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  • राहुल गांधी पर कंगना रनौत ने साधा निशाना, दिल्ली प्रदर्शन को लेकर बोलीं- ‘अंगूर खट्टे हैं’

    राहुल गांधी पर कंगना रनौत ने साधा निशाना, दिल्ली प्रदर्शन को लेकर बोलीं- ‘अंगूर खट्टे हैं’

    नई दिल्ली

    राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर CJP का प्रदर्शन चालू है. पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश कर रही है. उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है. गंभीर मुद्दे पर कंगना रनौत ने अपनी राय रखी है. उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा है. जानते हैं कि प्रदर्शन पर कंगना का क्या कहना है। 

    कंगना ने साधा निशाना  
    मीडिया संग बातचीत में कंगना रनौत ने दिल्ली में हो रहे प्रदर्शन पर कहा- देखिए जो देशद्रोही, आतंकी शक्तियां और जो इंटरनेशनल साजिशें हैं. वो हमारे देश के लिए इस वक्त बहुत गंभीर समस्या बन चुकी है. क्योंकि किसी ना किसी तरीके से बहाना चाहे कोई भी हो. देश को और नागरिकों किसी ना किसी तरह की समस्या हो रही है। 

    वो कहती हैं- लेकिन जैसे आज हम आयोध्या जा रहे हैं. श्रीराम जी का आशीर्वाद लेने. जब श्रीराम और हनुमान जी का आशीर्वाद हमारे साथ है. देखिए कितनी शक्तियां हमें तोड़ने के लिए खड़ी हैं, लेकिन सभी भारतवासी एक-दूसरे के साथ खड़े हैं. कितने लोग जो हैं वो इनका पर्दाफाश करने में लगे हुए हैं. देशद्रोही ताकतों का. मैं तो कहती हूं कि पुलिस छोड़िए लोग ही इन्हें पकड़कर इनकी धुलाई करने वाले हैं. क्योंकि लोग परेशान हैं, क्योंकि आए दिन किसी ना किसी वजह से देश को बंद कर दिया जाता है। 

    राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कंगना ने कहा कि 'राहुल गांधी का हक बनता है कि वो राष्ट्रपति को मिलकर आपात्तिजनक चीजें बताएं. हमारे क्लास में भी ऐसा होता था, जो स्टूडेंट फेल हो जाते थे, उन्हें लगता था जो पास हो गया है उसके पास दूसरा पेपर आया था. या टीचर ने उनके साथ किसी तरह की दुश्मनी निकाली है. इलेक्शन से लेकर ABVP तक सारी चीजें बीजेपी जीत रहा है. अब राहुल जी कहते हैं कि अंगूर खट्टा है. पूरा देश हंस रहा है। 

    प्रदर्शन की मांग क्या है
    CJP और कई छात्र संगठनों का ये प्रदर्शन वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं के खिलाफ है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता के सवालों का जवाब दें। 

    CJP ने 7 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस को प्रदर्शन की सूचना दी थी. लेकिन पुलिस ने कहा कि आवेदन कार्यक्रम से बहुत करीब किया गया और पिछले प्रदर्शन में शर्तों का पालन नहीं होने के कारण इजाजत नहीं दी जा रही है। 

  • प्रदर्शन के दौरान पुलिस से कथित धक्का-मुक्की पड़ी भारी, राहुल-प्रियंका समेत कई कांग्रेस नेताओं पर केस

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस से कथित धक्का-मुक्की पड़ी भारी, राहुल-प्रियंका समेत कई कांग्रेस नेताओं पर केस

    नई दिल्ली

    दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ FIR दर्ज की है. दोनों पर प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से कथित तौर पर धक्का-मुक्की करने और सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप है. पुलिस सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। 

    पुलिस के मुताबिक, FIR में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा कांग्रेस के कई अन्य नेताओं और उन पार्टी कार्यकर्ताओं को भी शामिल किया गया है, जिन्होंने बुधवार को हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था. यह मामला प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं के संबंध में दर्ज किया गया है। 

    पुलिस सूत्रों ने बताया कि मामले में लगाए गए आरोपों और प्रदर्शन में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है. पुलिस यह भी देख रही है कि प्रदर्शन के दौरान किन लोगों की ओर से पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर मारपीट या ड्यूटी में बाधा डालने की घटना हुई। 

    कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान बुधवार को पुलिस ने कुल 91 लोगों को हिरासत में लिया था. इनमें कई सांसद और अन्य नेता भी शामिल थे. राहुल गांधी ने बुधवार को INDIA ब्लॉक के नेताओं के साथ सड़क पर प्रदर्शन का नेतृत्व किया था. इसके बाद पुलिस ने उन्हें कई सांसदों के साथ फिर से हिरासत में लिया। 

    FIR में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल किए गए हैं. पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की जांच कर रही है और मामले में शामिल लोगों की भूमिका तय की जा रही है। 

    भोज में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों के सांसद शामिल हुए। समाजवादी पार्टी, शिवसेना (उबाठा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) का कोई प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हुआ।

  • राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर FIR, आकाशवाणी में कथित जबरन प्रवेश से बढ़ा विवाद

    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर FIR, आकाशवाणी में कथित जबरन प्रवेश से बढ़ा विवाद

    नई दिल्ली
     राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। दोनों पर आकाशवाणी भवन में जबरन घुसने का आरोप है। एक दिन पहले ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाला गया था। प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ था। धरना देते हुए राहुल गांधी कई नेताओं के साथ आकाशवाणी भवन के अंदर एक पेड़ के नीचे बैठ गए थे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में भी ले लिया था। अब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ केस भी दर्ज कर लिया गया है।

    FIR होने पर पीछे नहीं हटेंगे
    लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने के मामले में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने हैरानी जताई है। इमरान मसूद ने कहा है कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और उनके साथ सांसद भी। वे कहीं भी जबरदस्ती नहीं घुसे। हम आखिर तक लड़ेंगे। सिर्फ FIR की वजह से हम पीछे नहीं हटेंगे।

    इमरान मसूद ने जताया विरोध
    ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

    बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मंगलवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य सांसद आकाशवाणी भवन परिसर में जमा हुए थे। वे चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। विपक्ष का यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में केंद्रित था, जिसमें विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की।

    काशवाणी भवन परिसर में थे घुसे
    पुलिस की ओर से आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद पहले विपक्ष के नेता सड़क पर बैठ गए और अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। बाद में राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को पुलिस बैरिकेड पर चढ़ते हुए देखा गया। पुलिस की ओर से रोके जाने के बावजूद कांग्रेस नेता और अन्य प्रदर्शनकारी स्वागत द्वार से आकाशवाणी भवन परिसर में घुस गए।

    बिना इजाजत आकाशवाणी भवन में घुसने की मिली थी शिकायत
    दिल्ली पुलिस को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, उनके समर्थकों और उनके साथ मौजूद सांसदों के खिलाफ शिकायत मिली थी कि वे कल शाम बिना इजाज़त आकाशवाणी ऑफिस में घुस गए थे. इसी शिकायत के आधार पर कांग्रेस नेताओं पर प्राथमिकी दर्ज की गई है. मालूम हो कि आकाशवाणी भवन में राहुल गांधी के धरने के दौरान की तस्वीरों में पवन खेड़ा, दीपेंद्र हुड्डा, चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई कांग्रेसी नेता नजर आए थे। 

    आकाशवाणी भवन में 8 घंटे तक धरने पर रहे थे राहुल गांधी
    मालूम हो कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के कई नेता मंगलवार को आकाशवाणी परिसर में करीब 8 घंटे तक धरने पर रहे. बाद में पुलिस ने इन सभी को हिरासत में ले लिया. पुलिस रात करीब आठ बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कांग्रेस तथा कुछ सहयोगी दलों के नेताओं को हिरासत में लेकर उन्हें बस में बैठाकर ले गयी. पार्टी ने बताया कि बाद में, राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया। 

    सुबह विपक्षी सांसदों ने निकाला था मार्च 
    इससे पहले मंगलवार सुबह, विपक्षी ‘इंडिया' गठबंधन के घटक दलों के सांसदों ने संसद मार्ग से निर्वाचन आयोग मुख्यालय तक मार्च निकाला. हालांकि, पुलिस ने उन्हें बीच में ही रोक दिया और कई सांसदों तथा नेताओं को हिरासत में ले लिया. विपक्षी दलों की मांग है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाया जाए और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द किया जाए। 

    पेड़ के नीचे दिखे राहुल-प्रियंका
    प्रदर्शनों के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य सांसदों को आकाशवाणी भवन और नीति आयोग कार्यालय के पास संसद स्ट्रीट पर रोक दिया गया। बाद में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा को परिसर के अंदर एक पेड़ के नीचे बैठे देखा गया।

    हिरासत में लेकर छोड़ दिया
    पुलिस ने पहले ही चेतावनी दी थी कि आकाशवाणी भवन में प्रदर्शन को रातभर जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रदर्शनकारियों को परिसर छोड़ने के लिए कहा गया। पुलिस ने कहा कि इनकार करने वालों को हिरासत में लिया जाएगा। बाद में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका और 'इंडिया ब्लॉक' के अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया था। हालांकि, कुछ घंटों बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था।

  • कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर सपा का पलटवार, SP सिंह पटेल बोले- 50 सीट देना भी बड़ी बात

    कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर सपा का पलटवार, SP सिंह पटेल बोले- 50 सीट देना भी बड़ी बात

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर सीट बंटवारे की चर्चा तेज हो गई है. राज्य में कांग्रेस ने गठबंधन में कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही है. इसी बीच सपा सांसद शिवपाल सिंह पटेल (एसपी सिंह पटेल) ने कांग्रेस की इस मांग पर खुलकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि 150 सीट तो दूर की बात है, कांग्रेस को 50 सीट देना भी बहुत बड़ी बात होगी। 

