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  • Punjab Election Update: पहली बार वोट डालने वालों के लिए आवेदन शुरू, Form-6 से 12 सितंबर तक करें रजिस्ट्रेशन

    Punjab Election Update: पहली बार वोट डालने वालों के लिए आवेदन शुरू, Form-6 से 12 सितंबर तक करें रजिस्ट्रेशन

    चंडीगढ़
     मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) पंजाब और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा राज्य में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-2026' (SIR) का काम तेजी से चलाया जा रहा है। अगर आपकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है, या फिर आप 1 अक्टूबर 2026 तक 18 साल के हो रहे हैं, तो आप आवेदन कर सकते है। 

    फर्स्ट टाइम वोटर्स के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आयोग द्वारा जारी शेड्यूल के मुताबिक, नया वोटर कार्ड बनवाने और ड्राफ्ट वोटर सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरकर 12 सितंबर 2026 तक आवेदन किया जा सकता है।

    निर्वाचन आयोग की ओर से जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में किसी भी तरह की गलती, गलत नाम, पते में सुधार या किसी फर्जी/अयोग्य वोटर का नाम हटाने को लेकर यदि कोई दावे और आपत्तियां हैं, तो इन्हें 13 सितंबर तक संबंधित कार्यालयों या ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करवाया जा सकता है।

    यदि किसी नागरिक का नाम ड्राफ्ट रोल में छूट गया है या वोटर आईडी में संशोधन की आवश्यकता है, तो आयोग की ओर से अलग-अलग प्रकार के फॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं। यह अभियान राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में चलाया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। नए मतदाता बनने, NRI वोटर के रूप में पंजीकरण कराने, नाम कटवाने या पते में सुधार के लिए आवेदन प्रक्रिया को आसान और डिजिटल बनाया गया है।

    फर्स्ट टाइम वोटर्स कैसे कर सकते हैं आवेदन जानिए…

        चुनाव आयोग की अपील : चुनाव आयोग ने फर्स्ट टाइम वोटर्स बनने वाले युवाओं से अपील की है कि जो भी वोटर्स बनने की शर्तों को पूरा करते हैं वो अपनी वोट जरूर बनवाएं। 12 सितंबर तक वो ऑनलाइन या ऑफ लाइन सिस्टम को अपनाकर अपना नाम फाइनल मतदाता सूची में शामिल करवाएं ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में वो मतदान कर सकें।

        ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया: सबसे पहले भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल voters.eci.gov.in पर जाएं या अपने स्मार्टफोन में ECINet App (वोटर हेल्पलाइन ऐप) डाउनलोड करें। पोर्टल या ऐप पर मोबाइल नंबर के जरिए रजिस्ट्रेशन/लॉगिन करना होगा।

        फार्म-6 भरना होगा: आन लाइन रजिस्ट्रेशन करते हुए फर्स्ट टाइम वोटर्स को फार्म-6 का विकल्प चुनना होगा। उसके बाद फार्म में जो जानकारियां मांगी गई सभी भरनी अनिवार्य होंगी। फार्म भरते समय नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, वर्तमान व स्थाई पता आदि ध्यानपूर्वक भरें ताकि बाद में किसी तरह का बदलाव न करवाना पड़े।

        दस्तावेज अपलोड: फार्म नंबर छह के साथ आवेदक को पासपोर्ट साइज फोटो, आयु प्रमाण पत्र (जैसे 10वीं का सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट) और निवास प्रमाण पत्र (बिजली बिल, राशन कार्ड, बैंक पासबुक आदि) की कॉपी अपलोड करें। फॉर्म सबमिट करने के बाद एक रेफरेंस आईडी मिलेगी, जिससे आप अपने आवेदन का स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं।

        ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया: जो युवा ऑनलाइन प्रक्रिया में सहज नहीं हैं, वे अपने नजदीकी बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा ERO के दफ्तर जाकर हार्ड कॉपी में फॉर्म-6 प्राप्त कर सकते हैं। फॉर्म को पूरी तरह भरकर आवश्यक दस्तावेजों की फोटोकॉपी सेल्फ अटेस्ट करके BLO या ERO दफ्तर में 12 सितंबर 2026 से पहले जमा कराएं।

