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  • अस्पताल में 6 घंटे बिजली गुल, मरीज परेशान; ग्वालियर में 7 ऑपरेशन टले, एक्स-रे-CT जांच भी प्रभावित

    अस्पताल में 6 घंटे बिजली गुल, मरीज परेशान; ग्वालियर में 7 ऑपरेशन टले, एक्स-रे-CT जांच भी प्रभावित

    ग्वालियर.

    जिला अस्पताल मुरार में शनिवार को करीब छह घंटे बिजली गुल रहने से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। बिजली आपूर्ति बाधित होने का सबसे ज्यादा असर ऑपरेशन, जांच और ब्लड बैंक पर पड़ा।

    नेत्र और सर्जरी विभाग में ऑपरेशन के लिए चिन्हित सात मरीजों के ऑपरेशन टालने पड़े। इनमें नेत्र विभाग में चार और सर्जरी विभाग के तीन मरीज शामिल हैं। वहीं एक्स-रे और सीटी जांच भी घंटों बंद रही। जांच के लिए इंतजार कर रहे कई मरीज बिजली नहीं आने पर बिना जांच कराए ही वापस लौट गए।

    बिना बिजली मरीज रहे परेशान
    जनरेटर से सीटी जांच के लिए बिजली सप्लाई शुरू की गई, इसके बाद जांच हो सकीं। बिजली गुल होने के दौरान अस्पताल के ओपीडी हिस्से में जनरेटर से आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन अस्पताल के अन्य हिस्सों में बिजली नहीं होने से मरीज और उनके स्वजन परेशान होते रहे। आर्थोपेडिक विभाग के पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती मरीज गर्मी से बेहाल नजर आए। पंखे और कूलर बंद होने के कारण स्वजन हाथ के पंखे से मरीजों को हवा करते दिखाई दिए। ऑपरेशन के बाद मरीजों को इस वार्ड में शिफ्ट किया जाता है ऐसे में संक्रमण का खतरा बना रहा।

    ब्लड बैंक में तापमान नियंत्रण बिगड़ा
    बिजली गुल होने से ब्लड बैंक में भी तापमान नियंत्रित रखने की व्यवस्था प्रभावित हुई। ब्लड खराब होने की आशंका को देखते हुए ब्लड बैंक प्रभारी ने अस्पताल प्रबंधन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद ब्लड बैंक के लिए आरएमओ डॉक्टर जेपीएन शर्मा, सहायक प्रबंधक डॉक्टर राजेश बिरथरिया ने जनरेटर से अस्थायी बिजली व्यवस्था कराई। हालांकि, इस दौरान रक्त लेने पहुंचे मरीजों के स्वजन को भी इंतजार करना पड़ा।

    रोजाना 150 एक्स-रे, छह घंटे बाद शुरू हुई जांच
    अस्पताल में ओपीडी के दौरान रोजाना करीब 150 एक्स-रे किए जाते हैं। शनिवार को बिजली गुल रहने के कारण एक्स-रे जांच करीब छह घंटे प्रभावित रही। बिजली बहाल होने के बाद ही एक्स-रे सहित अन्य जांच दोबारा शुरू हो सकीं।

  • कुम्हारी में बिजली संकट, नपा के पंप हाउस और स्ट्रीट लाइटों के कनेक्शन कटे

    कुम्हारी में बिजली संकट, नपा के पंप हाउस और स्ट्रीट लाइटों के कनेक्शन कटे

    भिलाई नगर.

    कुम्हारी नगर पालिका क्षेत्र में विद्युत विभाग ने 8 करोड़ बकाया बिल के चलते कार्रवाई करते हुए लगभग 20 प्रमुख स्थानों का बिजली कनेक्शन काट दिया। बिजली कटने की वजह से शहर में सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और खेल गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

    मिली जानकारी के अनुसार, पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल के दौरान कुम्हारी नगर पालिका पर विद्युत विभाग का बकाया बिल लगभग 5 करोड़ रुपये था। समय पर भुगतान न होने और बकाया राशि जमा न किए जाने के कारण यह राशि बढ़कर अब लगभग 8 करोड़ रुपये हो चुकी है। विद्युत विभाग द्वारा बार-बार नोटिस जारी करने के बावजूद बकाया राशि का भुगतान न किए जाने पर विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए 23 सितंबर को बिजली काटने की कार्रवाई की है। बिजली कनेक्शन काटे जाने का सीधा असर स्थानीय युवाओं पर पड़ा है।

    अटल परिसर तथा बैडमिंटन कोर्ट का बिजली कनेक्शन काट दिए जाने के कारण यहां रोजाना बैडमिंटन खेलने और अभ्यास करने आने वाले दर्जनों युवा साथी खेल सुविधाओं से वंचित हो गए हैं। वहीं कुम्हारी के सबसे प्रमुख स्थानों में से एक, स्टेशन चौक स्थित ओवरब्रिज के नीचे पूरी तरह से अंधेरा पसरा हुआ है, जिससे रात के समय आवाजाही करने वाले लोगों को दुर्घटना और सुरक्षा का भय सताता रहता है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे लगी कई स्ट्रीट लाइटें भी पिछले कई महीनों से बंद पड़ी हैं, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

    बुनियादी सुविधाओं पर पड़ा असर:
    बिजली विभाग की इस कार्रवाई की गाज शहर की बुनियादी सुविधाओं पर भी गिरी है। कुम्हारी के सभी सार्वजनिक शौचालयों, पंप हाउसों और अन्य लगभग 20 महत्वपूर्ण स्थानों का बिजली कनेक्शन काट दिया गया है। पंप हाउस बंद होने से कई वार्डों में पेयजल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय नागरिकों ने कहा है कि इस समस्या का शीघ्र समाधान निकाला जाए और बिजली आपूर्ति जल्द बहाल की जाए।

  • रोपड़ का तीसरा यूनिट बंद, पंजाब में बिजली संकट पर आज शिअद का प्रदर्शन

    रोपड़ का तीसरा यूनिट बंद, पंजाब में बिजली संकट पर आज शिअद का प्रदर्शन

    पटियाला
     राज्य में भीषण गर्मी के बीच बिजली की खपत नित नए रिकॉर्ड बना रही है, लेकिन दूसरी ओर बिजली उत्पादन व्यवस्था चरमराती दिख रही है। पटियाला से मिली जानकारी के अनुसार, बिजली संकट से जूझ रहे पावरकॉम को एक और बड़ा झटका लगा है। बुधवार सुबह रोपड़ थर्मल प्लांट का एक और यूनिट तकनीकी खराबी के कारण अचानक बंद हो गया।

