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  • Sugar Price: त्योहारों से पहले बड़ी राहत, सस्ती हुई चीनी; स्टॉक रखने की सीमा दोगुनी

    Sugar Price: त्योहारों से पहले बड़ी राहत, सस्ती हुई चीनी; स्टॉक रखने की सीमा दोगुनी

    इंदौर 

     अब त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है. दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ सामने है. ऐसे में चीनी की बढ़ी कीमत ने मन खट्टा कर रखा है. चीनी की कीमत सांतवें आसमान पर है. आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ गया है. ऐसे में सरकार लगातार चीनी की मिठास लौटाने के लिए कदम उठा रही है. जी हां, त्योहारी सीजन से पहले चीनी को लेकर राहत की खबर है. पिछले तीन हफ्तों में चीनी के खुदरा दाम करीब 10% घटकर 65 रुपये से 58.5 रुपये प्रति किलो हो गए हैं. इतना ही नहीं, केंद्र सरकार ने भी बड़ी मात्रा में चीनी इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर दी है. इससे त्योहारों के दौरान चीनी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। 

    टीओआई की खबर के मुताबिक, त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार ने शुक्रवार को थोक चीनी उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा में ढील दी. अब वे मौजूदा 15 दिनों के बजाय 30 दिनों तक चीनी का स्टॉक रख सकते हैं. इसकी वजह है कि पिछले तीन हफ्तों में खुदरा कीमतों में लगभग 10% की कमी आई है। 

    क्यों अहम है यह कदम
    सरकार की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब चीनी की खुदरा कीमत लगभग 65 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 58.5 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई . हालांकि, त्योहारी सीजन के दौरान मांग बढ़ने की उम्मीद है. कारण कि दुर्गा पूजा से लेकर दिवाली और छठ में मिठाई और पकवानों खूब बनते हैं. इसमें चीनी का यूज होता है. ऐसे में यह तय है कि चीनी की डिमांड बढ़ेगी। 

    अब आपको भी कम कीमत में मिलेगी चीनी
    हालांकि, खाद्य विभाग ने इंडस्ट्री को बताया है कि खुदरा कीमतों में गिरावट चीनी की मिल से निकलने के बाद वाली कीमतों में हुई बड़ी कमी के मुकाबले कम है. विभाग के मुताबिक, मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत करीब 25% घट चुकी है, लेकिन सप्लाई चेन के जरिए इसका पूरा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है. विभाग ने थोक विक्रेताओं, खुदरा दुकानदारों और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों से तुरंत कीमतों में हुई कमी का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाने को कहा है। 

    एक शर्त के साथ मिली छूट
    थोक उपभोक्ताओं में बड़ी कन्फेक्शनरी बनाने वाली कंपनियां, बिस्किट निर्माता, सॉफ्ट ड्रिंक और बेवरेज कंपनियां, मिठाई विक्रेता और हलवाई शामिल हैं. अभी कच्चे माल के तौर पर हर महीने 10 टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल करने वाले औद्योगिक उपभोक्ताओं को 15 दिनों की खपत के बराबर स्टॉक रखने की अनुमति है. विभाग ने कहा कि अब इस सीमा को बढ़ाकर 30 दिन कर दिया गया है, लेकिन एक शर्त के साथ. पुरानी 15 दिनों की सीमा से अधिक जो भी स्टॉक रखा जाएगा, उसे टैरिफ रेट कोटा या एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत आयात की गई चीनी से ही लेना होगा। 

    सरकार ने क्या आदेश दिया
    केंद्र सरकार ने टैरिफ रेट कोटा के तहत 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति दी है. इसके अलावा एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत खरीदी गई निर्यात के लिए तय चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की भी अनुमति दी गई है. वहीं, घरेलू खुले बाजार से खरीदी गई चीनी का स्टॉक अभी भी 15 दिनों की खपत तक ही सीमित रहेगा. सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे हर शुक्रवार को खाद्य विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अपने चीनी स्टॉक की जानकारी दें। 

  • गन्ना किसानों का पूरा भुगतान, 102 चीनी मिलों ने किया शत-प्रतिशत गन्ना मूल्य भुगतान

    गन्ना किसानों का पूरा भुगतान, 102 चीनी मिलों ने किया शत-प्रतिशत गन्ना मूल्य भुगतान

    गन्ना किसानों को 102 चीनी मिलों ने किया शत-प्रतिशत भुगतान

    पेराई सत्र (2025-26) 

    23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820 करोड़ का किया भुगतान, निजी चीनी मिलों ने भी किया शत-प्रतिशत भुगतान 

    योगी सरकार ने गन्ना किसानों को किया 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान 

    निरंतर सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य बना है उत्तर प्रदेश 

    पेराई सत्र (2025-26) में 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का किया जा चुका भुगतान 