  • SIR का बड़ा आंकड़ा: ब्राजील के 2022 चुनाव से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से बाहर, जानें पूरा गणित

    SIR का बड़ा आंकड़ा: ब्राजील के 2022 चुनाव से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से बाहर, जानें पूरा गणित

    नई दिल्ली

    भारत में मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान यानी विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर नया बहस खड़ा हो गया है। अब तक की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 11.83 करोड़ नाम हटाए गए हैं। यह संख्या कितनी विशाल है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतिशत में यह आंकड़ा 12.1 है। तुलनात्मक रूप से देखें तो 2022 के ब्राजील आम चुनाव में कुल 11.18 करोड़ वोट पड़े थे। वहीं दुनिया में भारत और चीन के अलावा केवल 14 देश ही ऐसे हैं जिनकी कुल आबादी ही 10 करोड़ से अधिक है।

    इतने बड़े पैमाने पर हटाए गए नाम ने देश में राजनीतिक चर्चा को गर्म कर दिया है। सरकार के आलोचकों का तर्क है कि इस प्रक्रिया के कारण लाखों वैध और वास्तविक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं। दूसरी ओर सरकार के समर्थकों का दावा है कि केवल मृत, किसी दूसरे जगह पर चले गए और फर्जी मतदाताओं को ही सूची से बाहर किया गया है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि सच्चाई इन दोनों राजनीतिक दावों के बीच स्थित है।

    बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी में संशोधन के बाद चुनाव हो चुके हैं। यहां एसआईआर के बाद अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में 8.1% की गिरावट दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात जैसे 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यहां पूर्व सूची की तुलना में 10.7% नाम कम हुए हैं। 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जहां अभी केवल ड्राफ्ट रोल जारी हुआ है वहां यह दर 17% तक देखी गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि शुरुआत में नाम हटने की दर बहुत अधिक होती है, लेकिन दावे और आपत्तियां दर्ज होने के बाद अंतिम सूची में कई नाम वापस जुड़ जाते हैं।

    क्या कहते हैं आंकड़े?
    आपको बता दें कि 17 राज्यों में चुनाव एसआईआर का ड्राफ्ट चरण पूरा हो चुका है। यहां एसआईआर से पहले 36.09 करोड़ वोटर थे। ड्राफ्ट रोल के बाद 29.94 करोड़ बचे। यहां अभी फाइनल वोटर लिस्ट आना बाकी है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 8 ऐसे राज्य हैं जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई चुनाव नहीं हुआ है। ऐसे राज्यों में 34.01 करोड़ वोटर थे। ड्राफ्ट रोल में 29.25 करोड़ रह गए। फाइनल लिस्ट आने के बाद 30.36 करोड़ मतदाता बचे।

    मताधिकार से वंचित हो रहे हैं लोग?
    इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बावजूद अब तक के आंकड़े एक दिलचस्प पैटर्न दिखाते हैं। जिन राज्यों में संशोधन के बाद चुनाव हुए हैं, वहां कुल मतदान में बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है। इसके विपरीत मतदाता सूची में कुल नाम कम होने के कारण मतदान प्रतिशत में वृद्धि देखी गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि गलतियां नहीं हुई हैं। जमीनी स्तर पर और कुछ विधानसभा क्षेत्रों में वास्तविक मतदान संख्या घटी है। कई जगहों पर कागजी औपचारिकताओं के भारी बोझ के कारण नागरिकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल में लगभग 27 लाख मतदाता सूची से हटाए जाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

  • महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2.06 करोड़ नाम गायब, जानें नाम वापस जुड़वाने की पूरी प्रक्रिया

    महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2.06 करोड़ नाम गायब, जानें नाम वापस जुड़वाने की पूरी प्रक्रिया

    मुंबई 

    महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2.06 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। ये लोग पिछली वोटर लिस्ट में शामिल कुल मतदाताओं का लगभग 21.14 प्रतिशत थे। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सोमवार 31 अगस्त को यह जानकारी दी। राज्य के चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 7.71 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम शामिल हैं। इनमें 3.95 करोड़ पुरुष, 3.75 करोड़ महिलाएं और 3,087 थर्ड जेंडर (अन्य लिंग) के मतदाता शामिल हैं।