    सपा सांसद ने कहा कि गठबंधन में सीटों का बंटवारा पार्टियों की राजनीतिक हैसियत, विधायकों-सांसदों की संख्या और संगठन की ताकत को देखकर होना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को यह भी देखना चाहिए कि उसके कितने विधायक और सांसद हैं और जमीनी स्तर पर उसके कार्यकर्ताओं की संख्या कितनी है। 

    उन्होंने पिछली बार के चुनावी प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस को गठबंधन से फायदा मिला. सपा सांसद के मुताबिक अगर कांग्रेस का सपा के साथ गठबंधन नहीं होता तो उसके छह सांसद भी चुनाव नहीं जीत पाते. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पिछले चुनाव से सबक लेना चाहिए। 

    .रायबरेली से राहुल गांधी चुनाव लड़ने से डर रहे थे
    इंटरव्यू में सपा सांसद ने रायबरेली लोकसभा सीट का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ने को लेकर पहले हिचक रहे थे और अखिलेश यादव के समझाने के बाद उन्होंने वहां से चुनाव लड़ा. उन्होंने यह भी दावा किया कि अखिलेश यादव ने राहुल गांधी से कहा था कि अगर वह चुनाव नहीं लड़ेंगे तो सपा अपना उम्मीदवार उतार देगी। 

    सपा सांसद ने गठबंधन के भीतर नेताओं के बयानों को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही. उन्होंने कहा कि सेकंड लाइन के नेताओं के बयान गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकते हैं. उनके मुताबिक पहले गठबंधन में कांग्रेस की वजह से सपा के वोट कटे थे और अगर ऐसा नहीं होता तो सरकार बन सकती थी। 

    अपनी हैसियत के हिसाब से टिकट मांगे कांग्रेस: एसपी सिंह
    एसपी सिंह पटेल ने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक ताकत के हिसाब से सीटों की मांग करनी चाहिए. कितने सांसद और विधायक हैं, कितने सक्रिय कार्यकर्ता हैं और किन क्षेत्रों में संगठन मजबूत है, इन सभी पहलुओं को देखकर सीटों की मांग होनी चाहिए। 

    आपको बता दें कि कांग्रेस की ओर से यूपी की 403 विधानसभा सीटों में कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग सामने आई है. कांग्रेस का कहना है कि गठबंधन में वह 50 फीसदी सीटों की हकदार है और सीट बंटवारे पर अक्टूबर में फैसला होने की उम्मीद है। 

    ऐसे में सपा सांसद का यह बयान सीट शेयरिंग पर दोनों दलों के बीच चल रही खींचतान को और दिलचस्प बना देता है. अब निगाह इस बात पर है कि गठबंधन में सीटों का अंतिम फॉर्मूला क्या निकलता है। 

  • INDIA ब्लॉक की बैठक में क्यों नहीं पहुंचेंगे अखिलेश-उद्धव? SIR पर बनेगी विपक्षी रणनीति

    INDIA ब्लॉक की बैठक में क्यों नहीं पहुंचेंगे अखिलेश-उद्धव? SIR पर बनेगी विपक्षी रणनीति

    नई दिल्ली
    चुनाव आयोग को लेकर जारी घमासान के बीच बुधवार को INDIA ब्लॉक के बड़े नेता दिल्ली में जुटेंगे. मकसद चुनावी मुद्दों पर विपक्ष की साझा रणनीति तय करना है. लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही विपक्षी एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं. कुछ दलों ने बैठक से दूरी बना ली है, तो कुछ ने प्रतिनिधि भेजने का फैसला किया है. बीजेपी को भी विपक्ष पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। 

    बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, AICC महासचिव जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल, TMC की ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी, RJD से तेजस्वी यादव तथा SP, CPI, CPI(M), NCP(SP) और शिवसेना (UBT) जैसी पार्टियों के नेता शामिल होंगे। 

    लेकिन शामिल होने वाले नेताओं से ज्यादा चर्चा इसमें हिस्सा नहीं ले रहे विपक्षी नेताओं की हो रही है। 

    एक तरफ DMK और AAP ने साफ कर दिया है कि वे बैठक का हिस्सा नहीं बनेंगे, वहीं SP प्रमुख अखिलेश यादव भी इसमें नहीं होंगे. शिवसेना से उद्धव ठाकरे भी इसमें नहीं होंगे। 

    अखिलेश जानबूझकर किसी बड़े नेता को नहीं भेज रहे?
    अखिलेश ने UP में राज्यसभा चुनाव के नामांकन को वजह बताया है. साथ ही प्रतिनिधि भेजने की बात कही है. यादव के बैठक में न आने के बारे में पूछे जाने पर वेणुगोपाल ने कहा, 'मैंने अखिलेश यादव से बात की, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी उनसे बात की. उन्हें राज्यसभा चुनाव के नामांकन का काम देखना है, लेकिन उनकी पार्टी के नेता बैठक में शामिल हो रहे हैं। 

