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  • मोहाली में मतदाताओं की संख्या घटी, डेराबस्सी में सबसे ज्यादा 2.79 लाख वोटर

    मोहाली में मतदाताओं की संख्या घटी, डेराबस्सी में सबसे ज्यादा 2.79 लाख वोटर

    मोहाली
     विधानसभा क्षेत्र मोहाली जो कि पंजाब की सबसे अहम सीट मानी जाती है की मतदाता सूची में आए बदलाव ने चुनावी गणित को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची में मोहाली हलके में 2,02,010 मतदाता दर्ज किए गए हैं। यह संख्या 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज 2,33,573 मतदाताओं से 31,563 कम है। वहीं, 2022 के विधानसभा चुनाव में हलके में 2,39,357 मतदाता थे। उस आंकड़े के मुकाबले मौजूदा सूची में 37,347 मतदाताओं का अंतर सामने आया है। जिले के खरड़ और डेराबस्सी विधानसभा क्षेत्रों के मुकाबले मोहाली हलके में पुराने चुनावी आंकड़ों और मौजूदा मतदाता सूची के बीच सबसे बड़ा अंतर दिखाई देता है।

    मोहाली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद वोटरों की संख्या 7.8% घट गई है। सोमवार को जारी अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक जिले में अब 7,47,569 वोटर हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह संख्या 8,10,719 थी। इस हिसाब से 63,150 वोटरों की कमी आई है।

    हालांकि यह हटाए गए वोटरों की वास्तविक संख्या नहीं है, क्योंकि अंतिम सूची में नए वोट भी जुड़े हैं। प्रशासन बाद में हटाए गए वोटरों का अंतिम आंकड़ा जारी करेगा। डिप्टी कमिश्नर-कम-जिला चुनाव अधिकारी कोमल मित्तल ने रोल ऑब्जर्वर मोहम्मद तैय्यब की मौजूदगी में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अंतिम मतदाता सूची जारी होने की जानकारी दी। प्रतिनिधियों को मतदाता सूची की प्रतियां भी सौंपी गईं।

    डेराबस्सी में सबसे ज्यादा वोटर अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक, डेराबस्सी विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 2,79,857 वोटर हैं। खरड़ में 2,65,702 और मोहाली में 2,02,010 वोटर दर्ज किए गए हैं। 13 अगस्त को जारी मसौदा मतदाता सूची में जिले के 7,00,719 वोटर थे। इनमें 3,62,751 पुरुष, 3,37,954 महिलाएं और थर्ड जेंडर के 14 वोटर शामिल थे। उस समय खरड़ में 2,46,922, मोहाली में 1,92,715 और डेराबस्सी में 2,61,082 वोटर थे। मसौदा सूची के मुकाबले अंतिम सूची में 46,850 वोटर बढ़े हैं।

    84,795 वोटरों की नहीं हुई थी मैपिंग SIR के दौरान जिले में 84,795 ऐसे वोटर मिले, जिनकी मैपिंग नहीं हो पाई थी। इसके अलावा, 1,09,419 मामलों में तार्किक विसंगतियां मिली थीं। संबंधित वोटरों को नोटिस देकर जरूरी दस्तावेज जमा कराने और अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 13 अगस्त से 12 सितंबर तक थी।

    25 जून से शुरू हुई थी प्रक्रिया नोटिस जारी करने और उनके निपटारे की प्रक्रिया 8 अक्टूबर तक चली। मोहाली जिले में SIR की प्रक्रिया 25 जून से शुरू हुई थी। 838 बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को 8,54,423 वोटरों तक पहुंचकर गणना फॉर्म भरवाने और जानकारी का सत्यापन करने की जिम्मेदारी दी गई थी। बीएलओ ने 25 जून से 24 जुलाई तक घर-घर जाकर जानकारी जुटाई। इस दौरान अनुपस्थित, दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके, मृत और दोहरी एंट्री वाले वोटरों की जांच की गई।

