Author: NewseDay

  • राजस्थान में 2497 गांव-ढाणियों की बुझेगी प्यास, 4 जिलों को 3645 करोड़ आवंटित

    राजस्थान में 2497 गांव-ढाणियों की बुझेगी प्यास, 4 जिलों को 3645 करोड़ आवंटित

    जयपुर.

    मेवाड़ और वागड़ के सीमावर्ती जिलों में गहराते जल संकट को खत्म करने के लिए सरकार ने 'जाखम बांध पेयजल परियोजना' को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के जरिए चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिलों के करीब 800 गांव 622 ढाणी में पाइप लाइन से पीने का शुद्ध पानी पहुंचाया जाएगा।

    इसके प्रथम चरण में 1692.30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसकी टेक्निकल बिड जल्द खोली जाएगी। दूसरे चरण में उदयपुर और राजसमंद के गांव-ढाणी में पानी पहुंचाया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 3645.56 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

    जल जीवन मिशन के तहत होंगे काम
    जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल योजना के तहत पानी पहुंचाया जाएगा। पेयजल किल्लत से जूझते चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, उदयपुर और राजसमंद जिले के गांव-ढाणियों तक पानी पहुंचाने के लिए करीब 3 वर्ष पहले जाखम बांध पेयजल परियोजना की घोषणा की थी। उक्त योजना को अब धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। योजना के प्रथम चरण में चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिले के करीब 800 गांवों तक पानी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इसकी टेक्निकल बिड को 16 फरवरी को खोली जाएगी। इसकी जांच में सब कुछ सही पाए जाने पर सरकार के पास फाइनेंशल स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने पर ही संबंधित फर्म को टेण्डर दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के जल्द ही धरातल पर उतरने की उम्मीद जगी है। उल्लेखनीय है कि उक्त प्रोजेक्ट की करीब तीन साल पहले घोषणा की गई थी। इसके बाद इसकी डीपीआर तैयार कराई गई है। अब टेण्डर प्रक्रिया चल रही है।

    दूसरे चरण में 1953.26 करोड़ होंगे खर्च
    जाखम बांध पेयजल परियोजना दो चरणों में पूरी होगी। दूसरे चरण में राजसमंद और उदयपुर जिले के 1697 गांव और ढाणी में पानी पहुंचाने की योजना है। इसमें राजसमंद जिले के 790 गांव-ढाणी और उदयपुर जिले के 907 गांव-ढाणी को शामिल किया गया है। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में 1692.30 करोड़ एवं दूसरे चरण में 1953.26 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

    यह होगा प्रोजेक्ट का फायदा

    1. – घरों तक शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी
    2. – लगातार गहराते पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा
    3. – गांव-ढाणी तक पानी पहुंचने से श्रम और समय की बचत होगी
    4. – इसके निर्माण कार्य आदि होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे

    यह ब्लॉक अतिदोहित की श्रेणी में
    चित्तौड़गढ़ जिले का अधिकांश भाग भू-जल उपयोग के मामले में अतिदोहित श्रेणी में है। इसमें भैंसरोडगढ़, गंगरार, बेगूं, डूंगला, बड़ी सादड़ी, भदेसर, चित्तौड़गढ़, राशमी भोपालसागर, कपासन और निम्बाहेड़ा ब्लॉक अतिदोहित श्रेणी में है। इन ब्लॉक का भूमिगत जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जो कि चिंता का विषय है।

    जाखम प्रोजेक्ट की जल्द खुलेगी टेक्निकल बिड
    जाखम बांध पेयजल परियोजना के प्रथम चरण में चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिला शामिल है। इसके लिए टेण्डर आमंत्रित किए गए हैं, इसकी टेक्निकल बिड 16 फरवरी को खोली जाएगी। इसके बाद ही कुछ बता पाएंगे।
    – सुनीत कुमार गुप्ता, अधीक्षण अभियंता जनस्वास्थ्य अभियांत्री विभाग चित्तौड़गढ़

  • बिहार में योजना आकार हुआ दोगुना, मद्य निषेध और रजिस्ट्रेशन विभाग का बजट बढ़ा

    बिहार में योजना आकार हुआ दोगुना, मद्य निषेध और रजिस्ट्रेशन विभाग का बजट बढ़ा

    पटना.

