सभी जिलों के अधिकारियों को विकसित ग्राम पंचायत योजना की ट्रेनिंग

विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण आयोजित
आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा की अध्यक्षता में सभी जिलों के सहायक परियोजना अधिकारियों एवं प्रोग्रामरों को दिया गया प्रशिक्षण
2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं में शुरू होगी योजना निर्माण की प्रक्रिया, ग्रामीणों की भागीदारी से तय होंगी विकास की प्राथमिकताएं
रायपुर,
विकसित भारत -जीरामजी योजना के अंतर्गत प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) तैयार करने के लिए आज ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान, निमोरा में राज्य स्तरीय जिला मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। विकसित भारत-जीरामजी के आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित प्रशिक्षण में प्रदेश के सभी जिलों के सहायक परियोजना अधिकारियों एवं प्रोग्रामरों ने भाग लिया।
आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा ने सभी प्रशिक्षार्थियों से कहा कि विकसित ग्राम पंचायत योजना प्रक्रिया में ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा में प्रत्येक गांव की जरूरतों और प्राथमिकताओं पर खुलकर संवाद किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बस्ती एवं वार्ड स्तर तक पहुंचकर अधिक से अधिक ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत स्तर पर ग्रामीणों की सहभागिता से विकास योजना तैयार करने, डिजिटल मैपिंग, परिसंपत्तियों के सत्यापन और योजनाओं के समेकन की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य जिला मास्टर ट्रेनर्स को योजना निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया से अवगत कराना है, ताकि ग्राम पंचायत स्तर पर निर्धारित समय-सीमा में योजनाएं तैयार की जा सकें।
प्रशिक्षण में बताया गया कि 2 अक्टूबर से प्रदेश की ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं के माध्यम से विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को गांव के आधारभूत आंकड़ों, उपलब्ध संसाधनों, मानचित्रों और प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी दी जाएगी। ग्रामीण स्वयं अपने गांव की जरूरतों, समस्याओं और विकास की प्राथमिकताओं को तय करने में भागीदारी निभाएंगे। ग्राम सभाओं में प्राप्त सुझावों के आधार पर ग्राम पंचायतों की आगामी विकास कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
अक्टूबर-नवंबर में सीधा संवाद और दिसंबर में होगा योजना का अनुमोदन
प्रशिक्षण में जानकारी दी गई कि अक्टूबर और नवंबर माह में बस्ती एवं वार्ड स्तर पर ग्रामीणों के साथ बैठकें आयोजित कर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन किया जाएगा। इन बैठकों में ग्रामीणों से गांव की समस्याओं, आवश्यक सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों और प्रस्तावित विकास कार्यों के संबंध में सुझाव प्राप्त किए जाएंगे।
इस दौरान गांवों में मौजूद परिसंपत्तियों का स्थल सत्यापन भी किया जाएगा। ऐसी परिसंपत्तियां, जो भौतिक रूप से उपलब्ध हैं लेकिन डिजिटल अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं, उन्हें युक्तधारा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर प्रस्तावित विकास कार्यों के संभावित स्थानों को डिजिटल मानचित्र पर चिह्नित किया जाएगा।
दिसंबर माह में तैयार विकसित ग्राम पंचायत योजना का प्रारूप ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। ग्रामीणों के सुझावों और आवश्यक विचार-विमर्श के आधार पर योजना में संशोधन कर उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद ग्राम सभा से औपचारिक अनुमोदन प्राप्त कर योजना को विकासखंड स्तर पर भेजा जाएगा। ग्राम पंचायतों से प्राप्त योजनाओं का विकासखंड एवं जिला स्तर पर समेकन 15 जनवरी तक पूरा किया जाएगा।
जल सुरक्षा, आजीविका और ग्रामीण अधोसंरचना पर विशेष ध्यान
विकसित ग्राम पंचायत योजना में जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका से संबंधित अधोसंरचना और प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। योजना निर्माण के दौरान गांवों में उपलब्ध प्राकृतिक एवं भौतिक संसाधनों का आकलन किया जाएगा।
इस प्रशिक्षण में संयुक्त आयुक्त , वीबी – जी राम जी रामाधन श्रीवास, दीपक शर्मा, अधीक्षण अभियंता विनय गुप्ता, सहायक आयुक्त यशवत चंद्राकर, राज्य एमआईएस नोडल अधिकारी मजहर शामी, वीबी जी राम जी संकाय सदस्य आनंद रघुवंशी ने शामिल होकर विकसित ग्राम पंचायत योजना निर्माण की प्रक्रिया एवं तकनीकी बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया ।



