Author: NewseDay

  • साप्ताहिक जनसुनवाई: कलेक्टर ने सुनी जनता की शिकायतें, तुरंत समाधान के दिए निर्देश

    साप्ताहिक जनसुनवाई: कलेक्टर ने सुनी जनता की शिकायतें, तुरंत समाधान के दिए निर्देश

    कलेक्टर ने सुनीं आमजन की समस्याएं, त्वरित निराकरण के दिए निर्देश

    साप्ताहिक जनसुनवाई में 90 आवेदनों पर सुनवाई

     

    डिंडौरी
       जिला मुख्यालय पर आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में आज बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर पहुंचे। कलेक्टर ने एक-एक कर आवेदकों से मुलाकात की और उनकी शिकायतों के निराकरण के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।

               कलेक्ट्रेट सभागार में  आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में आम नागरिकों की समस्याएं सुनी गईं तथा कई आवेदनों का मौके पर ही समाधान कराया गया। जनसुनवाई में जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए नागरिकों द्वारा समस्याओं एवं शिकायतों से संबंधित कुल 90 आवेदन प्रस्तुत किए गए। जिन मामलों का तत्काल निराकरण संभव नहीं हो सका, उनमें आवेदकों को समय-सीमा निर्धारित कर आवश्यक आश्वासन प्रदान किया गया।

            जनसुनवाई के दौरान ग्राम पंचायत पोंड़ी माल विकासखंड डिंडौरी की आवेदिका श्रीमती अंधियारो बाई धुर्वे (आयु 70 वर्ष) एवं श्री गनपत सिंह (आयु 75 वर्ष) द्वारा विगत 10 माह से पेंशन राशि प्राप्त नहीं होने की शिकायत प्रस्तुत की गई। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अपर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी को तत्काल निराकरण के निर्देश दिए।

         कलेक्टर के निर्देश पर सामाजिक न्याय विभाग द्वारा दोनों हितग्राहियों की ई-केवायसी की गई, जिससे आगामी माह से उनके खाते में पेंशन राशि का नियमित भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा।

          इसी क्रम में ग्राम बहेरा टोला, ग्राम पंचायत माधोपुर विकासखंड डिंडौरी के आवेदक श्री इन्द्रपाल सिंह (आयु 82 वर्ष) एवं श्रीमती उर्मिला बाई (आयु 78 वर्ष) ने भी वृद्धावस्था पेंशन न मिलने की समस्या जनसुनवाई में रखी। जांच में पाया गया कि ई-केवायसी पूर्ण न होने के कारण उनकी पेंशन बंद थी। अपर कलेक्टर के निर्देशानुसार पुनः ई-केवायसी की गई, जिससे आगामी माह से पेंशन भुगतान पुनः प्रारंभ हो जाएगा। इसी प्रकार ग्राम ईश्वरपुर बंगवार ग्राम पंचायत दामी तितराही जनपद पंचायत समनापुर के श्री प्रेमलाल झिगराम ने जनसुनवाई में आवेदन दिया कि मेरे पुत्र पवन कुमार झिगराम की मृत्यु  28 सितंबर 2025 को हुआ है जिसका ग्राम पंचायत के द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। उक्त मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने हेतु जनसुनवाई में पहुंचे जहां पर अपर कलेक्टर ने योजना एवं सांख्यिकी विभाग के श्री अभिषेक बंसल को निराकरण करने के लिए निर्देशित किया जिस पर उन्होंने समस्या को गंभीरता से लेते हुए एक घंटे के अंदर मृत्यु प्रमाण पत्र संबंधित हितग्राही को जनसुनवाई के दौरान सौंपा गया।

            अपर कलेक्टर ने जिले के समस्त हितग्राहियों से अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति की पेंशन राशि बंद हो गई है अथवा इस प्रकार की कोई समस्या है, तो वे अपने ग्राम पंचायत के सचिव, रोजगार सहायक, मोबिलाइज़र अथवा संबंधित जनपद पंचायत कार्यालय में संपर्क कर समस्या का समाधान करा सकते हैं, जिससे जिला मुख्यालय आने में समय व परेशानी से बचा जा सके।

             जनसुनवाई में आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय भुगतान न होने पर उन्होंने जनसुनवाई में गुहार लगाई है कि ’ओम पारस मेन पावर सर्विस’ लिमिटेड, भोपाल के माध्यम से जिले के विभिन्न सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने आवेदन सौंपा। डाटा एंट्री ऑपरेटर, वार्डवॉय और सिक्योरिटी गार्ड सहित अन्य कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें नवंबर, दिसंबर और जनवरी माह का मानदेय अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। कर्मचारियों ने अपर कलेक्टर से मांग की है कि उनके मानदेय भुगतान के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित की जाए। जिस पर अपर कलेक्टर ने संबंधित विभाग को समस्या का निराकरण करने के निर्देश दिए तथा अपर कलेक्टर के द्वारा लिखित आवेदन भी कंपनी को मानदेय भुगतान  हेतु प्रेषित किया जाए। इसी तरह ग्राम मुंगेला विकासखंड समनापुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत बंजरा के सरपंच और ग्रामीणों ने सामुहिक रूप से लिखित आवेदन के साथ प्राथमिक शाला के जर्जर भवन की स्थिति की शिकायत की। बच्चों को स्कूल में अध्ययन में समस्या आ रहीं है। ग्रामीणों ने नए भवन निर्माण की मांग की। जिस पर अपर कलेक्टर ने समस्या को गंभीरता से लेते हुए डीपीसी, सर्व शिक्षा अभियान अधिकारी को निराकरण करने के निर्देश दिए। 