    बिहार विधानसभा में आज वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया. सरकार का कहना है कि वह सभी वर्गों का सम्मान करते हुए लोगों का जीवन आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है. इस बार बिहार का बजट 3 लाख 47 करोड़ रुपये से ज्यादा का है, जो पिछले कुछ वर्षों की तुलना में काफी बड़ा है. सरकार के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और बिहार भी दूसरे राज्यों के मुकाबले तेजी से आगे बढ़ रहा है.

    1.  2026-27 के लिए बिहार का कुल बजट 3,47,589.76 करोड़ रुपये है, जो पिछले साल से करीब 30,694 करोड़ ज्यादा है. बजट का मकसद बिहार को आर्थिक रूप से मजबूत और हर क्षेत्र में विकसित राज्य बनाना है. केंद्र सरकार से मिले सहयोग से राज्य की कई विकास योजनाओं को गति मिली है.
    2. सात निश्चय-3 (2025-2030) के तहत बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य है. योजना का फोकस प्रति व्यक्ति आय दोगुनी करना, 1 करोड़ रोजगार देना और महिलाओं को सशक्त बनाना है.
    3.  1.56 करोड़ से ज्यादा महिलाओं वाले स्व-सहायता समूहों को पहले 10,000 रुपये मिल चुके हैं, आगे कारोबार बढ़ाने के लिए 2 लाख तक मदद मिलेगी.
    4.  अनुसूचित जाति के 94 लाख गरीब परिवारों को सूक्ष्म उद्यमी बनाने की योजना है. कृषि, डेयरी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में आय बढ़ाने के लिए 50,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश लाने का लक्ष्य रखा गया है.
    5. हर प्रखंड में डिग्री और इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने पर जोर है. जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी स्तर तक अपग्रेड किया जाएगा, ताकि बेहतर इलाज जिले में ही मिल सके.
    6. 5 नए एक्सप्रेस-वे और बिजली ढांचे के विस्तार से बुनियादी सुविधाएं मजबूत होंगी. शहरी गरीबों के लिए बड़ी संख्या में बहुमंजिला पक्के घर बनाए जाएंगे.
    7. बुजुर्गों को घर पर स्वास्थ्य सेवाएं और जन्म-मृत्यु जैसी सुविधाएं देने की योजना है.
    8. 2004-05 में 23,885 करोड़ से बढ़कर बजट अब 3.47 लाख करोड़ पहुंच गया है, जो राज्य की बढ़ती आर्थिक क्षमता दिखाता है. कुल खर्च में 35.14% राजस्व और 64.86% पूंजीगत व्यय है, यानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा जोर. पुराने कर्ज चुकाने के लिए 22,664.83 करोड़ रुपये रखे गए हैं.
    9. कुल कर राजस्व 2,85,277.12 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. राज्य अपने करों से करीब 65,800 करोड़ रुपये कमाएगा, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा GST का होगा.
    10. बजट में राजकोषीय घाटा 39,111.80 करोड़ रुपये (लगभग 2.99%) है, जो तय सीमा के अंदर है.
  • बिहार के अरवल में मेडिकल कॉलेज की घोषणा, की हर पंचायत में बनेगा मॉडल स्कूल और बाजार

    बिहार के अरवल में मेडिकल कॉलेज की घोषणा, की हर पंचायत में बनेगा मॉडल स्कूल और बाजार

    अरवल.

    बिहार सरकार ने आम बजट पेश किया है जिसमें प्रत्येक पंचायत में एक मॉडल स्कूल की स्थापना करने की प्रावधान लाया है। जिले में 64 पंचायत हैं, सभी पंचायत में मॉडल स्कूल के होने से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर में सुधार होगा। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को निजी स्कूल के जैसा शिक्षा सरकारी स्कूल में मिलेगा।