    इस नए संकट के बाद अब रोपड़ थर्मल प्लांट के कुल चार में से तीन यूनिट पूरी तरह से ठप पड़ चुके हैं। कुल 840 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाले इस महत्वपूर्ण प्लांट से इस समय पावरकॉम को महज 120 मेगावाट बिजली ही हासिल हो पा रही है। प्लांट के अधिकांश यूनिट बंद होने से राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर बेहद बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    बिजली जनरेशन कम होने से कई इलाकों में लोगों को अघोषित बिजली कटों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ बाजारों में सप्लाई लाइन ठीक न होने से रोजाना तारों में स्पार्किंग हो रही है। घंटों तक बिजली बंद रहती है।

    लुधियाना के चौड़ा बाजार स्थित हजूरी रोड पर मंगलवार देर रात तारों में भयानक स्पार्किंग हुई और इलाके की लाइट गुल हो गई। सुबह तक इलाके में बिजली गुल रही। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लग रहे बिजली कटों के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल आज डिप्टी कमिश्नर दफ्तर लुधियाना में प्रदर्शन करेगा।

    राहत: प्राइवेट सेक्टर के दोनों थर्मल प्लांट एक्टिव
    दूसरी तरफ, राहत की बात केवल इतनी है कि प्राइवेट सेक्टर के दोनों बड़े थर्मल प्लांट, यानी राजपुरा और तलवंडी साबो, अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, सरकारी प्लांट के यूनिट बार-बार ठप होने से बिजली की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है।

    मांग तोड़ रही रिकॉर्ड
    गौरतलब है कि मौजूदा सीजन में राज्य के भीतर बिजली की मांग 17,300 मेगावाट से भी ऊपर पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा राज्य के पावर सेक्टर के इतिहास में अब तक किसी एक दिन की सबसे ज्यादा मांग का नया रिकॉर्ड है।

    इतनी भारी मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम को अब मुख्य रूप से सेंट्रल सेक्टर से बिजली की भारी खरीद पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अगर जल्द ही रोपड़ प्लांट के खराब यूनिट्स को ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आम जनता को लंबे पावर कट का सामना करना पड़ सकता है।

    पंजाब में बिजली की डिमांड-सप्लाई व जनरेशन के बारे में जानिए…

        प्राइवेट प्लांटों में पूरी कैपेसिटी से बन रही बिजली: पंजाब में प्राइवेट थर्मल प्लांटों से बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 3,380 मेगावाट है। इसमें से 1,980 मेगावाट बिजली का उत्पादन तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के 3 यूनिटों में होता है। प्रत्येक यूनिट में 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
        1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही
    : तलवंडी साबो में आजकल कुल 1,700 मेगावाट के आसपास बिजली पैदा हो रही है। वहीं, दूसरा प्राइवेट थर्मल प्लांट राजपुरा में है, जिसमें दो यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट है। इसमें आजकल 1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही है।

        तीन में से एक प्लांट की स्थिति चिंताजनक: पंजाब में 3 सरकारी थर्मल प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,300 मेगावाट बिजली उत्पादन की है। रोपड़ थर्मल प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 840 मेगावाट है। इसमें 4 यूनिट हैं। दो यूनिट कल से बंद हैं। जो दो यूनिट चालू हैं, वे भी पूरी क्षमता से नहीं चल रहे।

        लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट: रोपड़ में कुल 200 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं, लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट हैं। आज चारों यूनिट चल रहे हैं। इसकी कुल क्षमता 920 मेगावाट है और आज यहां 805 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। गोइंदवाल में तीसरा सरकारी थर्मल प्लांट है, जिसमें 2 यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 520 मेगावाट है। आज एक यूनिट में करीब 430 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

        हाइड्रो प्रोजेक्टों से मदद मिल रही: पंजाब में छोटे-बड़े हाइड्रो प्रोजेक्टों से रात में 830 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है और दिन में इसे घटाकर 500 मेगावाट के आसपास रखा जा रहा है। बिजली संकट को कम करने में हाइड्रो प्रोजेक्टों का इस समय अहम योगदान निभा रहा है।

        सोलर प्रोजेक्ट से रात में बिजली नहीं बन रही: पंजाब में सोलर प्रोजेक्ट्स के जरिए दोपहर के समय 450 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। रात के समय सोलर प्रोजेक्ट्स से बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से रात के समय बिजली संकट ज्यादा गहरा रहा है।

        केंद्रीय पूल से बड़ी मात्रा में बिजली खरीद: पंजाब में इन दिनों बिजली की डिमांड 16,000 मेगावाट के पार चल रही है। एक तरफ बिजली की डिमांड बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्पादन में कमी आ रही है। डिमांड और उत्पादन के गैप को कम करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) केंद्रीय पूल से बिजली ले रहा है।

        महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर: PSPCL केंद्रीय पूल से करीब 11,700 मेगावाट तक बिजली खरीद रहा है। PSPCL को केंद्रीय पूल से महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बिजली कट लग रहे हैं। आगे स्थिति और खराब हुई तो लोगों को गर्मी में बिजली के लंबे कटों का सामना करना पड़ेगा।

    बाजार में स्पार्किंग से आग लगने का खतरा हजूरी रोड के दुकानदार मोहित का कहना है कि पूरी मार्केट में तारों का जाल बिछा हुआ है। हल्की सी हवा या बरसात होती है तो स्पार्किंग शुरू हो जाती है। उनका कहना है कि कई बार अफसरों को इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। यह पूरी मार्केट कपड़ों की है। इस तरह स्पार्किंग होने से कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने बताया कि देर रात से सुबह तक बिजली सप्लाई बंद रही। अफसरों को फोन कर रहे हैं, तो वे फोन नहीं उठा रहे।

  • पंजाब का बिजली संकट बना सियासी मुद्दा, किसान-उद्योगपति का प्रदर्शन; पावरकॉम CMD पर गिरी गाज