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरंतर मॉनीटरिंग की बदौलत पेराई सत्र 2025-26 में 102 चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया। वहीं 23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820 करोड़ का भुगतान किया। प्रदेश में संचालित राज्य चीनी निगम की तीन मिलों ने पेराई सत्र 2025-26 में 543.51 करोड़ का भुगतान किया है। निजी चीनी मिलों की ओर से भी किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश निरंतर सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य बना हुआ है। योगी सरकार ने अब तक गन्ना किसानों को 3.25 लाख करोड़ का भुगतान किया। उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। पेराई सत्र 2025-26 में 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है।

    गन्ना, शीरा और एथेनॉल उत्पादन में शीर्ष पर बना है यूपी 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने किसान कल्याण, चीनी उत्पादन और एथेनॉल में नए आयाम स्थापित किए हैं। योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। सरकार ने न केवल गन्ना किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना प्राथमिकता माना, बल्कि ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अब तक रिकॉर्ड ₹3.25 लाख करोड़ का गन्ना मूल्य भुगतान सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित भी किया। 

    94.86 प्रतिशत से अधिक का भुगतान सुनिश्चित
    वर्तमान पेराई सत्र में भी 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है, जबकि प्रदेश की 102 चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य का शत- प्रतिशत भुगतान कर दिया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश के गन्ना किसानों की औसत आय में ₹40,720 प्रति हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    9 वर्ष में चीनी मिलों ने की 9220 लाख टन गन्ने की पेराई
    गन्ना विकास विभाग ने बताया कि विगत नौ वर्ष में प्रदेश की चीनी मिलों ने रिकॉर्ड 9,220 लाख टन गन्ने की पेराई की गई है। जो इससे पहले के 9 वर्ष की कुल गन्ना पेराई 6168 लाख टन से 3052 लाख टन अधिक है। 9 वर्ष में 879.06 लाख टन चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। 

    सहकारी चीनी मिलों ने किया 100 प्रतिशत भुगतान 
    उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2025-26 में सहकारी चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य के रूप में 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है। अनूपशहर, बदायूं, बागपत, बेलरायां, बिलासपुर, बीसलपुर, गजरौला, घोसी, कायमगंज, महमूदाबाद, मोरना, नानपारा, नानौता, पूरनपुर, पुवायां, रमाला, सहारनपुर, सरसावां, सठियांव, सेमीखेड़ा, स्नेह रोड, सुल्तानपुर, तिलहर समेत कुल कुल 23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820.89 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया है। 23 सहकारी चीनी मिलों की पेराई क्षमता 65375 टीसीडी है। 

    निजी चीनी मिलों द्वारा किया गया भुगतान 
    पेराई सत्र 2025-26 में निजी चीनों मिलों ने किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। लखनऊ संभाग की मिलों ने सर्वाधिक 6462.19 करोड़ का भुगतान किया। वहीं मुरादाबाद संभाग की मिलों द्वारा 6398.36 करोड़, सहारनपुर संभाग की चीनी मिलों ने 4799.25 करोड़ का भुगतान किया।   
    संभाग   भुगतान प्रतिशत          भुगतान 
    अयोध्या   100 फीसदी             1212.35 करोड़ 
    बरेली    89.25 फीसदी             2315.74 करोड़ 
    देवरिया 97.86 फीसदी              1016.95 करोड़ 
    देवीपाटन   91.63 फीसदी           2249.01 करोड़ 
    गोरखपुर    93.46 फीसदी            749.97 करोड़ 
    लखनऊ    91.34 फीसदी             6462.19 करोड़ 
    मेरठ     94.09 फीसदी              4227.24 करोड़ 
    मुरादाबाद   98.96 फीसदी          6398.36 करोड़ 
    सहारनपुर   94.64 फीसदी       4799.25 करोड़

  • चीनी और सरसों तेल के भाव ने बढ़ाई चिंता, अक्टूबर के बाद मिल सकती है राहत

    चीनी और सरसों तेल के भाव ने बढ़ाई चिंता, अक्टूबर के बाद मिल सकती है राहत

    नईदिल्ली 

    चीनी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में गिरावट जरूर देखने को मिली है। लेकिन अब भी दाम 60 रुपये प्रति किलोग्राम के ऊपर बना हुआ है। वहीं, सरसों का तेल अब भी 200 रुपये के पार ही बिक रहा है। चीनी और तेल ने मिलकर त्योहारों के इस सीजन को थोड़ा फीका बना दिया है। अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि कब तक दाम में गिरावट देखने को मिलेगी?