    सरकार ने डिजिटल शिक्षा का बढ़ावा देने के लिए भी बजट जारी किया है। डिजिटल शिक्षा मिलने से विद्यार्थी घर पर ही स्कूल के सिलेबस मोबाइल और लैपटॉप के माध्यम से पढ़ सकेंगे। जिले में मेडिकल कॉलेज की घोषणा सरकार ने की है। मेडिकल कॉलेज बन जाने से जिलेवासियों को इलाज के लिए दूसरे जिले पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। अभी जिले भर में कहीं भी ट्रामा सेंटर या फिर गंभीर रूप से बीमार लोगों का इलाज के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार की घोषणा
    इसके अलावा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिलाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार का निर्माण का भी घोषणा इस बजट में हुआ है, जिससे स्थानीय किसानों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। शहरी क्षेत्र में पेयजल, सीवरेज की और राष्ट्रीय मानक के अनुसार ठोस कचड़ा प्रबंधन की व्यवस्था करने का भी बजट पास हुआ है। अरवल नगर परिषद में सीवरेज और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं है। अब इसकी व्यवस्था हो जाएगी, जिससे शहर स्वच्छ और सुंदर बनेगा। प्रत्येक कमिश्नरी में स्किल सेंटर का निर्माण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके निर्माण होने से बेरोजगार रोजगार करने के लिए कला सीखेंगे जिससे पलायन रुकेगा। बजट को लेकर आम लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है।

        इस बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक मॉडल विद्यालय की स्थापना करने का निर्णय बहुत ही अच्छा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर में सुधार होगा।
    -चंदन कुमार

        ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा देने का प्रस्ताव बजट में किया गया है। डिजिटल शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई को बच्चे अच्छी तरह और जल्दी समझ लेंगे, साथ ही स्कूल का सिलेबस ऑनलाइन उपलब्ध होगा।
    -अरविंद कुमार

        प्रत्येक कमिश्नरी में स्किल सेंटर की स्थापना करने के लिए इस बजट में प्रावधान किया गया है। युवा को स्किल देखकर रोजगार देने की भी बात कही गई है। इस केंद्र की स्थापना हो जाने से युवाओं को रोजगार मिलेगा जिससे पलायन रुकेगा।
    -यशवंत कुमार

        इस बजट के बाद जिले में मेडिकल कॉलेज बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यहां मेडिकल कॉलेज बन जाने के बाद स्थानीय लोगों को इलाज के लिए दूसरे जिले पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जिससे जिलेवासियों को बड़ा राहत मिलेगा।
    -सुषमा कुमारी

        स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इस बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार विकसित करने का घोषणा किया है। इससे सबसे ज्यादा फायदा स्थानीय किसानों को होगा। किसान उचित दाम पर अपना उत्पाद बाजार में बेच सकेंगे।
    -गुड़िया देवी

        शहरी क्षेत्र में सीवरेज और ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था करने की बात इस बजट में कही गई है। शहर में कचरा प्रबंधन और सीवरेज की व्यवस्था नहीं है। यह दोनों व्यवस्था हो जाने पर शहर साफ और सुंदर दिखेगा।
    -अन्नू कुमारी

  • न रिफाइंड, न ऑलिव—ये देसी तेल है स्वास्थ्य का खजाना, 3 जबरदस्त फायदे जानिए

    न रिफाइंड, न ऑलिव—ये देसी तेल है स्वास्थ्य का खजाना, 3 जबरदस्त फायदे जानिए

    रसोई में तड़के की छनछनाहट से लेकर सर्दियों की गुनगुनी धूप तक, सरसों का तेल सदियों से हर भारतीय घर का हिस्सा रहा है। यह सिर्फ एक तेल नहीं, बल्कि स्वाद और सेहत का वो जादुई संगम है, जो बेस्वाद खाने और थके बदन, दोनों में फौरन जान फूंक देता है।

    सरसों के इन्हीं फायदों के बारे आज हम आपको अपने इस आर्टिकल में बताने वाले हैं। आइए जानते हैं सरसों का तेल इस्तेमाल करने के कुछ बेमिसाल फायदे-

    दिल के लिए फायदेमंद

    सरसों का तेल दिल की अच्छी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमें भरपूर मात्रा में मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड मौजूद होते हैं, जो हार्ट हेल्थ के लिए अच्छे माने जाते हैं। इसे रोजाना डाइट में शामिल करने से ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर के लेवल को कम करने में मदद मिलती है।