    पंजाब का बिजली संकट बना सियासी मुद्दा, किसान-उद्योगपति का प्रदर्शन; पावरकॉम CMD पर गिरी गाज

    जालंधर

    पंजाब में बिजली कटौती को लेकर हाहाकार मच गया है। बिजली कटों से परेशान लोगों सड़कों पर उतर आए। वहीं राजनीतिक दलों ने भी सरकार का विरोध किया। लगातार बढ़ते विरोध के बीच सरकार ने पीएसपीसीएल के सीएमडी आईएएस बसंत गर्ग को हटा दिया और उनकी जगह गुरकीरत किरपाल सिंह को नया सीएमडी नियुक्त कर दिया। 

    सरकार का दावा-संकट खत्म
    वहीं विरोध के बीच बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया कि पंजाब ने बिजली संकट पर काबू पा लिया है। 13 सितंबर सुबह सात बजे से बिजली की कमी के कारण कोई कट नहीं लगाया गया और आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक तथा कृषि क्षेत्र को 24 घंटे बिजली मिल रही है। 

    सौंद के अनुसार, दो निजी ताप विद्युत संयंत्रों की तकनीकी खराबियां दूर कर दी गई हैं और एक अन्य निजी प्लांट से करीब 100 मेगावाट बिजली मिलनी शुरू हो गई है। किसानों को सिंचाई के लिए आठ के बजाय 10 घंटे बिजली देने का भी दावा किया गया। उन्होंने बिजली संकट के लिए केंद्र से कोयले में कटौती और पंजाब के हिस्से की करीब 1,000 मेगावाट बिजली नहीं मिलने को भी कारण बताया। मंत्री ने कहा कि राज्य के पास करीब 17,000 मेगावाट तक की मांग पूरी करने की क्षमता है।

    जगह-जगह फूटा गुस्सा
    सोमवार को पटियाला में पावरकॉम मुख्यालय की ओर बढ़ रहे कांग्रेसियों को रोकने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारें मारीं और प्रदेश कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया। जगरांव में किसानों ने चार घंटे धरना देने के बाद जगरांव-जालंधर मार्ग जाम कर दिया। फरीदकोट में भी किसानों ने पावरकॉम कार्यालय का घेराव किया। 
     
    लुधियाना में डाइंग उद्योगपतियों ने वर्धमान चौक पर लुधियाना-चंडीगढ़ रोड जाम किया। उन्होंने रोजाना करीब 14 घंटे बिजली कटौती का आरोप लगाया। उद्योगपतियों के अनुसार इससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है और श्रमिक फैक्टरियां छोड़ रहे हैं। उन्होंने बिजली की दर करीब आठ से बढ़कर 9.50 रुपये प्रति यूनिट होने और एक फैक्टरी का बिल 15 लाख से बढ़कर 18 लाख रुपये तक पहुंचने का दावा किया।

    रिकॉर्ड 17,405 मेगावाट मांग, 1,478 मेगावाट उत्पादन ठप
    पंजाब में सोमवार को बिजली की मांग 17,405 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। 18 जुलाई को 17,452 मेगावाट की सर्वाधिक मांग दर्ज हुई थी। मांग के दबाव के बीच करीब 1,478 मेगावाट उत्पादन क्षमता प्रभावित रही। रोपड़, लहरा मोहब्बत और तलवंडी साबो थर्मल की कुछ इकाइयां कम क्षमता पर चलीं, जबकि पानी की कमी से हाइडल की पांच इकाइयां बंद रहीं। पावरकॉम के मुताबिक इसके बावजूद उद्योग, शहर और गांव में कोई कट नहीं लगाया गया।   

     

  • पंजाब में बिजली कटौती से मिलेगी राहत? CM मान बोले- 5 थर्मल प्लांटों को पर्याप्त कोयला मिलेगा

    पंजाब में बिजली कटौती से मिलेगी राहत? CM मान बोले- 5 थर्मल प्लांटों को पर्याप्त कोयला मिलेगा

     चंडीगढ़
    पंजाब में बिजली संकट को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि प्रदेश में बिजली की समस्या अब खत्म होने वाली है। उन्होंने कहा कि झारखंड की कोयला खदानों में बाढ़ का पानी भरने के कारण कोयले की शॉर्टेज हुई थी, जिसका असर पूरे देश में बिजली उत्पादन पर पड़ा।

    पंजाब भी इससे अछूता नहीं रहा, लेकिन अब कोयले की उपलब्धता को लेकर रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में उनकी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत हुई है। वह खुद भी दो-चार दिन बाद रांची जाकर हेमंत सोरेन से मुलाकात कर उनका धन्यवाद करेंगे।

    उन्होंने कहा कि झारखंड की पचवाड़ा कोयला खदान से मिलने वाला कोयला केवल सरकारी थर्मल प्लांटों में इस्तेमाल किया जा सकता है। पंजाब के दो निजी थर्मल प्लांटों को इस व्यवस्था के तहत कोयला उपलब्ध नहीं हो पा रहा था।

    मान ने बताया कि पंजाब सरकार ने कोल इंडिया से अनुरोध किया था कि निजी थर्मल प्लांटों को भी कोयला उपलब्ध करवाया जाए। कोल इंडिया ने इस पर सहमति दे दी है। अब झारखंड सरकार की स्थानीय स्तर पर जरूरी मंजूरी भी मिल गई है। इससे पंजाब के पांचों थर्मल प्लांटों को आने वाले दिनों में पर्याप्त कोयला मिल सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कोयले की उपलब्धता बढ़ने के साथ बंद पड़ी बिजली उत्पादन इकाइयों को भी चलाने में मदद मिलेगी और प्रदेश में बिजली की स्थिति सामान्य होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट किसी एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि झारखंड की खदानों में बाढ़ के कारण पूरे देश में कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई थी।

    मनप्रीत बादल पर भी साधा निशाना
    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मनप्रीत बादल को किसी एक पार्टी में रहना चाहिए, क्योंकि आज बहुत ज्यादा पार्टियां हो गई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मनप्रीत बादल आजकल किस पार्टी में हैं।

    पिछले साल से 3500 मेगावाट ज्यादा मांग
    सौंद ने कहा कि सितंबर में इस वर्ष पंजाब की बिजली मांग पिछले वर्षों की तुलना में करीब 3500 मेगावाट अधिक है। इसके बावजूद पावरकाम की ओर से उपलब्ध सभी स्रोतों से अधिकतम स्तर पर बिजली उत्पादन करवाया जा रहा है।