        ग्राम मोहगांव माल निवासी आवेदक ने अपने पिता की मृत्यु के उपरांत प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत लंबित क्लेम राशि के भुगतान हेतु आवेदन दिया। जिस पर कलेक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारी को समस्या का निराकरण करने के निर्देश दिए।
          कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित इस जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे प्राप्त आवेदनों की गंभीरता से जांच करें और समय सीमा के भीतर हितग्राहियों को लाभ दिलाना सुनिश्चित करें।

        जनसुनवाई के दौरान अतिरिक्त सीईओ जिला पंचायत  पंकज जैन, एसडीएम डिंडौरी सुश्री भारती मेरावी, डिप्टी कलेक्टर  वैद्यनाथ वासनिक, डिप्टी कलेक्टर सुश्री प्रियांशी जैन, सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग श्री राजेन्द्र जाटव, एलडीएम  रविशंकर सहित अन्य संबंधित अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • भारत में फिलिस्तीन स्टिकर विवाद: ब्रिटिश कपल पर एजेंसियों का अलर्ट, तुरंत निकाला गया देश से

    भारत में फिलिस्तीन स्टिकर विवाद: ब्रिटिश कपल पर एजेंसियों का अलर्ट, तुरंत निकाला गया देश से

    अजमेर

    राजस्थान के अजमेर में सार्वजनिक स्थलों पर इजरायल के खिलाफ और फिलिस्तीन के समर्थन में स्टिकर चिपकाने के मामले में एक ब्रिटिश दंपति के खिलाफ कार्रवाई करते हुए भारतीय अधिकारियों ने उन्हें देश छोड़ने के निर्देश दिए हैं। खुफिया एजेंसियों ने इसे गंभीर मामला मानते हुए जिला पुलिस को सतर्क किया, जिसके बाद दोनों विदेशी नागरिकों से पूछताछ की गई।

    जानकारी के अनुसार, लुईस गैब्रियल डी. अपनी गर्लफ्रेंड अनुशी एम्मा क्रिस्टीन के साथ पर्यटक वीजा पर भारत आए थे और वे पुष्कर में ठहरे हुए थे। 21 जनवरी को खुफिया विभाग को सूचना मिली कि यह दंपति अजमेर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर राजनीतिक प्रकृति के स्टिकर चिपका रहा है। इसके बाद खुफिया विभाग ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय सूचनाओं की समीक्षा कर दोनों की पहचान की।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस को शामिल किया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सीआईडी) राजेश मीणा के नेतृत्व में गठित टीम ने दोनों संदिग्धों से पूछताछ की। पूछताछ में सामने आया कि उन्होंने पर्यटक वीजा की शर्तों का उल्लंघन करते हुए राजनीतिक गतिविधियों में भाग लिया, जो वीजा नियमों के तहत प्रतिबंधित है।

    पुलिस की मदद से सार्वजनिक स्थानों से सभी स्टिकर हटा दिए गए। इसके बाद आव्रजन और विदेशियों से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए गए और उन्हें 'लीव इंडिया नोटिस' जारी किया गया, जिसमें देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है।

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया जा सकता है, उनके खिलाफ निर्वासन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है और उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है, जिससे भविष्य में भारत में प्रवेश पर रोक लग सकती है। प्रशासन ने दो टूक कहा है कि पर्यटक वीज़ा पर भारत आए किसी भी विदेशी को राजनीतिक, विरोध प्रदर्शन या वैचारिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है।

  • खंगाला जा रहा रिकॉर्ड, फरीदाबाद में आयकर विभाग ने कई ठिकानों पर दी दबिश

    खंगाला जा रहा रिकॉर्ड, फरीदाबाद में आयकर विभाग ने कई ठिकानों पर दी दबिश

    फरीदाबाद.

    फरीदाबाद जिले में  इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के द्वारा बड़ी कार्रवाही की जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शहर के अलग-अलग 6 से 8  ठिकानों पर टीमें छापेमारी कर रही है। इनमें कई स्कूल और कपंनी मालिकों के घर शामिल है। आज सुबह करीब 6 बजे ही फरीदाबाद में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की कई टीमें पुलिस बल के साथ शहर में पहुंची।

    शहर में आने के बाद इन टीमों के सदस्यों को अलग-अलग ठिकानों पर रेड की जा रही है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट  की तरफ से एक साथ पहली बार इतनी बड़ी रेड की जा रही है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की टीमें शहर में अलग-अलग जगह पर छापेमारी कर रही है। जिन जगहों पर छापेमारी की जा रही है। उनमें एनआईटी स्थित हिंदुस्तान सिक्योरिटी का ऑफिस और सेक्टर 21 में निवास शामिल है। इसके अलावा सेक्टर सेक्टर 17 और सेक्टर 28, नहर पार इलाके के कई स्कूल शामिल है।

    सूत्रों के मुताबिक 6 से 8 ठिकानों पर आईटी की टीमें छापेमारी कर रही है। सेक्टर नौ के मकान नंबर 504-505 में रानी रॉड के मालिक दीपक गुप्ता के यहां भी छापेमारी हो रही है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ये छापेमारी किसी बड़ी फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन होने के चलते की जा रही है। स्कूलों और कंपनी के रिकॉर्ड को चेक किया जा रहा है।

  • बेटे को नौकरी से निकालने पर CMO को दी थी धमकी, नकली स्वास्थ्य मंत्री गिरफ्तार

    बेटे को नौकरी से निकालने पर CMO को दी थी धमकी, नकली स्वास्थ्य मंत्री गिरफ्तार

    अमृतसर.