    साथ ही, ये शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं और बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं। इससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। हालांकि, दिल की सेहत पर सरसों तेल के प्रभाव को पूरी तरह समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।

    स्किन और बालों के लिए अच्छा

    सरसों का तेल स्किन और बालों दोनों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसका इस्तेमाल अक्सर दादी-नानी छोटे बच्चों के शरीर की मालिश के लिए करती हैं। यह स्किन को मॉइस्चराइज करता है और ड्राईनेस को भी कम करता है। साथ ही, यह फटी एड़ियों को भी ठीक करने के लिए भी बेहतरीन तरीका है। सरसों के तेल में थोड़ा मोम मिक्स करके आप रूखी और फटी एड़ियों को हील भी आसानी से कर सकते हैं।

    इतना ही नहीं, मस्टर्ड ऑयल झुर्रियों, फाइन लाइन्स और बालों की अच्छी ग्रोथ के लिए भी फायदेमंद होता है। इसका कोई साइड इफेक्ट्स न हो इसलिए इसके इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट जरूर कर लें।

    कैंसर का खतरा करें कम

    क्या आप जानते हैं कि खाने में इस्तेमाल होने वाला सरसों तेल कैंसर के खतरे को भी कम करने में मददगार हो सकता है। कुछ शोध में पाया गया है कि यह कई तरह के कैंसर सेल्स के ग्रोथ को कम करता है। एक अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि मक्के के तेल या फिश ऑयल के मुकाबले सरसों का तेल चूहों में कोलोन कैंसर के खतरे को कम करने में ज्यादा प्रभावी साबित हुआ।

    वहीं, जानवरों पर किए गए एक और अध्ययन में पता चला है कि इसमें मौजूद एलिल आइसोथियोसाइनेट ब्लैडर कैंसर की ग्रोथ को लगभग 35% तक कम कर सकता है और यह ब्लैडर में कैंसर के इन्फेक्शन को फैलने से रोकने में भी मदद करता है। हालांकि, इंसानों पर इसके प्रभाव को पूरी तरह समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।

  • यशोदा जयंती की सही तिथि क्या है? शुभ मुहूर्त, पूजा नियम और आध्यात्मिक महत्व जानें

    यशोदा जयंती की सही तिथि क्या है? शुभ मुहूर्त, पूजा नियम और आध्यात्मिक महत्व जानें

    सनातन धर्म में जब भी मां और बेटे के निस्वार्थ प्रेम की बात की जाती है, तो मां यशोदा और श्रीकृष्ण का नाम सबसे पहले याद किया जाता है. बिना माता यशोदा के भगवान श्रीकृष्ण की कथा कभी पूरी नहीं होती है. पौराणिक परंपरा के अनुसार, हर साल फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की षष्टि तिथि के दिन यशोदा जयंती मनाई जाती है. ये पावन पर्व मां की ममता को समर्पित किया गया है, जोकि माता यशोदा के जन्मदिवस पर मनाया जाता है. भले ही श्रीकृष्ण का जन्म मां देवकी के गर्भ से हुआ, लेकिन संसार उनको यशोदा के लाल के रूप में ही जानता है.

    माता यशोदा ने ही नन्हे से श्रीकृष्ण का स्नेह, ममता और प्रेम से पालन-पोषण किया था. यशोदा जयंती के दिन विधि-विधान से माता यशोदा और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से विवाहित स्त्रियों की सूनी गोद भर जाती है. इस दिन व्रत भी रखा जाता है. यशोदा जयंती का व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल यशोदा जयंती कब मनाई जाएगी? साथ ही जानते हैं इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व.

    यशोदा जयंती 2026 डेट और शुभ मुहूर्त

    हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन कृष्ण षष्ठी तिथि की शुरुआत 7 फरवरी को रात 01 बजकर 18 मिनट पर हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 8 फरवरी को रात 02 बजकर 54 मिनट पर होगा. सनतान धर्म में उदयातिथि मानी जाती है. ऐसे में उदयातिथि के नियम के अनुसार, साल 2026 में यशोदा जयंती 7 फरवरी को मनाई जाएगी.