    हालांकि राज्य में बिजली की मांग लगातार 16 हजार मेगावाट के पार बनी हुई है। पिछले कुछ दिनों की तुलना में बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन मांग में अपेक्षित कमी नहीं आई है। ऐसे में बिजली आपूर्ति को लेकर सरकार और पावरकाम के सामने चुनौती अभी भी बनी हुई है।

    उद्योग और किसान जता चुके हैं नाराजगी
    बिजली कटौती को लेकर पंजाब का औद्योगिक क्षेत्र लगातार चिंता जताता रहा है। खासकर रात के समय बिजली प्रतिबंध और उत्पादन प्रभावित होने से उद्योगों की लागत और डिलीवरी शेड्यूल पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। 

    किसानों की ओर से भी धान के सीजन में पर्याप्त बिजली आपूर्ति की मांग लगातार उठाई जाती रही है। ऐसे में बिजली मंत्री का पावर कट खत्म होने का दावा उद्योग और कृषि क्षेत्र के लिए राहत की खबर है। हालांकि 16 हजार मेगावाट से अधिक की लगातार मांग के बीच अगले दिनों में निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना पावरकाम के लिए बड़ी चुनौती होगी।

     

  • मानसून की बेरुखी से बांधों का जलस्तर घटा, पंजाब में बिजली की मांग बढ़ी; मंत्री ने कट को लेकर दिया बड़ा अपडेट

    मानसून की बेरुखी से बांधों का जलस्तर घटा, पंजाब में बिजली की मांग बढ़ी; मंत्री ने कट को लेकर दिया बड़ा अपडेट

    लुधियाना

    लुधियाना में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि किसानों को 10 घंटे बिजली मिल रही।लुधियाना में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया कि पंजाब में अब बिजली के लंबे कट नहीं लगेंगे, कल यानी 15 सितंबर से कट लगने बंद हो जाएंगे। प्राइवेट बिजली प्लांट भी सरकार ने ठीक करवाए हैं। इसके लिए करीब 200 सरकारी मुलाजिम लगाए।

    मंत्री ने कहा कि किसानों को पहले की तुलना में ज्यादा बिजली दी जा रही है। अब 8 घंटे की बजाय किसानों को 10 घंटे बिजली मिल रही है। उन्होंने बताया कि इस साल पिछले साल की तुलना में बिजली की डिमांड 3,500 मेगावाट ज्यादा है।

    इधर, बिजली की डिमांड लगातार 16 हजार मेगावाट के पार बनी हुई है। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) इस समय अलग-अलग स्रोतों से अधिकतम स्तर पर बिजली पैदा करवा रहा है। कायले की कमी के चलते बिजली की कुल जनरेशन 5,743 मेगावाट तक ही पहुंची है।

    पिछले दिनों के मुकाबले पंजाब में बिजली की जनरेशन तो बढ़ी है, लेकिन डिमांड कम नहीं हो रही है। डिमांड पूरी करने के लिए PSPCL को सीधे केंद्रीय पूल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे बिजली कट लग रहे हैं।

    अघोषित बिजली कटों से परेशान लुधियाना के डाइंग उद्यमियों ने आज चंडीगढ़ रोड के वर्धमान चौक पर धरना देने का ऐलान किया है। वहीं, दूसरी तरफ बिजली कटों को लेकर कांग्रेस पटियाला में PSPCL मुख्यालय के बाहर धरना देगी।

     

    बिजली उत्पादन कहां से कितना हो रहा, जानिए…

    सरकारी थर्मल प्लांट: पंजाब में तीन सरकारी थर्मल प्लांटों के 10 यूनिट हैं। पहला सरकारी प्लांट रोपड़ में है और यहां चार यूनिट हैं। इन चार यूनिटों की बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 840 मेगावाट है, जबकि इनमें 487 मेगावाट ही बिजली पैदा हो रही है।

    दूसरा प्लांट लहरा मोहब्बत में है। इस प्लांट में भी चार यूनिट हैं। इसकी कुल क्षमता 920 मेगावाट है, जबकि यहां 801 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है। तीसरा प्लांट गोइंदवाल में है और इसमें दो यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 540 मेगावाट है, जबकि इसमें 501 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। इस तरह सरकारी प्लांटों से कुल उत्पादन 1,786 मेगावाट है। सरकारी दो प्लांट लगभग पूरी क्षमता से चल रहे हैं, जबकि रोपड़ प्लांट में अभी भी उत्पादन क्षमता से काफी कम है।

    प्राइवेट थर्मल प्लांट: पंजाब में दो प्राइवेट थर्मल प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 3,380 मेगावाट बिजली पैदा करने की है। तलवंडी साबो में तीन यूनिट हैं, जिनकी कुल क्षमता 1,980 मेगावाट है। सोमवार को तीनों यूनिट ऑपरेशनल हैं और इनसे 1,701 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है।

    वहीं, दूसरा प्लांट राजपुरा में है और इसमें दो यूनिट हैं। दोनों की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट है। इन दोनों यूनिटों में आज कुल 1,321 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। दोनों प्राइवेट प्लांटों को मिलाकर 3,022 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है।

    हाइड्रो प्रोजेक्ट्स: पंजाब के पास रणजीत सागर डैम इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के अलावा चार और हाइड्रो प्रोजेक्ट हैं। रणजीत सागर डैम की क्षमता 600 मेगावाट बिजली पैदा करने की है, जिसमें दिन के समय कम बिजली पैदा की जा रही है। सोमवार सुबह 9 बजे के करीब चार में से दो टरबाइन चलाई जा रही हैं, जिनसे 240 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है।

    शानन प्रोजेक्ट से 50 मेगावाट बिजली तैयार: यू.बी.डी.सी. हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर हाउस से 44 मेगावाट, मुकेरियन हाइडल प्रोजेक्ट के अलग-अलग यूनिटों से 193 मेगावाट, आनंदपुर साहिब हाइडल प्रोजेक्ट से 112 मेगावाट व शानन प्रोजेक्ट से 50 मेगावाट बिजली तैयार की जा रही है। इस तरह हाइड्रो प्रोजेक्टों से कुल 639 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। रात के समय हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से उत्पादन 830 मेगावाट तक किया जा रहा है।

