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  • H1N1 का बढ़ा खतरा: लखनऊ में अब तक 13 केस, महिला की मौत के बाद परिवार की निगरानी शुरू

    H1N1 का बढ़ा खतरा: लखनऊ में अब तक 13 केस, महिला की मौत के बाद परिवार की निगरानी शुरू

    लखनऊ 
    राजधानी में स्वाइन फ्लू से महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे हो सकते हैं। लेकिन सांस लेने में तकलीफ बढ़ना गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय मरीज की तत्काल जांच और इलाज जरूरी है।

    सर्दी-जुकाम, बुखार या खांसी पर सावधानी बरतें
    सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि सर्दी-जुकाम, बुखार या खांसी होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी बनाने और संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। गंभीर लक्षण दिखने पर मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू मरीजों के जांच व इलाज के पुख्ता इंतजाम हैं। सिविल में 12 और बलरामपुर अस्पताल में छह बेड का अलग वार्ड बनाया गया है। इसमें गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा है। जरूरी दवाएं और जांच के इंतजाम हैं। उन्होंने कहा कि सभी अस्पताल स्वाइन फ्लू को अहतियात बरतें। स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीजों की जांच कराएं। घबराएं नहीं।

    एक माह में तीन लोगों में संक्रमण
    एक महीने में तीन लोग संक्रमण की जद में आ चुके हैं। जबकि जनवरी से अब तक लखनऊ में 13 लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें ज्यादातर मरीजों ने सर्दी-जुकाम और इससे जुड़े लक्षणों के बाद सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर से सलाह ली। डॉक्टरों की सलाह पर मरीजों की स्वाइन फ्लू की जांच कराई गई। एलाइजा जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन मरीजों की निगरानी के साथ लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मौसम में बदलाव के दौरान वायरल संक्रमण के मामले बढ़ते हैं। स्वाइन फ्लू भी संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस के साथ निकलने वाली संक्रमित बूंदों से फैल सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे ही नजर आते हैं। ऐसे में लगातार लक्षण बने रहने या स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

    महिला के परिवार की भी होगी निगरानी
    इंदिरानगर निवासी 50 वर्षीय महिला की बलरामपुर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत के बाद सीएमओ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम अब यह पता लगाएगी कि महिला इस बीच कहां-कहां गई, किन लोगों के सम्पर्क में आई। महिला के संपर्क में आए लोगों की निगरानी की जा सकती है। परिवार के अन्य सदस्यों को फिलहाल आइसोलेट रहने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने परिवारीजनों को जरूरी दवाएं उपलब्ध कराने के साथ एहतियात बरतने की सलाह दी है।

    संक्रमित सतह छूने से बीमारी फैलने का खतरा
    स्वाइन फ्लू को इन्फ्लुएंजा-ए (H1N1) संक्रमण भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस लेने से निकलने वाली बूंदों से फैलता है। संक्रमित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह छूने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है।

    लक्षण
    तेज बुखार और ठंड लगना

    खांसी और गले में खराश

    नाक बहना या जुकाम

    शरीर और मांसपेशियों में दर्द

    अत्यधिक कमजोरी और थकान

    सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना

    गंभीर स्थिति में ऑक्सीजन स्तर कम होना।

    बचाव
    खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकें

    हाथ साबुन से बार-बार धोएं

    संक्रमित से दूरी रखें

    लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें

    इस्तेमाल किए गए रुमाल या टिश्यू को सुरक्षित फेंकें

    सांस लेने में परेशानी या हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचें।

  • स्वाइन फ्लू से बचाव का असरदार उपाय? जानें कौन-सी वैक्सीन लगवाएं और कैसे करती है शरीर की सुरक्षा

    स्वाइन फ्लू से बचाव का असरदार उपाय? जानें कौन-सी वैक्सीन लगवाएं और कैसे करती है शरीर की सुरक्षा