    अमृतसर पुलिस ने एक पांचवीं पास व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो खुद को स्वास्थ्य मंत्री बताकर सिविल अस्पताल के सीएमओ डॉ. रजनीश को धमका रहा था। आरोपी हरजीत सिंह ने अस्पताल में कथित कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए अवैध निर्देश देने का प्रयास किया। हालांकि, सीएमओ की शिकायत पर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

    आरोपी के खिलाफ पहले भी धोखाधड़ी के छह मामले दर्ज हैं। यह मामला सिविल अस्पताल अमृतसर में तैनात एक सीएमओ डॉ. रजनीश द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। डॉ. रजनीश ने बताया कि मंगलवार फरवरी को सुबह 10.34 बजे उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। फोन करने वाले व्यक्ति ने सिविल अस्पताल में कथित कुप्रबंधन के आरोप लगाए और डराने-धमकाने का प्रयास किया। आरोपी ने सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप करते हुए कई अवैध निर्देश जारी करने की कोशिश की।

    इसके अलावा अस्पताल स्टाफ के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने की बात करने लगा। आरोपी ने यह भी कहा कि अस्पताल प्रशासन ने एक कर्मचारी को बिना वजह नौकरी से निकाला, जो अनुचित है। जब सीएमओ ने आरोपी की पहचान को लेकर दोबारा सवाल किए तो उसने अपना बयान बदलते हुए खुद को मंत्री कार्यालय से गुरजीत सिंह बताया। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने बार-बार झूठा अधिकार जताकर मानसिक रूप से परेशान किया और दबाव बनाने की कोशिश की। इसके बाद सीएमओ ने मामला सिविल सर्जन अमृतसर के संज्ञान में लाया। सिविल सर्जन ने इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह से संपर्क किया, जिन्होंने स्पष्ट रूप से किसी भी तरह की कॉल या निर्देश से इनकार किया और मामले में कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए।

    जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी द्वारा सरकारी अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए फर्जी पहचान, आपराधिक धमकी और अधिकारों के दुरुपयोग का प्रयास किया गया। इसके आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी का नाम हरजीत सिंह है। वह 57 वर्षीय है और वह गुरबख्श नगर का रहने वाला है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी एक प्राइवेट गोताखोर है। उसे गेट हकीमां क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।

    बाद में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी हरजीत सिंह का बेटा सिविल अस्पताल में सुरक्षा कंपनी में कार्यरत था, पर जब दस्तावेजों की जांच की गई तो वह पूर्व सैनिक नहीं पाया गया। ऐसे में कंपनी ने उसे नियमों के अनुसार नौकरी से हटा दिया था। डीसीपी विजय आलम ने बताया कि आरोपित के खिलाफ पहले भी धोखाधड़ी के छह मामले दर्ज हैं। मामले की आगे की जांच जारी है और आरोपी से पूछताछ की जा रही है।

  • भ्रष्ट ठेकेदार का कारनामा उजागर, विधायक ने गुणवत्ताहीन निर्माण को तुड़वाया

    भ्रष्ट ठेकेदार का कारनामा उजागर, विधायक ने गुणवत्ताहीन निर्माण को तुड़वाया

    सीतापुर.

    भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो कुछ दिनों से एक अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं। विधायक रामकुमार टोप्पो ने अपने क्षेत्र में जारी विकास कार्यों में लापरवाही बरतने वाले और भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया हुआ है। विधायक टोप्पो मंगलवार को मैनपाट ब्लॉक के दौरे पर पहुंचे थे।

    इस दौरान गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य पाए जाने पर विधायक ने तत्काल उसे तुड़वाया और दोबारा निर्माण करने का आदेश जारी किया। इस दौरान विधायक टोप्पो ने सख्त रवैया अपनाते हुए कहा कि, निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह सीधे तौर पर क्षेत्र के विकास से जुड़ा मामला है।

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, अपने क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का जायजा लेने के लिए विधायक रामकुमार टोप्पो ग्राम ग्राम करमहा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सड़क किनारे चल रहे रिटर्निंग वॉल के निर्माण का निरीक्षण किया और रिटर्निंग वॉल की बारीकी से जांच की। दीवार के निर्माण में गुणवत्ता की कमी और घटिया सामग्री का उपयोग देखकर विधायक आक्रोशित हो गए। विधायक रामकुमार टोप्पो ने निरीक्षण के दौरान ही अधिकारियों को इस निर्माण कार्य को पूरी तरह तोड़कर नए सिरे से मानक स्तर पर बनाने का निर्देश दे दिया।

    रिटर्निंग वॉल के निरीक्षण के बाद विधायक टोप्पो ग्राम करमहा में ही सड़क पर बने एक नवनिर्मित पुल का निरीक्षण पहुंचे। इस दौरान उन्हें वहाँ भी खामियां नजर आई। विधायक रामकुमार टोप्पो ने पुल को भी तत्काल प्रभाव से तोड़कर दोबारा बनाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। विधायक टोप्पो के इस अवतार को देखे क्षेत्र के ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

     

  • एमपी का सफर प्रभावित, घने कोहरे से विजिबिलिटी कम, 12+ ट्रेनें लेट और शाजापुर में हादसे में जान गई

    एमपी का सफर प्रभावित, घने कोहरे से विजिबिलिटी कम, 12+ ट्रेनें लेट और शाजापुर में हादसे में जान गई

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में ओले और बारिश का दौर थमने के बाद बुधवार सुबह घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। ग्वालियर में दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। कोहरे के कारण दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें देरी से चल रही है। 

    बुधवार सुबह ग्वालियर के अलावा दतिया, रीवा, रतलाम, उज्जैन, दमोह, नौगांव, सीधी, भोपाल, इंदौर, राजगढ़, खजुराहो, गुना, छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला, सागर, टीकमगढ़, मलाजखंड, शाजापुर, छतरपुर, विदिशा, आगर-मालवा, सीहोर, भिंड और मुरैना समेत कई जिलों में मध्यम से घने कोहरे का असर देखने को मिला। कुछ इलाकों में विजिबिलिटी बेहद कम होने से सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ।