    यशोदा जयंती पूजा विधि

    यशोदा जयंती पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद माता यशोदा के व्रत का संकल्प लें. फिर घर के मंदिर या पवित्र स्थान पर चौकी लगाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. उस पर माता यशोदा के साथ बाल श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र रखें. पूजा के दौरान दीपक, अगरबत्ती जलाएं. पुष्प, तुलसी दल, चंदन, हल्दी, कुमकुम और नारियल चढाएं.

    माता यशोदा को लाल चुनरी चढ़ाएं. भगवान श्रीकृष्ण और माता यशोदा को माखन-मिश्री का भोग लगाएं. साथ ही फल, दही, खीर और मिठाइयां चढाएं. ॐ कृष्णाय नमः मंत्र का जाप करें. माता यशोदा-कृष्ण की वात्सल्य कथा का पाठ करें. पूजा का समापन आरती के साथ करें. दिनभर व्रत रखें. सायंकाल पूजा के बाद फलाहार करें. जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र का दान दें.

    यशोदा जयंती का महत्व

    यशोदा जयंती का व्रत रखने महिलाओं को श्रीकृष्ण जैसी गुणी संतान मिलती है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यशोदा जयंती के दिन विधि-विधान से पूजन और व्रत करने से संतान प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं. इतना ही नहीं संतान के जीवन में सुख-सौभाग्य भी बढ़ता है.

  • शुभ-अशुभ का इशारा? जानिए आंखों के फड़कने का मतलब

    शुभ-अशुभ का इशारा? जानिए आंखों के फड़कने का मतलब

    सामुद्रिक शास्त्र प्राचीन भारतीय विद्याओं में शामिल है. ये व्यक्ति के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि शरीर की बनावट और अंगों की गतिविधियों के आधार पर भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत मिलता है. अक्सर व्यक्ति का कोई न कोई अंग फड़कता है. शरीर के अंगों की फड़कन एक शारीरिक क्रिया मान ली जाती है.

    वहीं सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, शरीर के अंगों में होने वाली फड़कन आने समय की चेतावनी या शुभ संकेत देती है. सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि शरीर के कुछ अंगों का फड़कना बहुत शुभ और लाभकारी माना जाता है. जबकि कुछ अंगों का फड़कना बहुत अशुभ और नुकसान होने का संकेत देता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आंखों का फड़कना शुभ संकेत देता है या अशुभ.

    पुरुषों की दाईं आंख फड़कना होता है शुभ

    आंखों का फड़कना सबसे ज्यादा महसूस होता है. इसके मायने भी गहरे होते हैं. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, पुरुषों की दाईं आंख का फड़कना बहुत ही शुभ माना जाता है. अगर किसी पुरुष की दाईं आंख फड़कती है, तो इसका अर्थ है कि उसको जीवन में कोई खुशखबरी मिलने वाली है. लंबे समय से रुका हुआ कोई काम पूरा होने वाला है. दूसरी ओर महिलओं की दाईं आंख का फड़कना शुभ नहीं होता.

    महिलाओं की बाईं आंख फड़कना है शुभ

    महिलओं की दाईं आंख का फड़कना अशुभ होता है. ये किसी दुखद समाचार के मिलने का संकेत हो सकता है. महिलाओं की बायीं आंख फड़कना शुभ माना जाता है. अगर किसी महिला की बायीं आंख फड़क रही है, तो उसको जीवन में कोई अच्छी खबर मिल सकती है. धन लाभ हो सकता है. रुका हुआ पैसा मिल सकता है. नौकरी में प्रमोशन मिल सकता है. ये घर में खुशखबरी या संतान सुख मिलने का संकेत भी होता है.

    पुरुषों व महिलाओं की ये आंख का फड़कना अशुभ

    सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, पुरुषों की बाईं और महिलाओं की दाईं आंख का फड़कना बिल्कुल भी शुभ नहीं माना जाता है. ये जीवन में संघर्ष और परेशानियों की ओर इशारा करता है.

