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  • Sugar Price Hike: क्यों महंगी हुई चीनी? सरकार ने अल नीनो और रेड रॉट को बताया बड़ा कारण

    Sugar Price Hike: क्यों महंगी हुई चीनी? सरकार ने अल नीनो और रेड रॉट को बताया बड़ा कारण

     नई दिल्ली

    भारत में त्योहारी सीजन चल रहा है और मिठाई की मिठास को चीनी की बढ़ती कीमतें (Sugar Price Hike) बेस्वाद करती नजर आ रही हैं. देश में चीनी की कीमतों में ताबड़तोड़ उछाल जारी है. रिटेल मार्केट में 1 किलो चीनी की कीमत (1Kg Silver Price) 65 रुपये या कहीं-कहीं इससे भी ज्यादा पहुंच चुकी है. इसे लेकर राजनीतिय गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है और ये विपक्ष का प्रमुख मुद्दा बना हुआ नजर आ रहा है। 

    Sugar Price Hike को लेकर जारी राजनीतिक खींचतान के बीच अब सरकार की ओर से बड़ा बयान सामने आया है. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने साफ किया है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है, इसके साथ ही उन्होंने चीनी के दाम बेलगाम होने के पीछे की एक नहीं, बल्कि दो वजह बताई हैं। 

    सरकार बोली- इथेनॉल का रोल नहीं
    चीनी की कीमतों को लेकर जारी राजनीतिक घमासान में जहां विपक्ष आरोप लगा रहा है कि इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल करने से देश में चीनी की सप्लाई कम हो रही है और उसके चलते कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. वहीं केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे इथेनॉल का कोई हाथ नहीं है।

    केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का कहना है कि त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की उपलब्धता और खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंताओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार कई कदम उठा रही है, जिसमें कच्चे चीनी का अस्थायी आयात भी शामिल है। 

    मंत्री ने बताईं दो वजह 
    केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे की दो वजह बताई हैं. उन्होंने कहा कि रेड रॉट बीमारी और अल नीनो की स्थितियों के कारण चीनी उत्पादन में गिरावट आई है, जिससे भारत और दुनिया भर में कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'रेड रॉट बीमारी (जिसकी उम्मीद नहीं थी) और अल नीनो के कारण, न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया भर में चीनी समेत कुल एग्रीकल्चर प्रोडक्शन में कमी आई है। 

    उन्होंने आगे कहा कि हम देश में चीनी के बढ़ते दाम को लेकर बहुत चिंतित हैं, इसलिए हमने तुरंत कई कदम उठाए हैं. भारत की जरूरत लगभग 280 लाख टन है, और आज की तारीख में हमारे पास पर्याप्त सरप्लस चीनी का स्टॉक है। 

    देश में चीनी की कोई कमी नहीं
    प्रह्लाद जोशी ने सरकार की ओर से साफ किया है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है. देश को लगभग 280 लाख टन चीनी की ज़रूरत है और अभी स्टॉक में लगभग 36 लाख टन चीनी है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चीनी की कीमतों पर बारीकी से नजर रख रही है और राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे उपलब्ध स्टॉक को बाजार में लाने में मदद करें, ताकि उपभोक्ताओं को पुरानी कीमतों पर चीनी मिल सके। 

    इसके अलावा उन्होंने कहा कि त्योहारों का मौसम आ रहा है और कई बड़े त्योहार हैं, इसलिए आयात के उपाय किए जा रहे हैं, हमने पहले ही कई कदम उठाए हैं, जिसमें अस्थायी उपाय के तौर पर कच्ची चीनी का आयात भी शामिल है 

    क्या होने वाली है चीनी की भारी कमी? 
    रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो से शुगर प्रोडक्शन पर खतरा है और दुनिया भर में चीनी की कमी की आशंका गहरा रही है. भारत और दुनिया भर में चीनी की सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है. अल नीनो से जुड़े मौसम के हालात मुख्य उत्पादक देशों में गन्ने के उत्पादन पर असर डालने वाले एक अहम कारक के तौर पर उभर रहे हैं. इससे सवाल खड़े हो रहे हैं कि खराब मौसम का वैश्विक उत्पादन पर असर, भारतीय चीनी उत्पादन, कीमतों और निर्यात पर दबाव डालते हुए इसकी दुनियाभर में बड़ी कमी का कारण बन सकता है। 

