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  • जबलपुर में स्वाइन फ्लू का खौफ, निजी अस्पतालों की वसूली पर सवाल; सभी 24 संदिग्ध निगेटिव

    जबलपुर में स्वाइन फ्लू का खौफ, निजी अस्पतालों की वसूली पर सवाल; सभी 24 संदिग्ध निगेटिव

    जबलपुर.

    जिले में सामान्य सर्दी, खांसी और फेफड़ों के संक्रमण से जूझ रहे मरीजों को स्वाइन फ्लू का खौफ दिखाकर निजी अस्पतालों द्वारा मनमाने इलाज और अवैध वसूली की लगातार आ रही शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी के अनुसार जिले में स्वाइन फ्लू की आशंका पर करीब 24 संदिग्ध लोगों की पड़ताल कराई गई थी, जिनमें निजी नर्सिंग होम से रेफर होकर आए मरीज भी शामिल थे। विभाग ने इन सभी 24 व्यक्तियों के नमूने नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में भेजे थे, जहां जांच के बाद प्रत्येक व्यक्ति का परीक्षण पूरी तरह निगेटिव निकला। सीएमएचओ ने साफ कर दिया कि किसी भी निजी अस्पताल अथवा लैब को इस संक्रामक बीमारी की पुष्टि करने की कानूनी मान्यता नहीं है।

  • पटना में तेजी से बढ़े टाइफाइड के मरीज, PMCH-IGIMS समेत अस्पतालों में बढ़ी भीड़

    पटना में तेजी से बढ़े टाइफाइड के मरीज, PMCH-IGIMS समेत अस्पतालों में बढ़ी भीड़

    पटना
     बारिश और बदलते मौसम के बीच राजधानी में बुखार और संक्रमण के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वाइन फ्लू के साथ टायफाइड और वायरल संक्रमण का प्रकोप भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना 50 से अधिक मरीज टायफाइड जैसे लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं।

    मरीजों में तेज बुखार, खांसी, कमजोरी और चक्कर के साथ गले में दर्द, सूखी खांसी और जोड़ों में दर्द की शिकायत प्रमुख रूप से सामने आ रही है।

    पिछले एक सप्ताह में 300 से अधिक मरीज
    पीएमसीएच, आईजीआईएमएस , एनएमसीएच, एम्स पटना और न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल की ओपीडी में पिछले एक सप्ताह में 300 से अधिक मरीजों में टाइफाइड की पुष्टि हुई है। इनमें पीएमसीएच में 98, आईजीआईएमएस में 92, एनएमसीएच में 45, एम्स में 58 और न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल में सात मरीज शामिल हैं।

    अस्पतालों के अनुसार, कुछ समय पहले तक यह संख्या 100 से भी कम थी। कंकड़बाग, बुद्धा कालोनी, राजीव नगर, बोरिंग रोड, गर्दनीबाग, दानापुर, महेंद्रू और नेपाली नगर समेत कई इलाकों में जलजमाव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की शिकायत है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर नियमित फॉगिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं हो रहा है। टूटी नालियां, जमा पानी, तालाबों के आसपास उगी घास और गंदगी मच्छरों के पनपने का कारण बन रही है।

    वायरल व डेंगू के साथ स्वाइन फ्लू की भी जांच
    पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह और आईजीआईएमएस के प्रवक्ता प्रो. डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने बताया कि टायफाइड और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। मरीजों के लक्षणों के आधार पर आवश्यक जांच कराई जा रही है। मौसम में बदलाव को देखते हुए स्वाइन फ्लू से मिलते-जुलते लक्षण वाले मरीजों के सैंपल लेने का निर्देश दिया गया है। वायरल बुखार और डेंगू के साथ स्वाइन फ्लू की भी जांच कराई जा रही है।

    सैंपल पटना सिटी के अगमकुआं स्थित आरएमआरआई सेंटर भेजे जा रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों को प्री-जांच और आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार, बारिश और जलजमाव के कारण बैक्टीरिया तथा मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में लगातार बुखार, खांसी या शरीर में दर्द रहने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है