       नई दिल्ली 
       दिल्ली ही नहीं अब कई दूसरे राज्यों में भी स्वाइन फ्लू के केस बढ़ रहे हैं. लोगों को तेज बुखार, खांसी, जुकाम, गले में दर्द जैसे लक्षण हो रहे हैं. कुछ मरीजों को सांस लेने में भी परेशानी हो रही है. बढ़ते मामलों के बीच स्वाइन फ्लू से बचाव करना बहुत जरूरी हो गया है. इससे बचाव कैसे करें? क्या स्वाइन फ्लू से बचने के लिए भी कोई वैक्सीन है? अगर है तो कौन सी, कब लगवानी चाहिए. इस बारे में डॉक्टर ने बताया है। 

    स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस का ही एक प्रकार है. फ्लू वैक्सीन से ही स्वाइन फ्लू समेत इन्फ्लूएंजा के दूसरे स्ट्रेन से बचाव हो जाता है. हर साल फ्लू की वैक्सीन को अपडेट किया जाता है. ऐसे में यह सभी स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी होती है. ये वैक्सीन आमतौर पर उस सीजन में फैलने वाले इन्फ्लूएंजा वायरस के प्रमुख स्ट्रेन को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं. इससे यह स्वाइन फ्लू से भी आसानी से बचाव कर सकती है। 

    कौन सी Vaccine लगवानी चाहिए, क्या है नाम? 

    दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि ने इस बारे में Aajtak.in को बताया है. डॉ. सुभाष कहते हैं कि स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए जो वैक्सीन लगती है उसका नाम सीजनल इन्फ्लूएंजा वैक्सीन है. इसको मॉडर्न क्वाड्रिवेलेंट फ्लू शॉट कहते हैं। 

    डॉ. सुभाष कहते हैं कि इन्फ्लूएंजा वायरस समय के साथ बदलते रहते हैं. यही वजह है कि फ्लू वैक्सीन को भी समय-समय पर अपडेट किया जाता है. आमतौर पर 6 महीने या उससे अधिक उम्र के लोग इसको लगवा सकते हैं. लेकिन अगर किसी को कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है तो उसको वैक्सीन लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। 

    कब लगवानी चाहिए वैक्सीन और कितने दिन में असर करती है?
    फ्लू वैक्सीन लगवाने के बाद शरीर को फ्लू के खिलाफ इम्यूनिटी बनाने में करीब दो हफ्ते लग सकते हैं. इसलिए यह सही समय है कि आप अपने डॉक्टर की सलाह लेकर ये टीका लगवा सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इस समय स्वाइन फ्लू के केस काफी बढ़ रहे हैं. ऐसे में समय पर टीका लगने के कई फायदे हैं. इससे स्वाइन फ्लू से होने वाले गंभीर लक्षणों से बचाव किया जा सकता है. ऐसे में हॉस्पिटल में भर्ती होने की आशंका भी कम होती है। 

    किन लोगों के लिए ज्यादा जरूरी है?
    हालांकि फ्लू किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में यह गंभीर रूप ले सकता है. इसलिए छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज, दिल या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को फ्लू से बचाव पर खास ध्यान देना चाहिए. कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में भी संक्रमण गंभीर होने की आशंका रहती है. ऐसे में इन लोगों को वैक्सीन जरूर लगवा लेनी चाहिए। 

    कितनी हो सकती है Vaccine की कीमत?
    भारत में फ्लू वैक्सीन की कीमत ब्रांड, वैक्सीन के प्रकार के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. प्राइवेट अस्पतालों में इसकी कीमत कुछ सौ रुपये से लेकर लगभग 1,000 से 2,000 रुपये या इससे अधिक तक हो सकती है. अगर आप ये वैक्सीन लगवाना चाहते हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह लेकर किसी हॉस्पिटल में जाकर इसको लगवा सकते हैं. इसका कोई नुकसान नहीं है, बल्कि ये इन्फ्लूएंजा से बचाने का ही काम करती है। 

  • बच्चों में बढ़ा इन्फ्लूएंजा-ए का खतरा, रिम्स ने संक्रमण रोकने के लिए की अलग व्यवस्था