    राजगढ़ सबसे ठंडा, न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस

    कोहरे के कारण शाजापुर जिले के अकोदिया-शुजालपुर स्टेट हाईवे पर कार और बाइक की भिड़ंत हो गई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई। वहीं विदिशा में सुबह हल्की बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। उत्तरी मध्य प्रदेश में कोहरे के साथ सर्द हवाएं चल रही हैं, हालांकि रात के तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं आई है। प्रदेश में राजगढ़ सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल और इंदौर में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री, ग्वालियर में 13.1, उज्जैन में 14 और जबलपुर में 14.8 डिग्री सेल्सियस रहा। अन्य जिलों में पारा 10 से 16 डिग्री के बीच दर्ज किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार ग्वालियर में विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम, दतिया और रीवा में 50 से 200 मीटर, जबकि भोपाल, इंदौर और राजगढ़ में एक किलोमीटर से ज्यादा रही। रेल यातायात पर पड़े असर के चलते पंजाब मेल 3 घंटे, शताब्दी एक्सप्रेस करीब 3 घंटे, कर्नाटक एक्सप्रेस 4 घंटे से अधिक और मालवा एक्सप्रेस 8 घंटे 15 मिनट की देरी से चल रही है।

  • बलूचिस्तान संकट: बवाल के बावजूद US और चीन क्यों बने हुए हैं गवाह?

    बलूचिस्तान संकट: बवाल के बावजूद US और चीन क्यों बने हुए हैं गवाह?

    बलूचिस्तान

    बलोचों के मुस्लिम भर होने से कलात (बलूचिस्तान) को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बन जाना चाहिए… 27 मार्च 1948 को जब पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने बलूचिस्तान को जबरन कब्जाया तो इसका काफी विरोध हुआ. जिन्ना अपनी ही बातों से मुकर गए. जिस जिन्ना ने बलूचिस्तान को स्वायत्त रहने देने की सलाह दी थी, उन्होंने ही जबरन आजाद बलूचिस्तान को पाकिस्तान में मिला लिया. 

    पाकिस्तानी इतिहासकार याकूब खान बंगाश अपनी किताब, 'अ प्रिंसली अफेयर' में लिखते हैं, 'आजाद रहने के प्रतिरोध को पाकिस्तान की सरकार ने कुचल दिया और बलपूर्वक कलात को अपने में मिला लिया.'

    पाकिस्तान जब आजाद हुआ तब कलात को अलग स्वायत्त प्रदेश की मान्यता मिली थी. 11 अगस्त 1947 को कलात और मुस्लिम लीग के बीच हुए समझौते में बलूचिस्तान एक अलग देश बना लेकिन उसकी सुरक्षा पाकिस्तान के जिम्मे दी गई. 12 अगस्त को बलूचिस्तान के शासक मीर अहमद खान ने अपनी रियासत को एक आजाद देश घोषित किया. लेकिन बलूचिस्तान की आजादी महज 227 दिनों की मेहमान थी. 

    27 मार्च 1948 को मीर अहमद खान से पाकिस्तान में विलय के पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए. उसी दिन से बलूचिस्तान में हिंसा और टकराव का सिलसिला शुरू हुआ, जो आज भी थमा नहीं है.

    बीएलए के हमलों से दहल उठा पाकिस्तान

    बीते शुक्रवार रात को बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहे हथियारबंद समूह बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने प्रांत के करीब एक दर्जन ठिकानों को सिलसिलेवार तरीके से निशाना बनाया. हमले अगले दिन भी जारी रहे और एक के बाद एक हुए इन धमाकों से पाकिस्तान दहल उठा.

    करीब 200 बीएलए लड़ाके, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, ने छोटे-छोटे समूहों में बंटकर एक साथ आत्मघाती धमाके और गोलीबारी की. पुलिस थानों, लोगों के घरों और सेना से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया. बीएलए का दावा है कि उसके हमलों में 200 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कहा जा रहा है कि हमले में 17 सैनिक और 31 नागरिक मरे हैं. 

    पाकिस्तानी सेना की जवाबी कार्रवाई में विद्रोही लड़ाकों को भारी नुकसान पहुंचा है. सेना की कार्रवाई में 177 बीएलए लड़ाके मारे गए हैं. 

    पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हमले पर बोलते हुए सोमवार को कहा कि बलूचिस्तान में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती जरूरी है.

    पाकिस्तान की संसद में खड़े होकर आसिफ ने कहा, 'भौगोलिक रूप से बलूचिस्तान पाकिस्तान के 40 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है. इसे कंट्रोल करना किसी घनी आबादी वाले शहर से कहीं ज्यादा मुश्किल है. ऐसी जगह को कंट्रोल करने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की जरूरत होती है. हमारे सैनिक वहां तैनात हैं और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन इतने बड़े इलाके की निगरानी और वहां पेट्रोलिंग करना बेहद चुनौती भरा है.'

    ये वही बलूचिस्तान है जिसके कीमती पत्थर देख ट्रंप की आंखों में आ गई चमक

    पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ अमेरिका पहुंचे थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में दोनों से मुलाकात की.

    इस दौरान मुनीर ने शहबाज शरीफ की मौजूदगी में ट्रंप के सामने एक ब्रीफकेस खोला… ब्रीफकेस खुलते ही बिजनेसमैन राष्ट्रपति ट्रंप की आंखें चमक उठीं. अंदर चमकते कीमती पत्थरों और खनिजों का एक सेट था. मुनीर का यह गिफ्ट ट्रंप को पाकिस्तान की ताजा पेशकश का हिस्सा था. मतलब साफ था कि पाकिस्तान अपने खनिज संसाधनों को अमेरिकी निवेश के लिए खोलने को तैयार है. पाकिस्तान के खनिज संसाधन यानी बलूचिस्तान के खनिज संसाधन.