    चीनी के दाम में गिरावट (Chini Ka rate)
    बीते हफ्ते चीनी का रेट 65.08 रुपये प्रति किलोग्राम था। जोकि अब घटकर 62.57 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है। यानी रिटेल मार्केट में कीमतों में 3.85 प्रति किलोग्राम की गिरावट देखने को मिली है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार चीनी का रेट कल शुक्रवार को 59 रुपये प्रति किलोग्राम था। जोकि पिछले साल की तुलना में 14 रुपये अधिक है। बीते इस साल 4 सितंबर को 1 किलो चीनी के लिए लोगों को 45 रुपये खर्च करने पड़ रहे थे।

    ड्यूटी फ्री चीनी इम्पोर्ट की मिली परमिशन
    सरकार ने विदेशों से चीनी आयात करने के लिए खरीदारों को बड़ी छूट देते हुए इसे ड्यूटी फ्री कर दिया है। हालांकि, इसकी सीमा एक मिलियन टन की है। लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इससे होलसेल के साथ-साथ रिटेल के दाम भी घटेंगे। इसके अलावा कालाबाजारी रोकने के लिए भी सरकार काफी सख्ती दिखा रही है।

    सरसों के तेल का दोहरा शतक (Mustard Oil Price today)
    पिछले एक महीने से सरसों के तेल का दाम भी सातवें आसमान पर है। कीमतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले साल इसका दाम 187 रुपये प्रति किलोग्राम था। जोकि इस समय 201 रुपये के आस-पास बना हुआ है। बीते एक महीने से सरसों के तेल की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं देखने को मिला।

    कब गिरेगा चीनी और तेल का दाम
    चीनी की कीमतों में फिलहाल कोई खास गिरावट की उम्मीद कम ही है। इस इंडस्ट्री पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट के अनुसार चीनी का रेट नई फसल के आने के बाद यानी अक्टूबर के बाद ही गिरने की संभावना है। वहीं, सरसों की कीमतों में आने वाले कुछ हफ्तों में आपको कटौती देखने को मिल सकती है। राजस्थान की फसल मार्केट में एंट्री करते ही दाम नीचे आ सकता है।

  • त्योहारी सीजन में सस्ती होगी चीनी? एक्स-मिल भाव में 20% की गिरावट, खुदरा दाम घटने के आसार

    त्योहारी सीजन में सस्ती होगी चीनी? एक्स-मिल भाव में 20% की गिरावट, खुदरा दाम घटने के आसार

    इंदौर 

    चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर है। आने वाले त्योहारों गणेश चतुर्दशी, नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ तक चीनी के दाम और गिरने की उम्मीद बढ़ गई है। डिपॉर्टमेंट ऑफ फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन ने एक्स पर पोस्ट करके चीनी के सस्ता होने की जानकारी दी है। X पर की गई पोस्ट के मुताबिक देश के खुदरा बाजार में चीनी के दाम करीब 5% तक कम हो गए हैं। इससे पहले चीनी की एक्स-मिल कीमतों में करीब 20% की बड़ी गिरावट आई है।

    अगर चीनीमंडी के आंकड़ों की बात करें तो गुरुवार शाम को अपडेट किए गए रेट के मुताबिक चीनी के दाम 61 रुपये किलो तक आ गए हैं। दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, रांची में 3 सितंबर को चीनी 61 रुपये में बिकी। गुवाहटी, कानपुर और रायपुर में 62 रुपये किलो थी और चेन्नई में 63 रुपये।

    कब तक एक्स-चीनी मिल रेट का दिखेगा असर
    सरकार का कहना है कि एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर अब धीरे-धीरे खुदरा बाजार में दिखाई देने लगा है और आने वाले दिनों में चीनी के दाम और नरम पड़ सकते हैं। सरकार के मुताबिक एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में थोड़ा समय लगता है, इसलिए आने वाले दिनों में इसका प्रभाव और ज्यादा दिखाई दे सकता है।

    यानी चीनी की कीमतों में अभी जो राहत मिली है, उसे शुरुआत माना जा सकता है। अगर मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट जारी रहती है तो थोक बाजार के बाद खुदरा बाजार में भी चीनी और सस्ती होने की संभावना है।

    अगस्त में तेजी के बाद सरकार ने बढ़ाई निगरानी
    दरअसल, अगस्त में चीनी की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली थी। इसके बाद सरकार ने चीनी बाजार की निगरानी बढ़ा दी। चीनी के स्टॉक, बिक्री और बाजार भाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों को रोका जा सके।

    सरकार का जोर इस बात पर है कि बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और सप्लाई में किसी तरह की परेशानी न हो। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने कहा है कि सरकार घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्धता, व्यवस्थित आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही है।

    हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक व्यापार और वितरण से जुड़ी गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहेंगी। यानी निगरानी और कार्रवाई का मकसद सामान्य कारोबार को रोकना नहीं, बल्कि बाजार में कृत्रिम कमी और अनावश्यक कीमत बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है।

    फिलहाल सरकार के ताजा आंकड़े उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत दे रहे हैं। अगस्त में तेजी के बाद अब चीनी की कीमतों का रुख नीचे की ओर है, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम लोगों को मिलना शुरू हो गया है।