  • पोस्टपार्टम पीरियड में सिरदर्द क्यों होता है? डॉक्टर से समझें माइग्रेन और उससे निपटने के उपाय

    पोस्टपार्टम पीरियड में सिरदर्द क्यों होता है? डॉक्टर से समझें माइग्रेन और उससे निपटने के उपाय

    मां बनना बेहद खूबसूरत एहसास है, लेकिन इसके बाद कई फिजिकल और मेंटल बदलावों से गुजरना पड़ता है, जो आसान नहीं होते। डिलीवरी के बाद कई महिलाएं तेज सिरदर्द से भी परेशान रहती हैं, जिसे पोस्टपार्टम माइग्रेन कहा जाता है।

    कई महिलाएं इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। इस बारे में डॉ. मानसी कुमार (सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्स्ट्रेटिक्स एंड गायनेकोलॉजी, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानते हैं कि यह समस्या है क्या और इसे कैसे मैनेज किया जा सकता है।  

    क्या है पोस्टपार्टम माइग्रेन और इसके लक्षण?

    प्रसव के बाद होने वाला माइग्रेन सामान्य सिरदर्द से कहीं ज्यादा गंभीर होता है। यह बार-बार होने वाला एक तेज दर्द है, जिसके साथ महिला को कुछ समस्याएं हो सकती हैं, जैसे-

        जी मिचलाना
        रोशनी या शोर के परेशानी होना
        देखने में दिक्कत या धुंधलापन

    हैरानी की बात यह है कि यह माइग्रेन उन महिलाओं को भी हो सकता है जिन्हें प्रेग्नेंसी से पहले कभी माइग्रेन की शिकायत नहीं रही हो।

    आखिर क्यों होता है यह दर्द?

    इसका मुख्य कारण प्रसव के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में अचानक आने वाली गिरावट है। इसके अलावा कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं-

        नींद की भारी कमी और शारीरिक थकान
        तनाव और बच्चे की देखभाल का दबाव
        शरीर में पानी की कमी और एनीमिया (खून की कमी)
        ब्रेस्ट फीडिंग से जुड़े शारीरिक बदलाव

    इसे मैनेज करने के तरीके

        आराम को प्राथमिकता- जब भी मौका मिले, भरपूर नींद लें और आराम करें।
        खान-पान का ध्यान- शरीर में पानी की कमी न होने दें और आयरन व पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाएं।
        ट्रिगर्स की पहचान- समय पर खाना न खाना या बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम माइग्रेन को बढ़ा सकता है, इनसे बचें।
        स्ट्रेस मैनेजमेंट- हल्की वॉक और रिलैक्सेशन तकनीकें रिकवरी में मदद करती हैं।

    डॉक्टर से सलाह कब लें?

    डॉ. मानसी कुमार चेतावनी देती हैं कि अगर सिरदर्द लगातार बना रहता है या गंभीर है, तो इसकी जांच करवाना जरूरी है, खासकर ब्रेस्टफीड करवाने वाली महिलाओं के लिए। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें, क्योंकि कुछ पेनकिलर ब्रेस्टफीडिंग के दौरान असुरक्षित हो सकते हैं।

    तुरंत डॉक्टर के पास जाएं अगर सिरदर्द अचानक और बहुत तेज हो, सिरदर्द के साथ धुंधला दिखे या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो, बुखार,कन्फ्यूजन या बहुत ज्यादा बेचैनी महसूस हो।

  • गद्दाफी के परिवार पर जारी त्रासदी: बेटे सैफ अल-इस्लाम की लीबिया में मौत

    गद्दाफी के परिवार पर जारी त्रासदी: बेटे सैफ अल-इस्लाम की लीबिया में मौत

    गद्दाफी
    लीबिया के पूर्व शासक मुअम्मर गद्दाफी का बेटा सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी, मंगलवार को एक हमले में मारा गया। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने उनकी टीम के एक बयान का हवाला देते हुए बताया कि मुअम्मर गद्दाफी के बेटे की मंगलवार को पश्चिमी लीबिया में हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक सैफ अल-इस्लाम के घर में घुस आए चार अज्ञात बंदूकधारियों के साथ उनकी सीधी मुठभेड़ हुई और इस दौरान उनकी मौत हो गई।