    मुंबई में मतदाताओं की संख्या में लगभग 36.1 लाख की कमी आई है। यानी करीब 35 फीसदी वोटर ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए हैं। महाराष्ट्र की पिछली वोटर लिस्ट में जून तक करीब 9.8 करोड़ मतदाता दर्ज थे। जबकि SIR के बाद जारी ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर लगभग 7.7 करोड़ रह गई है। यानी आंकड़ों के हिसाब से करीब 21.1 फीसदी की कमी आई है।

    हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम हमेशा के लिए वोटर लिस्ट से हट गया है। ऐसे लोगों को 30 सितंबर तक अपना दावा और आपत्ति दाखिल करने का मौका दिया गया है।

    क्यों हटाए गए नाम?
    अधिकारियों ने बताया कि 2,06,88,487 मतदाताओं के नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि उनके एन्यूमरेशन फॉर्म (गणना फर्म) जमा नहीं हो पाए। उनसे संपर्क नहीं हो सका। शायद उनकी मृत्यु हो गई थी। या उन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया था। SIR प्रोसेस से पहले महाराष्ट्र में 9.78 करोड़ मतदाता रजिस्टर्ड थे।

    इनमें से 78.86 प्रतिशत को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज्यादा फॉर्म 28.6 लाख पुणे में जमा नहीं हो पाए। इसके बाद ठाणे (28.5 लाख), मुंबई उपनगर (26.5 लाख), नागपुर (14.43 लाख), नासिक (10.27 लाख) और मुंबई शहर (9.5 लाख) का नंबर आता है।

    मुंबई में 36.1 लाख मतदाता कम
    SIR के बाद मुंबई के मतदाता आंकड़ों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में करीब 36.1 लाख मतदाता कम हुए हैं, जो पिछली लिस्ट की तुलना में लगभग 35 फीसदी है। यह कमी कई कारणों से हुई है। मतदाता गणना के दौरान जिन लोगों के फॉर्म उपलब्ध नहीं हो सके या जिनके बारे में जानकारी नहीं मिली, उन्हें विभिन्न कैटेगरी में रखा गया।

    17 लाख डुप्लीकेट नामों का भी मामला
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम के अनुसार, करीब 17 लाख डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज पाए गए थे। इन नामों को एक साथ मिलाकर हटाया गया है। इसलिए इन्हें पूरी तरह से 'फर्जी' या 'डुप्लीकेट मतदाता' मानना सही नहीं होगा। यानी एक ही व्यक्ति का नाम अगर एक से अधिक जगह दर्ज था। उसे एक निर्वाचन क्षेत्र में बरकरार रखते हुए दूसरे स्थान से हटाया गया, तो इससे कुल मतदाता संख्या में कमी दिखाई देती है।

    30 सितंबर तक वापस जुड़ सकता है नाम
    ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम बाहर होने वाले मतदाताओं के लिए यह आखिरी मौका नहीं है। वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। अगर किसी पात्र मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है तो उसे अपने क्षेत्र के संबंधित चुनाव अधिकारी या BLO से संपर्क करके अपना दावा पेश करना होगा। जरूरी प्रक्रिया और दस्तावेज पूरे करने के बाद नाम को वोटर लिस्ट में शामिल कराने का अवसर मिलेगा।

    18 साल के होने वाले युवाओं को भी मौका
    इस प्रक्रिया में पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है। जो युवा 1 अक्टूबर से पहले 18 वर्ष की उम्र पूरी कर रहे हैं, वे भी इस अवधि के दौरान मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे पहली बार मतदान करने वाले पात्र युवाओं को भी आगामी चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता मिलेगा।

    ऑनलाइन ऐसे चेक करें अपना नाम
    वोटर ड्राफ्ट लिस्ट में अपना नाम देखने के लिए नागरिक ECI के वोटर पोर्टल और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं। वोटर अपने EPIC नंबर के जरिए भी नाम और संबंधित डिटेल्स की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर भी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट उपलब्ध कराई गई है।