    नाम नहीं तो फॉर्म-6 भरकर बनवा सकते हैं वोट अंतिम मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर पात्र व्यक्ति फॉर्म-6 भरकर नया वोट बनवा सकता है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने के अलावा संबंधित बीएलओ या निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारी के कार्यालय में भी संपर्क किया जा सकता है। एसआईआर के लिए अर्हता तिथि 1 अक्टूबर 2026 रखी गई थी।

     राजनीतिक दृष्टि से यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मतदाता सूची बूथ स्तर पर राजनीतिक दलों की तैयारी, मतदाताओं तक पहुंच और चुनावी प्रबंधन का आधार होती है। हालांकि, मतदाताओं की संख्या में कमी के आधार पर किसी राजनीतिक दल के समर्थन या चुनावी नतीजों पर असर का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। यहां एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मौजूदा सूची में कितने नाम हटाए गए, कितने नए मतदाता जुड़े और कितने नामों में संशोधन हुआ। 

    जिला प्रशासन की ओर से जारी अंतिम सूची के कुल आंकड़े इन सवालों का पूरा जवाब नहीं देते। एसआईआर के दौरान वास्तव में हटाए गए नामों की संख्या जानने के लिए पुनरीक्षण से पहले की सूची और अंतिम सूची का आधिकारिक तुलनात्मक ब्योरा जरूरी है।

  • विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में 13 लाख वोट कम, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दी जानकारी

    विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में 13 लाख वोट कम, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दी जानकारी

    चंडीगढ़ 
    पंजाब में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद करीब 13 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने यह जानकारी दी। एसआईआर की प्रक्रिया से पहले राज्य में करीब 2.14 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे, जबकि पुनरीक्षण के बाद यह संख्या घटकर लगभग 2.01 करोड़ रह गई है।

    मतदाता सूची में हुए इस बदलाव के बाद पंजाब में मतदाताओं की कुल संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। एसआईआर के तहत मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कर उनमें दर्ज नामों और संबंधित विवरणों की जांच की जाती है, ताकि सूची को अद्यतन किया जा सके।

     मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया के बाद राज्य की मतदाता सूची में करीब 13 लाख मतदाताओं की कमी आई है। हालांकि, हटाए गए नामों के कारणों और अलग-अलग श्रेणियों में नाम कटने का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने नाम मृत मतदाताओं, स्थान परिवर्तन या अन्य कारणों से हटाए गए हैं।  

    मतदाता सूची में नाम दर्ज होना मतदान के अधिकार के लिए जरूरी है। ऐसे में मतदाताओं के लिए अपनी प्रविष्टियों की जांच करना महत्वपूर्ण है, ताकि आगामी चुनावों के दौरान उन्हें मतदान करने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। 

    घर-घर जाकर किया गया सत्यापन
    अनिंदिता मित्रा ने बताया कि बूथ लेवल अधिकारियों ने 25 जून से 3 अगस्त तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया. इस दौरान पंजीकृत मतदाताओं को एन्यूमरेशन फॉर्म दिए गए और उनसे वापस लिए गए. 13 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 1,93,94,435 मतदाता थे. उस समय कुल मतदाताओं में से 20,66,608 यानी 9.63 फीसदी मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट के तौर पर बंटवारा किया गया था। 

    दावों और आपत्तियों की अवधि के दौरान राज्यभर में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को ड्राफ्ट मतदाता सूची की प्रतियां दी गई थीं. 13 अगस्त से 12 सितंबर के बीच लोगों से अपनी जानकारी की जांच करने और जरूरत होने पर दावे या आपत्तियां दाखिल करने को कहा गया था. आवेदन ECINET मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन, बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से ऑफलाइन या चुनाव पंजीकरण अधिकारियों के कार्यालय में जमा किए जा सकते थे. इस दौरान पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, 19 रोल ऑब्जर्वर और जिला निर्वाचन अधिकारियों ने दावों और आपत्तियों की जांच के लिए फील्ड विजिट और सुपर-चेकिंग की। 