    सोलर व अन्य प्लांट: पंजाब में बड़ी संख्या में सोलर प्लांट लगे हैं। इनसे बिजली का उत्पादन काफी मात्रा में हो रहा है। दिन के समय सोलर प्लांट व अन्य स्रोतों से 350 से 400 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। हालांकि, रात के समय इन प्लांटों से जनरेशन शून्य हो जाती है। सुबह 9 बजे के करीब सोलर प्लांट व अन्य स्रोतों से कुल 341 मेगावाट के करीब बिजली उत्पादन हो रहा है।

    केंद्रीय पूल: पंजाब में बिजली की डिमांड पूरी करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड सीधे तौर पर केंद्रीय पूल पर निर्भर है। पंजाब में जितनी जनरेशन होती है, उसके बाद डिमांड और सप्लाई में जो गैप रहता है, उसे पूरा करने के लिए केंद्रीय पूल से बिजली खरीदी जाती है। सोमवार को केंद्रीय पूल से करीब 11 हजार मेगावाट के करीब बिजली खरीदी जा रही है।

    पंजाब में बढ़ी बिजली की मांग

    पंजाब में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी और यूनिटों में तकनीकी खराबी से उत्पादन प्रभावित है। मानसून की बारिश कम होने से खेतों में ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ी है। 

    उमस भरी गर्मी के कारण घरेलू बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर है। मांग और उपलब्धता में बड़े अंतर के कारण उद्योगों से लेकर खेतीबाड़ी क्षेत्र और शहरों व गांवों में लंबे कट लगाए जा रहे हैं। इससे उद्योगपतियों किसानों और आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

    सितंबर में लगातार 16 हजार मेगावाट से ज्यादा मांग
    छह सितंबर को छोड़कर सितंबर में बिजली की मांग लगातार 16 हजार मेगावाट से अधिक रही। एक सितंबर को 16116 मेगावाट, दो को 16530, तीन को 16485, चार को 16182, पांच को 16254, सात को 16219, आठ और नौ को 16505, 10 को 16432, 11 को 16619 और 12 सितंबर को 16519 मेगावाट मांग रही। शनिवार को 16519 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग के मुकाबले पावरकाम को सभी स्रोतों से केवल 4503 मेगावाट बिजली उपलब्ध हुई। करीब 2173 मेगावाट उत्पादन प्रभावित रहा।

    तकनीकी खराबी से राजपुरा का 700 मेगावाट का एक नंबर और तलवंडी साबो का 660 मेगावाट का दो नंबर यूनिट बंद रहा। 840 मेगावाट क्षमता वाले रोपड़ थर्मल से केवल 488 मेगावाट बिजली मिली। 920 मेगावाट क्षमता वाले लहरा मुहब्बत प्लांट से 804 मेगावाट उत्पादन हुआ। पावरकाम अधिकारियों के अनुसार सर्दियों में रोपड़ और लहरा मुहब्बत थर्मलों का सालाना रखरखाव नहीं हुआ था। अब तकनीकी खराबी के कारण यूनिट पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे। बांधों में पानी की कमी से रणजीत सागर के 300 मेगावाट के दो और यूबीडीसी के 45 मेगावाट के तीन यूनिट बंद हैं।

    चार थर्मलों में चार से 16 दिन का कोयला
    पंजाब के पांच थर्मल प्लांटों में से चार में केवल चार से 16 दिनों का कोयला बचा है। तलवंडी साबो में चार दिन राजपुरा में सात दिन लहरा मुहब्बत में 11 दिन और गोइंदवाल में 16 दिनों का स्टॉक है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नियमों के अनुसार 1000 किलोमीटर से अधिक दूर स्थित कोयला खदानों वाले राज्यों के थर्मलों में 30 दिनों का स्टॉक होना चाहिए। पंजाब को कोयला देने वाली खदानें 1300 से 1900 किलोमीटर दूर हैं। मानसून से पहले ऐसे थर्मलों में 21 दिनों का स्टॉक जरूरी माना जाता है। ओडिशा झारखंड और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से खनन और परिवहन प्रभावित होने की बात सामने आई है।

    मानसून की बारिश 40 फीसदी कम
    पंजाब में इस बार मानसून की बारिश सामान्य से 40 फीसदी कम रही है। 402.9 एमएम के मुकाबले 243.5 एमएम बारिश हुई। सितंबर में अब तक सामान्य 34.5 एमएम के मुकाबले केवल 12.9 एमएम बारिश हुई है जो 63 फीसदी कम है। अमृतसर में 92 फीसदी बरनाला में 89 बठिंडा में 81 फरीदकोट में 97 फतेहगढ़ साहिब में 74 फिरोजपुर में 96 जालंधर में 84 लुधियाना में 82 मुक्तसर में 83 पटियाला में 70 मोहाली में 72 एसबीएस नगर में 64 और संगरूर में 62 फीसदी बारिश कम हुई। सितंबर में मोगा फाजिल्का मानसा तरनतारन और कपूरथला पूरी तरह सूखे रहे। जुलाई में 26 और अगस्त में 35 फीसदी बारिश कम हुई थी।

    बांधों में घटा जलस्तर
    कम बारिश से प्रमुख बांधों में जलस्तर भी तेजी से घटा है। भाखड़ा में पिछले साल के मुकाबले 32.91 फुट कमी है। 2025 में इसी दिन जलस्तर 1676.89 फुट था जो अब 1643.98 फुट है। पानी की आवक 46708 से घटकर 30199 क्यूसिक रह गई। पौंग में जलस्तर 17.91 फुट कम होकर 1372.24 फुट रह गया है। आवक 34737 से घटकर 10751 क्यूसिक है। रणजीत सागर बांध में जलस्तर 13.05 मीटर घटकर 511.48 मीटर रह गया है। पानी की आवक 18411 से घटकर 5181 क्यूसिक है। इससे हाइडल बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

    उद्योगों में 10 घंटे तक कट
    आपूर्ति में कमी के कारण उद्योगों में 10 घंटे तक के कट लग रहे हैं। जिला मुख्यालयों में चार घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में एक घंटे के कट हैं। खेतीबाड़ी क्षेत्र को तीन से साढ़े चार घंटे बिजली मिल पा रही है। किसान संगठनों ने आंदोलन का एलान किया है। विपक्षी दल भी सरकार को घेर रहे हैं। राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र से कोयले की सप्लाई कम हो रही है और पंजाब को केंद्रीय पूल से 1051 मेगावाट कम बिजली मिल रही है।