    नाम नहीं है तो कौन सा फॉर्म भरना होगा?
    ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं होने पर पात्र व्यक्ति Form 6 के जरिए वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। यानी जिन लोगों का नाम SIR के दौरान ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गया है, उनके पास अभी दावा दाखिल कर अपना नाम वापस सूची में शामिल कराने का अवसर मौजूद है।

        नाम जोड़ने के लिए: Form 6
        मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए: Form 7
        एड्रेस या अन्य डिटेल्स में सुधार के लिए: Form 8

    ड्राफ्ट लिस्ट को अंतिम सूची न समझें
    महाराष्ट्र में मतदाता संख्या में इतनी बड़ी गिरावट के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है। यह फाइनल लिस्ट नहीं। जिन लोगों के नाम इसमें नहीं हैं, वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। इसलिए महाराष्ट्र और खासकर मुंबई के मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे अपना नाम अभी चेक करें। अगर नाम गायब है या डिटेल्स में कोई गलती है, तो तय समय सीमा के भीतर आवेदन कर सुधार या नाम शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी करें।

    आखिर 2.07 करोड़ नाम इस लिस्ट में क्यों आए?

    चुनाव आयोग ने इस आंकड़े का पूरा हिसाब भी जनता के सामने रखा है:

        76.80 लाख वोटर ऐसे हैं जो परमानेंटली कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं (ठोस जानकारी मिलने के बाद).
        75.52 लाख लोग वेरिफिकेशन के दौरान घर पर मिले ही नहीं या उनका पता नहीं चल पाया.
        34.81 लाख वोटरों का निधन हो चुका है (सर्टिफिकेट या परिवार की रिपोर्ट के आधार पर).
        17.63 लाख नाम डुप्लीकेट हैं या वो किसी और इलाके में भी रजिस्टर्ड हैं.
        2.23 लाख वोटर अन्य कारणों से इस लिस्ट में हैं.

    शहरों की भागदौड़ और असली वोटरों की परेशानी
    चुनाव आयोग खुद यह मानता है कि इस ड्राफ्ट में 100% सटीकता का दावा नहीं किया जा सकता. इसकी एक बड़ी वजह ग्राउंड रियलिटी है. नियम के मुताबिक, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को घर-घर जाकर चेक करना होता है. अगर कोई नहीं मिलता, तो उन्हें तीन बार तक जाना पड़ता है। 

    शहरी इलाकों में ज्यादातर लोग नौकरी-पेशा हैं और रात 7-8 बजे के बाद ही घर लौटते हैं. वहीं, वेरिफिकेशन करने वाली ज्यादातर BLO महिलाएं होती हैं, जिनके लिए देर रात तक काम करना संभव नहीं होता. ऐसे में जो लोग दिन में घर पर नहीं मिलते, उन्हें 'अनुपस्थित' मान लिया जाता है. अधिकारियों का मानना है कि इस वजह से कई असली वोटरों के नाम भी गलती से इस 'अनकलेक्टेड' कैटेगरी में चले गए होंगे। 

    अब आपको क्या करना है?
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने याद दिलाया है कि यह सिर्फ एक ड्राफ्ट है, फाइनल लिस्ट नहीं. फाइनल वोटर लिस्ट आने से पहले दावों और आपत्तियों की पूरी प्रक्रिया चलेगी। 

    लिस्ट चेक करने के लिए आप अपने जिले के कलेक्टर की वेबसाइट पर जा सकते हैं. इसके अलावा राजनीतिक दलों के बूथ-लेवल एजेंटों को भी इसकी कॉपियां दी गई हैं. यह सिर्फ अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर वोटर का फर्ज है कि वो अपना नाम चेक करे. तो देर किस बात की? आज ही चेक करें कि वोटर लिस्ट में आपका नाम सुरक्षित है या नहीं!