     

  • चीनी संकट से जूझ रही दुनिया! ब्राजील की परेशानी और मौसम ने बिगाड़ा ग्लोबल सप्लाई का गणित

    चीनी संकट से जूझ रही दुनिया! ब्राजील की परेशानी और मौसम ने बिगाड़ा ग्लोबल सप्लाई का गणित

     नई दिल्‍ली

    भारत में त्योहारों के मौसम शुरू होने के पहले ही चीनी की बढ़ती कीमतों से जायका कड़वा हो रहा है. सरकार कह रही है की इथेनॉल की वजह से चीनी के दाम में कोई इजाफा नहीं हो रहा है, लेकिन फिर भी चीनी की दिक्‍कत आई है. जिस कारण दुनिया को चीनी का एक्‍सपोर्ट करने वाला देश, अब चीनी आयात करने जा रहा है। 

    सरकार के मुताबिक, वर्तमान में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी कई कारकों के संयोजन के कारण हुई है. इनमें घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम होना, त्योहारी मौसम से पहले मांग में बढ़ोतरी, मौसम संबंधी कारणों से गन्ने की फसल को नुकसान, ग्‍लोबल स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग के कुछ वर्गों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। 

    वर्तमान सीजन में चीनी का उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने की उम्मीद है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों द्वारा शुरुआती अनुमान लगभग 343 LMT लगाया गया था. गन्ने की फसल रेड रॉट (लाल सड़न) और टॉप बोरर रोग से प्रभावित हुई है. इसके अलावा, समय से पहले ज्‍यादा बारिश के कारण हुए जलभराव ने भी फसल को नुकसान पहुंचाया है. हालांकि सरकार का दावा है कि उत्पादन अनुमान से कम होने के बावजूद, देश में पर्याप्त चीनी का भंडार उपलब्ध है, जो अक्टूबर में नए पेराई सीजन के शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। 

    पूरी दुनिया में चीनी की कीमत बढ़ रही
    लेकिन चीनी की कीमतों में उछाल सिर्फ़ भारत में नहीं है. चीनी की संकट अब पूरी दुनिया पर दिखाई दे रही है. दुनिया में गन्ने की सबसे ज्‍यादा खेती करने वाले ब्राज़ील में भी चीनी की संकट गहरा रही है. US डिपॉर्टमेंट ऑफ फॉरेन एग्रीकल्चर सर्विस के डेटा के मुताबिक, ब्राज़ील दुनिया के 24% गन्ना उत्पादन करता है, जिसके बाद भारत 16%  गन्ना उत्पादन करता है। 

    ब्राजील इथेनॉल में बढ़ा रहा उत्‍पादन
    ब्राज़ील अपनी गन्ने को इथेनॉल उत्पादन
    की तरह मोड़ रहा है, जिसके चलते ब्राजील में भी चीनी की संकट खड़ी हो चुकी है. ब्राज़ील की नेशनल सप्लाई कंपनी कोनाब के मुताबिक, चीनी के उत्पादन में लगभग 3% कटौती हो सकती है यानी इस साल ब्राज़ील में चीनी का उत्पादन लगभग 43 मिलियन टन कम रहने का अनुमान है. वहीं दूसरी वजह एलनीनो को लेकर है, जिसकी वजह से ब्राजील के मध्य और दक्षिणी हिस्से में बरसात में देरी और तापमान में बढ़ोतरी की वजह से गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ा है. यानी पूरी दुनिया को चीनी निर्यात करने वाले ब्राज़ील में किसानों का इथेनॉल की ओर रुख करना वर्ल्ड शुगर सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहा है। 

    मौसम बिगाड़ रहा खेल
    वहीं बाकी देशों में मौसम की वजह से चीनी की कीमतों में उछाल आने की संभावना है. वेलोर इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल सक्रिय एल नीनो के चलते चीनी उत्पादन वाले क्षेत्रों में नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है. मौसम का बदलाव भारत और थाइलैंड जैसे गन्ना उत्पादन रीजन में प्रभाव डाल रहा है. दुनिया में कुल गन्ना उत्पादन के 6% गन्ना पैदा करने वाले थाईलैंड में अगले सप्ताह से मौसम का निगेटिव असर होगा. एलनीनो की वजह से बरसात में कमी की अशंका जताई गई है। 