    अब सपा की तरफ से INDIA ब्लॉक की मीटिंग में किसी बड़े चेहरे को भेजने की जगह मोहिबुल्लाह नदवी और हरेंद्र मलिक शामिल होंगे. माना जा रहा है कि अखिलेश यादव ने कांग्रेस से नाराजगी जताने का ये तरीका चुना है. गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर इमरान मसूद और कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के बयानों से अखिलेश यादव नाराज हैं और इसे कांग्रेस का दबाव बनाने की रणनीति माना जा रहा है। 

    पार्टी सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव ने जानबूझकर आज का दिन रामगोपाल यादव के नामांकन के लिए चुना, ताकि उनके साथ-साथ रामगोपाल यादव भी इस मीटिंग में ना जा सकें. इसके साथ ही धर्मेंद्र यादव या डिंपल यादव में से भी किसी को इस मीटिंग में नहीं भेजा जा रहा। 

    DMK बोली- विपक्ष का हिस्सा हैं, INDIA ब्लॉक का नहीं
    DMK ने इससे दूरी बना ही ली है.  INDIA गठबंधन की बैठक पर DMK प्रवक्ता TKS एलंगोवन ने कहा, 'दूसरे विपक्षी दल बीजेपी का विरोध करते हैं, हम भी उनके साथ खड़े होंगे. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम साथ हैं. हम INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं हैं.' हालांकि, उन्होंने कहा कि हम INDIA गठबंधन का हिस्सा न सही लेकिन संसद में, जो कोई भी ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव लाएगा, हम उसका समर्थन करेंगे। 

    2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद DMK और कांग्रेस का रिश्ता टूट गया था. क्योंकि चुनाव के बाद कांग्रेस ने एक्टर-नेता विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) को समर्थन दिया. DMK ने इस कदम को धोखा बताया और इसके बाद जून में हुई INDIA ब्लॉक की बैठक से दूर रही. DMK नेताओं का कहना है कि पार्टी विपक्ष का हिस्सा तो है, लेकिन अब कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं है। 

    AAP और कांग्रेस की राह भी अलग
    वहीं अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) में इसमें नहीं होगी. क्योंकि दिल्ली और पंजाब में चुनावी मुकाबलों को लेकर कांग्रेस के साथ रिश्ते बिगड़ने के बाद, AAP जुलाई 2025 में औपचारिक रूप से INDIA गठबंधन से बाहर हो गई थी। 

    दोनों पार्टियों ने दिल्ली, हरियाणा और गुजरात में 2024 का लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ा था, लेकिन पंजाब में वे एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी बनी रहीं. 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव और 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ने के बाद उनके बीच मतभेद और बढ़ गए थे। 

    उद्धव ठाकरे दिल्ली नहीं आएंगे
    उद्धव ठाकरे इस मीटिंग में दिल्ली आकर शामिल नहीं होंगे. उन्होंने बताया कि वे INDIA गठबंधन की बैठक में वर्चुअली शामिल होंगे. बताया जा रहा है कि उद्धव 4 अक्टूबर को मुंबई में होने वाले प्रदर्शन की तैयारियों में जुटे हैं. शिवसेना का ये प्रदर्शन चुनाव आयोग के खिलाफ होगा, इसमें राज ठाकरे की पार्टी भी उनके साथ है। 

    इंडिया ब्लॉक की मीटिंग का क्या एजेंडा
    बैठक में नेता SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर संयुक्त आंदोलन की रणनीति तय करेंगे. साथ ही, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी चर्चा होगी। 

    सूत्रों के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्ताव लाने की नई कोशिश की जा रही है. इसके लिए ड्राफ्ट नोटिस तैयार है. बैठक में इस नोटिस को मंजूरी देने पर चर्चा हो सकती है। 

    INDIA ब्लॉक की पिछली बैठक 8 जून को हुई थी. बीजेपी के खिलाफ एकजुटता पर जोर देते हुए, INDIA ब्लॉक के सदस्यों ने सर्वसम्मति से फैसला किया था कि वे NEET-CBSE विवाद को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करेंगे और SIR प्रक्रिया तथा 'वोट लूट' के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखेंगे। 

  • राहुल गांधी की रणनीति पर असर? थलपति विजय के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल

    राहुल गांधी की रणनीति पर असर? थलपति विजय के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली

    लोकसभा चुनाव 2029 अभी दो साल दूर है, लेकिन तमिलनाडु में इसे लेकर पेच फंसा हुआ है। कुछ महीने पहले ही सत्ता में आए तमिलनाडु सीएम सी. जोसेफ विजय को उनकी पार्टी लगातार पीएम फेस प्रोजेक्ट करने की कोशिश कर रही है। इससे साथी दल कांग्रेस असहज नजर आ रहा है। पिछल कई दिनों से चले आ रहे इस विवाद को दोबारा हवा उस वक्त मिली जब कांग्रेस के पूर्व राज्य प्रमुख के. सेल्वापेरुंथगाई ने तमिलझा वेट्री कड़गम (TVK) के साथ कांग्रेस के गठबंधन पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि कोई भी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन करती है, उसे एक बाद पर सहमत होना चाहिए कि 2029 में राहुल गांधी की पीएम पद के उम्मीदवार होंगे।