  • नाम जुड़वाने के लिए कैंपों में भारी भीड़! पंजाब में 1.46 लाख लोगों को SIR नोटिस, जानें जरूरी दस्तावेज

    नाम जुड़वाने के लिए कैंपों में भारी भीड़! पंजाब में 1.46 लाख लोगों को SIR नोटिस, जानें जरूरी दस्तावेज

    जालंधर
     एसआइआर के सर्वे के दौरान जिले में 1.46 लाख लोगों की मैपिंग नहीं हो पाई थी। दूसरे चरण में इन सभी लोगों को सत्यापन के लिए जारी नोटिस मिलने के बाद जिला प्रशासन की ओर से इलेक्ट्रोलर रजिस्ट्रेशन अफसरों (ईआरओ) द्वारा लगाए गए कैंपों में लोगों की भीड़ उमड़ी।

    यहां किसी की मैपिंग 2003 की वोटर सूची के साथ नहीं हो रही तो किसी के स्वजन के दस्तावेजों में खामियां हैं। ऐसे में टोकन लेने के बावजूद लोगों को काम करवाने के लिए तीन से चार घंटे तक लग रहे हैं। दरअसल, एसआइआर सर्वे के तहत प्रथम चरण 25 जून से तीन अगस्त तक पूरा किया गया था।

    इसके तहत जिले के कुल 16,49,946 वोटरों को बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर इन्यूमरेशन फार्म बांटे गए। इनमें से 14,64,949 वोटरों द्वारा अपने इन्यूमरेशन फार्म जमा करवाए गए, जबकि, 1,84,997 वोटरों द्वारा फार्म प्राप्त नहीं हुए।

    इन वोटरों में 50,520 वोटर मृतक, 94,356 वोटर अन्य स्थानों पर स्थानांतरित, 8,961 डुप्लीकेट एंट्रीज, 30,157 एब्सेंट या अनट्रेसेबल वोटर व 1,003 अन्य कारणों वाली श्रेणियों में पाए गए थे। इसके अलावा ड्राफ्ट वोटर सूची में 1,46,551 वोटर ऐसे हैं, जिनकी 2003 की वोटर सूची से मैपिंग नहीं हुई।

    दूसरे चरण में इन सभी लोगों को सत्यापन के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। इन वोटरों को अलग-अलग तिथियों व अलग-अलग जगहों पर कैंप लगाकर बुलाया जा रहा है, जहां पर वोटरों की भीड़ तथा मैपिंग की प्रक्रिया में लग रही देरी के चलते लोगों को अपनी बारी के लिए दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।

    कैंपों में लोगों की भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए टोकन जारी किए जा रहे हैं। वहां पर भी लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि, कैंप में बैठने से लेकर पानी तक का इंतजाम किया गया है। वीरवार को पुडा कांप्लेक्स में कैंप लगेगा।

    हलका स्तर पर तैनात किए गए इलेक्ट्रोलर रजिस्ट्रेशन अफसर

        वेस्ट : एस्टेट अफसर जेडीए नवदीप सिंह
        नार्थः जेडीए के मुख्य प्रशासक तेजदीप सिंह सैनी
        सेंट्रल : एसडीएम-1 शुभी आंगरा
        कैंटः आरटीओ बलजिंदर सिंह ढिल्लों
        आदमपुर : एसडीएम लाल विश्वास
        फिल्लौर : एसडीएम दीपक भाटिया
        नकोदर : एसडीएम सिमरनजीत सिंह
        शाहकोट : एसडीएम आदित्य गुप्ता एसडीएम-दो शायरी मल्होत्रा

    2003 की वोटर सूची में नहीं था पिता का नाम, मंगवाए दस्तावेज

    पुडा परिसर में लगाए गए कैंप में नोटिस हासिल करने वाले सुरेश कुमार ने कहा कि 2003 में वह बालिग नहीं थे तथा उस समय की वोटर सूची में पिता नाम नहीं था। इसके चलते गांव से पिता का के नाम के दस्तावेज मंगवाए गए हैं। लीला रानी ने कहा कि उनकी वोट तो बनी है, लेकिन पति के नाम में स्पैलिंग की गलती है। इसके लिए पति के सही नाम वाले दस्तावेज मांगे गए हैं।

    नोटिस मिलने पर यह दस्तावेज करवा सकते हैं जमा
    नोटिस मिलने पर उम्र के प्रमाण के तौर पर जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, 10वीं या 12वीं का प्रमाणपत्र अथवा पासपोर्ट दिया जा सकता है।