  • चीनी खरीदने वालों के लिए राहत की खबर, रिटेल भाव 4% घटा; पिछले महीने के मुकाबले महंगी

    चीनी खरीदने वालों के लिए राहत की खबर, रिटेल भाव 4% घटा; पिछले महीने के मुकाबले महंगी

    नई दिल्ली
    देशभर में चीनी की कीमतों में अब नरमी दिखने लगी है. एक हफ्ते में चीनी का औसत रिटेल भाव 3.85% घटकर ₹62.57 प्रति किलो पर आ गया है. एक हफ्ते पहले यह कीमत ₹65.08 प्रति किलो थी. हालांकि, गिरावट के बावजूद चीनी अब भी महंगी है और इसका रिटेल भाव पिछले महीने के ₹49.33 प्रति किलो के स्तर से करीब 27% ऊपर बना हुआ है। 

    कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने हाल के दिनों में कई कदम उठाए हैं. इनमें 10 लाख टन चीनी के इंपोर्ट की अनुमति देना भी शामिल है. इसके अलावा बल्क यूजर्स और डीलरों के लिए स्टॉक रखने से जुड़े नियमों को भी सख्त किया गया है. माना जा रहा है कि इन उपायों का असर अब थोक बाजार में दिखाई देने लगा है। 

    थोक बाजार में भी घटी कीमत

    उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2 सितंबर को चीनी का औसत थोक भाव ₹57.62 प्रति किलो रहा. एक हफ्ते पहले यह ₹60.39 प्रति किलो था. यानी इस दौरान थोक कीमत में भी करीब ₹2.77 प्रति किलो की कमी आई है. हालांकि, थोक बाजार में कीमत घटने के बावजूद इसका पूरा फायदा रिटेल ग्राहकों को तुरंत नहीं मिल रहा है. इसकी वजह दुकानदारों के पास मौजूद पुराना स्टॉक है. कई रिटेलर्स ने चीनी पहले ही ऊंची कीमत पर खरीदी हुई है. ऐसे में वे उसे तुरंत कम भाव पर बेचकर नुकसान उठाना नहीं चाहते। 

    दुकानों तक सस्ता स्टॉक पहुंचने में लगेगा समय
    उद्योग से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, रिटेल कीमतों में बदलाव दिखने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं. आम तौर पर एक दुकानदार के पास चीनी की 10-15 बोरियां स्टॉक में रहती हैं और हर बोरी का वजन करीब 50 किलो होता है. ऐसे में पुराने महंगे स्टॉक के खत्म होने और नए सस्ते स्टॉक की सप्लाई आने के बाद ही रिटेल कीमतों में बड़ी गिरावट दिख सकती है। 

    उत्पादन घटा फिर भी पर्याप्त स्टॉक की उम्मीद
    चीनी की कीमतों को लेकर सरकार और चीनी मिलों के बीच भी खींचतान देखने को मिली है. केंद्र ने मिलों पर कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाया है. सरकार का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. वहीं, 2025-26 मार्केटिंग ईयर के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है. इसके बावजूद सरकार के सालाना घरेलू खपत के अनुमान के मुकाबले उपलब्धता को लेकर फिलहाल बड़ा संकट नहीं माना जा रहा है. देश में चीनी की सालाना घरेलू मांग करीब 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है। 

    अगले 10 दिन अहम
    सरकार की कोशिश एक साथ सप्लाई बढ़ाने और बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर नजर रखने की है. हालिया आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि इन कदमों के बाद थोक और रिटेल, दोनों बाजारों में कीमतों में कुछ नरमी आई है. हालांकि, रिटेल ग्राहकों को इसका पूरा फायदा मिलने में थोड़ा समय लग सकता है. अगर आप घर के लिए चीनी खरीदते हैं, तो आने वाले दिनों में राहत और बढ़ सकती है. नया और सस्ता स्टॉक दुकानों तक पहुंचने के बाद रिटेल कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद है. फिलहाल चीनी के दाम एक हफ्ते में जरूर घटे हैं, लेकिन वे अभी भी पिछले महीने के मुकाबले काफी ऊंचे हैं. आने वाले दिनों में नए स्टॉक की सप्लाई और बाजार में मांग के आधार पर कीमतों की अगली दिशा तय होगी। 

  • शक्कर बाजार में मंदी, मिल डिलीवरी से थोक भाव तक गिरावट; जल्द मिल सकती है बड़ी राहत

    शक्कर बाजार में मंदी, मिल डिलीवरी से थोक भाव तक गिरावट; जल्द मिल सकती है बड़ी राहत

    इंदौर 
    शक्कर के मिल डिलीवरी मूल्य एवं थोक बाजार भाव में कुछ और नरमी आ गई, लेकिन अखिल भारतीय स्तर पर इसका औसत खुदरा मूल्य उछलकर 63.97 रुपए प्रति किलो के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया है। मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर के उद्योग समीक्षकों की मानें तो, मिल डिलीवरी मूल्य और थोक बाजार भाव में आई नरमी का असर अगले दो स तीन दिनों में खुदरा दाम पर दिखाई पड़ने लगेगा और शक्कर का खुदरा मूल्य गिरकर 60 रुपए प्रति किलो से नीचे आ जाएगा।

