR) के खिलाफ प्रदर्शन के बीच कांग्रेस को सिलचर नगर निगम चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। अब कांग्रेस की इस हार पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने तंज कसा है। सरमा ने कहा कि ईवीएम की बात तो छोड़िए, कांग्रेस बैलेट पेपर पर भी नहीं जीत सकती है। बता दें कि सिलचर स्थानीय चुनाव बैलेट पेपर से हुई थी और कांग्रेस दो सीटों पर ही जीत सकी है, वहीं भाजपा को 32 सीटों पर जीत मिली है।

    सीएम हिमंता ने कांग्रेस पर कसा तंज
    सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस ईवीएम की खिलाफत करती है और बैलेट पत्र पर भी हुआ चुनाव हार जाती है। उन्होंने कहा, 'आप ही देखिए कि बैलेट पेपर पर भी कांग्रेस हार गई। बैलेट पेपर पर कांग्रेस थोड़ा ज्यादा ही हार गई। इसलिए ईवीएम में लोग नोटा भी दबा देते हैं। मशीन देखकर कुछ लोग घबरा जाते हैं और कभी गलत जगह पर वोट मार देते हैं, लेकिन बैलेट में तो वोट देने के बारे में लोग जानते हैं। तो जब तक बैलेट पेपर में वोट होते हैं, तब कांग्रेस और ज्यादा हारती है।'

    सरमा ने कहा-कोई साथ नहीं दे रहा
    सरमा ने कहा, 'आज आप देखिए कि सिलचर इलाका में 10 सीटें धार्मिक अल्पसंख्यकों की ही सीटें थीं। मतलब 10 सीट ऐसी थी, जहां कांग्रेस अल्पसंख्यकों के वोट से जीत सकती थी। लेकिन वहां भी कांग्रेस को वोट नहीं मिला और बस दो सीटें मिलीं और निर्दलीय को 5 सीटें मिलीं। तो पहला हुआ भाजपा-एजेपी, दूसरे हुए निर्दलीय और तीसरे पर कांग्रेस और बैलेट पेपर पर। आज के लिए हम लोग नारा दिए हैं कि आप मशीन पर भी हारने वाले हैं और बैलेट पर भी हारने वाले हैं।'

    भाजपा ने अकेले जीती 32 सीटें 
    बता दें कि इस चुनाव में भाजपा ने अकेले 32 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि उसकी सहयोगी पार्टी असम गण परिषद (AGP) को 2 सीटें मिली हैं। इस तरह एनडीए के खाते में कुल 34 सीटें गईं। वहीं कांग्रेस पार्टी को सिर्फ 2 सीटों से संतोष करना पड़ा, जबकि 6 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।

    कांग्रेस पर जमकर बरसे सीएम सरमा
    चुनाव नतीजों के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पार्टी पर जोरदार हमला बोला। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और 'विकसित भारत' के एजेंडे पर पूरी मुहर लगाई है।

    कांग्रेस के ईवीएम बहाने पर भाजपा का वार
    इसके अलावा असम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा ईवीएम में छेड़छाड़ का रोना रोती रहती है, लेकिन इस बार तो चुनाव बैलेट पेपर से हुए थे और परिणाम सबके सामने है कि कांग्रेस कहीं नहीं टिक पाई।

    सिलचर नगर निगम का क्या रहा रिजल्ट
    असम के सिलचर नगर निकाय में कुल 42 वार्ड में से 40 वार्ड के लिए तीन अक्टूबर को मतदान हुआ था, जबकि वार्ड संख्या 9 और 20 से भाजपा उम्मीदवार बिजेंद्र प्रसाद सिंह व भक्ति सेन तालुकदार निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। इनमें से भाजपा ने 32 और असम गण परिषद ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की है। जबकि, कांग्रेस के खाते में 2 सीटें और निर्दलीय को 6 पर जीत मिली है। असम के सिलचर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस मात्र दो सीटों पर सिमट गई, वहीं भाजपा ने 32 सीटें जीती हैं। 

  • अंबाला भवन हादसे की जांच में उठे सवाल, आयोग ने पूछा- नक्शा पास था तो अवैध निर्माण क्यों?

    अंबाला भवन हादसे की जांच में उठे सवाल, आयोग ने पूछा- नक्शा पास था तो अवैध निर्माण क्यों?

    अंबाला.

    धूलकोट में निर्माणाधीन तीन मंजिला अवैध भवन के गिरने से सात लोगों की मौत मामले में मानवाधिकार आयोग ने अंबाला के उपायुक्त, नगर निगम आयुक्त और पुलिस अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

    असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा के अनुसार संबंधित प्राधिकारियों की रिपोर्ट अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले आयोग को मिल जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी। 27 सितंबर को धूलकोट में निर्माणाधीन तीन मंजिला अवैध भवन ढह गया था।

    मलबे में कई श्रमिक दब गए थे। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी। 12 श्रमिक घायल हुए थे। घटना को लेकर अमनदीप सिंह भाटिया की शिकायत पर सुनवाई करते हुए हरियाणा मानवाधिकार आयोग के सदस्य (न्यायिक) कुलदीप जैन ने यह आदेश जारी किया।