    गैस, सोने, तांबे की खान है बलूचिस्तान

    बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रांत है. पाकिस्तान की कुल जमीन का करीब 44 प्रतिशत हिस्सा बलूचिस्तान है जहां पाकिस्तान के गैस, कोयला, सोना, तांबा का अधिकांश रिजर्व है.

    बलूचिस्तान में कीमती पत्थरों की भी भरमार है और पाकिस्तान के कुल कीमती पत्थरों का 90% हिस्सा यही से निकाला जाता है. यहां के संगमरमर काफी मशहूर है जो हाई क्वालिटी के होते हैं. जियारत व्हाइट, ब्लैक एंड गोल्ड मार्बल यहां की पहचान हैं. बलूचिस्तान में रेयर अर्थ मिनरल्स के भी बड़े भंडार हैं.

    पाकिस्तान के कुल खनिज संसाधनों का 75% हिस्सा बलूचिस्तान से निकाला जाता है. लेकिन इन संसाधनों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान की सरकार के पास जाता है.

    बलूचिस्तान का ईरान और अफगानिस्तान एंगल

    बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है बावजूद इसके, यहां की आबादी काफी कम है. पाकिस्तान की 25 करोड़ आबादी का केवल छह फीसद हिस्सा यहां रहता है. बलूचिस्तान में बलूच जनजाति की बहुलता है जो यहां के स्थानीय निवासी हैं. कुछ संख्या में पश्तून भी बलूचिस्तान में रहते हैं. 

    बलूचिस्तान क्षेत्र तीन देशों के बीच बंटा है जिसमें पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत, ईरान का सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत और अफगानिस्तान के निमरुज, हेलमंद और कांधार शामिल हैं. दोनों देशों से लगती बलूचिस्तान की सीमाएं हमेशा से अस्थिर रही हैं.

    ईरान और पाकिस्तान के बीच यूं तो भाईचारे वाला संबंध रहा है लेकिन दोनों देश एक-दूसरे पर बलूच विद्रोहियों को लेकर आरोप लगाते रहे हैं. ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में स्थित विद्रोही समूहों को लेकर पाकिस्तान और बलूचिस्तान स्थित समूहों को लेकर ईरान एक-दूसरे पर दोष मढ़ते रहते हैं.

    इसी लड़ाई को लेकर 16 जनवरी 2024 को ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे. ईरान का दावा था कि उसने बलोच सुन्नी मिलिटेंट समूह जैश अल-अदल के ठिकानों को निशाना बनाया क्योंकि वो ईरान पर हमले कर रहा है. 

    जवाब में पाकिस्तान ने भी ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में रॉकेट और मिसाइलों से हमले किए. पाकिस्तान ने दावा किया कि ये हमले उसने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) के ईरान स्थित ठिकानों पर किए हैं. इन हमलों से दोनों देशों में भारी तनाव देखा गया था. अफगानिस्तान से लगती बलूचिस्तान की सीमा भी लंबे समय से अस्थिर बनी हुई है. 

    पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान के तालिबान शासन पर आरोप लगाता रहा है कि वो इन सीमाओं से आतंकियों की आवाजाही रोकने में नाकाम रहा है. बलूचिस्तान में अशांति को लेकर पाकिस्तान कभी अफगानिस्तान तो कभी भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाता है लेकिन वो यह बात नहीं समझ पा रहा कि बलूचिस्तान की इस हालत के लिए जिम्मेदार खुद वहां की अब तक की सभी सरकारें और सैन्य प्रमुख हैं.

    सबसे बड़े और संपन्न प्रांत को पाकिस्तान ने बना दिया सबसे गरीब

    19वीं सदी में जब ब्रिटिश सरकार भारत (जिसमें आज का पाकिस्तान, बांग्लादेश शामिल थे) पर राज कर रही थी तब एक कहावत चलन में थी. अंग्रेज कहा करते थे- बलूचों का सम्मान करो, पश्तूनों को खरीद लो, पंजाबियों पर राज करो और सिंधियों को डराकर रखो.' 

    इस कहावत से एक बात साफ हो जाती है कि बलूचों पर जीत हासिल करना अंग्रेजों के लिए भी मुश्किल था और इसलिए उन्होंने उनके साथ ससम्मान रहने का रास्ता चुना. लेकिन पाकिस्तान की सरकार यह बात समझ नहीं पाई और उन्होंने बलूचिस्तान पर जबरन कब्जा किया. इसी कब्जे का नतीजा पाकिस्तान आजतक भुगत रहा है और बलूच अपने स्वाभिमान के लिए अब तक लड़ रहे हैं.

    प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर बलूचिस्तान को पाकिस्तान की सरकारों ने सबसे गरीब प्रांत बना दिया. यहां के प्राकृतिक संसाधन पाकिस्तान की सरकार चीन और अब अमेरिका के साथ मिलकर लूट रही है और इसका फायदा बलूचों तक नहीं पहुंच रहा.

    पाकिस्तान ने जबरन बलूचिस्तान पर कब्जा तो कर लिया लेकिन वहां के लोगों का मन कभी नहीं पढ़ पाया. बलूच हमेशा से पाकिस्तान की सरकारों से नाराज रहे हैं और विलय के बाद से ही विरोध की आवाज उठती रही है. बलूचिस्तान में विरोध की ज्वाला तब और भड़क गई है जब पाकिस्तान ने चीन को इस क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट्स दे दिए.

    बलूचिस्तान के विलय के बाद से ही शुरू हो गया था विद्रोह

    बलूचिस्तान के पाकिस्तान में विलय के बाद से ही प्रांत में विद्रोही आंदोलनों को शुरुआत हो गई. और उस विरोध की मशाल कलात के शासक मीर अहमद खान के भाई प्रिंस करीम खान ने उठाई. उन्होंने बलूच राष्ट्रवादियों का एक दस्ता बनाया और 1948 में ही पाकिस्तान के खिलाफ पहला विद्रोह किया. पाकिस्तान ने बड़े ही बेरहमी से विद्रोह को कुचल दिया और प्रिंस करीम अपने सहयोगियों समेत गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए.