    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एस ग्रेड की शक्कर का एक्स फैक्टरी बिक्री मूल्य 5500-5700 रुपए प्रति क्विंटल पर था, जो अब गिरकर 5400-5500 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया है। उद्योग विश्लेषकों के अनुसार सरकारी सख्ती के कारण घटे हुए दाम पर भी खरीदारों का अभाव देखा जा रहा है।

    रोजाना इस्तेमाल का किराना हुआ महंगा
    शक्कर 5800 से 5900, रायल रतन साबूदाना लूज में 7550, 1 किलो पैकिंग में 8100, सच्चा मोती लूज में 7450, 1 किलो पैंकिंग में 7950, आधा किलो पैंकिंग में 8050, सच्चा साबुदाना एगमार्क (आधा किलो पैकिंग) 8200, साबूदाना चक्र एगमार्क (500 ग्राम) 8140, साबूदाना गोपाल लूज (25 किलो) 6910 रुपए (भाव प्रति क्विंटल में)। खोपरा गोला कट्टे में 355 और बाक्स में 365 से 419, खोपरा बूरा 3200 से 5950 रुपए।

    इन चीजों के दामों में भी उतार-चढ़ाव
    -पूजन सामग्री : नारियल 120 भरती 3100 से 3150, 160 भरती 3600 से 3650, 200 भरती 3900 से 3950, 250 भरती 4600 से 4650, देशी कपूर 1295 से 1320, पूजा बादाम 250 से 260, बेस्ट 275 से 300, पूजा सुपारी 425, अरीठा 175 रुपए। केसर 185 से 200, बेस्ट 255 से 262 रुपए प्रति ग्राम।

    -मसाले : कालीमिर्च 755 से 760, मिनिमटर 775 से 785, मटरदाना 800 से 900, हल्दी निजामाबाद 230 से 250, हल्दी सांगली 320, जीरा 240 से 245, मीडियम 250 से 285, बेस्ट 310, सौंफ मोटी 130 से 155, बेस्ट 185 से 275, एक्सट्रा बेस्ट 325 से 385, बारीक 175 से 275, लौंग चालू 900 से 920, बेस्ट 950, दालचीनी 250 से 255, बेस्ट 260 से 270, जायफल 840 से 880, बेस्ट 925, जावत्री 1850 से 2000, बेस्ट 2300 से 2350, बड़ी इलायची 1350 से 1450, बेस्ट 1550 से 1650 रुपए।

  • महंगी चीनी से राहत की खबर, ₹51 किलो तक गिरे दाम; सरकार की कार्रवाई का असर

    महंगी चीनी से राहत की खबर, ₹51 किलो तक गिरे दाम; सरकार की कार्रवाई का असर

    मुंबई 

    चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कई कदमों का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है। देश के कई हिस्सों में चीनी के भाव नरम हुए हैं। दक्षिण महाराष्ट्र में जहां चीनी का भाव करीब 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था, वहीं अब महाराष्ट्र में मिल स्तर पर यह करीब 51-52 रुपये प्रति किलो में कारोबार कर रही है। कोलकाता में थोक भाव करीब 53 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। कोलकाता पूर्वोत्तर राज्यों के लिए चीनी का प्रमुख आपूर्ति केंद्र है।

    ChiniMandi के सूत्रों के मुताबिक, थोक और मिल स्तर पर आई इस नरमी का असर अगले 3-5 दिनों में खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

    रिटेल मार्केट में 8 रुपये तक सस्ती हुई चीनी
    ChiniMandi के ताजा रेट्स के मुताबिक दिल्ली में बुधवार को चीनी 62 रुपये किलो बिकी। इसका हाई 68 रुपये था। वहीं, कानपुर में चीनी की कीमत अब 69 की जगह 62 रुपये पर आ गई है। मुंबई में चीनी का भाव अब 68 रुपये से घटकर 61 रुपये, गुवाहटी में 71 से घटकर 63, हैदराबाद में 70 से घटकर 62 और चेन्नई में 70 रुपये से घटकर 65 रुपये किलो रह गई।

    चीनी के थोक भाव में बड़ी गिरावट
    अगर होलसेल प्राइस की बात करें तो मुंबई में चीनी अपने हाई से 950 रुपये प्रति क्विंटल सस्ती हो चुकी है। मुंबई में चीनी 5800 रुपये पर आ गई है जबकि, 22 अगस्त को 6750 रुपये के ऑल टाइम हाई पर थी। दिल्ली में चीनी 6000 रुपये प्रति क्विंटल पर ही टिकी है। यह 6600 रुपये पर पहुंच गई थी। चार दिन में कानपुर में भी चीनी के दाम में भी 600 रुपये की बड़ी गिरावट है। यहां एक क्विंटल चीनी 6050 रुपये पर आ गई है।