    86,038 मतदाताओं को किया गया अपात्र
    13 अगस्त से 8 अक्टूबर तक दावों और आपत्तियों के निपटारे के चरण में ऐसे मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए, जिनका मैपिंग नहीं हुआ था या जिनकी जानकारी में गड़बड़ी थी. अनिंदिता मित्रा ने बताया कि नोटिस पाने वाले 35,49,036 मतदाताओं में से 86,038 को विस्तृत सत्यापन और स्पीकिंग ऑर्डर के जरिए अपात्र पाया गया। 

     बढ़ाए गए मतदान केंद्र
    मतदाताओं की सुविधा बढ़ाने के लिए सभी जिलों में मतदान केंद्रों का पुनर्गठन किया गया. इसके तहत मतदान केंद्रों की संख्या 24,453 से बढ़ाकर 25,332 कर दी गई. मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए एक महीने की SVEEP योजना के तहत कई माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाया गया. मतदाताओं को अपनी जानकारी जांचने और जमा करने में मदद के लिए 7 जून, 11-12 जुलाई, 19 जुलाई और 16 अगस्त को मतदान केंद्रों पर स्पेशल शिविर लगाए गए. युवा मतदाताओं के पंजीकरण के लिए कॉलेजों और स्कूलों में भी विशेष शिविर आयोजित किए गए. राज्य और जिला स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ नियमित बैठकें भी की गईं। 

  • छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची सुधारने की कवायद तेज, नए वोटरों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू

    छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची सुधारने की कवायद तेज, नए वोटरों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू

    रायपुर 
    छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वा
    चन पदाधिकारी (CEO) यशवंत कुमार ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से छूटे हुए और पात्र नए नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए एक महीने के विशेष अभियान की घोषणा की है. इस पहल के तहत, जो लोग इस वर्ष फरवरी में संपन्न हुए SIR अभ्यास के दौरान घर पर अनुपस्थित रहने या अन्य स्थानों पर स्थानांतरित होने के कारण नामांकित होने से वंचित रह गए थे, उन्हें वोटर लिस्ट में जोड़ने का अवसर दिया जाएगा। 

    निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें केवल वर्तमान में 18 वर्ष पूर्ण कर चुके युवा ही नहीं, बल्कि 17 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके वे किशोर भी अग्रिम पंजीकरण करा सकेंगे, जो अगले एक वर्ष के भीतर 18 वर्ष के होने वाले हैं। 

    अभियान को प्रभावी बनाने के लिए बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) सप्ताह में दो दिन घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे. इसके अतिरिक्त, प्रत्येक बुधवार और गुरुवार को मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। 

    युवा और संभावित मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर शुक्रवार और शनिवार को शैक्षणिक संस्थानों में विशेष पंजीकरण शिविर लगाए जाएंगे. CEO यशवंत कुमार ने स्पष्ट किया कि मतदाता पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है और कोई भी पात्र नागरिक किसी भी समय इसके लिए आवेदन कर सकता है। 

    दूसरी ओर, इस घोषणा का स्वागत करते हुए कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि वे इस विशेष अभियान की लगातार मांग और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि SIR के बाद मतदाता सूची से बाहर रहे सभी 24 लाख लोगों तक पहुँच बनाकर उन्हें अपने दावों के सत्यापन का पूरा अवसर प्रदान किया जाए. उनके अनुसार, छत्तीसगढ़ में पहले 2.12 करोड़ मतदाता थे, लेकिन SIR के बाद केवल 1.87 करोड़ लोगों के नाम ही सूची में रह गए हैं। 

     

  • CG News: 24,99,823 मतदाताओं के नाम कटे, वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए चलेगा विशेष अभियान

    CG News: 24,99,823 मतदाताओं के नाम कटे, वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए चलेगा विशेष अभियान

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और छूटे हुए पात्र नागरिकों का सत्यापन करने के लिए एक महीने का विशेष अभियान शुरू किया गया है. भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान की जानकारी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में दी.