    टाइफाइड से बचाव के लिए रखें सावधानी

    • साफ और उबला हुआ या सुरक्षित पानी ही पिएं।
    • खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें।
    • खाना खाने और शौचालय के इस्तेमाल के बाद हाथ अच्छी तरह धोएं।
    • फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें।
    • बुखार रहने पर खुद से एंटीबायोटिक दवा न लें।
    • चिकित्सक की सलाह पर जांच और उपचार कराएं।
    • घर और आसपास पानी जमा न होने दें, ताकि मच्छरों का प्रजनन नहीं हो सके।

     

  • लुधियाना-पटियाला में स्वाइन फ्लू का असर, पंजाब में 347 मरीज सामने आए

    लुधियाना-पटियाला में स्वाइन फ्लू का असर, पंजाब में 347 मरीज सामने आए

    चंडीगढ़.

    पंजाब में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) यानी स्वाइन फ्लू के मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार, एक जनवरी से अब तक प्रदेश में कैटेगरी-सी के 1,926 संदिग्ध मामले सामने आए हैं।

    इनमें 347 मरीजों की रिपोर्ट पाजिटिव आई है। स्वाइन फ्लू से लुधियाना और जालंधर में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। जिलेवार आंकड़ों में लुधियाना सबसे आगे है। यहां कैटेगरी-सी के 746 संदिग्ध मामले मिले हैं, जबकि 95 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। संदिग्ध मामलों में मोहाली 135 और जालंधर 115 मामलों के साथ अगले स्थान पर हैं। पटियाला में 110, बठिंडा में 89 और होशियारपुर में 80 संदिग्ध मामले सामने आए हैं।

  • स्वाइन फ्लू से हिसार में तीसरी महिला की मौत, स्वास्थ्य विभाग कर रहा रिपोर्ट का ऑडिट

    स्वाइन फ्लू से हिसार में तीसरी महिला की मौत, स्वास्थ्य विभाग कर रहा रिपोर्ट का ऑडिट

    हिसार
     स्वाइन फ्लू के कारण एक और महिला मरीज की मौत हो गई। जिले में स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या तीन पर पहुंच गई है। मरने वाली तीनों महिलाएं हैं। मंगलवार को चार और स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आए।

    इससे जिले में स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों की संख्या 70 पर पहुंच गई है। हालांकि अभी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से मृतक महिला की रिपोर्ट का आडिट किया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी और डिप्टी सीएमओ डॉ. सुभाष खतरेजा ने बताया कि इस साल अभी तक 70 मरीज स्वाइन फ्लू से ग्रस्त मिले हैं। अभी तक तीन महिला मरीजों की मौत हो चुकी है। दो महिला मरीजों की पुष्टि हो चुकी है, एक महिला मरीज की फाइल अभी आडिट हो रही है।

    स्वाइन फ्लू ग्रस्त मरीज और उनके स्वजन को टैमीफ्लू दवा दी जा रही है। खांसी, जुकाम और बुखार होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए और नागरिक अस्पताल में सैंपल जांच के लिए देना चाहिए। अस्पताल परिसर में स्वाइन फ्लू की निशुल्क जांच की जाती है। लक्षण दिखाई देने पर मुंह पर मास्क लगाकर रखना चाहिए और भीड़भाड़ वाले एरिया में नहीं जाना चाहिए। स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य बुखार की तरह ही होते हैं।

  • करनाल में स्वाइन फ्लू की रफ्तार तेज, अस्पतालों में बनाए गए दो आइसोलेशन वार्ड

    करनाल में स्वाइन फ्लू की रफ्तार तेज, अस्पतालों में बनाए गए दो आइसोलेशन वार्ड

    करनाल
     बदलते मौसम के असर के बीच करनाल जिले में लगातार स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सिर्फ सात दिन में जिले में स्वाइन फ्लू के नौ नए मामले सामने आए हैं।

    6 सितंबर तक मरीजों की संख्या 27 थी, जो 13 सितंबर तक बढ़कर 36 हो गई। ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सिर्फ एक हफ्ते में मरीजों की संख्या में करीब 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