    पावरकाम पर आर्थिक दबाव
    पंजाब सरकार और उसके विभागों पर पावरकाम का करीब 9650 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें 7550 करोड़ सब्सिडी और 2100 करोड़ सरकारी विभागों के बिल हैं। सब्सिडी में 4000 करोड़ पिछले दो वित्तीय वर्षों का ब्याज समेत बकाया है जबकि 3550 करोड़ चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 का है। जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग पर करीब 1000 करोड़ स्थानीय निकाय विभाग पर 850 करोड़ ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग पर 380 करोड़ और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पर 125 करोड़ रुपये बकाया हैं। सरकारी विभागों और जरूरी सेवाओं के कनेक्शन काटना आसान नहीं होने से पावरकाम पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

    10 हजार करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी
    बिजली और कोयला खरीद मरम्मत के स्पेयर पार्ट्स तथा वेतन और अन्य खर्चों के भुगतान में दिक्कत के बीच पावरकाम बाजार से करीब 10 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए गैर परिवर्तनीय डिबेंचर और बॉन्ड जारी करने की योजना है। मर्चेंट बैंकरों से ऑनलाइन बोलियां मांगी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज और ब्याज का बोझ करदाताओं और बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। पावरकाम पर पहले से करीब 18000 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं।

    इंजीनियर्स एसोसिएशन ने बताया 7800 करोड़ के घाटे का खतरा
    पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल के अनुसार बिजली दरों में कटौती से सालाना सब्सिडी बिल 20500 करोड़ से घटकर करीब 15200 करोड़ रुपये रह गया है। इसके बावजूद सब्सिडी समय पर नहीं मिल रही। उनका कहना है कि हाल के एआरआर में खर्च का अनुमान कम आंका गया जिससे दरें कम तय हुईं। इससे चालू वित्तीय वर्ष में पावरकाम को वास्तविक जरूरत के मुकाबले करीब 7800 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है।

    उत्पादन बढ़ाने की मांग
    एसोसिएशन ने रोपड़ में 800-800 मेगावाट के तीन सुपर क्रिटिकल थर्मल यूनिट लगाने और बठिंडा में 250 मेगावाट का सोलर प्लांट स्थापित करने की मांग की है। एसोसिएशन के अनुसार 2020 में ही सरकार को वित्तीय वर्ष 2021-22 में बिजली कमी की आशंका बता दी गई थी। 2022 में मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने भी उत्पादन बढ़ाने की मांग रखी गई लेकिन अभी तक इस दिशा में कदम नहीं उठाया गया।

    पावरकाम बोला- जल्द दूर होगी कमी
    पावरकाम के डायरेक्टर जनरेशन पीएस बराड़ का कहना है कि कम बारिश के कारण खेतीबाड़ी से घरेलू क्षेत्र तक बिजली की मांग बढ़ी है। कोयले की सप्लाई तेज करने के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को पत्र लिखा गया है। कोयला उत्पादक राज्यों में भारी बारिश से खनन प्रभावित हुआ है। जरूरी मरम्मत के बाद बंद यूनिट जल्द चालू किए जाएंगे जिससे बिजली की कमी काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है। 

     

  • ऊर्जा क्षेत्र में यूपी की बड़ी उपलब्धि, 135 में 74 दिन सबसे बेहतर रही बिजली आपूर्ति

    ऊर्जा क्षेत्र में यूपी की बड़ी उपलब्धि, 135 में 74 दिन सबसे बेहतर रही बिजली आपूर्ति

    बिजली आपूर्ति में यूपी का दमदार प्रदर्शन, 135 में 74 दिन देश में रहा अव्वल

    कोयला संकट के बावजूद योगी सरकार ने संभाले रखी बिजली व्यवस्था, जिला मुख्यालयों पर 24 घंटे आपूर्ति

    24 मई से 22 दिनों तक सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को कटौती मुक्त बिजली आपूर्ति

    भारी बारिश से कोयला आपूर्ति प्रभावित, फिर भी प्रदेश में बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार सक्रिय

    सीआईएल समेत संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर कोयले और ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाने में जुटी योगी सरकार

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लगातार मजबूत किए जाने का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। एक मई से अब तक 135 दिनों में प्रदेश ने 74 दिन देश में सर्वाधिक विद्युत मांग की आपूर्ति की, जबकि 37 दिन दूसरे स्थान पर रहा। यानी 135 दिनों में 111 दिन उत्तर प्रदेश ने देश के शीर्ष दो राज्यों में रहते हुए बिजली की मांग पूरी की।

    प्रदेश में 24 मई से अब तक 22 दिनों में सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई। हालांकि देश के कई हिस्सों में भारी वर्षा और जलभराव के चलते कोयला खदानों में उत्पादन एवं आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके कारण पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों के तापीय विद्युत संयंत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है।

    यूपीपीसीएल के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भी कोयले की कमी और गीले कोयले के कारण तापीय उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। विभिन्न विद्युत इकाइयों में तकनीकी एवं अन्य कारणों से ट्रिपिंग के चलते उपलब्धता में कमी आई है। इसके बावजूद योगी सरकार ने विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखे हैं।

    दिन के समय सामान्य आपूर्ति

    दिन के समय प्रदेश में विद्युत आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। हालांकि पीक समय में विद्युत उपलब्धता कम होने और पावर एक्सचेंज में महज 2-3 प्रतिशत तक सीमित क्लीयरेंस के कारण ग्रामीण क्षेत्रों, बुंदेलखंड, तहसील एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में रात्रिकालीन सीमित रोस्टरिंग की जा रही है। वहीं जिला मुख्यालयों में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेश सरकार की ओर से निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड समेत संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। कोयले और ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। योगी सरकार का फोकस उपभोक्ताओं को अधिकतम राहत देने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल कर आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने पर है।

  • कोयले की किल्लत से पंजाब में बिजली संकट, लुधियाना समेत कई इलाकों में दिन-रात कटों से लोग बेहाल