    कांग्रेस की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष ने टीवीके के साथ पार्टी के गठबंधन को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अगर वह पीएम फेस को लेकर राहुल गांधी को स्वीकार नहीं करते हैं, फिर उनके साथ गठबंधन करने का मतलब ही क्या है। सेल्वापेरुंथगाई ने साफ किया कि प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गांधी ही दावेदार हैं। पूर्व कांग्रेस राज्य अध्यक्ष के इस बयान सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने टिप्पणी की। हालांकि, उन्होंने थलपति विजय की पार्टी को लेकर नरम रुख अपनाया। उन्होंने मतभेदों को कमतर बताते हुए आने वाले समय में गठबंधन को मजबूत रखने पर सहमति जताई।

    तमिलनाडु के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष पर सांसद का निशाना

    पूर्व तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष की बात का जवाब देते हुए सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने कहा कि पार्टी के पूर्व राज्य प्रमुख को फिलहाल गठबंधन पर बोलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और TVK के रिश्ते को लेकर कोई अनिश्चितता नहीं है और बताया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत दोस्ताना रही है।

    कांग्रेस और टीवीके के बीच में असमंजस की स्थिति
    गौरतलब है दोनों पार्टियों के बीच यह विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब विजय की पार्टी से बड़े नेताओं ने इस तरह के दावे किए थे कि वह अब मुख्यमंत्री नहीं बल्कि प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं। इससे दोनों पार्टियों के बीच में थोड़ी असहज करने वाली स्थिति बनी थी। हालांकि, बाद में दोनों पक्षों की तरफ से सब कुछ ठीक होने का संकेत दिया गया।

    राहुल गांधी की होंगे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार- मणिकम टैगौर
    अभी कुछ दिन पहले तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी ने अपने गठबंधन के नाम पर मुहर लगाने के लिए सभी गठबंधन साथियों को बुलाया था। इस बैठक में कांग्रेस पार्टी के नेता भी पहुंचे थे। इस दौरान तमिलनाडु का कांग्रेस के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने दोनों पक्षों के बीच में सब कुछ ठीक होने के संकेत दिए। इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी की 2029 में कांग्रेस पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे।

    हालांकि, इसके बाद भी दोनों पार्टियों के बीच में एक असहज करने वाली स्थिति बनी हुई है। दोनों पार्टियों के बीच में यह मतभेद इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं। क्योंकि तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके के साथ आ चुकी है। ऐसे में आने वाले लोकसभा चुनाव में भी वह विजय की पार्टी के साथ ही खड़ी नजर आ सकती है।

  • राहुल गांधी की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, PM मोदी पर टिप्पणी को लेकर मानहानि केस रहेगा जारी

    राहुल गांधी की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, PM मोदी पर टिप्पणी को लेकर मानहानि केस रहेगा जारी

    मुंबई

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विवादित टिप्पणियों से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने माना कि भारतीय जनता पार्टी एक पहचान योग्य राजनीतिक संगठन है और इस मामले में शिकायतकर्ता के तौर पर भाजपा कार्यकर्ता की याचिका प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य है. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी के खिलाफ चल रहा आपराधिक मानहानि मामला आगे बढ़ेगा. हालांकि अदालत ने उन्हें छह सप्ताह की अंतरिम राहत भी प्रदान की है। 

    मजिस्ट्रेट के आदेश में हस्तक्षेप से कोर्ट का इनकार
    न्यायमूर्ति नितिन बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि 'मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन आदेश में कोई स्पष्ट अवैधता या गंभीर त्रुटि नहीं दिखती. इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत हस्तक्षेप करने का यह उपयुक्त मामला नहीं है.' कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए समन आदेश में कोई कमी नजर नहीं आती। 

    उच्च न्यायालय ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपा का एक प्रमुख चेहरा हैं और इसलिए उनके खिलाफ की गई किसी भी टिप्पणी का भाजपा के सदस्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता। 

    अदालत ने कहा कि गांधी द्वारा की गई टिप्पणियां व्यक्तिगत प्रकृति की थीं या केवल प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाकर की गई थीं या नहीं, यह सबूतों और गवाहों के बयानों की जांच के बाद मुकदमे के दौरान ही निर्धारित किया जा सकता है। 