    राहत की बात यह है कि अब तक किसी मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ी है। मगर अस्पतालों के बाहर मरीजों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। पिछले 10 दिनों में 6 और पिछले एक महीने में 15 मामले सामने आए हैं।

    संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज एवं जिला नागरिक अस्पताल में दो आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए हैं।

    लक्षण दिखें तो न बरतें लापरवाही
    स्वास्थ्य विभाग की ओर से संक्रमित और संदिग्ध मरीजों की लगातार निगरानी की जा रही है। उप सिविल सर्जन (मलेरिया) डा. अनु शर्मा ने लोगों से फ्लू जैसे लक्षणों को हल्के में न लेने की अपील की है।

    सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने को कहा गया है। उन्होंने खांसते और छींकते समय नाक-मुंह ढकने, नियमित रूप से हाथ धोने और लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी।

    बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को छूने से भी बचने को
    कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार स्वाइन फ्लू मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार, नाक बहना और भूख कम लगना इसके सामान्य लक्षण हैं।

    समय पर चिकित्सकीय सलाह और सावधानी से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार स्वाइन फ्लू मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है।

    सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार, नाक बहना और भूख कम लगना इसके सामान्य लक्षण हैं। समय पर चिकित्सकीय सलाह और सावधानी से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है।

     

  • स्वाइन फ्लू की बढ़ती रफ्तार से लखनऊ में चिंता, 63 एक्टिव केस; जानें गंभीर लक्षण

    स्वाइन फ्लू की बढ़ती रफ्तार से लखनऊ में चिंता, 63 एक्टिव केस; जानें गंभीर लक्षण

    लखनऊ
    राजधानी में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। पिछले दो दिनों में ही 24 मरीजों की स्वाइन फ्लू रिपोर्ट पाजिटिव आई है। शुक्रवार को 13 और शनिवार को 11 नए मरीज सामने आए हैं। इसके साथ ही लखनऊ में सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 63 हो गई है। तेजी से बढ़ रहे मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और उपचार की व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

    सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि 20 रोगी अस्पतालों में भर्ती थे, जिनमें 17 स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। एक पहले से भर्ती था, जबकि दो मरीज शनिवार को भर्ती कराए गए। हालांकि, तीन रोगियों की तबीयत स्थिर है। कोई गंभीर लक्षण नहीं हैं। लगातार नए मरीज सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध और संक्रमित मरीजों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

    गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज न करें
    मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने लोगों को स्वाइन फ्लू के लक्षणों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज बुखार के साथ सांस फूलना, सीने में दर्द, रक्तचाप कम होना, बेहोशी, नाखून अथवा होंठ नीले पड़ना और बलगम में खून आना गंभीर लक्षण माने जाते हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल जांच और इलाज की जरूरत है। बच्चों में लगातार तेज बुखार, अत्यधिक सुस्ती, खाना-पीना बंद कर देना, झटके आना अथवा सांस लेने में परेशानी भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।

    उन्होंने स्पष्ट किया है कि सामान्य जुकाम, गले में खराश, खांसी और बुखार होने पर हर मरीज को एच1एन1 की जांच कराने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे मरीज चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लें, पर्याप्त आराम करें, मास्क का प्रयोग करें और ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करें। बिना डाक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेने से बचें। शनिवार को मिले 11 मरीजों में एक लोकबंधु अस्पताल और एक एसजीपीजीआइ में भर्ती है।

  • स्वाइन फ्लू से पंजाब में मचा हड़कंप, 220 मरीज सामने आए; जालंधर में बुजुर्ग की संदिग्ध मौत

    स्वाइन फ्लू से पंजाब में मचा हड़कंप, 220 मरीज सामने आए; जालंधर में बुजुर्ग की संदिग्ध मौत