    निवास के प्रमाण के लिए बैंक या डाकघर की पासबुक, बिजली, पानी या गैस का बिल, आधार कार्ड, पासपोर्ट, पंजीकृत किरायानामा अथवा पंजीकृत सेल डीड जैसे दस्तावेज दिए जा सकते हैं। आवेदन के साथ हाल की पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो भी देनी होगी।

     

  • ममता ने बंगाल में गड़बड़ी का आरोप लगाया, नादिया में BJP कार्यकर्ता पर हमले के बाद 18% वोटिंग

    ममता ने बंगाल में गड़बड़ी का आरोप लगाया, नादिया में BJP कार्यकर्ता पर हमले के बाद 18% वोटिंग

    कलकत्ता

    पश्चिम विधानसभा चुनाव के लिए आज दूसरे चरण की वोटिंग जारी है। मतदान सुबह 7 बजे से शुरू हो चुका है लेकिन मतदान केंद्रों पर सुबह 6 बजे से ही मतदाताओं की कतार लगनी शुरू हो गई थी।पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की मुख्य बातें: पहले चरण का मतदान पूरा हुआ; अनुमानित मतदान प्रतिशत 92% से अधिक रहा। 

    दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल की 142 सीटों पर आज वोटिंग हो रही है, पिछले विधानसभा चुनाव में इन 142 में में 123 सीटों पर सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। इस चरण के चुनाव में सबकी निगाहें भवानीपुर सीट पर टिकी हुई हैं, क्यूंकि यहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने है। बता दें कि भवानीपुर ममता बनर्जी की परंपरागत सीट है, इस लिहाज से यहां पर कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। इससे पहले सुवेंदु अधिकारी 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हरा चुके हैं। गौरतलब हो कि पहले चरण की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को रिकॉर्ड 93% मतदान हुआ था। 4 मई को चुनाव के रिजल्ट आएंगे।

     बारानगर में एक बूथ पर 5 बार बदली गई EVM, रुका मतदान
    बंगाल में हंगामे के बीच मतदान जारी है. इसी बीच बारानगर के बूथ नंबर 72 में ईवीएम में खराबी के कारण मतदान रोक दिया गया है. नाराज मतदाताओं का आरोप है कि मशीन को पांच बार बदला जा चुका है, फिर भी मतदान शुरू नहीं हुआ है. एक मतदाता, मिथु गरई ने कहा, 'हम सुबह 7 बजे से लाइन में खड़े हैं. वो कह रहे हैं कि ईवीएम खराब है. अब हम वापस जा रहे हैं। 
     
     'TMC बना रही है चौथी बार सरकार', अभिषेक बनर्जी का दावा
    ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने बंगाल चुनाव में बीजेपी पर केंद्रीय बलों के अत्याधिक तैनात का आरोप लगाया है. अब अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आईएनएस के युद्धपोत और राफेल, जिन्हें तैनात करना है बाकी आप वो भी कर दो जो भी चीज आपको बांग्लादेश और पाकिस्तान के खिलाफ करना है. वो आप बंगाल के लोगों के खिलाफ कर रहे हो। 

    टीएमसी नेता ने दावा किया कि बंगाल में 30 लाख मतदाताओं को वोट डालने से रोका गया है. उन्होंने अपनी एक साल पुरानी भविष्यवाणी को दोहराते हुए कहा कि टीएमसी 2021 से भी ज्यादा बहुमत हासिल करेगी. टीएमसी चौथी बार सरकार बना रही है. मैं आपसे 4 मई को मिलूंगा। 

    भबानीपुर: ममता बनर्जी के मतदान केंद्र के बाहर पहुंचे शुभेंदु अधिकारी
    ममता बनर्जी ने सुबह से ही अपने विधानसभा क्षेत्र भबानीपुर में डेरा डाला हुआ है. उन्होंने बीजेपी पर चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है. इसी बीच बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी भी भबानीपुर पहुंच गए हैं. बताया जा रहा है कि बीजेपी नेता उसी मतदान केंद्र के बाहर मौजूद हैं, जहां ममता बनर्जी ने डेरा डाला हुआ है। 

    मतदाताओं को डराया-धकाया जा रहा है, ममता का केंद्रीय बलों पर आरोप
    बंगाल में मतदान के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यालय में बैठक के बाद केंद्रीय बलों पर मतदाताओं को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है. उन्होंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के घरों में जबरन घुसने का भी आरोप लगाया है। 