    उन्होंने बताया कि अभियान के तहत विभिन्न कारणों से मतदाता सूची से हटाए गए नामों का भी पुनः सत्यापन किया जाएगा. पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के पंजीकरण पर विशेष जोर दिया जाएगा. वहीं 17 वर्ष से अधिक आयु के युवा भी मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकते हैं.

    घर-घर पहुचेंगे BLO
    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान करीब 24.99 लाख मतदाताओं के नाम कटे हैं. इनमें लगभग 6.42 लाख मृत मतदाता और 19,13,540 अनुपस्थित या स्थानांतरित मतदाता शामिल हैं. वहीं सूची में 2 लाख 35 हजार 994 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं. अब एक महीने तक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का दोबारा सत्यापन करेंगे और पात्रता के अनुसार मतदाता सूची से छूटे नाम जोड़ने की प्रक्रिया में मदद करेंगे.

    मतदान केंद्रों और शिक्षण संस्थानों में लगेंगे विशेष शिविर
    अभियान के तहत हर सप्ताह बुधवार और गुरुवार को मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे. इसके अलावा शुक्रवार और शनिवार को स्कूल-कॉलेजों में मतदाता पंजीकरण अभियान चलाया जाएगा. आईटीआई, हाई स्कूल, हायर सेकेंडरी और उच्च शैक्षणिक संस्थानों में भी शिविर लगेंगे. संस्थानों के इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के माध्यम से युवाओं को मतदाता पंजीकरण के प्रति जागरूक किया जाएगा. बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को फॉर्म-6 के आवेदन प्राप्त करने और क्षेत्र सत्यापन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी मतदाता सूची राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के साथ साझा करेंगे.

    ऐसे कर सकेंगे आवेदन
    मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए नागरिक ECINET मोबाइल ऐप और आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. ऑफलाइन आवेदन के लिए संबंधित मतदान केंद्र के बूथ लेवल अधिकारी को फॉर्म-6 जमा किया जा सकता है.
    पंजीकरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ECINET ऐप पर ‘Book a Call with BLO’ सुविधा उपलब्ध है. इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 1950 पर कॉल करके भी सहायता प्राप्त की जा सकती है. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार ने सभी पात्र नागरिकों से अभियान का लाभ उठाने और मतदाता सूची में अपना नाम सुनिश्चित कराने की अपील की.

  • MP में मतदाता सूची सुधार का बड़ा अभियान, 31 लाख हटे नामों की होगी जांच; मजदूरों-बेघरों के लिए विशेष कैंप

    MP में मतदाता सूची सुधार का बड़ा अभियान, 31 लाख हटे नामों की होगी जांच; मजदूरों-बेघरों के लिए विशेष कैंप

    भोपाल
     चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत मध्य प्रदेश में मतदाता सूची को सही और अपडेट करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत राज्य भर में 74,000 बूथ लेवल अधिकारी (BLO) 31 अक्टूबर तक घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट से बाहर हुए पात्र नागरिकों के नाम दोबारा जोड़ना और हटाई गई प्रविष्टियों का सत्यापन करना है।

    31.11 लाख कटे नामों का दोबारा होगा सत्यापन
    प्रशासन द्वारा पहले मतदाता सूची से हटाए गए 31 लाख 11 हजार नामों का पुनः सूक्ष्मता से निरीक्षण किया जा रहा है। इनमें लगभग 14 लाख ऐसे नाम हैं जो या तो दो जगह दर्ज थे या फिर संबंधित व्यक्तियों का निधन हो चुका है। वहीं लगभग 17,11,302 ऐसे मतदाता हैं जो स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं या पते पर नहीं मिले थे। यदि वे वास्तव में स्थानीय निवासी हैं और मतदान करते हैं, तो उनके नाम सूची में फिर से जोड़े जाएंगे।