     जालंधर

    पंजाब में इस साल स्वाइन फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी के बीच जालंधर में सीजन की पहली संदिग्ध स्वाइन फ्लू मौत दर्ज की गई है. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि 85 वर्षीय मरीज की मौत का वास्तविक कारण अभी पूरी तरह तय नहीं हुआ है. विभाग के अनुसार, अंतिम निष्कर्ष औपचारिक स्वास्थ्य ऑडिट के बाद ही सामने आएगा। 

    राज्य में अब तक 220 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है. इनमें सबसे अधिक मामले लुधियाना और एसएएस नगर (मोहाली) में सामने आए हैं. अगस्त से मामलों में तेजी देखी जा रही है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाने के साथ अस्पतालों में फ्लू कॉर्नर और आइसोलेशन यूनिट स्थापित किए हैं। 

    जालंधर के जमशेर खास के ताजपुर निवासी मूल राज (85) को सांस लेने में तकलीफ के बाद सिविल अस्पताल, जालंधर में भर्ती कराया गया था. उन्हें पहले से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) की समस्या थी। 

    इलाज के दौरान मौत
    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मूल राज का 2 सितंबर को GMC अमृतसर में H1N1 टेस्ट पॉजिटिव आया था. बाद में इलाज के दौरान शुक्रवार को सिविल अस्पताल, जालंधर में उनकी मौत हो गई. हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक मरीज पहले से COPD समेत अन्य बीमारियों से जूझ रहे थे और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर थी. ऐसे में केवल H1N1 इंफेक्शन को मौत का कारण मानना फिलहाल उचित नहीं होगा। 

    स्वास्थ्य विभाग ने कहा- ऑडिट के बाद स्पष्ट होगा मौत का कारण
    स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मरीज इम्यूनो-कम्प्रोमाइज्ड थे और उन्हें पहले से कई सह-रुग्णताएं (co-morbidities) थीं. इसलिए उनकी मौत का वास्तविक कारण H1N1 था या पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं, इसका निष्कर्ष औपचारिक स्वास्थ्य ऑडिट के बाद ही निकाला जाएगा। 

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने भी शुक्रवार को कहा कि H1N1 की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. उन्होंने कहा कि इस वर्ष सामने आया स्ट्रेन अभी तक नया या म्यूटेटेड स्ट्रेन नहीं पाया गया है. मंत्री के मुताबिक, जालंधर में 85 वर्षीय मरीज की मौत की वजह स्वाइन फ्लू होने की संभावना कम है। 

    पंजाब में 220 पॉजिटिव मामले, लुधियाना सबसे आगे
    स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अब तक 1,513 संदिग्ध मरीजों की स्वाइन फ्लू के लिए जांच की गई है. इनमें से 220 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. अकेले शुक्रवार को 14 नए मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई। 

    जिलेवार आंकड़ों में-

    लुधियाना — 72 मामले
    एसएएस नगर (मोहाली) — 36 मामले
    पटियाला — 16 मामले
    मोगा — 11 मामले
    जालंधर — 10 मामले
    रोपड़ — 9 मामले

    फाजिल्का — 1 मामला

    बाकी जिलों में संक्रमित मरीजों की संख्या 2 से 8 के बीच है.

    अगस्त से बढ़ने लगे मामले
    स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पंजाब में स्वाइन फ्लू के मामलों में हालिया बढ़ोतरी अगस्त से देखने को मिल रही है. मामलों में वृद्धि को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में निगरानी और जांच व्यवस्था को मजबूत किया है। 

    प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में फ्लू कॉर्नर और आइसोलेशन यूनिट स्थापित किए गए हैं, ताकि संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान, जांच और आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जा सके। 

    चार जिलों में सबसे ज्यादा असर
    आंकड़ों के मुताबिक, लुधियाना और एसएएस नगर राज्य में सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं. इनके बाद पटियाला, मोगा और जालंधर में भी मामले सामने आए हैं. हालांकि, राज्य के कई अन्य जिलों में संक्रमण के मामले अभी एकल अंक में हैं. स्वास्थ्य विभाग H1N1 की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और लोगों से लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सा सहायता लेने की अपील की जा रही है। 