    इसके बाद भी बलूच शांत नहीं हुए और उन्होंने अपने हक के लिए लगातार विद्रोह किए. 1950, 1960, 1970 के दशक में विद्रोह हुए. बलूचों के विद्रोह में साल 2000 में तेजी आई. विद्रोह का शुरुआती मकसद प्रांत के संसाधनों में स्थानीय लोगों की हिस्सेदारी बढ़ाना था, लेकिन जल्द ही यह विद्रोह आजादी की मांग में बदल गई.
     

    पाकिस्तानी सरकार के प्रति बढ़ते गुस्से के बीच बलूचिस्तान में कई विद्रोही समूह बन गए. इनमें बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA), बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF), बलूच नेशनल आर्मी (BNA), यूनाइटेड बलूच आर्मी (UBA), हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) जैसे समूह प्रमुख हैं.

    इनमें बीएलए सबसे अधिक सक्रिय है जिसने पाकिस्तान में कई बड़े हमलों को अंजाम दिया है. समूह पाकिस्तानी सेना, उनके ठिकानों, प्रांत में चीनी प्रोजेक्ट्स और उससे जुड़े लोगों को टार्गेट करता है.

    बलूचिस्तान में विद्रोह का चेहरा है बीएलए

    बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की स्थापना साल 2000 में ही हुई थी और इसकी अगुवाई वरिष्ठ बलूच राष्ट्रवादी नेता नवाब खैर बख्श मरी के बेटे बलाच मरी ने की.

    2006 में तत्कालीन सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के दौर में बलूच नेता नवाब अकबर बुगती की हत्या कर दी गई. बुगती बलूचों के बड़े नेता थे और उनकी हत्या ने पूरे बलूचिस्तान को सुलगा दिया. एक साल बाद बलाच मरी भी मारे गए और इसके बाद सरकार ने बीएलए पर प्रतिबंध लगा दिया. 

    पाकिस्तान की सरकारों ने बलूचिस्तान में विरोध की आवाजों को दबाने के लिए बेहद कड़ा रुख अपनाया. मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने अलगाववादी संगठनों से जुड़े होने या उनके प्रति सहानुभूति रखने के शक में हजारों बलूचों की हत्या की है या उन्हें जबरन गायब कर दिया है. बीएलए ने सरकार के प्रति बलूचों के असंतोष को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है.

    समय के साथ मजबूत हो रहा BLA

    समय के साथ बीएलए ने खुद को ऐसे संगठन के रूप में स्थापित किया है जो बलूचिस्तान की आजादी से कम पाकिस्तान से कुछ लेने पर राजी नहीं है. इस वक्त बीएलए को बशीर जैब बलूच लीड कर रहे हैं और पिछले साल जाफर एक्सप्रेस हाईजैक के पीछे भी वही थे.

    इस हाइजैक को 11 मार्च को अंजाम दिया गया था. उन्होंने क्वेटा से उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा जा रही जाफर एक्सप्रेस पैसेंजर ट्रेन को हाईजैक कर लिया. ट्रेन में लगभग 400 यात्री सवार थे. घंटों चले ऑपरेशन के बाद यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया. इस दौरान 31 लोगों की मौत हुई जिनमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी शामिल थे.

    पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के मुताबिक, 2025 में बलूचिस्तान में कम से कम 254 हमले हुए, जो पिछले साल के मुकाबले 26 प्रतिशत अधिक थे. इन हमलों में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई. इनमें से अधिकांश के पीछे बीएलए का हाथ था.

    हालिया हमले के संबंध में विल्सन सेंटर के साउथ एशिया इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर माइकल कुगेलमैन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, 'बलूचिस्तान संकट को सिर्फ मारे गए लड़ाकों की संख्या के नजरिए से देखना नीतिगत नाकामी है. क्योंकि असली सवाल यह है कि इतने सारे लड़ाके पैदा ही क्यों हो रहे हैं. बीएलए ने सरकार के खिलाफ स्थानीय गुस्से का फायदा उठाया है, जिससे उसमें बड़ी संख्या में लड़ाके भर्ती हो रहे हैं और संगठन पहले से ज्यादा मजबूत हुआ है.'

    बीएलए के सुसाइड स्कॉड ने मचाई तबाही

    2010 में बीएलए ने अपना सुसाइड स्कॉड मजीद ब्रिगेड बनाया. यह दस्ता अपने शुरुआती सालों में एक्टिव नहीं था लेकिन 2018 में बीएलए के तत्कालीन प्रमुख असलम बलोच ने अपने बेटे को ही दल्बंदिन में काम कर रहे चीनी इंजीनियरों पर हमले के लिए भेज दिया. हमले में पांच लोग घायल हुए, जिनमें तीन चीनी नागरिक थे. आत्मघाती हमले में असलम बलोच के बेटे की मौत हो गई. 

    इसके बाद बीएलए ने चीनी नागरिकों और ठिकानों को निशाना बनाने का सिलसिला तेज किया. नवंबर 2018 में कराची स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास पर हमला हुआ, जिसमें दो पुलिसकर्मियों समेत चार लोग मारे गए.

    2022 में कराची यूनिवर्सिटी में शरी बलूच नाम की महिला आत्मघाती हमलावर ने चीनी नागरिकों को निशाना बनाया, जिसमें तीन चीनी नागरिकों समेत चार लोगों की मौत हुई. इस हमले के बाद से मजीद ब्रिगेड दुनिया भर में चर्चा में आ गई.