    बच्चों में बढ़ा इन्फ्लूएंजा-ए का खतरा, रिम्स ने संक्रमण रोकने के लिए की अलग व्यवस्था

    रांची
    राजधानी में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने संक्रमित मरीजों के इलाज और संक्रमण से बचाव के लिए अलग व्यवस्था की है। स्वाइन फ्लू के मरीजों को सामान्य मरीजों से अलग रखने के लिए रिम्स के कॉटेज के ग्राउंड फ्लोर को आरक्षित किया गया है।

    यहां फिलहाल 10 बेड की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा आइसोलेशन वार्ड में भी स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए बेड रिजर्व रखे गए हैं। रिम्स के अपर अधीक्षक डॉ. शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि फिलहाल स्वाइन फ्लू का कोई मरीज भर्ती नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर संक्रमित मरीजों को निर्धारित स्थान पर भर्ती कर उपचार दिया जाएगा।

    मरीजों की जांच से लेकर दवा और अन्य आवश्यक उपचार की सुविधाएं रिम्स में उपलब्ध हैं। स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए काटेज के केवल ग्राउंड फ्लोर को आरक्षित किया गया है। पहले तले को पूर्व की तरह पेइंग वार्ड के रूप में संचालित किया जाएगा। इससे सामान्य मरीजों की सुविधा भी प्रभावित नहीं होगी।

    संक्रमण को फैलने से रोकने पर जोर
    स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीजों के लिए अलग स्थान निर्धारित करने का मुख्य उद्देश्य उपचार के साथ संक्रमण को अन्य मरीजों, स्वजन और अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों तक फैलने की आशंका को कम करना है। मरीजों की स्थिति के अनुसार उन्हें निगरानी और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

    मालूम हो कि राजधानी में पिछले कुछ दिनों में बच्चों में इन्फ्लूएंजा-ए यानी स्वाइन फ्लू के मामले बढ़े हैं। रिम्स और सदर अस्पताल के शिशु रोग ओपीडी में भी स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण वाले बच्चे पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने पहले से ही उपचार व्यवस्था को तैयार रखने का निर्णय लिया है।

  • बिलासपुर में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा, 7 मरीज मिलने पर विभाग अलर्ट

    बिलासपुर में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा, 7 मरीज मिलने पर विभाग अलर्ट

    बिलासपुर.

    छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्वाइन फ्लू (H1N1) के 7 मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। इनमें से 2 मरीजों का इलाज शहर के अपोलो हॉस्पिटल में जारी है, जबकि 5 मरीज स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं।

    अस्पताल में भर्ती मरीजों में एक 75 वर्षीय महिला भी शामिल हैं। उनकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है और उन्हें ICU से बाहर लाया गया है। वहीं एक 30 वर्षीय मरीज की रायपुर की ट्रैवल हिस्ट्री भी सामने आई है।

    अस्पतालों में बढ़ाई गई निगरानी
    स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण की निगरानी बढ़ा दी है। CIMS, जिला अस्पताल और PHC-CHC स्तर पर संदिग्ध मरीजों की पहचान और स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध लक्षण वाले मरीजों की जांच और उपचार की व्यवस्था पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है।

    5 मरीज स्वस्थ होकर लौटे घर
    बिलासपुर में सामने आए 7 संक्रमित मरीजों में से 5 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं। वहीं अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती 2 मरीजों का इलाज जारी है। इनमें 75 वर्षीय महिला की हालत में सुधार बताया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग फिलहाल मरीजों की स्थिति और संभावित संक्रमण के स्रोतों की निगरानी कर रहा है।

  • स्वाइन फ्लू को लेकर दिल्ली सरकार अलर्ट, अस्पतालों में अलग वार्ड और पर्याप्त बेड तैयार

    स्वाइन फ्लू को लेकर दिल्ली सरकार अलर्ट, अस्पतालों में अलग वार्ड और पर्याप्त बेड तैयार