    युवाओं और वंचित वर्गों के लिए दी गई छूट
    1 जनवरी 2027 तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नवयुवक अब बिना किसी डिक्लेरेशन के एडवांस में फॉर्म-6 भर सकते हैं। मजदूर बस्तियों, रैन बसेरों (नाइट शेल्टर) और बेघर नागरिकों का नाम मतदाता सूची में दर्ज करने के लिए अलग से विशेष कैंप लगाए जाएंगे।

    राजनीतिक दलों के साथ साझा होंगी लिस्ट
    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद ज़मीनी स्तर पर काम में तेज़ी ला दी गई है। बीएलओ को हर सप्ताह 20 से 25 घरों तक पहुंचने का लक्ष्य दिया गया है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद तैयार अंतिम सूची को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए (Booth Level Agents) के साथ साझा किया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

  • चंडीगढ़ में वोटर बनने का सुनहरा अवसर, आज से पांच दिन विशेष शिविर में होगा पंजीकरण

    चंडीगढ़ में वोटर बनने का सुनहरा अवसर, आज से पांच दिन विशेष शिविर में होगा पंजीकरण

    चंडीगढ़
     विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद अब मतदाता सूची में छूटे पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन विशेष अभियान चलाएगा।

    इसके तहत 7 से 11 अक्टूबर तक शहर के मतदान केंद्रों पर विशेष नामांकन शिविर लगाए जाएंगे। बीएलओ सुबह 10 से दोपहर तीन बजे तक मतदान केंद्रों पर मौजूद रहकर पात्र नागरिकों को नामांकन में मदद करेंगे।

    अभियान में युवाओं और पहली बार मतदाता बनने वालों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बीएलओ एसआईआर से पहले की मतदाता सूची का मौजूदा सूची से मिलान भी करेंगे। इसके आधार पर ऐसे मतदाताओं की पहचान की जाएगी, जिनका नाम पहले सूची में था, लेकिन अब शामिल नहीं है। बीएलओ ऐसे मतदाताओं की वर्तमान स्थिति जानने के लिए घर-घर भी जाएंगे।

    एसआईआर के दौरान तैयार अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि (एएसडीडी) वाले मतदाताओं की सूचियां भी उपलब्ध कराई जाएंगी। पात्र पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने में सहायता दी जाएगी।

    मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ स्तर एजेंटों (बीएलए) को भी बूथवार सूचियां उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान में सहयोग मिल सके। शैक्षणिक संस्थानों में निर्वाचन साक्षरता क्लबों, स्वीप गतिविधियों और जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से युवाओं को भी पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    प्रशासन के अनुसार, फॉर्म-6 नए मतदाता के पंजीकरण के लिए, फॉर्म-7 नाम हटाने या आपत्ति के लिए और फॉर्म-8 पता बदलने, विवरण में सुधार अथवा ईपीआईसी संबंधी बदलाव के लिए भरा जा सकता है। मतदाता सेवाएं ईसीआईनेट ऐप और पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध हैं। सहायता के लिए मतदाता हेल्पलाइन 1950 पर संपर्क किया जा सकता है।

     

  • वोटर लिस्ट में बड़ा अपडेट: इंदौर के 4.5 लाख पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जुड़ेंगे

    वोटर लिस्ट में बड़ा अपडेट: इंदौर के 4.5 लाख पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जुड़ेंगे

    इंदौर.