    स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ी, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं
    स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, फिलहाल इस साल सामने आए H1N1 स्ट्रेन में किसी नए या म्यूटेटेड स्वरूप की पुष्टि नहीं हुई है. जालंधर में हुई मौत को भी स्वास्थ्य विभाग ने अभी “संदिग्ध स्वाइन फ्लू मृत्यु” के तौर पर दर्ज किया है. ऐसे में राज्य में मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और अस्पतालों की तैयारी महत्वपूर्ण हो गई है, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर मृतक की मौत को सीधे स्वाइन फ्लू से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी। 

  • CG में बढ़े स्वाइन फ्लू के केस, 152 संक्रमित और कोरोना के 2 मामले; स्वास्थ्य मंत्री ने दी राहत

    CG में बढ़े स्वाइन फ्लू के केस, 152 संक्रमित और कोरोना के 2 मामले; स्वास्थ्य मंत्री ने दी राहत

    रायपुर.

    प्रदेश में स्वाइन फ्लू (इन्फ्लूएंजा-ए एच1एन1) का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के 31 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अब तक प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 152 मरीज मिल चुके हैं। इनमें 38 मरीज वर्तमान में सक्रिय हैं, जिनका उपचार चल रहा है।

    रायपुर संक्रमण के मामले में सबसे आगे है। जिले में अब तक 66 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है, जबकि आठ मरीज अभी सक्रिय हैं। रायपुर के बाद दुर्ग और बिलासपुर में संक्रमण का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। दोनों जिलों में अब तक 17-17 मरीज मिल चुके हैं। दुर्ग में आठ और बिलासपुर में छह मरीज वर्तमान में सक्रिय हैं।

    11 जिलों में एक भी मरीज नहीं
    स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बलरामपुर, बीजापुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोंडागांव, कोरिया, मुंगेली, नारायणपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और सुकमा में अब तक स्वाइन फ्लू का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।

    रायगढ़-कोरबा में भी सक्रिय मरीज
    रायगढ़ में 10 मरीज मिले हैं, जिनमें तीन सक्रिय हैं। कोरबा में नौ में से चार और धमतरी में नौ में से एक मरीज का उपचार चल रहा है। इसके अलावा बस्तर और बेमेतरा में तीन-तीन तथा कांकेर, राजनांदगांव, जांजगीर-चांपा और सरगुजा में दो-दो मरीज मिले हैं। बालोद, बलौदाबाजार, महासमुंद और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में एक-एक सक्रिय मरीज दर्ज हैं।

    इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मौसम में बदलाव के दौरान वायरल संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे हो सकते हैं। सर्दी, खांसी, तेज बुखार, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी होने पर जांच कराना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच, उपचार और आइसोलेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    पैनिक होने की जरूरत नहीं- स्वास्थ्य मंत्री
    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पैनिक होने की जरूरत नहीं है। कोरोना से निपटने के लिए पहले लगे डोज़ेस की वजह से शरीर में पर्याप्त इम्यून पॉवर बनी हुई है। जिला अस्पताल मेकाहारा में जांच की पूरी व्यवस्था की गई है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि स्वाइन फ्लू या कोरोना के लक्षण नजर आते ही किसी तरह की लापरवाही न करें और तत्काल अस्पताल पहुंचकर जांच और इलाज करवाएं।

  • रिम्स में डॉक्टर समेत 8 की स्वाइन फ्लू रिपोर्ट पॉजिटिव, जिलों में निगरानी बढ़ी

    रिम्स में डॉक्टर समेत 8 की स्वाइन फ्लू रिपोर्ट पॉजिटिव, जिलों में निगरानी बढ़ी

    रांची
     झारखंड में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के बढ़ते संक्रमण ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए 11 संदिग्ध मरीजों के नमूनों की जांच की गई। इनमें आठ की रिपोर्ट पाजिटिव मिली है।

    संक्रमित मरीजों में रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एक चिकित्सक भी शामिल हैं। इसके बाद अस्पताल में संक्रमण से बचाव को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

    मौसम में बदलाव के साथ राजधानी में फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, बदन दर्द और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण वाले मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं।