    सरकार ने क्या-क्या उठाए हैं कदम
    स्टॉक लिमिट: कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय की। इससे इनके पास जमा अतिरिक्त चीनी बाजार में आने लगी और उपलब्धता बढ़ी। सप्लाई सुधरने के साथ ही कीमतों पर दबाव कम हुआ है।

    जमाखोरी पर छापेमारी: सरकार ने चीनी की जमाखोरी और स्टॉक छिपाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी है। देशभर में अब तक 1,000 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी या निरीक्षण किए जाने की बात सामने आई है।

    इसके साथ ही चीनी मिलों को निर्देश दिया गया है कि अगस्त का निर्धारित कोटा जिन मिलों ने अभी तक बाजार में नहीं उतारा है, उसे जल्द से जल्द बेचें। इससे आने वाले दिनों में बाजार में चीनी की उपलब्धता और बढ़ सकती है।

    ड्यूटी-फ्री आयात: सरकार ने 21 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। सूत्रों के मुताबिक, निर्यातक देशों से करीब 70-80 हजार टन चीनी वाली 3-4 खेपें पहले ही रवाना हो चुकी हैं। इनके सितंबर के मध्य से अंत तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है।

    त्योहारों से पहले सरकार की नजर कीमतों पर
    अगस्त के बचे हुए कोटे की चीनी बाजार में आने, आयातित चीनी की खेपों के पहुंचने और बंदरगाहों पर रिफाइन होने वाली चीनी की उपलब्धता बढ़ने से प्रमुख खपत वाले इलाकों में सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है।

    खासकर त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार की कोशिश बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने की है। अगर ये सभी कदम उम्मीद के मुताबिक काम करते हैं, तो आने वाले हफ्तों में चीनी के भाव में और नरमी देखने को मिल सकती है।

  • शक्कर के दाम धड़ाम, 800 रुपये क्विंटल तक गिरी कीमत; राज्य सरकार के आदेश का इंतजार

    शक्कर के दाम धड़ाम, 800 रुपये क्विंटल तक गिरी कीमत; राज्य सरकार के आदेश का इंतजार

    भोपाल 

     त्योहारी समय में शक्कर की मिठास कम होने यानी शक्कर में महंगाई बढ़ने के अब कई कारण सामने आ रहे हैं। सरकार की सख्ती के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ही बीते तीन दिनों में शक्कर थोक भाव में 800 रुपए क्विंटल तक नीचे आ गई है। यानी जिस शक्कर के स्थानीय थोक बाजारों में ही 7000 रुपए क्विंटल तक भाव पहुंच गए थे, जो घटकर 6100/6200 रुपए पर आ गए है।

    बाजार के जानकारों का कहना है कि, शक्कर महंगी होने को लेकर केन्द्र सरकार ने भी जांच करवाई, जिसमें सामने आया कि कुछ व्यापारियों, डीलरों और बाजार के बिचौलियों द्वारा जमाखोरी, सट्टेबाजी के सौदे और बिना शक्कर की वास्तविक आवाजाही के सिर्फ पेपरों में दिखाया जा रहा था। इसलिए 1 अगस्त से 14 अगस्त तक फिजिकल स्टॉक वेरिफिकेशन किया गया। 13 दिन की जांच में पता चला कि, कई राज्यों में चीनी स्टॉक के अनुसार थोक ग्राहकों को बेची गई शक्कर शुगर मिलों के गोदामों में ही रखी हुई थी। शक्कर कारोबारी कपिल खंडेलवाल ने बताया कि, ऊपरी भाव से शक्कर के दाम नीचे आ गए हैं। हालांकि, त्योहारी मांग ज्यादा जोर नहीं पकड़ पा रही है।

    ड्राईफ्रूट का मिठाई कारोबार पर होगा असर
    शक्कर महंगी होने से अनुमान लगाया जा रहा था कि, इससे मिठाई महंगी हो जाएगी। लेकिन कारोबारियों का कहना है कि शक्कर से ज्यादा महंगे ड्राईफ्रूट से मिठाइयों की कीमतों पर असर हो रहा है। कारोबारी ने बताया कि कि शक्कर से ज्यादा सूखे मेवे पर महंगाई का बोझ पड़ रहा है। मिठाई कारोबारी मोहन शर्मा बताते हैं कि चीनी सहित कच्चा माल काफी महंगा हो गया है। सूखे मेवे, दूध, घी, बेसन सभी महंगे है। किराना कारोबारी अपूर्व पवैया बताते हैं कि बाजार में शक्कर की शॉर्टेज नहीं है, लेकिन उठाव नहीं है।