    कोयले की किल्लत से पंजाब में बिजली संकट, लुधियाना समेत कई इलाकों में दिन-रात कटों से लोग बेहाल

    लुधियाना

    पंजाब में कोयले की कमी के कारण बिजली संकट पैदा हो गया है। बिजली जनरेशन सीधे-सीधे थर्मल प्लांटों पर निर्भर है और कोई भी थर्मल प्लांट पूरी क्षमता के हिसाब से बिजली उत्पादन नहीं कर रहा है। नतीजा यह है कि सूबे में बिजली संकट बना हुआ है।

     देर रात से राजपुरा थर्मल प्लांट का भी एक यूनिट बंद है। देर रात से अभी तक दो प्राइवेट प्लांटों के एक-एक यूनिट और एक सरकारी प्लांट के एक यूनिट में बिजली उत्पादन नहीं हो रहा है।

    पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड बिजली उत्पादन कम होने के कारण केंद्रीय पूल से ज्यादा बिजली खरीद रहा है, लेकिन डिमांड ज्यादा होने के कारण लोगों को बिजली कटों से जूझना पड़ रहा है।

    पंजाब के बिजली मंत्री ने चार दिन पहले कहा था कि पंजाब के थर्मल प्लांटों के पास कोयला नहीं बचा है। अगर उन्हें कोयले की सप्लाई नहीं मिलती है तो पंजाब में बिजली संकट पैदा हो जाएगा। पीएसपीसीएल के अफसरों की मानें तो कोयले की सप्लाई तो आ रही है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में नहीं है, जिससे जनरेशन प्रभावित हो रही है।

    पंजाब में बिजली डिमांड, जनरेशन की स्थिति को जानिए…

        डिमांड 14,195 मेगावाट पहुंचीः गुरुवार रात 12 बजे पंजाब में बिजली की डिमांड 11,655 मेगावाट थी। शुक्रवार सुबह 8:30 बजे यह बढ़कर 14,195 मेगावाट हो गई। दिन में डिमांड 16,500 मेगावाट से ज्यादा चल रही है। रात से सुबह तक जनरेशन करीब 4,000 मेगावाट रही, जबकि करीब 7,100 मेगावाट बिजली केंद्रीय पूल से खरीदी गई।

        थर्मल के 3 यूनिट बंदः राजपुरा और तलवंडी साबो प्राइवेट थर्मल प्लांट का एक-एक यूनिट बंद रहा। सुबह तक प्राइवेट प्लांटों से करीब 1,700 मेगावाट बिजली बनी। सरकारी प्लांटों में भी रोपड़ और गोइंदवाल का एक-एक यूनिट बंद रहा। गोइंदवाल का यूनिट बाद में चालू किया गया।

        बिजली कटों से पब्लिक परेशान: बिजली उत्पादन में कमी के कारण पंजाब के लोगों को बिजली कटों से जूझना पड़ रहा है। बिजली कट रात में ज्यादा लग रहे हैं। दरअसल, दिन में करीब 400 मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से भी तैयार हो रही है, जो रात में शून्य हो जाती है।

    सोलर प्रोजेक्ट से रात में बिजली नहीं बन रही

    पंजाब में सोलर प्रोजेक्ट्स के जरिए दोपहर के समय 385 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। जबकि, 17 मेगावाट बिजली का उत्पादन अन्य सोर्स से हो रहा है। रात के समय सोलर प्रोजेक्ट से बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से रात के समय बिजली संकट ज्यादा गहरा रहा है।

    केंद्रीय पूल से बड़ी मात्रा में बिजली खरीद

    पंजाब में इन दिनों बिजली की डिमांड 16,000 मेगावाट के पार चल रही है। एक तरफ बिजली की डिमांड बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्पादन में कमी आ रही है। डिमांड और उत्पादन के गैप को कम करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) केंद्रीय पूल से बिजली ले रही है।

    आज पीएसपीसीएल केंद्रीय पूल से करीब 11,770 मेगावाट बिजली खरीद रही है। पीएसपीसीएल को केंद्रीय पूल से महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बिजली कट लग रहे हैं। आगे स्थिति और खराब हुई तो लोगों को गर्मी में बिजली के लंबे कटों का सामना करना पड़ेगा।

     

  • हाइड्रो पावर का दमदार प्रदर्शन, अगस्त में लक्ष्य से 42 मिलियन यूनिट अधिक बिजली उत्पादन से बढ़ी रफ्तार

    हाइड्रो पावर का दमदार प्रदर्शन, अगस्त में लक्ष्य से 42 मिलियन यूनिट अधिक बिजली उत्पादन से बढ़ी रफ्तार

    पॉवर जनरेटिंग कंपनी की जल विद्युत इकाइयों ने पकड़ी रफ्तार, अगस्त में लक्ष्य से 42 मिलियन यूनिट अधिक उत्पादन

    भोपाल
    प्रदेश में मानसून की अच्छी बारिश का मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) की जल विद्युत इकाइयों को सीधा लाभ मिला है। कंपनी के जल विद्युत गृहों ने अगस्त में निर्धारित 339 मिलियन यूनिट के मुकाबले 380.90 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन कर लक्ष्य से करीब 42 मिलियन यूनिट अधिक उत्पादन दर्ज किया। इस दौरान जल विद्युत इकाइयों का प्लांट उपलब्धता कारक 83.40 प्रतिशत रहा।

    ‘रेडीनेस फर्स्ट’ रणनीति से वित्तीय वर्ष में भी लक्ष्य पार

    म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी के अंतर्गत प्रदेश में संचालित 10 जल विद्युत गृहों की कुल स्थापित क्षमता 915 मेगावाट है। चालू वित्तीय वर्ष में अगस्त माह के अंत तक 963 मिलियन यूनिट के निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 983 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हो चुका है। यानी कंपनी की जल विद्युत इकाइयां अब तक निर्धारित लक्ष्य से 20 मिलियन यूनिट आगे चल रही हैं। कंपनी ने चालू वित्तीय वर्ष में जल विद्युत गृहों के संचालन की रणनीति को ‘रेडीनेस फर्स्ट’ दृष्टिकोण पर केंद्रित किया है। इसके तहत मशीनरी, टरबाइन, जनरेटर और सहायक प्रणालियों के आवश्यक अनुरक्षण एवं तकनीकी परीक्षण समय रहते पूरे किए गए, जिससे मानसून के दौरान उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सके।