    नई दिल्ली
     देश की राजधानी में स्वाइन फ्लू के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इस साल राष्ट्रीय राजधानी में इन्फ्लूएंजा के लगभग 3,000 मामले सामने आए हैं। इनमें 2308 मामले एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के हैं। उन्होंने स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

    शहर में मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों में वृद्धि के बीच पंकज सिंह ने स्वास्थ्य विभाग, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली छावनी बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इसी के बाद उन्होंने स्वाइन फ्लू पर जरूरी अपडेट दिए हैं।

    दिल्ली स्वास्थ्य मंत्री ने दिया अहम अपडेट
    पंकज सिंह ने कहा कि डॉक्टरों, कर्मचारियों या दवाओं की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई है। मैं आपको आश्वासन देता हूं कि कोई समस्या नहीं है, सब कुछ नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि नगर निकायों के साथ यह बैठक दिल्ली में एच1एन1 या मौसमी इन्फ्लूएंजा के साथ-साथ वेक्टर जनित बीमारियों को लेकर व्यवस्था और तैयारियों की समीक्षा के लिए की गई थी।

    पंकज सिंह बोले- घबराने की जरूरत नहीं
    स्वास्थ्य मंत्री ने आगे ये भी कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है और मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर अस्पताल में अलग वार्ड बनाए गए हैं। अगर कोई मरीज बिस्तर नहीं मिलने की शिकायत करता है, तो अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली में लगभग 3,000 इन्फ्लूएंजा मामलों में से 2,308 मामले एच1एन1 के हैं, जबकि शेष मामले इन्फ्लूएंजा के अन्य प्रकार के हैं।

    स्वाइन फ्लू को लेकर सरकार की एडवाइजरी

    • डॉक्टरों के अनुसार, एच1एन1 संक्रमण को स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाता है। इसमें आमतौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान के लक्षण होते हैं।
    • स्वाइन फ्लू के मामलों के चलते हाल ही में दिल्ली सरकार ने पब्लिक हेल्थ एडवाइजरी जारी की और लोगों से सांस से जुड़ी बीमारियों से बचने के लिए बुनियादी सावधानियां बरतने को कहा।
    • अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी कि वे भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें, बार-बार हाथ धोएं, सांस की बीमारी वाले लोगों के अधिक करीब जाने से बचें और अगर फ्लू जैसे लक्षण गंभीर हो जाएं या लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर को दिखाएं।
    • इससे पहले, दिल्ली में शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में दिल्ली की स्वास्थ्य तैयारियों की समीक्षा की गई।
    • बैठक में इन्फ्लूएंजा एच1एन1, डेंगू और मलेरिया की स्थिति के साथ-साथ अस्पतालों की तैयारियों और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर विस्तृत चर्चा हुई
    • दिल्ली के स्वास्थ्य परिवार कल्याण पंकज कुमार सिंह ने बताया कि अस्पतालों में बेड, डॉक्टर, दवाइयों और जरूरी मेडिकल सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है

     

  • नया स्ट्रेन नहीं फिर भी Swine Flu के केस बढ़े, इम्यूनिटी और बदलते मौसम का कितना असर?

    नया स्ट्रेन नहीं फिर भी Swine Flu के केस बढ़े, इम्यूनिटी और बदलते मौसम का कितना असर?

    नई दिल्ली
    राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू (HINI) के केस बढ़ने लगे हैं. कर्नाटक में 4 हजार से ज्यादा केस आ चुके हैं. दिल्ली में 1700 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं. लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए आशंका जताई जा रही थी कि क्या इस बार स्वाइन फ्लू का कोई नया स्ट्रेन आ गया है? लेकिन इस मामले में ICMR ने स्पष्ट कहा है कि भारत में H1N1 (स्वाइन फ्लू) का कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है। 