    निर्वाचक नामावली में नाम जुड़वाने से छूट गए और विभिन्न कारणों से विलोपित किए गए मतदाताओं को एक और मौका मिलेगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश ने शुक्रवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से निर्वाचक नामावली के निरंतर अद्यतन और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान की समीक्षा की।

    उन्होंने निर्देश दिए कि विलोपित मतदाताओं के प्रकरणों का दोबारा परीक्षण कर पात्र पाए जाने पर उनके नाम नियमानुसार मतदाता सूची में शामिल किए जाएं।

    वीसी में दिए गए छूटे मतदाताओं की पहचान के निर्देश –
    वीसी में इंदौर से कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी शिवम वर्मा, उप जिला निर्वाचन अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान जिन मतदाताओं के नाम सूची से छूट गए हैं, उनकी भी पहचान की जाए। जिन मतदान केंद्रों में बाद में परिवर्तन हुआ है, वहां पुरानी और वर्तमान सूचियों का मिलान कर छूटे हुए पात्र मतदाताओं की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि फार्म-6 के साथ लगाया जाने वाला घोषणा पत्र केवल एसआईआर के दौरान ही उपयोग था। गैर-एसआईआर अवधि में निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1960 के तहत निर्धारित प्रपत्रों का ही इस्तेमाल किया जाएगा।

    अभियान की होगी साप्ताहिक समीक्षा –
    बैठक में डीएसई प्रकरणों का तेजी से निराकरण, रिक्त बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजर पदों को भरने तथा अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए गए। अभियान की साप्ताहिक समीक्षा होगी और जिला स्तर पर प्रतिदिन की प्रगति की जानकारी ली जाएगी। गौरतलब है कि इंदौर में साढ़े चार लाख के करीब मतदाताओं के नाम हटाए गए थे।एसआइआर के बाद सूची में 24.20 मतदाता शामिल थे।

    दो दिन में उपलब्ध कराई जाएगी सूची –
    दो दिन के भीतर बीएलओ और बीएलए को छूटे नामों की सूची उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जा सके। एईआरओ को सूची तैयार कराने और ईआरओ को प्रतिदिन इसकी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। नागरिकों की सुविधा के लिए ईआरओ स्तर पर हेल्पडेस्क भी स्थापित किए जाएंगे। यहां मतदाता सूची में नाम जुड़वाने सहित निर्वाचन संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी और आवश्यक सहायता मिलेगी। नवीन बसाहटों में भी डोर-टू-डोर सर्वे कर पात्र मतदाताओं को चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • वोटर लिस्ट अपडेट पर EC का बड़ा फैसला, Form-6 के साथ अतिरिक्त डिक्लेरेशन की जरूरत नहीं

    वोटर लिस्ट अपडेट पर EC का बड़ा फैसला, Form-6 के साथ अतिरिक्त डिक्लेरेशन की जरूरत नहीं

    नई दिल्ली
    चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रॉसेसस पर चल रहे विवाद के बीच एक बड़ा फैसला लिया है. आयोग ने कहा कि अब फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र जरूरी नहीं होगा. चुनाव आयोग ने स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने वैधानिक फार्म-6 के मूल फॉर्मेट में कोई कानूनी बदलाव नहीं किया गया है। 

    बता दें, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रॉसेस के समय इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र अनिवार्य रूप से जोड़ा था. यह घोषणा, जिसके तहत नए आवेदकों को खुद को या अपने माता-पिता या दादा-दादी को पहले हुए सघन संशोधन (intensive revision) के दौरान तैयार मतदाता सूचियों से जोड़ने वाली जानकारी देनी होती है, उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ECINET पोर्टल पर उपलब्ध है जहां SIR का काम चल रहा है। 

    जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां चुनाव आयोग (ECINET) ऐप और पोर्टल के साथ-साथ संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल से भी अतिरिक्त घोषणा (additional declaration) को हटा दिया गया है. अब नामांकन चाहने वाले आवेदकों को केवल 'निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960' के तहत निर्धारित कानूनी 'फॉर्म 6' ही भरना होगा. यह कदम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी वाले पूरे आयोग की 26 सितंबर को हुई बैठक के बाद उठाया गया है। 