    83.40 प्रतिशत रहा प्लांट फेक्टर

    अगस्त माह के अंत तक कंपनी की जल विद्युत इकाइयों का प्लांट उपलब्धता फेक्टर 83.40 प्रतिशत रहा। यह मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित 83.77 प्रतिशत वार्षिक मानक के करीब है। बेहतर उपलब्धता ने जल विद्युत गृहों को उपलब्ध जल के अनुरूप अधिकतम क्षमता से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कंपनी द्वारा जल विद्युत गृहों की मशीनरी और महत्वपूर्ण प्रणालियों की निगरानी के साथ-साथ आवश्यक अनुरक्षण कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे उत्पादन के दौरान तकनीकी व्यवधान की संभावना को न्यूनतम रखा जा सके।

    समय पर तैयारी और तकनीकी अनुशासन से बढ़ी उत्पादन क्षमता

    कंपनी के डायरेक्टर टेक्निकल सुबोध निगम ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में विश्वसनीयता केवल स्थापित क्षमता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि समय पर की गई तैयारी, तकनीकी दक्षता और परिचालन अनुशासन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। संभावित मौसमीय परिस्थितियों का पूर्व आकलन कर जल विद्युत गृहों को उच्च स्तर की निगरानी में संचालित किया गया, जिससे उपलब्ध जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग संभव हुआ।

    मुख्य अभियंता जल विद्युत राजेन्द्र पटेल ने बताया कि सभी जल विद्युत गृहों में प्राथमिकता उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम, कुशल और किफायती उपयोग सुनिश्चित करने की है। इसके साथ ही इकाइयों को उनकी तकनीकी क्षमता के अनुरूप उपलब्ध रखने पर लगातार निगरानी की जा रही है।

     

  • Power Generating Company की बड़ी उपलब्धि, पहली बार सफल रही ‘Black Start Mock Drill’

    Power Generating Company की बड़ी उपलब्धि, पहली बार सफल रही ‘Black Start Mock Drill’

    पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने पहली बार सफलतापूर्वक किया ‘ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल’

    सतपुड़ा ताप विद्युत गृह और इंदिरा सागर जल विद्युत परियोजना का संयुक्त अभ्यास
    ब्लैकआउट के बाद बिजली बहाली की क्षमता को परखा 

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) ने अपने इतिहास में पहली बार ‘ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल’ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी और इंदिरा सागर जल विद्युत गृह परियोजना, खंडवा के संयुक्त अभ्यास में संभावित पूर्ण अथवा आंशिक ब्लैकआउट के बाद विद्युत उत्पादन प्रणाली को सुरक्षित एवं चरणबद्ध तरीके से पुनः संचालित करने की तैयारियों का परीक्षण किया गया।

    यह महत्वपूर्ण तकनीकी अभ्यास भारतीय विद्युत ग्रिड संहिता (IEGC)-2023 के प्रावधानों के अनुरूप आयोजित किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान आपातकालीन स्थिति में विद्युत ग्रिड के पुनर्बहाली तंत्र, विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था तथा निर्धारित पुनर्स्थापना प्रक्रिया की व्यावहारिक जांच की गई।

    इंदिरा सागर से सतपुड़ा ताप विद्युत गृह को दी गई बिजली

    सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में आयोजित यह मॉक ड्रिल प्रातः 11:30 बजे से दोपहर 1:51 बजे तक सफलतापूर्वक संचालित की गई। अभ्यास के दौरान आयलैंडिंग व्यवस्था के माध्यम से इंदिरा सागर जल विद्युत गृह से विद्युत आपूर्ति लेकर MPPGCL के 500 मेगावाट (2×250 मेगावाट) क्षमता वाले सतपुड़ा ताप विद्युत गृह की आपातकालीन स्टार्ट-अप क्षमता का परीक्षण किया गया।

    इस दौरान 400 केवी प्रणाली को चार्ज करने, स्टेशन ट्रांसफॉर्मर को ऊर्जीकृत करने तथा आवश्यक सहायक विद्युत प्रणालियों को निर्धारित क्रम में बहाल करने की प्रक्रिया का परीक्षण किया गया। पूरे अभ्यास के दौरान विद्युत प्रणाली के प्रमुख तकनीकी मानकों की सतत निगरानी की गई। मॉक ड्रिल निर्धारित समय-सीमा और तकनीकी मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक पूरी हुई।

    क्या है ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल

    ब्लैक स्टार्ट ऐसी विशेष प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से पूर्ण या आंशिक ब्लैकआउट की स्थिति में विद्युत उत्पादन केंद्र को बाहरी ग्रिड आपूर्ति उपलब्ध न होने पर भी चरणबद्ध तरीके से पुनः प्रारंभ किया जाता है। इसके लिए स्व-प्रारंभ क्षमता वाले विद्युत स्रोतों की सहायता से पहले आवश्यक सहायक प्रणालियों को ऊर्जा उपलब्ध कराई जाती है और इसके बाद क्रमशः बड़ी उत्पादन इकाइयों को चालू किया जाता है।

    इस तरह के अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपातकालीन स्थिति में विद्युत उत्पादन केंद्रों, लोड डिस्पैच केंद्रों और अन्य संबद्ध एजेंसियों के बीच समन्वय, संचार तथा ग्रिड पुनर्बहाली क्षमता का परीक्षण करना है।

    ग्रिड पुनर्बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि

    म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी के इतिहास में पहली बार आयोजित इस ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल की सफलता को कंपनी की परिचालन एवं तकनीकी तैयारियों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अभ्यास से आपात स्थिति में विभिन्न तकनीकी टीमों के बीच समन्वय और विद्युत आपूर्ति की चरणबद्ध बहाली की क्षमता का प्रभावी परीक्षण हुआ।

    मॉक ड्रिल में स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (SLDC), इंदिरा सागर जल विद्युत गृह परियोजना तथा सतपुड़ा ताप विद्युत गृह के अभियंताओं और तकनीकी कार्मिकों ने सहभागिता की। इस अवसर पर विद्युत गृह प्रमुख मुख्य अभियंता एस.के. लिल्हौरे, अधीक्षण अभियंता यशवंत वराठे सहित अन्य अभियंता उपस्थित थे।