    अमेरिकी कमोडिटी बाज़ार के मुताबिक़, अमेरिकी चीनी वायदा कीमतें 17 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर कारोबार कर रही हैं और मई 2025 के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब बनी हुई हैं.वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति और अधिक सीमित होने की संभावनाओं के कारण बाजार को सपोर्ट मिल रहा है. इसके अलावा, दशकों के सबसे मजबूत अल नीनो ने उत्पादन संबंधी जोखिमों को बढ़ा दिया है. विश्लेषकों ने 2026/27 में वैश्विक चीनी की कमी के अपने अनुमानों को बढ़ाया है. गन्ने और चुकंदर की कम बुवाई के कारण 2027/28 में यह कमी और भी बढ़ने की संभावना है। 

    क्‍यों इथेनॉल की ओर बढ़ रहा ब्राजील? 
    भारत, यूरोपीय संघ (EU) और थाईलैंड को प्रतिकूल मौसम की स्थिति के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में माना जा रहा है. इसी बीच, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें ब्राजील जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में गन्ने को चीनी उत्पादन के बजाय इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने को प्रोत्साहित कर रही हैं. ब्राजील ने जुलाई के अंत में अनिवार्य इथेनॉल मिश्रण की दर को बढ़ाकर 32% कर दिया, जो एक महीने पहले 30% और एक साल पहले 27% थी. इससे चीनी की उपलब्धता में और कमी आ सकती है. इससे वैश्विक बाजार में चीनी की मांग पर दबाव और बढ़ सकता है। 

  • Sugar Price Hike: त्योहारों से पहले बढ़ी चीनी की कीमत, सरकार का बड़ा कदम; स्टॉक लिमिट लागू

    Sugar Price Hike: त्योहारों से पहले बढ़ी चीनी की कीमत, सरकार का बड़ा कदम; स्टॉक लिमिट लागू

    इंदौर 
    त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले आम लोगों के लिए चीनी की कीमतों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. देश में पिछले एक महीने में चीनी के औसत खुदरा दाम करीब 6.6 फीसदी बढ़ गए हैं. जहां एक महीने पहले देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 47.17 रुपये प्रति किलो थी, वहीं अब यह बढ़कर 50.30 रुपये प्रति किलो हो गई है. पिछले साल के मुकाबले भी चीनी की कीमत करीब 9 फीसदी ज्यादा है। 

    देश में चीनी का औसत भाव कितना बढ़ा?
    ऑल इंडिया एवरेज प्राइस के मुताबिक, 7 अगस्त 2026 को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत (Sugar Price Today) 50.30 रुपये प्रति किलो रही. एक महीने पहले यानी करीब 30 दिन पहले यही कीमत 47.17 रुपये प्रति किलो थी. यानी इस दौरान चीनी के दाम में 6.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 

    त्योहारों से ठीक पहले चीनी के दाम में यह बढ़ोतरी आम लोगों के घरेलू बजट पर असर डाल सकती है. इसी बीच सरकार ने भी बढ़ती कीमतों को लेकर कदम उठाया है। 

    चीनी डीलरों पर सरकार ने लगाई स्टॉक लिमिट 
    चीनी की बढ़ती कीमतों और जमाखोरी को रोकने के लिए सरकार ने देशभर में चीनी डीलरों के लिए स्टॉक होल्डिंग लिमिट(Sugar Stock Limit) लागू कर दी है. यह फैसला 1 अगस्त 2026 से लागू हुआ है और यह  30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। 

    सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद चीनी की जमाखोरी रोकनाऔर बाजार में चीनी की लगातार उपलब्धता बनाए रखना है. साथ ही सरकार चाहती है कि आम लोगों को चीनी उचित कीमत पर मिलती रहे और सप्लाई चेन भी सुचारू रूप से चलती रहे। 