    पुराना स्ट्रेन ही लोगों को संक्रमित कर रहा है. अब सवाल उठता है कि जब कोई नया स्ट्रेन नहीं है तो भी फिर केस क्यों बढ़ रहे हैं.कब तक ये केस कम होने की उम्मीद है? स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने का एक बड़ा कारण मौसम में बदलाव तो है ही,लेकिन दूसरी वजह शरीर की इम्यूनिटी भी है. इसको समझने के लिए आपको साल 2009 में जाना होगा। 

    मई 2009 में स्वाइन फ्लू का देश में पहला मामला सामने आया था. इसके बाद सर्दियों के मौसम (दिसंबर 2009 से मार्च 2010) में फिर केस बढ़ने लगे. तब देश में बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हुए थे. उसके बाद धीरे- धीरे केस कम होने लगे थे.  फिर 2014 और 2015 के बीच  देश में स्वाइन फ्लू का आउटब्रेक हुआ और हजारों लोग संक्रमित हुए थे. फिर 2019 में बहुत केस बढ़े,उसके बाद अब साल 2026 में अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। 

    हर कुछ सालों में क्यों बढ़ जाते हैं केस, इम्यूनिटी का क्या है रोल
    सफदरजंग अस्पताल में कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ जुगल किशोर ने इस बारे में बताया है. डॉ किशोर कहते हैं कि भारत में हर कुछ सालों के बाद स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ते है. यह पैटर्न बताता है कि H1N1 वायरस कभी खत्म नहीं हुआ था.यह लोगों के बीच मौजूद रहा और समय-समय पर इसके मामले सामने आते रहे. डॉ किशोर बताते हैं कि जब भी किसी वायरस से लोग बड़ी संख्या में संक्रमित हो जाते हैं तो उसके खिलाफ  इम्यूनिटी बन जाती है. यह सालों तक रहती है. इस वजह से फिर केस बढ़ते नहीं हैं. थोड़े बहुत मामले आते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में केस नहीं रिपोर्ट होते हैं. लेकिन फिर जब कुल सालों में धीरे- धीरे शरीर में  इम्यूनिटी कम होने लगती है तो केस फिर से बढ़ने लगते हैं. ऐसा हर कुछ सालों में होता ही रहता है. यही कारण है कि इस बार फिर से स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं। 

    इसको ऐसे समझें, मान लीजिए किसी इलाके में पहले बहुत से लोगों को स्वाइन फ्लू हो चुका था, उनके शरीर में वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी बन गई. ऐसे में अगले कुछ साल तक संक्रमण कम रहा और केस नहीं बढ़े, लेकिन समय बीतने के साथ लोगों में उस वायरस से लड़ने की ताकत कम होती रही, जिससेफिर से केस बढ़ने लगे.डॉ. किशोर कहते हैं कि कोई भी वायरस हमेशा के लिए खत्म नहीं होता है. जब इम्यूनिटी कम होती तो वायरस लोगों को संक्रमित करना शुरू कर देता,जिससे केस बढ़ने लगते हैं। 
     
    मौसम भी करता है खेल
    बारिश और मौसम में बदलाव के समय फ्लू के मामले बढ़ सकते हैं. कभी गर्मी, कभी बारिश और फिर उमस. ऐसे मौसम में वायरस को फैलने का मौका मिल सकता है. इसके अलावा लोग ऑफिस, स्कूल, मेट्रो और दूसरे बंद स्थानों पर एक-दूसरे के काफी करीब रहते हैं. अगर किसी को फ्लू है, तो खांसने या छींकने के दौरान निकले छोटे कणों से संक्रमण दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है। 

    केस कब तक कम होने की उम्मीद
    डॉ किशोर कहते हैं कि जब तक पूरे समुदाय में पर्याप्त इम्यूनिटी नहीं होती, तब तक मामले आते रहेंगे. इसका मतलब यह है कि जब अधिकतर आबादी संक्रमित हो जाएगी और लोगों में स्वाइन फ्लू के खिलाफ इम्यूनिटी बन जाएगी तो केस अपने आप कम होने लगेंगे. वायरस के मामलों के कम होने का यही पैटर्न भी है, हालांकि इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है. अधिकतर लोगों में हल्के ही लक्षण ही हैं और होंगे भी. स्वाइन फ्लू किसी महामारी का रूप नहीं लेगा. लोगों को यह भी सलाह है कि डॉक्टर से सलाह लेकर फ्लू से बचाव की वैक्सीन भी लगवा लें।  

  • दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 1912 केस, अस्पतालों में बेड रिजर्व; जानें डॉक्टरों की सलाह

    दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 1912 केस, अस्पतालों में बेड रिजर्व; जानें डॉक्टरों की सलाह

    नई दिल्ली
     स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकारी अस्पतालों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अस्पतालों में डिजास्टर वॉर्ड से लेकर आइसोलेशन वॉर्ड तक जरूरत के मुताबिक बेड रिजर्व कर लिए गए हैं। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के मरीजों की भीड़ नहीं बढ़ी है और घबराने की जरूरत नहीं। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि H1N1 में आयुर्वेदिक दवाएं भी कारगर होती हैं। नजफगढ़ स्थित चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान में फीवर क्लिनिक भी शुरू कर दिया गया है।

    डॉ हेडगेवार अस्पताल में मरीजों के लिए तैयार किए गए चार वार्ड
    पूर्वी दिल्ली स्थित डॉ हेडगेवार अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए चार बेड का आइसोलेशन वॉर्ड तैयार किया गया है। अस्पताल में डॉक्टर से लेकर कर्मचारियों की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। हालांकि, अभी अस्पताल में स्वाइन फ्लू का एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। वहीं, संजय गांधी सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में भी 56 बेड का डिजास्टर वॉर्ड तैयार किया गया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, दवा से लेकर टेमीफ्लू दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। फीवर के संदिग्ध मरीजों की जांच कर उनपर नजर रखी जा रही है।

    जीटीबी अस्पताल के डॉक्टर ने की अपील
    जीटीबी अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण ने बताया कि अस्पताल में तैयारी पूरी हैं, लेकिन अभी कोई स्वाइन फ्लू का मरीज नहीं आया है। हालांकि, संदिग्ध मरीजों की जांच जरूर कराई जा रही है। उन्होंने अपील की है कि अभी पैनिक होने की जरूरत नहीं। भीड़भाड़ वाली जगह पर बेवजह जाने से बचें और मास्क जरूर लगाएं।

    CBPACS में फीवर क्लिनिक शुरू
    चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान (CBPACS) में H1N1 और वायरल बुखार के मरीजों के लिए विशेष फीवर क्लिनिक के जरिए आयुर्वेदिक इलाज और विशेषज्ञों की सलाह दी जा रही है। संस्थान के निदेशक डॉ एमबी गौर ने बताया कि HIN1 में आमतौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण होते है। कुछ मरीजों में बीमारी गंभीर होने पर सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। आयुर्वेद में मरीज के लक्षण और उसकी स्थिति को देखते हुए इलाज किया जाता है।

    वायरल फीवर में काढ़ा भी मददगार
    ऑल इंडिया डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ आईएसएम के अध्यक्ष डॉ. आरपी. पाराशर के मुताबिक, H1N1 में अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, ठंड लगना, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मरीजों में उल्टी और दस्त की शिकायत भी हो सकती है। आमतौर पर स्वस्थ लोग कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से हार्ट, लंग्स, डायबिटीज या किडनी की बीमारी वाले लोगों में जटिलता का खतरा अधिक रहता है।

    विशेषज्ञ की सलाह से करना बेहतर
    डॉ. पाराशर के मुताबिक, आयुर्वेद में तुलसी, अदरक, लौंग, हल्दी, पिप्पली, गिलोय, दालचीनी और काली मिर्च जैसे पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। इनसे तैयार काढ़ा या अन्य घरेलू तैयारियां लक्षणों के दौरान राहत देने में मदद कर सकती है। हालाकि किसी भी आयुर्वेदिक दवा या काढ़े का इस्तेमाल व्यक्ति की स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह से करना बेहतर है।