    चिकित्सकों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों के आधार पर उपचार किया जाता है। हर मरीज की एच1एन1 जांच आवश्यक नहीं होती। गंभीर लक्षण, जोखिम वाले मरीज या चिकित्सकीय रूप से संदिग्ध मामलों में ही जांच की जरूरत होती है।

    अस्पतालों में 10-10 बेड रखने का निर्देश :
    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सभी जिलों में निगरानी बढ़ाने और अस्पतालों को पूरी तरह तैयार रखने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी सिविल सर्जनों और मेडिकल कालेजों को पत्र भेजकर संदिग्ध मरीजों की जल्द पहचान, आवश्यक जांच और उपचार सुनिश्चित करने को कहा है।

    सभी सदर अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में 10-10 अतिरिक्त बेड आरक्षित रखने तथा जरूरत पड़ने पर अलग वार्ड में मरीजों के उपचार की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। अस्पतालों को पर्याप्त मात्रा में आवश्यक दवाएं, आक्सीजन और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध रखने को भी कहा गया है। रिम्स में स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए पहले से अलग व्यवस्था की गई है।

  • स्वाइन फ्लू से महिला की मौत के बाद बलरामपुर अस्पताल अलर्ट, अलग बनाया गया आइसोलेशन वार्ड

    स्वाइन फ्लू से महिला की मौत के बाद बलरामपुर अस्पताल अलर्ट, अलग बनाया गया आइसोलेशन वार्ड

    लखनऊ
    स्वाइन फ्लू संक्रमण से उत्तर प्रदेश में पहली मौत के बाद से लोग दहशत में हैं। लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में भर्ती महिला की स्वाइन फ्लू के कारण मौत के बाद उसके इलाज में लगे चिकित्सकों की भी जांच कराई जा रही है।

    बलरामपुर अस्पताल में स्वाइन फ्लू के संक्रमण से महिला की मौत के बाद उनके इलाज में शामिल 17 डाक्टरों और कर्मचारियों के नमूने भी जांच के लिए केजीएमयू भेजे गए हैं। बताया जा रहा है कि इलाज के दौरान डाक्टरों और कर्मचारियों को महिला की स्वाइन फ्लू रिपोर्ट पाजिटिव होने की जानकारी नहीं थी।

    महिला की मौत के बाद परिवारजन की ओर से रिपोर्ट सामने आने पर अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्यकर्मियों में सतर्कता बढ़ा दी गई। इलाज करने वाले डाक्टरों और कर्मचारियों को एहतियातन आइसोलेट रहने, अपने स्वास्थ्य पर नजर रखने और संक्रमण से जुड़े लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराने की सलाह दी गई है। केजीएमयू से जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला के संपर्क में आए किसी स्वास्थ्यकर्मी में संक्रमण फैला है या नहीं।

    संक्रमण के बीच बढ़ाई गई सतर्कता
    बलरामपुर अस्पताल में नए संक्रमित मरीज के भर्ती होने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमण नियंत्रण के नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध और संक्रमित मरीजों को सामान्य मरीजों से अलग रखने की व्यवस्था की जा रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि संक्रमण की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार आगे की व्यवस्था की जाएगी। बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डा बीकेएस चौहान ने बताया कि 11 नंबर चेस्ट वार्ड को स्वाइन फ्लू आइसोलेशन वार्ड के रूप में तैयार किया गया है। संक्रमित मिले एक मरीज को उसी में भर्ती किया गया है। संक्रमण और न फैले इसके लिए एसओपी का पालन किया जा रहा है।

    बढ़ा दी स्वास्थ्य विभाग की चिंता
    लखनऊ में लगातार बढ़ रहे स्वाइन फ्लू स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में स्वाइन फ्लू और कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए हैं। बलरामपुर अस्पताल में स्वाइन फ्लू संक्रमित महिला की मौत के बाद एक अन्य संक्रमित को भर्ती किया गया है। संक्रमण को देखते हुए बलरामपुर अस्पताल ने चेस्ट वार्ड को स्वाइन फ्लू आइसोलेशन वार्ड में बदल दिया है।