    आखिर चीनी के दाम क्यों बढ़े?
    उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है. सरकार के मुताबिक, चीनी की एक्स-मिल कीमतों में हाल की बढ़ोतरी मौजूदा मांग और सप्लाई की स्थिति के हिसाब से उचित नहीं है.सरकार के सामने यह बात भी आई है कि कुछ ट्रेडर्स, डीलर्स और बाजार से जुड़े बिचौलियों की ओर से चीनी का स्टॉक जमा किया जा रहा है. इसके अलावा सट्टेबाजी वाले लेनदेन और बिना चीनी की सप्लाई के सिर्फ कागजों पर होने वाले कारोबार ने भी बाजार में कमी का माहौल बनाया है। 

    सरकार का कहना है कि इन वजहों से चीनी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और एक्स-मिल के साथ-साथ खुदरा कीमतें भी बढ़ीं। 

    देश में चीनी की कोई कमी नहीं, पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध
    सरकार ने साफ किया है कि देश में घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध है. सरकार के मुताबिक, बाजार में  कमी का माहौल बनाकर कीमतों में बढ़ोतरी की कोशिशों पर नजर रखी जा रही है.सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। 

    डीलर को हर हफ्ते बताना होगा कितना है स्टॉक
    नए नियमों के तहत सभी चीनी डीलरों को अपने पास मौजूद चीनी के स्टॉक की जानकारी देनी होगी. इसके साथ ही उन्हें हर हफ्ते अपने स्टॉक के अपडेट करना होगा.इसके लिए खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल करना होगा. सरकार चीनी बाजार की लगातार निगरानी कर रही है और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। 

    आपके शहर में क्या है चीनी का भाव?
    7 अगस्त 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के प्रमुख शहरों में पिछले एक साल के दौरान चीनी की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। 

    अब चीनी बाजार पर सरकार की नजर 
    सरकार ने कहा है कि चीनी बाजार पर लगातार नजर रखी जा रही है. स्टॉक लिमिट लगाने का उद्देश्य जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाना है, ताकि बाजार में चीनी की सप्लाई बनी रहे और कीमतों में तेजी न आए। 

  • पवारखेड़ा अनुसंधान केंद्र की बड़ी कामयाबी: नई किस्मों से बढ़ेगा उत्पादन, देश भर में सप्लाई होंगे बीज

    पवारखेड़ा अनुसंधान केंद्र की बड़ी कामयाबी: नई किस्मों से बढ़ेगा उत्पादन, देश भर में सप्लाई होंगे बीज

    नर्मदापुरम
     पवारखेड़ा स्थित गन्ना अनुसंधान केंद्र में इन दिनों गन्नों की नई किस्मों पर अनुसंधान किया जा रहा है। अनुसंधान के तहत तमिलनाडु के कोयंबटूर और गुजरात के नवसारी सहित कई स्थानों से गन्ने की 20 किस्मों पर अध्ययन किया जा रहा है। इसकी मदद से एक गन्ने की एक नई किस्म तैयार की जा रही है हालांकि इसको तैयार होने में लगभग एक साल का समय लगेगा।

    इस अनुसंधान का एक मात्र उद्देश्य है जिससे गन्नों की मिठास सबसे अधिक हो। यदि यह प्रयोग सफल होता है तो आने वाले समय में नर्मदापुरम का गन्ना देशभर में मिठास घोलेगा।

    जबलपुर के अंतर्गत आता है केंद्र
    जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र पवारखेड़ा में गन्ने की उन्नत और उच्च पैदावार वाली किस्मों की दिशा में काम करता रहा है। कृषि विज्ञानियों की माने तो इस बार हो रहे अनुसंधान में उनकी कोशिश है कि गन्ने की ऐसी किस्म तैयार की जाए जिसमें उत्पादन तो अच्छा हो, साथ ही उसकी मिठास भी ज्यादा हो।

    इस तरह होती है नई किस्म तैयार
    कोई भी नई किस्म दो तीन से अच्छे गन्ने की प्रजातियों को मिलाकर तैयार किया जाता है। इसके लिए हाइब्रिडाइजेशन प्रक्रिया अपनाई जाती है इसमें अलग-अलग उन्नत किस्मों को मिलाकर उनका पालीनेशन कराया जाता है। इसके बाद इन्हें शुरूआत में क्यारियों में रोपा जाता है। इसके बाद बड़े एरिया में इसकी खेती की जाती है।