    2025-26 में जारी चीनी कोटा
    अक्टूबर में 24 लाख टन, नवंबर 20 लाख टन, दिसंबर 22 लाख टन, जनवरी 2026 के लिए 22 लाख टन, फरवरी 22.5 लाख टन, मार्च 22.5 लाख टन, अप्रेल 23 लाख टन, मई 22.5 लाख टन, जून 22.5 लाख टन, जुलाई 22 लाख टन, अगस्त 22.5 लाख टन कोटा जारी हुआ।

    निर्धारितसीमा से अधिक सटॉक, मतलब कार्रवाई
    भोपाल जिला खाद्य आपूति नियंत्रक सीएस जादौन का कहना है कि, केन्द्र सरकार ने स्टॉक लिमिट के जो निर्देश दिए हैं, राज्य सरकार भी आदेश जारी करने वाली है। इसका इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही आदेश होते हैं। विभाग की टीम व्यापारिक प्रतिष्ठानों की जांच शुरू कर देगी। निर्धारित सीमा से ज्यादा स्टॉक मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • महंगाई से राहत! 15% सस्ती हुई चीनी, आने वाले दिनों में दाम और घटने के संकेत

    महंगाई से राहत! 15% सस्ती हुई चीनी, आने वाले दिनों में दाम और घटने के संकेत

    इंदौर 

     चीनी की बढ़ी हुई कीमतों से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। थोक मार्केट में चीनी का दाम पिछले कुछ दिनों के दौरान 15 प्रतिशत नीचे गिर गया है। होलसेल में मार्केट में यह गिरावट के सरकार के फैसले के बाद देखने को मिली है। केंद्र सरकार ने पिछले दिनों 10 लाख टन ड्यूटी फ्री चीनी आयात करने की अनुमति दी थी। इसके अलावा कालाबाजारी रोकने के लिए भी केंद्र सरकार की तरफ लगातार कड़ाई की जा रही है। हालांकि, खुदरा बाजार में अब भी चीनी का दाम 75 रुपये प्रति किलोग्राम के आस-पास बना हुआ है।

    800 रुपये गिरा दाम
    टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार महज तीन दिन में चीनी का रेट होलसेल मार्केट में 800 रुपये प्रति क्विंटल तक कम हो गया है। मौजूदा समय में थोक बाजार में चीनी का रेट 62 रुपये प्रति किलोग्राम है। इस इंडस्ट्रीज से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में चीनी का रेट 3 रुपये प्रति किलोग्राम तक अभी और कम होगा।

    सरकारी आंकड़ों में चीनी का क्या है रेट
    डिपार्टेमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स की रिपोर्ट के अनुसार 24 अगस्त को 1 किलोग्राम चीनी का रेट 63.05 रुपये था। एक सप्ताह पहले चीनी का रेट खुदरा बाजार में 51.68 रुपये प्रति किलोग्राम था। वहीं, पिछले महीने की 24 तारीख को चीनी 48 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही थी। यानी 15 रुपये का इजाफा बीते एक महीने में देखने को मिला है। बता दें, पिछले वर्ष इसी समय चीनी का रेट 45.87 रुपये प्रति किलोग्राम था।

    अब 2 महीने में बेचनी होगी इंपोर्टेड चीनी

    चीनी के बढ़ते दामों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने इसके इंपोर्ट से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया है. अब टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत विदेश से आने वाली कच्ची चीनी को पहले रिफाइन्ड चीनी बनाना होगा. फिर इसे देश के बाजार में बेचना जरूरी होगा. सरकार ने इसके लिए दो महीने की डेडलाइन तय की है. यानी इंपोर्ट की गई कच्ची चीनी को देश में आने के 60 दिनों के अंदर प्रोसेस कर बाजारों में बेचना होगा. इस फैसले से चीनी की जमाखोरी पर रोक लगेगी और बाजार में सप्लाई बढ़ाने में मदद मिलेगी। 

    पहले आयात की गई कच्ची चीनी को प्रोसेस करके 31 अक्टूबर 2026 तक बाजारों में बेचने की शर्त थी. अब सरकार ने डेडलाइन और कम कर दी है. यानी नए नियम के तहत बिल ऑफ एंट्री की तारीख से दो महीने के अंदर कच्ची चीनी को रिफाइंड चीनी में बदलकर बाजार में लाना होगा। 

    चीनी के बढ़ते दाम पर सरकार ने क्या एक्शन लिया?
    चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने आयातित कच्ची और रिफाइंड चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं. सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति भी दी है. इससे विदेश से आने वाली चीनी लंबे समय तक गोदामों में नहीं स्टोर की जा सकेगी और जल्द बाजार में लोगों तक पहुंचेगी। 