    रखें ध्यान…

    • दिल्ली के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों से लेकर कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग दी गई है
    • अभी अस्पताल में स्वाइन फ्लू का कोई मरीज भर्ती नहीं।
    • 21 अगस्त को 135 नए केस मिलने के बाद दिल्ली में HIN1 के कुल मरीजों का आंकड़ा 1912 पहुंचा।
    • अब तक दिल्ली से बाहर के 348 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है।
  • स्वाइन फ्लू की तेज रफ्तार से अलर्ट, बच्चे-बुजुर्ग समेत डॉक्टर भी चपेट में

    स्वाइन फ्लू की तेज रफ्तार से अलर्ट, बच्चे-बुजुर्ग समेत डॉक्टर भी चपेट में

    नई दिल्ली
    राजधानी दिल्ली में पिछले 24 घंटे में 114 नए मामले की पुष्टि हुई है। अब तक कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 1777 तक पहुंच चुकी है, जो पिछले साल आए 229 मामलों की तुलना में सात से आठ गुना ज्यादा है। डॉक्टरों का कहना है कि स्वाइन फ्लू का स्ट्रेन हर कुछ सालों में बदलता रहता है, जिससे इम्यूनिटी कम हो जाती है। जिस तेजी से एसी का इस्तेमाल बढ़ा है, उससे संक्रमण को फैलने में भी मदद मिल रही है। पहले यह संक्रमण सर्दी में ज्यादा फैलता था।

    अब इसलिए, कोविड की तरह यह भी वायरल इन्फेक्शन है और इसमें भी हैंड हाइजीन और मास्क बचाव के बेहतर उपाय हैं। एम्स के इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ. नीरज निश्चल ने बताया कि मॉनसून के दौरान मौसम में लगातार बदलाव, घरों और बंद जगहों पर लोगों की अधिक भीड़, एसी का ज्यादा इस्तेमाल और हवा का ठीक से बाहर न निकलना इन्फ्लुएन्जा के संक्रमण को बढ़ावा दे सकता है।

    हर उम्र के लोग हो रहे संक्रमित
    इस साल स्वाइन फ्लू का संक्रमण छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी को संक्रमित कर रहा है। आम लोगों के साथ सफदरजंग और एम्स के अलावा दूसरे हॉस्पिटल के डॉक्टर और स्टाफ भी संक्रमित हो रहे हैं।

    ज्यादातर मामले स्वाइन फ्लू के
    मैक्स हॉस्पिटल के डॉ. रोमेल टिक्कू ने ने कहा कि अभी फीवर के ज्यादा मरीजों में स्वाइन फ्लू ही मिल रहा है। जिन लोगों में तीन से चार दिनों तक फीवर रह जाता है, उन्हें जांच करानी चाहिए। अभी मामले में तेजी तो बहुत है, लेकिन रिकवरी बेहतर हो रही है।

    पहले से बीमार लोगों में ऑक्सिजन की कमीः बीएलके सुपर
    स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के रेस्पिरेटरी विभाग के एक्सपर्ट डॉक्टर संदीप नय्यर ने कहा कि लगातार ओपीडी में मरीज आ रहे हैं, वॉर्ड में हैं, आईसीयू में हैं, वेंटिलेटर पर कुछ मरीज है। जिनकी इम्यूनिटी कम है, उनमें बीमारी सीवियर हो रही है।

    किनके लिए खतरनाकः आरएमएल के सीनियर एक्सपर्ट डॉ.
    सुभाष गिरी ने बताया कि यह वायरस कई बार निमोनिया कर देता है। जो लंग्स के मरीज हैं, हार्ट की बीमारी है, लिवर खराब है, किडनी या अन्य अंग का ट्रांसप्लांट हुआ है, इम्यूनिटी कमजोर है, स्टेरॉयड पर है, डायबिटीज, कैंसर है, उनमें संक्रमण खतरनाक हो जाता है।