    बैठक के बाद, चुनाव आयोग ने कहा था कि फॉर्म 6 के साथ लगा घोषणा-पत्र SIR के लिए था और 'गैर-SIR अवधि के लिए, नियमों (मतदाता पंजीकरण नियम 1960) के अनुसार लागू फर्म का इस्तेमाल किया जाएगा. यह मामला तब विवाद का विषय बन गया जब यह बात सामने आई कि संधू और जोशी ने फॉर्म 6 से जुड़े बदलावों पर आपत्ति जताई थी. फॉर्म 6 वह कानूनी फॉर्म है जिसका इस्तेमाल योग्य नागरिक वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाने के लिए करते हैं. जोशी ने इस फॉर्म में किए गए बदलावों पर यह कहते हुए आपत्ति जताई थी कि 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के तहत तय किए गए फॉर्म में नियमों में संशोधन किए बिना कोई बदलाव नहीं किया जा सकता. संधू भी उनकी बात से सहमत थे। 

    आयोग की वेबसाइट ECINET पर ऑनलाइन फॉर्म 6 की प्रक्रिया में SIR से जुड़ी घोषणा को शामिल किए जाने के बाद, संधू ने फिर से आपत्ति जताई और इस बदलाव को 'अनधिकृत/गैर-कानूनी' बताते हुए इसे हटाने की मांग की. हालांकि, अपने सार्वजनिक बयानों में चुनाव आयोग ने कहा है कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था और घोषणा (डिक्लेरेशन) SIR से जुड़ी एक अतिरिक्त जरूरत थी. आयोग ने यह भी कहा है कि बिहार SIR पर अपने फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस घोषणा को सही ठहराया था। 

    26 सितंबर को ये फैसले तब लिए गए जब इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े उन फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनके अनुसार उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे. आयोग ने 26 सितंबर के अपने बयान में कहा कि SIR से जुड़े आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी मिली थी। 

  • पंचायतों के उप निर्वाचन क्षेत्रों एवं नगर परिषद सुसनेर में मतदान दिवस पर रहेगा अवकाश

    पंचायतों के उप निर्वाचन क्षेत्रों एवं नगर परिषद सुसनेर में मतदान दिवस पर रहेगा अवकाश

    पंचायतों के उप निर्वाचन क्षेत्रों एवं नगर परिषद सुसनेर में मतदान दिवस पर रहेगा अवकाश

    मतदान 29 सितम्बर को होगा 

    भोपाल

    राज्य शासन द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के उप निर्वाचन वर्ष 2026 पूर्वाध के घोषित कार्यक्रम अनुसार मतदान दिवस 29 सितम्बर, 2026 को सामान्य अवकाश घोषित किया गया है। जिला आगर-मालवा की नगर परिषद सुसनेर के अध्यक्ष पद का निर्वाचन होगा।

    पंचायतों में मतदान 29 सितम्बर को सुबह 7 से अपरान्ह 3.00 बजे तक होगा। पंच पद के लिये मतगणना मतदान के तुरंत बाद मतदान केन्द्र पर ही होगी। सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य की विकास खण्ड मुख्यालय पर ई.व्ही.एम. से की जाने वाली मतगणना 3 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से होगी। इसी दिन सरपंच एवं जनपद पंचायत सदस्य के निर्वाचन परिणामों की घोषणा की जायेगी। जिला पंचायत सदस्यों एवं पंच पद के लिए परिणामों की घोषणा 5 अक्टूबर 2026 को प्रात: 10.30 बजे से की जायेगी।

    जिला पंचायत के 7, जनपद पंचायत के 28 और सरपंच के 110 पदों के लिये होगा उप निर्वाचन

    पंचायत उप निर्वाचन के तहत जिला पंचायत सदस्य के 7, जनपद पंचायत सदस्य के 28, सरपंच के 110 और 4090 पंच पद के लिये उप निर्वाचन होगा।