    देश में कितनी बची है चीनी
    केंद्र सरकार की तरफ से दी जानकारी के अनुसार इस समय कुल 36 लाख टन चीनी देश में है। सरकार को उम्मीद है कि मौजूदा भंडारण और 10 लाख इम्पोर्ट की जा रही चीनी के आने से देश को नए सीजन से पहले किसी भी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    सरकार ने बढ़ाई निगरानी
    चीनी की सप्लाई को लेकर सरकार काफी सतर्क हो गई है। केंद्र और राज्यों की सरकारों की नजर चीनी के भंडारण पर बनी हुई है। इसके अलावा चीनी की जमाखोरी या कीमतों में हेरा-फेरी करने पर भी सरकार की तरफ से चेतावनी दी गई है। बता दें, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन का कहना है कि देश में चीनी की कोई भी किल्लत नहीं है।

    क्या एथेनॉल की वजह से बढ़े चीनी के दाम
    ISMA का कहना है कि अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक कुल 1200 करोड़ लीटर एथेनॉल का प्रोडक्शन हुआ है। इसमें सिर्फ 290 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन गन्ने से हुआ है।

  • चीनी की जमाखोरी पर सरकार का शिकंजा, स्टॉक लिमिट घटाई; कीमतें काबू करने के लिए ड्यूटी-फ्री आयात को भी मंजूरी

    चीनी की जमाखोरी पर सरकार का शिकंजा, स्टॉक लिमिट घटाई; कीमतें काबू करने के लिए ड्यूटी-फ्री आयात को भी मंजूरी

    नई दिल्ली

    त्योहारी सीजन से पहले ही चीनी की बेलगाम होती कीमतों (Sugar Price Hike) को कंट्रोल में लाने के लिए सरकार ने तगड़ा एक्शन लिया है और कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव (Rule Change From Today) किया किया है. सरकार ने कच्ची चीनी के आयात नियमों में संशोधन किया गया, इसके तहत चीनी की जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने 2 महीने के भीतर रिफाइनिंग और बिक्री अनिवार्य की। 

    चीनी पर ये नियम किया लागू 
    चीनी की कीमतों में उछाल के बीच सरकार ने सोमवार को आयात की शर्तों में संशोधन किया और टैरिफ रेट्स कोटा (TRQ) के तहत देश में लाई गई कच्ची चीनी को दो महीने के भीतर सफेद/रिफाइंड चीनी में परिवर्तित करके घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य कर दिया गया है। 

    इससे पहले के नियमों को देखें, तो आयातित कच्ची चीनी को उचित समय सीमा के भीतर और पर्याप्त समय पूर्व संसाधित करना जरूरी था, जिससे इसे 31 अक्टूबर, 2026 तक घरेलू बाजार में बेचा जा सके. अब संशोधित नियमों के तहत प्रोसेसिंग और बिक्री के लिए दो महीने की डेडलाइन तय कर दी गई है। 

    जमाखोरी पर लगाम लगाने वाला एक्शन
    चीनी आयात से जुड़े नियमों में बदलाव (Sugar Import Rule Change) की अधिसूचना वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी की गई है. इसका उद्देश्य आयातित कच्ची चीनी के भंडारण यानी जमाखोरी को रोकना है. इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि आयात से उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द राहत मिल सके. सरकार के इस कदम से चीनी की बढ़ती कीमतों पर कंट्रोल की उम्मीद बढ़ी है। 

    सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति दे दी है और कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम निर्माताओं और इससे जुड़े व्यापारियों और थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट सेट कर दी है. देश के तमाम राज्यों की ओर से केंद्र से चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ एक्शन लेने का आग्रह किया गया था। 

    महीनेभर में इतनी महंगी हुई चीनी
    सरकारी आंकड़ों को देखें, तो सोमवार को अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जो एक महीने पहले के 48.73 रुपये प्रति किलोग्राम से 29 फीसदी अधिक है. अधिकतम खुदरा मूल्य 75 रुपये प्रति किलोग्राम था. फूड सेक्रेटरी संजीव चोपड़ा ने कहा कि मिल से प्राप्त चीनी की कीमतें महज 7 से दस दिनों में 47-48 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं और ये चौकाने वाला उछाल है। 

    चीनी महंगी होने की वजह क्या? 
    Sugar Price Hike के पीछे के कारणों की बात करें, तो इसे लेकर इंडियन शुगर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के चेयरमैन नीरज शिरगांवकर ने कहा है कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है और मौजूदा स्टॉक पर्याप्त है. कीमतें बढ़ने के पीछे मौसम के कारण गन्ने की कम पैदावार, महाराष्ट्र में अधिक क्रशिंग दर और यूपी में किस्मों से जुड़ी समस्याएं हैं। 

    इसके अलावा त्योहारी सीजन के चलते डिमांड तेज होना और ऐसे में ब्राजील ने आपूर्ति कम किए जाने के साथ ही चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी भी बड़ी वजह है. थोक खरीदारों ने स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है, जिससे चीनी बाजार से हट गई है और इसकी कमी पैदा होने से कीमतों में इजाफा हो रहा है।