    भाजपा कार्यकर्ता की शिकायत को माना सुनवाई योग्य
    राहुल गांधी की ओर से दलील दी गई थी कि उनकी कथित टिप्पणियों में भाजपा या किसी विशेष समूह का नाम नहीं लिया गया था, इसलिए भाजपा कार्यकर्ता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है. हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि भाजपा एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है और एक स्पष्ट रूप से पहचानी जाने वाली संस्था है. कोर्ट ने माना कि प्रारंभिक स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता कि राहुल गांधी की कथित टिप्पणियां केवल भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक सीमित थीं. गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता सुदीप पसबोला और अधिवक्ता कुशल मोर ने दलील दी कि शिकायत निराधार है तथा शिकायतकर्ता को इसे दायर करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था. उन्होंने कहा था कि शिकायतकर्ता इस मामले में पीड़ित पक्ष नहीं है और इसलिए वह ऐसी शिकायत दायर नहीं कर सकता। 

    क्या है पूरा मामला?
    यह मानहानि शिकायत भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमल ने गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में दर्ज कराई थी. शिकायतकर्ता श्रीश्रीमल ने उच्च न्यायालय में गांधी की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सदस्य होने के नाते वह अपने नेता के खिलाफ की गई टिप्पणियों से आहत हैं. शिकायत 2018 में राजस्थान की एक रैली में राहुल गांधी द्वारा दिए गए कथित बयान को लेकर की गई थी. शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया था. महेश श्रीश्रीमल का कहना था कि इन टिप्पणियों से न केवल प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची, बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं को भी गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया। 

    2019 में जारी हुआ था समन
    शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद मजिस्ट्रेट अदालत ने अगस्त 2019 में राहुल गांधी को समन जारी किया था. इसके बाद राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए समन आदेश और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। 

    सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए मिली राहत
    हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी, लेकिन उन्हें तत्काल राहत भी दी है. अदालत ने छह सप्ताह तक मजिस्ट्रेट अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से संरक्षण प्रदान किया है, ताकि वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकें। 

  • इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम की जोरदार तैयारी, 20 हजार से ज्यादा पंजीयन से बढ़ा उत्साह

    इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम की जोरदार तैयारी, 20 हजार से ज्यादा पंजीयन से बढ़ा उत्साह

    इंदौर 

    19 सितंबर को इंदौर में होने वाले राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए कांग्रेस नेताओं ने कमर कस ली है। इस आयोजन में न तो कांग्रेस के नेता राहुल के साथ मंच साझा करेंगे और न ही कांग्रेस का झंडा आयोजन में कहीं नजर आएगा, लेकिन पर्दे के पीछे कांग्रेस नेता इस आयोजन की बागडोर संभाले हुए हैं। विद्यार्थियों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का विकल्प दिया गया है। इसमें अब तक 20 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों के रजिस्ट्रेशन की बात कही जा रही है। इस आयोजन में 70 हजार से ज्यादा लोगों के जुटने की उम्मीद है। आयोजन स्थल को भी समतल किया जा रहा है, लेकिन शुक्रवार को हुई बारिश की वजह से काम रुक गया। पहले यह कार्यक्रम इंदौर के नेहरू स्टेडियम में होना था, लेकिन वहां नगर निगम ने इसकी अनुमति नहीं दी।

    गैर-राजनीतिक आयोजन बता रही कांग्रेस
    राहुल गांधी के 19 सितंबर के आयोजन को कांग्रेस नेता गैर-राजनीतिक बता रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा को इस आयोजन को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए। राहुल गांधी शामिल युवाओं से उनके सपनों, शिक्षा के अधिकार और शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद करेंगे। इस कारण इसे 'छात्रों की गूंज' नाम दिया गया है, लेकिन भाजपा ने स्टेडियम नहीं देकर छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश की है।

    विजयवर्गीय को भी आमंत्रण देगी कांग्रेस

    आयोजन की तैयारियों को लेकर बैठक हो रही थी। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने इस आयोजन में शामिल होने के लिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भी आमंत्रण पत्र भेजने की बात कही। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को दी है।

  • जो लोग खुद को नामदार मानते, वे कामगारों के बारे में कैसे सोच सकते: बृजलाल

    जो लोग खुद को नामदार मानते, वे कामगारों के बारे में कैसे सोच सकते: बृजलाल

    राहुल गांधी का चायवाला बयान दलितों का अपमान: बृजलाल 

    चाय की दुकानों पर अलग गिलास का दावा सरासर झूठ, कांग्रेस नेता ने बनाया फर्जी नैरेटिव: राज्यसभा सदस्य

    जो लोग खुद को नामदार मानते, वे कामगारों के बारे में कैसे सोच सकते: बृजलाल

    दलितों का अपमान करना कांग्रेस की खानदानी परंपरा, बृजलाल ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

    लखनऊ
     कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चाय की दुकानों पर दलितों के लिए अलग गिलास रखे जाने वाले बयान पर राज्यसभा सदस्य ब्रजलाल ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को दलितों का अपमान बताते हुए कहा कि चाय की दुकानों पर दलितों और सवर्णों के लिए अलग-अलग गिलास रखने की बात सरासर झूठ और बे-सिर-पैर का फर्जी नैरेटिव है। आज स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए मिट्टी के कुल्हड़ और कागज के गिलास का इस्तेमाल बढ़ा है, जिन्हें एक बार प्रयोग के बाद फेंक दिया जाता है।