    मजीद ब्रिगेड ने शुक्रवार रात और वीकेंड में हुए हमले में भी अहम भूमिका निभाई है. बीएलए ने दो महिला फिदायीन की तस्वीर पोस्ट कर बताया कि वो हमलों में शामिल थीं. इसके बाद बीएलए की ओर से दो और फिदायीन की तस्वीर शेयर की जो कि पति-पत्नी थे.

    बलूच विद्रोहियों के निशाने पर क्यों है चीन?

    बलूचिस्तान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का एक बड़ा हिस्सा है. CPEC प्रोजेक्ट के तहत चीन पाकिस्तान में 62 अरब डॉलर निवेश कर रहा है. इस प्रोजेक्ट का मकसद पाकिस्तान के जरिए दक्षिण-पश्चिमी चीन को अरब सागर से जोड़ना है.

    CPEC के तहत चीन बलूचिस्तान के ग्वादर शहर में डीप सी पोर्ट ग्वादर पोर्ट का विकास कर रहा है. चीन ने साल 2002 में ग्वादर पोर्ट का निर्माण शुरू किया जिसने बलूचों के आंदोलन में चिंगारी का काम किया.

    चीन ने ग्वादर में पाकिस्तान का सबसे बड़े एयरपोर्ट ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी डेवलप भी किया है. इसके अलावा चीन बलूचिस्तान में कई माइनिंग प्रोजेक्ट्स और एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है.

    ग्वादर पोर्ट को मकरान हाइवे से जोड़ने के लिए चीन ने ईस्ट बे एक्सप्रेसवे भी बनाया है. उसने इलाके में रोड नेटवर्क्स का जाल बिछाया है ताकि उसे व्यापार में आसानी हो.

    चीन बलूचिस्तान में 1320 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट स्थापित कर कोयले से बिजली भी बना रहा है. चीन के इन प्रोजेक्ट्स को लेकर स्थानीय बलूचों में भारी गुस्सा है. लोगों का कहना है कि विदेशी उनके प्रांत के संसाधनों का दोहन कर रहे हैं और उनके हाथ कुछ नहीं आ रहा है. इसी का नतीजा है कि बीएलए विद्रोही चीनी प्रोजेक्ट्स और चीनी नागरिकों को निशाना बना रहे हैं.

    चीन के साथ-साथ अमेरिका की नजर भी है बलूचिस्तान पर

    पाकिस्तान बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का एक हिस्सा अपने सबसे करीबी सहयोगी चीन के साथ बांट रहा है. ऐसे में अमेरिका कहां पीछे रहने वाला था. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले साल पाकिस्तान के साथ एक खनिज समझौते पर मुहर लगाई. इस समझौते में अमेरिका की खनन कंपनी USSM शामिल है जिसने सितंबर में पाकिस्तान में खनिज उत्खनन के लिए 50 करोड़ डॉलर के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया था.

    लेकिन पाकिस्तान ने ट्रंप को खनिजों का जो सपना दिखाया है, वो पूरा होगा, कहा नहीं जा सकता है. 

     

  • सिनेमा की दुनिया को कहा अलविदा, उर्मिला मातोंडकर की अपनी पसंद से बनी दूरी

    सिनेमा की दुनिया को कहा अलविदा, उर्मिला मातोंडकर की अपनी पसंद से बनी दूरी

    मुंबई

    बॉलीवुड में सफलता अक्सर कलाकारों को लंबे समय तक बांध कर रखती है। जब कोई कलाकार लोकप्रियता, कमाई और दर्शकों के प्यार तीनों के शिखर पर होता है तो आमतौर पर वह उस दौर को जितना हो सके, उतना लंबा खींचना चाहता है, लेकिन हिंदी सिनेमा में कुछ नाम ऐसे भी हैं, जिन्होंने ठीक उसी वक्त फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला लिया, और इन्हीं नामों में एक नाम है उर्मिला मातोंडकर का। जब उनका करियर अपने सबसे सुनहरे दौर में था, तभी उन्होंने पर्दे से ब्रेक ले लिया। उर्मिला मातोंडकर का जन्म 4 फरवरी 1974 को मुंबई में हुआ। उन्हें बचपन से ही अभिनय में दिलचस्पी थी। बहुत कम उम्र में उन्होंने कैमरे का सामना कर लिया था।

    महज तीन साल की उम्र में उन्होंने फिल्म 'कर्म' से बतौर बाल कलाकार काम शुरू किया। इसके बाद वह 'मासूम' में नजर आईं। पढ़ाई के साथ-साथ वह अभिनय करती रहीं और धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया का जाना-पहचाना चेहरा बन गईं। बतौर लीड एक्ट्रेस उर्मिला को असली पहचान साल 1995 में आई फिल्म 'रंगीला' से मिली। इस फिल्म ने उनकी पूरी किस्मत बदल दी। आमिर खान और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े सितारों के बीच भी उर्मिला सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं। उनके डांस, आत्मविश्वास और नए अंदाज ने दर्शकों को दीवाना बना दिया। इसी फिल्म के बाद वह 'रंगीला गर्ल' कहलाने लगीं। 'रंगीला' को कई बड़े पुरस्कार मिले और उर्मिला को भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान मिला।

    'रंगीला' के बाद उर्मिला ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 'सत्या', 'कौन', 'मस्त', 'दौड़' जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। वह सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने गंभीर और सशक्त भूमिकाओं में भी खुद को साबित किया। एक समय ऐसा आया जब उनकी फिल्मों की सफलता के कारण वह कई फिल्मों में अपने हीरो से ज्यादा फीस लेने लगी थीं।