    इस दौरान गन्ने की मोटाई, इसकी लंबाई इसमें चीनी की मात्रा, इसकी प्रतिरोधक क्षमता आदि का परीक्षण किया जाता है। इसके बाद केन्द्रीय और राज्य किस्म मूल्यांकन समिति इसे आधिकारिक रूप से मान्यता देती है।

    लंबाई तीन मीटर तक रहने की उम्मीद
    कृषि वैज्ञानियों की माने तो नई किस्म की लंबाई करीबन तीन मीटर तक रहने की उम्मीद है। साथ ही इसकी मिठास पहली की किस्मों से बेहतर रहने की उम्मीद है। अनुसंधान केन्द्र में पहले भी गन्ने की कई किस्में तैयार हो चुकी हैं। इसके पहले गन्ने की कोजेएन 9505 और कोजेएन 86/600 विकसित की थी।

    इसमें से कोजेएन 9509 प्रति हेक्टेयर करीबन 1100 क्विंटल का उत्पादन देता है और इसमें शुगर की मात्रा करीबन 22 फीसदी तक होती है। केन्द्र के द्वारा गेहूं की उन्नत किस्म भी तैयार की थी। एमपीओ 1255 किस्म पास्ता बनाने के लिए खासतौर से तैयार किया था।

        अधिक उत्पादन और इसमें मिठास को लेकर लगातार गन्ने की नई किस्म तैयार करने के प्रयास किए जाते रहे हैं। अब गन्ने की एक और नई किस्म तैयार करने के लिए अध्ययन चल रहा है।- आस्कर टोप्पो, कृषि विज्ञानी,गन्ना अनुसंधान केन्द्र, पवारखेड़ा

     

  • देश में चीनी की कमी या सिर्फ अफवाह? बढ़ती कीमतों के बीच सामने आई बड़ी वजह

    देश में चीनी की कमी या सिर्फ अफवाह? बढ़ती कीमतों के बीच सामने आई बड़ी वजह

    नई दिल्ली
     शक्कर हर घर की हर रोज की जरूरत का अहम हिस्सा है। हर दिन हम किसी ना किसी रूप में चीनी का इस्तेमाल करते हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों की सूची में शामिल है, लेकिन इस बार देश में चीनी की कमी को लेकर चर्चा तेज है। घरेलू आपूर्ति बनाए रखने और चीनी की कीमत को सामान्य रखने का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर बैन लगा दिया। इसके बाद देश में चीनी की आपूर्ति (Sugar Supply) और उपल्बधता को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे।

    अब ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) ने चीनी की कमी की खबरों को निराधार बताया है, और उसने अपने सदस्यों से पूरे देश में चीनी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उनकी ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब कारखाने से चीनी की कीमतों में एक महीने से भी कम समय में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

    उद्योग संगठनों ने अफवाहों से बचने की अपील की
     रिपोर्ट के मुताबिक, Indian Sugar & Bio-energy Manufacturers Association (ISMA) और National Federation of Cooperative Sugar Factories Ltd (NFCSF) ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घरेलू खपत को पूरा करने में किसी तरह की समस्या नहीं होगी। 

    दोनों संगठनों ने कहा कि हाल में कीमतों में आई तेजी मांग और सप्लाई की वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं है. बाजार में कमी का माहौल बनाना, सट्टेबाजी करना या गलत जानकारी फैलाना उपभोक्ताओं और चीनी पर निर्भर उद्योगों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. संगठनों ने व्यापारियों और अन्य हितधारकों से अनावश्यक स्टॉक जमा करने और अफवाहें फैलाने से बचने की अपील की है। 

    जल्द शुरू होंगी चीनी मिलें
    अपने सदस्यों को भेजे गए एक पत्र में, AISTA ने पिछले हफ्ते जारी भारतीय चीनी और जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) और राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना संघ (NFCSF) के संयुक्त बयान का हवाला देते हुए कहा कि देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी भंडार मौजूद है। इसमें यह भी कहा गया कि चीनी मिल मालिकों ने कृषि-जलवायु परिस्थितियों के आधार पर 2026-27 सीजन (अक्टूबर-सितंबर) को जल्द से जल्द शुरू करने पर सहमति जताई है।