    राज्यसभा सदस्य बृजलाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारीगरों और कामगार जातियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना शुरू की। कांग्रेस ने 60 वर्ष से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बावजूद इन कामगार और वंचित वर्गों के बारे में नहीं सोचा। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग खुद को नामदार मानते हैं, वे कामगारों के बारे में कैसे सोच सकते हैं।

    चाय के गिलास का बयान दलितों की गरिमा पर चोट

    बृजलाल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के चाय के गिलास वाले बयान ने दलित समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। कांग्रेस और गांधी परिवार पर दलितों के प्रति उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि ‘दलितों का अपमान करना कांग्रेस की खानदानी परंपरा रही है। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल से जुड़े कई राजनीतिक प्रसंगों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं करने का आरोप लगाया। 1946 में संविधान सभा के चुनाव में कांग्रेस ने बाबा साहब को हराने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। 

    राहुल गांधी अपनी मोहब्बत की दुकान में जहर बेच रहे

    बृजलाल ने राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि वह अपनी मोहब्बत की दुकान में जहर बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से समाज में भ्रम और विभाजन पैदा होता है। इसलिए उन्हें को पहले देश के दलित समाज की गरिमा और वास्तविक समस्याओं को समझना चाहिए।

  • राहुल गांधी संभालेंगे पंजाब कांग्रेस की कमान! कलह खत्म कराने 135 किमी की यात्रा, चन्नी-वड़िंग संग दिखेंगे

    राहुल गांधी संभालेंगे पंजाब कांग्रेस की कमान! कलह खत्म कराने 135 किमी की यात्रा, चन्नी-वड़िंग संग दिखेंगे

    चंडीगढ़ 

    पंजाब में कांग्रेस विधानसभा चुनाव से पहले एक यात्रा निकालने वाली है. पंजाब के प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल ने इस बारे में राहुल और प्रियंका गांधी से मुलाकात की है. राहुल ने बघेल को इस यात्रा का पूरा रोडमैप तैयार करके आने के लिए कहा है. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सितंबर के पहले हफ्ते में यह यात्रा शुरू होगी. राहुल गांधी पहले अमृतसर के हरमंदिर साहिब में मत्था टेकेंगे और फिर यात्रा की शुरुआत की जाएगी. यह यात्रा बस से की जाएगी और 135 किलोमीटर की होगी. यह 135 किलोमीटर की यात्रा पंजाब के तीनों खित्तों यानी माझा, दोआब और मालवा से होकर गुजरेगी। 

    पार्टी को एकजुट करना है यात्रा का मकसद
    राहुल गांधी की इस बस यात्रा का मकसद पंजाब में बुरी तरह बंटी हुई कांग्रेस को एकजुट करना है. कांग्रेस की पंजाब में सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी एक दूसरे को पसंद नहीं करते हैं और एक दूसरे को देखना तक नहीं चाहते हैं. कांग्रेस आलाकमान ने अभी तक यह साफ कर दिया है कि प्रदेश अध्यक्ष नहीं बदला जाएगा और किसी भी नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा के तौर पर पेश नहीं किया जाएगा. लेकिन पंजाब में कांग्रेस नेताओं की गुटबाजी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. कांग्रेस की दिक्कत ये है कि चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मिलकर एक गुट बना लिया है और प्रदेश अध्यक्ष राजा वाडिंग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। 

    कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कई बार इन नेताओं को अकेले में और एक साथ बैठा करके भी मुलाकात कर चुके हैं. लेकिन नतीजा कुछ निकला नहीं. यहां तक जब पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल 'हर बूथ कांग्रेस मजबूत' जैसा कार्यक्रम पूरे पंजाब में कर रहे थे तो वहां पोस्टर में बघेल की तुलना जनरल डायर से की गई, तो राजा वाडिंग के सर्मथकों ने चन्नी को बीजेपी-आरएसएस का एजेंट बताया. पंजाब में कांग्रेस ने एक परिवार एक टिकट का भी नियम बनाया है उसको लेकर भी नेताओं में नाराजगी बताई जा रही है।

    कांग्रेस के सामने बड़ी चुनाैती
    राहुल की यात्रा से पहले चन्नी और वड़िंग दोनों खेमों को साथ लाना कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। पार्टी स्तर पर इसे पंजाब बचाओ यात्रा नाम देने और अमृतसर से शुरू करने की तैयारी चल रही है। राहुल गांधी पंजाब दौरे के दौरान बस यात्रा के लिए सहमत हो गए हैं। पंजाब कांग्रेस जल्द ही इस संदर्भ में शेड्यूल जारी करेगी। 

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, यात्रा के दौरान राहुल गांधी श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेकेंगे। इसके बाद वे करीब 135 किलोमीटर का सफर करेंगे। इसमें माझा, दोआबा और मालवा के कार्यकर्ताओं व स्थानीय नेताओं से संवाद किया जाएगा। इस यात्रा का मकसद चुनावी अभियान को गति देना और संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना है। साथ ही कांग्रेस की एकजुट तस्वीर पेश करना भी इसका लक्ष्य है।