    सबसे चौंकाने वाला फैसला तब आया, जब उर्मिला ने अपने करियर के पीक पर ही फिल्मों से दूरी बना ली। जिस उम्र में अभिनेत्रियां अपने करियर को और मजबूत करती हैं, उसी उम्र में उर्मिला ने कैमरे से पीछे हटना चुना। यह फैसला न तो किसी मजबूरी का नतीजा था और न ही असफलता का, बल्कि उनकी अपनी सोच और मानसिक शांति से जुड़ा हुआ था।
    फिल्मों से दूर होने के बाद उर्मिला ने साल 2016 में मोहसिन अख्तर मीर से शादी की। बाद में उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। हालांकि, राजनीति में उन्हें वैसी सफलता नहीं मिली, जैसी फिल्मों में मिली थी, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान खुद तय की।

  • कर्नाटक शराब घोटाला: विधायकों की रातभर की विधानसभा पैदल मार्च और प्रदर्शन की नाटकीय कहानी

    कर्नाटक शराब घोटाला: विधायकों की रातभर की विधानसभा पैदल मार्च और प्रदर्शन की नाटकीय कहानी

    बेंगलुरु

    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल-सेक्युलर (जेडीएस) के विधायकों ने कथित शराब घोटाले को लेकर आबकारी मंत्री आरबी थिम्मापुर के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कर्नाटक विधानसभा में रात गुजारी। बुधवार सुबह भी भाजपा-जेडीएस विधायकों का प्रदर्शन जारी रहा। कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष व विधायक बीवाई विजयेंद्र और विपक्ष के नेता आर. अशोक समेत कई विधायक विधानसभा परिसर में मॉर्निंग वॉक करते हुए नजर आए। बाद में सभी विधायक एक जगह इकट्ठा हुए, चाय पी और आगे की कार्रवाई पर चर्चा की। कुछ देर बाद विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू हुआ, जिसमें भाजपा और जेडीएस के विधायक विधानसभा के प्रवेश द्वार की सीढ़ियों पर बैठ गए और एक्साइज मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए। उन्होंने गाने भी गाए और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए।
    भाजपा विधायक चन्नाबसप्पा ने एक भक्ति गीत भी गाया। विजयेंद्र, अशोक और विधानसभा में विपक्ष के उपनेता अरविंद बेल्लाड समेत अन्य विधायक भी उनके साथ शामिल हुए।

    कथित शराब घोटाले के केस में भाजपा-जेडीएस के विधायक राज्य के आबकारी मंत्री आरबी थिम्मापुर का इस्तीफा मांग रहे हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने दावा किया कि कर्नाटक के इतिहास में पहली बार शराब एसोसिएशन ने खुद एक्साइज डिपार्टमेंट में 6,000 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आबकारी मंत्री हर महीने 250 करोड़ से 300 करोड़ रुपए वसूल रहे थे। उनके मुताबिक, हर डिप्टी कमिश्नर की पोस्ट के लिए कथित तौर पर 2 करोड़ रुपए और कांस्टेबल लेवल की पोस्टिंग के लिए भी 10 लाख रुपए लिए जा रहे थे। आर. अशोक ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर एक डिप्टी कमिश्नर ने कहा था कि मंत्रियों को 'कट' देना पड़ता है। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज की गई है।

    अशोका ने आरोप लगाया, "इन सबके बावजूद मंत्री सबूत मांग रहे हैं और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, जिनके पास वित्त मंत्रालय भी है, सहित पूरी सरकार उनका साथ दे रही है। इससे पता चलता है कि कांग्रेस हाईकमान के पास बहुत सारा पैसा पहुंच रहा है। चुनावों के लिए यह भारी भरकम 6,000 करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ है। हम धरना दे रहे हैं और जब तक एक्साइज मंत्री थिम्मापुर इस्तीफा नहीं देते, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।"

  • नर्मदा की सुरक्षा पर हाई अलर्ट, NGT ने मध्य प्रदेश सरकार को भेजा नोटिस

    नर्मदा की सुरक्षा पर हाई अलर्ट, NGT ने मध्य प्रदेश सरकार को भेजा नोटिस

    भोपाल
    नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल बेंच ने पर्यावरण के प्रधान सचिव को नर्मदा नदी को साफ रखने के लिए दिए गए निर्देशों पर एक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। यह रिपोर्ट विभिन्न एजेंसियों, विभागों, जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों से संकलित की जाएगी। NGT ने यह निर्देश एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

    नर्मदा को जीवन रेखा बनाए रखने के लिए निर्देश
    NGT ने नर्मदा नदी के बाढ़ क्षेत्र को चिह्नित करने, उस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने, नदी में बिना उपचारित सीवेज और ठोस कचरा बहाने पर रोक लगाने, अवैध रेत खनन बंद करने और पूरे साल नदी के प्रवाह को स्थिर रखने जैसे कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश नर्मदा नदी को मध्य प्रदेश की जीवन रेखा बनाए रखने के लिए हैं।

    रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
    यह अनुपालन रिपोर्ट 1 सितंबर, 2025 को NGT द्वारा जारी आदेश के अनुसार तैयार की जानी है। यह रिपोर्ट याचिकाकर्ता कीर्ति कुमार सदाशिव भट्ट की याचिका पर आधारित है। रिपोर्ट को NGT के रजिस्ट्रार को सौंपा जाएगा, जो इसे ट्रिब्यूनल के सामने पेश करेंगे। इसके बाद, रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    निष्पादन याचिका पर सुनवाई
    NGT ने यह टिप्पणी जबलपुर की सामाजिक कार्यकर्ता पी.जी. नज्पांडे द्वारा दायर एक निष्पादन याचिका पर सुनवाई करते हुए की। NGT यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके द्वारा जारी किए गए निर्देशों का ठीक से पालन हो रहा है या नहीं। इसी के लिए NGT ने अब मुख्य सचिव (पर्यावरण) को इस मामले में निर्देशित किया है।