    गद्दाफी के करीबी नेता अब्दुल्ला ओथमान अब्दुर्रहीम ने फेसबुक पर इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि चार नकाबपोश बंदूकधारियों ने दोपहर में जिंटान शहर में गद्दाफी के आवास पर धावा बोल दिया। हमलावरों ने कथित तौर पर मुठभेड़ से पहले सीसीटीवी कैमरों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे हमलावरों की पहचान पता नहीं चल पाई। वहीं सैफ अल-इस्लाम की मौके पर ही मौत हो गई।

    घटना को लेकर ज्यादा जानकारी फिलहाल सामने नहीं आ पाई है। सैफ की टीम ने लीबियाई कोर्ट और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से हमले की जांच करने, अपराधियों की पहचान करने और इस ऑपरेशन की योजना बनाने वालों को जवाबदेह ठहराने की अपील की है।
    कौन थे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी?

    लीबिया में 2011 में नाटो समर्थित विद्रोह के बाद भी सैफ यहां एक अहम नेता बने रहे। बता दें कि इस विद्रोह में उनके पिता मुअम्मर गद्दाफी मारे गए थे। गद्दाफी ने चार दशकों से अधिक समय तक लीबिया में राज किया था। सैफ ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई पूरी की थी और उन्हें कभी कई सरकारों द्वारा लीबिया का स्वीकार्य, पश्चिमी-अनुकूल चेहरा माना जाता था। कोई आधिकारिक पद ना होने के बावजूद, सैफ अल-इस्लाम को एक समय मेरा तेल समृद्ध उत्तरी अफ्रीकी देश में अपने पिता मुअम्मर गद्दाफी के बाद सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता था।रिपोर्ट्स के मुताबिक सैफ अल-इस्लाम ने कई उच्च-स्तरीय, संवेदनशील राजनयिक मिशनों में मध्यस्थता की। उन्होंने पश्चिम के साथ संबंध बनाए और खुद को एक सुधारक के रूप में पेश किया। साथ ही सैफ ने संविधान और मानवाधिकारों के सम्मान का भी आह्वान किया।

    हालांकि जब 2011 में गद्दाफी के लंबे शासन के खिलाफ विद्रोह हुआ, तो सैफ अल-इस्लाम ने अपनी दोस्ती के बजाय परिवार और कबीले की वफादारी को चुना और विद्रोहियों पर क्रूर कार्रवाई का मास्टरमाइंड बन गया। 2015 में, त्रिपोली की एक अदालत ने सैफ अल-इस्लाम को युद्ध अपराधों के लिए फायरिंग स्क्वाड द्वारा मौत की सजा सुनाई। इसके बाद 2017 में एक माफी कानून के तहत मिलिशिया द्वारा रिहा किए जाने के बाद से, सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी अंडरग्राउंड होकर जिंटान में रह रहे थे।

  • केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय का संसद में जवाब, दिव्यांगों को सरकारी दफ्तरों में सुलभता की कोई जानकारी नहीं

    केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय का संसद में जवाब, दिव्यांगों को सरकारी दफ्तरों में सुलभता की कोई जानकारी नहीं

    चंडीगढ़.

    केंद्र सरकार के पास चंडीगढ़ में सरकारी कार्यालयों की दिव्यांगजनों के लिए सुलभता का पूरा डेटा उपलब्ध नहीं है। सामाजिक न्याय मंत्रालय ने बताया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत यह जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

    चंडीगढ़ में पिछले दो वर्षों में 330 श्रवण यंत्र बांटे गए और दो बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट हुआ। शिकायत निवारण के लिए मोबाइल ऐप और सहायता केंद्र उपलब्ध हैं, साथ ही उपकरणों की गुणवत्ता और वारंटी सुनिश्चित की जाती है। यह जानकारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने लोकसभा में सांसद मनीष तिवारी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी। राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने बताया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत सरकारी भवनों, परिवहन व्यवस्था और सूचना प्रणाली को सुलभ बनाना राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की जिम्मेदारी है। इसी कारण चंडीगढ़ में कितने सरकारी कार्यालयों में रैंप, दिव्यांग शौचालय, संकेतक, लो काउंटर और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, इसका कोई केंद्रीय स्तर पर संकलित आंकड़ा नहीं रखा जाता।

    मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार दिव्यांगों के लिए बाधारहित वातावरण के निर्माण हेतु राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मांग के आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसके लिए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन से जुड़ी विशेष योजना के तहत अनुदान दिया जाता है। श्रवण सहायक उपकरणों की स्थिति पर सरकार ने बताया कि दिव्यांगों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की योजना के अंतर्गत चंडीगढ़ में पिछले दो वर्षों के दौरान 330 श्रवण यंत्र वितरित किए गए हैं। इसके अलावा दो बच्चों में कॉक्लियर प्रत्यारोपण कराया गया है।

    मंत्री ने कहा कि योजना के तहत लाभ पाने के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र अनिवार्य है। निर्धारित आय सीमा तक के लाभार्थियों को पूर्ण आर्थिक सहायता दी जाती है, जबकि अधिक आय वर्ग के लिए आंशिक सहायता का प्रावधान है। बच्चों के कॉक्लियर प्रत्यारोपण पर उपचार, जांच, यात्रा और पुनर्वास सहित सहायता दी जाती है। सरकारी कार्यालयों और सहायक उपकरणों से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए नागरिकों को मोबाइल अनुप्रयोग, टोल फ्री सेवा और सार्वजनिक शिकायत प्रणाली के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा दी गई है। चंडीगढ़ में दिव्यांगजनों के लिए विशेष सहायता केंद्र भी संचालित किया जा रहा है, जहां उपकरणों की मरम्मत और शिकायतों का निस्तारण किया जाता है।

    मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगों को उपलब्ध कराए जाने वाले सभी सहायक उपकरण गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होते हैं और इनके साथ न्यूनतम एक वर्ष की वारंटी दी जाती है, ताकि समय पर मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित हो सके।

  • शहजाद पूनावाला की मां पर हमला, CCTV वीडियो से खुला मामला—जानबूझकर कार चढ़ाई गई

    शहजाद पूनावाला की मां पर हमला, CCTV वीडियो से खुला मामला—जानबूझकर कार चढ़ाई गई

    नई दिल्ली

    भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला की मां हादसे का शिकार हो गईं हैं। पूनावाला ने आरोप लगाए हैं कि उनकी मां को जानबूझकर कार से टक्कर मारी गई थी। उन्होंने पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने घटना का वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें उनकी मां को एक सफेद कार टक्कर मारती हुई नजर आ रही है।

    पूनावाला ने लिखा, 'कुछ घंटे पहले एक बेहद घृणित इंसान ने जानबूझकर मेरी मां पर अपनी कार चलाई – जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और फिर वह भाग गया। माताजी की बहुत जल्द एक सर्जरी करानी पड़ेगा। कृपया उनके लिए प्रार्थना करें।' उन्होंने लिखा, 'मेरी मां सबसे दयालु और सबसे अच्छे इंसानों में से एक हैं और इस उम्र में उनके साथ यह होना मुझे अंदर तक कचोट रहा है।'

    उन्होंने पुणे पुलिस के साथ पोस्ट में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी टैग किया है। उन्होंने लिखा, 'आशा है कि पुणे पुलिस उस व्यक्ति को त्वरित गिरफ़्तार कर यह सुनिश्चित करेगी कि उसे उचित सजा मिले।'

    घटना का वीडियो

    शहजाद पूनावाला के भाई और राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने लिखा, 'ये सब क्या हो रहा है? मेरी मां सीनियर सिटिजन हैं, जो मेरे ड्राइवर और एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट के साथ गईं थीं और जब वो लोग गैस भरवा रहे थे, तब वह पास में ही खड़ी इंतजार कर रहीं थीं। तब किसी ने उन्हें टक्कर मारी (जानबूझकर लग रहा है) और भाग गया।'

    उन्होंने एक्स रे भी एक्स पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा कि उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने भी पुणे पुलिस से आरोपी के खिलाफ जल्द कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने लिखा, 'जानबूझकर किया गया या नशे में किया गया। ये जांच में सामने आ जाएगा। पर दुख होता है कि सीनियर सिटिजन मां को इस दर्द से गुजरना पड़ा।'