    एक बस में दिखेंगे बड़े नेता?
    यात्रा की सबसे बड़ी राजनीतिक अहमियत यह होगी कि इसमें प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रताप सिंह बाजवा समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश होगी। यह तस्वीर पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल वड़िंग और चन्नी खेमों के बीच खींचतान खुलकर सामने आ चुकी है। 

    राहुल की बस यात्रा के तीन मकसद

        पहला पंजाब के नेताओं की एकजुट तस्वीर पेश करना. कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के साथ बस में चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष वाडिंग तो होंगे ही साथ में पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा भी रहेंगे. यानी राहुल गांधी एक बाजू में चन्नी और दूसरे बाजू में राजा वाडिंग को लेकर 'ऑल इज़ वेल' का संदेश देंगे। 

        दूसरा इस यात्रा का मकसद संगठन को सक्रिय करना है जिससे कि कार्यकर्ताओं में संदेश जाए कि उपर के लेवल पर सब ठीक हो गया है। 

        इस यात्रा का तीसरा मकसद है पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार की विधिवत शुरुआत करना। 

    कांग्रेस के सूत्र यह भी बता रहे हैं कि राहुल गांधी की यह यात्रा जो अमृतसर से हुसैनीवाला तक जाएगी पहली यात्रा होगी और अगली यात्रा इस यात्रा की सफलता पर निर्भर होगी. इसके अलावा कांग्रेस आलाकमान पंजाब के नेताओं को टिकट बांटने में भी अहम भूमिका देने पर विचार कर रही है। 

    राहुल गांधी शुरू करेंगे बस यात्रा
    प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पहले चरण में बस यात्रा हुसैनीवाला तक करीब 135 किमी का सफर तय करेगी। इस यात्रा में राहुल गांधी प्रदेश कांग्रेस नेताओं के साथ करीब 30 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं से उनकी समस्याओं पर चर्चा करेंगे। बस यात्रा के दौरान कांग्रेस उन विधानसभा क्षेत्रों पर खास ध्यान देगी, जहां वर्ष 2022 के चुनाव में बहुत कम अंतर के साथ हार का सामना करना पड़ा था।

    मालवा क्षेत्र की 69 सीटों पर पार्टी का खास ध्यान
    पंजाब विधानसभा चुनाव में मालवा का अपना महत्व है। प्रदेश की 117 में से 69 सीटें इसी क्षेत्र से आती है। माना जाता है कि जो पार्टी इस क्षेत्र में अपना परचम लहराती है, प्रदेश में वही सरकार बनाती है। वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी ने यहां 67 में से 64 सीट पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस को दो और अकाली दल को एक सीट मिली थी। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यहां अपना प्रदर्शन सुधारते हुए खोई हुई जमीन वापस हासिल करने में काफी हद तक सफल रही। पार्टी ने मालवा की आठ लोकसभा में चार सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। तब पार्टी ने 19 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल की थी।

    सर्वदलीय बैठक में उठाया जाए परिसीमन मुद्दा: खरगे
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया कि परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। साथ ही कहा कि किसी भी प्रस्ताव को संसद में पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों तथा राज्य सरकारों को उस पर विस्तार से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। कांग्रेस अध्यक्ष ने इस बात का उल्लेख किया कि उन्होंने इससे पहले 16 जुलाई 2026 को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सरकार के परिसीमन संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था।

    खरगे ने परिसीमन को लेकर तीन मांगें रखते हुए कहा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखी जाए, लोकसभा में राज्यों के लिए मौजूदा सीटों का आवंटन अगले 25 वर्षों तक कायम रखा जाए।

    क्या खत्म होगी कांग्रेस में गुटबाजी?
    लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि राहुल गांधी की बस यात्रा से क्या पंजाब कांग्रेस का संकट या गुटबाजी खत्म हो जाएगी. कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि अगर पंजाब में राहुल की यात्रा खत्म होने तक इन नेताओं ने अपना झगड़ा खत्म नहीं किया तो फिर कांग्रेस नेतृत्व कुछ कठोर फैसले पर मजबूर होगा. भले ही इससे पार्टी को नुकसान हो. वैसे भी कांग्रेस 2017 में 77 सीटें लेकर सत्ता में आई थी जो 2022 में घट कर 18 सीट रह गई है, तब चन्नी के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा गया था. वही मुख्यमंत्री थे. लेकिन लोकसभा चुनाव में लोगों ने कांग्रेस पर भरोसा जताया और 13 में से 7 सांसद कांग्रेस से जीते.अभी चरणजीत सिंह चन्नी,राजा वाडिंग और सुखजिंदर सिंह रंधावा तीनों सांसद हैं. मगर विधानसभा चुनाव से पहले इन तीनों नेताओं को एकजुट करना कांग्रेस नेतृत्व के लिए अभी तक चुनौती बना हुआ है।