    नदिया में भाजपा पोलिंग एजेंट पर हमला, अस्पताल में भर्ती
    बंगाल विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के लिए मतदान जारी है. मतदान से पहले सुबह करीब 5:30 बजे चापड़ा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हात्रा पंचायत में बूथ नंबर 52 पर भाजपा पोलिंग एजेंट मोशर्रफ पर कथित रूप से बदमाशों के एक गिरोह ने लोहे की रॉड से हमला कर दिया. पुलिस ने बाद में उन्हें बचाया और चापड़ा रूरल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है. डॉक्टरों ने बताया कि उनके सिर में चोट लगी है. उनके सिर में छह टांके लगाए हैं। 

    मतदान केंद्र के बाहर हंगामा, CRPF ने कई लोगों को हटाया
    मतदान के दौरान तनाव के बीच एक मतदान केंद्र के बाहर हंगामा मच गया. CRPF जवानों ने कई व्यक्तियों को वहां से हटा दिया. मतदाताओं के अनुसार, EVM मशीन में बार-बार खराबी आने के कारण तीन असफल प्रयासों के बाद सुबह करीब 8:30 बजे मतदान शुरू हो सका. मतदाताओं ने आरोप लगाया कि कुछ लोग मतदान प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने वहां से हटा दिया. एक मतदाता मयूर जैन ने बताया कि वो सुबह 7 बजे से इंतजार कर रहे थे। 

    उन्होंने कहा, 'मशीन खराब होने के कारण हमें तीन बार वोट डालने से रोका गया. नई मशीन लाई गई, लेकिन उसमें भी समस्या आई. अंदर चीख-पुकार मच गई और गेट बंद कर दिए गए. बाद में कुछ लोगों ने हंगामा करने की कोशिश की, उन्हें पीटा गया और ले जाया गया. आखिरकार सुबह 8:30 बजे मतदान शुरू हुआ.' मयूर जैन ने ये भी कहा कि CRPF के जवान मौजूद थे और प्रशासन पूरी तरह सतर्क था। 

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए बुधवार सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गया है. दूसरे चरण में सात जिलों की 142 विधानसभा सीटों पर कुल 3,21,73,837 मतदाता वोट डालेंगे. इनमें 1,64,35,627 पुरुष, 1,57,37,418 महिलाएं और 792 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं. मतदान के लिए 41,001 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां हर बूथ की वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 2,321 कंपनियां केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनात किया गया है. कोलकाता में सबसे अधिक 273 कंपनियां लगाई गई हैं। 

    इसके अलावा 142 सामान्य पर्यवेक्षक, 95 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक भी तैनात किए गए हैं. ड्रोन कैमरों से भी मतदान प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी. इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवार मैदान में हैं. भांगर सीट पर सबसे अधिक 19 उम्मीदवार हैं, जबकि हुगली जिले की गोगहाट सीट पर सबसे कम 5 उम्मीदवार हैं। 

    इस चरण में कई दिग्गज नेता अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (भबानीपुर), विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी (भबानीपुर), राज्य मंत्री सुजीत बोस (बिधाननगर), फिरहाद हकीम (कोलकाता पोर्ट), ज्योतिप्रिया मल्लिक (हावड़ा), ब्रात्य बसु (दम दम), सोवंदेब चट्टोपाध्याय (बालीगंज) और बीजेपी के अर्जुन सिंह (नोआपाड़ा), स्वपन दासगुप्ता (राशबिहारी), रूद्रनील घोष (शिबपुर) शामिल हैं. सीपीआई(एम) की मीनाक्षी मुखर्जी (उत्तरपाड़ा), दीप्सिता धर (दम दम उत्तर), कलातन दासगुप्ता (पानीहाटी) और आईएसएफ के नौशाद सिद्दीकी (भांगर) भी चुनावी मैदान में हैं। 

    वहीं, राज्यपाल आर.एन. रवि और चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए मतदाताओं से भारी संख्या में निकलने की अपील की है. इससे पहले 23 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान में 152 सीटों पर 93.19 प्रतिशत रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया था।