    चीनी की उपलब्धता को लेकर ठोस कदम
        मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, AISTA के अध्यक्ष प्रफुल विठलानी ने कहा, "हाल ही में कारखाने से एक महीने से भी कम समय में लगभग 15 प्रतिशत चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने चीनी की कमी की एक निराधार धारणा पैदा कर दी है।"

    उन्होंने चीनी मूल्य श्रृंखला के सभी शेयरहोल्डर्स – मिलों, व्यापारिक घरानों, थोक विक्रेताओं, वितरकों और संस्थागत उपभोक्ताओं से अनुरोध किया कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए "सकारात्मक कदम" उठाएं कि चीनी पूरे देश में आसानी से उपलब्ध रहे।

    जल्दबाजी में ना करें पैनिक खरीदी
    मीडिया खबरों के मुताबिक AISTA अध्यक्ष ने कोविड-19 महामारी के दौरान आपूर्ति बनाए रखने का उदाहरण देते हुए सदस्यों से अभी भी वैसा ही अप्रोच दिखाने का आग्रह किया और सप्लाई चेन को सुचारू रूप से चलाने तथा इसे बाधित करने वाली गतिविधियों से बचने की सलाह दी।

    उन्होंने सदस्यों से घबराहट में खरीदारी (Panic buying) या सट्टेबाजी के लिए स्टोर करने से बचने, सरकारी नियमों का पालन करने और भ्रामक सूचनाओं या अफवाहों को नजरअंदाज करने का भी आग्रह किया।

    महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम स्टॉक का असर
    विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले एक महीने में कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी महाराष्ट्र और कर्नाटक में देखने को मिली है. ये दोनों राज्य देश के प्रमुख चीनी उत्पादक हैं, लेकिन यहां अन्य राज्यों की तुलना में चीनी का स्टॉक अपेक्षाकृत कम बचा है। 

    चीनी कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इन राज्यों में स्टॉक कम होने के कारण अब अन्य राज्यों की चीनी मिलों को ऊंची कीमतों का फायदा मिल सकता है. बाजार में सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता ने भी कीमतों में तेजी लाने में अहम भूमिका निभाई है। 

    उत्पादन में सुधार की उम्मीद
    उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को समाप्त होने वाले 2025-26 Sugar Year में देश का चीनी उत्पादन करीब 27.8 मिलियन टन रहने का अनुमान है. यह पिछले सीजन के 25.6 मिलियन टन की तुलना में लगभग 8.5 प्रतिशत अधिक है. उत्पादन बढ़ने की उम्मीद से आने वाले महीनों में सप्लाई की स्थिति बेहतर हो सकती है। 

    एक्सपोर्ट बैन के बाद बदला बाजार
    सरकार ने मई 2026 में चीनी उत्पादन अनुमान से कम रहने के बाद Sugar Export पर रोक लगा दी थी. एक्सपोर्ट बैन लागू होने से पहले करीब 8 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था. इसमें सबसे बड़ा योगदान महाराष्ट्र और कर्नाटक की चीनी मिलों का रहा। 

    बताया जा रहा है कि इन राज्यों की कई मिलों ने अपने हिस्से के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को आवंटित कुछ Export Quota का भी इस्तेमाल किया था. इसके बदले उत्तर प्रदेश की मिलों को घरेलू बिक्री के लिए अतिरिक्त कोटा दिया गया। 

    कितने बढ़े शक्कर के दाम?
    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश भर में औसत खुदरा चीनी की कीमत एक महीने पहले के ₹47.01 प्रति किलो, तीन महीने पहले के ₹46.48/किलो और छह महीने पहले के ₹46.34/किलो से बढ़कर 17 जुलाई को ₹47.9/किलो हो गई है। थोक बाजार में, पिछले छह महीनों में कीमतें बढ़कर ₹4,294.70/किलो से 17 जुलाई तक ₹4,447.57/क्विंटल हो गई हैं।