     

  • युवा विदेश गए तो भी बढ़ती रही पंजाब की वोटर लिस्ट, 2009 से 2024 तक 45 लाख से ज्यादा बढ़े मतदाता

    युवा विदेश गए तो भी बढ़ती रही पंजाब की वोटर लिस्ट, 2009 से 2024 तक 45 लाख से ज्यादा बढ़े मतदाता

    चंडीगढ़ 

     पंजाब में एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। राज्य के गांवों और शहरों से युवा बेहतर शिक्षा और रोजगार के लिए विदेश जा रहे हैं। इसके बावजूद पंजाब की मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है। यह स्थिति राज्य के बदलते सामाजिक ढांचे पर सवाल उठाती है।

    2009 से 2024 के बीच पंजाब में मतदाताओं की संख्या में करीब 45 लाख की वृद्धि हुई। यह संख्या 1.69 करोड़ से बढ़कर 2.14 करोड़ से अधिक हो गई। 2009 के लोकसभा चुनाव में 1,69,58,380 मतदाता थे। 2022 के विधानसभा चुनाव तक यह आंकड़ा 2,14,99,804 तक पहुंच गया।

    2024 के लोकसभा चुनाव में भी मतदाता आधार करीब 2.15 करोड़ रहा। हालांकि, इसी दौरान मतदान प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई। 2012 के विधानसभा चुनाव में 78.60 फीसदी मतदान हुआ था। यह 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर 62.80 फीसदी रह गया। मतदाताओं की संख्या बढ़ने के बावजूद मतदान का उत्साह कम हुआ है।

    विदेश जाने की होड़
    इसी अवधि में पंजाब के युवाओं में विदेश जाने की होड़ तेज हुई है। प्रवासन अध्ययनों के अनुसार कुल विदेश प्रवासन का 73.16 फीसदी हिस्सा 2016 के बाद का है। कनाडा 41.88 फीसदी के साथ पंजाबियों का सबसे पसंदीदा गंतव्य है। दुबई 16.25 फीसदी और ऑस्ट्रेलिया 9.63 फीसदी के साथ अन्य प्रमुख गंतव्य हैं। 2016 के आसपास 75 हजार विद्यार्थी सालाना कनाडा जाते थे, जो 2022 से 2024 के बीच बढ़कर 1.35 लाख से 1.50 लाख हो गए।

    उच्च शिक्षा पर असर और आर्थिक बोझ
    विदेश जाने की इस दौड़ का असर राज्य की उच्च शिक्षा पर भी पड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एक लाख से अधिक विद्यार्थियों की कमी आई है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अध्ययनों के अनुसार ग्रामीण परिवारों ने बच्चों को विदेश भेजने के लिए 14,342 करोड़ रुपये का कर्ज लिया।

    विदेश भेजने की लागत जुटाने के लिए 5,636 करोड़ रुपये की कृषि भूमि और घरेलू संपत्तियां बेची गईं। एक बच्चे को विदेश भेजना कई परिवारों के लिए लाखों रुपये की परियोजना बन चुका है। इसके बावजूद विदेश जाने की चाह लगातार बढ़ी है।

    मतदाताओं की संख्या में वृद्धि का कारण
    राजनीति के विशेषज्ञ प्रो कुणाल ने इस विरोधाभास पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि हजारों युवा विदेश जा रहे हैं, पर पंजाब की जनसांख्यिकी बदली है। चंडीगढ़ से सटे क्षेत्रों में हिमाचल और जेएंडके के लोगों की संख्या बढ़ी है।

    लुधियाना, फतेहगढ़ साहब और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे औद्योगिक शहरों में बाहरी प्रदेशों से लोग आकर बसे हैं। मतदाता सूची में नाम होना और चुनाव में मतदान करना अलग बातें हैं। विदेश में रहने वाले भारतीयों की मतदाता पात्रता कानूनी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।